मद्रास हाईकोर्ट

चुनाव के तुरंत बाद इस्तीफ़ा देकर उपचुनाव लड़ने को मद्रास हाईकोर्ट ने बताया 'लोकतंत्र का मज़ाक', कहा- गाइडलाइन पर विचार करे ECI
मद्रास हाई कोर्ट ने भारत के चुनाव आयोग (ECI) से कहा है कि वह उस अजीब स्थिति पर विचार करें जिसमें कोई विधायक चुनाव के तुरंत बाद अपने पद से इस्तीफ़ा दे देता है और दूसरी पार्टी से उपचुनाव लड़ता है।जस्टिस एस.एम. सुब्रमण्यम और जस्टिस कृष्णस्वामी गोविंदराजन की बेंच ऐसी याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें चुने हुए प्रतिनिधियों की वित्तीय जवाबदेही तय करने के लिए एक सिस्टम बनाने की मांग की गई। ये प्रतिनिधि बिना किसी कानूनी रूप से मान्य और ठोस कारण के अपनी मर्ज़ी से और समय से पहले अपनी सीट से इस्तीफ़ा दे...

पति की पहली शादी के बारे में न जानने वाली दूसरी पत्नी पर क्रूरता और दूसरी शादी का केस नहीं चलाया जा सकता: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि जिस महिला को अपने पति की पहली शादी के बारे में जानकारी नहीं थी, उस पर BNS की धारा 82 के तहत बाइगैमी (दूसरी शादी) का केस नहीं चलाया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि दूसरी पत्नी "पति के रिश्तेदार" की परिभाषा में नहीं आएगी और उस पर BNS की धारा 85 (जो IPC की धारा 498A के बराबर है) के तहत केस नहीं चलाया जा सकता। [2026 LiveLaw (Mad) 445]जस्टिस एन. रमेश ने कहा कि यह प्रावधान ऐसे व्यक्ति तक सीमित है, जो पति से खून, शादी या गोद लेने के रिश्ते से जुड़ा हो। कोर्ट ने माना...

पूजा करना मौलिक अधिकार: मद्रास हाईकोर्ट ने तिरुपुर में गणेश प्रतिमा स्थापित करने की दी अनुमति
मद्रास हाईकोर्ट ने तिरुपुर में विनायक चतुर्थी के अवसर पर गणेश प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि पूजा करना मौलिक अधिकार है और याचिकाकर्ताओं को प्रतिमा स्थापित करने से रोका नहीं जाना चाहिए।जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायण ने हिंदू मुन्नानी के कार्यकारी समिति सदस्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए तिरुपुर पुलिस को उस स्थान पर गणेश प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति देने का निर्देश दिया, जिसे याचिकाकर्ता और पुलिस अधिकारियों ने संयुक्त रूप से निरीक्षण के बाद तय किया था।याचिकाकर्ता...

तमिलनाडु में अब डिजिटल जारी होंगे ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी, हाईकोर्ट ने खारिज की चुनौती
मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीकरण प्रमाणपत्र (RC) को डिजिटल रूप में उपलब्ध कराने की नई योजना पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार किया। हालांकि हाईकोर्ट ने योजना को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार और परिवहन आयुक्त को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस एसए धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने शुक्रवार 11 सितंबर को मामले की सुनवाई की। याचिका में परिवहन आयुक्त की ओर से जारी उस संचार को चुनौती दी गई, जिसके जरिए ड्राइविंग...

पति को माता-पिता से अलग रहने के लिए मजबूर करना और बिना वजह बार-बार मायके जाना क्रूरता: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि पत्नी यह जानते हुए भी कि उसका पति अपने माता-पिता का इकलौता बेटा है, उसे संयुक्त परिवार से अलग होकर अलग घर बसाने के लिए मजबूर करती है और बिना उचित कारण बार-बार मायके जाती है, तो यह पति के प्रति वैवाहिक क्रूरता (Cruelty) माना जा सकता है।जस्टिस पीटी आशा और जस्टिस एन. माला की पीठ ने इसी आधार पर फैमिली कोर्ट द्वारा पति को दिए गए तलाक के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और पत्नी की अपील खारिज कर दी।क्या था मामला?पति-पत्नी की शादी जून 2019 में हुई थी। पति के...

