मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

दो साल बाद बिना किसी धोखाधड़ी सबूत के भवन निर्माण की अनुमति रद्द नहीं कर सकता निगम: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
दो साल बाद बिना किसी धोखाधड़ी सबूत के भवन निर्माण की अनुमति रद्द नहीं कर सकता निगम: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर नगर निगम द्वारा जारी भवन निर्माण अनुमति निरस्तीकरण और ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) नोटिस को रद्द करते हुए कहा कि एक बार सक्षम प्राधिकारी द्वारा वैध रूप से भवन निर्माण की अनुमति दिए जाने और उसके आधार पर निर्माण कार्य हो जाने के बाद, धोखाधड़ी या तथ्य छिपाने का कोई प्रमाण न होने पर अनुमति वापस नहीं ली जा सकती।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की पीठ ने कहा कि बिना किसी धोखाधड़ी के सबूत के, नागरिक द्वारा भारी निवेश कर निर्माण किए जाने के बाद अनुमति रद्द करना मनमाना, अनुचित और संविधान के...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने टीबी स्क्रीनिंग गाइडलाइंस को सही ठहराया, कहा- रेडियोग्राफ़र एसोसिएशन की निजी आशंकाएं प्रशासनिक नतीजों की जगह नहीं ले सकतीं
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने टीबी स्क्रीनिंग गाइडलाइंस को सही ठहराया, कहा- रेडियोग्राफ़र एसोसिएशन की निजी आशंकाएं प्रशासनिक नतीजों की जगह नहीं ले सकतीं

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 'कम्युनिटी में टीबी स्क्रीनिंग के लिए अल्ट्रापोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे डिवाइस (HHXray) के इंस्टॉलेशन और ऑपरेशन से जुड़ी गाइडलाइंस' को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि रेडियोग्राफ़र एसोसिएशन की रेडिएशन के खतरों को लेकर आशंकाएं और अनौपचारिक प्रयोग, औपचारिक प्रशासनिक नतीजों की जगह नहीं ले सकते।याचिकाकर्ता एसोसिएशन 'प्रगतिशील रेडियोग्राफ़र संघ' (जो राज्य भर के सरकारी रेडियोग्राफ़र और एक्स-रे टेक्नीशियन का प्रतिनिधित्व करता है) ने टीबी स्क्रीनिंग के लिए अल्ट्रापोर्टेबल हैंडहेल्ड...

जांच अधिकारी के खिलाफ जांच का आदेश: अवैध शराब मामले में आरोपी को बिना वेरिफाइड सबूतों के किया था गिरफ्तार
जांच अधिकारी के खिलाफ जांच का आदेश: अवैध शराब मामले में आरोपी को बिना वेरिफाइड सबूतों के किया था गिरफ्तार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अलीराजपुर के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि वे उस जांच अधिकारी के खिलाफ जांच शुरू करें, जिसने अवैध शराब की ढुलाई के एक मामले में आरोपी को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि यह गिरफ्तारी एक ट्रक बिक्री समझौते के आधार पर की गई थी, जिसकी जांच न तो नोटरी ने की थी और न ही गवाहों ने।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच ने टिप्पणी की कि जांच करना इसलिए ज़रूरी है, ताकि भविष्य की जांचों में ऐसी गलतियां दोबारा न हों।कोर्ट ने कहा: "संबंधित पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया जाता है कि वे इस मामले...

समय पर मुआवज़ा दिए बिना संपत्ति से वंचित करना अनुच्छेद 14 का उल्लंघन: एनएच प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
समय पर मुआवज़ा दिए बिना संपत्ति से वंचित करना अनुच्छेद 14 का उल्लंघन: एनएच प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उस याचिका को मंज़ूरी दी, जिसमें नेशनल हाईवे के निर्माण के लिए ज़मीन अधिग्रहित की गई, लेकिन मुआवज़े की रकम जारी नहीं की गई। कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि ज़मीन मालिकों को समय पर मुआवज़ा दिए बिना उनकी संपत्ति से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीज़न बेंच ने यह टिप्पणी की:"अधिग्रहित ज़मीन के लिए मुआवज़ा पाने का अधिकार सिर्फ़ एक कानूनी हक नहीं है, बल्कि अनुच्छेद 300-A से मिलने वाली एक संवैधानिक गारंटी है। समय पर मुआवज़ा...

