उड़ीसा हाईकोर्ट

मुस्लिम मां भी नाबालिग की संपत्ति की संरक्षक नियुक्त हो सकती है, बच्चे के हित में हिस्सा बेचने की अनुमति दी जा सकती है: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा है कि मुस्लिम कानून के तहत मां को केवल अपने रिश्ते के आधार पर नाबालिग की संपत्ति का कानूनी संरक्षक होने का अधिकार नहीं मिलता। हालांकि, यदि नाबालिग के कल्याण और उसके स्पष्ट हित में ऐसा करना आवश्यक हो, तो सक्षम अदालत संरक्षक एवं प्रतिपाल्य अधिनियम, 1890 के तहत मां को नाबालिग की संपत्ति का संरक्षक नियुक्त कर सकती है और संपत्ति में उसके हिस्से को बेचने की अनुमति भी दे सकती है।जस्टिस संजय कुमार मिश्रा की पीठ ने नाबालिग की संपत्ति के हस्तांतरण से संबंधित 1890 के...

छात्र को नशे से रोकने और अनुशासन बनाए रखने के लिए डांटने पर शिक्षकों पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा नहीं चलाया जा सकता: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी छात्र को अनुशासन बनाए रखने के लिए डांटना या नशे से दूर रहने की चेतावनी देना, अपने आप में आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध नहीं है। यदि शिक्षकों का कोई आपराधिक इरादा नहीं था और उन्होंने छात्र को आत्महत्या के लिए उकसाया या जानबूझकर सहायता नहीं की, तो केवल छात्र की आत्महत्या के दुखद परिणाम के आधार पर उन्हें आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।जस्टिस राधा कृष्ण पटनायक की पीठ ने इस टिप्पणी के साथ स्कूल के शिक्षकों और हॉस्टल वार्डन के खिलाफ संज्ञान लेने के...

'हिस्ट्री-शीटर' होने से आरोपी के अनुच्छेद 21 के अधिकार कम नहीं हो जाते: कस्टोडियल डेथ केस में हाईकोर्ट का 3 पुलिसकर्मियों को जमानत से इनकार
उड़ीसा हाईकोर्ट ने बुधवार (14 अक्टूबर) को तीन पुलिसकर्मियों की जमानत याचिका खारिज की। इन पर आरोप है कि 2017 में उन्होंने एक व्यक्ति (जो आदतन अपराधी था) का सड़क पर पीछा किया और उसके साथ मारपीट की, जिसके कारण वह अपनी मोटरसाइकिल से गिर गया और उसकी मौत हो गई। [2026 लाइव लॉ (ओरी) 118]जस्टिस वी. नरसिंह की पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि किसी आरोपी को केवल इसलिए उसके संवैधानिक संरक्षण से वंचित नहीं किया जा सकता, क्योंकि वह एक "हिस्ट्री-शीटर" (आदतन अपराधी) है।पीठ ने टिप्पणी की, "मृतक को 'हिस्ट्री-शीटर'...

जब शादी का रिश्ता काफ़ी हद तक टूट चुका हो तो उसे सिर्फ़ कानूनी तौर पर बचाए रखने से शादी की पवित्रता बनी नहीं रहती: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने कहा कि जब पति-पत्नी के बीच वैवाहिक रिश्ता काफ़ी हद तक टूट चुका हो तो शादी को सिर्फ़ कानूनी रूप से बचाए रखना बेमतलब है और इससे शादी की पवित्रता भी बनी नहीं रहती। [2026 LiveLaw (Ori) 115]एक जोड़े को तलाक देने के फैमिली कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए चीफ जस्टिस हरीश टंडन और जस्टिस चित्तरंजन डैश की डिवीजन बेंच ने टिप्पणी की,“निस्संदेह शादी की एक पवित्रता होती है, जिसे कोर्ट को आम तौर पर बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन जब रिश्ते की मुख्य नींव ही काफ़ी हद तक टूट चुकी हो, तो...

अनुशासनात्मक कार्रवाई ही रद्द हो गई तो प्रतिकूल सेवा टिप्पणी का आधार भी खत्म: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने अपने पूर्व रजिस्ट्रार (न्यायिक) की सेवा पुस्तिका में दर्ज प्रतिकूल टिप्पणियों के मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया।हाईकोर्ट ने कहा कि जिन गंभीर आरोपों के आधार पर अधिकारी की गोपनीय चरित्रावली में प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज की गई, उन आरोपों पर हुई विभागीय कार्रवाई और उसमें दी गई सजा को बाद में अदालत पहले ही रद्द कर चुकी है। ऐसे में प्रतिकूल टिप्पणी के आधार की दोबारा समीक्षा जरूरी है।जस्टिस मनाश रंजन पाठक और जस्टिस सिबो शंकर मिश्रा की खंडपीठ ने पूर्व रजिस्ट्रार (न्यायिक) ललित कुमार दास...

उड़ीसा हाईकोर्ट ने डिप्टी चीफ मिनिस्टर की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
उड़ीसा हाईकोर्ट ने राज्य में डिप्टी चीफ मिनिस्टर की नियुक्ति की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली PIL (जनहित याचिका) खारिज की। कोर्ट ने कहा कि यह पद "सिर्फ नाम का" है और इस पद पर बैठे व्यक्ति को मंत्रिपरिषद के अन्य सदस्यों की तुलना में कोई उच्च संवैधानिक शक्ति प्राप्त नहीं होती है। [2026 LiveLaw (Ori) 107]इस पद के औपचारिक उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए चीफ जस्टिस हरीश टंडन और जस्टिस चित्तरंजन डैश की डिवीजन बेंच ने कहा,“ऊपर बताई गई रिपोर्ट में दिए गए सिद्धांत पर हमारे मन में कोई संदेह नहीं है कि...

BNSS में 60 दिन की अवधि चार्ज फ्रेम करने पर पूर्ण रोक नहीं: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा है कि BNSS की धारा 262(1) के तहत आरोपी को डिस्चार्ज आवेदन दाखिल करने के लिए दी गई 60 दिनों की अवधि कोई कठोर या अनिवार्य “moratorium” नहीं है।कोर्ट ने कहा कि पुलिस पेपर धारा 230 BNSS के तहत उपलब्ध कराने के बाद ट्रायल कोर्ट, आरोपी को उचित अवसर देने के लिए एक reasonable interval के बाद चार्ज फ्रेम कर सकता है। हालांकि, पुलिस पेपर देने और उसी दिन चार्ज फ्रेम करने की प्रक्रिया से बचना बेहतर होगा।जस्टिस डॉ. संजीब कुमार पाणिग्रही ने कहा कि धारा 262(1) को...

वकील को केवल मुवक्किल के निर्देश पर कानूनी नोटिस भेजने के लिए उसके कृत्यों के संबंध में अभियोजित नहीं किया जा सकता: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने कहा कि किसी पक्ष को मुवक्किल के निर्देश पर कानूनी नोटिस भेजने मात्र से किसी वकील के खिलाफ आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता, जब तक वह किसी आपराधिक साजिश का हिस्सा न हो।कानूनी पेशेवरों को पेशेवर दायित्वों के निर्वहन के दौरान किए गए कार्यों के लिए प्राप्त संरक्षण पर जोर देते हुए जस्टिस डॉ. संजीब कुमार पाणिग्रही की पीठ ने कहा,“यदि हर असफल कानूनी राय या मुवक्किल द्वारा किए गए प्रत्येक तथ्यात्मक प्रतिवेदन को बाद में वकील के खिलाफ आपराधिक मुकदमे की नींव बना दिया जाए, तो बार...

PC-PNDT नियम डॉक्टर को दो अलग-अलग ज़िलों के क्लीनिक में अल्ट्रासाउंड करने से नहीं रोकते: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने कहा कि क्वालिफाइड रेडियोलॉजिस्ट को दो अलग-अलग ज़िलों में स्थित दो अलग-अलग क्लीनिक/मेडिकल सेंटर्स में अल्ट्रासोनोग्राफी करने से नहीं रोका जा सकता, खासकर तब जब उसकी स्थायी नौकरी में उसके सीनियर अधिकारियों ने उसे आधिकारिक काम के घंटों के बाद प्रैक्टिस करने के लिए 'नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) जारी किया हो। [2026 LiveLaw (Ori) 97]प्री-कन्सेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्नीक्स (लिंग चयन पर रोक) नियम, 1996 ('PCPNDT नियम') के नियम 3(3) का सही मतलब स्पष्ट करते हुए जस्टिस बिभु...

HAMA के तहत तय भरण-पोषण बढ़ाने के लिए CrPC की धारा 127 का इस्तेमाल नहीं कर सकती फैमिली कोर्ट: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने कहा कि यदि मूल भरण-पोषण (Maintenance) का आदेश हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम, 1956 (HAMA) के तहत पारित किया गया है, तो उसकी राशि बढ़ाने के लिए फैमिली कोर्ट दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 127 के तहत अधिकार का प्रयोग नहीं कर सकती।जस्टिस मृगांक शेखर साहू की एकल पीठ ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें CrPC की धारा 127 के तहत पत्नी और बच्चे के भरण-पोषण की राशि बढ़ाई गई थी। अदालत ने कहा कि फैमिली कोर्ट ने गलत वैधानिक प्रावधान के तहत अधिकार का प्रयोग किया।मामले...

