झारखंड हाईकोट

चार्जशीट के बिना तीन महीने से अधिक सरकारी कर्मचारी का निलंबन जारी नहीं रह सकता: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी का निलंबन सामान्य तौर पर तीन महीने से आगे जारी नहीं रखा जा सकता, यदि इस अवधि में उसे चार्जशीट नहीं दी गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि विभागीय कार्यवाही शुरू किए बिना लंबे समय तक निलंबन जारी रखना उसे दंड के रूप में इस्तेमाल करने जैसा होगा।जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ केंद्र सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के आदेश को चुनौती दी गई। अधिकरण ने लंबे समय से निलंबित डाक विभाग के...

कानून की गलत व्याख्या मात्र से अर्ध-न्यायिक अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई नहीं हो सकती: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि कानून की गलत व्याख्या या कानून की गलती, यदि किसी अर्ध-न्यायिक प्राधिकारी ने अपने वैध अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए की, तो केवल इसी आधार पर उसके खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती। विभागीय कार्रवाई के लिए आरोपों में बाहरी प्रभाव, अनुचित उद्देश्य या अन्य ऐसे तत्व सामने आने चाहिए, जो महज कानूनी गलती से आगे जाकर कदाचार की ओर संकेत करें।जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की उस याचिका पर...

PMLA कार्यवाही खत्म करने के लिए प्रेडिकेट ऑफ़ेंस में बरी होने का फ़ैसला अंतिम होना चाहिए; अपील ब्लैंकेट शील्ड नहीं हो सकती: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की कार्यवाही खत्म करने से पहले 'प्रेडिकेट ऑफ़ेंस' (मुख्य अपराध) में बरी होने का फ़ैसला अंतिम होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि जिस बरी होने के फ़ैसले को अपील में चुनौती दी जा सकती है, उसे प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 (PMLA) के तहत कार्यवाही से बचने के लिए "ब्लैंकेट शील्ड" (सुरक्षा कवच) के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की सिंगल जज बेंच अमर मंडल की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। मंडल ने PMLA की धारा 3 और 4 के...

झारखंड हाईकोर्ट ने 4 साल की बच्ची की अंतरिम कस्टडी मां को सौंपी, IVF प्रक्रिया से जुड़े दर्द और त्याग पर ध्यान दिया

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि कस्टडी के मामलों में नाबालिग बच्चे का कल्याण और सर्वोत्तम हित सबसे महत्वपूर्ण बात होनी चाहिए। चार साल की बच्ची की अंतरिम कस्टडी उसकी माँ को सौंपते हुए कोर्ट ने इस बात पर ध्यान दिया कि बच्ची का जन्म IVF के ज़रिए हुआ था और माँ ने "इससे जुड़े दर्द और त्याग" को सहा है।जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की डिवीज़न बेंच हज़ारीबाग की फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ एक अपील पर सुनवाई कर रही थी। फैमिली कोर्ट ने 'गार्जियंस एंड वार्ड्स एक्ट, 1890' की धारा 12 के तहत माँ...

पुलिस अधिकारी के बयान के आधार पर खबर छापने वाले रिपोर्टर पर मानहानि का केस नहीं चलेगा: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि अगर कोई रिपोर्टर किसी पुलिस अधिकारी के बयान के आधार पर खबर छापता है, तो उस पर आपराधिक मामला नहीं चलाया जा सकता, क्योंकि रिपोर्टर ने बस वही बताया जो अधिकारी ने कहा था। कोर्ट ने माना कि प्रतिवादी "सिर्फ एक रिपोर्टर" है, जिसने SDPO की बात छापी और "खबर छापना रिपोर्टर के अधिकार क्षेत्र से बाहर की बात है। इसके लिए उस पर कोई आपराधिक जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती।"जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय और जस्टिस अरुण कुमार राय की डिवीजन बेंच, देवघर के सेशन जज के 26.09.2011 के फैसले के खिलाफ...

सरकारी कर्मचारी ने दूसरी शादी की तो दूसरी पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार नहीं: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारी की दूसरी पत्नी अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति का दावा नहीं कर सकती यदि कर्मचारी ने सेवा में रहते हुए दूसरी शादी के लिए आचरण नियमों के तहत सरकार से अनुमति नहीं ली थी। दूसरी शादी संबंधित समुदाय की प्रथा के तहत वैध मानी जाती हो तब भी सेवा नियमों में निर्धारित अनुमति की अनिवार्यता खत्म नहीं होती।चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने दूसरी पत्नी की ओर से दायर अपील खारिज करते हुए सिंगल जज का फैसला बरकरार रखा।मामला एक...

