सुप्रीम कोर्ट
क्या मतदाता सूची से नाम हटने पर पासपोर्ट का नवीनीकरण रोका जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से स्थिति हुई स्पष्ट
पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद पासपोर्ट नवीनीकरण रोके जाने का मामला सामने आने से नई कानूनी बहस छिड़ गई।सीनियर पत्रकार और पूर्व संपादक आर. राजगोपाल ने दावा किया कि मतदाता सूची से उनका नाम हटने के आधार पर पुलिस ने प्रतिकूल रिपोर्ट भेजी, जिसके कारण उनके पासपोर्ट के नवीनीकरण की प्रक्रिया रोक दी गई। राजगोपाल के अनुसार, उनका नाम "तार्किक विसंगतियों" का हवाला देकर मतदाता सूची से हटाया गया।चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में इसी श्रेणी के तहत 27 लाख...
ज़िले से बाहर निकालने के आदेश के ख़िलाफ़ अपील करने में हुई देरी को लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 के तहत माफ़ किया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 के तहत ज़िले से बाहर निकालने (एक्सटर्नमेंट) के आदेश के ख़िलाफ़ अपील करने में हुई देरी को लिमिटेशन एक्ट, 1963 की धारा 5 के तहत माफ़ किया जा सकता है।जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की बेंच ने कहा,"...जब तक कानून साफ़ तौर पर या ज़रूरी मतलब के ज़रिए लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 के लागू होने को रोकता नहीं है, तब तक अपीलीय अथॉरिटी (अधिनियम के तहत) के पास सही मामलों में देरी को माफ़ करने का अधिकार होना चाहिए।" बेंच ने छत्तीसगढ़...
Motor Accident Claim | माता-पिता के नुकसान का हिसाब गणितीय सटीकता से नहीं लगाया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बच्चे की मौत से माता-पिता को हुए नुकसान को "गणितीय सटीकता" से नहीं मापा जा सकता और मोटर व्हीकल एक्ट के तहत मुआवज़ा तय करना कोई सटीक गणितीय गणना का काम नहीं है।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी की अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। कंपनी ने 2013 में दिल्ली में सड़क दुर्घटना में मारे गए 20 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंसी छात्र के माता-पिता को दिए गए मुआवज़े को चुनौती दी थी।कोर्ट ने कहा,"मृतक के माता-पिता को हुए नुकसान को...
अधिनियम के तहत बने नियम कानून में संशोधन की विधायी शक्ति को सीमित नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी अधिनियम के तहत बनाए गए नियम या विनियम (Regulations) विधायिका की उस शक्ति को सीमित नहीं कर सकते, जिसके तहत वह मूल कानून (Parent Act) में संशोधन कर विनियमों को अप्रभावी बना सकती है।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए भ्रष्टाचार के मामले में दोषसिद्ध एक ग्रुप-ए अधिकारी को सेवा से बर्खास्त करने के दिल्ली नगर निगम आयुक्त के अधिकार को बरकरार रखा।मामला नॉर्थ दिल्ली म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के पूर्व कार्यकारी अभियंता राजेश शर्मा से...
निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस सरकारी कॉलेजों के बराबर नहीं की जा सकती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के एक अभ्यर्थी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस को सरकारी मेडिकल कॉलेजों के बराबर निर्धारित करने की मांग की गई थी।जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि स्व-वित्तपोषित (Self-Financing) संस्थानों को सरकारी कॉलेजों जैसी फीस संरचना अपनाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।याचिकाकर्ता, राजस्थान का एक EWS श्रेणी का NEET-UG 2025 अभ्यर्थी, निजी मेडिकल कॉलेजों की 18.9 लाख से 25 लाख...
