छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

गलत वेतन निर्धारण से मिली अतिरिक्त राशि की वसूली कक्षा-3 और कक्षा-4 कर्मचारियों से नहीं की जा सकती, सहमति देने पर भी नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
गलत वेतन निर्धारण से मिली अतिरिक्त राशि की वसूली कक्षा-3 और कक्षा-4 कर्मचारियों से नहीं की जा सकती, सहमति देने पर भी नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि गलत वेतन निर्धारण के कारण कर्मचारी को मिली अतिरिक्त राशि की वसूली कक्षा-3 और कक्षा-4 के कर्मचारियों से नहीं की जा सकती, भले ही कर्मचारी ने राशि वापस करने के लिए सहमति पत्र या शपथपत्र दिया हो।जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने रिटायर उप निरीक्षक द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ता ने वेतन के गलत निर्धारण के कारण अधिक भुगतान बताकर उससे वसूली गई 6,26,104 रुपये की राशि वापस करने की मांग की थी।याचिकाकर्ता का कहना था कि...

स्वैच्छिक सहयोग के नाम पर किसी व्यक्ति को पुलिस हिरासत में नहीं रखा जा सकता, यह Article 22 का उल्लंघन: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
'स्वैच्छिक सहयोग' के नाम पर किसी व्यक्ति को पुलिस हिरासत में नहीं रखा जा सकता, यह Article 22 का उल्लंघन: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि जांच एजेंसियां "स्वैच्छिक सहयोग (Voluntary Cooperation)" के नाम पर किसी व्यक्ति को अपनी हिरासत में रखकर गिरफ्तारी से जुड़े संवैधानिक सुरक्षा उपायों को दरकिनार नहीं कर सकतीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस के नियंत्रण में आने के बाद किसी नोटिस पर यह लिखवा लेना कि व्यक्ति स्वेच्छा से साथ जा रहा है, वास्तविक सहमति (Genuine Consent) का प्रमाण नहीं माना जा सकता।चीफ़ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने साइबर फ्रॉड मामले में एक व्यक्ति की...

डॉ. बी.आर. आंबेडकर पर आपत्तिजनक Instagram पोस्ट मामले में FIR रद्द करने से इनकार, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा- ट्रायल से पहले तथ्यों की जांच नहीं की जा सकती
डॉ. बी.आर. आंबेडकर पर आपत्तिजनक Instagram पोस्ट मामले में FIR रद्द करने से इनकार, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा- ट्रायल से पहले तथ्यों की जांच नहीं की जा सकती

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी Instagram पर पोस्ट करने की आरोपी महिला के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि चार्जशीट में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया (Prima Facie) संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) का खुलासा करते हैं, इसलिए इस स्तर पर कार्यवाही में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।चीफ़ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका को खारिज करते हुए की, जिसमें FIR और SC/ST...

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दहेज की मांग के कारण गर्भवती पत्नी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोपी पति को ज़मानत देने से इनकार किया
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दहेज की मांग के कारण गर्भवती पत्नी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोपी पति को ज़मानत देने से इनकार किया

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उस पति को रेगुलर ज़मानत देने से इनकार किया, जिस पर दहेज की मांग को लेकर अपनी पत्नी को लगातार शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और अंततः उसे आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि ज़मानत अर्ज़ी पर विचार करते समय FIR दर्ज करने में देरी और गवाहों के बयानों में कथित विसंगतियों जैसे मुद्दे ट्रायल के दौरान देखे जाने वाले मामले हैं और उन पर अभी पक्के तौर पर विचार नहीं किया जा सकता।चीफ़ जस्टिस रमेश सिन्हा, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 483...

सोशल मीडिया वीडियो की सत्यता साबित किए बिना विभागीय कार्रवाई नहीं हो सकती: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
सोशल मीडिया वीडियो की सत्यता साबित किए बिना विभागीय कार्रवाई नहीं हो सकती: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी विभागीय जांच (Departmental Enquiry) के निष्कर्ष केवल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो पर आधारित हों और उस वीडियो का स्रोत, प्रामाणिकता तथा कानूनी रूप से प्रमाणित होने का तरीका स्थापित न किया गया हो, तो ऐसे निष्कर्ष टिक नहीं सकते।चीफ़ रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए जेल प्रहरी (Prison Guard) को सेवा से हटाने का आदेश रद्द करने वाले एकलपीठ के फैसले को बरकरार रखा।मामले में जेल प्रहरी पर आरोप था कि वह...

