छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

अनिवार्य बैंक गारंटी की वैधता का पालन न करना टेंडर बिड खारिज करने का उचित आधार: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
अनिवार्य बैंक गारंटी की वैधता का पालन न करना टेंडर बिड खारिज करने का उचित आधार: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक रिट याचिका खारिज की, जिसमें एक ठेकेदार को एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) के निर्माण से जुड़ी सरकारी टेंडर प्रक्रिया से अयोग्य ठहराए जाने को चुनौती दी गई।M/s रामशरण सिंह प्रोजेक्ट्स LLP (याचिकाकर्ता 1)— जो सिविल निर्माण कार्यों में लगी है, ने WAPCOS लिमिटेड (प्रतिवादी 1), जो भारत सरकार का एक उपक्रम है, द्वारा जारी एक ई-मेल की वैधता को चुनौती दी थी। इस ई-मेल के ज़रिए कांकेर में EMRS के निर्माण के लिए 'टेंडर आमंत्रित करने की सूचना' (NIT) के जवाब में याचिकाकर्ता 1 द्वारा...

सुनने और बोलने में असमर्थ रेप पीड़िता ने गवाही के लिए प्लास्टिक की गुड़िया का इस्तेमाल किया, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दोषी की उम्रकैद की सज़ा बरकरार रखी
सुनने और बोलने में असमर्थ रेप पीड़िता ने गवाही के लिए प्लास्टिक की गुड़िया का इस्तेमाल किया, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दोषी की उम्रकैद की सज़ा बरकरार रखी

एक मूक-बधिर महिला के साथ रेप के मामले में व्यक्ति की सज़ा बरकरार रखते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कोई भी गवाह—जो बोल नहीं सकता, वह कोर्ट में इशारों या प्रदर्शन के तरीकों से गवाही दे सकता है। ऐसी गवाही को ठोस मौखिक सबूत माना जाएगा।मौजूदा मामले में पीड़िता—एक युवती जो जन्म से ही मूक-बधिर है—के साथ उसके एक रिश्तेदार (आरोपी) ने तब रेप किया, जब उसके माता-पिता घर पर मौजूद नहीं थे। जब पीड़िता के माता-पिता घर लौटे तो उसने इशारों के ज़रिए उन्हें घटना के बारे में बताया और आरोपी की तरफ...

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्टेट फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार की नियुक्ति रद्द की, कहा - सरकार फार्मेसी एक्ट के तहत सीधे नियुक्ति नहीं कर सकती
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्टेट फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार की नियुक्ति रद्द की, कहा - सरकार फार्मेसी एक्ट के तहत सीधे नियुक्ति नहीं कर सकती

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार के तौर पर अश्विनी गुरदेकर की नियुक्ति रद्द की। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि फार्मेसी एक्ट, 1948 की धारा 26 के तहत रजिस्ट्रार की नियुक्ति स्टेट फार्मेसी काउंसिल द्वारा राज्य सरकार की पहले से मंज़ूरी लेकर की जानी चाहिए, न कि सीधे सरकार द्वारा।जस्टिस पार्थ प्रतीक साहू रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें 'क्वो वारंटो' (Quo Warranto) रिट जारी करने की मांग की गई। इस याचिका में प्रतिवादी नंबर 4 (अश्विनी गुरदेकर) की छत्तीसगढ़ स्टेट...

गंभीर बीमारी से जूझ रहे कैदी की पैरोल पर जल्द फैसला करें अधिकारी: छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट, कहा- जीवन के अधिकार में समय पर इलाज भी शामिल
गंभीर बीमारी से जूझ रहे कैदी की पैरोल पर जल्द फैसला करें अधिकारी: छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट, कहा- जीवन के अधिकार में समय पर इलाज भी शामिल

हाइकोर्ट ने गंभीर बीमारी से पीड़ित 68 वर्षीय कैदी की पैरोल अर्जी पर जल्द निर्णय लेने का निर्देश दिया।अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में समय पर और उचित मेडिकल ट्रीटमेंट का अधिकार भी शामिल है।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसे जेल में सजा काट रहे एक कैदी ने दायर किया। याचिका में बताया गया कि वह गैंग्रीन नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित है।मामले में प्रस्तुत मेडिकल दस्तावेजों के अनुसार कैदी के पैर की एक उंगली...

