छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

ज़मीन के विवाद में प्राइवेट प्रतिवादियों के कहने पर तहसीलदार दस्तावेज़ पेश करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
ज़मीन के विवाद में प्राइवेट प्रतिवादियों के कहने पर तहसीलदार दस्तावेज़ पेश करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि छत्तीसगढ़ लैंड रेवेन्यू कोड के तहत तहसीलदार के पास किसी प्राइवेट प्रतिवादी की अर्ज़ी पर किसी पक्ष को दस्तावेज़ पेश करने के लिए मजबूर करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि ज़्यादा से ज़्यादा, तहसीलदार दस्तावेज़ पेश न करने पर किसी पक्ष के ख़िलाफ़ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाल सकता है, लेकिन उनकी मर्ज़ी के बिना उन्हें दस्तावेज़ पेश करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। [2026 LiveLaw (Chh) 72]जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें एडिशनल कलेक्टर के...

मोटर दुर्घटना के दावों में उम्र के सबूत के तौर पर आधार कार्ड पर भरोसा नहीं किया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
मोटर दुर्घटना के दावों में उम्र के सबूत के तौर पर आधार कार्ड पर भरोसा नहीं किया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि मोटर दुर्घटना में मुआवज़े के मामलों में दावा करने वाले की उम्र तय करने के लिए आधार कार्ड भरोसेमंद दस्तावेज़ नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ़ इंश्योरेंस प्रीमियम मिलने से ही इंश्योरेंस कंपनी की ज़िम्मेदारी तय नहीं हो जाती, क्योंकि इंश्योरेंस का कॉन्ट्रैक्ट पॉलिसी में बताई गई तारीख और समय से शुरू होता है, न कि प्रीमियम मिलने की तारीख से।जस्टिस सचिन सिंह राजपूत एक सड़क दुर्घटना से जुड़े तीन मामलों की सुनवाई कर रहे थे। इस दुर्घटना में दो लोगों की मौत हो गई और एक...

लोक सूचना अधिकारी पर जुर्माना लगाने से पहले अलग नोटिस देना अनिवार्य, अपील का नोटिस पर्याप्त नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
लोक सूचना अधिकारी पर जुर्माना लगाने से पहले अलग नोटिस देना अनिवार्य, अपील का नोटिस पर्याप्त नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act) के तहत किसी लोक सूचना अधिकारी पर जुर्माना लगाने से पहले राज्य सूचना आयोग के लिए धारा 20(1) के तहत अलग से नोटिस जारी करना और सुनवाई का उचित अवसर देना अनिवार्य है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अपील की कार्यवाही के दौरान जारी नोटिस को अंतिम नोटिस मानकर सीधे जुर्माना नहीं लगाया जा सकता।जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद एक लोक सूचना अधिकारी की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। याचिका में छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के उस...

नगर पालिका परिषद के लिए गए फ़ैसले के लिए परिषद के अध्यक्ष को व्यक्तिगत रूप से ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
नगर पालिका परिषद के लिए गए फ़ैसले के लिए परिषद के अध्यक्ष को व्यक्तिगत रूप से ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष और मुख्य नगर पालिका अधिकारी को, परिषद द्वारा विधिवत पारित प्रस्ताव के माध्यम से सामूहिक रूप से लिए गए फ़ैसले के लिए व्यक्तिगत रूप से ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि जब पूरी नगर पालिका संस्था ने सर्वसम्मति से फंड के डायवर्जन और अन्य फ़ैसलों को मंज़ूरी दी थी तो केवल दो पदाधिकारियों पर व्यक्तिगत आपराधिक दायित्व नहीं थोपा जा सकता।जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद उन रिट याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे, जो राज्य सरकार के एक आदेश से...

FIR दर्ज होने से पहले झूठे आरोपों से खुद को बचाने के लिए आरोपी द्वारा उठाए गए कदमों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रेप की सज़ा रद्द की
FIR दर्ज होने से पहले झूठे आरोपों से खुद को बचाने के लिए आरोपी द्वारा उठाए गए कदमों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रेप की सज़ा रद्द की

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने IPC की धारा 376(1) और 506 पार्ट II के तहत व्यक्ति को सुनाई गई सज़ा रद्द की। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट बचाव पक्ष द्वारा पेश किए गए अहम सबूतों पर ठीक से विचार करने में नाकाम रहा, जिसमें रेप की FIR दर्ज होने से पहले आरोपी द्वारा दी गई शिकायत और भेजा गया कानूनी नोटिस शामिल था। कोर्ट ने माना कि कथित झूठे आरोपों से खुद को बचाने के लिए आरोपी द्वारा उठाए गए ऐसे कानूनी कदमों को अभियोजन पक्ष के मामले की विश्वसनीयता का आकलन करते समय नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।जस्टिस संजय एस....

