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यौन अपराधों में जेंडर से जुड़ी रूढ़िवादी सोच से निपटना: सुप्रीम कोर्ट की 2026 की गाइडलाइंस 2023 की हैंडबुक से कैसे अलग
यौन अपराधों में जेंडर से जुड़ी रूढ़िवादी सोच से निपटना: सुप्रीम कोर्ट की 2026 की गाइडलाइंस 2023 की हैंडबुक से कैसे अलग

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी (NJA) की एक्सपर्ट कमेटी ने हाल ही में जजों के लिए जेंडर-सेंसिटिव (लिंग-संवेदनशील), सर्वाइवर-सेंट्रिक (पीड़ित-केंद्रित) और सहानुभूतिपूर्ण कोर्ट प्रैक्टिस अपनाने के लिए कुछ गाइडलाइंस जारी कीं।ये गाइडलाइंस सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अनिरुद्ध बोस की अध्यक्षता वाली कमेटी ने तैयार की हैं। यह कदम तब उठाया गया, जब चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि टॉप कोर्ट की 2023 की 'जेंडर स्टीरियोटाइप्स से निपटने पर...

RTI आवेदक को जानकारी की भाषा नहीं आती तो रिकॉर्ड देखने के लिए तीसरे पक्ष को साथ नहीं ले जा सकता: गुजरात हाईकोर्ट
RTI आवेदक को जानकारी की भाषा नहीं आती तो रिकॉर्ड देखने के लिए 'तीसरे पक्ष' को साथ नहीं ले जा सकता: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि अगर कोई RTI आवेदक किसी जानकारी को मांग रहा है और उसे उस जानकारी की भाषा या उसमें दी गई बातों की समझ नहीं है तो रिकॉर्ड की जांच के दौरान आवेदक के साथ किसी दूसरे व्यक्ति को ले जाने की अनुमति देना, पहली नज़र में किसी तीसरे पक्ष को जानकारी देने जैसा होगा।ऐसा करते हुए कोर्ट ने RTI आवेदक को उन रिकॉर्ड्स को देखने की अनुमति दी, जिनकी उसने मांग की थी, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि जांच के दौरान आवेदक के साथ किसी और को जाने की अनुमति नहीं होगी।आरोप था कि...

जजों के वेतन का ब्योरा RTI Act से बाहर नहीं, नागरिकों को जानकारी देने से इनकार नहीं किया जा सकता: मद्रास हाईकोर्ट
जजों के वेतन का ब्योरा RTI Act से बाहर नहीं, नागरिकों को जानकारी देने से इनकार नहीं किया जा सकता: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि जजों के वेतनमान और वेतन संबंधी जानकारी सूचना का अधिकार (RTI Act) अधिनियम की धारा 8 के तहत गोपनीय जानकारी नहीं है। चूंकि जजों का वेतन भारत की संचित निधि से दिया जाता है, इसलिए नागरिकों को इसकी जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है।जस्टिस एम. धंडपानी ने कहा,"जजों का वेतन भारत की संचित निधि से दिया जाता है। यह सार्वजनिक धन है, इसलिए भारत का कोई भी नागरिक उनके वेतन संबंधी जानकारी जानने से वंचित नहीं किया जा सकता। यह RTI Act की धारा 8 के तहत अपवाद की...

कोर्ट ने नई पीढ़ी को निराश किया है: सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दवे ने सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर उठाए सवाल
कोर्ट ने नई पीढ़ी को निराश किया है: सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दवे ने सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दवे ने एक लेख में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि अदालत ने नई पीढ़ी को निराश किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत ने कथित पुलिस कार्रवाई का सामना कर रहे छात्रों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।दवे ने लिखा कि संविधान का अनुच्छेद 32 सुप्रीम कोर्ट को नागरिकों के मौलिक अधिकारों का संरक्षक बनाता है। उन्होंने संविधान सभा में डॉ. भीमराव आंबेडकर के उस वक्तव्य का उल्लेख किया,...

