हाईकोर्ट
यौन अपराधों में जेंडर से जुड़ी रूढ़िवादी सोच से निपटना: सुप्रीम कोर्ट की 2026 की गाइडलाइंस 2023 की हैंडबुक से कैसे अलग
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी (NJA) की एक्सपर्ट कमेटी ने हाल ही में जजों के लिए जेंडर-सेंसिटिव (लिंग-संवेदनशील), सर्वाइवर-सेंट्रिक (पीड़ित-केंद्रित) और सहानुभूतिपूर्ण कोर्ट प्रैक्टिस अपनाने के लिए कुछ गाइडलाइंस जारी कीं।ये गाइडलाइंस सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अनिरुद्ध बोस की अध्यक्षता वाली कमेटी ने तैयार की हैं। यह कदम तब उठाया गया, जब चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि टॉप कोर्ट की 2023 की 'जेंडर स्टीरियोटाइप्स से निपटने पर...
धोखाधड़ी से घर खरीदा, 13 साल तक किया परेशान: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिल्डर पर लगाया ₹2.5 लाख का जुर्माना
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बिल्डर पर घर खरीदने वाले को 13 वर्षों तक तुच्छ मुकदमेबाजी के कई दौर से गुजरने के लिए 2.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।जस्टिस प्रशांत कुमार ने कहा,"घर-खरीदारों के सामने आने वाली कठिनाइयों और कमजोरियों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने रियल एस्टेट क्षेत्र में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने और आवंटियों की शिकायतों के निवारण के लिए एक त्वरित और प्रभावी तंत्र प्रदान करने के उद्देश्य से रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 लागू किया था। हालांकि, वर्तमान...
राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय न्यायाधिकरण में खाली पद भरें, वरना DoP के प्रधान सचिव को पेश होना होगा: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कार्मिक विभाग (DoP) के प्रधान सचिव को निर्देश दिया कि अगर अगली सुनवाई की तारीख से पहले राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय न्यायाधिकरण, जयपुर में खाली पदों पर नियुक्तियां नहीं की जाती हैं तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होना होगा।जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने एडवोकेट जनरल का यह बयान दर्ज करने के बाद यह निर्देश जारी किया कि न्यायाधिकरण के दो सदस्यों की नियुक्ति एक सप्ताह के भीतर कर दी जाएगी।एक प्रैक्टिसिंग वकील द्वारा दायर रिट याचिका में बताया गया कि...
मीटर से छेड़छाड़ के सबूत के बिना सिर्फ़ बिजली का बिल न भरना 'बिजली की चोरी' नहीं: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि बिजली का बिल न भरना, इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा 135 के तहत बिजली की चोरी नहीं माना जाएगा, जब तक कि इस बात का कोई सबूत न हो कि कनेक्शन असल में काट दिया गया या उपभोक्ता ने मीटर से छेड़छाड़ की थी।जस्टिस जितेंद्र कुमार की सिंगल जज बेंच ने कहा कि भले ही उपभोक्ता बकाया बिजली बिल चुकाने के लिए ज़िम्मेदार हो सकता है, लेकिन बेईमानी से बिजली इस्तेमाल करने के सबूत के बिना उस पर आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।याचिकाकर्ता ने इलेक्ट्रिसिटी एक्ट की धारा 135 के तहत दर्ज FIR रद्द...
RTI आवेदक को जानकारी की भाषा नहीं आती तो रिकॉर्ड देखने के लिए 'तीसरे पक्ष' को साथ नहीं ले जा सकता: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि अगर कोई RTI आवेदक किसी जानकारी को मांग रहा है और उसे उस जानकारी की भाषा या उसमें दी गई बातों की समझ नहीं है तो रिकॉर्ड की जांच के दौरान आवेदक के साथ किसी दूसरे व्यक्ति को ले जाने की अनुमति देना, पहली नज़र में किसी तीसरे पक्ष को जानकारी देने जैसा होगा।ऐसा करते हुए कोर्ट ने RTI आवेदक को उन रिकॉर्ड्स को देखने की अनुमति दी, जिनकी उसने मांग की थी, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि जांच के दौरान आवेदक के साथ किसी और को जाने की अनुमति नहीं होगी।आरोप था कि...
मध्यस्थता में समझौते पर हस्ताक्षर के बाद महज मन बदलने पर सहमति वापस नहीं ले सकता पक्ष: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि अदालत से जुड़ी मध्यस्थता प्रक्रिया के दौरान यदि पक्षकारों के बीच लिखित समझौता हो जाता है और दोनों उस पर हस्ताक्षर कर देते हैं तो बाद में केवल मन बदल जाने के आधार पर कोई एक पक्ष अपनी सहमति से पीछे नहीं हट सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि सहमति वापस लेने का अधिकार मध्यस्थता की प्रक्रिया चलने तक ही रहता है। समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद वह बाध्यकारी हो जाता है।जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने पति की ओर से दायर अपील पर...
कर्मचारी की मौत से नियमितीकरण का अधिकार खत्म नहीं होता, कानूनी वारिसों को मिलता है लाभ: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि किसी कर्मचारी के जीवनकाल में उसके नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी, तो उसकी मृत्यु के साथ नियमितीकरण पर विचार करने का अधिकार समाप्त नहीं होता। ऐसा अधिकार उसके कानूनी वारिसों के माध्यम से जीवित रहता है और आवश्यक होने पर कर्मचारी को काल्पनिक रूप से उस तारीख से नियमित मानते हुए सेवा संबंधी लाभ उसके कानूनी वारिसों को दिए जा सकते हैं।जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला ने यह फैसला मृत कर्मचारी के बेटे की याचिका पर सुनाया। अदालत ने याचिकाकर्ता के...
राजनीतिक दल या NGO पुलिस थाने और जेल से प्रेस ब्रीफिंग नहीं कर सकते: मेघालय हाईकोर्ट
मेघालय हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस थानों और जेलों का इस्तेमाल पुलिस विभाग के अलावा किसी राजनीतिक दल, गैर-सरकारी संगठन या अन्य गैर-राज्य पक्ष द्वारा प्रेस ब्रीफिंग के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत ने पुलिस महानिदेशक को सभी पुलिस थानों के लिए इस संबंध में स्पष्ट निर्देश या स्थायी आदेश जारी करने की अपेक्षा जताई।चीफ जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस डब्ल्यू. डिएंगदोह की खंडपीठ मेघालय हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में हिन्यूट्रेप नेशनल यूथ फाउंडेशन के कुछ सदस्यों के खिलाफ...
हॉस्टल में खराब खाने को लेकर पुराने केस न्यायिक सेवा की राह में बाधा नहीं: MP हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उच्च न्यायिक सेवा के एक उम्मीदवार की उम्मीदवारी खारिज करने का आदेश रद्द करते हुए उसके मामले पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि छात्र जीवन में दर्ज हुए दो आपराधिक मामलों में नैतिक अधमता (Moral Turpitude) से जुड़े अपराध नहीं थे और दोनों मामलों में उम्मीदवार बाद में बरी हो चुका था।जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की खंडपीठ ने MP Higher Judicial Service Examination-2017 के उम्मीदवार की याचिका पर सुनवाई की। उम्मीदवार ने आवेदन के समय 2002 में दर्ज...
राजस्थान हाईकोर्ट ने मौत की सज़ा वाले सभी पेंडिंग मामलों पर फ़ैसला सुनाया: 9 मामलों में सज़ा बदली, 2 में बरी किया
एक अहम घटनाक्रम में जोधपुर स्थित राजस्थान हाई कोर्ट ने मौत की सज़ा से जुड़े सभी पेंडिंग मामलों (रेफ़रेंस केस) पर अपना फ़ैसला सुनाया।पहला मामला 3 अक्टूबर, 2025 को तय किया गया था (स्टेट बनाम अर्जुन सिंह), जबकि बाकी 10 मामलों पर फ़ैसला इसी साल सुनाया गया। आखिरी फ़ैसला 6 अगस्त को जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की डिवीज़न बेंच ने सुनाया।कुल मिलाकर डिवीज़न बेंच ने 7 अप्रैल से 6 अगस्त के बीच मौत की सज़ा से जुड़े 10 मामलों पर फ़ैसला सुनाया।इन 11 मामलों में से सिर्फ़ दो मामलों में...
