कलकत्ता हाईकोर्ट

राजनीतिक भाषण मामले में विधायक हुमायूं कबीर को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत
राजनीतिक भाषण मामले में विधायक हुमायूं कबीर को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

पश्चिम बंगाल के आम जनता उन्नयन पार्टी के विधायक हुमायूं कबीर को कथित राजनीतिक भाषण से जुड़े मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली। हाईकोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत दी।कोर्ट ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 के तहत अपराध के प्रथम दृष्टया आवश्यक तत्व मामले में दिखाई नहीं देते और कबीर से हिरासत में पूछताछ की जरूरत भी नहीं है। जस्टिस अजय कुमार गुप्ता ने 10 सितंबर को हुमायूं कबीर की अग्रिम जमानत याचिका पर यह आदेश पारित किया।बता दें, मामला रेजीनगर थाने में दर्ज FIR से जुड़ा है।...

अगर तलाकशुदा पत्नी ने दोबारा शादी नहीं की तो वह गुज़ारा-भत्ता का दावा कर सकती है: कलकत्ता हाईकोर्ट
अगर तलाकशुदा पत्नी ने दोबारा शादी नहीं की तो वह गुज़ारा-भत्ता का दावा कर सकती है: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि पति द्वारा हासिल किया गया तलाक का एकतरफ़ा आदेश (ex parte decree) अपने आप में उसकी पूर्व पत्नी का भरण-पोषण करने की कानूनी ज़िम्मेदारी को खत्म नहीं करता, बशर्ते पत्नी ने दोबारा शादी न की हो और वह अपना खर्च उठाने में असमर्थ हो।साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि एक अविवाहित बेटी, जो CrPC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की याचिका दायर करने से पहले ही बालिग हो चुकी है और जिसे कोई शारीरिक या मानसिक अक्षमता नहीं है, वह इस प्रावधान के तहत भरण-पोषण का दावा नहीं कर सकती।जस्टिस उदय कुमार ने...

बस बहुत हो गया: हाईकोर्ट ने दी अभिषेक बनर्जी को अंतरिम राहत, आगे FIR के लिए कोर्ट की अनुमति जरूरी करने पर होगा विचार
बस बहुत हो गया: हाईकोर्ट ने दी अभिषेक बनर्जी को अंतरिम राहत, आगे FIR के लिए कोर्ट की अनुमति 'जरूरी' करने पर होगा विचार

तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता और डायमंड हार्बर सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ लगातार दर्ज हो रही आपराधिक शिकायतों पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई। अदालत ने सोमवार को कहा कि अब बहुत हो गया और संकेत दिया कि यदि उनके खिलाफ इसी तरह शिकायतें और FIR दर्ज होती रहीं तो भविष्य में नई FIR दर्ज करने से पहले अदालत की अनुमति लेना अनिवार्य किया जा सकता है।जस्टिस ने सुनवाई के दौरान कहा कि वह 4 मई से इस मामले को सुन रहे हैं और अब सुबेंदु अधिकारी के मामले में समकक्ष पीठ द्वारा दिए गए आदेश के आधार पर आदेश पारित...

भगवा गुंडागर्दी टिप्पणी मामले में आनंदबाजार पत्रिका के पत्रकारों पर फिलहाल नहीं होगी सख्त कार्रवाई: हाईकोर्ट में राज्य का आश्वासन
'भगवा गुंडागर्दी' टिप्पणी मामले में आनंदबाजार पत्रिका के पत्रकारों पर फिलहाल नहीं होगी सख्त कार्रवाई: हाईकोर्ट में राज्य का आश्वासन

आनंदबाजार पत्रिका (ABP) में 'भगवा गुंडागर्दी' टिप्पणी को लेकर FIR का सामना कर रहे पत्रकारों को फिलहाल राहत मिली। कलकत्ता हाईकोर्ट में गुरुवार को राज्य सरकार ने भरोसा दिया कि याचिका पर सुनवाई होने तक पत्रकारों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि यह राहत उन्हें जांच एजेंसियों की ओर से जारी नोटिस का पालन करने की शर्त पर मिलेगी।मामले की सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट एस. एन. मुखर्जी ने पत्रकारों के खिलाफ दर्ज FIR का मुद्दा कोर्ट के सामने उठाया। उन्होंने कहा कि ऐसा मामला दर्ज किया गया,...

