दिल्ली हाईकोर्ट

राणा अय्यूब के ट्वीट नहीं हटाने पर X को झटका, सुरक्षित छूट हो सकती है खत्म: केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा
राणा अय्यूब के ट्वीट नहीं हटाने पर X को झटका, सुरक्षित छूट हो सकती है खत्म: केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा

दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र सरकार ने बड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि पत्रकार राणा अय्यूब के कथित आपत्तिजनक ट्वीट्स को न हटाने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' अपनी सेफ हार्बर यानी कानूनी संरक्षण खो सकता है। केंद्र ने अदालत को बताया कि न्यायिक आदेश और पुलिस नोटिस के बावजूद सामग्री न हटाना कानून के उल्लंघन के समान है।जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव के समक्ष दाखिल हलफनामे में केंद्र ने कहा कि जब किसी मंच को अवैध सामग्री की वास्तविक जानकारी मिल जाती है तब उसे तुरंत कार्रवाई करनी होती है। ऐसा न करना नियमों के...

सिर्फ दुर्व्यवहार से नहीं बनता SC-ST Act का मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने DU प्रोफेसर के खिलाफ FIR रद्द की
सिर्फ दुर्व्यवहार से नहीं बनता SC-ST Act का मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने DU प्रोफेसर के खिलाफ FIR रद्द की

दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि केवल किसी अनुसूचित जाति के व्यक्ति के साथ दुर्व्यवहार करना अपने आप में SC-ST अत्याचार निवारण कानून के तहत अपराध नहीं बनता। इसके लिए यह साबित होना आवश्यक है कि आरोपी ने जाति के आधार पर अपमान करने की मंशा से कार्य किया हो।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा,“SC-ST कानून की धारा 3 के तहत अपराध तभी बनता है जब यह स्पष्ट हो कि कथित कृत्य पीड़ित को उसकी जाति के कारण अपमानित करने की मंशा से किया गया हो। केवल यह पर्याप्त नहीं है कि शिकायतकर्ता अनुसूचित...

अतिक्रमणकारियों को सार्वजनिक हित के आगे झुकना होगा: दिल्ली हाईकोर्ट ने सड़क चौड़ीकरण को दी मंजूरी
अतिक्रमणकारियों को सार्वजनिक हित के आगे झुकना होगा: दिल्ली हाईकोर्ट ने सड़क चौड़ीकरण को दी मंजूरी

दिल्ली हाईकोर्ट ने शालीमार बाग इलाके में सड़क चौड़ीकरण के लिए महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि सार्वजनिक भूमि पर कब्जा करने वालों के निजी हित, बड़े सार्वजनिक हित के सामने टिक नहीं सकते। अदालत ने स्पष्ट किया कि बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सड़क का विस्तार जरूरी है।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की खंडपीठ ने 30 मीटर चौड़ी सड़क बनाने की योजना को मंजूरी देते हुए कहा कि अस्पताल, स्कूल और आपातकालीन सेवाओं तक सुगम पहुंच के लिए इस परियोजना में देरी नहीं की जा सकती।अदालत...

फंड संभालने वाले कर्मचारियों पर भरोसा टूटे तो बर्खास्तगी जायज: दिल्ली हाईकोर्ट
फंड संभालने वाले कर्मचारियों पर भरोसा टूटे तो बर्खास्तगी जायज: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि “लॉस ऑफ कॉन्फिडेंस” (विश्वास का समाप्त होना) का सिद्धांत उन मामलों में विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है, जहां कर्मचारी को वित्तीय जिम्मेदारियां सौंपी गई हों। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि वित्तीय अनियमितताओं जैसे सिद्ध कदाचार से विश्वास टूट जाता है, तो नियोक्ता को उस कर्मचारी को बनाए रखने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।जस्टिस शैल जैन ने कहा:“जहां कर्मचारी वित्तीय कार्यों में संलग्न होता है, वहां विश्वास का महत्व अधिक होता है। एक बार यह विश्वास टूट जाए, तो नियोक्ता को...

