छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

RTI Act: किसी तीसरे पक्ष की प्राइवेसी का मामला न हो तो बचाव के लिए मांगी गई जांच की जानकारी देने से मना नहीं किया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
RTI Act: किसी तीसरे पक्ष की प्राइवेसी का मामला न हो तो बचाव के लिए मांगी गई जांच की जानकारी देने से मना नहीं किया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की बेंच ने कहा कि RTI Act की धारा 8(1)(c) और 8(1)(j) के तहत जानकारी देने से मना करना तब सही नहीं है, जब मांगी गई जानकारी याचिकाकर्ता की अपनी विभागीय जांच से जुड़ी हो और बचाव के लिए मांगी गई हो, और इसमें किसी तीसरे पक्ष की प्राइवेसी का मामला न हो।पृष्ठभूमि की जानकारीयाचिकाकर्ता जांजगीर के फैमिली कोर्ट में ड्राइवर के तौर पर काम कर रहा था। कुछ आरोपों के चलते याचिकाकर्ता के खिलाफ दो विभागीय जांच शुरू की गईं। उस पर गलत व्यवहार के सात आरोप लगाए गए।...

निजी शरिया संस्था मुस्लिम महिला का तलाक या वैवाहिक स्थिति तय नहीं कर सकती: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
निजी शरिया संस्था मुस्लिम महिला का तलाक या वैवाहिक स्थिति तय नहीं कर सकती: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि खुद को 'इदारा-ए-शरिया इस्लामी कोर्ट' कहने वाली कोई निजी धार्मिक संस्था किसी व्यक्ति की वैवाहिक स्थिति या उसके कानूनी अधिकारों और दायित्वों का फैसला नहीं कर सकती।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धार्मिक आस्था किसी निजी संस्था को अदालत की तरह कानूनी स्थिति तय करने का अधिकार नहीं देती। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने एक मुस्लिम महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।महिला ने 18 जनवरी 2022 को इदारा-ए-शरिया इस्लामी कोर्ट की ओर से जारी उस आदेश को...

पदोन्नति के लिए सेवा अवधि नियुक्ति की तारीख से नहीं, संबंधित कैलेंडर वर्ष से गिनी जाएगी: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
पदोन्नति के लिए सेवा अवधि नियुक्ति की तारीख से नहीं, संबंधित कैलेंडर वर्ष से गिनी जाएगी: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पदोन्नति के लिए निर्धारित सेवा अवधि की गणना को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि पात्रता सेवा की गणना संबंधित संवर्ग में नियुक्ति की वास्तविक तारीख से नहीं, बल्कि उस कैलेंडर वर्ष से की जाएगी, जिसमें कर्मचारी ने पदोन्नति के लिए निर्धारित मूल संवर्ग में प्रवेश किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ लोक सेवाएं (पदोन्नति) नियम, 2003 के नियम 6(2) में सेवा अवधि की गणना के लिए कैलेंडर वर्ष को आधार बनाया गया।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने...

पिछड़ा वर्ग आयोग निजी कारोबारी विवाद में वसूली का आदेश नहीं दे सकता, सिफारिश का नाम देने से अधिकार क्षेत्र नहीं बदलता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
पिछड़ा वर्ग आयोग निजी कारोबारी विवाद में वसूली का आदेश नहीं दे सकता, सिफारिश का नाम देने से अधिकार क्षेत्र नहीं बदलता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग दो निजी पक्षकारों के बीच कारोबारी विवाद का फैसला नहीं कर सकता और न ही एक निजी पक्ष से तय रकम की वसूली कर दूसरे निजी पक्ष को भुगतान करने का निर्देश दे सकता है। अदालत ने कहा कि किसी आदेश को महज 'सिफारिश' कह देने से उसका वास्तविक स्वरूप नहीं बदल जाता।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच एक इंट्रा-कोर्ट अपील पर सुनवाई कर रही थी। अपील एकल पीठ के 17 जून 2026 के आदेश के खिलाफ दायर की गई, जिसके जरिए छत्तीसगढ़...

