पटना हाईकोट
लॉरेंस बिश्नोई गैंग से खतरे का दावा; पटना हाईकोर्ट ने पप्पू यादव की 'Y+' सुरक्षा बहाल की
पटना हाईकोर्ट ने पूर्णिया सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की सुरक्षा 'Y+' से घटाकर 'Y' करने के बिहार सरकार के फैसले को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि यह निर्णय मनमाना था और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना लिया गया।जस्टिस जितेंद्र कुमार की पीठ ने कहा कि सुरक्षा कम करने से पहले न तो पप्पू यादव से कोई इनपुट लिया गया और न ही आदेश उन्हें बताया गया। कोर्ट ने पाया कि सरकार के पास ऐसा कोई ठोस रिकॉर्ड नहीं था जिससे साबित हो कि उन्हें मिलने वाला खतरा कम हो गया था।पप्पू यादव ने लॉरेंस...
देश का पेट भरने वाले किसान को आपदा में अकेला नहीं छोड़ा जा सकता: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि प्राकृतिक आपदा से फसल बर्बाद होने वाले किसानों को केवल प्रक्रियात्मक कारणों के आधार पर मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता।अदालत ने टिप्पणी की कि देश का पेट भरने वाले किसान को संकट के समय अपने हाल पर नहीं छोड़ा जा सकता। चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की खंडपीठ फसल क्षति से जुड़े मुआवजे के मामले पर सुनवाई कर रही थी।सुनवाई के दौरान बिहार कृषि विभाग के निदेशक, मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी, जिला कृषि पदाधिकारी और साहेबगंज के प्रखंड विकास पदाधिकारी वीडियो...
पुस्तकालयाध्यक्षों के खाली पद शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर संकट: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने बिहार के विश्वविद्यालयों में लाइब्रेरियन, डिप्टी लाइब्रेरियन और असिस्टेंट लाइब्रेरियन के बड़ी संख्या में खाली पड़े पदों पर गंभीर चिंता जताई है।अदालत ने कहा कि पुस्तकालयाध्यक्षों की अनुपस्थिति से विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है और पुस्तकालयों का संचालन लगभग ठप हो चुका है। चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की खंडपीठ इस मामले पर सुनवाई कर रही थी।अदालत ने शुरुआत में ही कहा कि पुस्तकालय किसी भी शैक्षणिक संस्थान का जीवंत और केंद्रीय...
सार्वजनिक जगह पर अपमान साबित हुए बिना केवल जातिसूचक शब्द बोलना SC/ST Act के तहत अपराध नहीं: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) और भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द करते हुए कहा कि केवल जातिसूचक शब्द बोल देना या सामान्य गाली-गलौज करना, यदि वह सार्वजनिक दृष्टि में न हो तो अपने आप SC/ST Act के तहत अपराध नहीं माना जा सकता।जस्टिस अनिल कुमार सिन्हा की सिंगल बेंच उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 27 सितंबर 2023 को विशेष जज, SC/ST Act, सारण, छपरा द्वारा संज्ञान लेने के आदेश को चुनौती दी गई थी।मामले में...
'लेबर लॉ कार्यस्थल पर मानवाधिकारों का चार्टर है, सरकार कर्मचारियों के साथ "लुका-छिपी" नहीं खेल सकती': पटना हाईकोर्ट ने बकाया वेतन बहाल किया
पटना हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि जहां लेबर कोर्ट का कोई फैसला, जिसमें पूरी बकाया वेतन के साथ बहाली का निर्देश दिया गया हो, बिना किसी चुनौती के बना रहता है, तो औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 33C(2) के तहत ऐसे बकाए की गणना के लिए पारित निष्पादन आदेश में इस तरह से हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता जिससे मूल फैसला ही रद्द हो जाए।चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की खंडपीठ सिया सिंह द्वारा दायर दो 'लेटर्स पेटेंट अपील' पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सिंगल जज के साझा आदेश को चुनौती दी गई थी। सिंगल...
