बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने जनगणना ड्यूटी के लिए प्राइवेट, गैर-सरकारी मदद वाले और अल्पसंख्यक स्कूलों के शिक्षकों की तैनाती पर लगाई रोक
बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार (22 मई) को महाराष्ट्र भर में हर दस साल में होने वाली जनगणना के काम के लिए प्राइवेट, गैर-सरकारी मदद वाले और प्राइवेट अल्पसंख्यक स्कूलों के टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ की तैनाती पर अंतरिम रोक लगाई।जस्टिस गौतम अंखड और जस्टिस संदेश पाटिल की डिवीज़न बेंच वाली वेकेशन कोर्ट ने महाराष्ट्र भर में 500 से ज़्यादा प्राइवेट, बिना सरकारी मदद वाले और प्राइवेट अल्पसंख्यक स्कूलों में काम कर रहे हज़ारों स्टाफ सदस्यों को अंतरिम राहत देते हुए पहली नज़र में यह माना कि ऐसे स्कूलों के स्टाफ को...
बढ़ती बेरोजगारी पर बॉम्बे हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, पढ़ी-लिखी पत्नी को भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता
बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने भरण-पोषण से जुड़े एक मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल शिक्षित होने के आधार पर किसी पत्नी को गुजारा भत्ता देने से इनकार नहीं किया जा सकता।हाईकोर्ट ने कहा कि वर्तमान समय में बेरोजगारी इतनी बढ़ गई है कि उच्च डिग्री और विशेषज्ञता रखने वाले लोग भी नौकरी पाने में असफल हो रहे हैं। जस्टिस उर्मिला जोशी फाल्के ने पति की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि उसकी पत्नी स्नातकोत्तर तक पढ़ी-लिखी है और खुद अपना पालन-पोषण कर सकती है।अदालत ने अपने आदेश में...
न्यायिक परीक्षा में तीन साल की प्रैक्टिस के नियम को पिछली तारीख से लागू करने की चुनौती पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) को रिट याचिका पर नोटिस जारी किया। इस याचिका में सिविल जज जूनियर डिवीज़न और ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (JMFC) परीक्षा के लिए तय की गई, तीन साल की प्रैक्टिस की अनिवार्य शर्त को पिछली तारीख से लागू करने के फैसले को चुनौती दी गई।चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम ए. अंखड की डिवीज़न बेंच दो लॉ ग्रेजुएट और प्रैक्टिस कर रहे वकीलों द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में MPSC द्वारा 30 अप्रैल 2026 को...
भीषण गर्मी में बिना शेड बस का इंतजार कराना गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लंघन: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि नागरिकों को भीषण गर्मी, बारिश या अन्य खराब मौसम में बिना शेड और बैठने की व्यवस्था के सड़क पर खड़े होकर बस का इंतजार करने के लिए मजबूर किया जाता है तो यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लंघन है।जस्टिस अनिल किलोर और जस्टिस राज वाकोड़े की खंडपीठ ने नागपुर शहर में बस स्टॉप की खराब स्थिति अतिक्रमण और यात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी से जुड़ी एक मराठी समाचार रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया था।अदालत ने...
अपराध से सीधे जुड़ाव के बिना पुलिस CrPC की धारा 102 के तहत बैंक अकाउंट ज़ब्त नहीं कर सकती: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि पुलिस, ज़ब्त की गई संपत्ति और कथित अपराध के बीच सीधा संबंध साबित किए बिना दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CrPC) की धारा 102 के तहत बैंक अकाउंट्स को फ्रीज़ या ज़ब्त नहीं कर सकती। कोर्ट ने टिप्पणी की कि अकाउंट्स को डी-फ्रीज़ करने का निर्देश देते समय फ्रीज़ की गई राशि के बराबर बैंक गारंटी देने की एक भारी शर्त लगाना, डी-फ्रीज़िंग के मूल उद्देश्य को ही विफल कर देता है।जस्टिस एन.जे. जमादार दो आपराधिक याचिकाओं की सुनवाई कर रहे थे। ये याचिकाएं अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन...
सर रतन टाटा ट्रस्ट की बोर्ड बैठक पर रोक की मांग वाली याचिका वापस, बॉम्बे हाईकोर्ट ने जताई नाराज़गी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सर रतन टाटा ट्रस्ट की 16 मई को प्रस्तावित महत्वपूर्ण बोर्ड बैठक पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को वापस लेने की अनुमति देते हुए निस्तारित किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता के आचरण पर कड़ी नाराज़गी जताई और कहा कि मामला चौंकाने वाली स्थिति दर्शाता है।जस्टिस अद्वैत सेठना और जस्टिस संदेश पाटिल की अवकाशकालीन खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी।याचिकाकर्ता सुरेश पाटिलखेड़े ने अदालत से मांग की थी कि सर रतन टाटा ट्रस्ट की बोर्ड बैठक पर रोक लगाई जाए। उनका दावा था कि ट्रस्ट...
गलत राजस्व प्रविष्टियों के आधार पर संपत्ति के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 300-ए के तहत मिले संपत्ति के अधिकार को गलत राजस्व प्रविष्टियों के आधार पर समाप्त नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि भू-धारकों को कानून के अनुसार नोटिस ही जारी नहीं किया गया, तो रिकॉर्ड सुधारने में हुई देरी को आधार बनाकर उन्हें उनकी जमीन से वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस सिद्धेश्वर एस. थोम्बरे रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें मंत्री द्वारा पारित उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसके जरिए उप निदेशक, भू-अभिलेख का आदेश रद्द कर दिया गया था। उप...
सर्विस बॉन्ड का उल्लंघन करके इस्तीफ़ा देने वाला कर्मचारी, एम्प्लॉयर को रिलीविंग लेटर या अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह फ़ैसला दिया कि जो कर्मचारी सर्विस बॉन्ड का उल्लंघन करके इस्तीफ़ा देता है, वह इस बात पर ज़ोर नहीं दे सकता कि एम्प्लॉयर उसे रिलीविंग लेटर या अनुभव प्रमाण पत्र जारी करे। कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि जब कोई इस्तीफ़ा किसी वैध सर्विस बॉन्ड के तहत अनुबंध संबंधी दायित्वों के विपरीत दिया जाता है तो एम्प्लॉयर के लिए इस्तीफ़ा स्वीकार न करना उचित है। परिणामस्वरूप, उसे रिलीविंग या सेवा प्रमाण पत्र जारी करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।जस्टिस संदीप वी. मार्ने एक एविएशन कंपनी द्वारा दायर...
सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले में अमित शाह को मिली राहत बरकरार, बॉम्बे हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मिली राहत को चुनौती देने वाली अंतरिम याचिका खारिज की।अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह याचिका संभवतः किसी “राजनीतिक विरोधी” के इशारे पर दायर की गई हो सकती है। चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखाड की खंडपीठ ने 22 पुलिसकर्मियों को बरी किए जाने के फैसले को भी बरकरार रखा।यह मामला सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की कथित फर्जी मुठभेड़ से जुड़ा है।अदालत ने अपने...
सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने 22 पुलिसकर्मियों की बरी बरकरार रखी, कहा- साजिश साबित नहीं
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति के कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में 22 पुलिसकर्मियों को बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष कथित साजिश और अपहरण की कहानी साबित करने में विफल रहा तथा पूरा मामला केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था, जिसकी कड़ियां पूरी तरह साबित नहीं हो सकीं।चीफ़ जस्टिस शील नागू चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखाड की खंडपीठ ने कहा कि 90 से अधिक गवाह hostile हो गए, जिससे अभियोजन के मामले की विश्वसनीयता...
