बॉम्बे हाईकोर्ट
मजिस्ट्रेट सिर्फ़ ज़्यादा सज़ा के कारण केस को सेशंस कोर्ट में नहीं भेज सकता, उसे कारण बताने होंगे: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि हालांकि क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC) की धारा 323 के तहत मजिस्ट्रेट को जांच या ट्रायल के किसी भी स्टेज पर केस को सेशंस कोर्ट में भेजने का अधिकार है, लेकिन इस शक्ति का इस्तेमाल बिना सोचे-समझे या सिर्फ़ अपराध के लिए तय सज़ा की गंभीरता के आधार पर नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट को अपने सामने दर्ज सबूतों पर चर्चा करने के बाद कारणों के साथ एक राय बनानी होगी, ताकि यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि केस की सुनवाई सेशंस कोर्ट में होनी चाहिए।जस्टिस प्रवीण एस. पाटिल चीफ...
[महाराष्ट्र स्टाम्प एक्ट] 'ज़ब्त करने की शक्ति संपत्ति के अधिकारों को प्रभावित करती है, इसका प्रयोग केवल रजिस्ट्रिंग अधिकारी ही कर सकता है': बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि महाराष्ट्र स्टाम्प एक्ट, 1958 की धारा 33A के तहत किसी दस्तावेज़ को ज़ब्त करने की शक्ति गंभीर कानूनी शक्ति है, जिसका नागरिक के संपत्ति अधिकारों पर सीधा नागरिक परिणाम होता है। इसलिए इसका प्रयोग केवल उसी "रजिस्ट्रिंग अधिकारी" द्वारा किया जा सकता है, जिसके सामने दस्तावेज़ पंजीकृत किया गया। कोर्ट ने कहा कि धारा 33A किसी अन्य राजस्व अधिकारी या सीनियर अधिकारी को केवल प्रशासनिक पदानुक्रम के आधार पर ऐसी शक्ति मानने की अनुमति नहीं देती है।जस्टिस अमित बोरकर रिट याचिका पर...
शौचालय की सुविधा अनुच्छेद 21 के तहत बुनियादी मानव अधिकार: बॉम्बे हाइकोर्ट ने मुंबई की झुग्गी बस्तियों में स्वच्छता सुधार के निर्देश दिए
बॉम्बे हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि पर्याप्त स्वच्छता और शौचालय की सुविधा संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। यह अधिकार झुग्गी बस्तियों में रहने वाले नागरिकों को भी समान रूप से प्राप्त है, भले ही वे झुग्गियां नगर निगम की भूमि पर अतिक्रमण कर बनाई गई हों। हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक बार जब बड़ी आबादी किसी क्षेत्र में निवास करती है तो नगर निगम अपने वैधानिक और संवैधानिक दायित्वों से मुंह नहीं मोड़ सकता।जस्टिस जी. एस. कुलकर्णी और जस्टिस आरती साठे की...
नाबालिग पीड़िता की पीड़ा से आंख नहीं मूंद सकता कोर्ट: बॉम्बे हाइकोर्ट ने 83 वर्षीय बलात्कार दोषी की सज़ा घटाने से इनकार किया
बॉम्बे हाइकोर्ट (गोवा बेंच) ने एक अहम फैसले में 83 वर्षीय व्यक्ति की सज़ा कम करने से इनकार करते हुए स्पष्ट कहा कि ऐसे जघन्य अपराधों में आरोपी की उम्र को सहानुभूति का आधार नहीं बनाया जा सकता। हाइकोर्ट ने कहा कि अदालत पीड़िता की उम्र और उसके साथ हुए अत्याचार की अनदेखी करते हुए नेल्सन की आंख नहीं फेर सकती।जस्टिस श्रीराम वी. शिरसाट की एकल पीठ ने 63 पन्नों के विस्तृत आदेश में 2012 के मामले में 9 वर्षीय बच्ची के यौन शोषण के दोषी मार्टिन सोआरेस की 10 साल की कठोर कारावास की सज़ा को बरकरार रखा। कोर्ट ने...
