छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
पंचायत नियमों के तहत नियुक्त शिक्षाकर्मियों को स्कूल शिक्षा विभाग के वेतनमान का अधिकार नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पंचायत विभाग के नियमों के तहत नियुक्त शिक्षाकर्मी स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षकों के समान वेतनमान या अन्य सेवा लाभ पाने के हकदार नहीं हैं।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह फैसला उन शिक्षाकर्मियों की अपील खारिज करते हुए दिया, जिन्होंने क्रमोन्नति वेतनमान का लाभ देने की मांग की थी।याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति पंचायत विभाग के अंतर्गत शिक्षाकर्मी ग्रेड-2 और ग्रेड-3 के रूप में हुई तथा उनकी सेवाएं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन...
जज की भतीजी वकील के तौर पर हुई पेश, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बेंच ने सुनवाई से खुद को अलग किया
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच ने पिछले हफ़्ते रजिस्ट्रार (ज्यूडिशियल) द्वारा चीफ़ जस्टिस के निर्देश पर जारी किए गए सर्कुलर पर कड़ी आपत्ति जताई। यह सर्कुलर सुनवाई से हटने के नियमों से जुड़ा था। बेंच ने इसे "कोर्ट के कामकाज में दखल" बताया।यह कड़ी टिप्पणी तब आई जब बेंच [जस्टिस संजय एस अग्रवाल और जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास] ने वैवाहिक अपील की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि बेंच के एक पीठासीन जज [जस्टिस अग्रवाल] की भतीजी इस मामले में वकील के तौर पर पेश हुई थी, हालांकि वह...
SC/ST Act में अपराध साबित करने के लिए वैध जाति प्रमाणपत्र अनिवार्य: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(r) के तहत अपराध साबित करने के लिए यह आवश्यक है कि अभियोजन यह साबित करे कि पीड़ित अनुसूचित जाति/जनजाति से संबंधित है और आरोपी उस वर्ग से नहीं है। जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास ने स्पष्ट किया कि इसके लिए वैध जाति प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य (sine qua non) है।मामला एक अपील से जुड़ा था, जिसमें शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि सरकारी जमीन पर दुकान निर्माण को लेकर विवाद के दौरान आरोपियों ने...
योग्यता-आधारित पदोन्नति में सीनियरिटी का यांत्रिक उपयोग गलत: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम फैसला
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पदोन्नति से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया कि “मेरिट-कम-सीनियरिटी” यानी योग्यता-सह-वरिष्ठता के सिद्धांत में पहले उम्मीदवारों की योग्यता का तुलनात्मक मूल्यांकन करना अनिवार्य है। केवल सीनियरिटी के आधार पर पदोन्नति देना कानून के विरुद्ध है।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि सीनियरिटी का उपयोग केवल तब किया जा सकता है, जब उम्मीदवारों की योग्यता वास्तव में बराबर पाई जाए, न कि बिना उचित मूल्यांकन के।मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार...
स्पेशिलाइज़्ड मेडिकल पोस्ट्स, विशेष रूप से मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में भर्ती में देरी से जनता को नुकसान: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने विशेषज्ञ पदों—विशेष रूप से मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में, जैसे कि MD मनोचिकित्सक—की भर्ती में हो रही अत्यधिक देरी पर खेद व्यक्त किया, जिससे नागरिकों को नुकसान पहुंच रहा है।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ छत्तीसगढ़ भर में पर्याप्त मानसिक स्वास्थ्य देखभाल बुनियादी ढांचे और सुविधाओं की कमी, तथा विशेषज्ञ पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी होने में हो रही अत्यधिक देरी से संबंधित एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी।छत्तीसगढ़ सरकार के सचिव...
