गौहाटी हाईकोर्ट

POCSO जांचें चाइल्ड-फ्रेंडली होनी चाहिए, जांचकर्ताओं को संवेदनशील बनाएं ताकि बिना किसी शक के सच सामने आए: गुवाहाटी हाईकोर्ट
POCSO जांचें चाइल्ड-फ्रेंडली होनी चाहिए, जांचकर्ताओं को संवेदनशील बनाएं ताकि 'बिना किसी शक के सच सामने आए': गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण एक्ट (POCSO Act) के तहत जांच संवेदनशीलता और चाइल्ड-फ्रेंडली प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करते हुए की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि काउंसलिंग सपोर्ट न देना, सपोर्ट पर्सन नियुक्त न करना और साफ़, विशिष्ट बयान रिकॉर्ड न करना न्याय के मकसद को ही खत्म कर सकता है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि खराब या लापरवाही से की गई जांच न केवल आरोपी के साथ अन्याय करती है, बल्कि ऐसे मामलों में भी बरी होने का कारण बन सकती है जहां अपराध हुआ हो।जस्टिस...

लंबे अंतराल के कारण अनुकंपा नियुक्ति से इनकार, लेकिन मनमाने निर्णय पर मुआवज़ा मंजूर: गौहाटी हाइकोर्ट
लंबे अंतराल के कारण अनुकंपा नियुक्ति से इनकार, लेकिन मनमाने निर्णय पर मुआवज़ा मंजूर: गौहाटी हाइकोर्ट

गौहाटी हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद अत्यधिक समय बीत चुका हो तो अनुकंपा नियुक्ति पर विचार करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता, क्योंकि इसका उद्देश्य तत्काल राहत प्रदान करना होता है।हालांकि, अदालत ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता के मामले में राज्य स्तरीय समिति द्वारा किया गया निर्णय मनमाना और भेदभावपूर्ण था, जिसके लिए मुआवज़ा दिया जाना उचित है।जस्टिस एन. उन्नी कृष्णन नायर ने कहा कि याचिकाकर्ता के पिता, जो सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में जुगाली के पद पर कार्यरत थे, का 14...

चेक बाउंस मामले में यदि आरोपी की दलील प्रथम दृष्टया विश्वसनीय हो तो अंतरिम मुआवजा नहीं दिया जा सकता: गुवाहाटी हाइकोर्ट
चेक बाउंस मामले में यदि आरोपी की दलील प्रथम दृष्टया विश्वसनीय हो तो अंतरिम मुआवजा नहीं दिया जा सकता: गुवाहाटी हाइकोर्ट

गुवाहाटी हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि चेक बाउंस मामले में ऐसे विवादित तथ्य हों जिनका निपटारा साक्ष्यों के माध्यम से किया जाना आवश्यक हो, तो उस अवस्था में परक्राम्य लिखत अधिनियम (NI Act) की धारा 143-ए के तहत अंतरिम मुआवजा देना उचित नहीं होगा।जस्टिस प्रांजल दास ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें आरोपी को चेक राशि का 20 प्रतिशत अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था।हाइकोर्ट ने कहा कि अंतरिम मुआवजा देने से पहले कोर्ट का यह संतुष्ट होना आवश्यक है कि शिकायतकर्ता के पक्ष में...

नोटरी के समक्ष दिए गए हलफनामे से विवाह विच्छेद संभव नहीं: गुवाहाटी हाईकोर्ट
नोटरी के समक्ष दिए गए हलफनामे से विवाह विच्छेद संभव नहीं: गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी विवाह को केवल नोटरी के समक्ष दिए गए हलफनामे के माध्यम से भंग नहीं किया जा सकता।हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक मुस्लिम विवाह विच्छेद अधिनियम, 1939 के प्रावधानों का विधिवत पालन किए जाने का कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जाता, तब तक केवल एक नोटरीकृत हलफनामे के आधार पर तलाक का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।जस्टिस प्रांजल दास ने यह टिप्पणी उस आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें बारपेटा के प्रधान जज, फैमिली कोर्ट द्वारा पारित उस आदेश को...

