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RSS पर कथित टिप्पणी मामले में कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे को अदालत का समन
RSS पर कथित टिप्पणी मामले में कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे को अदालत का समन

बेंगलुरु कोर्ट ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के खिलाफ कथित मानहानिकारक टिप्पणियों के मामले में कर्नाटक के गृह मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियंक खड़गे तथा कांग्रेस नेता मोहम्मद हैरिस नलपाड़ को समन जारी किया।अदालत ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 356 (आपराधिक मानहानि) के तहत निजी शिकायत पर संज्ञान लेते हुए दोनों को 21 जुलाई 2026 को पेश होने का निर्देश दिया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बेंगलुरु शहर की अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान कांग्रेस विधायक दिनेश गुंडू राव के खिलाफ कार्यवाही समाप्त...

मानहानि मामले में राहुल गांधी को राहत: खेद जताने के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामला बंद किया
मानहानि मामले में राहुल गांधी को राहत: खेद जताने के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामला बंद किया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर मानहानि का मामला बंद किया। यह मामला पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान ने दर्ज कराया था, जिसमें आरोप लगाया गया कि गांधी ने 2018 में एक चुनावी रैली के दौरान सिंह के खिलाफ झूठे और मानहानिपूर्ण बयान दिए। [2026 LiveLaw (MP) 235]गांधी ने ट्रायल कोर्ट के 2024 के उस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया, जिसमें मानहानि के मामले का संज्ञान लिया गया और उन्हें समन जारी किया गया।जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक्टर सनी देओल के खिलाफ प्रोड्यूसर की अपील को फिर से शुरू किया, ₹15,000 का जुर्माना लगाया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक्टर सनी देओल के खिलाफ प्रोड्यूसर की अपील को फिर से शुरू किया, ₹15,000 का जुर्माना लगाया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार (25 जून) को प्रोड्यूसर सुनील दर्शन पर ₹15,000 का जुर्माना लगाते हुए उनकी अपील को फिर से शुरू करने की इजाज़त दी। यह अपील 2015 में सिंगल-जज के फैसले के खिलाफ दायर की गई, जिसमें फिल्ममेकर और बॉलीवुड एक्टर सनी देओल द्वारा एक-दूसरे के खिलाफ दायर दो आर्बिट्रेशन याचिकाओं को खारिज कर दिया गया।मामले की पृष्ठभूमि यह है कि दोनों सेलिब्रिटी एक दशक से भी ज़्यादा समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। यह विवाद 'गुड मॉर्निंग इंडिया' नाम की फिल्म से देओल के अलग होने को लेकर था, जिसे 2008...

कांग्रेस MLA के BJP में शामिल होने का कोई सबूत नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दल-बदल की कार्यवाही में तेज़ी लाने से इनकार किया
कांग्रेस MLA के BJP में शामिल होने का कोई सबूत नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दल-बदल की कार्यवाही में तेज़ी लाने से इनकार किया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कांग्रेस MLA उमंग सिंघार की याचिका खारिज की। उन्होंने स्पीकर के पास एक अर्ज़ी दी थी, जिसमें बीना निर्वाचन क्षेत्र की MLA निर्मला सप्रे को दल-बदल के आधार पर अयोग्य घोषित करने की मांग की गई थी। [2026 LiveLaw (MP) 234]एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीज़न बेंच ने सप्रे (प्रतिवादी नंबर 4) की दलीलों पर ध्यान दिया। सप्रे ने कहा था कि न तो उन्होंने INC से इस्तीफ़ा दिया है और न ही BJP में शामिल हुई हैं, और उन्हें हाईकोर्ट और विधानसभा स्पीकर के सामने एक...

