छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

धारा 498A के मामले में पति का बरी होना यह साबित नहीं करता कि पत्नी ने झूठे क्रूरता के आरोप लगाए: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A के तहत दर्ज आपराधिक मामले में पति के बरी होने मात्र से यह साबित नहीं होता कि पत्नी द्वारा लगाए गए क्रूरता के आरोप झूठे थे। वैवाहिक विवाद में क्रूरता हुई या नहीं, इसका निर्धारण वैवाहिक कार्यवाही में उपलब्ध समस्त साक्ष्यों की समग्र जांच के आधार पर किया जाना चाहिए।जस्टिस पार्थ प्रीतीम साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की खंडपीठ पति की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने तलाक की मांग वाली याचिका खारिज करने के फैमिली कोर्ट के फैसले को...

RTI आवेदन के समय संबंधित विभाग में तैनात नहीं थे तो देरी के लिए अधिकारी जिम्मेदार नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 25 हजार रुपये का जुर्माना रद्द किया
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सूचना का अधिकार (RTI Act) के तहत दो तहसीलदारों पर लगाया गया 25 हजार रुपये का जुर्माना रद्द किया। कोर्ट ने कहा कि जब RTI आवेदन दाखिल किए जाने और प्रथम अपील के समय दोनों अधिकारी संबंधित तहसील में तैनात ही नहीं थे तो सूचना देने में देरी के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने यह भी पाया कि राज्य सूचना आयोग ने अधिकारियों के जवाबों पर विचार किए बिना आदेश पारित किया था।जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद इस याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के...

ट्रायल कोर्ट में मांग और सबूत नहीं तो अपील में पहली बार स्थायी गुजारा भत्ता तय नहीं कर सकते: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि यदि ट्रायल कोर्ट के समक्ष स्थायी गुजारा भत्ता यानी परमानेंट एलिमनी की कोई मांग नहीं की गई और उसके समर्थन में कोई साक्ष्य भी पेश नहीं किया गया, तो अपीलीय अदालत पहली बार अपील के स्तर पर इस दावे का फैसला नहीं कर सकती। कोर्ट ने कहा कि स्थायी गुजारा भत्ते की राशि तय करते समय संबंधित परिस्थितियों पर उचित तरीके से विचार किया जाना जरूरी है।जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की डिवीजन बेंच पत्नी की ओर से दाखिल अपील पर सुनवाई कर रही थी। फैमिली कोर्ट ने पति की ओर से...

नर्सिंग होम को सील करने का अधिकार नगर निगम के पास नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कार्रवाई रद्द की
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि छत्तीसगढ़ नर्सिंग होम अधिनियम और उसके नियमों के तहत नगर निगम को किसी नर्सिंग होम को सील करने का वैधानिक अधिकार नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि क्लिनिकल संस्थानों के नियमन और निगरानी का अधिकार जिला कलेक्टर में निहित है और नगर निगम आयुक्त के पास नर्सिंग होम के खिलाफ ऐसी कार्रवाई करने की वैधानिक शक्ति नहीं है।जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने नगर निगम आयुक्त की ओर से जारी उस नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की, जिसके आधार पर याचिकाकर्ता के नर्सिंग होम को कथित...

बिना रजिस्ट्रेशन वाले 'रिलीन्क्विशमेंट डीड' से मालिकाना हक ट्रांसफर नहीं हो सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि अचल संपत्ति का मालिकाना हक ट्रांसफर करने वाले 'रिलीन्क्विशमेंट डीड' का रजिस्ट्रेशन होना ज़रूरी है। बिना रजिस्ट्रेशन वाला 'रिलीन्क्विशमेंट डीड' मालिकाना हक ट्रांसफर नहीं कर सकता, भले ही उसे गवाहों की मौजूदगी में बनाया गया हो।कोर्ट ने इसी आधार पर रेवेन्यू बोर्ड के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की। रेवेन्यू बोर्ड ने बिना रजिस्ट्रेशन वाले 'रिलीन्क्विशमेंट डीड' के आधार पर किए गए म्यूटेशन (नाम बदलने की प्रक्रिया) रद्द करने का फैसला सही ठहराया था। जस्टिस रवींद्र...

सिर्फ ससुराल जाकर पत्नी को वापस आने को कहना पर्याप्त नहीं, उचित कारण से अलग रहने का अधिकार: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि केवल पति का बार-बार पत्नी के मायके जाना या वैवाहिक साथ फिर शुरू करने की इच्छा जताते हुए कानूनी नोटिस भेजना इस बात का प्रमाण नहीं है कि पत्नी बिना उचित कारण के पति से अलग रह रही थी।जस्टिस पार्थ प्रीतम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की खंडपीठ ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (Hindu Marriage Act) की धारा 9 के तहत पति की ओर से दायर याचिका खारिज करने वाला फैमिली कोर्ट का फैसला बरकरार रखते हुए यह टिप्पणी की।मामले में पति का कहना था कि पत्नी की मां की तबीयत खराब होने की सूचना...