बच्चों की करंट से मौत के मामलों पर राज्य की कार्रवाई के बाद स्वतः संज्ञान जनहित याचिका बंद: छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट
बच्चों की करंट से मौत के मामलों पर राज्य की कार्रवाई के बाद स्वतः संज्ञान जनहित याचिका बंद: छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने बच्चों की करंट लगने से हुई मौतों से जुड़े मामलों पर स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई जनहित याचिका को राज्य सरकार की प्रभावी कार्रवाई के बाद अभिलेखों में दर्ज करते हुए बंद किया।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह स्वतः संज्ञान जनहित याचिका वर्ष 2025 में दो चिंताजनक समाचारों के आधार पर शुरू की थी जिनमें बच्चों की करंट लगने से मौत की घटनाएं सामने आईं।पहला मामला कोंडागांव जिले का है, जहां ढाई साल के एक बच्चे की आंगनवाड़ी केंद्र के अंदर खुले...

आपराधिक प्रक्रिया को उत्पीड़न का हथियार नहीं बनाया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने पूर्व चीफ जस्टिस व जजों के खिलाफ शिकायत रद्द की
आपराधिक प्रक्रिया को उत्पीड़न का हथियार नहीं बनाया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने पूर्व चीफ जस्टिस व जजों के खिलाफ शिकायत रद्द की

छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने एक अहम फैसले में पूर्व चीफ जस्टिस, एक वर्तमान हाइकोर्ट जस्टिस और राज्य की उच्च न्यायिक सेवा के कई अधिकारियों के खिलाफ दायर आपराधिक शिकायत रद्द की। अदालत ने कहा कि केवल आशंका और अनुमान के आधार पर न्यायपालिका के सदस्यों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही चलने देना न्यायिक संस्थाओं की गरिमा को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बिभु दत्त गुरु की खंडपीठ ने कहा कि आपराधिक कानून का इस्तेमाल किसी को परेशान करने, डराने या व्यक्तिगत अथवा सेवा संबंधी शिकायतों...

PHD के लिए अध्ययन अवकाश अधिकार नहीं: छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने व्याख्याता की अपील खारिज की
PHD के लिए अध्ययन अवकाश अधिकार नहीं: छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने व्याख्याता की अपील खारिज की

छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी कर्मचारियों को उच्च शिक्षा के लिए अध्ययन अवकाश देना उनका अधिकार नहीं है बल्कि यह नियोक्ता के विवेक पर निर्भर करता है। इसी सिद्धांत को दोहराते हुए हाइकोर्ट ने गणित के एक व्याख्याता की अपील खारिज की, जिसमें उन्होंने PHD करने के लिए अध्ययन अवकाश की मांग की।मामला एक सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज में कार्यरत गणित लेक्चरार से जुड़ा है, जिन्होंने Phd करने के लिए कॉलेज के प्राचार्य के माध्यम से अनुमति मांगी थी। प्राचार्य ने उनका आवेदन कौशल विकास विभाग के सचिव को...

अनुसूचित जनजाति का व्यक्ति चाहे तो हिंदू विवाह अधिनियम के तहत अदालत आ सकता है: छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट
अनुसूचित जनजाति का व्यक्ति चाहे तो हिंदू विवाह अधिनियम के तहत अदालत आ सकता है: छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि यदि अनुसूचित जनजाति (एसटी) का कोई व्यक्ति स्वेच्छा से हिंदू रीति-रिवाज, परंपराएं और संस्कार अपनाता है तथा हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत अदालत के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार करता है, तो उसे केवल इस आधार पर अधिनियम के दायरे से बाहर नहीं किया जा सकता कि इस कानून की धारा 2(2) सामान्यतः एसटी समुदाय पर लागू नहीं होती।जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने यह स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि जनजातीय समुदाय का कोई सदस्य स्वयं...

यह उत्पीड़न का रूप: सरकारी स्कूलों में बालिकाओं के शौचालयों की कमी पर छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट सख्त, शिक्षा सचिव से मांगा हलफनामा
यह उत्पीड़न का रूप: सरकारी स्कूलों में बालिकाओं के शौचालयों की कमी पर छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट सख्त, शिक्षा सचिव से मांगा हलफनामा

छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने राज्य के सरकारी विद्यालयों में बालिकाओं के लिए शौचालयों की गंभीर कमी और उनकी दयनीय स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। अदालत ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को इस संबंध में व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ वर्ष 2025 में दायर जनहित याचिका की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान हिंदी दैनिक में प्रकाशित हालिया समाचार का संज्ञान लिया गया, जिसमें राज्यभर के स्कूलों में बालिकाओं के शौचालयों की भारी कमी और उनकी...

