झारखंड हाईकोट

एक ही गलती के आधार पर पेंशन नहीं रोकी जा सकती: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की अपील खारिज की
एक ही गलती के आधार पर पेंशन नहीं रोकी जा सकती: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की अपील खारिज की

झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी की पेंशन केवल एक घटना में अनियमितता के आधार पर नहीं रोकी जा सकती। इसके लिए यह साबित होना जरूरी है कि कर्मचारी का पूरा सेवा काल गंभीर रूप से असंतोषजनक रहा हो या उसने गंभीर कदाचार किया हो।चीफ जस्टिस एम एस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए एकल पीठ का फैसला बरकरार रखा।मामला जल संसाधन विभाग के जूनियर इंजीनियर से जुड़ा था जिन पर माइक्रोलिफ्ट योजनाओं में वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे थे।...

पेंशन व रिटायरमेंट लाभ न देने पर सख्ती, झारखंड हाईकोर्ट ने परिवहन अधिकारी का वेतन रोका
पेंशन व रिटायरमेंट लाभ न देने पर सख्ती, झारखंड हाईकोर्ट ने परिवहन अधिकारी का वेतन रोका

झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में पलामू के जिला परिवहन पदाधिकारी का वेतन रोकने का निर्देश दिया। अदालत ने यह सख्त कदम इसलिए उठाया, क्योंकि रिटायर कर्मचारी को अब तक पेंशन और अन्य रिटायरमेंट लाभ नहीं दिए गए।जस्टिस आनंद सेन की एकल पीठ अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका उस आदेश से जुड़ी थी, जिसमें 23 अक्टूबर 2024 को अदालत ने रिटायर लिपिक को पेंशन, सभी रिटायरमेंट लाभ, 6 प्रतिशत ब्याज और 50 हजार रुपये खर्च देने का निर्देश दिया था।याचिकाकर्ता 31 मार्च 2011 को रिटायर हुए, लेकिन विभाग...

45 साल बाद जमीन बहाली का दावा खारिज: झारखंड हाइकोर्ट का बड़ा फैसला, 1947 से पहले के सौदों पर नहीं लागू होंगे नियम
45 साल बाद जमीन बहाली का दावा खारिज: झारखंड हाइकोर्ट का बड़ा फैसला, 1947 से पहले के सौदों पर नहीं लागू होंगे नियम

झारखंड हाइकोर्ट ने छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि 1947 से पहले हुए भूमि हस्तांतरण पर धारा 46 लागू नहीं होती और 45 साल की देरी से दायर बहाली याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की एकल पीठ ने यह निर्णय देते हुए निचली प्राधिकरणों के आदेशों को रद्द किया, जिनमें जमीन बहाली की अनुमति दी गई थी।मामले में याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उनके पूर्वज को वर्ष 1939-40 में विधिवत पंजीकृत पट्टा के जरिए जमीन दी गई। बाद में 1952 में सिविल कोर्ट...

रांची ऑफिस में आरोपी पर कथित हमले को लेकर ED अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज: हाईकोर्ट ने दिया CBI जांच का आदेश
रांची ऑफिस में आरोपी पर कथित हमले को लेकर ED अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज: हाईकोर्ट ने दिया CBI जांच का आदेश

झारखंड हाई कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों के खिलाफ झारखंड पुलिस द्वारा दर्ज FIR रद्द करने से इनकार किया। साथ ही यह निर्देश दिया कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए जांच को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दिया जाए। यह मामला पेयजल घोटाले के एक आरोपी से पूछताछ के दौरान ED के रांची जोनल ऑफिस में हुई एक घटना से जुड़े आरोपों से संबंधित है।इससे पहले, हाईकोर्ट ने जांच पर रोक लगाई थी। उस चरण में कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की यह दलील दर्ज की थी कि 15 जनवरी, 2026 को सुबह लगभग 6:00 बजे, देर...

झारखंड हाइकोर्ट ने दिवंगत कर्मी के वारिसों को दिया पूर्ण बकाया वेतन, कहा- निष्पक्ष जांच के बाद भी लेबर कोर्ट सजा में बदलाव कर सकता है
झारखंड हाइकोर्ट ने दिवंगत कर्मी के वारिसों को दिया पूर्ण बकाया वेतन, कहा- निष्पक्ष जांच के बाद भी लेबर कोर्ट सजा में बदलाव कर सकता है

झारखंड हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भले ही विभागीय जांच निष्पक्ष और विधिसम्मत पाई गई हो, फिर भी लेबर कोर्ट या औद्योगिक न्यायाधिकरण को यह परखने का अधिकार है कि दी गई सजा अपराध की गंभीरता के अनुपात में है या नहीं। औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 11ए के तहत वह उचित राहत प्रदान कर सकता है।जस्टिस दीपक रोशन की एकलपीठ प्रबंधन द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 15 जनवरी 2008 के लेबर कोर्ट के अवार्ड को चुनौती दी गई। लेबर कोर्ट ने कर्मचारी की बर्खास्तगी निरस्त करते हुए पुनर्नियुक्ति, 40...

