दिल्ली हाईकोर्ट
CPC: कोर्ट में की गई साफ स्वीकारोक्ति को बाद में बदलने के लिए संशोधन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता- दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी पक्ष को अपनी दलीलों (pleadings) में की गई स्पष्ट और ठोस स्वीकारोक्ति (admission) से पीछे हटने की अनुमति नहीं दी जा सकती, खासकर जब इससे विरोधी पक्ष को महत्वपूर्ण अधिकार प्राप्त हो चुके हों। अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए एक सिंगल जज के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें प्रतिवादी को चार वर्ष से अधिक समय बाद अपना लिखित बयान संशोधित करने की अनुमति दी गई थी।जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस रेणु भटनागर की डिवीजन बेंच ने कहा कि यद्यपि संशोधन की शक्ति व्यापक है और अदालतें...
“यात्रा का सबूत नहीं, तो मुआवज़ा नहीं”: दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों हाथ कटने के बावजूद रेलवे क्लेम खारिज किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने रेलवे दुर्घटना मुआवज़े से जुड़े एक अहम मामले में कहा है कि गंभीर चोट, जैसे दोनों हाथों का कट जाना, अपने आप में “अनटुवर्ड इंसीडेंट” का प्रमाण नहीं हो सकता, जब तक कि घटना के तथ्य स्पष्ट और विश्वसनीय रूप से सिद्ध न हों।जस्टिस मनोज कुमार की पीठ ने रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें एक व्यक्ति को मुआवज़ा देने से इनकार कर दिया गया था। अपीलकर्ता ने दावा किया था कि वह Malwa Express से सोनीपत से झांसी की यात्रा कर रहा था और भारी भीड़ के कारण ट्रेन से गिर गया,...
पहले का खरीदार बाद की बिक्री रद्द करने की मांग कर सकता है, बाद के सौदे पहले के अधिकारों को खत्म नहीं कर सकते: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि पहले के सौदे के तहत कोई खरीदार उसी विक्रेता द्वारा उसी प्रॉपर्टी की बाद में की गई बिक्री को चुनौती देने और उसे रद्द करवाने का हकदार है। कोर्ट ने इस बात की पुष्टि की कि ऐसे बाद के सौदे पहले के अधिकारों को खत्म नहीं कर सकते।जस्टिस मिनी पुष्करणा ने अपने 86 पेज के फैसले में यह टिप्पणी की:“जहां एक ही अचल संपत्ति के दो लगातार ट्रांसफर किए गए हों, वहां कानून में उस ट्रांसफर को प्राथमिकता मिलती है, जो समय के हिसाब से पहले हुआ हो, न कि उस ट्रांसफर को जो बाद में हुआ हो। यह...
किरायेदार जिम्मेदारी से नहीं बच सकता, परिवार के रहने पर भी मानी जाएगी उसकी कब्जेदारी: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि कोई भी किरायेदार यह कहकर अपनी कानूनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता कि वह खुद किराए के मकान में नहीं रह रहा है। अदालत ने कहा कि यदि उस मकान में उसके परिवार के सदस्य रह रहे हैं, तो उसे ही उस संपत्ति का वैधानिक कब्जाधारी माना जाएगा।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने अपने फैसले में कहा,“जब कोई किरायेदार अपने परिवार के साथ रहने के लिए मकान किराए पर लेता है तो परिवार के किसी भी सदस्य द्वारा उस मकान में रहना, किरायेदार का ही वैधानिक कब्जा माना जाएगा। केवल...
बलात्कार में मदद करने पर महिला को 10 साल की जेल, दिल्ली हाईकोर्ट ने लगातार आपराधिक आचरण का दिया हवाला
दिल्ली हाईकोर्ट ने महिला को बलात्कार करने में मदद करने के लिए 10 साल की कठोर कारावास की सज़ा सुनाई। कोर्ट ने सज़ा में नरमी न बरतने के मुख्य कारण के तौर पर महिला की आपराधिक गतिविधियों में लगातार संलिप्तता पर ज़ोर दिया।जस्टिस चंद्रशेखरन सुधा ने राज्य सरकार द्वारा दायर अपील पर सज़ा का यह आदेश पारित किया। इस अपील में महिला को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दोषी महिला ने इस अपराध में "सक्रिय और जान-बूझकर भूमिका" निभाई थी।कोर्ट ने अपने अवलोकन में कहा कि महिला ने...
पासपोर्ट जब्ती जैसे मामलों में रिट याचिका सुनने से इनकार करना गलत: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने पासपोर्ट जब्त किए जाने के खिलाफ दायर रिट याचिका को सुनने से इनकार करने के एकल पीठ का आदेश रद्द किया।अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में गंभीर नागरिक परिणाम होते हैं, इसलिए याचिका पर विचार किया जाना चाहिए।चीफ जस्टिस देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया।मामला उस आदेश से जुड़ा था जिसमें एकल जस्टिस ने याचिकाकर्ता को पासपोर्ट अधिनियम 1967 की धारा 11 के तहत वैकल्पिक उपाय अपनाने के लिए कहा था और रिट याचिका सुनने से मना कर दिया था।हाईकोर्ट ने कहा कि...
बैंकिंग अनुशासनात्मक जांच में गवाह न होने से कार्यवाही अमान्य नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि बैंकिंग अनुशासनात्मक जांच में प्रबंधन के गवाहों का न होना अपने आप में कार्यवाही को अवैध नहीं बनाता, यदि निष्कर्ष दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित हों।जस्टिस संजीव नरूला ने यह टिप्पणी पंजाब नेशनल बैंक के एक सीनियर अधिकारी के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान की। अधिकारी को ऋण स्वीकृति और निगरानी में कथित लापरवाही के आरोप में सेवा से बर्खास्त किया गया।याचिकाकर्ता का तर्क था कि जांच में किसी भी प्रबंधन...
एक्टर मोहनलाल के पर्सनालिटी राइट्स की रक्षा पर दिल्ली हाईकोर्ट देगा अंतरिम आदेश
दिल्ली हाईकोर्ट ने मलयालम अभिनेता मोहनलाल के पर्सनालिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए अंतरिम आदेश पारित करने का संकेत दिया।जस्टिस ज्योति सिंह ने सुनवाई के दौरान एक्टर की उस अर्जी को स्वीकार कर लिया जिसमें उन्होंने नए प्रतिवादियों को मुकदमे में पक्षकार बनाने की मांग की थी।अदालत ने एक्टर मोहनलाल को निर्देश दिया कि वे कथित रूप से उल्लंघन करने वाले लिंक की सूची प्रतिवादियों के साथ साझा करें ताकि मामले पर आगे विचार किया जा सके।गौरतलब है कि पिछली सुनवाई में अदालत ने एक्टर को अपनी अंतरिम अर्जी वापस लेने की...
अगर मुद्दों को तय करने से पहले क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र पर आपत्ति नहीं उठाई जाती तो उसे छोड़ दिया गया माना जाएगा: दिल्ली हा कोर्ट ने वाद-पत्र लौटाने का आदेश रद्द किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने यह साफ़ किया कि क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र पर आपत्ति को तब छोड़ दिया गया माना जाएगा, अगर उसे शुरुआती चरण में, खासकर मुद्दों को तय करने से पहले नहीं उठाया जाता। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें इसी आधार पर वाद-पत्र (Plaint) लौटा दिया गया।जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने इस तरह वादी (Plaintiff) द्वारा दायर एक अपील को मंज़ूरी दी। इस अपील में CPC के आदेश VII नियम 10 के तहत पारित आदेश को चुनौती दी गई, जिसके तहत ट्रायल कोर्ट ने क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र की कमी के आधार पर...
बाइपोलर डिसऑर्डर मात्र से नहीं मिलेगा स्थानांतरण में छूट, बेंचमार्क दिव्यांगता जरूरी: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय विद्यालय संगठन की एक शिक्षिका के स्थानांतरण को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि केवल बाइपोलर डिसऑर्डर होने से मेडिकल आधार पर छूट नहीं मिल सकती, जब तक कि बेंचमार्क दिव्यांगता का प्रमाण न हो।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की पीठ ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के आदेश को सही ठहराते हुए याचिका खारिज की। अधिकरण ने भी शिक्षिका के दिल्ली से बाबूगढ़ छावनी स्थित केंद्रीय विद्यालय में स्थानांतरण में हस्तक्षेप करने से इनकार किया।याचिकाकर्ता जो केंद्रीय विद्यालय संगठन...
