सुप्रीम कोर्ट
सेकेंडरी सबूत पेश करने की शर्तें साबित न होने तक दस्तावेज़ की फोटोकॉपी सबूत नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फोटोकॉपी किए गए पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर की गई बिक्री यह देखते हुए रद्द की कि किसी दस्तावेज़ की फोटोकॉपी, जो सेकेंडरी सबूत है, तब तक सबूत नहीं है जब तक कि वह एविडेंस एक्ट की धारा 65 में बताई गई शर्तों के तहत न आती हो।एविडेंस एक्ट की धारा 65 सेकेंडरी सबूत (कॉपी, मौखिक बयान) पेश करने की अनुमति देती है, जब मूल दस्तावेज़ धारा 64 के तहत पेश नहीं किया जा सकता। यह तब लागू होता है, जब मूल दस्तावेज़/सबूत खो गया हो, नष्ट हो गया हो, विरोधी पक्ष के कब्ज़े में हो, या एक सार्वजनिक दस्तावेज़...
PMLA | अटैचमेंट की पुष्टि के खिलाफ अपील लंबित हो तो संपत्ति जब्ती का आदेश नहीं दे सकती स्पेशल कोर्ट: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 8 की व्याख्या करते हुए एक अहम फैसला दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि PMLA की धारा 8(3) के तहत अटैचमेंट की पुष्टि के खिलाफ अपील अपीलीय अधिकरण में लंबित है तो स्पेशल कोर्ट धारा 8(7) के तहत संपत्ति की जब्ती की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ा सकती।जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटेश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि जैसे ही धारा 8(3) के आदेश को धारा 26 के तहत चुनौती दी जाती है, धारा 8(7) की कार्यवाही पर एक निहित रोक लग जाती है।कोर्ट ने अपने फैसले में...
अर्ध-न्यायिक प्राधिकरणों के पास समीक्षा की शक्ति नहीं होती, जब तक कि कानून द्वारा उन्हें यह शक्ति न दी गई हो: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (6 फरवरी) को कहा कि अर्ध-न्यायिक प्राधिकरणों को समीक्षा क्षेत्राधिकार का प्रयोग करने का अधिकार नहीं है, जब तक कि कानून द्वारा उन्हें ऐसा करने का अधिकार न दिया गया हो।जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला पलट दिया, जिसमें राजस्व अधिकारी द्वारा समीक्षा क्षेत्राधिकार के प्रयोग को सही ठहराया गया। कोर्ट ने कहा कि राज्य मंत्री के निर्देशों के अनुसार, प्रतिवादी के पक्ष में विवादित भूमि का हस्तांतरण अस्वीकार्य था, खासकर तब जब...
सहकारी हाउसिंग सोसायटी द्वारा निर्णय में अनुचित देरी होने पर वैधानिक प्राधिकरण हस्तक्षेप कर सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि कोई सहकारी हाउसिंग सोसायटी किसी मामले पर निर्णय लेने से इनकार करती है या उसे लंबे समय तक लंबित रखती है, तो ऐसे में वैधानिक प्राधिकरण सोसायटी के मामलों में हस्तक्षेप कर सकते हैं ताकि न्याय और निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने यह टिप्पणी मुंबई स्थित मालबोरो हाउस को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी लिमिटेड से जुड़े एक मामले में की। यह मामला उन फ्लैट मालिकों से संबंधित था, जो कई वर्षों से अपने-अपने फ्लैटों में शांतिपूर्वक रह रहे...
BNSS की धारा 35(3) के नोटिस के बाद गिरफ़्तारी केवल नए तथ्यों पर ही संभव: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि BNSS, 2023 की धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी करना—उन अपराधों में जिनमें अधिकतम सज़ा सात वर्ष तक है—अनिवार्य है। साथ ही, अदालत ने यह भी कहा कि धारा 35(6) के तहत गिरफ़्तारी नोटिस जारी होने के बाद केवल उन्हीं नए तथ्यों/सामग्रियों के आधार पर की जा सकती है, जो नोटिस जारी करते समय पुलिस अधिकारी के पास उपलब्ध नहीं थीं।अदालत ने स्पष्ट किया कि धारा 35(6) के अंतर्गत गिरफ़्तारी करते समय पुलिस अधिकारी उन परिस्थितियों या कारकों पर भरोसा नहीं कर सकता, जो धारा 35(3) का नोटिस...