बोली की वैधता खत्म होने के बाद टेंडर से अयोग्यता को चुनौती देने का अधिकार लागू नहीं रहता: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी टेंडर की बोली की वैधता अवधि समाप्त हो जाने के बाद बोलीदाता को तकनीकी अयोग्यता के खिलाफ कोई प्रभावी राहत नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में अयोग्यता को चुनौती देने का विवाद व्यावहारिक रूप से केवल शैक्षणिक मुद्दा बनकर रह जाता है।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेन्द्र सिंह की खंडपीठ रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका पटना डिवीजन में ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने और उससे जुड़े कार्यों के लिए जारी टेंडर में तकनीकी रूप से अयोग्य...
पटना हाईकोर्ट ने "अस्पष्ट" व्यभिचार के आरोपों पर तलाक़ देने से इनकार किया, कहा - दलीलों से परे के सबूतों पर विचार नहीं किया जा सकता
पटना हाईकोर्ट ने व्यभिचार के आरोपों पर आधारित पति की तलाक़ की अर्ज़ी खारिज करने का फ़ैसला सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि समय, जगह या पहचान के ब्योरे के बिना लगाए गए अस्पष्ट और बिना सबूतों वाले आरोप तलाक़ के आदेश का आधार नहीं बन सकते। कोर्ट ने यह भी दोहराया कि राहत देने के लिए दलीलों से परे के सबूतों पर भरोसा नहीं किया जा सकता।जस्टिस नानी टागिया और जस्टिस आलोक कुमार पांडे की डिवीज़न बेंच सिवान के प्रिंसिपल जज, फ़ैमिली कोर्ट के 2019 के फ़ैसले को चुनौती देने वाली विविध अपील पर सुनवाई कर रही थी। उस...
गंभीर तथ्यात्मक विवादों का फैसला Article 226 की रिट याचिका में नहीं किया जा सकता: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट अधिकार क्षेत्र का उपयोग गंभीर तथ्यात्मक विवादों के निपटारे के लिए नहीं किया जा सकता, खासकर जब भूमि पर कब्जे को लेकर पक्षों के बीच विवाद हो और विस्तृत साक्ष्य की आवश्यकता हो।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेन्द्र सिंह की खंडपीठ कटिहार जिले की एक भूमि विवाद से जुड़ी इंट्रा-कोर्ट अपील पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता का दावा था कि विवादित जमीन उसके पिता की थी और वह उस पर कब्जे में है, जबकि DIET संस्थान उस जमीन में हस्तक्षेप कर रहा...
'रिमिशन बोर्ड के सामने समय से पहले रिहाई की 143 अर्ज़ियां लंबित; देरी से सुधार का मकसद ही खत्म हो जाता है': पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने बिहार राज्य सज़ा माफ़ी बोर्ड के सामने समय से पहले रिहाई के लिए 143 अर्ज़ियों के लंबित होने पर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों को निपटाने में होने वाली देरी से सुधार और पुनर्वास का मूल मकसद ही खत्म हो जाता है।चीफ़ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की एक डिवीज़न बेंच आपराधिक अपील की सुनवाई कर रही थी, जिसमें समय से पहले रिहाई पर विचार करने से जुड़े मुद्दे सामने आए थे।कोर्ट ने गौर किया कि पहले दी गई जानकारी के मुताबिक, अपीलकर्ता ने हिरासत में 15 साल से ज़्यादा का...
गवाह का बयान FIR का आधार हो तो पूरे अभियोजन मामले की जांच FIR के आधार पर की जा सकती है: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी गवाह का बयान ही FIR का आधार बनता है, तो पूरे अभियोजन मामले की जांच FIR के संदर्भ में की जा सकती है और ऐसी स्थिति में FIR भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 11 के तहत प्रासंगिक तथ्य बन जाती है।जस्टिस बिबेक चौधरी और जस्टिस अंसुल की खंडपीठ दो आपराधिक अपीलों पर सुनवाई कर रही थी, जो बेगूसराय की बरौनी थाना कांड संख्या 47/2012 से संबंधित थीं। अपीलकर्ताओं को ट्रायल कोर्ट ने IPC की धारा 364/34, 302/34 और 120B के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।अभियोजन के...
'ट्रैफिक चालान लोक अदालत में लोगों को परेशानी न हो, पूरी व्यवस्था करें': पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत में ट्रैफिक चालान मामलों के सुचारु निपटारे के लिए राज्य प्रशासन को कई निर्देश जारी किए हैं। चीफ़ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की खंडपीठ ने कहा कि लोक अदालत के दौरान अदालत परिसरों में आने वाली भीड़ को देखते हुए पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि “वन टाइम ट्रैफिक चालान सेटलमेंट स्कीम, 2026” को कैबिनेट मंजूरी के बाद अधिसूचित कर दिया गया है। इसके बाद कोर्ट ने...
