पटना हाईकोट
साथ रहने या सार्थक संपर्क के बिना ससुराल पक्ष पर क्रूरता के आरोप स्वभावतः अविश्वसनीय: पटना हाइकोर्ट
पटना हाइकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि पति के रिश्तेदारों के साथ न तो साझा निवास हो और न ही कोई सार्थक संपर्क, तो ससुराल पक्ष के खिलाफ क्रूरता के आरोप अपने आप में अविश्वसनीय हो जाते हैं। हाइकोर्ट ने इस आधार पर आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।यह मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धाराओं 85, 115(2), 118(1) और 191(2) के तहत दर्ज एक शिकायत से जुड़ा था। ट्रायल कोर्ट द्वारा संज्ञान लिए जाने के आदेश को चुनौती देते हुए पति के रिश्तेदारों ने हाइकोर्ट का...
मेडिकल कॉलेज फैकल्टी के लिए आधार और GPS आधारित अटेंडेंस सिस्टम निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं: पटना हाईकोर्ट
एक महत्वपूर्ण फैसले में पटना हाईकोर्ट ने बिहार के मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी सदस्यों की अटेंडेंस दर्ज करने के लिए आधार-आधारित फेशियल ऑथेंटिकेशन और GPS लोकेशन शेयरिंग की आवश्यकता को सही ठहराया।जस्टिस बिबेक चौधरी की सिंगल जज बेंच एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एक पब्लिक नोटिस को चुनौती दी गई। इस नोटिस में राज्य के मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों में फेस-आधारित आधार ऑथेंटिकेशन और GPS-सक्षम अटेंडेंस को अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्देश दिया गया।याचिकाकर्ता अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों और...
अनुशासनात्मक अथॉरिटी एक ही आदेश से एक साथ बड़ी और छोटी सज़ा नहीं दे सकती: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि एक बड़ी सज़ा और एक छोटी सज़ा को एक ही मिले-जुले आदेश में "पैक" करके एक साथ नहीं दिया जा सकता।जस्टिस संदीप कुमार की सिंगल जज बेंच एक डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सज़ा के आदेश को चुनौती दी गई। इस आदेश के तहत उन्हें पांच इंक्रीमेंट रोकने की सज़ा दी गई, जिसका असर आगे भी होता, साथ ही प्रमोशन की तय तारीख से पांच साल के लिए प्रमोशन पर रोक भी लगाई गई।याचिकाकर्ता एक सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर है। उनको एक कथित अवैध खनन मामले में...
नाबालिग को 2.5 महीने तक गैर-कानूनी हिरासत में रखने के लिए ₹5 लाख मुआवज़ा देने का आदेश, हाईकोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाई
पटना हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते एक नाबालिग को ₹5,00,000/- का मुआवज़ा देने का आदेश दिया, जिसे बिहार पुलिस ने गैर-कानूनी तरीके से गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने इस काम को भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उसके मौलिक अधिकार का घोर उल्लंघन बताया।जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस रितेश कुमार की डिवीजन बेंच ने कहा कि गिरफ्तारी कानून की तय प्रक्रिया की पूरी तरह से अनदेखी करके सिर्फ़ डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (DIG) के कहने पर की गई, जबकि नाबालिग को पहले ही चार्जशीट में बरी कर दिया गया।हाईकोर्ट ने...
बिहार उत्पाद अधिनियम | शराब के साथ जब्त किराये की कार की रिहाई पर पटना हाईकोर्ट ने जुर्माना 50% से घटाकर 30% किया
पटना हाईकोर्ट ने लगभग 318 लीटर शराब के साथ जब्त की गई एक किराये की कार की रिहाई के लिए लगाए गए 50 प्रतिशत जुर्माने को घटाकर 30 प्रतिशत कर दिया। साथ ही न्यायालय ने जुर्माने के अतिरिक्त लगाए गए 3 प्रतिशत शुल्क को अवैध करार देते हुए निरस्त कर दिया।जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस सौरेन्द्र पांडेय की खंडपीठ ने कहा कि वाहन का मालिक इस मामले में अभियुक्त नहीं है और जब्ती से संबंधित आदेशों में सुधार की आवश्यकता है।न्यायालय ने कहा,“यह न्यायालय यह उचित और न्यायसंगत समझता है कि दंडादेश में संशोधन करते...
