इलाहाबाद हाईकोट
सुबह 6 बजे खुला इलाहाबाद हाईकोर्ट, परीक्षा से तीन घंटे पहले अभ्यर्थी को मुख्य परीक्षा में बैठने की मिली राहत
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने रविवार सुबह 6 बजे विशेष सुनवाई कर सहायक अभियोजन अधिकारी (APO) 2025 मुख्य परीक्षा के एक अभ्यर्थी को बड़ी राहत दी।अदालत ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए अभ्यर्थी शालिनी पांडे को अस्थायी रूप से मुख्य परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी। परीक्षा उसी दिन सुबह 9 बजे शुरू होनी थी।मामले की अत्यधिक तात्कालिकता को देखते हुए मुख्य जस्टिस के 27 जून 2026 के प्रशासनिक आदेश के बाद जस्टिस अमिताभ कुमार राय ने अपने आवास पर विशेष बैठक कर सुनवाई की।शालिनी पांडे ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा...
मुश्किल समय में माता-पिता से मदद मिलने पर भी पति अपनी पत्नी के भरण-पोषण की कानूनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी को मुश्किल समय में उसके माता-पिता से आर्थिक मदद मिलने के आधार पर CrPC की धारा 125 के तहत पति से भरण-पोषण पाने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने कहा कि पत्नी के माता-पिता की आय को पत्नी की आय नहीं माना जा सकता। साथ ही माता-पिता की मदद पति की पत्नी के भरण-पोषण की कानूनी ज़िम्मेदारी का विकल्प नहीं हो सकती।बेंच ने यह टिप्पणी बुलंदशहर की फैमिली कोर्ट के दिसंबर 2023 के आदेश के खिलाफ पत्नी और उसके 2 नाबालिग बच्चों द्वारा दायर क्रिमिनल...
कल्याणकारी योजना के तहत पत्नी को घर मिलने से वह CrPC की धारा 125 के तहत गुज़ारा-भत्ता मांगने के अधिकार से वंचित नहीं होती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी कल्याणकारी योजना के तहत महिला को घर मिलना उसकी आजीविका का साधन नहीं माना जा सकता, जिससे वह अपने पति से CrPC की धारा 125 के तहत गुज़ारा-भत्ता मांगने के अधिकार से वंचित हो जाए।जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने यह भी कहा कि पति केवल यह कहकर अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने की कानूनी ज़िम्मेदारी से नहीं बच सकता कि वह बेरोज़गार है या बहुत कम कमाता है।इन बातों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने पति द्वारा दायर एक क्रिमिनल रिविज़न याचिका खारिज की। इस याचिका में फैमिली...
समान मामले में शामिल दो सह-आरोपियों में से एक को ज़मानत देने और दूसरे को ज़मानत न देने का मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जज से मांगा स्पष्टीकरण
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाज़ियाबाद के एडिशनल सेशन जज से स्पष्टीकरण मांगा। यह मामला एक ही आपराधिक केस में शामिल दो सह-आरोपियों की ज़मानत याचिकाओं पर अलग-अलग तरह से कार्रवाई करने से जुड़ा है।जस्टिस विवेक कुमार सिंह की बेंच ने स्पष्टीकरण मांगा और ज़ोर दिया कि न्यायिक एकरूपता और कानूनी सिद्धांतों का समान रूप से पालन संस्थागत महत्व के मामले हैं।बता दें, न्यायिक अधिकारी ने एक आरोपी को ज़मानत देने से इनकार किया, जबकि उसे लगी चोटें (जो कथित तौर पर उसी ने पहुंचाई थीं) मामूली प्रकृति की थीं। लेकिन बाद में...
UP Panchayat Elections: '5 साल से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता पंचायत का कार्यकाल', इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा चुनाव का टाइमलाइन
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव टाले जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि पंचायतों का कार्यकाल संविधान के तहत निर्धारित पांच वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि जिन प्रावधानों के आधार पर राज्य सरकार ने ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने और चुनाव स्थगित करने के आदेश जारी किए, उन्हें पहले ही असंवैधानिक घोषित किया जा चुका है। इसलिए ये आदेश non est (कानून की नजर में अस्तित्वहीन) प्रतीत होते हैं।जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की पीठ अरविंद...
