पटना हाईकोट

मीटर से छेड़छाड़ के सबूत के बिना सिर्फ़ बिजली का बिल न भरना बिजली की चोरी नहीं: पटना हाईकोर्ट
मीटर से छेड़छाड़ के सबूत के बिना सिर्फ़ बिजली का बिल न भरना 'बिजली की चोरी' नहीं: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने कहा कि बिजली का बिल न भरना, इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा 135 के तहत बिजली की चोरी नहीं माना जाएगा, जब तक कि इस बात का कोई सबूत न हो कि कनेक्शन असल में काट दिया गया या उपभोक्ता ने मीटर से छेड़छाड़ की थी।जस्टिस जितेंद्र कुमार की सिंगल जज बेंच ने कहा कि भले ही उपभोक्ता बकाया बिजली बिल चुकाने के लिए ज़िम्मेदार हो सकता है, लेकिन बेईमानी से बिजली इस्तेमाल करने के सबूत के बिना उस पर आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।याचिकाकर्ता ने इलेक्ट्रिसिटी एक्ट की धारा 135 के तहत दर्ज FIR रद्द...

अदालत की अवमानना का नाम सुनकर अफसरों के कांपने वाले दिन अब गए: मद्रास हाईकोर्ट, दो IAS अधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी
अदालत की अवमानना का नाम सुनकर अफसरों के कांपने वाले दिन अब गए: मद्रास हाईकोर्ट, दो IAS अधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी

मद्रास हाईकोर्ट ने अदालत के आदेशों का पालन न करने पर पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग के पूर्व निदेशक एस.पी. अमृत और वर्तमान निदेशक एम. कृष्णा उन्नी (दोनों IAS अधिकारी) को अवमानना नोटिस जारी किया।जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन ने सुनवाई के दौरान कहा कि एक समय था, जब 'अदालत की अवमानना' शब्द सुनते ही अधिकारियों में भय पैदा हो जाता था, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है और अदालत के आदेशों की अवहेलना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।अदालत ने कहा,"वे दिन अब बीत चुके हैं, जब 'अवमानना' शब्द सुनते ही लोगों की रूह कांप...

मुसलमानों में बहुविवाह पर रोक लगाने वाला कोई कानून नहीं, बिहार पॉलिसी के तहत मृतक कर्मचारी की एक से ज़्यादा विधवाओं को फ़ैमिली पेंशन पाने का हक: हाईकोर्ट
मुसलमानों में बहुविवाह पर रोक लगाने वाला कोई कानून नहीं, बिहार पॉलिसी के तहत मृतक कर्मचारी की एक से ज़्यादा विधवाओं को फ़ैमिली पेंशन पाने का हक: हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने कहा कि मुसलमानों में बहुविवाह पर रोक लगाने वाले किसी कानून के न होने पर अगर किसी मुस्लिम विधवा की शादी मृतक सरकारी कर्मचारी के साथ मोहम्मडन पर्सनल लॉ के तहत वैध है, तो वह फ़ैमिली पेंशन पाने की हकदार है। कोर्ट ने यह भी कहा कि फ़ाइनेंस डिपार्टमेंट का 2011 का स्पष्टीकरण, जो मृतक मुस्लिम सरकारी कर्मचारियों की जीवित विधवाओं को फ़ैमिली पेंशन देने की बात करता है, अभी भी लागू है और अधिकारी इसे नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते।जस्टिस पूर्णेंदु सिंह की सिंगल जज बेंच नजमा खातून की एक रिट याचिका पर...

तलाक और बच्चों की अभिरक्षा के कागजात पर हस्ताक्षर का दबाव बनाना अपने आप में क्रूरता नहीं: पटना हाईकोर्ट
तलाक और बच्चों की अभिरक्षा के कागजात पर हस्ताक्षर का दबाव बनाना अपने आप में क्रूरता नहीं: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवाद के दौरान पति या पत्नी पर तलाक और बच्चों की अभिरक्षा से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाना मात्र से भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 85 के तहत क्रूरता का अपराध नहीं बनता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसा आचरण न तो संपत्ति या मूल्यवान वस्तु की अवैध मांग के लिए उत्पीड़न की श्रेणी में आता है और न ही ऐसा जानबूझकर किया गया व्यवहार है, जिससे महिला आत्महत्या करने या गंभीर शारीरिक अथवा मानसिक क्षति झेलने के लिए विवश हो जाए।जस्टिस प्रवीण कुमार की एकल पीठ ने...