मामूली गवाही विरोधाभास से पंजीकृत बिक्री विलेख की वैधता पर संदेह नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पंजीकृत बिक्री विलेख (Sale Deed) को कानूनन वैधता और प्रामाणिकता का मजबूत अनुमान प्राप्त होता है। ऐसे में सत्यापनकर्ता (Attesting Witness) के बयान में मामूली विरोधाभास मात्र से विलेख के निष्पादन पर संदेह नहीं किया जा सकता।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की खंडपीठ ने हरिद्वार की कृषि भूमि से जुड़े एक विवाद में यह टिप्पणी की। समेकन अधिकारियों और हाईकोर्ट ने अपीलकर्ताओं के स्वामित्व दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि बिक्री विलेख के एक गवाह के...
राशन से वंचित करने के खिलाफ याचिका वापस, सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट जाने की दी अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद मतदाता सूची से बाहर हुए लोगों को राशन लाभ नहीं देने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका का निस्तारण करते हुए याचिकाकर्ता को कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख करने की अनुमति दी।जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की अवकाशकालीन पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रसन्ना एस की मौखिक प्रार्थना पर याचिका वापस लेने की अनुमति दी और उचित राहत के लिए हाईकोर्ट जाने की स्वतंत्रता प्रदान की।यह याचिका पश्चिम बंगाल के खेतिहर...
मिस्त्री की कटी टांग को 100% कार्यात्मक दिव्यांगता माना जाए: सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजा बढ़ाकर 40.29 लाख रुपये किया
सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि किसी मिस्त्री की घुटने के ऊपर से दाहिनी टांग कट जाती है तो उसे केवल शारीरिक दिव्यांगता के प्रतिशत के आधार पर नहीं आंका जा सकता। ऐसे मामले में उसकी कार्यात्मक दिव्यांगता 100 प्रतिशत मानी जानी चाहिए, क्योंकि वह अपने पेशे से प्रभावी रूप से वंचित हो जाता है।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की पीठ ने तमिलनाडु के एक मिस्त्री को दिए गए मुआवजे में बढ़ोतरी करते हुए इसे 29.01 लाख रुपये से बढ़ाकर 40.29 लाख रुपये कर दिया।पीठ ने कहा कि...
लंबे समय तक दोबारा अपराध न करना सजा तय करने में महत्वपूर्ण पहलू: सुप्रीम कोर्ट ने दोषी की सजा घटाई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि किसी दोषी के खिलाफ लंबे समय तक समान प्रकार की किसी अन्य आपराधिक गतिविधि में शामिल होने का कोई प्रमाण नहीं मिलता, तो यह सजा तय करते समय एक महत्वपूर्ण विचारणीय पहलू हो सकता है।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए एक दोषी की सजा में राहत दी और उसकी सजा को पहले से काटी गई अवधि तक सीमित किया।मामला एक जाली राजस्व दस्तावेज का उपयोग कर न्यायिक कार्यवाही में जमानतदार बनने से जुड़ा था। अभियोजन के अनुसार आरोपी ने फर्जी दस्तावेज...
वादी ने जब ऐसी कोई मांग नहीं की हो तो कोर्ट उसे 'इंजंक्शन' के बदले मुआवज़ा लेने के लिए मजबूर नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपीलीय कोर्ट के लिए कानूनी तौर पर यह सही नहीं है कि वह ऐसी राहत दे, जिसके लिए याचिका में कोई मांग नहीं की गई हो। साथ ही अपीलीय कोर्ट डिक्री रद्द करने के बाद मामले को एग्जीक्यूटिंग कोर्ट (फैसला लागू करने वाली अदालत) के पास ऐसे मुद्दों पर फैसले के लिए नहीं भेज सकता जो किसी मौजूदा डिक्री से पैदा नहीं हुए हों।जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया। हाईकोर्ट ने कथित अतिक्रमण हटाने के आदेश वाली डिक्री को बदलकर...
