पटना हाईकोट
गवाह का बयान FIR का आधार हो तो पूरे अभियोजन मामले की जांच FIR के आधार पर की जा सकती है: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी गवाह का बयान ही FIR का आधार बनता है, तो पूरे अभियोजन मामले की जांच FIR के संदर्भ में की जा सकती है और ऐसी स्थिति में FIR भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 11 के तहत प्रासंगिक तथ्य बन जाती है।जस्टिस बिबेक चौधरी और जस्टिस अंसुल की खंडपीठ दो आपराधिक अपीलों पर सुनवाई कर रही थी, जो बेगूसराय की बरौनी थाना कांड संख्या 47/2012 से संबंधित थीं। अपीलकर्ताओं को ट्रायल कोर्ट ने IPC की धारा 364/34, 302/34 और 120B के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।अभियोजन के...
'ट्रैफिक चालान लोक अदालत में लोगों को परेशानी न हो, पूरी व्यवस्था करें': पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत में ट्रैफिक चालान मामलों के सुचारु निपटारे के लिए राज्य प्रशासन को कई निर्देश जारी किए हैं। चीफ़ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की खंडपीठ ने कहा कि लोक अदालत के दौरान अदालत परिसरों में आने वाली भीड़ को देखते हुए पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि “वन टाइम ट्रैफिक चालान सेटलमेंट स्कीम, 2026” को कैबिनेट मंजूरी के बाद अधिसूचित कर दिया गया है। इसके बाद कोर्ट ने...
आखिरी बार आरोपियों के साथ दिखी बच्ची, 10 घंटे में मिला शव: पटना हाईकोर्ट ने दुष्कर्म-हत्या मामले में उम्रकैद बरकरार रखी
पटना हाईकोर्ट ने आठ वर्षीय बच्ची के दुष्कर्म और हत्या मामले में दो दोषियों की सजा बरकरार रखते हुए कहा कि जब अभियोजन यह साबित कर दे कि पीड़िता आखिरी बार आरोपियों के साथ देखी गई थी और कुछ ही घंटों बाद उसका शव बरामद हुआ तो ऐसी स्थिति में आरोपियों पर यह दायित्व आ जाता है कि वे मृत्यु के संबंध में स्पष्टीकरण दें।जस्टिस बिबेक चौधुरी और जस्टिस अंसुल की खंडपीठ ने मुजफ्फरपुर की स्पेशल POCSO कोर्ट द्वारा 2018 में सुनाई गई दोषसिद्धि और सजा के आदेश के खिलाफ दायर अपील खारिज करते हुए यह फैसला दिया।दोनों...
“हॉस्टलों में लड़कियों की सुरक्षा पर बिहार पुलिस के सर्कुलर में नियमों का पालन न करने पर सज़ा का कोई प्रावधान नहीं, इसे लागू किया जाना चाहिए”: हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि निजी हॉस्टलों और लॉज में रहने वाली लड़कियों की सुरक्षा के उपायों के संबंध में बिहार पुलिस द्वारा जारी सर्कुलर में नियमों का पालन न करने पर किसी भी तरह की सज़ा का कोई प्रावधान नहीं है। इस बात पर ज़ोर दिया कि इसे सख्ती से लागू किया जाना चाहिए और इस पर आगे की कार्रवाई भी होनी चाहिए।चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की डिवीज़न बेंच बिहार राज्य में लड़कियों के हॉस्टलों और लॉज में रहने वाली स्टूडेंट्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी सलाह और...
तलाक वाद में मुद्दे तय किए बिना निर्णय देना केवल अनुमान आधारित आकलन: पटना हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द किया
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 के तहत तलाक संबंधी वाद में यदि ट्रायल कोर्ट स्पष्ट मुद्दे तय किए बिना निर्णय देता है तो ऐसा निर्णय विधिसम्मत नहीं माना जा सकता और वह केवल “अनुमान आधारित आकलन” बनकर रह जाता है।जस्टिस नानी टैगिया और जस्टिस आलोक कुमार पांडे की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए मुजफ्फरपुर फैमिली कोर्ट द्वारा पति की तलाक याचिका खारिज करने का आदेश रद्द किया। निर्णय जस्टिस आलोक कुमार पांडे ने लिखा।पति ने क्रूरता, परित्याग और व्यभिचार के आधार पर विवाह विच्छेद की...
