सुप्रीम कोर्ट

लॉरेंस बिश्नोई गैंग से धमकी मामले में पप्पू यादव को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट में शीघ्र सुनवाई मांगने की अनुमति दी
लॉरेंस बिश्नोई गैंग से धमकी मामले में पप्पू यादव को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट में शीघ्र सुनवाई मांगने की अनुमति दी

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार से सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग से मिली जान से मारने की धमकियों के मामले में हाइकोर्ट के समक्ष शीघ्र सुनवाई की मांग करने की अनुमति दी।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने कहा कि यद्यपि सुप्रीम कोर्ट सामान्यतः ऐसे मामलों में सीधे हस्तक्षेप नहीं करता लेकिन याचिकाकर्ता की यह शिकायत कि उसकी सुरक्षा याचिका 19 नवंबर 2024 से हाइकोर्ट में सूचीबद्ध नहीं हुई, को देखते हुए सीमित राहत दी जा रही है।अदालत ने...

सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 227 के तहत अधिकार क्षेत्र के इस्तेमाल के लिए सिद्धांत बताए
सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 227 के तहत अधिकार क्षेत्र के इस्तेमाल के लिए सिद्धांत बताए

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि हाईकोर्ट संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत निगरानी वाली रिट अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए उन मुद्दों पर फिर से विचार नहीं कर सकते ताकि ट्रायल कोर्ट के फैसले की जगह अपना फैसला दे सकें।कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट किसी याचिका पर उसके गुण-दोष के आधार पर फैसला देने के लिए अपीलीय अदालत की तरह काम नहीं कर सकता; बल्कि उसकी जांच सिर्फ़ यह तय करने तक सीमित होनी चाहिए कि क्या ट्रायल कोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया, या उसका फैसला इतना गलत है कि कोई भी समझदार व्यक्ति...

Order XIII-A CPC | सुप्रीम कोर्ट ने कॉमर्शियल मुकदमों में समरी जजमेंट के लिए गाइडलाइंस तय कीं
Order XIII-A CPC | सुप्रीम कोर्ट ने कॉमर्शियल मुकदमों में 'समरी जजमेंट' के लिए गाइडलाइंस तय कीं

सुप्रीम कोर्ट ने सिविल प्रोसीजर कोड के ऑर्डर XIII-A के तहत कमर्शियल मुकदमों में 'समरी जजमेंट' (संक्षिप्त फैसला) देने के लिए गाइडलाइंस तय कीं।सिविल प्रोसीजर कोड के ऑर्डर XIII-A की व्याख्या करते हुए कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि 'समरी जजमेंट' अहम प्रक्रियात्मक तरीका है, जिसका मकसद कमर्शियल विवादों में काम की गति बढ़ाना और गैर-ज़रूरी मुकदमों को रोकना है।कोर्ट ने साफ किया कि 'समरी जजमेंट' तभी दिया जाना चाहिए, जब बचाव पक्ष की दलीलें सिर्फ़ अटकलों पर आधारित हों या उनके सफल होने की कोई ठोस गुंजाइश न...

हेट स्पीच पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा—संविधान की आत्मा बंधुत्व को बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी
हेट स्पीच पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा—संविधान की आत्मा 'बंधुत्व' को बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच (घृणा भाषण) के मुद्दे पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसी भाषा संविधान के मूल मूल्य 'बंधुत्व' (Fraternity) के खिलाफ है और समाज की नैतिक संरचना को कमजोर करती है। हालांकि, कोर्ट ने इस विषय पर कोई सामान्य दिशा-निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया और कहा कि नए अपराध बनाना विधायिका के अधिकार क्षेत्र में आता है।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि संविधान केवल संस्थाओं या कानूनों से नहीं चलता, बल्कि नागरिकों की उसके मूल्यों के...

हेड-ऑन टक्कर में बिना गहन जांच के एक ड्राइवर को अकेले दोषी नहीं ठहराया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
हेड-ऑन टक्कर में बिना गहन जांच के एक ड्राइवर को अकेले दोषी नहीं ठहराया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि हेड-ऑन (आमने-सामने) टक्कर के मामलों में बिना सभी परिस्थितियों और पक्षों के आचरण की गहन जांच किए, किसी एक ड्राइवर पर पूरा दोष नहीं डाला जा सकता।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की खंडपीठ ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसलों को रद्द कर दिया। दोनों ने मृत कार चालक को दुर्घटना के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया था।सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि निचली अदालतों ने 'सह-लापरवाही'...

जाली वसीयत पर आधारित संपत्ति खरीदने वाला खरीदार आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
जाली वसीयत पर आधारित संपत्ति खरीदने वाला खरीदार आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी जाली वसीयत (Will) के आधार पर खरीदी गई संपत्ति के मामले में, यदि खरीदार को उस जालसाजी की जानकारी नहीं थी, तो उसे आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने एक खरीदार के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब खरीद के समय खरीदार को कथित फर्जी वसीयत की जानकारी नहीं थी और वह संबंधित अवधि में विदेश में था, तो उसे धोखाधड़ीपूर्ण लेन-देन के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया...

