सुप्रीम कोर्ट

NDPS Act | जब धारा 52ए का पालन करते हुए सैंपल नहीं लिए जाते तो एफएसएल रिपोर्ट बेकार कागज है और इसे साक्ष्य के रूप में नहीं पढ़ा जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
NDPS Act | जब धारा 52ए का पालन करते हुए सैंपल नहीं लिए जाते तो एफएसएल रिपोर्ट बेकार कागज है और इसे साक्ष्य के रूप में नहीं पढ़ा जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (1 मार्च) को कहा कि यदि पुलिस फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी जांच के लिए एकत्रित सैंपल भेजते समय NDPS Act की धारा 52ए के आदेश को पूरा नहीं करती है तो आरोपी को नशीले पदार्थ और मनोदैहिक पदार्थ रखने का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के निष्कर्षों को पलटते हुए पाया कि यदि पुलिस स्टेशन में सैंपल जमा करने और एफएसएल को उसके हस्तांतरण से संबंधित दस्तावेज जब्ती अधिकारी द्वारा रिकॉर्ड पर प्रदर्शित नहीं किए गए तो एफएसएल रिपोर्ट को...

सुप्रीम कोर्ट ने झूठे बयान देने वाले वादी को विशिष्ट निष्पादन से इनकार किया, राहत को विवेकाधीन और न्यायसंगत बताया
सुप्रीम कोर्ट ने झूठे बयान देने वाले वादी को विशिष्ट निष्पादन से इनकार किया, राहत को विवेकाधीन और न्यायसंगत बताया

अपने द्वारा दिए गए झूठे/गलत बयानों के कारण विशिष्ट निष्पादन के लिए वादी की याचिका अस्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में माना कि विशिष्ट राहत अधिनियम, 1963 की धारा 20 के तहत विशिष्ट निष्पादन के लिए डिक्री देना विवेकाधीन और न्यायसंगत है।जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस संजय करोल की बेंच ने टिप्पणी की,"विवेक का प्रयोग कई कारकों पर निर्भर करता है। कारकों में से एक वादी का आचरण है। इसका कारण यह है कि विशिष्ट प्रदर्शन के डिक्री की राहत न्यायसंगत राहत है, जो व्यक्ति इक्विटी चाहता है उसे इक्विटी करना...

कानूनी प्रतिनिधि मृतक के निजी अनुबंधों के निर्वहन करने के उत्तरदायी नहीं, लेकिन मौद्रिक दायित्व को पूरा करना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट
कानूनी प्रतिनिधि मृतक के निजी अनुबंधों के निर्वहन करने के उत्तरदायी नहीं, लेकिन मौद्रिक दायित्व को पूरा करना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने (01 मार्च को) उपभोक्ता विवाद से उत्पन्न एक अपील की अनुमति देते हुए कहा कि कानूनी प्रतिनिधि पक्षकार के दायित्व का निर्वहन करने के लिए उत्तरदायी नहीं हैं, जिसे व्यक्तिगत क्षमता में निर्वहन किया जाना है।"..अनुबंध के तहत किसी व्यक्ति पर लगाए गए व्यक्तिगत दायित्व के मामले में और ऐसे व्यक्ति के निधन पर, उसकी संपत्ति उत्तरदायी नहीं बनती है और इसलिए, कानूनी प्रतिनिधि जो मृतक की संपत्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं, वे स्पष्ट रूप से उत्तरदायी नहीं होंगे और अदालत ने कहा, ''मृतक के संविदात्मक...

राज्यों के पास कराधान के लिए कुछ क्षेत्र होते हैं, हमें इसे कमजोर नहीं करना चाहिए  : सुप्रीम कोर्ट ने खनिज पर राज्यों की कर शक्तियों को कमजोर करने पर चिंता जताई [ दिन-3]
'राज्यों के पास कराधान के लिए कुछ क्षेत्र होते हैं, हमें इसे कमजोर नहीं करना चाहिए ' : सुप्रीम कोर्ट ने खनिज पर राज्यों की कर शक्तियों को कमजोर करने पर चिंता जताई [ दिन-3]

सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ ने गुरुवार (29 फरवरी) को खनिजों पर रॉयल्टी से जुड़े मुद्दे पर सुनवाई के तीसरे दिन इस बात पर विचार किया कि क्या संसद खनिज अधिकारों पर कर लगाने की अपनी शक्ति से राज्यों को पूरी तरह से वंचित कर सकती है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस हृषिकेश रॉय, जस्टिस अभय ओक,जस्टिस बीवी नागरत्ना,जस्टिस जेबी पारदीवाला, जस्टिस मनोज मिश्रा, जस्टिस उज्जल भुइयां, जस्टिस एससी शर्मा और जस्टिस एजी मसीह शामिल हैं, इस मामले की सुनवाई...