कोविड के कारण TET परीक्षा रद्द होने पर अभ्यर्थी को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
कोविड के कारण TET परीक्षा रद्द होने पर अभ्यर्थी को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि कोविड-19 महामारी के कारण TET परीक्षा रद्द हो गई हो, तो निर्धारित अवधि के भीतर TET योग्यता प्राप्त न कर पाने के आधार पर किसी अभ्यर्थी को अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि जब देरी अभ्यर्थी की नहीं बल्कि प्रशासन की वजह से हुई हो, तो उसका नुकसान उम्मीदवार को नहीं उठाना चाहिए।जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी ने यह फैसला उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें याचिकाकर्ता के पिता, जो सहायक शिक्षक (LB) थे, की 7...

सिर्फ शिकायत के आधार पर पदोन्नति से वंचित नहीं किया जा सकता न्यायिक अधिकारी, विभागीय कार्रवाई न हो तो सेवा लाभ भी मिलेंगे: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
सिर्फ शिकायत के आधार पर पदोन्नति से वंचित नहीं किया जा सकता न्यायिक अधिकारी, विभागीय कार्रवाई न हो तो सेवा लाभ भी मिलेंगे: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी न्यायिक अधिकारी की पदोन्नति केवल शिकायत के आधार पर स्थायी रूप से नहीं रोकी जा सकती, यदि उस शिकायत पर न तो विभागीय जांच हुई हो, न अनुशासनात्मक कार्रवाई और न ही कोई प्रतिकूल निष्कर्ष निकला हो।जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ न्यायिक अधिकारी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने पदोन्नति टाले जाने और मूल वरिष्ठता बहाल नहीं किए जाने के फैसले को चुनौती दी।मामले के अनुसार, वर्ष 2014 में याचिकाकर्ता पदोन्नति के लिए पात्र थीं,...

ज़ब्त शराब की बोतलों की मात्रा तय सीमा से ज़्यादा होने की पुष्टि किए बिना आबकारी अधिनियम के तहत गाड़ी ज़ब्त नहीं की जा सकती: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
ज़ब्त शराब की बोतलों की मात्रा तय सीमा से ज़्यादा होने की पुष्टि किए बिना आबकारी अधिनियम के तहत गाड़ी ज़ब्त नहीं की जा सकती: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 47-A के तहत गाड़ी को ज़ब्त करने का फ़ैसला इस अनुमान के आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता कि ज़ब्त की गई सभी बोतलों में शराब की मात्रा कानूनी सीमा से ज़्यादा थी। कोर्ट ने कहा कि ज़ब्ती की कार्रवाई करने से पहले संबंधित अधिकारी को भरोसेमंद सबूतों के आधार पर यह पक्का करना होगा कि ज़ब्त किया गया पदार्थ शराब थी और उसकी मात्रा पाँच बल्क लीटर से ज़्यादा थी; ऐसा पक्का यकीन ठोस सबूतों के बिना केवल अनुमानों पर आधारित नहीं हो सकता।चीफ जस्टिस रमेश...

छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग एक सलाहकार संस्था, कॉमर्शियल विवादों में रिकवरी का आदेश नहीं दे सकती: हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग एक सलाहकार संस्था, कॉमर्शियल विवादों में रिकवरी का आदेश नहीं दे सकती: हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग सलाहकार और सिफारिश करने वाली संस्था है। उसे कमर्शियल विवाद में पैसे की रिकवरी का आदेश देने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि हालांकि 'छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम, 1995' के तहत आयोग की सलाह आमतौर पर राज्य सरकार के लिए बाध्यकारी हो सकती है, लेकिन वह असल में रिकवरी का आदेश जारी करके किसी सक्षम अधिकारी की शक्तियों का इस्तेमाल नहीं कर सकती।जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा 23.09.2022 को...

