गौहाटी हाईकोर्ट
पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित, गुवाहाटी हाईकोर्ट में दोनों पक्षकारों की जोरदार बहस
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा द्वारा दर्ज FIR से जुड़ा है, जिसमें कई पासपोर्ट रखने के आरोप लगाए गए ।जस्टिस पार्थिवज्योति सैकिया की पीठ ने दोनों पक्षकारों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा।याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री...
हेट स्पीच याचिकाएं: असम CM पर आरोप- नोटिस के बाद भी भड़काऊ बयान जारी, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
गुवाहाटी हाईकोर्ट में दायर हेट स्पीच से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि हिमंत बिस्वा सरमा ने अदालत के नोटिस के बाद भी कथित तौर पर भड़काऊ बयान देना जारी रखा है। कोर्ट ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का अतिरिक्त समय दे दिया।चीफ जस्टिस अशुतोष कुमार और जस्टिस अरुण देव चौधरी की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 28 मई के लिए तय की है और निर्देश दिया है कि तब तक सभी प्रतिवादी अपना हलफनामा दाखिल करें।सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट...
पासपोर्ट विवाद: पवन खेड़ा ने अग्रिम जमानत के लिए गुवाहाटी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा द्वारा दर्ज FIR के मामले में अग्रिम जमानत के लिए गुवाहाटी हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट की वेबसाइट के अनुसार यह याचिका सोमवार 20 अप्रैल को दाखिल की गई।यह मामला कथित तौर पर कई पासपोर्ट रखने के आरोपों से जुड़ा है। इससे पहले तेलंगाना हाईकोर्ट ने 10 अप्रैल को खेड़ा को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी और उन्हें संबंधित न्यायालय में जाने की अनुमति दी थी। यह याचिका हैदराबाद में दायर की गई, जहां...
DNA रिपोर्ट नेगेटिव होने पर भी पीड़िता का बयान सर्वोपरि: यौन उत्पीड़न के मामले में गुवाहाटी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि यदि पीड़िता की गवाही विश्वसनीय है और उसे अन्य मेडिकल सबूतों से समर्थन मिलता है, तो केवल 'नेगेटिव' डीएनए (DNA) रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को बरी नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि जब अभियोजन पक्ष गवाही के माध्यम से अपराध सिद्ध कर देता है, तो DNA रिपोर्ट का मिलान न होना मामले को कमजोर नहीं करता।मामले की पृष्ठभूमियह फैसला जस्टिस प्रांजल दास की एकल पीठ ने सुनाया। मामला एक 14 वर्षीय नाबालिग लड़की से जुड़ा है जिसके साथ उस समय बलात्कार किया गया...
वैवाहिक बलात्कार भले अपराध नहीं, लेकिन प्रेम संबंध में जबरन संबंध अपराध—FIR रद्द करने से इनकार: गौहाटी हाईकोर्ट
गौहाटी हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि प्रेम संबंध (love relationship) होने से बलात्कार के अपराध की गंभीरता कम नहीं हो जाती। अदालत ने कहा कि यदि महिला की इच्छा के विरुद्ध जबरन शारीरिक संबंध बनाया जाता है, तो वह आपराधिक कृत्य ही रहेगा।जस्टिस प्रांजल दास की पीठ एक आपराधिक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोपी ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) और POCSO अधिनियम की धारा 4 के तहत दर्ज अपराधों से जुड़ा है।मामले...
प्रशिक्षण पूरा किए बिना असम राइफल्स से मुक्त होने पर बहाली का अधिकार नहीं: गुवाहाटी हाइकोर्ट
गुवाहाटी हाइकोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि जिस अभ्यर्थी ने न तो अपना प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया हो और न ही असम राइफल्स अधिनियम, 2006 के तहत औपचारिक रूप से बल का सदस्य बना हो उसे सेवा में पुनर्बहाली का अधिकार प्राप्त नहीं है, विशेषकर तब जब उसने स्वयं लिखित आवेदन और शपथपत्र देकर सेवा से मुक्त होने का अनुरोध किया हो।जस्टिस उन्नी कृष्णन नायर और जस्टिस यारेनजुंगला लोंगकुमेर की खंडपीठ ने एकलपीठ के निर्णय को बरकरार रखते हुए अभ्यर्थी की अपील खारिज की।मामले के अनुसार, कर्मचारी चयन आयोग द्वारा असम...
