पटना हाईकोट

टेंडर डॉक्यूमेंट जमा करने की शर्त में बोली लगाने वाले द्वारा उसे सही तरीके से पूरा करना और प्रमाणित करना शामिल है: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि टेंडर डॉक्यूमेंट जमा करने की शर्त में यह ज़रूरी है कि डॉक्यूमेंट को बोली लगाने वाले ने सही तरीके से पूरा किया हो और प्रमाणित किया हो।कोर्ट ने कहा, "डॉक्यूमेंट जमा करने की शर्त के साथ यह भी ज़रूरी है कि डॉक्यूमेंट को बोली लगाने वाले ने सही तरीके से पूरा किया हो और प्रमाणित किया हो।" एक्टिंग चीफ जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस राजेश कुमार वर्मा की खंडपीठ, M/s शुभराज कंस्ट्रक्शन द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में नगर परिषद, मोकामा द्वारा 'नल-जल...

जीवनसाथी को सिर्फ़ 'आपत्तिजनक स्थिति' में देखने का आरोप लगाने से व्यभिचार साबित नहीं होता: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने एक पति की अपील खारिज की, जिसमें उसने व्यभिचार और क्रूरता के आधार पर अपनी शादी खत्म करने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि जीवनसाथी को सिर्फ़ "आपत्तिजनक स्थिति" में देखने से यह साबित नहीं होता कि उसने किसी दूसरे व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध बनाए।जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस राणा विक्रम सिंह की डिवीजन बेंच ने मधुबनी के फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज का फैसला बरकरार रखा, जिन्होंने पति के तलाक का मामला खारिज कर दिया।अपीलकर्ता ने 2 जुलाई, 2006 को प्रतिवादी से शादी की थी। बाद में 2010 में...

अवैध संपत्ति का हिसाब करते समय खेती से हुई आय नज़रअंदाज़ नहीं की जा सकती: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि बिहार स्पेशल कोर्ट्स एक्ट, 2009 के तहत अवैध संपत्ति का पता लगाते समय "अपील करने वाले की खेती से हुई आय पर विचार न करना कानून की नज़र में गलत है"। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर ज़ब्ती की कार्यवाही के दौरान किसी सरकारी कर्मचारी की मौत हो जाती है तो ऐसी कार्यवाही "दोषी सरकारी कर्मचारी की मौत के साथ ही खत्म हो जानी चाहिए" और इसे सिर्फ़ बरी किए गए सह-आरोपी द्वारा दिए गए दस्तावेज़ों के आधार पर जारी नहीं रखा जा सकता।जस्टिस चंद्र शेखर झा की सिंगल जज बेंच उस अपील पर सुनवाई कर रही थी,...

पटना हाईकोर्ट का फैसला: अब 62 की उम्र में रिटायर होंगे बिहार के ज्यूडिशियल अधिकारी
पटना हाईकोर्ट की फुल कोर्ट ने बिहार में ज्यूडिशियल अधिकारियों की रिटायरमेंट की उम्र 60 से बढ़ाकर 62 साल करने का फ़ैसला किया।यह फ़ैसला ऐसे समय में आया, जब सुप्रीम कोर्ट इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या पूरे देश में डिस्ट्रिक्ट ज्यूडिशियरी के सदस्यों की रिटायरमेंट की उम्र एक समान रूप से बढ़ाकर 62 साल कर दी जानी चाहिए।बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी को 31 अगस्त, 2026 को भेजे गए एक पत्र में पटना हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रूपेश देव ने राज्य सरकार को बताया कि फुल कोर्ट...

नशे की हालत में साथी कॉन्स्टेबल पर कथित हमले के लिए नौकरी से निकालना "कड़ी सज़ा": पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने बिहार पुलिस के कॉन्स्टेबल की बर्खास्तगी (नौकरी से निकालने) का आदेश रद्द किया। उस पर नशे की हालत में चाकू से दूसरे कॉन्स्टेबल पर हमला करने का आरोप था। कोर्ट ने पाया कि विभागीय कार्यवाही में न तो कथित पीड़ित का बयान था, न ही कोई चोट की रिपोर्ट या मेडिकल सबूत था जिससे नशे की पुष्टि हो सके।जस्टिस डॉ. अंशुमन की सिंगल बेंच ने कहा कि भले ही कॉन्स्टेबल की यह बात मान ली जाए कि हाथापाई हुई, फिर भी उसे नौकरी से निकालना "बहुत ज़्यादा सज़ा" थी।याचिकाकर्ता 1984 में कॉन्स्टेबल के तौर पर बिहार...