सिर्फ़ इसलिए कि PSU अपने कर्मचारियों के बच्चों की फ़ीस का भुगतान करता है, प्राइवेट स्कूल RTI के दायरे में नहीं आता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
सिर्फ़ इसलिए कि PSU अपने कर्मचारियों के बच्चों की फ़ीस का भुगतान करता है, प्राइवेट स्कूल RTI के दायरे में नहीं आता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि कोई प्राइवेट शिक्षण संस्थान 'सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005' (RTI Act) के तहत 'पब्लिक अथॉरिटी' (सार्वजनिक प्राधिकरण) नहीं बन जाता, सिर्फ़ इसलिए कि कोई पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSU) अपने कर्मचारियों के बच्चों से ली जाने वाली रियायती फ़ीस से होने वाले घाटे की भरपाई करती है। कोर्ट ने माना कि इस तरह की कॉन्ट्रैक्ट वाली वित्तीय व्यवस्था को 'काफ़ी ज़्यादा फ़ंडिंग' (substantial financing) नहीं माना जा सकता, जिससे RTI एक्ट की धारा 2(h) के प्रावधान लागू हों।जस्टिस अमितेंद्र...

बिना एविडेंस एक्ट की धारा 65B के सर्टिफिकेट और वॉइस सैंपल ऑथेंटिकेशन के रिश्वत मांगने की वॉइस रिकॉर्डिंग मान्य नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
'बिना एविडेंस एक्ट की धारा 65B के सर्टिफिकेट और वॉइस सैंपल ऑथेंटिकेशन के रिश्वत मांगने की वॉइस रिकॉर्डिंग मान्य नहीं': छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दोषी ठहराए गए दो सरकारी कर्मचारियों को बरी किया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष गैर-कानूनी तरीके से रिश्वत मांगने की बात को बिना किसी शक के साबित करने में नाकाम रहा। कोर्ट ने पाया कि इंडियन एविडेंस एक्ट, 1872 की धारा 65-B के तहत सर्टिफिकेट न होने और वॉइस सैंपल या FSL रिपोर्ट न होने की वजह से अभियोजन पक्ष द्वारा पेश की गई रिकॉर्ड की गई बातचीत पर भरोसा नहीं किया जा सकता।जस्टिस रजनी दुबे स्पेशल जज (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) के फैसले के...

परिवार के एक सदस्य के नौकरी में होने मात्र से अनुकंपा नियुक्ति से इनकार नहीं किया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
परिवार के एक सदस्य के नौकरी में होने मात्र से अनुकंपा नियुक्ति से इनकार नहीं किया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल इस आधार पर अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) से इनकार नहीं किया जा सकता कि मृत कर्मचारी के परिवार का कोई अन्य सदस्य सरकारी नौकरी में है। अदालत ने कहा कि संबंधित प्राधिकरण को पहले परिवार की वास्तविक आर्थिक स्थिति और वित्तीय संकट का आकलन करना होगा।कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति योजना का उद्देश्य मृत कर्मचारी के परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इसलिए केवल तकनीकी आधारों पर दावे खारिज करना योजना की मानवीय भावना...

बरी होने मात्र से पूरे बकाया वेतन का अधिकार नहीं मिलता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
बरी होने मात्र से पूरे बकाया वेतन का अधिकार नहीं मिलता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी कर्मचारी को आपराधिक मामले में दोषसिद्धि के आधार पर सेवा से बर्खास्त किया गया हो और बाद में वह अपील में बरी हो जाए, तो केवल बरी होने के आधार पर उसे बर्खास्तगी की अवधि का पूरा बकाया वेतन पाने का स्वतः अधिकार नहीं मिल जाता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में "काम नहीं तो वेतन नहीं" का सिद्धांत लागू होगा।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवीन्द्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह फैसला विद्युत मंडल के पूर्व कर्मचारी की अपील खारिज करते हुए...

रिटायरमेंट के करीब कर्मचारियों को सुरक्षा देने वाली पॉलिसी तब लागू नहीं होती, जब सेवा का 1 साल से ज़्यादा समय बचा हो: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
रिटायरमेंट के करीब कर्मचारियों को सुरक्षा देने वाली पॉलिसी तब लागू नहीं होती, जब सेवा का 1 साल से ज़्यादा समय बचा हो: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की चीफ़ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की डिवीज़न बेंच ने फ़ैसला दिया कि ट्रांसफर पॉलिसी का क्लॉज़ 1.6 (जो एक साल से कम सेवा वाले कर्मचारियों को ट्रांसफर से बचाता है) तब लागू नहीं होता, जब कर्मचारी के रिटायरमेंट में एक साल से ज़्यादा का समय बचा हो।पृष्ठभूमि के तथ्यअपीलकर्ता जनकपुर में वन उप-मंडल अधिकारी के तौर पर काम कर रहा था। उसे साल 2026 में रिटायर होना था। जून 2025 में उसका ट्रांसफर ज़िला संघ में उप-प्रबंध निदेशक के पद पर कर दिया गया। उसकी जगह पर एक दूसरे...

