मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
भोजशाला विवाद में केंद्र का बड़ा दावा: नमाज़ की अनुमति वाला 1935 का नोटिफिकेशन वैध नहीं
भोजशाला मंदिर–कमाल मौला मस्जिद विवाद में केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को बताया कि वर्ष 1935 में धार रियासत द्वारा जारी वह अधिसूचना, जिसके आधार पर मुस्लिम पक्ष नमाज़ के अधिकार का दावा करता है विधिक रूप से वैध नहीं है।मामले की सुनवाई जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष हुई।केंद्र और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन ने दलील दी कि भोजशाला को वर्ष 1904 में ही संरक्षित स्मारक घोषित किया जा चुका है, इसलिए उसके बाद धार...
मृतकों के सम्मानजनक परिवहन के लिए मुफ्त शव वाहन हेल्पलाइन का प्रचार करे राज्य: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जनहित याचिका (PIL) का निपटारा करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह अपनी मुफ्त शव वाहन सेवा, 'मध्य प्रदेश मुक्ति वाहन योजना' का व्यापक प्रचार सुनिश्चित करे।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने याचिका का निपटारा यह देखते हुए किया कि राज्य सरकार ने पहले ही एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर स्थापित किया।खंडपीठ ने निर्देश दिया:"इस तथ्य को देखते हुए कि प्रतिवादी/राज्य प्राधिकरण ने याचिकाकर्ता द्वारा की गई प्रार्थना का पहले ही पालन किया, इस याचिका में अब और...
UAPA के तहत ज़मानत देने से मना करने का आधार सिर्फ़ इस्लामिक सेमिनार में हिस्सा लेना नहीं हो सकता: हाईकोर्ट ने तीन लोगों को किया रिहा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आरोपी तीन लोगों को ज़मानत दी। कोर्ट ने कहा कि इस्लामिक साहित्य पर किसी सेमिनार में सिर्फ़ हिस्सा लेना ही, UAPA के तहत ज़मानत पर रोक लगाने वाले प्रावधानों के तहत अपने आप में कोई अपराध नहीं है।जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की डिवीज़न बेंच ने कहा कि सेमिनार में हिस्सा लेने के अलावा, अभियोजन पक्ष आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के गंभीर आरोपों के समर्थन में कोई भी प्रथम दृष्टया सबूत पेश नहीं कर...
सामान्य वर्ग के स्टूडेंट्स को भेदभाव की शिकायतों से बाहर रखने का आरोप: UGC के इक्विटी नियमों पर एससी की रोक के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट करेगा सर्कुलर की जांच
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्टूडेंट शिकायत निवारण समिति को निर्देश दिया कि वह सामान्य वर्ग सहित सभी श्रेणियों के छात्रों से मिली भेदभाव की शिकायतों पर विचार करे।यह निर्देश याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें राज्य सरकार द्वारा 2 फरवरी को जारी सर्कुलर को चुनौती दी गई। इस सर्कुलर में सामान्य वर्ग के छात्रों को समिति के समक्ष भेदभाव के आधार पर विवाद उठाने से बाहर रखा गया।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने निर्देश दिया:"स्टूडेंट शिकायत निवारण समिति, यदि प्राप्त होती है तो...
एक की मौत, दो ने काटी उम्रकैद: 14 साल बाद हाईकोर्ट ने हत्या के दोषियों को किया बरी, सबूत गढ़ने के आरोप में जांच अधिकारी के खिलाफ FIR का आदेश
हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के चौदह साल बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आठ लोगों को बरी किया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला जांच अधिकारी द्वारा पेश किए गए मनगढ़ंत सबूतों पर आधारित था।इस बीच दोषियों में से एक की मौत हो गई, जबकि दो ने अपनी उम्रकैद की सज़ा पूरी की और रिहा हो गए।इस मामले के महत्व को देखते हुए जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र की डिवीज़न बेंच ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया कि वे उक्त जांच अधिकारी के खिलाफ FIR दर्ज करें।कोर्ट ने निर्देश देते...