भगवा गुंडागिरी टिप्पणी पर ABP के पत्रकारों को तत्काल राहत नहीं: हाईकोर्ट ने कहा- पहले FIR रद्द कराने की याचिका दाखिल करें
'भगवा गुंडागिरी' टिप्पणी पर ABP के पत्रकारों को तत्काल राहत नहीं: हाईकोर्ट ने कहा- पहले FIR रद्द कराने की याचिका दाखिल करें

जादवपुर यूनिवर्सिटी में हिंसा की खबरों के दौरान भगवा गुंडागिरी शब्द के इस्तेमाल को लेकर दर्ज FIR के मामले में आनंदबाजार पत्रिका (ABP) के पत्रकारों को कलकत्ता हाईकोर्ट से बुधवार को तत्काल राहत नहीं मिली।जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की अदालत ने मामले की तत्काल सुनवाई के लिए विशेष रूप से तारीख तय करने से इनकार किया। सीनियर एडवोकेट एस.एन. मुखर्जी ने पत्रकारों की ओर से अदालत में पेश होकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि अखबार में भगवा गुंडागिरी शब्द के इस्तेमाल के बाद पत्रकारों के खिलाफ कई...

अगर सांसद पर अंडे फेंके जा रहे हैं तो दूसरों का क्या होगा? महुआ मोइत्रा की सुरक्षा पर कलकत्ता हाईकोर्ट सख्त
अगर सांसद पर अंडे फेंके जा रहे हैं तो दूसरों का क्या होगा? महुआ मोइत्रा की सुरक्षा पर कलकत्ता हाईकोर्ट सख्त

कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए पश्चिम बंगाल पुलिस को निर्देश दिया है कि वह अगले 30 दिनों तक जब भी सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र में जाएं, उनके साथ दो पुलिसकर्मी तैनात करे। अदालत ने कहा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधि को अपने क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से जाकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में सक्षम होना चाहिए।जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने यह निर्देश महुआ मोइत्रा की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में आरोप लगाया गया कि निर्वाचन...

हिंदू विवाह की रस्मों और घटना की क्रूरता को आधार बनाकर मौत की सजा देना पर्याप्त नहीं: हाईकोर्ट
हिंदू विवाह की रस्मों और घटना की क्रूरता को आधार बनाकर मौत की सजा देना पर्याप्त नहीं: हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पत्नी की हत्या के मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि किसी मामले को 'दुर्लभतम में दुर्लभ' मानते समय केवल अपराध की गंभीरता और क्रूरता पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। अदालत को आरोपी के सुधार और पुनर्वास की संभावना पर भी विचार करना जरूरी है।जस्टिस शंपा सरकार और जस्टिस स्मिता दास डे की पीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने मौत की सजा देने के लिए जिन विशेष कारणों पर भरोसा किया, वे काफी हद तक हिंदू विवाह की रस्मों और वैवाहिक संबंधों से...