'विभाजनकारी प्रवृत्ति' : मुसलमानों के खिलाफ कथित हेट स्पीच पर असम सीएम को हाईकोर्ट का नोटिस
गौहाटी हाईकोर्ट ने गुरुवार (26 फरवरी) को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ अल्पसंख्यक समुदायों के विरुद्ध कथित घृणास्पद भाषण (हेट स्पीच) देने से रोकने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) और दो संबद्ध मामलों पर नोटिस जारी किया।चीफ़ जस्टिस अशुतोष कुमार और जस्टिस अरुण देव चौधरी की खंडपीठ ने केंद्र सरकार, असम राज्य, डीजीपी और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को नोटिस जारी किया। अदालत ने अंतरिम राहत की मांग पर भी नोटिस दिया और मामले को बिहू अवकाश के बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।PIL में क्या...
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने आर्टिकल 22(5) के सेफगार्ड्स का उल्लंघन पर एक्टिविस्ट विक्टर दास की NSA डिटेंशन रद्द की
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने नेशनल सिक्योरिटी एक्ट, 1980 (NSA) के तहत विक्टर दास की प्रिवेंटिव डिटेंशन को यह कहते हुए रद्द किया कि आर्टिकल 22(5) के तहत संवैधानिक सेफगार्ड्स का उल्लंघन किया गया।जस्टिस कल्याण राय सुराणा और जस्टिस अंजन मोनी कलिता की डिवीजन बेंच ने 7 अक्टूबर, 2025 के डिटेंशन ऑर्डर, डिटेंशन के आधार और राज्य सरकार की मंज़ूरी रद्द की और निर्देश दिया कि अगर किसी और मामले में ज़रूरत न हो तो दास को तुरंत रिहा किया जाए।दास को असमिया सिंगर ज़ुबीन गर्ग की मौत के बाद हुई घटनाओं के बाद गुवाहाटी के...
जिस विषय में पुनर्मूल्यांकन का आवेदन नहीं, उसमें अंक घटाना गलत: गुवाहाटी हाइकोर्ट
गुवाहाटी हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिस विषय में पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन नहीं किया गया हो, उस विषय के अंकों में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड कोई बदलाव नहीं कर सकता। अदालत ने कहा कि किसी विषय के पुनर्मूल्यांकन के दौरान दूसरे विषय के पहले से दिए गए अंक घटाना नियमों के विपरीत है।जस्टिस नेल्सन सैलो की पीठ ने कहा,“जब याचिकाकर्ता के पुत्र ने निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार केवल विज्ञान विषय में पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया तो यह समझ से परे है कि उस पुनर्मूल्यांकन के दौरान गणित विषय के अंक...
शादीशुदा दंपति और नाबालिग बच्चे के हित में कार्यवाही समाप्त: गौहाटी हाइकोर्ट ने बाल विवाह और POCSO मामला किया रद्द
गुवाहाटी हाइकोर्ट ने विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बाल विवाह निषेध अधिनियम और POCSO Act के तहत चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की।अदालत ने कहा कि जब दोनों पक्ष विवाह कर चुके हैं, साथ रह रहे हैं और उनका एक नाबालिग बच्चा भी है, तो मुकदमे को जारी रखना निरर्थक होगा।जस्टिस प्रांजल दास ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 528 के तहत अपने विशेष अधिकार का प्रयोग करते हुए यह आदेश पारित किया।उन्होंने कहा,“वर्तमान मामले के तथ्यों से जो वस्तुस्थिति सामने आई, उसे अनदेखा नहीं किया जा...
