सुप्रीम कोर्ट
दोबारा नौकरी पर रखे गए अधिकारियों को रेगुलर अधिकारियों से अलग माना जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रिटायरमेंट के बाद दोबारा नौकरी पर रखे गए सरकारी अधिकारियों को वेतन तय करने के मकसद से रेगुलर सरकारी कर्मचारियों से अलग श्रेणी (णlass) माना जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा वर्गीकरण संविधान के आर्टिकल 14 और 16 के तहत समानता की गारंटी का उल्लंघन नहीं करता।जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने सेंट्रल गवर्नमेंट इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल-कम-लेबर कोर्ट (CGIT-कम-LCs) के पीठासीन अधिकारियों (Presiding Officers) की याचिका खारिज करते हुए यह बात कही। इन अधिकारियों...
JJ Act | रेगुलर कोर्ट ने नाबालिग पर बालिग़ की तरह मुक़दमा चलाया तो भी सज़ा का फ़ैसला रद्द नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर किसी नाबालिग पर रेगुलर क्रिमिनल कोर्ट में मुक़दमा चलाया गया तो सिर्फ़ इस वजह से मामले के गुण-दोष के आधार पर हुई सज़ा (कनविक्शन) रद्द करने की ज़रूरत नहीं। इसी के अनुसार, कोर्ट ने एक ऐसे आरोपी की सज़ा (कनविक्शन) को तो बरकरार रखा, जिस पर बालिग़ की तरह मुक़दमा चलाया गया था, लेकिन अपराध की तारीख़ पर उसके नाबालिग होने का पता चलने के बाद उसे सुनाई गई सज़ा रद्द कर दी।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की, जिसमें अपील करने वाले आरोपी...
तुरंत ज़ब्ती की ज़रूरत वाली स्थितियों में NDPS Act की धारा 42 का काफ़ी हद तक पालन काफ़ी: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब नशीले पदार्थों से जुड़ी जानकारी ऐसी परिस्थितियों में मिलती है जहाँ चलती हुई गाड़ी को तुरंत रोकना ज़रूरी हो तो नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 (NDPS Act) की धारा 42 की ज़रूरतों को स्थिति की गंभीरता के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। मामले के तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने पाया कि कानूनी सुरक्षा उपायों का काफ़ी हद तक पालन किया गया और प्रक्रियात्मक कमियों के आधार पर बरामदगी को अमान्य करने से इनकार किया।कोर्ट ने यह टिप्पणी एक व्यक्ति की अपील खारिज करते हुए की,...
मकान मालिक-किरायेदार के बीच Agreement to Sell से किरायेदारी अपने आप खत्म नहीं होती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मकान मालिक और किरायेदार के बीच Agreement to Sell होने मात्र से मौजूदा किरायेदारी अपने आप समाप्त नहीं होती। किरायेदारी खत्म हुई या नहीं, यह Agreement to Sell की शर्तों या पक्षकारों के स्पष्ट आचरण से तय होगा।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की खंडपीठ ने कहा कि केवल Agreement to Sell पर हस्ताक्षर हो जाने से किरायेदारी समाप्त नहीं मानी जा सकती।कोर्ट ने तय किए महत्वपूर्ण सिद्धांतसुप्रीम कोर्ट ने कहा कि—केवल Agreement to Sell से मौजूदा किरायेदारी समाप्त...
सेंट्रल इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल में नियुक्त रिटायर्ड जज दूसरे ट्रिब्यूनल सदस्यों के बराबर वेतन की मांग नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (12 अगस्त) को पूर्व न्यायिक अधिकारियों की रिट याचिका खारिज की। इन अधिकारियों को केंद्र सरकार के इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल-सह-लेबर कोर्ट में पीठासीन अधिकारी (Presiding Officers) के तौर पर फिर से नौकरी पर रखा गया था। उन्होंने छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत अन्य राष्ट्रीय ट्रिब्यूनल के अधिकारियों के बराबर वेतनमान की मांग की थी।जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने जस्टिस ई. पद्मनाभन कमेटी के अनुसार याचिकाकर्ताओं के लिए जिला न्यायपालिका के अधिकारियों का बराबर...
