मद्रास हाईकोर्ट
द्रविड़ कड़गम द्वारा हिंदू धर्म पर स्पष्ट हमला : मद्रास हाइकोर्ट ने अमित मालवीय के खिलाफ FIR रद्द की
मद्रास हाइकोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता अमित मालवीय के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करते हुए कहा कि तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री और युवा कल्याण एवं खेल मंत्री उदयनिधि स्टालिन के भाषण पर की गई प्रतिक्रिया के लिए उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।जस्टिस एस. श्रीमथी ने कहा कि अमित मालवीय ने केवल मंत्री के भाषण पर प्रतिक्रिया दी थी, जो पहले से ही सार्वजनिक डोमेन में था। ऐसे में उनके खिलाफ कार्यवाही जारी रखने से उन्हें अपूरणीय क्षति और नुकसान होगा।हाइकोर्ट ने यह...
लंबित आपराधिक मामलों वाले लोग अधिवक्ता बन सकते हैं या नहीं? मद्रास हाईकोर्ट की बड़ी पीठ करेगी फैसला
मद्रास हाईकोर्ट ने यह महत्वपूर्ण प्रश्न एक बड़ी पीठ (Larger Bench) को संदर्भित किया है कि क्या किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित होने पर उसे राज्य बार काउंसिल द्वारा अधिवक्ता के रूप में नामांकित (enrol) किया जा सकता है या नहीं।जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस आर. कलैमाथी की खंडपीठ ने यह मुद्दा बड़ी पीठ को भेजते हुए कहा कि अधिवक्ता अधिनियम (Advocates Act) हाईकोर्ट को नामांकन के लिए अतिरिक्त शर्तें लगाने का अधिकार नहीं देता।कोर्ट ने यह भी नोट किया कि यद्यपि हाईकोर्ट की एक पूर्ण पीठ (Full...
BNSS की धारा 35 पुलिस को बिना रजिस्टर्ड केस के व्यक्तियों को बुलाने या पूछताछ करने का अधिकार नहीं देती: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि पुलिस के पास बिना रजिस्टर्ड केस के किसी व्यक्ति को बुलाने या उससे पूछताछ करने का अधिकार नहीं है।जस्टिस सुंदर मोहन ने इस तरह डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस द्वारा जारी नोटिस रद्द किया, जिसमें एक पत्रकार को बुलाया गया और उससे एक लेख के बारे में स्पष्टीकरण मांगा गया, जिसमें कथित तौर पर पुलिस के खिलाफ मानहानिकारक बयान थे। जज ने कहा कि यह धारा सिर्फ पुलिस को बिना वारंट के किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार देती है और बिना केस दर्ज किए किसी व्यक्ति से पूछताछ...
मद्रास हाईकोर्ट ने विजय की फिल्म 'जना नायकन' को CBFC को U/A सर्टिफिकेट देने का निर्देश देने वाले आदेश पर लगाई रोक
मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार (9 जनवरी) को पहले दिए गए सिंगल जज के आदेश पर अस्थायी रोक लगाई, जिसमें CBFC को विजय अभिनीत तमिल फिल्म 'जना नायकन' को तुरंत U/A सर्टिफिकेट देने का निर्देश दिया गया था।चीफ जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस जी अरुल मुरुगन की डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में कहा:"प्रतिवादी यूनियन ऑफ इंडिया को पर्याप्त समय नहीं दिया गया... UoI की एक मुख्य शिकायत यह थी कि उन्हें जवाब देने का समय नहीं दिया गया। दूसरी शिकायत यह है कि 6 जनवरी के पत्र को चुनौती नहीं दी गई, लेकिन कोर्ट (सिंगल...
BREAKING| CBFC को विजय स्टारर 'जना नायकन' फिल्म को तुरंत सर्टिफिकेट देने का निर्देश
मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार (9 जनवरी) को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) को विजय अभिनीत आने वाली तमिल फिल्म "जना नायकन" को तुरंत U/A सर्टिफिकेट देने का निर्देश दिया।खबरों के अनुसार, फिल्म की रिलीज़, जो पहले आज के लिए तय थी, टाल दी गई।जस्टिस पीटी आशा ने आदेश सुनाते हुए कहा:"सामग्री की जांच करने के बाद यह बिल्कुल साफ है कि शिकायतकर्ता की शिकायत बाद में सोची-समझी लगती है।"कोर्ट ने कहा कि ऐसी शिकायतों पर विचार करने से "खतरनाक चलन" शुरू होगा।कोर्ट ने आगे कहा कि 6 जनवरी को अपलोड किया गया...
