आध्रं प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला: पिता की सहमति के बिना सिंगल मदर भी कर सकती है बच्चे के पासपोर्ट के लिए आवेदन, बशर्ते...
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि एक सिंगल मदर अपने नाबालिग बच्चे के पासपोर्ट के लिए पिता की सहमति या हस्ताक्षर के बिना भी आवेदन करने की हकदार है, बशर्ते पासपोर्ट नियमों के तहत निर्धारित घोषणाएँ जमा की गई हों।पासपोर्ट नियम, 1980 के तहत—विशेष रूप से पासपोर्ट आवेदन पत्र भरने के लिए दिशानिर्देशों के कॉलम 16 और पासपोर्ट मैनुअल/दिशानिर्देशों के क्लॉज़ 4.8 के तहत—एक सिंगल पेरेंट (एकल अभिभावक) निर्धारित हलफनामा/घोषणाएं जमा करके दूसरे अभिभावक की सहमति के बिना भी अपने नाबालिग बच्चे के पासपोर्ट के...
गंभीर जालसाज़ी के मामलों में सुरक्षा उपायों के साथ सार्वजनिक की जा सकती है Aadhaar की जानकारी: आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि जालसाज़ी के गंभीर आरोपों वाले मामलों की आपराधिक जांच के लिए ज़रूरी सुरक्षा उपायों के साथ आधार से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक की जा सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जालसाज़ी के आरोपी व्यक्ति को अगर उसने अपराध किया तो वह अपनी निजता के अधिकार की सुरक्षा के आधार पर बच नहीं सकता।चीफ जस्टिस लीसा गिल और जस्टिस आर. रघुनंदन राव की डिवीज़न बेंच ने कहा कि हालांकि आधार अधिनियम, 2016 की धारा 33(1) आधार की जानकारी सार्वजनिक करने पर सुरक्षा उपाय लागू करती है, लेकिन जब जांच के...
गंभीर दुराचार न होने पर पति का पत्नी के साथ फिर से रहने से इनकार करना, HMA की धारा 23(1)(a) के तहत 'गलती' नहीं मानी जाएगी: एपी हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि वैवाहिक अधिकारों की बहाली के आदेश (Decree) के बाद पति या पत्नी का साथ रहने से सिर्फ़ "इनकार" करना, हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 23(1)(a) के अर्थ में "गलती" नहीं माना जाएगा, जिससे उस पति या पत्नी को तलाक़ मांगने के अधिकार से वंचित किया जा सके।कोर्ट ने कहा कि धारा 23(1)(a) के अर्थ में 'गलती' माने जाने के लिए, जिस आचरण का आरोप लगाया गया, वह फिर से साथ रहने के प्रस्ताव पर सहमत होने से सिर्फ़ इनकार करने से कहीं ज़्यादा होना चाहिए। यह इतना गंभीर दुराचार होना...
संशोधित हिंदू उत्तराधिकार कानून के तहत बेटी को बराबरी का हक: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने बदली प्रारंभिक डिक्री
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि संशोधित हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 6 के तहत बेटी को पैतृक संपत्ति में बेटे के बराबर अधिकार प्राप्त है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि विभाजन वाद में अंतिम डिक्री की कार्यवाही लंबित है और संपत्ति का वास्तविक बंटवारा नहीं हुआ है, तो प्रारंभिक डिक्री में संशोधन किया जा सकता है।जस्टिस रवि नाथ तिलहरी और जस्टिस बालाजी मेडामल्ली की खंडपीठ ने कहा कि वर्ष 2005 में संशोधित धारा 6 के अनुसार बेटी भी सहभाजक संपत्ति में बेटे के समान अधिकार...
वैवाहिक विवादों में सुलह प्रक्रिया के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नहीं हो सकती: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि वैवाहिक विवादों में सुलह प्रक्रिया के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि सुलह का उद्देश्य पति-पत्नी को गोपनीय माहौल में आमने-सामने बातचीत का अवसर देना होता है, जिसे वर्चुअल माध्यम से प्रभावी ढंग से पूरा नहीं किया जा सकता।जस्टिस रवि नाथ तिलहरी ने यह फैसला अमेरिका के टेक्सास में रह रहे एक पति की याचिका खारिज करते हुए दिया। याचिकाकर्ता ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे सुलह...
किसी वकील को धमकाना स्वीकार्य नहीं: आंध्र प्रदेश के युवा वकीलों ने बार एसोसिएशन के रुख का किया विरोध
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के कई युवा वकीलों ने जज द्वारा जूनियर वकील को न्यायिक हिरासत में भेजने की धमकी देने के मामले में एसोसिएशन के रुख पर आपत्ति जताई है। युवा वकीलों ने कहा कि मामले को आपसी सहमति से सुलझा हुआ बताना बार के जूनियर सदस्यों की भावना को नहीं दर्शाता।दो सौ से अधिक युवा वकीलों ने एसोसिएशन के अध्यक्ष को पत्र लिखकर गहरी निराशा जताई। पत्र में कहा गया कि किसी भी वकील को केवल फाइल जोर से रखने पर न्यायिक हिरासत की धमकी देना उचित नहीं है।विवाद उस वीडियो क्लिप से जुड़ा है,...
NEET-UG 2026 आवेदन पोर्टल दोबारा खोलने से आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का इनकार, कहा- समयसीमा का सख्ती से पालन जरूरी
आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट ने NEET-UG 2026 के आवेदन पोर्टल को दोबारा खोलने या वैकल्पिक माध्यम से आवेदन स्वीकार करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक नोटिस और सूचना पुस्तिका में तय समयसीमा का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए और मानवीय आधार पर इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।चीफ़ जस्टिस लीसा गिल और जस्टिस निनाला जयसूर्या की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया।याचिकाकर्ता छात्रों ने कहा था कि उन्होंने आवेदन जमा करने का काम कॉलेज से जुड़े एक कंप्यूटर/DTP ऑपरेटर को सौंपा था, जिसने पैसे लेने...
बिना नोटिस तोड़फोड़ केवल आपात स्थिति में ही संभव, सामान्य नियम है सुनवाई का अधिकार: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि निजी संपत्ति को गिराने से पहले नगर निकायों के लिए सामान्य नियम के रूप में विधिसम्मत प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करना अनिवार्य है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना नोटिस और सुनवाई के ध्वस्तीकरण केवल अत्यावश्यक परिस्थितियों में ही किया जा सकता है।जस्टिस गन्नामनेनी रामकृष्ण प्रसाद ने यह टिप्पणी याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें याचिकाकर्ता ने सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए अपनी दो दुकानों को गिराए जाने की कार्रवाई को चुनौती दी थी।याचिकाकर्ता ने...
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कोमा में पड़े पति की पत्नी को अभिभावक नियुक्त किया, बैंक अकाउंट्स तक पहुंच की अनुमति दी
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने पत्नी (याचिकाकर्ता 1) को उसके पति का कानूनी अभिभावक नियुक्त किया—जो लगातार 'वेजिटेटिव स्टेट' (अचेत अवस्था) में है और जिसे आगे के इलाज की ज़रूरत है। इसके साथ ही कोर्ट ने पत्नी को इलाज और घर के खर्चों के लिए पति के बैंक अकाउंट्स तक पहुँचने की अनुमति दी।याचिकाकर्ता 1 का पति और उनके बच्चों (याचिकाकर्ता 2 और 3) का पिता लगातार 'वेजिटेटिव/कोमा' की स्थिति में है। उसके लगातार इलाज के लिए काफी पैसों की ज़रूरत है। चूंकि मरीज़ के इलाज के लगातार खर्च को उठाना उसके बैंक अकाउंट्स को...
बच्चे का हित सर्वोपरि, विदेशी अदालत का आदेश बाध्यकारी नहीं: ब्रिटिश कोर्ट का आदेश लागू करने की मांग आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने की खारिज
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि किसी भी नाबालिग बच्चे के मामले में उसका कल्याण सर्वोपरि होता है और विदेशी अदालतों के आदेश इस सिद्धांत से ऊपर नहीं हो सकते। अदालत ने ब्रिटेन की अदालत के आदेश को लागू कराने की मांग वाली पिता की याचिका खारिज की।जस्टिस चीकाटी मानवेंद्रनाथ रॉय और जस्टिस तुहिन कुमार गेडेला की खंडपीठ ने पिता द्वारा दायर हैबियस कॉर्पस याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस प्रकार की याचिका का उपयोग विदेशी अदालत के आदेश लागू कराने के लिए नहीं किया जा सकता।मामला एक...
मालिकाना हक के विवाद के कारण किसी कब्जेदार को बिजली की सप्लाई से मना नहीं किया जा सकता: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
इस बात पर ज़ोर देते हुए कि बिजली एक बुनियादी ज़रूरत है, आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ कोई सिविल केस पेंडिंग होने के आधार पर किसी उपभोक्ता की बिजली सप्लाई बंद नहीं की जा सकती, जब तक कि बिजली सप्लाई रोकने का कोई साफ़-साफ़ आदेश न हो।जस्टिस निनाला जयसूर्या 62 साल की एक महिला की दायर की गई रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इस महिला ने साल 2000 में एक प्रॉपर्टी खरीदी थी और वह उस जगह पर खुद रहते हुए (घरेलू इस्तेमाल के लिए) एक होटल (व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए) चला रही थी। हालांकि, तब एक विवाद...
माता-पिता से मिली पत्नी की संपत्ति पर पति का कोई अधिकार नहीं: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि यदि किसी हिंदू महिला को उसके माता-पिता से संपत्ति विरासत में मिलती है और उसकी मृत्यु बिना वसीयत के हो जाती है तो उस संपत्ति पर उसके पति या उसके ससुराल पक्ष का कोई अधिकार नहीं होगा।जस्टिस तरलाडा राजशेखर राव ने हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 15(2)(क) का हवाला देते हुए कहा,“यदि किसी महिला को संपत्ति उसके पिता या माता से मिली है और उसकी मृत्यु बिना संतान के होती है तो ऐसी संपत्ति उसके पिता के उत्तराधिकारियों को जाएगी न कि पति...
बालिग महिला अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहने के लिए स्वतंत्र, माता-पिता की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज: आंध्र प्रदेश हाइकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाइकोर्ट ने दोहराया कि यदि महिला बालिग है तो उसे अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहने का पूरा अधिकार है।अदालत ने माता-पिता द्वारा अपनी बेटी को वापस दिलाने के लिए दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज की।जस्टिस चीकाटी मानवेंद्रनाथ रॉय और जस्टिस तुहिन कुमार गेदेला की खंडपीठ ने कहा कि जब महिला ने अपनी इच्छा से विवाह किया है और पति के साथ रहने का निर्णय लिया है तो इसे अवैध हिरासत नहीं माना जा सकता।अदालत ने कहा,“चूंकि वह बालिग है और अपनी इच्छा से प्रतिवादी नंबर 7 से विवाह कर चुकी है तथा उसके...
CrPC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण सिर्फ़ एक बार नहीं, बार-बार और लगातार मिलने वाला अधिकार: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि मेंटेनेंस देने की ज़िम्मेदारी पूरी तरह से है। साथ ही बेरोज़गारी, पैसे की तंगी, या दूसरी कार्रवाई के पेंडिंग होने के बहाने इससे बचा नहीं जा सकता। इसके अलावा, भरण-पोषण का कानूनी आधार इस सिद्धांत पर टिका है कि पत्नी, नाबालिग बच्चे, और डिपेंडेंट माता-पिता उस व्यक्ति के स्टेटस और साधनों के हिसाब से गुज़ारा पाने के हकदार हैं, जो कानूनी तौर पर उनका गुज़ारा करने के लिए ज़िम्मेदार है।कोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण का अधिकार “एक बार का इनाम” नहीं है, बल्कि एक चलता-फिरता, बार-बार...
IPC की धारा 498A जैसे वैवाहिक मामलों में यांत्रिक तरीके से LOC जारी नहीं की जा सकती: आंध्र प्रदेश हाइकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाइकोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए (भारतीय न्याय संहिता की धारा 85) के तहत दर्ज वैवाहिक क्रूरता के मामलों में लुक-आउट सर्कुलर (LOC) जारी करने की प्रवृत्ति पर कड़ी आपत्ति जताई। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में एलओसी केवल अपवाद स्वरूप और विशेष परिस्थितियों में ही जारी की जा सकती है न कि यांत्रिक तरीके से।जस्टिस के. श्रीनिवास रेड्डी की एकलपीठ ने आरोपी के खिलाफ जारी LOC को निरस्त करते हुए कहा कि पुलिस को यह देखना आवश्यक है कि क्या आरोपी जांच में सहयोग कर रहा है या गिरफ्तारी...
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का निर्देश: ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए छह माह में लागू करें आरक्षण लागू
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक निर्णय में राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह ट्रांसजेंडर समुदाय को सार्वजनिक रोजगार में आरक्षण प्रदान करे और इसे छह महीनों के भीतर लागू करे। जस्टिस न्यापथी विजय ने कहा कि ट्रांसजेंडर समुदाय सामाजिक-आर्थिक रूप से अत्यधिक पिछड़ा है और समाज द्वारा उपेक्षित किए जाने के कारण राज्य पर नैतिक व संवैधानिक दायित्व है कि वह उनके लिए सकारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करे।न्यायालय ने टिप्पणी की,“भारत में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की समस्याओं की उत्पत्ति परिवार और समाज में उन्हें...
आर्थिक अक्षमता का बहाना नहीं चलेगा: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने ग्रेच्युटी रोकने को अनुच्छेद 21 का उल्लंघन बताया
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट फैसला सुनाया कि राज्य संस्थाएं अपने कर्मचारियों को सेवांत लाभ (Terminal Benefits) प्रदान करने की वैधानिक बाध्यता को पूरा करने के लिए आर्थिक अक्षमता को बहाना नहीं बना सकती हैं। कोर्ट ने कहा कि इन लाभों को जारी करने की जिम्मेदारी से मुंह मोड़ना संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन के अधिकार) का उल्लंघन है।जस्टिस महेश्वर राव कुंचेम ऐसे मामले की सुनवाई कर रहे थे जहां कृष्ण जिला सहकारी केंद्रीय बैंक (DCCB) जो कि अनुच्छेद 12 के तहत 'राज्य' के दायरे में आता है, उनके रिटायर...
सरकारी नौकरियों में ट्रांसजेंडर कम्युनिटी को आरक्षण देने पर राज्य से 'सकारात्मक निर्णय' की उम्मीद: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से अपेक्षा जताई कि वह ट्रांसजेंडर समुदाय को सार्वजनिक रोजगार में आरक्षण देने के संबंध में एक सकारात्मक निर्णय लेकर आएगी।जस्टिस बट्टू देवनंद और जस्टिस ए. हरी हरनाध शर्मा की खंडपीठ ने यह टिप्पणी उस समय की, जब अदालत को सूचित किया गया कि कर्नाटक सरकार ने वहां के हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप सार्वजनिक नौकरियों में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए विशेष आरक्षण की व्यवस्था की।राज्य के एडिशनल एडवोकेट जनरल ने अदालत से समय मांगा ताकि वह इस मुद्दे को राज्य सरकार के...
S.179(1) BNSS | पुलिस अधिकार के तौर पर मामले से परिचित 'किसी भी व्यक्ति' की उपस्थिति सुनिश्चित नहीं कर सकती: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 179(1) के तहत किसी पुलिस अधिकारी की "किसी भी व्यक्ति" की उपस्थिति सुनिश्चित करने की शक्ति क्षेत्रीय रूप से उसके अपने पुलिस थाने या आसपास के किसी थाने की सीमा के भीतर रहने वाले व्यक्तियों तक सीमित है। इसलिए यह शक्ति उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर रहने वाले व्यक्तियों तक विस्तारित नहीं होती है। अदालत ने आगे कहा कि कोई पुलिसकर्मी ऐसे व्यक्ति की उपस्थिति "अधिकार के तौर पर" सुनिश्चित नहीं कर सकता।BNSS की धारा 179(1) एक पुलिस...
आपराधिक मामलों में योगदान देने वाली लापरवाही का सिद्धांत लागू नहीं: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में यह स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों में योगदान देने वाली लापरवाही का सिद्धांत लागू नहीं होता। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई ड्राइवर लापरवाही से गाड़ी चलाकर किसी की मौत का कारण बनता है तो वह भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304A के तहत दंडनीय होगा भले ही पीड़ित की ओर से भी कुछ लापरवाही रही हो।जस्टिस मल्लिकार्जुन राव की एकल पीठ ने आंध्र प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (APSRTC) के एक बस चालक की अपील पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। बस चालक को एक 75 वर्षीय महिला...


