ट्रायल कोर्ट में 2863 जजों की भर्ती पर हाइकोर्ट ने मांगा ब्लूप्रिंट, कहा- तेज़ न्याय के लक्ष्य के लिए त्वरित कदम ज़रूरी
बॉम्बे हाइकोर्ट ने महाराष्ट्र की निचली न्यायपालिका में हाल ही में स्वीकृत 2863 नए पदों पर न्यायिक अधिकारियों की भर्ती को लेकर हाइकोर्ट प्रशासन से एक स्पष्ट ब्लूप्रिंट प्रस्तुत करने को कहा। कोर्ट ने जोर देते हुए कहा कि नागरिकों को समय पर न्याय दिलाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्य सरकार और हाइकोर्ट दोनों को प्रशासनिक स्तर पर तेज़ी से कदम उठाने होंगे।जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस सारंग कोतवाल की खंडपीठ ने 28 जनवरी को पारित अपने आदेश में कहा,“हम इस बात को लेकर सतर्क हैं कि न्यायिक अधिकारियों...
साहयोग पोर्टल और आईटी नियमों के 2025 संशोधन को लेकर बॉम्बे हाइकोर्ट में चुनौती
प्रसिद्ध स्टैंड-अप कॉमेडियन और व्यंग्यकार कुणाल कामरा ने सोशल मीडिया कंटेंट को ब्लॉक करने से जुड़े साहयोग पोर्टल और सूचना प्रौद्योगिकी नियमों में किए गए 2025 के संशोधन को बॉम्बे हाइकोर्ट में चुनौती दी।कामरा ने आईटी नियम 2021 के नियम 3(1)(d) में किए गए बदलाव को असंवैधानिक बताते हुए कहा है कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गंभीर असर डालता है।कामरा की याचिका में दलील दी गई कि साहयोग पोर्टल के ज़रिये कंटेंट हटाने या ब्लॉक करने की जो व्यवस्था बनाई गई, वह IT Act की धारा 69A में तय कानूनी प्रक्रिया और...
बच्चे पर हमले की अकेली घटना गोवा बाल अधिनियम के तहत 'बाल शोषण' नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार (3 फरवरी) को अपने रिश्तेदार के बच्चे के सिर पर लोहे की रॉड से मारकर खून निकलने वाली चोट पहुंचाने के आरोप में दोषी ठहराई गई दो महिलाओं को बरी करते हुए कहा कि गोवा बाल अधिनियम, 2003 के तहत बच्चे पर हमले की सिर्फ एक अकेली घटना 'बाल शोषण' का अपराध नहीं हो सकती।गोवा बेंच में बैठे सिंगल-जज जस्टिस श्रीराम शिरसाट ने अनीता और कुंडा नाइक (दोनों सगी बहनें) द्वारा दायर अपील पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने पणजी की एक चिल्ड्रन स्पेशल कोर्ट के 30 जून, 2016 के फैसले को चुनौती दी, जिसमें...
चैरिटी कमिश्नर की शक्तियां निगरानी के लिए, नैतिक सुधार के लिए नहीं: बॉम्बे हाइकोर्ट
बॉम्बे हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स अधिनियम की धारा 41ए के तहत चैरिटी कमिश्नर की शक्तियां केवल ट्रस्ट के प्रशासन की निगरानी तक सीमित हैं। उनका उपयोग 'नैतिक सुधार' के लिए नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर हाइकोर्ट ने नासिक स्थित एक स्कूल को दो प्रमुख अखबारों में सार्वजनिक माफी प्रकाशित करने का निर्देश देने वाला आदेश रद्द कर दिया।यह मामला उस शिकायत से जुड़ा था, जिसमें कुछ अभिभावकों ने आरोप लगाया कि स्कूल ने स्वयं को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से संबद्ध बताकर उन्हें...