पेनिस को वजाइना के ऊपर रखना, बिना पेनिट्रेशन के इजैक्युलेट करना रेप नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रेप की सज़ा बदली
'पेनिस को वजाइना के ऊपर रखना, बिना पेनिट्रेशन के इजैक्युलेट करना रेप नहीं': छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रेप की सज़ा बदली

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सोमवार (16 फरवरी) को कहा कि मेल ऑर्गन को वजाइना के ऊपर रखना और फिर बिना पेनिट्रेशन के इजैक्युलेट करना इंडियन पैनल कोड (IPC) की धारा 375 के तहत 'रेप' नहीं कहा जा सकता, बल्कि यह 'रेप की कोशिश' है और IPC की धारा 376/511 के तहत सज़ा होगी।रेप की सज़ा को रेप की कोशिश में बदलते हुए जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की बेंच ने कहा,“अश्लील हमले को अक्सर रेप की कोशिश में बदल दिया जाता है। इस नतीजे पर पहुंचने के लिए कि आरोपी का बर्ताव हर हाल में, और हर तरह के विरोध के बावजूद, अपने जुनून को...

JJ Act के तहत नाबालिग के लिए जमानत पूरा अधिकार नहीं, न्याय का अंत धारा 12 के तहत एक अहम टेस्ट: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
JJ Act के तहत नाबालिग के लिए जमानत पूरा अधिकार नहीं, 'न्याय का अंत' धारा 12 के तहत एक अहम टेस्ट: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

एक जघन्य हत्या के आरोपी नाबालिग को जमानत देने से मना करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने समझाया कि नाबालिग अधिकार के तौर पर बेल का दावा नहीं कर सकता, क्योंकि किए गए जुर्म की प्रकृति और गंभीरता को ध्यान में रखना होगा।जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा ने जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल और सुरक्षा) एक्ट, 2015 (JJ Act) की धारा 12(1) का ज़िक्र किया, जिसमें यह प्रावधान है कि— जब किसी बच्चे पर कोई जुर्म करने का आरोप लगता है और उसे जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने लाया जाता है तो ऐसे व्यक्ति को बेल पर रिहा कर दिया...

निष्पक्ष ट्रायल के लिए प्राइवेसी का ध्यान रखना होगा: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तलाक के मामले में पति को पत्नी की कॉल रिकॉर्डिंग, WhatsApp चैट पेश करने की इजाज़त दी
'निष्पक्ष ट्रायल के लिए प्राइवेसी का ध्यान रखना होगा': छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तलाक के मामले में पति को पत्नी की कॉल रिकॉर्डिंग, WhatsApp चैट पेश करने की इजाज़त दी

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश बरकरार रखा, जिसमें एक पति को तलाक की कार्रवाई में अपनी पत्नी की कॉल रिकॉर्डिंग और WhatsApp चैट पेश करने की इजाज़त दी गई।संविधान के आर्टिकल 21 के तहत प्राइवेसी के अधिकार के उल्लंघन के आधार पर पत्नी की आपत्तियों को खारिज करते हुए जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की बेंच ने यह साफ किया कि 'प्राइवेसी का अधिकार' निजी अधिकार होने के नाते 'फेयर ट्रायल के अधिकार' के आगे झुकना चाहिए, जो पब्लिक जस्टिस पर असर डालता है।जज ने कहा,“यह ध्यान देने वाली बात है कि प्राइवेसी का...

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गैर-कानूनी गिरफ्तारी, कथित हिरासत में हिंसा के लिए पुलिस को फटकार लगाई, गिरफ्तार व्यक्ति को ₹1 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गैर-कानूनी गिरफ्तारी, कथित हिरासत में हिंसा के लिए पुलिस को फटकार लगाई, गिरफ्तार व्यक्ति को ₹1 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक होटल मालिक की गैर-कानूनी गिरफ्तारी, कथित हिरासत में हिंसा और लगातार परेशान करने और बेइज्जत करने के लिए पुलिस अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि बेवजह कैद करने से निजी आजादी और सम्मान के बुनियादी अधिकारों का “गंभीर उल्लंघन” हुआ।जब याचिकाकर्ता कानूनी तौर पर अपना लाइसेंस वाला होटल चला रहा था, तो आरोप है कि लोकल पुलिस ने बार-बार होटल के काम में दखल दिया।हालांकि, हाईकोर्ट ने 2023 में अधिकारियों को होटल चलाने में बेवजह रुकावट न डालने का आदेश देकर उसे अंतरिम सुरक्षा...

