हाईकोर्ट

सोमनाथ मंदिर से जुड़े पुरातात्विक सर्वेक्षण दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग वाली PIL खारिज, गुजरात हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता पर ₹2 लाख का जुर्माना लगाया
सोमनाथ मंदिर से जुड़े पुरातात्विक सर्वेक्षण दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग वाली PIL खारिज, गुजरात हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता पर ₹2 लाख का जुर्माना लगाया

गुजरात हाईकोर्ट ने सोमनाथ मंदिर स्थल से संबंधित पुरातात्विक सर्वेक्षण रिपोर्ट, ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR) सर्वे, नक्शे, संरचनात्मक विश्लेषण, तस्वीरें, वीडियो और अन्य दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) खारिज कर दी। साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर ₹2 लाख का जुर्माना भी लगाया।चीफ़ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डी.एन. रे की खंडपीठ ने कहा कि याचिका में किए गए अधिकांश दावे केवल समाचार रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर आधारित थे। याचिकाकर्ता ने न तो किसी प्रामाणिक दस्तावेज या शोध...

दशकों तक नियमित काम लेने के बाद अस्थायी कर्मचारी को मनमाने ढंग से नहीं हटा सकती सरकार: उड़ीसा हाईकोर्ट
दशकों तक नियमित काम लेने के बाद अस्थायी कर्मचारी को मनमाने ढंग से नहीं हटा सकती सरकार: उड़ीसा हाईकोर्ट

उड़ीसा हाईकोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार किसी व्यक्ति से वर्षों तक नियमित प्रकृति का काम लेने के बाद केवल यह कहकर उसे अचानक सेवा से नहीं हटा सकती कि वह गैर-स्वीकृत (Non-Sanctioned) अस्थायी पद पर संविदा के आधार पर कार्यरत था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक या वित्तीय बाधाओं का हवाला देकर कर्मचारियों को लंबे समय तक रोजगार की असुरक्षा में नहीं रखा जा सकता।जस्टिस दीक्षित कृष्ण श्रीपाद और जस्टिस चित्तरंजन दास की खंडपीठ ने 14 वर्षों तक लगातार सेवा देने के बाद बर्खास्त की गई एक महिला फार्मासिस्ट को...

केवल यह कहना कि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में कोई छेड़छाड़ नहीं हुई, साक्ष्य अधिनियम की धारा 65B का पालन नहीं माना जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
केवल यह कहना कि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में कोई छेड़छाड़ नहीं हुई, साक्ष्य अधिनियम की धारा 65B का पालन नहीं माना जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल यह दावा कर देना कि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में कोई एडिटिंग या छेड़छाड़ नहीं की गई है, भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65B के तहत निर्धारित अनिवार्य कानूनी शर्तों का विकल्प नहीं हो सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तभी साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जा सकता है, जब उसके साथ धारा 65B के अनुरूप विधिवत प्रमाणपत्र संलग्न हो।जस्टिस अमित सेठ की एकलपीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा एक सीडी को प्रदर्श...

सुबह 6 बजे खुला इलाहाबाद हाईकोर्ट, परीक्षा से तीन घंटे पहले अभ्यर्थी को मुख्य परीक्षा में बैठने की मिली राहत
सुबह 6 बजे खुला इलाहाबाद हाईकोर्ट, परीक्षा से तीन घंटे पहले अभ्यर्थी को मुख्य परीक्षा में बैठने की मिली राहत

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने रविवार सुबह 6 बजे विशेष सुनवाई कर सहायक अभियोजन अधिकारी (APO) 2025 मुख्य परीक्षा के एक अभ्यर्थी को बड़ी राहत दी।अदालत ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए अभ्यर्थी शालिनी पांडे को अस्थायी रूप से मुख्य परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी। परीक्षा उसी दिन सुबह 9 बजे शुरू होनी थी।मामले की अत्यधिक तात्कालिकता को देखते हुए मुख्य जस्टिस के 27 जून 2026 के प्रशासनिक आदेश के बाद जस्टिस अमिताभ कुमार राय ने अपने आवास पर विशेष बैठक कर सुनवाई की।शालिनी पांडे ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा...

