झारखंड हाईकोट
झारखंड हाईकोर्ट ने सरकारी वकील की बर्खास्तगी के खिलाफ याचिका खारिज की, कहा- पद से सम्मानजनक इस्तीफ़ा अपेक्षित
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि जब सरकार किसी सरकारी वकील की सेवा समाप्त करती है तो रिट कार्यवाही के ज़रिए "हाथ से निकले केस" (lost briefs) के पीछे भागने के बजाय "पद से सम्मानजनक इस्तीफ़ा" देना ही उचित प्रतिक्रिया है।जस्टिस दीपक रोशन की सिंगल जज बेंच ने यह टिप्पणी तब की, जब वह अधिकारियों द्वारा अपनी सेवा समाप्ति को चुनौती देने वाली पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की याचिका खारिज कर रहे थे।कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें 8 जुलाई, 2026 का वह आदेश रद्द करने की मांग की गई, जिसके तहत याचिकाकर्ता की पब्लिक...
लंबे समय से अलग-अलग कब्जा और मौखिक साक्ष्य से साबित हो सकता है मौखिक बंटवारा: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि संयुक्त परिवार की संपत्ति का मौखिक बंटवारा लिखित दस्तावेज के अभाव में भी मौखिक साक्ष्य और लंबे समय से चले आ रहे अलग-अलग कब्जे के आधार पर साबित किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि यदि पक्षकार कई दशकों से अपने-अपने हिस्से की संपत्ति पर अलग-अलग कब्जा रखते हुए उसका उपयोग और उपभोग कर रहे हैं तो मौखिक बंटवारे को स्वीकार किया जा सकता है।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी ने यह टिप्पणी रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए की। याचिका में संताल परगना प्रमंडल, दुमका के आयुक्त द्वारा 6 जुलाई 2007 को...
शादी से इनकार करने पर 7 साल के आपसी सहमति वाले रिश्ते को रेप नहीं माना जा सकता: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि अगर दो बालिगों के बीच सात साल से ज़्यादा समय तक शारीरिक संबंध रहे हों, और इस बात का कोई ठोस आरोप न हो कि शादी का वादा करते समय पुरुष का इरादा शादी करने का नहीं था, तो ऐसे आरोपों से ज़्यादा से ज़्यादा आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंध का ही पता चलता है; इसे शादी के झूठे वादे पर रेप नहीं माना जा सकता।जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की सिंगल बेंच ने यह टिप्पणी तब की, जब वह भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(2)(n) के तहत रेप के आरोपी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही (जिसमें FIR और...
रजिस्टर्ड सेल डीड से भी आदिवासी जमीन का अवैध हस्तांतरण वैध नहीं हो सकता: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908 की धारा 46(1) का उल्लंघन कर किया गया आदिवासी जमीन का हस्तांतरण केवल इस आधार पर वैध नहीं हो सकता कि उसके लिए रजिस्टर्ड सेल डीड तैयार की गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून द्वारा प्रतिबंधित लेनदेन को रजिस्टर्ड सेल डीड वैधता प्रदान नहीं कर सकती।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी ने यह टिप्पणी हजारीबाग के तत्कालीन उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के आयुक्त की ओर से 10 मई 2013 को पारित आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए की। आयुक्त ने...
मेडिकल कॉलेज को दी गई फीस को IPC की धारा 406 के तहत 'सौंपी गई संपत्ति' नहीं माना जा सकता: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि किसी छात्र या उसके माता-पिता द्वारा मेडिकल कॉलेज को फीस का भुगतान सामान्य वित्तीय या कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ा लेन-देन है। इसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 406 के तहत 'आपराधिक विश्वासघात' (Criminal Breach of Trust) का अपराध मानने के लिए संपत्ति की 'सौंपी गई संपत्ति' (Entrustment) नहीं माना जा सकता।जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की सिंगल जज बेंच ने मॉरीशस के S.S.R. मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन और चेयरमैन के सेक्रेटरी के खिलाफ एक छात्र की पढ़ाई से जुड़े आरोपों के मामले में आपराधिक...
