हाईकोर्ट

दादा-दादी/नाना-नानी से अचानक अलग होने पर बच्चा परेशान हो सकता है: राजस्थान हाईकोर्ट ने पिता के लिए चरणबद्ध कस्टडी की व्यवस्था तय की
राजस्थान हाईकोर्ट ने 7 साल के बच्चे की कस्टडी उसके पिता को देने से इनकार किया। कोर्ट ने पाया कि बच्चा जन्म से ही अपने नाना-नानी के साथ रह रहा है, इसलिए अचानक उसे कहीं और भेजने से उसे मानसिक परेशानी हो सकती है, जो बच्चे के हित में नहीं होगा।जस्टिस मुन्नूरी लक्ष्मण और जस्टिस संगीता शर्मा की बेंच ने पिता को चरणबद्ध तरीके से मुलाक़ात और कुछ समय के लिए कस्टडी के अधिकार दिए। कोर्ट ने माना कि पिता को ऐसा माहौल बनाने का पूरा अधिकार है जिससे बाद में बच्चा उनके साथ रहने के लिए तैयार हो सके।बेंच ने...

'ज़हरीले पेड़ का फल': इलाहाबाद हाईकोर्ट का फ़ैसला - बाद में हुई गिरफ़्तारी या रिमांड से गैर-कानूनी हिरासत सही नहीं हो सकती, ₹30,000 का मुआवज़ा देने का आदेश
अनुच्छेद 21 और 22 के तहत संवैधानिक सुरक्षा के संदर्भ में 'ज़हरीले पेड़ का फल' (Fruit of the Poisonous Tree) सिद्धांत को लागू करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बाद में की गई औपचारिक गिरफ़्तारी और रिमांड, पहले की गैर-कानूनी हिरासत को वैध नहीं बना सकती।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने कहा कि जब किसी व्यक्ति की शुरुआती हिरासत गैर-कानूनी होती है तो बाद में की गई गिरफ़्तारी (भले ही उसके लिए वैध आधार हों) और उससे जुड़ी रिमांड की कार्यवाही भी अमान्य हो जाती है।बेंच ने यह टिप्पणी रवि...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टाउन प्लानिंग में कमियों को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए PIL शुरू की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टाउन प्लानिंग में कमियों, खासकर शहरों, कस्बों और कॉलोनियों के लिए लेआउट प्लान बनाते समय कचरा डंपिंग/कलेक्शन के लिए जगह तय न करने और ट्रांसफॉर्मर लगाने की व्यवस्था न करने को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए एक जनहित याचिका (PIL) शुरू की।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने कहा कि इस मुद्दे पर विचार करने की ज़रूरत है, क्योंकि यह टाउन प्लानिंग से जुड़ा है और डेवलपमेंट अथॉरिटी (जिसमें उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद भी शामिल है) द्वारा विकसित कॉलोनियों में रहने वाले...

MTP नियमों के तहत सिर्फ़ वैवाहिक अलगाव गर्भपात का आधार नहीं हो सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महिला की याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 'मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ़ प्रेग्नेंसी रूल्स, 2003' (2021 में संशोधित) के तहत सिर्फ़ वैवाहिक अलगाव को गर्भावस्था को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने (गर्भपात) का आधार नहीं माना जा सकता।कोर्ट ने कहा कि सामान्य वैवाहिक मतभेदों की तुलना वैवाहिक स्थिति में बदलाव, जैसे 'तलाक' या 'विधवापन' से नहीं की जा सकती; नियम 3B(c) में गर्भावस्था के दौरान वैवाहिक स्थिति में बदलाव के संदर्भ में विशेष रूप से इनका उल्लेख किया गया।बता दें, नियम 3B(c) गर्भावस्था के दौरान वैवाहिक स्थिति में बदलाव...

CEC की नियुक्ति के मामले पर फ़ैसला लेने में सुप्रीम कोर्ट की 2 साल से ज़्यादा की देरी की कीमत
29 सितंबर को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की सुप्रीम कोर्ट बेंच ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को एक बड़ी बेंच के पास भेज दिया।जहाँ जस्टिस दत्ता का मानना था कि बड़ी बेंच को मामला भेजने की केंद्र सरकार की मांग ज़रूरी नहीं थी, वहीं जस्टिस शर्मा की राय अलग थी। बाद में इस मामले की सुनवाई करने वाले जस्टिस शर्मा की निष्पक्षता पर सवाल उठे, क्योंकि पता चला कि उनके बेटे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में...