पत्नी का पति को "सांवले रंग का" या "मोटे शरीर वाला" कहना तलाक देने के लिए काफ़ी नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी का पति को "सांवले रंग का" या "मोटे शरीर वाला" कहना, अकेले तलाक देने का आधार नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा कि बिना किसी सबूत के सिर्फ़ आरोप लगाने से तलाक नहीं दिया जा सकता।जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की बेंच पति द्वारा दायर एक अपील पर सुनवाई कर रही थी। यह अपील फ़ैमिली कोर्ट एक्ट, 1984 की धारा 19 (1) के तहत दायर की गई, जिसमें पति ने हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 की धारा 13 के तहत तलाक की अर्ज़ी खारिज करने वाले फ़ैमिली कोर्ट के फ़ैसले को चुनौती दी...

एससी आयोग आपराधिक आरोप तय या अपराध साबित घोषित नहीं कर सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य अनुसूचित जाति आयोग किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक आरोप को साबित घोषित नहीं कर सकता और न ही इस आधार पर FIR दर्ज करने की सिफारिश कर सकता है कि संबंधित अपराध अदालत में साबित हो चुका है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी अपराध के साबित होने का निर्धारण आपराधिक अदालत के अधिकार क्षेत्र में आता है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।याचिका में राज्य अनुसूचित जाति आयोग के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें आयोग ने याचिकाकर्ता के खिलाफ...

शादीशुदा बेटी मां का लंबित मुआवजा दावा आगे नहीं बढ़ा सकती: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम, 1923 के तहत शादीशुदा बेटी उस लंबित मुआवजा दावे को आगे नहीं बढ़ा सकती, जो उसकी मां ने अपने पति की मौत के बाद दाखिल किया था। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अधिनियम की धारा 2(1)(डी) के तहत शादीशुदा बेटी को 'आश्रित' नहीं माना गया।जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की पीठ ऐसे मामले की सुनवाई कर रही ,थी जिसमें कर्मचारी की विधवा ने अपने पति की कार्यस्थल पर हुई मौत के बाद मुआवजे का दावा किया। 26 अप्रैल 2015 को कारखाने की...

RTI Act: किसी तीसरे पक्ष की प्राइवेसी का मामला न हो तो बचाव के लिए मांगी गई जांच की जानकारी देने से मना नहीं किया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की बेंच ने कहा कि RTI Act की धारा 8(1)(c) और 8(1)(j) के तहत जानकारी देने से मना करना तब सही नहीं है, जब मांगी गई जानकारी याचिकाकर्ता की अपनी विभागीय जांच से जुड़ी हो और बचाव के लिए मांगी गई हो, और इसमें किसी तीसरे पक्ष की प्राइवेसी का मामला न हो।पृष्ठभूमि की जानकारीयाचिकाकर्ता जांजगीर के फैमिली कोर्ट में ड्राइवर के तौर पर काम कर रहा था। कुछ आरोपों के चलते याचिकाकर्ता के खिलाफ दो विभागीय जांच शुरू की गईं। उस पर गलत व्यवहार के सात आरोप लगाए गए।...

निजी शरिया संस्था मुस्लिम महिला का तलाक या वैवाहिक स्थिति तय नहीं कर सकती: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि खुद को 'इदारा-ए-शरिया इस्लामी कोर्ट' कहने वाली कोई निजी धार्मिक संस्था किसी व्यक्ति की वैवाहिक स्थिति या उसके कानूनी अधिकारों और दायित्वों का फैसला नहीं कर सकती।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धार्मिक आस्था किसी निजी संस्था को अदालत की तरह कानूनी स्थिति तय करने का अधिकार नहीं देती। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने एक मुस्लिम महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।महिला ने 18 जनवरी 2022 को इदारा-ए-शरिया इस्लामी कोर्ट की ओर से जारी उस आदेश को...

पदोन्नति के लिए सेवा अवधि नियुक्ति की तारीख से नहीं, संबंधित कैलेंडर वर्ष से गिनी जाएगी: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पदोन्नति के लिए निर्धारित सेवा अवधि की गणना को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि पात्रता सेवा की गणना संबंधित संवर्ग में नियुक्ति की वास्तविक तारीख से नहीं, बल्कि उस कैलेंडर वर्ष से की जाएगी, जिसमें कर्मचारी ने पदोन्नति के लिए निर्धारित मूल संवर्ग में प्रवेश किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ लोक सेवाएं (पदोन्नति) नियम, 2003 के नियम 6(2) में सेवा अवधि की गणना के लिए कैलेंडर वर्ष को आधार बनाया गया।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने...

पिछड़ा वर्ग आयोग निजी कारोबारी विवाद में वसूली का आदेश नहीं दे सकता, सिफारिश का नाम देने से अधिकार क्षेत्र नहीं बदलता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग दो निजी पक्षकारों के बीच कारोबारी विवाद का फैसला नहीं कर सकता और न ही एक निजी पक्ष से तय रकम की वसूली कर दूसरे निजी पक्ष को भुगतान करने का निर्देश दे सकता है। अदालत ने कहा कि किसी आदेश को महज 'सिफारिश' कह देने से उसका वास्तविक स्वरूप नहीं बदल जाता।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच एक इंट्रा-कोर्ट अपील पर सुनवाई कर रही थी। अपील एकल पीठ के 17 जून 2026 के आदेश के खिलाफ दायर की गई, जिसके जरिए छत्तीसगढ़...

