सुप्रीम कोर्ट

Electricity Act | टैरिफ तय करते समय रेगुलेटरी कमीशन सरकारी ग्रांट को ध्यान में रख सकता है: सुप्रीम कोर्ट
Electricity Act | टैरिफ तय करते समय रेगुलेटरी कमीशन सरकारी ग्रांट को ध्यान में रख सकता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि हालांकि टैरिफ तय करना पूरी तरह से राज्य बिजली रेगुलेटरी कमीशन के अधिकार क्षेत्र में आता है, फिर भी उसे बिजली उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से दी जाने वाली सब्सिडी सहित सरकारी नीतिगत प्रोत्साहनों पर विचार करना भी उतना ही ज़रूरी है। हालांकि, इस तरह के विचार के परिणामस्वरूप टैरिफ से प्रोत्साहन की यांत्रिक कटौती इस तरह से नहीं होनी चाहिए कि वह योजना के मूल उद्देश्य को ही विफल कर दे।आगे कहा गया,"रेगुलेटरी कमीशन के पास टैरिफ तय करने की पूर्ण शक्ति है और टैरिफ तय करने की...

Land Acquisition | जिस व्यक्ति ने S.28A के तहत मुआवज़ा स्वीकार किया, वह अपील के आधार पर बढ़ोतरी के लिए दूसरा आवेदन दायर कर सकता है: सुप्रीम कोर्ट
Land Acquisition | जिस व्यक्ति ने S.28A के तहत मुआवज़ा स्वीकार किया, वह अपील के आधार पर बढ़ोतरी के लिए दूसरा आवेदन दायर कर सकता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 28A के तहत दूसरा आवेदन दायर किया जा सकता है, ताकि अन्य मामलों में हाई कोर्ट द्वारा दी गई बढ़ोतरी के आधार पर मुआवज़े का फिर से निर्धारण किया जा सके।कोर्ट ने फैसला दिया कि भूमि अधिग्रहण का मुआवज़ा स्वीकार कर लेने से कोई ज़मीन मालिक भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 28-A के तहत बढ़ा हुआ मुआवज़ा मांगने से वंचित नहीं हो जाएगा।जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कर्नाटक हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच का फैसला...

डिफ़ॉल्ट के कारण किसी मुक़दमे का खारिज होना रेस ज्यूडिकाटा के तौर पर काम नहीं करता: सुप्रीम कोर्ट
डिफ़ॉल्ट के कारण किसी मुक़दमे का खारिज होना 'रेस ज्यूडिकाटा' के तौर पर काम नहीं करता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि डिफ़ॉल्ट के कारण किसी मुक़दमे का खारिज होना 'रेस ज्यूडिकाटा' (Res Judicata) के तौर पर काम नहीं करता, क्योंकि इसमें मामले के गुण-दोष पर कोई निर्णय नहीं होता। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई ऐसा वादी जिसे अपना दावा आगे बढ़ाने का अवसर मिला था, लेकिन जिसने बार-बार कार्यवाही को खारिज होने दिया, उसे न्यायसंगत सिद्धांतों के आधार पर राहत से वंचित किया जा सकता है, क्योंकि ऐसा आचरण कोर्ट की प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जा सकता है।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन...

हाईकोर्ट ने किसी भी बात पर चर्चा नहीं की: दहेज हत्या मामले में यांत्रिक तरीके से ज़मानत देने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट की आलोचना की
'हाईकोर्ट ने किसी भी बात पर चर्चा नहीं की': दहेज हत्या मामले में यांत्रिक तरीके से ज़मानत देने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट की आलोचना की

सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट की आलोचना की कि उसने कथित दहेज हत्या के एक मामले में पति को ज़मानत देने का आदेश बिना सोचे-समझे (यांत्रिक तरीके से) पारित किया।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने पाया कि हाईकोर्ट ने अपराध की गंभीरता और रिकॉर्ड पर मौजूद उन सबूतों पर विचार किए बिना ज़मानत देकर गलती की, जिनसे पहली नज़र में आरोपी-पति की संलिप्तता का पता चलता है।कोर्ट ने कहा,"हाईकोर्ट द्वारा आरोपी को ज़मानत पर रिहा करने का जो आदेश दिया गया, वह पूरी तरह से गलत है। दहेज हत्या जैसे...

