पटना हाईकोट
किशोर न्याय कानून का उद्देश्य सुधार, सजा नहीं; केवल अपराध की गंभीरता के आधार पर जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 (JJ Act) का उद्देश्य कानून से संघर्षरत बच्चों को दंडित करना नहीं, बल्कि उनका सुधार और पुनर्वास करना है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आरोपित अपराध की गंभीरता या किशोर की आयु जमानत देने से इनकार करने का आधार नहीं हो सकती।जस्टिस जितेंद्र कुमार ने हत्या के मामले में आरोपी किशोर की जमानत याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ दायर अपील पर यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की। हालांकि मामले के तथ्यों को देखते हुए अदालत ने ट्रायल कोर्ट का...
बिना मंज़ूरी के 2.5% से कम कोडीन वाली कफ़ सिरप रखने पर NDPS Act लागू होता है: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि जिस कफ़ सिरप में कुल मात्रा का 2.5% से कम कोडीन होता है, वह सिर्फ़ इस आधार पर NDPS एक्ट के दायरे से बाहर नहीं हो जाता। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसी दवाओं को ज़रूरी नशीली दवाओं (नारकोटिक ड्रग्स) के तौर पर वर्गीकृत किया गया और NDPS Act और उसके तहत बने नियमों के अनुसार ही इनका कब्ज़ा, बिक्री, खरीद, ट्रांसपोर्ट, आयात और निर्यात नियंत्रित होता है।जस्टिस जितेंद्र कुमार की सिंगल जज बेंच ने यह टिप्पणी तब की जब वे ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट और NDPS Act के प्रावधानों के तहत दर्ज...
तकनीकी पात्रता पर विशेषज्ञ समिति के फैसले में अदालतें नहीं करेंगी दखल, जब तक दुर्भावना या स्पष्ट मनमानी साबित न हो: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत न्यायिक समीक्षा की शक्ति का प्रयोग करते समय अदालतें विशेषज्ञ निविदा समितियों द्वारा तय की गई तकनीकी पात्रता का नए सिरे से मूल्यांकन नहीं कर सकतीं।अदालत केवल तभी हस्तक्षेप कर सकती है जब निर्णय दुर्भावनापूर्ण, मनमाना या स्पष्ट रूप से विकृत और अवैध साबित हो। जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस रंजन कुमार झा की खंडपीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें याचिकाकर्ता संयुक्त उद्यम को तकनीकी रूप से सफल घोषित करने और उसकी...
विशेषज्ञ समिति के तकनीकी मूल्यांकन में अदालतें दखल नहीं दे सकतीं, जब तक दुर्भावना या स्पष्ट मनमानी साबित न हो: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत न्यायिक समीक्षा करते समय अदालतें विशेषज्ञ निविदा समितियों द्वारा किए गए तकनीकी पात्रता मूल्यांकन का दोबारा आकलन नहीं कर सकतीं। केवल तब हस्तक्षेप किया जा सकता है, जब निर्णय दुर्भावनापूर्ण, मनमाना या स्पष्ट रूप से विकृत एवं अवैध साबित हो।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस रंजन कुमार झा की खंडपीठ एक संयुक्त उद्यम द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।याचिका में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की विभिन्न निविदाओं में...
ज़िला कोर्ट को CBI जांच का आदेश देने का अधिकार नहीं: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि ज़िला कोर्ट (जिसमें सेशन कोर्ट और मजिस्ट्रेट शामिल हैं) के पास किसी अपराध की जांच के लिए सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को आदेश देने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने दोहराया कि यह अधिकार सिर्फ़ संवैधानिक अदालतों के पास है, जो संविधान के आर्टिकल 32 और 226 के तहत अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करती हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि ज़मानत से जुड़े मामले की सुनवाई करते समय सेशन कोर्ट CBI जांच का आदेश नहीं दे सकता।जस्टिस जितेंद्र कुमार की सिंगल जज बेंच CBI की रिट याचिका पर सुनवाई कर...
