इलाहाबाद हाईकोट

राज्य के आकार और जनसंख्या को देखते हुए यूपी की फोरेंसिक लैब का बुनियादी ढांचा अपर्याप्त: हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते कहा कि राज्य में केवल 1 स्टेट फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) और 12 रीजनल FSL हैं। कोर्ट ने माना कि उत्तर प्रदेश के आकार और जनसंख्या को देखते हुए यहां का मौजूदा फोरेंसिक लैब इंफ्रास्ट्रक्चर 'अपर्याप्त' है।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्र की बेंच ने उत्तर प्रदेश की फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के निदेशक को निर्देश दिया कि वे 4 सप्ताह के भीतर इस मुद्दे पर एक विस्तृत जवाब (काउंटर-एफिडेविट) दाखिल करें।यह आदेश वकील पीयूष गुप्ता द्वारा दायर जनहित...

कोर्ट के गलियारों में नारेबाजी और हंगामा करने वाले वकीलों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने की जा सकती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन वकीलों की पहचान करने का निर्देश दिया, जिन्होंने 27 अक्टूबर को जस्टिस अजय भनोट की कोर्ट में हुई घटना के विरोध में कोर्ट के गलियारों में नारेबाजी की और अदालती कार्यवाही में बाधा डाली।कोर्ट ने उनके इस व्यवहार को "पूरी तरह से अवमाननापूर्ण" करार दिया। कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए यूपी बार काउंसिल को भेज सकता है। साथ ही उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही भी शुरू कर सकता है।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान यह...

पहले अर्जी खारिज होने के बाद भी आरोप बढ़ाने की दूसरी अर्जी पर सुनवाई संभव: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट पहले अर्जी खारिज होने के बावजूद दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 216 के तहत आरोप में बदलाव करने या नया आरोप जोड़ने की दूसरी अर्जी पर विचार कर सकता है। हालांकि यह शक्ति ट्रायल कोर्ट के फैसला सुनाने से पहले तक ही इस्तेमाल की जा सकती है।जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव ने यह टिप्पणी आरोपी की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत दायर अर्जी खारिज करते हुए की। आरोपी ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उसके खिलाफ हत्या के...

ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम होने के बावजूद 138 लोगों के नाम अंतिम सूची से गायब, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अमेठी के 138 ग्रामीणों के नाम अंतिम मतदाता सूची से हटाए जाने पर उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब इन लोगों के नाम पहले की मतदाता सूची और ड्राफ्ट सूची में शामिल थे, तो संबंधित लोगों को सूचना दिए बिना अंतिम सूची से उनके नाम कैसे हटा दिए गए।जस्टिस जसप्रीत सिंह की सिंगल बेंच अमेठी जिले के गोपालपुर गांव, ग्राम पंचायत महमूदपुर बेनीपुर के 138 निवासियों की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनके नाम...

वकील के कथित अपमान का मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने दी जस्टिस अजय भनोट की अदालत का बहिष्कार करने की चेतावनी
इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने मंगलवार को जस्टिस अजय भनोट की अदालत का बहिष्कार करने की धमकी दी। एसोसिएशन का आरोप है कि कोर्ट की कार्यवाही के दौरान उन्होंने एक वकील को अपमानित किया और एक वरिष्ठ वकील का मजाक भी उड़ाया।27 अक्टूबर 2026 को लिखे गए एक पत्र में, जिसे रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को भेजा गया, बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने उसी दिन जस्टिस भनोट की अदालत में हुई घटना पर उचित कार्रवाई की मांग की।पत्र के अनुसार, जस्टिस भनोट ने अपने कोर्ट रूम...

