पटना हाईकोट
'कल्पना से परे: FSL रिपोर्ट के बिना ज़ब्त चीज़ों को 'नशीला पदार्थ' कैसे मान लिया गया': पटना हाईकोर्ट ने 27 साल बाद NDPS के आरोपी को बरी किया
पटना हाईकोर्ट ने NDPS Act के तहत दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति को बरी किया। कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष कानून के मुताबिक नशीला पदार्थ बरामद होने की बात साबित करने में नाकाम रहा और अनिवार्य सुरक्षा उपायों का पालन न करने के साथ-साथ सबूतों में कमियों ने दोषसिद्धि रद्द की।जस्टिस आलोक कुमार पांडे की सिंगल बेंच, एडिशनल जिला एवं सेशन जज (तृतीय), आरा, भोजपुर द्वारा 27.12.2010 को NDPS केस नंबर 2/1998 में दिए गए फैसले के खिलाफ आपराधिक अपील पर सुनवाई कर रही थी। यह मामला शाहपुर थाना केस नंबर 7/1998 से जुड़ा...
'शक सबूत की जगह नहीं ले सकता': पटना हाईकोर्ट ने आरा कोर्ट धमाका मामले में आरोपियों को बरी किया, मौत की सज़ा रद्द की
176 पन्नों के फ़ैसले में पटना हाई कोर्ट ने आरा सिविल कोर्ट बम धमाका मामले में कई आरोपियों की सज़ा रद्द की। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष (सरकारी वकील) परिस्थितियों की कड़ी को बिना किसी उचित संदेह के साबित करने में नाकाम रहा। साथ ही यह दोहराया कि "शक, चाहे कितना भी मज़बूत क्यों न हो, सबूत की जगह नहीं ले सकता।"चीफ़ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद की डिवीज़न बेंच भोजपुर, आरा के एडिशनल सेशंस जज द्वारा चलाए गए मुक़दमे से जुड़े आपराधिक अपीलों के साथ-साथ CrPC की धारा 366 (BNSS की धारा...
पटना हाईकोर्ट ने सिविल कोर्ट भर्ती में वेटलिस्टेड उम्मीदवार को नियुक्त करने का निर्देश रद्द किया, कहा- 'खामोश बैठने वाले' समानता का दावा नहीं कर सकते
पटना हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि जो उम्मीदवार चयन पैनल के अस्तित्व में रहने के दौरान अपने अधिकारों का दावा करने में विफल रहते हैं, वे बाद में उन दूसरों के साथ समानता की मांग नहीं कर सकते, जिन्होंने समय पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने दोहराया कि रिट राहत में देरी और लापरवाही के कारण रोक है और अनुच्छेद 14 "नकारात्मक समानता" के आधार पर लाभों के विस्तार की अनुमति नहीं देता।चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस आलोक कुमार सिन्हा की एक खंडपीठ (Division Bench) C.W.J.C. संख्या 10521/2022 में एक...
साक्ष्यों में विरोधाभास, मेडिकल प्रमाण नहीं: पटना हाइकोर्ट ने POCSO मामले में दोषसिद्धि रद्द की
पटना हाइकोर्ट ने अहम फैसले में अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दी गई सजा रद्द की।अदालत ने कहा कि पीड़िता के बयानों में गंभीर विरोधाभास, मेडिकल साक्ष्य का अभाव और स्वतंत्र पुष्टि न होने के कारण अभियोजन का मामला विश्वसनीय नहीं ठहरता।जस्टिस बिबेक चौधुरी और जस्टिस डॉ. अंशुमान की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि ऐसे असंगत और अप्रमाणित साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि कायम नहीं रह सकती।अदालत ने माना कि यौन अपराध के मामलों में पीड़िता की गवाही महत्वपूर्ण होती है लेकिन इस मामले में उसके बयान...
हाईवे निर्माण में दखल नहीं दे सकता वक्फ ट्रिब्यूनल: पटना हाइकोर्ट का सख्त फैसला
पटना हाइकोर्ट ने बड़ा फैसला देते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े भूमि अधिग्रहण मामलों में वक्फ ट्रिब्यूनल को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।अदालत ने साफ किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 अपने आप में पूर्ण कानून है। इसी के तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया संचालित होती है।जस्टिस बिबेक चौधरी की एकल पीठ ने बिहार राज्य वक्फ ट्रिब्यूनल, पटना के उस आदेश को रद्द किया, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को समस्तीपुर जिले में कब्रिस्तान और मस्जिद दर्ज जमीन पर हाईवे निर्माण से...
