झारखंड हाईकोट

पूर्ण बरी होने या निलंबन पूरी तरह अनुचित पाए जाने पर ही मिलेगा निलंबन अवधि का पूरा वेतन: झारखंड हाईकोर्ट
पूर्ण बरी होने या निलंबन पूरी तरह अनुचित पाए जाने पर ही मिलेगा निलंबन अवधि का पूरा वेतन: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी निलंबित कर्मचारी को बिना पूर्ण दोषमुक्ति के सेवा में बहाल किया जाता है अथवा निलंबन को पूरी तरह अनुचित नहीं ठहराया जाता तो वह निलंबन अवधि के लिए पूर्ण वेतन और निर्वाह भत्ता के अंतर की मांग नहीं कर सकता। ऐसे मामलों में कर्मचारी को केवल उतना ही वेतन और भत्ता मिलेगा, जितना सक्षम प्राधिकारी उचित समझे।जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय और जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने यह निर्णय देते हुए कर्मचारी की अपील खारिज की और एकलपीठ का आदेश बरकरार रखा।मामले के अनुसार कर्मचारी...

झारखंड हाईकोर्ट ने अडानी थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिका स्वीकार की
झारखंड हाईकोर्ट ने अडानी थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिका स्वीकार की

झारखंड हाईकोर्ट ने 15 अप्रैल 2026 के आदेश में गोड्डा जिले में अडानी थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए 1,363 एकड़ से अधिक कृषि भूमि के अधिग्रहण को चुनौती देने वाली रिट याचिका को स्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई करने का निर्देश दिया। इस मामले की सुनवाई जस्टिस आनंद सेन की एकल पीठ ने की।याचिका में भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया को चुनौती दी गई है, जो भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता अधिनियम, 2013 के तहत की गई थी। इसमें अधिनियम की धारा 4, 5, 11 और 19 के तहत जारी...

बिना इजाज़त जान-बूझकर गैर-हाज़िरी होने पर ही नौकरी से निकाला जा सकता है, बीमारी की वजह से गैर-हाज़िरी पर सज़ा ज़्यादा मानी जाएगी: झारखंड हाईकोर्ट
बिना इजाज़त जान-बूझकर गैर-हाज़िरी होने पर ही नौकरी से निकाला जा सकता है, बीमारी की वजह से गैर-हाज़िरी पर सज़ा ज़्यादा मानी जाएगी: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट की चीफ़ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस दीपक रोशन की डिवीज़न बेंच ने फ़ैसला दिया कि ड्यूटी से बिना इजाज़त गैर-हाज़िरी को जान-बूझकर किया गया साबित करना ज़रूरी है, तभी नौकरी से निकाला जा सकता है। अगर गैर-हाज़िरी किसी मज़बूरी वाली वजह से, जैसे कि किसी मेडिकल बीमारी की वजह से हो, तो सज़ा ज़्यादा मानी जाएगी।मामले की पृष्ठभूमिअपील में जवाब देने वाले (कर्मचारी) को असिस्टेंट टीचर के तौर पर नियुक्त किया गया। तीन साल तक सेवा करने के बाद वह गंभीर रूप से बीमार पड़ गया। फिर वह ठीक से मेडिकल जांच...

HIV संक्रमित खून चढ़ाने का मामला गंभीर, बच्चों का भविष्य खतरे में: झारखंड हाईकोर्ट ने मांगी जांच रिपोर्ट
HIV संक्रमित खून चढ़ाने का मामला गंभीर, बच्चों का भविष्य खतरे में: झारखंड हाईकोर्ट ने मांगी जांच रिपोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने चाईबासा सदर अस्पताल में नाबालिग बच्चों को HIV संक्रमित खून चढ़ाने के मामले को बेहद गंभीर बताते हुए राज्य सरकार से जांच की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी। अदालत ने कहा कि इस घटना ने बच्चों के भविष्य को खतरे में डाल दिया और जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए।जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय की सिंगल बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं ने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए आरोप लगाया कि थैलेसीमिया से पीड़ित नाबालिग बच्चों को अस्पताल के ब्लड बैंक में एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाया...

पदोन्नति के लिए कर्मचारियों से सीधे संवाद की जगह सार्वजनिक विज्ञापन नहीं ले सकता: झारखंड हाईकोर्ट
पदोन्नति के लिए कर्मचारियों से सीधे संवाद की जगह सार्वजनिक विज्ञापन नहीं ले सकता: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट की चीफ़ जस्टिस एम. एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की डिवीज़न बेंच ने यह फ़ैसला दिया कि विभागीय ज़रूरतों के लिए कर्मचारियों से सीधे संवाद की जगह सार्वजनिक विज्ञापन नहीं ले सकते, और बिना उचित सूचना के योग्य कर्मचारियों को पदोन्नति से वंचित करना मनमाना है। आगे यह भी कहा गया कि प्रभावित कर्मचारी उस तारीख से पिछली तारीख से पदोन्नति के हकदार हैं, जिस तारीख को उनके जूनियर कर्मचारियों को पदोन्नति दी गई।पृष्ठभूमि के तथ्यये कर्मचारी झारखंड सरकार के सड़क निर्माण विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर...

बर्न सुविधाओं के बिना स्वास्थ्य का अधिकार महज दिखावा: झारखंड हाईकोर्ट के सख्त निर्देश, 120 दिन में हर जिले में बर्न यूनिट अनिवार्य
बर्न सुविधाओं के बिना स्वास्थ्य का अधिकार महज दिखावा: झारखंड हाईकोर्ट के सख्त निर्देश, 120 दिन में हर जिले में बर्न यूनिट अनिवार्य

झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग अग्निकांड मामले की सुनवाई करते हुए राज्य में बर्न केयर सुविधाओं की कमी पर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि यदि राज्य में आधुनिक बर्न उपचार सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं तो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिला स्वास्थ्य का अधिकार केवल कागजों तक सीमित रह जाता है।चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो हजारीबाग में मिट्टी तेल से लगी आग की घटना से जुड़ी थी। इस हादसे में कई लोगों की मौत हुई थी और कई गंभीर रूप से झुलस...

झारखंड हाईकोर्ट ने 12 साल की बच्ची के रेप-मर्डर का स्वतः संज्ञान लिया, पुलिस के सुस्त रवैये पर फटकार लगाई
झारखंड हाईकोर्ट ने 12 साल की बच्ची के रेप-मर्डर का स्वतः संज्ञान लिया, पुलिस के "सुस्त रवैये" पर फटकार लगाई

झारखंड हाईकोर्ट ने हज़ारीबाग़ में 12 साल की बच्ची के रेप और मर्डर का स्वतः संज्ञान लेते हुए इस मामले में पुलिस के "सुस्त रवैये" पर गहरी चिंता जताई।जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की डिवीज़न बेंच ने इस घटना का संज्ञान तब लिया, जब सुबह 10:30 बजे कोर्ट की कार्यवाही शुरू होने पर वकील हेमंत शिकारवार ने कोर्ट का ध्यान 29 मार्च, 2026 को हिंदी दैनिक 'हिंदुस्तान' में छपी एक ख़बर की ओर दिलाया।कोर्ट के सामने रखी गई रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना 24 मार्च, 2026 को हज़ारीबाग़ ज़िले के...

एक ही गलती के आधार पर पेंशन नहीं रोकी जा सकती: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की अपील खारिज की
एक ही गलती के आधार पर पेंशन नहीं रोकी जा सकती: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की अपील खारिज की

झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी की पेंशन केवल एक घटना में अनियमितता के आधार पर नहीं रोकी जा सकती। इसके लिए यह साबित होना जरूरी है कि कर्मचारी का पूरा सेवा काल गंभीर रूप से असंतोषजनक रहा हो या उसने गंभीर कदाचार किया हो।चीफ जस्टिस एम एस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए एकल पीठ का फैसला बरकरार रखा।मामला जल संसाधन विभाग के जूनियर इंजीनियर से जुड़ा था जिन पर माइक्रोलिफ्ट योजनाओं में वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे थे।...

पेंशन व रिटायरमेंट लाभ न देने पर सख्ती, झारखंड हाईकोर्ट ने परिवहन अधिकारी का वेतन रोका
पेंशन व रिटायरमेंट लाभ न देने पर सख्ती, झारखंड हाईकोर्ट ने परिवहन अधिकारी का वेतन रोका

झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में पलामू के जिला परिवहन पदाधिकारी का वेतन रोकने का निर्देश दिया। अदालत ने यह सख्त कदम इसलिए उठाया, क्योंकि रिटायर कर्मचारी को अब तक पेंशन और अन्य रिटायरमेंट लाभ नहीं दिए गए।जस्टिस आनंद सेन की एकल पीठ अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका उस आदेश से जुड़ी थी, जिसमें 23 अक्टूबर 2024 को अदालत ने रिटायर लिपिक को पेंशन, सभी रिटायरमेंट लाभ, 6 प्रतिशत ब्याज और 50 हजार रुपये खर्च देने का निर्देश दिया था।याचिकाकर्ता 31 मार्च 2011 को रिटायर हुए, लेकिन विभाग...

45 साल बाद जमीन बहाली का दावा खारिज: झारखंड हाइकोर्ट का बड़ा फैसला, 1947 से पहले के सौदों पर नहीं लागू होंगे नियम
45 साल बाद जमीन बहाली का दावा खारिज: झारखंड हाइकोर्ट का बड़ा फैसला, 1947 से पहले के सौदों पर नहीं लागू होंगे नियम

झारखंड हाइकोर्ट ने छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि 1947 से पहले हुए भूमि हस्तांतरण पर धारा 46 लागू नहीं होती और 45 साल की देरी से दायर बहाली याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की एकल पीठ ने यह निर्णय देते हुए निचली प्राधिकरणों के आदेशों को रद्द किया, जिनमें जमीन बहाली की अनुमति दी गई थी।मामले में याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उनके पूर्वज को वर्ष 1939-40 में विधिवत पंजीकृत पट्टा के जरिए जमीन दी गई। बाद में 1952 में सिविल कोर्ट...

रांची ऑफिस में आरोपी पर कथित हमले को लेकर ED अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज: हाईकोर्ट ने दिया CBI जांच का आदेश
रांची ऑफिस में आरोपी पर कथित हमले को लेकर ED अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज: हाईकोर्ट ने दिया CBI जांच का आदेश

झारखंड हाई कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों के खिलाफ झारखंड पुलिस द्वारा दर्ज FIR रद्द करने से इनकार किया। साथ ही यह निर्देश दिया कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए जांच को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दिया जाए। यह मामला पेयजल घोटाले के एक आरोपी से पूछताछ के दौरान ED के रांची जोनल ऑफिस में हुई एक घटना से जुड़े आरोपों से संबंधित है।इससे पहले, हाईकोर्ट ने जांच पर रोक लगाई थी। उस चरण में कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की यह दलील दर्ज की थी कि 15 जनवरी, 2026 को सुबह लगभग 6:00 बजे, देर...

झारखंड हाइकोर्ट ने दिवंगत कर्मी के वारिसों को दिया पूर्ण बकाया वेतन, कहा- निष्पक्ष जांच के बाद भी लेबर कोर्ट सजा में बदलाव कर सकता है
झारखंड हाइकोर्ट ने दिवंगत कर्मी के वारिसों को दिया पूर्ण बकाया वेतन, कहा- निष्पक्ष जांच के बाद भी लेबर कोर्ट सजा में बदलाव कर सकता है

झारखंड हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भले ही विभागीय जांच निष्पक्ष और विधिसम्मत पाई गई हो, फिर भी लेबर कोर्ट या औद्योगिक न्यायाधिकरण को यह परखने का अधिकार है कि दी गई सजा अपराध की गंभीरता के अनुपात में है या नहीं। औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 11ए के तहत वह उचित राहत प्रदान कर सकता है।जस्टिस दीपक रोशन की एकलपीठ प्रबंधन द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 15 जनवरी 2008 के लेबर कोर्ट के अवार्ड को चुनौती दी गई। लेबर कोर्ट ने कर्मचारी की बर्खास्तगी निरस्त करते हुए पुनर्नियुक्ति, 40...

झारखंड हाईकोर्ट ने बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के लिए निर्देश जारी किए, कहा- लापरवाही से लागू करने से पब्लिक हेल्थ को खतरा, आर्टिकल 21 का उल्लंघन
झारखंड हाईकोर्ट ने बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के लिए निर्देश जारी किए, कहा- लापरवाही से लागू करने से पब्लिक हेल्थ को खतरा, आर्टिकल 21 का उल्लंघन

झारखंड हाईकोर्ट ने बायो-मेडिकल-वेस्ट से जुड़ी एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन में कई निर्देश जारी किए, जिसमें राज्य में बायोमेडिकल वेस्ट की हैंडलिंग और डिस्पोजल को कंट्रोल करने वाले कानूनी फ्रेमवर्क को सख्ती से लागू करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया।चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की डिवीजन बेंच सोशल वेलफेयर ऑर्गनाइज़ेशन झारखंड ह्यूमन राइट्स कॉन्फ्रेंस की PIL पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें बायोमेडिकल वेस्ट को कंट्रोल करने वाले कानूनी सिस्टम को असरदार तरीके से लागू करने की मांग की गई। पिटीशन...

रोड एक्सीडेंट क्रॉस-FIR में वकील के खिलाफ कोई ज़बरदस्ती कार्रवाई न की जाए: झारखंड हाईकोर्ट का आदेश
रोड एक्सीडेंट क्रॉस-FIR में वकील के खिलाफ कोई ज़बरदस्ती कार्रवाई न की जाए: झारखंड हाईकोर्ट का आदेश

झारखंड हाईकोर्ट ने रांची में रोड एक्सीडेंट की घटना से जुड़ी क्रॉस-FIR में आरोपी वकील मनोज टंडन को अंतरिम सुरक्षा दी है और मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई। साथ ही कोर्ट ने कहा है कि एक ही घटना से जुड़े दोनों क्रॉस-केस की जांच एक ही जांच अधिकारी से करानी चाहिए।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की सिंगल जज बेंच वकील द्वारा दायर मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें वकील ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) के अलग-अलग नियमों के तहत दर्ज डोरंडा P.S. केस नंबर 51 और 52/2026 के संबंध में पुलिस द्वारा परेशान...

हिरासत में 437 मौतों पर झारखंड हाइकोर्ट सख्त, मजिस्ट्रेट जांच अनिवार्य, राज्य से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
हिरासत में 437 मौतों पर झारखंड हाइकोर्ट सख्त, मजिस्ट्रेट जांच अनिवार्य, राज्य से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

झारखंड हाइकोर्ट ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 176(1-क) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 196) के तहत पुलिस या न्यायिक हिरासत में मृत्यु, लापता होने या दुष्कर्म के हर मामले में मजिस्ट्रेट द्वारा न्यायिक जांच अनिवार्य है। अदालत ने राज्य सरकार से इस संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी, क्योंकि राज्य ने खुलासा किया कि वर्ष 2018 से 2025 के बीच 437 लोगों की हिरासत में मौत हुई।चीफ जस्टिस एम. एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में मांग...

लापता लोगों की तलाश में आधार जानकारी तक पहुंच में दिक्कत: झारखंड हाइकोर्ट ने गृह मंत्रालय से मांगे सुझाव
लापता लोगों की तलाश में आधार जानकारी तक पहुंच में दिक्कत: झारखंड हाइकोर्ट ने गृह मंत्रालय से मांगे सुझाव

झारखंड हाइकोर्ट ने लापता व्यक्तियों की तलाश के मामलों में जांच एजेंसियों को आधार संबंधी जानकारी प्राप्त करने में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।अदालत ने इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय से उपयुक्त व्यवस्था विकसित करने के लिए सुझाव मांगे हैं।यह टिप्पणी जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान की। याचिका एक मां की ओर से दायर की गई, जिसकी बेटी पिछले पांच वर्षों से लापता है।सुनवाई के दौरान अदालत को...

ID Act | अगर कर्मचारियों ने पहले ही एम्प्लॉयर के सामने अपनी शिकायतें उठाईं और उनकी कॉपी सुलह अधिकारी को भेजी हैं तो उन्हें अलग से आवेदन करने की ज़रूरत नहीं: झारखंड हाईकोर्ट
ID Act | अगर कर्मचारियों ने पहले ही एम्प्लॉयर के सामने अपनी शिकायतें उठाईं और उनकी कॉपी सुलह अधिकारी को भेजी हैं तो उन्हें अलग से आवेदन करने की ज़रूरत नहीं: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट, 1947 (ID Act) की धारा 2A(2) के तहत औपचारिक आवेदन करना ज़रूरी नहीं है, अगर कर्मचारियों ने एम्प्लॉयर को भेजे गए अपने रिप्रेजेंटेशन और शिकायतों की कॉपी सुलह अधिकारी को भेजी हैं, जिससे विवाद लेबर अथॉरिटीज़ के संज्ञान में आ गया हो।दीपक रोशन की सिंगल जज बेंच लेबर कोर्ट, देवघर के आदेशों को चुनौती देने वाली रिट याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसने कर्मचारियों के दावों को सिर्फ़ इस आधार पर खारिज किया कि इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट की धारा...