मुश्किल समय में माता-पिता से मदद मिलने पर भी पति अपनी पत्नी के भरण-पोषण की कानूनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
मुश्किल समय में माता-पिता से मदद मिलने पर भी पति अपनी पत्नी के भरण-पोषण की कानूनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी को मुश्किल समय में उसके माता-पिता से आर्थिक मदद मिलने के आधार पर CrPC की धारा 125 के तहत पति से भरण-पोषण पाने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने कहा कि पत्नी के माता-पिता की आय को पत्नी की आय नहीं माना जा सकता। साथ ही माता-पिता की मदद पति की पत्नी के भरण-पोषण की कानूनी ज़िम्मेदारी का विकल्प नहीं हो सकती।बेंच ने यह टिप्पणी बुलंदशहर की फैमिली कोर्ट के दिसंबर 2023 के आदेश के खिलाफ पत्नी और उसके 2 नाबालिग बच्चों द्वारा दायर क्रिमिनल...

कल्याणकारी योजना के तहत पत्नी को घर मिलने से वह CrPC की धारा 125 के तहत गुज़ारा-भत्ता मांगने के अधिकार से वंचित नहीं होती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
कल्याणकारी योजना के तहत पत्नी को घर मिलने से वह CrPC की धारा 125 के तहत गुज़ारा-भत्ता मांगने के अधिकार से वंचित नहीं होती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी कल्याणकारी योजना के तहत महिला को घर मिलना उसकी आजीविका का साधन नहीं माना जा सकता, जिससे वह अपने पति से CrPC की धारा 125 के तहत गुज़ारा-भत्ता मांगने के अधिकार से वंचित हो जाए।जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने यह भी कहा कि पति केवल यह कहकर अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने की कानूनी ज़िम्मेदारी से नहीं बच सकता कि वह बेरोज़गार है या बहुत कम कमाता है।इन बातों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने पति द्वारा दायर एक क्रिमिनल रिविज़न याचिका खारिज की। इस याचिका में फैमिली...

सह-आरोपी के खिलाफ सप्लीमेंट्री शिकायत आने से NDPS ट्रायल नहीं रोका जा सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
सह-आरोपी के खिलाफ सप्लीमेंट्री शिकायत आने से NDPS ट्रायल नहीं रोका जा सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा है कि सिर्फ इसलिए कि किसी सह-आरोपी के खिलाफ बाद में सप्लीमेंट्री शिकायत दाखिल हुई है, ट्रायल कोर्ट NDPS मामले की सुनवाई नहीं रोक सकता।कोर्ट ने कहा कि अगर किसी आरोपी के खिलाफ सबूत और सुनवाई पूरी हो चुकी है, तो ट्रायल कोर्ट को यह तय करना होगा कि नए आरोपी का ट्रायल साथ चलेगा या अलग। अगर अलग ट्रायल जरूरी है, तो मुख्य मामले का फैसला किया जा सकता है।यह टिप्पणी जस्टिस राजनेश ओसवाल की पीठ ने करीब पांच साल से जेल में बंद एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान...

समान मामले में शामिल दो सह-आरोपियों में से एक को ज़मानत देने और दूसरे को ज़मानत न देने का मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जज से मांगा स्पष्टीकरण
समान मामले में शामिल दो सह-आरोपियों में से एक को ज़मानत देने और दूसरे को ज़मानत न देने का मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जज से मांगा स्पष्टीकरण

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाज़ियाबाद के एडिशनल सेशन जज से स्पष्टीकरण मांगा। यह मामला एक ही आपराधिक केस में शामिल दो सह-आरोपियों की ज़मानत याचिकाओं पर अलग-अलग तरह से कार्रवाई करने से जुड़ा है।जस्टिस विवेक कुमार सिंह की बेंच ने स्पष्टीकरण मांगा और ज़ोर दिया कि न्यायिक एकरूपता और कानूनी सिद्धांतों का समान रूप से पालन संस्थागत महत्व के मामले हैं।बता दें, न्यायिक अधिकारी ने एक आरोपी को ज़मानत देने से इनकार किया, जबकि उसे लगी चोटें (जो कथित तौर पर उसी ने पहुंचाई थीं) मामूली प्रकृति की थीं। लेकिन बाद में...