हाईकोर्ट का UP DPG को निर्देश: पासपोर्ट वेरिफिकेशन रिपोर्ट में आपराधिक कार्यवाही की मौजूदा स्थिति का उल्लेख होना चाहिए
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया है कि पासपोर्ट आवेदनों के लिए दी जाने वाली पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट में आपराधिक कार्यवाही की मौजूदा स्थिति की जानकारी दी जाए। इसमें यह भी शामिल होना चाहिए कि क्या अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई और क्या अदालत ने मामले का संज्ञान लिया।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने कहा कि पुलिस अधिकारी केवल केस क्राइम नंबर का उल्लेख करके या किसी व्यक्ति के खिलाफ दाखिल चार्जशीट का विवरण देकर अपना काम पूरा नहीं मान...

IPC की धारा 467 के तहत जालसाजी का अपराध JJ Act के तहत 'जघन्य' नहीं, बल्कि 'गंभीर': इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि IPC की धारा 467 के तहत आने वाला अपराध, जिसमें कम-से-कम 7 साल की सजा का प्रावधान नहीं है, उसे 'जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015' (JJ Act) के उद्देश्यों के लिए "जघन्य अपराध" (Heinous Offence) नहीं माना जा सकता।जस्टिस जय प्रकाश तिवारी की बेंच ने कहा कि यह अपराध JJ Act के तहत "गंभीर अपराधों" (Serious Offences) की श्रेणी में आता है।अदालत ने आगे कहा कि इसलिए जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) ऐसे मामले को 'जघन्य अपराधों' पर लागू होने वाले कानूनी...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाल विवाह रोकने के लिए पूरे राज्य में निर्देश जारी किए; केवल आधार के आधार पर उम्र की पुष्टि करने पर रोक लगाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में बाल विवाह के पंजीकरण को रोकने के लिए पूरे राज्य में कड़े निर्देश जारी किए। इसके तहत विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र जारी करने से पहले दोनों पक्षों की जन्म तिथि की पुष्टि करना अनिवार्य कर दिया गया।कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह यह सुनिश्चित करे कि उसका ऑनलाइन पंजीकरण सिस्टम केवल आधार कार्ड में दर्ज उम्र के आधार पर प्रमाण पत्र जारी न करे। साथ ही अगर उम्र की पुष्टि नहीं हुई है या कोई विसंगति (Discrepancy) सामने आती है, तो आवेदन को आगे न बढ़ने दिया...

ऑनलाइन लीगल रिसर्च डेटाबेस पर 18% GST को चुनौती देने वाली PIL खारिज, इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी—2017 से टैक्स लागू, अब अचानक क्यों उठाया सवाल?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऑनलाइन लीगल रिसर्च और कानूनी शिक्षा से जुड़ी डेटा सेवाओं पर लगने वाले 18% Goods and Services Tax (GST) को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (PIL) खारिज कर दी है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब यह टैक्स वर्ष 2017 से लागू है, तो याचिकाकर्ता अधिवक्ता को 2026 में अचानक इसकी दर अनुचित क्यों लगने लगी।चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने अधिवक्ता अनिकेत गुप्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में यह नहीं बताया कि...

अविवाहित बहन भी किसान बीमा योजना के तहत 5 लाख रुपये की हकदार, परिवार की सूची में नाम होना जरूरी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री किसान एवं सर्वहित बीमा योजना को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी अविवाहित बहन को केवल इस आधार पर दुर्घटना मृत्यु बीमा की पांच लाख रुपये की राशि से वंचित नहीं किया जा सकता कि योजना के तहत परिवार के सदस्यों की सूची में बहन का उल्लेख नहीं है। यदि वह मृतक की कानूनी वारिस है, तो वह बीमा राशि पाने की हकदार हो सकती है।जस्टिस प्रकाश पाडिया और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि योजना के तहत बीमित परिवार के सदस्यों की सूची और परिवार के मुखिया या...