सात बैच गुणवत्ता जांच में फेल, ORS आपूर्तिकर्ता को ब्लैक लिस्ट में डालने का फैसला बरकरार: पटना हाईकोर्ट
सात बैच गुणवत्ता जांच में फेल, ORS आपूर्तिकर्ता को ब्लैक लिस्ट में डालने का फैसला बरकरार: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने सात बैच गुणवत्ता जांच में असफल पाए जाने के बाद एक ORS (ओरल रिहाइड्रेशन साल्ट) आपूर्तिकर्ता को दो वर्ष के लिए ब्लैक लिस्ट में डालने के फैसले को सही ठहराया।अदालत ने कहा कि सार्वजनिक वितरण के लिए दवाओं की खरीद में संबंधित एजेंसी की यह विशेष जिम्मेदारी है कि लाभार्थियों तक केवल निर्धारित गुणवत्ता वाली दवाएं ही पहुंचें।एक्टिंग चीफ जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस राजेश कुमार वर्मा की खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि जब अनुबंध में तय गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया का पालन किया गया, तब...

PDS कॉन्ट्रैक्टर पर कालाबाज़ारी के लिए अनाज डायवर्ट करने का आरोप: ट्रायल का इंतज़ार किए बिना ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है- पटना हाईकोर्ट
PDS कॉन्ट्रैक्टर पर कालाबाज़ारी के लिए अनाज डायवर्ट करने का आरोप: ट्रायल का इंतज़ार किए बिना ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है- पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने कहा कि पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) के तहत अनाज के ट्रांसपोर्टेशन के लिए नियुक्त कॉन्ट्रैक्टर को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है और उसका कॉन्ट्रैक्ट खत्म किया जा सकता है, भले ही कालाबाज़ारी के लिए अनाज डायवर्ट करने के आरोपों से जुड़ी आपराधिक कार्यवाही का नतीजा अभी न आया हो। कोर्ट ने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ी कार्रवाई आपराधिक दायित्व से अलग है और इसे स्वतंत्र रूप से किया जा सकता है, अगर कॉन्ट्रैक्टर का व्यवहार कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों के मुताबिक नहीं पाया जाता है।जस्टिस सुधीर...

पुरानी दुश्मनी मात्र से अभियोजन का मामला खारिज नहीं किया जा सकता, वही घटना का कारण भी हो सकती है: पटना हाईकोर्ट
पुरानी दुश्मनी मात्र से अभियोजन का मामला खारिज नहीं किया जा सकता, वही घटना का कारण भी हो सकती है: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने कहा है कि पक्षों के बीच पूर्व से चली आ रही दुश्मनी (Prior Enmity) मात्र इस आधार पर अभियोजन के मामले को अविश्वसनीय नहीं बनाया जा सकता। यदि वही दुश्मनी घटना के पीछे एक संभावित कारण (Motive) भी प्रस्तुत करती है, तो केवल इसी आधार पर अभियोजन के साक्ष्यों को खारिज नहीं किया जा सकता।जस्टिस पूर्णेंदु सिंह की एकलपीठ ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 323 सहपठित धारा 34 के तहत दोषी ठहराया गया था। हालांकि, अदालत ने मामले के तथ्यों और...

लापरवाही और खामियों से भरी जांच का उदाहरण: पटना हाईकोर्ट ने हत्या के दोषी को बरी किया, जांच अधिकारी के खिलाफ जांच के आदेश
लापरवाही और खामियों से भरी जांच का उदाहरण: पटना हाईकोर्ट ने हत्या के दोषी को बरी किया, जांच अधिकारी के खिलाफ जांच के आदेश

पटना हाईकोर्ट ने हत्या के एक मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को बरी करते हुए पुलिस जांच पर कड़ी टिप्पणी की।अदालत ने कहा कि यह मामला अनुचित, लापरवाहीपूर्ण और उदासीन जांच का एक क्लासिक उदाहरण है। साथ ही जांच में गंभीर चूक पाए जाने पर संबंधित जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच कराने का भी निर्देश दिया। जस्टिस बिबेक चौधरी और जस्टिस राणा विक्रम सिंह की खंडपीठ एडिशनल सेशन जज, मधेपुरा के उस फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोपी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302/34 तथा...