'हाईकोर्ट कॉलेजियम को निर्देश नहीं दिया जा सकता': सुप्रीम कोर्ट ने प्रमोशन की मांग करने वाले न्यायिक अधिकारी की याचिका पर सुनवाई से इनकार किया
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (22 जून) को हिमाचल प्रदेश के न्यायिक अधिकारी की रिट याचिका पर सुनवाई करने से इनकार किया। अधिकारी ने हाईकोर्ट में प्रमोशन के लिए अपने नाम पर विचार करने की मांग की थी। कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि हाई कोर्ट कॉलेजियम को कोई न्यायिक निर्देश नहीं दिया जा सकता।याचिकाकर्ता अरविंद मल्होत्रा अभी धर्मशाला में फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज हैं। उनकी शिकायत थी कि हाई कोर्ट कॉलेजियम ने उनके जूनियर्स के नाम आगे बढ़ाए, जिन्हें बाद में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मंज़ूरी दी।याचिकाकर्ता की...
पता बदलने की जानकारी न देने वाला कर्मचारी 'शो-कॉज़ नोटिस' न मिलने का तर्क नहीं दे सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने लेबर कोर्ट का वह आदेश रद्द किया, जिसमें एक कर्मचारी को बकाया वेतन के साथ नौकरी पर वापस रखने (Reinstatement) को कहा गया था। कोर्ट ने कहा कि जो कर्मचारी बिना इजाज़त के अनुपस्थित रहा और ड्यूटी पर वापस लौटने से रोके जाने के अपने दावों को साबित नहीं कर पाया, वह बिना पुष्टि वाले बयानों के आधार पर राहत नहीं मांग सकता।कर्मचारी का तर्क था कि नोटिस उसे कभी नहीं मिला क्योंकि इसे गौतम बुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश में उसके रहने की जगह के बजाय बिहार में उसके स्थायी पते पर भेजा गया। उसने दावा किया...
बीमा कराने वाले मालिक द्वारा सौंपे गए वाहन की चोरी के लिए फाइनेंसर इंश्योरेंस का दावा नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बीमा वाले वाहन को उसके मालिक द्वारा किसी दूसरे व्यक्ति (जिसने वाहन खरीदने के लिए फाइनेंस किया था) को सौंप देना ही फाइनेंसर के लिए वाहन के नुकसान या चोरी होने पर मुआवज़े का दावा करने के लिए काफ़ी नहीं होगा।जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (NCDRC) के फ़ैसले में दखल देने से इनकार किया। कमीशन ने बीमा कंपनियों के पक्ष में फ़ैसला सुनाते हुए माना था कि अपीलकर्ता (वाहन फाइनेंसर) और प्रतिवादी (बीमा कंपनी) के बीच कोई...
आर्बिट्रेशन क्लॉज़ होने से कंज्यूमर फोरम का अधिकार क्षेत्र खत्म नहीं होता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी एग्रीमेंट में आर्बिट्रेशन क्लॉज़ (मध्यस्थता खंड) होने मात्र से कंज्यूमर फोरम को मामले के गुण-दोष के आधार पर फैसला करने से नहीं रोका जा सकता।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कहा,"...आर्बिट्रेशन क्लॉज़ अपने आप में कंज्यूमर फोरम के अधिकार क्षेत्र को खत्म नहीं करता है।" बेंच ने नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन (NCDRC), स्टेट कमीशन और डिस्ट्रिक्ट फोरम के उन फैसलों को रद्द किया, जिनमें रेजिडेंशियल फ्लैट का कब्ज़ा सौंपने में देरी से जुड़े...
फुटपाथ पर चलना मौलिक अधिकार, इसके लिए कानून बनाने पर विचार करे केंद्र: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि फुटपाथ पर चलना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(d) और 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है और यह अधिकार मोटर वाहनों के अधिकार से पहले आता है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस अधिकार की सुरक्षा के लिए कानूनी ढांचा तैयार करने पर विचार करने को कहा है।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की खंडपीठ ने यह टिप्पणी एक सड़क दुर्घटना मामले में की, जिसमें स्कूल जाते समय 5 वर्षीय बच्चे की टैंकर की चपेट में आने से मौत हो गई थी। कोर्ट ने बच्चे के परिवार को दिया गया मुआवजा बढ़ाकर 11.44 लाख...