हिंदू विवाह अधिनियम | धारा 13B में 'अलग रहना' का मतलब सिर्फ अलग घर में रहना नहीं, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते खत्म होना: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि Hindu Marriage Act, 1955 की धारा 13B के तहत “अलग रहना” (living separately) का अर्थ केवल शारीरिक दूरी नहीं, बल्कि वैवाहिक दायित्वों का पूर्ण रूप से समाप्त होना है। कोर्ट ने उस मामले में आपसी सहमति से तलाक की याचिका खारिज करने के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें पक्षकारों ने वैधानिक अवधि के भीतर वैवाहिक संबंध फिर से स्थापित कर लिए थे।जस्टिस नानी तागिया और जस्टिस आलोक कुमार पांडेय की खंडपीठ यह अपील सुन रही थी, जो 6 जून 2023 को शियोहर फैमिली कोर्ट द्वारा पारित आदेश के...
अधीनस्थ अधिकारी द्वारा आदेश की सूचना देना वैधानिक शक्ति का प्रत्यायोजन नहीं: पटना हाईकोर्ट ने बंदी स्थानांतरण अवधि-विस्तार बरकरार रखा
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि किसी अधीनस्थ अधिकारी द्वारा सक्षम प्राधिकारी के आदेश का केवल संप्रेषण करना वैधानिक शक्ति का प्रत्यायोजन नहीं माना जा सकता।इसी आधार पर अदालत ने एक बंदी के जेल स्थानांतरण की अवधि बढ़ाने का आदेश वैध ठहराते हुए चुनौती खारिज की।जस्टिस आलोक कुमार पांडे की एकलपीठ उस आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 30 अक्तूबर 2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसके तहत बिहार के सहायक महानिरीक्षक (कारा) ने याचिकाकर्ता के आदर्श केंद्रीय कारा, बेउर, पटना से विशेष केंद्रीय कारा, भागलपुर...
'कोई व्यक्ति लाभ पाने के लिए दो जाति पहचानों के बीच फेरबदल नहीं कर सकता, इससे व्यवस्था की पवित्रता कमज़ोर होती है': पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी भी व्यक्ति को चुनावी लाभ पाने के लिए अपनी जाति पहचान के संबंध में विरोधाभासी रुख अपनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के लिए आरक्षित सीट से चुने गए एक मुखिया को अयोग्य घोषित करने के लिए शुरू की गई कार्यवाही को सही ठहराया।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेंद्र सिंह की डिवीज़न बेंच 09.08.2023 को सिंगल जज द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ 'इंट्रा-कोर्ट अपील' (अदालत के भीतर की अपील) पर सुनवाई कर रही थी। उस फैसले में सिंगल जज ने अपीलकर्ता...
'बैड वर्क' जैसे अस्पष्ट शब्दों से प्रवेशात्मक यौन उत्पीड़न नहीं माना जा सकता: पटना हाईकोर्ट ने POCSO दोषसिद्धि आंशिक रूप से रद्द की
पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि केवल 'बैड वर्क' जैसे अस्पष्ट शब्दों के आधार पर बिना स्पष्ट प्रत्यक्षदर्शी या मेडिकल साक्ष्य के प्रवेशात्मक यौन उत्पीड़न मान लेना विधिसम्मत नहीं है।अदालत ने कहा कि ऐसे सामान्य शब्दों से स्वतः यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि POCSO Act के तहत प्रवेशात्मक यौन उत्पीड़न हुआ।जस्टिस बिबेक चौधुरी और जस्टिस चंद्रशेखर झा की खंडपीठ आपराधिक अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें विशेष POCSO अदालत, मुंगेर द्वारा 2 अगस्त, 2018 को सुनाई गई दोषसिद्धि और सजा को चुनौती...
जॉइनिंग में स्वीकृत देरी के आधार पर पुरानी पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि किसी कर्मचारी को सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से सेवा ग्रहण करने में देरी हुई है तो केवल इसी आधार पर उसे पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ देने से वंचित नहीं किया जा सकता, विशेषकर तब जब पूरी भर्ती प्रक्रिया निर्धारित कट-ऑफ तिथि से पहले पूरी हो चुकी हो।चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की खंडपीठ बिहार सरकार द्वारा दायर लेटर्स पेटेंट अपील पर सुनवाई कर रही थी।यह अपील उस आदेश के खिलाफ दाखिल की गई, जिसमें एकलपीठ ने राज्य सरकार द्वारा...
