इलाहाबाद हाईकोट
कस्टडी विवाद के बीच बच्चे को जबरन बोर्डिंग स्कूल नहीं भेजा जा सकता, मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन आवश्यक: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि माता-पिता के बीच चल रहे कस्टडी विवाद के दौरान किसी बच्चे को बोर्डिंग स्कूल भेजने का निर्देश देने से पहले उस बच्चे का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन (Psychological Evaluation) किया जाना आवश्यक है, ताकि यह आकलन किया जा सके कि वह उस अभिभावक से अलग रहने के मानसिक और भावनात्मक प्रभाव को सहन कर पाएगा या नहीं, जिसके साथ वह अब तक रह रहा है।चीफ़ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने नाबालिग बेटे की कस्टडी और विज़िटेशन को लेकर चल रहे विवाद में यह टिप्पणी की।खंडपीठ...
'कोई प्रभावी सुनवाई नहीं हो रही': हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से वक्फ ट्रिब्यूनल में खाली पद भरने को कहा
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने उत्तर प्रदेश सरकार से वक्फ ट्रिब्यूनल में खाली पद को जल्द से जल्द भरने का अनुरोध किया, क्योंकि कोर्ट ने पाया कि मौजूदा खाली पदों के कारण कोई प्रभावी सुनवाई नहीं हो रही है।जस्टिस शेखर बी सर्राफ और जस्टिस मनजीव शुक्ला की बेंच ने सोमवार को फैसल खान द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।हालांकि, बेंच ने याचिका में की गई प्रार्थनाओं पर विचार करने से इनकार किया, क्योंकि याचिकाकर्ता को पहले ही एक सिंगल जज द्वारा अपनी शिकायतों के संबंध में अपील करने...
अगर पत्नी के अपने कामों से पति कमाने में असमर्थ हो जाए तो वह भरण-पोषण का दावा नहीं कर सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अगर कोई पत्नी अपने कामों या गलतियों से अपने पति की कमाने की क्षमता को खत्म करती है या उसमें योगदान देती है तो उसे ऐसी स्थिति का फायदा उठाने और मेंटेनेंस का दावा करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती।जस्टिस लक्ष्मी कांत शुक्ला की बेंच ने फैसला सुनाया कि ऐसे मामले में मेंटेनेंस देना "गंभीर अन्याय" होगा, खासकर जब पति की कमाने की क्षमता पत्नी के परिवार के आपराधिक कामों से खत्म हो गई हो।कोर्ट ने आगे कहा कि भारतीय समाज में यह माना जाता है कि एक पति से, भले ही उसके पास रेगुलर नौकरी...
यूपी सरकार ने रिटायर्ड हाईकोर्ट जजों के फायदों के लिए 'आंध्र मॉडल' अपनाया: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अब सिक्योरिटी प्रोटोकॉल पर जवाब मांगा
उत्तर प्रदेश सरकार ने बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया कि उसने एक सरकारी आदेश जारी किया, जिसमें रिटायर्ड जजों के रिटायरमेंट के बाद के फायदों के बारे में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का काफी हद तक पालन सुनिश्चित किया गया।इस बात पर ध्यान देते हुए जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस स्वरूपामा चतुर्वेदी की बेंच ने एडिशनल एडवोकेट जनरल से रिटायर्ड हाईकोर्ट जजों के लिए बनाए गए संबंधित सुरक्षा नियमों, यदि कोई हों, को रिकॉर्ड पर रखने को कहा।बता दें, याचिकाकर्ता (रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट जजों का...
'यूपी पुनर्गठन अधिनियम' को चुनौती: हाईकोर्ट ने राष्ट्रपति को पक्षकार बनाने से किया इनकार, उत्तराखंड के पहले मुख्यमंत्री के खिलाफ़ याचिका खारिज
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने पिछले हफ़्ते एक रिट याचिका (2000 में दायर की गई) में भारत के राष्ट्रपति को पक्षकार बनाने की याचिका खारिज की। यह याचिका उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के लागू होने/अधिसूचना को चुनौती देती थी।जस्टिस संगीता चंद्रा और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की बेंच ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता कानून से परेशान है तो राष्ट्रपति के बजाय उस विभाग के उचित प्रमुख को पक्षकार बनाया जाना चाहिए, जो विवादित कानून को लाने और पास करने के लिए ज़िम्मेदार है।यह टिप्पणी तब आई, जब कोर्ट 26 साल...
