उड़ीसा हाईकोर्ट

अनुशासनात्मक कार्रवाई ही रद्द हो गई तो प्रतिकूल सेवा टिप्पणी का आधार भी खत्म: उड़ीसा हाईकोर्ट

उड़ीसा हाईकोर्ट ने अपने पूर्व रजिस्ट्रार (न्यायिक) की सेवा पुस्तिका में दर्ज प्रतिकूल टिप्पणियों के मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया।हाईकोर्ट ने कहा कि जिन गंभीर आरोपों के आधार पर अधिकारी की गोपनीय चरित्रावली में प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज की गई, उन आरोपों पर हुई विभागीय कार्रवाई और उसमें दी गई सजा को बाद में अदालत पहले ही रद्द कर चुकी है। ऐसे में प्रतिकूल टिप्पणी के आधार की दोबारा समीक्षा जरूरी है।जस्टिस मनाश रंजन पाठक और जस्टिस सिबो शंकर मिश्रा की खंडपीठ ने पूर्व रजिस्ट्रार (न्यायिक) ललित कुमार दास...

वकील को केवल मुवक्किल के निर्देश पर कानूनी नोटिस भेजने के लिए उसके कृत्यों के संबंध में अभियोजित नहीं किया जा सकता: उड़ीसा हाईकोर्ट

उड़ीसा हाईकोर्ट ने कहा कि किसी पक्ष को मुवक्किल के निर्देश पर कानूनी नोटिस भेजने मात्र से किसी वकील के खिलाफ आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता, जब तक वह किसी आपराधिक साजिश का हिस्सा न हो।कानूनी पेशेवरों को पेशेवर दायित्वों के निर्वहन के दौरान किए गए कार्यों के लिए प्राप्त संरक्षण पर जोर देते हुए जस्टिस डॉ. संजीब कुमार पाणिग्रही की पीठ ने कहा,“यदि हर असफल कानूनी राय या मुवक्किल द्वारा किए गए प्रत्येक तथ्यात्मक प्रतिवेदन को बाद में वकील के खिलाफ आपराधिक मुकदमे की नींव बना दिया जाए, तो बार...

PC-PNDT नियम डॉक्टर को दो अलग-अलग ज़िलों के क्लीनिक में अल्ट्रासाउंड करने से नहीं रोकते: उड़ीसा हाईकोर्ट

उड़ीसा हाईकोर्ट ने कहा कि क्वालिफाइड रेडियोलॉजिस्ट को दो अलग-अलग ज़िलों में स्थित दो अलग-अलग क्लीनिक/मेडिकल सेंटर्स में अल्ट्रासोनोग्राफी करने से नहीं रोका जा सकता, खासकर तब जब उसकी स्थायी नौकरी में उसके सीनियर अधिकारियों ने उसे आधिकारिक काम के घंटों के बाद प्रैक्टिस करने के लिए 'नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) जारी किया हो। [2026 LiveLaw (Ori) 97]प्री-कन्सेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्नीक्स (लिंग चयन पर रोक) नियम, 1996 ('PCPNDT नियम') के नियम 3(3) का सही मतलब स्पष्ट करते हुए जस्टिस बिभु...

दशकों तक नियमित काम लेने के बाद अस्थायी कर्मचारी को मनमाने ढंग से नहीं हटा सकती सरकार: उड़ीसा हाईकोर्ट

उड़ीसा हाईकोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार किसी व्यक्ति से वर्षों तक नियमित प्रकृति का काम लेने के बाद केवल यह कहकर उसे अचानक सेवा से नहीं हटा सकती कि वह गैर-स्वीकृत (Non-Sanctioned) अस्थायी पद पर संविदा के आधार पर कार्यरत था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक या वित्तीय बाधाओं का हवाला देकर कर्मचारियों को लंबे समय तक रोजगार की असुरक्षा में नहीं रखा जा सकता।जस्टिस दीक्षित कृष्ण श्रीपाद और जस्टिस चित्तरंजन दास की खंडपीठ ने 14 वर्षों तक लगातार सेवा देने के बाद बर्खास्त की गई एक महिला फार्मासिस्ट को...