फ्लिपकार्ट को दी गई थी शिपमेंट की जिम्मेदारी, कर्मचारियों पर नहीं: झारखंड हाईकोर्ट ने FIR और आपराधिक कार्यवाही रद्द की
झारखंड हाईकोर्ट ने ई-कार्ट लॉजिस्टिक्स के एक अधिकारी और फ्लिपकार्ट की सुरक्षा टीम के सदस्य के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि शिपमेंट की कथित गैर-वापसी के मामले में संपत्ति की सुपुर्दगी व्यक्तिगत कर्मचारियों को नहीं, बल्कि फ्लिपकार्ट कंपनी को की गई थी। इसलिए कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात का अपराध नहीं बनता।जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की एकल पीठ ने धारा 482 CrPC के तहत दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए FIR, चार्जशीट और दोनों आरोपियों के खिलाफ संज्ञान लेने के...
झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व कांग्रेस मंत्री योगेंद्र साव को किया बरी, 2010 के NTPC प्रदर्शन मामले में मिली राहत
झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व कांग्रेस मंत्री और विधायक योगेंद्र साव को 2010 में NTPC परियोजना कार्यालय के उद्घाटन के दौरान हुए प्रदर्शन से जुड़े आपराधिक मामले में बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस और विशिष्ट साक्ष्य नहीं है, जिससे यह साबित हो कि योगेंद्र साव ने किसी व्यक्ति के साथ मारपीट की या भीड़ को हिंसा के लिए उकसाया।जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ ने ट्रायल कोर्ट और अपीलीय अदालत के फैसलों को रद्द करते हुए योगेंद्र साव को IPC की धारा 323, 341, 504 और 353, सहपठित...
झारखंड हाईकोर्ट ने ₹300 की रिश्वत वाले मामले में सज़ा कम की, कहा- आरोपी ने तीन दशकों तक 'मुक़दमे की पीड़ा' झेली
झारखंड हाईकोर्ट ने 1993 के भ्रष्टाचार के मामले में एक व्यक्ति की सज़ा कम की। यह मामला शिकायतकर्ता के प्रोविडेंट फंड (PF) के पैसे की प्रोसेसिंग के लिए ₹300 की रिश्वत मांगने से जुड़ा था। कोर्ट ने इस बात पर ध्यान दिया कि आरोपी ने तीन दशकों तक "मुक़दमे की पीड़ा" झेली है।जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की सिंगल जज बेंच ने 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' (Prevention of Corruption Act) की धारा 7 के तहत सज़ा की अवधि पर विचार करते हुए कहा कि हालांकि इस प्रावधान में कम से कम छह महीने की सज़ा का नियम है, लेकिन...
ज़मानत की मुश्किल शर्तें 'एक हाथ से ज़मानत देना और दूसरे से वापस ले लेना' जैसा: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाई कोर्ट ने कहा कि ज़मानत देते समय ऐसी शर्त लगाना जो बहुत मुश्किल हो या जिसे पूरा करना मुमकिन न हो, "एक हाथ से ज़मानत देने और दूसरे से वापस ले लेने" जैसा है।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की सिंगल बेंच ने यह टिप्पणी याचिका पर विचार करते हुए की। यह याचिका 2014 के अग्रिम ज़मानत (Anticipatory Bail) आदेश में बदलाव की मांग के लिए दायर की गई। इस आदेश में याचिकाकर्ता को ज़मानत बॉन्ड और ज़मानतदार देने के अलावा, तीन लोगों को ₹35,000-₹35,000 और एक अन्य व्यक्ति के नाम ₹23,000 का बैंक ड्राफ्ट देने की...
जेल मैनुअल के नियम अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए होते हैं, इनका इस्तेमाल आपराधिक आरोप साबित करने के लिए नहीं किया जा सकता: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि जेल मैनुअल के तहत जेल अधिकारियों की तय जिम्मेदारियां अनुशासनात्मक कार्रवाई या कर्तव्य में लापरवाही के लिए तो अहम हो सकती हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल आपराधिक आरोप साबित करने के लिए नहीं किया जा सकता। आपराधिक आरोप तो दंड कानून के तहत अपराध के तत्वों के आधार पर ही तय किए जाने चाहिए।जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की सिंगल जज बेंच ने यह टिप्पणी तब की, जब उन्होंने लोहरदगा के डिविजनल जेल से विचाराधीन कैदी के भागने के मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 222 और धारा 120B के...
झारखंड हाईकोर्ट ने 2022 में लातेहार कोर्ट पर हुए हमले के मामले में शुरू की गई कार्यवाही बंद की, न्यायिक अधिकारियों के लिए सुरक्षा का निर्देश दिया
झारखंड हाईकोर्ट ने लातेहार सिविल कोर्ट में 2022 में हुए हमले और तोड़-फोड़ के बाद स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई जनहित याचिका (PIL) का निपटारा किया। कोर्ट ने कहा कि राज्य के सभी जिलों में काम कर रहे न्यायिक अधिकारियों के लिए एक जैसी व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।चीफ जस्टिस एम.एस. सोनाक और जस्टिस राजेश शंकर की डिवीजन बेंच ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के उपाय करने के लिए अधिकारियों को लातेहार जैसी किसी और घटना का इंतजार करने की कोई वजह नहीं है।यह स्वतः संज्ञान कार्यवाही 11...
धारा 498ए में दहेज की मांग होना जरूरी नहीं, संपत्ति की कोई भी अवैध मांग क्रूरता के दायरे में: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत अपराध के लिए दहेज की मांग का आरोप होना जरूरी नहीं है। किसी महिला को संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति की किसी भी अवैध मांग को पूरा करने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से किया गया उत्पीड़न भी इस धारा के तहत क्रूरता माना जा सकता है।जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने यह टिप्पणी आपराधिक पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए की। कोर्ट ने पति और उसके परिवार के सदस्यों को धारा 498ए और 323 के तहत दोषी ठहराने वाले...
नियमित नियुक्ति बिना उचित प्रक्रिया के रद्द नहीं की जा सकती: झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC भर्ती रद्द करने के आदेश पर लगाई रोक
झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड लोक सेवा आयोग की 11वीं से 13वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षाओं के जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर अंतरिम रोक लगाते हुए कहा कि नियमित नियुक्ति को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना खत्म नहीं किया जा सकता।जस्टिस दीपक रोशन ने 2023 की विज्ञप्ति के आधार पर नियुक्त खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की भर्ती रद्द करने वाली अधिसूचना पर रोक लगाते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा कोई ठोस आधार रिकॉर्ड पर नहीं है, जिससे यह पता चले कि कथित भ्रष्टाचार में...
उपभोक्ता आयोगों के रिटायर अध्यक्षों-सदस्यों को भी मिलेगा सेवा जारी रखने का लाभ, झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की अधिसूचना बदली
झारखंड हाईकोर्ट ने उपभोक्ता आयोगों के उन पूर्व अध्यक्षों और सदस्यों को भी सेवा जारी रखने का लाभ देने का निर्देश दिया, जो 21 मई 2025 से पहले रिटायर हो चुके थे।हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की उस अधिसूचना में संशोधन किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के मनेंद्र भास्कर लिमये मामले में दिए निर्देशों का लाभ केवल 21 मई 2025 या उसके बाद रिटायर्ड हुए पदाधिकारियों तक सीमित कर दिया गया। जस्टिस दीपक रोशन ने कहा कि 21 मई 2025 सुप्रीम कोर्ट के फैसले की तारीख मात्र है। यह ऐसी पात्रता तिथि नहीं है, जिसके आधार पर उपभोक्ता...
वैवाहिक क्रूरता साबित करने के लिए पहले पुलिस शिकायत या चोट का दस्तावेज जरूरी नहीं: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि वैवाहिक क्रूरता और मारपीट के आरोपों को साबित करने के लिए पीड़िता की ओर से पहले पुलिस शिकायत दर्ज कराना या चोटों का चिकित्सकीय दस्तावेज पेश करना अनिवार्य मानना अनुचित है। अदालत ने ऐसी शर्त को बेतुका और अनावश्यक बताया।जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ ने पति को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत बरी करने वाले अपीलीय अदालत का फैसला रद्द किया और निचली अदालत द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि तथा सजा बहाल की।मामला सुषमा देवी और संजय कुमार उर्फ राजेश कुमार के विवाह से...