किसी महिला खासकर नाबालिग को गर्भ पूरा करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम और संवेदनशील फैसले में कहा कि किसी भी महिला को और विशेष रूप से किसी नाबालिग लड़की को उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भ जारी रखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।इसी टिप्पणी के साथ अदालत ने एक नाबालिग लड़की की 30 सप्ताह की गर्भावस्था को मेडिकल रूप से समाप्त करने की अनुमति दी।मामले की सुनवाई जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने की।अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में गर्भवती लड़की की प्रजनन संबंधी स्वायत्तता यानी उसके अपने शरीर और भविष्य को लेकर निर्णय...
2004 की राजस्थान कैडर सीट को लेकर दावा खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- कैडर आवंटन की प्रक्रिया अनंत काल तक खुली नहीं रह सकती
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु कैडर के IPS अधिकारी की वह याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने वर्ष 2004 की राजस्थान कैडर की इनसाइडर रिक्ति पर नियुक्ति की मांग की थी।अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि इतने वर्षों बाद कैडर बदलने या आवंटन में हस्तक्षेप करने से पूरी व्यवस्था अस्थिर हो जाएगी।यह फैसला जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने सुनाया।याचिकाकर्ता रुपेश कुमार मीणा जो 2004 बैच के IPS अधिकारी हैं और वर्तमान में तमिलनाडु कैडर में कार्यरत हैं, उन्होंने यह दावा वर्ष 2010 में उठाया था यानी...
राज्य कर्मचारियों को साल में दो बार महंगाई भत्ता कोई स्वतः अधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि राज्य सरकार के कर्मचारी साल में दो बार महंगाई भत्ता (DA) पाने का अधिकार तभी जता सकते हैं, जब संबंधित सेवा नियमों में इसका स्पष्ट प्रावधान हो। केवल परंपरा या पहले दी गई सुविधा के आधार पर इसे अधिकार नहीं माना जा सकता।यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार की उस अपील पर फैसला सुनाते हुए की जिसमें पश्चिम बंगाल सेवा (वेतन और भत्तों का संशोधन) नियम 2009 के तहत डीए भुगतान को लेकर दिए गए आदेशों को चुनौती दी गई।मामले की सुनवाई जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार...
राज्य सरकार के कर्मचारी साल में दो बार महंगाई भत्ता क्लेम नहीं कर सकते, जब तक कि नियम इसकी इजाज़त न दें: सुप्रीम कोर्ट
पश्चिम बंगाल सर्विसेज (वेतन और भत्ते में संशोधन) नियम, 2009 के तहत महंगाई भत्ते के भुगतान पर निर्देशों को लेकर पश्चिम बंगाल राज्य की चुनौती पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार के कर्मचारियों को अधिकार के तौर पर साल में दो बार डीए के भुगतान का हक नहीं है।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने कहा –“इसका कारण यह है कि RoPA नियमों में, जिनका हमने ऊपर ज़िक्र किया, कहीं भी यह नहीं कहा गया कि डीए का भुगतान साल में दो बार किया जाएगा या किया जा सकता है। जो कुछ भी...
गवाहों की जांच से पहले ट्रायल कोर्ट को आरोपी को मुफ्त कानूनी सहायता देने की पेशकश रिकॉर्ड करनी होगी: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (5 फरवरी) को एक अहम आदेश जारी किया, जिसमें हाईकोर्ट्स को निर्देश दिया गया कि वे अपने राज्य के ट्रायल कोर्ट्स को निर्देश दें कि अगर आरोपी वकील का खर्च नहीं उठा सकते हैं तो उन्हें कानूनी सहायता के अधिकार के बारे में बताया जाए। मुफ्त कानूनी सहायता की पेशकश पर आरोपी की प्रतिक्रिया को रिकॉर्ड किया जाना चाहिए।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने आदेश दिया,“आपराधिक कार्यवाही से निपटने वाले ट्रायल कोर्ट्स के लिए, ऐसी स्थितियों का सामना करने पर आरोपी को कानूनी...