अगर सर्विस रूल्स इजाज़त दें तो नौकरी के दौरान शुरू हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई रिटायरमेंट के बाद भी जारी रह सकती है: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट की जस्टिस सी.वी. कार्तिकेयन और जस्टिस आर. शक्तिवेल की डिविजन बेंच ने कहा कि किसी कर्मचारी के खिलाफ नौकरी के दौरान शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को उनके रिटायरमेंट के बाद भी जारी रखा जा सकता है और पूरा किया जा सकता है, अगर संबंधित सर्विस रूल्स इसकी इजाज़त देते हैं।पृष्ठभूमि की जानकारीअपीलकर्ता श्री परमाकल्याणी कॉलेज के केमिस्ट्री डिपार्टमेंट में एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर काम कर रहे थे। 30.08.2011 को उनके खिलाफ आरोपों का मेमोरेंडम जारी किया गया, जिसमें आरोप लगाया गया कि...

जाति के आधार पर SC व्यक्ति को मंदिर में प्रवेश से रोकना छुआछूत, दोषियों पर चल सकता है मुकदमा: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि जाति के आधार पर अनुसूचित जाति के किसी व्यक्ति को मंदिर में प्रवेश से रोकना छुआछूत की प्रथा के समान है और यह संविधान के अनुच्छेद 17 के तहत मिले मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह की प्रथा अपनाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार मुकदमा चलाया जा सकता है। जस्टिस भरत चक्रवर्ती ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को जातिगत आधार पर मंदिर में प्रवेश करने से रोका जाता है, खासकर तब जब वह अनुसूचित जाति से संबंधित हो तो ऐसा कृत्य छुआछूत की श्रेणी में आएगा। ऐसे...

सिर्फ़ इसलिए बेटी को 'अनुकंपा नौकरी' देने से मना नहीं किया जा सकता कि पिता की मौत से पहले उसकी शादी हो गई थी: मद्रास हाई कोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि मृतक कर्मचारी की बेटी को सिर्फ़ इसलिए 'अनुकंपा नौकरी' देने से मना नहीं किया जा सकता, क्योंकि पिता की मौत की तारीख से पहले उसकी शादी हो गई थी। [2026 LiveLaw (Mad) 419]जस्टिस सी. कुमारप्पन ने कहा कि अधिकारी 'दया के आधार पर नौकरी' देने से मना नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि बेटी की शादी पिता की मौत से पहले हो गई और वह अलग रह रही थी, उसे मृतक पर पूरी तरह से निर्भर नहीं माना जा सकता, ऐसा कहना गलत है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा नज़रिया पूरी तरह से...

जनता में डर पैदा करने की मंशा न हो तो मंत्री के खिलाफ झूठी सोशल मीडिया पोस्ट अपराध नहीं, लेकिन मानहानि का मामला बन सकता है: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु के हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती मंत्री के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित रूप से झूठी जानकारी फैलाने के मामले में विनोद सूर्या कुमार के खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दी।जस्टिस भरत चक्रवर्ती ने कहा कि किसी मंत्री के खिलाफ झूठी जानकारी या अफवाह फैलाना तभी संबंधित आपराधिक प्रावधानों के तहत अपराध बनेगा, जब उसे फैलाने का इरादा या संभावित प्रभाव जनता में डर या घबराहट पैदा करना हो।क्या था मामला?कुमार ने सोशल मीडिया पोस्ट में मंत्री को पलानी स्थित अरुल्मिगु दंडायुधपाणि स्वामी...

नाबालिग के आंसू पोंछना या बिना सेक्सुअल इरादे के उसका हाथ पकड़ना सेक्सुअल असॉल्ट नहीं: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि आम मानवीय व्यवहार के दौरान होने वाला कोई भी संपर्क - जैसे हाथ पकड़ना, कंधे को छूना, आंसू पोंछना और किसी को सांत्वना देना - अपने आप में सेक्सुअल नहीं माना जाएगा। किसी सेक्सुअल इरादे का पता आसपास की परिस्थितियों से ही लगाया जा सकता है। [2026 LiveLaw (Mad) 408]जस्टिस आर विजयकुमार ने कॉन्स्टेबल के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला रद्द किया। उस पर POCSO Act के तहत अपराधों का आरोप था। कोर्ट ने पाया कि उस व्यक्ति ने केवल उस नाबालिग लड़की को सांत्वना दी थी, जिसके साथ उसका...

