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लंबित सिविल मुकदमे में काम आने की दलील से तीसरे पक्ष की RTI सूचना नहीं मिल सकती: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि केवल यह कहना कि RTI Act के तहत मांगी गई जानकारी लंबित सिविल मुकदमे में मदद करेगी, तीसरे पक्ष से जुड़ी सूचना के खुलासे के लिए जरूरी बड़े सार्वजनिक हित को साबित नहीं करता।जस्टिस कीर्ति सिंह ने पंजाब राज्य सूचना आयोग के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें FIR से संबंधित सूचना देने से इनकार किया गया। कोर्ट ने कहा कि किसी लंबित मामले में कोई सूचना याचिकाकर्ता के लिए उपयोगी हो सकती है लेकिन केवल इस आधार पर निजी मुकदमे की जरूरत को RTI Act के तहत बड़े सार्वजनिक हित में...

कपिल सिब्बल ने 10वीं अनुसूची के तहत 'विलय' के मुद्दे पर फ़ैसला लेने में सुप्रीम कोर्ट की देरी पर उठाए सवाल
सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत विलय से जुड़े अपवाद (Merger Exception) पर बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच के 2022 के फ़ैसले की वैधता तय करने में सुप्रीम कोर्ट की देरी पर सवाल उठाए। उन्होंने चेतावनी दी कि मूल राजनीतिक पार्टी के विलय के बिना किसी विधायी पार्टी (legislature party) के विलय को मान्यता देने से "गड़बड़ी" (mischief) पैदा होगी।कोच्चि में 'हॉर्स ट्रेडिंग और लोकतंत्र' (Horse Trade and Democracy) पर ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन द्वारा आयोजित चर्चा में बोलते हुए सिब्बल ने...

Explained | यूपी जज रवि कुमार दिवाकर से जुड़े विवादों पर एक नज़र
उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर ज़िले में तैनात एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज रवि कुमार दिवाकर 7 सितंबर, 2026 को दिए गए फ़ैसले के बाद फिर से चर्चा में हैं। इस फ़ैसले में उन्होंने कहा कि "कायर जज कहलाने से बेहतर है कि मैं मर जाऊँ"।38 पेज के इस फ़ैसले में मुज़फ़्फ़रनगर के शाहपुर के रहने वाले नदीम को मौत की सज़ा सुनाई गई। नदीम पर अपनी 23 साल की पत्नी शहज़ादी पर केरोसिन डालकर उसे आग लगाने और उसकी हत्या करने का आरोप था। फ़ैसले में दर्ज है कि महिला का शरीर 98 प्रतिशत तक जल गया था।जज दिवाकर की ये बातें...

RTI Act: किसी तीसरे पक्ष की प्राइवेसी का मामला न हो तो बचाव के लिए मांगी गई जांच की जानकारी देने से मना नहीं किया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की बेंच ने कहा कि RTI Act की धारा 8(1)(c) और 8(1)(j) के तहत जानकारी देने से मना करना तब सही नहीं है, जब मांगी गई जानकारी याचिकाकर्ता की अपनी विभागीय जांच से जुड़ी हो और बचाव के लिए मांगी गई हो, और इसमें किसी तीसरे पक्ष की प्राइवेसी का मामला न हो।पृष्ठभूमि की जानकारीयाचिकाकर्ता जांजगीर के फैमिली कोर्ट में ड्राइवर के तौर पर काम कर रहा था। कुछ आरोपों के चलते याचिकाकर्ता के खिलाफ दो विभागीय जांच शुरू की गईं। उस पर गलत व्यवहार के सात आरोप लगाए गए।...

RTI Act के तहत सीधे CCTV फुटेज नहीं मांग सकता आवेदक, शिकायत पर कोर्ट या आयोग करा सकता है सुरक्षित: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) के तहत मांगा गया CCTV फुटेज यदि अधिनियम की धारा 8(1)(g) में दिए गए अपवाद के दायरे में आता है तो उसे सीधे RTI आवेदक को नहीं दिया जा सकता। हालांकि, आवेदक संबंधित अदालत या आयोग के समक्ष शिकायत कर सकता है, जहां जरूरत पड़ने पर CCTV फुटेज मंगाने और उसे सुरक्षित रखने का आदेश दिया जा सकता है।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अब्धेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए याचिका का निस्तारण किया।मामले में याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद...

