मद्रास हाईकोर्ट

इस्लाम अपनाने से व्यक्ति BC (मुस्लिम) आरक्षण का हकदार नहीं बनता: ​​मद्रास हाईकोर्ट ने सरकारी आदेश को असंवैधानिक घोषित किया
इस्लाम अपनाने से व्यक्ति BC (मुस्लिम) आरक्षण का हकदार नहीं बनता: ​​मद्रास हाईकोर्ट ने सरकारी आदेश को असंवैधानिक घोषित किया

मद्रास हाईकोर्ट ने एक सरकारी आदेश को असंवैधानिक घोषित किया। इस आदेश के तहत पिछड़ी जातियों, अति पिछड़ी जातियों, डी-नोटिफाइड समुदायों या अनुसूचित जातियों से इस्लाम अपनाने वाले व्यक्ति को BC (मुस्लिम) माना जा सकता था और आरक्षण का लाभ उठाने के लिए 7 अधिसूचित समुदायों में से किसी एक का समुदाय प्रमाण पत्र जारी किया जा सकता था। [2026 LiveLaw (Mad) 279]'तमिलनाडु पिछड़ी जातियां, अनुसूचित जातियां और अनुसूचित जनजातियां (शैक्षिक संस्थानों में सीटों का आरक्षण और राज्य के तहत सेवाओं में नियुक्तियों या पदों का...

हाईकोर्ट की 5 जजों की बेंच का अहम फैसला: अपील पेंडिंग होने की वजह से कैदियों की अस्थायी रिहाई को अनिश्चित काल के लिए रोका नहीं जा सकता
हाईकोर्ट की 5 जजों की बेंच का अहम फैसला: अपील पेंडिंग होने की वजह से कैदियों की अस्थायी रिहाई को अनिश्चित काल के लिए रोका नहीं जा सकता

मद्रास हाईकोर्ट की 5 जजों की बेंच ने हाल ही में कहा कि छुट्टी (Leave) और अस्थायी रिहाई मानवीय गरिमा का हिस्सा हैं, जिन्हें सिर्फ़ अपील पेंडिंग होने की वजह से अनिश्चित काल के लिए रोका नहीं जा सकता। [2026 LiveLaw (Mad) 276]कोर्ट ने कहा,"हमें फिर से यह दोहराना होगा कि जेल में बंद होने का मतलब यह नहीं है कि मौलिक अधिकार सिर्फ़ 'कागज़ी वादे' बनकर रह जाएं... इन अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अनुच्छेद 226 के तहत इस कोर्ट की शक्ति हमारे संविधान के मूल ढांचे का एक अटूट हिस्सा है... इसलिए हमारी...

किशोरावस्था में होने वाले हार्मोनल बदलाव होते हैं: मद्रास हाईकोर्ट ने POCSO मामले में उम्रकैद की सज़ा घटाकर 10 साल की
किशोरावस्था में होने वाले हार्मोनल बदलाव होते हैं: मद्रास हाईकोर्ट ने POCSO मामले में उम्रकैद की सज़ा घटाकर 10 साल की

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि रोमांटिक रिश्तों से जुड़े मामलों में सज़ा तय करते समय किशोरावस्था में होने वाले हार्मोनल बदलावों का असर एक अहम बात हो सकती है, भले ही POCSO Act के तहत सहमति या रोमांटिक रिश्ता कोई बचाव का आधार न हो।जस्टिस आनंद वेंकटेश और जस्टिस केके रामकृष्णन की बेंच ने दोषी की उम्रकैद की सज़ा को घटाकर 10 साल की कठोर कैद में बदल दिया; अपराध करते समय दोषी की उम्र मुश्किल से 19 साल थी।कोर्ट ने कहा,"आरोपी पीड़िता को लंबे समय से जानता था... आरोपी और पीड़िता के बीच रिश्ते को देखते हुए यह...

