मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
28 साल नौकरी कराने के बाद कर्मचारी को हटाना अनुचित, नियमित करें सेवा: एमपी हाईकोर्ट का राज्य सरकार को आदेश
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने करीब 28 वर्ष की सेवा के बाद एक कर्मचारी की नियुक्ति यह कहते हुए समाप्त किए जाने का आदेश रद्द किया कि राज्य सरकार को उसे हटाने के बजाय प्रत्यक्ष भर्ती वाले उपयुक्त पद पर नियमित करना चाहिए था।अदालत ने कहा कि कर्मचारी ने नियुक्ति पाने के लिए न तो कोई धोखाधड़ी की और न ही कोई गलत जानकारी दी थी।जस्टिस दीपक खोत की एकलपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि कर्मचारी की सेवाओं को प्रत्यक्ष भर्ती वाले उपयुक्त पद पर नियमित किया जाए। यदि वह पद कम वेतनमान वाला भी हो तब भी नियमों के...
'एक ही गोत्र' में शादी करने पर कथित तौर पर सामाजिक बहिष्कार का मामला: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जोड़े को दी सुरक्षा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक ऐसे जोड़े को नोटिस जारी किया और अंतरिम सुरक्षा दी है, जिन्हें एक स्थानीय सामाजिक संगठन (संगठन) ने एक ही गोत्र (वंश) में शादी करने के कारण कथित तौर पर समाज से बहिष्कृत कर दिया।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने पुलिस को निर्देश दिया कि अगर जोड़े को परेशान किया जा रहा है, तो उन्हें सुरक्षा दी जाए।"प्रतिवादी संख्या 9 से 16 को P.F. के भुगतान पर 7 कामकाजी दिनों के भीतर नोटिस जारी किया जाए, जिसका जवाब 6 सप्ताह के भीतर आना चाहिए। राज्य के वकील को...
एमपी हाईकोर्ट ने कांग्रेस से जुड़े WhatsApp ग्रुप में AI-वीडियो फैलाने के मामले में 'हेबियस कॉर्पस' याचिकाओं को बंद किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 'हेबियस कॉर्पस' याचिकाओं के एक समूह को बंद किया। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि तीन लोगों को पुलिस ने गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया और बाद में राजस्थान पुलिस को सौंप दिया। उन पर कांग्रेस से जुड़े WhatsApp ग्रुप में एक न्यूज़ चैनल की पहचान का गलत इस्तेमाल करके AI से बदला हुआ (मैनिपुलेटेड) वीडियो फैलाने का आरोप है। [2026 LiveLaw (MP) 282]बता दें, राजस्थान पुलिस ने दावा किया कि एक न्यूज़ चैनल के क्राइम रिपोर्टर ने चैनल की पहचान का गलत इस्तेमाल करके AI से बदले गए...
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का फैसला: दंगे के मामले में सम्मानजनक बरी होने की जानकारी छिपाने पर पुलिस कांस्टेबल की बर्खास्तगी बरकरार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दंगे और ईंट-पत्थर फेंकने के मामले में लाभ के संदेह (बेनिफिट ऑफ डाउट) के आधार पर बरी हुए पुलिस कांस्टेबल की सेवा से बर्खास्तगी को सही ठहराया। हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने यह तथ्य छिपाया कि उसकी बरी होना सम्मानजनक (क्लीन) नहीं था। ऐसे व्यक्ति की पुलिस जैसे अनुशासित बल में नियुक्ति पुलिस की अनुशासन व्यवस्था और प्रतिष्ठा पर सवाल खड़े करेगी।जस्टिस दीपक खोत की एकलपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता की आपराधिक मामले में संलिप्तता भले ही संदेहास्पद रही हो लेकिन उसके खिलाफ लगाए गए आरोप...
'हर शादी का अधूरा वादा रेप नहीं': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रेप और आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपी को किया बरी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल शादी से इनकार कर देने या शादी का वादा पूरा न होने मात्र से किसी व्यक्ति को दुष्कर्म (धारा 376 IPC) और आत्महत्या के लिए उकसाने (धारा 306 IPC) का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने कहा कि यह साबित होना जरूरी है कि आरोपी ने शुरुआत से ही शादी करने का इरादा नहीं रखा था और झूठा वादा केवल शारीरिक संबंध बनाने के लिए किया था।जस्टिस राजेंद्र कुमार वानी की पीठ ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि को रद्द करते हुए आरोपी को बरी कर...
