इलाहाबाद हाईकोट

मौजूद ही नहीं जो कानून, उसी के तहत दे दिया तलाक: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द किया
मौजूद ही नहीं जो कानून, उसी के तहत दे दिया तलाक: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बांदा फैमिली कोर्ट द्वारा पारित तलाक डिक्री रद्द करते हुए कड़ी टिप्पणी की कि अदालत ने ऐसे कानून के तहत तलाक दिया, जिसका अस्तित्व ही नहीं है। हाईकोर्ट ने संबंधित न्यायिक अधिकारी के फैसले को अत्यंत लापरवाह और अनौपचारिक बताते हुए उसकी कार्यप्रणाली पर नाराज़गी जताई।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस विवेक सारन की खंडपीठ ने यह आदेश पति की अपील पर पारित किया, जिसने जनवरी 2026 में फैमिली कोर्ट द्वारा पत्नी को दिए गए तलाक आदेश को चुनौती दी थी।मामले में पत्नी ने अपनी याचिका मुस्लिम स्त्री...

अवैध जब्ती और जल्दबाज़ी में नीलामी पर राज्य सरकार को झटका: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कम-से-कम 2 लाख मुआवज़े का आदेश दिया
अवैध जब्ती और जल्दबाज़ी में नीलामी पर राज्य सरकार को झटका: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कम-से-कम 2 लाख मुआवज़े का आदेश दिया

इलाहाबाद हाRकोर्ट ने कथित गौ-तस्करी के अप्रमाणित आरोप में वाहन जब्त कर जल्दबाज़ी में नीलाम करने पर उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाते हुए वाहन स्वामी को कम-से-कम 2 लाख रुपये मुआवज़ा देने का आदेश दिया। अदालत ने जब्ती और ज़ब्ती से जुड़े आदेश रद्द करते हुए कहा कि राज्य की कार्रवाई मनमानी, अवैध और कानून के विपरीत थी।जस्टिस संदीप जैन ने कहा कि यदि राज्य सरकार वाहन वापस नहीं कर सकती तो उसे वाहन स्वामी को अतिरिक्त 4 लाख रुपये वाहन मूल्य के रूप में देने होंगे।मामले के अनुसार 8 सितंबर 2024 को चंदौली जिले...

सामाजिक संतुलन को बिगाड़ने वाली धार्मिक प्रथाओं की शुरुआत या विस्तार अनुच्छेद 25 और 26 के तहत संरक्षित नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
सामाजिक संतुलन को बिगाड़ने वाली धार्मिक प्रथाओं की शुरुआत या विस्तार अनुच्छेद 25 और 26 के तहत संरक्षित नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि किसी ऐसी धार्मिक प्रथा या उपयोग की शुरुआत या विस्तार, जो पहले से प्रचलित नहीं थी—विशेष रूप से यदि वह मौजूदा सामाजिक संतुलन को बिगाड़ती है—तो उसे संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत संरक्षण प्राप्त नहीं है।पीठ ने आगे कहा कि राज्य के लिए यह ज़रूरी नहीं है कि वह किसी वास्तविक व्यवधान का इंतज़ार करे; बल्कि, जहां ऐसी गतिविधि से सार्वजनिक जीवन प्रभावित होने की आशंका हो, वहां राज्य उचित निवारक उपाय कर सकता है।इन टिप्पणियों के साथ जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस गरिमा...

निजी ज़मीन पर नियमित सामूहिक धार्मिक गतिविधियां सरकारी नियमों से मुक्त नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
निजी ज़मीन पर नियमित सामूहिक धार्मिक गतिविधियां सरकारी नियमों से मुक्त नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि निजी संपत्ति पर धार्मिक प्रार्थनाएं आयोजित की जा सकती हैं, बशर्ते वे कभी-कभार और बिना किसी बाधा के हों; लेकिन जब संपत्ति का इस्तेमाल नियमित या संगठित सामूहिक गतिविधियों के लिए किया जाता है तो उस पर सरकारी नियम लागू हो सकते हैं।जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने आगे कहा कि अगर निजी संपत्ति पर ऐसी गतिविधि नियमित, संगठित या बड़े पैमाने पर होने लगती है तो इसे परिसर के इस्तेमाल के तरीके में बदलाव माना जा सकता है। यह योजना और स्थानीय नियमों...