RTI Act | धारा 5 की शर्तें पूरी किए बिना फर्स्ट अपीलेट अथॉरिटी को डीम्ड पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर नहीं माना जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
RTI Act | धारा 5 की शर्तें पूरी किए बिना 'फर्स्ट अपीलेट अथॉरिटी' को 'डीम्ड पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर' नहीं माना जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act) के तहत 'फर्स्ट अपीलेट अथॉरिटी' (प्रथम अपीलीय प्राधिकारी) को धारा 5(4) और 5(5) में बताई गई कानूनी शर्तों को पूरा किए बिना 'डीम्ड पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर' (मानित जन सूचना अधिकारी) नहीं माना जा सकता और न ही उन पर अधिनियम की धारा 20(1) के तहत जुर्माना लगाया जा सकता है। कोर्ट ने पाया कि राज्य सूचना आयोग ने ज़रूरी निष्कर्ष दर्ज किए बिना ही जुर्माना लगा दिया था। [2026 LiveLaw (Chh) 75]जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद 'फर्स्ट अपीलेट...

RTI Act | सुनवाई का अवसर दिए बिना सूचना अधिकारी पर जुर्माना नहीं लगाया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
RTI Act | सुनवाई का अवसर दिए बिना सूचना अधिकारी पर जुर्माना नहीं लगाया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act), 2005 की धारा 20 के तहत सूचना देने में देरी पर लोक सूचना अधिकारी (PIO) पर जुर्माना लगाने से पहले उसे सुनवाई का उचित अवसर देना अनिवार्य है। अदालत ने कहा कि केवल बिना आधार के राय बनाकर दंड नहीं लगाया जा सकता, बल्कि उपलब्ध अभिलेखों और तथ्यों के आधार पर विधिसम्मत राय बनाना आवश्यक है।यह फैसला जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने सुनाया।मामले में याचिकाकर्ता एक खंड शिक्षा अधिकारी होने के...

पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं कहना बेतुका, अगर आप भारत में रह रहे हैं तो यह माना जाता है कि आप भारतीय हैं: जस्टिस धूलिया
'पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं' कहना बेतुका, अगर आप भारत में रह रहे हैं तो यह माना जाता है कि आप भारतीय हैं: जस्टिस धूलिया

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज, जस्टिस सुधांशु धूलिया ने वोटर रोल के चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बारे में गंभीर सवाल उठाए और नागरिकता के डॉक्यूमेंटेशन और लोकल चुनाव अधिकारियों को मिली ताकत के आसपास की "बाहर निकालने वाली पॉलिटिक्स" पर चिंता जताई।"दिल से विद कपिल सिब्बल" एपिसोड में बोलते हुए, जस्टिस धूलिया ने तर्क दिया कि मौजूदा प्रोसेस नागरिकों पर सबूत का गलत बोझ डालता है, जिससे वोट देने का मौलिक अधिकार खतरे में पड़ता है। उनकी यह टिप्पणी इस गरमागरम बहस के बीच आई है कि क्या पासपोर्ट नागरिकता...

लोक सूचना अधिकारी पर जुर्माना लगाने से पहले अलग नोटिस देना अनिवार्य, अपील का नोटिस पर्याप्त नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
लोक सूचना अधिकारी पर जुर्माना लगाने से पहले अलग नोटिस देना अनिवार्य, अपील का नोटिस पर्याप्त नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act) के तहत किसी लोक सूचना अधिकारी पर जुर्माना लगाने से पहले राज्य सूचना आयोग के लिए धारा 20(1) के तहत अलग से नोटिस जारी करना और सुनवाई का उचित अवसर देना अनिवार्य है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अपील की कार्यवाही के दौरान जारी नोटिस को अंतिम नोटिस मानकर सीधे जुर्माना नहीं लगाया जा सकता।जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद एक लोक सूचना अधिकारी की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। याचिका में छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के उस...

PMLA की शक्तियां खुला सरकारी आतंकवाद: दुष्यंत दवे, Interview में कहा- लोगों के अधिकारों के उल्लंघन के बावजूद जज मूकदर्शक बने रहते हैं
PMLA की शक्तियां 'खुला सरकारी आतंकवाद': दुष्यंत दवे, Interview में कहा- लोगों के अधिकारों के उल्लंघन के बावजूद जज मूकदर्शक बने रहते हैं

सीनियर एडवोकेट कपिल सिबल के साथ एक इंटरव्यू में सिस्टम की कमियों से निराश होकर वकालत छोड़ देने वाले पूर्व सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दवे ने हाल ही में 'प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA) के तहत मिली शक्तियों की तुलना "खुले सरकारी आतंकवाद" से की।उन्होंने अफ़सोस जताया कि कानून के तहत लोगों के अधिकारों के साफ़ उल्लंघन के बावजूद, आज के जज "मूकदर्शक" बने रहते हैं और सही आदेश पारित करने में नाकाम रहते हैं।दवे ने कहा,"आज एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) के पास जिस तरह की शक्तियां हैं, वे चौंकाने वाली...