मद्रास हाईकोर्ट ने DGCA से पूछा — क्या इंडिगो को थकान प्रबंधन मानकों से मिली छूट बढ़ाई जाएगी?
मद्रास हाईकोर्ट ने नागरिक उड्डयन महानिदेशक (DGCA) से यह स्पष्ट करने के लिए कहा है कि क्या इंडिगो एयरलाइंस का संचालन करने वाली इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड को थकान संबंधी (Fatigue) मानकों के पालन से दी गई छूट को आगे भी बढ़ाया जाएगा। न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायण ने चेन्नई निवासी द्वारा दायर एक याचिका पर DGCA से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें इस छूट को अवैध, निरस्त करने योग्य और नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं (CAR) के अनुरूप नहीं बताया गया है।अदालत ने आदेश में कहा,“श्री ए.आर.एल. सुंदरसन ने यह...
मंदिर में विशेष सम्मान को पूर्ण अधिकार के रूप में दावा नहीं किया जा सकता, पहला सम्मान हमेशा भगवान को: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि मंदिर में विशेष सम्मान को पूर्ण अधिकार के रूप में दावा नहीं किया जा सकता और मंदिर में पहला सम्मान हमेशा भगवान को होता है। इस तरह कोर्ट ने एक आश्रम की याचिका खारिज की, जिसमें कांचीपुरम के श्री देवराज स्वामी मंदिर में अपने प्रमुख के लिए पहले विशेष सम्मान की मांग की गई।जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम और जस्टिस सी कुमारप्पन की बेंच ने कहा कि हालांकि प्रमुखों को सम्मानित करने की मौजूदा प्रथा थी, लेकिन क्या इसे अधिकार के रूप में दावा किया जा सकता है या नहीं, यह एक ऐसा...
इनकम टैक्स एक्ट के तहत चैरिटेबल मानी गई संस्था को FCRA में अलग नजरिए से नहीं देखा जा सकता: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने स्पष्ट किया कि जिस ट्रस्ट को इनकम टैक्स एक्ट (Income Tax Act) के तहत चैरिटेबल संस्था के रूप में मान्यता प्राप्त है, उसे विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) के तहत उस दर्जे से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि इनकम टैक्स एक्ट की धारा बारह ए के तहत वैध पंजीकरण रखने वाली संस्था की चैरिटेबल हैसियत को नजरअंदाज करना कानूनन उचित नहीं है।जस्टिस जी आर स्वामीनाथन की एकल पीठ अरष विद्या परंपरा ट्रस्ट की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें गृह मंत्रालय द्वारा ट्रस्ट का...
“भारत में ऑनर किलिंग आज भी गंभीर समस्या”: मद्रास हाईकोर्ट ने कविन ऑनर किलिंग केस में पुलिसकर्मी को जमानत देने से इनकार किया
मद्रास हाईकोर्ट ने तिरुनेलवेली जिले में टेक कर्मचारी कविन सेल्वगणेश की कथित ऑनर किलिंग के मामले में आरोपी सब-इंस्पेक्टर सरवनन को जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि यह मामला अत्यंत गंभीर प्रकृति का है और “ऑनर किलिंग” जैसे जघन्य अपराधों में जमानत एक अपवादस्वरूप राहत होती है, जिसे अत्यंत सावधानीपूर्वक प्रदान किया जाना चाहिए।जस्टिस के. मुरली शंकर ने जिला एवं सत्र न्यायालय द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि समाज में अब भी सम्मान के नाम पर हत्या की घटनाएँ...
नाबालिग से यौन अपराध जघन्य अपराध; एकमात्र घटना पर भी डिटेंशन संभव : मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में यह स्पष्ट किया है कि नाबालिग के विरुद्ध यौन अपराध समाज के खिलाफ गंभीर और जघन्य अपराध है, और ऐसी स्थिति में केवल एक घटना के आधार पर भी तमिलनाडु गूंडास एक्ट के तहत आरोपी के खिलाफ डिटेंशन आदेश पारित किया जा सकता है।जस्टिस जी.के. इलंथिरैयन और जस्टिस आर. पूर्णिमा की खंडपीठ ने एक हैबियस कॉर्पस याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोपी द्वारा उठाया गया यह तर्क अस्वीकार्य है कि “एक घटना” से सार्वजनिक व्यवस्था बाधित नहीं होती और इसलिए डिटेंशन उचित नहीं है।यौन अपराध के मामले में 'एक...