पटना हाईकोर्ट ने दिया मानसिक रूप से बीमार लोगों के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन का आदेश
पटना हाईकोर्ट ने बिहार में मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति से जुड़ी एक स्वतः संज्ञान जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई करते हुए मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित लोगों की मदद के लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन बनाने के निर्देश जारी किए। कोर्ट ने राज्य सरकार को इस मामले में एमिक्स क्यूरी (न्याय मित्र) द्वारा दिए गए सुझावों पर विचार करने का भी निर्देश दिया।चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की एक खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। यह मामला बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (BSLSA) के...
रिमिशन योजनाएं कैदियों को अच्छे व्यवहार के लिए प्रेरित करती हैं: पटना हाईकोर्ट, आजीवन कारावासियों की याचिका पर पुनर्विचार का निर्देश
सुधारात्मक उद्देश्य के लिए जरूरी हैं रिमिशन योजनाएं, बिहार हाईकोर्ट ने दो आजीवन कारावास भुगत रहे दोषियों की याचिका पर पुनर्विचार का निर्देश दिया।पटना हाईकोर्ट ने कहा है कि रिमिशन (सजा में छूट) योजनाएं आपराधिक न्याय प्रणाली के सुधारात्मक पहलू का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और यह कैदियों को अच्छा आचरण बनाए रखने के लिए प्रेरित करती हैं। अदालत ने इस आधार पर बिहार राज्य सजा माफी समीक्षा बोर्ड (State Sentence Remission Review Board) को दो दोषियों की रिमिशन याचिका पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया।जस्टिस...
पटना हाईकोर्ट ने लोक अदालतों में ट्रैफिक चालान के निपटारे की अनुमति पर राज्य से जवाब मांगा
पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार से जवाब मांगा कि क्या ट्रैफिक चालान से जुड़े मामलों का निपटारा लोक अदालतों में किया जा सकता है।चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस आलोक कुमार सिन्हा की बेंच एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई कि वे ट्रैफिक और मोटर वाहनों से जुड़े कंपाउंडिंग मामलों (समझौते योग्य मामले)—जिनमें निजी मोटर वाहनों और उनके मालिकों को जारी किए गए लंबित ट्रैफिक चालान भी शामिल हैं—की सुनवाई और निपटारे के संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी...
Mental Healthcare Act | हाईकोर्ट ने बिहार की मेंटल हेल्थ सुविधाओं में 'कमियों' का खुद से संज्ञान लिया, रिपोर्ट मांगी
पटना हाईकोर्ट ने बिहार राज्य में मेंटल हेल्थ सुविधाओं में कमियों का खुद से संज्ञान लिया, जिसमें बिहार स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेंटल हेल्थ एंड एलाइड साइंसेज (BIMHAS), कोइलवर, भोजपुर भी शामिल है। साथ ही बिहार स्टेट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी (BSLSA) के मेंबर सेक्रेटरी द्वारा जमा की गई इंस्पेक्शन रिपोर्ट के आधार पर खुद से एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन शुरू की।चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की एक डिवीजन बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी। खुद से यह कार्रवाई BSLSA की 17.02.2026 की रिपोर्ट के...
लंबित आपराधिक मामला मात्र से अयोग्यता नहीं, विज्ञापन की शर्तों का कड़ाई से पालन अनिवार्य: पटना हाईकोर्ट
पटना हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि यदि किसी अभ्यर्थी के विरुद्ध आपराधिक मामला लंबित है लेकिन आवेदन की तिथि तक उसमें आरोप तय नहीं हुए हैं तो मात्र इस आधार पर उसे पेट्रोलियम डीलरशिप के लिए अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता जब तक कि विज्ञापन में स्पष्ट रूप से ऐसी अयोग्यता का प्रावधान न हो।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया का संचालन विज्ञापन से होता है। आवेदन प्रपत्र के आधार पर उसमें विस्तार या संशोधन नहीं किया जा सकता।यह निर्णय जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस आलोक कुमार सिन्हा की...