एग्जीक्यूटिंग कोर्ट फ़ाइनल डिक्री में शामिल न की गई पिछली सैलरी नहीं दे सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि एग्जीक्यूटिंग कोर्ट डिक्री से आगे नहीं जा सकता और पिछली सैलरी (बैक वेजेज़) नहीं दे सकता, अगर उस फ़ैसले और डिक्री में ऐसी कोई राहत नहीं दी गई, जिसे लागू किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि एग्जीक्यूटिंग कोर्ट के पास न तो डिक्री को समझाने का अधिकार है और न ही उससे आगे जाने का अधिकार क्षेत्र।जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) कमांडेंट की रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इसमें एग्जीक्यूटिंग कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें...

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कथित शराब घोटाले से जुड़े कैश ट्रेल मामले में वेस्टिन होटल की ₹110 करोड़ की संपत्ति ज़ब्त करने का फ़ैसला बरकरार रखा
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गोवा के होटल वेस्टिन को ₹110 करोड़ तक अस्थायी रूप से ज़ब्त करने के मामले में दखल देने से इनकार किया। याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने साफ़ किया कि उसने संबंधित आरोपों पर कोई अंतिम फ़ैसला नहीं लिया है और ऐसे सवालों की जांच कानून के तहत तय कानूनी प्रक्रिया के ज़रिए की जानी चाहिए।चीफ़ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीज़न बेंच, प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 की धारा 5(1) के तहत 28 मई, 2026 को जारी अस्थायी ज़ब्ती आदेश...

धारा 498ए में बरी होने से घरेलू हिंसा कानून के तहत कार्रवाई पर रोक नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए और घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 की धारा 12 अलग-अलग क्षेत्रों में काम करती हैं और दोनों का उद्देश्य भी अलग है। इसलिए धारा 498ए के मामले में बरी हो जाने मात्र से महिला को घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत शिकायत दाखिल करने से नहीं रोका जा सकता।जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास ने यह टिप्पणी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए की। याचिका में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के...

ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे का भरण-पोषण 18 साल पूरे होते ही बंद नहीं होगा, आत्मनिर्भर होने तक मिल सकता है: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि शारीरिक या मानसिक विकलांगता अथवा असामान्यता से पीड़ित और अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ बच्चे के मामले में केवल 18 वर्ष की आयु पूरी हो जाने से भरण-पोषण पाने का अधिकार स्वतः समाप्त नहीं हो सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि असली कसौटी यह होगी कि बालिग होने के बाद संबंधित व्यक्ति अपना भरण-पोषण करने और आजीविका कमाने में सक्षम है या नहीं।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एक आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। यह याचिका फैमिली कोर्ट, दुर्ग के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई, जिसमें...

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट: महिला आयोग कर्मचारी की सेवा शर्तों को प्रभावित करने वाले बाध्यकारी निर्देश नहीं दे सकता
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि राज्य महिला आयोग महिलाओं के अधिकारों से वंचित किए जाने से जुड़ी शिकायतें प्राप्त कर सकता है, लेकिन किसी कर्मचारी की सेवा शर्तों को प्रभावित करने वाले बाध्यकारी निर्देश जारी नहीं कर सकता। आयोग का अधिकार क्षेत्र केवल शिकायतों पर उचित कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को सिफारिश करने और सुविधा प्रदान करने तक सीमित है।जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की पीठ एक सरकारी स्कूल के प्राचार्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग...

बिना धोखे या बेईमानी से उकसाए वैवाहिक स्थिति न बताना IPC की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि वैवाहिक स्थिति से जुड़ी अहम जानकारी न बताने के सिर्फ़ आरोपों से - जब तक कि उसमें धोखा देने और बेईमानी से उकसाने जैसी ज़रूरी बातें शामिल न हों - IPC की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का अपराध नहीं बनता। कोर्ट ने कहा कि जिन अपराधों का आरोप लगाया गया, अगर उनके लिए ज़रूरी तत्व मौजूद नहीं हैं तो आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कोर्ट की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका ज्यूडिशियल...

बेटे का सीनियर सिटीजन होना 93 वर्षीय मां के घर पर कब्जे का अधिकार नहीं देता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी व्यक्ति का स्वयं सीनियर सिटीजन होना उसे किसी अन्य सीनियर सिटीजन की इच्छा के विरुद्ध उसके घर में रहने का असीमित अधिकार नहीं देता। कोर्ट ने कहा कि माता-पिता और सीनियर सिटीजन के भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को उपेक्षा, दुर्व्यवहार और उत्पीड़न से सुरक्षा देना है।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती देने वाली अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।...
