झारखंड हाईकोट

प्रथम दृष्टया भ्रष्टाचार: स्टूडेंट्स के रजिस्ट्रेशन न होने पर झारखंड हाइकोर्ट ने JUT-AICTE के खिलाफ CBI जांच के आदेश दिए
प्रथम दृष्टया भ्रष्टाचार: स्टूडेंट्स के रजिस्ट्रेशन न होने पर झारखंड हाइकोर्ट ने JUT-AICTE के खिलाफ CBI जांच के आदेश दिए

झारखंड हाइकोर्ट ने झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (JUT) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए CBI जांच के आदेश दिए। कोर्ट ने तकनीकी स्टूडेंट के पंजीकरण से जुड़े मामले में टिप्पणी की कि यह मामला प्रथम दृष्टया राज्य अधिकारियों द्वारा अपनाए गए भ्रष्ट आचरण को दर्शाता है, जिसने स्टूडेंट्स के भविष्य को संकट में डाल दिया।जस्टिस राजेश कुमार ने धनबाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।सुनवाई के दौरान...

BREAKING | पुलिस रेड के बाद ED रांची ऑफिस में पैरामिलिट्री फोर्स तैनात करने का आदेश दिया, हाईकोर्ट ने अधिकारियों के खिलाफ FIR पर रोक लगाई
BREAKING | पुलिस रेड के बाद ED रांची ऑफिस में पैरामिलिट्री फोर्स तैनात करने का आदेश दिया, हाईकोर्ट ने अधिकारियों के खिलाफ FIR पर रोक लगाई

झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR में आगे की जांच और कार्यवाही पर रोक लगाई।कोर्ट ने भारत सरकार के गृह सचिव को रांची में ED के ऑफिस में CISF या BSF, या किसी अन्य उपयुक्त पैरामिलिट्री फोर्स को तैनात करने का भी निर्देश दिया। यह आदेश झारखंड पुलिस के ED ऑफिस में घुसने और परिसर को क्राइम सीन मानने की घटना के बाद आया है।झारखंड हाईकोर्ट की जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की सिंगल जज बेंच राज्य पुलिस द्वारा भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा...

कोर्ट के आदेश पर कर्मचारी की बहाली पिछले दुर्व्यवहार के लिए अनुशासनात्मक जांच को नहीं रोकती: राजस्थान हाईकोर्ट
कोर्ट के आदेश पर कर्मचारी की बहाली पिछले दुर्व्यवहार के लिए अनुशासनात्मक जांच को नहीं रोकती: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि कोर्ट के आदेश के आधार पर किसी सरकारी कर्मचारी के रिप्रेजेंटेशन पर विचार करने के बाद उसे बहाल करना दुर्व्यवहार को माफ़ करने के बराबर नहीं था। इससे राज्य का उस कर्मचारी के खिलाफ उसी अवधि के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का अधिकार खत्म नहीं होता।जस्टिस आनंद शर्मा की बेंच ने साफ किया कि जब तक कोई खास आदेश पास नहीं किया जाता, जो दुर्व्यवहार को माफ़ करता हो, तब तक न्यायिक आदेश के बाद सिर्फ़ बहाली से राज्य को अनुशासनात्मक जांच करने से नहीं रोका जा सकता।याचिकाकर्ता को...

नाबालिग थैलेसीमिया मरीजों को HIV संक्रमित खून चढ़ाने के आरोप पर FIR की मांग, झारखंड हाईकोर्ट में याचिका
नाबालिग थैलेसीमिया मरीजों को HIV संक्रमित खून चढ़ाने के आरोप पर FIR की मांग, झारखंड हाईकोर्ट में याचिका

झारखंड हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि अक्टूबर 2025 में पश्चिम सिंहभूम जिले के चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में थैलेसीमिया से पीड़ित नाबालिग बच्चों को HIV संक्रमित रक्त चढ़ाया गया। याचिका में इस घटना को लेकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता एम. शादाब अंसारी ने बताया कि पीड़ित बच्चे थैलेसीमिया नामक आजीवन रहने वाली आनुवंशिक रक्त बीमारी से पीड़ित हैं, जिसके इलाज के लिए उन्हें नियमित रूप से रक्त चढ़ाना पड़ता है। याचिका में...