मुखिया चुनाव में आरक्षण के लिए 1991 का आरक्षण कानून लागू नहीं होगा: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा है कि मुखिया पद के चुनाव में आरक्षण बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के तहत निर्धारित होता है, न कि बिहार आरक्षण अधिनियम, 1991 के तहत।जस्टिस पार्थ सारथी की एकल पीठ ने जाति जांच समिति के फैसले और राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत 2021 में निर्वाचित मुखिया को पद से हटा दिया गया था।मामला ग्राम पंचायत राज सहुरिया से जुड़ा है, जहां याचिकाकर्ता 2021 के पंचायत चुनाव में अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के लिए आरक्षित सीट से मुखिया निर्वाचित हुआ था। उसके खिलाफ...

गैंगरेप मामले में 4 दोषियों को पटना हाईकोर्ट ने किया बरी, कहा- पांच लोगों ने बारी-बारी रेप किया होता तो शरीर पर चोटें जरूर होतीं
पटना हाईकोर्ट ने गैंगरेप मामले में दोषी ठहराए गए चार आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन की कहानी मेडिकल साक्ष्यों से पुष्ट नहीं होती और मामले में कई महत्वपूर्ण विरोधाभास हैं।जस्टिस जी. अनुपमा चक्रवर्ती की एकल पीठ ने वर्ष 2004 में हुई दोषसिद्धि को रद्द करते हुए कहा कि यदि पांच आरोपियों ने पीड़िता के साथ एक के बाद एक बलात्कार किया होता, तो उसके शरीर पर कुछ चोटें मिलनी चाहिए थीं।यह मामला 1998 का है, जिसमें पांच लोगों पर महिला के साथ सामूहिक बलात्कार का आरोप लगा था। ट्रायल कोर्ट ने सभी...

नाबालिग छात्र अपने विकास के दौर में होते हैं, स्कूलों को उनको निकालने के बजाय सुधार के उपाय अपनाने चाहिए: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि किसी छात्र को स्कूल से निकालने के मामले में प्राइवेट बिना सरकारी मदद वाले (Unaided) स्कूल के खिलाफ रिट याचिका दायर की जा सकती है, क्योंकि शिक्षा देते समय एक शिक्षण संस्थान सार्वजनिक काम (Public Function) करता है।जस्टिस हरीश कुमार की सिंगल जज बेंच ने कहा कि हालांकि शिक्षण संस्थानों में अनुशासन ज़रूरी है, लेकिन स्कूलों को यह भी याद रखना चाहिए कि नाबालिग छात्र अपनी ज़िंदगी के बनने-बिगड़ने वाले दौर (Formative Stage) में होते हैं। अगर गलत व्यवहार को सुधारा जा सकता है तो आम तौर...

POCSO में भी बेगुनाही की धारणा खत्म नहीं होती: पटना हाईकोर्ट ने 20 साल की सजा पाए व्यक्ति को किया बरी
पटना हाईकोर्ट ने POCSO मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए 20 साल की सजा पाए एक व्यक्ति को बरी किया। कोर्ट ने कहा कि POCSO Act की धाराएं 29 और 30 अभियोजन को अपराध के बुनियादी तथ्य साबित करने की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करतीं। जब अभियोजन अपराध के मूल तथ्यों को ही साबित करने में विफल रहता है, तब इन कानूनी धारणाओं के आधार पर दोषसिद्धि कायम नहीं रखी जा सकती।जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस रमेश चंद्र मालवीय की खंडपीठ ने कहा कि POCSO Act के तहत मामला होने मात्र से आरोपी के निर्दोष होने की धारणा...

POCSO में भी बेगुनाही की धारणा खत्म नहीं होती: पटना हाईकोर्ट ने 20 साल की सजा पाए व्यक्ति को किया बरी
पटना हाईकोर्ट ने POCSO मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए 20 साल की सजा पाए एक व्यक्ति को बरी किया। कोर्ट ने कहा कि POCSO Act की धाराएं 29 और 30 अभियोजन को अपराध के बुनियादी तथ्य साबित करने की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करतीं। जब अभियोजन अपराध के मूल तथ्यों को ही साबित करने में विफल रहता है, तब इन कानूनी धारणाओं के आधार पर दोषसिद्धि कायम नहीं रखी जा सकती।जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस रमेश चंद्र मालवीय की खंडपीठ ने कहा कि POCSO Act के तहत मामला होने मात्र से आरोपी के निर्दोष होने की धारणा...

