मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
अपराध का मामला दर्ज होना हथियार लाइसेंस निलंबित करने का आधार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि केवल इस आशंका के आधार पर किसी व्यक्ति का हथियार लाइसेंस निलंबित नहीं किया जा सकता कि लाइसेंसी हथियार का संभावित रूप से दुरुपयोग कर सकता है। अदालत ने कहा कि लाइसेंस निलंबित करने से पहले सक्षम प्राधिकारी को हथियार अधिनियम, 1959 की धारा 17 के तहत स्वतंत्र और ठोस कारणों के आधार पर संतुष्ट होना आवश्यक है।जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की पीठ ने कहा कि केवल किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होने या उसके लंबित होने के आधार पर लाइसेंस निलंबित नहीं किया जा सकता। प्राधिकारी...
'बेटे' में सौतेला बेटा भी शामिल, मकान मालिक सौतेले बेटे की असली ज़रूरत के आधार पर किरायेदार को बेदखल कर सकता है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि एक्ट की धारा 2 के तहत परिवार के सदस्य की परिभाषा में सौतेला बेटा भी शामिल है। इसलिए एमपी अकोमोडेशन कंट्रोल एक्ट, 1961 की धारा 12(1) के तहत बेदखली के मकसद से उसे 'बेटा' ही माना जाएगा। [2026 LiveLaw (MP) 323]किरायेदार के खिलाफ बेदखली के मामले में ट्रायल कोर्ट के आदेश को बहाल करते हुए जस्टिस आशीष श्रोती की बेंच ने कहा कि मकान मालिक खुद के लिए या परिवार के किसी अन्य सदस्य (जिसमें सौतेला बेटा भी शामिल है) की असली ज़रूरत के आधार पर किरायेदार को बेदखल करने की मांग कर सकता...
IPL सट्टेबाजी मामले में FIR रद्द करने से MP हाईकोर्ट का इनकार, कहा- सह-आरोपी को मिली राहत का लाभ अपने आप नहीं मिलेगा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कथित IPL सट्टेबाजी से जुड़े मामले में एक आरोपी के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि केवल इसलिए आरोपी को राहत नहीं दी जा सकती क्योंकि सह-आरोपी की FIR पहले रद्द की जा चुकी है।जस्टिस हिमांशु जोशी ने कहा कि Parity के सिद्धांत को यांत्रिक तरीके से लागू नहीं किया जा सकता, जब आरोपियों की भूमिका और उनके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों का अलग-अलग मूल्यांकन जरूरी हो।मामले में पुलिस ने कथित अवैध IPL सट्टेबाजी की सूचना पर छापेमारी की थी। जांच के दौरान करीब ₹21 लाख नकद...
त्विशा शर्मा दहेज हत्या मामला: सास गिरीबाला सिंह ने ज़मानत के लिए खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाज़ा
रिटायर्ड जज गिरीबाला सिंह ने अपनी बहू त्विशा शर्मा की मौत और दहेज के लिए परेशान करने के मामले में रेगुलर ज़मानत के लिए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अर्ज़ी दी।यह मामला आज (12 अगस्त) जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की बेंच के सामने लिस्ट किया गया था, लेकिन इस पर सुनवाई नहीं हो सकी। कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, अब इसे 14 अगस्त के लिए लिस्ट किया गया।33 साल की त्विशा 12 मई को भोपाल में अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं। BNS की धाराओं 80(2) (दहेज हत्या), 85 (क्रूरता) और 3(5) (साझा इरादा) और दहेज निषेध अधिनियम की...
'ट्रायल कोर्ट की लापरवाही': किसी दूसरे केस से जुड़ी थी FSL रिपोर्ट, एमपी हाईकोर्ट ने रद्द की 2009 की हत्या की सज़ा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 2009 में हत्या के दोषी ठहराए गए दो लोगों को बरी किया। कोर्ट ने पाया कि ट्रायल कोर्ट ने जिस FSL रिपोर्ट पर भरोसा किया था, वह किसी दूसरे केस से जुड़ी थी। कोर्ट ने इस दस्तावेज़ पर भरोसा करने में ट्रायल कोर्ट की लापरवाही पर हैरानी जताई। [2026 LiveLaw (MP) 320]सबूतों की मेरिट के आधार पर जांच करते हुए जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की डिवीज़न बेंच ने आगे कहा कि इस बात पर एक अहम विवाद था कि क्या FIR दर्ज होने के समय मृतक जीवित था या क्या कुछ पुलिस अधिकारियों...