पश्चिम बंगाल SIR: सुप्रीम कोर्ट ने 75 वर्षीय वकील की अपील पर जल्द सुनवाई का दिया निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ 75 वर्षीय अधिवक्ता की अपील पर त्वरित सुनवाई का निर्देश दिया है। चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहना की खंडपीठ ने अपीलीय ट्रिब्यूनल को मामले की “आउट-ऑफ-टर्न” सुनवाई कर जल्द फैसला लेने को कहा।याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट शकील शेख ने बताया कि उनकी अपील 27 मार्च 2026 से लंबित है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता पिछले 50 वर्षों से वकालत कर रहे हैं और पांच दशक से मतदान करते आ रहे हैं।सुनवाई के...
महिला वकीलों के लिए बुनियादी सुविधाएं अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के अधिकार से जुड़ीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि अदालत परिसरों में महिला अधिवक्ताओं के लिए स्वच्छ शौचालय, लेडीज़ बार रूम और अन्य बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा के अधिकार से सीधे जुड़ी हुई है।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहन की खंडपीठ महिला अधिवक्ताओं द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें देशभर की अदालतों में लेडीज़ बार रूम और अन्य आवश्यक सुविधाओं के अभाव का मुद्दा उठाया गया है।अदालत ने कहा कि जब महिला वकील अपने दिन का बड़ा हिस्सा अदालत परिसरों...
NEET-UG पुनर्परीक्षा से पहले तत्काल सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, कहा- सभी मामले जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा की पीठ के समक्ष
सुप्रीम कोर्ट ने 21 जून को प्रस्तावित NEET-UG 2026 पुनर्परीक्षा से जुड़े मामलों पर तत्काल सुनवाई की मांग खारिज की। अदालत ने कहा कि परीक्षा से संबंधित सभी याचिकाएं पहले से ही जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष लंबित हैं और वही उन पर विचार करेगी।मामले का उल्लेख चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत के समक्ष नीट अभ्यर्थियों की ओर से पेश वकीलों ने किया था।जब पुनर्परीक्षा से संबंधित एक याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया गया, तो चीफ जस्टिस ने स्पष्ट कहा,"NEET से जुड़े सभी...
BREAKING| पैदल चलने वालों का फुटपाथ पाने का मौलिक अधिकार; मोटर चलाने वाले पैदल चलने के अधिकार को नकार नहीं सकते: सुप्रीम कोर्ट
एक अहम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा कि तय फुटपाथ पर चलने का अधिकार संविधान के आर्टिकल 19(1)(d) के तहत मौलिक अधिकार है, जिसमें सुरक्षित और सही ढंग से बने फुटपाथ तक पहुंचने का अधिकार भी शामिल है। मोटर वाले वाहनों की आवाजाही की तुलना में इस अधिकार को प्राथमिकता दी जाएगी।इसे मौलिक अधिकार इसलिए माना गया, क्योंकि पैदल चलने का अधिकार हमेशा से हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी से "अटूट" रूप से जुड़ा रहा है।कोर्ट ने कहा कि फुटपाथ और पैदल चलने वालों के लिए अन्य बुनियादी ढांचे को तय करने, बनाने, उनकी देखभाल...
मृत कर्मचारी की हत्या के आरोपियों को अनुकंपा नौकरी पर रोक का नियम नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को खामी दूर करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार से अनुकंपा नियुक्ति संबंधी नियमों में मौजूद एक महत्वपूर्ण विसंगति को दूर करने पर विचार करने को कहा।अदालत ने कहा कि वर्तमान नियमों के तहत यदि किसी सरकारी कर्मचारी की हत्या के मामले में उसके परिवार का कोई सदस्य आरोपी हो, तो उसे अनुकंपा वित्तीय सहायता से वंचित किया जा सकता है, लेकिन उसी व्यक्ति को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी मिलने से रोकने का कोई प्रावधान नहीं है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह टिप्पणी एक अपील पर सुनवाई के दौरान...



