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट में जज द्वारा मध्यस्थता पर उठे सवालों वाली जनहित याचिका निपटाई, याचिकाकर्ता को समिति के पास जाने का निर्देश
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट में जजों द्वारा स्वयं मध्यस्थता करने और बाद में उसी मामले की सुनवाई करने की प्रथा को लेकर दायर जनहित याचिका का निपटारा किया।हाईकोर्ट ने कहा कि इस विषय पर उचित होगा कि याचिकाकर्ता संबंधित जजों की समिति के समक्ष अपनी बात रखे।चीफ जस्टिस डी के उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता फैमिली कोर्ट्स से जुड़े मामलों को देखने वाली समिति के समक्ष प्रतिनिधित्व प्रस्तुत करे। अदालत ने यह भी कहा कि समिति याचिकाकर्ता के सुझावों पर शीघ्रता से...
विदेश में रह रहे आरोपी को भगोड़ा घोषित करना गलत: हाईकोर्ट ने प्रोक्लेमेशन आदेश और LOC रद्द की
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में ऑस्ट्रेलिया में रह रहे एक व्यक्ति के खिलाफ जारी प्रोक्लेमेशन आदेश और लुकआउट सर्कुलर (LOC) रद्द किया।अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी ने विदेश में रह रहे आरोपी को समन भेजने का कोई ठोस प्रयास ही नहीं किया।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा,“जब जांच एजेंसी को पता था कि आरोपी ऑस्ट्रेलिया में रह रहा है, तब भी वहां उसके पते पर समन या वारंट भेजने की कोई कोशिश नहीं की गई। विदेश मंत्रालय या अन्य वैधानिक माध्यमों से भी सेवा कराने का प्रयास नहीं हुआ।”हाईकोर्ट ने पाया कि दंड...
गैर-कानूनी तरीके से नौकरी से निकालना अपने आप में नौकरी पर वापस रखने या पिछले वेतन का हकदार नहीं बनाता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने यह साफ किया कि अगर यह पाया जाता है कि किसी को गैर-कानूनी तरीके से नौकरी से निकाला गया तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसे अपने आप ही नौकरी पर वापस रखने या पिछले वेतन का हक मिल जाएगा।जस्टिस शैल जैन ने इसलिए प्रोप्राइटरशिप फर्म द्वारा गैर-कानूनी तरीके से नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों को नौकरी पर वापस रखने और पिछले वेतन देने से मना किया। उन्होंने इसके लिए काफी समय बीत जाने का हवाला दिया, खासकर तब जब कई कर्मचारी पहले ही रिटायरमेंट की उम्र तक पहुंच चुके थे और उन्होंने अपनी कानूनी...
बढ़ती प्रॉपर्टी की कीमतों के कारण प्रॉपर्टी डील्स में समय-सीमा का पालन ज़रूरी: दिल्ली हाईकोर्ट ने 'स्पेसिफिक परफॉर्मेंस' का आदेश देने से इनकार किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने बिक्री के एक कथित समझौते के 'स्पेसिफिक परफॉर्मेंस' (समझौते को लागू करने) का आदेश देने से इनकार करते हुए यह टिप्पणी की कि प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतों के कारण प्रॉपर्टी के लेन-देन में समय-सीमा का पालन करना बहुत ज़रूरी हो जाता है।जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस रेनू भटनागर की डिवीज़न बेंच ने कहा,"दिल्ली जैसे बड़े शहरों में, जहां प्रॉपर्टी की कीमतें लगातार और काफ़ी तेज़ी से बढ़ती रहती हैं, प्रॉपर्टी से जुड़े लेन-देन की व्यावसायिक सच्चाई यह है कि समझौते की शर्तों को पूरा करने में समय की...
कैंसलेशन रिपोर्ट स्वीकार करने के बाद मजिस्ट्रेट 'फंक्टस ऑफिसियो' हो जाते हैं, पुलिस की चूकों की जांच नहीं कर सकते: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया कि एक बार जब कोई मजिस्ट्रेट पुलिस द्वारा दायर की गई कैंसलेशन या 'अनट्रेस्ड' (लापता) रिपोर्ट को स्वीकार कर लेता है तो अदालत 'फंक्टस ऑफिसियो' (अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर) हो जाती है। उसके बाद जांच में कथित चूकों की जांच करने या पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश देने के लिए आगे नहीं बढ़ सकती।जस्टिस सौरभ बनर्जी ने इस प्रकार पुलिस अधिकारियों द्वारा दायर याचिकाओं के एक समूह को स्वीकार किया। इन याचिकाओं में पटियाला हाउस कोर्ट के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल...
