गौहाटी हाईकोर्ट

निजी जमीन पर घर तोड़ने पर गुवाहाटी हाईकोर्ट सख्त, कहा- आपदा प्रबंधन कानून के दुरुपयोग की प्रथमदृष्टया आशंका

गोलपाड़ा में निजी जमीन पर बने लोगों के मकान गिराने की कार्रवाई पर गुवाहाटी हाईकोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए । कोर्ट ने कहा कि राज्य की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों से प्रथमदृष्टया ऐसा नहीं लगता कि मकान गिराने के लिए कोई आसन्न खतरा मौजूद था। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रथमदृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 का दुरुपयोग किया गया।मामला गोलपाड़ा जिले के माटिया अंचल कार्यालय की ओर से जारी नोटिस से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें अपने ही कृषि भूखंडों पर बने मकानों को 24 घंटे...

पीड़िता की उम्र साबित नहीं हुई: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने POCSO के तहत 20 साल की सज़ा रद्द की; रेप के लिए 12 साल की सज़ा सुनाई

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कहा कि POCSO Act की धारा 4 के तहत सज़ा तब तक नहीं दी जा सकती, जब तक अभियोजन पक्ष यह साबित न कर दे कि पीड़िता की उम्र 18 साल से कम थी, भले ही IPC की धारा 376(1) के तहत रेप का अपराध अलग से साबित हो गया हो।जस्टिस माइकल ज़ोथानखुमा और जस्टिस शमीमा जहान की डिवीज़न बेंच ने कहा,"हमारा मानना ​​है कि भले ही POCSO Act, 2012 की धारा 4 के तहत सज़ा नहीं दी जा सकती - क्योंकि ट्रायल के दौरान पीड़िता की उम्र 18 साल से कम होना साबित नहीं हो पाया - लेकिन अपीलकर्ता द्वारा पीड़िता के साथ रेप की...

भारत में तलाक-ए-हसन वैध, असम के कानून के तहत कराना होगा रजिस्ट्रेशन: गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कहा कि तलाक-ए-हसन भारत में फिलहाल वैध तलाक का एक रूप है और प्रतिबंधित नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि असम में इस तरह के तलाक का रजिस्ट्रेशन 2024 के असम अनिवार्य मुस्लिम विवाह एवं तलाक पंजीकरण अधिनियम के तहत संबंधित विवाह एवं तलाक रजिस्ट्रार के समक्ष कराया जा सकता है।जस्टिस अरुण देव चौधरी ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें एक पति ने बारपेटा के उप-पंजीयक-सह-विवाह एवं तलाक रजिस्ट्रार द्वारा तलाक-ए-हसन के पंजीकरण से इनकार किए जाने को चुनौती दी थी।पति का कहना...

विध्वंस पहली नज़र में गैर-कानूनी: बिना सुनवाई के घर गिराने पर गुवाहाटी हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फटकारा

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने सोमवार (7 सितंबर) को गोलपारा में कई निवासियों के निजी ज़मीन पर बने घरों को बिना उनकी बात सुने गिराने के लिए राज्य के अधिकारियों को फटकार लगाई। कोर्ट ने माना कि यह कार्रवाई पहली नज़र में गैर-कानूनी और बिना अधिकार के की गई।ऐसा करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा कि याचिकाकर्ताओं के घरों को गिराने की ज़रूरत क्यों पड़ी और क्या कोई "तत्काल खतरा" है।कोर्ट उन लोगों की याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिन्होंने मटिया के सर्कल ऑफिस (प्रतिवादी नंबर 3) द्वारा जारी नोटिस को चुनौती...

मुस्लिम कानून में संयुक्त परिवार मान्य नहीं होते, भाई नाबालिग भाई-बहनों की ज़मीन नहीं बेच सकता: गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने फिर से कहा कि मुस्लिम कानून के तहत हर वारिस का हिस्सा अलग और स्वतंत्र होता है। इसलिए चार नाबालिग भाई-बहनों का भाई उनका अभिभावक (गार्जियन) बनकर उनकी ज़मीन नहीं बेच सकता, क्योंकि इस कानून में 'प्रतिनिधित्व के सिद्धांत' (थ्योरी ऑफ़ रिप्रेजेंटेशन) या 'संयुक्त परिवार' की अवधारणा को मान्यता नहीं दी गई।ऐसा करते हुए कोर्ट ने ज़मीन के एक टुकड़े पर वादी (Plaintiff) के 30-33 साल के कब्ज़े और प्रतिवादियों (Defendants) द्वारा समय-सीमा के भीतर अपना दावा पेश न कर पाने को आधार मानते हुए...