वायु प्रदूषण मामले में लार्सन एंड टूब्रो के निदेशकों के खिलाफ जारी समन इलाहाबाद हाइकोर्ट ने रद्द किए
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के तहत दर्ज एक आपराधिक मामले में लार्सन एंड टूब्रो कंपनी और उसके निदेशकों के खिलाफ जारी समन रद्द किया।कोर्ट ने कहा कि समन जारी करते समय संबंधित मजिस्ट्रेट ने रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों पर समुचित रूप से विचार नहीं किया और बिना सही तथ्यात्मक आधार के आदेश पारित कर दिया।यह आदेश जस्टिस बृज राज सिंह द्वारा पारित किया गया।मामले का पूरा विवरणइस मामले में लार्सन एंड टूब्रो के पूर्णकालिक निदेशक एवं वरिष्ठ कार्यकारी उपाध्यक्ष, पूर्णकालिक...
वकील मुवक्किल का केवल मुखपत्र नहीं, निरर्थक मामलों से बचना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई भी वकील अपने मुवक्किल का केवल मुखपत्र नहीं होता और उसे ऐसे निरर्थक मामलों को स्वीकार करने से बचना चाहिए, जिनसे न्यायालय का कीमती समय बर्बाद होता है।हालांकि, कोर्ट ने एक युवा वकील पर लागत (कॉस्ट) लगाने से परहेज किया, क्योंकि उनका नामांकन हाल ही में वर्ष 2024 में हुआ था।यह टिप्पणी जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने की।जस्टिस विद्यार्थी ने कहा,“वकील को यह समझना चाहिए कि वह भले ही अपने मुवक्किल का प्रतिनिधित्व करता हो, लेकिन वह उसका मात्र मुखपत्र नहीं है।...
समय सीमा के बाद संज्ञान लेना गलत; 'सद्भावनापूर्ण चूक' और 'सामान्य चलन' मजिस्ट्रेट के लिए कोई बहाना नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को चोरी के एक मामले में आपराधिक कार्यवाही रद्द की, जिसमें मजिस्ट्रेट ने CrPC की धारा 468 [समय सीमा समाप्त होने के बाद संज्ञान लेने पर रोक] के तहत तय अनिवार्य अवधि के बाद संज्ञान लिया था।कोर्ट ने फिरोजाबाद के तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा दी गई सफाई पर कड़ी आपत्ति जताई, जिन्होंने कहा कि सभी मजिस्ट्रेट अदालतों में प्रचलित सामान्य चलन के अनुसार, संज्ञान लेने से पहले पुलिस रिपोर्ट पर कोई गहन जांच नहीं की जाती है।यह मामला मोटरसाइकिल चोरी की घटना से संबंधित था और...
MACT | केवल कक्षा 12वीं का छात्र होने से यह नहीं माना जा सकता कि मृतक आय अर्जित नहीं कर रहा था; अकुशल श्रमिक मानकर मुआवज़ा दिया जाएगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल इस आधार पर यह मान लेना कि सड़क दुर्घटना में मृतक कोई आय अर्जित नहीं कर रहा था, सही नहीं है कि वह कक्षा 12वीं का छात्र था। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में मुआवज़े की गणना मृतक को अकुशल श्रमिक (Unskilled Workman) मानकर की जानी चाहिए।जस्टिस संदीप जैन ने कहा—“केवल इस कारण कि मृतक कक्षा 12वीं में पढ़ रहा था, यह अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि वह कोई आय अर्जित नहीं कर रहा था। यह स्पष्ट है कि दावेदार मृतक की आय और व्यवसाय से संबंधित कोई दस्तावेजी साक्ष्य...
अंतरिम भरण-पोषण | पत्नी अपनी पढ़ाई के खर्च का भी कर सकती है दावा, आय की जानकारी न देने पर पति के खिलाफ प्रतिकूल अनुमान संभव: इलाहाबाद हाइकोर्ट
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने हाल ही में पत्नी के पक्ष में अंतरिम भरण-पोषण के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि पत्नी द्वारा अपनी शिक्षा से संबंधित खर्चों के लिए अंतरिम भरण-पोषण का दावा प्रथम दृष्टया उचित है।हाइकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अब यह स्थापित कानून है कि यदि पति को पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद वह अपनी आय और संपत्ति का विवरण हलफनामे के माध्यम से प्रस्तुत नहीं करता तो अदालत उसके खिलाफ प्रतिकूल अनुमान (एडवर्स इंफेरेंस) लगा सकती है।जस्टिस गरिमा प्रसाद की एकल पीठ पति द्वारा दाखिल उस आपराधिक...
