हाईकोर्ट

शरारत के अपराध के लिए इरादा और संपत्ति को नुकसान जरूरी: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
शरारत के अपराध के लिए इरादा और संपत्ति को नुकसान जरूरी: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि IPC की धारा 425 के तहत शरारत के अपराध को स्थापित करने के लिए संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का इरादा होना चाहिए और इसके परिणामस्वरूप इसका मूल्य कम होना चाहिए।जस्टिस मनीषा बत्रा ने कहा, 'यह स्पष्ट है कि शरारत के अपराध का मुख्य घटक यह है कि संपत्ति को गलत तरीके से नुकसान या नुकसान पहुंचाने की मंशा होनी चाहिए और उस इरादे के साथ क्षति होनी चाहिए, जिसके परिणामस्वरूप कुछ संपत्ति का मूल्य या उपयोगिता कम हो' केवल नुकसान पहुंचाना पर्याप्त नहीं है और इस तरह के नुकसान को...

हाईकोर्ट ने स्वतंत्रता सेनानी कोटा से मेडिकल प्रवेश बहाल किया, कहा – “नियम बीच में नहीं बदले जा सकते”
हाईकोर्ट ने स्वतंत्रता सेनानी कोटा से मेडिकल प्रवेश बहाल किया, कहा – “नियम बीच में नहीं बदले जा सकते”

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब राज्य विश्वविद्यालय के उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें स्वतंत्रता सेनानी कोटा के तहत एक मेडिकल छात्र को दिया गया प्रवेश स्पष्ट आरक्षण मानदंड के बावजूद रद्द कर दिया गया था।चीफ़ जस्टिस शील नागू और जस्टिस सुमित गोयल ने कहा, "खेल के बीच में या खेल खेले जाने के बाद नियमों में बदलाव पर रोक लगाने वाला सिद्धांत, संविधान के अनुच्छेद 14 में निहित मनमानेपन के खिलाफ नियम पर आधारित है। अनुच्छेद 16 अनुच्छेद 14 में निहित समानता की अवधारणा के अनुप्रयोग का केवल एक उदाहरण है।...

अल्पसंख्यक स्कूलों में शिक्षक भर्ती को विनियमित करने का अधिकार राज्य को देने मात्र से अनुच्छेद 30 का उल्लंघन नहीं होता: गुजरात हाईकोर्ट
अल्पसंख्यक स्कूलों में शिक्षक भर्ती को विनियमित करने का अधिकार राज्य को देने मात्र से अनुच्छेद 30 का उल्लंघन नहीं होता: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने गुजरात माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा अधिनियम में 2021 के संशोधनों को बरकरार रखते हुए, जिसने राज्य को भाषाई और धार्मिक अल्पसंख्यक स्कूलों में शिक्षकों और प्रधानाचार्यों की भर्ती के संबंध में नियम बनाने की अनुमति दी, कहा कि प्रावधानों की भाषा यह नहीं दर्शाती है कि राज्य के पास नियम बनाने की अनियंत्रित या असीमित शक्ति है। कोर्ट ने आगे जोर दिया कि हालांकि विनियमन करने की राज्य की शक्ति अप्रतिबंधित नहीं है, लेकिन केवल सक्षम प्रावधानों द्वारा शक्ति प्रदान करने को भारत के...

दिल्ली हाईकोर्ट ने नकद आधारित योजनाओं को लेकर राजनीतिक दलों के खिलाफ पूर्व जज की याचिका पर त्वरित सुनवाई से इनकार किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने नकद आधारित योजनाओं' को लेकर राजनीतिक दलों के खिलाफ पूर्व जज की याचिका पर त्वरित सुनवाई से इनकार किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP), आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के खिलाफ आगामी विधानसभा चुनावों में मतदाताओं को नकदी वितरित करने के उनके राजनीतिक वादों के खिलाफ दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया कि यह भ्रष्ट आचरण के दायरे में आता है।चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने कहा कि मामले को उसके सामान्य क्रम में सूचीबद्ध किया जाएगा। याचिकाकर्ता के वकील के अनुरोध को खारिज कर दिया कि...