पत्नी द्वारा छोड़ देने के आधार पर तलाक़ मिलने से पति CrPC की धारा 125 के तहत पत्नी को भरण-पोषण देने की ज़िम्मेदारी से मुक्त नहीं हो जाता: उड़ीसा हाईकोर्ट

उड़ीसा हाईकोर्ट ने यह फ़ैसला दिया कि सिर्फ़ इसलिए कि पति के पक्ष में तलाक़ का फ़ैसला इस आधार पर दिया गया कि पत्नी ने उसे छोड़ दिया था, यह अपने आप में तलाक़ के बाद पत्नी को भरण-पोषण देने में कोई रुकावट नहीं डालता।कानून की स्थिति को स्पष्ट करते हुए जस्टिस डॉ. संजीव कुमार पाणिग्राही की पीठ ने यह राय व्यक्त की–“BNSS के तहत भरण-पोषण का प्रावधान अब धारा 144 के रूप में पुन: क्रमांकित किया गया। इसकी व्याख्या में 'पत्नी' शब्द के अंतर्गत एक ऐसी तलाक़शुदा महिला को भी शामिल किया गया, जिसने अभी तक पुनर्विवाह...

पब्लिसिटी पाने की कोशिश: 2003 के खराब मोबाइल मामले में मुकेश अंबानी के खिलाफ केस उड़ीसा हाईकोर्ट ने किया रद्द

ओडिशा हाईकोर्ट ने वर्ष 2003 के एक मामूली उपभोक्ता विवाद में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) और उसके चेयरमैन मुकेश धीरूभाई अंबानी के खिलाफ दायर आपराधिक शिकायत और समन आदेश को रद्द कर दिया है।डॉ. जस्टिस संजीब कुमार पाणिग्रही की पीठ ने कहा कि यह मामला “अदालत की प्रक्रिया का सुनियोजित दुरुपयोग” है और इसे प्रचार पाने के उद्देश्य से दायर किया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी प्रसिद्ध व्यक्ति को केवल ध्यान आकर्षित करने के लिए आपराधिक मामले में घसीटना उचित नहीं है।मामला क्या थाशिकायतकर्ता...

पंचायत अदालत नहीं, शादी का वादा कर यौन अपराध का समझौता नहीं हो सकता: उड़ीसा हाइकोर्ट

उड़ीसा हाइकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट कहा कि पंचायत कोई अदालत नहीं है और सरपंच के पास मजिस्ट्रेट जैसी न्यायिक शक्तियां नहीं होतीं। इसलिए बाल यौन शोषण जैसे गंभीर अपराधों को पंचायत बैठाकर शादी के वादे के जरिए निपटाया नहीं जा सकता।जस्टिस संजीब कुमार पाणिग्रही की पीठ ने यह टिप्पणी उस मामले में की, जिसमें एक व्यक्ति को नाबालिग लड़की के साथ बार-बार दुष्कर्म करने के मामले में दोषी ठहराया गया। अदालत ने निचली अदालत द्वारा दी गई सजा को बरकरार रखते हुए आरोपी की अपील खारिज की।अदालत ने अपने फैसले में...

POCSO कानून में स्किन-टू-स्किन संपर्क जरूरी नहीं: उड़ीसा हाइकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- नाबालिग के स्तन को दबाना यौन हमला

उड़ीसा हाइकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले में कहा कि किसी नाबालिग लड़की के स्तन को दबाना या खींचना, भले ही वह सीधे स्किन-टू-स्किन संपर्क के बिना किया गया हो POCSO Act की धारा 7 के तहत 'यौन हमले' की श्रेणी में आता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में आरोपी की मंशा सबसे महत्वपूर्ण होती है न कि शरीर का सीधा स्पर्श।यह मामला अगस्त 2021 का है जब एक नाबालिग लड़की बस से यात्रा कर रही थी। जब बस एक स्टॉपेज पर रुकी तो दोषी ने बस की खिड़की के बाहर से हाथ डालकर लड़की के साथ छेड़छाड़ की और उसके स्तन को दबाया।...