महज हाथ छूना आपराधिक बल नहीं: गुवाहाटी हाइकोर्ट ने IIT प्रोफेसर पर दर्ज यौन उत्पीड़न का मामला किया रद्द
गुवाहाटी हाइकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि केवल किसी महिला का हाथ छू लेना भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 के तहत आपराधिक बल या महिला की लज्जा भंग करने का अपराध नहीं बनता। कोर्ट ने इसी आधार पर एक IIT प्रोफेसर के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न का आपराधिक मामला रद्द किया।जस्टिस संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि IPC की धारा 354 के तहत अपराध तभी बनता है जब आपराधिक बल का प्रयोग हुआ हो और महज हाथ छूना कानून में परिभाषित बल की श्रेणी में नहीं आता।यह मामला उस शिकायत से जुड़ा था, जिसमें एक महिला ने आरोप लगाया कि वह...
POCSO जांचें चाइल्ड-फ्रेंडली होनी चाहिए, जांचकर्ताओं को संवेदनशील बनाएं ताकि 'बिना किसी शक के सच सामने आए': गुवाहाटी हाईकोर्ट
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण एक्ट (POCSO Act) के तहत जांच संवेदनशीलता और चाइल्ड-फ्रेंडली प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करते हुए की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि काउंसलिंग सपोर्ट न देना, सपोर्ट पर्सन नियुक्त न करना और साफ़, विशिष्ट बयान रिकॉर्ड न करना न्याय के मकसद को ही खत्म कर सकता है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि खराब या लापरवाही से की गई जांच न केवल आरोपी के साथ अन्याय करती है, बल्कि ऐसे मामलों में भी बरी होने का कारण बन सकती है जहां अपराध हुआ हो।जस्टिस...
लंबे अंतराल के कारण अनुकंपा नियुक्ति से इनकार, लेकिन मनमाने निर्णय पर मुआवज़ा मंजूर: गौहाटी हाइकोर्ट
गौहाटी हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद अत्यधिक समय बीत चुका हो तो अनुकंपा नियुक्ति पर विचार करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता, क्योंकि इसका उद्देश्य तत्काल राहत प्रदान करना होता है।हालांकि, अदालत ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता के मामले में राज्य स्तरीय समिति द्वारा किया गया निर्णय मनमाना और भेदभावपूर्ण था, जिसके लिए मुआवज़ा दिया जाना उचित है।जस्टिस एन. उन्नी कृष्णन नायर ने कहा कि याचिकाकर्ता के पिता, जो सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में जुगाली के पद पर कार्यरत थे, का 14...
चेक बाउंस मामले में यदि आरोपी की दलील प्रथम दृष्टया विश्वसनीय हो तो अंतरिम मुआवजा नहीं दिया जा सकता: गुवाहाटी हाइकोर्ट
गुवाहाटी हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि चेक बाउंस मामले में ऐसे विवादित तथ्य हों जिनका निपटारा साक्ष्यों के माध्यम से किया जाना आवश्यक हो, तो उस अवस्था में परक्राम्य लिखत अधिनियम (NI Act) की धारा 143-ए के तहत अंतरिम मुआवजा देना उचित नहीं होगा।जस्टिस प्रांजल दास ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें आरोपी को चेक राशि का 20 प्रतिशत अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था।हाइकोर्ट ने कहा कि अंतरिम मुआवजा देने से पहले कोर्ट का यह संतुष्ट होना आवश्यक है कि शिकायतकर्ता के पक्ष में...
नोटरी के समक्ष दिए गए हलफनामे से विवाह विच्छेद संभव नहीं: गुवाहाटी हाईकोर्ट
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी विवाह को केवल नोटरी के समक्ष दिए गए हलफनामे के माध्यम से भंग नहीं किया जा सकता।हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक मुस्लिम विवाह विच्छेद अधिनियम, 1939 के प्रावधानों का विधिवत पालन किए जाने का कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जाता, तब तक केवल एक नोटरीकृत हलफनामे के आधार पर तलाक का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।जस्टिस प्रांजल दास ने यह टिप्पणी उस आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें बारपेटा के प्रधान जज, फैमिली कोर्ट द्वारा पारित उस आदेश को...