एग्जाम में लॉ स्टूडेंट को मिले ज़ीरो-मार्क्स: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने BCI और लॉ कमीशन को भेजी आंसर बुक, कानूनी शिक्षा के गिरते स्तर पर जताई चिंता
लॉ कॉलेजों में कानूनी शिक्षा के गिरते स्तर पर गंभीर चिंता जताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में निर्देश दिया कि लॉ स्टूडेंट की जांची गई आंसर बुक (जिसमें उसे ज़ीरो मार्क्स मिले थे) की एडिट की हुई कॉपी और क्वेश्चन पेपर, बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI) और लॉ कमीशन ऑफ़ इंडिया को भेजा जाए।कोर्ट ने BCI से इस बात पर विचार करने को कहा कि क्या कानूनी शिक्षा के मौजूदा स्तर और लॉ संस्थानों की मंज़ूरी, एफिलिएशन और समय-समय पर होने वाली जांच के मौजूदा सिस्टम को "ग्लोबली कॉम्पिटिटिव कानूनी शिक्षा मानकों का...
ज़ीरो शुगर दावों पर उठे सवाल: कृत्रिम मिठास के स्वास्थ्य प्रभावों पर भारत-विशिष्ट अध्ययन की मांग, दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र और FSSAI से मांगा जवाब
ज़ीरो शुगर और कृत्रिम मिठास वाले खाद्य एवं पेय पदार्थों के स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की सिंगल बेंच ने यह आदेश इंडियन शुगर एंड बायोएनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।याचिका में FSSAI को निर्देश देने की मांग की...
ट्रायल शुरू होने के बाद कोर्ट की अनुमति के बिना पुलिस आगे की जांच नहीं कर सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि ट्रायल शुरू होने के बाद कोई भी पुलिस अधिकारी, चाहे उसका पद कितना भी ऊंचा क्यों न हो, अदालत की अनुमति के बिना किसी आपराधिक मामले में आगे की जांच (Further Investigation) का आदेश नहीं दे सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह सिद्धांत पहले धारा 173(8) CrPC के तहत स्थापित था और अब धारा 193(9) BNSS में इसे स्पष्ट रूप से शामिल कर दिया गया है।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने कानपुर नगर के जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस द्वारा लंबित हत्या के मुकदमे में आगे की जांच...
नजरबंद व्यक्ति की रिहाई संबंधी अर्जी पर बिना वजह देरी करना असंवैधानिक, इससे हिरासत अवैध हो जाती है: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने व्यक्ति के निवारक निरुद्धीकरण (प्रिवेंटिव डिटेंशन) रद्द करते हुए कहा कि यदि सरकार नजरबंद व्यक्ति की रिहाई संबंधी अर्जी पर बिना उचित कारण के देरी से निर्णय लेती है, तो उसकी आगे की हिरासत अवैध हो जाती है।जस्टिस रवि नाथ तिलहरी और जस्टिस शुभेंदु सामंत की खंडपीठ ने यह फैसला नजरबंद व्यक्ति की पत्नी द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका पर सुनाया। याचिका में आंध्र प्रदेश खतरनाक गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम, 1986 के तहत जारी निरुद्धीकरण आदेश को चुनौती दी...
गिरफ्तार वकीलों को अदालत में पेश करने से पुलिस को नहीं रोक सकते वकील: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी वकील की गिरफ्तारी में पुलिस की ज्यादती का आरोप हो तो अन्य वकील उसके खिलाफ आपत्ति जता सकते हैं और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक तरीके से विरोध भी कर सकते हैं। लेकिन वे पुलिस को गिरफ्तार वकील को अदालत में पेश करने से नहीं रोक सकते।जस्टिस भरत चक्रवर्ती ने यह टिप्पणी 10 वकीलों की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमा रद्द करने की मांग की। उन पर आरोप था कि उन्होंने मादक पदार्थ मामले में गिरफ्तार दो वकीलों को अदालत में पेश करने से...