धार्मिक कर्मकांड पर रोक लगाकर साम्प्रदायिक सौहार्द नहीं बन सकती: थिरुपरंकुंद्रम दीपम मामले पर मद्रास हाईकोर्ट की टिप्पणी
मद्रास हाईकोर्ट ने गुरुवार को थिरुपरंकुंद्रम पहाड़ी पर दीप प्रज्वलन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी एक समुदाय को उसके धार्मिक कृत्य करने से रोककर साम्प्रदायिक सौहार्द नहीं बनाया जा सकता। सौहार्द तभी संभव है जब विभिन्न समुदाय आपसी सह-अस्तित्व के साथ एक-दूसरे की आस्थाओं का सम्मान करें।जस्टिस जी. जयचंद्रन और जस्टिस के.के. रामकृष्णन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी उस अपील की सुनवाई के दौरान की, जो सिंगल जज द्वारा दिए गए उस आदेश के विरुद्ध दायर की गई, जिसमें...
SC/ST समुदाय की भूमि बेदखली शिकायत को 'सिविल विवाद' बताकर FIR दर्ज करने से इनकार नहीं कर सकती पुलिस: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा: SC/ST समुदाय की भूमि से बेदखली की शिकायत पर FIR दर्ज करना अनिवार्य, पुलिस “सिविल विवाद” बताकर इनकार नहीं कर सकतीमद्रास हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों की भूमि से बेदखली या अवैध कब्जे की शिकायत को पुलिस केवल यह कहकर खारिज नहीं कर सकती कि मामला “सिविल विवाद” है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 18A के तहत यदि शिकायत में संज्ञेय अपराध का खुलासा होता है, तो पुलिस प्रारंभिक जांच किए...
घूस की रकम लौटाने के लिए जारी चेक के बाउंस पर धारा 138 लागू नहीं: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि घूस की रकम वापस करने के लिए जारी किया गया चेक बाउंस होने पर नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता, क्योंकि यह कानूनी रूप से वसूली योग्य ऋण (legally enforceable debt) नहीं माना जाता।जस्टिस के. मुरली शंकर ने कहा कि नौकरी दिलाने के लिए पैसे लेना-देना एक ऐसा समझौता है जो शुरू से ही अवैध (void ab initio) है और भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 23 के तहत गैरकानूनी माना जाता है। इसलिए, ऐसी अवैध राशि लौटाने के लिए जारी चेक पर धारा 138...
क्या सरकारी कर्मचारी की SC/ST समुदाय की स्थिति रिटायरमेंट के बाद सत्यापित की जा सकती है? मद्रास हाईकोर्ट ने मामला बड़ी बेंच को भेजा
मद्रास हाईकोर्ट ने इस प्रश्न को बड़ी बेंच को भेज दिया कि क्या किसी कर्मचारी के समुदाय प्रमाण पत्र का रिटायरमेंट के बाद सत्यापन किया जा सकता है।चीफ जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस जी अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने न्यायालय की समन्वय पीठों द्वारा लिए गए परस्पर विरोधी विचारों को देखते हुए इस मुद्दे को बड़ी बेंच को भेजना उचित समझा।अतः, न्यायालय ने रजिस्ट्रार (न्यायिक) को निर्देश दिया कि वह प्रशासनिक पक्ष के चीफ जस्टिस के समक्ष मामला प्रस्तुत करें ताकि निम्नलिखित मुद्दों पर विचार करने के लिए एक...
बिना संज्ञेय अपराध पुलिस पूछताछ नहीं कर सकती: मद्रास हाईकोर्ट ने करंट पेपर इन्क्वायरी की प्रथा पर लगाई फटकार
मद्रास हाईकोर्ट ने बिना किसी वैधानिक आधार के पुलिस अधिकारियों द्वारा करंट पेपर इन्क्वायरी आयोजित करने की प्रथा की कड़ी आलोचना की है।जस्टिस बी. पुगलेंधी ने कहा कि इस तरह की अनौपचारिक कार्यवाही को कानून के तहत कोई मान्यता प्राप्त नहीं है और किसी भी व्यक्ति को पुलिस के सामने पेश होने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, जब तक कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173 के अनुसार किसी संज्ञेय अपराध का खुलासा और रिकॉर्ड न किया गया हो।न्यायालय ने कहा, "यह अदालत यह नोट करने के लिए बाध्य है कि 'करंट...