दशकों तक नियमित काम लेने के बाद अस्थायी कर्मचारी को मनमाने ढंग से नहीं हटा सकती सरकार: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार किसी व्यक्ति से वर्षों तक नियमित प्रकृति का काम लेने के बाद केवल यह कहकर उसे अचानक सेवा से नहीं हटा सकती कि वह गैर-स्वीकृत (Non-Sanctioned) अस्थायी पद पर संविदा के आधार पर कार्यरत था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक या वित्तीय बाधाओं का हवाला देकर कर्मचारियों को लंबे समय तक रोजगार की असुरक्षा में नहीं रखा जा सकता।जस्टिस दीक्षित कृष्ण श्रीपाद और जस्टिस चित्तरंजन दास की खंडपीठ ने 14 वर्षों तक लगातार सेवा देने के बाद बर्खास्त की गई एक महिला फार्मासिस्ट को...

पत्नी द्वारा 'छोड़ देने' के आधार पर तलाक़ मिलने से पति CrPC की धारा 125 के तहत पत्नी को भरण-पोषण देने की ज़िम्मेदारी से मुक्त नहीं हो जाता: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने यह फ़ैसला दिया कि सिर्फ़ इसलिए कि पति के पक्ष में तलाक़ का फ़ैसला इस आधार पर दिया गया कि पत्नी ने उसे छोड़ दिया था, यह अपने आप में तलाक़ के बाद पत्नी को भरण-पोषण देने में कोई रुकावट नहीं डालता।कानून की स्थिति को स्पष्ट करते हुए जस्टिस डॉ. संजीव कुमार पाणिग्राही की पीठ ने यह राय व्यक्त की–“BNSS के तहत भरण-पोषण का प्रावधान अब धारा 144 के रूप में पुन: क्रमांकित किया गया। इसकी व्याख्या में 'पत्नी' शब्द के अंतर्गत एक ऐसी तलाक़शुदा महिला को भी शामिल किया गया, जिसने अभी तक पुनर्विवाह...

'पब्लिसिटी पाने की कोशिश': 2003 के 'खराब मोबाइल' मामले में मुकेश अंबानी के खिलाफ केस उड़ीसा हाईकोर्ट ने किया रद्द
ओडिशा हाईकोर्ट ने वर्ष 2003 के एक मामूली उपभोक्ता विवाद में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) और उसके चेयरमैन मुकेश धीरूभाई अंबानी के खिलाफ दायर आपराधिक शिकायत और समन आदेश को रद्द कर दिया है।डॉ. जस्टिस संजीब कुमार पाणिग्रही की पीठ ने कहा कि यह मामला “अदालत की प्रक्रिया का सुनियोजित दुरुपयोग” है और इसे प्रचार पाने के उद्देश्य से दायर किया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी प्रसिद्ध व्यक्ति को केवल ध्यान आकर्षित करने के लिए आपराधिक मामले में घसीटना उचित नहीं है।मामला क्या थाशिकायतकर्ता...

पंचायत अदालत नहीं, शादी का वादा कर यौन अपराध का समझौता नहीं हो सकता: उड़ीसा हाइकोर्ट
उड़ीसा हाइकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट कहा कि पंचायत कोई अदालत नहीं है और सरपंच के पास मजिस्ट्रेट जैसी न्यायिक शक्तियां नहीं होतीं। इसलिए बाल यौन शोषण जैसे गंभीर अपराधों को पंचायत बैठाकर शादी के वादे के जरिए निपटाया नहीं जा सकता।जस्टिस संजीब कुमार पाणिग्रही की पीठ ने यह टिप्पणी उस मामले में की, जिसमें एक व्यक्ति को नाबालिग लड़की के साथ बार-बार दुष्कर्म करने के मामले में दोषी ठहराया गया। अदालत ने निचली अदालत द्वारा दी गई सजा को बरकरार रखते हुए आरोपी की अपील खारिज की।अदालत ने अपने फैसले में...

POCSO कानून में स्किन-टू-स्किन संपर्क जरूरी नहीं: उड़ीसा हाइकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- नाबालिग के स्तन को दबाना यौन हमला
उड़ीसा हाइकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले में कहा कि किसी नाबालिग लड़की के स्तन को दबाना या खींचना, भले ही वह सीधे स्किन-टू-स्किन संपर्क के बिना किया गया हो POCSO Act की धारा 7 के तहत 'यौन हमले' की श्रेणी में आता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में आरोपी की मंशा सबसे महत्वपूर्ण होती है न कि शरीर का सीधा स्पर्श।यह मामला अगस्त 2021 का है जब एक नाबालिग लड़की बस से यात्रा कर रही थी। जब बस एक स्टॉपेज पर रुकी तो दोषी ने बस की खिड़की के बाहर से हाथ डालकर लड़की के साथ छेड़छाड़ की और उसके स्तन को दबाया।...

अवैध हिरासत न हो तो बाल अभिरक्षा विवाद रिट अदालत में नहीं सुलझाए जाने चाहिए: उड़ीसा हाइकोर्ट
उड़ीसा हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि बाल अभिरक्षा से जुड़े विवादों का निपटारा रिट अदालतें बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के माध्यम से नहीं करेंगी, जब तक यह स्पष्ट न हो जाए कि बच्चे को अवैध या गैरकानूनी रूप से रोका गया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अभिरक्षा का प्रश्न जटिल तथ्यों से जुड़ा हो और विस्तृत साक्ष्य की आवश्यकता हो तो पक्षकारों को सक्षम सिविल अदालत के पास भेजा जाना चाहिए।चीफ जस्टिस हरीश टंडन और जस्टिस मुराहारी श्री रमन की खंडपीठ ने कहा,“जैसे ही यह प्रतीत होता है कि अभिरक्षा...

जनसंख्या वृद्धि रोकने के समर्थन में आया उड़ीसा हाईकोर्ट, कहा- युद्ध स्तर पर कड़े कदम उठाने की ज़रूरत
उड़ीसा हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायत सदस्य को दो से ज़्यादा बच्चे होने के कारण अयोग्य ठहराए जाने के फैसले को सही ठहराया, जो ओडिशा ग्राम पंचायत अधिनियम, 1964 ['1964 का अधिनियम'] की धारा 25(1)(v) के अनुसार अयोग्यता का एक कानूनी आधार है।एक सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करते हुए जस्टिस दीक्षित कृष्णा श्रीपाद और जस्टिस चित्तरंजन डैश की डिवीजन बेंच ने दिलचस्प टिप्पणी की,“कहा जाता है कि सर विंस्टन चर्चिल (1874-1965) ने कहा था कि "भारत एक राष्ट्र नहीं, बल्कि सिर्फ़ आबादी है"। यह बंटवारे...

HMA | पहली शादी के रहते दूसरी शादी पहली पत्नी की मौत पर जायज़ नहीं हो जाती: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने माना कि एक हिंदू आदमी का अपनी पहली शादी के रहते दूसरी शादी करना, जो शुरू से ही अमान्य है, पहली पत्नी की मौत पर जायज़/कानूनी नहीं हो जाती।एक पुराने सरकारी कर्मचारी की दूसरी पत्नी की फ़ैमिली पेंशन देने की अर्ज़ी पर फ़ैसला करते हुए जस्टिस दीक्षित कृष्ण श्रीपाद और जस्टिस चित्तरंजन दाश की डिवीज़न बेंच ने कहा –“इस मामले में माना कि अपील करने वाले ने दूसरी औरत के साथ पहली शादी के रहते हुए मृतक कर्मचारी से शादी की थी। यह काम अपने आप में हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 की धारा 17 और पहले के...

कानूनी पेशे में सर्वोच्च पद हमेशा मेहनती और धैर्यवान युवा वकीलों के लिए सुरक्षित रहते हैं” — जस्टिस एस.के. साहू ने ओडिशा हाईकोर्ट को दी भावभीनी
ओडिशा हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस हरीश टंडन की अध्यक्षता में सोमवार (05 जनवरी) को जस्टिस संगम कुमार साहू के सम्मान में विदाई समारोह आयोजित किया गया। हाल ही में उन्हें पटना हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया है।दोपहर में चीफ जस्टिस के पुराने कोर्ट रूम में फुल कोर्ट रेफरेंस आयोजित हुआ, जिसमें जजों के साथ एडवोकेट जनरल पिताम्बर आचार्य, डिप्टी सॉलिसिटर जनरल (DSGI) पी.के. परही, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (OHCBA) के अध्यक्ष मनोज कुमार मिश्रा और बार के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। चीफ जस्टिस ने जस्टिस साहू की...

एक ही तथ्यों पर 'आपराधिक न्यास भंग' और 'धोखाधड़ी' साथ-साथ लागू नहीं हो सकते: ओडिशा हाईकोर्ट
ओडिशा हाईकोर्ट ने दोहराया है कि एक ही तथ्यों के आधार पर एक ही मामले में 'आपराधिक न्यास भंग' (Criminal Breach of Trust) और 'धोखाधड़ी' (Cheating) दोनों अपराधों को एक साथ लागू नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि धोखाधड़ी के अपराध में झूठे या भ्रामक प्रतिनिधित्व के समय से ही आपराधिक मंशा मौजूद होना आवश्यक है, जबकि आपराधिक न्यास भंग के मामले में प्रारंभिक मंशा आपराधिक नहीं होती — वहाँ पहले वैध रूप से संपत्ति सौंपी जाती है और बाद में उसका दुरुपयोग किया जाता है।जस्टिस राधा कृष्ण पटनायक की पीठ ने JMFC...
