तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना में SIR प्रक्रिया पर सवाल, बिना नोटिस मतदाता का नाम हटाने पर हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब

तेलंगाना हाईकोर्ट ने सोमवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता का नाम बिना नोटिस दिए मतदाता सूची से हटाए जाने के मामले में चुनाव आयोग से जवाब मांगा। कोर्ट ने यह भी पूछा कि दूसरे याचिकाकर्ता को जारी नोटिस का जवाब देने के बाद उसके मामले में क्या कार्रवाई की गई।जस्टिस पी. सैम कोशी और जस्टिस नरसिंह राव नंदिकोंडा की खंडपीठ उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें मतदाताओं के गणना प्रपत्रों में कथित मामूली विसंगतियों के आधार पर उन्हें नोटिस जारी करने की प्रक्रिया को चुनौती दी गई।...

वकीलों की हड़ताल पर तेलंगाना हाईकोर्ट सख्त, कहा- कोर्ट आने वाले वकील के साथ मारपीट स्वीकार्य नहीं

तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा कि बार (वकीलों) और/या बेंच (जजों) की गरिमा, ईमानदारी या आज़ादी से जुड़े बहुत ही खास मामलों में, कुछ शर्तों के साथ, वकीलों को एक दिन की हड़ताल या कोर्ट के काम से दूर रहने की इजाज़त दी जा सकती है।हालांकि, इस छूट का मतलब यह नहीं है कि जो वकील कोर्ट आना चाहते हैं, उन्हें डराया-धमकाया जाए, रोका जाए या उनके साथ मारपीट की जाए।जस्टिस लक्ष्मी नारायण अलीशेट्टी ने यह बात मेट्रोपॉलिटन क्रिमिनल कोर्ट बार एसोसिएशन, नामपल्ली के पदाधिकारियों के खिलाफ अवमानना ​​का मामला खारिज करते हुए...

विधवा बहू और पोते-पोतियों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी सास पर नहीं: तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा- धारा 125 में ऐसी वैधानिक बाध्यता नहीं

तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 के तहत सास पर अपनी विधवा बहू या मृत बेटे के बच्चों का भरण-पोषण करने की कानूनी जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती। अदालत ने सास के खिलाफ चल रही भरण-पोषण की कार्यवाही रद्द की।जस्टिस एन. तुकारामजी ने कहा कि धारा 125(1) में उन व्यक्तियों की स्पष्ट श्रेणियां दी गईं, जो भरण-पोषण का दावा कर सकते हैं और जिन पर उन्हें भरण-पोषण देने की जिम्मेदारी है। इस प्रावधान में सास को अपनी विधवा बहू या मृत बेटे के बच्चों का भरण-पोषण करने के लिए उत्तरदायी...

मुस्लिम व्यक्ति की दूसरी शादी अमान्य नहीं, IPC की धारा 494 के तहत दो शादियां करने का अपराध नहीं बनता: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा कि जिन मामलों में पक्ष मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत आते हैं, वहां किसी व्यक्ति की दूसरी शादी सिर्फ़ इसलिए "अमान्य" नहीं मानी जाएगी कि उसकी पहली शादी अभी भी कायम है। इसलिए IPC की धारा 494 के तहत बिगैमी का अपराध नहीं बनेगा।जस्टिस एन. तुकारामजी की सिंगल जज बेंच ने मुस्लिम व्यक्ति के खिलाफ बिगैमी की कार्यवाही रद्द की, क्योंकि उन्हें लगा कि IPC की धारा 494 के लिए ज़रूरी शर्तें पूरी नहीं हो रही थीं।कोर्ट ने कहा:"इसके अलावा, पक्षकारों पर लागू होने वाले पर्सनल लॉ से जुड़ा एक अलग और...