देरी से दायर POSH शिकायतें केवल विलंब के आधार पर खारिज नहीं की जा सकतीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संरक्षण (POSH) कानून के तहत दायर शिकायतों को केवल देरी के आधार पर प्रारंभिक स्तर पर खारिज नहीं किया जा सकता। शिकायत में हुई देरी के कारणों पर विचार करना आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का दायित्व है।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने यह टिप्पणी करते हुए प्रयागराज स्थित हरिशचंद्र अनुसंधान संस्थान के खगोल भौतिकी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर के खिलाफ दायर यौन उत्पीड़न की शिकायतों की दोबारा जांच का निर्देश दिया।मामला उन छात्राओं की शिकायतों...
'24 कोसी परिक्रमा मार्ग' परियोजना पर रोक से इनकार, जनहित के आगे व्यक्तिगत हित को झुकना होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी 24 कोसी परिक्रमा मार्ग परियोजना पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि यह सरकार की नीति के अनुरूप एक महत्वपूर्ण जनहित परियोजना है और ऐसे मामलों में व्यक्तिगत हित को व्यापक जनहित के आगे झुकना होगा।जस्टिस जे. जे. मुनीर और जस्टिस अरुण कुमार की खंडपीठ ने उस याचिका को खारिज किया, जिसमें संभल में प्रस्तावित परिक्रमा मार्ग के निर्माण को रोकने की मांग की गई। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनकी भूमि पर कोल्ड स्टोरेज बनाने की योजना है और परियोजना के...
धार्मिक रीति-रिवाजों के लिए किसी खास सड़क का इस्तेमाल करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुहर्रम जुलूस के लिए रास्ते की मांग वाली याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही भारत के संविधान का अनुच्छेद 25 धर्म की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार देता है, लेकिन यह किसी समुदाय को धार्मिक रीति-रिवाजों के पालन के लिए किसी खास सड़क का इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं देता। [2026 LiveLaw (AB) 333]जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस अरुण कुमार की बेंच ने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों वाले जुलूसों के लिए रास्ते तय करने की ज़िम्मेदारी सिविल और पुलिस प्रशासन की होती है।कोर्ट ने यह बात संभल ज़िले के कुछ निवासियों की जनहित याचिका (PIL) को खारिज करते हुए कही।...
अपील लंबित रहते एक ही संपत्ति पर बुलडोजर कार्रवाई पर हाईकोर्ट सख्त, LDA की मंशा पर उठाए सवाल
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अपील लंबित रहने के दौरान केवल एक संपत्ति पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने को लेकर लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को कड़ी फटकार लगाई।अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि प्राधिकरण की कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण प्रतीत होती है और फिलहाल आगे की ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर रोक लगाई। जस्टिस पंकज भाटिया और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ कंचन सिंह द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।याचिका में आरोप लगाया गया था कि एलडीए ने उनकी संपत्ति के खिलाफ चुनिंदा और भेदभावपूर्ण तरीके से ध्वस्तीकरण की...
सिर्फ़ संसद ही एससी लिस्ट में बदलाव कर सकती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निषाद और केवट को 'माझवार' जाति का पर्यायवाची मानने की याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को याचिका खारिज की। इस याचिका में निषाद, कश्यप, केवट, मल्लाह और बिंद समुदायों को 'माझवार' जाति का पर्यायवाची या सामान्य नाम मानने का निर्देश देने की मांग की गई। माझवार जाति उत्तर प्रदेश में पहले से ही अधिसूचित अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) है।जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि न तो राज्य सरकारों और न ही अदालतों के पास मौजूदा अनुसूचित जाति की लिस्ट में बदलाव करने, उसमें फेरबदल करने या उनके लिए 'पर्यायवाची' तय करने का अधिकार...