ChatGPT शिक्षक का विकल्प नहीं, कक्षा में पढ़ाई का कोई विकल्प नहीं: मद्रास हाईकोर्ट
ChatGPT शिक्षक का विकल्प नहीं, कक्षा में पढ़ाई का कोई विकल्प नहीं: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु डॉ. अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी के उन छात्रों को राहत देने वाले एकल न्यायाधीश के आदेश को रद्द कर दिया, जिन्हें अनिवार्य उपस्थिति पूरी न होने के बावजूद कक्षाओं और परीक्षाओं में शामिल होने की अनुमति दी गई थी। अदालत ने कहा कि ऑनलाइन शिक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित उपकरण, जैसे ChatGPT, कभी भी योग्य शिक्षकों और जीवंत कक्षा वातावरण का विकल्प नहीं बन सकते।जस्टिस एस.एम. सुब्रमण्यम और जस्टिस एन. सेंथिलकुमार की खंडपीठ ने कहा कि नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित रहने से...

वैवाहिक विवाद में पति के हर रिश्तेदार को नहीं बना सकते आरोपी, ठोस आरोप के बिना मुकदमा नहीं चलेगा: मद्रास हाईकोर्ट
वैवाहिक विवाद में पति के हर रिश्तेदार को नहीं बना सकते आरोपी, ठोस आरोप के बिना मुकदमा नहीं चलेगा: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि पति-पत्नी के बीच वैवाहिक विवाद होने मात्र से पति के प्रत्येक रिश्तेदार के खिलाफ आपराधिक मामला नहीं चलाया जा सकता।अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत पति के परिजनों के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द करते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सामान्य, अस्पष्ट और बिना किसी ठोस साक्ष्य के थे।जस्टिस विक्टोरिया गौरी ने कहा,"पति-पत्नी के बीच वैवाहिक मतभेद होने मात्र से पति के हर रिश्तेदार के खिलाफ आपराधिक कानून का इस्तेमाल नहीं किया...

ऑनर किलिंग में कोई सम्मान नहीं होता, यह कृत्य शर्मनाक और जातिवाद का चरम रूप: मद्रास हाईकोर्ट
'ऑनर किलिंग' में कोई 'सम्मान' नहीं होता, यह कृत्य शर्मनाक और जातिवाद का चरम रूप: मद्रास हाईकोर्ट

पिछले साल तिरुनेलवेली में 27 साल के कविन की ऑनर किलिंग के मामले में आरोपी पुलिसकर्मी की ज़मानत अर्ज़ी पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने जाति-आधारित हिंसा की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई।जस्टिस बी पुगलेंधी ने कहा कि पिछले 10 सालों में तमिलनाडु राज्य में 59 ऑनर किलिंग की घटनाएं हुई हैं। जज ने कहा कि लोगों के मन में गहराई तक बैठी जातिवाद की भावना पूरे सिस्टम को खराब कर रही है।कोर्ट ने कहा,"ऑनर किलिंग जातिवाद का चरम रूप है। जातिवाद समाज को बांटता है और माननीय सुप्रीम कोर्ट ने लाला सिंह बनाम उत्तर...

भरण-पोषण बकाया होने पर पति की पेंशन रोकने की मांग खारिज, मद्रास हाईकोर्ट ने कहा- हाईकोर्ट को फैमिली कोर्ट नहीं बनाया जा सकता
भरण-पोषण बकाया होने पर पति की पेंशन रोकने की मांग खारिज, मद्रास हाईकोर्ट ने कहा- हाईकोर्ट को फैमिली कोर्ट नहीं बनाया जा सकता

मद्रास हारेकोर्ट ने एक महिला की उस याचिका को खारिज किया, जिसमें उसने अपने पति द्वारा भरण-पोषण की राशि का भुगतान नहीं किए जाने का हवाला देते हुए उसकी पेंशन और सेवा निवृत्ति लाभों के वितरण पर रोक लगाने की मांग की थी।जस्टिस मुम्मिनेनी सुधीर कुमार ने स्पष्ट कहा कि हाईकोर्ट को न तो निष्पादन अदालत और न ही फैमिली कोर्ट में बदला जा सकता है।अदालत ने कहा कि यदि महिला को भरण-पोषण मामले में उसके पक्ष में आदेश मिला है और उसका पालन नहीं किया गया है, तो उसे संबंधित आदेश के क्रियान्वयन के लिए विधि सम्मत...