NEET OMR शीट से छेड़छाड़ के आरोप गंभीर, इन्हें सिर्फ़ उम्मीदवार के शक के आधार पर नहीं माना जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
NEET OMR शीट से छेड़छाड़ के आरोप 'गंभीर', इन्हें सिर्फ़ उम्मीदवार के शक के आधार पर नहीं माना जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि NEET उम्मीदवार की OMR शीट से छेड़छाड़ के आरोप गंभीर हैं और ठोस सबूत के बिना, सिर्फ़ शक, अंदाज़े या अपनी सोच के आधार पर इन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर यह साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है कि तय तरीका उपलब्ध नहीं था या बेकार था, तो कोई उम्मीदवार परीक्षा लेने वाली संस्था की शिकायत निवारण प्रक्रिया को नज़रअंदाज़ करके सीधे अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट के रिट अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं कर सकता।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र...

भारतीय सेना और पैरामिलिट्री फ़ोर्स के ख़िलाफ़ Facebook पोस्ट करने पर CISF कॉन्स्टेबल की सैलरी में कटौती की सज़ा सही: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
भारतीय सेना और पैरामिलिट्री फ़ोर्स के ख़िलाफ़ Facebook पोस्ट करने पर CISF कॉन्स्टेबल की सैलरी में कटौती की सज़ा सही: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भारतीय सेना और पैरामिलिट्री फ़ोर्स के ख़िलाफ़ Facebook पर आपत्तिजनक कंटेंट पोस्ट करने के लिए CISF कॉन्स्टेबल पर लगाई गई सैलरी में कटौती की सज़ा को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि यह सज़ा दुर्व्यवहार के हिसाब से सही थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि संविधान के आर्टिकल 226 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए, वह तब तक दखल नहीं दे सकता जब तक कि जांच में कोई प्रक्रियात्मक गड़बड़ी न हो या सज़ा बहुत ज़्यादा या अनुचित न हो।जस्टिस राकेश मोहन पांडे एक CISF कॉन्स्टेबल द्वारा दायर रिट...

बार एसोसिएशन की शोकसभा के नाम पर पूरे दिन सभी मामलों की सुनवाई टालना उचित नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
बार एसोसिएशन की शोकसभा के नाम पर पूरे दिन सभी मामलों की सुनवाई टालना उचित नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि बार एसोसिएशन की ओर से शोकसभा आयोजित किए जाने के आधार पर पूरे दिन सभी मामलों की सुनवाई स्थगित नहीं की जा सकती। कोर्ट ने कहा कि दिवंगत अधिवक्ता या न्यायिक अधिकारी को श्रद्धांजलि देना संस्थागत परंपरा का हिस्सा है, लेकिन इसके नाम पर पूरे दिन न्यायिक कार्य रोकना न्याय व्यवस्था को प्रभावित करता है।जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल ने यह टिप्पणी एक 72 वर्षीय मकान मालिक की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। याचिकाकर्ता ने रायपुर के किराया नियंत्रक के उस...

जांच पूरी होने के बावजूद 1.45 लाख मामले क्लोजर रिपोर्ट के बिना लंबित: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने DGP से मांगा जवाब
'जांच पूरी होने के बावजूद 1.45 लाख मामले क्लोजर रिपोर्ट के बिना लंबित': छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने DGP से मांगा जवाब

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को उन मामलों पर अपडेटेड स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया, जिनकी जांच तो पूरी हो चुकी है, लेकिन सक्षम अदालतों में अभी तक क्लोजर रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई। कोर्ट ने गौर किया कि बैकलॉग में कमी के बावजूद, ऐसे 1.45 लाख से ज़्यादा मामले अभी भी लंबित हैं।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच योगेंद्र बाबू शर्मा द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने रायपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) को निर्देश...

ज़मानत बॉन्ड भरने के बाद भी व्यक्ति को जेल में रखा गया: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गैर-कानूनी हिरासत के लिए दिया ₹25,000 का मुआवज़ा
ज़मानत बॉन्ड भरने के बाद भी व्यक्ति को जेल में रखा गया: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गैर-कानूनी हिरासत के लिए दिया ₹25,000 का मुआवज़ा

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति को ₹25,000 का मुआवज़ा देने का आदेश दिया। इस व्यक्ति के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत आज़ादी के अधिकार का उल्लंघन हुआ था, क्योंकि एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के निर्देशानुसार ज़मानत बॉन्ड भरने के बावजूद उसे न्यायिक हिरासत में रखा गया। कोर्ट ने कहा कि जिस व्यक्ति को केवल शक के आधार पर गिरफ्तार किया गया हो और जिस पर कोई संज्ञेय (cognizable) या गैर-ज़मानती अपराध का आरोप न हो, उसे न्यायिक हिरासत में नहीं भेजा जा सकता और उसे कानून के अनुसार ज़मानत पर रिहा...