CrPC की धारा 125(3) के तहत एक साल की समय-सीमा DV Act के तहत मेंटेनेंस की वसूली के लिए वेतन की कुर्की को नहीं रोकती: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा कि CrPC की धारा 125(3) के पहले प्रावधान (Proviso) के तहत एक साल की समय-सीमा तभी लागू होती है, जब कोई व्यक्ति उस प्रावधान के तहत बकाया मेंटेनेंस की वसूली के लिए वारंट की मांग करता है।यह मेंटेनेंस के बकाया को खत्म नहीं करता और न ही 'महिलाओं को घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम, 2005' (DV एक्ट) की धारा 20(6) के तहत सैलरी अटैचमेंट को रोकता है।CrPC की धारा 125(3) का पहला प्रावधान रिकवरी वारंट जारी करने से रोकता है, जब तक कि मेंटेनेंस की रकम बकाया होने के एक साल के भीतर आवेदन न...

498A की शिकायत करना अपने आप में क्रूरता नहीं, तलाक का आधार भी नहीं: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि पति और उसके परिवार के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और क्रूरता के आरोप में शिकायत दर्ज कराना अपने आप में पत्नी की ओर से क्रूरता नहीं माना जा सकता। केवल इस आधार पर तलाक नहीं दिया जा सकता भले ही बाद में आपराधिक मामले में पति और उसके परिवार को बरी कर दिया गया हो।जस्टिस के. लक्ष्मण और जस्टिस के. सुजाना की खंडपीठ ने कहा कि यदि पति हिंदू विवाह अधिनियम के तहत क्रूरता के आधार पर तलाक मांगता है तो क्रूरता के आरोपों को ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों से साबित करने की...

स्वतंत्र प्रैक्टिस करने वाली वकील को सिर्फ पेशे के आधार पर भरणपोषण से वंचित नहीं किया जा सकता: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा है कि सिर्फ अधिवक्ता के रूप में नामांकित होने और स्वतंत्र रूप से वकालत करने से यह साबित नहीं होता कि पत्नी की पर्याप्त स्वतंत्र आय है और उसे हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत भरणपोषण नहीं दिया जाना चाहिए।जस्टिस वाकिति रामकृष्ण रेड्डी ने पत्नी की रिव्यू याचिका मंजूर करते हुए हाईकोर्ट के अक्टूबर 2024 के उस आदेश को वापस ले लिया, जिसमें फैमिली कोर्ट द्वारा पत्नी को दिए गए ₹20,000 प्रतिमाह अंतरिम भरणपोषण को रद्द कर दिया गया था।मामला हैदराबाद की I Additional Family Court...

बच्चे से मिले बिना उसकी इच्छा दर्ज कर कस्टडी देना अवैध, तेलंगाना हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द किया

तेलंगाना हाईकोर्ट ने एक फैमिली कोर्ट का अंतरिम कस्टडी आदेश रद्द करते हुए कहा कि किसी बच्चे की इच्छा, पसंद और भावनाओं पर आधारित निष्कर्ष तब तक दर्ज नहीं किए जा सकते, जब तक अदालत ने वास्तव में उससे व्यक्तिगत बातचीत न की हो।जस्टिस वाकिटी रामकृष्ण रेड्डी ने कहा कि न्यायिक आदेश की वैधता केवल उसके निष्कर्ष पर नहीं, बल्कि उस निष्कर्ष तक पहुंचने की प्रक्रिया पर भी निर्भर करती है। यदि अदालत यह दर्ज करती है कि उसने बच्चे से बातचीत की है, तो ऐसी बातचीत वास्तव में हुई होनी चाहिए।मामला 11 वर्षीय बच्चे की...

स्वास्तिक की जगह ✓ निशान वाले मतपत्र को केवल तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी मतदाता का इरादा स्पष्ट रूप से व्यक्त हो रहा है, तो केवल इस आधार पर मतपत्र को अमान्य नहीं ठहराया जा सकता कि उस पर निर्धारित 'स्वास्तिक' चिन्ह के बजाय ✓ (टिक मार्क) लगाया गया है। अदालत ने कहा कि जब तक किसी नियम या उपनियम में स्पष्ट रूप से यह न कहा गया हो कि केवल स्वास्तिक चिन्ह ही मान्य होगा, तब तक ऐसे मतपत्र को खारिज करना उचित नहीं है।जस्टिस एन. तुकारामजी ने बोधन बार एसोसिएशन के महासचिव (2026-27) के चुनाव से जुड़े मामले में यह फैसला सुनाया। अदालत ने विवादित...