धार्मिक जुलूस निकालने का अधिकार पूर्ण नहीं, कानून-व्यवस्था के लिए उचित पाबंदी लगा सकता है राज्य: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने महाबीरी जुलूस को लेकर दायर याचिका खारिज करते हुए कहा कि धार्मिक जुलूस निकालने का अधिकार संविधान के तहत संरक्षित है लेकिन यह अधिकार पूर्ण नहीं है।सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य उचित प्रतिबंध लगा सकता है।जस्टिस आलोक कुमार की एकल पीठ ने सीवान जिले में महाबीरी जुलूस को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों में हस्तक्षेप करने से इनकार किया।याचिकाकर्ता सीवान के हथौरा गांव स्थित अखाड़ा नंबर-1 के श्रद्धालु हैं। उन्होंने पारंपरिक मार्ग से महाबीरी जुलूस निकालने की अनुमति देने और इसमें...

'सरकारी मान्यता' का मतलब भारतीय अधिकारियों से मान्यता, नेपाल के संस्थान का सर्टिफिकेट PDS लाइसेंस के लिए मान्य नहीं: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि जहां पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) लाइसेंस के लिए "सरकार" से मान्यता प्राप्त एजुकेशनल सर्टिफिकेट की ज़रूरत होती है, वहां इस शब्द का मतलब भारत सरकार या भारत के अंदर या उसके नियंत्रण वाले अधिकारियों से होता है।जस्टिस गिरीश कुमार की सिंगल जज बेंच ने उस उम्मीदवार की उम्मीदवारी खारिज करने के फैसले को सही ठहराया, जिसने नेपाल के एक संस्थान से कंप्यूटर सर्टिफिकेट हासिल किया।याचिकाकर्ता ने PDS की खाली दुकान के लिए लाइसेंस के लिए आवेदन किया और अपने आवेदन के साथ बेसिक कंप्यूटर...

बिहार शिक्षक ट्रांसफर नियम: सरकारी नौकरी में पति-पत्नी को एक ही जगह पोस्टिंग में प्राथमिकता - पटना हाई कोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि बिहार राज्य शिक्षक ट्रांसफर नियम, 2026 में खास तौर पर उन मामलों में ट्रांसफर में प्राथमिकता देने का प्रावधान है जहाँ पति-पत्नी दोनों सरकारी नौकरी में हैं। कोर्ट ने दो महिला शिक्षकों की उस अर्ज़ी पर विचार करने का निर्देश दिया है, जिसमें उन्होंने पटना सदर शहरी क्षेत्र में पोस्टिंग की मांग की थी, जहाँ उनके पति काम करते हैं।जस्टिस हरीश कुमार की सिंगल बेंच ने ज़िला स्थापना समिति को निर्देश दिया कि वे 2026 के नियमों के तहत याचिकाकर्ताओं के ट्रांसफर के अनुरोधों पर विचार करें और...

छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा गैर-कानूनी हिरासत और मारपीट का आरोप: पटना हाईकोर्ट पहुंचा वकील
पटना हाईकोर्ट में एक वकील ने याचिका दायर की। उनका आरोप है कि पटना के गांधी मैदान के पास विरोध कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज के दौरान जब उन्होंने पुलिसकर्मियों से संयम बरतने का अनुरोध किया, तो उन्हें गैर-कानूनी तरीके से पकड़ा गया, उनके साथ मारपीट की गई और लगभग 31 घंटे तक हिरासत में रखा गया।याचिकाकर्ता आदिल हुसैन ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट का रुख किया। उन्होंने 'रिट ऑफ़ मैंडमस' (आदेश) की मांग की है ताकि संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया जा सके।...

बची हुई बिक्री की रकम न चुकाना अपने आप में धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि किसी एग्रीमेंट के तहत बिक्री की बची हुई रकम न चुकाना अपने आप में धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता, जब तक कि वादा करते समय बेईमानी या धोखाधड़ी का इरादा न रहा हो।जस्टिस आलोक कुमार पांडे की सिंगल जज बेंच ने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि कोई पार्टी बाद में अपना वादा पूरा नहीं कर पाई, ऐसा इरादा नहीं माना जा सकता।यह मामला ज़मीन के एक सौदे से जुड़ा था, जिसमें शिकायतकर्ता ने ज़मीन खरीदने के लिए आरोपी के साथ एक एग्रीमेंट किया। शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपी ने बाद में पूरी ज़मीन अपने नाम रजिस्टर...