तुम जैसे हजार पति रख सकती हूं कहना गंभीर और अचानक उकसावा, MP हाईकोर्ट ने हत्या नहीं बल्कि गैर-इरादतन मानव वध माना
'तुम जैसे हजार पति रख सकती हूं' कहना गंभीर और अचानक उकसावा, MP हाईकोर्ट ने हत्या नहीं बल्कि गैर-इरादतन मानव वध माना

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पत्नी की हत्या के मामले में पति की सजा में राहत देते हुए कहा कि पत्नी का यह कहना कि "वह उसके जैसे हजार पति रख सकती है" पति के लिए गंभीर और अचानक उकसावे (grave and sudden provocation) का कारण बन सकता है। कोर्ट ने माना कि आरोपी को अपने कृत्य से मौत होने की जानकारी थी, लेकिन उसकी पत्नी की हत्या करने का इरादा नहीं था।जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने आरोपी की दोषसिद्धि को IPC की धारा 304 भाग-I से बदलकर धारा 304 भाग-II के तहत कर दिया और उसे सात...

बिना सुनवाई ताजिया जुलूस और मेले की अनुमति रद्द करना अनुचित: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने MIC का प्रस्ताव रद्द किया
बिना सुनवाई ताजिया जुलूस और मेले की अनुमति रद्द करना अनुचित: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने MIC का प्रस्ताव रद्द किया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर नगर निगम की मेयर-इन-काउंसिल (MIC) द्वारा मुहर्रम के अवसर पर पारंपरिक ताजिया जुलूस और धोबी घाट पर तीन दिवसीय मेले की अनुमति रद्द करने संबंधी प्रस्ताव को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सक्षम अधिकारी द्वारा दी गई अनुमति को याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर दिए बिना रद्द करना उचित प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।जस्टिस पवन कुमार द्विवेदी की एकलपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता समिति ने 3 जून 2026 को अनुमति के लिए आवेदन किया था, लेकिन नगर निगम ने 25 जून को 26 से 28 जून तक...

UP Panchayat Elections: 5 साल से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता पंचायत का कार्यकाल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा चुनाव का टाइमलाइन
UP Panchayat Elections: '5 साल से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता पंचायत का कार्यकाल', इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा चुनाव का टाइमलाइन

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव टाले जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि पंचायतों का कार्यकाल संविधान के तहत निर्धारित पांच वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि जिन प्रावधानों के आधार पर राज्य सरकार ने ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने और चुनाव स्थगित करने के आदेश जारी किए, उन्हें पहले ही असंवैधानिक घोषित किया जा चुका है। इसलिए ये आदेश non est (कानून की नजर में अस्तित्वहीन) प्रतीत होते हैं।जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की पीठ अरविंद...

देरी से दायर POSH शिकायतें केवल विलंब के आधार पर खारिज नहीं की जा सकतीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
देरी से दायर POSH शिकायतें केवल विलंब के आधार पर खारिज नहीं की जा सकतीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संरक्षण (POSH) कानून के तहत दायर शिकायतों को केवल देरी के आधार पर प्रारंभिक स्तर पर खारिज नहीं किया जा सकता। शिकायत में हुई देरी के कारणों पर विचार करना आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का दायित्व है।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने यह टिप्पणी करते हुए प्रयागराज स्थित हरिशचंद्र अनुसंधान संस्थान के खगोल भौतिकी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर के खिलाफ दायर यौन उत्पीड़न की शिकायतों की दोबारा जांच का निर्देश दिया।मामला उन छात्राओं की शिकायतों...

24 कोसी परिक्रमा मार्ग परियोजना पर रोक से इनकार, जनहित के आगे व्यक्तिगत हित को झुकना होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
'24 कोसी परिक्रमा मार्ग' परियोजना पर रोक से इनकार, जनहित के आगे व्यक्तिगत हित को झुकना होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी 24 कोसी परिक्रमा मार्ग परियोजना पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि यह सरकार की नीति के अनुरूप एक महत्वपूर्ण जनहित परियोजना है और ऐसे मामलों में व्यक्तिगत हित को व्यापक जनहित के आगे झुकना होगा।जस्टिस जे. जे. मुनीर और जस्टिस अरुण कुमार की खंडपीठ ने उस याचिका को खारिज किया, जिसमें संभल में प्रस्तावित परिक्रमा मार्ग के निर्माण को रोकने की मांग की गई। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनकी भूमि पर कोल्ड स्टोरेज बनाने की योजना है और परियोजना के...