केवल संदेह के लाभ के आधार पर बरी किए जाने का इस्तेमाल कर्मचारी को वैध वित्तीय अधिकारों से वंचित करने के लिए नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
केवल "संदेह के लाभ" के आधार पर बरी किए जाने का इस्तेमाल कर्मचारी को वैध वित्तीय अधिकारों से वंचित करने के लिए नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने 2002 से 2009 के बीच एक आपराधिक मामले के कारण निलंबित रहे और बाद में बरी कर दिया गया था और सेवा में बहाल कर ‌दिया गया था, एक जूनियर इंजीनियर, जिसकी इस आधार पर बकाया राशि रोक ली गई उसे केवल संदेह के लाभ के आधार पर बरी किया गया था, को राहत प्रदान की है। जस्टिस अरुण मोंगा की पीठ ने राज्य द्वारा अपनाए गए इस रुख को खराब कहा और कहा कि आरोपी के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिलने पर ही अदालत ने उसे बरी किया। और एक बार बरी होने के बाद, उसे बकाया राशि देने से इनकार करने के लिए "संदेह के लाभ"...

न्यायालय द्वारा नियुक्त आयुक्त का उपयोग पक्षों के लिए साक्ष्य एकत्र करने के लिए नहीं किया जा सकता: झारखंड हाईकोर्ट ने विवादित संपत्ति के सर्वेक्षण की मांग वाली याचिका खारिज की
न्यायालय द्वारा नियुक्त आयुक्त का उपयोग पक्षों के लिए साक्ष्य एकत्र करने के लिए नहीं किया जा सकता: झारखंड हाईकोर्ट ने विवादित संपत्ति के सर्वेक्षण की मांग वाली याचिका खारिज की

झारखंड हाईकोर्ट ने दोहराया कि सीपीसी के आदेश XXVI नियम 10-ए के तहत न्यायालय द्वारा नियुक्त आयुक्त किसी मुकदमे के पक्षकारों की ओर से साक्ष्य एकत्र नहीं कर सकता।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी ने कहा कि आयुक्त की नियुक्ति का उद्देश्य विवादित मामलों को स्पष्ट करना है, न कि किसी पक्ष को उसके दावों को स्थापित करने में सहायता करना।पीठ ने कहा,"वर्तमान भौतिक कब्जे और विवादित भूमि का पता लगाने और पक्षों के बीच मामलों की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए सर्वेक्षण जानने वाले आयुक्त से रिपोर्ट प्राप्त करने के...

झारखंड हाईकोर्ट ने अधीनस्थ के खिलाफ जाति आधारित टिप्पणी करने के लिए पूर्व सीआईएसएफ अधिकारी को दी गई सजा बरकरार रखी, कहा- आरोप गंभीर
झारखंड हाईकोर्ट ने अधीनस्थ के खिलाफ जाति आधारित टिप्पणी करने के लिए पूर्व सीआईएसएफ अधिकारी को दी गई सजा बरकरार रखी, कहा- आरोप गंभीर

झारखंड हाईकोर्ट ने एक फैसले में माना कि किसी अधिकारी का अच्छा अतीत अनुशासनात्मक प्राधिकारी द्वारा लगाए गए दंड की मात्रा में हस्तक्षेप करने का आधार नहीं हो सकता, खासकर जब आरोप कदाचार से संबंधित हो। चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव और जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की खंडपीठ ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, बोकारो स्टील लिमिटेड के पूर्व सहायक कमांडेंट को दिए गए अनुशासनात्मक दंड की पुष्टि की, जिन्हें अपने कार्यालय में एक निरीक्षक के खिलाफ जाति-आधारित टिप्पणी करने का दोषी पाया गया था।न्यायालय ने कहा, "हम यह...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पति-पत्नी और नाबालिग बच्चों वाले परिवार की अंतिम सांस तक एकता के लिए ईश्वर से प्रार्थना की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पति-पत्नी और नाबालिग बच्चों वाले परिवार की 'अंतिम सांस तक' एकता के लिए 'ईश्वर से प्रार्थना' की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक टिप्पणी में एक माँ द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर विचार करते हुए हाल ही में व्यक्त किया कि वह परिवार के लिए 'ईश्वर से प्रार्थना' करती है कि वे अपनी 'अंतिम सांस' तक एक साथ रहें।उक्त माँ वर्तमान में अपने पिता के साथ रह रहे अपने दो नाबालिग बच्चों की कस्टडी की मांग कर रही है।जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव की पीठ ने टिप्पणी की,“यह न्यायालय वकीलों और वादियों के विस्तारित परिवार का हिस्सा होने के नाते, ईश्वर से प्रार्थना कर रहा है कि परिवार अपनी अंतिम सांस तक एक रहे,” क्योंकि...