फैमिली कोर्ट एक्ट की धारा 14 साक्ष्य और प्राकृतिक न्याय के बुनियादी सिद्धांतों से छूट नहीं देती: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मां को सौंपी बच्चे की कस्टडी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट एक्ट 1984 की धारा 14 के तहत परिवार न्यायालयों को भारतीय साक्ष्य कानून के कठोर नियमों से जो सीमित छूट दी गई, उसका मतलब यह नहीं है कि वे साक्ष्य के सामान्य सिद्धांतों और प्राकृतिक न्याय के नियमों का पालन करने से मुक्त हो जाते हैं।अदालत ने स्पष्ट किया कि पिता के केवल हलफनामे के आधार पर बच्चे की कस्टडी का फैसला नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब पिता ने जिरह के लिए खुद को पेश ही नहीं किया हो।जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने बच्चे की...

यूपी सीलिंग एक्ट के तहत निर्धारित प्राधिकारी सिविल कोर्ट नहीं, उसके आदेश को अनुच्छेद 226 के तहत दी जा सकती है चुनौती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश जोत सीमा आरोपण अधिनियम, 1960 के तहत निर्धारित प्राधिकारी सिविल कोर्ट नहीं है। इसलिए उसके आदेश को संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दायर करके चुनौती दी जा सकती है।जस्टिस सैयद कमर हसन रिजवी ने कहा कि अधिनियम की धारा 37 के तहत निर्धारित प्राधिकारी को सिविल कोर्ट की कुछ शक्तियां और विशेषाधिकार दिए जाने का मतलब यह नहीं है कि उसे सिविल कोर्ट का दर्जा मिल जाता है। इन शक्तियों का इस्तेमाल केवल निर्धारित सीमा से अधिक जमीन का निर्धारण करने के लिए...

गैर-जमानती वारंट के बावजूद आरोपी को हाईकोर्ट में पेश नहीं किया गया, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेरठ SSP को शाम 4 बजे तक अदालत में रहने का दिया आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद आरोपी को अदालत में पेश नहीं किए जाने पर मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) BBGTS मूर्ति को शाम 4 बजे तक अदालत में मौजूद रहने का निर्देश दिया।कोर्ट ने कहा कि वारंट के निष्पादन में SSP के अधीनस्थ अधिकारियों की लापरवाही नजर आती है लेकिन वारंट तामील कराने के लिए जिम्मेदार अधिकारी होने के नाते आरोपी की हाईकोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित करना उनकी भी जिम्मेदारी थी। जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने SSP के खिलाफ प्रतिकूल आदेश पारित करने के...

70% वसूली की अनिवार्य शर्त पूरी किए बिना वरिष्ठता के आधार पर नियमित नियुक्ति का दावा नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश कलेक्शन अमीन सेवा नियमावली, 1974 के तहत निर्धारित न्यूनतम 70 प्रतिशत वसूली का मानक पूरा नहीं करने वाला मौसमी संग्रह अमीन केवल वरिष्ठता के आधार पर नियमित नियुक्ति का दावा नहीं कर सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि संतोषजनक कार्य सेवा नियमों के तहत पात्रता की अनिवार्य शर्त है और वरिष्ठता का लाभ केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को मिल सकता है, जो पहले पात्रता की शर्तें पूरी करते हों।जस्टिस गरिमा प्रसाद की पीठ ने कहा कि नियमावली के नियम 5 के तहत संतोषजनक कार्य करना नियमित...

जांच का मूल रिकॉर्ड पेश नहीं कर सका बैंक, बर्खास्तगी का आदेश रद्द; इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कर्मचारी को 50% बकाया वेतन देने का निर्देश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि नियोक्ता कर्मचारी के खिलाफ इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध नहीं कराता और अदालत के निर्देश के बावजूद विभागीय जांच का मूल रिकॉर्ड भी पेश नहीं करता तो अनुशासनात्मक कार्यवाही दोषपूर्ण हो जाती है। केवल यह कह देना कि रिकॉर्ड खो गया या कहीं रखकर भूल गए, नियोक्ता को अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करता। नियोक्ता को जांच के रिकॉर्ड से यह साबित करना होगा कि कर्मचारी को अपना बचाव करने का निष्पक्ष और प्रभावी अवसर दिया गया।जस्टिस गरिमा प्रसाद की पीठ ने पंजाब नेशनल...