समान साक्ष्य पर सह-आरोपियों के बरी होने पर NDPS Act की धारा 37 की बाधा हटेगी: गुवाहाटी हाइकोर्ट
समान साक्ष्य पर सह-आरोपियों के बरी होने पर NDPS Act की धारा 37 की बाधा हटेगी: गुवाहाटी हाइकोर्ट

गुवाहाटी हाइकोर्ट ने NDPS Act के एक मामले में आरोपी को जमानत देते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि यदि उसी मामले में समान साक्ष्य के आधार पर सह-आरोपी बरी हो चुके हों और उन बरी होने के निष्कर्षों को अपील में चुनौती नहीं दी गई हो तो जमानत पर विचार करते समय अदालत को उन निष्कर्षों को वैध मानकर चलना होगा। ऐसे में NDPS Act की धारा 37 के तहत लगाई गई सख्त शर्तें भी संतुष्ट मानी जाएंगी।जस्टिस संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि जब तक सह-आरोपियों के बरी होने के निष्कर्ष अपील में पलटे नहीं जाते तब तक जमानत याचिका पर...

अनुच्छेद 226 के तहत रिट कोर्ट निर्णय की प्रक्रिया देखता है, गुण-दोष नहीं: गुवाहाटी हाइकोर्ट
अनुच्छेद 226 के तहत रिट कोर्ट निर्णय की प्रक्रिया देखता है, गुण-दोष नहीं: गुवाहाटी हाइकोर्ट

गुवाहाटी हाइकोर्ट ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की उचित मूल्य दुकान का लाइसेंस रद्द किए जाने के मामले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट अधिकार क्षेत्र में अदालत केवल निर्णय लेने की प्रक्रिया की जांच करती है, न कि निर्णय के गुण-दोष का मूल्यांकन।जस्टिस संजय कुमार मेधी ने कहा कि अनुच्छेद 226 के तहत सर्टियोरारी अधिकार का प्रयोग केवल यह देखने तक सीमित है कि क्या निर्णय लेते समय प्रासंगिक तथ्यों पर विचार किया गया या नहीं, अथवा क्या निर्णय किसी...

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केवल सुनी-सुनाई बातों के आधार पर कार्यवाही नहीं चल सकती : गुवाहाटी हाइकोर्ट
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केवल सुनी-सुनाई बातों के आधार पर कार्यवाही नहीं चल सकती : गुवाहाटी हाइकोर्ट

गुवाहाटी हाइकोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत किसी आरोपी के खिलाफ कार्यवाही तब तक कायम नहीं रह सकती, जब तक रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री ठोस न हो और उसका सीधा संबंध आरोपी के आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन से स्थापित न होता हो। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल सुनी-सुनाई बातों (हियरसे) के आधार पर आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानूनन उचित नहीं है।जस्टिस संजीव कुमार शर्मा की एकल पीठ ने यह टिप्पणी एक होमगार्ड कर्मी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें विशेष अदालत में लंबित...

लोक अदालत में समझौता पक्षकारों की स्वतंत्र सहमति से ही संभव, वकील को बिना लिखित अधिकार समझौता करने का हक नहीं: गुवाहाटी हाइकोर्ट
लोक अदालत में समझौता पक्षकारों की स्वतंत्र सहमति से ही संभव, वकील को बिना लिखित अधिकार समझौता करने का हक नहीं: गुवाहाटी हाइकोर्ट

गुवाहाटी हाइकोर्ट ने नेशनल लोक अदालत में दर्ज किए गए समझौते की वैधता पर अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत कोई भी समझौता तभी मान्य होगा जब वह पक्षकारों द्वारा स्वयं अपनी स्वतंत्र सहमति से किया गया हो।जस्टिस संजय कुमार मेधी ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि वकील द्वारा बिना किसी लिखित प्राधिकार के किया गया समझौता कानूनी रूप से वैध नहीं माना जा सकता और न ही उसे अनिवार्य माना जा सकता है।अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम...