पेरारिवलन के वकील नामांकन मामले में मद्रास हाईकोर्ट की टिप्पणी, पूछा- CBI जांच का आधार क्या है?
पेरारिवलन के वकील नामांकन मामले में मद्रास हाईकोर्ट की टिप्पणी, पूछा- CBI जांच का आधार क्या है?

राजीव गांधी हत्या मामले के दोषी रहे ए. जी. पेरारिवलन के एडवोकेट के रूप में नामांकन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) आवश्यक पक्षकार नहीं है। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर ऐसा कौन-सा धोखाधड़ी का मामला है, जिसके लिए सीबीआई जांच का आदेश दिया जाए।चीफ जस्टिस एस. ए. धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से CBI जांच संबंधी अंतरिम मांग पर जोर नहीं दिए जाने के बाद CBI के खिलाफ याचिका खारिज...

हर कब्र/दरगाह स्वयं वक्फ़ संपत्ति नहीं बन जाती, सिर्फ़ मुस्लिम धार्मिक कार्यों के लिए इस्तेमाल होने के कारण बोर्ड उस पर कब्ज़ा नहीं कर सकता: मद्रास हाईकोर्ट
हर कब्र/दरगाह स्वयं वक्फ़ संपत्ति नहीं बन जाती, सिर्फ़ मुस्लिम धार्मिक कार्यों के लिए इस्तेमाल होने के कारण बोर्ड उस पर कब्ज़ा नहीं कर सकता: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में तमिलनाडु वक्फ बोर्ड के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें 240 साल पुरानी दरगाह को वक्फ प्रॉपर्टी घोषित किया गया।जस्टिस गोविंदराजन थिलाकवथी ने कहा कि किसी प्रॉपर्टी को वक्फ प्रॉपर्टी घोषित करने के लिए वक्फ एक्ट में बताई गई प्रक्रिया के अनुसार उसका सर्वे और नोटिफिकेशन होना ज़रूरी है। कोर्ट ने कहा कि हर कब्र या दरगाह को वक्फ प्रॉपर्टी नहीं कहा जा सकता। इसके लिए किसी बंदोबस्त (एंडोमेंट) का होना ज़रूरी है। कोर्ट ने आगे कहा कि वक्फ बोर्ड सिर्फ इसलिए अधिकार क्षेत्र का दावा...

पति के जीवित रहते मंगलसूत्र हटाना मानसिक क्रूरता, तलाक का आदेश बरकरार: मद्रास हाईकोर्ट
पति के जीवित रहते मंगलसूत्र हटाना मानसिक क्रूरता, तलाक का आदेश बरकरार: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा है कि पति के जीवित रहते हिंदू पत्नी द्वारा थाली (मंगलसूत्र) हटाना पति के प्रति मानसिक क्रूरता माना जा सकता है। जस्टिस पी. वडामलाई ने पति को दिए गए तलाक के आदेश को बरकरार रखते हुए पत्नी की दूसरी अपील खारिज कर दी।मामला 1977 में विवाह करने वाले एक दंपति से जुड़ा था। पति ने आरोप लगाया था कि पत्नी लगातार उस पर अन्य महिलाओं से अवैध संबंध रखने के आरोप लगाती रही, उसके वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायतें भेजती रही और बाद में ईसाई धर्म भी अपना लिया। पत्नी ने इन आरोपों से इनकार करते हुए...