'महंत मंदिर की ज़मीन को अपने निजी नाम पर घोषित करने की मांग नहीं कर सकते': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जनराई तोरिया मंदिर के महंत की उस अपील को खारिज करने वाला ट्रायल कोर्ट का आदेश बरकरार रखा, जिसमें उन्होंने मंदिर की ज़मीन पर मालिकाना हक अपने निजी नाम पर घोषित करने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि महंत मंदिर की ज़मीन को अपने निजी नाम पर घोषित करने की मांग नहीं कर सकते। [2026 LiveLaw (MP) 316]यह कहते हुए कि ट्रायल कोर्ट ने महंत के मुकदमे को सही ढंग से खारिज किया, जस्टिस विवेक जैन की बेंच ने कहा:"इस मामले में महंत के निजी नाम पर संपत्ति के मालिकाना हक की घोषणा की मांग की गई,...
RTI Act का गलत इस्तेमाल और कोर्ट कार्यवाही में बाधा डालने का मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाया ₹6.7 लाख का जुर्माना
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में खुद अपना केस लड़ने वाले व्यक्ति (पार्टी-इन-पर्सन) पर ₹6.70 लाख का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने पाया कि उसने RTI Act, 2005 का गलत इस्तेमाल किया; उसने कोर्ट के अंदरूनी कामकाज के बारे में बार-बार अस्पष्ट RTI एप्लीकेशन दाखिल कीं और न्यायिक कार्यवाही में बाधा भी डाली।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की बेंच ने स्टेट इंफॉर्मेशन कमीशन (SIC) के आदेश को चुनौती देने वाली रिट याचिका खारिज की और याचिकाकर्ता को 4 हफ़्ते के अंदर पूरी रकम हाईकोर्ट लीगल सर्विस कमेटी के पास जमा करने का...
Lucknow Fire Tragedy | हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से मांगा विस्तृत जवाब, राज्य ने कहा- फायर सेफ्टी SOP 'लगभग तैयार'
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस साल जून में लखनऊ कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग की घटना, जिसमें 15 लोगों की जान चली गई, उससे जुड़ी जनहित याचिका (PIL) पर यूपी सरकार से विस्तृत जवाब मांगा। राज्य ने कोर्ट को बताया कि फायर सेफ्टी पर प्रस्तावित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) "लगभग तैयार" है।राज्य की बात को रिकॉर्ड करते हुए जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए 1 हफ़्ते का समय दिया।हालांकि, बेंच ने साफ़ कर दिया कि हलफनामे में रिट याचिका में उठाए गए सभी मुद्दों और...
बीफ़ नहीं मिला, न ही वध के लिए ले जाने का कोई सबूत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैर-कानूनी तरीके से गाड़ी ज़ब्त करने पर दिया ₹4.75 लाख मुआवज़ा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को उत्तर प्रदेश गो-वध निवारण अधिनियम, 1955 के तहत गैर-कानूनी तरीके से ज़ब्त की गई गाड़ी का ज़ब्ती आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने पाया कि अधिकारियों ने पूरी तरह से इस धारणा के आधार पर कार्रवाई की कि मवेशियों को वध के लिए उत्तर प्रदेश से बाहर ले जाया जा रहा था।जस्टिस संदीप जैन की बेंच ने पाया कि गाड़ी से न तो कोई बीफ़ और न ही वध किए गए मवेशियों के अवशेष मिले थे, और ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे यह पता चले कि जानवरों को बिहार या किसी बूचड़खाने ले जाया जा रहा है।कोर्ट ने...
सिर्फ़ दोषी ठहराए जाने के आधार पर पुलिस कॉन्स्टेबल को नौकरी से नहीं निकाला जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 'यूपी पुलिस ऑफिसर्स ऑफ़ द सबऑर्डिनेट रैंक्स (पनिशमेंट एंड अपील) रूल्स, 1991' के नियम 8(2)(a) के तहत किसी पुलिस अधिकारी को सिर्फ़ इसलिए नौकरी से नहीं निकाला जा सकता कि उसे किसी आपराधिक आरोप में दोषी ठहराया गया, जब तक कि अनुशासनात्मक अधिकारी ने पहले उस आचरण पर विचार न किया हो जिसके कारण दोषसिद्धि हुई।कोर्ट ने कहा कि बर्खास्तगी की सज़ा देने का अधिकार पाने के लिए ऐसा विचार करना एक ज़रूरी शर्त है।1991 के नियमों का नियम 8(2) उचित जांच और अनुशासनात्मक कार्यवाही के बिना पुलिस...




















