मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
Section 166 MV Act | दोषी वाहन के ड्राइवर को पक्षकार न बनाने से दावा दोषपूर्ण और सुनवाई योग्य नहीं रहता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि दोषी वाहन के ड्राइवर को पक्षकार न बनाने से मोटर दुर्घटना दावा याचिका दोषपूर्ण और सुनवाई योग्य नहीं रह जाती है।जस्टिस हिरदेश की बेंच ने यह टिप्पणी की:"...मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत दायर दावा याचिका में दोषी वाहन का ड्राइवर आवश्यक पक्षकार होता है। ड्राइवर को पक्षकार न बनाने से दावा याचिका दोषपूर्ण हो जाती है और सुनवाई योग्य नहीं रहती।"राज्य सरकार ने ग्वालियर के मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (Motor Accidents Claims Tribunal) द्वारा दिए गए फैसले को चुनौती...
यूनिवर्सिटी शिक्षक 'पब्लिक ऑफिस' नहीं, क्वो वारंटो याचिका नहीं चलेगी: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यूनिवर्सिटी में शिक्षक, प्रोफेसर या रीडर 'पब्लिक ऑफिस' के दायरे में नहीं आते इसलिए उनके खिलाफ क्वो वारंटो याचिका दायर नहीं की जा सकती।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की।मामला एक यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस के लेक्चरर की नियुक्ति को चुनौती देने से जुड़ा था। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि नियुक्त व्यक्ति के पास आवश्यक शैक्षणिक योग्यता नहीं थी और उसने गलत प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए।अदालत ने पहले यह स्पष्ट किया कि...
LPG संकट पर वीडियो डालने पर शिक्षक के निलंबन पर रोक, एमपी हाईकोर्ट ने कहा- बिना सोच-समझ के लिया गया फैसला
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी प्राथमिक शिक्षक के निलंबन पर रोक लगाते हुए कहा कि यह आदेश बिना उचित विचार किए और जल्दबाजी में पारित किया गया प्रतीत होता है।जस्टिस आशीष श्रोति की पीठ ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को निर्देश दिया कि वह पूरे मामले पर नए सिरे से विचार करें और तथ्यों के आधार पर निर्णय लें।मामला उस शिक्षक से जुड़ा है, जिस पर आरोप है कि उसने 13 मार्च, 2026 को फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें एलपीजी गैस की कमी पर चर्चा की गई। प्रशासन का आरोप था कि इस वीडियो से समाज में अशांति फैल...
'कानूनी शादी में यौन संबंध के लिए सहमति का कोई महत्व नहीं': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पति के खिलाफ IPC की धारा 377 के तहत आरोप रद्द किए
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक पति की याचिका आंशिक रूप से स्वीकार की, जिसमें उसने यौन शोषण और दहेज उत्पीड़न के आरोप में दर्ज FIR रद्द करने की मांग की। कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि बलात्कार से जुड़े प्रावधानों में दी गई छूटों को देखते हुए एक पति द्वारा अपनी वयस्क पत्नी के साथ किया गया कोई भी यौन संबंध या यौन कृत्य बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता। इसलिए शादी के दायरे में सहमति का पहलू कानूनी तौर पर महत्वहीन है।जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की बेंच ने यह टिप्पणी की:"...IPC की धारा 375 के अपवाद 2 (Exception 2)...
डोमिसाइल में तकनीकी गलती पर उम्मीदवार को नहीं किया जा सकता बाहर: एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एसएससी अभ्यर्थी को राहत देते हुए कहा कि डोमिसाइल से जुड़ी एक मामूली तकनीकी त्रुटि को तथ्यों को छिपाने के समान नहीं माना जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि सख्त नियमों का यांत्रिक तरीके से प्रयोग कर किसी योग्य उम्मीदवार का भविष्य खराब नहीं किया जा सकता।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की पीठ ने कर्मचारी चयन आयोग द्वारा अभ्यर्थी की उम्मीदवारी खारिज करने का आदेश रद्द किया।मामला कांस्टेबल (GD) भर्ती परीक्षा 2018 से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने ऑनलाइन आवेदन भरा था, लेकिन साइबर कियोस्क पर फॉर्म...
