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CJI चंद्रचूड़ ने मुझसे PMLA मामले में 'बीच का रास्ता' अपनाने को कहा था; जजों की नियुक्ति से जुड़े मामले से मुझे हटाने का दबाव था: जस्टिस कौल
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस संजय किशन कौल ने बताया कि तत्कालीन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डी.वाई. चंद्रचूड़ ने उनसे 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA) के मुख्य प्रावधानों को बरकरार रखने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार की याचिकाओं के मामले में "बीच का रास्ता" अपनाने को कहा था।एक और खुलासा करते हुए जस्टिस कौल ने बताया कि जजों की नियुक्ति में देरी से जुड़ा मामला उनकी बेंच से तब हटा लिया गया था, जब वे केंद्र सरकार पर कॉलेजियम की लंबित सिफारिशों पर कार्रवाई करने के लिए जोर डाल...

पुलिस जब मजिस्ट्रेट बन जाए: 'स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट' का अजीबोगरीब मामला
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरभ दास और आशुतोष रांका की हिरासत से जुड़ी कार्यवाही ने ऐसी अजीबोगरीब बात सामने ला दी, जिसके बारे में शायद कानूनी हलकों के बाहर बहुत कम लोग जानते हैं या चर्चा करते हैं - वह यह कि पुलिस अधिकारी 'स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट' (विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट) के रूप में काम करते हैं।दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 70 के तहत जारी एक अधिसूचना के जरिए दिल्ली पुलिस कमिश्नर, अतिरिक्त कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर, एडिशनल डिप्टी कमिश्नर और असिस्टेंट कमिश्नर को 'एग्जीक्यूटिव...

IAF विमान में प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं के रिकॉर्ड RTI के दायरे से बाहर: दिल्ली हाईकोर्ट ने CIC का आदेश रद्द किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय वायु सेना (IAF) के विमान में भारत के प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं से जुड़े 'स्पेशल फ्लाइट रिटर्न्स' (SFR-II) के विवरण को 'सूचना का अधिकार' अधिनियम (RTI Act) के तहत सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, यदि ऐसा करने से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो या प्रधानमंत्री के जीवन और शारीरिक सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा हो।जस्टिस अमित महाजन ने कहा कि केवल सुरक्षा कर्मियों के नाम और उनकी पहचान से जुड़ी जानकारी को हटा देने से, इन रिकॉर्ड्स को सार्वजनिक करने से पैदा होने वाले सुरक्षा...

सुप्रीम कोर्ट को SIR को सही ठहराने वाले अपने फैसले पर फिर से विचार करना चाहिए: जस्टिस अभय ओक
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अभय ओक ने कहा कि यह प्रक्रिया ऐसे मतदाताओं के नाम हटाने की अनुमति देती है, जिन्होंने केवल 'प्री-फिल्ड एन्यूमरेशन फॉर्म' (पहले से भरे हुए डेटा फॉर्म) जमा नहीं किए।मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने बताया कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच द्वारा दिए गए मई 2026 के फैसले में, 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' (Representation of the People Act, 1950) की धारा 21(3) के तहत सभी निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में एक...

भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़ी जानकारी RTI Act के तहत देने से इनकार नहीं किया जा सकता: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा है कि सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) को सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) के तहत मिली छूट का इस्तेमाल भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन से संबंधित जानकारी रोकने के लिए नहीं किया जा सकता।जस्टिस हेमंत चंदनगौदर ने स्पष्ट किया कि RTI अधिनियम की धारा 24(4) के तहत किसी विभाग को छूट दिए जाने के बावजूद, भ्रष्टाचार के आरोपों और मानवाधिकार उल्लंघन से संबंधित जानकारी इस छूट के दायरे से बाहर रहती है।अदालत ने यह भी कहा कि DVAC मैनुअल के नियम 29 के तहत जांच संबंधी जानकारी...

SIR मामले में ECI ने ग़लत तथ्य पेश करके सुप्रीम कोर्ट के साथ की धोखाधड़ी, फैसला वापस लिया जाना चाहिए: पूर्व एससी जज गोपाला गौड़ा
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस वी. गोपाला गौड़ा ने कहा कि वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) को कराने के चुनाव आयोग (ECI) के फ़ैसले को सही ठहराने वाले सुप्रीम कोर्ट के मई 2026 के फ़ैसले को वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह फ़ैसला चुनाव आयोग द्वारा कोर्ट को गुमराह करने और तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने का नतीजा है।'लाइव लॉ' (LiveLaw) से बातचीत में जस्टिस गौड़ा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को खुद से (suo motu) इस फ़ैसले को वापस लेना चाहिए और चुनाव आयोग से सभी रिकॉर्ड मंगाने चाहिए।...

