आध्रं प्रदेश हाईकोर्ट

विशाखापत्तनम में गूगल-अडानी डेटा सेंटर प्रोजेक्ट को हाईकोर्ट में चुनौती, राज्य का दावा- पर्यावरण सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम

विशाखापत्तनम में प्रस्तावित गूगल-अडानी डेटा सेंटर को चुनौती देते हुए आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में PIL (जनहित याचिका) दायर की गई। इसमें प्रोजेक्ट के लिए पर्यावरण मंज़ूरी और 160 एकड़ ज़मीन के आवंटन पर सवाल उठाए गए।प्रस्तावित प्रोजेक्ट में श्री वराह लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी देवस्थानम, सिम्हाचलम की 160 एकड़ मंदिर की ज़मीन शामिल है। यह ज़मीन विशाखापत्तनम ग्रामीण मंडल के अदाविवरम और मुडासरलोवा गांवों में स्थित है। इस प्रोजेक्ट का दायरा विशाखापत्तनम और अनाकापल्ली ज़िलों तक फैला हुआ।पर्यावरण कार्यकर्ता और...

JJ Act | हाईकोर्ट ने बालिग़ बताकर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए गए नाबालिग़ को रिहा करने का आदेश दिया, SHO पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने एक नाबालिग़ लड़के की मदद की, जिसे पुलिस ने कथित तौर पर बालिग़ मानकर रेगुलर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया। कोर्ट ने उसे तुरंत न्यायिक हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया और कहा कि रिमांड का आदेश गैर-कानूनी, गलत और अधिकार क्षेत्र से बाहर है।ऐसा करते हुए कोर्ट ने संबंधित पुलिस स्टेशन के SHO पर ₹10,000 का जुर्माना भी लगाया।जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल और सुरक्षा) एक्ट, 2015 (JJ Act) में कानून के उल्लंघन के मामलों में शामिल बच्चों के साथ निपटने के लिए एक अलग और बच्चों के...

SC/ST Act | जाति-आधारित दुर्व्यवहार के मामले में चश्मदीद गवाह का स्वतंत्र और निष्पक्ष होना ज़रूरी: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि SC/ST Act के तहत जाति-आधारित दुर्व्यवहार के आरोप की जांच करते समय "पब्लिक व्यू" (सार्वजनिक रूप से देखे जाने) की शर्त पर विचार करते समय यह भी देखना चाहिए कि क्या कथित चश्मदीद गवाह स्वतंत्र और निष्पक्ष थे।इसके अनुसार, कोर्ट ने एक सब-इंस्पेक्टर और कॉन्स्टेबल के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द की। यह कार्यवाही एक हेड कॉन्स्टेबल की शिकायत पर शुरू हुई, जिसमें जाति-आधारित दुर्व्यवहार और आपराधिक धमकी का आरोप लगाया गया।कोर्ट ने कहा कि शिकायत की जांच अलग-थलग रहकर नहीं की जा...

डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर सरकारी आदेश को चुनौती नहीं दे सकते, वे राज्य के पदानुक्रमित फ़ैसले से बंधे हैं: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने ग्रेटर विशाखापत्तनम म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (GVMC) और डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर की उन याचिकाओं को खारिज किया, जिनमें 'रयोतवारी पट्टा' अधिकार देने वाले सरकारी आदेश (GO) को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि कानूनी कर्तव्यों को निभाने के लिए सरकार द्वारा नियुक्त डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर, सरकार के ही रिविजनल आदेश के खिलाफ रिट याचिका दायर नहीं कर सकते। [2026 LiveLaw (AP) 194]जस्टिस सुमति जगदम ने रूप चंद बनाम पंजाब राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा,"कानूनी...