दिल्ली हाईकोर्ट में PIL: विरोध-प्रदर्शन को संभालने के दौरान पुलिस और RAF के लिए बॉडी-वर्न कैमरे अनिवार्य हों
दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई। इसमें केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को निर्देश देने की मांग की गई कि वे भीड़ को नियंत्रित करने और विरोध-प्रदर्शन को संभालने की ड्यूटी पर तैनात कर्मियों के लिए बॉडी-वर्न कैमरों (BWCs) को अनिवार्य और "हमेशा चालू" (Always-on) रखने के लिए एक बाध्यकारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाएं।वकील चाहत राघव द्वारा दायर इस याचिका में ऐसे कैमरों से रिकॉर्ड किए गए फुटेज के स्टोरेज, अखंडता, उसे सुरक्षित रखने और सबूत के तौर पर...

कृषि उपज को बाहर से लाकर सिर्फ प्रोसेसिंग करने पर विकास उपकर नहीं लगा सकता राज्य: उत्तराखंड हाईकोर्ट
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि राज्य के बाहर से कृषि उपज को किसी मार्केट एरिया में केवल विनिर्माण (Manufacturing) या आगे की प्रोसेसिंग के लिए लाने पर, यदि उस मार्केट एरिया में उसकी कोई बिक्री या खरीद नहीं होती है, तो उस पर डेवलपमेंट सेस (विकास उपकर) नहीं लगाया जा सकता।चीफ जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की डिवीजन बेंच ने कहा कि उत्तराखंड कृषि उपज विपणन (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 2011 की धारा 27(c)(v) के पहले प्रावधान में इस तरह के कृषि उत्पाद पर...

'सड़क किनारे सामान बेचने वालों को हटाना समाधान नहीं, सही योजना की ज़रूरत': जबलपुर कोर्ट में ट्रैफिक की समस्या पर हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बार एसोसिएशन और अन्य संबंधित पक्षों से जनहित याचिका (PIL) में शामिल होने को कहा। यह याचिका जबलपुर ज़िला कोर्ट के गेट नंबर 3 और 4 के पास सड़क किनारे सामान बेचने वालों और हाथगाड़ियों (Handcarts) की वजह से होने वाली ट्रैफिक समस्याओं से जुड़ी है।चीफ़ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीज़न बेंच ने कहा कि इस समस्या का व्यावहारिक समाधान निकालने के लिए संबंधित पक्षों, खासकर वकीलों के संगठन की भागीदारी ज़रूरी होगी।बेंच ने कहा,"याचिका में कोर्ट के कामकाज से जुड़ी...

NCR के पेट्रोल पंपों पर ANPR कैमरे ज़रूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रिटेलर्स पर खर्च का बोझ डालने के राज्य सरकार के अधिकार पर सवाल उठाए
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते सवाल उठाया कि क्या नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में पेट्रोल और डीज़ल रिटेल आउटलेट मालिकों को 'एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन' (CAQM) के निर्देशों के तहत राज्य सरकार के आदेश के अनुसार 'ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन' (ANPR) कैमरे लगाने का खर्च उठाने के लिए मजबूर किया जा सकता है।जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच ने कहा कि 'गंभीर' मुद्दा यह है कि क्या राज्य सरकार का 4 जून, 2026 का पत्र, जिसमें पेट्रोल और डीज़ल रिटेल आउटलेट्स को 30 सितंबर, 2026 तक ANPR...

सिंहस्थ कुंभ से पहले सड़क चौड़ीकरण: MP हाईकोर्ट ने नगर निगम अधिनियम की धारा 305 को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया
सिंहस्थ कुंभ से पहले उज्जैन में चल रहे सड़क चौड़ीकरण अभियान के बीच मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1956 की धारा 305 की संवैधानिक वैधता (vires) को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की डिवीजन बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही Ravindra Ramchandra Waghmare v. Indore Municipal Corporation मामले में धारा 305 को बरकरार रख चुका है। हालांकि, मौजूदा मामले के तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने...