मजिस्ट्रेट कस्टडी में हुई मौत के लिए ज़िम्मेदार लोगों का नाम बता सकते हैं, CrPC की धारा 176(1A) के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश दे सकते हैं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि कस्टडी में हुई मौत की जांच CrPC की धारा 176(1A) के तहत करने वाले ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट का काम सिर्फ़ मौत का कारण पता करना ही नहीं है, बल्कि वे उन लोगों की पहचान करने के लिए भी अधिकृत हैं, जो पहली नज़र में कस्टडी में हुई मौत के लिए ज़िम्मेदार हैं और उनके ख़िलाफ़ FIR दर्ज करने का निर्देश भी दे सकते हैं। [2026 LiveLaw (MP) 319]जस्टिस जय कुमार पिल्लई ने धार ज़िला जेल के सुपरिटेंडेंट और डॉक्टरों की एक टीम द्वारा दायर रिट याचिकाओं को खारिज करते हुए ये टिप्पणियां कीं। इन...
हॉस्टल में खराब खाने को लेकर पुराने केस न्यायिक सेवा की राह में बाधा नहीं: MP हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उच्च न्यायिक सेवा के एक उम्मीदवार की उम्मीदवारी खारिज करने का आदेश रद्द करते हुए उसके मामले पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि छात्र जीवन में दर्ज हुए दो आपराधिक मामलों में नैतिक अधमता (Moral Turpitude) से जुड़े अपराध नहीं थे और दोनों मामलों में उम्मीदवार बाद में बरी हो चुका था।जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की खंडपीठ ने MP Higher Judicial Service Examination-2017 के उम्मीदवार की याचिका पर सुनवाई की। उम्मीदवार ने आवेदन के समय 2002 में दर्ज...
'महंत मंदिर की ज़मीन को अपने निजी नाम पर घोषित करने की मांग नहीं कर सकते': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जनराई तोरिया मंदिर के महंत की उस अपील को खारिज करने वाला ट्रायल कोर्ट का आदेश बरकरार रखा, जिसमें उन्होंने मंदिर की ज़मीन पर मालिकाना हक अपने निजी नाम पर घोषित करने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि महंत मंदिर की ज़मीन को अपने निजी नाम पर घोषित करने की मांग नहीं कर सकते। [2026 LiveLaw (MP) 316]यह कहते हुए कि ट्रायल कोर्ट ने महंत के मुकदमे को सही ढंग से खारिज किया, जस्टिस विवेक जैन की बेंच ने कहा:"इस मामले में महंत के निजी नाम पर संपत्ति के मालिकाना हक की घोषणा की मांग की गई,...
फतवे के आधार पर मुस्लिम दंपति का तलाक घोषित नहीं किया जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी फतवे (Fatwa) के आधार पर मुस्लिम दंपति का तलाक घोषित नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि कोई भी मदरसा या सेमिनरी (Seminary) किसी मुस्लिम पुरुष को तलाक नहीं दे सकती। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने भोपाल की दारुल-दफ़ा मसाजिद कमेटी द्वारा जारी फतवे के आधार पर तलाक की घोषणा की मांग करने वाले पति के मुकदमे को खारिज कर दिया।जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने कहा कि संबंधित फतवे में कहीं भी विवाह समाप्त होने या तलाक दिए जाने की घोषणा नहीं की गई है। फतवा केवल इस्लामी...
BJP सांसदों के चुनाव और स्वयं का राज्यसभा नॉमिनेशन रद्द होने के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची मीनाक्षी, नोटिस जारी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने BJP सांसद तरुण चुघ, रजनीश कुमार अग्रवाल और महेश केवट के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया।यह याचिका पूर्व कांग्रेस सांसद मीनाक्षी नटराजन ने दायर की, जिसमें उनके राज्यसभा नॉमिनेशन को रद्द किए जाने को भी चुनौती दी गई।जस्टिस बीपी शर्मा की बेंच ने निर्देश दिया:"सुनवाई हुई। सात कामकाजी दिनों के भीतर ज़रूरी प्रोसेस फीस जमा करने पर प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया जाए। सर्विस रिपोर्ट के साथ 11.09.2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करें।"याचिकाकर्ता ने मध्य प्रदेश से...
