मद्रास हाईकोर्ट

धार्मिक चिह्न पहने गैर-हिंदू, देवता के प्रति 'श्रद्धा' जताए बिना आगमिक मंदिरों में प्रवेश नहीं कर सकते: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि धार्मिक चिह्न पहने हुए गैर-हिंदुओं को तमिलनाडु के आगमिक मंदिरों के परिसर में तब तक प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जा सकती, जब तक कि वे मंदिर द्वारा तय किए गए प्रारूप में एक शपथ-पत्र (अंडरटेकिंग) देकर संबंधित देवता के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त न करें।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हालांकि प्रवेश को प्रतिबंधित करने वाले आगमिक नियम अब संविधान की कसौटी पर खरे नहीं उतर सकते, लेकिन जो गैर-हिंदू शपथ-पत्र पर हस्ताक्षर नहीं करते, उन पर ये नियम लागू रहेंगे। कोर्ट ने टिप्पणी की,"अगर इस...

बच्चा सामान्य जीवन नहीं जी सकेगा तो उसे जन्म देना है या नहीं, यह तय करने का अधिकार मां को: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने भ्रूण में गंभीर असामान्यताएं पाए जाने के बाद 28 सप्ताह की गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति दी। जस्टिस पी.टी. आशा ने कहा कि मां को यह निर्णय लेने का अधिकार है कि वह बच्चे को जन्म देना चाहती है या नहीं, खासकर तब, जब बच्चे के सामान्य जीवन जी पाने की संभावना प्रभावित हो सकती हो।अदालत ने कहा,“इस मामले में स्कैन रिपोर्ट स्पष्ट रूप से भ्रूण में गंभीर असामान्यताओं को दर्शाती हैं। मां को यह निर्णय लेने का अधिकार है कि वह ऐसे बच्चे को जन्म देना चाहती है या नहीं, खासकर तब जब बच्चा...

पति का विवाहेतर संबंध अपने आप में IPC की धारा 498A के तहत पत्नी के साथ क्रूरता नहीं: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि पति का किसी अन्य महिला के साथ अवैध संबंध होना अपने आप में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A के तहत पत्नी के साथ क्रूरता का अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।जस्टिस सुंदर मोहन ने इस आधार पर पत्नी और उनकी डेढ़ साल की बच्ची की आत्महत्या के मामले में पति को बरी किए जाने के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार किया। पति पर क्रूरता और दहेज उत्पीड़न से संबंधित आरोप लगाए गए थे।अदालत ने कहा, “इस मामले में भी यह साबित हुआ है कि दूसरे प्रतिवादी का अवैध संबंध था। तथ्यों के...

RSS रूट मार्च को मद्रास हाईकोर्ट की मंजूरी का रास्ता साफ, पुलिस 19 अक्टूबर तक देगी अनुमति
मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार (16 अक्टूबर) को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के रूट मार्च का रास्ता साफ कर दिया। कोर्ट को तमिलनाडु के एडवोकेट जनरल ने बताया कि पुलिस आयोजकों की ओर से दिए गए आवेदन और अन्य विवरणों पर विचार करने के बाद सोमवार (19 अक्टूबर) तक मार्च की अनुमति दे देगी।जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन ने इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए याचिका का निपटारा कर दिया। कोर्ट ने कहा कि रूट मार्च 25 अक्टूबर और 1 नवंबर को आयोजित किए जाएंगे। हालांकि, स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर पुलिस आवश्यक बदलाव कर...

मस्जिद होने के आधार पर RSS रूट मार्च की अनुमति नहीं रोक सकते, अल्पसंख्यकों को बदनाम न करें: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने गुरुवार (15 अक्टूबर) को कहा कि राज्य पुलिस प्रस्तावित मार्ग पर मस्जिद या ईदगाह होने का हवाला देकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के रूट मार्च की अनुमति देने से इनकार नहीं कर सकती। अदालत ने कहा कि इस तरह के तर्क देकर मुस्लिम समुदाय को गलत तरीके से पेश नहीं किया जाना चाहिए।जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन ने यह मौखिक टिप्पणी तमिलनाडु में RSS के प्रस्तावित रूट मार्च की अनुमति देने से इनकार किए जाने के खिलाफ संगठन की उत्तर तमिलनाडु इकाई के राज्य सचिव की याचिका पर सुनवाई के दौरान की।राज्य...