बिना स्वामित्व वाले व्यक्ति द्वारा विक्रय पत्र निष्पादित किए जाने पर संपत्ति पर स्वामित्व का दावा नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
बिना स्वामित्व वाले व्यक्ति द्वारा विक्रय पत्र निष्पादित किए जाने पर संपत्ति पर स्वामित्व का दावा नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि वादी के पक्ष में उस व्यक्ति (जो संपत्ति का मालिक नहीं है) द्वारा निष्पादित सेल्स डीड वादी को ऐसी संपत्ति पर स्वामित्व/कब्ज़ा का दावा करने का अधिकार नहीं देगा।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस संजय कुमार की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के निष्कर्षों को पलटते हुए कहा कि केवल उस व्यक्ति की भागीदारी, जिसके पास संपत्ति पर स्वामित्व नहीं है, हस्ताक्षरकर्ता के रूप में सेल्स डीड के निष्पादन से वादी को संपत्ति के स्वामित्व/शीर्षक का दावा करने का अधिकार नहीं मिलेगा।हाईकोर्ट ने अपने निष्कर्षों वादी...

जब तक विवादित संपत्ति का व्यापार और वाणिज्य में वास्तव में उपयोग नहीं किया जाता, तब तक धन वसूली मुकदमा वाणिज्यिक मुकदमा नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट
जब तक विवादित संपत्ति का व्यापार और वाणिज्य में 'वास्तव में उपयोग' नहीं किया जाता, तब तक धन वसूली मुकदमा वाणिज्यिक मुकदमा नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल इसलिए कि विवाद अचल संपत्ति से संबंधित है, इसे वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम, 2015 के तहत वाणिज्यिक विवाद नहीं माना जाएगा। विशेष रूप से जब तक कि अचल संपत्ति का 'वास्तव में उपयोग' विशेष रूप से व्यापार या वाणिज्य में नहीं किया जाता।जस्टिस हृषिकेश रॉय और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने हाईकोर्ट का फैसला रद्द करते हुए इस मामले को फिर से निर्णय लेने के लिए हाईकोर्ट को वापस भेज दिया कि क्या धन की वसूली के लिए मुकदमा दायर किया जाएगा। अंबालाल साराभाई एंटरप्राइजेज...

उन्हें भी निजता का अधिकार है: सुप्रीम कोर्ट ने सांसदों/विधायकों की 24x7 डिजिटल निगरानी की मांग वाली याचिका खारिज की
'उन्हें भी निजता का अधिकार है': सुप्रीम कोर्ट ने सांसदों/विधायकों की 24x7 डिजिटल निगरानी की मांग वाली याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने आज (1 मार्च) एक जनहित याचिका (पीआईएल) को खारिज कर दिया, जिसमें 'पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार को रोकने' के लिए सांसदों/विधायकों की सभी गतिविधियों की डिजिटल निगरानी करने की मांग की गई थी। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने याचिका के विषय पर असंतोष व्यक्त किया और याद दिलाया कि निर्वाचित प्रतिनिधियों की निरंतर डिजिटल निगरानी की मांग करने का आदेश निजता के अधिकार का घोर उल्लंघन होगा।उन्होंने गुण-दोष के आधार पर सुनवाई करने से पहले याचिकाकर्ता को चेतावनी भी दी कि यदि अदालत ने मामले...

Muzaffarnagar Student Slapping Case : सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने काउंसलिंग पर TISS की सिफारिशों का पालन किया
Muzaffarnagar Student Slapping Case : सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने काउंसलिंग पर TISS की सिफारिशों का पालन किया

मुजफ्फरनगर स्टूडेंट थप्पड़ मामले में नवीनतम घटनाक्रम में उत्तर प्रदेश राज्य ने शुक्रवार (1 मार्च) को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि उसने इसमें शामिल अन्य बच्चों की काउंसलिंग पर टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल स्टडीज (TISS) द्वारा की गई सिफारिशों का अनुपालन किया।जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस उज्जल भुइयां की खंडपीठ एक्टिविस्ट तुषार गांधी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें घटना की उचित और समयबद्ध जांच की मांग की गई। मामला उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में प्राथमिक विद्यालय की शिक्षक द्वारा...