एमपी हाईकोर्ट ने जज की बर्खास्तगी सही ठहराई, कहा - नेक नीयत से हुई न्यायिक गलतियों के लिए सुरक्षा, लापरवाही से शक्ति के इस्तेमाल पर लागू नहीं होती
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सिविल जज क्लास-I की नौकरी से बर्खास्तगी सही ठहराई। कोर्ट ने कहा कि हालांकि नेक नीयत से हुई न्यायिक गलतियों के लिए सुरक्षा मिलती है और उन्हें अपील की कार्यवाही में सुधारा जा सकता है, लेकिन यह सुरक्षा न्यायिक शक्ति के लापरवाह इस्तेमाल या न्यायिक अधिकारी के पद के अनुकूल न होने वाले आचरण पर लागू नहीं होती। [2026 LiveLaw (MP) 312]यूनियन ऑफ़ इंडिया बनाम के.के. धवन (1993) मामले का ज़िक्र करते हुए जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की डिवीज़न बेंच ने कहा,"हालांकि न्यायिक...
कोर्ट के समक्ष तथ्य रखना पेशेवर कदाचार नहीं, भले ही उससे दूसरे पक्ष को लाभ मिले : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि कोई लॉ ऑफिसर यदि अपने आधिकारिक कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करते हुए कोर्ट के सामने प्रासंगिक तथ्यों को रखता है, तो इसे पेशेवर कदाचार नहीं माना जा सकता, भले ही उन तथ्यों से किसी अन्य पक्ष को लाभ मिल जाए।एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने यह टिप्पणी दीपली न्यूज़ एडिटर द्वारा दायर रिट अपील खारिज करते हुए की। अपील में एक डिप्टी एडवोकेट जनरल (DAG) पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर (CMHO) का बचाव करने के लिए...
गेस्ट लेक्चरर नियमित कर्मचारियों के समान अतिरिक्त आकस्मिक अवकाश के हकदार नहीं : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि गेस्ट लेक्चरर नियमित सरकारी कर्मचारियों के समान अतिरिक्त आकस्मिक अवकाश (कैजुअल लीव) का दावा नहीं कर सकते। कोर्ट ने कहा कि गेस्ट लेक्चरर अस्थायी या आकस्मिक आधार पर नियुक्त किए जाते हैं और उनके सेवा नियम नियमित कर्मचारियों से अलग होते हैं।एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त द्वारा अतिथि व्याख्याताओं को 7 दिन का अतिरिक्त आकस्मिक अवकाश देने की मांग वाली याचिका खारिज करने का आदेश बरकरार रखा।कोर्ट ने कहा कि...
सिर्फ़ आपराधिक इतिहास के आधार पर संगठित अपराध का आरोप नहीं लगाया जा सकता, जब तक कि इसके लिए ज़रूरी शर्तें पूरी न हों: एमी हाईकोर्ट
एक आरोपी को ज़मानत देते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 के तहत 'ऑर्गनाइज़्ड क्राइम' (संगठित अपराध) का आरोप लगाने के लिए सिर्फ़ आपराधिक इतिहास का होना काफ़ी नहीं है, जब तक कि इस प्रावधान के लिए ज़रूरी कानूनी शर्तें शुरुआती तौर पर (prima facie) साबित न हो जाएं। [2026 LiveLaw (MP) 307]यह देखते हुए कि इस प्रावधान का इस्तेमाल अक्सर बिना यह जांचे किया गया कि क्या इसके लिए ज़रूरी बुनियादी शर्तें शुरुआती तौर पर पूरी होती हैं, जस्टिस रामकुमार चौबे की बेंच ने साफ़...
अगर सबूत मौजूद हों तो बिना किसी अर्ज़ी के भी कोर्ट को आरोपी की मानसिक क्षमता की जांच करनी चाहिए: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि अगर ऐसे सबूत मौजूद हैं, जिनसे आरोपी की ट्रायल का सामना करने की मानसिक क्षमता पर शुरुआती संदेह पैदा होता है तो ट्रायल कोर्ट की यह अनिवार्य ड्यूटी है कि वह जांच करे, भले ही इस संबंध में कोई अर्ज़ी दाखिल न की गई हो। [2026 LiveLaw (MP) 306]संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निष्पक्ष ट्रायल के अधिकार पर ज़ोर देते हुए जस्टिस गजेंद्र सिंह की बेंच ने कहा,"यही मुख्य कारण है कि कोड, संहिता और मेंटल हेल्थकेयर एक्ट में ऐसे प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिनके अनुसार किसी ऐसे व्यक्ति की...
