हाईकोर्ट
ट्रायल शुरू होने के बाद कोर्ट की अनुमति के बिना पुलिस आगे की जांच नहीं कर सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि ट्रायल शुरू होने के बाद कोई भी पुलिस अधिकारी, चाहे उसका पद कितना भी ऊंचा क्यों न हो, अदालत की अनुमति के बिना किसी आपराधिक मामले में आगे की जांच (Further Investigation) का आदेश नहीं दे सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह सिद्धांत पहले धारा 173(8) CrPC के तहत स्थापित था और अब धारा 193(9) BNSS में इसे स्पष्ट रूप से शामिल कर दिया गया है।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने कानपुर नगर के जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस द्वारा लंबित हत्या के मुकदमे में आगे की जांच...
नजरबंद व्यक्ति की रिहाई संबंधी अर्जी पर बिना वजह देरी करना असंवैधानिक, इससे हिरासत अवैध हो जाती है: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने व्यक्ति के निवारक निरुद्धीकरण (प्रिवेंटिव डिटेंशन) रद्द करते हुए कहा कि यदि सरकार नजरबंद व्यक्ति की रिहाई संबंधी अर्जी पर बिना उचित कारण के देरी से निर्णय लेती है, तो उसकी आगे की हिरासत अवैध हो जाती है।जस्टिस रवि नाथ तिलहरी और जस्टिस शुभेंदु सामंत की खंडपीठ ने यह फैसला नजरबंद व्यक्ति की पत्नी द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका पर सुनाया। याचिका में आंध्र प्रदेश खतरनाक गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम, 1986 के तहत जारी निरुद्धीकरण आदेश को चुनौती दी...
गिरफ्तार वकीलों को अदालत में पेश करने से पुलिस को नहीं रोक सकते वकील: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी वकील की गिरफ्तारी में पुलिस की ज्यादती का आरोप हो तो अन्य वकील उसके खिलाफ आपत्ति जता सकते हैं और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक तरीके से विरोध भी कर सकते हैं। लेकिन वे पुलिस को गिरफ्तार वकील को अदालत में पेश करने से नहीं रोक सकते।जस्टिस भरत चक्रवर्ती ने यह टिप्पणी 10 वकीलों की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमा रद्द करने की मांग की। उन पर आरोप था कि उन्होंने मादक पदार्थ मामले में गिरफ्तार दो वकीलों को अदालत में पेश करने से...
'महंत मंदिर की ज़मीन को अपने निजी नाम पर घोषित करने की मांग नहीं कर सकते': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जनराई तोरिया मंदिर के महंत की उस अपील को खारिज करने वाला ट्रायल कोर्ट का आदेश बरकरार रखा, जिसमें उन्होंने मंदिर की ज़मीन पर मालिकाना हक अपने निजी नाम पर घोषित करने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि महंत मंदिर की ज़मीन को अपने निजी नाम पर घोषित करने की मांग नहीं कर सकते। [2026 LiveLaw (MP) 316]यह कहते हुए कि ट्रायल कोर्ट ने महंत के मुकदमे को सही ढंग से खारिज किया, जस्टिस विवेक जैन की बेंच ने कहा:"इस मामले में महंत के निजी नाम पर संपत्ति के मालिकाना हक की घोषणा की मांग की गई,...
RTI Act का गलत इस्तेमाल और कोर्ट कार्यवाही में बाधा डालने का मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाया ₹6.7 लाख का जुर्माना
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में खुद अपना केस लड़ने वाले व्यक्ति (पार्टी-इन-पर्सन) पर ₹6.70 लाख का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने पाया कि उसने RTI Act, 2005 का गलत इस्तेमाल किया; उसने कोर्ट के अंदरूनी कामकाज के बारे में बार-बार अस्पष्ट RTI एप्लीकेशन दाखिल कीं और न्यायिक कार्यवाही में बाधा भी डाली।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की बेंच ने स्टेट इंफॉर्मेशन कमीशन (SIC) के आदेश को चुनौती देने वाली रिट याचिका खारिज की और याचिकाकर्ता को 4 हफ़्ते के अंदर पूरी रकम हाईकोर्ट लीगल सर्विस कमेटी के पास जमा करने का...