आज की दुनिया में बायोलॉजिकल पिता का नाम रखना ज़रूरी नहीं: कलकत्ता हाईकोर्ट ने बर्थ सर्टिफिकेट में सौतेले पिता का नाम जोड़ने की इजाज़त दी
आज की दुनिया में बायोलॉजिकल पिता का नाम रखना ज़रूरी नहीं: कलकत्ता हाईकोर्ट ने बर्थ सर्टिफिकेट में सौतेले पिता का नाम जोड़ने की इजाज़त दी

कलकत्ता हाईकोर्ट ने म्युनिसिपल अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे नाबालिग बच्चे के बर्थ सर्टिफिकेट में उसके सौतेले पिता का नाम जोड़ें और बच्चे का सरनेम बदलें। कोर्ट ने कहा कि "नाबालिग बच्चे के भले के लिए" ऐसा बदलाव ज़रूरी है।जस्टिस राजा बसु चौधरी ने एक माँ की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। माँ ने अपने नाबालिग बेटे का सरनेम और बर्थ रिकॉर्ड में उसके बायोलॉजिकल पिता का नाम बदलने की मांग की।कोर्ट ने कहा कि समाज आगे बढ़ चुका है और "आज की दुनिया में रजिस्टर में बायोलॉजिकल पिता का नाम बनाए रखना"...

पति-पत्नी के बीच सिविल विवाद का परिवार के खिलाफ आपराधिक मामले में बदलना, सख्त न्यायिक जांच की मांग करता है: कलकत्ता हाईकोर्ट
पति-पत्नी के बीच 'सिविल विवाद' का परिवार के खिलाफ आपराधिक मामले में बदलना, सख्त न्यायिक जांच की मांग करता है: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवाद कभी-कभी उस "नाजुक सीमा को पार कर सकते हैं, जो सिविल विवाद को परेशान करने वाले आपराधिक मुकदमों से अलग करती है"। एक जीवनसाथी द्वारा सिविल कानूनी उपाय अपनाने के बाद पूरे विस्तारित परिवार के खिलाफ गंभीर सजा वाले आपराधिक मामले शुरू करने के लिए "सख्त न्यायिक जांच" की आवश्यकता होती है।जस्टिस उदय कुमार ने यह टिप्पणी तब की, जब उन्होंने पति और उसके विस्तारित परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ बलात्कार, क्रूरता, मारपीट, आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक धमकी और दहेज से जुड़े...

पति को उसकी आश्रित विधवा माँ से अलग करने के लिए पत्नी का ज़ोर देना क्रूरता: कलकत्ता हाईकोर्ट
पति को उसकी आश्रित विधवा माँ से अलग करने के लिए पत्नी का ज़ोर देना क्रूरता: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी का यह ज़ोर देना कि उसका पति अपनी आश्रित विधवा माँ से रिश्ते तोड़ ले और अलग रहे, इस मामले के तथ्यों के आधार पर मानसिक क्रूरता माना जाएगा। ऐसा इसलिए है, क्योंकि अलग घर में रहने की पत्नी की मांग का आधार उनके नाबालिग बेटे के साथ छेड़छाड़ का आरोप है, जो पूरी तरह से बेबुनियाद साबित हुआ।जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य और जस्टिस सुप्रतिम भट्टाचार्य की डिवीज़न बेंच ने कहा कि हालांकि अलग घर में रहने की मांग को अकेले क्रूरता नहीं माना जा सकता, लेकिन पत्नी के व्यवहार को उस खास...

महुआ मोइत्रा को हाईकोर्ट से राहत, कथित नफरत फैलाने वाले भाषण मामले में गिरफ्तारी वारंट पर रोक
महुआ मोइत्रा को हाईकोर्ट से राहत, कथित नफरत फैलाने वाले भाषण मामले में गिरफ्तारी वारंट पर रोक

कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर रोक लगाई।बता दें, यह वारंट कृष्णानगर की अदालत ने कथित आपत्तिजनक बयान और नफरत फैलाने वाले भाषण से जुड़े मामले में जारी किया। जस्टिस देबांग्शु बसाक और जस्टिस आर्यक दत्ता की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि वारंट के आधार पर महुआ मोइत्रा के खिलाफ फिलहाल कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए।हाईकोर्ट इस मामले में उनकी चुनौती पर 27 अगस्त को सुनवाई करेगा। कृष्णानगर की तीसरी न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने...