सिर्फ़ घरेलू हिंसा का केस पेंडिंग होने की वजह से पति को विदेश यात्रा के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि पति या पत्नी को सिर्फ़ इसलिए विदेश यात्रा के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि उनके बीच कोई विवाद पेंडिंग है।जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायण ने एक पति को राहत दी, जिसे पत्नी द्वारा शुरू की गई घरेलू हिंसा की कार्यवाही पेंडिंग होने के कारण अपना पासपोर्ट वापस करने के लिए कहा गया। कोर्ट ने माना कि घरेलू हिंसा की कार्यवाही तब तक सिविल प्रकृति की होती है जब तक कि 'महिलाओं का घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम, 2005' की धारा 31 के तहत कोई आदेश पारित न हो जाए।इस अधिनियम...

POCSO मामलों में बाल पीड़ित को सहज महसूस कराना जज की जिम्मेदारी: मद्रास HC
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा है कि POCSO मामलों की सुनवाई करने वाले न्यायिक अधिकारियों को बाल पीड़ित के साथ rapport बनाकर उसे अदालत में सहज महसूस कराना चाहिए। जज को बच्चे की मनोदशा समझते हुए सहानुभूति और संवेदनशीलता के साथ सच्चाई सामने लाने का प्रयास करना चाहिए।जस्टिस भरत चक्रवर्ती ने कहा कि बच्चे से पूछे जाने वाले शुरुआती सवाल केवल औपचारिकता नहीं हैं, बल्कि उनका उद्देश्य बच्चे के साथ विश्वास का रिश्ता बनाना है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अभियोजन और बचाव पक्ष के सवालों को बच्चे के अनुकूल भाषा में दोबारा...

माता-पिता या 60 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति ही सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत शिकायत कर सकते हैं: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि माता-पिता या 60 वर्ष की आयु पूरी कर चुके व्यक्ति ही माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत शिकायत दाखिल कर सकते हैं।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि शिकायतकर्ता न तो संबंधित व्यक्ति का माता-पिता है और न ही उसकी उम्र 60 वर्ष पूरी हुई है, तो इस कानून के तहत उसकी शिकायत सुनने का अधिकारियों के पास अधिकार क्षेत्र नहीं होगा। जस्टिस एम. धंडपानी ने यह टिप्पणी करते हुए कन्याकुमारी के जिला कलेक्टर के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें शिकायतकर्ता को हर...

वसीयत में मामूली बदलाव अपने आप संदेह का आधार नहीं: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि वसीयत में मामूली सुधार, अलग-अलग स्याही का इस्तेमाल या उसका पंजीकृत न होना, अपने आप में वसीयत की प्रामाणिकता पर संदेह करने का आधार नहीं है, खासकर जब वसीयतकर्ता की हस्तलिपि और हस्ताक्षर विवादित न हों।जस्टिस एन. सतीश कुमार और जस्टिस एम. जोथिरामन की पीठ ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली अपील पर यह टिप्पणी की।मामला डॉ. एस.जी. राजारथिनम की 12 पन्नों की हस्तलिखित वसीयत से जुड़ा था। उनकी बेटी ने वसीयत की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए संपत्तियों में 1/5 हिस्से का दावा...

गिरफ्तार वकीलों को अदालत में पेश करने से पुलिस को नहीं रोक सकते वकील: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी वकील की गिरफ्तारी में पुलिस की ज्यादती का आरोप हो तो अन्य वकील उसके खिलाफ आपत्ति जता सकते हैं और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक तरीके से विरोध भी कर सकते हैं। लेकिन वे पुलिस को गिरफ्तार वकील को अदालत में पेश करने से नहीं रोक सकते।जस्टिस भरत चक्रवर्ती ने यह टिप्पणी 10 वकीलों की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमा रद्द करने की मांग की। उन पर आरोप था कि उन्होंने मादक पदार्थ मामले में गिरफ्तार दो वकीलों को अदालत में पेश करने से...