Lucknow Fire Tragedy | हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से मांगा विस्तृत जवाब, राज्य ने कहा- फायर सेफ्टी SOP 'लगभग तैयार'
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस साल जून में लखनऊ कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग की घटना, जिसमें 15 लोगों की जान चली गई, उससे जुड़ी जनहित याचिका (PIL) पर यूपी सरकार से विस्तृत जवाब मांगा। राज्य ने कोर्ट को बताया कि फायर सेफ्टी पर प्रस्तावित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) "लगभग तैयार" है।राज्य की बात को रिकॉर्ड करते हुए जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए 1 हफ़्ते का समय दिया।हालांकि, बेंच ने साफ़ कर दिया कि हलफनामे में रिट याचिका में उठाए गए सभी मुद्दों और...
बीफ़ नहीं मिला, न ही वध के लिए ले जाने का कोई सबूत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैर-कानूनी तरीके से गाड़ी ज़ब्त करने पर दिया ₹4.75 लाख मुआवज़ा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को उत्तर प्रदेश गो-वध निवारण अधिनियम, 1955 के तहत गैर-कानूनी तरीके से ज़ब्त की गई गाड़ी का ज़ब्ती आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने पाया कि अधिकारियों ने पूरी तरह से इस धारणा के आधार पर कार्रवाई की कि मवेशियों को वध के लिए उत्तर प्रदेश से बाहर ले जाया जा रहा था।जस्टिस संदीप जैन की बेंच ने पाया कि गाड़ी से न तो कोई बीफ़ और न ही वध किए गए मवेशियों के अवशेष मिले थे, और ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे यह पता चले कि जानवरों को बिहार या किसी बूचड़खाने ले जाया जा रहा है।कोर्ट ने...
सिर्फ़ दोषी ठहराए जाने के आधार पर पुलिस कॉन्स्टेबल को नौकरी से नहीं निकाला जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 'यूपी पुलिस ऑफिसर्स ऑफ़ द सबऑर्डिनेट रैंक्स (पनिशमेंट एंड अपील) रूल्स, 1991' के नियम 8(2)(a) के तहत किसी पुलिस अधिकारी को सिर्फ़ इसलिए नौकरी से नहीं निकाला जा सकता कि उसे किसी आपराधिक आरोप में दोषी ठहराया गया, जब तक कि अनुशासनात्मक अधिकारी ने पहले उस आचरण पर विचार न किया हो जिसके कारण दोषसिद्धि हुई।कोर्ट ने कहा कि बर्खास्तगी की सज़ा देने का अधिकार पाने के लिए ऐसा विचार करना एक ज़रूरी शर्त है।1991 के नियमों का नियम 8(2) उचित जांच और अनुशासनात्मक कार्यवाही के बिना पुलिस...
PC Act | आरोप तय करने के चरण में अपराध साबित होना ज़रूरत नहीं, सिर्फ़ मज़बूत शक काफ़ी: हाईकोर्ट का पूर्व GST अधिकारी को राहत देने से इनकार
भ्रष्टाचार के मामले में पूर्व GST अधिकारी को राहत देने से इनकार करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि आरोप तय करने के चरण में कोर्ट का ध्यान केवल इस बात पर होता है कि क्या आरोपी के खिलाफ़ अपराध करने का "मज़बूत शक" है; इस चरण में अपराध साबित होने की अंतिम कसौटी लागू नहीं होती।जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की बेंच ने कहा,"...आरोपी/रिविज़न याचिकाकर्ता को आरोपमुक्त करने के सवाल पर विचार करते समय कोर्ट जांच के दौरान इकट्ठा की गई सामग्री की विस्तृत छानबीन नहीं करता है। अभियोजन पक्ष द्वारा...
PC Act | 2018 के संशोधन से पहले अगर पूर्व सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया तो पहले से मंज़ूरी लेने की ज़रूरत नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' (Prevention of Corruption Act) की धारा 19 में 2018 का संशोधन, जिसके तहत पूर्व सरकारी कर्मचारियों पर मुकदमा चलाने के लिए पहले से मंज़ूरी लेने की ज़रूरत को बढ़ाया गया, भविष्य के मामलों पर लागू होता है। यह उन मामलों को फिर से नहीं खोलता, जिनमें 26 जुलाई, 2018 से पहले ही मामला दर्ज (संज्ञान) किया जा चुका है।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की बेंच ने कहा कि यह संशोधन इस हद तक 'पिछली तारीख से लागू' (Retrospective) होता है कि इसका फायदा तब...