जीवनसाथी की बातचीत बिना अनुमति रिकॉर्ड करना निजता के अधिकार का उल्लंघन, तलाक के मुकदमे में सबूत के तौर पर स्वीकार्य नहीं: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा कि पति या पत्नी की टेलीफोन पर हुई बातचीत को उनकी अनुमति के बिना गुप्त रूप से रिकॉर्ड करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। ऐसे कॉल रिकॉर्डिंग को वैवाहिक विवाद या तलाक के मुकदमे में साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।जस्टिस नामावरापु राजेश्वर राव ने दो दीवानी पुनरीक्षण याचिकाएं खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया।अदालत ने कहा,"पक्षकारों के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग के संबंध में निचली अदालत का यह निष्कर्ष सही है कि दूसरे...

बार एसोसिएशन की सदस्यता स्वैच्छिक है, वकील को प्रैक्टिस करने से नहीं रोका जा सकता: तेलंगाना हाईकोर्ट ने BCI के नियम को सीमित किया

तेलंगाना हाईकोर्ट ने 'बार काउंसिल ऑफ इंडिया सर्टिफिकेट एंड प्लेस ऑफ प्रैक्टिस (वेरिफिकेशन) रूल्स, 2015' के नियम 6 को सीमित करते हुए कहा कि वकीलों के लिए बार एसोसिएशन की सदस्यता अनिवार्य नहीं की जा सकती और सदस्यता न होने पर किसी वकील को कानून की प्रैक्टिस करने से रोका या अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। [2026 LiveLaw (Tel) 86]जस्टिस एन. तुकारामजी की सिंगल जज बेंच ने कहा:“नियम 6 की व्याख्या या उसे लागू इस तरह से नहीं किया जा सकता कि बार एसोसिएशन की सदस्यता अनिवार्य हो जाए या प्रैक्टिस करने के अधिकार पर...

बैंक अकाउंट में जमा धन खाताधारक की संपत्ति, बिना कानूनी आदेश अनिश्चितकाल तक खाता फ्रीज नहीं किया जा सकता: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी नागरिक का बैंक अकाउंट केवल आंतरिक पत्राचार, पोर्टल अलर्ट या अनौपचारिक इलेक्ट्रॉनिक संदेशों के आधार पर अनिश्चितकाल तक फ्रीज नहीं किया जा सकता, जब तक कि ऐसी कार्रवाई किसी वैधानिक अधिकार के तहत न की गई हो।जस्टिस नागेश भीमपाका की एकल पीठ ने कहा कि बैंक अकाउंट में जमा धन खाताधारक की संपत्ति है और खाते के संचालन पर रोक लगाना व्यक्ति के आजीविका के अधिकार, संपत्ति के अधिकार तथा उसके वैध धन तक पहुंच को प्रभावित करता है।अदालत ने कहा,“बैंक अकाउंट...

निजी WhatsApp ग्रुप में आलोचना मात्र से IPC की धाराएं नहीं लगेंगी, आवश्यक तत्व साबित होना जरूरी: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने एक आरोपी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करते हुए कहा है कि किसी निजी WhatsApp ग्रुप में किसी जनप्रतिनिधि की आलोचना मात्र से भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 504, 505(1)(b) और 506 के तहत अपराध नहीं बन जाता, जब तक कि इन धाराओं के आवश्यक तत्व स्पष्ट रूप से स्थापित न हों।जस्टिस के. सुजाना की एकल पीठ ने कहा कि निजी सोशल मीडिया समूह में व्यक्त की गई आलोचना, अपने आप में अपराध नहीं मानी जा सकती। अभियोजन पक्ष को संबंधित धाराओं के तहत आवश्यक कानूनी तत्वों को साबित करना...

तेलंगाना हाईकोर्ट: पत्नी को पति के पास जाने से रोकने का आदेश रद्द, कहा—“अभूतपूर्व”

तेलंगाना हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पत्नी को तलाक कार्यवाही के दौरान अपने पति, उसके घर और कार्यस्थल के पास जाने से पूरी तरह रोक दिया गया था।जस्टिस शुमी भट्टाचार्य और जस्टिस गाडि प्रवीण कुमार की खंडपीठ ने कहा कि यह आदेश “अभूतपूर्व” है और किसी व्यक्ति की आवाजाही पर इस तरह की रोक लगाने के लिए बहुत ठोस और विश्वसनीय कारण होने चाहिए, जो इस मामले में मौजूद नहीं थे।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ इस आधार पर कि पत्नी ने पति के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए हैं या...

चुनाव के दौरान मतदाता से कथित दुर्व्यवहार मामला: हाईकोर्ट ने BJP नेता माधवी लता को दी अंतरिम राहत

तेलंगाना हाईकोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता माधवी लता के खिलाफ दर्ज FIR पर फिलहाल आगे की कार्यवाही पर रोक लगाई। बता दें, यह मामला 2024 के हैदराबाद लोकसभा चुनाव के दौरान कथित रूप से मतदान प्रक्रिया में बाधा डालने और एक महिला मतदाता का नकाब जबरन हटाने के आरोप से जुड़ा है।जस्टिस जे. श्रीनिवास राव की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया और कहा कि फिलहाल FIR में आगे की कार्यवाही स्थगित रहेगी। अदालत ने यह भी नोट किया कि धारा 155(2) के तहत आवश्यक अनुमति नहीं ली गई।यह मामला मलाकपेट...

असम सीएम की पत्नी के पासपोर्ट पर विवाद: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को मिली 1 हफ़्ते की अग्रिम जमानत, संबंधित कोर्ट में जाने की अनुमति

तेलंगाना हाईकोर्ट ने शुक्रवार (10 अप्रैल) को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को एक हफ़्ते की अग्रिम ज़मानत दी। यह ज़मानत असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा द्वारा दर्ज कराई गई FIR के सिलसिले में दी गई, जिसमें उन पर कई पासपोर्ट रखने के आरोप लगाए गए।जस्टिस के. सुजाना ने फ़ैसला सुनाते हुए कहा,"याचिकाकर्ता को संबंधित कोर्ट में अर्ज़ी दाख़िल करने के लिए एक हफ़्ते का समय दिया जाता है... याचिकाकर्ता को शर्तों के साथ एक हफ़्ते की राहत दी जाती है।" अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी हैदराबाद...

रिटायर जज को 8 हफ्तों में पुरानी पेंशन योजना का लाभ दें: तेलंगाना हाईकोर्ट का निर्देश

तेलंगाना हाईकोर्ट ने अहम आदेश में रिटायर जज जस्टिस जी. श्री देवी को पुरानी पेंशन योजना का लाभ 8 सप्ताह के भीतर देने का निर्देश दिया। अदालत ने संबंधित अधिकारियों से इस प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने को कहा।जस्टिस पी. सैम कोशी और जस्टिस नरसिंग राव नंदिकोंडा की खंडपीठ ने यह आदेश पारित करते हुए याचिका का निपटारा किया। अदालत ने यह नोट किया कि संबंधित प्राधिकरण पहले ही याचिकाकर्ता को पुरानी पेंशन योजना के तहत लाभ देने की मंजूरी दे चुका है।अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया कि 13 मार्च, 2026 को भारत सरकार...

असम सीएम की पत्नी के पासपोर्ट पर विवाद: हाईकोर्ट ने पवन खेड़ा की अग्रिम ज़मानत याचिका पर सुरक्षित रखा फ़ैसला

तेलंगाना हाईकोर्ट ने गुरुवार (9 अप्रैल) को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम ज़मानत याचिका पर अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया। यह याचिका असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा द्वारा दर्ज FIR के सिलसिले में दायर की गई थी, जिसमें उन पर कई पासपोर्ट रखने के आरोप लगाए गए।जस्टिस के. सुजाना शुक्रवार को इस मामले पर अपना फ़ैसला सुना सकती हैं।अग्रिम ज़मानत याचिका हैदराबाद में दायर की गई, जहां खेड़ा का निवास स्थान है।खेड़ा की ओर से पेश हुए सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि मानहानि...