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2010 के दंतेवाड़ा नक्सली हमले में बरी किए जाने का फैसला बरकरार रखा, राज्य की खामियों वाली जांच पर दुख जताया
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2010 के दंतेवाड़ा नक्सली हमले में बरी किए जाने का फैसला बरकरार रखा, राज्य की 'खामियों वाली जांच' पर दुख जताया

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अप्रैल 2010 में दंतेवाड़ा के ताड़मेटला जंगल में हुए हमले के सभी 10 आरोपियों को बरी किए जाने का फैसला बरकरार रखा। इस हमले में CRPF के 75 जवान और राज्य पुलिस का एक जवान शहीद हो गया था।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने पुलिस द्वारा की गई जांच को "खामियों से भरी" पाया।इस मामले में की गई दोषपूर्ण जांच पर नाराजगी जताते हुए बेंच ने टिप्पणी की, “यह देखकर बहुत दुख होता है कि नक्सलियों द्वारा किए गए एक क्रूर हमले में CRPF के 75 जवानों (जिनमें...

पंचायत नियमों के तहत नियुक्त शिक्षाकर्मियों को स्कूल शिक्षा विभाग के वेतनमान का अधिकार नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
पंचायत नियमों के तहत नियुक्त शिक्षाकर्मियों को स्कूल शिक्षा विभाग के वेतनमान का अधिकार नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पंचायत विभाग के नियमों के तहत नियुक्त शिक्षाकर्मी स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षकों के समान वेतनमान या अन्य सेवा लाभ पाने के हकदार नहीं हैं।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह फैसला उन शिक्षाकर्मियों की अपील खारिज करते हुए दिया, जिन्होंने क्रमोन्नति वेतनमान का लाभ देने की मांग की थी।याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति पंचायत विभाग के अंतर्गत शिक्षाकर्मी ग्रेड-2 और ग्रेड-3 के रूप में हुई तथा उनकी सेवाएं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन...

जज की भतीजी वकील के तौर पर हुई पेश, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बेंच ने सुनवाई से खुद को अलग किया
जज की भतीजी वकील के तौर पर हुई पेश, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बेंच ने सुनवाई से खुद को अलग किया

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच ने पिछले हफ़्ते रजिस्ट्रार (ज्यूडिशियल) द्वारा चीफ़ जस्टिस के निर्देश पर जारी किए गए सर्कुलर पर कड़ी आपत्ति जताई। यह सर्कुलर सुनवाई से हटने के नियमों से जुड़ा था। बेंच ने इसे "कोर्ट के कामकाज में दखल" बताया।यह कड़ी टिप्पणी तब आई जब बेंच [जस्टिस संजय एस अग्रवाल और जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास] ने वैवाहिक अपील की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि बेंच के एक पीठासीन जज [जस्टिस अग्रवाल] की भतीजी इस मामले में वकील के तौर पर पेश हुई थी, हालांकि वह...

योग्यता-आधारित पदोन्नति में सीनियरिटी का यांत्रिक उपयोग गलत: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम फैसला
योग्यता-आधारित पदोन्नति में सीनियरिटी का यांत्रिक उपयोग गलत: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम फैसला

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पदोन्नति से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया कि “मेरिट-कम-सीनियरिटी” यानी योग्यता-सह-वरिष्ठता के सिद्धांत में पहले उम्मीदवारों की योग्यता का तुलनात्मक मूल्यांकन करना अनिवार्य है। केवल सीनियरिटी के आधार पर पदोन्नति देना कानून के विरुद्ध है।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि सीनियरिटी का उपयोग केवल तब किया जा सकता है, जब उम्मीदवारों की योग्यता वास्तव में बराबर पाई जाए, न कि बिना उचित मूल्यांकन के।मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार...

स्पेशिलाइज़्ड मेडिकल पोस्ट्स, विशेष रूप से मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में भर्ती में देरी से जनता को नुकसान: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
स्पेशिलाइज़्ड मेडिकल पोस्ट्स, विशेष रूप से मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में भर्ती में देरी से जनता को नुकसान: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने विशेषज्ञ पदों—विशेष रूप से मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में, जैसे कि MD मनोचिकित्सक—की भर्ती में हो रही अत्यधिक देरी पर खेद व्यक्त किया, जिससे नागरिकों को नुकसान पहुंच रहा है।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ छत्तीसगढ़ भर में पर्याप्त मानसिक स्वास्थ्य देखभाल बुनियादी ढांचे और सुविधाओं की कमी, तथा विशेषज्ञ पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी होने में हो रही अत्यधिक देरी से संबंधित एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी।छत्तीसगढ़ सरकार के सचिव...