इलाहाबाद हाईकोट

यह कहां से आया? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्रकार सत्यम वर्मा की NSA हिरासत में 'आंदोलनजीवी' शब्द के इस्तेमाल पर उठाया सवाल
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 (NSA) के तहत पत्रकार सत्यम वर्मा के खिलाफ पारित निवारक हिरासत आदेश का आधार बनाते हुए हिरासत के आधार पर 'आंदोलनजीवी' शब्द के उपयोग पर मौखिक रूप से सवाल उठाया।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की खंडपीठ ने एडिशनल एडवोकेट मनीष गोयल से सवाल किया कि इस तरह की शब्दावली आधिकारिक सरकारी हिरासत दस्तावेज़ में कैसे आ गई।जस्टिस श्रीधरन ने पूछा,"यह शब्द 'आंदोलनजीवी' कहां से आया? इसे आधिकारिक दस्तावेज़ में कैसे शामिल किया गया?" खंडपीठ ने...

पत्रकार सत्यम वर्मा की NSA हिरासत के खिलाफ याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा में अप्रैल 2026 के वर्कर्स प्रोटेस्ट में कथित भूमिका को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिए गए पत्रकार सत्यम वर्मा की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर गुरुवार को फैसला सुरक्षित रख लिया।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने 7 और 8 अक्टूबर को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा। सत्यम वर्मा ने 12 मई 2026 को गौतम बुद्ध नगर के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की धारा 3(2) सहपठित धारा 3(3) के तहत जारी हिरासत...

नेचुरल जस्टिस के उल्लंघन का आरोप लगाने वाली रिट याचिका वैकल्पिक उपाय के आधार पर शुरुआती चरण में खारिज नहीं की जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जिस रिट याचिका में नेचुरल जस्टिस (प्राकृतिक न्याय) के उल्लंघन का खास तौर पर ज़िक्र किया गया हो, उसे केवल इस आधार पर शुरुआती चरण में खारिज नहीं किया जा सकता कि कोई वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध है। इसके लिए पहले काउंटर-एफिडेविट (जवाब-हलफनामा) मंगाना ज़रूरी है और दोनों पक्षों के तर्कों के आधार पर याचिका की जांच होनी चाहिए।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने कहा,"यह निष्कर्ष निकालना कि कोई मामला नेचुरल जस्टिस के अपवाद के दायरे में नहीं आता, अपने आप...

पुलिस स्टेशन बुलाकर पूछताछ से पहले भी बताना होगा वकील रखने का अधिकार, गिरफ्तारी टालकर सुरक्षा से नहीं बच सकती पुलिस: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 38 के तहत पुलिस को किसी संदिग्ध को पूछताछ के दौरान अपनी पसंद के वकील की मौजूदगी के अधिकार के बारे में औपचारिक गिरफ्तारी से पहले भी बताना होगा। पुलिस किसी व्यक्ति को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किए बिना थाने बुलाकर कई घंटे पूछताछ करके इस कानूनी सुरक्षा से बच नहीं सकती।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की डिवीजन बेंच ने कहा कि पुलिस यदि किसी संदिग्ध को पूछताछ के लिए थाने लाती है तो उस समय भी उसे...

स्पेशल TET से इन-सर्विस शिक्षकों को भविष्य की भर्ती में वरीयता नहीं मिलेगी, अनुच्छेद 14-16 का उल्लंघन भी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पहले से सेवा में कार्यरत शिक्षकों के लिए स्पेशल शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी स्पेशल TET आयोजित करने का फैसला संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन नहीं करता।हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह विशेष परीक्षा केवल इन-सर्विस शिक्षकों को वह अनिवार्य योग्यता हासिल करने का अवसर देती है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने उनके लिए जरूरी माना है। इससे नियमित TET पहले ही पास कर चुके उम्मीदवारों की तुलना में इन शिक्षकों को भविष्य की भर्ती में कोई अतिरिक्त वरीयता नहीं...