अवैध हिरासत न हो तो बाल अभिरक्षा विवाद रिट अदालत में नहीं सुलझाए जाने चाहिए: उड़ीसा हाइकोर्ट

उड़ीसा हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि बाल अभिरक्षा से जुड़े विवादों का निपटारा रिट अदालतें बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के माध्यम से नहीं करेंगी, जब तक यह स्पष्ट न हो जाए कि बच्चे को अवैध या गैरकानूनी रूप से रोका गया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अभिरक्षा का प्रश्न जटिल तथ्यों से जुड़ा हो और विस्तृत साक्ष्य की आवश्यकता हो तो पक्षकारों को सक्षम सिविल अदालत के पास भेजा जाना चाहिए।चीफ जस्टिस हरीश टंडन और जस्टिस मुराहारी श्री रमन की खंडपीठ ने कहा,“जैसे ही यह प्रतीत होता है कि अभिरक्षा...

जनसंख्या वृद्धि रोकने के समर्थन में आया उड़ीसा हाईकोर्ट, कहा- युद्ध स्तर पर कड़े कदम उठाने की ज़रूरत

उड़ीसा हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायत सदस्य को दो से ज़्यादा बच्चे होने के कारण अयोग्य ठहराए जाने के फैसले को सही ठहराया, जो ओडिशा ग्राम पंचायत अधिनियम, 1964 ['1964 का अधिनियम'] की धारा 25(1)(v) के अनुसार अयोग्यता का एक कानूनी आधार है।एक सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करते हुए जस्टिस दीक्षित कृष्णा श्रीपाद और जस्टिस चित्तरंजन डैश की डिवीजन बेंच ने दिलचस्प टिप्पणी की,“कहा जाता है कि सर विंस्टन चर्चिल (1874-1965) ने कहा था कि "भारत एक राष्ट्र नहीं, बल्कि सिर्फ़ आबादी है"। यह बंटवारे...

HMA | पहली शादी के रहते दूसरी शादी पहली पत्नी की मौत पर जायज़ नहीं हो जाती: उड़ीसा हाईकोर्ट

उड़ीसा हाईकोर्ट ने माना कि एक हिंदू आदमी का अपनी पहली शादी के रहते दूसरी शादी करना, जो शुरू से ही अमान्य है, पहली पत्नी की मौत पर जायज़/कानूनी नहीं हो जाती।एक पुराने सरकारी कर्मचारी की दूसरी पत्नी की फ़ैमिली पेंशन देने की अर्ज़ी पर फ़ैसला करते हुए जस्टिस दीक्षित कृष्ण श्रीपाद और जस्टिस चित्तरंजन दाश की डिवीज़न बेंच ने कहा –“इस मामले में माना कि अपील करने वाले ने दूसरी औरत के साथ पहली शादी के रहते हुए मृतक कर्मचारी से शादी की थी। यह काम अपने आप में हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 की धारा 17 और पहले के...

कानूनी पेशे में सर्वोच्च पद हमेशा मेहनती और धैर्यवान युवा वकीलों के लिए सुरक्षित रहते हैं” — जस्टिस एस.के. साहू ने ओडिशा हाईकोर्ट को दी भावभीनी

ओडिशा हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस हरीश टंडन की अध्यक्षता में सोमवार (05 जनवरी) को जस्टिस संगम कुमार साहू के सम्मान में विदाई समारोह आयोजित किया गया। हाल ही में उन्हें पटना हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया है।दोपहर में चीफ जस्टिस के पुराने कोर्ट रूम में फुल कोर्ट रेफरेंस आयोजित हुआ, जिसमें जजों के साथ एडवोकेट जनरल पिताम्बर आचार्य, डिप्टी सॉलिसिटर जनरल (DSGI) पी.के. परही, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (OHCBA) के अध्यक्ष मनोज कुमार मिश्रा और बार के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। चीफ जस्टिस ने जस्टिस साहू की...

S. 337 BNSS | विदेशी देश में आपराधिक मामला दर्ज होने से भारत में उन्हीं तथ्यों पर मुकदमा चलाने में कोई रोक नहीं: उड़ीसा हाईकोर्ट

ओडिशा हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ विदेशी देश में आपराधिक मामला दर्ज होने से भारत में उसी तरह के तथ्यों या उसी लेन-देन से जुड़े अपराध के आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई करने में कोई रुकावट नहीं आएगी।ज़ाम्बिया में हुए कुछ वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े एक ज़मानत याचिका पर फैसला सुनाते हुए जस्टिस गौरीशंकर सतपथी की बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होना या वारंट जारी होना भारतीय दंड प्रावधानों के तहत उसके खिलाफ कार्रवाई करने में कोई रोक नहीं है, क्योंकि यह 'दोहरे दंड' के...

टीचर्स को पॉलिटिक्स से उचित दूरी बनाए रखनी चाहिए: उड़ीसा हाईकोर्ट ने MPs/MLAs को टीचर्स के ट्रांसफर की सिफ़ारिश करने का अधिकार देने वाला ऑर्डर रद्द किया

उड़ीसा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार का ऑर्डर रद्द कर दिया, जिसमें मेंबर्स ऑफ़ पार्लियामेंट (MPs) और मेंबर्स ऑफ़ स्टेट लेजिस्लेटिव असेंबली (MLAs) को उन टीचर्स के इंटर-डिस्ट्रिक्ट और इंट्रा-डिस्ट्रिक्ट ट्रांसफर की सिफ़ारिश करने का अधिकार दिया गया, जिनके लिए इस तरह की कोई कानूनी स्कीम नहीं है।जस्टिस दीक्षित कृष्ण श्रीपद की बेंच ने ज़ोर देकर कहा कि पॉलिटिशियन्स और टीचर्स के बीच गैर-ज़रूरी सांठगांठ का समाज पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है।कोर्ट के शब्दों में–“इस तरह का विवादित लेटर, जिसमें MP/MLAs को टीचरों...

पोते के पालन-पोषण के लिए दादा-दादी का स्नेह अटूट अंग, उन्हें भी मुलाकात का अधिकार: ओडिशा हाईकोर्ट

ओडिशा हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसले में एक दो वर्षीय बच्चे के पिता और दादा-दादी को उससे मिलने का अधिकार प्रदान किया। न्यायालय ने कटक फैमिली कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मुलाकात के अधिकार की याचिका को खारिज कर दिया गया था।जस्टिस संजय कुमार मिश्रा की एकल पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चे के सर्वांगीण विकास के लिए दादा-दादी और पोते-पोती के बीच भावनात्मक बंधन और स्नेह महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने कहा कि भारतीय समाज में दादा-दादी बच्चों के पालन-पोषण का एक अभिन्न अंग होते हैं और...

बैंक सेवानिवृत्त कर्मचारी के पेंशन खाते से एकतरफा राशि नहीं काट सकता: उड़ीसा हाईकोर्ट

उड़ीसा हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी बैंक को यह अधिकार नहीं है कि वह सेवानिवृत्त कर्मचारी के पेंशन खाते से एकतरफा पैसा काट ले सिर्फ इसलिए कि उसने किसी ऋण के लिए गारंटी दी थी।जस्टिस संजीब कुमार पाणिग्रही ने कहा कि पेंशन खाते से बिना नोटिस या सुनवाई के पैसा काटना प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है। बैंक को कम से कम कारण बताने का अवसर देना चाहिए था। मामला एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी से जुड़ा था, जिसने अपनी पत्नी के वाहन और कार ऋणों में गारंटर के रूप में हस्ताक्षर किए थे। फरवरी 2024 में बैंक ने उनके और...