सुप्रीम कोर्ट ने डीए मामले में अपने आरोपमुक्ति के खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट के स्वत: संज्ञान संशोधन को चुनौती देने वाली तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री पनीरसेल्वम की याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने डीए मामले में अपने आरोपमुक्ति के खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट के स्वत: संज्ञान संशोधन को चुनौती देने वाली तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री पनीरसेल्वम की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और अन्नाद्रमुक नेता ओ पन्नीरसेल्वम की मद्रास हाईकोर्रट के उस आदेश को चुनौती खारिज कर दी, जिसके तहत आपराधिक मामले में उन्हें आरोपमुक्त करने के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए पुनर्विचार शुरू किया गया।जस्टिस हृषिकेश रॉय और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा खंडकी पीठ ने कहा,"एसएलपी खारिज कर दी गई। हालांकि हम यह देख सकते हैं कि जज द्वारा आक्षेपित आदेश में की गई टिप्पणी... उसको केवल नोटिस आदेश के प्रयोजन के लिए माना जाना चाहिए... सू मोटो क्रिमिनल आरसी नंबर 1524/...

सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग से बलात्कार मामले में मेडिकल आधार पर सजा निलंबित करने की आसाराम बापू की याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग से बलात्कार मामले में मेडिकल आधार पर सजा निलंबित करने की आसाराम बापू की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम बापू की राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती खारिज की, जिसने उस मामले में स्वास्थ्य आधार पर सजा को निलंबित करने की उनकी याचिका खारिज कर दी थी। उक्त मामले में उन्हें नाबालिग से बलात्कार के लिए दोषी ठहराया गया था।गुण-दोष पर टिप्पणी किए बिना पुलिस हिरासत में इलाज की अनुमति देने का राज्य का प्रस्ताव स्वीकार करने के मद्देनजर, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आसाराम बापू आयुर्वेदिक अस्पताल में इलाज कराने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए स्वतंत्र होंगे।...

शिंदे गुट को अयोग्य ठहराने से महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर के इनकार के खिलाफ शिवसेना यूबीटी की याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
शिंदे गुट को अयोग्य ठहराने से महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर के इनकार के खिलाफ शिवसेना यूबीटी की याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट एकनाथ शिंदे गुट के विधायकों को अयोग्य ठहराने से महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर के इनकार को चुनौती देने वाली शिवसेना के सदस्य (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) द्वारा दायर याचिका पर 7 मार्च, 2024 को सुनवाई करने पर सहमत हो गया।याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने तत्काल सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ के समक्ष मामले का उल्लेख किया।सिब्बल ने कहा कि मामले में सुनवाई की जरूरत है और अनुरोध किया कि इसे गैर-विविध दिन पर सूचीबद्ध किया जाए।सीजेआई ने 7 मार्च को...

मुकदमे पूजा स्थल अधिनियम द्वारा वर्जित नहीं, कहने वाले हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ ज्ञानवापी मस्जिद समिति ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
'मुकदमे पूजा स्थल अधिनियम द्वारा वर्जित नहीं', कहने वाले हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ ज्ञानवापी मस्जिद समिति ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

ज्ञानवापी विवाद में नवीनतम घटनाक्रम में मस्जिद समिति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जिसमें कहा गया कि वाराणसी सिविल कोर्ट के समक्ष लंबित हिंदू पक्षों द्वारा सिविल मुकदमों का बैच पूजा स्थल अधिनियम, 1991 द्वारा वर्जित नहीं है। 1991 में हिंदू उपासकों और देवताओं की ओर से दायर यह मुकदमा ज्ञानवापी मस्जिद में पूजा करने का अधिकार और विवादित स्थल पर मंदिर की बहाली की मांग करता है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस...

अंतरिम राहत रद्द करने के आवेदनों को लंबे समय तक लंबित नहीं रखा जा सकता: सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक देने और हटाने पर हाईकोर्ट के लिए दिशानिर्देश जारी किए
'अंतरिम राहत रद्द करने के आवेदनों को लंबे समय तक लंबित नहीं रखा जा सकता': सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक देने और हटाने पर हाईकोर्ट के लिए दिशानिर्देश जारी किए

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (29 फरवरी) को कार्यवाही पर रोक के अंतरिम आदेश पारित करने और ऐसे रोक को हटाने के लिए आवेदनों से निपटने में हाईकोर्ट द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के संबंध में दिशानिर्देश जारी किए।मुख्य निर्णय लिखने वाले जस्टिस अभय एस ओक के माध्यम से बोलते हुए सुप्रीम कोर्ट ने माना कि प्रभावित पक्षों को सुने बिना एकपक्षीय अंतरिम राहत देते समय हाईकोर्ट को आम तौर पर सीमित अवधि के लिए ऐसी राहत देनी चाहिए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत अंतरिम आदेश की पुष्टि कर सकती है या उसे रद्द कर...

लखनऊ अकबर नगर तोड़फोड़ : सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले तक तोड़फोड़ पर रोक लगाई, कहा- ये गरीब लोग हैं
लखनऊ अकबर नगर तोड़फोड़ : सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले तक तोड़फोड़ पर रोक लगाई, कहा- ये गरीब लोग हैं

लखनऊ के अकबर नगर में वाणिज्यिक स्थानों के हालिया विध्वंस की त्वरित प्रतिक्रिया में, तोड़फोड़ आदेशों की वैधता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई हैं। यह कदम इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा 24 कब्जाधारियों की याचिकाओं को खारिज करने के बाद आया है, जिससे लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के लिए क्षेत्र में कथित तौर पर अवैध प्रतिष्ठानों को ध्वस्त करने का रास्ता साफ हो गया है।जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ के समक्ष गुरुवार को पहली बार याचिकाओं का उल्लेख किया गया था,...

गंभीर उल्लंघन : सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के तूतीकोरिन में स्टरलाइट तांबा गलाने वाले संयंत्र को फिर से खोलने की याचिका खारिज की
'गंभीर उल्लंघन' : सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के तूतीकोरिन में स्टरलाइट तांबा गलाने वाले संयंत्र को फिर से खोलने की याचिका खारिज की

वेदांता की ओर से 'बार-बार उल्लंघन' और 'गंभीर उल्लंघन' का हवाला देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (29 फरवरी) को तमिलनाडु के तूतीकोरिन में स्टरलाइट तांबा गलाने वाले संयंत्र को फिर से खोलने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने अगस्त 2020 के मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ वेदांता लिमिटेड द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया। इस विस्तृत फैसले के द्वारा, हाईकोर्ट ने तूतीकोरिन में उसके तांबा...

अपने मुव्वकिल के लिए कोर्ट में पेश हो रहे वकील उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत  सेवा प्रदाता  नहीं : एमिकस ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
अपने मुव्वकिल के लिए कोर्ट में पेश हो रहे वकील उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत ' सेवा प्रदाता ' नहीं : एमिकस ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (29 फरवरी) को इस मुद्दे पर फैसला सुरक्षित रख लिया कि क्या सेवाओं में कमी के लिए वकीलों को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत उत्तरदायी ठहराया जा सकता है।जस्टिस बेला त्रिवेदी और जस्टिस पंकज मित्तल की बेंच ने मामले की सुनवाई की। अंतिम दिन, मामले में न्याय मित्र, सीनियर एडवोकेट वी गिरी ने पीठ को संबोधित किया।यह मुद्दा, जो बार के सदस्यों के लिए प्रासंगिक है, 2007 में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग द्वारा दिए गए एक फैसले से उभरा। आयोग ने फैसला सुनाया था कि वकीलों द्वारा...

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को आमतौर पर अन्य अदालतों में मामले के निपटारे के लिए समयबद्ध कार्यक्रम तय करने से बचना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को आमतौर पर अन्य अदालतों में मामले के निपटारे के लिए समयबद्ध कार्यक्रम तय करने से बचना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में गुरुवार (29 फरवरी) को अपने 2018 एशियन रिसर्फेसिंग फैसले को पलट दिया, जिसमें दृढ़ता से कहा गया कि एक निर्धारित अवधि के बाद अंतरिम आदेशों की स्वचालित समाप्ति को अनिवार्य करने वाले निर्देश संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत शीर्ष अदालत द्वारा जारी नहीं किए जा सकते हैं। नवीनतम फैसला गुरुवार को चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अभय एस ओका, जस्टिस जेबी पारदीवाला, जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस मनोज मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पीठ ने सुनाया।...