वोटर लिस्ट में जीवनसाथी का नाम होना वैध हिंदू विवाह का सबूत नहीं: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि वोटर लिस्ट में जीवनसाथी के तौर पर किसी व्यक्ति का नाम होने से ही वैध हिंदू विवाह साबित नहीं होता। जहां विवाह पर ही विवाद हो, वहां दावा करने वाले पक्ष को यह साबित करना होगा कि विवाह हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 7 के तहत ज़रूरी रीति-रिवाजों और परंपराओं के साथ संपन्न हुआ था।जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस राणा विक्रम सिंह की डिवीजन बेंच ने एक महिला की अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। महिला ने फैमिली कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ अपील की थी, जिसमें कहा गया कि वह प्रतिवादी की...

शराबबंदी पुलिस की हिरासत के बाद युवक लापता: पटना हाईकोर्ट ने CBI जांच के दिए आदेश, पुलिस की निष्क्रियता पर जताई नाराजगी
पटना हाईकोर्ट ने भोजपुर जिले में शराबबंदी पुलिस अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर हिरासत में लिए जाने और बेरहमी से पीटे जाने के बाद लापता हुए एक युवक के मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी।अदालत ने मामले को दुर्लभ और असाधारण परिस्थितियों वाला बताते हुए राज्य पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि मामले में जिस तरह की निष्क्रियता दिखाई गई, उससे राज्य की जांच एजेंसी की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़ा हो गया।जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस आलोक कुमार सिन्हा की खंडपीठ ने कहा कि...

धारा 65बी का प्रमाणपत्र नहीं तो व्हाट्सऐप मैसेज साक्ष्य में स्वीकार्य नहीं, मौखिक गवाही से कमी पूरी नहीं हो सकती: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के रूप में पेश किए गए व्हाट्सऐप मैसेज को भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65बी(4) के तहत अनिवार्य प्रमाणपत्र के बिना साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि इस वैधानिक कमी को मौखिक गवाही के जरिए पूरा नहीं किया जा सकता।जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस राणा विक्रम सिंह की खंडपीठ ने यह टिप्पणी उस मामले में की, जिसमें फैमिली कोर्ट ने पति द्वारा क्रूरता के आरोप के आधार पर विवाह विच्छेद की डिक्री पारित की...

मीटर से छेड़छाड़ के सबूत के बिना सिर्फ़ बिजली का बिल न भरना 'बिजली की चोरी' नहीं: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि बिजली का बिल न भरना, इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा 135 के तहत बिजली की चोरी नहीं माना जाएगा, जब तक कि इस बात का कोई सबूत न हो कि कनेक्शन असल में काट दिया गया या उपभोक्ता ने मीटर से छेड़छाड़ की थी।जस्टिस जितेंद्र कुमार की सिंगल जज बेंच ने कहा कि भले ही उपभोक्ता बकाया बिजली बिल चुकाने के लिए ज़िम्मेदार हो सकता है, लेकिन बेईमानी से बिजली इस्तेमाल करने के सबूत के बिना उस पर आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।याचिकाकर्ता ने इलेक्ट्रिसिटी एक्ट की धारा 135 के तहत दर्ज FIR रद्द...

अदालत की अवमानना का नाम सुनकर अफसरों के कांपने वाले दिन अब गए: मद्रास हाईकोर्ट, दो IAS अधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी
मद्रास हाईकोर्ट ने अदालत के आदेशों का पालन न करने पर पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग के पूर्व निदेशक एस.पी. अमृत और वर्तमान निदेशक एम. कृष्णा उन्नी (दोनों IAS अधिकारी) को अवमानना नोटिस जारी किया।जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन ने सुनवाई के दौरान कहा कि एक समय था, जब 'अदालत की अवमानना' शब्द सुनते ही अधिकारियों में भय पैदा हो जाता था, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है और अदालत के आदेशों की अवहेलना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।अदालत ने कहा,"वे दिन अब बीत चुके हैं, जब 'अवमानना' शब्द सुनते ही लोगों की रूह कांप...