अंतिम आदेश के बाद समीक्षा का अधिकार नहीं: पटना हाईकोर्ट ने 10 साल बाद पंचायत शिक्षिकाओं को बहाल किया
यह मामला लगभग दस वर्ष लंबी कानूनी लड़ाई के बाद न्याय दिलाने का उदाहरण प्रस्तुत करता है। पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में राज्य स्तर के ट्रिब्यूनलों के आदेशों को रद्द करते हुए बक्सर की दो महिला पंचायत शिक्षिकाओं की सेवा बहाल कर दी। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि पुनर्विचार (रीव्यू) की शक्ति किसी न्यायिक या अर्द्ध-न्यायिक प्राधिकरण का अंतर्निहित अधिकार नहीं होती, बल्कि यह केवल तभी प्रयोग की जा सकती है जब किसी क़ानून में स्पष्ट रूप से ऐसी शक्ति प्रदान की गई हो। न्यायमूर्ति आलोक कुमार सिन्हा की एकल-पीठ राज्य...
हड़ताल में भागीदारी मात्र से बिना जांच सेवा समाप्त नहीं की जा सकती: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी की केवल हड़ताल में भागीदारी, अपने आप में, उसकी सेवा समाप्त करने का आधार नहीं बन सकती, खासकर तब जब हड़ताल को अवैध घोषित नहीं किया गया हो और न ही कर्मचारी के खिलाफ किसी प्रकार का कदाचार सिद्ध किया गया हो।अदालत ने यह भी कहा कि हड़ताल के दौरान अनुपस्थिति को कदाचार या सेवा परित्याग मानने से पहले विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है, जिसमें कारण बताओ नोटिस, आरोप निर्धारण और विधिवत घरेलू जांच शामिल है।जस्टिस आलोक कुमार सिन्हा की एकल पीठ मगध महिला...
सात साल या उससे ज़्यादा की सज़ा वाले अपराधों के लिए भी अग्रिम ज़मानत याचिकाएं सुनवाई योग्य: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने साफ़ किया कि अग्रिम ज़मानत याचिका पर फ़ैसला करने का अधिकार रखने वाली सेशंस कोर्ट का यह कर्तव्य है कि वह याचिका पर गुण-दोष के आधार पर फ़ैसला करे, या तो उसे मंज़ूर करे या खारिज करे, और ऐसा किए बिना वह ऐसी किसी याचिका का निपटारा नहीं कर सकती। कोर्ट ने आगे साफ़ किया कि सिर्फ़ इसलिए अग्रिम ज़मानत याचिकाएं सुनने पर कोई कानूनी रोक नहीं है, क्योंकि कथित अपराध में सात साल या उससे ज़्यादा की जेल की सज़ा हो सकती है।ये टिप्पणियां जस्टिस जितेंद्र कुमार की सिंगल जज बेंच ने आपराधिक विविध...
पटना हाईकोर्ट ने CBI बनाम मीर उस्मान मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद स्पीडी ट्रायल के लिए गाइडलाइंस जारी की
12 दिसंबर 2025 को जारी सर्कुलर में पटना हाईकोर्ट ने सभी ट्रायल कोर्ट को प्रशासनिक निर्देश जारी किए, जिनका मकसद सुनवाई को तेज़ी से पूरा करना है।यह सर्कुलर CBI बनाम मीर उस्मान मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पालन में जारी किया गया। इसमें साफ तौर पर SLP (Crl.) नंबर 969/2025 (सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन बनाम मीर उस्मान @ आरा @ मीर उस्मान अली) में 22 सितंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पैराग्राफ 37 का ज़िक्र है, जिसमें कोर्ट ने हाईकोर्ट को ट्रायल कोर्ट्स के लिए उचित प्रशासनिक गाइडलाइंस...
[Bihar Excise Act] अगर सह-यात्री के पास शराब मिलती है तो मोटरसाइकिल मालिक के खिलाफ कोई अनुमान नहीं: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि जहां अवैध शराब सह-आरोपी व्यक्ति से बरामद की जाती है, न कि वाहन के किसी हिस्से से, तो यह नहीं कहा जा सकता कि मोटरसाइकिल का इस्तेमाल बिहार निषेध और उत्पाद शुल्क अधिनियम (Bihar Excise Act) के तहत अपराध करने में किया गया। नतीजतन, अधिनियम की धारा 32 के तहत वाहन के मालिक के खिलाफ कानूनी अनुमान तब तक नहीं लगाया जा सकता, जब तक अभियोजन पक्ष यह साबित न कर दे कि वाहन का इस्तेमाल कथित अपराध करने में किया गया।पटना हाईकोर्ट की जस्टिस जितेंद्र कुमार की सिंगल जज बेंच...