CEC की नियुक्ति के मामले पर फ़ैसला लेने में सुप्रीम कोर्ट की 2 साल से ज़्यादा की देरी की कीमत
29 सितंबर को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की सुप्रीम कोर्ट बेंच ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को एक बड़ी बेंच के पास भेज दिया।जहाँ जस्टिस दत्ता का मानना था कि बड़ी बेंच को मामला भेजने की केंद्र सरकार की मांग ज़रूरी नहीं थी, वहीं जस्टिस शर्मा की राय अलग थी। बाद में इस मामले की सुनवाई करने वाले जस्टिस शर्मा की निष्पक्षता पर सवाल उठे, क्योंकि पता चला कि उनके बेटे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में...

जजों के बच्चों को सरकार या सरकारी एजेंसियों के वकील के तौर पर नियुक्त नहीं होना चाहिए: जस्टिस ओक
मौजूदा जजों के बच्चों की सरकारी वकील के तौर पर नियुक्ति को लेकर हालिया विवादों ने न्यायिक मर्यादा और हितों के टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ़ इंटरेस्ट) के मुद्दे को चर्चा में ला दिया। यह बात सामने आने पर सवाल उठे कि जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा के बेटे को भारत के चुनाव आयोग के वकील के तौर पर पैनल में शामिल किया गया; क्योंकि यह तथ्य तब सामने आया जब जज ने 'मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त अधिनियम' की वैधता से जुड़े मामलों और मुख्य चुनाव आयुक्त की बेटी मेधा रूपम से जुड़े एक मामले की सुनवाई कर ली थी।इससे पहले,...

CAPF अवमानना मामला दूसरी बेंच को सौंपने से 'मास्टर ऑफ़ रोस्टर' की शक्तियों पर सवाल उठे हैं? दुष्यंत दवे
'मास्टर ऑफ़ रोस्टर' यानी चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने फिर से ऐसा कदम उठाया है, जो उनकी तय शक्तियों से परे है और जिससे न्याय में बाधा पड़ने का संकेत मिलता है।CJI ने कथित तौर पर 29 सितंबर को एक प्रशासनिक आदेश जारी किया, जिसमें जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की विशेष बेंच बनाई गई। इस बेंच को 30 सितंबर को CA 13106/2024 में अवमानना याचिका 37/2026 पर सुनवाई करनी है।ऐसा करके CJI ने सीधे तौर पर जस्टिस भुइयां और जस्टिस चंदुरकर की बेंच द्वारा 29 सितंबर को ही पारित न्यायिक आदेश में दखल...

क्या है फॉर्म 6? जिसके बारे में ECI ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस नए फ़ॉर्म डिक्लेरेशन को मंज़ूरी दी
स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) प्रोसेस के दौरान फ़ॉर्म 6 [जिसका इस्तेमाल नए वोटर्स को शामिल करने के लिए किया जाता है] में किए गए बदलावों पर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति के बाद विवाद खड़ा हो गया। इसके बाद भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने कल एक प्रेस बयान जारी करके नए वोटर्स के लिए डिक्लेरेशन फ़ॉर्म शामिल करने के अपने फ़ैसले को सही ठहराने की कोशिश की, जो फ़ॉर्म 6 के ज़रिए एनरोलमेंट चाहते हैं।ECI ने कहा कि SIR के लिए फ़ॉर्म 6 के साथ जोड़े गए डिक्लेरेशन को सुप्रीम कोर्ट ने बिहार SIR से जुड़े अपने मई के...