झारखंड हाईकोर्ट ने बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के लिए निर्देश जारी किए, कहा- लापरवाही से लागू करने से पब्लिक हेल्थ को खतरा, आर्टिकल 21 का उल्लंघन
झारखंड हाईकोर्ट ने बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के लिए निर्देश जारी किए, कहा- लापरवाही से लागू करने से पब्लिक हेल्थ को खतरा, आर्टिकल 21 का उल्लंघन

झारखंड हाईकोर्ट ने बायो-मेडिकल-वेस्ट से जुड़ी एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन में कई निर्देश जारी किए, जिसमें राज्य में बायोमेडिकल वेस्ट की हैंडलिंग और डिस्पोजल को कंट्रोल करने वाले कानूनी फ्रेमवर्क को सख्ती से लागू करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया।चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की डिवीजन बेंच सोशल वेलफेयर ऑर्गनाइज़ेशन झारखंड ह्यूमन राइट्स कॉन्फ्रेंस की PIL पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें बायोमेडिकल वेस्ट को कंट्रोल करने वाले कानूनी सिस्टम को असरदार तरीके से लागू करने की मांग की गई। पिटीशन...

रोड एक्सीडेंट क्रॉस-FIR में वकील के खिलाफ कोई ज़बरदस्ती कार्रवाई न की जाए: झारखंड हाईकोर्ट का आदेश
रोड एक्सीडेंट क्रॉस-FIR में वकील के खिलाफ कोई ज़बरदस्ती कार्रवाई न की जाए: झारखंड हाईकोर्ट का आदेश

झारखंड हाईकोर्ट ने रांची में रोड एक्सीडेंट की घटना से जुड़ी क्रॉस-FIR में आरोपी वकील मनोज टंडन को अंतरिम सुरक्षा दी है और मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई। साथ ही कोर्ट ने कहा है कि एक ही घटना से जुड़े दोनों क्रॉस-केस की जांच एक ही जांच अधिकारी से करानी चाहिए।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की सिंगल जज बेंच वकील द्वारा दायर मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें वकील ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) के अलग-अलग नियमों के तहत दर्ज डोरंडा P.S. केस नंबर 51 और 52/2026 के संबंध में पुलिस द्वारा परेशान...

हिरासत में 437 मौतों पर झारखंड हाइकोर्ट सख्त, मजिस्ट्रेट जांच अनिवार्य, राज्य से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
हिरासत में 437 मौतों पर झारखंड हाइकोर्ट सख्त, मजिस्ट्रेट जांच अनिवार्य, राज्य से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

झारखंड हाइकोर्ट ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 176(1-क) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 196) के तहत पुलिस या न्यायिक हिरासत में मृत्यु, लापता होने या दुष्कर्म के हर मामले में मजिस्ट्रेट द्वारा न्यायिक जांच अनिवार्य है। अदालत ने राज्य सरकार से इस संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी, क्योंकि राज्य ने खुलासा किया कि वर्ष 2018 से 2025 के बीच 437 लोगों की हिरासत में मौत हुई।चीफ जस्टिस एम. एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में मांग...

लापता लोगों की तलाश में आधार जानकारी तक पहुंच में दिक्कत: झारखंड हाइकोर्ट ने गृह मंत्रालय से मांगे सुझाव
लापता लोगों की तलाश में आधार जानकारी तक पहुंच में दिक्कत: झारखंड हाइकोर्ट ने गृह मंत्रालय से मांगे सुझाव

झारखंड हाइकोर्ट ने लापता व्यक्तियों की तलाश के मामलों में जांच एजेंसियों को आधार संबंधी जानकारी प्राप्त करने में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।अदालत ने इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय से उपयुक्त व्यवस्था विकसित करने के लिए सुझाव मांगे हैं।यह टिप्पणी जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान की। याचिका एक मां की ओर से दायर की गई, जिसकी बेटी पिछले पांच वर्षों से लापता है।सुनवाई के दौरान अदालत को...