इलाहाबाद हाईकोर्ट कैसे यूपी पुलिस के एनकाउंटर के दावों की पोल खोल रहा है?
आरोपी के पैरों में गोली मारने और एनकाउंटर की अलग से FIR दर्ज न करने या उसकी जांच न करने से लेकर इनाम और स्वतंत्र जांच पर उठने वाले सवालों तक इलाहाबाद हाईकोर्ट लगातार उत्तर प्रदेश की एनकाउंटर पुलिसिंग पर सवाल उठा रहा है।इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2026 में एनकाउंटर से जुड़े आदेशों में एक साफ़ पैटर्न दिखाई दे रहा है। कोर्ट पुलिस एनकाउंटर के होने पर सवाल नहीं उठा रहा है, और न ही आत्मरक्षा में बल प्रयोग करने के पुलिस के अधिकार को नकार रहा है।कोर्ट जो कर रहा है और जिस पर वह ज़ोर दे रहा है, वह यह है कि...

बार काउंसिल की भूमिका की जांच: पेशा, पढ़ाने का तरीका और दोहरी ज़िम्मेदारी
हाल ही में बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने NALSAR यूनिवर्सिटी के 2026 बैच पर पूरी तरह रोक लगाई, फिर एक घंटे के अंदर उसे वापस ले लिया और बाद में छात्रों से माफ़ी भी मांगी। इस विवाद के बाद अब एक बड़ी जांच की मांग उठ रही है। क्या हमें बार काउंसिल की ज़रूरत है? 1961 के एडवोकेट्स एक्ट के तहत बनी बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI) दो तरह के काम करती है: एक तरफ़ कानूनी पेशे को रेगुलेट और सुपरवाइज़ करना, और दूसरी तरफ़ कानूनी शिक्षा पर रेगुलेटरी कंट्रोल रखना। लेकिन कुप्रबंधन, हितों के टकराव, खराब परफॉर्मेंस और...

क्या हमारी संवैधानिक अदालतें नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा कर रही हैं?
हाल ही में जंतर-मंतर पर युवा भारतीयों के विरोध-प्रदर्शन और उसके बाद पुलिस की गैर-ज़रूरी और अन्यायपूर्ण कार्रवाई, जिसके कारण सच का पता लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़ा, ने देश में सभी का ध्यान खींचा है। इस पर गंभीर और गहरी बहस की ज़रूरत है।भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। इसके मौलिक लक्ष्य न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व हैं। इसका संविधान, जिसे संविधान सभा ने 9 दिसंबर 1946 से 25 नवंबर 1949 तक विचार-विमर्श के बाद अंतिम रूप दिया (संविधान के मसौदे पर 114 दिनों से ज़्यादा समय...

RTI Act के तहत छात्र द्वारा मांगी गई आंसर स्क्रिप्ट के लिए यूनिवर्सिटी कोई इंटरनल फ़ीस नहीं ले सकती: CIC
सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमीशन (CIC) ने कहा कि जब कोई छात्र सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act), 2005 के तहत जानकारी मांगता है तो यूनिवर्सिटी उसे आंसर स्क्रिप्ट की कॉपी देने के लिए कोई इंटरनल फ़ीस नहीं लगा सकती।इन्फॉर्मेशन कमिश्नर सुधा रानी रेलंगी, असम यूनिवर्सिटी से जुड़े पत्थरकांडी कॉलेज के एक छात्र की अपील पर सुनवाई कर रही थीं।छात्र ने 21 नवंबर, 2025 को RTI Act के तहत यूनिवर्सिटी से संपर्क किया और फ़िलॉसफ़ी पेपर की अपनी जांची हुई आंसर स्क्रिप्ट की फ़ोटोकॉपी मांगी। उसे 70 में से 35 अंक मिले थे और वह...

संवैधानिक लोकतंत्र में औपनिवेशिक पुलिस व्यवस्था
पिछले कुछ महीनों में देश में एक अहम बहस फिर से शुरू हो गई। राजधानी और दूसरी जगहों पर जो कुछ हुआ है, उसे देखकर हमें यह सोचना चाहिए कि क्या हमारी पुलिस व्यवस्था के तौर-तरीके उस संवैधानिक लोकतंत्र के अनुकूल हैं, जो हम आज बन चुके हैं। अब समय आ गया कि हम इस बात पर फिर से विचार करें कि क्या हमारी पुलिस व्यवस्था का मकसद मूल रूप से ज़बरदस्ती करना ही होना चाहिए। अगर हम गहराई से देखें तो समझ आता है कि भारतीय पुलिस व्यवस्था को मिली औपनिवेशिक विरासत की वजह से ही असहमति के प्रति संस्थागत प्रतिक्रिया में बल...