NCLT इलाहाबाद में याचिकाओं की जांच केवल स्थानीय रजिस्ट्री करेगी: हाईकोर्ट ने प्रिंसिपल बेंच का संयुक्त स्क्रूटनी आदेश स्थगित किया
NCLT इलाहाबाद में याचिकाओं की जांच केवल स्थानीय रजिस्ट्री करेगी: हाईकोर्ट ने प्रिंसिपल बेंच का 'संयुक्त स्क्रूटनी' आदेश स्थगित किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NCLT प्रिंसिपल बेंच, नई दिल्ली के उस आदेश/अधिसूचना पर रोक लगा दी है, जिसमें NCLT इलाहाबाद में दायर याचिकाओं एवं आवेदनों की संयुक्त जांच (स्क्रूटनी) इलाहाबाद और प्रिंसिपल बेंच दोनों द्वारा किए जाने का प्रावधान किया गया।जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय देते हुए अंतरिम आदेश पारित किया कि फिलहाल NCLT इलाहाबाद में दायर याचिकाओं/आवेदनों की जांच केवल NCLT इलाहाबाद की रजिस्ट्री ही करेगी।यह...

झूठी जानकारी देकर जनहित याचिका दायर करने पर वकील पर 25 हजार रुपये का जुर्माना, इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त
झूठी जानकारी देकर जनहित याचिका दायर करने पर वकील पर 25 हजार रुपये का जुर्माना, इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सड़क अतिक्रमण के खिलाफ जनहित याचिका दायर करने वाले वकील पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता ने अपने शपथपत्र में गलत जानकारी दी और अपने विरुद्ध लंबित आपराधिक मामलों को छिपाया। चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ ने कहा कि यह याचिका न्यायिक प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग है और ऐसे मामलों में लागत लगाना आवश्यक है ताकि निजी स्वार्थ के लिए जनहित याचिका का सहारा लेने वालों को हतोत्साहित किया जा सके।याचिकाकर्ता पेशे से एडवोकेट है।...

पंचायत चुनाव 2026: OBC आयोग गठन में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, यूपी सरकार से मांगी स्पष्ट समयसीमा
पंचायत चुनाव 2026: OBC आयोग गठन में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, यूपी सरकार से मांगी स्पष्ट समयसीमा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव 2026 के लिए समर्पित अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग के गठन में देरी पर राज्य सरकार से कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा कि आयोग का गठन आखिर कब तक किया जाएगा।जस्टिस सौरभ लवानिया की पीठ ने पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें आयोग गठन की स्पष्ट समयसीमा बतानी होगी।मामले की अगली सुनवाई 19 मई को होगी।अदालत अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसे अधिवक्ता मोतीलाल यादव ने दायर किया। याचिका में...

महाकुंभ भगदड़: हाईकोर्ट ने कहा—मुआवजा दावों का फैसला 30 दिन में जिला प्रशासन करे, आयोग नहीं
महाकुंभ भगदड़: हाईकोर्ट ने कहा—मुआवजा दावों का फैसला 30 दिन में जिला प्रशासन करे, आयोग नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जनवरी 2025 के महाकुंभ मेला भगदड़ मामले में स्पष्ट किया है कि पीड़ितों को अनुग्रह (ex gratia) मुआवजा देने के दावों का निपटारा राज्य द्वारा गठित न्यायिक जांच आयोग नहीं, बल्कि जिला प्रशासन और मेला प्राधिकरण द्वारा किया जाएगा, और यह प्रक्रिया 30 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस सत्य वीर सिंह की खंडपीठ संजय कुमार शर्मा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 29 जनवरी 2025 (मौनी अमावस्या) को हुई भगदड़ में उनके रिश्तेदार की मौत पर मुआवजा मांगा गया था।अदालत ने...

पुलिस को नहीं मिला फरार दुष्कर्म आरोपी, लेकिन हाइकोर्ट में हलफनामा दाखिल करने पहुंचा; इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जताई कड़ी नाराज़गी, CBI जांच पर विचार
पुलिस को नहीं मिला फरार दुष्कर्म आरोपी, लेकिन हाइकोर्ट में हलफनामा दाखिल करने पहुंचा; इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जताई कड़ी नाराज़गी, CBI जांच पर विचार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कड़ी फटकार लगाई, जब यह सामने आया कि जिस सामूहिक दुष्कर्म आरोपी को पुलिस महीनों से फरार और अज्ञात स्थान पर बता रही है। वही आरोपी हाइकोर्ट की कार्यवाही में परोक्ष रूप से शामिल हो रहा था और हाल ही में हलफनामा दाखिल करने के लिए उसका आधिकारिक फोटोग्राफ भी न्यायालय परिसर में लिया गया।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यह स्थिति चौंकाने वाली है और प्रथम दृष्टया जांच अधिकारी...