पुलिस की बर्बरता नहीं रुकी तो कानून का राज खत्म हो जाएगा, पुलिस 'नाजी जर्मनी' जैसी बन सकती है: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कथित पुलिस हिरासत में यातना के एक गंभीर मामले में सख्त रुख अपनाते हुए बक्सर जिले के मुरार थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि यदि पुलिस की ऐसी बर्बरता पर अंकुश नहीं लगाया गया तो कानून का शासन और नागरिकों के जीवन एवं स्वतंत्रता की संवैधानिक सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी, तथा पुलिस का स्वरूप "नाजी जर्मनी" की पुलिस जैसा हो सकता है।जस्टिस जितेंद्र कुमार की एकल पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मुरार थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी...
'टेंडर का हिस्सा न होने वाली शर्त के आधार पर बोली लगाने वाले को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता': पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि किसी बोली लगाने वाले को ऐसी शर्त के आधार पर दंडित, अयोग्य या ब्लैकलिस्ट नहीं किया जा सकता जो मूल टेंडर नोटिस (NIT) का हिस्सा नहीं थी। कोर्ट ने दोहराया कि राज्य के अधिकारियों को टेंडर की शर्तों के अनुसार ही सख्ती से काम करना होता है और वे मनमाने ढंग से उनसे हट नहीं सकते।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेंद्र सिंह की डिवीजन बेंच एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में बिहार राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम (BSFC), कैमूर के जिला प्रबंधक द्वारा 29.12.2017 को जारी...
'कई स्तरों पर गलत इरादे से प्रेरित': पटना हाईकोर्ट ने पैसे मांगने के आरोपी ADJ का CrPC की धारा 319 के तहत दिया गया आदेश रद्द किया
पटना हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में CrPC की धारा 319 के तहत एक व्यक्ति को ट्रायल का सामना करने के लिए बुलाने वाला आदेश रद्द किया। कोर्ट ने कहा कि यह कार्यवाही "कई स्तरों पर गलत इरादे से प्रेरित" लग रही थी और ट्रायल कोर्ट ने जिन सबूतों के आधार पर यह फैसला लिया, वह CrPC की धारा 319 के तहत शक्तियों का इस्तेमाल करने के लिए "बहुत कम" हैं।जस्टिस अंशुल की सिंगल जज बेंच क्रिमिनल मिसलेनियस याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका भागलपुर के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज-VII द्वारा 22.08.2019 को दिए गए...
कोचिंग सेंटर फायरिंग केस: FIR रद्द करने की मांग लेकर पटना हाईकोर्ट पहुंचे खान सर
एजुकेटर और यूट्यूबर फैसल खान (खान सर) ने पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने कोचिंग इंस्टीट्यूट में हाल ही में हुई हिंसा के सिलसिले में पटना पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की।खान सर ने अपने कोचिंग इंस्टीट्यूट को फिर से खोलने के लिए भी निर्देश देने की मांग की, जो इस घटना के बाद से बंद है।यह मामला बुधवार को हाईकोर्ट के सामने आया। दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने बिहार सरकार को याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ़्ते का समय दिया।यह मामला 2 जून की एक घटना से जुड़ा है,...
लॉरेंस बिश्नोई गैंग से खतरे का दावा; पटना हाईकोर्ट ने पप्पू यादव की 'Y+' सुरक्षा बहाल की
पटना हाईकोर्ट ने पूर्णिया सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की सुरक्षा 'Y+' से घटाकर 'Y' करने के बिहार सरकार के फैसले को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि यह निर्णय मनमाना था और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना लिया गया।जस्टिस जितेंद्र कुमार की पीठ ने कहा कि सुरक्षा कम करने से पहले न तो पप्पू यादव से कोई इनपुट लिया गया और न ही आदेश उन्हें बताया गया। कोर्ट ने पाया कि सरकार के पास ऐसा कोई ठोस रिकॉर्ड नहीं था जिससे साबित हो कि उन्हें मिलने वाला खतरा कम हो गया था।पप्पू यादव ने लॉरेंस...
देश का पेट भरने वाले किसान को आपदा में अकेला नहीं छोड़ा जा सकता: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि प्राकृतिक आपदा से फसल बर्बाद होने वाले किसानों को केवल प्रक्रियात्मक कारणों के आधार पर मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता।अदालत ने टिप्पणी की कि देश का पेट भरने वाले किसान को संकट के समय अपने हाल पर नहीं छोड़ा जा सकता। चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की खंडपीठ फसल क्षति से जुड़े मुआवजे के मामले पर सुनवाई कर रही थी।सुनवाई के दौरान बिहार कृषि विभाग के निदेशक, मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी, जिला कृषि पदाधिकारी और साहेबगंज के प्रखंड विकास पदाधिकारी वीडियो...
पुस्तकालयाध्यक्षों के खाली पद शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर संकट: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने बिहार के विश्वविद्यालयों में लाइब्रेरियन, डिप्टी लाइब्रेरियन और असिस्टेंट लाइब्रेरियन के बड़ी संख्या में खाली पड़े पदों पर गंभीर चिंता जताई है।अदालत ने कहा कि पुस्तकालयाध्यक्षों की अनुपस्थिति से विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है और पुस्तकालयों का संचालन लगभग ठप हो चुका है। चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की खंडपीठ इस मामले पर सुनवाई कर रही थी।अदालत ने शुरुआत में ही कहा कि पुस्तकालय किसी भी शैक्षणिक संस्थान का जीवंत और केंद्रीय...
सार्वजनिक जगह पर अपमान साबित हुए बिना केवल जातिसूचक शब्द बोलना SC/ST Act के तहत अपराध नहीं: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) और भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द करते हुए कहा कि केवल जातिसूचक शब्द बोल देना या सामान्य गाली-गलौज करना, यदि वह सार्वजनिक दृष्टि में न हो तो अपने आप SC/ST Act के तहत अपराध नहीं माना जा सकता।जस्टिस अनिल कुमार सिन्हा की सिंगल बेंच उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 27 सितंबर 2023 को विशेष जज, SC/ST Act, सारण, छपरा द्वारा संज्ञान लेने के आदेश को चुनौती दी गई थी।मामले में...
'लेबर लॉ कार्यस्थल पर मानवाधिकारों का चार्टर है, सरकार कर्मचारियों के साथ "लुका-छिपी" नहीं खेल सकती': पटना हाईकोर्ट ने बकाया वेतन बहाल किया
पटना हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि जहां लेबर कोर्ट का कोई फैसला, जिसमें पूरी बकाया वेतन के साथ बहाली का निर्देश दिया गया हो, बिना किसी चुनौती के बना रहता है, तो औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 33C(2) के तहत ऐसे बकाए की गणना के लिए पारित निष्पादन आदेश में इस तरह से हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता जिससे मूल फैसला ही रद्द हो जाए।चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की खंडपीठ सिया सिंह द्वारा दायर दो 'लेटर्स पेटेंट अपील' पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सिंगल जज के साझा आदेश को चुनौती दी गई थी। सिंगल...
बोली की वैधता खत्म होने के बाद टेंडर से अयोग्यता को चुनौती देने का अधिकार लागू नहीं रहता: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी टेंडर की बोली की वैधता अवधि समाप्त हो जाने के बाद बोलीदाता को तकनीकी अयोग्यता के खिलाफ कोई प्रभावी राहत नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में अयोग्यता को चुनौती देने का विवाद व्यावहारिक रूप से केवल शैक्षणिक मुद्दा बनकर रह जाता है।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेन्द्र सिंह की खंडपीठ रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका पटना डिवीजन में ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने और उससे जुड़े कार्यों के लिए जारी टेंडर में तकनीकी रूप से अयोग्य...
पटना हाईकोर्ट ने "अस्पष्ट" व्यभिचार के आरोपों पर तलाक़ देने से इनकार किया, कहा - दलीलों से परे के सबूतों पर विचार नहीं किया जा सकता
पटना हाईकोर्ट ने व्यभिचार के आरोपों पर आधारित पति की तलाक़ की अर्ज़ी खारिज करने का फ़ैसला सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि समय, जगह या पहचान के ब्योरे के बिना लगाए गए अस्पष्ट और बिना सबूतों वाले आरोप तलाक़ के आदेश का आधार नहीं बन सकते। कोर्ट ने यह भी दोहराया कि राहत देने के लिए दलीलों से परे के सबूतों पर भरोसा नहीं किया जा सकता।जस्टिस नानी टागिया और जस्टिस आलोक कुमार पांडे की डिवीज़न बेंच सिवान के प्रिंसिपल जज, फ़ैमिली कोर्ट के 2019 के फ़ैसले को चुनौती देने वाली विविध अपील पर सुनवाई कर रही थी। उस...
गंभीर तथ्यात्मक विवादों का फैसला Article 226 की रिट याचिका में नहीं किया जा सकता: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट अधिकार क्षेत्र का उपयोग गंभीर तथ्यात्मक विवादों के निपटारे के लिए नहीं किया जा सकता, खासकर जब भूमि पर कब्जे को लेकर पक्षों के बीच विवाद हो और विस्तृत साक्ष्य की आवश्यकता हो।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेन्द्र सिंह की खंडपीठ कटिहार जिले की एक भूमि विवाद से जुड़ी इंट्रा-कोर्ट अपील पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता का दावा था कि विवादित जमीन उसके पिता की थी और वह उस पर कब्जे में है, जबकि DIET संस्थान उस जमीन में हस्तक्षेप कर रहा...
'रिमिशन बोर्ड के सामने समय से पहले रिहाई की 143 अर्ज़ियां लंबित; देरी से सुधार का मकसद ही खत्म हो जाता है': पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने बिहार राज्य सज़ा माफ़ी बोर्ड के सामने समय से पहले रिहाई के लिए 143 अर्ज़ियों के लंबित होने पर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों को निपटाने में होने वाली देरी से सुधार और पुनर्वास का मूल मकसद ही खत्म हो जाता है।चीफ़ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की एक डिवीज़न बेंच आपराधिक अपील की सुनवाई कर रही थी, जिसमें समय से पहले रिहाई पर विचार करने से जुड़े मुद्दे सामने आए थे।कोर्ट ने गौर किया कि पहले दी गई जानकारी के मुताबिक, अपीलकर्ता ने हिरासत में 15 साल से ज़्यादा का...
गवाह का बयान FIR का आधार हो तो पूरे अभियोजन मामले की जांच FIR के आधार पर की जा सकती है: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी गवाह का बयान ही FIR का आधार बनता है, तो पूरे अभियोजन मामले की जांच FIR के संदर्भ में की जा सकती है और ऐसी स्थिति में FIR भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 11 के तहत प्रासंगिक तथ्य बन जाती है।जस्टिस बिबेक चौधरी और जस्टिस अंसुल की खंडपीठ दो आपराधिक अपीलों पर सुनवाई कर रही थी, जो बेगूसराय की बरौनी थाना कांड संख्या 47/2012 से संबंधित थीं। अपीलकर्ताओं को ट्रायल कोर्ट ने IPC की धारा 364/34, 302/34 और 120B के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।अभियोजन के...
'ट्रैफिक चालान लोक अदालत में लोगों को परेशानी न हो, पूरी व्यवस्था करें': पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत में ट्रैफिक चालान मामलों के सुचारु निपटारे के लिए राज्य प्रशासन को कई निर्देश जारी किए हैं। चीफ़ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की खंडपीठ ने कहा कि लोक अदालत के दौरान अदालत परिसरों में आने वाली भीड़ को देखते हुए पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि “वन टाइम ट्रैफिक चालान सेटलमेंट स्कीम, 2026” को कैबिनेट मंजूरी के बाद अधिसूचित कर दिया गया है। इसके बाद कोर्ट ने...

