सुप्रीम कोर्ट का राजद्रोह के आरोप को रोके रखने का निर्देश IPC, UAPA के तहत अन्य अपराधों पर ट्रायल जारी रखने से नहीं रोकता: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि एस.जी. वोम्बटकेरे बनाम भारत संघ [W.P.(Civil) 682/2021] मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला, जिसमें IPC की धारा 124A के तहत आरोपों को मामले के लंबित रहने तक रोके रखा गया, UAPA या IPC के तहत अन्य संबंधित अपराधों के लिए मुकदमा चलाने से पूरी छूट नहीं देता है। [2026 LiveLaw (MP) 302]यह देखते हुए कि कई कानूनों के तहत आरोप तय करने की प्रक्रिया को केवल इसलिए नहीं रोका जा सकता, क्योंकि एक धारा को रोके रखा गया, जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच ने कहा:"आरोप तय करने के लिए ज़रूरी...
मरने से पहले WhatsApp मैसेज में आरोपियों का नाम लेना शुरुआती तौर पर 'मरते समय दिया गया बयान' माना जाएगा: एमपी हाई कोर्ट ने ज़मानत देने से इनकार किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आत्महत्या करने से पहले मृतक द्वारा अपने पिता को भेजे गए WhatsApp मैसेज को, जिसमें आरोपी व्यक्तियों के नाम हैं, शुरुआती तौर पर 'मरते समय दिया गया बयान' (dying declaration) माना है। [2026 LiveLaw (MP) 304]जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच ने ट्रायल कोर्ट का आदेश बरकरार रखा, जिसमें अनुसूचित जाति के एक व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी तीन लोगों को ज़मानत देने से इनकार कर दिया गया था।"अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किया गया एक अहम सबूत मृतक के मोबाइल फोन से संबंधित पंचनामा...
किसी दूसरे केस में पहले से ही कस्टडी में दोषी को पुराने केस में सज़ा का सस्पेंशन खत्म होने के बाद दोबारा औपचारिक रूप से सरेंडर करने की ज़रूरत नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि जो दोषी पहले से ही किसी दूसरे क्रिमिनल केस में ज्यूडिशियल कस्टडी में है, उसे किसी पुराने केस में सज़ा के अस्थायी सस्पेंशन की अवधि खत्म होने के बाद दोबारा औपचारिक रूप से सरेंडर करने की ज़रूरत नहीं है। [2026 LiveLaw (MP) 301]यह देखते हुए कि कानून "बेमतलब या बेकार की औपचारिकताओं" पर ज़ोर नहीं देता, जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की बेंच ने कहा कि जेल अधिकारियों द्वारा कस्टडी रिकॉर्ड रखने में हुई प्रशासनिक चूक के कारण किसी कैदी को जेल में बिताई गई असल अवधि का क्रेडिट नहीं...
दुष्कर्म पीड़िता पत्नी का साथ न देना और पहली शादी रहते दूसरी शादी करना क्रूरता व परित्याग: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि पत्नी के साथ दुष्कर्म होने के बाद उसका साथ न देना और पहली शादी के रहते दूसरी शादी करना, दोनों ही वैवाहिक क्रूरता और परित्याग की श्रेणी में आते हैं।जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने परिवार न्यायालय द्वारा दिए गए तलाक के फैसले को बरकरार रखते हुए पति की अपील खारिज की।अदालत ने कहा,"पहली शादी विधिक रूप से कायम रहते दूसरी महिला से विवाह करना, जैसा कि स्वयं अपीलकर्ता ने स्वीकार किया है, क्रूरता और परित्याग दोनों...
980 के संदेह पर 2.5 करोड़ का पूरा बैंक अकाउंट फ्रीज करना उचित नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जारी किए अहम दिशा-निर्देश
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने साइबर धोखाधड़ी के मामलों में बैंक अकाउंट फ्रीज करने की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि किसी अकाउंट में संदिग्ध राशि बहुत कम है तो पूरे अकाउंट को फ्रीज करना उचित नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि 980 की संदिग्ध राशि के आधार पर 2.5 करोड़ से अधिक की वैध धनराशि वाले पूरे बैंक अकाउंट को फ्रीज करना "अनुपातिकता के सिद्धांत" की कसौटी पर परखा जाना चाहिए।जस्टिस हिमांशु जोशी की एकल पीठ ने कहा कि जांच एजेंसियों के वैधानिक अधिकारों और नागरिक के...



















