तेलंगाना हाईकोर्ट
स्वास्तिक की जगह ✓ निशान वाले मतपत्र को केवल तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता: तेलंगाना हाईकोर्ट
तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी मतदाता का इरादा स्पष्ट रूप से व्यक्त हो रहा है, तो केवल इस आधार पर मतपत्र को अमान्य नहीं ठहराया जा सकता कि उस पर निर्धारित 'स्वास्तिक' चिन्ह के बजाय ✓ (टिक मार्क) लगाया गया है। अदालत ने कहा कि जब तक किसी नियम या उपनियम में स्पष्ट रूप से यह न कहा गया हो कि केवल स्वास्तिक चिन्ह ही मान्य होगा, तब तक ऐसे मतपत्र को खारिज करना उचित नहीं है।जस्टिस एन. तुकारामजी ने बोधन बार एसोसिएशन के महासचिव (2026-27) के चुनाव से जुड़े मामले में यह फैसला सुनाया। अदालत ने विवादित...
जीवनसाथी की बातचीत बिना अनुमति रिकॉर्ड करना निजता के अधिकार का उल्लंघन, तलाक के मुकदमे में सबूत के तौर पर स्वीकार्य नहीं: तेलंगाना हाईकोर्ट
तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा कि पति या पत्नी की टेलीफोन पर हुई बातचीत को उनकी अनुमति के बिना गुप्त रूप से रिकॉर्ड करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। ऐसे कॉल रिकॉर्डिंग को वैवाहिक विवाद या तलाक के मुकदमे में साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।जस्टिस नामावरापु राजेश्वर राव ने दो दीवानी पुनरीक्षण याचिकाएं खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया।अदालत ने कहा,"पक्षकारों के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग के संबंध में निचली अदालत का यह निष्कर्ष सही है कि दूसरे...
Telangana SIR | हाईकोर्ट ने ECI से कहा: जहां में 20% से ज़्यादा वोटर उर्दू जानते हैं, वहां उर्दू में फ़ॉर्म देने पर विचार करें
तेलंगाना हाईकोर्ट ने सोमवार (29 जून) को भारत के चुनाव आयोग (ECI) से कहा कि वह उन निर्वाचन क्षेत्रों में, जहां उर्दू जानने वाले वोटरों की आबादी 20% से ज़्यादा है, वोटर की पसंद के आधार पर उर्दू भाषा में भी गणना फ़ॉर्म (enumeration forms) उपलब्ध कराने पर विचार करे।कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें राज्य में होने वाले 'विशेष गहन संशोधन' (Special Intensive Revision) के लिए गणना फ़ॉर्म को सिर्फ़ तेलुगु भाषा में छापने और बांटने के फ़ैसले को चुनौती दी गई। तेलंगाना में बूथ लेवल अधिकारियों...
केवल तेलुगु में मतदाता गणना फॉर्म छापने के फैसले पर ECI से जवाब तलब, तेलंगाना हाईकोर्ट ने मांगा रुख
तेलंगाना हाईकोर्ट ने राज्य में आगामी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)-2026 के लिए मतदाता गणना (Enumeration) फॉर्म केवल तेलुगु भाषा में छापने और वितरित करने के निर्वाचन आयोग (ECI) के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर गुरुवार (25 जून) को चुनाव आयोग से जवाब मांगा। कोर्ट ने ईसीआई के वकील को निर्देश लेकर आने को कहा और मामले की अगली सुनवाई 29 जून के लिए सूचीबद्ध कर दी।जस्टिस पुल्ला कार्तिक की एकलपीठ के समक्ष दायर याचिका में कहा गया कि केवल तेलुगु भाषा में फॉर्म छापना संविधान के अनुच्छेद 14 और 19(1)(a)...
बार एसोसिएशन की सदस्यता स्वैच्छिक है, वकील को प्रैक्टिस करने से नहीं रोका जा सकता: तेलंगाना हाईकोर्ट ने BCI के नियम को सीमित किया
तेलंगाना हाईकोर्ट ने 'बार काउंसिल ऑफ इंडिया सर्टिफिकेट एंड प्लेस ऑफ प्रैक्टिस (वेरिफिकेशन) रूल्स, 2015' के नियम 6 को सीमित करते हुए कहा कि वकीलों के लिए बार एसोसिएशन की सदस्यता अनिवार्य नहीं की जा सकती और सदस्यता न होने पर किसी वकील को कानून की प्रैक्टिस करने से रोका या अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। [2026 LiveLaw (Tel) 86]जस्टिस एन. तुकारामजी की सिंगल जज बेंच ने कहा:“नियम 6 की व्याख्या या उसे लागू इस तरह से नहीं किया जा सकता कि बार एसोसिएशन की सदस्यता अनिवार्य हो जाए या प्रैक्टिस करने के अधिकार पर...