जज बनकर हासिल की जानकारी: हाईकोर्ट आरोपी की अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज की, पुलिस की गिरफ्तारी न कर पाने पर सवाल उठाए
दिल्ली हाईकोर्ट ने ऐसे व्यक्ति की अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज की, जिस पर सिविल सर्वेंट और पटना हाई कोर्ट का जज बनकर कई वरिष्ठ अधिकारियों से संवेदनशील और गोपनीय जानकारी हासिल करने का आरोप है।जस्टिस गिरीश कथपालिया ने इस बात पर हैरानी जताई कि सुप्रीम कोर्ट तक से ज़मानत याचिकाएं खारिज होने के बावजूद पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर पाई।कोर्ट ने कहा कि आरोपी मनोज कुमार झा के खिलाफ लगे आरोपों, उसके आदतन अपराधी होने और सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद परिस्थितियों में कोई बदलाव न होने के कारण वह अग्रिम...
नगर निकाय किराए की बकाया रकम को ज़मीन के लगान की तरह वसूल नहीं कर सकते, वे सिविल केस कर सकते हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि नगर पालिका परिषद को अपने किराएदार से मिलने वाला बकाया किराया ज़मीन के लगान के बकाये की तरह वसूल नहीं किया जा सकता, क्योंकि ऐसा किराया एक कॉन्ट्रैक्ट के तहत देय राशि है, न कि कोई टैक्स।उत्तर प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1916 की धारा 173-A नगरपालिका को कलेक्टर से वसूली के लिए आवेदन करने की अनुमति देती है, जैसे कि यह ज़मीन के लगान का बकाया हो, किसी ऐसी राशि के लिए जो बोर्ड को टैक्स के तौर पर देनी हो (सिवाय उस टैक्स के जो तुरंत मांग पर देय हो)। कलेक्टर इस बात से संतुष्ट होने...
UP Police Rules | कर्मचारी का जवाब मांगे बिना जांच रिपोर्ट से सहमत होने से अनुशासनात्मक कार्यवाही अमान्य नहीं होती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अनुशासनात्मक अधिकारी का 'कारण बताओ नोटिस' (Show Cause Notice) में जांच अधिकारी के निष्कर्षों से सहमति जताना, बाद में दिए गए सजा के आदेश को अमान्य नहीं करता। कोर्ट ने माना कि ऐसी सहमति 'कारण बताओ नोटिस' जारी करने की एक पूर्व-शर्त है।कोर्ट ने देखा कि सजा के लिए जांच अधिकारी की सिफारिश का स्पष्ट रूप से 'यू.पी. पुलिस ऑफिसर्स ऑफ सबऑर्डिनेट रैंक्स (डिसिप्लिन एंड अपील) रूल्स, 1991' के नियम 14(1) के अपेंडिक्स I में प्रावधान है।कोर्ट के अनुसार, 1991 के नियमों के नियम 14(1) का...
रिटायरमेंट के बाद एकेडमिक सेशन के आखिर तक नौकरी जारी रखने का हक रिसर्च ड्यूटी पर तैनात टीचर को नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि रिटायरमेंट के बाद एकेडमिक सेशन के आखिर तक नौकरी जारी रखना एक रियायत है, न कि कोई कानूनी अधिकार। इसका दावा सिर्फ़ वही टीचर कर सकता है जो असल में रेगुलर टीचिंग (नियमित शिक्षण) में लगा हो।कोर्ट ने कहा कि एक एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर, जिन्हें रिसर्च स्टेशन का इंचार्ज बनाया गया था, वह सिर्फ़ इसलिए इस फ़ायदे का दावा नहीं कर सकते कि वे एक मुख्य टीचिंग पोस्ट पर बने रहे और उसके बदले सैलरी लेते रहे।जस्टिस मंजू रानी चौहान ने कहा,"कानून बनाने वालों की मंशा, लागू...
हाईकोर्ट का आदेश- लखनऊ में वकीलों के अवैध रूप से बने चैंबरों को गिराने से पहले जारी करें नए नोटिस
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 72 कथित अतिक्रमणकारियों (जिनमें से ज़्यादातर वकील हैं) को एक आखिरी मौका दिया। उन्हें लखनऊ ज़िला कोर्ट कॉम्प्लेक्स के पास सार्वजनिक रास्ते या सार्वजनिक उपयोग की ज़मीन पर बने चैंबरों को खाली करने या उन पर अपना वैध दावा साबित करने का निर्देश दिया गया। ऐसा न करने पर लखनऊ नगर निगम (LMC) को उन्हें गिराने का आदेश दिया गया।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राजीव भारती की बेंच ने LMC को निर्देश दिया कि वह सभी 72 कथित अतिक्रमणकारियों को एक हफ़्ते के भीतर नए नोटिस जारी करे।अगर वे नोटिस...