आधार डीएक्टिवेशन, बायोमेट्रिक मिसमैच के कारण असली निवासियों को बिना किसी उपाय के नहीं छोड़ा जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट ने जारी कीं गाइडलाइंस
बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन बढ़ते मामलों पर संज्ञान लेते हुए, जिनमें नागरिकों को बायोमेट्रिक मिसमैच, आधार कार्ड के डीएक्टिवेशन या सस्पेंशन के कारण अदालतों का दरवाज़ा खटखटाने पर मजबूर होना पड़ रहा है, विस्तृत गाइडलाइंस जारी कीं। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे ऐसे मामलों से निपटने में 'नागरिक-केंद्रित' (citizen-centric) दृष्टिकोण अपनाएं और यह भी सुनिश्चित करें कि शिकायतों का निवारण चार हफ़्तों के भीतर हो जाए।जस्टिस रविंद्र घुगे और जस्टिस हितेन वेनेगांवकर की डिवीज़न बेंच ने पाया कि ऐसे कई...
अनिल अंबानी-रिपब्लिक टीवी विवाद सुलझने की उम्मीद, बॉम्बे हाईकोर्ट ने आपसी समाधान पर दिया जोर
बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार (8 मई) को उद्योगपति अनिल अंबानी और रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी के बीच चल रहे मानहानि विवाद को लेकर उम्मीद जताई कि मामला आपसी सहमति से सुलझ सकता है। कोर्ट ने चैनल से यह भी कहा कि वह अंबानी द्वारा चिन्हित कथित आपत्तिजनक सामग्री पर विचार करे।जस्टिस आरिफ डॉक्टर की पीठ अनिल अंबानी द्वारा रिपब्लिक टीवी और अर्नब गोस्वामी के खिलाफ दायर मानहानि याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में चल रही जांचों को लेकर चैनल की रिपोर्टिंग को आपत्तिजनक बताया गया है।सुनवाई के...
बाबा सिद्दीकी हत्याकांड : बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत देने से किया इनकार, कहा- सह-आरोपी का कबूलनामा भी साक्ष्य
पूर्व महाराष्ट्र मंत्री बाबा सिद्दीकी की हत्या से जुड़े मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत अर्जी खारिज की। हाईकोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के तहत सह-आरोपी का कबूलनामा भी साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य है और प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सामग्री मौजूद है।जस्टिस रविंद्र जोशी ने आरोपी चेतन परधी की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री से यह संकेत मिलता है कि वह उस संगठित गिरोह का सदस्य था, जिसने बाबा सिद्दीकी की हत्या की...
सोहराबुद्दीन कथित फर्जी मुठभेड़ मामला: 22 पुलिसकर्मियों की बरी होने के खिलाफ दायर अपील हाईकोर्ट ने की खारिज
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति के कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में 22 पुलिसकर्मियों को बरी किए जाने के खिलाफ दायर अपीलों को खारिज किया।चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखाड की खंडपीठ ने गुरुवार को खुले न्यायालय में यह फैसला सुनाया।ये अपीलें सोहराबुद्दीन के भाइयों रुबाबुद्दीन और नयाबुद्दीन द्वारा दायर की गई थीं, जिनमें स्पेशल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई, जिसमें गुजरात के 22 पुलिसकर्मियों को बरी कर दिया गया।सुनवाई के दौरान केंद्रीय...
गोद लेने के आदेश का अधिकार जिला मजिस्ट्रेट को देना वैध, 2021 संशोधन बरकरार: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम (JJ Act) में वर्ष 2021 में किए गए उस संशोधन को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया, जिसके तहत गोद लेने के आदेश जारी करने की शक्ति अदालतों से लेकर जिला मजिस्ट्रेट को सौंप दी गई।जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की खंडपीठ ने कहा कि केवल मंच बदलने से संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन नहीं होता और यह संशोधन गोद लेने की प्रक्रिया को अधिक त्वरित एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से किया गया।याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि गोद लेने का...
डॉ. आंबेडकर शोर-शराबे नहीं, बौद्धिक विकास और वंचितों के उत्थान को देते थे प्राथमिकता: बॉम्बे हाइकोर्ट ने जन्म जयंती समारोहों पर उठाए सवाल
बॉम्बे हाइकोर्ट ने डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती पर तेज आवाज, नारेबाजी और पटाखों के साथ होने वाले आयोजनों पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि डॉ. आंबेडकर संभवतः ऐसे उत्सव के बजाय बौद्धिक विकास, सामाजिक सुधार और वंचित वर्गों के सशक्तिकरण पर केंद्रित आयोजन को प्राथमिकता देते थे।जस्टिस उर्मिला जोशी-फाल्के और जस्टिस निवेदिता मेहता की खंडपीठ ने नागपुर स्थित संविधान चौक पर डॉ. आंबेडकर जयंती की पूर्व संध्या पर हुए कार्यक्रमों के दौरान अत्यधिक शोर, नारेबाजी और पटाखों पर आपत्ति जताई। अदालत के समक्ष न्यायमित्र...
Bhima-Koregaon Case: बॉम्बे हाईकोर्ट ने 8 साल जेल में बिताने के बाद सुरेंद्र गाडलिंग को ज़मानत दी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को वकील-कार्यकर्ता सुरेंद्र गाडलिंग को ज़मानत दी। गाडलिंग भीमा-कोरेगांव - एल्गार परिषद मामले में 6 जून, 2018 से जेल में बंद हैं। कोर्ट ने उनकी लंबी कैद को देखते हुए यह फ़ैसला सुनाया। इस मामले में नामज़द 16 लोगों में से वह आख़िरी व्यक्ति हैं जो अभी भी जेल में हैं।जस्टिस अजय गाडकरी और जस्टिस कमल खाटा की डिवीज़न बेंच ने ओपन कोर्ट में आदेश सुनाते हुए गाडलिंग को सामान्य शर्तों पर ज़मानत दी। ये वही शर्तें हैं जो स्पेशल कोर्ट ने हनी बाबू जैसे अन्य सह-आरोपियों पर लगाई थीं।बेंच...
UAPA की वैधता बरकरार: बॉम्बे हाइकोर्ट ने पुनर्विचार याचिका खारिज की
बॉम्बे हाईकोर्ट ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखने वाले अपने पूर्व निर्णय के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका खारिज की। अदालत ने कहा कि फैसले में कोई प्रत्यक्ष विधिक त्रुटि नहीं है और याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए आधार अपील के लिए उपयुक्त हैं पुनर्विचार के लिए नहीं।जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की खंडपीठ ने यह आदेश भीमा-कोरेगांव एल्गार परिषद मामले के कथित गवाह अनिल बाबुराव बैले की पुनर्विचार याचिका पर पारित किया।बैले ने वर्ष 2021 में UAPA की...
शादी तय होने पर दुष्कर्म आरोपी को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण: बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- विवाह तक न हो कठोर कार्रवाई
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक दुष्कर्म आरोपी को अंतरिम राहत देते हुए उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई, जबकि उसकी अग्रिम जमानत याचिका निचली अदालत में लंबित है।अदालत ने यह राहत इस आधार पर दी कि आरोपी का विवाह 4 मई, 2026 को निर्धारित है।जस्टिस अश्विन भोबे ने आदेश पारित करते हुए जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि आरोपी की लंबित अग्रिम जमानत याचिका पर विशेष अदालत द्वारा निर्णय होने तक उसके विरुद्ध कोई कठोर कदम न उठाया जाए। अदालत ने कहा कि आरोपी और उसके परिवार द्वारा विवाह की सभी तैयारियां की जा चुकी हैं, और यह एक...
'या अल्लाह! रसगुल्ला!' टिप्पणी मामले में भारती सिंह और शेखर सुमन को राहत, हाईकोर्ट ने रद्द की FIR
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार (29 अप्रैल) को कहा कि किसी कॉमेडी एक्ट में खाने की चीज़ों का इस्तेमाल करने भर से धर्म का अपमान नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कॉमेडियन भारती सिंह और एक्टर शेखर सुमन के खिलाफ 2010 में दर्ज की गई FIR रद्द की। यह FIR 'या अल्लाह! रसगुल्ला! दही भल्ला!' जैसे शब्द बोलने के लिए दर्ज की गईं।सिंगल-जज जस्टिस अमित बोरकर ने साफ किया कि कलाकारों के खिलाफ आपराधिक कानून का इस्तेमाल 'यूं ही' नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 295A के तहत दर्ज FIR रद्द की। यह...




