श्यामला हिल्स अतिक्रमण मामला: हाईकोर्ट ने बेदखली पर रोक से किया इनकार, कहा- सरकारी जमीन पर कोई कानूनी अधिकार साबित नहीं
श्यामला हिल्स अतिक्रमण मामला: हाईकोर्ट ने बेदखली पर रोक से किया इनकार, कहा- सरकारी जमीन पर कोई कानूनी अधिकार साबित नहीं

भोपाल के श्यामला हिल्स क्षेत्र में सरकारी भूमि पर रह रहे लोगों को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा। हाईकोर्ट ने बेदखली की कार्रवाई पर आगे किसी भी प्रकार की रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता विवादित भूमि पर अपना कोई कानूनी, स्वामित्व, पट्टाधिकार, किरायेदारी या वनाधिकार स्थापित करने में असफल रहे हैं। ऐसे में उनके पक्ष में कोई न्यायसंगत आधार नहीं बनता, जिसके आधार पर अदालत हस्तक्षेप करे।जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस विवेक जैन की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता न तो भूमि के आवंटित...

हाईकोर्ट ने बढ़ाया कम उम्र में ब्याही दी गई पत्नी का गुजारा भत्ता, कहा- उसे उचित रकम देने से मना नहीं किया जा सकता
हाईकोर्ट ने बढ़ाया 'कम उम्र' में ब्याही दी गई पत्नी का गुजारा भत्ता, कहा- उसे उचित रकम देने से मना नहीं किया जा सकता

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने फ़ैमिली कोर्ट द्वारा महिला को दिए गए गुज़ारा भत्ते की रकम बढ़ाई। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह लड़कियों के अधिकारों की एक दुखद तस्वीर है, जिसमें वह महिला, जो कथित तौर पर बाल विवाह की शिकार है, उसे "बहुत कम गुज़ारा भत्ता" देकर फिर से पीड़ित किया जा रहा है।महिला की शादी कथित तौर पर 2015 में हुई थी। उस वक्त वह सिर्फ़ 13 साल की थी, उसने आरोप लगाया कि गुज़ारा भत्ता न देकर उसके साथ क्रूरता की गई। उसने यह भी कहा कि उसके पति के पास गुज़ारा करने के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं और वह खुद...

पिता बेटे और बेटी की पढ़ाई के खर्च में भेदभाव नहीं कर सकते: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
पिता बेटे और बेटी की पढ़ाई के खर्च में भेदभाव नहीं कर सकते: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नाबालिग बेटी की गुहार पर भरण-पोषण की रकम बढ़ाने का आदेश देते हुए कहा कि पिता को बेटे और बेटी की पढ़ाई के खर्च में भेदभाव करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती।जस्टिस गजेंद्र सिंह की बेंच ने इस बात पर ज़ोर दिया:"प्रतिवादी को बेटे और बेटी की पढ़ाई के खर्च में भेदभाव करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती। अगर प्रतिवादी अपने बालिग बेटे की टेक्निकल पढ़ाई का काफ़ी खर्च उठा रहा है तो यह नाबालिग बेटी को उचित भरण-पोषण और पढ़ाई में मदद देने से मना करने का बहाना नहीं हो सकता।"पत्नी और नाबालिग...

सरकारी कर्मचारियों को ट्रांसफर या अटैचमेंट ऑर्डर के ज़रिए परेशान नहीं किया जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
सरकारी कर्मचारियों को ट्रांसफर या अटैचमेंट ऑर्डर के ज़रिए परेशान नहीं किया जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ग्राम रोज़गार सहायक का ट्रांसफर ऑर्डर रद्द किया। कोर्ट ने कहा कि किसी भी सरकारी कर्मचारी को अटैचमेंट या सज़ा के तौर पर किए गए ट्रांसफर के ज़रिए परेशान नहीं किया जा सकता। अगर सरकार किसी कर्मचारी का ट्रांसफर प्रशासनिक कारणों से करना चाहती है तो सबसे अच्छा तरीका ट्रांसफर पॉलिसी का पालन करना है।जस्टिस आनंद सिंह बहरावत की बेंच ने पाया कि शुरुआती जांच और उसके बाद आई जांच रिपोर्ट से यह साबित नहीं होता कि याचिकाकर्ता पर लगाए गए आरोप सही हैं।बेंच ने कहा, "इसलिए किसी भी कर्मचारी...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य से कान्हा नेशनल पार्क में बाघों की मौत को लेकर उठाए गए बचाव के कदमों की जानकारी मांगी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य से कान्हा नेशनल पार्क में बाघों की मौत को लेकर उठाए गए बचाव के कदमों की जानकारी मांगी

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से कान्हा टाइगर रिज़र्व में बाघों की मौत के मामले में अधिकारियों द्वारा उठाए गए बचाव और इलाज के कदमों के बारे में विस्तृत जवाब मांगा।जस्टिस विवेक जैन और जस्टिस अजय कुमार निरंकार की डिवीज़न बेंच ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए यह टिप्पणी की:"प्रतिवादी कान्हा नेशनल पार्क में बाघों की मौत के मामले में उनके द्वारा उठाए गए बचाव और इलाज के कदमों के बारे में अपनी जवाब के साथ विशिष्ट बयान देंगे, जिसे दो हफ़्तों के भीतर दाखिल किया जाना है। गर्मियों...