क्या BNS की धारा 67 वैवाहिक बलात्कार को मान्यता देने का कानूनी रास्ता है?
भारतीय आपराधिक कानून में सबसे ज़्यादा बहस वाले मुद्दों में से एक यह रहा है कि क्या शादी के अंदर बिना सहमति के यौन संबंध बनाना कानूनी कार्रवाई के दायरे में आता है या नहीं। कई संवैधानिक बदलावों के बावजूद, जिनमें अब गरिमा, निजता, शारीरिक अखंडता और निर्णय लेने की आज़ादी को मान्यता दी गई, भारतीय न्याय संहिता 2023 (BNS) में अभी भी वैवाहिक बलात्कार से जुड़ी छूट शामिल है। इसलिए बहस मुख्य रूप से दो विकल्पों पर केंद्रित रही है: कानून बनाने वाली संस्था के तौर पर संसद और संवैधानिक रूप से अमान्य करने वाली...

क्या 'संस्कृति' के आधार पर सरकारी कार्यक्रमों में धार्मिक रीति-रिवाजों को सही ठहराया जा सकता है? भूमि पूजन समारोहों की संवैधानिक दृष्टिकोण
भारत में सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के शिलान्यास या उद्घाटन समारोहों से पहले भूमि पूजन, हवन, नारियल फोड़ने, वैदिक मंत्रोच्चार और अन्य हिंदू धार्मिक रीति-रिवाजों में प्रधानमंत्री, न्यायाधीशों, मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों और मंत्रियों जैसे सरकारी और संवैधानिक पदाधिकारियों की भागीदारी इतनी आम हो गई है कि इस पर शायद ही कभी गंभीर संवैधानिक जांच होती है। चाहे राजमार्गों, पुलों, अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, विधायी भवनों, सरकारी कार्यालयों या यहां तक कि अदालती परिसरों की आधारशिला रखने का मामला हो, इन...

चुनाव नतीजे के बाद RTI सूचना न देना 'भ्रष्ट आचरण' नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद RTI आवेदन के जरिए मांगी गई सूचना उपलब्ध न कराना, उम्मीदवार के चुनावी prospects को आगे बढ़ाने के लिए सहायता प्राप्त करना नहीं माना जा सकता। इसलिए ऐसा कृत्य जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (RPA) की धारा 123(7) के तहत भ्रष्ट आचरण (corrupt practice) नहीं बनता।जस्टिस शर्मिला यू. देशमुख ने यह टिप्पणी 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से संबंधित एक चुनाव याचिका पर सुनवाई करते हुए की। अदालत के समक्ष Order VII Rule 11(a) CPC के तहत आवेदन दायर कर...

'प्रेस और न्यायपालिका, दोनों हमें निराश कर चुके हैं; लेकिन क्यों?' - कपिल सिब्बल
सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने हाल ही में कहा कि अगर लोकतंत्र के दो अहम स्तंभ न्यायपालिका और प्रेस सत्ता के गलत इस्तेमाल के आगे झुक जाते हैं तो इससे गणतंत्र अंदर से खोखला हो जाएगा। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका और मीडिया का काम नागरिकों को बहुमत की भावनाओं से बचाना है, लेकिन अगर एक संस्था खुद को बचाने की चिंता में लगी हो और दूसरी सरकार के पक्ष में नैरेटिव बनाने में व्यस्त हो तो लोकतंत्र नहीं बचेगा।सिब्बल 'प्रेम भाटिया मेमोरियल लेक्चर' में "लोकतंत्र के दो सबसे मजबूत स्तंभ प्रेस और न्यायपालिका हैं:...

क्या जस्टिस यशवंत वर्मा अभी भी इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज हैं?
बुधवार को लोकसभा की एक समिति ने जस्टिस यशवंत वर्मा को आरोपों के सभी मामलों में दोषी ठहराया। समिति ने पाया कि उनके सरकारी आवास पर बड़ी मात्रा में ऐसी नकदी मिली थी, जिसका कोई हिसाब-किताब नहीं था। हालांकि पुलिस जली हुई नकदी मिलने के बाद उसे सुरक्षित रखने में नाकाम रही, लेकिन जज ने इस बारे में गुमराह करने वाला और टालमटोल भरा जवाब दिया।जस्टिस वर्मा मार्च 2025 से ही विवादों में घिरे हुए थे, जब यह बात सामने आई कि दिल्ली में उनके सरकारी आवास के स्टोररूम में आग लगने की घटना के दौरान 500 रुपये के नोटों की...