दिल्ली हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में आरोप तय होने से पहले मंज़ूरी देने वाले अधिकारी को बुलाने का फ़ैसला सही ठहराया
दिल्ली हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में आरोप तय होने से पहले (प्री-चार्ज स्टेज) मंज़ूरी देने वाले अधिकारी को बुलाने के फ़ैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि जहां तथ्यों की ज़रूरत हो, वहां ट्रायल शुरू होने से पहले मंज़ूरी की वैधता की जाँच करने से अदालतों को रोका नहीं जा सकता।जस्टिस अमित महाजन ने इस तरह राज्य सरकार की याचिका खारिज की, जिसमें स्पेशल जज के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें आरोपी को CrPC की धारा 311 के तहत मंज़ूरी देने वाले अधिकारी को बुलाने की इजाज़त दी गई ताकि उसके मुक़दमे के लिए...
गौतम गंभीर के पर्सनेलिटी राइट्स की रक्षा करेगा हाईकोर्ट, आपत्तिजनक सामग्री हटाने के संकेत
दिल्ली हाइकोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर के व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा के लिए अंतरिम आदेश पारित करेगा।जस्टिस ज्योति सिंह ने सुनवाई के दौरान संकेत दिए कि अदालत मेटा, गूगल और अमेज़न से जुड़े विक्रेताओं को कथित उल्लंघनकारी सामग्री हटाने का निर्देश दे सकती है।अदालत ने कहा कि वह इन मंचों को आपत्तिजनक सामग्री हटाने के साथ-साथ अपलोड करने वालों की बुनियादी जानकारी (BCI) और आईपी लॉगिन विवरण उपलब्ध कराने का भी निर्देश देगी।सुनवाई के दौरान गंभीर की ओर से पेश...
मानव तस्करी मामले में सोनू पंजाबन बरी, पीड़िता की गवाही पर दिल्ली हाईकोर्ट ने जताया संदेह
दिल्ली हाईकोर्ट ने मानव तस्करी और नाबालिग के यौन शोषण से जुड़े एक चर्चित मामले में गीता अरोड़ा उर्फ सोनू पंजाबन को बरी किया।अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा और पीड़िता की गवाही भरोसेमंद नहीं पाई गई।जस्टिस चंद्रशेखरन सुधा ने अपने फैसले में कहा कि केवल पीड़िता की गवाही के आधार पर दोषसिद्धि संभव है लेकिन वह गवाही उच्च स्तर की और पूरी तरह विश्वसनीय होनी चाहिए।अदालत ने कहा,“इस मामले में गवाह की गवाही में कई विरोधाभास हैं और यह भरोसा पैदा नहीं करती।”हाईकोर्ट ने पाया कि घटना के...
जज के खिलाफ FIR की मांग पर हाईकोर्ट का सख्त रुख, याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाई, जिसने एक कार्यरत न्यायिक अधिकारी के खिलाफ कथित जालसाजी के आरोप में FIR दर्ज कराने की मांग की थी।चीफ जस्टिस डी के उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि किसी जज के खिलाफ सीधे अदालत में याचिका दाखिल कर FIR दर्ज नहीं कराई जा सकती।अदालत ने कहा,“यदि आप FIR दर्ज कराना चाहते हैं, तो पहले चीफ जस्टिस से प्रशासनिक स्तर पर अनुमति लेनी होगी। यह प्रक्रिया न्यायिक आदेश के जरिए पूरी नहीं हो सकती।” जस्टिस करिया ने भी स्पष्ट किया कि अनुमति...
गोपनीय जानकारी लीक करना बदनामी नहीं, सिर्फ अनुबंध उल्लंघन हो सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी द्वारा कंपनी की गोपनीय जानकारी उजागर करने का आरोप, भले ही सही मान लिया जाए तो वह अधिकतम अनुबंध का उल्लंघन हो सकता है, लेकिन उसे अपने आप बदनामी (मानहानि) नहीं माना जा सकता।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने पुस्तक कंपनी की अपील खारिज करते हुए यह फैसला दिया। कंपनी ने अपने पूर्व कर्मचारी पर 10 लाख रुपये हर्जाने की मांग करते हुए मानहानि का मुकदमा दायर किया था।पूरा मामलाकंपनी का आरोप था कि पूर्व कर्मचारी ने प्रतिस्पर्धी कंपनियों से संपर्क कर उनके व्यापार और...




















