हाईकोर्ट

CPC: कोर्ट में की गई साफ स्वीकारोक्ति को बाद में बदलने के लिए संशोधन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता- दिल्ली हाईकोर्ट
CPC: कोर्ट में की गई साफ स्वीकारोक्ति को बाद में बदलने के लिए संशोधन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता- दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी पक्ष को अपनी दलीलों (pleadings) में की गई स्पष्ट और ठोस स्वीकारोक्ति (admission) से पीछे हटने की अनुमति नहीं दी जा सकती, खासकर जब इससे विरोधी पक्ष को महत्वपूर्ण अधिकार प्राप्त हो चुके हों। अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए एक सिंगल जज के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें प्रतिवादी को चार वर्ष से अधिक समय बाद अपना लिखित बयान संशोधित करने की अनुमति दी गई थी।जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस रेणु भटनागर की डिवीजन बेंच ने कहा कि यद्यपि संशोधन की शक्ति व्यापक है और अदालतें...

“यात्रा का सबूत नहीं, तो मुआवज़ा नहीं”: दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों हाथ कटने के बावजूद रेलवे क्लेम खारिज किया
“यात्रा का सबूत नहीं, तो मुआवज़ा नहीं”: दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों हाथ कटने के बावजूद रेलवे क्लेम खारिज किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने रेलवे दुर्घटना मुआवज़े से जुड़े एक अहम मामले में कहा है कि गंभीर चोट, जैसे दोनों हाथों का कट जाना, अपने आप में “अनटुवर्ड इंसीडेंट” का प्रमाण नहीं हो सकता, जब तक कि घटना के तथ्य स्पष्ट और विश्वसनीय रूप से सिद्ध न हों।जस्टिस मनोज कुमार की पीठ ने रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें एक व्यक्ति को मुआवज़ा देने से इनकार कर दिया गया था। अपीलकर्ता ने दावा किया था कि वह Malwa Express से सोनीपत से झांसी की यात्रा कर रहा था और भारी भीड़ के कारण ट्रेन से गिर गया,...

कलकत्ता हाईकोर्ट ने रेप केस में व्यक्ति को बरी किया, कहा - रिश्ता टूटने के बाद रंजिश में शिकायत दर्ज की गई
कलकत्ता हाईकोर्ट ने रेप केस में व्यक्ति को बरी किया, कहा - रिश्ता टूटने के बाद "रंजिश" में शिकायत दर्ज की गई

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 2008 में रेप का दोषी पाए गए व्यक्ति की सज़ा रद्द की। कोर्ट ने माना कि प्रॉसिक्यूशन के केस में कई विरोधाभास, ज़रूरी बातों की कमी और सबूतों की पुष्टि का अभाव था — खासकर शिकायतकर्ता का यह कबूलनामा कि उसने बाद में आरोपी से शादी कर ली थी और उसकी पत्नी के तौर पर उसके साथ रही थी।जस्टिस चैताली चटर्जी दास ने क्रिमिनल अपील CRA 76 of 2009 (मिथुन पॉल बनाम पश्चिम बंगाल राज्य) पर फैसला सुनाते हुए कहा कि लिखित शिकायत में ही शादी की बात छिपाई गई। यह बात ट्रायल के दौरान ही सामने आई, जिससे...

पहले का खरीदार बाद की बिक्री रद्द करने की मांग कर सकता है, बाद के सौदे पहले के अधिकारों को खत्म नहीं कर सकते: दिल्ली हाईकोर्ट
पहले का खरीदार बाद की बिक्री रद्द करने की मांग कर सकता है, बाद के सौदे पहले के अधिकारों को खत्म नहीं कर सकते: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि पहले के सौदे के तहत कोई खरीदार उसी विक्रेता द्वारा उसी प्रॉपर्टी की बाद में की गई बिक्री को चुनौती देने और उसे रद्द करवाने का हकदार है। कोर्ट ने इस बात की पुष्टि की कि ऐसे बाद के सौदे पहले के अधिकारों को खत्म नहीं कर सकते।जस्टिस मिनी पुष्करणा ने अपने 86 पेज के फैसले में यह टिप्पणी की:“जहां एक ही अचल संपत्ति के दो लगातार ट्रांसफर किए गए हों, वहां कानून में उस ट्रांसफर को प्राथमिकता मिलती है, जो समय के हिसाब से पहले हुआ हो, न कि उस ट्रांसफर को जो बाद में हुआ हो। यह...

किरायेदार जिम्मेदारी से नहीं बच सकता, परिवार के रहने पर भी मानी जाएगी उसकी कब्जेदारी: दिल्ली हाईकोर्ट
किरायेदार जिम्मेदारी से नहीं बच सकता, परिवार के रहने पर भी मानी जाएगी उसकी कब्जेदारी: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि कोई भी किरायेदार यह कहकर अपनी कानूनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता कि वह खुद किराए के मकान में नहीं रह रहा है। अदालत ने कहा कि यदि उस मकान में उसके परिवार के सदस्य रह रहे हैं, तो उसे ही उस संपत्ति का वैधानिक कब्जाधारी माना जाएगा।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने अपने फैसले में कहा,“जब कोई किरायेदार अपने परिवार के साथ रहने के लिए मकान किराए पर लेता है तो परिवार के किसी भी सदस्य द्वारा उस मकान में रहना, किरायेदार का ही वैधानिक कब्जा माना जाएगा। केवल...

जवाई क्षेत्र में बेकाबू पर्यटन पर सख्त राजस्थान हाईकोर्ट, नाइट सफारी और ड्रोन पर रोक
जवाई क्षेत्र में बेकाबू पर्यटन पर सख्त राजस्थान हाईकोर्ट, नाइट सफारी और ड्रोन पर रोक

राजस्थान के पाली जिले के जवाई क्षेत्र में अनियंत्रित पर्यटन गतिविधियों पर सख्ती दिखाते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम अंतरिम आदेश जारी किया। हाइकोर्ट ने नाइट सफारी पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया और सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही सफारी गतिविधियों की अनुमति देने का निर्देश दिया। इसके साथ ही ड्रोन, तेज रोशनी वाले उपकरण और अन्य साधनों के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी गई, जो वन्यजीवों को परेशान करते हैं।यह आदेश जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें कहा गया कि जवाई क्षेत्र में बढ़ते अनियंत्रित...

बलात्कार में मदद करने पर महिला को 10 साल की जेल, दिल्ली हाईकोर्ट ने लगातार आपराधिक आचरण का दिया हवाला
बलात्कार में मदद करने पर महिला को 10 साल की जेल, दिल्ली हाईकोर्ट ने लगातार आपराधिक आचरण का दिया हवाला

दिल्ली हाईकोर्ट ने महिला को बलात्कार करने में मदद करने के लिए 10 साल की कठोर कारावास की सज़ा सुनाई। कोर्ट ने सज़ा में नरमी न बरतने के मुख्य कारण के तौर पर महिला की आपराधिक गतिविधियों में लगातार संलिप्तता पर ज़ोर दिया।जस्टिस चंद्रशेखरन सुधा ने राज्य सरकार द्वारा दायर अपील पर सज़ा का यह आदेश पारित किया। इस अपील में महिला को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दोषी महिला ने इस अपराध में "सक्रिय और जान-बूझकर भूमिका" निभाई थी।कोर्ट ने अपने अवलोकन में कहा कि महिला ने...

जब बायोग्राफी समाप्त हो जाए, पर बायोलॉजी शेष रहे: जीवन त्यागने का संवैधानिक अधिकार
जब बायोग्राफी समाप्त हो जाए, पर बायोलॉजी शेष रहे: जीवन त्यागने का संवैधानिक अधिकार

वेंटिलेटर की ठंडी, यांत्रिक गूंज और फीडिंग ट्यूब की नियमित टपक—ये आज की आधुनिक दुनिया के सबसे द्वंद्वपूर्ण प्रतीक बन गए हैं। उन्नत चिकित्सीय तकनीक ने चमत्कार कर दिखाया है—चेतना की लौ बुझ जाने के बाद भी जैविक क्रियाओं को बनाए रखना। लेकिन इस उपलब्धि का एक अंधेरा पक्ष भी है: “टेक्नोलॉजिकल ट्रैप”, जहां उपचार की मशीनरी ही कैद का साधन बन जाती है। 11 मार्च, 2026 को, भारत के सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा बनाम भारत संघ के ऐतिहासिक मामले में, अंततः इस पिंजरे के सबसे लगातार सलाखों में से एक को ध्वस्त कर...

कल्पना से परे: FSL रिपोर्ट के बिना ज़ब्त चीज़ों को नशीला पदार्थ कैसे मान लिया गया: पटना हाईकोर्ट ने 27 साल बाद NDPS के आरोपी को बरी किया
'कल्पना से परे: FSL रिपोर्ट के बिना ज़ब्त चीज़ों को 'नशीला पदार्थ' कैसे मान लिया गया': पटना हाईकोर्ट ने 27 साल बाद NDPS के आरोपी को बरी किया

पटना हाईकोर्ट ने NDPS Act के तहत दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति को बरी किया। कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष कानून के मुताबिक नशीला पदार्थ बरामद होने की बात साबित करने में नाकाम रहा और अनिवार्य सुरक्षा उपायों का पालन न करने के साथ-साथ सबूतों में कमियों ने दोषसिद्धि रद्द की।जस्टिस आलोक कुमार पांडे की सिंगल बेंच, एडिशनल जिला एवं सेशन जज (तृतीय), आरा, भोजपुर द्वारा 27.12.2010 को NDPS केस नंबर 2/1998 में दिए गए फैसले के खिलाफ आपराधिक अपील पर सुनवाई कर रही थी। यह मामला शाहपुर थाना केस नंबर 7/1998 से जुड़ा...

इकबालिया बयान पुलिस जांच को दिशा दे सकते हैं, भले ही वे चार्जशीट का हिस्सा न बन सकें: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इकबालिया बयान पुलिस जांच को दिशा दे सकते हैं, भले ही वे चार्जशीट का हिस्सा न बन सकें: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ किया कि संजू बंसल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक, भले ही पुलिस द्वारा दर्ज किए गए इकबालिया बयान चार्जशीट का हिस्सा नहीं बन सकते, लेकिन यह पुलिस को चल रही जांच में आगे बढ़ने के लिए ऐसे बयानों पर भरोसा करने से नहीं रोकता है।जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की बेंच ने किशन यादव नाम के एक व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। आरोपी पर गोरखपुर में मानसिक रूप से कमजोर 20 साल के एक युवक की हत्या करने का आरोप है।आरोपी का कहना...

किसी निजी व्यक्ति द्वारा सरकारी कर्मचारियों पर हमला नैतिक पतन का अपराध: बॉम्बे हाईकोर्ट
'किसी निजी व्यक्ति द्वारा सरकारी कर्मचारियों पर हमला 'नैतिक पतन' का अपराध': बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि किसी निजी व्यक्ति द्वारा सरकारी कर्मचारियों पर हमला, खासकर किसी गैर-कानूनी आंदोलन के दौरान, 'नैतिक पतन' (Moral Turpitude) से जुड़ा अपराध माना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि ऐसे काम सामाजिक कर्तव्य का उल्लंघन दिखाते हैं और सार्वजनिक व्यवस्था को कमज़ोर करते हैं। इसलिए ये 'दुराचार' और समाज के मान्य मानकों के विपरीत आचरण की श्रेणी में आते हैं।जस्टिस रजनीश आर. व्यास एक आरोपी द्वारा दायर आपराधिक अर्जी पर सुनवाई कर रहे थे। आरोपी ने दंगा करने, सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने और...

मुकेश अंबानी की रिलायंस के खिलाफ कथित गैस चोरी की याचिका प्रक्रिया का दुरुपयोग, इससे प्रतिष्ठा को नुकसान होता है: बॉम्बे हाईकोर्ट
मुकेश अंबानी की रिलायंस के खिलाफ कथित 'गैस चोरी' की याचिका प्रक्रिया का दुरुपयोग, इससे प्रतिष्ठा को नुकसान होता है: बॉम्बे हाईकोर्ट

कथित 'गैस चोरी' मामले में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) और उसके निदेशक मुकेश धीरूभाई अंबानी के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जांच की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि ऐसी याचिकाएं इन संस्थाओं की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकती हैं और उनकी वर्तमान या भविष्य की व्यावसायिक साझेदारियों के लिए खतरा बन सकती हैं।गौरतलब है कि जितेंद्र मारू नाम के कार्यकर्ता ने RIL और अंबानी के खिलाफ CBI जांच की मांग की थी। आरोप था कि उन्होंने आंध्र प्रदेश के तट से दूर कृष्णा...

Section 166 MV Act | दोषी वाहन के ड्राइवर को पक्षकार न बनाने से दावा दोषपूर्ण और सुनवाई योग्य नहीं रहता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
Section 166 MV Act | दोषी वाहन के ड्राइवर को पक्षकार न बनाने से दावा दोषपूर्ण और सुनवाई योग्य नहीं रहता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि दोषी वाहन के ड्राइवर को पक्षकार न बनाने से मोटर दुर्घटना दावा याचिका दोषपूर्ण और सुनवाई योग्य नहीं रह जाती है।जस्टिस हिरदेश की बेंच ने यह टिप्पणी की:"...मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत दायर दावा याचिका में दोषी वाहन का ड्राइवर आवश्यक पक्षकार होता है। ड्राइवर को पक्षकार न बनाने से दावा याचिका दोषपूर्ण हो जाती है और सुनवाई योग्य नहीं रहती।"राज्य सरकार ने ग्वालियर के मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (Motor Accidents Claims Tribunal) द्वारा दिए गए फैसले को चुनौती...