अगर नियुक्ति अगले आदेश तक की शर्त पर है तो पूरा कार्यकाल करने का कोई अधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
अगर नियुक्ति 'अगले आदेश तक' की शर्त पर है तो पूरा कार्यकाल करने का कोई अधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (28 अप्रैल) को यह टिप्पणी की कि अगर किसी नियुक्ति आदेश में कार्यकाल को "अगले आदेश तक" की शर्त के अधीन रखा गया है तो इससे कर्मचारी को पूरे कार्यकाल तक पद पर बने रहने का कोई ऐसा अधिकार नहीं मिल जाता, जिसे वह कानूनी तौर पर लागू करवा सके।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला सही ठहराया, जिसमें प्रतिवादी अधिकारियों द्वारा अपीलकर्ता का कार्यकाल कम किए जाने का फैसला बरकरार रखा गया था। खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि हालांकि...

मौत की सज़ा वाले संभावित मामलों में सज़ा सुनाने से पहले ट्रायल कोर्ट को कम करने वाले और बढ़ाने वाले कारकों पर रिपोर्ट मंगानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
मौत की सज़ा वाले संभावित मामलों में सज़ा सुनाने से पहले ट्रायल कोर्ट को कम करने वाले और बढ़ाने वाले कारकों पर रिपोर्ट मंगानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि ट्रायल कोर्ट को नियमित प्रक्रिया के तौर पर मौत की सज़ा वाले संभावित मामलों में दोषी ठहराए जाने के तुरंत बाद और सज़ा तय करने से पहले सज़ा को कम करने वाले और बढ़ाने वाले हालात पर रिपोर्ट मंगानी चाहिए। कोर्ट ने पाया कि शुरुआती चरण में ऐसी रिपोर्ट न मिलने से सज़ा सुनाने की संतुलित प्रक्रिया कमज़ोर होती है और सुधार से जुड़े कारकों पर सही ढंग से विचार करने में देरी होती है।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने पटना हाईकोर्ट के फैसले के...

RTE Act | स्कूल, राज्य द्वारा आवंटित स्टूडेंट का एडमिशन योग्यता पर विवाद का बहाना बनाकर नहीं रोक सकते: सुप्रीम कोर्ट
RTE Act | स्कूल, राज्य द्वारा आवंटित स्टूडेंट का एडमिशन योग्यता पर विवाद का बहाना बनाकर नहीं रोक सकते: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि प्राइवेट "पड़ोस के स्कूलों" को शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) के तहत राज्य द्वारा आवंटित स्टूडेंट्स को तुरंत एडमिशन देना होगा। इस मामले में वे इस आधार पर एडमिशन से मना नहीं कर सकते कि छात्र की योग्यता को लेकर कोई विवाद अभी लंबित है।कोर्ट ने साफ किया कि भले ही स्कूल को किसी स्टूडेंट की योग्यता को लेकर कोई शक हो तो भी वह स्पष्टीकरण के लिए अधिकारियों से संपर्क कर सकता है, लेकिन इस बीच वह एडमिशन नहीं रोक सकता।जस्टिस पमिदिघंतम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक...

सबरीमाला संदर्भ के मद्देनज़र सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक धार्मिक संस्थान कानून पर फैसला सुरक्षित रखने का आदेश लिया वापस
सबरीमाला संदर्भ के मद्देनज़र सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक धार्मिक संस्थान कानून पर फैसला सुरक्षित रखने का आदेश लिया वापस

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला संदर्भ में लंबित संवैधानिक सवालों को देखते हुए कर्नाटक हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम, 1997 की वैधता पर अपना पहले सुरक्षित रखा गया फैसला वापस ले लिया है। अदालत ने कहा कि इस मामले का सीधा संबंध 9-जजों की संविधान पीठ के समक्ष लंबित मुद्दों से है और उसी के निर्णय के बाद इस पर सुनवाई की जाएगी।जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने 11 फरवरी को इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा था। यह मामला कर्नाटक हाईकोर्ट के 2006 के उस निर्णय को चुनौती...

“शादी से पहले साथ क्यों रही?”: 15 साल के लिव-इन रिश्ते में झूठे शादी के वादे पर यौन शोषण के आरोप पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
“शादी से पहले साथ क्यों रही?”: 15 साल के लिव-इन रिश्ते में 'झूठे शादी के वादे' पर यौन शोषण के आरोप पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि लंबे समय तक चले लिव-इन रिलेशनशिप में, जहां दोनों पक्ष साथ रहे और एक बच्चा भी हुआ, उसे केवल “शादी के झूठे वादे पर यौन शोषण” के आपराधिक मामले के रूप में नहीं देखा जा सकता।जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की खंडपीठ एक महिला की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें भारतीय न्याय संहिता, 2024 की धाराओं 69, 115(2) और 74 के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया गया था।महिला का...

S.27 Evidence Act | अलग-अलग आरोपियों के संयुक्त बयान तभी स्वीकार्य, जब उनसे अलग-अलग नई बातें सामने आती हों: सुप्रीम कोर्ट
S.27 Evidence Act | अलग-अलग आरोपियों के संयुक्त बयान तभी स्वीकार्य, जब उनसे अलग-अलग नई बातें सामने आती हों: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि अलग-अलग आरोपियों द्वारा दिए गए संयुक्त या एक साथ दिए गए खुलासे के बयान साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 के तहत तभी स्वीकार्य हैं, जब ऐसे बयानों से अपराध से जुड़े अलग और प्रासंगिक तथ्यों का पता चलता हो।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने यह फैसला कर्नाटक से जुड़े हत्या के मामले में अपनी दोषसिद्धि को चुनौती देने वाले दो दोषियों द्वारा दायर आपराधिक अपीलों पर सुनवाई करते हुए दिया। कोर्ट ने अंततः अपीलकर्ताओं को बरी किया, लेकिन भारतीय साक्ष्य अधिनियम,...

Article 227 | हाईकोर्ट ट्रायल कोर्ट द्वारा विचार किए गए सबूतों का दोबारा मूल्यांकन नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट
Article 227 | हाईकोर्ट ट्रायल कोर्ट द्वारा विचार किए गए सबूतों का दोबारा मूल्यांकन नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के लिए संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत अपने सुपरवाइजरी अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए निचली अदालतों के फैसलों में दखल देना गलत है।जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला रद्द करते हुए यह बात कही, जिसमें हाईकोर्ट ने अपील कोर्ट का फैसले में दखल दिया था, जिसमें अपीलकर्ता को बेदखली के मुकदमे में संशोधन करने की इजाज़त दी गई थी।बेंच ने कहा, "यह बात अच्छी तरह से तय है कि इस तरह के अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते समय...

मकान मालिक के कानूनी वारिस बेदखली के मुकदमे में वास्तविक ज़रूरत जोड़ने के लिए संशोधन कर सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट
मकान मालिक के कानूनी वारिस बेदखली के मुकदमे में 'वास्तविक ज़रूरत' जोड़ने के लिए संशोधन कर सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की है कि यदि कोई मकान मालिक, जिसने अपने और अपने परिवार के लिए 'वास्तविक ज़रूरत' (bona fide requirement) के आधार पर बेदखली का मुकदमा दायर किया था, उसका निधन हो जाता है तो उसके कानूनी वारिस मुकदमे की दलीलों में संशोधन करके 'वास्तविक ज़रूरत' के अतिरिक्त आधारों को शामिल कर सकते हैं; बशर्ते कि ऐसे संशोधन मुकदमे के मूल आधार से न तो टकराते हों और न ही उसे बदलते हों।जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की खंडपीठ ने मकान मालिक के कानूनी वारिसों (पत्नी और बच्चों)...

अग्रिम ज़मानत खारिज करते समय कोर्ट आरोपी को सरेंडर करने का निर्देश नहीं दे सकता: सुप्रीम कोर्ट
अग्रिम ज़मानत खारिज करते समय कोर्ट आरोपी को सरेंडर करने का निर्देश नहीं दे सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि अग्रिम ज़मानत खारिज करते समय किसी आरोपी को ट्रायल कोर्ट के सामने सरेंडर करने का निर्देश देने का अधिकार कोर्ट के पास नहीं है।कोर्ट ने टिप्पणी की,"अगर कोर्ट अग्रिम ज़मानत खारिज करना चाहता है, तो वह ऐसा कर सकता है, लेकिन कोर्ट के पास यह कहने का अधिकार नहीं है कि याचिकाकर्ता को अब सरेंडर कर देना चाहिए।" जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ऐसे व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिस पर धोखाधड़ी और जालसाज़ी का आरोप है। यह याचिका झारखंड...

क्या दोषी को सरेंडर किए बिना अपील/रिवीजन सुनी जा सकती है? सुप्रीम कोर्ट ने मामला बड़ी बेंच को भेजा
क्या दोषी को सरेंडर किए बिना अपील/रिवीजन सुनी जा सकती है? सुप्रीम कोर्ट ने मामला बड़ी बेंच को भेजा

सुप्रीम कोर्ट ने यह महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न बड़ी बेंच को भेजा कि क्या हाईकोर्ट किसी दोषी को जेल में आत्मसमर्पण किए बिना उसकी आपराधिक अपील या पुनरीक्षण याचिका सुन सकता है?जस्टिस पामिडिघंटम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की विभिन्न पीठों के फैसलों में मतभेद है, इसलिए स्पष्टता के लिए बड़ी पीठ का निर्णय आवश्यक है।यह मामला उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें एक दोषी ने राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। राजस्थान हाईकोर्ट ने उसकी पुनर्विचार याचिका...