अंबेडकर जयंती की बैठक को चुनाव में अनुचित प्रभाव डालने की कोशिश नहीं माना जा सकता: झारखंड हाईकोर्ट ने केस रद्द किया
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि स्कूल के सभागार में अंबेडकर जयंती मनाने के लिए बैठक आयोजित करना अपने आप में चुनाव में अनुचित प्रभाव डालने का अपराध नहीं है।अदालत ने 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान स्कूल में आयोजित ऐसी ही एक बैठक को लेकर दो लोगों के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही रद्द की।जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की एकल पीठ ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 171एफ, 171एच और 188 के तहत दर्ज मामले में आरोप पत्र, संज्ञान आदेश और आरोपमुक्ति आवेदन खारिज करने के आदेश समेत पूरी कार्यवाही रद्द की।मामला सरस्वती...
सिर्फ़ महिला पर हमला करना, रेप करने की कोशिश नहीं माना जाएगा: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि रेप करने की कोशिश के तौर पर किसी खास हरकत के बिना, महिला पर किया गया हमला अपने आप में रेप की कोशिश नहीं माना जाएगा।जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की सिंगल जज बेंच ने एक व्यक्ति की सज़ा को बदला। उसे पहले इंडियन पीनल कोड (IPC) की धारा 376/511 के तहत रेप की कोशिश का दोषी ठहराया गया था, जिसे बदलकर IPC की धारा 354 के तहत महिला की मर्यादा भंग करने का दोषी माना गया।यह अपील डाल्टनगंज (पलामू) के एडिशनल सेशन जज के 2005 के फ़ैसले के ख़िलाफ़ दायर की गई। उस फ़ैसले में अपील करने वाले...
झारखंड हाईकोर्ट ने 11वीं-13वीं JPSC परीक्षाओं के ज़रिए की गई नियुक्तियां रद्द करने के राज्य सरकार के फ़ैसले पर लगाई रोक
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार (20 अगस्त) को एक अंतरिम आदेश में राज्य सरकार के उन आदेशों पर रोक लगाई, जिनके तहत 11वीं से 13वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षाओं के ज़रिए की गई नियुक्तियों को रद्द किया गया।गौरतलब है कि राज्य सरकार ने हाल ही में JPSC परीक्षाओं के आयोजन में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों के कई हफ़्तों तक चले विरोध-प्रदर्शन के बाद इन परीक्षाओं को रद्द कर दिया था।हाईकोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिनमें नियुक्तियां रद्द करने वाले राज्य सरकार के...
पत्नी के रंग-रूप, कम IQ और बातचीत के कौशल को लेकर ताने मारना मात्र IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता नहीं: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में एक व्यक्ति के खिलाफ क्रूरता का मामला रद्द किया। कोर्ट ने कहा कि पत्नी के रंग-रूप, कम IQ और बातचीत के खराब कौशल को लेकर ताने मारने के आरोप, अकेले IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता का अपराध साबित करने के लिए काफी नहीं हैं।संदर्भ के लिए, IPC की धारा 498A में क्रूरता को इस तरह परिभाषित किया गया: a) ऐसा कोई जानबूझकर किया गया व्यवहार जिससे महिला आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो सकती है या उसके शरीर या स्वास्थ्य को गंभीर चोट पहुँच सकती है, या b) उसे या उसके रिश्तेदारों को दहेज...
सिर्फ UAPA आरोपी की पत्नी होना आतंकवाद की कमाई से संपत्ति खरीदने का आधार नहीं: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने UAPA के एक आरोपी की पत्नी की स्कूटी की कुर्की रद्द करते हुए कहा कि केवल किसी आरोपी से पारिवारिक संबंध होने के आधार पर उसकी संपत्ति को आतंकवाद से हुई कमाई से अर्जित संपत्ति नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि जब महिला की अपनी आय का स्वतंत्र स्रोत हो और संपत्ति उसके नाम पर दर्ज हो, तो उसकी खरीद के स्रोत की जांच तथ्यों के आधार पर की जानी चाहिए।जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने पाया कि महिला सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड में कार्यरत है और उसकी नियमित आय...