एग्जीक्यूटिंग कोर्ट फ़ाइनल डिक्री में शामिल न की गई पिछली सैलरी नहीं दे सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
एग्जीक्यूटिंग कोर्ट फ़ाइनल डिक्री में शामिल न की गई पिछली सैलरी नहीं दे सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि एग्जीक्यूटिंग कोर्ट डिक्री से आगे नहीं जा सकता और पिछली सैलरी (बैक वेजेज़) नहीं दे सकता, अगर उस फ़ैसले और डिक्री में ऐसी कोई राहत नहीं दी गई, जिसे लागू किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि एग्जीक्यूटिंग कोर्ट के पास न तो डिक्री को समझाने का अधिकार है और न ही उससे आगे जाने का अधिकार क्षेत्र।जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) कमांडेंट की रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इसमें एग्जीक्यूटिंग कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें...

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कथित शराब घोटाले से जुड़े कैश ट्रेल मामले में वेस्टिन होटल की ₹110 करोड़ की संपत्ति ज़ब्त करने का फ़ैसला बरकरार रखा
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कथित शराब घोटाले से जुड़े कैश ट्रेल मामले में वेस्टिन होटल की ₹110 करोड़ की संपत्ति ज़ब्त करने का फ़ैसला बरकरार रखा

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गोवा के होटल वेस्टिन को ₹110 करोड़ तक अस्थायी रूप से ज़ब्त करने के मामले में दखल देने से इनकार किया। याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने साफ़ किया कि उसने संबंधित आरोपों पर कोई अंतिम फ़ैसला नहीं लिया है और ऐसे सवालों की जांच कानून के तहत तय कानूनी प्रक्रिया के ज़रिए की जानी चाहिए।चीफ़ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीज़न बेंच, प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 की धारा 5(1) के तहत 28 मई, 2026 को जारी अस्थायी ज़ब्ती आदेश...

ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे का भरण-पोषण 18 साल पूरे होते ही बंद नहीं होगा, आत्मनिर्भर होने तक मिल सकता है: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे का भरण-पोषण 18 साल पूरे होते ही बंद नहीं होगा, आत्मनिर्भर होने तक मिल सकता है: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि शारीरिक या मानसिक विकलांगता अथवा असामान्यता से पीड़ित और अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ बच्चे के मामले में केवल 18 वर्ष की आयु पूरी हो जाने से भरण-पोषण पाने का अधिकार स्वतः समाप्त नहीं हो सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि असली कसौटी यह होगी कि बालिग होने के बाद संबंधित व्यक्ति अपना भरण-पोषण करने और आजीविका कमाने में सक्षम है या नहीं।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एक आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। यह याचिका फैमिली कोर्ट, दुर्ग के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई, जिसमें...

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट: महिला आयोग कर्मचारी की सेवा शर्तों को प्रभावित करने वाले बाध्यकारी निर्देश नहीं दे सकता
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट: महिला आयोग कर्मचारी की सेवा शर्तों को प्रभावित करने वाले बाध्यकारी निर्देश नहीं दे सकता

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि राज्य महिला आयोग महिलाओं के अधिकारों से वंचित किए जाने से जुड़ी शिकायतें प्राप्त कर सकता है, लेकिन किसी कर्मचारी की सेवा शर्तों को प्रभावित करने वाले बाध्यकारी निर्देश जारी नहीं कर सकता। आयोग का अधिकार क्षेत्र केवल शिकायतों पर उचित कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को सिफारिश करने और सुविधा प्रदान करने तक सीमित है।जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की पीठ एक सरकारी स्कूल के प्राचार्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग...

बिना धोखे या बेईमानी से उकसाए वैवाहिक स्थिति न बताना IPC की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
बिना धोखे या बेईमानी से उकसाए वैवाहिक स्थिति न बताना IPC की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि वैवाहिक स्थिति से जुड़ी अहम जानकारी न बताने के सिर्फ़ आरोपों से - जब तक कि उसमें धोखा देने और बेईमानी से उकसाने जैसी ज़रूरी बातें शामिल न हों - IPC की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का अपराध नहीं बनता। कोर्ट ने कहा कि जिन अपराधों का आरोप लगाया गया, अगर उनके लिए ज़रूरी तत्व मौजूद नहीं हैं तो आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कोर्ट की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका ज्यूडिशियल...