घरेलू हिंसा अधिनियम | पति के रिश्तेदार जो साझा घर में भी नहीं रहते, उन्हें भी उत्पीड़न के मामलों में फंसाया जाता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
घरेलू हिंसा अधिनियम | पति के रिश्तेदार जो साझा घर में भी नहीं रहते, उन्हें भी उत्पीड़न के मामलों में फंसाया जाता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में पाया कि कई मामलों में पति के परिवार या घरेलू रिश्ते में रहने वाले व्यक्ति को परेशान करने के लिए पीड़ित पक्ष ऐसे रिश्तेदारों को फंसाता है जो कभी उनके साथ साझा घर में नहीं रहे। जस्टिस अरुण कुमार देशवाल की पीठ ने कहा कि घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12 के तहत नोटिस जारी करते समय, अदालतों को यह देखना चाहिए कि जिस व्यक्ति को फंसाया जा रहा है, क्या वह पीड़ित व्यक्ति के साथ साझा घर में रह रहा है या कभी रहा है।अदालत ने आगे कहा कि घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत आवेदन में...

क्या राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट RTI Act के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण है? दिल्ली हाईकोर्ट CIC से तय करने को कहा
क्या 'राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र' ट्रस्ट RTI Act के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण है? दिल्ली हाईकोर्ट CIC से तय करने को कहा

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) को यह तय करने का निर्देश दिया कि क्या "श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र" ट्रस्ट सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act) की धारा 2(एच) के तहत एक सार्वजनिक प्राधिकरण है।जस्टिस संजीव नरूला ने CIC को RTI आवेदक नीरज शर्मा के साथ-साथ केंद्रीय गृह मंत्रालय के लोक सूचना अधिकारी (PIO) को सुनवाई का अवसर देने के बाद यथासंभव शीघ्रता से इस प्रश्न पर निर्णय लेने का निर्देश दिया।शर्मा के RTI आवेदन के जवाब में गृह मंत्रालय ने उन्हें सूचित किया कि ट्रस्ट का गठन केंद्र...

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- सरकारी सेवा में वित्तीय कदाचार बर्खास्तगी का कारण बनता है, नैतिक पतन के लिए अनुकंपा भत्ता नहीं दिया जा सकता
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- सरकारी सेवा में वित्तीय कदाचार बर्खास्तगी का कारण बनता है, नैतिक पतन के लिए अनुकंपा भत्ता नहीं दिया जा सकता

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस नवीन चावला और शालिंदर कौर की खंडपीठ ने एक वेतन क्लर्क (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) की बर्खास्तगी को बरकरार रखा, जिस पर वित्तीय कदाचार और जालसाजी का आरोप लगाया गया था। न्यायालय ने पाया कि सरकारी रिकॉर्डों से छेड़छाड़ और धन का दुरुपयोग गंभीर अपराध है, जिसके कारण उसे सेवा से बर्खास्त किया जाना चाहिए। न्यायालय ने सीसीएस (पेंशन) रूल्स, 1972 के नियम 41 के तहत अनुकंपा भत्ते की याचिका को भी खारिज कर दिया। उन्होंने माना कि नैतिक अधमता से जुड़े कृत्यों के कारण कर्मचारी ऐसे लाभों...

यूपी में प्रिंसिपल और सहायक अध्यापकों की अनुपलब्धता पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने की सख्त टिप्पणी, कहा- स्टूडेंट्स को हो रही परेशानी
यूपी में प्रिंसिपल और सहायक अध्यापकों की अनुपलब्धता पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने की सख्त टिप्पणी, कहा- स्टूडेंट्स को हो रही परेशानी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि पूरे उत्तर प्रदेश में यह सर्वविदित तथ्य है कि प्रिंसिपल और सहायक अध्यापकों की अनुपलब्धता के कारण छात्र परेशान हैं।जस्टिस प्रकाश पाडिया की पीठ ने जूनियर हाई स्कूल द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की, जिसने स्वीकृत पदों के अनुसार शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति न किए जाने से व्यथित होकर हाईकोर्ट का रुख किया।याचिका के अनुसार, स्कूल में एक प्रधानाध्यापक, दो सहायक अध्यापक, एक क्लर्क और दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के...

दिल्ली हाईकोर्ट ने सभी बार एसोसिएशनों के चुनावों की तिथि 28 फरवरी निर्धारित की
दिल्ली हाईकोर्ट ने सभी बार एसोसिएशनों के चुनावों की तिथि 28 फरवरी निर्धारित की

दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में सभी बार एसोसिएशनों के चुनावों की तिथि 07 फरवरी से बदलकर 28 फरवरी, 2025 की।जस्टिस यशवंत वर्मा, जस्टिस रेखा पल्ली और जस्टिस सी हरि शंकर की फुल बेंच ने कहा कि पिछले वर्ष हाईकोर्ट की सुरक्षा समिति द्वारा पारित प्रस्ताव में यह प्रस्ताव पारित गया कि सभी चुनाव आयुक्त, निर्वाचन अधिकारी सभी बार एसोसिएशनों के अध्यक्षों या सचिवों के साथ मिलकर EVM या मतपत्रों की खरीद के लिए आवश्यक व्यवस्था करेंगे और समय रहते कार्ड रीडर मशीन और अन्य उपकरण स्थापित करने के लिए समन्वय...