बंटवारा कार्यवाही में मालिकाना हक का फैसला नहीं कर सकते राजस्व अधिकारी: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
बंटवारा कार्यवाही में मालिकाना हक का फैसला नहीं कर सकते राजस्व अधिकारी: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि राजस्व अधिकारी बंटवारा कार्यवाही के दौरान भूमि के मालिकाना हक से जुड़े विवादों का निपटारा नहीं कर सकते। अदालत ने स्पष्ट किया कि जो व्यक्ति राजस्व अभिलेखों में भूमिस्वामी के रूप में दर्ज नहीं है, लेकिन स्वयं को भूमि का सह-स्वामी या भूमिस्वामी बताता है, उसे अपने अधिकार की घोषणा के लिए सक्षम दीवानी अदालत का दरवाजा खटखटाना होगा।जस्टिस दीपक खोत की पीठ ने यह टिप्पणी याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें राजस्व मंडल और तहसीलदार के आदेशों को...

S.223 BNSS | आरोपी को सुनवाई का मौका देने का मतलब यह नहीं कि संज्ञान लेने से पहले उसे सारे सबूत दिए जाएं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
S.223 BNSS | आरोपी को सुनवाई का मौका देने का मतलब यह नहीं कि संज्ञान लेने से पहले उसे सारे सबूत दिए जाएं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि, हालांकि BNSS की धारा 223 का परंतुक (proviso) मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेने से पहले अपनाई जाने वाली प्रक्रिया निर्धारित करता है, जिसमें आरोपी को सुनवाई का मौका देना अनिवार्य है। फिर भी ऐसा मौका अपने आप में यह बाध्यता नहीं बन जाता कि आरोपी को शुरुआती चरण में ही सारे सबूत उपलब्ध कराए जाएं।धारा 223 (1) में कहा गया कि अधिकार क्षेत्र रखने वाला कोई भी मजिस्ट्रेट किसी शिकायत पर किसी अपराध का संज्ञान लेते समय शिकायतकर्ता और यदि कोई हो तो उपस्थित गवाहों की शपथ पर...

किताबों की कीमतें और बेचने वालों की जानकारी न देने का मामला: हाई कोर्ट ने प्रीस्कूल डायरेक्टर के खिलाफ FIR रद्द करने से किया इनकार
किताबों की कीमतें और बेचने वालों की जानकारी न देने का मामला: हाई कोर्ट ने प्रीस्कूल डायरेक्टर के खिलाफ FIR रद्द करने से किया इनकार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 'कंगारू किड्स इंटरनेशनल प्रीस्कूल' के डायरेक्टर के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इनकार किया। डायरेक्टर पर कलेक्टर के आदेश का उल्लंघन करने का आरोप है। कलेक्टर ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने और शैक्षणिक सामग्री की मनमानी बिक्री पर रोक लगाने के लिए प्रीस्कूल की किताबों, उनकी कीमतों और बेचने वालों की जानकारी वेबसाइट पर सार्वजनिक करने का आदेश दिया था।'कंगारू किड्स इंटरनेशनल प्रीस्कूल' द्वारा दायर रिट याचिका खारिज करते हुए जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की बेंच ने टिप्पणी की कि स्कूल का...

Twisha Sharma Dowry Death: गिरिबाला सिंह की अग्रिम ज़मानत की चुनौतियों पर फैसला सुरक्षित, CBI को पक्षकार बनने की अनुमति
Twisha Sharma Dowry Death: गिरिबाला सिंह की अग्रिम ज़मानत की चुनौतियों पर फैसला सुरक्षित, CBI को पक्षकार बनने की अनुमति

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और त्विशा शर्मा के माता-पिता की उन याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिनमें त्विशा की सास गिरिबाला सिंह को दहेज हत्या के कथित मामले में दी गई अग्रिम ज़मानत को चुनौती दी गई।जस्टिस देव नारायण मिश्रा की सिंगल-जज बेंच ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।सुनवाई के दौरान, त्विशा के माता-पिता की ओर से पेश सीनियर वकील सिद्धार्थ लूथरा ने दलील दी कि भोपाल कोर्ट का वह आदेश, जिसमें ट्विशा की सास गिरिबाला (रिटायर्ड जज) को अग्रिम ज़मानत दी गई...