सर्विस लॉ में 'डीम्ड गिल्ट' का कोई कॉन्सेप्ट नहीं: पटना हाईकोर्ट ने इंटेलिजेंस इकट्ठा न कर पाने के आरोप में पुलिस वाले की सज़ा रद्द की
पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि सर्विस लॉ ज्यूरिस्प्रूडेंस में 'डीम्ड गिल्ट' का कोई कॉन्सेप्ट नहीं है। एक पुलिस ऑफिसर पर लगाई गई सज़ा रद्द कर दी।जस्टिस संदीप कुमार वाली सिंगल जज बेंच पुलिस ऑफिसर की रिट पिटीशन पर सुनवाई कर रही थी, जिसे दो साल के लिए सैलरी इंक्रीमेंट रोकने की सज़ा दी गई। यह मामला सीतामढ़ी ज़िले के सुरसंड पुलिस स्टेशन के पास से एक्साइज़ डिपार्टमेंट द्वारा लगभग 4767.22 लीटर गैर-कानूनी शराब ज़ब्त करने से जुड़ा है।याचिकाकर्ता पर आरोप था कि वह इंटेलिजेंस इकट्ठा करने और बिहार...
पहले जांच अधिकारी की गवाही न होना अभियोजन के लिए घातक नहीं, यदि घटना स्थल अन्य साक्ष्यों से साबित हो: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि यदि किसी आपराधिक मामले में घटना स्थल को अन्य साक्ष्यों के माध्यम से साबित किया जा सकता है तो पहले जांच अधिकारी (IO) की गवाही न होना अभियोजन पक्ष के मामले के लिए घातक नहीं होगा।जस्टिस आलोक कुमार पांडे की सिंगल बेंच भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304B (दहेज मृत्यु) के तहत दोषसिद्धि और दस साल के कठोर कारावास की सजा के खिलाफ दायर एक अपील पर सुनवाई कर रही थी।तथ्यों के अनुसार शिकायतकर्ता की बेटी की शादी अपीलकर्ता से 28.03.2014 को हुई। आरोप था कि...
पटना हाईकोर्ट: 'सिर्फ़' ढाई साल की जेल UAPA के तहत ज़मानत का आधार नहीं
पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि नेशनल सिक्योरिटी और पब्लिक सेफ्टी को खतरे वाले मामलों की तुलना आम क्रिमिनल मामलों से नहीं की जा सकती। साथ ही कहा कि 'सिर्फ़ ढाई साल की जेल' किसी आरोपी को ज़मानत का हक़ नहीं दे सकती, जहाँ नेशनल सिक्योरिटी की चिंताएँ शामिल हों।जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस सौरेंद्र पांडे की डिवीज़न बेंच ने ये बातें प्रधानमंत्री के पटना दौरे के दौरान गड़बड़ी फैलाने की प्लानिंग में कथित तौर पर शामिल आरोपी को ज़मानत देने से इनकार करते हुए कहीं।नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA)...
कई केस पेंडिंग होने से कोई नाबालिग सुधार के लिए नाकाबिल नहीं हो जाता: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि सिर्फ केस पेंडिंग होने से किसी नाबालिग को सुधरने के लिए नाकाबिल या अयोग्य नहीं माना जा सकता।जस्टिस अरुण कुमार झा की सिंगल-जज बेंच एक क्रिमिनल रिवीजन याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी। इसने याचिकाकर्ता को जमानत देने से जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के इनकार को सही ठहराया था।अभियोजन पक्ष के अनुसार शिकायतकर्ता ने याचिकाकर्ता को एक मोटरसाइकिल चलाते हुए और पुलिस को देखकर यू-टर्न लेते हुए देखा। उसे तुरंत पकड़ लिया गया।...
30 साल की कानूनी लड़ाई के बाद पटना हाईकोर्ट ने गैर-कानूनी तरीके से नौकरी से निकाले गए सरकारी कर्मचारी को पूरा पिछला वेतन दिया
पटना हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसे 1995 में नौकरी से निकाल दिया गया और राज्य को उसे वापस नौकरी पर रखने पर पूरा पिछला वेतन देने का निर्देश दिया।कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि 'नो वर्क नो पे' का नियम तब लागू नहीं होता, जब नौकरी से निकालना ही गैर-कानूनी हो। इस फैसले से याचिकाकर्ता की लगभग तीन दशक पुरानी कानूनी लड़ाई खत्म हो है, जो सही हक के लिए चल रही थी और न्यायपालिका की प्रक्रिया में निष्पक्षता और कर्मचारियों के अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि हुई।मामले की...
