कलकत्ता हाईकोर्ट
पश्चिम बंगाल चुनाव: हाईकोर्ट में केवल केंद्रीय व PSU कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइज़र बनाने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई
कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार (30 अप्रैल) को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के लिए केवल केंद्र सरकार और PSU कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइज़र नियुक्त करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई की।याचिका में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के उस मेमो को चुनौती दी गई है, जिसमें हर काउंटिंग टेबल पर कम से कम एक केंद्रीय कर्मचारी की नियुक्ति अनिवार्य की गई है।याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट कल्याण बनर्जी ने Representation of the People Act, 1951 का हवाला देते हुए कहा कि इस तरह का आदेश जारी करना...
'ट्रबलमेकर' की सूची बनाकर गिरफ्तारी क्यों? कलकत्ता हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा सवाल
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले कथित “ट्रबलमेकर” सूची के आधार पर गिरफ्तारी के निर्देशों को लेकर भारत निर्वाचन आयोग से सवाल किया है कि जब कानून और वैधानिक प्राधिकरण पहले से मौजूद हैं, तो ऐसे आदेश की जरूरत क्या है।चीफ जस्टिस सुजय पॉल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ यह सुनवाई एक जनहित याचिका पर कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग ने “गुप्त रूप से” एक सूची तैयार की है, जिसके आधार पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जा सकता है।सभी पक्षों की दलीलें...
सूचना का अधिकार मौलिक अधिकार, 15 दिन में जवाब दें: कलकत्ता हाईकोर्ट का सख्त निर्देश
कलकत्ता हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया कि सूचना का अधिकार (RTI) संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) से उत्पन्न मौलिक अधिकार है और इसमें देरी स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने पश्चिम बंगाल सूचना आयोग के राज्य लोक सूचना अधिकारी को लंबित आरटीआई आवेदन का निपटारा 15 दिनों के भीतर करने का निर्देश दिया।जस्टिस राय चट्टोपाध्याय इस मामले की सुनवाई कर रहे थे, जिसमें याचिकाकर्ता ने वर्ष 2018 में मांगी गई जानकारी समय पर न मिलने और सूचना आयोग की कार्यवाही को चुनौती दी थी।अदालत ने अपने आदेश में कहा,“सूचना का...
पत्नी द्वारा झूठे केस दर्ज कराने से पति की गिरफ्तारी, 17 साल की अलगाव की अवधि मानसिक क्रूरता के बराबर: कलकत्ता हाईकोर्ट ने तलाक को सही ठहराया
कलकत्ता हाईकोर्ट की जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य और जस्टिस सुप्रतिम भट्टाचार्य की बेंच ने पत्नी द्वारा दायर अपील खारिज की, जिसमें उसने पति को दिए गए तलाक के आदेश को चुनौती दी थी। ट्रायल कोर्ट ने क्रूरता के आधार पर तलाक मंजूर किया। साथ ही यह भी माना था कि शादी अब ठीक नहीं हो सकती।डिवीजन बेंच ने दोनों पक्षों द्वारा पेश किए गए सबूतों केस शुरू होने से पहले और बाद में पत्नी के बर्ताव, उसके द्वारा शुरू की गई आपराधिक कार्रवाइयों और लगभग 17 साल के लंबे अलगाव की जांच करने के बाद इन निष्कर्षों को सही...
नाबालिग को नौकरानी की तरह रखने वाली महिला 'वैध अभिभावक' नहीं: कलकत्ता हाईकोर्ट ने अपहरण का दोष निरस्त किया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि किसी नाबालिग को अपने घर में नौकरानी के रूप में रखने वाली महिला को उसका “वैध अभिभावक” नहीं माना जा सकता। अदालत ने इसी आधार पर वर्ष 2007 के अपहरण के मामले में दोषसिद्धि रद्द की।जस्टिस चैताली चटर्जी दास की पीठ ने अपील स्वीकार करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा कि लड़की को किसी “वैध अभिभावक” की अभिरक्षा से ले जाया गया, जो धारा 363 के तहत अपराध का आवश्यक तत्व है।मामले में नाबालिग लड़की चंदा बीबी के घर रह रही थी। अभियोजन का दावा था...