आखिरी बार आरोपियों के साथ दिखी बच्ची, 10 घंटे में मिला शव: पटना हाईकोर्ट ने दुष्कर्म-हत्या मामले में उम्रकैद बरकरार रखी
पटना हाईकोर्ट ने आठ वर्षीय बच्ची के दुष्कर्म और हत्या मामले में दो दोषियों की सजा बरकरार रखते हुए कहा कि जब अभियोजन यह साबित कर दे कि पीड़िता आखिरी बार आरोपियों के साथ देखी गई थी और कुछ ही घंटों बाद उसका शव बरामद हुआ तो ऐसी स्थिति में आरोपियों पर यह दायित्व आ जाता है कि वे मृत्यु के संबंध में स्पष्टीकरण दें।जस्टिस बिबेक चौधुरी और जस्टिस अंसुल की खंडपीठ ने मुजफ्फरपुर की स्पेशल POCSO कोर्ट द्वारा 2018 में सुनाई गई दोषसिद्धि और सजा के आदेश के खिलाफ दायर अपील खारिज करते हुए यह फैसला दिया।दोनों...
“हॉस्टलों में लड़कियों की सुरक्षा पर बिहार पुलिस के सर्कुलर में नियमों का पालन न करने पर सज़ा का कोई प्रावधान नहीं, इसे लागू किया जाना चाहिए”: हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि निजी हॉस्टलों और लॉज में रहने वाली लड़कियों की सुरक्षा के उपायों के संबंध में बिहार पुलिस द्वारा जारी सर्कुलर में नियमों का पालन न करने पर किसी भी तरह की सज़ा का कोई प्रावधान नहीं है। इस बात पर ज़ोर दिया कि इसे सख्ती से लागू किया जाना चाहिए और इस पर आगे की कार्रवाई भी होनी चाहिए।चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की डिवीज़न बेंच बिहार राज्य में लड़कियों के हॉस्टलों और लॉज में रहने वाली स्टूडेंट्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी सलाह और...
तलाक वाद में मुद्दे तय किए बिना निर्णय देना केवल अनुमान आधारित आकलन: पटना हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द किया
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 के तहत तलाक संबंधी वाद में यदि ट्रायल कोर्ट स्पष्ट मुद्दे तय किए बिना निर्णय देता है तो ऐसा निर्णय विधिसम्मत नहीं माना जा सकता और वह केवल “अनुमान आधारित आकलन” बनकर रह जाता है।जस्टिस नानी टैगिया और जस्टिस आलोक कुमार पांडे की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए मुजफ्फरपुर फैमिली कोर्ट द्वारा पति की तलाक याचिका खारिज करने का आदेश रद्द किया। निर्णय जस्टिस आलोक कुमार पांडे ने लिखा।पति ने क्रूरता, परित्याग और व्यभिचार के आधार पर विवाह विच्छेद की...
हिंदू विवाह अधिनियम | धारा 13B में 'अलग रहना' का मतलब सिर्फ अलग घर में रहना नहीं, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते खत्म होना: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि Hindu Marriage Act, 1955 की धारा 13B के तहत “अलग रहना” (living separately) का अर्थ केवल शारीरिक दूरी नहीं, बल्कि वैवाहिक दायित्वों का पूर्ण रूप से समाप्त होना है। कोर्ट ने उस मामले में आपसी सहमति से तलाक की याचिका खारिज करने के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें पक्षकारों ने वैधानिक अवधि के भीतर वैवाहिक संबंध फिर से स्थापित कर लिए थे।जस्टिस नानी तागिया और जस्टिस आलोक कुमार पांडेय की खंडपीठ यह अपील सुन रही थी, जो 6 जून 2023 को शियोहर फैमिली कोर्ट द्वारा पारित आदेश के...