2011 की सीधी नियुक्ति को बाद में कार्यकाल आधारित नहीं बनाया जा सकता: पटना हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय का फैसला रद्द किया
2011 की सीधी नियुक्ति को बाद में कार्यकाल आधारित नहीं बनाया जा सकता: पटना हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय का फैसला रद्द किया

पटना हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत वर्ष 2010 में बनाए गए उपबंध, जिन्हें वर्ष 2017 में अधिसूचित किया गया, उन्हें पूर्व प्रभाव से लागू कर वर्ष 2011 में सीधी भर्ती के जरिए हुई स्थायी नियुक्ति को कार्यकाल आधारित नियुक्ति में नहीं बदला जा सकता। अदालत ने कहा कि जब तक किसी कानून में स्पष्ट रूप से या आवश्यक रूप से पूर्व प्रभाव से लागू होने का प्रावधान न हो, तब तक उसे भविष्य के लिए ही प्रभावी माना जाएगा, विशेषकर तब जब उससे कर्मचारियों के अर्जित सेवा...

राजनीतिक दुश्मनी का आरोप FIR रद्द करने का आधार नहीं, यदि उसमें संज्ञेय अपराध का खुलासा हो: पटना हाईकोर्ट
राजनीतिक दुश्मनी का आरोप FIR रद्द करने का आधार नहीं, यदि उसमें संज्ञेय अपराध का खुलासा हो: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने कहा है कि सिर्फ राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता या दुर्भावना (Mala Fide) का आरोप लगाकर एफआईआर रद्द नहीं कराई जा सकती, यदि उसमें प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का खुलासा होता हो।जस्टिस अरुण कुमार झा की एकलपीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें एक राजनेता ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसकी पत्नी प्रखंड प्रमुख हैं और राजनीतिक दुश्मनी के कारण उसे झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है।राज्य सरकार ने अदालत को...

किशोर न्याय कानून का उद्देश्य सुधार, सजा नहीं; केवल अपराध की गंभीरता के आधार पर जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता: पटना हाईकोर्ट
किशोर न्याय कानून का उद्देश्य सुधार, सजा नहीं; केवल अपराध की गंभीरता के आधार पर जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने कहा कि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 (JJ Act) का उद्देश्य कानून से संघर्षरत बच्चों को दंडित करना नहीं, बल्कि उनका सुधार और पुनर्वास करना है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आरोपित अपराध की गंभीरता या किशोर की आयु जमानत देने से इनकार करने का आधार नहीं हो सकती।जस्टिस जितेंद्र कुमार ने हत्या के मामले में आरोपी किशोर की जमानत याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ दायर अपील पर यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की। हालांकि मामले के तथ्यों को देखते हुए अदालत ने ट्रायल कोर्ट का...

तकनीकी पात्रता पर विशेषज्ञ समिति के फैसले में अदालतें नहीं करेंगी दखल, जब तक दुर्भावना या स्पष्ट मनमानी साबित न हो: पटना हाईकोर्ट
तकनीकी पात्रता पर विशेषज्ञ समिति के फैसले में अदालतें नहीं करेंगी दखल, जब तक दुर्भावना या स्पष्ट मनमानी साबित न हो: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत न्यायिक समीक्षा की शक्ति का प्रयोग करते समय अदालतें विशेषज्ञ निविदा समितियों द्वारा तय की गई तकनीकी पात्रता का नए सिरे से मूल्यांकन नहीं कर सकतीं।अदालत केवल तभी हस्तक्षेप कर सकती है जब निर्णय दुर्भावनापूर्ण, मनमाना या स्पष्ट रूप से विकृत और अवैध साबित हो। जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस रंजन कुमार झा की खंडपीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें याचिकाकर्ता संयुक्त उद्यम को तकनीकी रूप से सफल घोषित करने और उसकी...