बंगाल को निशाना नहीं बना रहा ECI, चुनाव वाले दूसरे राज्यों में ज़्यादा अधिकारियों का तबादला हुआ: हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
कलकत्ता हाईकोर्ट ने वकील अर्का कुमार नाग की दायर जनहित याचिका (PIL) खारिज की। इस याचिका में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा 15 मार्च को चुनाव की घोषणा के बाद IAS और IPS अधिकारियों के बड़े पैमाने पर किए गए तबादलों को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने माना कि यह चुनौती मूल रूप से ही गलत है, क्योंकि याचिका में खुद इस बात पर कभी विवाद नहीं उठाया गया कि "स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद अधिकारियों का तबादला/स्थानांतरण करने की शक्ति ECI के पास है।"बेंच की ओर से...
मरते समय न कोई बयान, न क्रूरता का सबूत: कलकत्ता हाईकोर्ट ने दहेज उत्पीड़न मामले में 24 साल बाद पति को किया बरी
कलकत्ता हाईकोर्ट ने अहम फैसले में 24 साल पुराने मामले में पति को धारा 498ए के आरोप से बरी किया। अदालत ने कहा कि न तो क्रूरता का ठोस सबूत पेश किया गया और न ही कोई वैध मरते समय का बयान (डाइंग डिक्लेरेशन) मौजूद था जिससे दोष सिद्ध किया जा सके।जस्टिस चैताली चटर्जी दास ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष के आरोप अस्पष्ट, विरोधाभासी और भावनात्मक दावों पर आधारित थे, जिनमें कानूनी रूप से दोष साबित करने के लिए जरूरी ठोस आधार का अभाव था।मामला बोरेन मंडल की अपील से जुड़ा था जिन्हें 2002 में मालदा सेशन...
कलकत्ता हाईकोर्ट ने रेप केस में व्यक्ति को बरी किया, कहा - रिश्ता टूटने के बाद "रंजिश" में शिकायत दर्ज की गई
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 2008 में रेप का दोषी पाए गए व्यक्ति की सज़ा रद्द की। कोर्ट ने माना कि प्रॉसिक्यूशन के केस में कई विरोधाभास, ज़रूरी बातों की कमी और सबूतों की पुष्टि का अभाव था — खासकर शिकायतकर्ता का यह कबूलनामा कि उसने बाद में आरोपी से शादी कर ली थी और उसकी पत्नी के तौर पर उसके साथ रही थी।जस्टिस चैताली चटर्जी दास ने क्रिमिनल अपील CRA 76 of 2009 (मिथुन पॉल बनाम पश्चिम बंगाल राज्य) पर फैसला सुनाते हुए कहा कि लिखित शिकायत में ही शादी की बात छिपाई गई। यह बात ट्रायल के दौरान ही सामने आई, जिससे...
कलकत्ता हाईकोर्ट ने विश्व हिंदू परिषद की राम नवमी रैली की अर्जी मंज़ूर की, प्रतिभागियों की संख्या 500 तक सीमित की
कलकत्ता हाईकोर्ट ने विश्व हिंदू परिषद को 26 मार्च, 2026 को हावड़ा में राम नवमी रैली आयोजित करने की अनुमति दी। कोर्ट ने उन्हें पिछले साल वाले ही रास्ते का इस्तेमाल करने की इजाज़त दी है, लेकिन साथ ही सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई शर्तें भी लगाईं।जस्टिस सौगत भट्टाचार्य विश्व हिंदू परिषद द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें पुलिस अधिकारियों को रैली में मदद करने के निर्देश देने की मांग की गई।याचिकाकर्ताओं ने 4 अप्रैल, 2025 के एक पिछले बेंच के आदेश का हवाला दिया, जिसमें कुछ...
मजिस्ट्रेट खुद करेंगे प्रारंभिक जांच, पुलिस को नहीं सौंप सकते जिम्मेदारी: कलकत्ता हाइकोर्ट
कलकत्ता हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 175(3) के तहत मजिस्ट्रेट पुलिस को “जांच” (इन्क्वायरी) करने का निर्देश नहीं दे सकते। यह जिम्मेदारी स्वयं मजिस्ट्रेट को निभानी होगी, और उसके बाद ही वे जांच के आदेश दे सकते हैं।जस्टिस अजय कुमार मुखर्जी ने कहा कि कानून के तहत जांच का अर्थ न्यायिक प्रक्रिया से है, जिसे केवल मजिस्ट्रेट या अदालत ही कर सकती है। यदि इस कार्य को पुलिस को सौंप दिया जाए खासकर तब जब पुलिस पहले ही FIR दर्ज करने से इनकार...