मृतक का भाई CrPC के तहत 'पीड़ित', मर्डर की सज़ा के खिलाफ पति की अपील में हिस्सा ले सकता है: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने माना कि किसी मृतक व्यक्ति का भाई क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC) की धारा 2(wa) के तहत “पीड़ित” माना जाता है और अपराध से जुड़ी क्रिमिनल कार्रवाई में उसकी सुनवाई का हक है।जस्टिस बिबेक चौधरी और जस्टिस डॉ. अंशुमान की डिवीजन बेंच एक मृतक महिला के भाई की इंटरवेंशन एप्लीकेशन पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दोषी पति की सज़ा के खिलाफ दायर अपील में पार्टी रेस्पोंडेंट के तौर पर शामिल होने की मांग की गई।मृतक शादीशुदा महिला थी। उसको गोली लगी थी और बाद में उसकी मौत हो गई। शुरू में उसके पति ने शिकायत...
गिरफ्तारी या रिमांड को चुनौती न देना मान लेना है: पटना हाईकोर्ट ने गैर-कानूनी हिरासत के लिए मुआवज़ा देने से मना किया
पटना हाईकोर्ट ने माना कि सही कोर्ट में गिरफ्तारी या रिमांड के आदेश को चुनौती न देना मान लेना है, और कोई व्यक्ति बाद में गैर-कानूनी हिरासत का आरोप लगाकर मुआवज़ा नहीं मांग सकता।जस्टिस जितेंद्र कुमार की सिंगल जज बेंच रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 30.07.2020 से 01.08.2020 तक सोनपुर पुलिस स्टेशन द्वारा याचिकाकर्ता की हिरासत को गैर-कानूनी घोषित करने और मुआवज़े का दावा करने की मांग की गई।याचिकाकर्ता ने दलील दी कि उसे बिना किसी FIR या कानूनी वजह के तीन दिनों तक गैर-कानूनी हिरासत में रखा गया।...
प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के आरोपी को जमानत, पटना हाइकोर्ट का आदेश
पटना हाइकोर्ट ने व्यक्ति को जमानत दी, जिस पर राजनीतिक रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत माता के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करने का आरोप है। आरोप है कि उक्त बयान का वीडियो बाद में सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित किया गया।यह आदेश जस्टिस अरुण कुमार झा की एकलपीठ ने पारित किया। मामला सिमरी थाना कांड संख्या 243/2025, दिनांक 28 अगस्त 2025 से संबंधित है। इस प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया...
Bihar Prohibition Act | जब तक मालिक का गैर-कानूनी शराब ट्रांसपोर्ट में शामिल होना साबित न हो जाए, गाड़ी ज़ब्त नहीं की जा सकती: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी गाड़ी का मालिक गैर-कानूनी शराब ट्रांसपोर्ट करने के जुर्म में शामिल नहीं है, और मालिक की कोई सहमति या मिलीभगत नहीं है तो गाड़ी को बिहार प्रोहिबिशन एंड एक्साइज एक्ट, 2016 के तहत ज़ब्त करने की कार्रवाई नहीं की जा सकती।जस्टिस मोहित कुमार शाह और जस्टिस आलोक कुमार पांडे की डिवीजन बेंच रिट पिटीशन पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एक्साइज मामले में सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट के पास किए गए ऑर्डर को रद्द करने की मांग की गई, जिसके तहत पिटीशनर की मोटरसाइकिल ज़ब्त करके नीलामी के लिए रख...
S.53A CrPC | पटना हाईकोर्ट ने यौन अपराध के मामलों में आरोपी का मेडिकल जांच करने के लिए पुलिस को संवेदनशील बनाने को कहा
पटना हाइकोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 53ए को भूला हुआ प्रावधान बताते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि पुलिस को संवेदनशील बनाया जाए ताकि यौन अपराध के मामलों में आरोपी की गिरफ्तारी के तुरंत बाद उसका मेडिकल टेस्ट कराया जाए। कोर्ट ने चेतावनी दी कि ऐसा न होने पर जांच में गंभीर और अपूरणीय खामियां रह जाती हैं।जस्टिस बिबेक चौधरी और जस्टिस अंसुल की खंडपीठ IPC की धारा 376 और POCSO Act की धारा 6 के तहत आजीवन कारावास से दंडित आरोपी की आपराधिक अपील पर सुनवाई कर रही थी।अभियोजन के अनुसार वर्ष 2016...