पंचनामा रिपोर्ट पर गवाह के हस्ताक्षर न होने से उसकी गवाही खारिज नहीं की जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1998 के एक चर्चित हत्या मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर किसी प्रत्यक्षदर्शी गवाह की गवाही को खारिज नहीं किया जा सकता कि उसके हस्ताक्षर पंचनामा रिपोर्ट या अन्य पुलिस दस्तावेजों पर नहीं हैं।जस्टिस सलील कुमार राय और जस्टिस अजय कुमार-द्वितीय की खंडपीठ ने कहा कि कानून में कहीं भी यह अनिवार्य नहीं है कि पंचनामा रिपोर्ट में FIR का विवरण, आरोपियों के नाम, प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के नाम या उनके बयानों का सार दर्ज...
9 साल जेल में बिताने के बाद रेप आरोपी को राहत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 8 साल की पीड़िता के बयान में विरोधाभास का हवाला देते हुए किया बरी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसे व्यक्ति को बरी किया, जिसने 8 साल की बच्ची के साथ रेप और POCSO Act के तहत अपराध करने के आरोप में 9 साल से ज़्यादा जेल में बिताए।नाबालिग पीड़िता के बयान में विरोधाभास और बदलाव, उसके पिता के व्यवहार और मामले की पुष्टि करने वाले मेडिकल सबूतों की कमी को देखते हुए जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय की बेंच ने ट्रायल कोर्ट के 2019 के उस फैसले को रद्द किया, जिसमें आरोपी को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई।बेंच ने अपने फैसले में कहा,"पुष्टि करने वाले ठोस...
राम मंदिर चंदा चोरी विवाद: जांच की मांग वाली याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई से हाईकोर्ट का इनकार
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और कीमती वस्तुओं के कथित गबन के आरोपों की जांच की मांग करने वाली दो जनहित याचिकाओं पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने तत्काल सुनवाई से इनकार किया।जस्टिस पंकज भाटिया और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की अवकाशकालीन खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा कि मामले में तत्काल सुनवाई की कोई विशेष आवश्यकता नहीं है, क्योंकि राज्य सरकार पहले ही जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर चुकी है।पहली जनहित याचिका वकील मोहित अशोक ने दायर की। इसमें मंदिर में प्राप्त नकद, सोना और...
CrPC की धारा 200 और 202 के तहत मौखिक बयान प्रोटेस्ट पिटीशन में ज़रूरी बातों की कमी को पूरा नहीं कर सकते, जिससे आरोप पर शक पैदा होता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
CrPC की धारा 200 और 202 के तहत मजिस्ट्रेट द्वारा की जाने वाली जांच के दायरे पर एक अहम आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि प्रोटेस्ट पिटीशन में छूटी हुई ज़रूरी बातें आमतौर पर बाद में शिकायतकर्ता और गवाहों के मौखिक बयानों से नहीं जोड़ी जा सकतीं।बेंच ने कहा कि मजिस्ट्रेट द्वारा जांच/पूछताछ के दौरान पहली बार ऐसी बातें सामने लाना एक बड़ा बदलाव माना जाता है और इससे आरोप की सच्चाई पर "गंभीर संदेह" पैदा होता है।जस्टिस अनिल कुमार-X की बेंच ने हत्या के मामले में चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन...
हालातों की पूरी कड़ी के बिना सिर्फ़ 'आखिरी बार साथ देखे जाने' के आधार पर सज़ा नहीं दी जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1986 के मर्डर केस में आरोपी को बरी किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में 1986 के मर्डर केस में उम्रकैद की सज़ा पाए एक व्यक्ति (अपील करने वाले अकेले जीवित व्यक्ति) को बरी किया। कोर्ट ने कहा कि "आखिरी बार साथ देखे जाने" की थ्योरी "बहुत कमज़ोर सबूत" है और सिर्फ़ इसके आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।जस्टिस रजनीश कुमार और जस्टिस बबीता रानी की बेंच ने कहा कि अदालतों को यह पक्का करना चाहिए कि 'हालात से जुड़े सबूत' (circumstantial evidence) और घटनाओं की कड़ी इस तरह पूरी हो कि वे सिर्फ़ आरोपी के दोषी होने की ओर इशारा करें, और आरोपी के...