छोड़कर जाने का आरोप लगाकर पत्नी को मेंटेनेंस देने से मना नहीं किया जा सकता: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने फिर से कहा कि छोड़कर जाने के आरोप सेक्शन 125 CrPC के तहत पत्नी के मेंटेनेंस के दावे को तब तक खत्म नहीं कर सकते, जब तक कि ये आरोप मैट्रिमोनियल प्रोसीडिंग्स में पक्के तौर पर साबित न हो जाएं।यह याचिका फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर की गई, जिसमें याचिकाकर्ता को अपनी पत्नी को हर महीने 22,000 का मेंटेनेंस देने का निर्देश दिया गया। पति ने इस आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि उसकी पत्नी ने सुलह से इनकार कर दिया और उसे छोड़कर चली गई। साथ ही उसकी इनकम का गलत अंदाज़ा लगाया गया।उसने हिंदू...
बिहार एक्साइज नियम | केवल शराब की मात्रा के आधार पर जब्त वाहन की रिहाई रोका जाना जनहित नहीं: हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने बिहार निषेध एवं मद्यनिषेध नियमावली, 2021 के नियम 12A(3) की अहम व्याख्या करते हुए कहा कि 'जनहित' का अर्थ कठोर, स्थिर या यांत्रिक ढंग से नहीं समझा जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जब्त वाहन की रिहाई से इनकार करने का आधार केवल शराब की मात्रा नहीं हो सकता, बल्कि संबंधित प्राधिकारी को पूरे वैधानिक ढाँचे के अनुरूप कई महत्वपूर्ण तथ्यों का समुचित मूल्यांकन करना आवश्यक है।जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस सौरेंद्र पांडेय की खंडपीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आयुक्त...
पटना हाईकोर्ट का सख्त रुख : छह दिन की अवैध हिरासत पर 2 लाख रुपये का मुआवज़ा, IG जेल को दिशानिर्देश जारी करने का आदेश
पटना हाईकोर्ट ने अहम फैसले में राज्य सरकार को आदेश दिया कि वह एक आरोपी को छह दिन तक अवैध रूप से हिरासत में रखने के लिए 2 लाख रुपये का मुआवज़ा दे।अदालत ने माना कि यह घटना न केवल न्यायिक आदेशों की अवहेलना है, बल्कि सीधे-सीधे व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है।जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस सौरेंद्र पांडेय की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। आरोपी बिहार निषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 के तहत गिरफ्तार था। 29 सितंबर 2025 को स्पेशल एक्साइज जज ने उसकी जमानत...
रेलवे की छवि खराब करने की अफवाह फैलाने के आरोप में यूट्यूबर मनीष कश्यप को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत
पटना हाईकोर्ट ने भारतीय रेलवे की छवि खराब करने के आरोप में दर्ज एफआईआर के मामले में यूट्यूबर मनीष कश्यप को अग्रिम जमानत दे दी।आरोप था कि कश्यप ने 'X' पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें रेलवे ट्रैक पर फिश-प्लेट्स के बीच पत्थर डाले जाने का दावा किया गया था। जस्टिस चंद्र शेखर झा की बेंच ने कहा कि कश्यप ने वीडियो सोशल मीडिया से प्राप्त होने के बाद बिना किसी बदलाव के रेलवे मंत्रालय को टैग करते हुए केवल जानकारी देने के उद्देश्य से अपलोड किया था। कश्यप पर BNS की कई धाराओं और IT Act की धारा 66 व...
चुनाव प्रचार मौलिक अधिकार नहीं, राजनीति से अपराधियों का सफाया होना चाहिए: पटना हाईकोर्ट ने जेल में बंद RJD MLA की याचिका खारिज की
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) विधायक रीतलाल यादव द्वारा बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान अपने प्रचार के लिए अंतरिम ज़मानत की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए, पटना हाईकोर्ट ने कहा कि किसी उम्मीदवार का प्रचार और प्रसार करने का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है, बल्कि केवल एक वैधानिक अधिकार है जिस पर क़ानून द्वारा प्रतिबंध लगाया जा सकता है।दानपुर निर्वाचन क्षेत्र से वर्तमान विधायक और उसी सीट से फिर से चुनाव लड़ रहे यादव ने अदालत से 6 नवंबर को होने वाले मतदान तक प्रचार करने के लिए चार हफ़्ते की रिहाई या,...








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