शक सबूत की जगह नहीं ले सकता: पटना हाईकोर्ट ने आरा कोर्ट धमाका मामले में आरोपियों को बरी किया, मौत की सज़ा रद्द की
'शक सबूत की जगह नहीं ले सकता': पटना हाईकोर्ट ने आरा कोर्ट धमाका मामले में आरोपियों को बरी किया, मौत की सज़ा रद्द की

176 पन्नों के फ़ैसले में पटना हाई कोर्ट ने आरा सिविल कोर्ट बम धमाका मामले में कई आरोपियों की सज़ा रद्द की। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष (सरकारी वकील) परिस्थितियों की कड़ी को बिना किसी उचित संदेह के साबित करने में नाकाम रहा। साथ ही यह दोहराया कि "शक, चाहे कितना भी मज़बूत क्यों न हो, सबूत की जगह नहीं ले सकता।"चीफ़ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद की डिवीज़न बेंच भोजपुर, आरा के एडिशनल सेशंस जज द्वारा चलाए गए मुक़दमे से जुड़े आपराधिक अपीलों के साथ-साथ CrPC की धारा 366 (BNSS की धारा...

लिव-इन संबंध पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी—विवाहित पुरुष और वयस्क महिला साथ रहें तो अपराध नहीं
लिव-इन संबंध पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी—विवाहित पुरुष और वयस्क महिला साथ रहें तो अपराध नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि कोई विवाहित पुरुष किसी वयस्क महिला के साथ उसकी सहमति से लिव-इन संबंध में रहता है, तो यह किसी भी प्रकार का अपराध नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून और नैतिकता को अलग-अलग रखा जाना चाहिए और सामाजिक धारणा अदालत के फैसलों को प्रभावित नहीं कर सकती।जस्टिस जे जे मुनीर और जस्टिस करून सक्सेना की खंडपीठ यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान कर रही थी, जिसमें एक लिव-इन कपल ने महिला के परिवार से मिल रही धमकियों के खिलाफ सुरक्षा की...

अनुच्छेद 226 के तहत आपराधिक कोर्ट के आदेश को चुनौती नहीं दी जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
अनुच्छेद 226 के तहत आपराधिक कोर्ट के आदेश को चुनौती नहीं दी जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी आपराधिक अदालत द्वारा पारित न्यायिक आदेश को संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दाखिल कर चुनौती नहीं दी जा सकती।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए एक याचिका खारिज कर दी, जिसमें लखनऊ के स्पेशल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (कस्टम) द्वारा फरवरी 2026 में पारित आदेश को रद्द करने की मांग की गई थी।सुनवाई के दौरान राज्य ने याचिका की सुनवाई योग्य होने पर प्रारंभिक आपत्ति उठाई और नीता सिंह बनाम राज्य, 2024 के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि...

पासपोर्ट जब्ती जैसे मामलों में रिट याचिका सुनने से इनकार करना गलत: दिल्ली हाईकोर्ट
पासपोर्ट जब्ती जैसे मामलों में रिट याचिका सुनने से इनकार करना गलत: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने पासपोर्ट जब्त किए जाने के खिलाफ दायर रिट याचिका को सुनने से इनकार करने के एकल पीठ का आदेश रद्द किया।अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में गंभीर नागरिक परिणाम होते हैं, इसलिए याचिका पर विचार किया जाना चाहिए।चीफ जस्टिस देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया।मामला उस आदेश से जुड़ा था जिसमें एकल जस्टिस ने याचिकाकर्ता को पासपोर्ट अधिनियम 1967 की धारा 11 के तहत वैकल्पिक उपाय अपनाने के लिए कहा था और रिट याचिका सुनने से मना कर दिया था।हाईकोर्ट ने कहा कि...

यूनिवर्सिटी शिक्षक पब्लिक ऑफिस नहीं, क्वो वारंटो याचिका नहीं चलेगी: एमपी हाईकोर्ट
यूनिवर्सिटी शिक्षक 'पब्लिक ऑफिस' नहीं, क्वो वारंटो याचिका नहीं चलेगी: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यूनिवर्सिटी में शिक्षक, प्रोफेसर या रीडर 'पब्लिक ऑफिस' के दायरे में नहीं आते इसलिए उनके खिलाफ क्वो वारंटो याचिका दायर नहीं की जा सकती।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की।मामला एक यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस के लेक्चरर की नियुक्ति को चुनौती देने से जुड़ा था। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि नियुक्त व्यक्ति के पास आवश्यक शैक्षणिक योग्यता नहीं थी और उसने गलत प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए।अदालत ने पहले यह स्पष्ट किया कि...