PITNDPS Act: हिरासत में लिए गए व्यक्ति को डिटेनिंग अथॉरिटी के पास प्रतिनिधित्व का अधिकार बताना जरूरी, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिरासत आदेश रद्द किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि नशीली दवाओं और मन:प्रभावी पदार्थों की अवैध तस्करी रोकथाम अधिनियम (PITNDPS Act) के तहत हिरासत में लिए गए व्यक्ति को यह स्पष्ट रूप से बताया जाना जरूरी है कि वह हिरासत का आदेश जारी करने वाले डिटेनिंग अथॉरिटी के समक्ष भी अपना प्रतिनिधित्व कर सकता है। केवल राज्य सरकार के सामने प्रतिनिधित्व करने के अधिकार की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है, भले ही हिरासत का आदेश जारी करने वाला अधिकारी किसी दूसरी हैसियत से राज्य सरकार की ओर से उस आदेश को रद्द करने की शक्ति रखता हो।जस्टिस अतुल...

प्रतिनिधि क्षमता में मुकदमा दायर करने के लिए कोर्ट की अनुमति न लेने पर केस खारिज नहीं होगा, फैसला सिर्फ पक्षकारों पर लागू होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 1 नियम 8 के तहत प्रतिनिधि क्षमता में दायर मुकदमा केवल इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता कि वादी ने कोर्ट से प्रतिनिधि मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं मांगी थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में मुकदमा वादियों का व्यक्तिगत मुकदमा माना जाएगा और उसका फैसला केवल उस मुकदमे के पक्षकारों पर बाध्यकारी होगा, पूरे समुदाय पर नहीं।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने कहा कि आदेश 1 नियम 8 का उद्देश्य यह है कि यदि कोर्ट से अनुमति...

दादा-दादी/नाना-नानी से अचानक अलग होने पर बच्चा परेशान हो सकता है: राजस्थान हाईकोर्ट ने पिता के लिए चरणबद्ध कस्टडी की व्यवस्था तय की
राजस्थान हाईकोर्ट ने 7 साल के बच्चे की कस्टडी उसके पिता को देने से इनकार किया। कोर्ट ने पाया कि बच्चा जन्म से ही अपने नाना-नानी के साथ रह रहा है, इसलिए अचानक उसे कहीं और भेजने से उसे मानसिक परेशानी हो सकती है, जो बच्चे के हित में नहीं होगा।जस्टिस मुन्नूरी लक्ष्मण और जस्टिस संगीता शर्मा की बेंच ने पिता को चरणबद्ध तरीके से मुलाक़ात और कुछ समय के लिए कस्टडी के अधिकार दिए। कोर्ट ने माना कि पिता को ऐसा माहौल बनाने का पूरा अधिकार है जिससे बाद में बच्चा उनके साथ रहने के लिए तैयार हो सके।बेंच ने...

'ज़हरीले पेड़ का फल': इलाहाबाद हाईकोर्ट का फ़ैसला - बाद में हुई गिरफ़्तारी या रिमांड से गैर-कानूनी हिरासत सही नहीं हो सकती, ₹30,000 का मुआवज़ा देने का आदेश
अनुच्छेद 21 और 22 के तहत संवैधानिक सुरक्षा के संदर्भ में 'ज़हरीले पेड़ का फल' (Fruit of the Poisonous Tree) सिद्धांत को लागू करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बाद में की गई औपचारिक गिरफ़्तारी और रिमांड, पहले की गैर-कानूनी हिरासत को वैध नहीं बना सकती।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने कहा कि जब किसी व्यक्ति की शुरुआती हिरासत गैर-कानूनी होती है तो बाद में की गई गिरफ़्तारी (भले ही उसके लिए वैध आधार हों) और उससे जुड़ी रिमांड की कार्यवाही भी अमान्य हो जाती है।बेंच ने यह टिप्पणी रवि...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टाउन प्लानिंग में कमियों को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए PIL शुरू की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टाउन प्लानिंग में कमियों, खासकर शहरों, कस्बों और कॉलोनियों के लिए लेआउट प्लान बनाते समय कचरा डंपिंग/कलेक्शन के लिए जगह तय न करने और ट्रांसफॉर्मर लगाने की व्यवस्था न करने को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए एक जनहित याचिका (PIL) शुरू की।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने कहा कि इस मुद्दे पर विचार करने की ज़रूरत है, क्योंकि यह टाउन प्लानिंग से जुड़ा है और डेवलपमेंट अथॉरिटी (जिसमें उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद भी शामिल है) द्वारा विकसित कॉलोनियों में रहने वाले...