दिशा सालियान मौत मामला: हत्या की FIR दर्ज कराने की मांग वाली याचिका से जस्टिस आशीष चव्हाण अलग हुए
दिशा सालियान मौत मामला: 'हत्या' की FIR दर्ज कराने की मांग वाली याचिका से जस्टिस आशीष चव्हाण अलग हुए

बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस आशीष चव्हाण ने बुधवार को दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान द्वारा दायर याचिका की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया।सतीश सालियान ने अपनी याचिका में दावा किया कि उनकी बेटी दिशा सालियान ने आत्महत्या नहीं की थी बल्कि उसकी हत्या की गई। उन्होंने मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की प्रासंगिक धाराओं के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की।हालांकि जस्टिस आशीष चव्हाण ने मामले की सुनवाई से अलग होने का फैसला किया। अदालत ने इस चरण पर मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं...

राजस्थान सरकार ने UCC ड्राफ्ट तैयार करने के लिए बनाया पैनल, पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई करेंगे अध्यक्षता
राजस्थान सरकार ने UCC ड्राफ्ट तैयार करने के लिए बनाया पैनल, पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई करेंगे अध्यक्षता

राजस्थान सरकार ने 'राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड, 2026' (RUCC) का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए एक हाई-लेवल कमेटी बनाई, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई करेंगी।एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) इस कमेटी के मेंबर-सेक्रेटरी होंगे।इसकी घोषणा संसदीय कार्य, कानून और कानूनी मामलों, कानूनी सलाह और न्याय विभाग के कैबिनेट मंत्री श्री जोगाराम पटेल और गृह राज्य मंत्री श्री जवाहर सिंह बेढम ने 22 जून, 2026 को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में की।5 सदस्यों वाली इस कमेटी में अन्य सदस्यों...

जो माँ अपने पति के प्रति पवित्र कर्तव्यों को पूरा नहीं करती, उसके साथ बच्चे का भविष्य सुरक्षित नहीं: पुणे कोर्ट
जो माँ अपने पति के प्रति 'पवित्र कर्तव्यों' को पूरा नहीं करती, उसके साथ बच्चे का भविष्य सुरक्षित नहीं: पुणे कोर्ट

पुणे फैमिली कोर्ट ने हाल ही में कहा कि एक महिला से उम्मीद की जाती है कि वह शादी की कसमें निभाए, अपने पति का शारीरिक और भावनात्मक रूप से ख्याल रखे, उसके लिए प्रार्थना करे और उसकी भलाई चाहे। अगर वह पति के प्रति इन 'पवित्र' कर्तव्यों को पूरा नहीं करती है, तो बच्चे का भविष्य उसके साथ 'सुरक्षित' नहीं है।फैमिली कोर्ट के इंचार्ज जज गणेश घुले ने 16 मई को एक आदेश जारी कर एक नाबालिग लड़के की कस्टडी उसके पिता को सौंप दी। उन्होंने माँ के खिलाफ कुछ बातें कहीं, खासकर यह कि वह अपने पति के प्रति अपने 'पवित्र'...

जज का काम किसी को खुश करना नहीं, बल्कि न्याय करने में ही असली संतुष्टि: जस्टिस विभा कंकनवाड़ी ने बॉम्बे हाईकोर्ट को कहा अलविदा
जज का काम किसी को खुश करना नहीं, बल्कि न्याय करने में ही असली संतुष्टि: जस्टिस विभा कंकनवाड़ी ने बॉम्बे हाईकोर्ट को कहा अलविदा

बॉम्बे हाईकोर्ट से विदा लेते हुए जज जस्टिस विभा कंकनवाड़ी ने मंगलवार (23 जून) को कहा कि अपने काम से संतुष्टि पाने के लिए एक जज को अपनी पूरी क्षमता से काम करना चाहिए, न कि किसी को खुश करने या संतुष्ट करने की कोशिश करनी चाहिए।जस्टिस कंकनवाड़ी को 9 साल पहले हाईकोर्ट में प्रमोट किया गया था। वह कुल 34 साल तक जज रहने के बाद रिटायर हुईं।हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच की अध्यक्षता करने वाली पहली महिला जज रहीं जस्टिस कंकनवाड़ी ने अपने विदाई भाषण में कहा कि न्याय करना, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना और...

पश्चिम बंगाल सरकार करेगी 1.69 करोड़ जाति प्रमाण पत्रों की जांच: CPIM(L) ने हाईकोर्ट में दी चुनौती
पश्चिम बंगाल सरकार करेगी 1.69 करोड़ जाति प्रमाण पत्रों की जांच: CPIM(L) ने हाईकोर्ट में दी चुनौती

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन ने कलकत्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की। इसमें पश्चिम बंगाल सरकार के उस मेमोरेंडम को चुनौती दी गई, जिसमें 2011 से राज्य में जारी सभी अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के जाति प्रमाण पत्रों का बड़े पैमाने पर दोबारा वेरिफिकेशन करने का निर्देश दिया गया।याचिका में पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग द्वारा 14 मई, 2026 को जारी मेमोरेंडम पर सवाल उठाए गए। इसमें कहा गया कि इससे लगभग 1.69 करोड़ जाति प्रमाण पत्र...

पैसेंजर ट्रेन में बम धमाका रेलवे एक्ट के तहत हादसा, रेलवे मुआवज़ा देने के लिए ज़िम्मेदाक: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पैसेंजर ट्रेन में बम धमाका रेलवे एक्ट के तहत 'हादसा', रेलवे मुआवज़ा देने के लिए ज़िम्मेदाक: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पैसेंजर ट्रेन में बम धमाके के पीड़ितों को मुआवज़ा देने के लिए भारत सरकार (यूनियन ऑफ़ इंडिया) की ज़िम्मेदारी बरकरार रखी। कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटना रेलवे एक्ट, 1989 की धारा 124 के तहत "हादसे" की परिभाषा में आती है। [2026 LiveLaw (PH) 204]जस्टिस पंकज जैन ने कहा,"एक बार यह तय हो जाने के बाद कि ट्रेन में आग या धमाका 'हादसे' की परिभाषा में आता है तो भारत सरकार ट्रेन/रेलवे स्टेशन पर बम धमाके से हुई मौत के लिए मुआवज़ा देने की अपनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकती।" कोर्ट ने भारत...

एमपी में शादी करने वाली महिला सरकारी नौकरी में आरक्षण के लिए अपने मूल राज्य से जारी जाति प्रमाण पत्र पर निर्भर नहीं रह सकती: हाईकोर्ट
एमपी में शादी करने वाली महिला सरकारी नौकरी में आरक्षण के लिए अपने मूल राज्य से जारी जाति प्रमाण पत्र पर निर्भर नहीं रह सकती: हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि एक महिला को उस राज्य में आरक्षण का लाभ मिल सकता है, जहां उसकी शादी हुई है, बशर्ते वह उस राज्य के सक्षम अधिकारी से जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करे और उसे प्राप्त करे। [2026 LiveLaw (MP) 223]जस्टिस विशाल धगट की बेंच ने आगे स्पष्ट किया कि महिला को उसके मूल राज्य द्वारा मूल रूप से जारी जाति प्रमाण पत्र का उपयोग किसी अन्य राज्य में आरक्षण पाने के लिए नहीं किया जा सकता है।बेंच ने कहा:"यदि किसी लड़की की जाति को दोनों राज्यों में आरक्षण का लाभ पाने के लिए अधिसूचित किया...

हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन की मांग: तेलंगाना मूल के वकीलों को ही बनाया जाए जज
हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन की मांग: तेलंगाना मूल के वकीलों को ही बनाया जाए जज

तेलंगाना हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन ने बुधवार (17 जून) को एक विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें राज्य के मूल वकीलों के नामों पर जज के तौर पर नियुक्ति के लिए विचार करने की मांग की गई।एसोसिएशन के अध्यक्ष एस. सुरेंद्र रेड्डी, उपाध्यक्ष डी.एल. पांडु, सचिव पी. श्रवण कुमार गौड़, संयुक्त सचिव पी. कृष्णा कीर्तना और बार के वरिष्ठ सदस्यों ने इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया।यह विरोध प्रदर्शन एक विशेष आम सभा में पारित प्रस्ताव के तहत आयोजित किया गया। इस प्रस्ताव में तेलंगाना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और कॉलेजियम...