धमकी या दबाव में दिए गए इस्तीफे को बिना जांच स्वीकार नहीं किया जा सकता : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
धमकी या दबाव में दिए गए इस्तीफे को बिना जांच स्वीकार नहीं किया जा सकता : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि किसी कर्मचारी ने अपने इस्तीफे में स्पष्ट रूप से लिखा है कि वह धमकी या दबाव में इस्तीफा दे रहा है तो नियोक्ता का यह कानूनी दायित्व है कि वह पहले यह सुनिश्चित करे कि इस्तीफा वास्तव में स्वेच्छा से दिया गया है या नहीं। बिना किसी जांच या सत्यापन के ऐसे इस्तीफे को स्वीकार करना कानून की दृष्टि में टिकाऊ नहीं माना जा सकता।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवीन्द्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ चौकसे इंजीनियरिंग कॉलेज की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी,...

शादी से इनकार करने पर लगातार पीछा करना और जान से मारने की धमकी देना आत्महत्या के लिए उकसाने जैसा: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
शादी से इनकार करने पर लगातार पीछा करना और जान से मारने की धमकी देना आत्महत्या के लिए उकसाने जैसा: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि शादी से इनकार करने पर लगातार पीछा करना, परेशान करना, शादी के लिए दबाव डालना और बार-बार जान से मारने की धमकी देना, आत्महत्या के लिए उकसाने का एक "सक्रिय कार्य" (positive act) है, जो IPC की धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध बनाता है। कोर्ट ने पाया कि आरोपी का व्यवहार साफ तौर पर लगातार उकसाने वाला था, न कि सिर्फ़ परेशान करने वाली अलग-अलग घटनाएं।जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास उस अपील पर सुनवाई कर रहे थे, जो राज्य सरकार ने प्रतिवादी को बरी किए जाने के खिलाफ़...

पिता की मौत के बाद शादीशुदा महिला अनुकंपा नियुक्ति का दावा कर सकती है: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
पिता की मौत के बाद शादीशुदा महिला 'अनुकंपा नियुक्ति' का दावा कर सकती है: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि किसी शादीशुदा बेटी को सिर्फ़ इस अनुमान के आधार पर 'दया के आधार पर नौकरी' के लिए विचार करने से मना नहीं किया जा सकता कि वह अपने पति पर निर्भर है, न कि अपने दिवंगत पिता पर। कोर्ट ने कहा कि निर्भरता एक तथ्य का सवाल है, जिसे हर मामले में सबूतों के आधार पर तय किया जाना चाहिए। साथ ही वैवाहिक स्थिति (शादीशुदा होना) अपने आप में किसी शादीशुदा बेटी को विचार के दायरे से बाहर करने का सही आधार नहीं हो सकती, जब तक कि लागू नीति में उसे स्पष्ट रूप से मना न किया गया हो।जस्टिस संजय...

पदोन्नति नीति के अभाव में कर्मचारियों को हमेशा के लिए स्थिर स्थिति में नहीं छोड़ा जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
पदोन्नति नीति के अभाव में कर्मचारियों को हमेशा के लिए स्थिर स्थिति में नहीं छोड़ा जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने माना कि पदोन्नति के किसी भी अवसर के अभाव के परिणामस्वरूप कैडर का स्थायी ठहराव मनमाना है और संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा कि छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग गैर-लिपिकीय पैरामेडिकल और नर्सिंग (निदेशालय स्वास्थ्य सेवा) वर्ग-III भर्ती नियम, 2013, नेत्र सहायकों के लिए कोई प्रचार चैनल प्रदान नहीं करता।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ नेत्र रोग सहायकों द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिन्हें सीधी...