2013 रेप केस में सीनियर जर्नालिस्ट तरुण तेजपाल को 10 साल की सजा, बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला
बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने गुरुवार (6 अगस्त) को पत्रकार तरुण तेजपाल को रेप केस में 10 साल की कठोर कैद की सज़ा सुनाई। यह मामला नवंबर 2013 में उनकी एक जूनियर सहयोगी ने दर्ज कराया था।यह सज़ा IPC की धारा 376(2)(f) (भरोसे या अधिकार वाले रिश्ते में किसी व्यक्ति द्वारा किया गया गंभीर रेप) और 376(2)(k) (पीड़िता पर नियंत्रण या दबदबे की स्थिति में किसी व्यक्ति द्वारा किया गया गंभीर रेप) के तहत सुनाई गई।इन अपराधों के लिए कम से कम 10 साल की सज़ा का प्रावधान है।जस्टिस डॉ. नीला गोखले और जस्टिस अमित...
'बिना सोच-समझ और Grounds of Detention दर्ज किए Preventive Detention Order पारित करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण', इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र से की सुधार की अपील
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने Preventive Detention आदेश पारित करने में अधिकारियों द्वारा बिना उचित विचार (Application of Mind) और Grounds of Detention दर्ज किए कार्रवाई करने की प्रवृत्ति को "बेहद दुर्भाग्यपूर्ण (Deplorable)" बताया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति आपराधिक न्याय प्रणाली के लिए गंभीर चिंता का विषय है और केंद्र सरकार को इसे जल्द से जल्द दूर करना चाहिए।जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने PIT NDPS Act, 1988 के तहत एक व्यक्ति की नजरबंदी (Preventive Detention) रद्द करते हुए...
सहकर्मी की आलोचना या भर्ती प्रक्रिया पर चर्चा करना अपने आप में कदाचार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी सेवा नियम में कर्मचारियों को सहकर्मियों के प्रति शिष्टाचार बनाए रखने की अपेक्षा का यह अर्थ नहीं लगाया जा सकता कि हर असहमति, निष्पक्ष आलोचना या संस्थान के मामलों पर चर्चा को कदाचार (Misconduct) मान लिया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई फैकल्टी सदस्य भर्ती प्रक्रिया को लेकर चिंता व्यक्त करने के लिए बैठक बुलाता है, तो केवल इसी आधार पर उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक यह साबित न हो कि उसका उद्देश्य किसी सहकर्मी को अपमानित, प्रताड़ित या उसकी छवि खराब करना...
फार्मा फ्रीबीज़ मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने 30 डॉक्टरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर लगाई रोक
दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित फार्मा फ्रीबीज़ (उपहार) मामले में 30 स्वास्थ्य विशेषज्ञों, जिनमें कई त्वचा रोग विशेषज्ञ भी शामिल हैं के खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाई।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि याचिकाकर्ता डॉक्टरों ने अंतरिम राहत दिए जाने का प्रथमदृष्टया मामला स्थापित किया। यह आदेश उन डॉक्टरों की याचिका पर दिया गया, जिन्होंने 23 दिसंबर 2024 को फार्मा मार्केटिंग प्रथाओं से संबंधित शीर्ष समिति के आदेश को चुनौती दी थी।इस आदेश में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) को भारतीय...
अदालत की अवमानना का नाम सुनकर अफसरों के कांपने वाले दिन अब गए: मद्रास हाईकोर्ट, दो IAS अधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी
मद्रास हाईकोर्ट ने अदालत के आदेशों का पालन न करने पर पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग के पूर्व निदेशक एस.पी. अमृत और वर्तमान निदेशक एम. कृष्णा उन्नी (दोनों IAS अधिकारी) को अवमानना नोटिस जारी किया।जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन ने सुनवाई के दौरान कहा कि एक समय था, जब 'अदालत की अवमानना' शब्द सुनते ही अधिकारियों में भय पैदा हो जाता था, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है और अदालत के आदेशों की अवहेलना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।अदालत ने कहा,"वे दिन अब बीत चुके हैं, जब 'अवमानना' शब्द सुनते ही लोगों की रूह कांप...




