रिश्वत मांगने के आरोप में फंसे आबकारी अधिकारी को राहत नहीं, कलकत्ता हाइकोर्ट ने कार्यवाही रद्द करने से किया इनकार
कथित तौर पर लाइसेंस देने के बदले रिश्वत मांगने के मामले में फंसे एक आबकारी अधिकारी को कलकत्ता हाइकोर्ट से राहत नहीं मिली।अदालत ने भ्रष्टाचार से जुड़ी आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग खारिज करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत मौजूद हैं, जिनकी जांच ट्रायल के दौरान ही की जाएगी।जस्टिस अपूर्व सिन्हा राय ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 482 के तहत दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इस स्तर पर अदालत को केवल यह देखना होता है कि क्या प्रथम दृष्टया मामला बनता है, न कि पूरे मामले का...
3 साल की हिरासत के बाद PMLA में ज़मानत मिली, कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा - लंबे समय तक हिरासत के मामलों में अनुच्छेद 21, दोहरी शर्तों पर भारी पड़ सकता है
कलकत्ता हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में आरोपी को ज़मानत दी। कोर्ट ने माना कि तीन साल से ज़्यादा समय तक ट्रायल से पहले हिरासत में रखना, अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। साथ ही यह मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) की धारा 45 के तहत तय सख्त 'दोहरी शर्तों' में ढील देने का उचित आधार बन सकता है।जस्टिस सुव्रा घोष ने टिप्पणी की कि कोई भी दंडात्मक कानून कितना भी सख्त क्यों न हो, एक संवैधानिक अदालत को हमेशा संविधानवाद और कानून के शासन के पक्ष में ही...
पति पर अवैध संबंध व बच्चे को मारने की झूठी आरोपबाजी 'मानसिक क्रूरता': कलकत्ता हाइकोर्ट ने दिया तलाक का आदेश
कलकत्ता हाइकोर्ट ने कहा कि पति या पत्नी के खिलाफ बिना सबूत के गंभीर और अपमानजनक आरोप लगाना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है और यह विवाह समाप्त करने का आधार बन सकता है। अदालत ने इसी आधार पर पति की अपील स्वीकार करते हुए उसे तलाक दे दिया।जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य और जस्टिस सुप्रतिम भट्टाचार्य की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। हाइकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें पति की तलाक याचिका खारिज कर दी गई थी।मामले में पति ने मानसिक क्रूरता के आधार पर तलाक की मांग की थी। हालांकि बांकुड़ा जिले के...
स्टांप पेपर पर किया गया 'कॉन्ट्रैक्ट विवाह' हिंदू कानून में अमान्य: कलकत्ता हाइकोर्ट
कलकत्ता हाइकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि केवल गैर-न्यायिक स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर कर किया गया तथाकथित “कॉन्ट्रैक्ट विवाह” हिंदू कानून के तहत मान्य नहीं है। इसलिए ऐसे संबंध के आधार पर द्विविवाह या वैवाहिक क्रूरता के आपराधिक आरोप नहीं लगाए जा सकते।जस्टिस उदय कुमार की पीठ ने एक व्यक्ति के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करते हुए कहा कि हिंदू विवाह के लिए कानून में निर्धारित रीति-रिवाज और धार्मिक अनुष्ठान आवश्यक होते हैं। केवल स्टांप पेपर पर किया गया समझौता वैध विवाह का स्थान नहीं...
चार्जशीट दाखिल होना जमानत का आधार नहीं: कलकत्ता हाइकोर्ट ने POCSO आरोपी की जमानत रद्द की
कलकत्ता हाइकोर्ट ने 14 वर्षीय बालिका से कथित गंभीर दुष्कर्म के मामले में आरोपी kr जमानत रद्द करते हुए स्पष्ट किया कि केवल चार्जशीट दाखिल हो जाने के आधार पर POCSO जैसे गंभीर मामलों में जमानत नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि जमानत का विवेक स्वतः या रूटीन में नहीं, बल्कि आरोपों की गंभीरता, पीड़िता की संवेदनशीलता और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।जस्टिस बिवास पट्टनायक ने सेशंस कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि जमानत आदेश में स्पष्ट रूप से विचार का अभाव...
EPF Act के तहत मेडिकल ट्रेनी 'एम्प्लॉई' नहीं: कलकत्ता हाई कोर्ट ने रद्द की PF की मांग
कलकत्ता हाईकोर्ट ने एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड अपीलेट ट्रिब्यूनल का आदेश बरकरार रखा, जिसमें प्राइवेट कंपनी के खिलाफ लगाए गए प्रोविडेंट फंड का बकाया रद्द कर दिया गया था। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि मॉडल स्टैंडिंग ऑर्डर के तहत अप्रेंटिस के तौर पर रखे गए ट्रेनी मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव को EPF Act के तहत प्रोविडेंट फंड कंट्रीब्यूशन के लिए "एम्प्लॉई" नहीं माना जा सकता।जस्टिस शम्पा दत्त ने रीजनल प्रोविडेंट फंड कमिश्नर और दूसरी EPFO अथॉरिटीज़ की रिट याचिका खारिज की, जिसमें मेसर्स क्लार सेहेन प्राइवेट लिमिटेड...
सिर्फ़ 'आम गलत इस्तेमाल' के दावों पर रिश्तेदारों पर केस नहीं चलाया जा सकता: कलकत्ता हाईकोर्ट ने IPC की धारा 498A के तहत शादी के दौरान क्रूरता का केस रद्द किया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने शादी के दौरान क्रूरता के केस में आपराधिक कार्रवाई को कुछ हद तक रद्द किया। कोर्ट ने पति-पत्नी के खिलाफ खास आरोपों और परिवार के दूसरे सदस्यों के खिलाफ अस्पष्ट, हर तरह के आरोपों के बीच एक साफ़ लाइन खींची है। साथ ही दोहराया कि कोर्ट को क्रिमिनल कार्रवाई का इस्तेमाल रिश्तेदारों को “पूरी तरह फंसाने” के लिए होने से रोकना चाहिए।जस्टिस उदय कुमार, प्रैक्टिसिंग वकील आशीष कुमार दत्ता और उनके भाई तपस कुमार दत्ता की तरफ़ से CrPC की धारा 482 (BNSS की धारा 528) के तहत दायर याचिका पर सुनवाई...
माता-पिता की देखभाल को लेकर भाइयों के बीच अचानक हुई लड़ाई, जिससे मौत हुई, मर्डर नहीं: कलकत्ता हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सज़ा घटाकर 14 साल की
कलकत्ता हाईकोर्ट ने दो भाइयों की सज़ा को मर्डर से गैर-इरादतन हत्या में यह कहते हुए बदल दिया कि बूढ़े माता-पिता के भरण-पोषण की ज़िम्मेदारी को लेकर अचानक हुए पारिवारिक झगड़े से हुआ जानलेवा हमला पहले से सोचा-समझा नहीं था। इसलिए इसमें IPC की धारा 302 नहीं लगती।जस्टिस राजशेखर मंथा और जस्टिस अजय कुमार गुप्ता की एक डिवीजन बेंच ने नादिया में ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई उम्रकैद की सज़ा के खिलाफ ऐमुद्दीन शेख और एक अन्य की अपील को कुछ हद तक मंज़ूरी दी।प्रॉसिक्यूशन के अनुसार, अपील करने वाले और पीड़ित भाई-बहन...
सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत भरण-पोषण न्यायाधिकरण बच्चों को बेदखल करने का आदेश नहीं दे सकता: कलकत्ता हाइकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत गठित भरण-पोषण न्यायाधिकरण को धारा 4 और 5 की कार्यवाही में बच्चों को संपत्ति से बेदखल करने का अधिकार नहीं है।न्यायालय ने स्पष्ट किया कि न्यायाधिकरण की शक्तियां केवल मासिक भरण-पोषण तय करने तक सीमित हैं, उन्हें परिसर खाली कराने तक विस्तारित नहीं किया जा सकता।जस्टिस कृष्णा राव ने उप-मंडल पदाधिकारी (जो भरण-पोषण न्यायाधिकरण के रूप में कार्य कर रहे थे) द्वारा पारित आदेशों में आंशिक...
पांच वर्ष के सहमति आधारित संबंध के बाद शादी से इनकार मात्र से दुष्कर्म का मामला नहीं बनता: कलकत्ता हाइकोर्ट ने मामला रद्द किया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि दो वयस्कों के बीच लंबे समय तक चले सहमति आधारित संबंध को केवल इसलिए दुष्कर्म के मामले में नहीं बदला जा सकता, क्योंकि बाद में संबंध खराब हो गया या विवाह नहीं हो सका।अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 417, 376, 313 और 506 के तहत दर्ज आपराधिक कार्यवाही रद्द की।जस्टिस चैतालि चटर्जी दास ने अभियुक्त अनिर्बान मुखर्जी द्वारा दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि दोनों के बीच लगभग पांच वर्षों तक सहमति से संबंध रहा। इस दौरान वे साथ...

