विवाह पुरुष को पत्नी पर असीमित अधिकार नहीं देता, महिलाओं की सहनशीलता को सहमति नहीं माना जा सकता: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने एक 80 वर्षीय व्यक्ति की बरी को रद्द करते हुए उसे धारा 498A (पत्नी के प्रति क्रूरता) के तहत फिर से दोषी ठहराया है। अदालत ने कहा कि विवाह पुरुष को पत्नी पर असीम अधिकार नहीं देता और पत्नी की सुरक्षा, गरिमा और सम्मान सुनिश्चित करना पति की मुख्य वैवाहिक जिम्मेदारी है।जस्टिस एल. विक्टोरिया गौरी ने कहा कि भारतीय पुरुषों को यह पुरानी सोच छोड़नी चाहिए कि विवाह उन्हें अधिकार देता है। कोर्ट ने कहा, “पत्नी की सुविधा, सुरक्षा और गरिमा कोई द्वितीय जिम्मेदारी नहीं, बल्कि वैवाहिक बंधन का मूल...
आधार कार्ड पर मद्रास हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- आधार कार्ड में बदलाव कराना मौलिक अधिकार
मद्रास हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि आधार कार्ड धारक को अपने कार्ड में विवरण में बदलाव की मांग करने का मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जनसांख्यिकीय जानकारी में बदलाव की सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होनी चाहिए।जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन ने अपने आदेश में कहा कि चूंकि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने का अधिकार मौलिक अधिकार है और आधार कार्ड वह अनिवार्य माध्यम है, जिसके जरिए यह लाभ प्राप्त किया जा सकता है, इसलिए कार्ड धारक को आधार अधिनियम की धारा 31 के तहत अपने...
क्या ED राज्य पुलिस को FIR दर्ज करने का निर्देश देने की मांग कर सकती है? मद्रास हाईकोर्ट ने पूछा सवाल
मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार को यह सवाल उठाया कि क्या प्रवर्तन निदेशालय (ED), जो एक जांच एजेंसी है, दूसरी जांच एजेंसी (राज्य पुलिस) को मामला दर्ज करने का निर्देश देने के लिए अदालत में याचिका दायर कर सकती है?चीफ़ जस्टिस मनींद्र मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस जी. अरुलमुरुगन की खंडपीठ ED द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में तमिलनाडु राज्य को रेत खनन मामले की जांच में सहयोग करने और पुलिस महानिदेशक को ED के पत्र के आधार पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। ...
संसद में बिना पर्याप्त चर्चा बने कानून को क्या चुनौती दी जा सकती है? मद्रास हाईकोर्ट का सवाल
मद्रास हाईकोर्ट ने गुरुवार को यह सवाल उठाया कि क्या संसद में किसी कानून के पारित होने के समय पर्याप्त विचार-विमर्श या चर्चा न होने के आधार पर किसी केंद्रीय कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी जा सकती है?चीफ़ जस्टिस मनींद्र मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस जी. अरुलमुरुगन की खंडपीठ भारत न्याय संहिता, भारत नागरिक सुरक्षा संहिता और भारत साक्ष्य अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा — “आप यह कहकर किसी कानून को कैसे चुनौती दे सकते हैं कि...
अविवाहित बेटी की ओर से नानी-नानी द्वारा किया गया दत्तक-पत्र उसकी सहमति से ही मान्य होगा: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि अविवाहित महिला के बच्चे को गोद लेने के मामले में नाना-नानी द्वारा किया गया दत्तक-पत्र तभी मान्य होगा, जब यह दर्शाया गया हो कि माँ ने इस दत्तक-पत्र के लिए सहमति दी थी।अदालत ने कहा,"सिर्फ़ यह तथ्य कि बच्चे के नाना-नानी ने दत्तक-पत्र पर हस्ताक्षर किए, दत्तक-पत्र को अमान्य नहीं कर सकता, बशर्ते कि दत्तक-पत्र बच्चे की माँ, जो कोई और नहीं बल्कि बच्चे के नाना-नानी की बेटी है, की सहमति से किया गया हो।"जस्टिस ढांडापानी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि दत्तक-पत्र की अवधारणा...




