सबूत पेश करने का काम पूरा होने के बाद बचाव पक्ष को बेहतर बनाने या फिर से तैयार करने के लिए गवाह को वापस बुलाने की शक्ति का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता: हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि BNSS की धारा 348 (पहले CrPC की धारा 311) के तहत गवाहों को वापस बुलाने और सबूत मांगने की शक्ति भले ही व्यापक हो, लेकिन इसका इस्तेमाल सिर्फ़ इसलिए नहीं किया जा सकता कि कोई आरोपी अपने सबूत पेश करने का काम पूरा होने के बाद अपना बचाव पक्ष मज़बूत करना चाहता है।चेक बाउंस होने के मामले में आरोपी की याचिका खारिज करते हुए जस्टिस सुमीत गोयल ने कहा कि इस शक्ति का इस्तेमाल तब किया जाना चाहिए जब मामले के सही फ़ैसले के लिए ज़रूरी सबूत की मांग की गई हो, "न कि सिर्फ़ इसलिए कि...

निर्माण श्रमिकों के लिए जमा ₹3,000 करोड़ का सेस अब तक अप्रयुक्त, दिल्ली हाईकोर्ट ने मांगा एक्शन प्लान
निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए एकत्र किए गए करीब ₹3,000 करोड़ के सेस के अब तक इस्तेमाल नहीं होने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार के श्रम विभाग और संबंधित कल्याण बोर्ड से जवाब मांगा है।चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने अधिकारियों से पूछा कि क्या इस राशि का इस्तेमाल कर निर्माण एवं अन्य श्रमिकों को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए कोई एक्शन प्लान तैयार किया गया है।कोर्ट के समक्ष दलील दी गई कि सेस के रूप में बड़ी राशि जमा होने के...

पति की सहमति के बिना भी मुस्लिम पत्नी ले सकती है 'खुला': केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मुस्लिम पत्नी द्वारा विवाह-विच्छेद के लिए 'खुला (Khula)' का सहारा लेने पर पति की सहमति या स्वीकृति आवश्यक नहीं है। कोर्ट ने कहा कि खुला मुस्लिम पत्नी को प्राप्त विवाह-विच्छेद का स्वतंत्र अधिकार है और इसकी वैधता पति की सहमति पर निर्भर नहीं करती।जस्टिस जे. निशा बानू और जस्टिस शोबा अन्नम्मा ईपेन की डिवीजन बेंच ने कहा कि 'खुला' पत्नी को उसी प्रकार प्राप्त तलाक का अधिकार है, जिस प्रकार 'तलाक' पति को प्राप्त है।कोर्ट ने कहा, “खुला की वैधता पति की स्वीकृति या सहमति पर...

'काला हिरण' फ़िल्म के प्रोड्यूसर ने सलमान खान के केस पर रोक लगाने की मांग की, कहा - विवाद पहले ही दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहा है
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को प्रस्तावित फ़िल्म "काला हिरण: द बैटल फ़ॉर लिगेसी" के मेकर्स की याचिका पर नोटिस जारी किया। इस याचिका में बॉलीवुड एक्टर सलमान खान द्वारा फ़िल्म की रिलीज़ के ख़िलाफ़ दायर केस पर रोक लगाने की मांग की गई।जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने उस एक्टर से जवाब मांगा है जो फ़िल्म की रिलीज़ पर रोक लगवाना चाहते हैं।बताया जा रहा है कि यह प्रस्तावित फ़िल्म खान के 1998 के काले हिरण (ब्लैकबक) के शिकार मामले से प्रेरित है।प्रोड्यूसर ने अर्ज़ी दायर कर तर्क दिया कि खान द्वारा पहले दायर किए गए...

सोशल मीडिया पर यूनिवर्सिटी में कथित गड़बड़ियों के बारे में किया पोस्ट: पटना हाईकोर्ट ने स्टूडेंट का अनिश्चितकालीन निष्कासन रद्द किया
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि यूनिवर्सिटी किसी स्टूडेंट को जांच रिपोर्ट दिए बिना और प्रस्तावित सज़ा पर जवाब देने का खास मौका दिए बिना उसे अनिश्चित काल के लिए निष्कासित नहीं कर सकती। कोर्ट ने माना कि ऐसी कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।जस्टिस हरीश कुमार की सिंगल जज बेंच ने महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी, पूर्वी चंपारण के मीडिया स्टडीज़ विभाग के पहले सेमेस्टर के पोस्ट-ग्रेजुएट स्टूडेंट की याचिका पर सुनवाई की। छात्र ने यूनिवर्सिटी से अपने सस्पेंशन और उसके बाद हुए निष्कासन को...

मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला का 2 साल से ज़्यादा समय तक पता नहीं लगा पाई UP Police, हाईकोर्ट ने CBI को जांच सौंपी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 42 साल की एक महिला के लापता होने की जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को सौंप दी, क्योंकि उत्तर प्रदेश पुलिस दो साल से ज़्यादा समय तक उसका पता नहीं लगा पाई।जस्टिस संदीप जैन की बेंच ने यह निर्देश तब दिया, जब उन्होंने पाया कि पुलिसकर्मियों की तमाम कोशिशों के बावजूद, सुदामा देवी नाम की उस महिला का पता नहीं चल सका और न ही उसे बरामद किया जा सका।कोर्ट ने गौर किया कि महिला 8 सितंबर, 2024 से लापता है और पुलिस ने 9 सितंबर, 2024 को महाराजगंज ज़िले के पुरंदरपुर पुलिस स्टेशन...

अगर शोर से जुड़े नियमों का पालन किया जाए तो सहारनपुर मस्जिद में 5 बार अज़ान में दखल न दें: इलाहाबाद हाईकोर्ट का पुलिस को निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहारनपुर पुलिस और ज़िला प्रशासन को निर्देश दिया कि वे शहर की आयशा मस्जिद में याचिकाकर्ताओं के पांच बार अज़ान पढ़ने के अधिकार में दखल न दें। यह निर्देश इस शर्त पर दिया गया कि वे 'ध्वनि प्रदूषण (नियमन और नियंत्रण) नियम, 2000' और अज़ान के लिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर हाईकोर्ट के 2020 के फ़ैसले का सख्ती से पालन करेंगे।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत शहनवाज़ खान और पांच अन्य लोगों की याचिका का निपटारा करते हुए यह निर्देश जारी...

न्यूज़ वीडियो की पूरी तरह से नकल करना 'फेयर डीलिंग' नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने RSY न्यूज़ के खिलाफ कॉपीराइट मामले में ANI को राहत दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि मौजूदा घटनाओं की रिपोर्टिंग के लिए कॉपीराइट वाले न्यूज़ वीडियो की पूरी तरह से नकल करना 'फेयर डीलिंग' नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने RSY न्यूज़ के खिलाफ कॉपीराइट उल्लंघन के मामले में न्यूज़ एजेंसी एशियन न्यूज़ इंटरनेशनल (ANI) के पक्ष में फैसला सुनाया।जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने ANI मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में समरी जजमेंट (संक्षिप्त फैसला) सुनाया। यह मामला RSY न्यूज़ द्वारा चार YouTube चैनलों पर न्यूज़ एजेंसी के वीडियो कंटेंट की बिना इजाज़त नकल करने से जुड़ा...

'अगर नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं तो SIR का क्या मकसद?' ECI से बॉम्बे हाईकोर्ट का सवाल
बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने सोमवार (5 अक्टूबर) को उस तरीके पर सवाल उठाए, जिससे चुनाव अधिकारी चल रहे 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) के तहत नागरिकों के नाम हटा रहे हैं।भारत के चुनाव आयोग (ECI) को सुप्रीम कोर्ट की उन बातों की याद दिलाते हुए कि आयोग की यह ज़िम्मेदारी है कि वह पक्का करे कि सभी भारतीय नागरिक फाइनल वोटर लिस्ट में शामिल हों, जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित जामसांडेकर की डिवीजन बेंच ने ECI से कहा:"फैसला पढ़िए, उसमें कहा गया कि ECI की यह ज़िम्मेदारी है कि वह पक्का करे कि सभी...

जब शादी का रिश्ता काफ़ी हद तक टूट चुका हो तो उसे सिर्फ़ कानूनी तौर पर बचाए रखने से शादी की पवित्रता बनी नहीं रहती: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने कहा कि जब पति-पत्नी के बीच वैवाहिक रिश्ता काफ़ी हद तक टूट चुका हो तो शादी को सिर्फ़ कानूनी रूप से बचाए रखना बेमतलब है और इससे शादी की पवित्रता भी बनी नहीं रहती। [2026 LiveLaw (Ori) 115]एक जोड़े को तलाक देने के फैमिली कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए चीफ जस्टिस हरीश टंडन और जस्टिस चित्तरंजन डैश की डिवीजन बेंच ने टिप्पणी की,“निस्संदेह शादी की एक पवित्रता होती है, जिसे कोर्ट को आम तौर पर बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन जब रिश्ते की मुख्य नींव ही काफ़ी हद तक टूट चुकी हो, तो...