पुलिस की लापरवाही से महिला को 12 दिन अतिरिक्त जेल में रहना पड़ा, हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस पर लगाया 25 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग की लापरवाही के कारण 12 दिन अतिरिक्त जेल में रहने वाली एक महिला को 25 हजार रुपये मुआवजा देने का निर्देश उत्तर प्रदेश पुलिस को दिया। अदालत ने कहा कि जमानत याचिका में राज्य के वकील को समय पर आवश्यक निर्देश उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण महिला की जमानत अर्जी पर समय से सुनवाई नहीं हो सकी और उसे जेल में अतिरिक्त समय बिताना पड़ा।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने निर्देश दिया कि पुलिस विभाग एक महीने के भीतर महिला को 25 हजार रुपये का भुगतान करे। साथ ही विभाग को यह...

नियुक्ति का अनुमोदन आदेश रिकॉर्ड में न मिलना धोखाधड़ी का सबूत नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि विभागीय रिकॉर्ड में नियुक्ति का अनुमोदन आदेश नहीं मिलना इस बात का प्रमाण नहीं है कि अनुमोदन कभी दिया ही नहीं गया। इससे भी कम आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि संबंधित कर्मचारी ने दस्तावेज तैयार कराकर या उनमें हेराफेरी करके नियुक्ति हासिल की थी।अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि राज्य सरकार किसी नियुक्ति को धोखाधड़ी से प्राप्त बताना चाहती है तो उसे यह बताना होगा कि कौन-सा गलत तथ्य पेश किया गया या कौन-सा दस्तावेज जाली है, इसके लिए कौन...

प्राधिकरण की गलती से विज्ञापन रद्द होने पर आवंटी को निवेश की भरपाई जरूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी प्राधिकरण की अपनी गलती के कारण विज्ञापन रद्द किया जाता है और आवंटी की ओर से किसी शर्त का उल्लंघन नहीं हुआ है, तो प्राधिकरण को आवंटी द्वारा किए गए निवेश की भरपाई करनी होगी।कोर्ट ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के रिटेल आउटलेट की डीलरशिप के लिए चयनित एक व्यक्ति को 15,78,486 रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया।जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की बेंच ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत राहत देते हुए कहा कि जब आवंटी ने आशय पत्र में...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने POCSO पीड़िताओं को आर्थिक सहायता के लिए अनिवार्य इंजरी रिपोर्ट की शर्त असंवैधानिक घोषित की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष योजना 2015 के तहत यौन अपराध की शिकार बच्चियों को आर्थिक सहायता देने के लिए पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट यानी प्रवेशात्मक यौन हमला दर्शाने वाली इंजरी रिपोर्ट अनिवार्य करने की शर्त को असंवैधानिक घोषित किया।कोर्ट ने कहा कि यह शर्त मनमानी है और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करती है क्योंकि इसके कारण पीड़िता को ऐसी मेडिकल रिपोर्ट न होने पर सहायता से वंचित किया जा सकता है जो कानूनी या व्यावहारिक कारणों से उपलब्ध ही न...

दुकानें तोड़ने से पहले दुकानदारों के पुनर्वास या मुआवजे पर विचार करें: इलाहाबाद हाईकोर्ट; अयोध्या DM के आचरण को बताया 'अत्यंत निंदनीय'
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अयोध्या में सरकारी अस्पताल के निर्माण के लिए छह दुकानदारों को उनकी दुकानें खाली कराए बिना और उन्हें पुनर्वास या मुआवजे का प्रस्ताव दिए बिना बेदखल करने और दुकानें ध्वस्त करने पर उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को फटकार लगाई है।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने अयोध्या के जिलाधिकारी के आचरण को "अत्यंत निंदनीय" बताया। कोर्ट ने कहा कि 300 बिस्तरों वाले सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल का निर्माण जनहित में है, लेकिन अपनी दुकानों से आजीविका कमाने वाले दुकानदारों को...