अधीनस्थ अधिकारी द्वारा आदेश की सूचना देना वैधानिक शक्ति का प्रत्यायोजन नहीं: पटना हाईकोर्ट ने बंदी स्थानांतरण अवधि-विस्तार बरकरार रखा
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि किसी अधीनस्थ अधिकारी द्वारा सक्षम प्राधिकारी के आदेश का केवल संप्रेषण करना वैधानिक शक्ति का प्रत्यायोजन नहीं माना जा सकता।इसी आधार पर अदालत ने एक बंदी के जेल स्थानांतरण की अवधि बढ़ाने का आदेश वैध ठहराते हुए चुनौती खारिज की।जस्टिस आलोक कुमार पांडे की एकलपीठ उस आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 30 अक्तूबर 2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसके तहत बिहार के सहायक महानिरीक्षक (कारा) ने याचिकाकर्ता के आदर्श केंद्रीय कारा, बेउर, पटना से विशेष केंद्रीय कारा, भागलपुर...
'कोई व्यक्ति लाभ पाने के लिए दो जाति पहचानों के बीच फेरबदल नहीं कर सकता, इससे व्यवस्था की पवित्रता कमज़ोर होती है': पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी भी व्यक्ति को चुनावी लाभ पाने के लिए अपनी जाति पहचान के संबंध में विरोधाभासी रुख अपनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के लिए आरक्षित सीट से चुने गए एक मुखिया को अयोग्य घोषित करने के लिए शुरू की गई कार्यवाही को सही ठहराया।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेंद्र सिंह की डिवीज़न बेंच 09.08.2023 को सिंगल जज द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ 'इंट्रा-कोर्ट अपील' (अदालत के भीतर की अपील) पर सुनवाई कर रही थी। उस फैसले में सिंगल जज ने अपीलकर्ता...
'बैड वर्क' जैसे अस्पष्ट शब्दों से प्रवेशात्मक यौन उत्पीड़न नहीं माना जा सकता: पटना हाईकोर्ट ने POCSO दोषसिद्धि आंशिक रूप से रद्द की
पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि केवल 'बैड वर्क' जैसे अस्पष्ट शब्दों के आधार पर बिना स्पष्ट प्रत्यक्षदर्शी या मेडिकल साक्ष्य के प्रवेशात्मक यौन उत्पीड़न मान लेना विधिसम्मत नहीं है।अदालत ने कहा कि ऐसे सामान्य शब्दों से स्वतः यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि POCSO Act के तहत प्रवेशात्मक यौन उत्पीड़न हुआ।जस्टिस बिबेक चौधुरी और जस्टिस चंद्रशेखर झा की खंडपीठ आपराधिक अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें विशेष POCSO अदालत, मुंगेर द्वारा 2 अगस्त, 2018 को सुनाई गई दोषसिद्धि और सजा को चुनौती...
जॉइनिंग में स्वीकृत देरी के आधार पर पुरानी पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि किसी कर्मचारी को सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से सेवा ग्रहण करने में देरी हुई है तो केवल इसी आधार पर उसे पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ देने से वंचित नहीं किया जा सकता, विशेषकर तब जब पूरी भर्ती प्रक्रिया निर्धारित कट-ऑफ तिथि से पहले पूरी हो चुकी हो।चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की खंडपीठ बिहार सरकार द्वारा दायर लेटर्स पेटेंट अपील पर सुनवाई कर रही थी।यह अपील उस आदेश के खिलाफ दाखिल की गई, जिसमें एकलपीठ ने राज्य सरकार द्वारा...
डिफॉल्ट आदेश रद्द कर पूर्ण न्याय सुनिश्चित कर सकता है DRAT, यह केवल निर्णय देने वाली संस्था नहीं: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि डेट रिकवरी अपीलीय ट्रिब्यूनल (DRAT) केवल एक निर्णय देने वाली संस्था नहीं है, बल्कि उसे पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए डिफॉल्ट आदेशों को रद्द करने का अधिकार प्राप्त है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऋण वसूली एवं दिवाला अधिनियम, 1993 की धारा 21 के तहत प्री-डिपॉजिट न करने के कारण अपील खारिज होना केवल प्रक्रियात्मक कार्रवाई है, इससे अपील का वैधानिक अधिकार समाप्त नहीं होता।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस सुनील दत्ता मिश्रा की खंडपीठ लेटर्स पेटेंट अपील पर...
