जमानत में तय रकम नकद जमा करना जरूरी नहीं, स्थानीय जमानतदार की शर्त भी नहीं लगा सकते: गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत या जमानतदार बांड में लिखी गई रकम को आरोपी की रिहाई के लिए नकद जमा करने की राशि नहीं माना जा सकता।अदालत ने कहा कि बांड में किसी रकम का उल्लेख होने मात्र से पुलिस या अदालत आरोपी से उस रकम को नकद जमा करने की मांग नहीं कर सकती।जस्टिस बुदी हाबुंग ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें दापोरिजो के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा लगाई गई जमानत की शर्तों में बदलाव की मांग की गई।मामले में अनार अली को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2) और...

गन लाइसेंस पाना मौलिक अधिकार नहीं, नौकरी की ज़रूरत से लाइसेंस रिन्यूअल का हक नहीं मिलता: गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कहा कि गन लाइसेंस पाने या उसे रिन्यू कराने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है। कोर्ट ने माना कि आर्म्स एक्ट, 1959 के तहत लाइसेंस मिलना सिर्फ़ एक कानूनी सुविधा है।जस्टिस संजय कुमार मेधी की सिंगल बेंच ने तीन लोगों की याचिका खारिज करते हुए यह बात कही। इन लोगों का दावा था कि गन लाइसेंस की मियाद खत्म होने से वे बेरोजगार हो गए, क्योंकि उनके काम के लिए लाइसेंस की ज़रूरत थी।याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे पहले नागालैंड और असम के बाहर दूसरी जगहों पर प्राइवेट कंपनियों में काम करते थे और गन...

आय से अधिक संपत्ति मामले में जांच के लिए धारा 17ए की पूर्व मंजूरी जरूरी नहीं: गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों की जांच शुरू करने से पहले भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17ए के तहत सक्षम प्राधिकारी की पूर्व मंजूरी आवश्यक नहीं है।हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह के आरोप किसी लोकसेवक द्वारा अपने आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान दी गई सिफारिश या लिए गए निर्णय से संबंधित नहीं होते। जस्टिस मृदुल कुमार कलिता ने पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के रिटायर डिप्टी चीफ इंजीनियर रंजीत दास की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।रंजीत दास ने...

नियोक्ता की स्वीकारोक्ति को नजरअंदाज करना गंभीर त्रुटि: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने मृत चालक के परिवार का मुआवजा बढ़ाया

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम, 1923 के तहत मृत चालक के परिजनों को मिलने वाली क्षतिपूर्ति राशि बढ़ाते हुए कहा कि आयुक्त ने चालक के वेतन के संबंध में नियोक्ता की स्पष्ट स्वीकारोक्ति को नजरअंदाज कर गंभीर त्रुटि की।जस्टिस मृदुल कुमार कलिता ने अपील स्वीकार करते हुए मुआवजे की राशि 5,81,280 रुपये से बढ़ाकर 8,43,680 रुपये की। साथ ही इस राशि पर आयुक्त के आदेश के एक महीने बाद से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी निर्देश दिया।मामला कर्मचारी क्षतिपूर्ति आयुक्त, बारपेटा के 8...

मूल ध्वस्तीकरण आदेश को चुनौती दिए बिना बाद के आदेश पर राहत नहीं मिल सकती: गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी निर्माण को गिराने का मूल आदेश चुनौती नहीं दिया गया है तो उसके आधार पर जारी किए गए बाद के ध्वस्तीकरण कार्यक्रम या कार्रवाई संबंधी आदेश को अलग से चुनौती देकर राहत नहीं मांगी जा सकती।जस्टिस मनीष चौधरी ने गुवाहाटी महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) द्वारा कथित अवैध निर्माण हटाने के लिए जारी ध्वस्तीकरण कार्यक्रम में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा कि विवादित आदेश केवल पहले से पारित ध्वस्तीकरण आदेश का परिणाम है।अदालत ने कहा,"18 जून 2026 का विवादित आदेश 19 नवंबर...

परीक्षा तभी रद्द होगी जब पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो, केवल संदिग्ध उम्मीदवारों को अलग किया जाए: गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी परीक्षा को पूरी तरह रद्द करना तभी उचित है जब उसकी निष्पक्षता प्रणालीगत स्तर पर प्रभावित हो और दोषी तथा निर्दोष उम्मीदवारों को अलग करना संभव न हो। यदि संदिग्ध उम्मीदवारों की पहचान की जा सकती है, तो उन्हें अलग कर चयन प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी चाहिए।चीफ़ जस्टिस अशुतोष कुमार और जस्टिस अरुण देव चौधरी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी एन.एफ. रेलवे में चीफ लॉ असिस्टेंट पद की विभागीय पदोन्नति परीक्षा से जुड़े मामले में की। उत्तर कुंजी विवाद के बाद पुनर्मूल्यांकन कराया गया था,...