विशेषज्ञ समिति के तकनीकी मूल्यांकन में अदालतें दखल नहीं दे सकतीं, जब तक दुर्भावना या स्पष्ट मनमानी साबित न हो: पटना हाईकोर्ट
विशेषज्ञ समिति के तकनीकी मूल्यांकन में अदालतें दखल नहीं दे सकतीं, जब तक दुर्भावना या स्पष्ट मनमानी साबित न हो: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत न्यायिक समीक्षा करते समय अदालतें विशेषज्ञ निविदा समितियों द्वारा किए गए तकनीकी पात्रता मूल्यांकन का दोबारा आकलन नहीं कर सकतीं। केवल तब हस्तक्षेप किया जा सकता है, जब निर्णय दुर्भावनापूर्ण, मनमाना या स्पष्ट रूप से विकृत एवं अवैध साबित हो।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस रंजन कुमार झा की खंडपीठ एक संयुक्त उद्यम द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।याचिका में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की विभिन्न निविदाओं में...

पुलिस की बर्बरता नहीं रुकी तो कानून का राज खत्म हो जाएगा, पुलिस नाजी जर्मनी जैसी बन सकती है: पटना हाईकोर्ट
पुलिस की बर्बरता नहीं रुकी तो कानून का राज खत्म हो जाएगा, पुलिस 'नाजी जर्मनी' जैसी बन सकती है: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने कथित पुलिस हिरासत में यातना के एक गंभीर मामले में सख्त रुख अपनाते हुए बक्सर जिले के मुरार थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि यदि पुलिस की ऐसी बर्बरता पर अंकुश नहीं लगाया गया तो कानून का शासन और नागरिकों के जीवन एवं स्वतंत्रता की संवैधानिक सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी, तथा पुलिस का स्वरूप "नाजी जर्मनी" की पुलिस जैसा हो सकता है।जस्टिस जितेंद्र कुमार की एकल पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मुरार थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी...

टेंडर का हिस्सा न होने वाली शर्त के आधार पर बोली लगाने वाले को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता: पटना हाईकोर्ट
'टेंडर का हिस्सा न होने वाली शर्त के आधार पर बोली लगाने वाले को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता': पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने कहा कि किसी बोली लगाने वाले को ऐसी शर्त के आधार पर दंडित, अयोग्य या ब्लैकलिस्ट नहीं किया जा सकता जो मूल टेंडर नोटिस (NIT) का हिस्सा नहीं थी। कोर्ट ने दोहराया कि राज्य के अधिकारियों को टेंडर की शर्तों के अनुसार ही सख्ती से काम करना होता है और वे मनमाने ढंग से उनसे हट नहीं सकते।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेंद्र सिंह की डिवीजन बेंच एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में बिहार राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम (BSFC), कैमूर के जिला प्रबंधक द्वारा 29.12.2017 को जारी...

कई स्तरों पर गलत इरादे से प्रेरित: पटना हाईकोर्ट ने पैसे मांगने के आरोपी ADJ का CrPC की धारा 319 के तहत दिया गया आदेश रद्द किया
'कई स्तरों पर गलत इरादे से प्रेरित': पटना हाईकोर्ट ने पैसे मांगने के आरोपी ADJ का CrPC की धारा 319 के तहत दिया गया आदेश रद्द किया

पटना हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में CrPC की धारा 319 के तहत एक व्यक्ति को ट्रायल का सामना करने के लिए बुलाने वाला आदेश रद्द किया। कोर्ट ने कहा कि यह कार्यवाही "कई स्तरों पर गलत इरादे से प्रेरित" लग रही थी और ट्रायल कोर्ट ने जिन सबूतों के आधार पर यह फैसला लिया, वह CrPC की धारा 319 के तहत शक्तियों का इस्तेमाल करने के लिए "बहुत कम" हैं।जस्टिस अंशुल की सिंगल जज बेंच क्रिमिनल मिसलेनियस याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका भागलपुर के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज-VII द्वारा 22.08.2019 को दिए गए...