अलग रहने के बाद कुछ दिन साथ रहना क्रूरता की माफी नहीं: कलकत्ता हाईकोर्ट ने तलाक बरकरार रखा
अलग रहने के बाद कुछ दिन साथ रहना क्रूरता की माफी नहीं: कलकत्ता हाईकोर्ट ने तलाक बरकरार रखा

कलकत्ता हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पति-पत्नी के अलग रहने के बाद कुछ मौकों पर दोबारा साथ रहना अपने आप में वैवाहिक क्रूरता को माफ करने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। खासकर तब जब बाद में संबंधित पक्ष का क्रूर व्यवहार फिर दोहराया गया हो।जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य और जस्टिस सुप्रतिम भट्टाचार्य की खंडपीठ ने पति को मानसिक क्रूरता के आधार पर दी गई तलाक की डिक्री को बरकरार रखते हुए पत्नी की अपील खारिज की।मामले में दोनों का विवाह वर्ष 2009 में हुआ था और वे करीब पांच वर्ष तक साथ रहे। दिसंबर 2014 से दोनों अलग...

केंद्र सरकार आदर्श नियोक्ता, समान स्थिति वाले कर्मचारियों से भेदभाव नहीं कर सकती: कलकत्ता हाईकोर्ट
केंद्र सरकार आदर्श नियोक्ता, समान स्थिति वाले कर्मचारियों से भेदभाव नहीं कर सकती: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार 'आदर्श नियोक्ता' होने के नाते सार्वजनिक रोजगार में समानता के मूल सिद्धांत का उल्लंघन नहीं कर सकती। समान परिस्थितियों में नियुक्त कर्मचारियों के साथ एक जैसा व्यवहार किया जाना जरूरी है।अदालत ने इसी आधार पर 25 अस्थायी डॉक्टरों में से एक डॉक्टर को उसकी प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से नियमित करने के आदेश को बरकरार रखा और केंद्र सरकार की याचिका खारिज की। जस्टिस पार्थ सारथी चटर्जी और कार्यवाहक चीफ जस्टिस तपाब्रत चक्रवर्ती की खंडपीठ ने कहा कि जब कर्मचारियों की...

मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के पुलिस के कथित मौखिक निर्देश पर जनहित याचिका खारिज, कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा- आरोप अस्पष्ट
मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के पुलिस के कथित मौखिक निर्देश पर जनहित याचिका खारिज, कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा- आरोप अस्पष्ट

पश्चिम बंगाल में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के लिए पुलिस द्वारा कथित तौर पर मौखिक निर्देश दिए जाने के आरोप वाली जनहित याचिका को कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को खारिज की। हाईकोर्ट ने कहा कि याचिका में लगाए गए आरोप अस्पष्ट हैं और उनके समर्थन में कोई ठोस सामग्री पेश नहीं की गई।मामले की सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस तपाब्रत चक्रवर्ती और जस्टिस अतारुप बनर्जी की खंडपीठ ने की। याचिका में आरोप लगाया गया कि पुलिस अधिकारियों ने मस्जिदों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कीं और उन्हें लाउडस्पीकर हटाने के मौखिक...

बंगाल में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के कथित मौखिक निर्देश पर हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला
बंगाल में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के कथित मौखिक निर्देश पर हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

पश्चिम बंगाल में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के लिए पुलिस द्वारा कथित तौर पर मौखिक निर्देश दिए जाने के आरोपों से जुड़ी जनहित याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। याचिका में आरोप लगाया गया कि अनुमत ध्वनि सीमा के उल्लंघन के किसी ठोस प्रमाण के बिना पुलिस अधिकारी मस्जिद समितियों से लाउडस्पीकर हटाने के लिए कह रहे हैं।मामले की सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस तपाब्रत चक्रवर्ती और जस्टिस अतारुप बनर्जी की खंडपीठ ने की। इससे पहले कोर्ट ने राज्य के महाधिवक्ता को आरोपों पर सरकार...