प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्य से अपराध साबित हो जाए तो मकसद का महत्व कम हो जाता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी अपराध की घटना प्रत्यक्षदर्शी गवाहों की विश्वसनीय गवाही से साबित हो जाती है तो केवल इस आधार पर अभियोजन का मामला खारिज नहीं किया जा सकता कि अपराध का मकसद सिद्ध नहीं हुआ या उसके बारे में कुछ संदेह है।जस्टिस रजनीश कुमार और जस्टिस जफीर अहमद की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए वर्ष 2015 में बाराबंकी में एक प्रमुख आश्रम प्रमुख की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए हरेराम चौधरी की दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी। अभियोजन के अनुसार, घटना 15 और 16 मई 2015 की...
नाबालिग से दुष्कर्म मामलों में जमानत सुनवाई पीड़ित की गैरहाजिरी में भी हो सकती है, यदि उसे नोटिस दिया गया हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 483(2) की व्याख्या करते हुए महत्वपूर्ण फैसला दिया। अदालत ने कहा कि नाबालिग से दुष्कर्म जैसे मामलों में जमानत अर्जी पर सुनवाई केवल इसलिए नहीं रोकी जा सकती, क्योंकि पीड़ित या शिकायतकर्ता अदालत में उपस्थित नहीं हुआ, बशर्ते उसे सुनवाई की सूचना विधिवत दे दी गई हो।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की एकलपीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य शिकायतकर्ता को सुनवाई का अवसर देना है। इसके बाद अदालत में उपस्थित होना या न होना उसकी अपनी इच्छा पर निर्भर करता...
पत्नी को जिंदा जलाकर दरवाजा बाहर से बंद करना हत्या की मंशा का स्पष्ट प्रमाण: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरकरार रखी दोषसिद्धि
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर ऐसी चोट पहुंचाई हो जो स्वाभाविक रूप से मृत्यु का कारण बन सकती है, तो केवल इस आधार पर हत्या का अपराध कम नहीं हो जाता कि पीड़ित की मौत कुछ दिनों बाद संक्रमण (सेप्टीसीमिया) के कारण हुई।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने आठ माह की गर्भवती पत्नी को मिट्टी का तेल डालकर जिंदा जलाने वाले पति की हत्या के मामले में दोषसिद्धि को बरकरार रखा।हालांकि, अदालत ने सुधारात्मक न्याय के सिद्धांत को ध्यान में...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहुंचा अयोध्या राम मंदिर में दान चोरी का मामला, याचिका में CBI जांच की मांग
अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान के फंड (जिसमें पैसे, सोना और चांदी शामिल हैं) की कथित "हेराफेरी" की सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) से स्वतंत्र, विश्वसनीय और तय समय-सीमा के भीतर जांच कराने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई।वकील मोहित अशोक द्वारा दायर इस याचिका में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खातों का व्यापक "स्पेशल फ़ोरेंसिक ऑडिट" कराने की भी मांग की गई।राष्ट्रीय दैनिक 'दैनिक...
वकीलों की 8 दिन की हड़ताल अवैध और अनुचित, बार पदाधिकारियों को अवमानना नोटिस: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अतिक्रमण हटाओ अभियान के विरोध में स्थानीय वकीलों द्वारा की गई 8 दिन की हड़ताल को "अवैध और अनुचित" करार दिया है। कोर्ट ने प्रशासन और पुलिस के खिलाफ भड़काऊ वीडियो प्रसारित करने तथा वकीलों में प्लास्टिक की लाठियां बांटने की घटनाओं पर भी कड़ी नाराजगी जताई।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राजीव भारती की पीठ ने सेंट्रल बार एसोसिएशन, लखनऊ और लखनऊ बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की...


















