झारखंड हाईकोट
पंचायत सचिव को 'तुम-ताम' या 'मेरे-तेरे' कहकर बुलाना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं: झारखंड हाईकोर्ट ने BDO के खिलाफ FIR रद्द की
झारखंड हाईकोर्ट ने ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की। उन पर एक पंचायत सचिव को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप था। कोर्ट ने कहा कि मृतक को सिर्फ़ "तुम-ताम" या "मेरे-तेरे" कहकर बुलाना आत्महत्या के लिए उकसाने जैसा नहीं है। कोर्ट ने माना कि अगर FIR में लगाए गए आरोपों को पूरी तरह सच भी मान लिया जाए तो भी वे भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने के अपराध की शर्तों को पूरा नहीं करते हैं।जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की सिंगल जज बेंच उस याचिका पर सुनवाई...
व्यभिचार अब अपराध नहीं: झारखंड हाईकोर्ट ने विवाहेतर संबंध के आरोप में कॉन्स्टेबल की बर्खास्तगी रद्द की
झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड आर्म्ड पुलिस के एक कॉन्स्टेबल की बर्खास्तगी रद्द की। यह बर्खास्तगी विवाहेतर संबंध (Adultery) के आरोप में की गई। कोर्ट ने कहा कि 'जोसेफ शाइन बनाम भारत संघ' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद व्यभिचार अब कोई आपराधिक अपराध नहीं रह गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि अनुशासनात्मक अधिकारी ने कॉन्स्टेबल को ऐसे आधार पर बर्खास्त किया था जो कभी चार्ज-शीट का हिस्सा ही नहीं था, जिससे यह आदेश गैर-कानूनी और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करने वाला हो गया।जस्टिस दीपक रोशन की...
गुड़ का बर्तन ज़मीन पर रखने पर बहू को डांटना क्रूरता नहीं: झारखंड हाईकोर्ट ने रद्द की सास की सजा
झारखंड हाईकोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत दोषी ठहराई गई एक सास की सजा रद्द करते हुए कहा कि केवल गुड़ के शीरे का बर्तन जमीन पर रखने पर बहू को डांटना या अपशब्द कहना अपने आप में क्रूरता नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष धारा 498ए के तहत आवश्यक कानूनी तत्व साबित करने में असफल रहा है।जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने यह फैसला दुमका के चतुर्थ अपर जिला एवं सेशन जज (फास्ट ट्रैक कोर्ट) के उस निर्णय के खिलाफ दायर आपराधिक अपील पर सुनाया, जिसमें सास को धारा 498ए के तहत...
2014 के चुनावी भाषण मामले में हेमंत सोरेन को राहत: हाईकोर्ट ने रद्द की आपराधिक कार्यवाही
झारखंड हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ 2014 के चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए भाषण से जुड़ी आपराधिक कार्यवाही रद्द की। कोर्ट ने माना कि छोटानागपुर टेनेंसी (CNT) एक्ट, संथाल परगना टेनेंसी (SPT) एक्ट और श्रम कानूनों में प्रस्तावित बदलावों के बारे में उनकी टिप्पणियां 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' की धारा 125 के तहत अपराध की श्रेणी में नहीं आती हैं।जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की सिंगल जज बेंच उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आपराधिक कार्यवाही, 16 अगस्त 2017 के संज्ञान लेने वाले आदेश और...
NDPS Act के तहत 'भांग' को 'कैनाबिस (हेम्प)' की परिभाषा में शामिल नहीं किया गया: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि भांग रखना NDPS Act, 1985 के तहत अपराध नहीं है, क्योंकि इसे एक्ट की धारा 2(iii) के तहत "कैनाबिस (हेम्प)" की कानूनी परिभाषा से बाहर रखा गया। NDPS Act के तहत अपील करने वाले व्यक्ति की सज़ा रद्द करते हुए कोर्ट ने कहा कि जब फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) ने रिपोर्ट दी कि ज़ब्त किया गया पदार्थ भांग था, न कि गांजा, तो सज़ा को बरकरार नहीं रखा जा सकता।जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की सिंगल जज बेंच एक क्रिमिनल अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें NDPS Act की धारा 20(B), 22(B) और...
सिर्फ कुर्फ़ानामा काफी नहीं, बेदखली रोकने के लिए 1949 के कानून से पहले 12 वर्ष का कब्जा साबित करना होगा: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति कुर्फ़ानामा के आधार पर जमीन पर अपना अधिकार जताकर बेदखली की कार्रवाई का विरोध करना चाहता है तो उसे यह साबित करना होगा कि संताल परगना काश्तकारी (पूरक उपबंध) अधिनियम, 1949 लागू होने से पहले उसका 12 वर्ष का वैध कब्जा था।अदालत ने यह भी कहा कि तस्दीक नियमावली की शर्तों को पूरा नहीं करने वाले कुर्फ़ानामा के आधार पर बेदखली की कार्रवाई को चुनौती नहीं दी जा सकती। जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की एकल पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें संताल परगना...
हिरासत में मौत और दुष्कर्म मामलों की न्यायिक जांच खत्म करने वाले NHRC के आदेश को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती
झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के उस सर्कुलर को चुनौती दी गई, जिसके जरिए हिरासत में मौत, हिरासत से लापता होने और हिरासत में दुष्कर्म के मामलों में अनिवार्य न्यायिक जांच संबंधी अपने पहले के निर्देश को वापस ले लिया गया था।याचिका में 14 मई 2024 का NHRC का सर्कुलर रद्द करने की मांग की गई। इस सर्कुलर में आयोग ने 4 सितंबर 2020 के अपने पूर्व निर्देश को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) लागू होने के बाद निष्प्रभावी बताते हुए उसे वापस और निरस्त कर दिया...
CrPC की धारा 216 के तहत आरोप बदलने या जोड़ने की शक्ति केवल अदालत की, पक्षकारों के आवेदन से नहीं होती सीमित: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा है कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 216 के तहत आरोप (Charge) में बदलाव या नया आरोप जोड़ने का अधिकार केवल ट्रायल कोर्ट के पास है। हालांकि, यदि अभियोजन या आरोपी इस संबंध में आवेदन देकर अदालत का ध्यान प्रासंगिक तथ्यों की ओर आकर्षित करते हैं, तो केवल इस वजह से अदालत की शक्ति सीमित नहीं हो जाती।जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की एकलपीठ ने यह टिप्पणी उस आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, गढ़वा द्वारा धारा 328 और 302/34 आईपीसी के...
अभियोजन की अर्जी से ट्रायल कोर्ट की शक्ति सीमित नहीं होती, फैसला आने से पहले कभी भी आरोप बदले जा सकते हैं: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 216 के तहत आरोपों में संशोधन या नए आरोप जोड़ने का अधिकार केवल ट्रायल कोर्ट के पास है। यदि अभियोजन या आरोपी किसी आवेदन के माध्यम से इस ओर अदालत का ध्यान आकर्षित करता है तो मात्र इसी आधार पर अदालत की शक्ति सीमित नहीं हो जाती।जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ एडिशनल सेशन जज, गढ़वा के उस आदेश को चुनौती देने वाली आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने धारा 216 के तहत अभियोजन की अर्जी स्वीकार...
निजी पक्षों के भूमि विवाद का फैसला नहीं कर सकते राज्य दिव्यांग आयुक्त, यह अधिकार केवल सिविल कोर्ट का: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य दिव्यांग आयुक्त को निजी पक्षों के बीच अचल संपत्ति के स्वामित्व या भूमि विवाद का फैसला करने का अधिकार नहीं है।अदालत ने कहा कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत आयुक्त को जांच के सीमित उद्देश्य से सिविल अदालत जैसी कुछ शक्तियां दी गई हैं, लेकिन इससे उन्हें भूमि स्वामित्व से जुड़े विवादों का निपटारा करने का अधिकार नहीं मिल जाता। जस्टिस श्री आनंद सेन की एकल पीठ दो संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। पहली याचिका में राज्य दिव्यांग आयुक्त के 28 जून 2019...