अपील बहाल करते हुए अनोखा निर्देश: वृद्धाश्रम जाकर बुजुर्गों के साथ एक घंटा बिताएं, रिपोर्ट भी दें: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक रिट अपील बहाल करते हुए आवेदक को अनोखा निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि वह जबलपुर के तिलवारा वृद्धाश्रम जाकर वहां के बुजुर्गों के साथ एक घंटा बिताएं और 15 दिनों के भीतर अपने अनुभव, वृद्धाश्रम की स्थिति तथा सुझावों सहित रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करें।जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि यह मामला "सामाजिक लेखा-परीक्षण" की अवधारणा को परखने का अवसर है और वर्तमान समय में इसकी अत्यंत आवश्यकता है।मामला उस रिट अपील से जुड़ा था जिसे 18 जुलाई 2025 को पारित एक...
मंदिर के पुजारी की नियुक्ति के लिए सही प्रक्रिया की जगह विरासत या लंबी सेवा नहीं ले सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक सेवा, बाद में मिली मान्यता या प्रशासनिक बातचीत से पुजारी की नियुक्ति को सही नहीं ठहराया जा सकता। [2026 LiveLaw (MP) 273]जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की डिवीजन बेंच ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि मंदिर के पुजारी के तौर पर सेवा करने का अधिकार न तो हमेशा के लिए होता है और न ही इसे विरासत में पाया जा सकता है।"लंबे समय तक सेवा में बने रहने से पुजारी के पद पर नियुक्ति सही नहीं हो जाती, और न ही बाद में मिली मान्यता या प्रशासनिक बातचीत से...
अर्द्ध-न्यायिक कार्य करने वाले तहसीलदार को जजों जैसा कानूनी संरक्षण मिलेगा, पेंशन रोकने का आदेश रद्द: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मुरैना के रिटायर संयुक्त कलेक्टर की याचिका स्वीकार करते हुए उनकी पेंशन पर लगाई गई रोक को रद्द किया।कोर्ट ने कहा कि अर्द्ध-न्यायिक कार्य करने वाले तहसीलदार को जजों की तरह कानूनी संरक्षण प्राप्त है, इसलिए अपने न्यायिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान किए गए कार्यों के लिए उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती, जब तक दुर्भावना या गंभीर कदाचार सिद्ध न हो।जस्टिस आनंद सिंह बहरावत की पीठ ने कहा कि मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता के तहत अधिकारों का प्रयोग करने वाला तहसीलदार जज संरक्षण...
52 वर्षीय महिला को IVF की अनुमति, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा- केवल उम्र के आधार पर नहीं रोका जा सकता उपचार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक 52 वर्षीय महिला को इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) प्रक्रिया से संतान प्राप्ति की अनुमति देते हुए कहा कि यदि डाक्टर महिला को मेडिकल रूप से उपयुक्त मानते हैं तो केवल आयु सीमा के आधार पर उसे इस प्रक्रिया से वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस विशाल मिश्रा की पीठ ने दंपती की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि वे अपनी पसंद के किसी भी संस्थान में सहायक प्रजनन तकनीक (IVF) की प्रक्रिया करा सकते हैं। संबंधित संस्थान मेडिकल जांच के बाद यह तय करने के लिए स्वतंत्र होगा कि IVF किया जा सकता है...
साइबर ठगी में हर सेकंड अहम: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा- पुलिस, बैंक और दूरसंचार विभाग के बीच तुरंत समन्वय जरूरी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने साइबर अपराधों की जांच को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में हर सेकंड अहम होता है और जांच एजेंसियों को अपराधियों से अधिक तेज़ी से काम करना होगा। कोर्ट ने कहा कि जब तक सूचना जुटाने, तकनीकी जांच और मैदानी कार्रवाई के बीच समन्वित व्यवस्था नहीं होगी, तब तक समय पर अपराध का खुलासा और धन की बरामदगी मुश्किल रहेगी।जस्टिस हिमांशु जोशी की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय, दूरसंचार विभाग और भारतीय रिजर्व बैंक को पक्षकार बनाने की अनुमति...