समान साक्ष्य पर सह-आरोपियों के बरी होने पर NDPS Act की धारा 37 की बाधा हटेगी: गुवाहाटी हाइकोर्ट
गुवाहाटी हाइकोर्ट ने NDPS Act के एक मामले में आरोपी को जमानत देते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि यदि उसी मामले में समान साक्ष्य के आधार पर सह-आरोपी बरी हो चुके हों और उन बरी होने के निष्कर्षों को अपील में चुनौती नहीं दी गई हो तो जमानत पर विचार करते समय अदालत को उन निष्कर्षों को वैध मानकर चलना होगा। ऐसे में NDPS Act की धारा 37 के तहत लगाई गई सख्त शर्तें भी संतुष्ट मानी जाएंगी।जस्टिस संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि जब तक सह-आरोपियों के बरी होने के निष्कर्ष अपील में पलटे नहीं जाते तब तक जमानत याचिका पर...
अनुच्छेद 226 के तहत रिट कोर्ट निर्णय की प्रक्रिया देखता है, गुण-दोष नहीं: गुवाहाटी हाइकोर्ट
गुवाहाटी हाइकोर्ट ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की उचित मूल्य दुकान का लाइसेंस रद्द किए जाने के मामले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट अधिकार क्षेत्र में अदालत केवल निर्णय लेने की प्रक्रिया की जांच करती है, न कि निर्णय के गुण-दोष का मूल्यांकन।जस्टिस संजय कुमार मेधी ने कहा कि अनुच्छेद 226 के तहत सर्टियोरारी अधिकार का प्रयोग केवल यह देखने तक सीमित है कि क्या निर्णय लेते समय प्रासंगिक तथ्यों पर विचार किया गया या नहीं, अथवा क्या निर्णय किसी...
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केवल सुनी-सुनाई बातों के आधार पर कार्यवाही नहीं चल सकती : गुवाहाटी हाइकोर्ट
गुवाहाटी हाइकोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत किसी आरोपी के खिलाफ कार्यवाही तब तक कायम नहीं रह सकती, जब तक रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री ठोस न हो और उसका सीधा संबंध आरोपी के आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन से स्थापित न होता हो। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल सुनी-सुनाई बातों (हियरसे) के आधार पर आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानूनन उचित नहीं है।जस्टिस संजीव कुमार शर्मा की एकल पीठ ने यह टिप्पणी एक होमगार्ड कर्मी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें विशेष अदालत में लंबित...
लोक अदालत में समझौता पक्षकारों की स्वतंत्र सहमति से ही संभव, वकील को बिना लिखित अधिकार समझौता करने का हक नहीं: गुवाहाटी हाइकोर्ट
गुवाहाटी हाइकोर्ट ने नेशनल लोक अदालत में दर्ज किए गए समझौते की वैधता पर अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत कोई भी समझौता तभी मान्य होगा जब वह पक्षकारों द्वारा स्वयं अपनी स्वतंत्र सहमति से किया गया हो।जस्टिस संजय कुमार मेधी ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि वकील द्वारा बिना किसी लिखित प्राधिकार के किया गया समझौता कानूनी रूप से वैध नहीं माना जा सकता और न ही उसे अनिवार्य माना जा सकता है।अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम...
सेवा में तीन साल से कम शेष होने के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति से इनकार नहीं किया जा सकता: गुवाहाटी हाइकोर्ट
गुवाहाटी हाइकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के समय उसकी सेवा में तीन साल से कम अवधि शेष होने के आधार पर उसके आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित करना मनमाना है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।चीफ जस्टिस अशुतोष कुमार और जस्टिस अरुण देव चौधरी की खंडपीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि मृतक कर्मचारी की शेष सेवा अवधि के आधार पर किया गया यह वर्गीकरण न तो तार्किक है और न ही इसका उद्देश्य से कोई सीधा संबंध है।हाइकोर्ट ने कहा,“हम पाते हैं कि मृत कर्मचारी की बची...

