हाइपरटेंशन, डायबिटीज़ को 'लाइफस्टाइल डिज़ीज़' बताकर सैन्य कर्मियों को दिव्यांगता पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाइकोर्ट
बॉम्बे हाइकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि हाइपरटेंशन, डायबिटीज़, स्पॉन्डिलाइटिस जैसी बीमारियों को केवल 'लाइफस्टाइल' या 'संवैधानिक' रोग बताकर सशस्त्र बलों के कर्मियों को दिव्यांगता पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता। हाइकोर्ट ने सशस्त्र बल अधिकरण (AFT), मुंबई का निर्णय बरकरार रखा, जिसमें सेना और नौसेना के कर्मियों को यह मानते हुए दिव्यांगता पेंशन देने का निर्देश दिया गया कि ये बीमारियां उनकी सेवा के दौरान उत्पन्न हुईं या सेवा की परिस्थितियों के कारण बढ़ीं।चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखाड...
बिना जांच के प्रोबेशनरी टीचर को नौकरी से निकालने के लिए स्टूडेंट को 'रोमांटिक' मैसेज भेजना काफी: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में यह फैसला सुनाया कि अगर कोई प्रोबेशन पर टीचर स्कूल के घंटों के बाद किसी स्टूडेंट के साथ लगातार मैसेजिंग करता है, जो उत्पीड़न के बराबर हो सकता है, ऐसी स्थिति में स्कूल मैनेजमेंट महाराष्ट्र प्राइवेट स्कूल कर्मचारी (सेवा की शर्तें) रेगुलेशन एक्ट, 1977 के प्रावधानों का इस्तेमाल करके बिना किसी जांच वगैरह के टीचर की सर्विस खत्म कर सकता है।सिंगल-जज जस्टिस सोमशेखर सुंदरेशन ने गावित गुलाबसिंह सुका की याचिका पर सुनवाई की, जिन्होंने रायगढ़ जिले के म्हासाला के स्कूल के फैसले को...
"पुलिस एस्कॉर्ट के लिए पैसे दो या मत जाओ": बॉम्बे हाईकोर्ट ने भाई की मौत पर शोक मनाने के लिए इमरजेंसी पैरोल की याचिका पर अबू सलेम से कहा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को अंडरवर्ल्ड गैंगस्टर अबू सलेम से कहा कि अगर वह अपने भाई की मौत के बाद उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ इलाके में अपने पैतृक स्थान पर जाने के लिए इमरजेंसी पैरोल लेना चाहता है, तो उसे पुलिस एस्कॉर्ट पार्टी का खर्च देना होगा, जो उसके साथ जाएगी।बता दें, सलेम के भाई अबू हाकिम अंसारी की 14 नवंबर, 2025 को मौत हो गई और उनकी मौत पर शोक मनाने के लिए, 1993 मुंबई बम धमाकों के मुख्य आरोपी ने 14 दिन की इमरजेंसी पैरोल के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की।सलेम ने तर्क दिया कि चूंकि वह पिछले लगभग...
Mumbai Municipal Act | धारा 314 के तहत नोटिस मशीनी तरीके से जारी नहीं किया जा सकता, कमिश्नर का विशिष्ट उल्लंघन से संतुष्ट होना ज़रूरी: हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि मुंबई नगर निगम अधिनियम, 1888 (MMC Act) की धारा 314 के तहत जारी किया गया नोटिस तब तक मान्य नहीं होगा, जब तक उसे मशीनी तरीके से और यह बताए बिना जारी किया जाता है कि किन विशिष्ट कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन किया गया।कोर्ट ने कहा कि धारा 314 के तहत शक्ति का प्रयोग तभी किया जा सकता है, जब कमिश्नर इस बात से संतुष्ट हों कि MMC Act की धारा 312, 313 या 313A का उल्लंघन हुआ, यह संतुष्टि नोटिस में साफ तौर पर दिखनी चाहिए।जस्टिस जितेंद्र जैन सिटी सिविल कोर्ट द्वारा 23 फरवरी...
ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स नियम | 60 दिन में सैंपल जांच अनिवार्य, लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश: बॉम्बे हाइकोर्ट
बॉम्बे हाइकोर्ट की नागपुर पीठ ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स नियमों के पालन में हो रही गंभीर लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई। हाइकोर्ट ने कहा कि तय समय-सीमा के भीतर दवाओं के सैंपल की जांच न होना न केवल अभियोजन को कमजोर करता है, बल्कि इससे जनस्वास्थ्य भी गंभीर रूप से प्रभावित होता है, क्योंकि घटिया गुणवत्ता की दवाएं बाजार में बनी रहती हैं।जस्टिस एम.एम. नेरलिकर की पीठ एम/एस ऑस्कर रेमेडीज प्रा. लि. के निदेशकों अश्विनी लांबा और अन्य द्वारा दायर आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में गढ़चिरोली...
भीमा कोरेगांव मामला: बॉम्बे हाइकोर्ट ने 5 साल की जेल के बाद रमेश गाइचोर और सागर गोरखे को दी जमानत
बॉम्बे हाइकोर्ट ने शुक्रवार को एल्गार परिषद–भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ्तार किए गए रमेश गाइचोर और सागर गोरखे को जमानत दी। दोनों आरोपी वर्ष 2020 से जेल में बंद थे। हाइकोर्ट ने लंबी अवधि तक हिरासत में रहने को आधार बनाते हुए यह राहत दी।जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस श्याम चांडक की डिवीजन बेंच ने यह आदेश पारित किया।गौरतलब है कि रमेश गाइचोर और सागर गोरखे, दोनों कबीर कला मंच के सदस्य हैं। उन्हें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 7 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया था।NIA के अनुसार, दोनों ने 31 दिसंबर 2017 को...
हाइकोर्ट की फटकार के अगले ही दिन मंत्री के बेटे ने किया आत्मसमर्पण, महाड दंगे मामले में बड़ी कार्रवाई
बॉम्बे हाइकोर्ट द्वारा महाराष्ट्र सरकार को कड़ी फटकार लगाए जाने के एक दिन बाद महाड दंगा मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया। राज्य के कैबिनेट मंत्री भरत गोगावले के बेटे विकास गोगावले और इस मामले के अन्य आरोपियों ने स्थानीय पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। यह जानकारी गुरुवार को हाइकोर्ट को दी गई।जस्टिस माधव जामदार ने एक दिन पहले इस मामले में महाराष्ट्र सरकार की तीखी आलोचना की थी। उन्होंने एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद विकास गोगावले की गिरफ्तारी न होने पर गंभीर सवाल उठाते हुए राज्य...
'क्या महाराष्ट्र में यही कानून का राज है?' : हाईकोर्ट ने मंत्री के बेटे को एक महीने तक गिरफ्तार न करने पर पुलिस से पूछा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को महाराष्ट्र सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि वह कैबिनेट मंत्री भरत गोगावले के बेटे विकास को गिरफ्तार करने में नाकाम रही है, जिसे पिछले महीने रायगढ़ जिले के महाड में नगर पालिका चुनावों से जुड़े दंगे के मामले में आरोपी बनाया गया था। कोर्ट ने टिप्पणी की कि क्या मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस 'इतने लाचार' हैं कि वह इस मामले में कुछ नहीं कर पा रहे हैं, जिसमें उनके अपने मौजूदा मंत्री का बेटा 'फरार' बताया जा रहा है, लेकिन वह अपने पिता के लगातार संपर्क में है।सिंगल-जज...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पीएम मोदी पर 'आपत्तिजनक पोस्ट' के खिलाफ FIR पर यूट्यूबर डॉ. संग्राम पाटिल की याचिका पर नोटिस जारी किया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार (22 जनवरी) को यूट्यूबर और यूनाइटेड किंगडम (UK) में रहने वाले डॉक्टर संग्राम पाटिल की याचिका पर महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया, जिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य बीजेपी नेताओं के खिलाफ कथित तौर पर 'आपत्तिजनक' सोशल मीडिया पोस्ट करने का मामला दर्ज किया गया।भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक पाटिल, जो हाल ही में मुंबई आए थे, उन्हें शहर के एनएम जोशी मार्ग पुलिस स्टेशन में अपने खिलाफ दर्ज FIR के बारे में तब पता चला, जब इमिग्रेशन अधिकारियों ने उनके खिलाफ पेंडिंग लुक आउट...