श्योपुर नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव मामला फिर खुला: हाईकोर्ट ने सरकार को फटकारा, कहा- विरोधाभासी रुख अपनाकर प्रक्रिया में देरी की
श्योपुर नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव मामला फिर खुला: हाईकोर्ट ने सरकार को फटकारा, कहा- विरोधाभासी रुख अपनाकर प्रक्रिया में देरी की

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने श्योपुर नगर पालिका परिषद अध्यक्ष चुनाव को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को फिर से बहाल किया।अदालत ने राज्य सरकार और निर्वाचित अध्यक्ष रेणु गर्ग के विरोधाभासी रुख पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि दोनों ने अलग-अलग मंचों पर अलग दलीलें देकर न्यायिक प्रक्रिया में देरी की।जस्टिस आशीष श्रोती की पीठ ने प्रथम जिला जज के उस आदेश रद्द किया, जिसमें चुनाव याचिका समयपूर्व बताते हुए खारिज की गई।श्योपुर नगर पालिका परिषद के चुनाव जुलाई 2022 में हुए थे जिनमें 23 पार्षद चुने गए। इसके बाद 5...

तलाकशुदा बेटी को पारिवारिक पेंशन से वंचित करना भेदभावपूर्ण: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
तलाकशुदा बेटी को पारिवारिक पेंशन से वंचित करना भेदभावपूर्ण: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि तलाकशुदा बेटी को पारिवारिक पेंशन के अधिकार से बाहर नहीं रखा जा सकता। अदालत ने माना कि ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन होगा।जस्टिस विशाल धगत की पीठ ने कहा,“यदि तलाकशुदा बेटियों को परिवार की परिभाषा में शामिल नहीं किया जाता, तो यह संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा, क्योंकि अविवाहित, विवाहित और तलाकशुदा बेटी में कोई अंतर नहीं है।”मामला ज्योति नामक महिला से जुड़ा था जो...

भरण-पोषण न देने पर पति को अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
भरण-पोषण न देने पर पति को अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण राशि की वसूली के लिए की जाने वाली गिरफ्तारी केवल पालन सुनिश्चित कराने का माध्यम है, इसे अनिश्चितकालीन दंडात्मक कारावास में नहीं बदला जा सकता।जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने अक्टूबर 2025 से जेल में बंद एक मजदूर को रिहा करने का आदेश देते हुए कहा कि किसी निर्धन व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में रखने से भरण-पोषण कानून का उद्देश्य ही विफल हो सकता है, क्योंकि वह भविष्य में कमाकर भुगतान करने में असमर्थ हो जाता है।अदालत ने कहा,“किसी निर्धन व्यक्ति की लगातार हिरासत,...

संदिग्ध लेनदेन के नाम पर पूरा वेतन अकाउंट फ्रीज करना आजीविका के अधिकार का उल्लंघन: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
संदिग्ध लेनदेन के नाम पर पूरा वेतन अकाउंट फ्रीज करना आजीविका के अधिकार का उल्लंघन: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि केवल कुछ संदिग्ध लेनदेन की जांच चलने के आधार पर किसी कार्यरत विशेष सशस्त्र बल कर्मी को उसके वैध वेतन से वंचित नहीं किया जा सकता।अदालत ने माना कि पूरे वेतन खाते पर रोक लगाना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले आजीविका के अधिकार का उल्लंघन है।जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की एकलपीठ ने बैंक को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के वेतन खाते का संचालन बहाल किया जाए। हालांकि जिन लेनदेन पर संदेह है या जो जांच के दायरे में हैं, उन पर रोक जांच एजेंसी के अगले आदेश तक जारी रह सकती...

घर से वकालत करने पर व्यावसायिक बिजली दर नहीं वसूली जा सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
घर से वकालत करने पर व्यावसायिक बिजली दर नहीं वसूली जा सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि यदि कोई वकील अपने आवास से कार्यालय संचालित करता है तो उससे व्यावसायिक दर पर बिजली शुल्क नहीं वसूला जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि वकालत को व्यावसायिक गतिविधि नहीं माना जा सकता।जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की एकलपीठ ने कहा,“यदि वकील का कार्यालय आवासीय परिसर में स्थित है, तो उसे व्यावसायिक गतिविधि नहीं कहा जा सकता। हालांकि यदि कार्यालय किसी व्यावसायिक भवन में संचालित हो रहा हो तब वह व्यावसायिक दर से छूट नहीं मांग सकता।”अदालत ने आगे कहा कि किसी...