RTI Act | धारा 5 की शर्तें पूरी किए बिना फर्स्ट अपीलेट अथॉरिटी को डीम्ड पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर नहीं माना जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
RTI Act | धारा 5 की शर्तें पूरी किए बिना 'फर्स्ट अपीलेट अथॉरिटी' को 'डीम्ड पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर' नहीं माना जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act) के तहत 'फर्स्ट अपीलेट अथॉरिटी' (प्रथम अपीलीय प्राधिकारी) को धारा 5(4) और 5(5) में बताई गई कानूनी शर्तों को पूरा किए बिना 'डीम्ड पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर' (मानित जन सूचना अधिकारी) नहीं माना जा सकता और न ही उन पर अधिनियम की धारा 20(1) के तहत जुर्माना लगाया जा सकता है। कोर्ट ने पाया कि राज्य सूचना आयोग ने ज़रूरी निष्कर्ष दर्ज किए बिना ही जुर्माना लगा दिया था। [2026 LiveLaw (Chh) 75]जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद 'फर्स्ट अपीलेट...

पत्नी द्वारा तलाक की सहमति के लिए ₹2 करोड़ की मांगना, साथ रहने से इनकार करना मानसिक क्रूरता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
पत्नी द्वारा तलाक की सहमति के लिए ₹2 करोड़ की मांगना, साथ रहने से इनकार करना मानसिक क्रूरता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मानसिक क्रूरता के आधार पर तलाक का फैसला बरकरार रखा, जिसमें कहा गया कि एक पति या पत्नी जो सहवास फिर से शुरू करने से लगातार इनकार करता है, दूसरे पति या पत्नी को वैवाहिक सहयोग और संघ से वंचित करता है, और तलाक के लिए सहमति देने की शर्त के रूप में ₹2 करोड़ की अत्यधिक एकमुश्त राशि की मांग करता है, वह दूसरे पति या पत्नी को मानसिक क्रूरता का शिकार बनाता है। [2026 लाइवलॉ (छ.ग.)74]चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ पत्नी द्वारा दायर वैवाहिक अपील पर...

ज़मीन के विवाद में प्राइवेट प्रतिवादियों के कहने पर तहसीलदार दस्तावेज़ पेश करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
ज़मीन के विवाद में प्राइवेट प्रतिवादियों के कहने पर तहसीलदार दस्तावेज़ पेश करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि छत्तीसगढ़ लैंड रेवेन्यू कोड के तहत तहसीलदार के पास किसी प्राइवेट प्रतिवादी की अर्ज़ी पर किसी पक्ष को दस्तावेज़ पेश करने के लिए मजबूर करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि ज़्यादा से ज़्यादा, तहसीलदार दस्तावेज़ पेश न करने पर किसी पक्ष के ख़िलाफ़ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाल सकता है, लेकिन उनकी मर्ज़ी के बिना उन्हें दस्तावेज़ पेश करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। [2026 LiveLaw (Chh) 72]जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें एडिशनल कलेक्टर के...

मोटर दुर्घटना के दावों में उम्र के सबूत के तौर पर आधार कार्ड पर भरोसा नहीं किया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
मोटर दुर्घटना के दावों में उम्र के सबूत के तौर पर आधार कार्ड पर भरोसा नहीं किया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि मोटर दुर्घटना में मुआवज़े के मामलों में दावा करने वाले की उम्र तय करने के लिए आधार कार्ड भरोसेमंद दस्तावेज़ नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ़ इंश्योरेंस प्रीमियम मिलने से ही इंश्योरेंस कंपनी की ज़िम्मेदारी तय नहीं हो जाती, क्योंकि इंश्योरेंस का कॉन्ट्रैक्ट पॉलिसी में बताई गई तारीख और समय से शुरू होता है, न कि प्रीमियम मिलने की तारीख से।जस्टिस सचिन सिंह राजपूत एक सड़क दुर्घटना से जुड़े तीन मामलों की सुनवाई कर रहे थे। इस दुर्घटना में दो लोगों की मौत हो गई और एक...

लोक सूचना अधिकारी पर जुर्माना लगाने से पहले अलग नोटिस देना अनिवार्य, अपील का नोटिस पर्याप्त नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
लोक सूचना अधिकारी पर जुर्माना लगाने से पहले अलग नोटिस देना अनिवार्य, अपील का नोटिस पर्याप्त नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act) के तहत किसी लोक सूचना अधिकारी पर जुर्माना लगाने से पहले राज्य सूचना आयोग के लिए धारा 20(1) के तहत अलग से नोटिस जारी करना और सुनवाई का उचित अवसर देना अनिवार्य है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अपील की कार्यवाही के दौरान जारी नोटिस को अंतिम नोटिस मानकर सीधे जुर्माना नहीं लगाया जा सकता।जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद एक लोक सूचना अधिकारी की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। याचिका में छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के उस...