आरोपी को आरोप पढ़कर सुनाए जाने पर आरोप तय करते समय ऑर्डर शीट पर दस्तखत न होने पर ट्रायल रद्द नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट
आरोपी को आरोप पढ़कर सुनाए जाने पर आरोप तय करते समय ऑर्डर शीट पर दस्तखत न होने पर ट्रायल रद्द नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोप तय करने वाली ऑर्डर शीट पर दस्तखत न होना एक ठीक किया जा सकने वाला प्रक्रियागत दोष है और इससे ट्रायल रद्द नहीं होता, खासकर तब जब आरोपी को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के बारे में ठीक से बताया गया हो और वे उन्हें समझ गए हों।जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा,“आरोप पत्र पर दस्तखत न होने से जुड़ा दोष कोई गैर-कानूनी काम नहीं है। यह ज़्यादा से ज़्यादा CrPC की धारा 215 और 464 के दायरे में आने वाली एक ठीक की जा सकने वाली प्रक्रियागत अनियमितता है।...

अनुच्छेद 25 में धार्मिक अवसर पर सार्वजनिक अवकाश मांगने का अधिकार शामिल नहीं: सुप्रीम कोर्ट
अनुच्छेद 25 में धार्मिक अवसर पर सार्वजनिक अवकाश मांगने का अधिकार शामिल नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि अनुच्छेद 25 के तहत धर्म की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार में यह मांग करने का अधिकार शामिल नहीं है कि राज्य किसी धार्मिक अवसर पर सार्वजनिक अवकाश घोषित करे। साथ ही कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि एक विकासशील राष्ट्र के तौर पर भारत को उत्पादकता और काम की निरंतरता को प्राथमिकता देनी चाहिए।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने 'ऑल इंडिया शिरोमणि सिंह सभा' ​​द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) खारिज की। इस याचिका में गुरु गोबिंद सिंह की जयंती (प्रकाश पर्व) को...

इच्छित उपयोग पर आधारित एक्साइज ड्यूटी छूट की अधिसूचनाओं की व्याख्या करदाता के पक्ष में उदारतापूर्वक की जानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
"इच्छित उपयोग" पर आधारित एक्साइज ड्यूटी छूट की अधिसूचनाओं की व्याख्या करदाता के पक्ष में उदारतापूर्वक की जानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि "उपयोग" या "इच्छित उपयोग" पर आधारित एक्साइज छूट की अधिसूचनाओं की व्याख्या करदाता के पक्ष में उदारतापूर्वक की जानी चाहिए। कोर्ट ने यह माना कि एक बार जब माल का उपयोग उसके इच्छित उद्देश्य के लिए कर लिया जाता है तो इस बात से कि उसका एक हिस्सा संयोगवश अन्य गतिविधियों के लिए भी उपयोग में आ गया है, करदाता छूट का दावा करने के अधिकार से वंचित नहीं हो जाता।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की खंडपीठ ने राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड के खिलाफ एक्साइज...

बलात्कार पीड़िता की पहचान उजागर न करने के आदेश का पालन नहीं हो रहा: सुप्रीम कोर्ट ने लंबित मामलों में कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया
बलात्कार पीड़िता की पहचान उजागर न करने के आदेश का पालन नहीं हो रहा: सुप्रीम कोर्ट ने लंबित मामलों में कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया

अदालती रिकॉर्ड में बलात्कार पीड़िता की पहचान उजागर होने पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि वे सभी लंबित मामलों में IPC की धारा 228-A के तहत वैधानिक रोक का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। इन मामलों में वे मामले भी शामिल हैं जो 'निपुण सक्सेना बनाम भारत संघ' मामले में 2018 के फैसले से पहले शुरू हुए थे। कोर्ट ने टिप्पणी की कि पीड़िता की पहचान उजागर न करने का आदेश कानून में लंबे समय से चली आ रही स्थिति है, फिर भी इसका लगातार पालन नहीं किया गया।कोर्ट...