NCP नेता राम अवतार जग्गी की हत्या के मामले में पूर्व CM अजीत जोगी के बेटे दोषी, हाईकोर्ट ने सुनाई आजीवन कारावास की सज़ा
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने गुरुवार (2 अप्रैल) को पूर्व विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को 2003 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता राम अवतार जग्गी की हत्या के मामले में दोषी ठहराया।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने कहा कि वह "इस साज़िश का मास्टरमाइंड, मुख्य रचयिता और इसके पीछे की मुख्य ताकत" था।कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर किसी मामले का कोई पक्ष जान-बूझकर मामले को टालने की कोशिश कर रहा हो तो वह "मूक दर्शक बनकर असहाय नहीं बैठ सकता"। कोर्ट...
चुनावी कार्य में लगे अधिकारी का बिना अनुमति ट्रांसफर अवैध: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्य में लगे अधिकारी का Election Commission of India की पूर्व अनुमति के बिना किया गया तबादला अवैध और मनमाना है।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की पीठ ने कहा कि Representation of the People Act, 1950 की धारा 13CC के तहत चुनावी कार्य में लगे अधिकारी उस अवधि में चुनाव आयोग के नियंत्रण में होते हैं, इसलिए उनका ट्रांसफर बिना अनुमति नहीं किया जा सकता।क्या था...
घर में प्रार्थना सभा पर रोक नहीं, अनुमति की जरूरत नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि किसी व्यक्ति को अपने घर में प्रार्थना सभा आयोजित करने से रोकने वाला कोई कानून नहीं है। इसके लिए किसी भी प्राधिकरण से पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है बशर्ते इससे कानून-व्यवस्था या अन्य नियमों का उल्लंघन न हो।जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए पुलिस द्वारा जारी नोटिसों को रद्द किया, जिनमें याचिकाकर्ताओं को अपने घर में ईसाई समुदाय की प्रार्थना सभा आयोजित करने से रोका गया था।अदालत ने कहा,“किसी व्यक्ति को अपने निवास स्थान...
अनिवार्य बैंक गारंटी की वैधता का पालन न करना टेंडर बिड खारिज करने का उचित आधार: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक रिट याचिका खारिज की, जिसमें एक ठेकेदार को एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) के निर्माण से जुड़ी सरकारी टेंडर प्रक्रिया से अयोग्य ठहराए जाने को चुनौती दी गई।M/s रामशरण सिंह प्रोजेक्ट्स LLP (याचिकाकर्ता 1)— जो सिविल निर्माण कार्यों में लगी है, ने WAPCOS लिमिटेड (प्रतिवादी 1), जो भारत सरकार का एक उपक्रम है, द्वारा जारी एक ई-मेल की वैधता को चुनौती दी थी। इस ई-मेल के ज़रिए कांकेर में EMRS के निर्माण के लिए 'टेंडर आमंत्रित करने की सूचना' (NIT) के जवाब में याचिकाकर्ता 1 द्वारा...
सुनने और बोलने में असमर्थ रेप पीड़िता ने गवाही के लिए प्लास्टिक की गुड़िया का इस्तेमाल किया, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दोषी की उम्रकैद की सज़ा बरकरार रखी
एक मूक-बधिर महिला के साथ रेप के मामले में व्यक्ति की सज़ा बरकरार रखते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कोई भी गवाह—जो बोल नहीं सकता, वह कोर्ट में इशारों या प्रदर्शन के तरीकों से गवाही दे सकता है। ऐसी गवाही को ठोस मौखिक सबूत माना जाएगा।मौजूदा मामले में पीड़िता—एक युवती जो जन्म से ही मूक-बधिर है—के साथ उसके एक रिश्तेदार (आरोपी) ने तब रेप किया, जब उसके माता-पिता घर पर मौजूद नहीं थे। जब पीड़िता के माता-पिता घर लौटे तो उसने इशारों के ज़रिए उन्हें घटना के बारे में बताया और आरोपी की तरफ...
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्टेट फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार की नियुक्ति रद्द की, कहा - सरकार फार्मेसी एक्ट के तहत सीधे नियुक्ति नहीं कर सकती
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार के तौर पर अश्विनी गुरदेकर की नियुक्ति रद्द की। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि फार्मेसी एक्ट, 1948 की धारा 26 के तहत रजिस्ट्रार की नियुक्ति स्टेट फार्मेसी काउंसिल द्वारा राज्य सरकार की पहले से मंज़ूरी लेकर की जानी चाहिए, न कि सीधे सरकार द्वारा।जस्टिस पार्थ प्रतीक साहू रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें 'क्वो वारंटो' (Quo Warranto) रिट जारी करने की मांग की गई। इस याचिका में प्रतिवादी नंबर 4 (अश्विनी गुरदेकर) की छत्तीसगढ़ स्टेट...
बोर्ड परीक्षा को देखते हुए हाइकोर्ट ने 12वीं के स्टूडेंट को दी जमानत
छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने 12वीं कक्षा के 19 वर्षीय स्टूडेंट को बड़ी राहत देते हुए जमानत प्रदान की, जिसे कथित तौर पर 40 लीटर देशी महुआ शराब रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।मामले के अनुसार सरायपाली क्षेत्र की पुलिस ने सूचना के आधार पर छापा मारकर उक्त मात्रा में शराब बरामद करने का दावा किया और स्टूडेंट के खिलाफ छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत मामला दर्ज किया गया।जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान स्टूडेंट की ओर से कहा गया कि उसे झूठा फंसाया गया। जिस स्थान से शराब बरामद बताई गई वह घर के...
गंभीर बीमारी से जूझ रहे कैदी की पैरोल पर जल्द फैसला करें अधिकारी: छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट, कहा- जीवन के अधिकार में समय पर इलाज भी शामिल
हाइकोर्ट ने गंभीर बीमारी से पीड़ित 68 वर्षीय कैदी की पैरोल अर्जी पर जल्द निर्णय लेने का निर्देश दिया।अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में समय पर और उचित मेडिकल ट्रीटमेंट का अधिकार भी शामिल है।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसे जेल में सजा काट रहे एक कैदी ने दायर किया। याचिका में बताया गया कि वह गैंग्रीन नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित है।मामले में प्रस्तुत मेडिकल दस्तावेजों के अनुसार कैदी के पैर की एक उंगली...
बच्चों की करंट से मौत के मामलों पर राज्य की कार्रवाई के बाद स्वतः संज्ञान जनहित याचिका बंद: छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने बच्चों की करंट लगने से हुई मौतों से जुड़े मामलों पर स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई जनहित याचिका को राज्य सरकार की प्रभावी कार्रवाई के बाद अभिलेखों में दर्ज करते हुए बंद किया।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह स्वतः संज्ञान जनहित याचिका वर्ष 2025 में दो चिंताजनक समाचारों के आधार पर शुरू की थी जिनमें बच्चों की करंट लगने से मौत की घटनाएं सामने आईं।पहला मामला कोंडागांव जिले का है, जहां ढाई साल के एक बच्चे की आंगनवाड़ी केंद्र के अंदर खुले...
आपराधिक प्रक्रिया को उत्पीड़न का हथियार नहीं बनाया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने पूर्व चीफ जस्टिस व जजों के खिलाफ शिकायत रद्द की
छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने एक अहम फैसले में पूर्व चीफ जस्टिस, एक वर्तमान हाइकोर्ट जस्टिस और राज्य की उच्च न्यायिक सेवा के कई अधिकारियों के खिलाफ दायर आपराधिक शिकायत रद्द की। अदालत ने कहा कि केवल आशंका और अनुमान के आधार पर न्यायपालिका के सदस्यों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही चलने देना न्यायिक संस्थाओं की गरिमा को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बिभु दत्त गुरु की खंडपीठ ने कहा कि आपराधिक कानून का इस्तेमाल किसी को परेशान करने, डराने या व्यक्तिगत अथवा सेवा संबंधी शिकायतों...
PHD के लिए अध्ययन अवकाश अधिकार नहीं: छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने व्याख्याता की अपील खारिज की
छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी कर्मचारियों को उच्च शिक्षा के लिए अध्ययन अवकाश देना उनका अधिकार नहीं है बल्कि यह नियोक्ता के विवेक पर निर्भर करता है। इसी सिद्धांत को दोहराते हुए हाइकोर्ट ने गणित के एक व्याख्याता की अपील खारिज की, जिसमें उन्होंने PHD करने के लिए अध्ययन अवकाश की मांग की।मामला एक सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज में कार्यरत गणित लेक्चरार से जुड़ा है, जिन्होंने Phd करने के लिए कॉलेज के प्राचार्य के माध्यम से अनुमति मांगी थी। प्राचार्य ने उनका आवेदन कौशल विकास विभाग के सचिव को...
अनुसूचित जनजाति का व्यक्ति चाहे तो हिंदू विवाह अधिनियम के तहत अदालत आ सकता है: छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि यदि अनुसूचित जनजाति (एसटी) का कोई व्यक्ति स्वेच्छा से हिंदू रीति-रिवाज, परंपराएं और संस्कार अपनाता है तथा हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत अदालत के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार करता है, तो उसे केवल इस आधार पर अधिनियम के दायरे से बाहर नहीं किया जा सकता कि इस कानून की धारा 2(2) सामान्यतः एसटी समुदाय पर लागू नहीं होती।जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने यह स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि जनजातीय समुदाय का कोई सदस्य स्वयं...
यह उत्पीड़न का रूप: सरकारी स्कूलों में बालिकाओं के शौचालयों की कमी पर छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट सख्त, शिक्षा सचिव से मांगा हलफनामा
छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने राज्य के सरकारी विद्यालयों में बालिकाओं के लिए शौचालयों की गंभीर कमी और उनकी दयनीय स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। अदालत ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को इस संबंध में व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ वर्ष 2025 में दायर जनहित याचिका की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान हिंदी दैनिक में प्रकाशित हालिया समाचार का संज्ञान लिया गया, जिसमें राज्यभर के स्कूलों में बालिकाओं के शौचालयों की भारी कमी और उनकी...
बिना इजाज़त स्कूल कैंपस में घुसना IPC के तहत 'घर में घुसना' माना जा सकता है: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि स्कूल कैंपस को 'प्रॉपर्टी की कस्टडी की जगह' माना जा सकता है, जहां स्कूल का फ़र्नीचर और एजुकेशनल एसेट्स रखे जाते हैं। इसलिए यह इंडियन पैनल कोड (IPC) के तहत घर में घुसने का अपराध बन सकता है।जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल ने IPC की धारा 452 (चोट, हमला या गलत तरीके से रोकने की तैयारी के बाद घर में घुसना); धारा 442 (घर में घुसने की परिभाषा) और धारा 441 (क्रिमिनल ट्रेसपास) और समझाया,“इन तीनों धाराओं को मिलाकर पढ़ने से यह साफ पता चलता है कि जो कोई भी किसी बिल्डिंग, टेंट या...
'पेनिस को वजाइना के ऊपर रखना, बिना पेनिट्रेशन के इजैक्युलेट करना रेप नहीं': छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रेप की सज़ा बदली
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सोमवार (16 फरवरी) को कहा कि मेल ऑर्गन को वजाइना के ऊपर रखना और फिर बिना पेनिट्रेशन के इजैक्युलेट करना इंडियन पैनल कोड (IPC) की धारा 375 के तहत 'रेप' नहीं कहा जा सकता, बल्कि यह 'रेप की कोशिश' है और IPC की धारा 376/511 के तहत सज़ा होगी।रेप की सज़ा को रेप की कोशिश में बदलते हुए जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की बेंच ने कहा,“अश्लील हमले को अक्सर रेप की कोशिश में बदल दिया जाता है। इस नतीजे पर पहुंचने के लिए कि आरोपी का बर्ताव हर हाल में, और हर तरह के विरोध के बावजूद, अपने जुनून को...