NEET-PG 2025 | इलाहाबाद हाईकोर्ट में SC/ST/OBC उम्मीदवारों को 'माइनस 40' नंबर के साथ काउंसलिंग की इजाज़त देने के खिलाफ PIL
इलाहाबाद हाईकोर्ट में नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) के उस फैसले को चुनौती देते हुए जनहित याचिका (PIL) दायर की गई, जिसमें NEET-PG 2025 परीक्षा में 800 में से -40 (माइनस 40) नंबर लाने वाले SC/ST/OBC स्टूडेंट्स को काउंसलिंग की इजाज़त दी गई।याचिकाकर्ता एडवोकेट अभिनव गौर इस कदम को भारत के संविधान के अनुच्छेद 16(4) के खिलाफ बताते हैं। याचिका में इस आधार पर फैसले को चुनौती दी गई कि NEET-PG 2025 के लिए कट-ऑफ नंबरों में भारी कमी से मेरिट-आधारित चयन प्रक्रिया की पवित्रता खत्म हो...
पतंग उड़ाने के पीक सीज़न के दौरान 'चाइनीज़ मांझे' के खिलाफ़ मशीनरी एक्टिवेट करने के लिए राज्य सरकार बाध्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते कहा कि राज्य सरकार हाईकोर्ट द्वारा पहले से जारी निर्देशों का पालन करने और यह सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है कि जब पतंग उड़ाने का सीज़न अपने चरम पर हो तो मशीनरी को एक्टिवेट किया जाए ताकि चाइनीज़ मांझे का निर्माण, इस्तेमाल और बिक्री न हो, जिससे इंसानों और पक्षियों की जान को खतरा न हो।चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की बेंच ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें जौनपुर ज़िले में सिंथेटिक पतंग के धागे पर रोक...
राज्य बिना मान्यता वाले मदरसे को बंद नहीं कर सकता, लेकिन सरकारी ग्रांट देने से मना कर सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो डिस्ट्रिक्ट माइनॉरिटी वेलफेयर ऑफिसर को उत्तर प्रदेश राज्य में बिना मान्यता वाले मदरसे को बंद करने का अधिकार दे।याचिकाकर्ता मदरसा अहले सुन्नत इमाम अहमद रज़ा की मैनेजमेंट कमेटी ने श्रावस्ती के डिस्ट्रिक्ट माइनॉरिटी वेलफेयर ऑफिसर के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी, जिसमें याचिकाकर्ता मदरसे को बिना मान्यता प्राप्त होने के कारण बंद करने का आदेश दिया गया।याचिकाकर्ता के वकील ने उत्तर प्रदेश गैर-सरकारी अरबी और फारसी मदरसा मान्यता,...
Panchayat Polls 2026 | हाईकोर्ट में PIL में सीएम योगी आदित्यनाथ को OBC कमीशन बनाने का निर्देश देने की मांग
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई, जिसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 2026 के पंचायत चुनावों से पहले एक समर्पित अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग के गठन पर फैसला लेने का निर्देश देने की मांग की गई।यह PIL एडवोकेट मोती लाल यादव ने दायर की, जिसमें तर्क दिया गया कि 6 सदस्यीय समर्पित OBC आयोग बनाने का प्रस्ताव राज्य कैबिनेट (जिसका नेतृत्व प्रतिवादी नंबर 1, CM आदित्यनाथ कर रहे हैं) के पास 5 महीने से ज़्यादा समय से लंबित है।याचिका में कहा गया कि ऐसे आयोग के गठन...
POCSO Act | चोट की रिपोर्ट न होने पर पीड़ित को मुआवज़ा देने से इनकार नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष नियम, 2015 के तहत मुआवज़ा तब दिया जाना चाहिए, जब FIR में प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्शुअल ऑफ़ेंसेस एक्ट, 2012 (POCSO Act) की धारा 4 के तहत अपराध का ज़िक्र हो। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि चोट की रिपोर्ट में किसी चोट का ज़िक्र नहीं है, मुआवज़ा देने से इनकार नहीं किया जा सकता।जस्टिस शेखर बी. सर्राफ और जस्टिस मनजीव शुक्ला की बेंच ने कहा,“इस स्कीम के तहत पेनिट्रेटिव सेक्शुअल असॉल्ट की शिकार को मुआवज़ा इसलिए नहीं दिया...