बेटे का सीनियर सिटीजन होना 93 वर्षीय मां के घर पर कब्जे का अधिकार नहीं देता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
बेटे का सीनियर सिटीजन होना 93 वर्षीय मां के घर पर कब्जे का अधिकार नहीं देता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी व्यक्ति का स्वयं सीनियर सिटीजन होना उसे किसी अन्य सीनियर सिटीजन की इच्छा के विरुद्ध उसके घर में रहने का असीमित अधिकार नहीं देता। कोर्ट ने कहा कि माता-पिता और सीनियर सिटीजन के भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को उपेक्षा, दुर्व्यवहार और उत्पीड़न से सुरक्षा देना है।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती देने वाली अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।...

एक ही आरोपों पर दोबारा FIR नहीं हो सकती, यदि पुलिस ने पहले शिकायत को गैर-संज्ञेय माना था: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
एक ही आरोपों पर दोबारा FIR नहीं हो सकती, यदि पुलिस ने पहले शिकायत को गैर-संज्ञेय माना था: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि पुलिस ने शुरुआत में किसी शिकायत को गैर-संज्ञेय विवाद मानते हुए कार्रवाई की हो और बाद में उसी आरोपों पर बिना किसी नए तथ्य या सामग्री के FIR दर्ज कर दी जाए, तो यह संकेत देता है कि मूलतः कारोबारी या संविदात्मक विवाद को आपराधिक रंग देने का प्रयास किया गया है।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह टिप्पणी भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 3(5) के तहत दर्ज FIR को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए की।क्या था...

विधेयक लंबित होना शोर प्रदूषण पर कार्रवाई में ढिलाई का आधार नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मौजूदा कानून के सख्त पालन का दिया निर्देश
विधेयक लंबित होना शोर प्रदूषण पर कार्रवाई में ढिलाई का आधार नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मौजूदा कानून के सख्त पालन का दिया निर्देश

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शोर प्रदूषण पर रोक लगाने वाले मौजूदा कानून और सरकारी निर्देशों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण विधेयक, 2026 के विधायी प्रक्रिया में लंबित होने को मौजूदा कानून के पालन में किसी भी तरह की ढिलाई का आधार नहीं बनाया जा सकता।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ शोर प्रदूषण से संबंधित समाचार रिपोर्ट के आधार पर शुरू की गई स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।कोर्ट ने गृह विभाग...

विधेयक लंबित होना शोर प्रदूषण पर कार्रवाई में ढिलाई का आधार नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मौजूदा कानून के सख्त पालन का दिया निर्देश
विधेयक लंबित होना शोर प्रदूषण पर कार्रवाई में ढिलाई का आधार नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मौजूदा कानून के सख्त पालन का दिया निर्देश

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शोर प्रदूषण पर रोक लगाने वाले मौजूदा कानून और सरकारी निर्देशों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण विधेयक, 2026 के विधायी प्रक्रिया में लंबित होने को मौजूदा कानून के पालन में किसी भी तरह की ढिलाई का आधार नहीं बनाया जा सकता।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ शोर प्रदूषण से संबंधित समाचार रिपोर्ट के आधार पर शुरू की गई स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।कोर्ट ने गृह विभाग...

गलत वेतन निर्धारण से मिली अतिरिक्त राशि की वसूली कक्षा-3 और कक्षा-4 कर्मचारियों से नहीं की जा सकती, सहमति देने पर भी नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
गलत वेतन निर्धारण से मिली अतिरिक्त राशि की वसूली कक्षा-3 और कक्षा-4 कर्मचारियों से नहीं की जा सकती, सहमति देने पर भी नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि गलत वेतन निर्धारण के कारण कर्मचारी को मिली अतिरिक्त राशि की वसूली कक्षा-3 और कक्षा-4 के कर्मचारियों से नहीं की जा सकती, भले ही कर्मचारी ने राशि वापस करने के लिए सहमति पत्र या शपथपत्र दिया हो।जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने रिटायर उप निरीक्षक द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ता ने वेतन के गलत निर्धारण के कारण अधिक भुगतान बताकर उससे वसूली गई 6,26,104 रुपये की राशि वापस करने की मांग की थी।याचिकाकर्ता का कहना था कि...