MTP नियमों के तहत सिर्फ़ वैवाहिक अलगाव गर्भपात का आधार नहीं हो सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महिला की याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 'मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ़ प्रेग्नेंसी रूल्स, 2003' (2021 में संशोधित) के तहत सिर्फ़ वैवाहिक अलगाव को गर्भावस्था को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने (गर्भपात) का आधार नहीं माना जा सकता।कोर्ट ने कहा कि सामान्य वैवाहिक मतभेदों की तुलना वैवाहिक स्थिति में बदलाव, जैसे 'तलाक' या 'विधवापन' से नहीं की जा सकती; नियम 3B(c) में गर्भावस्था के दौरान वैवाहिक स्थिति में बदलाव के संदर्भ में विशेष रूप से इनका उल्लेख किया गया।बता दें, नियम 3B(c) गर्भावस्था के दौरान वैवाहिक स्थिति में बदलाव...

NCR के पेट्रोल पंपों पर ANPR कैमरे ज़रूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रिटेलर्स पर खर्च का बोझ डालने के राज्य सरकार के अधिकार पर सवाल उठाए
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते सवाल उठाया कि क्या नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में पेट्रोल और डीज़ल रिटेल आउटलेट मालिकों को 'एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन' (CAQM) के निर्देशों के तहत राज्य सरकार के आदेश के अनुसार 'ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन' (ANPR) कैमरे लगाने का खर्च उठाने के लिए मजबूर किया जा सकता है।जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच ने कहा कि 'गंभीर' मुद्दा यह है कि क्या राज्य सरकार का 4 जून, 2026 का पत्र, जिसमें पेट्रोल और डीज़ल रिटेल आउटलेट्स को 30 सितंबर, 2026 तक ANPR...

मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला का 2 साल से ज़्यादा समय तक पता नहीं लगा पाई UP Police, हाईकोर्ट ने CBI को जांच सौंपी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 42 साल की एक महिला के लापता होने की जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को सौंप दी, क्योंकि उत्तर प्रदेश पुलिस दो साल से ज़्यादा समय तक उसका पता नहीं लगा पाई।जस्टिस संदीप जैन की बेंच ने यह निर्देश तब दिया, जब उन्होंने पाया कि पुलिसकर्मियों की तमाम कोशिशों के बावजूद, सुदामा देवी नाम की उस महिला का पता नहीं चल सका और न ही उसे बरामद किया जा सका।कोर्ट ने गौर किया कि महिला 8 सितंबर, 2024 से लापता है और पुलिस ने 9 सितंबर, 2024 को महाराजगंज ज़िले के पुरंदरपुर पुलिस स्टेशन...

अगर शोर से जुड़े नियमों का पालन किया जाए तो सहारनपुर मस्जिद में 5 बार अज़ान में दखल न दें: इलाहाबाद हाईकोर्ट का पुलिस को निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहारनपुर पुलिस और ज़िला प्रशासन को निर्देश दिया कि वे शहर की आयशा मस्जिद में याचिकाकर्ताओं के पांच बार अज़ान पढ़ने के अधिकार में दखल न दें। यह निर्देश इस शर्त पर दिया गया कि वे 'ध्वनि प्रदूषण (नियमन और नियंत्रण) नियम, 2000' और अज़ान के लिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर हाईकोर्ट के 2020 के फ़ैसले का सख्ती से पालन करेंगे।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत शहनवाज़ खान और पांच अन्य लोगों की याचिका का निपटारा करते हुए यह निर्देश जारी...

बच्चों के अधिकार और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का हिंदी ई-बुकलेट जारी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपनी ऐतिहासिक निर्णय ई-बुकलेट श्रृंखला का छठा संस्करण जारी किया। इसमें बच्चों के अधिकार और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रेन अलायंस बनाम एस. हरिश का हिंदी अनुवाद शामिल किया गया।यह ई-बुकलेट 30 सितंबर 2026 को AI आधारित कानूनी अनुवाद सलाहकार, E-AHCR और ILR समिति द्वारा जारी किया गया। ई-बुकलेट में शामिल सुप्रीम कोर्ट का फैसला 23 सितंबर 2024 का है, जो आपराधिक अपील संख्या 2161-2162/2024 में सुनाया गया। इस फैसले में बच्चों से संबंधित...