डिफेंस सिक्योरिटी कोर के जवान दूसरी पेंशन के हकदार, एक साल तक की कमी माफ की जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट
डिफेंस सिक्योरिटी कोर के जवान दूसरी पेंशन के हकदार, एक साल तक की कमी माफ की जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने 24 मार्च को फैसला सुनाया कि डिफेंस सिक्योरिटी कोर (DSC) के जो जवान पहले से ही सेना में अपनी पिछली सेवा के लिए पेंशन ले रहे हैं, वे DSC में अपनी बाद की सेवा के लिए दूसरी सर्विस पेंशन पाने के हकदार हैं। साथ ही पेंशन नियमों के अनुसार, क्वालिफाइंग सर्विस में एक साल तक की कमी को माफ किया जा सकता है। कोर्ट ने साफ किया कि दूसरी पेंशन देने पर कोई कानूनी रोक नहीं है, सिर्फ इसलिए कि वह व्यक्ति पहले से ही अपनी पहली सेवा अवधि के लिए पेंशन ले रहा है।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की...

BREAKING| हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म या सिख धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करने पर अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त हो जाता है: सुप्रीम कोर्ट
BREAKING| हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म या सिख धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करने पर अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त हो जाता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें कहा गया कि एक बार जब कोई व्यक्ति ईसाई धर्म अपना लेता है और सक्रिय रूप से उसका पालन करता है तो वह अनुसूचित जाति समुदाय का सदस्य नहीं रह सकता।कोर्ट ने कहा कि कोई भी व्यक्ति जो हिंदू धर्म, सिख धर्म या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म का पालन करता है, उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने आगे कहा कि किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करने पर अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त हो जाता है। कोर्ट ने गौर किया कि संविधान...

IBC | मोरेटोरियम के बाद लेनदार कॉर्पोरेट देनदार द्वारा पहले जमा की गई सिक्योरिटी डिपॉज़िट से CIRP से पहले के बकाया को नहीं काट सकता: सुप्रीम कोर्ट
IBC | मोरेटोरियम के बाद लेनदार कॉर्पोरेट देनदार द्वारा पहले जमा की गई सिक्योरिटी डिपॉज़िट से CIRP से पहले के बकाया को नहीं काट सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक बार मोरेटोरियम लागू हो जाने के बाद कॉर्पोरेट देनदार के CIRP से पहले के बकाया को लेनदार के पास जमा राशि से समायोजित (Set Off) नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि जब तक ऐसी जमा राशि को कानूनी रूप से समायोजित नहीं किया जाता, तब तक वह कॉर्पोरेट देनदार की संपत्ति बनी रहती है और मोरेटोरियम के बाद किया गया कोई भी समायोजन कानूनन अस्वीकार्य होगा।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने कहा,"भले ही जमा राशि को बकाया भुगतान में चूक के लिए गारंटी माना जाए।...

चयनित उम्मीदवार के जॉइन न करने पर अगली मेरिट वाले को नियुक्ति का अधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
चयनित उम्मीदवार के जॉइन न करने पर अगली मेरिट वाले को नियुक्ति का अधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी उम्मीदवार को केवल इस आधार पर नियुक्ति का अधिकार नहीं मिल जाता कि चयनित उम्मीदवार ने जॉइन नहीं किया या प्री-अपॉइंटमेंट औपचारिकताएं पूरी नहीं कीं। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में रिक्त पद को उसी सेलेक्ट लिस्ट से भरना अनिवार्य नहीं है, बल्कि संबंधित भर्ती नियमों के अनुसार ही प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने कर्नाटक सरकार की अपील स्वीकार करते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उत्तरदाता को...

आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार नियमों की अनुमति होने पर छूट का लाभ उठाने के बावजूद मेरिट के आधार पर सामान्य सीटों का दावा कर सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट
आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार नियमों की अनुमति होने पर छूट का लाभ उठाने के बावजूद मेरिट के आधार पर सामान्य सीटों का दावा कर सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (23 मार्च) को यह टिप्पणी की कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार, जिन्होंने किसी योग्यता परीक्षा में छूट का लाभ उठाया, उन्हें अभी भी सामान्य वर्ग के पदों के लिए विचार किया जा सकता है, बशर्ते वे अंतिम चयन चरण में उच्च मेरिट हासिल करें और संबंधित नियम इसकी अनुमति देते हों।TET उम्मीदवारों को राहत देते हुए जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ का फैसला रद्द किया, जिसमें यह कहा गया था कि जिन उम्मीदवारों ने छूट का लाभ उठाया है, वे...

राज्य के अधिकारियों द्वारा अधिग्रहित वाहन से हुए हादसे के लिए निजी बीमा कंपनी ज़िम्मेदार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
राज्य के अधिकारियों द्वारा अधिग्रहित वाहन से हुए हादसे के लिए निजी बीमा कंपनी ज़िम्मेदार नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (23 मार्च) को यह फ़ैसला दिया कि जब किसी निजी वाहन को राज्य द्वारा चुनावों जैसे सार्वजनिक कार्यों के लिए अधिग्रहित किया जाता है तो दुर्घटनाओं की ज़िम्मेदारी अधिग्रहित करने वाले प्राधिकरण की होती है, न कि बीमा कंपनी की।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने कहा,"...जहां किसी वाहन को सार्वजनिक कार्यों के लिए अधिग्रहित किया जाता है और अधिग्रहण की उस अवधि के दौरान कोई घटना घटित होती है तो उसकी ज़िम्मेदारी सही तौर पर अधिग्रहित करने वाले प्राधिकरण की होनी...

आरोपियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट करने पर दिशानिर्देश की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने निपटाई
आरोपियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट करने पर दिशानिर्देश की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने निपटाई

चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने शुक्रवार को पुलिस द्वारा अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर आरोपियों की तस्वीरें पोस्ट करने को लेकर दिशानिर्देश बनाने की मांग वाली याचिका का निस्तारण कर दिया। कोर्ट ने कहा कि हाल ही में पीयूसीएल से जुड़े एक मामले में राज्यों को पुलिस की मीडिया ब्रीफिंग के लिए दिशानिर्देश बनाने का निर्देश दिया गया है, जिनमें सोशल मीडिया पोस्टिंग भी शामिल हो सकती है।कोर्ट ने सुझाव दिया कि याचिकाकर्ता उन दिशानिर्देशों के तैयार होने का इंतजार करें।...

विकास के लिए मंज़ूर ज़मीन पर बाद में उगने वाले पेड़ उसे डीम्ड फ़ॉरेस्ट नहीं बना देंगे: सुप्रीम कोर्ट
विकास के लिए मंज़ूर ज़मीन पर बाद में उगने वाले पेड़ उसे 'डीम्ड फ़ॉरेस्ट' नहीं बना देंगे: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि किसी नोटिफ़ाइड मास्टर प्लान के तहत विकास के लिए तय की गई ज़मीन को सिर्फ़ बाद में पेड़-पौधे या पेड़ उग जाने की वजह से "डीम्ड फ़ॉरेस्ट" (माना गया जंगल) नहीं माना जा सकता। इसलिए ऐसे बाद में उगे पेड़ों को काटने के लिए वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के तहत केंद्र सरकार की पहले से मंज़ूरी लेने की ज़रूरत नहीं होगी।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने दिल्ली के बिजवासन रेलवे स्टेशन पर रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट को मंज़ूरी देने वाले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल...