सेवा में तीन साल से कम शेष होने के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति से इनकार नहीं किया जा सकता: गुवाहाटी हाइकोर्ट
सेवा में तीन साल से कम शेष होने के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति से इनकार नहीं किया जा सकता: गुवाहाटी हाइकोर्ट

गुवाहाटी हाइकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के समय उसकी सेवा में तीन साल से कम अवधि शेष होने के आधार पर उसके आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित करना मनमाना है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।चीफ जस्टिस अशुतोष कुमार और जस्टिस अरुण देव चौधरी की खंडपीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि मृतक कर्मचारी की शेष सेवा अवधि के आधार पर किया गया यह वर्गीकरण न तो तार्किक है और न ही इसका उद्देश्य से कोई सीधा संबंध है।हाइकोर्ट ने कहा,“हम पाते हैं कि मृत कर्मचारी की बची...

अनुशासन नियम लागू होने पर बिना विभागीय जांच संविदा कर्मचारी की सेवा समाप्त नहीं की जा सकती: गौहाटी हाइकोर्ट
अनुशासन नियम लागू होने पर बिना विभागीय जांच संविदा कर्मचारी की सेवा समाप्त नहीं की जा सकती: गौहाटी हाइकोर्ट

गौहाटी हाइकोर्ट ने अहम फैसला देते हुए कहा कि यदि किसी संविदा कर्मचारी की नियुक्ति में स्पष्ट रूप से वैधानिक अनुशासन और अपील नियम लागू किए गए तो कथित अनुशासनहीनता के आधार पर उसकी सेवा बिना विभागीय जांच के समाप्त नहीं की जा सकती।हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में सेवा समाप्ति दंडात्मक मानी जाएगी और नियमों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य होगा।चीफ जस्टिस आशुतोष कुमार और जस्टिस अरुण देव चौधरी की खंडपीठ ने यह फैसला असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में संविदा पर नियुक्त परियोजना...

सरोगेसी कानून में आयु सीमा वैध, पहली कोशिश असफल होने के आधार पर छूट नहीं दी जा सकती: गुवाहाटी हाइकोर्ट
सरोगेसी कानून में आयु सीमा वैध, पहली कोशिश असफल होने के आधार पर छूट नहीं दी जा सकती: गुवाहाटी हाइकोर्ट

गुवाहाटी हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरोगेसी से संबंधित कानून में तय की गई आयु सीमा पूरी तरह संवैधानिक है। इसमें केवल इस आधार पर इसमें छूट नहीं दी जा सकती कि दंपति की पहली सरोगेसी कोशिश असफल हो गई। अदालत ने कहा कि व्यक्तिगत कठिनाइयां चाहे जितनी भी वास्तविक हों, वे जनहित में बनाए गए वैधानिक प्रावधानों को शिथिल करने या निरस्त करने का आधार नहीं बन सकतीं।इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस अशुतोष कुमार और जस्टिस अरुण देव चौधरी की खंडपीठ ने की। अदालत ने कहा कि सरोगेसी कानून के तहत लगाए गए प्रतिबंध वैध राज्य...

सिविल जज मुस्लिम शादी खत्म करने का आदेश नहीं दे सकते, फैमिली कोर्ट ही सक्षम फोरम: गुवाहाटी हाईकोर्ट
सिविल जज मुस्लिम शादी खत्म करने का आदेश नहीं दे सकते, फैमिली कोर्ट ही सक्षम फोरम: गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कहा कि सिविल जज के पास तलाक के रूप में मुस्लिम शादी को खत्म करने को प्रमाणित करने और तलाक का घोषणात्मक आदेश देने का अधिकार क्षेत्र नहीं है और सक्षम कोर्ट फैमिली कोर्ट या फैमिली कोर्ट न होने पर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट होगा।ऐसा करते हुए हाईकोर्ट ने सिविल जज (सीनियर डिवीजन) कe एक आदेश बरकरार रखा, जिसने अपीलीय कोर्ट – सिविल जज (जूनियर डिवीजन) द्वारा पारित आदेश खारिज कर दिया, जिसने एक वैवाहिक मुकदमे में एक व्यक्ति को तलाक के रूप में घोषणात्मक राहत दी और लिखित तलाक की पुष्टि के लिए एक...

प्रेम संबंध में विफलता और शादी से इनकार स्वतः ही आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला नहीं: गुवाहाटी हाइकोर्ट
प्रेम संबंध में विफलता और शादी से इनकार स्वतः ही आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला नहीं: गुवाहाटी हाइकोर्ट

गुवाहाटी हाइकोर्ट ने हाल ही में महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया कि किसी प्रेम संबंध का टूट जाना या शादी करने से मना कर देना, भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का आधार नहीं बन सकता। अदालत ने एक व्यक्ति के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों को रद्द कर दिया, जिसमें आरोपी पर एक नाबालिग लड़की को जान देने के लिए मजबूर करने का आरोप था।जस्टिस अंजन मोनी कलिता ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसी कोई सामग्री नहीं है, जो यह दर्शाती हो कि आरोपी ने...

POSH कानून के तहत सुलह के बाद भी नियोक्ता को विभागीय कार्रवाई का अधिकार बना रहता है: गौहाटी हाईकोर्ट
POSH कानून के तहत सुलह के बाद भी नियोक्ता को विभागीय कार्रवाई का अधिकार बना रहता है: गौहाटी हाईकोर्ट

गौहाटी हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें चीफ़ जस्टिस अशुतोष कुमार और जस्टिस अरुण देव चौधरी शामिल थे, ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा है कि POSH अधिनियम, 2013 की धारा 10(4) के तहत सुलह (conciliation) हो जाने के बाद केवल आंतरिक शिकायत समिति (ICC) द्वारा आगे की जांच पर रोक लगती है, लेकिन इससे नियोक्ता को सेवा नियमों के तहत स्वतंत्र विभागीय कार्यवाही शुरू करने से नहीं रोका जा सकता, खासकर जब बाद में नया साक्ष्य सामने आए और कार्यस्थल की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक हो।मामले की पृष्ठभूमिमामले में...

असम पंचायत नियमों का नियम 47(1) सिर्फ़ बाज़ार सेटलमेंट के लिए सबसे ज़्यादा बोली की सीमा तय करता है, सबसे कम सही दर तय नहीं करता: गुवाहाटी हाईकोर्ट
असम पंचायत नियमों का नियम 47(1) सिर्फ़ बाज़ार सेटलमेंट के लिए सबसे ज़्यादा बोली की सीमा तय करता है, सबसे कम सही दर तय नहीं करता: गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कहा कि असम पंचायत (वित्तीय) नियम, 2002 का नियम 47(1) सिर्फ़ बाज़ारों के सेटलमेंट के लिए ऊपरी सीमा तय करता है और कानूनी योजना में किसी न्यूनतम या "सबसे कम सही" बोली की शर्त को पढ़ने की अनुमति नहीं देता है।कोर्ट ने आगे कहा कि टेंडर से जुड़े आंकड़ों से निकाले गए प्रशासनिक नोटिस या अनुमानों का इस्तेमाल नियम 47(1) में ऐसी शर्तें जोड़ने के लिए नहीं किया जा सकता, जो नियम में खुद नहीं दी गईं।जस्टिस देवाशीष बरुआ ने नियम 47(1) के दायरे की जांच करते हुए कहा,"ऊपर बताए गए नियम को देखने...

S. 11 Cattle Preservation Act | सर्कल ऑफिसर को परिसर में घुसने, जांच करने का अधिकार हो सकता है, लेकिन उसे सील करने का नहीं: गुवाहाटी हाईकोर्ट
S. 11 Cattle Preservation Act | सर्कल ऑफिसर को परिसर में घुसने, जांच करने का अधिकार हो सकता है, लेकिन उसे सील करने का नहीं: गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कहा कि असम पशु संरक्षण अधिनियम (Cattle Preservation Act) 2021 की धारा 11 के तहत सर्कल ऑफिसर को ऐसे परिसर में घुसने और जांच करने का अधिकार दिया जा सकता है, जहां कानून का उल्लंघन हुआ हो, जिसमें एक मांस की दुकान भी शामिल है। हालांकि ऑफिसर के पास परिसर को सील करने का कोई अधिकार या क्षेत्राधिकार नहीं है।कोर्ट ने कहा कि कानून ऐसे अधिकारियों को परिसर में घुसने और जांच करने और वहां मिली सामग्री को जब्त करने की अनुमति देता है, लेकिन यह परिसर को पूरी तरह से सील करने तक नहीं है, जहां...

2018 तेजू पुलिस स्टेशन लिंचिंग केस | गुवाहाटी हाईकोर्ट ने आरोपियों की रिहाई का आदेश रद्द किया, हत्या के आरोप तय करने का निर्देश दिया
2018 तेजू पुलिस स्टेशन लिंचिंग केस | गुवाहाटी हाईकोर्ट ने आरोपियों की रिहाई का आदेश रद्द किया, हत्या के आरोप तय करने का निर्देश दिया

राज्य द्वारा दायर आपराधिक याचिका पर सुनवाई करते हुए जिसमें ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई और जिसमें 2018 में अरुणाचल प्रदेश के तेजू पुलिस स्टेशन से दो बलात्कार और हत्या के संदिग्धों को बाहर निकालकर सार्वजनिक रूप से पीट-पीटकर मार डालने के आरोपी छह प्रतिवादियों को बरी कर दिया गया था, गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कहा कि जांच के दौरान इकट्ठा किए गए सबूतों से आरोपियों के खिलाफ गंभीर संदेह पैदा होता है। इसलिए साजिश, सरकारी कर्मचारियों को काम करने से रोकने और हत्या सहित आरोपों पर पूरी सुनवाई की...

भूमि पासबुक जारी होने के बाद आवंटी का अधिकार व स्वामित्व तब तक बना रहता है, जब तक रद्द न किया जाए : गुवाहाटी हाईकोर्ट
भूमि पासबुक जारी होने के बाद आवंटी का अधिकार व स्वामित्व तब तक बना रहता है, जब तक रद्द न किया जाए : गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया कि जब सरकारी भूमि के आवंटन का हस्तांतरण सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित हो जाता है और आवंटी के पक्ष में भूमि पासबुक जारी हो जाती है तो वह व्यक्ति उस भूमि पर अधिकार और स्वामित्व बनाए रखता है। यह अधिकार तब तक बना रहता है, जब तक कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा विधिवत रूप से आवंटन को रद्द या वापस न लिया जाए।जस्टिस अंजन मोनी कलिता ने यह टिप्पणी अपील खारिज करते हुए की। उन्होंने कहा कि यह दलील स्वीकार्य नहीं है कि भूमि पासबुक केवल राजस्व भुगतान या वित्तीय...

महिला ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों को पुरुषों जैसी कठोर चयन प्रक्रिया से नहीं गुजरना चाहिए: गुवाहाटी हाईकोर्ट, राज्य को दी आरक्षण नीति पर सलाह
महिला ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों को पुरुषों जैसी कठोर चयन प्रक्रिया से नहीं गुजरना चाहिए: गुवाहाटी हाईकोर्ट, राज्य को दी आरक्षण नीति पर सलाह

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने पुलिस भर्ती विज्ञापन में ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों को पुरुष अभ्यर्थियों के साथ क्लब किए जाने को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि महिला ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों को पुरुष उम्मीदवारों जैसी कठोर चयन प्रक्रिया से नहीं गुजारा जा सकता। अदालत ने राज्य सरकार को सुझाव दिया कि भविष्य की भर्तियों में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए अधिक समावेशी और न्यायसंगत नीति अपनाई जाए।यह मामला उस भर्ती विज्ञापन से जुड़ा था, जिसमें सब-इंस्पेक्टर और कांस्टेबल पदों के लिए ट्रांसजेंडर...