न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को मद्रास हाईकोर्ट ने किया स्वीकार, कहा- जजों को पवित्र गाय की तरह नहीं माना जाना चाहिए
'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' को मद्रास हाईकोर्ट ने किया स्वीकार, कहा- जजों को 'पवित्र गाय' की तरह नहीं माना जाना चाहिए

तमिल फ़िल्म "करुप्पु" पर बैन लगाने की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए, जिसमें आरोप लगाया गया कि फ़िल्म में न्यायपालिका को गलत रोशनी में दिखाया गया, मद्रास हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है और जजों को 'पवित्र गाय' की तरह नहीं माना जाना चाहिए।अपने आदेश में जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस वी लक्ष्मीनारायणन की बेंच ने कहा कि उन्हें न्यायिक भ्रष्टाचार के मामले देखने को मिले हैं। ऐसे "काली भेड़ें" (भ्रष्ट लोग) मद्रास हाईकोर्ट की फुल कोर्ट द्वारा नियमित रूप से बाहर का रास्ता दिखा...

एक विवादित वोट से सरकार का भविष्य तय हो सकता है तो संवैधानिक अदालतें चुप नहीं रह सकतीं: मद्रास हाईकोर्ट
एक विवादित वोट से सरकार का भविष्य तय हो सकता है तो संवैधानिक अदालतें चुप नहीं रह सकतीं: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने तिरुपत्तूर विधानसभा सीट से एक वोट से चुनाव जीतने वाले TVK विधायक सीनिवासा सेतुपति को फिलहाल फ्लोर टेस्ट में हिस्सा लेने से रोक दिया।अदालत ने कहा कि जब किसी विवादित वोट से सरकार का भविष्य तय होने की स्थिति बन जाए तब संवैधानिक अदालतें मूकदर्शक नहीं रह सकतीं।जस्टिस विक्टोरिया गौरी और जस्टिस एन. सेंथिलकुमार की अवकाशकालीन पीठ ने यह अंतरिम आदेश DMK उम्मीदवार पेरियाकरुप्पन की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।याचिका में आरोप लगाया गया कि उनके पक्ष में पड़ा एक डाक मतपत्र गलती से...

स्कूल के सामाजिक विज्ञान सिलेबस में डॉ. अंबेडकर के जीवन को शामिल करे राज्य सरकार: मद्रास हाईकोर्ट
स्कूल के सामाजिक विज्ञान सिलेबस में डॉ. अंबेडकर के जीवन को शामिल करे राज्य सरकार: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया कि वह सामाजिक विज्ञान के सिलेबस में डॉ. बी.आर. अंबेडकर के जीवन और योगदान, और आज़ादी की लड़ाई और लोकतांत्रिक राष्ट्र-निर्माण में उनकी भूमिका से जुड़े पाठों को शामिल करने के लिए ज़रूरी नीतिगत फ़ैसले ले।जस्टिस विक्टोरिया गौरी ने ज़ोर देकर कहा कि स्कूल सिस्टम को संविधान को सिर्फ़ कुछ नीरस संस्थागत तथ्यों के तौर पर नहीं पढ़ाना चाहिए, बल्कि उन लोगों के जीवन के ज़रिए पढ़ाना चाहिए जिन्होंने इसे बनाया। कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि अंबेडकर को समझने का...

महिला की गरिमा उसके आश्रय से जुड़ी है: मद्रास हाईकोर्ट का सख्त आदेश, तोड़ा गया घर फिर से बनाने का निर्देश
महिला की गरिमा उसके आश्रय से जुड़ी है: मद्रास हाईकोर्ट का सख्त आदेश, तोड़ा गया घर फिर से बनाने का निर्देश

मद्रास हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि किसी महिला की गरिमा उसके रहने के अधिकार से गहराई से जुड़ी होती है। अदालत ने अवैध रूप से तोड़े गए घर के मामले में न केवल मुआवजा देने का आदेश दिया, बल्कि आरोपियों को तुरंत घर पुनर्निर्माण करने के निर्देश भी दिए।जस्टिस एल. विक्टोरिया गौरी ने कहा,“महिला की गरिमा उसके आश्रय के अधिकार से अविभाज्य रूप से जुड़ी है। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में गरिमा के साथ जीने और रहने का अधिकार भी शामिल है।” अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा,"घर केवल...