लंबित सिविल मुकदमे में काम आने की दलील से तीसरे पक्ष की RTI सूचना नहीं मिल सकती: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि केवल यह कहना कि RTI Act के तहत मांगी गई जानकारी लंबित सिविल मुकदमे में मदद करेगी, तीसरे पक्ष से जुड़ी सूचना के खुलासे के लिए जरूरी बड़े सार्वजनिक हित को साबित नहीं करता।जस्टिस कीर्ति सिंह ने पंजाब राज्य सूचना आयोग के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें FIR से संबंधित सूचना देने से इनकार किया गया। कोर्ट ने कहा कि किसी लंबित मामले में कोई सूचना याचिकाकर्ता के लिए उपयोगी हो सकती है लेकिन केवल इस आधार पर निजी मुकदमे की जरूरत को RTI Act के तहत बड़े सार्वजनिक हित में...

कपिल सिब्बल ने 10वीं अनुसूची के तहत 'विलय' के मुद्दे पर फ़ैसला लेने में सुप्रीम कोर्ट की देरी पर उठाए सवाल
सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत विलय से जुड़े अपवाद (Merger Exception) पर बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच के 2022 के फ़ैसले की वैधता तय करने में सुप्रीम कोर्ट की देरी पर सवाल उठाए। उन्होंने चेतावनी दी कि मूल राजनीतिक पार्टी के विलय के बिना किसी विधायी पार्टी (legislature party) के विलय को मान्यता देने से "गड़बड़ी" (mischief) पैदा होगी।कोच्चि में 'हॉर्स ट्रेडिंग और लोकतंत्र' (Horse Trade and Democracy) पर ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन द्वारा आयोजित चर्चा में बोलते हुए सिब्बल ने...

Explained | यूपी जज रवि कुमार दिवाकर से जुड़े विवादों पर एक नज़र
उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर ज़िले में तैनात एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज रवि कुमार दिवाकर 7 सितंबर, 2026 को दिए गए फ़ैसले के बाद फिर से चर्चा में हैं। इस फ़ैसले में उन्होंने कहा कि "कायर जज कहलाने से बेहतर है कि मैं मर जाऊँ"।38 पेज के इस फ़ैसले में मुज़फ़्फ़रनगर के शाहपुर के रहने वाले नदीम को मौत की सज़ा सुनाई गई। नदीम पर अपनी 23 साल की पत्नी शहज़ादी पर केरोसिन डालकर उसे आग लगाने और उसकी हत्या करने का आरोप था। फ़ैसले में दर्ज है कि महिला का शरीर 98 प्रतिशत तक जल गया था।जज दिवाकर की ये बातें...

RTI Act: किसी तीसरे पक्ष की प्राइवेसी का मामला न हो तो बचाव के लिए मांगी गई जांच की जानकारी देने से मना नहीं किया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की बेंच ने कहा कि RTI Act की धारा 8(1)(c) और 8(1)(j) के तहत जानकारी देने से मना करना तब सही नहीं है, जब मांगी गई जानकारी याचिकाकर्ता की अपनी विभागीय जांच से जुड़ी हो और बचाव के लिए मांगी गई हो, और इसमें किसी तीसरे पक्ष की प्राइवेसी का मामला न हो।पृष्ठभूमि की जानकारीयाचिकाकर्ता जांजगीर के फैमिली कोर्ट में ड्राइवर के तौर पर काम कर रहा था। कुछ आरोपों के चलते याचिकाकर्ता के खिलाफ दो विभागीय जांच शुरू की गईं। उस पर गलत व्यवहार के सात आरोप लगाए गए।...

RTI Act के तहत सीधे CCTV फुटेज नहीं मांग सकता आवेदक, शिकायत पर कोर्ट या आयोग करा सकता है सुरक्षित: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) के तहत मांगा गया CCTV फुटेज यदि अधिनियम की धारा 8(1)(g) में दिए गए अपवाद के दायरे में आता है तो उसे सीधे RTI आवेदक को नहीं दिया जा सकता। हालांकि, आवेदक संबंधित अदालत या आयोग के समक्ष शिकायत कर सकता है, जहां जरूरत पड़ने पर CCTV फुटेज मंगाने और उसे सुरक्षित रखने का आदेश दिया जा सकता है।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अब्धेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए याचिका का निस्तारण किया।मामले में याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद...