स्वैच्छिक सहयोग के नाम पर किसी व्यक्ति को पुलिस हिरासत में नहीं रखा जा सकता, यह Article 22 का उल्लंघन: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
'स्वैच्छिक सहयोग' के नाम पर किसी व्यक्ति को पुलिस हिरासत में नहीं रखा जा सकता, यह Article 22 का उल्लंघन: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि जांच एजेंसियां "स्वैच्छिक सहयोग (Voluntary Cooperation)" के नाम पर किसी व्यक्ति को अपनी हिरासत में रखकर गिरफ्तारी से जुड़े संवैधानिक सुरक्षा उपायों को दरकिनार नहीं कर सकतीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस के नियंत्रण में आने के बाद किसी नोटिस पर यह लिखवा लेना कि व्यक्ति स्वेच्छा से साथ जा रहा है, वास्तविक सहमति (Genuine Consent) का प्रमाण नहीं माना जा सकता।चीफ़ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने साइबर फ्रॉड मामले में एक व्यक्ति की...

डॉ. बी.आर. आंबेडकर पर आपत्तिजनक Instagram पोस्ट मामले में FIR रद्द करने से इनकार, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा- ट्रायल से पहले तथ्यों की जांच नहीं की जा सकती
डॉ. बी.आर. आंबेडकर पर आपत्तिजनक Instagram पोस्ट मामले में FIR रद्द करने से इनकार, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा- ट्रायल से पहले तथ्यों की जांच नहीं की जा सकती

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी Instagram पर पोस्ट करने की आरोपी महिला के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि चार्जशीट में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया (Prima Facie) संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) का खुलासा करते हैं, इसलिए इस स्तर पर कार्यवाही में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।चीफ़ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका को खारिज करते हुए की, जिसमें FIR और SC/ST...

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दहेज की मांग के कारण गर्भवती पत्नी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोपी पति को ज़मानत देने से इनकार किया
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दहेज की मांग के कारण गर्भवती पत्नी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोपी पति को ज़मानत देने से इनकार किया

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उस पति को रेगुलर ज़मानत देने से इनकार किया, जिस पर दहेज की मांग को लेकर अपनी पत्नी को लगातार शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और अंततः उसे आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि ज़मानत अर्ज़ी पर विचार करते समय FIR दर्ज करने में देरी और गवाहों के बयानों में कथित विसंगतियों जैसे मुद्दे ट्रायल के दौरान देखे जाने वाले मामले हैं और उन पर अभी पक्के तौर पर विचार नहीं किया जा सकता।चीफ़ जस्टिस रमेश सिन्हा, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 483...

सोशल मीडिया वीडियो की सत्यता साबित किए बिना विभागीय कार्रवाई नहीं हो सकती: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
सोशल मीडिया वीडियो की सत्यता साबित किए बिना विभागीय कार्रवाई नहीं हो सकती: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी विभागीय जांच (Departmental Enquiry) के निष्कर्ष केवल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो पर आधारित हों और उस वीडियो का स्रोत, प्रामाणिकता तथा कानूनी रूप से प्रमाणित होने का तरीका स्थापित न किया गया हो, तो ऐसे निष्कर्ष टिक नहीं सकते।चीफ़ रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए जेल प्रहरी (Prison Guard) को सेवा से हटाने का आदेश रद्द करने वाले एकलपीठ के फैसले को बरकरार रखा।मामले में जेल प्रहरी पर आरोप था कि वह...

NEET OMR शीट से छेड़छाड़ के आरोप गंभीर, इन्हें सिर्फ़ उम्मीदवार के शक के आधार पर नहीं माना जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
NEET OMR शीट से छेड़छाड़ के आरोप 'गंभीर', इन्हें सिर्फ़ उम्मीदवार के शक के आधार पर नहीं माना जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि NEET उम्मीदवार की OMR शीट से छेड़छाड़ के आरोप गंभीर हैं और ठोस सबूत के बिना, सिर्फ़ शक, अंदाज़े या अपनी सोच के आधार पर इन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर यह साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है कि तय तरीका उपलब्ध नहीं था या बेकार था, तो कोई उम्मीदवार परीक्षा लेने वाली संस्था की शिकायत निवारण प्रक्रिया को नज़रअंदाज़ करके सीधे अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट के रिट अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं कर सकता।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र...