वैध प्रिविलेज पास वाले रेलवे कर्मचारी को यात्रा एंट्री न होने के बावजूद 'बोनाफाइड यात्री' माना जाएगा: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि रेलवे कर्मचारी के पास मौजूद वैध प्रिविलेज पास पर यात्रा की जानकारी दर्ज न होने से ही, कर्मचारी को रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 124A के तहत बोनाफाइड यात्री मानने से इनकार नहीं किया जा सकता।कोर्ट ने कहा कि अगर पास यात्रा की तारीख पर वैध था और दुरुपयोग या हक से ज़्यादा यात्रा का कोई सबूत नहीं था तो तकनीकी आधार पर बोनाफाइड स्टेटस से इनकार करना गलत है।हालांकि, कोर्ट ने कहा कि पूरा मुआवजा नहीं दिया जा सकता, क्योंकि मृतक कर्मचारी अनिवार्य यात्रा विवरण भरने में विफल रहा...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बिना सबूत के कार्यवाही में देरी के लिए वकीलों को दोषी ठहराने की मुवक्किलों की प्रथा की निंदा की
बॉम्बे हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली पहली अपील दायर करने में 203 दिनों की देरी को माफ करने से इनकार करते हुए मुवक्किलों द्वारा वकील को पार्टी बनाए बिना और उस वकील के खिलाफ कोई कार्रवाई शुरू किए बिना देरी के लिए वकीलों को दोषी ठहराने की प्रथा की निंदा की।सिंगल-जज जस्टिस जितेंद्र जैन ने सिविल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने के लिए 203 दिनों की देरी को माफ करने की मांग वाली सिविल अर्जी पर सुनवाई करते हुए कहा कि पार्टी ने अपने वकील (जो सिविल कोर्ट में उनके लिए पेश हुए) पर आरोप...
POSH Act | एक बार आरोप साबित न होने पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकती: बॉम्बे हाईकोर्ट ने सहकर्मियों का वीडियो बनाने के मामले में राहत दी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (NABARD) के एक कर्मचारी को राहत दी, जिसने सेंट्रल कंप्लेंट्स कमेटी (CCC) द्वारा उस पर लगाए गए 'फटकार' की सज़ा को चुनौती दी थी। उस पर आरोप था कि उसने अपनी महिला सहकर्मियों का 'वीडियो रिकॉर्डिंग' किया, जो अक्सर 'एक साथ बैठकर, हंसकर, गपशप करके और गाना गाकर' काम के घंटों में 'परेशानी' पैदा करती थीं।जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की डिवीज़न बेंच ने कहा कि CCC ने 30 जून, 2020 को अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता...


![[महाराष्ट्र स्टाम्प एक्ट] ज़ब्त करने की शक्ति संपत्ति के अधिकारों को प्रभावित करती है, इसका प्रयोग केवल रजिस्ट्रिंग अधिकारी ही कर सकता है: बॉम्बे हाईकोर्ट [महाराष्ट्र स्टाम्प एक्ट] ज़ब्त करने की शक्ति संपत्ति के अधिकारों को प्रभावित करती है, इसका प्रयोग केवल रजिस्ट्रिंग अधिकारी ही कर सकता है: बॉम्बे हाईकोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2025/05/12/500x300_599612-750x450472964-justice-amit-borkar.jpg)















