मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

वीसी सुनवाई के दौरान अंडरपैंट में उपस्थित हुए सरकारी अधिकारी: हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य अधिकारी को अपने बिस्तर से अपनी शर्ट बंद करके और अपने जांघिया में वर्चुअल मोड के माध्यम से अदालत की सुनवाई में उपस्थित होने के लिए फटकार लगाई।यह टिप्पणी करते हुए कि अधिकारी "कदाचार का दोषी है और उसने इस अदालत की अवमानना ​​की", जस्टिस दीपक खोत की पीठ ने अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया।कोर्ट ने कहा,"इस न्यायालय ने दिनांक 09.10.2026 के आदेश के तहत प्रतिवादी को अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, जिसमें विफल रहने पर उसकी उपस्थिति का निर्देश दिया गया।...

एमपी हाईकोर्ट ने छात्र संघ चुनाव कराने के लिए उठाए गए कदमों पर राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य प्रशासन से कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव कराने के लिए उठाए गए कदमों पर एक्शन टेकन रिपोर्ट (की गई कार्रवाई की रिपोर्ट) मांगी। कोर्ट ने पहले ही आदेश दिया था कि हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में चुनाव कराए जाएं।चीफ जस्टिस अल्पेश वाई. कोगजे और जस्टिस विनय सर्राफ की खंडपीठ ने छात्र संघ चुनाव लंबे समय से न कराए जाने को चुनौती देने वाली नई याचिका पर नोटिस जारी किया। साथ ही कोर्ट ने संबंधित पक्षों को निर्देश दिया कि वे 3 अगस्त 2026 को WP 34295/2024 मामले में दिए...

पिता द्वारा जिम्मेदारी लेने को तैयार होने के बावजूद बच्चे को ऑब्जर्वेशन होम में रखना, JJ Act के सुधारवादी उद्देश्य के खिलाफ: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि कानून के दायरे में आए किसी बच्चे को लंबे समय तक ऑब्जर्वेशन होम में रखना - जबकि उसका प्राकृतिक अभिभावक (माता-पिता) पूरी जिम्मेदारी लेने को तैयार हो - 'जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015' (JJ Act) के पुनर्वास और सुधार के उद्देश्यों के विपरीत है। [2026 LiveLaw (MP) 434]बच्चे की कस्टडी उसके पिता को सौंपते हुए जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने टिप्पणी की:"12वीं कक्षा के छात्र को लंबे समय तक ऑब्जर्वेशन होम में रखना, खासकर तब जब उसका प्राकृतिक अभिभावक...

धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले की जांच के लिए हर आरोपी को व्यक्तिगत आर्थिक लाभ मिलना जरूरी नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि धोखाधड़ी (Cheating), जालसाजी (Forgery) और आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) जैसे अपराधों की जांच के लिए यह जरूरी नहीं है कि हर आरोपी को व्यक्तिगत रूप से कोई आर्थिक लाभ मिला हो। कोर्ट ने कहा कि आरोपी की भूमिका, उसे लीज की वास्तविक स्थिति की जानकारी थी या नहीं और लेन-देन किन परिस्थितियों में हुआ, इन सभी पहलुओं का पता जांच के दौरान लगाया जाना चाहिए।जस्टिस हिमांशु जोशी की पीठ ने सरकारी जमीन से संबंधित कथित जालसाजी के मामले में एक आरोपी की ओर से दायर FIR रद्द करने...

माँ के चरित्र पर केवल आरोप लगाने के आधार पर बच्चे को उसकी कस्टडी से वापस लाने के लिए सर्च वारंट जारी नहीं किया जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि माँ के चरित्र पर केवल आरोप लगाने के आधार पर, बच्चे को उसकी कस्टडी से वापस लाने के लिए CrPC की धारा 97 के तहत सर्च वारंट जारी करना उचित नहीं है। [2026 LiveLaw (MP) 431]बता दें, CrPC की धारा 97 के तहत जिला मजिस्ट्रेट, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) या प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट को किसी ऐसे व्यक्ति को छुड़ाने के लिए सर्च वारंट जारी करने का अधिकार है, जिसे गलत तरीके से कैद (wrongful confinement) में रखा गया हो।जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की पीठ ने कहा,"केवल यह आरोप लगाना कि...

नाबालिग की आत्महत्या से अभियोजन पक्ष को आत्महत्या के लिए उकसाने के तत्वों को साबित करने की जिम्मेदारी से छूट नहीं मिलती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही BNS की धारा 107 किसी बच्चे की आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित है, फिर भी अभियोजन पक्ष (Prosecution) को इस अपराध के जरूरी तत्वों को स्पष्ट करना होगा। [2026 LiveLaw (MP) 433]जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच ने टिप्पणी की,"BNS की धारा 107 किसी बच्चे या मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति की आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित है। भले ही यह प्रावधान किसी बच्चे की आत्महत्या के मामले में लागू होता है, फिर भी अभियोजन पक्ष को 'उकसाने' (Abetment) के तत्वों को स्पष्ट करना...

इंदौर में ध्वनि प्रदूषण पर हाईकोर्ट सख्त, हर वार्ड में दो स्वयंसेवक तैनात करने के निर्देश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण पर सख्त रुख अपनाते हुए शहर के हर वार्ड में दो स्वयंसेवक नियुक्त करने के निर्देश दिए। ये स्वयंसेवक अपने क्षेत्र में तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजाने वाले लोगों और वाहनों की जानकारी तुरंत पुलिस को देंगे। वे अपने मोबाइल फोन से घटना का वीडियो भी बना सकेंगे, ताकि शिकायत पर कार्रवाई करने में पुलिस को मदद मिल सके।जस्टिस सुभोद अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ ने कहा कि पिछले साल त्योहारों के दौरान शहर में ध्वनि प्रदूषण बेकाबू रहा और पुलिस इसे...

कॉपीराइट का उल्लंघन करने वाली पोस्ट हटाने के IT नियमों को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ठहराया वैध, इंस्टाग्राम अकाउंट निलंबित करने को चुनौती खारिज

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कॉपीराइट उल्लंघन के आरोप में इंस्टाग्राम पोस्ट हटाए जाने और उसके बाद अकाउंट निलंबित किए जाने को चुनौती देने वाले एक सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर की याचिका खारिज की। हाईकोर्ट ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के नियम 3(1)(बी)(iv) की संवैधानिक वैधता भी बरकरार रखी। यह नियम सोशल मीडिया मंचों को कॉपीराइट और अन्य मालिकाना अधिकारों का उल्लंघन करने वाली सामग्री हटाने की अनुमति देता है।चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोग्जे और जस्टिस विवेक...

त्विशा शर्मा मौत मामला: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपनी बहू त्विशा शर्मा की दहेज हत्या के मामले में आरोपी, रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रखा।जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की बेंच ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा।इस मामले में शुरुआत में भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 80(2) (दहेज हत्या), 85 (क्रूरता) और 3(5) (समान इरादा) के तहत FIR दर्ज की गई। इसके साथ ही दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 भी लगाई गईं। बाद में जांच CBI को सौंप दी गई।सुनवाई के दौरान, सिंह के...

हिरासत की अवधि बताए बिना NSA के तहत जारी आदेश अवैध, बाद का आदेश भी खामी दूर नहीं कर सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत जारी हिरासत आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया हो कि आदेश कितनी अवधि तक प्रभावी रहेगा तो ऐसा आदेश कानून की नजर में टिकाऊ नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिरासत की अवधि का उल्लेख न करना महज प्रक्रियात्मक अनियमितता नहीं, बल्कि आदेश की वैधता को प्रभावित करने वाली गंभीर खामी है।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ ने कहा कि बाद में हिरासत की अवधि बढ़ाने का आदेश जारी करके शुरुआती आदेश की इस मूलभूत कमी को दूर...

सुसाइड नोट न होने मात्र से आरोपी को आरोपमुक्त नहीं किया जा सकता, यदि आत्महत्या के लिए उकसाने का गंभीर संदेह हो: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि सुसाइड नोट का न होना अपने आप में आरोपी को आरोपमुक्त करने का आधार नहीं हो सकता, खासकर तब जब रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से आत्महत्या के लिए उकसाने का गंभीर संदेह पैदा होता हो। इसी टिप्पणी के साथ जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की पीठ ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 306 के तहत आरोप तय किए जाने को चुनौती देने वाली आरोपी की याचिका खारिज की।कोर्ट ने कहा कि यदि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से प्रथम दृष्टया यह गंभीर संदेह पैदा होता है कि मृतका ने आरोपी के ऐसे आचरण के कारण आत्महत्या...

इंदौर में रोड डिवाइडर और फुटपाथों पर अवैध होर्डिंग के खिलाफ याचिका पर हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर में रोड डिवाइडर और फुटपाथों पर कथित अवैध होर्डिंग और यूनिपोल लगाए जाने के मामले में राज्य सरकार सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। जनहित याचिका में इंदौर नगर निगम के खिलाफ कार्रवाई करने और शहर में लगाए गए कथित अवैध विज्ञापन ढांचों को हटाने की मांग की गई।चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने 23 अक्टूबर को निर्देश दिया कि सात कार्यदिवस के भीतर प्रक्रिया शुल्क जमा किए जाने पर प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया जाए। नोटिस का जवाब तीन...

व्हाट्सऐप अकाउंट बहाल होने के बाद एमपी हाईकोर्ट ने बार एसोसिएशन अध्यक्ष की याचिका का निपटारा किया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मृगेंद्र सिंह के व्हाट्सऐप अकाउंट ब्लॉक किए जाने के खिलाफ दायर याचिका का निपटारा किया।व्हाट्सऐप की ओर से अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता के दोनों अकाउंट बहाल कर दिए गए हैं और अब वे काम कर रहे हैं।जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने व्हाट्सऐप के वकील के बयान के बाद कहा कि जब दोनों अकाउंट बहाल हो चुके हैं, तो मामले में आगे किसी निर्देश की आवश्यकता नहीं है। इसी के साथ कोर्ट ने याचिका का निपटारा किया।याचिका में मृगेंद्र सिंह ने बताया था कि वह कई वर्षों से...

इंदौर मेट्रो के लिए पेड़ काटने की अनुमति, लेकिन पक्षी विशेषज्ञों की निगरानी में होगी चरणबद्ध कटाई: हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर मेट्रो परियोजना के लिए 150 से अधिक पेड़ काटे जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका का निपटारा करते हुए पेड़ों की कटाई को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।हाईकोर्ट ने परियोजना के लिए पेड़ काटने पर रोक लगाने से इनकार किया, लेकिन स्पष्ट किया कि सभी पेड़ एक साथ या मनमाने तरीके से नहीं काटे जाएंगे। कटाई और शाखाओं की छंटाई कम से कम दो पक्षी विशेषज्ञों की निगरानी और सलाह से चरणबद्ध तरीके से करनी होगी, ताकि वहां आने वाले पक्षियों को कम से कम परेशानी हो।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और...

वकील का मुवक्किल की गोपनीय जानकारी सुरक्षित रखने का दायित्व नौकरी छोड़ने के बाद भी रहता है, यह स्थायी है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि वकील का अपने मुवक्किल के साथ हुई बातचीत और उसे दी गई पेशेवर कानूनी सलाह की गोपनीयता बनाए रखने का दायित्व नौकरी या पेशेवर नियुक्ति समाप्त होने के बाद भी खत्म नहीं होता, बल्कि यह दायित्व स्थायी रहता है।चीफ जस्टिस अल्पेश वाई. कोगजे और जस्टिस विवेक रूसिया की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता के अपने पूर्व नियोक्ता से संबंधित मामला उठाने के आचरण को “बेहद आपत्तिजनक और निंदनीय” बताया।खंडपीठ ने कहा,“एक वकील का अपने मुवक्किल के प्रति निष्ठा और गोपनीयता बनाए रखने का अटूट दायित्व है।...

पत्नी अपने पति की सहमति या किसी कानूनी/मेडिकल आदेश के बिना उसे नशा मुक्ति केंद्र में कैद करने की अनुमति नहीं दे सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि निजी पुनर्वास केंद्रों (रिहैबिलिटेशन सेंटर्स) के पास केवल जीवनसाथी (पति या पत्नी) की सहमति के आधार पर किसी व्यक्ति को कैद रखने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। [2026 लाइव लॉ (MP) 423]इस बात पर जोर देते हुए कि किसी व्यक्ति को नशा मुक्ति केंद्र में केवल उसकी अपनी मर्जी से या किसी सक्षम कानूनी या मेडिकल आदेश के तहत ही भर्ती किया जा सकता है, जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ ने टिप्पणी की:"किसी निजी पुनर्वास केंद्र के पास केवल जीवनसाथी की सहमति के...

मुस्लिम कानून के तहत वैवाहिक अधिकारों की बहाली की याचिका पत्नी की क्रूरता और दहेज उत्पीड़न की FIR रद्द करने का आधार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि मुस्लिम कानून के तहत पति की ओर से वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए दायर याचिका अपने आप में पत्नी द्वारा क्रूरता और दहेज उत्पीड़न के आरोप में दर्ज कराई गई FIR रद्द करने का आधार नहीं बन सकती।जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की पीठ ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धाराओं 3 और 4 के तहत दर्ज FIR रद्द करने की मांग वाली पति की याचिका खारिज करते हुए कहा कि पति यह साबित करने में विफल रहा कि पत्नी ने उसके वैवाहिक अधिकारों की बहाली संबंधी मुकदमे...

अनुकंपा नियुक्ति में बेटी का दावा पोते से स्वतः श्रेष्ठ नहीं माना जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारी की सेवा बहाल की

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि मृत सरकारी कर्मचारी की बेटी का अनुकंपा नियुक्ति का दावा केवल बेटी होने के आधार पर उसके पोते के दावे से स्वतः श्रेष्ठ नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति का फैसला संबंधित राज्य सरकार की लागू नीति और मामले के तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।जस्टिस आनंद सिंह बहारावत ने कहा,“केवल इसलिए कि हस्तक्षेपकर्ता मृत कर्मचारी की बेटी है, उसके दावे को याचिकाकर्ता यानी पोते के दावे से स्वतः श्रेष्ठ नहीं माना जा सकता। अनुकंपा नियुक्ति के प्रश्न पर लागू...