60 साल की उम्र में रिटायरमेंट का विकल्प न चुनने पर मदरसा शिक्षिका की ग्रेच्युटी नहीं रोकी जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी मदरसा शिक्षिका को केवल इस आधार पर ग्रेच्युटी से वंचित नहीं किया जा सकता कि उसने 60 वर्ष की उम्र में रिटायर होने का विकल्प नहीं चुना और 62 वर्ष की उम्र तक सेवा जारी रखी। कोर्ट ने कहा कि जब संबंधित अधिकारियों ने शिक्षिका को निर्धारित आयु के बाद भी सेवा जारी रखने की अनुमति दी तो उसी अवधि तक सेवा करने को ग्रेच्युटी रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता।जस्टिस इरशाद अली ने कहा,“जिस परिस्थिति को ग्रेच्युटी से वंचित करने का आधार बनाया गया वही परिस्थिति वास्तव में याचिकाकर्ता...

गिरफ्तारी के आधार न बताने की चुनौती धारा 167 के चरण तक ही, आरोप तय होने के बाद नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत गिरफ्तारी के आधार की जानकारी नहीं दिए जाने से जुड़ी प्रारंभिक गिरफ्तारी और रिमांड को चुनौती केवल दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 167 के तहत चलने वाले चरण के दौरान ही दी जा सकती है। आरोप तय होने और मुकदमे की कार्यवाही शुरू हो जाने के बाद इस आधार पर प्रारंभिक गिरफ्तारी और रिमांड को चुनौती नहीं दी जा सकती।जस्टिस मनीष माथुर ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें ऐसे आरोपी की औपचारिक गिरफ्तारी और उसके बाद दिए गए रिमांड...

लखनऊ चिड़ियाघर में वन्यजीवों के भोजन की आपूर्ति के टेंडर को चुनौती देने वाली याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने कहा- अंतिम फैसला चिड़ियाघर प्रबंधन का
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान में वन्यजीवों के लिए खाद्य सामग्री की आपूर्ति के टेंडर को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की। कोर्ट ने कहा कि टेंडर में सबसे योग्य बोलीदाता का चयन करते समय संबंधित संस्थान की वास्तविक जरूरतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अंतिम निर्णय संबंधित मालिक या प्राधिकरण को आवश्यक लचीलापन और व्यावहारिकता के साथ लेने का अधिकार है।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अब्धेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि जब किसी टेंडर को चुनौती दी जाती है तो अक्सर पूरा...

सहकारी समिति के चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की बैठक सिर्फ जिलाधिकारी बुला सकते हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सहकारी समिति के चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक बुलाने का अधिकार केवल जिलाधिकारी के पास है। उत्तर प्रदेश सहकारी समिति नियमावली, 1968 के नियम 465 के तहत जिलाधिकारी ही निर्धारित प्राधिकारी हैं और यह अधिकार किसी दूसरे अधिकारी को सौंपा या आगे हस्तांतरित नहीं किया जा सकता।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि यदि किसी अन्य अधिकारी ने अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक की तारीख, समय और स्थान तय किया है तो वह कानूनन सक्षम प्राधिकारी के अधिकार...

शिक्षा मित्र प्री-TET इन-सर्विस शिक्षकों के बराबर होने का अधिकार नहीं, उन्हें बाहर रखना अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि इन-सर्विस शिक्षकों (सेवा में पहले से मौजूद शिक्षकों) के लिए आयोजित 'स्पेशल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट' (Special TET) से शिक्षा मित्रों को बाहर रखना भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन नहीं है।कोर्ट ने कहा कि जब 'टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट' (TET) अनिवार्य किया गया, तब जो शिक्षक पहले से सेवा में थे, वे एक अलग श्रेणी (class) में आते हैं। 'स्पेशल TET' अंतरिम उपाय है, जो उस श्रेणी के शिक्षकों को वह योग्यता हासिल करने में मदद करता है, जो सेवा में आने के बाद उन पर लागू...