'जम्मू-कश्मीर जैसे आतंक प्रभावित क्षेत्र में मार्च निकाल सकते हैं, तो तमिलनाडु में अनुमति क्यों नहीं?' RSS मार्च पर मद्रास हाईकोर्ट की मौखिक टिप्पणी
मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार (14 अक्टूबर) को तमिलनाडु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की रूट मार्च निकालने की अनुमति से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए सवाल किया कि जब संगठन जम्मू-कश्मीर जैसे आतंक प्रभावित क्षेत्रों में भी मार्च निकाल सकता है, तो तमिलनाडु पुलिस उसे हर साल अनुमति देने से इनकार क्यों करती है।जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा,“अगर वे (RSS) जम्मू-कश्मीर जैसे आतंक प्रभावित क्षेत्र में मार्च निकाल सकते हैं, तो तमिलनाडु पुलिस उन्हें हर साल अनुमति देने से इनकार क्यों...

भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़ी जानकारी RTI Act के तहत देने से इनकार नहीं किया जा सकता: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा है कि सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) को सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) के तहत मिली छूट का इस्तेमाल भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन से संबंधित जानकारी रोकने के लिए नहीं किया जा सकता।जस्टिस हेमंत चंदनगौदर ने स्पष्ट किया कि RTI अधिनियम की धारा 24(4) के तहत किसी विभाग को छूट दिए जाने के बावजूद, भ्रष्टाचार के आरोपों और मानवाधिकार उल्लंघन से संबंधित जानकारी इस छूट के दायरे से बाहर रहती है।अदालत ने यह भी कहा कि DVAC मैनुअल के नियम 29 के तहत जांच संबंधी जानकारी...

प्राइवेट एम्प्लॉयर और एजुकेशनल इंस्टिट्यूट एप्लीकेशन फ़ॉर्म में जाति की जानकारी अनिवार्य रूप से नहीं मांग सकते: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट की जस्टिस सी.वी. कार्तिकेयन और जस्टिस आर. शक्तिवेल डिवीज़न बेंच ने कहा कि तमिलनाडु में कोई भी प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टिट्यूट या प्राइवेट एम्प्लॉयर एप्लीकेशन फ़ॉर्म में जाति या समुदाय की जानकारी अनिवार्य रूप से नहीं मांग सकता।पृष्ठभूमि की जानकारीयाचिकाकर्ता ने मद्रास हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। याचिकाकर्ता ने तमिलनाडु सरकार से यह निर्देश देने की मांग की कि वह राज्य के भीतर प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टिट्यूट और प्राइवेट एम्प्लॉयर को एप्लीकेशन फ़ॉर्म में जाति या समुदाय की जानकारी...

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने “₹600 करोड़ घोषित किए, ₹30 करोड़ छूट गए तो क्या चुनाव रद्द होगा?” मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार (7 अक्टूबर) को सवाल किया कि यदि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने चुनावी हलफनामे में करीब ₹600 करोड़ की संपत्ति घोषित की है, लेकिन कथित तौर पर करीब ₹30 करोड़ की संपत्तियों का खुलासा नहीं किया, तो क्या इसे भ्रष्ट आचरण (Corrupt Practice) माना जा सकता है और क्या इसके आधार पर उनका चुनाव रद्द किया जा सकता है?जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन ने यह सवाल मुख्यमंत्री द्वारा दायर उस आवेदन पर सुनवाई के दौरान उठाया, जिसमें उन्होंने पेरम्बूर विधानसभा क्षेत्र से अपने चुनाव को चुनौती...

शादी का मकसद सिर्फ़ बच्चे पैदा करना नहीं, बच्चा न होना क्रूरता नहीं: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में एक पति को कथित क्रूरता के आधार पर तलाक देने से इनकार कfया। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि कपल को बच्चा नहीं हुआ, पत्नी वैवाहिक रिश्ते में नाकाम नहीं रही। [2026 LiveLaw (Mad) 477]जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस एमडी सुमति की बेंच ने कहा कि कपल का बच्चा न हो पाना पत्नी की वैवाहिक गलती नहीं मानी जा सकती। कोर्ट ने ज़ोर दिया कि शादी का मकसद सिर्फ़ बच्चे पैदा करना नहीं हो सकता।कोर्ट ने कहा,"सबसे अहम बात यह है कि कपल का बच्चा न हो पाना, अपने आप में पत्नी की वैवाहिक गलती...