डिफॉल्ट आदेश रद्द कर पूर्ण न्याय सुनिश्चित कर सकता है DRAT, यह केवल निर्णय देने वाली संस्था नहीं: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि डेट रिकवरी अपीलीय ट्रिब्यूनल (DRAT) केवल एक निर्णय देने वाली संस्था नहीं है, बल्कि उसे पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए डिफॉल्ट आदेशों को रद्द करने का अधिकार प्राप्त है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऋण वसूली एवं दिवाला अधिनियम, 1993 की धारा 21 के तहत प्री-डिपॉजिट न करने के कारण अपील खारिज होना केवल प्रक्रियात्मक कार्रवाई है, इससे अपील का वैधानिक अधिकार समाप्त नहीं होता।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस सुनील दत्ता मिश्रा की खंडपीठ लेटर्स पेटेंट अपील पर...
ब्लैकलिस्टिंग के 'कारण बताओ नोटिस' के खिलाफ कोई रिट याचिका दायर नहीं की जा सकती': पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि ब्लैकलिस्टिंग की कार्यवाही शुरू करने वाले 'कारण बताओ नोटिस' को आम तौर पर अनुच्छेद 226 के तहत चुनौती नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने इस बात को दोहराया कि जिस अधिकारी के पास अंतिम फैसला लेने की शक्ति है, वह प्रक्रिया शुरू करने के लिए भी उतना ही सक्षम है।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेंद्र सिंह की एक डिवीज़न बेंच रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में 17.03.2026 को इंजीनियर-इन-चीफ-सह-रजिस्टरिंग अथॉरिटी द्वारा जारी किए गए एक 'कारण बताओ नोटिस' को चुनौती दी गई थी। इस...
कल्याणकारी योजना के तहत आंगनवाड़ी सेविका के पद पर चयन से कोई लागू करने योग्य वैधानिक अधिकार नहीं मिलता: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजना के तहत आंगनवाड़ी सेविका के पद पर चयन या नियुक्ति से कोई लागू करने योग्य वैधानिक अधिकार नहीं मिलता। ऐसे चयन से जुड़े विवादों में आमतौर पर रिट अधिकार क्षेत्र के तहत हस्तक्षेप की ज़रूरत नहीं होती है।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेंद्र सिंह की डिवीज़न बेंच 10.02.2023 को सिंगल जज द्वारा C.W.J.C. No. 10524 of 2017 में दिए गए फैसले को चुनौती देने वाली इंट्रा-कोर्ट अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अपीलकर्ता द्वारा दायर रिट याचिका को...
'अनुकंपा नियुक्ति विशेष छूट है, किंतु देर से किए गए दावों के लिए नहीं': पटना हाईकोर्ट ने 25 साल के अंतराल के बाद अपील खारिज की
पटना हाईकोर्ट ने फिर दोहराया कि अनुकंपा नियुक्ति का मकसद तत्काल आर्थिक राहत देना है और लंबे समय बीत जाने के बाद इसका दावा नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने एक कर्मचारी के लापता होने के लगभग 25 साल बाद दायर की गई इंट्रा-कोर्ट अपील खारिज की।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेंद्र सिंह की डिवीज़न बेंच C.W.J.C. No. 6835 of 2017 में सिंगल जज द्वारा 02.09.2024 को दिए गए फैसले को चुनौती देने वाली लेटर्स पेटेंट अपील पर सुनवाई कर रही थी।यह मामला अपीलकर्ता के अनुकंपा नियुक्ति के दावे से जुड़ा था। अपीलकर्ता के...
बिहार में RTI लंबित मामलों पर सुनवाई टली, हाईकोर्ट ने कहा- मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन
पटना हाईकोर्ट ने बिहार में RTI आवेदनों और अपीलों के भारी लंबित मामलों को लेकर दायर जनहित याचिका पर फिलहाल सुनवाई टाल दी। अदालत ने कहा कि यह मुद्दा पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है।चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। याचिका में मांग की गई कि सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत तय समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने के लिए अदालत लगातार निगरानी का आदेश दे।याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि दिसंबर, 2024 तक बिहार राज्य सूचना आयोग में 28 हजार...