सुप्रीम कोर्ट ने BCI की नॉमिनेशन फीस को मंज़ूरी दी, हाईकोर्ट्स से कहा- फीस को चुनौती देने के मामले में स्टेट बार काउंसिल चुनावों में दखल न दें
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा स्टेट बार काउंसिल्स के चुनाव लड़ने के लिए तय की गई 1.25 लाख रुपये की नॉमिनेशन फीस को मंज़ूरी दी।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने यह भी निर्देश दिया कि कोई भी हाईकोर्ट चुनाव फीस तय करने को लेकर किसी भी चुनौती के कारण चल रहे बार काउंसिल चुनावों में दखल नहीं देगा। बेंच ने घोषणा की कि इस मुद्दे पर हाई कोर्ट्स में लंबित सभी रिट याचिकाओं को खारिज माना जाएगा।बेंच ने कहा कि BCI चुनावों पर खर्च कर रही...
'कर्ता' द्वारा खरीदी गई प्रॉपर्टीज़ को जॉइंट हिंदू फैमिली की संपत्ति माना जाएगा, जब तक कि इसके विपरीत न साबित हो: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (5 फरवरी) को कहा कि एक बार जब पैतृक, आय देने वाली संपत्ति का अस्तित्व साबित हो जाता है तो जॉइंट हिंदू फैमिली के अस्तित्व के दौरान कर्ता द्वारा किया गया कोई भी बाद का अधिग्रहण जॉइंट फैमिली की संपत्ति माना जाएगा, जब तक कि खुद के अधिग्रहण का दावा करने वाला व्यक्ति ठोस सबूतों के साथ सबूत का बोझ साबित न कर दे।कोर्ट ने कहा,"जहां जॉइंट फैमिली के अस्तित्व के दौरान अधिग्रहण किए जाते हैं, और जहां आय देने वाली पैतृक संपत्तियों का अस्तित्व दिखाया जाता है, वहां कर्ता के नाम पर खरीदी...
बाल हिरासत विवादों में बच्चे का कल्याण सर्वोपरि, लेकिन एकमात्र आधार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
बच्चों की कस्टडी (हिरासत) तय करते समय सिर्फ उनके कल्याण को ही आधार बनाना पर्याप्त नहीं है—अदालतों को माता-पिता के आचरण, आर्थिक स्थिति, जीवन-स्तर, तथा बच्चों की सुविधा और शिक्षा जैसे अन्य प्रासंगिक पहलुओं पर भी विचार करना होगा। यह महत्वपूर्ण टिप्पणी Supreme Court of India ने की।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस. वी. एन. भट्टी की खंडपीठ ने Jammu and Kashmir High Court के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें दो नाबालिग बच्चों की कस्टडी उनकी मां को बहाल की गई थी। खंडपीठ ने कहा कि यद्यपि बच्चों का कल्याण...
अनुच्छेद 227 के तहत हाईकोर्ट वाद (Plaint) खारिज नहीं कर सकता : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत हाईकोर्ट अपने पर्यवेक्षणीय अधिकारों का प्रयोग करते हुए किसी वाद (plaint) को खारिज नहीं कर सकता, जब इसके लिए सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) में विशेष प्रावधान मौजूद हो।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की खंडपीठ ने कहा कि“जब Order VII Rule 11 CPC के तहत वाद खारिज करने का स्पष्ट प्रावधान उपलब्ध है, तब हाईकोर्ट अनुच्छेद 227 के अंतर्गत शक्तियों का प्रयोग कर plaint को खारिज या strike off नहीं कर सकता।”मामले की पृष्ठभूमि यह...
DGP नियुक्ति में देरी पर सख्त सुप्रीम कोर्ट: समय पर प्रस्ताव न भेजने वाले राज्यों के खिलाफ UPSC चला सकेगा अवमानना कार्यवाही
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि राज्य सरकारों को पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को प्रस्ताव भेजने में अनावश्यक देरी नहीं करनी चाहिए।अदालत ने कई राज्यों में 'कार्यवाहक/अध hoc DGP' नियुक्त करने की प्रवृत्ति पर असंतोष जताते हुए UPSC को यह अधिकार दिया कि वह राज्यों को समय पर प्रस्ताव भेजने के लिए रिमाइंडर भेजे। यदि इसके बावजूद राज्य सरकारें डिफॉल्ट करती हैं, तो UPSC को अवमानना कार्यवाही शुरू करने की स्वतंत्रता होगी।अदालत ने याद दिलाया कि प्रकाश सिंह बनाम...