जजों के वेतन का ब्योरा RTI Act से बाहर नहीं, नागरिकों को जानकारी देने से इनकार नहीं किया जा सकता: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि जजों के वेतनमान और वेतन संबंधी जानकारी सूचना का अधिकार (RTI Act) अधिनियम की धारा 8 के तहत गोपनीय जानकारी नहीं है। चूंकि जजों का वेतन भारत की संचित निधि से दिया जाता है, इसलिए नागरिकों को इसकी जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है।जस्टिस एम. धंडपानी ने कहा,"जजों का वेतन भारत की संचित निधि से दिया जाता है। यह सार्वजनिक धन है, इसलिए भारत का कोई भी नागरिक उनके वेतन संबंधी जानकारी जानने से वंचित नहीं किया जा सकता। यह RTI Act की धारा 8 के तहत अपवाद की...

POCSO मामलों में बच्चे को बार-बार कोर्ट बुलाकर उसका ट्रॉमा दोबारा नहीं जीने दिया जा सकता: मद्रास हाईकोर्ट
यौन शोषण का शिकार हुए बच्चे को क्या सिर्फ आरोपी को पूरा मौका देने के नाम पर बार-बार अदालत बुलाया जा सकता है? इस सवाल पर मद्रास हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा करना बच्चे को दोबारा मानसिक पीड़ा से गुजरने के लिए मजबूर करना होगा, जिसे कानून स्वीकार नहीं कर सकता।जस्टिस भरत चक्रवर्ती ने कहा कि POCSO Act का उद्देश्य बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देना है। यदि इस कानून का क्रियान्वयन ही बच्चे के लिए एक और मानसिक आघात का कारण बन जाए, तो यह कानून के उद्देश्य के विपरीत होगा। अदालत ने...

विरोध-प्रदर्शन लोकतंत्र की पहचान, भूख हड़ताल करना अपराध नहीं: मद्रास हाईकोर्ट ने किसान पर दर्ज मुकदमा किया रद्द
मद्रास हाईकोर्ट ने किसान संगठन के नेता के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों के विरोध में भूख हड़ताल करने वाले एक किसान के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमा रद्द करते हुए कहा कि विरोध-प्रदर्शन लोकतंत्र की पहचान है और यह संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों का हिस्सा है। केवल नारे लगाने या शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने को अपराध नहीं माना जा सकता।जस्टिस एम. निर्मल कुमार ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है, जिससे यह साबित हो कि प्रदर्शन के कारण आम जनता को कोई असुविधा हुई या यातायात बाधित हुआ।अदालत ने कहा,"सिर्फ नारे...

धर्म के नाम पर नदियों को प्रदूषित करने का अधिकार नहीं: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा है कि धार्मिक अनुष्ठानों के नाम पर किसी भी व्यक्ति को जल स्रोतों को प्रदूषित करने का अधिकार नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 25 के तहत धर्म की स्वतंत्रता जनस्वास्थ्य के अधीन है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाकर धार्मिक अधिकारों का प्रयोग नहीं किया जा सकता।जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस बी. पुगालेंधी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी तमिराबरानी नदी में श्राद्ध कर्म के दौरान बड़ी मात्रा में कपड़े और अन्य सामग्री फेंके जाने पर चिंता जताते हुए की। अदालत ने कहा कि तमिलनाडु...

तमिलनाडु राष्ट्र की मांग राजद्रोह नहीं, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने एक पब्लिशिंग हाउस के ख़िलाफ़ दर्ज देशद्रोह का मामला रद्द किया। इस पब्लिशिंग हाउस ने ऐसी किताब छापी थी, जिसमें कहा गया था कि तमिलनाडु को एक अलग देश होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि आज के समय में ऐसे बयान को देश या सरकार के प्रति नफ़रत के तौर पर नहीं देखा जा सकता। [2026 LiveLaw (Mad) 297]जस्टिस भरत चक्रवर्ती ने कहा कि भारत दिल और आत्मा से एकजुट है। ऐसे बयानों से मौजूदा सामाजिक माहौल में ज़्यादा से ज़्यादा झुंझलाहट हो सकती है। ऐसा बयान देने वाले व्यक्ति को मानसिक स्वास्थ्य की समस्या...