कॉलेजियम सिस्टम पूरी तरह से नाकाम रहा: दुष्यंत दवे; सिब्बल को सेकंड जजेज़ केस में पेश होने का अफ़सोस
कॉलेजियम सिस्टम पूरी तरह से नाकाम रहा: दुष्यंत दवे; सिब्बल को 'सेकंड जजेज़ केस' में पेश होने का अफ़सोस

'दिल से विद कपिल सिब्बल' शो के एक इंटरव्यू में वकालत छोड़ देने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व सीनियर वकील दुष्यंत दवे ने हाल ही में कहा कि जजों की नियुक्ति का कॉलेजियम सिस्टम पूरी तरह से नाकाम रहा है।दवे का मानना ​​है कि पिछले कुछ सालों में जज "नागरिक-विरोधी" हो गए हैं और संविधान के मूल स्वरूप से उनका संपर्क टूट गया। उनके अनुसार, हाल के जजों ने अपने फैसलों में संविधान सभा की बहसों की सही समझ नहीं दिखाई और इसका एक कारण नियुक्ति की प्रक्रिया है।दवे ने कहा,"इसमें कोई शक नहीं कि इसका संबंध जजों की...

RTI अपीलों के निस्तारण के लिए 45 दिन की समयसीमा तय करने से हाईकोर्ट का इनकार, CIC को लंबित मामलों के समाधान की व्यवस्था सुधारने का निर्देश
RTI अपीलों के निस्तारण के लिए 45 दिन की समयसीमा तय करने से हाईकोर्ट का इनकार, CIC को लंबित मामलों के समाधान की व्यवस्था सुधारने का निर्देश

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) को सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) के तहत दूसरी अपीलों का निस्तारण 45 दिनों के भीतर करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया।अदालत ने कहा कि RTI Act, 2005 में दूसरी अपीलों और शिकायतों के निस्तारण के लिए कोई वैधानिक समयसीमा निर्धारित नहीं है, इसलिए अदालत ऐसी समयसीमा तय नहीं कर सकती। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आयोग अपीलों को वर्षों तक लंबित नहीं रख सकता। उसे लंबित मामलों का बोझ कम करने और नए मामलों के शीघ्र निस्तारण के...

स्टेन स्वामी की कस्टडी में मौत को 5 साल: कोई सबक नहीं सीखा गया, UAPA के गलत प्रयोग पर चिंता बरकरार
स्टेन स्वामी की कस्टडी में मौत को 5 साल: कोई सबक नहीं सीखा गया, UAPA के गलत प्रयोग पर चिंता बरकरार

भीमा कोरेगांव मामले में कस्टडी के दौरान फादर स्टेन स्वामी की मौत को पांच साल हो चुके हैं। हमें अब भी नहीं पता कि उन्होंने क्या अपराध किया था, सिवाय नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) के बढ़ा-चढ़ाकर लगाए गए उन आरोपों के, जिन पर बाद में खुद अदालतों ने कई सह-आरोपियों को ज़मानत देते समय शक और सवाल उठाए।अगर कथित अपराध इतना गंभीर था कि उससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता था, तो उम्मीद की जाती कि मुक़दमे की सुनवाई तेज़ी से होगी। हालांकि, सुनवाई में कोई तेज़ी नहीं दिख रही है; यह बहुत धीमी गति से चल रही...

WhatsApp से नोटिस भेजना कानूनी रूप से मान्य नहीं: BNSS की धारा 35 और अनौपचारिक इलेक्ट्रॉनिक नोटिस की सीमाएं
WhatsApp से नोटिस भेजना कानूनी रूप से मान्य नहीं: BNSS की धारा 35 और अनौपचारिक इलेक्ट्रॉनिक नोटिस की सीमाएं

क्या होता है जब किसी व्यक्ति को इसलिए गिरफ्तार कर लिया जाता है, क्योंकि उसने कोर्ट द्वारा भेजे गए नोटिस का पालन नहीं किया, जबकि उसे वह नोटिस मिला ही नहीं था (इसके विपरीत, कोर्ट द्वारा वारंट तामील करने की प्रक्रिया अलग होती है)? यही मुद्दा सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम CBI मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मुख्य आधार है।जब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) लागू हुई तो कई पुलिस अधिकारियों ने धारा 35 के तहत नोटिस भेजने के लिए WhatsApp और ईमेल का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। इस तरीके के पीछे की...