सुप्रीम कोर्ट

प्रक्रिया में देरी करके एम्प्लॉयर अनुकंपा नियुक्ति का दावा खारिज नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट
प्रक्रिया में देरी करके एम्प्लॉयर 'अनुकंपा नियुक्ति' का दावा खारिज नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई एम्प्लॉयर किसी कर्मचारी की मेडिकल आधार पर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (voluntary retirement) की अर्ज़ी को तब तक पेंडिंग नहीं रख सकता, जब तक कि कर्मचारी तय उम्र सीमा पार न कर ले, और फिर उस देरी का इस्तेमाल कर्मचारी के आश्रित को दया के आधार पर नियुक्ति देने से इनकार करने के लिए करे। कोर्ट ने कहा कि ऐसी व्याख्या से एम्प्लॉयर को "प्रोसेस में देरी करके पात्रता को कंट्रोल करने" और एक फायदेमंद स्कीम के मकसद को नाकाम करने की छूट मिल जाएगी।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम...

Art. 226 | हाईकोर्ट सर्टिओरारी अधिकार क्षेत्र के तहत सबूतों का दोबारा मूल्यांकन या तथ्यों से जुड़े निष्कर्षों में दखल नहीं दे सकता: सुप्रीम कोर्ट
Art. 226 | हाईकोर्ट 'सर्टिओरारी' अधिकार क्षेत्र के तहत सबूतों का दोबारा मूल्यांकन या तथ्यों से जुड़े निष्कर्षों में दखल नहीं दे सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट 'सर्टिओरारी' की रिट जारी करके उन सबूतों की समीक्षा या दोबारा जांच नहीं कर सकता, जिनके आधार पर निचली अदालतों ने किसी मामले में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने दोहराया कि ऐसा अधिकार क्षेत्र केवल अदालतों या ट्रिब्यूनल द्वारा अधिकार क्षेत्र से जुड़ी गलतियों को सुधारने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, न कि सबूतों का दोबारा मूल्यांकन करने या अपील की अदालत की तरह काम करने के लिए।ऐसा कहते हुए जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला रद्द...

सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे से ट्रेनों में भीड़ कम करने को कहा- सेकंड क्लास पैसेंजर शब्द हटाने का सुझाव दिया
सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे से ट्रेनों में भीड़ कम करने को कहा- 'सेकंड क्लास पैसेंजर' शब्द हटाने का सुझाव दिया

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रेलवे से ट्रेनों में भीड़ को रोकने के लिए असरदार कदम उठाने को कहा। कोर्ट ने देखा कि ऐसी घटनाओं की वजह से अक्सर यात्री चलती ट्रेनों से गिरकर अपनी जान गंवा बैठते हैं। कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि रेलवे अपने मैनुअल में "सेकंड क्लास पैसेंजर" (दूसरी श्रेणी के यात्री) शब्द का इस्तेमाल बंद करे। कोर्ट का कहना था कि संवैधानिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए, श्रेणी का अंतर कोच से जुड़ा होना चाहिए, न कि यात्री से।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की...

जब आरोपी जेल में हो तो कोर्ट और प्रॉसिक्यूशन की ज़िम्मेदारी है कि वे ट्रायल में तेज़ी लाएं: सुप्रीम कोर्ट
जब आरोपी जेल में हो तो कोर्ट और प्रॉसिक्यूशन की ज़िम्मेदारी है कि वे ट्रायल में तेज़ी लाएं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब कोई आरोपी कस्टडी में हो तो कोर्ट और प्रॉसिक्यूशन एजेंसी दोनों की यह ज़िम्मेदारी है कि वे जल्द से जल्द ट्रायल पूरा करें। कोर्ट ने हत्या के एक आरोपी को ज़मानत दे दी जो नौ साल से ज़्यादा समय से जेल में था। कोर्ट ने कहा कि इतनी लंबी देरी ने "हमारी न्यायिक अंतरात्मा को झकझोर दिया।"जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने संविधान के आर्टिकल 32 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए लियाकत अली को ज़मानत दी। वह रणबीर पीनल कोड की धारा 302, 382, ​​201 और...

सिर्फ़ गाली-गलौज या अभद्र भाषा का इस्तेमाल अश्लीलता नहीं है: सुप्रीम कोर्ट ने IPC की धारा 294(b) का दायरा समझाया
सिर्फ़ गाली-गलौज या अभद्र भाषा का इस्तेमाल अश्लीलता नहीं है: सुप्रीम कोर्ट ने IPC की धारा 294(b) का दायरा समझाया

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि "सिर्फ़ गाली-गलौज, अपशब्द और अभद्र भाषा का इस्तेमाल - चाहे वे कितने भी बुरे या असभ्य क्यों न हों - उन्हें अश्लीलता नहीं माना जा सकता।" कोर्ट ने फैसला सुनाया कि गाली-गलौज या अभद्र भाषा का इस्तेमाल अपने आप में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 294 के तहत अश्लीलता का अपराध नहीं है। कोर्ट ने साफ़ किया कि कानून की नज़र में अश्लीलता, अभद्रता, गाली-गलौज या अपशब्दों से अलग है। इसके लिए यह साबित करना ज़रूरी है कि शब्द कामुक हों, कामुक इच्छाओं को भड़काने वाले हों और कमज़ोर...

टाउन पंचायत के नॉमिनेटेड सदस्य लेजिस्लेटिव काउंसिल चुनाव में वोट नहीं डाल सकते: सुप्रीम कोर्ट
टाउन पंचायत के नॉमिनेटेड सदस्य लेजिस्लेटिव काउंसिल चुनाव में वोट नहीं डाल सकते: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि टाउन पंचायतों के नॉमिनेटेड सदस्य कर्नाटक लेजिस्लेटिव काउंसिल के लिए लोकल अथॉरिटीज़ निर्वाचन क्षेत्रों से होने वाले चुनावों में वोट नहीं डाल सकते। कोर्ट ने कहा कि वोटर लिस्ट में उन्हें शामिल करना संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेशों को चुनौती देने वाली कई अपीलों को खारिज किया। हाईकोर्ट ने कहा था कि नॉमिनेटेड सदस्य चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले सकते...

ओनर रिस्क पर बुक किए गए सामान की कम डिलीवरी के लिए रेलवे तब तक ज़िम्मेदार नहीं, जब तक उसने खुद सामान की गिनती या वज़न न किया हो: सुप्रीम कोर्ट
'ओनर रिस्क' पर बुक किए गए सामान की कम डिलीवरी के लिए रेलवे तब तक ज़िम्मेदार नहीं, जब तक उसने खुद सामान की गिनती या वज़न न किया हो: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि "ओनर रिस्क" (मालिक के जोखिम) रेट पर बुक किए गए सामान की कम डिलीवरी के लिए रेलवे को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि उसने ट्रांसपोर्ट से पहले खुद सामान की गिनती या वज़न न किया हो और इस तरह उसे सौंपी गई मात्रा की देखभाल की ज़िम्मेदारी न ली हो।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने M/s बजाज ट्रेडिंग कंपनी की अपील खारिज कr। कंपनी ने गुजरात से असम भेजे गए नमक के 1,742 बोरे कम होने के लिए मुआवज़े की मांग की थी। कोर्ट ने रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल और गुवाहाटी...

क्या वसीयत के प्रोबेट के लिए आवेदन वसीयतकर्ता की मौत के 3 साल के अंदर न करने पर समय-सीमा खत्म हो जाती है? सुप्रीम कोर्ट ने दिया जवाब
क्या वसीयत के प्रोबेट के लिए आवेदन वसीयतकर्ता की मौत के 3 साल के अंदर न करने पर समय-सीमा खत्म हो जाती है? सुप्रीम कोर्ट ने दिया जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वसीयत के प्रोबेट के लिए आवेदन वसीयतकर्ता की मौत के तीन साल के अंदर ही करना ज़रूरी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि प्रोबेट के लिए आवेदन करने का अधिकार तब मिलता है जब ऐसा करना ज़रूरी हो जाता है, यानी जब वसीयत से बनी स्थिति के खिलाफ कोई कदम उठाया जाता है।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा,"इसलिए आवेदन करने का अधिकार उस तारीख से मिलता है, जब आवेदन करना ज़रूरी हो जाता है। ज़ाहिर है, यह वसीयतकर्ता की मौत के तीन साल के अंदर होना ज़रूरी नहीं है।" बेंच ने ट्रायल...

बुजुर्ग और असाध्य रोगों से पीड़ित कैदियों की समयपूर्व रिहाई के लिए 3 महीने में नीति बनाएं राज्य: सुप्रीम कोर्ट
बुजुर्ग और असाध्य रोगों से पीड़ित कैदियों की समयपूर्व रिहाई के लिए 3 महीने में नीति बनाएं राज्य: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे तीन महीने के भीतर बुजुर्ग और असाध्य रोगों से पीड़ित कैदियों की समयपूर्व या समय से पहले रिहाई के लिए स्पष्ट नीति तैयार कर उसे अधिसूचित करें। अदालत ने ऐसे मामलों के निस्तारण के लिए तकनीक आधारित एक समान व्यवस्था लागू करने का भी निर्देश दिया।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने यह आदेश राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिका में 70 वर्ष से अधिक आयु के...

अपीलीय अदालतों को स्वतंत्र कारण बताने होंगे, वे सिर्फ़ ट्रायल कोर्ट के फ़ैसले को गलत बताकर उसे पलट नहीं सकतीं: सुप्रीम कोर्ट
अपीलीय अदालतों को स्वतंत्र कारण बताने होंगे, वे सिर्फ़ ट्रायल कोर्ट के फ़ैसले को गलत बताकर उसे पलट नहीं सकतीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहली अपीलीय अदालत, सबूतों का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन किए बिना और अपने कारण दर्ज किए बिना, केवल ट्रायल कोर्ट के फ़ैसले को गलत बताकर उसे पलट नहीं सकती। तथ्यों से जुड़े निष्कर्षों को बदलते समय अपीलीय अदालतों की ज़िम्मेदारी पर ज़ोर देते हुए कोर्ट ने कहा कि उन्हें निचली अदालतों के प्रति "दोस्त, दार्शनिक और मार्गदर्शक" की तरह काम करना चाहिए, न कि केवल गलतियाँ बताने वाला वरिष्ठ अधिकारी जैसा रवैया अपनाना चाहिए।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने केरल हाईकोर्ट...

ओपन कोर्ट में फैसला सुनाना अंतिम निर्णय नहीं, हस्ताक्षर से पहले जज बदल सकते हैं फैसला: सुप्रीम कोर्ट
ओपन कोर्ट में फैसला सुनाना अंतिम निर्णय नहीं, हस्ताक्षर से पहले जज बदल सकते हैं फैसला: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि खुली अदालत (Open Court) में किसी फैसले का मौखिक उच्चारण (Oral Pronouncement) मात्र से वह अंतिम निर्णय नहीं बन जाता। जब तक संबंधित न्यायाधीश उस फैसले पर हस्ताक्षर नहीं कर देते, तब तक उसमें बदलाव किया जा सकता है और आवश्यकता पड़ने पर मामले को दोबारा सुनवाई के लिए सूचीबद्ध (Re-list) भी किया जा सकता है।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की खंडपीठ यह टिप्पणी कर्नाटक के श्री आंजनेय मंदिर के प्रधान पुजारी...

Land Acquisition Act | जो ज़मीन मालिक सुनवाई का मौका नहीं ले पाए, वे बाद में सुनवाई न मिलने का आरोप नहीं लगा सकते: सुप्रीम कोर्ट
Land Acquisition Act | जो ज़मीन मालिक सुनवाई का मौका नहीं ले पाए, वे बाद में सुनवाई न मिलने का आरोप नहीं लगा सकते: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (13 जुलाई) को जयपुर मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के लिए ज़मीन अधिग्रहण की कार्यवाही को चुनौती देने वाली ज़मीन मालिकों की अपील खारिज की। कोर्ट ने कहा कि ज़मीन मालिकों ने ज़मीन अधिग्रहण अधिकारी (LAO) के सामने पेश न होकर और उसके बाद चुप रहकर ज़मीन अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 5A के तहत सुनवाई का अपना अधिकार छोड़ दिया था।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा,"9 अप्रैल, 2012 को अपीलकर्ताओं (ज़मीन मालिकों) की अनुपस्थिति और उसके बाद उनकी चुप्पी से LAO को यह...

Arbitration | आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल द्वारा धारा 16 के तहत आवेदन खारिज करने को चुनौती देने के लिए अनुच्छेद 227 का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
Arbitration | आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल द्वारा धारा 16 के तहत आवेदन खारिज करने को चुनौती देने के लिए अनुच्छेद 227 का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (14 जुलाई) को कहा कि हाईकोर्ट के लिए अपने सुपरवाइजरी अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल के उस फैसले में दखल देना सही नहीं है, जिसमें ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र को चुनौती देने वाले आर्बिट्रेशन एंड कंसिलिएशन एक्ट की धारा 16 के तहत आवेदन को खारिज कर दिया गया।जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने कहा,"...हमारा मानना ​​है कि संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत चुनौती पर विचार करना और आर्बिट्रेशन की कार्यवाही पर रोक लगाना हाईकोर्ट के लिए...

एविडेंस एक्ट की धारा 68- रजिस्टर्ड सेल डीड के लिए गवाहों के सर्टिफिकेशन (अटेस्टेशन) के सबूत की ज़रूरत नहीं : सुप्रीम कोर्ट
एविडेंस एक्ट की धारा 68- रजिस्टर्ड सेल डीड के लिए गवाहों के सर्टिफिकेशन (अटेस्टेशन) के सबूत की ज़रूरत नहीं : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (14 जुलाई) को फैसला सुनाया कि इंडियन एविडेंस एक्ट, 1872 की धारा 68 का प्रोविज़ो (शर्त) रजिस्टर्ड सेल डीड पर लागू नहीं होता है, क्योंकि कानून के तहत सेल डीड के लिए गवाहों से सर्टिफिकेशन ज़रूरी नहीं है।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने केरल हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द करते हुए यह बात कही, जिसमें सेल डीड ट्रांज़ैक्शन पर धारा 68 के प्रोविज़ो को गलत तरीके से लागू किया गया।बेंच ने कहा, "धारा 68 का प्रोविज़ो कहता है कि किसी भी डॉक्यूमेंट (वसीयत को...

Hindu Succession Act | धारा 22 के तहत क्लास-I उत्तराधिकारियों का प्राथमिकता वाला अधिकार कृषि भूमि पर भी लागू होती है: सुप्रीम कोर्ट
Hindu Succession Act | धारा 22 के तहत क्लास-I उत्तराधिकारियों का प्राथमिकता वाला अधिकार कृषि भूमि पर भी लागू होती है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (14 जुलाई) को फैसला सुनाया कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 22, जो क्लास-I उत्तराधिकारियों को किसी अन्य सह-उत्तराधिकारी द्वारा ट्रांसफर की जाने वाली संपत्ति को खरीदने का प्राथमिकता वाला अधिकार देता है, कृषि भूमि पर भी समान रूप से लागू होती है।हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 22 के कृषि भूमि पर लागू होने को चुनौती देने वाली अपील खारिज करते हुए जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा।...

Arms Act | सिर्फ़ हथियार मिलने से ही अपराध साबित नहीं होता, अगर यह साबित न हो कि आरोपी को उसकी जानकारी थी और उसका उस पर कंट्रोल था: सुप्रीम कोर्ट
Arms Act | सिर्फ़ हथियार मिलने से ही अपराध साबित नहीं होता, अगर यह साबित न हो कि आरोपी को उसकी जानकारी थी और उसका उस पर कंट्रोल था: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (13 जुलाई) को कहा कि किसी के घर से हथियार मिलने मात्र से ही उसे आर्म्स एक्ट के तहत दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि यह साबित न हो जाए कि आरोपी को उन हथियारों के बारे में जानकारी थी और उन पर उसका कंट्रोल था।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने एक आदिवासी व्यक्ति को बरी करने के फैसले को सही ठहराते हुए कहा,"हाईकोर्ट का यह कहना सही था कि प्रतिवादी/आरोपी के घर से हथियार समेत कुछ सामान मिलने मात्र से ही उसे अपराध का दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि...

नागरिकता तय करने की प्रक्रिया निष्पक्ष होनी चाहिए, केवल अनुपस्थिति के आधार पर किसी को विदेशी नहीं ठहराया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
नागरिकता तय करने की प्रक्रिया निष्पक्ष होनी चाहिए, केवल अनुपस्थिति के आधार पर किसी को विदेशी नहीं ठहराया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी व्यक्ति की नागरिकता या विदेशी होने का निर्धारण निष्पक्ष, कानूनी और उचित प्रक्रिया के तहत ही किया जाना चाहिए। अदालत ने गौहाटी हाईकोर्ट के उन फैसलों को रद्द कर दिया, जिनमें 27 लोगों को विदेशी घोषित करने वाले विदेशी न्यायाधिकरणों के आदेश बरकरार रखे गए थे।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि राज्य का यह वैध हित है कि कोई व्यक्ति अवैध रूप से भारतीय नागरिकता प्राप्त न करे, लेकिन यह उद्देश्य प्रक्रियात्मक निष्पक्षता की कीमत पर हासिल नहीं किया जा...