वैवाहिक मामले की सुनवाई के दौरान बेटा बालिग हो जाए तो माँ उसके DNA टेस्ट के लिए सहमति नहीं दे सकती: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि अगर वैवाहिक मामले की सुनवाई के दौरान बच्चा बालिग हो जाता है तो माँ के पास बच्चे की ओर से DNA टेस्ट के लिए सहमति देने का अधिकार नहीं रहता। कोर्ट ने कहा कि एक बालिग बच्चा, जो मामले का पक्षकार नहीं है, उसे DNA टेस्ट कराने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और अगर बच्चा ऐसा टेस्ट कराने से इनकार करता है तो माँ के खिलाफ कोई प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की सिंगल जज बेंच एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका गिरिडीह के प्रिंसिपल जज के उस आदेश...
“17 साल की नौकरी के बाद चाय और बिस्किट घर ले जाने पर नौकरी से निकालना सही नहीं”: झारखंड हाईकोर्ट ने चपरासी को बहाल करने का आदेश दिया
झारखंड हाईकोर्ट ने कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले चपरासी को बहाल करने का आदेश दिया, जिसे ऑफिस से चाय और बिस्किट लेने के आरोप में नौकरी से निकाल दिया गया था। कोर्ट ने माना कि कथित गलत काम के लिए यह सज़ा बहुत ज़्यादा है। कोर्ट ने यह भी पाया कि अनुशासनात्मक कार्रवाई भी गलत तरीके से की गई, क्योंकि कर्मचारी को एक अस्पष्ट 'शो-कॉज़ नोटिस' (कारण बताओ नोटिस) दिया गया और बिना कोई कारण बताए उसका जवाब खारिज कर दिया गया।चीफ जस्टिस एम.एस. सोनाक और जस्टिस राजेश शंकर की डिवीजन बेंच उस अपील पर सुनवाई कर रही थी,...
दो वकीलों के बीच स्कूल मैनेजमेंट विवाद: झारखंड हाईकोर्ट ने वकील को अग्रिम ज़मानत दी
झारखंड हाईकोर्ट ने एक वकील को अग्रिम ज़मानत दी। उन पर एक स्कूल के मैनेजमेंट में वित्तीय गड़बड़ी और धोखाधड़ी का आरोप है। यह मामला हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले एक साथी वकील ने दर्ज कराया।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की सिंगल जज बेंच जगन्नाथपुर पुलिस स्टेशन केस नंबर 314/2017 (IPC की धारा 406, 420, 467, 468, 379 और 120B/34 के तहत दर्ज) से जुड़ी अग्रिम ज़मानत अर्ज़ी पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ चार्जशीट दाखिल होने के आधार पर अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी खारिज नहीं की जा सकती और ऐसी...
झारखंड हाईकोर्ट ने पुरुष एसिड अटैक पीड़ितों के लिए मुआवज़ा स्कीम में बदलाव का सुझाव दिया, पीड़ित का मुआवज़ा बढ़ाकर ₹15 लाख किया
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य को 'झारखंड पीड़ित मुआवज़ा स्कीम, 2016' के तहत पुरुष एसिड अटैक पीड़ितों को दिए जाने वाले मुआवज़े पर फिर से विचार करना चाहिए। कोर्ट ने 2019 की संशोधन स्कीम के तहत पुरुष और महिला पीड़ितों को मिलने वाले मुआवज़े में बड़े अंतर को देखते हुए यह बात कही।जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की डिवीज़न बेंच ने एसिड अटैक पीड़ित को मिलने वाले मुआवज़े को ₹3 लाख से बढ़ाकर ₹15 लाख करते हुए यह टिप्पणी की।कोर्ट एक सिंगल जज के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई...
झारखंड हाईकोर्ट ने पलामू में कस्टडी में हुई कथित मौत की न्यायिक जांच का आदेश दिया, BNSS की धारा 196(2) के तहत जांच करने को कहा
झारखंड हाईकोर्ट ने पलामू जिले में व्यक्ति की कस्टडी में हुई मौत और उस दौरान उसे दी गई यातना के आरोपों की न्यायिक जांच का आदेश दिया। कोर्ट 'डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य' मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए सुरक्षा उपायों के उल्लंघन का आरोप लगाने वाली अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रहा था।जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की डिवीजन बेंच ने कहा कि अवमानना की कार्यवाही शुरू करने से पहले यह तय करना ज़रूरी है कि क्या किसी सरकारी अधिकारी ने 'डी.के. बसु' मामले में तय...