सिविल मुकदमे की लंबितता से म्यूटेशन कार्यवाही पर रोक नहीं: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि भूमि के स्वामित्व से संबंधित सिविल मुकदमे के लंबित होने मात्र से राजस्व अधिकारियों की म्यूटेशन कार्यवाही पर रोक नहीं लगती।हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि राजस्व अधिकारी आंध्र प्रदेश अधिकार अभिलेख और पट्टादार पासबुक अधिनियम 1971 के तहत अपने वैधानिक अधिकारों का प्रयोग कर सकते हैं। हालांकि स्वामित्व के संबंध में सिविल कोर्ट का अंतिम फैसला राजस्व अभिलेखों में भी प्रभावी होगा।यह फैसला जस्टिस रवि नाथ तिलहरी और जस्टिस पुरुषोत्तम कुमार चिंतालापुड़ी...

निरोध आदेश के बाद गिरफ्तारी के लिए एडवायजर बोर्ड की राय जरूरी नहीं: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि निवारक निरोध के आदेश के तहत किसी व्यक्ति को गिरफ्तार या हिरासत में लेने के लिए एडवायजर बोर्ड की राय पहले प्राप्त करना अनिवार्य शर्त नहीं है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एडवाइजर बोर्ड की रिपोर्ट राज्य सरकार के लिए यह तय करने के लिए आवश्यक है कि निरोध आदेश की पुष्टि की जाए या व्यक्ति को रिहा किया जाए।जस्टिस रवि नाथ तिलहरी और जस्टिस सुभेंदु सामंत की खंडपीठ ने यह फैसला एक बंदी की मां द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।याचिका में आंध्र प्रदेश खतरनाक गतिविधियों में...

बिजली का अधिकार अनुच्छेद 21 का अभिन्न हिस्सा: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने बिजली कनेक्शन की अर्जी बहाल की

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि बिजली का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। कोर्ट ने फ्लोर मिल शुरू करने के लिए बिजली कनेक्शन मांगने वाले व्यक्ति की अर्जी को बिना कारण बताए “Permanently Rejected” करने के फैसले को रद्द कर दिया।जस्टिस महेश्वर राव कुंचेम ने विजयनगरम के एक निवासी की याचिका पर यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता ने फ्लोर मिल शुरू करने के लिए जरूरी शुल्क जमा कर ग्राम पंचायत से NOC भी प्राप्त किया था।कोर्ट ने कहा कि भले ही आवेदन में कोई कमी रही हो, बिजली...

नजरबंद व्यक्ति की रिहाई संबंधी अर्जी पर बिना वजह देरी करना असंवैधानिक, इससे हिरासत अवैध हो जाती है: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने व्यक्ति के निवारक निरुद्धीकरण (प्रिवेंटिव डिटेंशन) रद्द करते हुए कहा कि यदि सरकार नजरबंद व्यक्ति की रिहाई संबंधी अर्जी पर बिना उचित कारण के देरी से निर्णय लेती है, तो उसकी आगे की हिरासत अवैध हो जाती है।जस्टिस रवि नाथ तिलहरी और जस्टिस शुभेंदु सामंत की खंडपीठ ने यह फैसला नजरबंद व्यक्ति की पत्नी द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका पर सुनाया। याचिका में आंध्र प्रदेश खतरनाक गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम, 1986 के तहत जारी निरुद्धीकरण आदेश को चुनौती दी...

माता-पिता के साथ खुशी-खुशी रह रही बालिग महिला के साथ लिव-इन रिलेशनशिप का दावा करने वाला व्यक्ति हेबियस कॉर्पस याचिका दायर नहीं कर सकता: एपी हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि माता-पिता के साथ रह रही बालिग महिला के साथ रिश्ते का दावा करने वाले व्यक्ति की ओर से 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) की रिट याचिका तब तक स्वीकार्य नहीं है, जब तक कि यह दिखाने के लिए कोई शुरुआती सबूत (Prima Facie Material) न हो कि उसे गैर-कानूनी तरीके से कैद करके रखा गया।कोर्ट ने कहा कि माता-पिता के घर में अपनी माँ और भाई के साथ रह रही बेटी को आम तौर पर गैर-कानूनी कैद नहीं माना जा सकता।'हेबियस कॉर्पस' याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि रिश्ते का सबूत देने...

पति पर झूठे आपराधिक केस करना, जिनमें अंत में बरी होना पड़े, मानसिक क्रूरता: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि जीवनसाथी द्वारा झूठे आपराधिक केस दर्ज कराना, जिनमें अंततः बरी होना पड़ता है, मानसिक क्रूरता है और यह शादी खत्म करने का एक वैध आधार है।कोर्ट ने पति के पक्ष में दिए गए तलाक के आदेश को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ आपराधिक शिकायत दर्ज कराना क्रूरता नहीं है, लेकिन झूठे आरोपों के कारण जीवनसाथी को आपराधिक मुकदमे का सामना करने के लिए मजबूर करना और अंत में बरी हो जाना क्रूरता है।ट्रायल जज ने पत्नी को पति और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज कराने के कारण...

सीनियर सिटिज़न एक्ट के तहत संयुक्त परिवार की संपत्ति का बंटवारा ट्रांसफर नहीं, माता-पिता की देखभाल न करने पर इसे रद्द नहीं किया जा सकता: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007' के तहत संयुक्त परिवार की संपत्ति का बंटवारा "संपत्ति का ट्रांसफर" नहीं माना जाता है। इसलिए वरिष्ठ नागरिक माता-पिता की देखभाल न करने के आधार पर, इस अधिनियम की धारा 23 का इस्तेमाल करके ऐसे रजिस्टर्ड बंटवारे के दस्तावेज़ (partition deed) रद्द नहीं की जा सकती। [2026 LiveLaw (AP) 123]ऐसा करते हुए कोर्ट ने कहा कि जहां 'ट्रांसफर' का मतलब संपत्ति में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को अधिकार या हित सौंपना है,...

सिर्फ आपराधिक मामला लंबित होने से पासपोर्ट नवीनीकरण नहीं रोका जा सकता: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल किसी आपराधिक मामले के लंबित होने मात्र से पासपोर्ट के नवीनीकरण या जारी करने से इनकार नहीं किया जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक सक्षम आपराधिक अदालत किसी मामले में संज्ञान नहीं लेती, तब तक उसे पासपोर्ट कानून के तहत लंबित न्यायिक कार्यवाही नहीं माना जा सकता।जस्टिस सुब्बा रेड्डी सट्टी ने यह आदेश एक 16 वर्षीय किशोर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। किशोर ने पासपोर्ट जारी करने के लिए क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी के समक्ष आवेदन किया...

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला: पिता की सहमति के बिना सिंगल मदर भी कर सकती है बच्चे के पासपोर्ट के लिए आवेदन, बशर्ते...

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि एक सिंगल मदर अपने नाबालिग बच्चे के पासपोर्ट के लिए पिता की सहमति या हस्ताक्षर के बिना भी आवेदन करने की हकदार है, बशर्ते पासपोर्ट नियमों के तहत निर्धारित घोषणाएँ जमा की गई हों।पासपोर्ट नियम, 1980 के तहत—विशेष रूप से पासपोर्ट आवेदन पत्र भरने के लिए दिशानिर्देशों के कॉलम 16 और पासपोर्ट मैनुअल/दिशानिर्देशों के क्लॉज़ 4.8 के तहत—एक सिंगल पेरेंट (एकल अभिभावक) निर्धारित हलफनामा/घोषणाएं जमा करके दूसरे अभिभावक की सहमति के बिना भी अपने नाबालिग बच्चे के पासपोर्ट के...

गंभीर जालसाज़ी के मामलों में सुरक्षा उपायों के साथ सार्वजनिक की जा सकती है Aadhaar की जानकारी: आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि जालसाज़ी के गंभीर आरोपों वाले मामलों की आपराधिक जांच के लिए ज़रूरी सुरक्षा उपायों के साथ आधार से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक की जा सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जालसाज़ी के आरोपी व्यक्ति को अगर उसने अपराध किया तो वह अपनी निजता के अधिकार की सुरक्षा के आधार पर बच नहीं सकता।चीफ जस्टिस लीसा गिल और जस्टिस आर. रघुनंदन राव की डिवीज़न बेंच ने कहा कि हालांकि आधार अधिनियम, 2016 की धारा 33(1) आधार की जानकारी सार्वजनिक करने पर सुरक्षा उपाय लागू करती है, लेकिन जब जांच के...

गंभीर दुराचार न होने पर पति का पत्नी के साथ फिर से रहने से इनकार करना, HMA की धारा 23(1)(a) के तहत गलती नहीं मानी जाएगी: एपी हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि वैवाहिक अधिकारों की बहाली के आदेश (Decree) के बाद पति या पत्नी का साथ रहने से सिर्फ़ "इनकार" करना, हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 23(1)(a) के अर्थ में "गलती" नहीं माना जाएगा, जिससे उस पति या पत्नी को तलाक़ मांगने के अधिकार से वंचित किया जा सके।कोर्ट ने कहा कि धारा 23(1)(a) के अर्थ में 'गलती' माने जाने के लिए, जिस आचरण का आरोप लगाया गया, वह फिर से साथ रहने के प्रस्ताव पर सहमत होने से सिर्फ़ इनकार करने से कहीं ज़्यादा होना चाहिए। यह इतना गंभीर दुराचार होना...

संशोधित हिंदू उत्तराधिकार कानून के तहत बेटी को बराबरी का हक: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने बदली प्रारंभिक डिक्री

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि संशोधित हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 6 के तहत बेटी को पैतृक संपत्ति में बेटे के बराबर अधिकार प्राप्त है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि विभाजन वाद में अंतिम डिक्री की कार्यवाही लंबित है और संपत्ति का वास्तविक बंटवारा नहीं हुआ है, तो प्रारंभिक डिक्री में संशोधन किया जा सकता है।जस्टिस रवि नाथ तिलहरी और जस्टिस बालाजी मेडामल्ली की खंडपीठ ने कहा कि वर्ष 2005 में संशोधित धारा 6 के अनुसार बेटी भी सहभाजक संपत्ति में बेटे के समान अधिकार...

वैवाहिक विवादों में सुलह प्रक्रिया के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नहीं हो सकती: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि वैवाहिक विवादों में सुलह प्रक्रिया के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि सुलह का उद्देश्य पति-पत्नी को गोपनीय माहौल में आमने-सामने बातचीत का अवसर देना होता है, जिसे वर्चुअल माध्यम से प्रभावी ढंग से पूरा नहीं किया जा सकता।जस्टिस रवि नाथ तिलहरी ने यह फैसला अमेरिका के टेक्सास में रह रहे एक पति की याचिका खारिज करते हुए दिया। याचिकाकर्ता ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे सुलह...

किसी वकील को धमकाना स्वीकार्य नहीं: आंध्र प्रदेश के युवा वकीलों ने बार एसोसिएशन के रुख का किया विरोध

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के कई युवा वकीलों ने जज द्वारा जूनियर वकील को न्यायिक हिरासत में भेजने की धमकी देने के मामले में एसोसिएशन के रुख पर आपत्ति जताई है। युवा वकीलों ने कहा कि मामले को आपसी सहमति से सुलझा हुआ बताना बार के जूनियर सदस्यों की भावना को नहीं दर्शाता।दो सौ से अधिक युवा वकीलों ने एसोसिएशन के अध्यक्ष को पत्र लिखकर गहरी निराशा जताई। पत्र में कहा गया कि किसी भी वकील को केवल फाइल जोर से रखने पर न्यायिक हिरासत की धमकी देना उचित नहीं है।विवाद उस वीडियो क्लिप से जुड़ा है,...

NEET-UG 2026 आवेदन पोर्टल दोबारा खोलने से आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का इनकार, कहा- समयसीमा का सख्ती से पालन जरूरी

आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट ने NEET-UG 2026 के आवेदन पोर्टल को दोबारा खोलने या वैकल्पिक माध्यम से आवेदन स्वीकार करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक नोटिस और सूचना पुस्तिका में तय समयसीमा का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए और मानवीय आधार पर इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।चीफ़ जस्टिस लीसा गिल और जस्टिस निनाला जयसूर्या की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया।याचिकाकर्ता छात्रों ने कहा था कि उन्होंने आवेदन जमा करने का काम कॉलेज से जुड़े एक कंप्यूटर/DTP ऑपरेटर को सौंपा था, जिसने पैसे लेने...