ID Act | अगर कर्मचारियों ने पहले ही एम्प्लॉयर के सामने अपनी शिकायतें उठाईं और उनकी कॉपी सुलह अधिकारी को भेजी हैं तो उन्हें अलग से आवेदन करने की ज़रूरत नहीं: झारखंड हाईकोर्ट
ID Act | अगर कर्मचारियों ने पहले ही एम्प्लॉयर के सामने अपनी शिकायतें उठाईं और उनकी कॉपी सुलह अधिकारी को भेजी हैं तो उन्हें अलग से आवेदन करने की ज़रूरत नहीं: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट, 1947 (ID Act) की धारा 2A(2) के तहत औपचारिक आवेदन करना ज़रूरी नहीं है, अगर कर्मचारियों ने एम्प्लॉयर को भेजे गए अपने रिप्रेजेंटेशन और शिकायतों की कॉपी सुलह अधिकारी को भेजी हैं, जिससे विवाद लेबर अथॉरिटीज़ के संज्ञान में आ गया हो।दीपक रोशन की सिंगल जज बेंच लेबर कोर्ट, देवघर के आदेशों को चुनौती देने वाली रिट याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसने कर्मचारियों के दावों को सिर्फ़ इस आधार पर खारिज किया कि इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट की धारा...

विदेश यात्रा का अधिकार मौलिक अधिकार: झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक की पत्नी को इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति दी
विदेश यात्रा का अधिकार मौलिक अधिकार: झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक की पत्नी को इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति दी

झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व झारखंड विधायक एवं मंत्री कमलेश कुमार सिंह की पत्नी पर लगाए गए जमानत की शर्तों में संशोधन करते हुए उन्हें इलाज के लिए अमेरिका या यूनाइटेड किंगडम (UK) की यात्रा करने की अनुमति दी।कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि विदेश यात्रा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार का हिस्सा है।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की एकल पीठ ने 13 मई 2014 को पारित उस आदेश में संशोधन किया, जिसके तहत याचिकाकर्ता को अपना पासपोर्ट जमा करने और विदेश यात्रा से रोका गया।पृष्ठभूमियाचिकाकर्ता जो...

हर चुनावी चूक भ्रष्ट आचरण नहीं होती: झारखंड हाईकोर्ट ने सिंदरी से चंद्रदेव महतो का चुनाव बरकरार रखा
हर चुनावी चूक 'भ्रष्ट आचरण' नहीं होती: झारखंड हाईकोर्ट ने सिंदरी से चंद्रदेव महतो का चुनाव बरकरार रखा

झारखंड हाईकोर्ट ने 3 फरवरी 2026 को सिंदरी विधानसभा क्षेत्र (38) से निर्वाचित चन्द्रदेव महतो चुनाव को बरकरार रखते हुए कहा कि चुनावी अभियान में हर तरह की विसंगति मात्र से 'भ्रष्ट आचरण' सिद्ध नहीं होता, जब तक यह साबित न किया जाए कि वह मतदाताओं को गुमराह कर अन्य प्रत्याशियों की संभावनाओं को वास्तविक रूप से प्रभावित करने के लिए की गई हो।एकल पीठ में जस्टिस गौतम कुमार चौधरी ने यह फैसला जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत दायर चुनाव याचिका पर सुनाते हुए दिया। याचिका में अक्टूबर–नवंबर 2024 के झारखंड...

CrPC की धारा 125 का मकसद महिला की पीड़ा और वित्तीय कठिनाई को कम करना है: झारखंड हाईकोर्ट ने भरण-पोषण मामले में देरी पर चिंता जताई
'CrPC की धारा 125 का मकसद महिला की पीड़ा और वित्तीय कठिनाई को कम करना है': झारखंड हाईकोर्ट ने भरण-पोषण मामले में देरी पर चिंता जताई

झारखंड हाईकोर्ट ने दोहराया कि CrPC की धारा 125 के तहत कार्यवाही संक्षिप्त प्रकृति की होती है। इसका मकसद बेघर होने और गरीबी को रोकना है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पत्नी कानूनी तौर पर भरण-पोषण की हकदार है ताकि वह गरिमा के साथ और उसी तरह के जीवन स्तर के साथ रह सके जैसा कि वह अपने ससुराल में रहती थी। हालांकि, मौजूदा मामले के तथ्यों को देखते हुए, कोर्ट ने फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए भरण-पोषण को बढ़ाने से इनकार किया।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की सिंगल जज बेंच रांची की फैमिली कोर्ट का आदेश के खिलाफ पति और...