पिता ने छोड़ी बच्चे की कस्टडी: दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग का पासपोर्ट पिता के नाम के बिना जारी करने का दिया निर्देश
पिता ने छोड़ी बच्चे की कस्टडी: दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग का पासपोर्ट पिता के नाम के बिना जारी करने का दिया निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग का पासपोर्ट बिना उसके पिता का नाम बताए दोबारा जारी करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि पिता ने कोर्ट से मंज़ूर एक समझौते के तहत कस्टडी और मिलने-जुलने के सभी अधिकार छोड़ दिए।जस्टिस पुरुशेंद्र कुमार कौरव ने यह आदेश माँ की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। माँ ने अपनी नाबालिग बेटी का पासपोर्ट बिना पिता का नाम शामिल किए दोबारा जारी करने की मांग की थी।याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि माता-पिता ने 2021 में आपसी सहमति से समझौता किया था, जिसे बाद में 2022 में तलाक़ के आदेश...

संजय भंडारी को भगोड़ा आर्थिक अपराधी ठहराने का फैसला बरकरार, दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
संजय भंडारी को भगोड़ा आर्थिक अपराधी ठहराने का फैसला बरकरार, दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

दिल्ली हाईकोर्ट ने ब्रिटेन में रह रहे हथियार सलाहकार संजय भंडारी को “भगोड़ा आर्थिक अपराधी” घोषित करने के ट्रायल कोर्ट का आदेश बरकरार रखा। अदालत ने उनकी याचिका खारिज करते हुए साफ कहा कि इस फैसले में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने संक्षिप्त आदेश में कहा, अपील खारिज की जाती है।यह आदेश तिस हजारी कोर्ट के जिला जज द्वारा 5 जुलाई, 2023 को पारित फैसले के खिलाफ दायर अपील पर दिया गया। ट्रायल कोर्ट ने भंडारी को भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 के तहत घोषित किया था।ट्रायल कोर्ट...

जहां आदेश पारित हुआ, वहीं उत्पन्न होता है आंशिक कारण: दिल्ली हाईकोर्ट ने PNB मामले में बहाल की याचिका
जहां आदेश पारित हुआ, वहीं उत्पन्न होता है आंशिक कारण: दिल्ली हाईकोर्ट ने PNB मामले में बहाल की याचिका

दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी मामले में कॉज ऑफ एक्शन उस स्थान पर भी उत्पन्न होता है, जहां विवादित आदेश पारित किया गया हो। इसी आधार पर अदालत ने पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े एक मामले में याचिका फिर से बहाल की।चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए सिंगल जज का आदेश रद्द किया, जिसमें क्षेत्राधिकार के आधार पर याचिका सुनने से इनकार कर दिया गया।मामला एक पूर्व बैंक कर्मचारी से जुड़ा था जिसे वर्ष 2013 में सेवा से हटा दिया गया। उसने...

दिल्ली हाईकोर्ट ने नर्सिंग काउंसिल से नर्सों के लिए शिकायत निवारण तंत्र बनाने पर विचार करने को कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने नर्सिंग काउंसिल से नर्सों के लिए शिकायत निवारण तंत्र बनाने पर विचार करने को कहा

दिल्ली हाईकोर्ट ने इंडियन नर्सिंग काउंसिल से नर्सों के लिए शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने पर विचार करने को कहा। कोर्ट ने यह निर्देश एक जनहित याचिका (PIL) का निपटारा करते हुए दिया, जिसमें इस पेशे के भीतर शिकायतों को सुलझाने के लिए एक प्रभावी प्रणाली की कमी को उजागर किया गया।चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीज़न बेंच इंडियन प्रोफेशनल नर्सेस एसोसिएशन द्वारा दायर PIL की सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में नर्सिंग पेशेवरों को पेश आने वाली शिकायतों को सुलझाने के लिए किसी...

ट्रांसजेंडर संशोधन कानून 2026 पर सवाल, दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
ट्रांसजेंडर संशोधन कानून 2026 पर सवाल, दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों से जुड़े संशोधन कानून 2026 को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को तय की।चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने बुधवार को सुनवाई करते हुए केंद्र को नोटिस जारी किया। याचिका चंद्रेश जैन द्वारा दायर की गई, जिसमें कहा गया कि यह संशोधन सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक नालसा फैसले द्वारा स्थापित सिद्धांतों को कमजोर करता है।याचिका में आरोप लगाया गया कि नया कानून...