बलात्कार नारीत्व का अपमान, जीवन के अधिकार का क्रूर उल्लंघन: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
बलात्कार नारीत्व का अपमान, 'जीवन के अधिकार का क्रूर उल्लंघन': छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

बलात्कार की सज़ा बरकरार रखते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि बलात्कार का अपराध "नारीत्व का अपमान" है> यह संविधान के अनुच्छेद 21 के कई पहलुओं जैसे गरिमा, शारीरिक निजता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का खुला उल्लंघन है।जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास ने कहा,"बलात्कार एक महिला के खिलाफ सबसे गंभीर और जघन्य अपराधों में से एक है। यह खुद नारीत्व का अपमान है, जो उसकी गरिमा, शालीनता और सम्मान की जड़ पर चोट करता है। यह अपराध गहरा और स्थायी आघात पहुंचाता है, जिससे उसकी आत्म-सम्मान, स्वायत्तता और आत्मविश्वास टूट...

30 साल पुराने वसीयतनामे पर वैधता की कोई स्वचालित धारणा नहीं, निष्पादन का कठोर प्रमाण आवश्यक: छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट
30 साल पुराने वसीयतनामे पर वैधता की कोई स्वचालित धारणा नहीं, निष्पादन का कठोर प्रमाण आवश्यक: छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 90 के तहत 30 वर्ष से अधिक पुराने दस्तावेजों को लेकर जो वैधता की धारणा बनाई जाती है, वह वसीयत (विल) के मामलों में लागू नहीं होती। हाइकोर्ट ने कहा कि वसीयत को केवल उसकी प्राचीनता के आधार पर सही नहीं माना जा सकता, बल्कि उसका निष्पादन और सत्यापन विधि में निर्धारित कठोर प्रावधानों के अनुसार सिद्ध किया जाना अनिवार्य है।यह निर्णय जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने दिया। कोर्ट ने कहा कि वसीयत दाता की मृत्यु के बाद ही प्रभावी होती है और उसके...

अनुकंपा नियुक्ति का मतलब तुरंत मदद देना, न कि दशकों बाद सरकारी नौकरी का ज़रिया बनना: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
अनुकंपा नियुक्ति का मतलब तुरंत मदद देना, न कि दशकों बाद सरकारी नौकरी का ज़रिया बनना: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति को राहत देने से इनकार किया, जिसने अपने पिता की मौत के 14 साल बाद बहुत ज़्यादा देरी से अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्तियों का मूल मकसद तुरंत मदद देना है, न कि मृतक की मौत के दशकों बाद सरकारी नौकरी का ज़रिया बनना।जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने दोहराया कि अनुकंपा नियुक्तियां मौत के समय की गंभीर वित्तीय ज़रूरत की स्थितियों तक ही सीमित होनी चाहिए। एक बार जब संकट खत्म हो जाता है तो अनुकंपा नियुक्ति का आधार भी खत्म हो जाता है।इस...

भूमि अधिग्रहण से विस्थापितों का पुनर्वास और रोजगार का अधिकार अनुच्छेद 21 से प्रवाहित होता है: छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट
भूमि अधिग्रहण से विस्थापितों का पुनर्वास और रोजगार का अधिकार अनुच्छेद 21 से प्रवाहित होता है: छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि भूमि अधिग्रहण से प्रभावित व्यक्तियों को पुनर्वास और रोजगार का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 से स्वाभाविक रूप से जुड़ा हुआ है। इस अधिकार से मनमाने ढंग से वंचित किया जाना अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन है।जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा ने स्पष्ट किया कि भूमि खोने वाले व्यक्तियों को पुनर्वास नीति के अंतर्गत रोजगार दिया जाना एक अत्यंत महत्वपूर्ण अधिकार है, जिसे भूमि अधिग्रहण की तिथि पर लागू नीति के अनुसार ही परखा जाना चाहिए। बाद में कोल इंडिया...

सेवा नियमों के उल्लंघन में कोर्ट कर्मचारी नियमित स्टूडेंट के रूप में LLB नहीं कर सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
सेवा नियमों के उल्लंघन में कोर्ट कर्मचारी नियमित स्टूडेंट के रूप में LLB नहीं कर सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एकल जज का आदेश रद्द किया, जिसमें जिला एवं सेशन कोर्ट में कार्यरत एक परिवीक्षाधीन कर्मचारी को नियमित स्टूडेंट के रूप में LLB के तृतीय वर्ष में अध्ययन की अनुमति दी गई थी।हाईकोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की अनुमति का सीधा प्रभाव प्रशासनिक अनुशासन, कार्यालय की कार्यप्रणाली और वैधानिक नियमों के अनुपालन पर पड़ता है।मामले के अनुसार सितंबर, 2022 में उत्तरदाता को प्रधान जिला एवं सेशन कोर्ट में सहायक ग्रेड-3 के पद पर तीन वर्ष की परिवीक्षा अवधि के लिए नियुक्त किया गया था। नियुक्ति की...