7 साल तक की सज़ा वाले अपराधों में गिरफ्तारी नियम नहीं, बल्कि अपवाद; ऐसे मामलों में BNSS की धारा 35(3) के तहत नोटिस अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 35(3) के तहत 7 वर्ष तक की सज़ा वाले अपराधों में पुलिस द्वारा नोटिस देना अनिवार्य है, और नोटिस दिए बिना गिरफ्तारी नहीं की जा सकती।जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने कहा कि ऐसे अपराधों में गिरफ्तारी नियम नहीं, बल्कि अपवाद है। जब तक धारा 35(3) के तहत नोटिस देकर अभियुक्त को उपस्थित होने का अवसर न दिया जाए और वह उसका पालन करे, तब तक गिरफ्तारी नहीं हो सकती।गिरफ्तारी “विवेकाधीन”, अनिवार्य...
RTE Act | केंद्र से फंड न मिलने का हवाला देकर राज्य शिक्षकों को कम मानदेय नहीं दे सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार द्वारा धनराशि जारी न किए जाने का हवाला देकर राज्य सरकार शिक्षकों को बेहद कम मानदेय देने का औचित्य नहीं ठहरा सकती। कोर्ट ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) के क्रियान्वयन की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकार की है, और उसे पहले शिक्षकों को भुगतान करना होगा; केंद्र का हिस्सा बाद में वसूला जा सकता है।जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि सर्व शिक्षा अभियान/समग्र शिक्षा योजना के तहत...
'सख्त राजनीतिक पोस्ट के लिए कोई मैकेनिकल FIR नहीं': सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े मामलों के लिए जारी दिशानिर्देश बरकरार रखें
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े मामलों में FIR दर्ज करने को रेगुलेट करने के लिए तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा बनाए गए दिशानिर्देश बरकरार रखें और पुलिस को "सख्त, आपत्तिजनक या आलोचनात्मक राजनीतिक भाषणों" पर बिना सोचे-समझे FIR दर्ज न करने का निर्देश दिया।हाईकोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में दुश्मनी को बढ़ावा देने, सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा या देशद्रोह के लिए FIR तभी दर्ज की जा सकती है, जब प्रथम दृष्टया मामला बनता हो।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई...
फाइनल रिपोर्ट दाखिल करने के बाद आगे की जांच के लिए कोर्ट की इजाज़त ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस खुद से आगे की जांच नहीं कर सकती। साथ ही CrPC की धारा 173(8)/BNSS की धारा 193(9) के तहत आगे की जांच करने से पहले कोर्ट की इजाज़त लेना ज़रूरी है।जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने आरोपियों द्वारा दायर अपील मंज़ूरी की और 2023 का इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर दिया, जिसमें एक दशक पुराने रेप केस में पुलिस अधिकारियों को "आगे की जांच" जारी रखने की इजाज़त दी गई।कोर्ट के सामने सवाल यह था कि क्या CrPC की धारा 173(2) के तहत फाइनल रिपोर्ट जमा करने के बाद...
तलाक के बाद पति का अपनी पूर्व पत्नी का भरण-पोषण करने का कर्तव्य सिर्फ इसलिए खत्म नहीं होगा कि वह पढ़ी-लिखी है या उसे माता-पिता का सहारा है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक पति तलाक के बाद अपनी पूर्व पत्नी का भरण-पोषण करने के कर्तव्य से इस आधार पर बच नहीं सकता कि वह पढ़ी-लिखी या उसे माता-पिता का सहारा है।जस्टिस एसवीएन भट्टी और आर महादेवन की बेंच ने यह टिप्पणी की,"हमारे समाज में शादी एक ऐसी संस्था है, जो भावनात्मक जुड़ाव, साथ और आपसी सहारे पर आधारित है, जिसे सिर्फ पैसे के हिसाब से नहीं आंका जा सकता। एक महिला अक्सर एक स्थिर और सम्मानजनक जीवन की सही उम्मीदों के साथ शादी करती है। जब ऐसी शादी टूट जाती है तो पति का यह कर्तव्य कि पत्नी सम्मान के...



