900 रुपये की रिश्वत: 35 साल पुराने मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने इंजीनियरों को किया बरी, सजा की रद्द
'900' रुपये की रिश्वत: 35 साल पुराने मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने इंजीनियरों को किया बरी, सजा की रद्द

दिल्ली हाईकोर्ट ने वर्ष 1991 के एक पुराने रिश्वत मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए बाढ़ नियंत्रण विभाग के दो पूर्व इंजीनियरों को बरी कर दिया। इन पर 900-900 रुपये की रिश्वत लेने का आरोप था। इस फैसले के साथ ही दोनों का 35 साल लंबा कानूनी संघर्ष समाप्त हो गया।जस्टिस चंद्रशेखरन सुधा ने आरोपियों की अपील स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा वर्ष 2002 में सुनाई गई सजा रद्द की। हाइकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष “अवैध धन की मांग” को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा।अदालत ने स्पष्ट किया,“भ्रष्टाचार निवारण...

हिरासत में मौत का मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने क्राइम ब्रांच को सौंपी जांच, ACP स्तर के अधिकारी से जांच के निर्देश
हिरासत में मौत का मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने क्राइम ब्रांच को सौंपी जांच, ACP स्तर के अधिकारी से जांच के निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित हिरासत में मौत के एक गंभीर मामले में सख्त रुख अपनाते हुए जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी। अदालत ने निर्देश दिया कि इस मामले की जांच एसीपी स्तर के अधिकारी द्वारा की जाए जिसकी निगरानी संयुक्त पुलिस आयुक्त (क्राइम) करेंगे।जस्टिस अनुप जयराम भंभानी की पीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि 23 फरवरी 2026 को पुलिस हिरासत में याचिकाकर्ता के पिता की पिटाई के कारण मौत हो गई।याचिकाकर्ता के अनुसार एक संपत्ति विवाद के सिलसिले में उसे और उसके पिता को पुल प्रह्लादपुर...

दिल्ली हाईकोर्ट ने अन्य लोगों से शादीशुदा होने के बावजूद लिव-इन कपल को दी पुलिस सुरक्षा, अनुच्छेद 21 के अधिकारों का हवाला
दिल्ली हाईकोर्ट ने अन्य लोगों से शादीशुदा होने के बावजूद लिव-इन कपल को दी पुलिस सुरक्षा, अनुच्छेद 21 के अधिकारों का हवाला

दिल्ली हाईकोर्ट ने अलग रह रहे माता-पिता द्वारा अपनी अमेरिका में जन्मी बेटी की कस्टडी को लेकर दायर परस्पर याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अदालत ने दोहराया कि बच्चे का सर्वोपरि हित (welfare of the child) ही सबसे महत्वपूर्ण मानदंड है और विदेशी अदालतों के आदेश अंतिम (conclusive) नहीं होते।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेजा की खंडपीठ ने कहा कि विदेशी अदालतों के आदेशों को उचित महत्व और सम्मान दिया जाता है, लेकिन बच्चे के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कस्टडी...

आपत्तिजनक पोस्ट पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, पत्रकार राणा अय्यूब के खिलाफ कार्रवाई के संकेत
आपत्तिजनक पोस्ट पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, पत्रकार राणा अय्यूब के खिलाफ कार्रवाई के संकेत

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया मंच 'X' पर कथित तौर पर हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक और भड़काऊ टिप्पणियों को लेकर पत्रकार राना अय्यूब के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत बताई। अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल सुनवाई योग्य बताया।जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव की पीठ याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें इन पोस्ट को हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। अदालत ने केंद्र सरकार सोशल मीडिया कंपनी दिल्ली पुलिस और राना अय्यूब को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।अदालत ने कहा कि इन पोस्ट की प्रकृति...

शादीशुदा होने के बावजूद लिव-इन कपल को सुरक्षा, दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- जीवन और स्वतंत्रता सर्वोपरि
शादीशुदा होने के बावजूद लिव-इन कपल को सुरक्षा, दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- जीवन और स्वतंत्रता सर्वोपरि

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि दो वयस्क अपनी इच्छा से साथ रह रहे हैं तो केवल इस आधार पर उन्हें सुरक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता कि वे पहले से किसी और से शादीशुदा हैं। अदालत ने ऐसे ही एक लिव-इन कपल को पुलिस सुरक्षा देने का निर्देश दिया।जस्टिस सौरभ बनर्जी की पीठ ने स्पष्ट कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार सर्वोपरि है और यह सभी नागरिकों को समान रूप से प्राप्त है।अदालत ने कहा,“दोनों याचिकाकर्ता वयस्क हैं और भारतीय नागरिक हैं। इसलिए...