रिटायर्ड जज जस्टिस एसएन ढींगरा ने दिल्ली विधानसभा चुनावों में नकदी-उन्मुख योजनाओं के मुद्दे पर राजनीतिक दलों के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की
रिटायर्ड जज जस्टिस एसएन ढींगरा ने दिल्ली विधानसभा चुनावों में 'नकदी-उन्मुख योजनाओं' के मुद्दे पर राजनीतिक दलों के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की

दिल्ली विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों की ओर से मतदाताओं को नकद बांटने के वादों के मुद्दे पर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), आम आदमी पार्टी (आप) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) के खिलाफ रिटायर्ड जस्टिस एसएन ढींगरा ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उनका आरोप है कि यह "भ्रष्ट आचरण" के दायरे में आता है। जस्टिस ढींगरा एक समय यान (सशक्त समाज) नामक संगठन के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने ने तर्क दिया है कि इस प्रकार की गतिविधियां न केवल चुनावी कानूनों का उल्लंघन करती हैं, बल्कि भारत के...

नियोक्ता वैध आधार के बिना स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति को अनिश्चित काल तक रोक नहीं सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
नियोक्ता वैध आधार के बिना स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति को अनिश्चित काल तक रोक नहीं सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शालिंदर कौर की खंडपीठ ने एक फैसले में कहा कि कोई नियोक्ता मौलिक नियमों के नियम 56(के) के तहत स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति को अनिश्चित काल तक रोक नहीं सकता। न्यायालय ने माना कि लंबित सतर्कता मंजूरी या केवल संभावित जांच सेवानिवृत्ति को रोकने के लिए वैध आधार नहीं हैं। इसने आगे स्पष्ट किया कि नियोक्ता को नोटिस अवधि समाप्त होने से पहले किसी भी अस्वीकृति की सूचना देनी चाहिए; अन्यथा, इसे स्वीकृत माना जाएगा।पृष्ठभूमिसंदीप गुप्ता 1995 में BRO में जनरल रिजर्व...

दिल्ली दंगों पर आधारित फिल्म के खिलाफ आपत्तियों की जांच पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- ऐसा करना जल्दबाजी होगी, क्योंकि सीबीएफसी के पास प्रमाणन अनुरोध अभी लंबित
दिल्ली दंगों पर आधारित फिल्म के खिलाफ आपत्तियों की जांच पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- ऐसा करना जल्दबाजी होगी, क्योंकि सीबीएफसी के पास प्रमाणन अनुरोध अभी लंबित

2020 में दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाके में हुए दंगों पर आधारित फिल्‍म "2020 दिल्ली" की प्र‌ी-स्क्रीन‌िंग की मांग संबंधी याचिका और फिल्‍म के खिलाफ दायर अन्य याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि फिल्‍म के खिलाफ उठाई गई आपत्तियों की जांच करना "समय पूर्व" होगा, यह देखते हुए कि फिल्म का प्रमाणन केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के समक्ष विचाराधीन है। जस्टिस सचिन दत्ता ने कहा,"इस प्रकार, इस स्तर पर, जब अपेक्षित प्रमाणन के लिए अनुरोध अभी भी सीबीएफसी के समक्ष विचाराधीन है तो...

34 साल बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने बलात्कार के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को शिनाख्त परेड न कराने का हवाला देते हुए खारिज किया
34 साल बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने बलात्कार के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को शिनाख्त परेड न कराने का हवाला देते हुए खारिज किया

राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक, जयपुर और गृह विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देश दिया कि वह राजस्थान के सभी पुलिस जांच अधिकारियों को निर्देश और दिशा-निर्देश जारी करें कि वे उन मामलों में आरोपी की पहचान परेड (TIP) पीड़िता के साथ कराएं, जहां आरोपी पीड़िता को नहीं जानता था।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ बलात्कार के मामले में सेशन कोर्ट द्वारा पारित 1991 के दोषसिद्धि आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें पाया गया कि पीड़िता आरोपी को अपराध करने से पहले या अपराध करने के समय भी नहीं जानती थी।...