भारत में महिलाओं के विधिक अधिकार: वास्तविकता और चुनौतियाँ
भारत में स्वतंत्रता के 79 साल बाद महिलाओं ने कानूनी रूप से एक बड़ी शक्ति अर्जित की है और आज वे पुरुषों के बराबर मानी जाती हैं। उनकी स्वतंत्रता को कायम रखने के लिए कानून में उन्हें कई अधिकार दिए गए हैं, जिनमें उनकी लाज (Modesty) और गरिमा (Dignity) भी शामिल है। यहाँ तक कि वे पुरुषों के साथ पूर्ण रूप से प्रतिस्पर्धा करने हेतु सक्षम हैं और कई क्षेत्रों में उन्हें पुरुषों से भी बेहतर माना जाने लगा है। समान स्वतंत्रता के अधिकार के साथ-साथ, उन्हें पारिवारिक संपत्ति में वे समस्त अधिकार दिए गए हैं जो एक...

यौन अपराधों में जेंडर से जुड़ी रूढ़िवादी सोच से निपटना: सुप्रीम कोर्ट की 2026 की गाइडलाइंस 2023 की हैंडबुक से कैसे अलग
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी (NJA) की एक्सपर्ट कमेटी ने हाल ही में जजों के लिए जेंडर-सेंसिटिव (लिंग-संवेदनशील), सर्वाइवर-सेंट्रिक (पीड़ित-केंद्रित) और सहानुभूतिपूर्ण कोर्ट प्रैक्टिस अपनाने के लिए कुछ गाइडलाइंस जारी कीं।ये गाइडलाइंस सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अनिरुद्ध बोस की अध्यक्षता वाली कमेटी ने तैयार की हैं। यह कदम तब उठाया गया, जब चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि टॉप कोर्ट की 2023 की 'जेंडर स्टीरियोटाइप्स से निपटने पर...

RTI आवेदक को जानकारी की भाषा नहीं आती तो रिकॉर्ड देखने के लिए 'तीसरे पक्ष' को साथ नहीं ले जा सकता: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि अगर कोई RTI आवेदक किसी जानकारी को मांग रहा है और उसे उस जानकारी की भाषा या उसमें दी गई बातों की समझ नहीं है तो रिकॉर्ड की जांच के दौरान आवेदक के साथ किसी दूसरे व्यक्ति को ले जाने की अनुमति देना, पहली नज़र में किसी तीसरे पक्ष को जानकारी देने जैसा होगा।ऐसा करते हुए कोर्ट ने RTI आवेदक को उन रिकॉर्ड्स को देखने की अनुमति दी, जिनकी उसने मांग की थी, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि जांच के दौरान आवेदक के साथ किसी और को जाने की अनुमति नहीं होगी।आरोप था कि...

पुलिस का काम भीड़ को हटाना है, न कि प्रदर्शनकारियों को सज़ा देना
20 जुलाई, 2026 को कई ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर छात्रों के 'चलो संसद' मार्च के वीडियो और क्लिप सामने आए। हालांकि नई दिल्ली में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत एक कार्यकारी आदेश लागू था - जिसमें लोगों को सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ खास कामों से दूर रहने का निर्देश दिया गया - लेकिन छात्रों के खिलाफ पुलिस की बर्बर कार्रवाई हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या यह सही था। भले ही यह कहा जाए कि छात्रों ने आदेश का उल्लंघन किया, लेकिन क्या आंसू गैस, लाठी, छर्रों (पेलेट्स)...

जजों के वेतन का ब्योरा RTI Act से बाहर नहीं, नागरिकों को जानकारी देने से इनकार नहीं किया जा सकता: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि जजों के वेतनमान और वेतन संबंधी जानकारी सूचना का अधिकार (RTI Act) अधिनियम की धारा 8 के तहत गोपनीय जानकारी नहीं है। चूंकि जजों का वेतन भारत की संचित निधि से दिया जाता है, इसलिए नागरिकों को इसकी जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है।जस्टिस एम. धंडपानी ने कहा,"जजों का वेतन भारत की संचित निधि से दिया जाता है। यह सार्वजनिक धन है, इसलिए भारत का कोई भी नागरिक उनके वेतन संबंधी जानकारी जानने से वंचित नहीं किया जा सकता। यह RTI Act की धारा 8 के तहत अपवाद की...