MBBS पूरा करने के बाद केवल लंबित आपराधिक मुकदमे के आधार पर डिग्री प्रमाणपत्र नहीं रोका जा सकता: गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी छात्र के खिलाफ आपराधिक मामला लंबित होने मात्र के आधार पर उसका मूल अंतिम MBBS उत्तीर्ण प्रमाणपत्र अनिश्चितकाल तक रोका नहीं जा सकता खासकर तब जब उसने पाठ्यक्रम, अनिवार्य इंटर्नशिप पूरी कर ली हो और सक्षम प्राधिकारी से पंजीकरण भी प्राप्त कर लिया हो।जस्टिस बुद्धि हाबुंग ने कहा कि जब तक किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने का न्यायिक निर्णय नहीं हो जाता, तब तक केवल मुकदमे के लंबित रहने को प्रमाणपत्र रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता।मामला वालिया...

Custodial Death | गुवाहाटी हाईकोर्ट ने दिया बिज़नेसमैन की विधवा को ₹25 लाख का मुआवज़ा, कहा- पुलिस वालों के ख़िलाफ़ चल रहा ट्रायल कोई रुकावट नहीं

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने इस हफ़्ते की शुरुआत में असम सरकार को बिज़नेसमैन की विधवा को ₹20 लाख का अतिरिक्त मुआवज़ा देने का निर्देश दिया। अंतरिम राहत के तौर पर पहले ही ₹5 लाख दिए जा चुके थे। यह मुआवज़ा उस बिज़नेसमैन की मौत के लिए दिया गया, जिसे 2020 में पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर अगवा किया, बेरहमी से प्रताड़ित किया और मार डाला।पब्लिक लॉ रेमेडी (सार्वजनिक कानून के तहत उपाय) के तहत मुआवज़ा देते हुए जस्टिस कल्याण राय सुराना और जस्टिस शमीमा जहान की बेंच ने कस्टडी में हिंसा की बर्बर घटनाओं पर कड़ी आपत्ति...

हेट स्पीच PILs | इंटरव्यू के चुनिंदा हिस्से वास्तविक अर्थ को बिगाड़ सकते हैं: असम सीएम ने गुवाहाटी हाईकोर्ट से कहा, पूरे ट्रांसक्रिप्ट मांगे

अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ कथित हेट स्पीच के मामले में कार्रवाई की मांग करने वाली जनहित याचिकाओं (PIL) के जवाब में असम सीएम डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के सामने कहा कि उन पर लगे आरोप न्यूज़ क्लिपिंग की फोटोकॉपी पर आधारित हैं, जिनमें से कुछ चुनिंदा लाइनें निकाली गई हैं जो उनके असली इरादे को बिगाड़ सकती हैं।अपने हलफनामे में सीएम सरमा ने याचिकाकर्ताओं द्वारा इस्तेमाल की गई सामग्री की असलियत पर गंभीर सवाल उठाए।उन्होंने यह भी कहा कि किसी इंटरव्यू से चुनिंदा हिस्से या कुछ लाइनें...

POCSO मामलों में पूरा प्रवेश या हाइमन फटना जरूरी नहीं: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 20 साल की सजा बरकरार रखी

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने POCSO Act के महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया कि यौन उत्पीड़न साबित करने के लिए पूरा प्रवेश या हाइमन का फटना जरूरी नहीं है।अदालत ने कहा कि मामूली स्तर का प्रवेश भी कानून के तहत भेदक यौन उत्पीड़न माना जाएगा।हाईकोर्ट ने 9 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म के आरोपी सतीश राय की सजा बरकरार रखते हुए उसकी अपील खारिज की। आरोपी को स्पेशल POCSO कोर्ट ने गंभीर भेदक यौन उत्पीड़न का दोषी मानते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।जस्टिस माइकल जोथनखुमा और जस्टिस संजीव कुमार शर्मा की...

फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल में नागरिकता साबित करने की पूरी जिम्मेदारी व्यक्ति की, सिर्फ मौखिक दावे पर्याप्त नहीं : गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कहा है कि फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के समक्ष नागरिकता साबित करने का पूरा भार संबंधित व्यक्ति (प्रोसीडी) पर होता है और इसे केवल अस्पष्ट दलीलों, विरोधाभासी वोटर लिस्ट या बिना प्रमाणित दस्तावेजों के आधार पर पूरा नहीं किया जा सकता।जस्टिस संजय कुमार मेधी और जस्टिस प्रांजल दास की खंडपीठ डाबिर रहमान द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में वर्ष 2018 में फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें उसे 25 मार्च 1971 के बाद भारत आया विदेशी घोषित किया गया...