कर्मचारी भविष्य निधि के लाभ स्वीकार करने पर रिटायरमेंट वेतन का अधिकार समाप्त: झारखंड हाइकोर्ट
कर्मचारी भविष्य निधि के लाभ स्वीकार करने पर रिटायरमेंट वेतन का अधिकार समाप्त: झारखंड हाइकोर्ट

झारखंड हाइकोर्ट की एक खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत को स्पष्ट करते हुए व्यवस्था दी कि यदि कोई कर्मचारी स्वेच्छा से कर्मचारी भविष्य निधि योजना का विकल्प चुनता है और सेवानिवृत्ति के समय इसके सभी लाभ प्राप्त कर लेता है तो वह बाद में राज्य सरकार से पेंशन या रिटायरमेंट वेतन का दावा नहीं कर सकता।जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस राजेश कुमार की खंडपीठ ने कहा कि वर्षों तक मौन रहने और वित्तीय लाभ स्वीकार करने के बाद इस तरह की मांग करना कानून की दृष्टि में उचित नहीं है।यह विवाद एक ऐसे...

पत्नी के निजी फोटो तक अनधिकृत पहुंच और उन्हें वायरल करने की धमकी क्रूरता: झारखंड हाइकोर्ट
पत्नी के निजी फोटो तक अनधिकृत पहुंच और उन्हें वायरल करने की धमकी क्रूरता: झारखंड हाइकोर्ट

झारखंड हाइकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि पति द्वारा पत्नी के निजी और आपत्तिजनक फोटो तक अनधिकृत रूप से पहुंच बनाना, उन्हें अपने पास सुरक्षित करना और उन्हें सार्वजनिक करने की धमकी देना क्रूरता की श्रेणी में आता है।हाइकोर्ट ने इसे पति द्वारा पत्नी की छवि धूमिल करने और चरित्र हनन का गंभीर मामला बताया।यह फैसला जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनाया, जिसमें पत्नी द्वारा हिंदू विवाह अधिनियम के तहत विवाह विच्छेद की याचिका...

अपने पद की शक्तियों का दुरुपयोग किया: झारखंड हाईकोर्ट ने ज़मीन घोटाले के मामले में निलंबित IAS अधिकारी विनय कुमार चौबे की ज़मानत याचिका खारिज की
'अपने पद की शक्तियों का दुरुपयोग किया': झारखंड हाईकोर्ट ने ज़मीन घोटाले के मामले में निलंबित IAS अधिकारी विनय कुमार चौबे की ज़मानत याचिका खारिज की

झारखंड हाईकोर्ट ने मंगलवार (6 जनवरी) को हज़ारीबाग के पूर्व डिप्टी कमिश्नर (DC) और निलंबित IAS अधिकारी विनय कुमार चौबे की ज़मानत याचिका खारिज की। चौबे पर एंटी करप्शन ब्यूरो ने कथित ज़मीन घोटाले के मामले में केस दर्ज किया था।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी याचिकाकर्ता की रेगुलर ज़मानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 409, 467, 468, 471, 420, और 120B के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) और 13(1)(c) और (d) के तहत दर्ज FIR में आरोपी बनाया...

समझौते की शर्तों के उल्लंघन मात्र से जमानत रद्द नहीं की जा सकती: झारखंड हाईकोर्ट
समझौते की शर्तों के उल्लंघन मात्र से जमानत रद्द नहीं की जा सकती: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने अहम फैसला देते हुए कहा कि एक बार जमानत दिए जाने के बाद केवल समझौते की शर्तों का पालन न करना या भुगतान करने के वादे को पूरा न कर पाना, अपने आप में जमानत रद्द करने का आधार नहीं बन सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत रद्द करने के लिए इससे कहीं अधिक ठोस और कानूनी आधार आवश्यक होता है।यह टिप्पणी जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की सिंगल बेंच ने उस मामले में की, जिसमें याचिकाकर्ता ने न्यायिक आयुक्त, रांची द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी। उक्त आदेश के जरिए याचिकाकर्ता को पहले से मिली अग्रिम...

झारखंड हाईकोर्ट ने पांच साल की बच्ची के रेप और मर्डर के दोषी व्यक्ति की मौत की सज़ा उम्रकैद में बदली
झारखंड हाईकोर्ट ने पांच साल की बच्ची के रेप और मर्डर के दोषी व्यक्ति की मौत की सज़ा उम्रकैद में बदली

झारखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में पांच साल की बच्ची के रेप और मर्डर के दोषी एक आरोपी की मौत की सज़ा को उम्रकैद में यह मानते हुए बदल दिया कि आरोपी के सुधार और पुनर्वास की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की डिवीजन बेंच एक मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोपी इंदर उरांव को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) की धारा 6 के तहत अपराधों के लिए दोषी पाया गया। उसे IPC की धारा 302 के तहत मौत की सज़ा और...

झारखंड हाईकोर्ट ने बिजली ड्यूटी लगाने के लिए नेट चार्ज फॉर्मूला रद्द किया, अत्यधिक डेलीगेशन पर सवाल उठाया
झारखंड हाईकोर्ट ने बिजली ड्यूटी लगाने के लिए 'नेट चार्ज' फॉर्मूला रद्द किया, अत्यधिक डेलीगेशन पर सवाल उठाया

झारखंड हाईकोर्ट ने सोमवार को बिहार बिजली ड्यूटी एक्ट, 1948 में राज्य के एक संशोधन द्वारा लाए गए एक प्रावधान रद्द कर दिया, जिसके तहत उपभोक्ताओं के "नेट चार्ज" के प्रतिशत के रूप में बिजली ड्यूटी लगाने की अनुमति थी। कोर्ट ने कहा कि विधायिका ने बिना किसी पॉलिसी गाइडेंस के अपनी टैक्स लगाने की शक्ति कार्यपालिका को सौंप दी थी।कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य सरकार को बिना किसी स्टैंडर्ड या लिमिट तय किए, वैल्यू-बेस्ड फॉर्मूले पर बिजली ड्यूटी तय करने का अधिकार देना, विधायी शक्ति का अत्यधिक डेलीगेशन था और इससे...

झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व IAS अधिकारी पूजा सिंघल के खिलाफ़ संज्ञान को सही ठहराया, कहा- भ्रष्टाचार को बचाने के लिए पहले से मंज़ूरी ज़रूरी नहीं
झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व IAS अधिकारी पूजा सिंघल के खिलाफ़ संज्ञान को सही ठहराया, कहा- भ्रष्टाचार को बचाने के लिए पहले से मंज़ूरी ज़रूरी नहीं

झारखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 197 के तहत पहले से मंज़ूरी की शर्त सिर्फ़ उन कामों पर लागू होती है, जो आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन से उचित रूप से जुड़े हों, न कि व्यक्तिगत या अवैध कामों पर सिर्फ़ इसलिए कि वे किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा किए गए। कोर्ट ने साफ़ किया कि CrPC की धारा 197 के तहत सुरक्षा का मकसद भ्रष्ट अधिकारियों को आपराधिक मुक़दमे से बचाना नहीं है।झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस अंबुज नाथ की सिंगल जज बेंच मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम, रांची के...

ध्वस्त मकानों का मुआवजा दोषी अधिकारियों से ही वसूला जाए, राज्य पर नहीं डाला जा सकता बोझ: झारखंड हाईकोर्ट
ध्वस्त मकानों का मुआवजा दोषी अधिकारियों से ही वसूला जाए, राज्य पर नहीं डाला जा सकता बोझ: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान की अधिग्रहित भूमि पर हुए अवैध निर्माण और अतिक्रमण के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जिन अधिकारियों की लापरवाही और मिलीभगत से यह स्थिति पैदा हुई, उन्हीं से ध्वस्त मकानों का मुआवजा वसूला जाना चाहिए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसी अवैधताओं के लिए राज्य के खजाने पर बोझ डालना न्यायसंगत नहीं है।चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने रिम्स की भूमि पर हुए अतिक्रमण से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिए।...

अब कोई ढिलाई नहीं: अवैध पशु वध और मांस बिक्री पर झारखंड हाईकोर्ट की सख्त चेतावनी
अब कोई ढिलाई नहीं: अवैध पशु वध और मांस बिक्री पर झारखंड हाईकोर्ट की सख्त चेतावनी

झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अवैध पशु वध और मांस की अवैध बिक्री पर कड़ा रुख अपनाने का निर्देश देते हुए कहा कि अब इस मामले में किसी भी तरह की दिली-डैलीइंग (अनावश्यक टालमटोल) बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के प्रावधानों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए।चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ रांची में अवैध रूप से पशुओं, विशेषकर मुर्गी पक्षियों, के वध और सार्वजनिक सड़कों पर पशु शवों के...

अगर कट-ऑफ तारीख तक कोई ऑप्शन नहीं चुना जाता है तो कर्मचारी को CPF से ज़्यादा फ़ायदेमंद GPF-कम-पेंशन स्कीम में बदला हुआ माना जाएगा: झारखंड हाईकोर्ट
अगर कट-ऑफ तारीख तक कोई ऑप्शन नहीं चुना जाता है तो कर्मचारी को CPF से ज़्यादा फ़ायदेमंद GPF-कम-पेंशन स्कीम में बदला हुआ माना जाएगा: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट की चीफ़ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की एक डिवीज़न बेंच ने कहा कि फ़ायदेमंद पेंशन स्कीम में बदलना बिना किसी साफ़ ऑप्शन के भी मंज़ूर है। 01.01.1986 से पहले नियुक्त कर्मचारी को CPF स्कीम से ज़्यादा फ़ायदेमंद GPF-कम-पेंशन स्कीम में बदला हुआ माना जाएगा, अगर तय कट-ऑफ तारीख तक CPF में बने रहने का कोई पॉज़िटिव ऑप्शन नहीं चुना गया।मामले के तथ्यकर्मचारी केंद्रीय विद्यालय में योग टीचर था, जिसे 1981 में नियुक्त किया गया। वह मार्च 2019 में रिटायर हुआ। उसने शुरू में...

हुक या क्रुक से जीतने वाला सामान्य पक्षकार नहीं है सरकार: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की आक्रामक मुकदमेबाजी पर कड़ी फटकार, 1 लाख का जुर्माना
हुक या क्रुक से जीतने वाला सामान्य पक्षकार नहीं है सरकार: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की आक्रामक मुकदमेबाजी पर कड़ी फटकार, 1 लाख का जुर्माना

झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की आक्रामक और गैर-जिम्मेदाराना मुकदमेबाजी पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि सरकार कोई साधारण वादी नहीं है, जो अपने ही नागरिक के खिलाफ किसी भी तरह से मामला जीतने की कोशिश करे।अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य का दायित्व न्यायपूर्ण आचरण का है न कि तकनीकी दांव-पेंच अपनाकर कमजोर पक्ष पर अनुचित बढ़त हासिल करने का।चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ एक सिविल रिव्यू याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसे राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के खिलाफ...

देश की सेवा कर रहे स्क्वाड्रन लीडर की आज़ादी दांव पर: झारखंड हाईकोर्ट ने क्रूरता मामले में गिरफ्तार IAF अधिकारी को अग्रिम ज़मानत दी
'देश की सेवा कर रहे स्क्वाड्रन लीडर की आज़ादी दांव पर': झारखंड हाईकोर्ट ने क्रूरता मामले में गिरफ्तार IAF अधिकारी को अग्रिम ज़मानत दी

झारखंड हाईकोर्ट ने मंगलवार (16 दिसंबर) को भारतीय वायु सेना (IAF) में सेवारत स्क्वाड्रन लीडर को अग्रिम ज़मानत दी, जिस पर दहेज लेने और अपनी पत्नी पर क्रूरता करने का आरोप था। कोर्ट ने कहा कि परिस्थितियां असाधारण और अजीब हैं, जहां देश की सेवा कर रहे एक अधिकारी की आज़ादी दांव पर है।ऐसा करते हुए कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता फरार नहीं है और वास्तव में जाँच में सहयोग कर रहा है।याचिकाकर्ता को BNS की धारा 85 [पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा महिला पर क्रूरता], 115(2) [जानबूझकर गंभीर चोट पहुँचाने की...

झारखंड हाईकोर्ट ने शेयर्ड पेरेंटिंग ऑर्डर को खारिज किया, कहा- बच्चे की भलाई पिता के नेचुरल गार्जियन होने के स्टेटस से ज़्यादा ज़रूरी
झारखंड हाईकोर्ट ने शेयर्ड पेरेंटिंग ऑर्डर को खारिज किया, कहा- बच्चे की भलाई पिता के नेचुरल गार्जियन होने के स्टेटस से ज़्यादा ज़रूरी

झारखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि हिंदू माइनॉरिटी एंड गार्जियनशिप एक्ट की धारा 6 को धारा 13 के साथ पढ़ा जाना चाहिए। साथ ही बच्चे की भलाई सबसे ज़रूरी है, भले ही पिता को नेचुरल गार्जियन बनाया गया हो। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस ऑर्डर को खारिज कर दिया, जिसमें “शेयर्ड पेरेंटिंग अरेंजमेंट” का निर्देश दिया गया था और पत्नी को कस्टडी दी गई थी।झारखंड हाईकोर्ट की जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की डिवीजन बेंच फैमिली कोर्ट्स एक्ट की धारा 19(1) के तहत फैमिली कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ...

झारखंड हाईकोर्ट ने कैदियों को दिए जाने वाले खाने की क्वालिटी की जांच के लिए जेलों के इंस्पेक्शन का निर्देश दिया
झारखंड हाईकोर्ट ने कैदियों को दिए जाने वाले खाने की क्वालिटी की जांच के लिए जेलों के इंस्पेक्शन का निर्देश दिया

झारखंड हाईकोर्ट ने अलग-अलग डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटीज़ (DLSA) को अलग-अलग जेलों का इंस्पेक्शन करने का निर्देश दिया ताकि कैदियों को दिए जाने वाले खाने की क्वालिटी की जांच की जा सके और यह चेक किया जा सके कि यह जेल मैनुअल के अनुसार है या नहीं।कोर्ट ने आगे निर्देश दिया कि DLSA या झारखंड स्टेट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी जेलों में दिए जाने वाले खाने की क्वालिटी की अक्सर ऐसी जांच करेगी।कोर्ट एक आदमी के अपील करने वाले की सुनवाई कर रहा था, जिसने स्पेशल जज, NIA के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी...