पटना हाईकोट

'सिर्फ इसलिए कि कानूनी राय गलत निकली, किसी वकील पर आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता': पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि किसी वकील पर केवल इसलिए आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता, क्योंकि पेशेवर कर्तव्यों के दौरान दी गई उसकी कानूनी राय बाद में गलत साबित हो जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आपराधिक जिम्मेदारी तब बन सकती है, जब कोई वकील धोखाधड़ी में मदद करने के इरादे से, दूसरों के साथ मिलकर जानबूझकर कोई गलत या गुमराह करने वाली राय दे।जस्टिस राणा विक्रम सिंह की सिंगल बेंच ने UCO बैंक के एक पैनल वकील के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की। उस वकील पर बैंक लोन धोखाधड़ी में शामिल होने का आरोप था,...

पटना हाईकोर्ट ने 8 साल पहले दी गई अग्रिम जमानत रद्द की, कहा - शपथ पर दिया गया झूठा बयान माफ नहीं किया जा सकता
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि जो व्यक्ति अग्रिम जमानत मांगते समय शपथ पर झूठा बयान देता है, वह यह तर्क देकर अपनी गलत बयानी को सही नहीं ठहरा सकता कि जमानत अर्जी के साथ लगी FIR में सही तथ्य पहले ही बता दिए गए। कोर्ट ने लगभग आठ साल पहले दी गई अग्रिम जमानत रद्द कr। कोर्ट ने कहा कि बाद में कोई गलत काम न करने का मतलब यह नहीं है कि झूठ बोलकर हासिल किया गया आदेश वैध हो जाएगा।जस्टिस संदीप कुमार की सिंगल बेंच ने कहा कि जो व्यक्ति कोर्ट से कोई विशेष राहत (Discretionary Relief) मांगता है, उसे सभी जरूरी तथ्यों को...

जमीन अधिग्रहण के 50 साल बाद मीरा कुमार को 2013 के कानून के तहत मुआवजे का हक: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने लोकसभा की पूर्व स्पीकर मीरा कुमार को वर्ष 1976 में राज्य सरकार द्वारा अधिग्रहित जमीन के लिए उचित मुआवजा और पारदर्शिता के साथ भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013 के तहत मुआवजा पाने का हकदार माना।अदालत ने पाया कि बिहार भूमि सुधार अधिनियम, 1950 की धारा 4(एच) के तहत कार्यवाही शुरू करने से पहले कलेक्टर को यह साबित करना जरूरी है कि संबंधित जमीन राज्य सरकार में निहित हो चुकी है। ऐसा किए बिना कलेक्टर को इस धारा के तहत कार्यवाही शुरू करने का अधिकार नहीं है। जस्टिस...

अनुमेय कोडीन सीमा के साथ कफ सिरप NDPS Act के तहत प्रतिबंधित नहीं; पुलिस प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रही है: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने NDPS मामले में आरोपी को यह देखते हुए जमानत दी कि 2.5% की अनुमेय सांद्रता से कम कोडीन वाले कफ सिरप नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस अधिनियम (NDPS Act) के तहत प्रतिबंधित दायरे में नहीं आते हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि पुलिस NDPS Act के तहत ड्रग्स और कॉस्मेटिक्स अधिनियम के अंतर्गत आने वाले मामलों को दर्ज करके "प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रही है"।जस्टिस अशोक कुमार पांडे NDPS Act की धारा 21 (सी), 8 (सी) और 29 के तहत दर्ज मामले के संबंध में दायर जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे।...

मौखिक गवाही के बिना दस्तावेजी साक्ष्य खुद को साबित नहीं कर सकते: पटना हाईकोर्ट ने बर्खास्त बैंक कर्मचारी को बहाल करने का दिया आदेश
पटना हाईकोर्ट ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के उस कर्मचारी की बर्खास्तगी रद्द की, जिसे भर्ती परीक्षा में कथित प्रतिरूपण यानी किसी दूसरे व्यक्ति की जगह परीक्षा देने के आरोप में नौकरी से हटाया गया।जस्टिस कुमार मनीष की एकल पीठ ने कहा कि विभागीय जांच में आरोप साबित करने के लिए जिस प्रमुख साक्ष्य पर भरोसा किया गया, उसे उचित तरीके से साबित ही नहीं किया गया। कोर्ट कर्मचारी की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें 31 मार्च, 2018 के बर्खास्तगी आदेश को चुनौती दी गई। इस आदेश के तहत कर्मचारी को सेवा से हटाने...

युवाओं को जिंदगी भर अपराधी नहीं माना जाना चाहिए: नाबालिग रहते दर्ज मामले के कारण कांस्टेबल की नियुक्ति रद्द करने पर पटना हाईकोर्ट ने पुनर्विचार का दिया आदेश
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि किसी उम्मीदवार द्वारा आपराधिक मामले की जानकारी छिपाना नियुक्ति के मामले में प्रासंगिक हो सकता है, लेकिन अधिकारियों को यह भी देखना होगा कि छिपाई गई जानकारी वास्तव में कितनी महत्वपूर्ण थी। इस संबंध में निर्णय लेते समय उम्मीदवार की उम्र, आरोपों की प्रकृति और मामले की परिस्थितियों पर निष्पक्षता से विचार करना जरूरी है। अदालत ने कहा कि कम उम्र में हुई गलती के आधार पर किसी युवा को जीवनभर अपराधी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।जस्टिस पार्थ सारथी की सिंगल बेंच राहुल कुमार की...

बिहार पेंशन नियमों के तहत रिटायरमेंट के बाद 4 साल से पुरानी गड़बड़ी के लिए विभागीय कार्यवाही पर रोक: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी सरकारी कर्मचारी के रिटायरमेंट के बाद विभागीय कार्यवाही शुरू की जाती है तो बिहार पेंशन नियमों का नियम 43(b) ऐसी कार्यवाही शुरू करने से रोकता है, अगर वह घटना कार्यवाही शुरू होने से चार साल से ज़्यादा पहले हुई हो।जस्टिस कुमार मनीष की सिंगल जज बेंच उमेश कुमार वर्मा की रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उन्होंने अपने खिलाफ शुरू की गई विभागीय कार्यवाही, बाद में उसे बिहार पेंशन नियमों के नियम 43(b) के तहत बदलने, जांच की कार्यवाही और उनकी पेंशन से 75% कटौती के आदेश को...

कोविड-19 से मौत पर मुआवजे का दावा अस्पताल की रिपोर्ट में तारीख की गड़बड़ी के आधार पर खारिज नहीं कर सकते: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा है कि कोविड-19 से हुई मौत के मामले में अनुग्रह राशि (Ex-gratia Compensation) के वास्तविक दावे को केवल अस्पताल की प्रयोगशाला रिपोर्ट में दर्ज तारीख में विसंगति के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब अस्पताल स्वयं इस बात की पुष्टि कर चुका हो कि मृतक की कोविड-19 जांच रिपोर्ट पॉजिटिव थी।जस्टिस आलोक कुमार की एकल पीठ ने शांति देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। याचिकाकर्ता ने कोविड-19 महामारी के दौरान अपने पति राम भजन चौधरी की मृत्यु के बाद मुआवजे की मांग की...

हालात में बदलाव के बिना सिर्फ़ 6 महीने बाद अर्ज़ी दोबारा लगाने की छूट देकर नाबालिग की ज़मानत अर्ज़ी खारिज नहीं की जा सकती: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि अगर ट्रायल पूरा नहीं हुआ तो चिल्ड्रन कोर्ट किसी नाबालिग की ज़मानत अर्ज़ी को सिर्फ़ इस आधार पर खारिज नहीं कर सकता कि उसे छह महीने बाद अर्ज़ी दोबारा लगाने की छूट दी जा रही है। कोर्ट ने माना कि जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल और सुरक्षा) एक्ट, 2015 के तहत ऐसा तरीका अपनाना सही नहीं है।जस्टिस जितेंद्र कुमार की सिंगल जज बेंच नाबालिग की अपील पर सुनवाई कर रही थी। यह अपील चिल्ड्रन कोर्ट के 02.01.2026 के उस आदेश के खिलाफ है, जो J.E. ट्रायल नंबर 18/2025 (सिवान मुफस्सिल P.S. केस...

पहले ही जमानत पर रिहा हो चुका आरोपी दोबारा अग्रिम जमानत नहीं मांग सकता, सरेंडर कर नियमित जमानत लेनी होगी: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि जो आरोपी अग्रिम जमानत मिलने के बाद संबंधित अदालत में सरेंडर कर जमानत बांड जमा कर चुका है और जमानत पर रिहा हो गया, वह बाद में दोबारा अग्रिम जमानत की मांग नहीं कर सकता। ऐसे आरोपी को अदालत में सरेंडर कर नियमित जमानत के लिए आवेदन करना होगा।जस्टिस जितेंद्र कुमार की एकलपीठ गौरा थाना कांड संख्या 54/2024 से जुड़े अग्रिम जमानत आवेदन पर सुनवाई कर रही थी। यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 384 के तहत दर्ज किया गया था।याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल...

JJ Act के तहत सज़ा कम होने पर पीड़ित अपील नहीं कर सकता; सही रास्ता 'रिविज़न' है: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि कोई पीड़ित या शिकायत करने वाला व्यक्ति सज़ा कम होने के आधार पर उसे बढ़ाने के लिए अपील नहीं कर सकता। इसके बजाय, सही तरीका जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल और सुरक्षा) एक्ट, 2015 (JJ Act) की धारा 102 के तहत क्रिमिनल रिविज़न (आपराधिक पुनरीक्षण) याचिका दायर करना है।जस्टिस जितेंद्र कुमार की सिंगल जज बेंच, छपरा (सारण) में पहले एडिशनल सेशंस जज (Children Court Case No. 05 of 2023) द्वारा 26.03.2026 को पारित आदेश के खिलाफ शिकायतकर्ता द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी।चिल्ड्रन...

गैंगरेप मामले में FIR में 2 महीने की देरी से पूरी घटना खारिज नहीं हो सकती: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा है कि गैंगरेप के मामले में FIR दर्ज करने में दो महीने की देरी इतनी असाधारण नहीं है कि केवल इसी आधार पर पूरी घटना को अविश्वसनीय मान लिया जाए।जस्टिस चंद्रशेखर झा की एकल पीठ आरोपी की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें विशेष न्यायाधीश, SC/ST, पटना द्वारा 27 नवंबर 2018 को लिए गए संज्ञान के आदेश को चुनौती दी गई थी। आरोपी के खिलाफ IPC की धारा 376(D), SC/ST Act की धारा 3(2)(va) और IT Act की धारा 67 के तहत मामला दर्ज था।अभियोजन के अनुसार, पीड़िता अपने मामा के घर जा रही थी, तभी...

बिना गवाहों, दस्तावेज़ों और क्रॉस-एग्जामिनेशन के विभागीय जांच के आधार पर बड़ी सज़ा नहीं दी जा सकती: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी विभागीय जांच के आधार पर बड़ी सज़ा नहीं दी जा सकती, जिसमें न तो गवाहों से पूछताछ की गई, न ही दस्तावेज़ ठीक से पेश या दिखाए गए और आरोपी कर्मचारी को क्रॉस-एग्जामिनेशन (जिरह) का उचित मौका नहीं दिया गया।जस्टिस कुमार मनीष की सिंगल जज बेंच पवन कुमार की एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसके तहत उन्हें एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद से बिहार इंजीनियरिंग सर्विस के बेसिक ग्रेड, यानी असिस्टेंट इंजीनियर के पद पर वापस भेज दिया गया।याचिकाकर्ता...

अरेस्ट मेमो में गिरफ्तारी के कारण समझाने की बात लिखना पर्याप्त नहीं, लिखित में देना जरूरी: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि अरेस्ट मेमो में केवल यह दर्ज कर देना कि गिरफ्तारी करने वाले अधिकारी ने आरोपी को गिरफ्तारी के कारण समझा दिए, संविधान के अनुच्छेद 22 की अनिवार्यता का पालन नहीं माना जा सकता। गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में उपलब्ध कराना जरूरी है।कोर्ट ने कहा कि अरेस्ट मेमो के तयशुदा प्रारूप में की गई ऐसी औपचारिक प्रविष्टि, जिसमें गिरफ्तारी के कारण बताए जाने का उल्लेख हो, लिखित रूप में गिरफ्तारी के आधार उपलब्ध कराने की संवैधानिक और वैधानिक...

'सिर्फ़ सिग्नेचर में अंतर से OMR के साथ छेड़छाड़ साबित नहीं होती': पटना हाईकोर्ट ने NEET उम्मीदवारों की याचिकाएं खारिज कीं
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि उम्मीदवार के एडमिट कार्ड और OMR आंसर शीट पर मौजूद सिग्नेचर में सिर्फ़ अंतर होने से यह साबित नहीं होता कि OMR शीट के साथ छेड़छाड़ की गई या उसे बदल दिया गया। ऐसा तब और भी लागू होता है, जब परीक्षा अथॉरिटी ओरिजिनल OMR रिकॉर्ड पेश करती है और हेरफेर का कोई ठोस सबूत नहीं होता।जस्टिस हरीश कुमार की सिंगल जज बेंच संविधान के आर्टिकल 226 के तहत NEET-UG 2026 उम्मीदवारों की उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा रखे गए मार्क्स और OMR आंसर शीट को...