इलाहाबाद हाईकोर्ट कैसे यूपी पुलिस के एनकाउंटर के दावों की पोल खोल रहा है?
आरोपी के पैरों में गोली मारने और एनकाउंटर की अलग से FIR दर्ज न करने या उसकी जांच न करने से लेकर इनाम और स्वतंत्र जांच पर उठने वाले सवालों तक इलाहाबाद हाईकोर्ट लगातार उत्तर प्रदेश की एनकाउंटर पुलिसिंग पर सवाल उठा रहा है।इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2026 में एनकाउंटर से जुड़े आदेशों में एक साफ़ पैटर्न दिखाई दे रहा है। कोर्ट पुलिस एनकाउंटर के होने पर सवाल नहीं उठा रहा है, और न ही आत्मरक्षा में बल प्रयोग करने के पुलिस के अधिकार को नकार रहा है।कोर्ट जो कर रहा है और जिस पर वह ज़ोर दे रहा है, वह यह है कि...

बार काउंसिल की भूमिका की जांच: पेशा, पढ़ाने का तरीका और दोहरी ज़िम्मेदारी
हाल ही में बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने NALSAR यूनिवर्सिटी के 2026 बैच पर पूरी तरह रोक लगाई, फिर एक घंटे के अंदर उसे वापस ले लिया और बाद में छात्रों से माफ़ी भी मांगी। इस विवाद के बाद अब एक बड़ी जांच की मांग उठ रही है। क्या हमें बार काउंसिल की ज़रूरत है? 1961 के एडवोकेट्स एक्ट के तहत बनी बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI) दो तरह के काम करती है: एक तरफ़ कानूनी पेशे को रेगुलेट और सुपरवाइज़ करना, और दूसरी तरफ़ कानूनी शिक्षा पर रेगुलेटरी कंट्रोल रखना। लेकिन कुप्रबंधन, हितों के टकराव, खराब परफॉर्मेंस और...

क्या हमारी संवैधानिक अदालतें नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा कर रही हैं?
हाल ही में जंतर-मंतर पर युवा भारतीयों के विरोध-प्रदर्शन और उसके बाद पुलिस की गैर-ज़रूरी और अन्यायपूर्ण कार्रवाई, जिसके कारण सच का पता लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़ा, ने देश में सभी का ध्यान खींचा है। इस पर गंभीर और गहरी बहस की ज़रूरत है।भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। इसके मौलिक लक्ष्य न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व हैं। इसका संविधान, जिसे संविधान सभा ने 9 दिसंबर 1946 से 25 नवंबर 1949 तक विचार-विमर्श के बाद अंतिम रूप दिया (संविधान के मसौदे पर 114 दिनों से ज़्यादा समय...

RTI Act के तहत छात्र द्वारा मांगी गई आंसर स्क्रिप्ट के लिए यूनिवर्सिटी कोई इंटरनल फ़ीस नहीं ले सकती: CIC
सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमीशन (CIC) ने कहा कि जब कोई छात्र सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act), 2005 के तहत जानकारी मांगता है तो यूनिवर्सिटी उसे आंसर स्क्रिप्ट की कॉपी देने के लिए कोई इंटरनल फ़ीस नहीं लगा सकती।इन्फॉर्मेशन कमिश्नर सुधा रानी रेलंगी, असम यूनिवर्सिटी से जुड़े पत्थरकांडी कॉलेज के एक छात्र की अपील पर सुनवाई कर रही थीं।छात्र ने 21 नवंबर, 2025 को RTI Act के तहत यूनिवर्सिटी से संपर्क किया और फ़िलॉसफ़ी पेपर की अपनी जांची हुई आंसर स्क्रिप्ट की फ़ोटोकॉपी मांगी। उसे 70 में से 35 अंक मिले थे और वह...

संवैधानिक लोकतंत्र में औपनिवेशिक पुलिस व्यवस्था
पिछले कुछ महीनों में देश में एक अहम बहस फिर से शुरू हो गई। राजधानी और दूसरी जगहों पर जो कुछ हुआ है, उसे देखकर हमें यह सोचना चाहिए कि क्या हमारी पुलिस व्यवस्था के तौर-तरीके उस संवैधानिक लोकतंत्र के अनुकूल हैं, जो हम आज बन चुके हैं। अब समय आ गया कि हम इस बात पर फिर से विचार करें कि क्या हमारी पुलिस व्यवस्था का मकसद मूल रूप से ज़बरदस्ती करना ही होना चाहिए। अगर हम गहराई से देखें तो समझ आता है कि भारतीय पुलिस व्यवस्था को मिली औपनिवेशिक विरासत की वजह से ही असहमति के प्रति संस्थागत प्रतिक्रिया में बल...