नाबालिग थैलेसीमिया मरीजों को HIV संक्रमित रक्त चढ़ाने के आरोप: झारखंड हाइकोर्ट FIR दर्ज करने का दिया आदेश
नाबालिग थैलेसीमिया मरीजों को HIV संक्रमित रक्त चढ़ाने के आरोप: झारखंड हाइकोर्ट FIR दर्ज करने का दिया आदेश

झारखंड हाइकोर्ट ने पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में नाबालिग थैलेसीमिया मरीजों को कथित रूप से HIV संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने के मामले में FIR दर्ज करने का निर्देश दिया।जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की एकल पीठ इस मामले में दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि अक्टूबर, 2025 में चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में नाबालिग याचिकाकर्ताओं को संक्रमित रक्त चढ़ाया गया, जिसके बाद वे एचआईवी से संक्रमित हो गए।याचिकाकर्ताओं ने हाइकोर्ट से आग्रह किया कि इस...

झारखंड हाईकोर्ट ने 25 साल पुरानी लेक्चरर नियुक्तियों में दखल देने से इनकार किया, लंबे समय से सेवा और समानता का हवाला दिया
झारखंड हाईकोर्ट ने 25 साल पुरानी लेक्चरर नियुक्तियों में दखल देने से इनकार किया, लंबे समय से सेवा और समानता का हवाला दिया

झारखंड हाईकोर्ट ने दो दशक से भी पहले हुई तीन लेक्चरर की नियुक्तियों में दखल देने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि लगभग 25 सालों से चली आ रही नियुक्तियों को बदलना अन्याय होगा, खासकर तब जब सक्षम अधिकारियों ने पहले ही एक संभावित और तर्कसंगत दृष्टिकोण पर कार्रवाई कर ली थी।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की सिंगल जज बेंच तीन लोगों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली और बिहार कॉलेज सर्विस कमीशन, पटना की 14 फरवरी 2000 के पत्र द्वारा जारी सिफारिश को रद्द करने की मांग वाली रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, इस आधार पर...

अवमानना की कार्रवाई न करना कमजोरी समझ लिया गया: रांची टर्मिनल मार्केट यार्ड के चुनावी उपयोग पर हाइकोर्ट की सख्त रोक
अवमानना की कार्रवाई न करना कमजोरी समझ लिया गया: रांची टर्मिनल मार्केट यार्ड के चुनावी उपयोग पर हाइकोर्ट की सख्त रोक

झारखंड हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि रांची के पंडरा स्थित टर्मिनल मार्केट यार्ड परिसर का किसी भी प्रकार के चुनावी कार्यों के लिए उपयोग नहीं किया जाएगा। अदालत ने चेतावनी दी कि उसके आदेशों का उल्लंघन होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।चीफ जस्टिस एम. एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ इस मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।याचिका में आरोप लगाया गया कि चुनावी कार्यों के नाम पर बार-बार टर्मिनल मार्केट यार्ड का उपयोग किए जाने से वहां वर्षों से कारोबार कर रहे...

शराब घोटाला मामला: अंतरिम जमानत पर रहते हुए नियमित जमानत याचिका सुनवाई योग्य नहीं, आरोपी का हिरासत में होना अनिवार्य : झारखंड हाइकोर्ट
शराब घोटाला मामला: अंतरिम जमानत पर रहते हुए नियमित जमानत याचिका सुनवाई योग्य नहीं, आरोपी का 'हिरासत' में होना अनिवार्य : झारखंड हाइकोर्ट

झारखंड हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिस व्यक्ति को अंतरिम जमानत मिली हुई है, उसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 483 के अंतर्गत नियमित जमानत के लिए हिरासत में माना नहीं जा सकता, जब तक कि वह वास्तव में न्यायिक हिरासत में न हो या अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण न करे।हाइकोर्ट ने कहा कि नियमित जमानत की याचिका केवल उसी स्थिति में सुनवाई योग्य होती है, जब आरोपी विधिवत हिरासत में हो।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की एकल पीठ एक आरोपी द्वारा दायर नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो...

हाईकोर्ट की अवमानना ​​की चेतावनी के बाद झारखंड सरकार ने चार हफ़्तों के अंदर राज्य सूचना आयोग को चालू करने का वादा किया
हाईकोर्ट की अवमानना ​​की चेतावनी के बाद झारखंड सरकार ने चार हफ़्तों के अंदर राज्य सूचना आयोग को चालू करने का वादा किया

29 जनवरी, 2026 को झारखंड राज्य ने झारखंड हाईकोर्ट को बताया कि राज्य सूचना आयोग, जो अपने अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति न होने के कारण काम नहीं कर रहा था, उसे चार हफ़्तों के अंदर चालू कर दिया जाएगा।जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की डिवीजन बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी।सुनवाई के दौरान, झारखंड सरकार के मुख्य सचिव अविनाश कुमार और कार्मिक, प्रशासनिक सुधार और राजभाषा विभाग के सचिव प्रवीन कुमार टोप्पो कोर्ट में पेश हुए और आश्वासन दिया कि राज्य आयोग को तय चार हफ़्तों के अंदर...