POCSO केस में वीडियो प्रसारण पर मद्रास हाईकोर्ट की रोक, कहा- 'TRP से ज्यादा जरूरी बच्चों की सुरक्षा'
मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार (25 सितंबर) को ग्रेनाइट कारोबारी वीरमणि उर्फ Gem Granite Veeramani से जुड़े POCSO मामले में मीडिया संस्थानों को मामले से संबंधित वीडियो प्रकाशित या प्रसारित करने से रोक दिया। हालांकि, कोर्ट ने मीडिया को मामले के प्रभावों और बाल यौन शोषण जैसे व्यापक मुद्दों पर बहस करने की अनुमति दी है।जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि जांच के महत्वपूर्ण चरण में ऐसे वीडियो का प्रसारण उन अन्य पीड़ित बच्चों पर "chilling effect" डाल सकता है, जो पुलिस के सामने आने...

महिलाओं के करियर पर फोकस करने से टूटती शादियां रोकने के लिए मद्रास हाईकोर्ट का सुझाव- पति 'गृहिणी' की भूमिका निभाएं
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में पाया कि महिलाओं के तेजी से करियर-उन्मुख होने के कारण, कुछ करियर महिलाओं, विशेष रूप से आईटी क्षेत्र और अन्य व्यवसायों में काम करने वाली महिलाओं के लिए शादी "जीत का प्रस्ताव" साबित नहीं हो रही है।कोर्ट ने कहा कि कुछ महिलाएं शादी को अपने करियर की संभावनाओं में बाधा के रूप में देख सकती हैं और शादी न करने का विकल्प चुन सकती हैं।जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस एमडी सुमति की खंडपीठ ने कहा कि परंपरागत रूप से पति से वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने की अपेक्षा की जाती थी और पत्नी...

चुनाव के तुरंत बाद इस्तीफ़ा देकर उपचुनाव लड़ने को मद्रास हाईकोर्ट ने बताया 'लोकतंत्र का मज़ाक', कहा- गाइडलाइन पर विचार करे ECI
मद्रास हाई कोर्ट ने भारत के चुनाव आयोग (ECI) से कहा है कि वह उस अजीब स्थिति पर विचार करें जिसमें कोई विधायक चुनाव के तुरंत बाद अपने पद से इस्तीफ़ा दे देता है और दूसरी पार्टी से उपचुनाव लड़ता है।जस्टिस एस.एम. सुब्रमण्यम और जस्टिस कृष्णस्वामी गोविंदराजन की बेंच ऐसी याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें चुने हुए प्रतिनिधियों की वित्तीय जवाबदेही तय करने के लिए एक सिस्टम बनाने की मांग की गई। ये प्रतिनिधि बिना किसी कानूनी रूप से मान्य और ठोस कारण के अपनी मर्ज़ी से और समय से पहले अपनी सीट से इस्तीफ़ा दे...

पति की पहली शादी के बारे में न जानने वाली दूसरी पत्नी पर क्रूरता और दूसरी शादी का केस नहीं चलाया जा सकता: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि जिस महिला को अपने पति की पहली शादी के बारे में जानकारी नहीं थी, उस पर BNS की धारा 82 के तहत बाइगैमी (दूसरी शादी) का केस नहीं चलाया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि दूसरी पत्नी "पति के रिश्तेदार" की परिभाषा में नहीं आएगी और उस पर BNS की धारा 85 (जो IPC की धारा 498A के बराबर है) के तहत केस नहीं चलाया जा सकता। [2026 LiveLaw (Mad) 445]जस्टिस एन. रमेश ने कहा कि यह प्रावधान ऐसे व्यक्ति तक सीमित है, जो पति से खून, शादी या गोद लेने के रिश्ते से जुड़ा हो। कोर्ट ने माना...

पूजा करना मौलिक अधिकार: मद्रास हाईकोर्ट ने तिरुपुर में गणेश प्रतिमा स्थापित करने की दी अनुमति
मद्रास हाईकोर्ट ने तिरुपुर में विनायक चतुर्थी के अवसर पर गणेश प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि पूजा करना मौलिक अधिकार है और याचिकाकर्ताओं को प्रतिमा स्थापित करने से रोका नहीं जाना चाहिए।जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायण ने हिंदू मुन्नानी के कार्यकारी समिति सदस्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए तिरुपुर पुलिस को उस स्थान पर गणेश प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति देने का निर्देश दिया, जिसे याचिकाकर्ता और पुलिस अधिकारियों ने संयुक्त रूप से निरीक्षण के बाद तय किया था।याचिकाकर्ता...