वसुंधरा राजे के 'फर्जी पत्र' विवाद को लेकर पुलिस पर तीन लोगों को अवैध रूप से हिरासत में रखने का आरोप, हाईकोर्ट ने दिए जांच के आदेश
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार को मजिस्ट्रेट कोर्ट को निर्देश दिया कि वह उन तीन लोगों के बयान दर्ज करे, जिन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें बिना कोर्ट में पेश किए लगभग दो दिनों तक अवैध रूप से हिरासत में रखा। इन लोगों पर राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से जुड़ा कथित पत्र फैलाने का आरोप है, जिसमें विभिन्न मुद्दों पर BJP के रुख की आलोचना की गई।राज्य सरकार और याचिकाकर्ताओं द्वारा पेश किए गए विरोधाभासी बयानों को संज्ञान में लेते हुए चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: महिला ऑपरेटर से पुलिसकर्मियों की सांस सूंघवाना “चौंकाने वाला”
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार (29 अप्रैल) को एक पुलिस इंस्पेक्टर के आचरण पर कड़ी नाराज़गी जताई, जिस पर आरोप है कि उसने डायल-100 कंट्रोल रूम में निजी महिला कॉल ऑपरेटर से नशे में संदिग्ध पुरुष पुलिसकर्मियों की सांस चेक करवाई।चीफ़ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणी करते हुए कहा—“क्या यह एक अधिकारी के लिए उचित है? क्या वह खुद जांच नहीं कर सकता था? एक महिला कर्मचारी को पुरुष पुलिसकर्मियों की सांस सूंघने के लिए क्यों बुलाया गया?”यह मामला 19 फरवरी 2026 के...
भोजशाला विवाद: सरस्वती मंदिर तोड़े जाने का कोई ऐतिहासिक रिकॉर्ड नहीं, यह केवल काल्पनिक कथा- मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट से कहा
भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद विवाद में मुस्लिम पक्ष ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट को बताया कि भोजशाला परिसर में सरस्वती मंदिर तोड़े जाने का कोई ऐतिहासिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है और इस संबंध में प्रस्तुत दावा केवल काल्पनिक परिकल्पना है।मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी ने जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष यह दलील दी।विवाद 11वीं शताब्दी के संरक्षित स्मारक भोजशाला से संबंधित है, जिसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित किया गया। हिंदू पक्ष इस स्थल को देवी...
थानों में बिना CCTV वाले हिस्सों में नहीं ले जाए जाएं आरोपी या शिकायतकर्ता: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, हिरासत हिंसा रोकने को बॉडी कैमरा अनिवार्य करने के निर्देश
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत में हिंसा के आरोपों पर कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिया कि राज्य के किसी भी थाने में आरोपी या शिकायतकर्ता को ऐसे स्थान पर न ले जाया जाए जहां CCTV कैमरे न लगे हों।अदालत ने पुलिसकर्मियों के लिए बॉडी कैमरा उपयोग की व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया।जस्टिस सुभोध अभ्यंकर की एकलपीठ ने इंदौर पुलिस आयुक्तालय को निर्देश देते हुए कहा कि शौचालय और कपड़े बदलने के कक्ष जैसे अपवादों को छोड़कर थानों के सभी हिस्से निगरानी के दायरे में होने चाहिए।अदालत ने राज्य सरकार को यह भी...
सरदार सरोवर विस्थापितों की शिकायतें दूर करे सरकार: मेधा पाटकर की याचिका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का निर्देश
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सरदार सरोवर बांध परियोजना से विस्थापित परिवारों के पुनर्वास और भूखंड आवंटन से जुड़ी शिकायतों पर राज्य सरकार को कार्रवाई करने का निर्देश दिया।अदालत ने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर द्वारा उठाए गए मुद्दों पर अतिरिक्त मुख्य सचिव गंभीरता से विचार करें और उनका समाधान सुनिश्चित करें।जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि 6 मार्च 2026 को प्रस्तुत शिकायतों पर निर्णय लेने से पहले यदि...
कानूनी संशोधनों को पिछली तारीख से लागू करके लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारी के नियमितीकरण से इनकार नहीं किया जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि कानूनी संशोधनों को पिछली तारीख से लागू करके उस कर्मचारी के हासिल अधिकारों को खत्म नहीं किया जा सकता, जो दशकों से लगातार सेवा कर रहा है।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच ने यह टिप्पणी की:"हालांकि, इस कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता 1989 में सेवा में आया था और 2016 का संशोधन लागू होने से काफी पहले ही उसने नियमितीकरण के लिए अपनी ज़रूरी सेवा अवधि पूरी कर ली थी। कानूनी संशोधनों को पिछली तारीख से लागू करके उस कर्मचारी के हासिल अधिकारों को खत्म नहीं किया जा सकता, जो...
PIL के अधिकार क्षेत्र में मालिकाना हक और स्वामित्व के सवालों पर फैसला नहीं हो सकता: भोजशाला मंदिर-कमल मौला विवाद में हस्तक्षेप करने वालों ने हाईकोर्ट में कहा
भोजशाला मंदिर-कमल मौला विवाद पर चल रही सुनवाई में इस मामले में दायर PIL में हस्तक्षेप करने वालों ने मंगलवार (28 अप्रैल) को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से कहा कि यह मुद्दा मुख्य रूप से मालिकाना हक और स्वामित्व के सवाल से जुड़ा है। इसलिए इस पर जनहित याचिका (PIL) के ज़रिए फैसला नहीं किया जा सकता।यह विवाद भोजशाला से जुड़ा है, जो 11वीं सदी का स्मारक है और ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) के संरक्षण में है। हिंदू इस जगह को वाग्देवी, यानी देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर मानते हैं, जबकि मुस्लिम इसे कमल मौला...
मृत कर्मचारी के कथित असंतोषजनक रिकॉर्ड का इस्तेमाल बेटे के अनुकंपा नियुक्ति का दावा खारिज करने के लिए नहीं किया जा सकता: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया कि मृत सरकारी कर्मचारी का कथित असंतोषजनक सर्विस रिकॉर्ड, अनुकंपा नियुक्ति के दावे को खारिज करने का कोई वैध आधार नहीं हो सकता।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच ने सक्षम अधिकारियों को आगे यह भी चेतावनी दी कि वे ऐसे आदेश जारी न करें, जिनमें उचित तर्क का अभाव हो या जो मनगढ़ंत आधारों पर आधारित हों।बेंच ने टिप्पणी की, "ऊपर बताए गए अस्वीकृति आदेश की बारीकी से जांच करने पर यह साफ़ पता चलता है कि इसमें लागू नीति का कोई ऐसा खास नियम शामिल नहीं है या उसका हवाला नहीं दिया...
नाबालिग के तौर पर छोटे-मोटे अपराध के लिए सज़ा, डिफेंस सर्विसेज़ में नौकरी में रुकावट नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के फ़ायदेमंद स्वभाव पर ज़ोर देते हुए फ़ैसला दिया कि नाबालिगों द्वारा किए गए छोटे-मोटे अपराध किसी उम्मीदवार को मिलिट्री फ़ोर्स में नौकरी पाने से नहीं रोकेंगे।चीफ़ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सर्राफ़ की डिवीज़न बेंच ने यह टिप्पणी की:"हम माननीय सिंगल जज के इस विचार से पूरी तरह सहमत हैं कि ये अपराध छोटे-मोटे हैं और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के प्रावधानों के अपवादों के दायरे में नहीं आते। प्रतिवादी को सिर्फ़ सज़ा मिलना उसके नौकरी पाने में रुकावट...
रजिस्ट्रार जनरल अपने ही जज की सेशंस जज के बारे में की गई टिप्पणियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करें: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने वापस लिया आदेश
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपना वह निर्देश वापस ले लिया, जिसमें रजिस्ट्रार जनरल से कहा गया था कि वे एक सेशंस जज के खिलाफ एक सिंगल जज द्वारा की गई 'अपमानजनक' टिप्पणियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर करें। आखिरकार, कोर्ट ने इस मुद्दे को अपने आंतरिक प्रशासनिक तंत्र के माध्यम से सुलझाने का फैसला किया।यह विवाद जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता द्वारा जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान पारित आदेश से जुड़ा है। इस आदेश में, शिवपुरी जिले में सरकारी फंड के कथित बड़े पैमाने पर गबन के संबंध...
भोजशाला मंदिर-कमल मौला विवाद: सर्वे का वीडियो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर करे अपलोड, ताकि याचिकाकर्ता देख सकें: हाईकोर्ट ने ASI को निर्देश
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को निर्देश दिया कि वह साइट सर्वे के वीडियोग्राफिक रिकॉर्ड को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड करे और मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी को उसका एक्सेस (पहुंच) प्रदान करे।जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने निर्देश दिया:"सुप्रीम कोर्ट के 01.04.2026 के आदेश के पैरा 6 में की गई टिप्पणियों को देखते हुए हम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को निर्देश देते हैं कि वह भोजशाला साइट पर की गई सर्वे की कार्यवाही की वीडियोग्राफी को एक...
फीस में मनमानी बढ़ोतरी और किताबों की सप्लाई में गड़बड़ी: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूल अधिकारियों के खिलाफ FIR रद्द करने से किया इनकार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर के उन प्राइवेट स्कूलों के अधिकारियों के खिलाफ FIR रद्द करने से इनकार किया, जिन पर फीस में भारी बढ़ोतरी करने और अभिभावकों को चुनिंदा विक्रेताओं से नकली या डुप्लीकेट ISBN वाली किताबें ज़्यादा कीमतों पर खरीदने के लिए मजबूर करने का आरोप है।जस्टिस बीपी शर्मा की बेंच ने यह टिप्पणी की:"इस तरह का बर्ताव, जब किताबों और स्टेशनरी पर मिलने वाले भारी मुनाफे और सप्लाई के खास तरीके के साथ मिलाकर देखा जाता है तो यह एक सोची-समझी साज़िश की ओर इशारा करता है। इसका मकसद अभिभावकों को...
498ए मामले में बरी होने से भरण-पोषण नहीं रोका जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का अहम फैसला
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पति का धारा 498ए के आपराधिक मामले में बरी होना, पत्नी और नाबालिग बच्चे को भरण-पोषण देने से बचने का आधार नहीं बन सकता, यदि वे स्वयं अपना पालन-पोषण करने में असमर्थ हैं।जस्टिस गजेंद्र सिंह की पीठ ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 एक सामाजिक न्याय का प्रावधान है, जिसका उद्देश्य जरूरतमंद आश्रितों को आर्थिक सहारा देना है, न कि किसी को दंडित करना।अदालत ने कहा,“धारा 498ए में बरी होना अपने आप में भरण-पोषण से इनकार का आधार नहीं हो सकता, यदि यह साबित...
मृतक के रिश्तेदार का कोर्ट स्टाफ़ या वकील के तौर पर मौजूद होना, आपराधिक मुक़दमे को ट्रांसफ़र करने का आधार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ऐसे आदेश को सही ठहराया, जिसमें मजिस्ट्रेट कोर्ट से आपराधिक मुक़दमे को ट्रांसफ़र करने से मना किया गया था। इसकी वजह सिर्फ़ यह थी कि मृतक का बेटा मजिस्ट्रेट के मिनिस्ट्रियल स्टाफ़ में है और दूसरा बेटा प्रैक्टिसिंग वकील थाहैजस्टिस हिमांशु जोशी ने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि मृतक का कोई रिश्तेदार मिनिस्ट्रियल पद पर काम कर रहा है, यह मान लेना सही नहीं है कि पीठासीन अधिकारी (जज) प्रभावित होंगे।बेंच ने कहा:"एक कोर्ट रीडर, जो कि मिनिस्ट्रियल स्टाफ़ का हिस्सा होता है, उसकी फ़ैसला लेने...
विदेशी अदालत का आदेश अंतिम नहीं, बच्चों का हित सर्वोपरि: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अमेरिका का कस्टडी आदेश मानने से किया इनकार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि बच्चों की भलाई किसी भी विदेशी अदालत के आदेश से ऊपर है। कोर्ट ने अमेरिका के टेक्सास की अदालत द्वारा दिए गए कस्टडी आदेश को भारत में लागू करने से इनकार किया।जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि विदेशी अदालत का आदेश एक प्रासंगिक पहलू हो सकता है लेकिन यह अंतिम और बाध्यकारी नहीं है खासकर जब मामला बच्चों के हित से जुड़ा हो।कोर्ट ने कहा,“कोर्टों के पारस्परिक सम्मान का सिद्धांत महत्वपूर्ण है, लेकिन यह बच्चों के...