सार्वजनिक स्थान पर कॉफी पीना भी डर का कारण बन गया: अंतरधार्मिक जोड़ों की उत्पीड़न पर NHRC की चुप्पी पर हाईकोर्ट में तीखी टिप्पणी, बेंच में मतभेद
सार्वजनिक स्थान पर कॉफी पीना भी डर का कारण बन गया': अंतरधार्मिक जोड़ों की उत्पीड़न पर NHRC की चुप्पी पर हाईकोर्ट में तीखी टिप्पणी, बेंच में मतभेद

इलाहाबाद हाईकोर्ट में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की भूमिका को लेकर सुनवाई के दौरान खंडपीठ के दो जजों के बीच असामान्य मतभेद देखने को मिले।जस्टिस अतुल श्रीधरन ने NHRC की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अंतरधार्मिक संबंधों में रहने वाले लोगों के लिए सार्वजनिक स्थान पर साथ कॉफी पीना तक भय का कारण बन गया है, जबकि आयोग ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान नहीं लेता।हालांकि जस्टिस विवेक सारन ने इन व्यापक टिप्पणियों से असहमति जताई और कहा कि बिना सभी पक्षों को सुने इस प्रकार की प्रतिकूल...

मदरसों की जांच का आदेश, लेकिन मॉब लिंचिंग पर स्वतः संज्ञान नहीं? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NHRC की भूमिका पर उठाए गंभीर सवाल
मदरसों की जांच का आदेश, लेकिन मॉब लिंचिंग पर स्वतः संज्ञान नहीं? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NHRC की भूमिका पर उठाए गंभीर सवाल

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि आयोग उत्तर प्रदेश के मदरसों की जांच जैसे मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है, जबकि मॉब लिंचिंग, भीड़ हिंसा और सतर्कतावादी हमलों जैसे गंभीर मामलों में स्वतः संज्ञान लेने के उदाहरण सामने नहीं आते।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस विवेक सरन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया ने वर्ष 2025 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा उत्तर...

योग्य और कमाने में सक्षम पत्नी केवल पति पर बोझ डालने के लिए काम न करे तो भरण-पोषण नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
योग्य और कमाने में सक्षम पत्नी केवल पति पर बोझ डालने के लिए काम न करे तो भरण-पोषण नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि कोई शिक्षित और कमाने में सक्षम पत्नी केवल पति पर आर्थिक बोझ डालने के उद्देश्य से काम करने से परहेज करती है तो अदालतें हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत अंतरिम भरण-पोषण देने से इनकार कर सकती हैं।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस विवेक सरन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी एक महिला द्वारा दायर प्रथम अपील खारिज करते हुए की। महिला पेशे से स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं और उन्होंने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके अंतरिम भरण-पोषण का आवेदन...

बधाई के नाम पर धन वसूली को कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
बधाई के नाम पर धन वसूली को कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किन्नर समुदाय द्वारा शुभ अवसरों पर बधाई के नाम पर धन या उपहार लेने की प्रथा को कोई वैधानिक या कानूनी मान्यता प्राप्त नहीं है और अदालत इसे अधिकार के रूप में वैध नहीं ठहरा सकती।जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने यह टिप्पणी याचिका खारिज करते हुए की, जिसमें किन्नर समुदाय की सदस्य रेखा देवी ने बधाई संग्रह के लिए क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र निर्धारित करने की मांग की थी।याचिकाकर्ता का कहना था कि विभिन्न किन्नर समूह एक-दूसरे के...

प्रथम दृष्टया कोई औचित्य नहीं: इलाहाबाद फाइलिंग्स पर NCLT प्रधान पीठ के संयुक्त स्क्रूटिनी आदेश पर हाईकोर्ट की टिप्पणी
'प्रथम दृष्टया कोई औचित्य नहीं': इलाहाबाद फाइलिंग्स पर NCLT प्रधान पीठ के 'संयुक्त स्क्रूटिनी' आदेश पर हाईकोर्ट की टिप्पणी

इलाहाबाद हाईकोर्ट) ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) से जुड़े एक मामले में टिप्पणी करते हुए कहा है कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि एनसीएलटी, इलाहाबाद में याचिकाओं की जांच (स्क्रूटिनी) के लिए कोई लंबित कमी (डिफेक्ट) नहीं थी, इसलिए दिल्ली स्थित प्रधान पीठ द्वारा “संयुक्त स्क्रूटिनी” का आदेश पारित करने का कोई औचित्य नहीं था।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल द्वारा प्रस्तुत निर्देशों का अवलोकन करते हुए कहा कि 23 फरवरी 2026 और 2 मार्च...