BJP नेताओ पर NaMo App के जरिए फंड जुटाने में धोखाधड़ी का आरोप, मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर
BJP नेताओ पर NaMo App के जरिए फंड जुटाने में धोखाधड़ी का आरोप, मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर

मद्रास हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके नेताओं पर NaMo ऐप के माध्यम से कथित रूप से धोखाधड़ी कर धन जुटाने का आरोप लगाया गया। याचिकाकर्ता ने इस मामले की जांच कराने और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।याचिका चेन्नई निवासी बीआर अरविंदाक्षन ने दायर की, जिसमें कहा गया कि NaMo ऐप और वेबसाइट के जरिए जनता से चंदा लिया गया लेकिन इसे सरकारी योजनाओं से जोड़कर प्रस्तुत किया गया, जबकि वास्तविकता में यह धन राजनीतिक दल के लिए एकत्र किया गया।याचिका में BJP के पूर्व...

ट्रायल कोर्ट ज़मानत देने की शर्त के तौर पर पासपोर्ट ज़ब्त करने का आदेश नहीं दे सकता: मद्रास हाईकोर्ट
ट्रायल कोर्ट ज़मानत देने की शर्त के तौर पर पासपोर्ट ज़ब्त करने का आदेश नहीं दे सकता: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि ट्रायल कोर्ट के पास ज़मानत देने की शर्त के तौर पर पासपोर्ट ज़ब्त करने का आदेश देने का अधिकार नहीं है।जस्टिस पी. धनबाल ने फ़ैसला दिया कि BNSS की धारा 109 (CrPC की धारा 104) के तहत कोर्ट के पास किसी भी दस्तावेज़ को ज़ब्त करने का अधिकार है, लेकिन पासपोर्ट को नहीं। कोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट ज़ब्त करने का अधिकार सिर्फ़ पासपोर्ट अधिकारियों के पास है, जो पासपोर्ट एक्ट की धारा 10(3) के तहत दिया गया।कोर्ट ने आगे कहा कि पासपोर्ट ज़ब्त करने का अधिकार पासपोर्ट एक्ट की...

मुवक्किल के निर्देश पर दिए बयान पर वकील पर मानहानि नहीं: मद्रास हाईकोर्ट का अहम फैसला
मुवक्किल के निर्देश पर दिए बयान पर वकील पर मानहानि नहीं: मद्रास हाईकोर्ट का अहम फैसला

मद्रास हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई वकील अपने मुवक्किल के निर्देश पर दिए गए बयानों के लिए मानहानि के मामले में अभियोजन का सामना नहीं कर सकता। अदालत ने कहा कि वकील केवल अपने मुवक्किल की ओर से बोलता है और तथ्यों की सत्यता की स्वतंत्र जांच करने की स्थिति में नहीं होता।जस्टिस जी.के. इलंथिरैयन ने कहा,“वकील मुवक्किल के निर्देशों के आधार पर ही कार्य करता है। ऐसे में उन बयानों की जिम्मेदारी मुवक्किल की होती है, न कि वकील की। इसके विपरीत कोई भी दृष्टिकोण वकीलों को प्राप्त कानूनी विशेषाधिकारों के खिलाफ...

शराब व्यक्तिगत पसंद, लेकिन सार्वजनिक असुविधा नहीं—रिक्रिएशन क्लब का लाइसेंस रद्द: मद्रास हाईकोर्ट
'शराब व्यक्तिगत पसंद, लेकिन सार्वजनिक असुविधा नहीं'—रिक्रिएशन क्लब का लाइसेंस रद्द: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में मनोरंजन क्लब को दिए गए शराब लाइसेंस (FL2) को रद्द करते हुए कहा है कि शराब पीना भले ही व्यक्तिगत पसंद हो, लेकिन इससे किसी इलाके के निवासियों को असुविधा या खतरा नहीं होना चाहिए।जस्टिस एन. सतीश कुमार और जस्टिस एम. जोतिरामन की खंडपीठ मदुरै के थंडलाई गांव स्थित PONS Recreation Club को दिए गए लाइसेंस के खिलाफ दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि यह इलाका जल्लिकट्टू जैसी सांस्कृतिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है और स्थानीय लोग...