झारखंड हाईकोर्ट ने सरकारी वकील की बर्खास्तगी के खिलाफ याचिका खारिज की, कहा- पद से सम्मानजनक इस्तीफ़ा अपेक्षित

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि जब सरकार किसी सरकारी वकील की सेवा समाप्त करती है तो रिट कार्यवाही के ज़रिए "हाथ से निकले केस" (lost briefs) के पीछे भागने के बजाय "पद से सम्मानजनक इस्तीफ़ा" देना ही उचित प्रतिक्रिया है।जस्टिस दीपक रोशन की सिंगल जज बेंच ने यह टिप्पणी तब की, जब वह अधिकारियों द्वारा अपनी सेवा समाप्ति को चुनौती देने वाली पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की याचिका खारिज कर रहे थे।कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें 8 जुलाई, 2026 का वह आदेश रद्द करने की मांग की गई, जिसके तहत याचिकाकर्ता की पब्लिक...

लंबे समय से अलग-अलग कब्जा और मौखिक साक्ष्य से साबित हो सकता है मौखिक बंटवारा: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि संयुक्त परिवार की संपत्ति का मौखिक बंटवारा लिखित दस्तावेज के अभाव में भी मौखिक साक्ष्य और लंबे समय से चले आ रहे अलग-अलग कब्जे के आधार पर साबित किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि यदि पक्षकार कई दशकों से अपने-अपने हिस्से की संपत्ति पर अलग-अलग कब्जा रखते हुए उसका उपयोग और उपभोग कर रहे हैं तो मौखिक बंटवारे को स्वीकार किया जा सकता है।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी ने यह टिप्पणी रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए की। याचिका में संताल परगना प्रमंडल, दुमका के आयुक्त द्वारा 6 जुलाई 2007 को...

शादी से इनकार करने पर 7 साल के आपसी सहमति वाले रिश्ते को रेप नहीं माना जा सकता: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि अगर दो बालिगों के बीच सात साल से ज़्यादा समय तक शारीरिक संबंध रहे हों, और इस बात का कोई ठोस आरोप न हो कि शादी का वादा करते समय पुरुष का इरादा शादी करने का नहीं था, तो ऐसे आरोपों से ज़्यादा से ज़्यादा आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंध का ही पता चलता है; इसे शादी के झूठे वादे पर रेप नहीं माना जा सकता।जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की सिंगल बेंच ने यह टिप्पणी तब की, जब वह भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(2)(n) के तहत रेप के आरोपी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही (जिसमें FIR और...

रजिस्टर्ड सेल डीड से भी आदिवासी जमीन का अवैध हस्तांतरण वैध नहीं हो सकता: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908 की धारा 46(1) का उल्लंघन कर किया गया आदिवासी जमीन का हस्तांतरण केवल इस आधार पर वैध नहीं हो सकता कि उसके लिए रजिस्टर्ड सेल डीड तैयार की गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून द्वारा प्रतिबंधित लेनदेन को रजिस्टर्ड सेल डीड वैधता प्रदान नहीं कर सकती।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी ने यह टिप्पणी हजारीबाग के तत्कालीन उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के आयुक्त की ओर से 10 मई 2013 को पारित आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए की। आयुक्त ने...

फ्लिपकार्ट को दी गई थी शिपमेंट की जिम्मेदारी, कर्मचारियों पर नहीं: झारखंड हाईकोर्ट ने FIR और आपराधिक कार्यवाही रद्द की

झारखंड हाईकोर्ट ने ई-कार्ट लॉजिस्टिक्स के एक अधिकारी और फ्लिपकार्ट की सुरक्षा टीम के सदस्य के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि शिपमेंट की कथित गैर-वापसी के मामले में संपत्ति की सुपुर्दगी व्यक्तिगत कर्मचारियों को नहीं, बल्कि फ्लिपकार्ट कंपनी को की गई थी। इसलिए कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात का अपराध नहीं बनता।जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की एकल पीठ ने धारा 482 CrPC के तहत दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए FIR, चार्जशीट और दोनों आरोपियों के खिलाफ संज्ञान लेने के...

झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व कांग्रेस मंत्री योगेंद्र साव को किया बरी, 2010 के NTPC प्रदर्शन मामले में मिली राहत

झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व कांग्रेस मंत्री और विधायक योगेंद्र साव को 2010 में NTPC परियोजना कार्यालय के उद्घाटन के दौरान हुए प्रदर्शन से जुड़े आपराधिक मामले में बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस और विशिष्ट साक्ष्य नहीं है, जिससे यह साबित हो कि योगेंद्र साव ने किसी व्यक्ति के साथ मारपीट की या भीड़ को हिंसा के लिए उकसाया।जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ ने ट्रायल कोर्ट और अपीलीय अदालत के फैसलों को रद्द करते हुए योगेंद्र साव को IPC की धारा 323, 341, 504 और 353, सहपठित...

झारखंड हाईकोर्ट ने ₹300 की रिश्वत वाले मामले में सज़ा कम की, कहा- आरोपी ने तीन दशकों तक मुक़दमे की पीड़ा झेली

झारखंड हाईकोर्ट ने 1993 के भ्रष्टाचार के मामले में एक व्यक्ति की सज़ा कम की। यह मामला शिकायतकर्ता के प्रोविडेंट फंड (PF) के पैसे की प्रोसेसिंग के लिए ₹300 की रिश्वत मांगने से जुड़ा था। कोर्ट ने इस बात पर ध्यान दिया कि आरोपी ने तीन दशकों तक "मुक़दमे की पीड़ा" झेली है।जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की सिंगल जज बेंच ने 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' (Prevention of Corruption Act) की धारा 7 के तहत सज़ा की अवधि पर विचार करते हुए कहा कि हालांकि इस प्रावधान में कम से कम छह महीने की सज़ा का नियम है, लेकिन...

जेल मैनुअल के नियम अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए होते हैं, इनका इस्तेमाल आपराधिक आरोप साबित करने के लिए नहीं किया जा सकता: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि जेल मैनुअल के तहत जेल अधिकारियों की तय जिम्मेदारियां अनुशासनात्मक कार्रवाई या कर्तव्य में लापरवाही के लिए तो अहम हो सकती हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल आपराधिक आरोप साबित करने के लिए नहीं किया जा सकता। आपराधिक आरोप तो दंड कानून के तहत अपराध के तत्वों के आधार पर ही तय किए जाने चाहिए।जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की सिंगल जज बेंच ने यह टिप्पणी तब की, जब उन्होंने लोहरदगा के डिविजनल जेल से विचाराधीन कैदी के भागने के मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 222 और धारा 120B के...

झारखंड हाईकोर्ट ने 2022 में लातेहार कोर्ट पर हुए हमले के मामले में शुरू की गई कार्यवाही बंद की, न्यायिक अधिकारियों के लिए सुरक्षा का निर्देश दिया

झारखंड हाईकोर्ट ने लातेहार सिविल कोर्ट में 2022 में हुए हमले और तोड़-फोड़ के बाद स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई जनहित याचिका (PIL) का निपटारा किया। कोर्ट ने कहा कि राज्य के सभी जिलों में काम कर रहे न्यायिक अधिकारियों के लिए एक जैसी व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।चीफ जस्टिस एम.एस. सोनाक और जस्टिस राजेश शंकर की डिवीजन बेंच ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के उपाय करने के लिए अधिकारियों को लातेहार जैसी किसी और घटना का इंतजार करने की कोई वजह नहीं है।यह स्वतः संज्ञान कार्यवाही 11...

धारा 498ए में दहेज की मांग होना जरूरी नहीं, संपत्ति की कोई भी अवैध मांग क्रूरता के दायरे में: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत अपराध के लिए दहेज की मांग का आरोप होना जरूरी नहीं है। किसी महिला को संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति की किसी भी अवैध मांग को पूरा करने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से किया गया उत्पीड़न भी इस धारा के तहत क्रूरता माना जा सकता है।जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने यह टिप्पणी आपराधिक पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए की। कोर्ट ने पति और उसके परिवार के सदस्यों को धारा 498ए और 323 के तहत दोषी ठहराने वाले...

नियमित नियुक्ति बिना उचित प्रक्रिया के रद्द नहीं की जा सकती: झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC भर्ती रद्द करने के आदेश पर लगाई रोक

झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड लोक सेवा आयोग की 11वीं से 13वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षाओं के जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर अंतरिम रोक लगाते हुए कहा कि नियमित नियुक्ति को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना खत्म नहीं किया जा सकता।जस्टिस दीपक रोशन ने 2023 की विज्ञप्ति के आधार पर नियुक्त खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की भर्ती रद्द करने वाली अधिसूचना पर रोक लगाते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा कोई ठोस आधार रिकॉर्ड पर नहीं है, जिससे यह पता चले कि कथित भ्रष्टाचार में...