पूर्व सैनिक की लाइसेंसी राइफल लौटाने का आदेश, जब्ती जारी रहने से आजीविका प्रभावित होगी: राजस्थान हाईकोर्ट
पूर्व सैनिक की लाइसेंसी राइफल लौटाने का आदेश, जब्ती जारी रहने से आजीविका प्रभावित होगी: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने पूर्व सैनिक की लाइसेंसी 12 बोर राइफल उसे वापस सौंपने का आदेश देते हुए कहा कि वर्तमान में वह सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत है और यह राइफल उसके रोजगार का महत्वपूर्ण साधन है। ऐसे में राइफल को लंबे समय तक जब्त रखना उसकी आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।जस्टिस संजीत पुरोहित ने यह आदेश पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ता सेना से सेवानिवृत्त हैं और उनके नाम पर विधिवत लाइसेंसी राइफल है।याचिकाकर्ता के खिलाफ रंगदारी मांगने के आरोप में FIR दर्ज होने के बाद...

किशोर न्याय कानून का उद्देश्य सुधार, सजा नहीं; केवल अपराध की गंभीरता के आधार पर जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता: पटना हाईकोर्ट
किशोर न्याय कानून का उद्देश्य सुधार, सजा नहीं; केवल अपराध की गंभीरता के आधार पर जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने कहा कि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 (JJ Act) का उद्देश्य कानून से संघर्षरत बच्चों को दंडित करना नहीं, बल्कि उनका सुधार और पुनर्वास करना है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आरोपित अपराध की गंभीरता या किशोर की आयु जमानत देने से इनकार करने का आधार नहीं हो सकती।जस्टिस जितेंद्र कुमार ने हत्या के मामले में आरोपी किशोर की जमानत याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ दायर अपील पर यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की। हालांकि मामले के तथ्यों को देखते हुए अदालत ने ट्रायल कोर्ट का...

सरकार नागरिकों की जमीन पर अवैध कब्जा कर मालिकाना हक का दावा नहीं कर सकती: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट, मुआवजा देने का आदेश
सरकार नागरिकों की जमीन पर अवैध कब्जा कर मालिकाना हक का दावा नहीं कर सकती: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट, मुआवजा देने का आदेश

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि कल्याणकारी राज्य होने के नाते सरकार नागरिकों की निजी जमीन पर प्रतिकूल कब्जे का सिद्धांत लागू कर मालिकाना हक का दावा नहीं कर सकती। अदालत ने हरियाणा सरकार को बिना भूमि अधिग्रहण के सिंचाई नहर के लिए इस्तेमाल की गई निजी जमीन का उचित मुआवजा तीन महीने के भीतर देने का निर्देश दिया।जस्टिस रमेश कुमारी ने कहा कि राज्य का दायित्व अपने नागरिकों के जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति की रक्षा करना है। सरकार को नागरिकों की जमीन पर अवैध कब्जा कर उसे अपनी...

रजिस्ट्रार के वैधानिक आदेश पर हुई सेवा समाप्ति के खिलाफ रिट याचिका सुनवाई योग्य: उत्तराखंड हाईकोर्ट
रजिस्ट्रार के वैधानिक आदेश पर हुई सेवा समाप्ति के खिलाफ रिट याचिका सुनवाई योग्य: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि यदि किसी सहकारी समिति के कर्मचारी की सेवा समाप्ति सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार या वैधानिक अधिकार का प्रयोग करने वाले अधिकारी के निर्देश पर की गई हो, तो उसके खिलाफ दायर रिट याचिका सुनवाई योग्य होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में यह नहीं कहा जा सकता कि याचिका केवल सहकारी समिति की कार्रवाई के विरुद्ध है।चीफ जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ विशेष अपील पर सुनवाई कर रही थी। यह अपील उस आदेश के खिलाफ दायर की गई,...

स्थगन आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाएं अदालत का समय बर्बाद करती हैं: दिल्ली हाईकोर्ट, CAT के आदेश में दखल से इनकार
स्थगन आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाएं अदालत का समय बर्बाद करती हैं: दिल्ली हाईकोर्ट, CAT के आदेश में दखल से इनकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के केवल स्थगन आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि इस तरह की याचिकाएं अदालत के लंबित मामलों का बोझ अनावश्यक रूप से बढ़ाती हैं।जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान की याचिका खारिज करते हुए कहा कि जब अधिकरण ने मामले को 30 जून 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया, यह भी स्पष्ट कर दिया कि उस दिन कोई स्थगन नहीं दिया जाएगा और अंतरिम राहत केवल...