COVID-19 के दौरान खत्म हुई भवन अनुमति पर राहत, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट बोला- वित्तीय हित किसी व्यक्ति के जीवन से ऊपर नहीं हो सकते
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने COVID-19 महामारी के दौरान समाप्त हुई भवन निर्माण अनुमति के मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के जीवन से बढ़कर वित्तीय हित नहीं हो सकते। कोर्ट ने नगर निगम द्वारा आवेदक पर नई भवन अनुमति लेने और इसके लिए दोबारा शुल्क जमा करने का दबाव बनाने के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की।जस्टिस जी. एस. अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने नगर निगम की अपील खारिज करते हुए सिंगल बेंच का आदेश बरकरार रखा, जिसमें निगम को भूमि विकास नियम, 2012 के नियम 23(3) के तहत भवन...
प्रैक्टिसिंग वकील न होने की स्वीकारोक्ति के बाद रेप FIR रद्द, एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महिला द्वारा दर्ज कराई गई दुष्कर्म की एफआईआर को रद्द करते हुए कहा कि जब शिकायतकर्ता ने अदालत के समक्ष स्वयं स्वीकार कर लिया कि वह प्रैक्टिसिंग वकील नहीं है, तब आरोपी से उसकी मुलाकात का आधार ही संदेहास्पद हो गया। अदालत ने माना कि इस महत्वपूर्ण विरोधाभास ने अभियोजन के पूरे मामले की बुनियाद को कमजोर कर दिया है।जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने कहा कि महिला ने अपनी लिखित शिकायत और धारा 164 सीआरपीसी के बयान में खुद को कोटा में प्रैक्टिस करने वाली अधिवक्ता बताया था और दावा...
HAMA | अगर बालिग़ अविवाहित बेटी अपनी कमाई से अपना गुज़ारा नहीं कर सकती तो उसे गुज़ारा-भत्ता पाने के लिए कोई दिव्यांगता दिखाने की ज़रूरत नहीं: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बालिग़ अविवाहित बेटी को ₹2,000 का अंतरिम गुज़ारा-भत्ता (Pendente Lite Maintenance) देने के फ़ैमिली कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम (HAM Act) की धारा 20(3) साफ़ तौर पर कहती है कि बेटी को बस यह दिखाना होगा कि वह अपनी कमाई या किसी और संपत्ति से अपना गुज़ारा करने में असमर्थ है; उसे किसी विकलांगता को साबित करने की ज़रूरत नहीं है। [2026 LiveLaw (MP) 270]जस्टिस द्वारकाधीश बंसल की बेंच ने कहा;"ऊपर बताई गई बातों को देखते हुए यह साफ़ है...
एमपी हाईकोर्ट ने नाबालिग़ उम्र में शादी के आरोप वाली FIR में वायरल कुंभ मेला स्टार और उनके पति को अंतरिम सुरक्षा दी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने वायरल कुंभ मेला स्टार और उनके पति को अंतरिम राहत दी। उन्होंने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि उनकी अलग-अलग धर्मों की शादी को अपराध साबित करने के लिए महिला के जन्म प्रमाण पत्र में हेरफेर किया गया। जोड़े ने जन्म प्रमाण पत्र को बहाल करने और सरकारी रिकॉर्ड में कथित धोखाधड़ी की स्वतंत्र जांच के आदेश देने की भी मांग की।मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस गजेंद्र सिंह की बेंच ने उन्हें नाबालिग़ उम्र में शादी के आरोपों पर दर्ज FIR में अंतरिम सुरक्षा दी।"मौजूद पक्षों के वकीलों की...
छात्रावास शुल्क विवाद में परीक्षा से रोकने के खिलाफ लॉ स्टूडेंट पहुंची मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, कॉलेज और यूनिवर्सिटी को नोटिस
छात्रावास शुल्क को लेकर विवाद के कारण एलएलबी की स्टूडेंट को द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा में बैठने से रोकने के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कॉलेज और यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी किया।अदालत ने दोनों पक्षों से जवाब तलब करते हुए मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की।जस्टिस दीपक खोत की पीठ ने कहा,"प्रतिवादियों को सात कार्य दिवस के भीतर प्रक्रिया शुल्क जमा करने पर नोटिस जारी किया जाए। नोटिस चार सप्ताह में प्रत्यावर्तनीय हो। इसके बाद मामले को सूचीबद्ध किया जाए।"याचिकाकर्ता तीन वर्षीय एलएलबी...
मां ने पति पर लगाया बेटियों के यौन शोषण का आरोप, बेटियों ने कोर्ट में कहा— 'आरोप झूठे हैं, पिता के साथ रहेंगे'
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने पारिवारिक विवाद और झूठे आरोपों से जुड़े एक मामले में बेहद अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने एक नाबालिग लड़की को उसकी मां के पास भेजने के बजाय उसके पिता और बड़ी बहन के साथ रहने की इजाजत दे दी है। कोर्ट ने यह फैसला तब लिया जब नाबालिग लड़की ने साफ शब्दों में कहा कि उसकी मां ने वैवाहिक विवाद (Matrimonial Dispute) के चलते उसके पिता को फंसाने के लिए यौन उत्पीड़न का झूठा आरोप लगाया था।पूरा मामला क्या है?यह मामला जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी...
एक बार की प्रतिकूल टिप्पणी से वकील को हमेशा के लिए नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी वकील के खिलाफ अतीत में दर्ज की गई एक बार की प्रतिकूल टिप्पणी उसे भविष्य में सरकारी विधि अधिकारी के पद पर नियुक्ति से हमेशा के लिए अयोग्य नहीं ठहरा सकती। अदालत ने कहा कि यदि सक्षम प्राधिकारी बाद में उसके कार्य का मूल्यांकन कर उसे उपयुक्त पाता है, तो उसकी नियुक्ति को केवल पुरानी प्रतिकूल टिप्पणियों के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता।यह फैसला जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के ने सुनाया। अदालत ने सरकारी विधि अधिकारी के रूप में वकील की नियुक्ति को चुनौती...
पुलिस शायद आरोपी को रिहाई दिलाने में मदद करने के लिए गिरफ्तारी की प्रक्रिया को जानबूझकर नज़रअंदाज़ कर रही है- एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया कि वह सभी जांच अधिकारियों के लिए एक सर्कुलर जारी करें। इसमें उन्हें पंकज बंसल मामले में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस और BNSS की धारा 47 की ज़रूरतों का सख्ती से पालन करने की चेतावनी दी जाए। इन नियमों के तहत गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में बताना ज़रूरी है।जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की डिवीज़न बेंच ने आगे कहा कि नियमों का पालन न करने से यह धारणा बनेगी कि आरोपी को लिखित आधार जानबूझकर नहीं दिए गए। ऐसा बुरी नीयत से किया...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अधिकारियों से कहा- टाइगर रिज़र्व को कैनाइन डिस्टेंपर के प्रकोप से बचाया जाए
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि वह सभी टाइगर रिज़र्व में नज़र रखे और यह पक्का करे कि ज़रूरत पड़ने पर बाघों को कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) का टीका लगाया जाए।जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी सिंह की बेंच ने कहा:"दलीलों पर विचार करते हुए यह उम्मीद की जाती है कि संबंधित अधिकारी ज़िम्मेदारी से काम करेंगे और सभी टाइगर रिज़र्व पर नज़र रखेंगे। जब भी और जहाँ भी टीकाकरण की ज़रूरत होगी, यह अभियान चलाया जाएगा ताकि बिल्ली प्रजाति के इन जानवरों को ऐसी प्राकृतिक या स्वास्थ्य संबंधी आपदाओं से...
नाबालिग लड़की की उम्र छिपाने के आरोप पर पुलिस अधिकारी और स्कूल प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई पर फैसला लें: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने DGP को दिए निर्देश
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया कि वह एक पुलिस अधिकारी और एक स्कूल प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता पर एक महीने के भीतर निर्णय लें। अदालत ने प्रथम दृष्टया पाया कि दोनों ने नाबालिग लड़की की वास्तविक जन्मतिथि से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज दबाकर उसकी उम्र को लेकर संदेह पैदा किया जिससे आरोपी को आपराधिक मामले में बरी होने में मदद मिली।जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि उपलब्ध सभी आधिकारिक अभिलेखों में लड़की की जन्मतिथि 10 फरवरी...


