परीक्षा में बैठने का अधिकार जीवन के अधिकार के समान: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पोर्टल की गड़बड़ी के कारण छूटी स्टूडेंट के लिए विशेष परीक्षा का आदेश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि परीक्षा में बैठने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 में दिए गए मानवीय गरिमा के साथ जीने के अधिकार के समान है।यह कहते हुए कि किसी स्टूडेंट का भविष्य "तकनीकी खामियों" या प्रशासनिक सुस्ती के कारण खतरे में नहीं डाला जा सकता, जस्टिस विवेक सरन की बेंच ने प्रयागराज स्थित यूनिवर्सिटी को B.Sc. की स्टूडेंट के लिए विशेष परीक्षा आयोजित करने का निर्देश दिया, जिसे एडमिट कार्ड नहीं दिया गया, क्योंकि यूनिवर्सिटी पोर्टल उसके एडमिशन रिकॉर्ड को अपडेट नहीं कर पाया।संक्षेप में मामलाराज्जू...
झूठी FIR दर्ज कराने वालों पर पुलिस के लिए मुकदमा चलाना अनिवार्य, पालन न करने पर IOs को अवमानना का सामना करना पड़ेगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
एक महत्वपूर्ण आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य की पुलिस मशीनरी को सख्त निर्देश दिया कि वे उन व्यक्तियों/सूचना देने वालों के खिलाफ अनिवार्य रूप से मुकदमा शुरू करें, जो झूठी या दुर्भावनापूर्ण फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराते हैं।जस्टिस प्रवीण कुमार गिरि की बेंच ने कहा कि अगर जांच में पता चलता है कि FIR झूठी जानकारी पर आधारित थी तो IO "कानूनी रूप से बाध्य" है कि वह BNSS की धारा 215(1)(a) (CrPC की धारा 195(1)(a) के बराबर) के तहत सूचना देने वाले के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज करे।कोर्ट ने...
UP Revenue Code 2006: हाईकोर्ट ने कृषि भूमि में महिलाओं के उत्तराधिकार अधिकारों पर राज्य के 'बेहद अधूरे' हलफनामे पर फटकार लगाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार पर यूपी-रेवेन्यू कोड, 2006 (UP Revenue Code 2006) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर टालमटोल वाले और "बेहद अधूरे" जवाब के लिए कड़ी फटकार लगाई।5 याचिकाएं 2006 के कोड की धारा 108, 109 और 110 को चुनौती देती हैं, यह तर्क देते हुए कि ये प्रावधान कृषि भूमि के उत्तराधिकार में महिलाओं के साथ भेदभाव करते हैं।12 जनवरी, 2026 के एक कड़े आदेश में जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने राज्य के जवाबी हलफनामे पर...
स्थायी कार्यात्मक दिव्यांगता वाला नाबालिग 'कुशल श्रमिक' के रूप में मुआवजे का हकदार: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा है कि दुर्घटना के बाद 100% स्थायी कार्यात्मक दिव्यांगता से पीड़ित बेरोज़गार नाबालिग को भी मोटर वाहन अधिनियम के तहत “कुशल श्रमिक (Skilled Workman)” के रूप में मुआवजा दिया जाना चाहिए।जस्टिस संदीप जैन ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) द्वारा दिए गए मुआवजे को बढ़ाने संबंधी अपील पर सुनवाई करते हुए कहा—“भले ही यह मान लिया जाए कि दुर्घटना के समय दावा करने वाला केवल 16 वर्ष का था और किसी भी प्रकार की आय अर्जित नहीं कर रहा था, फिर भी उसे कुशल...
वसीयत के आधार पर नहीं मिल सकती अनुकंपा नियुक्ति, मृतक पर निर्भरता ही निर्णायक: इलाहाबाद हाइकोर्ट
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति का लाभ मृत सरकारी कर्मचारी की वसीयत (विल) के आधार पर नहीं दिया जा सकता।हाइकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश मृतक आश्रित नियम, 1974 के तहत अनुकंपा नियुक्ति का आधार केवल यह होता है कि आवेदक मृतक कर्मचारी पर वास्तव में निर्भर था या नहीं, न कि यह कि वसीयत किसके पक्ष में बनाई गई।जस्टिस मनीष माथुर ने अपने फैसले में कहा कि नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत मृतक की वसीयत के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति की पात्रता तय की जाए।उन्होंने कहा कि पंजीकृत...


