सोशल मीडिया पर यूनिवर्सिटी में कथित गड़बड़ियों के बारे में किया पोस्ट: पटना हाईकोर्ट ने स्टूडेंट का अनिश्चितकालीन निष्कासन रद्द किया
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि यूनिवर्सिटी किसी स्टूडेंट को जांच रिपोर्ट दिए बिना और प्रस्तावित सज़ा पर जवाब देने का खास मौका दिए बिना उसे अनिश्चित काल के लिए निष्कासित नहीं कर सकती। कोर्ट ने माना कि ऐसी कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।जस्टिस हरीश कुमार की सिंगल जज बेंच ने महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी, पूर्वी चंपारण के मीडिया स्टडीज़ विभाग के पहले सेमेस्टर के पोस्ट-ग्रेजुएट स्टूडेंट की याचिका पर सुनवाई की। छात्र ने यूनिवर्सिटी से अपने सस्पेंशन और उसके बाद हुए निष्कासन को...

रुटीन FIR में शामिल होना ही हथियार का लाइसेंस न देने का आधार नहीं हो सकता, जब तक कि सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा साबित न हो: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि किसी आवेदक के खिलाफ़ सिर्फ़ आम FIR दर्ज होने या उसमें शामिल होने के आधार पर ही हथियार का लाइसेंस देने से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। इसके लिए हथियार के गलत इस्तेमाल, हिंसा या सार्वजनिक सुरक्षा को सीधे खतरे का ठोस सबूत होना ज़रूरी है।जस्टिस आलोक कुमार की सिंगल जज बेंच बिल्डर और 'बिग्रहपुरम डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड' के डायरेक्टर की रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उन्होंने नॉन-प्रोहिबिटेड बोर रिवॉल्वर/पिस्टल के लिए हथियार का लाइसेंस न दिए जाने के फैसले को चुनौती...

उनमें 'SC/ST लोगों को परेशान करने की मानसिकता' है: पटना हाईकोर्ट ने स्कॉलर के खिलाफ हटाई डीएम की टिप्पणी
पटना हाईकोर्ट ने अर्ध-न्यायिक अधिकारियों को मुकदमेबाजी करने वालों के खिलाफ व्यक्तिगत, अप्रासंगिक या पक्षपाती टिप्पणियां करने के खिलाफ चेतावनी दी। यह चेतावनी तब दी गई जब जिला मजिस्ट्रेट ने एक संस्कृत विद्वान के बारे में कहा कि उनमें SC/ST समुदाय के लोगों को "परेशान करने की मानसिकता" है।जस्टिस आलोक कुमार की सिंगल जज डॉ. देव नारायण झा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, 2015 के तहत जिला मजिस्ट्रेट-सह-द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी द्वारा उनके...

'हैरान करने वाला': पटना हाईकोर्ट ने असम से पटना तक 65 किलो गांजा ले जाने वाले नाबालिगों को ज़मानत दी, जांच के आदेश दिए
पटना हाईकोर्ट ने 65 किलो से ज़्यादा गांजा के साथ पकड़े गए दो नाबालिगों को ज़मानत दे दी है। साथ ही, कोर्ट ने इस बात की जांच के आदेश दिए कि वे बिना पहचान-पत्र या गाड़ी के कागज़ात के गुवाहाटी (असम) से पटना तक इतनी बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित सामान (गांजा) लेकर कैसे पहुंचे।जस्टिस अरुण कुमार झा की सिंगल जज बेंच DRI के मामले से जुड़ी दो क्रिमिनल रिविज़न याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इस मामले में एक महिंद्रा TUV गाड़ी के चेसिस में बनी गुप्त जगह और चेसिस व फुटस्टेप के बीच छिपाए गए 109 प्लास्टिक पैकेट से...

विभागीय जांच में गलत काम का ठोस सबूत नहीं, अखबार की बिना पुष्टि वाली रिपोर्ट: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि विभागीय कार्यवाही में गलत काम (Misconduct) का ठोस सबूत अखबार की ऐसी रिपोर्ट नहीं हो सकती, जिसकी पुष्टि न हुई हो, खासकर तब जब उसी समय के सरकारी रिकॉर्ड उस रिपोर्ट के उलट बात कहते हों।जस्टिस कुमार मनीष की सिंगल जज बेंच पंकज कुमार की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पंकज कुमार ने गया के सरकारी ITI महकार में प्रिंसिपल-सह-सेंटर सुपरिटेंडेंट के तौर पर तैनाती के दौरान उन पर चली विभागीय कार्यवाही और दी गई सज़ा को चुनौती दी थी।जुलाई 2018 में हुए ऑल-इंडिया ट्रेड टेस्ट (AITT) से पहले...