कोर्ट बिल्स और लोअर कोर्ट शब्दों के प्रयोग पर रोक, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को दिए निर्देश
'कोर्ट बिल्स' और 'लोअर कोर्ट' शब्दों के प्रयोग पर रोक, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को दिए निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आधिकारिक अभिलेखों और न्यायिक प्रक्रिया में 'कोर्ट बिल्स' तथा 'लोअर कोर्ट' जैसे शब्दों के प्रयोग पर आपत्ति जताते हुए रजिस्ट्री को इन्हें बंद करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि इन शब्दों के स्थान पर ट्रायल कोर्ट या संबंधित न्यायालय का स्पष्ट नाम इस्तेमाल किया जाए।जस्टिस अब्दुल शाहिद की पीठ ने यह निर्देश अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत गठित स्पेशल कोर्ट के लिए कोर्ट बिल्स शब्द के उपयोग पर नाराजगी जताते हुए दिया।अदालत ने कहा कि यह विधिक रूप से सही शब्दावली...

POSH Act | आंतरिक शिकायत समिति की रिपोर्ट और सिफारिशें अनिवार्य प्रकृति कीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
POSH Act | आंतरिक शिकायत समिति की रिपोर्ट और सिफारिशें अनिवार्य प्रकृति कीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम संबंधी पॉश कानून (POSH Act) के तहत आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की रिपोर्ट और सिफारिशें बाध्यकारी हैं मात्र सलाहात्मक नहीं।जस्टिस मनीष माथुर ने कहा कि यदि ICC अपनी जांच में किसी कर्मचारी को यौन उत्पीड़न का दोषी पाती है तो नियोक्ता या जिला अधिकारी के लिए उस आचरण को दुराचार मानते हुए अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करना अनिवार्य होगा।अदालत ने कहा,“कानून के उद्देश्य विधायिका की मंशा और कार्यस्थल पर...

ज़रूरी दस्तावेज़ होने के बावजूद बिड खारिज करना मनमाना और भेदभावपूर्ण: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टेंडर प्रक्रिया पर लगाई रोक
ज़रूरी दस्तावेज़ होने के बावजूद बिड खारिज करना मनमाना और भेदभावपूर्ण: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टेंडर प्रक्रिया पर लगाई रोक

यह देखते हुए कि याचिकाकर्ता की बिड ज़रूरी दस्तावेज़ देने के बावजूद खारिज कर दी गई, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि टेंडर देने वाले अधिकारी की फ़ैसला लेने की प्रक्रिया भेदभावपूर्ण है। इसलिए कोर्ट ने पूरी टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगा दी और प्रतिवादियों को टेंडर के तहत कोई भी कॉन्ट्रैक्ट करने से मना किया।यह देखते हुए कि कोर्ट आम तौर पर टेंडर प्रक्रिया में दखल नहीं देता, जस्टिस शेखर बी. सर्राफ़ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने कहा,“रिट याचिका के साथ लगाए गए दस्तावेज़ों से यह साफ़ है कि...

शादियों की जांच और युवा जोड़ों का पीछा कर रही UP Police: हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, कहा- परेशान करने वाला चलन
शादियों की जांच और युवा जोड़ों का पीछा कर रही UP Police: हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, कहा- परेशान करने वाला चलन

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में टिप्पणी की कि पुलिस उन युवा जोड़ों के खिलाफ FIR दर्ज करके और उनका पीछा करके बहुत बड़ी गलती कर रही है, जिन्होंने अपनी मर्ज़ी से शादी की है।पुलिस द्वारा अन्य अपराधों की जांच करने के बजाय आपसी सहमति से हुई शादियों की जांच करने और FIR दर्ज करने के 'परेशान करने वाले चलन' पर चिंता जताते हुए जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की बेंच ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को ऐसे मामलों में सुधारात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।इस निर्देश के साथ बेंच ने...