धारा 372 CrPC | सज़ा बढ़ाने के लिए पीड़ित की अपील सुनवाई योग्य नहीं: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल सज़ा को अपर्याप्त बताकर पीड़ित आपराधिक अपील दायर नहीं कर सकता। अदालत ने कहा कि धारा 372 दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के तहत पीड़ित को अपील का अधिकार केवल तीन सीमित परिस्थितियों में ही प्राप्त है—(i) अभियुक्त के बरी होने पर,(ii) कम गंभीर अपराध में दोषसिद्धि होने पर, या(iii) अपर्याप्त प्रतिकर (compensation) दिए जाने पर।जस्टिस आलोक कुमार पांडेय की एकल पीठ पीड़िता द्वारा दायर उस आपराधिक अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-VI सह विशेष...
'अधर्म करने वालों का दुखद अंत होता है': पटना हाईकोर्ट ने ट्रिपल मर्डर केस में मौत की सज़ा की पुष्टि के लिए 'महाभारत' का ज़िक्र किया
पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में ज़मीन विवाद के सिलसिले में तीन लोगों की हत्या के लिए दो आरोपियों को दी गई सज़ा और मौत की सज़ा बरकरार रखी। महान ग्रंथ महाभारत की थीम का ज़िक्र करते हुए एक जज ने इस बात पर ज़ोर दिया कि हमलावरों को उनके पाप/अपराध के लिए सज़ा मिलनी चाहिए।जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस सौरेंद्र पांडे की बेंच की धारा CrPC 366(1) के तहत एक रेफरेंस की सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोपियों को IPC की 302 के साथ धारा 34 के तहत दोषी ठहराया गया और अपने चाचा और दो चचेरे भाइयों की बेरहमी से हत्या के...
म्यूटेशन की कार्यवाही तय करने वाला 'कार्यकारी अधिकारी' जजों (संरक्षण) अधिनियम, 1985 के उद्देश्यों के लिए 'जज' है: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि पटना नगर निगम में कार्यकारी अधिकारी, म्यूटेशन की कार्यवाही तय करते समय, जजों (संरक्षण) अधिनियम, 1985 के दायरे में आएगा।कोर्ट ने साफ किया कि कोई भी व्यक्ति जो कानूनी कार्यवाही के दौरान, एक निश्चित और निर्णायक फैसला देने के लिए कानूनी रूप से अधिकृत है, उसे 1985 के अधिनियम के उद्देश्यों के लिए 'जज' माना जाएगा।जस्टिस संदीप कुमार की बेंच ने इस तरह CrPC की धारा 482 के तहत याचिका को मंज़ूरी दी, जिसमें बिहार सरकार के कानून विभाग द्वारा IPC की धारा 420, 467, 468, 471, और...
साथ रहने या सार्थक संपर्क के बिना ससुराल पक्ष पर क्रूरता के आरोप स्वभावतः अविश्वसनीय: पटना हाइकोर्ट
पटना हाइकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि पति के रिश्तेदारों के साथ न तो साझा निवास हो और न ही कोई सार्थक संपर्क, तो ससुराल पक्ष के खिलाफ क्रूरता के आरोप अपने आप में अविश्वसनीय हो जाते हैं। हाइकोर्ट ने इस आधार पर आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।यह मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धाराओं 85, 115(2), 118(1) और 191(2) के तहत दर्ज एक शिकायत से जुड़ा था। ट्रायल कोर्ट द्वारा संज्ञान लिए जाने के आदेश को चुनौती देते हुए पति के रिश्तेदारों ने हाइकोर्ट का...
मेडिकल कॉलेज फैकल्टी के लिए आधार और GPS आधारित अटेंडेंस सिस्टम निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं: पटना हाईकोर्ट
एक महत्वपूर्ण फैसले में पटना हाईकोर्ट ने बिहार के मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी सदस्यों की अटेंडेंस दर्ज करने के लिए आधार-आधारित फेशियल ऑथेंटिकेशन और GPS लोकेशन शेयरिंग की आवश्यकता को सही ठहराया।जस्टिस बिबेक चौधरी की सिंगल जज बेंच एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एक पब्लिक नोटिस को चुनौती दी गई। इस नोटिस में राज्य के मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों में फेस-आधारित आधार ऑथेंटिकेशन और GPS-सक्षम अटेंडेंस को अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्देश दिया गया।याचिकाकर्ता अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों और...