दिव्यांगों के अधिकारों से जुड़े मामलों में विशेष संवेदनशीलता जरूरी, सेवा विवाद होने पर भी जनहित याचिका सुनवाई योग्य: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों और भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े मामलों में सामान्य सेवा विवादों पर लागू प्रतिबंध के बावजूद जनहित याचिका पर विचार किया जा सकता है।अदालत ने कहा कि दिव्यांगजनों से जुड़े मुद्दों को "विशेष संवेदनशीलता" के साथ देखा जाना चाहिए। चीफ जस्टिस एम. एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ एक ऐसी याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें वर्ष 2018 की उस अधिसूचना को चुनौती दी गई, जिसके तहत भर्ती प्रक्रियाओं में दिव्यांगता प्रमाणपत्र...
झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: ऑनलाइन जमीन रिकॉर्ड में गड़बड़ी खत्म, अब सीओ के डिजिटल साइन से ही होगा सत्यापन
झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य भर के सर्कल अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे फिजिकल ज़मीन रजिस्टर और राज्य के ऑनलाइन पोर्टल पर दिख रही एंट्रीज़ के बीच बार-बार पाई जा रही गड़बड़ियों को देखते हुए ऑनलाइन ज़मीन के रिकॉर्ड की जांच करें और उन्हें डिजिटल रूप से प्रमाणित करें।जस्टिस आनंद सेन की सिंगल जज बेंच, लोहरदगा ज़िले के बारीडीह गाँव में स्थित ज़मीन से जुड़े रिकॉर्ड में सुधार की मांग करने वाली राम प्रकाश भगत उर्फ राम प्रकाश उरांव की रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी।याचिकाकर्ता ने रजिस्टर-II, लगान रसीदों और...
झारखंड सरकार के ₹6000 के सालाना प्रीमियम के आश्वासन के बाद हाईकोर्ट ने वकीलों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस की मांग वाली PIL बंद की
झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों के लिए आर्थिक मदद और मेडिकल इंश्योरेंस कवरेज की मांग वाली PIL का निपटारा किया। कोर्ट ने झारखंड सरकार के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया कि रजिस्टर्ड वकीलों के लिए सालाना प्रीमियम का भुगतान राज्य सरकार लगातार करती रहेगी।चीफ जस्टिस एम.एस. सोनाक और जस्टिस राजेश शंकर की डिवीजन बेंच जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका झारखंड में प्रैक्टिस करने वाले वकील ने दायर की थी, जिसमें वकीलों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों के लिए आर्थिक मदद...
लोकायुक्त के मुख्य न्यायिक काम उनके भाई के खिलाफ शिकायत होने पर भी किसी और को नहीं सौंपे जा सकते: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने लोकायुक्त के अपने ही भाई के खिलाफ आरोपों से जुड़ी कार्यवाही में लोकायुक्त द्वारा पारित एक आदेश को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि 'ज़रूरत का सिद्धांत' (doctrine of necessity) तब लागू होता है, जब लोकायुक्त का पद एक-सदस्यीय संस्था हो और झारखंड लोकायुक्त अधिनियम, 2001 के तहत पद के मुख्य न्यायिक काम किसी और को नहीं सौंपे जा सकते हों।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की सिंगल जज बेंच संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में झारखंड के लोकायुक्त द्वारा...
झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: हाईकोर्ट में लॉ क्लर्क बनने से वकालत नामांकन का अधिकार खत्म नहीं होता
झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि हाईकोर्ट में लॉ रिसर्चर या रिसर्च एसोसिएट के रूप में कार्यरत लॉ ग्रेजुएट को वकील के रूप में नामांकन से वंचित नहीं किया जा सकता।हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी नियुक्ति के दौरान उसका वकालत लाइसेंस निलंबित माना जाएगा। जस्टिस आनंद सेन की एकलपीठ ऋचा प्रिया की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में झारखंड राज्य बार काउंसिल को निर्देश देने की मांग की गई कि उसे उसी तारीख से एडवोकेट के रूप में नामांकित किया जाए, जिस दिन उसके साथ आवेदन करने...