'भरोसे लायक दस्तावेज़ दिए बिना ब्लैकलिस्ट करना प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन': पटना हाईकोर्ट ने ठेकेदार पर लगी 2 साल की रोक हटाई
पटना हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि किसी ठेकेदार को उन दस्तावेज़ों को दिए बिना ब्लैकलिस्ट करना, जो आरोपों का आधार हैं, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। कोर्ट ने राज्य के अधिकारियों द्वारा लगाई गई दो साल की रोक हटाई।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेंद्र सिंह की डिवीज़न बेंच रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में ग्रामीण कार्य विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ द्वारा 10.12.2025 को जारी किए गए आदेश को चुनौती दी गई। इस आदेश के तहत, याचिकाकर्ता को बिहार ठेकेदार पंजीकरण नियम, 2007 के नियम 11 के...
अगर टेंडर की समय सीमा नहीं बढ़ाई जाती तो वह अपने आप खत्म हो जाता है: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि सिर्फ़ बार-बार अर्जी देने से देरी की भरपाई नहीं हो सकती या समय-सीमा नहीं बढ़ाई जा सकती> एक बार जब टेंडर की समय सीमा बिना किसी विस्तार के खत्म हो जाती है तो कॉन्ट्रैक्ट अपने आप खत्म हो जाता है, जिससे राज्य को जनहित में एक नया टेंडर जारी करने की अनुमति मिल जाती है।चीफ़ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की डिवीज़न बेंच राज्य द्वारा दायर लेटर्स पेटेंट अपील पर सुनवाई कर रही थी। इस अपील में 18.11.2024 को सिंगल जज द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें...
फेनोथियाज़ीन और प्रोमेथाज़ीन NDPS Act के तहत नहीं: पटना हाईकोर्ट ने तीन दोषियों की सजा रोकी
पटना हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि फेनोथियाज़ीन और प्रोमेथाज़ीन जैसे पदार्थ मादक या मनोप्रभावी पदार्थों की श्रेणी में नहीं आते। इनके आधार पर NDPS Act के तहत सजा देना प्रथम दृष्टया उचित नहीं प्रतीत होता। अदालत ने इसी आधार पर तीन दोषियों की सजा को निलंबित करते हुए उन्हें अपील लंबित रहने तक जमानत देने का आदेश दिया।यह मामला उन तीन आरोपियों से जुड़ा है, जिन्हें ट्रायल कोर्ट ने NDPS Act की धारा 21(ग) के तहत दोषी ठहराते हुए 15 वर्ष की सजा और डेढ़ लाख रुपये जुर्माना लगाया। आरोप है कि उनके पास से भारी...
अनिवार्य टेंडर शर्तों में ढील नहीं दी जा सकती: पटना हाईकोर्ट ने बोलीदाता की योग्यता रद्द की
पटना हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि टेंडर प्रक्रिया में निर्धारित अनिवार्य शर्तों को नजरअंदाज या शिथिल नहीं किया जा सकता। अदालत ने आवश्यक दस्तावेज जमा न करने वाले एक बोलीदाता को तकनीकी रूप से योग्य घोषित करने और उसे एल-1 घोषित करने का फैसला रद्द किया।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेन्द्र सिंह की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें ग्रामीण कार्य विभाग के एक टेंडर से जुड़े विवाद को चुनौती दी गई।याचिकाकर्ता ने आपत्ति जताई कि निजी पक्ष ने टेंडर की अनिवार्य शर्तों के तहत जरूरी “पेमेंट सर्टिफिकेट”...
टेंडर में 'मौजूदा प्रतिबद्धता' वही मानी जाएगी, जो वास्तव में लागू हों: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि टेंडर प्रक्रिया में केवल वही कार्य “मौजूदा प्रतिबद्धता” माने जाएंगे, जो वास्तव में लागू और प्रभावी हों। जिन कार्यों को पहले ही समाप्त करने का प्रस्ताव हो चुका हो, उन्हें छिपाने के आधार पर बोलीदाता को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेन्द्र सिंह की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए तकनीकी मूल्यांकन समिति द्वारा एक बोलीदाता को अयोग्य ठहराने का आदेश रद्द किया।मामला ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा सड़क और पुल निर्माण से जुड़े टेंडर से...