तमिलनाडु में अब डिजिटल जारी होंगे ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी, हाईकोर्ट ने खारिज की चुनौती
मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीकरण प्रमाणपत्र (RC) को डिजिटल रूप में उपलब्ध कराने की नई योजना पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार किया। हालांकि हाईकोर्ट ने योजना को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार और परिवहन आयुक्त को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस एसए धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने शुक्रवार 11 सितंबर को मामले की सुनवाई की। याचिका में परिवहन आयुक्त की ओर से जारी उस संचार को चुनौती दी गई, जिसके जरिए ड्राइविंग...

पति को माता-पिता से अलग रहने के लिए मजबूर करना और बिना वजह बार-बार मायके जाना क्रूरता: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि पत्नी यह जानते हुए भी कि उसका पति अपने माता-पिता का इकलौता बेटा है, उसे संयुक्त परिवार से अलग होकर अलग घर बसाने के लिए मजबूर करती है और बिना उचित कारण बार-बार मायके जाती है, तो यह पति के प्रति वैवाहिक क्रूरता (Cruelty) माना जा सकता है।जस्टिस पीटी आशा और जस्टिस एन. माला की पीठ ने इसी आधार पर फैमिली कोर्ट द्वारा पति को दिए गए तलाक के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और पत्नी की अपील खारिज कर दी।क्या था मामला?पति-पत्नी की शादी जून 2019 में हुई थी। पति के...

अगर सर्विस रूल्स इजाज़त दें तो नौकरी के दौरान शुरू हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई रिटायरमेंट के बाद भी जारी रह सकती है: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट की जस्टिस सी.वी. कार्तिकेयन और जस्टिस आर. शक्तिवेल की डिविजन बेंच ने कहा कि किसी कर्मचारी के खिलाफ नौकरी के दौरान शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को उनके रिटायरमेंट के बाद भी जारी रखा जा सकता है और पूरा किया जा सकता है, अगर संबंधित सर्विस रूल्स इसकी इजाज़त देते हैं।पृष्ठभूमि की जानकारीअपीलकर्ता श्री परमाकल्याणी कॉलेज के केमिस्ट्री डिपार्टमेंट में एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर काम कर रहे थे। 30.08.2011 को उनके खिलाफ आरोपों का मेमोरेंडम जारी किया गया, जिसमें आरोप लगाया गया कि...

जाति के आधार पर SC व्यक्ति को मंदिर में प्रवेश से रोकना छुआछूत, दोषियों पर चल सकता है मुकदमा: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि जाति के आधार पर अनुसूचित जाति के किसी व्यक्ति को मंदिर में प्रवेश से रोकना छुआछूत की प्रथा के समान है और यह संविधान के अनुच्छेद 17 के तहत मिले मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह की प्रथा अपनाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार मुकदमा चलाया जा सकता है। जस्टिस भरत चक्रवर्ती ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को जातिगत आधार पर मंदिर में प्रवेश करने से रोका जाता है, खासकर तब जब वह अनुसूचित जाति से संबंधित हो तो ऐसा कृत्य छुआछूत की श्रेणी में आएगा। ऐसे...

सिर्फ़ इसलिए बेटी को 'अनुकंपा नौकरी' देने से मना नहीं किया जा सकता कि पिता की मौत से पहले उसकी शादी हो गई थी: मद्रास हाई कोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि मृतक कर्मचारी की बेटी को सिर्फ़ इसलिए 'अनुकंपा नौकरी' देने से मना नहीं किया जा सकता, क्योंकि पिता की मौत की तारीख से पहले उसकी शादी हो गई थी। [2026 LiveLaw (Mad) 419]जस्टिस सी. कुमारप्पन ने कहा कि अधिकारी 'दया के आधार पर नौकरी' देने से मना नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि बेटी की शादी पिता की मौत से पहले हो गई और वह अलग रह रही थी, उसे मृतक पर पूरी तरह से निर्भर नहीं माना जा सकता, ऐसा कहना गलत है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा नज़रिया पूरी तरह से...