22 बार सुनवाई के बावजूद आदेश की अवहेलना, एमपी हाईकोर्ट ने अधिकारियों को दो माह की सजा सुनाई
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अदालत के आदेश का बार-बार पालन न करने पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अवमानना का दोषी ठहराते हुए दो माह की साधारण कारावास की सजा सुनाई।अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि मामला 22 बार सूचीबद्ध हुआ फिर भी आदेश का पालन नहीं किया गया।जस्टिस प्रणय वर्मा की पीठ ने कहा,“याचिका 22वीं बार सूचीबद्ध हुई और अब तक आदेश का पालन नहीं किया गया। 06.02.2026 के आदेश के अनुसार प्रतिवादी अवमानना के दोषी है। उन्हें दो माह के साधारण कारावास की सजा दी जाती है।”हालांकि, अदालत...
शराब का कारोबार मौलिक अधिकार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने डिस्टिलरी के लाइसेंस सस्पेंड करने का फैसले सही ठहराया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सोम डिस्टिलरीज़ के कई लाइसेंस सस्पेंड करने के फैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि शराब का कारोबार कोई मौलिक अधिकार नहीं है और यह सख्त कानूनी नियमों के अधीन है।जस्टिस विवेक अग्रवाल की बेंच ने कहा:"पहली बात तो यह कि शराब का कारोबार कोई मौलिक अधिकार नहीं है। दूसरी बात यह कि जब आनुपातिकता (Proportionality) की कसौटी पर इसे परखा जाता है तो उस आधार पर भी अथॉरिटी का फैसला एक्साइज एक्ट और उसके तहत बनाए गए नियमों के दायरे में है, इसलिए इसमें कोई गलती नहीं निकाली जा...
बार निकायों में 30% महिला प्रतिनिधित्व आदेश का पालन न करने के कारण रीवा जिला बार एसोसिएशन के चुनाव पर रोक
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार (25 मार्च) को अंतरिम आदेश में रीवा जिला बार एसोसिएशन को अगले आदेश तक चुनाव कराने से रोक दिया। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के जनवरी के उस फैसले का पालन न करने का हवाला दिया, जिसमें बार एसोसिएशन की कार्यकारी समिति में 30% महिलाओं के लिए आरक्षण अनिवार्य किया गया।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने निर्देश दिया:"उक्त चुनाव के लिए मतदान 25/3/2026 को होना निर्धारित है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी अनिवार्य निर्देशों को ध्यान में रखते हुए - यह सुनिश्चित करने...
पूरी तरह बेतुका: मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने टाइगर कॉरिडोर में सीमित रास्तों पर उठाए सवाल, अधिकारियों को किया तलब
मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने NH-46 के चौड़ीकरण परियोजना में टाइगर कॉरिडोर के लिए प्रस्तावित सीमित वन्यजीव मार्गों पर कड़ा सवाल उठाते हुए इसे पूरी तरह बेतुका करार दिया।कोर्ट ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड के सीनियर अधिकारियों को तलब कर विस्तृत जवाब मांगा।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने पाया कि 16 किलोमीटर लंबे महत्वपूर्ण वन्यजीव कॉरिडोर में केवल लगभग 1.2 से 1.5 किलोमीटर हिस्से में ही पशुओं के लिए मार्ग प्रस्तावित किया गया, जबकि पहले से बना एक...
Hindu Marriage Act के तहत जनजातियों को बहुविवाह की खुली छूट नहीं: मध्य प्रदेश हाइकोर्ट का स्पष्ट फैसला
मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया कि हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act) की धारा 2(2) के तहत अनुसूचित जनजातियों को दी गई छूट का मतलब यह नहीं है कि वे बिना किसी परंपरा के बहुविवाह को उचित ठहरा सकें।जस्टिस विवेक जैन की पीठ ने कहा कि यह प्रावधान केवल जनजातीय परंपराओं और मान्यताओं की रक्षा के लिए है, न कि बहुविवाह जैसे प्रथाओं को मनमाने ढंग से अपनाने की अनुमति देने के लिए।मामला मुन्नी बाई द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था, जिसमें उसने अपने पति की मृत्यु के बाद उत्तराधिकार...
धारा 41A CrPC के नोटिस का पालन होने पर सामान्यतः गिरफ्तारी नहीं: पुलिस कांस्टेबल भर्ती घोटाले में आरोपी को अग्रिम जमानत—मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में कथित धांधली मामले में एक आरोपी को अग्रिम जमानत प्रदान की है। आरोपी पर अभ्यर्थियों और प्रतिरूप (इम्पर्सोनेटर) व्यक्तियों के बीच बिचौलिये की भूमिका निभाकर अवैध चयन में सहायता करने का आरोप था।जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने कहा कि धारा 41A CrPC (अब BNSS की धारा 35(3)) के तहत जारी नोटिस का पालन करने पर सामान्यतः गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि आरोपी जांच में सहयोग करता है, तो उसे गिरफ्तार करना...
पैसे लेकर नौकरी का भरोसा देना धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार (18 मार्च) को एक व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी (IPC की धारा 420) के आरोप में दी गई सज़ा बरकरार रखी। इस व्यक्ति ने नीमच के पूर्व कलेक्टर होने का ढोंग किया और नौकरी के इच्छुक लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का झूठा भरोसा देकर उनसे धोखे से 2 लाख रुपये प्रति व्यक्ति ऐंठ लिए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि उसका यह कृत्य धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है, न कि आपराधिक विश्वासघात की।जस्टिस गजेंद्र सिंह की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा,"सरकारी दफ्तरों में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर स्टूडेंट्स...
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने नवोदय विद्यालयों में एडमिशन में EWS कोटे को शामिल न करने की याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार (17 मार्च) को एक याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा। इस याचिका में दावा किया गया कि जवाहर नवोदय विद्यालयों में एडमिशन की प्रक्रिया से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के छात्रों के लिए कोटे को बाहर रखा गया।जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने यह टिप्पणी की:"श्री एस. एम. गुरु, डिप्टी सॉलिसिटर जनरल, प्रतिवादियों की ओर से अग्रिम सूचना पर पेश हुए। याचिका की एक प्रति, साथ में संलग्न दस्तावेजों के साथ, उन्हें दी जाए ताकि वे निर्देश प्राप्त कर सकें और याचिका पर अपना जवाब दाखिल...
हाईकोर्ट का निर्देश- रोड डिवाइडर और फुटपाथ पर लगे अवैध होर्डिंग्स के खिलाफ कार्रवाई करे इंदौर नगर निगम
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अंतरिम उपाय के तौर पर मंगलवार (17 मार्च) को इंदौर नगर निगम को शहर में रोड डिवाइडर और फुटपाथ पर लगे अवैध होर्डिंग्स के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया।कोर्ट होर्डिंग्स के अवैध रूप से लगाए जाने को लेकर चिंता जताने वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रहा था।PIL पर नोटिस जारी करते हुए जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीज़न बेंच ने यह टिप्पणी की:"नोटिस चार हफ़्तों के भीतर जवाब देने योग्य बनाया जाए। एक अंतरिम उपाय के तौर पर यह निर्देश दिया जाता है कि...
अदालत में गर्भपात हुए भ्रूण को लाकर सहानुभूति लेने की कोशिश अत्यंत अनुचित: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अदालत में गर्भपात हुए भ्रूण को लाकर सहानुभूति हासिल करने की कोशिश करने वाले याचिकाकर्ता की याचिका खारिज करते हुए कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि इस प्रकार का आचरण आपत्तिजनक, अनुचित है और इससे अदालत की गरिमा और मर्यादा कम होती है।जस्टिस हिमांशु जोशी की पीठ ने कहा,“याचिकाकर्ता ने कार्यवाही के दौरान अदालत के मंच के सामने भ्रूण रख दिया, जिससे स्पष्ट है कि वह अदालत की सहानुभूति प्राप्त करना चाहता था। यह कृत्य अत्यंत आपत्तिजनक और अनुचित है। अदालत की कार्यवाही को भावनात्मक...
चार्जशीट दाखिल होते ही नौकरी से हटाना सही नहीं: मध्य प्रदेश हाइकोर्ट
मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि किसी आपराधिक मामले में केवल चार्जशीट दाखिल होने के आधार पर सरकारी कर्मचारी को स्वतः सेवा से बर्खास्त नहीं किया जा सकता।अदालत ने एक होमगार्ड सैनिक को सेवा से हटाने का आदेश रद्द कर दिया।जस्टिस आशीष श्रोती की पीठ ने कहा कि किसी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करते समय संबंधित प्राधिकारी को आरोपों की गंभीरता और उपलब्ध प्रारंभिक साक्ष्यों का आकलन करना जरूरी है। केवल FIR दर्ज होने और चालान पेश होने के आधार पर सेवा से हटाना उचित नहीं है।मामले में...
हाईकोर्ट ने शहदोल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के खिलाफ झूठी शिकायत को लेकर मानहानि मामला रद्द करने से किया इनकार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शहदोल जिला बार एसोसिएशन के वकील और अध्यक्ष की अर्जी खारिज की, जिसमें मानहानि के आरोपों पर संज्ञान लेने के आदेश को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि आरोप पहली नज़र में अपराध के तत्वों को पूरा करते हैं।जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच ने टिप्पणी की,"यह एक स्थापित सिद्धांत है कि CrPC की धारा 482 के तहत निहित शक्तियों का प्रयोग बहुत ही कम मामलों में और केवल तभी किया जाना चाहिए, जब शिकायत में रिकॉर्ड के आधार पर कोई अपराध सामने न आता हो। मौजूदा मामले में आरोप पहली नज़र में मानहानि के...
नामांकन पत्र में गलत जानकारी देना भ्रष्ट आचरण: मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने पंचायत सदस्य का चुनाव रद्द किया
मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि नामांकन पत्र में गलत जानकारी देना भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है। अदालत ने इस आधार पर जनपद पंचायत सदस्य के चुनाव परिणाम रद्द किया।जस्टिस विशाल मिश्रा की पीठ ने वार्ड नंबर-1 के जनपद सदस्य के चुनाव को निरस्त करते हुए कहा कि उम्मीदवार द्वारा नामांकन पत्र और हलफनामे में गलत जानकारी देना गंभीर अनियमितता है, जिसका चुनाव परिणाम पर सीधा प्रभाव पड़ता है।अदालत ने कहा,“नामांकन पत्र में गलत जानकारी देना भ्रष्ट आचरण है। यह मतगणना से जुड़ा मामला...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ACP को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की शक्तियां देने वाली राज्य अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें राज्य सरकार की उस अधिसूचना को चुनौती दी गई, जिसके तहत दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CrPC) के तहत सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्तियां प्रदान की गईं।जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने आदेश दिया:"प्रतिवादियों को सात कार्य दिवसों के भीतर प्रक्रिया शुल्क जमा करने पर RAD (पंजीकृत डाक) के माध्यम से उचित पावती के साथ नोटिस जारी किया जाए, जिसका जवाब चार सप्ताह के भीतर देना होगा।"यह याचिका 9...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व कैबिनेट मंत्री के खिलाफ दर्ज अश्लीलता और जानबूझकर अपमान करने के आरोप वाली FIR की रद्द
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक पूर्व कैबिनेट मंत्री के खिलाफ दर्ज अश्लीलता और जानबूझकर अपमान करने के आरोप वाली FIR रद्द की। कोर्ट ने कहा कि "नालायक" शब्द आम बोलचाल में अक्सर इस्तेमाल होता है और यह शब्द अपने आप में भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत किसी अपराध के लिए कानूनी जवाबदेही नहीं बनाता है।जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच ने यह फैसला सुनाया:"यह आम अनुभव की बात है कि 'नालायक' जैसे शब्द और इसी तरह के बोलचाल वाले शब्द पूरे देश में आम बातचीत में खूब इस्तेमाल होते हैं। संदर्भ के आधार पर, यह ज़रूरी नहीं कि...