एक ही वादी द्वारा मुकदमों में आम फैसले के खिलाफ समग्र अपील सुनवाई योग्य: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (12 अगस्त) को कहा कि एक ही वादी द्वारा दायर मुकदमों में दिए गए सामान्य फैसले के खिलाफ समग्र अपील सुनवाई योग्य होगी।जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस अतुल एस चंदूरकर की खंडपीठ ने कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसने अपीलकर्ता (वादी) द्वारा स्थापित दो मुकदमों पर निर्णय देने वाले सामान्य फैसले के खिलाफ अपीलकर्ता द्वारा दायर समग्र अपील पर विचार करने के प्रथम अपीलीय न्यायालय के फैसले में हस्तक्षेप किया था।कोर्ट ने कहा,"...हमारा विचार है कि हाईकोर्ट के फैसले को कायम नहीं...
बिजली का झटका लगने से हुई मौतों के लिए बिजली बोर्ड पर सख्त जवाबदेही लागू होती है, पूर्ण जवाबदेही नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि बिजली का झटका लगने से हुई मौतों या चोटों के लिए बिजली अधिकारियों को 'स्ट्रिक्ट लायबिलिटी' (सख्त जवाबदेही) के तहत जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, लेकिन ऐसी जवाबदेही को बिना किसी अपवाद के 'एब्सोल्यूट लायबिलिटी' (पूर्ण जवाबदेही) नहीं माना जा सकता।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कर्नाटक हाईकोर्ट की सिंगल और डिवीजन बेंच के उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें कर्नाटक पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन को बिजली का झटका लगने से हुई मौतों के लिए...
खाड़ी देशों के छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से राहत, CBSE को जल्द विशेष परीक्षा कराने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति के कारण बोर्ड परीक्षा से वंचित रह गए खाड़ी देशों के 12वीं कक्षा के छात्रों को बड़ी राहत देते हुए CBSE की विशेष मूल्यांकन व्यवस्था में दखल देने से इनकार किया। हालांकि, कोर्ट ने CBSE की उस आश्वस्ति को दर्ज किया है कि प्रभावित छात्रों के लिए जल्द से जल्द दोबारा परीक्षा कराने के कदम उठाए जाएंगे।जस्टिस एम.एम. सुंदरैश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने छात्रों की उस मांग को स्वीकार नहीं किया, जिसमें उन्हें कंपार्टमेंट परीक्षा में शामिल होने वाले...
S. 14 Limitation Act | रिकवरी का केस करने के लिए कंपनी बंद करने की कार्यवाही में लगा समय नहीं घटाया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (12 अगस्त) को कहा कि कंपनी बंद करने की कार्यवाही (वाइंडिंग अप प्रोसीडिंग्स) में लगा समय, लिमिटेशन एक्ट की धारा 14 के तहत रिकवरी का केस करने की समय-सीमा से नहीं घटाया जा सकता, क्योंकि दोनों कार्यवाहियों में मांगी गई राहत मूल रूप से अलग-अलग है।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा,"...कंपनी बंद करने की कार्यवाही शुरू करने से - जिससे रिकवरी हो भी सकती है और नहीं भी - पैसे की रिकवरी के लिए अलग से केस करने की समय-सीमा पर कोई असर नहीं पड़ेगा।" ...
आपराधिक रिकॉर्ड छिपाने पर कर्मचारी की बर्खास्तगी अपने आप नहीं हो सकती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कर्मचारी के आपराधिक रिकॉर्ड का खुलासा होने मात्र से उसकी नौकरी खत्म नहीं की जा सकती। बर्खास्तगी से पहले नियोक्ता को यह जांचना होगा कि कर्मचारी ने जानबूझकर जानकारी छिपाई थी या नहीं और क्या उसकी सेवा जारी रखना वास्तव में संभव नहीं है।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने कहा कि बर्खास्तगी के लिए दो स्तर की जांच जरूरी है। पहले यह तय करना होगा कि कर्मचारी को आपराधिक मामले की जानकारी थी और उसने उसे छिपाया या गलत जानकारी दी। इसके बाद अपराध की प्रकृति,...
हिरासत में मौत मामले की जांच CBI को, सुप्रीम कोर्ट ने ₹25 लाख मुआवजे का आदेश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ में 34 वर्षीय श्रवण की हिरासत में हुई मौत के मामले की जांच CBI को सौंपने का आदेश दिया है। कोर्ट ने राज्य पुलिस द्वारा मौत के बाद दो साल से अधिक समय तक FIR दर्ज नहीं करने को गंभीरता से लिया।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने कहा कि न्याय के हित में मामले की जांच CBI को सौंपना जरूरी है। कोर्ट ने हिरासत में हिंसा के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई का भी निर्देश दिया।श्रवण की मौत 21 जनवरी 2024 को अस्पताल में हुई...
अगर किसी व्यक्ति के पास गोपनीय जानकारी है और वह ट्रेडिंग करता है तो इसे इनसाइडर ट्रेडिंग माना जाएगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (11 अगस्त) को कहा कि SEBI (इनसाइडर ट्रेडिंग पर रोक) रेगुलेशन, 2015 के तहत इनसाइडर ट्रेडिंग का अनुमान लगाने के लिए सिर्फ़ 'अनपब्लिश्ड प्राइस सेंसिटिव इन्फॉर्मेशन' (UPSI) का पास होना और उस दौरान सिक्योरिटीज़ में ट्रेडिंग करना ही काफ़ी है।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) के आदेश को रद्द करते हुए सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) की अपील को मंज़ूरी दी। इसके साथ ही कोर्ट ने तारा ज्वेल्स लिमिटेड (TJL) के...
ट्रायल से पहले बचाव पक्ष के सबूतों के आधार पर आपराधिक केस रद्द किया जा सकता है या नहीं, इसे परखने के 4 तरीके: सुप्रीम कोर्ट ने समझाया
सुप्रीम कोर्ट ने फिर से कहा कि खास मामलों में, बचाव पक्ष के सबूतों या सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर ट्रायल शुरू होने से पहले ही आपराधिक कार्यवाही रद्द की जा सकती है। ऐसा तब किया जा सकता है जब वे सबूत पूरी तरह भरोसेमंद हों और उनसे यह साबित हो कि केस को आगे बढ़ाना कोर्ट की प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल होगा।राहुल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में 11 अगस्त, 2026 को दिए गए फैसले में जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने राजीव थापर बनाम मदन लाल कपूर (2013) मामले में तय किए गए चार-चरणीय...
परीक्षा में हाईकोर्ट विशेषज्ञों की राय की जगह अपना आकलन नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया है कि अकादमिक मामलों में न्यायिक समीक्षा की शक्ति का इस्तेमाल विशेषज्ञों के निर्णय में हस्तक्षेप करने के लिए नहीं किया जा सकता। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की खंडपीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के दोबारा मूल्यांकन, कुछ प्रश्न हटाने और कुछ प्रश्नों पर पूर्ण अंक देने के निर्देश दिए गए थे।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने Ran Vijay Singh v. State of Uttar Pradesh (2018) में...
'सर्वोच्च बलिदान': सुप्रीम कोर्ट ने शौर्य चक्र विजेता की विधवा को ₹10 लाख देने का आदेश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार को जनरल रिजर्व इंजीनियरिंग फोर्स (GREF) के एक कर्मचारी की विधवा को अतिरिक्त ₹10 लाख देने का निर्देश दिया है। इस कर्मचारी को भारत-चीन सीमा पर सड़क निर्माण के दौरान अपने साथियों की जान बचाते हुए शहीद होने पर मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था।जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस अरुण पल्ली की बेंच ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए विधवा को उनके पति की 2000 में हुई मौत की तारीख से ही 'असाधारण पारिवारिक पेंशन' का लाभ दिया। यह लाभ...
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को चेतावनी दी: उम्र या जेंडर की परवाह किए बिना, हर लापता व्यक्ति के लिए तुरंत FIR दर्ज होनी चाहिए
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में साफ़ किया कि लापता व्यक्ति के बारे में जानकारी मिलने पर पुलिस को तुरंत FIR दर्ज करने का उसका निर्देश हर व्यक्ति पर लागू होता है, चाहे उसकी उम्र या जेंडर कुछ भी हो। कोर्ट ने कहा कि उसके पिछले आदेश में "व्यक्ति" (Person) शब्द का मतलब सिर्फ़ बच्चों से नहीं निकाला जा सकता और चेतावनी दी कि जो राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इस निर्देश का पालन नहीं करेंगे, उनके ख़िलाफ़ अदालत की अवमानना की कार्रवाई हो सकती है।जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने मानव...
गवाहों के एक जैसे बयान पर सुप्रीम कोर्ट को संदेह, हत्या मामले में 20 आरोपियों का बरी होना बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के मामले में 20 आरोपियों को बरी करने के बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच के फैसले को बरकरार रखा है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि अलग-अलग स्थानों पर मौजूद कई प्रत्यक्षदर्शियों के बयान अगर एक जैसे और रटे-रटाए हों, तो यह गवाहों को सिखाए-पढ़ाए जाने का संकेत हो सकता है।कोर्ट ने कहा कि एक ही घटना को अलग-अलग जगहों से देखने वाले गवाहों के बयानों में स्वाभाविक रूप से कुछ अंतर होना चाहिए। लेकिन इस मामले में गवाहों ने 23 आरोपियों की भूमिकाओं का लगभग एक...
क्या अलग-अलग कमिटल ऑर्डर होने के बावजूद सेशंस कोर्ट जॉइंट ट्रायल कर सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने समझाया
सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ किया कि कमिटल ऑर्डर यह तय नहीं करते कि ट्रायल जॉइंट होगा या अलग-अलग; यह फ़ैसला पूरी तरह से ट्रायल कोर्ट का होता है।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा,"...कमिटल ऑर्डर यह तय नहीं करते कि ट्रायल सिंगल, अलग-अलग या जॉइंट होगा; यह पूरी तरह से कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में है।" कोर्ट ने कहा कि "कमिटल ऑर्डर सेशंस कोर्ट को उन लोगों के ट्रायल का संज्ञान (कॉग्निज़ेंस) लेने का अधिकार देता है जिन्हें भेजा गया है, लेकिन यह ट्रायल के लिए संज्ञान लेने का आधार नहीं...
पिछली तारीख से टैक्स की देनदारी सही, लेकिन जुर्माना नहीं : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भले ही कानूनी संशोधन के ज़रिए पिछली तारीख से टैक्स की देनदारी सही तरीके से लागू की जा सकती है, लेकिन किसी डीलर पर पिछली तारीख से जुर्माना नहीं लगाया जा सकता, जिसने उस समय कानून का पालन किया था जब लेन-देन हुआ था।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने यह अंतर तब स्पष्ट किया, जब उन्होंने कर्नाटक सेल्स टैक्स एक्ट, 1957 में 2001 के संशोधन की संवैधानिक वैधता बरकरार रखी। इस संशोधन ने चीनी पर मिलने वाली छूट को पिछली तारीख से केवल "भारत में उत्पादित या...
S.101(2) JJ Act | JJB के आदेश के खिलाफ अपील की सुनवाई में चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट की मदद लेना ज़रूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में साफ़ किया कि कानून के दायरे में आए बच्चे (Child in Conflict with Law) की शुरुआती जांच (Preliminary Assessment) करते समय चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट एक्सपर्ट की मदद लेने का नियम, जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल और सुरक्षा) एक्ट, 2015 की धारा 101(2) पर उसी तरह लागू नहीं होगा।धारा 15(1) के प्रावधान के अनुसार, जब यह तय किया जा रहा हो कि कानून के दायरे में आए बच्चे पर बालिग की तरह मुकदमा चलाया जाए या नहीं तो बोर्ड के लिए चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट की एक्सपर्ट मदद लेना ज़रूरी है, बशर्ते...


