अगस्तावेस्टलैंड केस: दिल्ली हाईकोर्ट ने क्रिश्चियन मिशेल की जेल से रिहाई की याचिका खारिज की
अगस्तावेस्टलैंड केस: दिल्ली हाईकोर्ट ने क्रिश्चियन मिशेल की जेल से रिहाई की याचिका खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार (8 अप्रैल) को अगस्तावेस्टलैंड VVIP चॉपर घोटाले के आरोपी क्रिश्चियन मिशेल की याचिका खारिज की। इस याचिका में उन्होंने भारत-UAE प्रत्यर्पण संधि के अनुच्छेद 17 को चुनौती दी थी जो साल 1999 में हुई थी।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की डिवीज़न बेंच ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को भी सही ठहराया, जिसमें मिशेल की जेल से रिहाई की अर्जी खारिज की गई थी। मिशेल ने यह अर्जी इस आधार पर दी थी कि वह सात साल की अधिकतम सज़ा काट चुके हैं।कोर्ट ने कहा,"हमें इस याचिका में कोई दम नहीं...

वकीलों को WhatsApp अकाउंट बैन और डेटा नुकसान की शिकायत: दिल्ली हाईकोर्ट ने अपीलीय पैनल से संपर्क करने का निर्देश दिया
वकीलों को WhatsApp अकाउंट बैन और डेटा नुकसान की शिकायत: दिल्ली हाईकोर्ट ने अपीलीय पैनल से संपर्क करने का निर्देश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने WhatsApp अकाउंट बैन से जुड़ी याचिकाओं के समूह को निपटाते हुए याचिकाकर्ताओं को सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत कानूनी उपाय का लाभ उठाने का निर्देश दिया।जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने कहा कि IT Rules के नियम 3A के तहत शिकायत निवारण का प्रभावी सिस्टम उपलब्ध है, जो शिकायत अपीलीय समिति के समक्ष अपील का प्रावधान करता है।ये याचिकाएं प्रैक्टिस करने वाले वकीलों— दीपक कंसल, डॉ. आदिश सी अग्रवाल और रोहित पांडे ने दायर की थीं,...

CBI से क्लीन चिट मिलने के बावजूद जांच का आदेश देने के लिए लोकपाल को कारण बताने होंगे: दिल्ली हाईकोर्ट ने DRI अधिकारी के खिलाफ जांच रद्द की
CBI से क्लीन चिट मिलने के बावजूद जांच का आदेश देने के लिए लोकपाल को कारण बताने होंगे: दिल्ली हाईकोर्ट ने DRI अधिकारी के खिलाफ जांच रद्द की

दिल्ली हाईकोर्ट ने लोकपाल का आदेश रद्द किया, जिसमें Directorate of Revenue Intelligence (DRI) के अधिकारी के खिलाफ CBI जांच का निर्देश दिया गया। कोर्ट ने कहा कि ऐसा फैसला बिना स्पष्ट कारण बताए नहीं लिया जा सकता, खासकर तब जब पिछली जांच में अधिकारी को बेकसूर पाया गया हो।जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस रेनू भटनागर की डिवीज़न बेंच ने अधिकारी द्वारा दायर रिट याचिका स्वीकार की और लोकपाल के 24 जुलाई, 2025 का आदेश रद्द किया, जहां तक ​​वह उस अधिकारी से संबंधित था।कोर्ट ने कहा,"जब ये सबूत याचिकाकर्ता के पक्ष...

22 साल जेल काटने के बाद उम्रकैदी की रिहाई का आदेश, अपराध की गंभीरता के आधार पर बार-बार इनकार पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त
22 साल जेल काटने के बाद उम्रकैदी की रिहाई का आदेश, अपराध की गंभीरता के आधार पर बार-बार इनकार पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त

दिल्ली हाईकोर्ट ने 22 साल से अधिक सजा काट चुके एक उम्रकैदी की समयपूर्व रिहाई का आदेश देते हुए सेंटेंस रिव्यू बोर्ड (एसआरबी) के फैसलों पर कड़ी टिप्पणी की।अदालत ने कहा कि केवल अपराध की गंभीरता के आधार पर बार-बार रिहाई से इनकार करना यांत्रिक और मनमाना है।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने राजब अली की याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया। अली को वर्ष 2005 में दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई।अदालत ने पाया कि एसआरबी ने 2016 से लेकर 2024 तक कई बार उसकी रिहाई की अर्जी खारिज की और हर बार...