Bihar Special Courts Act | अवैध संपत्ति वाले सरकारी कर्मचारी की मौत के बाद भी पत्नी के खिलाफ ज़ब्ती की कार्रवाई जारी रह सकती है: सुप्रीम कोर्ट
Bihar Special Courts Act | अवैध संपत्ति वाले सरकारी कर्मचारी की मौत के बाद भी पत्नी के खिलाफ ज़ब्ती की कार्रवाई जारी रह सकती है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस सरकारी अधिकारी ने अपनी आय से ज़्यादा संपत्ति जमा की हो, उसकी मौत के बाद भी बिहार स्पेशल कोर्ट एक्ट, 2009 के तहत उसकी पत्नी (जो सरकारी कर्मचारी नहीं है) के खिलाफ ज़ब्ती की कार्रवाई जारी रखी जा सकती है।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने पटना हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें कहा गया कि आरोपी अधिकारी की मौत के बाद बिहार स्पेशल कोर्ट एक्ट, 2009 के तहत उसकी पत्नी के खिलाफ ज़ब्ती की कार्रवाई खत्म हो गई।हाईकोर्ट की टिप्पणी से असहमति जताते हुए बेंच ने...

यूपी गैंगस्टर एक्ट के गंभीर परिणाम होते हैं, इसलिए प्रक्रिया का सख्ती से पालन अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट
यूपी गैंगस्टर एक्ट के गंभीर परिणाम होते हैं, इसलिए प्रक्रिया का सख्ती से पालन अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कथित गैंगस्टर गब्बर सिंह के खिलाफ उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1986 के तहत चल रही कार्यवाही रद्द की। कोर्ट ने यह फैसला गैंग चार्ट तैयार करने की सिफारिश भेजने की प्रक्रिया में हुई प्रक्रियागत अनियमितताओं का हवाला देते हुए दिया, जिसमें गब्बर सिंह का नाम शामिल है।राज्य सरकार का स्पष्टीकरण खारिज करते हुए कोर्ट ने उस स्थापित सिद्धांत को दोहराया कि जब कोई कानून यह निर्धारित करता है कि कोई काम किसी विशेष तरीके से ही किया जाना चाहिए तो उसे उसी तरीके से...

वैधानिक अपीलें विवादित फैसले की सर्टिफाइड कॉपी के साथ ही दायर की जानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
वैधानिक अपीलें विवादित फैसले की सर्टिफाइड कॉपी के साथ ही दायर की जानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फिर दोहराया कि विवादित फैसले की सर्टिफाइड कॉपी के बिना किसी भी वैधानिक अपील पर विचार नहीं किया जा सकता।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल के एक फैसले के खिलाफ सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया द्वारा दायर सिविल अपील की सुनवाई कर रही थी।कोर्ट ने गौर किया कि अपीलकर्ता ने अर्जी दायर कर विवादित फैसले की सर्टिफाइड कॉपी जमा करने से छूट मांगी थी। कोर्ट ने पाया कि अपील को दोबारा दायर करने में 102 दिनों की देरी हुई। फिर भी छूट वाली अर्जी में यह...

हाईकोर्ट बेबुनियाद या परेशान करने वाली आपराधिक कार्यवाही रद्द करने के लिए FIR/शिकायत से आगे भी देख सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट
हाईकोर्ट बेबुनियाद या परेशान करने वाली आपराधिक कार्यवाही रद्द करने के लिए FIR/शिकायत से आगे भी देख सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने 'कहानी-2' फ़िल्म के प्रोड्यूसर सुजॉय घोष के ख़िलाफ़ कॉपीराइट उल्लंघन का मामला रद्द करते हुए यह टिप्पणी की कि आपराधिक कार्यवाही रद्द करने के लिए CrPC की धारा 482 या संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते समय हाईकोर्ट को अपनी जांच को केवल मामले के मौजूदा चरण तक ही सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि बेबुनियाद कार्यवाही रद्द करने के लिए समग्र परिस्थितियों और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पर भी विचार करना चाहिए।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने...