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राज्य के आकार और जनसंख्या को देखते हुए यूपी की फोरेंसिक लैब का बुनियादी ढांचा अपर्याप्त: हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते कहा कि राज्य में केवल 1 स्टेट फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) और 12 रीजनल FSL हैं। कोर्ट ने माना कि उत्तर प्रदेश के आकार और जनसंख्या को देखते हुए यहां का मौजूदा फोरेंसिक लैब इंफ्रास्ट्रक्चर 'अपर्याप्त' है।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्र की बेंच ने उत्तर प्रदेश की फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के निदेशक को निर्देश दिया कि वे 4 सप्ताह के भीतर इस मुद्दे पर एक विस्तृत जवाब (काउंटर-एफिडेविट) दाखिल करें।यह आदेश वकील पीयूष गुप्ता द्वारा दायर जनहित...

मामला एक इंच भी आगे नहीं बढ़ा: दिल्ली हाईकोर्ट ने ओपन जेल सुधारों को लेकर DG (जेल) को अवमानना ​​नोटिस जारी किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार (28 अक्टूबर) को दिल्ली के महानिदेशक (जेल) को अवमानना ​​नोटिस जारी किया। उन पर आरोप है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ओपन जेल सुधारों से जुड़े निर्देशों का पालन करने के बारे में खुद शपथ-पत्र (Affidavit) दाखिल नहीं किया, बल्कि अपने किसी अधीनस्थ (Subordinate) से ऐसा शपथ-पत्र दाखिल करवाया, जिसमें अधूरी जानकारी थी।एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव साम्ब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि DG (जेल) ने हाईकोर्ट के आदेशों की "पूरी तरह से अनदेखी" की। उन्हें इस मामले को...

सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट की ट्रस्टीशिप को पहली नज़र में वसीयत के ज़रिए किसी और को नहीं सौंपा जा सकता: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि किसी पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट का कोई ट्रस्टी, पहली नज़र में, अपनी वसीयत के ज़रिए अपने पद के लिए किसी उत्तराधिकारी को नियुक्त नहीं कर सकता।कोर्ट ने कहा कि ट्रस्टीशिप विश्वास का एक व्यक्तिगत पद है, जो विरासत में नहीं मिलता। साथ ही किसी पब्लिक ट्रस्ट का प्रबंधन "पारिवारिक या वंशानुगत अधिकार" नहीं बन सकता।जस्टिस दीपक गुप्ता ने फरीदाबाद के 'जनहित सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट' द्वारा दायर एक रिवीजन याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया।जब तक कि इस मामले का फैसला नहीं हो...

वीसी सुनवाई के दौरान अंडरपैंट में उपस्थित हुए सरकारी अधिकारी: हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य अधिकारी को अपने बिस्तर से अपनी शर्ट बंद करके और अपने जांघिया में वर्चुअल मोड के माध्यम से अदालत की सुनवाई में उपस्थित होने के लिए फटकार लगाई।यह टिप्पणी करते हुए कि अधिकारी "कदाचार का दोषी है और उसने इस अदालत की अवमानना ​​की", जस्टिस दीपक खोत की पीठ ने अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया।कोर्ट ने कहा,"इस न्यायालय ने दिनांक 09.10.2026 के आदेश के तहत प्रतिवादी को अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, जिसमें विफल रहने पर उसकी उपस्थिति का निर्देश दिया गया।...

कोर्ट के गलियारों में नारेबाजी और हंगामा करने वाले वकीलों के खिलाफ अवमानना ​​की कार्रवाई करने की जा सकती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन वकीलों की पहचान करने का निर्देश दिया, जिन्होंने 27 अक्टूबर को जस्टिस अजय भनोट की कोर्ट में हुई घटना के विरोध में कोर्ट के गलियारों में नारेबाजी की और अदालती कार्यवाही में बाधा डाली।कोर्ट ने उनके इस व्यवहार को "पूरी तरह से अवमाननापूर्ण" करार दिया। कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए यूपी बार काउंसिल को भेज सकता है। साथ ही उनके खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही भी शुरू कर सकता है।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान यह...

यौन उत्पीड़न मामले में बृजभूषण सिंह की बरी होने के खिलाफ पहलवानों की अपील, जवाब देने का आखिरी मौका

दिल्ली कोर्ट ने बुधवार (28 अक्टूबर) को बीजेपी नेता और भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण सिंह को यौन उत्पीड़न मामले में बरी किए जाने के खिलाफ चार महिला पहलवानों की अपील पर जवाब दाखिल करने का आखिरी मौका दिया।राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज दिग विनय सिंह ने 28 सितंबर 2026 को बृजभूषण सिंह को नोटिस जारी किया था। चार महिला पहलवानों ने 3 अगस्त को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की ओर से पारित बरी किए जाने के आदेश को चुनौती दी।अपील में कहा गया है कि निचली अदालत का आदेश कानूनी...

पिता द्वारा जिम्मेदारी लेने को तैयार होने के बावजूद बच्चे को ऑब्जर्वेशन होम में रखना, JJ Act के सुधारवादी उद्देश्य के खिलाफ: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि कानून के दायरे में आए किसी बच्चे को लंबे समय तक ऑब्जर्वेशन होम में रखना - जबकि उसका प्राकृतिक अभिभावक (माता-पिता) पूरी जिम्मेदारी लेने को तैयार हो - 'जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015' (JJ Act) के पुनर्वास और सुधार के उद्देश्यों के विपरीत है। [2026 LiveLaw (MP) 434]बच्चे की कस्टडी उसके पिता को सौंपते हुए जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने टिप्पणी की:"12वीं कक्षा के छात्र को लंबे समय तक ऑब्जर्वेशन होम में रखना, खासकर तब जब उसका प्राकृतिक अभिभावक...

वकील के कथित अपमान का मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने दी जस्टिस अजय भनोट की अदालत का बहिष्कार करने की चेतावनी

इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने मंगलवार को जस्टिस अजय भनोट की अदालत का बहिष्कार करने की धमकी दी। एसोसिएशन का आरोप है कि कोर्ट की कार्यवाही के दौरान उन्होंने एक वकील को अपमानित किया और एक वरिष्ठ वकील का मजाक भी उड़ाया।27 अक्टूबर 2026 को लिखे गए एक पत्र में, जिसे रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को भेजा गया, बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने उसी दिन जस्टिस भनोट की अदालत में हुई घटना पर उचित कार्रवाई की मांग की।पत्र के अनुसार, जस्टिस भनोट ने अपने कोर्ट रूम...

राजस्थान हाईकोर्ट ने 2013 से लंबित अपीलकर्ता की दोषसिद्धि पर रोक लगाई, पंचायत चुनाव लड़ने की अनुमति दी

राजस्थान हाईकोर्ट ने उस व्यक्ति की दोषसिद्धि पर रोक लगाई, जिसकी अपील 2013 से लंबित है। कोर्ट ने उसे आगामी पंचायत चुनाव लड़ने की अनुमति दी, बशर्ते वह अन्य सभी शर्तों को पूरा करता हो।जस्टिस फरजंद अली की सिंगल बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता को केवल इसलिए चुनाव लड़ने के अवसर से वंचित नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि उसकी अपील वर्षों से लंबित है और निकट भविष्य में उस पर सुनवाई होने की संभावना नहीं है।याचिकाकर्ता को 2013 में अपहरण और घर में जबरन घुसने (House-Trespass) जैसे अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया और...

बलात्कार मामले में आसाराम की सजा और आजीवन कारावास के खिलाफ अपील पर अगले महीने सुनवाई करेगा गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट अगले महीने आसाराम की उस अपील पर सुनवाई करेगा, जो उसने गांधीनगर सत्र न्यायालय के उस फैसले के खिलाफ दायर की है, जिसमें उसे 2013 के बलात्कार मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।यह जानकारी मंगलवार (27 अक्टूबर) को आसाराम के वकील ने हाईकोर्ट को दी। उन्होंने बताया कि राजस्थान हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ आसाराम की अपील, जिसमें उसकी दोषसिद्धि और सजा बरकरार रखी गई थी, 17 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।इस दलील को सुनने के बाद जस्टिस इलेश...

धार्मिक चिह्न पहने गैर-हिंदू, देवता के प्रति श्रद्धा जताए बिना आगमिक मंदिरों में प्रवेश नहीं कर सकते: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि धार्मिक चिह्न पहने हुए गैर-हिंदुओं को तमिलनाडु के आगमिक मंदिरों के परिसर में तब तक प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जा सकती, जब तक कि वे मंदिर द्वारा तय किए गए प्रारूप में एक शपथ-पत्र (अंडरटेकिंग) देकर संबंधित देवता के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त न करें।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हालांकि प्रवेश को प्रतिबंधित करने वाले आगमिक नियम अब संविधान की कसौटी पर खरे नहीं उतर सकते, लेकिन जो गैर-हिंदू शपथ-पत्र पर हस्ताक्षर नहीं करते, उन पर ये नियम लागू रहेंगे। कोर्ट ने टिप्पणी की,"अगर इस...

हाईकोर्ट का UP DPG को निर्देश: पासपोर्ट वेरिफिकेशन रिपोर्ट में आपराधिक कार्यवाही की मौजूदा स्थिति का उल्लेख होना चाहिए

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया है कि पासपोर्ट आवेदनों के लिए दी जाने वाली पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट में आपराधिक कार्यवाही की मौजूदा स्थिति की जानकारी दी जाए। इसमें यह भी शामिल होना चाहिए कि क्या अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई और क्या अदालत ने मामले का संज्ञान लिया।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने कहा कि पुलिस अधिकारी केवल केस क्राइम नंबर का उल्लेख करके या किसी व्यक्ति के खिलाफ दाखिल चार्जशीट का विवरण देकर अपना काम पूरा नहीं मान...

सिर्फ इसलिए कि कानूनी राय गलत निकली, किसी वकील पर आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने कहा कि किसी वकील पर केवल इसलिए आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता, क्योंकि पेशेवर कर्तव्यों के दौरान दी गई उसकी कानूनी राय बाद में गलत साबित हो जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आपराधिक जिम्मेदारी तब बन सकती है, जब कोई वकील धोखाधड़ी में मदद करने के इरादे से, दूसरों के साथ मिलकर जानबूझकर कोई गलत या गुमराह करने वाली राय दे।जस्टिस राणा विक्रम सिंह की सिंगल बेंच ने UCO बैंक के एक पैनल वकील के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की। उस वकील पर बैंक लोन धोखाधड़ी में शामिल होने का आरोप था,...

“नहीं” का मतलब “नहीं”: एचपी हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इनकार किया, कहा- रिश्ते में होने का मतलब यह नहीं कि यौन-कृत्य की सहमति मिल गई

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि किसी रिश्ते में होने का मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति अपने साथी की मर्जी के खिलाफ यौन क्रियाएं कर सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि “नहीं” का मतलब “नहीं” ही होता है।कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की जब उसने अपनी मंगेतर के यौन उत्पीड़न के आरोपी व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की। इस मामले में शुरुआती जांच और मेडिकल सबूतों से भी आरोपों की पुष्टि होती दिख रही है।जस्टिस चिराग भानु सिंह ने कहा:इस मामले के तथ्यों को देखते हुए, इतना कहना ही काफी है कि याचिकाकर्ता/आरोपी का...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाल विवाह रोकने के लिए पूरे राज्य में निर्देश जारी किए; केवल आधार के आधार पर उम्र की पुष्टि करने पर रोक लगाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में बाल विवाह के पंजीकरण को रोकने के लिए पूरे राज्य में कड़े निर्देश जारी किए। इसके तहत विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र जारी करने से पहले दोनों पक्षों की जन्म तिथि की पुष्टि करना अनिवार्य कर दिया गया।कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह यह सुनिश्चित करे कि उसका ऑनलाइन पंजीकरण सिस्टम केवल आधार कार्ड में दर्ज उम्र के आधार पर प्रमाण पत्र जारी न करे। साथ ही अगर उम्र की पुष्टि नहीं हुई है या कोई विसंगति (Discrepancy) सामने आती है, तो आवेदन को आगे न बढ़ने दिया...

CrPC की धारा 313 के तहत सवाल आरोपी को उसकी समझ आने वाली भाषा में समझाए जाने चाहिए: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि CrPC की धारा 313 के तहत आरोपी से उसकी समझ आने वाली भाषा में ही सवाल पूछे जाने चाहिए। अगर उसके बयान को गलत तरीके से दर्ज किया जाता है, जिससे उसे अपने खिलाफ मौजूद सबूतों या परिस्थितियों को स्पष्ट करने के अधिकार पर असर पड़ता है तो यह उसे बरी करने का आधार बन सकता है। कोर्ट ने एक अनपढ़ व्यक्ति की हत्या की सजा और उम्रकैद रद्द की। उसका बयान पूरी तरह से अंग्रेजी में दर्ज किया गया। इस बात का कोई जिक्र नहीं था कि सवाल और जवाब उसे उसकी मातृभाषा में समझाए गए या नहीं।जस्टिस आनंद सेन...