बैंक अकाउंट में जमा धन खाताधारक की संपत्ति, बिना कानूनी आदेश अनिश्चितकाल तक खाता फ्रीज नहीं किया जा सकता: तेलंगाना हाईकोर्ट
तेलंगाना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी नागरिक का बैंक अकाउंट केवल आंतरिक पत्राचार, पोर्टल अलर्ट या अनौपचारिक इलेक्ट्रॉनिक संदेशों के आधार पर अनिश्चितकाल तक फ्रीज नहीं किया जा सकता, जब तक कि ऐसी कार्रवाई किसी वैधानिक अधिकार के तहत न की गई हो।जस्टिस नागेश भीमपाका की एकल पीठ ने कहा कि बैंक अकाउंट में जमा धन खाताधारक की संपत्ति है और खाते के संचालन पर रोक लगाना व्यक्ति के आजीविका के अधिकार, संपत्ति के अधिकार तथा उसके वैध धन तक पहुंच को प्रभावित करता है।अदालत ने कहा,“बैंक अकाउंट...
निजी WhatsApp ग्रुप में आलोचना मात्र से IPC की धाराएं नहीं लगेंगी, आवश्यक तत्व साबित होना जरूरी: तेलंगाना हाईकोर्ट
तेलंगाना हाईकोर्ट ने एक आरोपी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करते हुए कहा है कि किसी निजी WhatsApp ग्रुप में किसी जनप्रतिनिधि की आलोचना मात्र से भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 504, 505(1)(b) और 506 के तहत अपराध नहीं बन जाता, जब तक कि इन धाराओं के आवश्यक तत्व स्पष्ट रूप से स्थापित न हों।जस्टिस के. सुजाना की एकल पीठ ने कहा कि निजी सोशल मीडिया समूह में व्यक्त की गई आलोचना, अपने आप में अपराध नहीं मानी जा सकती। अभियोजन पक्ष को संबंधित धाराओं के तहत आवश्यक कानूनी तत्वों को साबित करना...
तेलंगाना हाईकोर्ट: पत्नी को पति के पास जाने से रोकने का आदेश रद्द, कहा—“अभूतपूर्व”
तेलंगाना हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पत्नी को तलाक कार्यवाही के दौरान अपने पति, उसके घर और कार्यस्थल के पास जाने से पूरी तरह रोक दिया गया था।जस्टिस शुमी भट्टाचार्य और जस्टिस गाडि प्रवीण कुमार की खंडपीठ ने कहा कि यह आदेश “अभूतपूर्व” है और किसी व्यक्ति की आवाजाही पर इस तरह की रोक लगाने के लिए बहुत ठोस और विश्वसनीय कारण होने चाहिए, जो इस मामले में मौजूद नहीं थे।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ इस आधार पर कि पत्नी ने पति के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए हैं या...
चुनाव के दौरान मतदाता से कथित दुर्व्यवहार मामला: हाईकोर्ट ने BJP नेता माधवी लता को दी अंतरिम राहत
तेलंगाना हाईकोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता माधवी लता के खिलाफ दर्ज FIR पर फिलहाल आगे की कार्यवाही पर रोक लगाई। बता दें, यह मामला 2024 के हैदराबाद लोकसभा चुनाव के दौरान कथित रूप से मतदान प्रक्रिया में बाधा डालने और एक महिला मतदाता का नकाब जबरन हटाने के आरोप से जुड़ा है।जस्टिस जे. श्रीनिवास राव की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया और कहा कि फिलहाल FIR में आगे की कार्यवाही स्थगित रहेगी। अदालत ने यह भी नोट किया कि धारा 155(2) के तहत आवश्यक अनुमति नहीं ली गई।यह मामला मलाकपेट...
असम सीएम की पत्नी के पासपोर्ट पर विवाद: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को मिली 1 हफ़्ते की अग्रिम जमानत, संबंधित कोर्ट में जाने की अनुमति
तेलंगाना हाईकोर्ट ने शुक्रवार (10 अप्रैल) को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को एक हफ़्ते की अग्रिम ज़मानत दी। यह ज़मानत असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा द्वारा दर्ज कराई गई FIR के सिलसिले में दी गई, जिसमें उन पर कई पासपोर्ट रखने के आरोप लगाए गए।जस्टिस के. सुजाना ने फ़ैसला सुनाते हुए कहा,"याचिकाकर्ता को संबंधित कोर्ट में अर्ज़ी दाख़िल करने के लिए एक हफ़्ते का समय दिया जाता है... याचिकाकर्ता को शर्तों के साथ एक हफ़्ते की राहत दी जाती है।" अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी हैदराबाद...
रिटायर जज को 8 हफ्तों में पुरानी पेंशन योजना का लाभ दें: तेलंगाना हाईकोर्ट का निर्देश
तेलंगाना हाईकोर्ट ने अहम आदेश में रिटायर जज जस्टिस जी. श्री देवी को पुरानी पेंशन योजना का लाभ 8 सप्ताह के भीतर देने का निर्देश दिया। अदालत ने संबंधित अधिकारियों से इस प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने को कहा।जस्टिस पी. सैम कोशी और जस्टिस नरसिंग राव नंदिकोंडा की खंडपीठ ने यह आदेश पारित करते हुए याचिका का निपटारा किया। अदालत ने यह नोट किया कि संबंधित प्राधिकरण पहले ही याचिकाकर्ता को पुरानी पेंशन योजना के तहत लाभ देने की मंजूरी दे चुका है।अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया कि 13 मार्च, 2026 को भारत सरकार...
असम सीएम की पत्नी के 'पासपोर्ट' पर विवाद: हाईकोर्ट ने पवन खेड़ा की अग्रिम ज़मानत याचिका पर सुरक्षित रखा फ़ैसला
तेलंगाना हाईकोर्ट ने गुरुवार (9 अप्रैल) को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम ज़मानत याचिका पर अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया। यह याचिका असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा द्वारा दर्ज FIR के सिलसिले में दायर की गई थी, जिसमें उन पर कई पासपोर्ट रखने के आरोप लगाए गए।जस्टिस के. सुजाना शुक्रवार को इस मामले पर अपना फ़ैसला सुना सकती हैं।अग्रिम ज़मानत याचिका हैदराबाद में दायर की गई, जहां खेड़ा का निवास स्थान है।खेड़ा की ओर से पेश हुए सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि मानहानि...
पासपोर्ट विवाद में असम सीएम की पत्नी द्वारा FIR में अग्रिम ज़मानत के लिए तेलंगाना हाईकोर्ट पहुंचे पवन खेड़ा
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी द्वारा दायर FIR में अग्रिम ज़मानत की मांग करते हुए तेलंगाना हाईकोर्ट में अर्ज़ी दी। यह FIR उन आरोपों के बीच दायर की गई, जिनमें उन पर एक से ज़्यादा पासपोर्ट रखने का आरोप लगाया गया।इस मामले की सुनवाई गुरुवार (9 अप्रैल) को जस्टिस के. सुजाना की बेंच के सामने होगी।यह FIR गुवाहाटी क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में BNS की धाराओं 175 (चुनाव के संबंध में झूठा बयान), 35, 36, 318 (धोखाधड़ी), 338 (कीमती वसीयत, सिक्योरिटी आदि की जालसाज़ी), 337...
लंबित आपराधिक मामले में ट्रायल कोर्ट के NOC बिना पासपोर्ट री-इश्यू नहीं होगा: तेलंगाना हाईकोर्ट
तेलंगाना हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिन व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं, वे पासपोर्ट के नवीनीकरण या पुनः जारी करने के लिए सीधे आवेदन नहीं कर सकते। ऐसे मामलों में पहले संबंधित ट्रायल कोर्ट से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) प्राप्त करना अनिवार्य है।यह निर्णय जस्टिस नागेश भीमपाका ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें एक शोध वैज्ञानिक ने पासपोर्ट पुनः जारी न किए जाने को चुनौती दी थी।मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता अमेरिका में कार्यरत है और उसके खिलाफ उसकी पत्नी द्वारा IPC की धारा...
सोशल मीडिया पोस्ट फॉरवर्ड करना BNS के तहत अपराध नहीं, मंशा जरूरी: तेलंगाना हाईकोर्ट
तेलंगाना हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि केवल सोशल मीडिया पर किसी सामग्री को आगे बढ़ा देना (फॉरवर्ड करना) अपने आप में अपराध नहीं है, जब तक उसमें गलत मंशा या दुष्प्रेरणा (इरादा) साबित न हो। अदालत ने इसी आधार पर फेक न्यूज फैलाने के आरोप में दर्ज FIR रद्द की।जस्टिस के. सुजना की सिंगल बेंच ने कहा,“मान भी लिया जाए कि याचिकाकर्ताओं ने सामग्री प्रसारित या फॉरवर्ड की तब भी भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के आवश्यक तत्व पूरे नहीं होते। ऐसे में कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का...
फीस बकाया होने के आधार पर छात्रों के मूल प्रमाणपत्र रोकना अवैध: तेलंगाना हाईकोर्ट
तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा है कि शैक्षणिक संस्थान केवल फीस बकाया होने के आधार पर छात्रों के मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र रोक नहीं सकते, क्योंकि ये प्रमाणपत्र छात्र की संपत्ति होते हैं और उन्हें बकाया वसूली के लिए दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।जस्टिस सुरेपल्ली नंदा की एकल पीठ ने कहा कि विश्वविद्यालय किसी भी बहाने से छात्र के मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र (मार्कशीट और डिग्री प्रमाणपत्र सहित) अपने पास नहीं रख सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि फीस बकाया है तो संस्थान को उसकी वसूली के...
न्याय के विफल होने से बचाने के लिए आवश्यक हो तो अतिरिक्त साक्ष्य स्वीकार किया जाना चाहिए: तेलंगाना हाइकोर्ट
तेलंगाना हाइकोर्ट ने चेक अनादरण मामले में अपीलीय अदालत द्वारा अतिरिक्त साक्ष्य स्वीकार करने से इनकार करने का आदेश रद्द किया। हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 391 के तहत अतिरिक्त साक्ष्य लेने की शक्ति तभी प्रयोग की जानी चाहिए जब न्याय के हित में ऐसा करना आवश्यक हो और न्याय के विफल होने की आशंका हो।जस्टिस तिरुमला देवी ईडा ने आपराधिक याचिका स्वीकार करते हुए 25 जुलाई, 2025 को थर्ड एडिशनल जिला जस्टिस, एल.बी. नगर द्वारा पारित आदेश निरस्त किया।मामले में वास्तविक...
लॉन्ग टर्म वीज़ा नहीं होने पर पुलिस की घर पर जांच को चुनौती: तेलंगाना हाईकोर्ट ने पासपोर्ट प्राधिकरण को पक्षकार बनाने की अनुमति दी
तेलंगाना हाइकोर्ट ने मंगलवार को हैदराबाद निवासी एक व्यक्ति द्वारा दायर रिट अपील पर सुनवाई की, जिसमें उसने विशेष शाखा (स्पेशल ब्रांच) पुलिस द्वारा उसके घर पर की जा रही डोमिसिलरी विज़िट्स को चुनौती दी है। याचिकाकर्ता का कहना है कि उसका जन्म भारत में हुआ है, जबकि उसके पास लॉन्ग टर्म वीज़ा नहीं है।चीफ़ जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस जी. एम. मोहिउद्दीन की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। अदालत ने पासपोर्ट प्राधिकरण को पक्षकार (इम्पलीड) बनाने की अनुमति दी और संबंधित अधिकारियों को...
पति की गर्लफ्रेंड को IPC की धारा 498A के तहत 'रिश्तेदार' नहीं माना जा सकता: तेलंगाना हाईकोर्ट ने महिला के खिलाफ केस किया रद्द
तेलंगाना हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में क्रिमिनल कंप्लेंट में आरोपी नंबर 2 के तौर पर खड़ी महिला के खिलाफ क्रिमिनल कार्रवाई रद्द की और दोहराया कि इंडियन पैनल कोड (IPC) की धारा 498A के तहत गर्लफ्रेंड को पुरुष का "रिश्तेदार" नहीं माना जा सकता।जस्टिस तिरुमाला देवी ईडा ने हैदराबाद के XIII एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के सामने पेंडिंग एक कंप्लेंट केस में कार्रवाई रद्द करने की मांग वाली याचिका पर विचार करते हुए आगे पाया कि कंप्लेंट में लगाए गए आरोपों में 498A, 354D, 427 और 506 IPC के तहत...
संप्रभुता के खिलाफ गतिविधियों के आरोप अहम: तेलंगाना हाइकोर्ट ने उर्दू पत्रकार का पासपोर्ट रद्द करने का फैसला बरकरार रखा
तेलंगाना हाइकोर्ट ने उर्दू भाषा के पत्रकार द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए उनका पासपोर्ट रद्द किए जाने के फैसले को सही ठहराया।हाइकोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट का नवीनीकरण कोई स्वचालित अधिकार नहीं है और जब किसी व्यक्ति की गतिविधियों को देश की संप्रभुता और अखंडता के लिए प्रतिकूल बताया गया हो तो अदालत को अत्यंत सावधानी बरतनी होती है।जस्टिस नागेश भीमपाका ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा कि सार्वजनिक हित और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में प्राकृतिक न्याय के...


















