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अदालतें अवमानना क्षेत्राधिकार में पहले से तय मुद्दों पर दोबारा फैसला नहीं दे सकतीं, सिर्फ़ पालन की जांच कर सकती हैं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अवमानना क्षेत्राधिकार का इस्तेमाल करते समय संबंधित अदालतों के लिए यह गलत है कि वे अपनी सीमाओं को लांघकर उन मुद्दों पर दोबारा फैसला दें, जो मूल कार्यवाही में पहले ही तय हो चुके हैं। उन्हें खुद को सिर्फ़ बाध्यकारी निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने तक ही सीमित रखना चाहिए।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा,"अवमानना कार्यवाही में क्षेत्राधिकार सिर्फ़ जारी किए गए निर्देशों के पालन की जांच करने तक ही सीमित है। यह उन मुद्दों पर दोबारा फैसला देने तक नहीं...
'न्याय होते हुए दिखना भी चाहिए': कर्मचारी द्वारा पक्षपात के आरोप के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अन्य अनुशासनात्मक प्राधिकरण को फैसला लेने का निर्देश दिया
प्रक्रियात्मक निष्पक्षता के मूल सिद्धांत की पुष्टि करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस अनुशासनात्मक प्राधिकरण पर किसी कर्मचारी ने पहले पक्षपात का आरोप लगाया हो, उसे कार्यवाही से खुद को अलग कर लेना चाहिए; कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि न केवल न्याय होना चाहिए, बल्कि वह होता हुआ दिखना भी चाहिए।जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने दोषी कर्मचारी के खिलाफ प्राधिकरण द्वारा की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही को अमान्य ठहराया। उस कर्मचारी ने पहले ही उस प्राधिकरण पर अविश्वास व्यक्त...
पवन खेड़ा को मिली अग्रिम जमानत पर विवाद: असम पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को मिली ट्रांजिट अग्रिम जमानत के खिलाफ असम पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। यह जमानत तेलंगाना हाईकोर्ट ने हाल ही में एक सप्ताह के लिए दी थी।मामला कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के खिलाफ दर्ज FIR से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने असम के मुख्यमंत्री की पत्नी पर कई देशों के पासपोर्ट रखने का आरोप लगाया था।जस्टिस के. सुजाना की पीठ ने 10 अप्रैल को खेड़ा को सीमित अवधि के लिए अग्रिम जमानत दी थी और निर्देश दिया था कि वह इस अवधि में गुवाहाटी हाRकोर्ट का रुख करें।असम सरकार ने इस आदेश...
वोटिंग में बायोमेट्रिक पहचान पर सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र व चुनाव आयोग को जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने मतदान केंद्रों पर फिंगरप्रिंट और आईरिस आधारित बायोमेट्रिक पहचान लागू करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को नोटिस जारी किया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया इस तरह की व्यवस्था को आगामी विधानसभा चुनावों में लागू करना संभव नहीं दिखता, लेकिन भविष्य के चुनावों, विशेषकर लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए इस विकल्प पर विचार किया जा सकता है।अदालत ने कहा,“फिलहाल होने वाले...
बार काउंसिल चुनाव: महिला सदस्यों के को-ऑप्शन का तरीका तय करे धूलिया समिति- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बार काउंसिल चुनावों में 30% महिला आरक्षण से जुड़े मामले में आज उच्चस्तरीय निगरानी समिति, जिसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया कर रहे हैं, को 10% महिला उम्मीदवारों के को-ऑप्शन की प्रक्रिया तय करने का निर्देश दिया।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें को-ऑप्शन के दुरुपयोग को लेकर चिंता जताई गई थी। कोर्ट के समक्ष विभिन्न विकल्प रखे गए, जैसे अधिक वोट पाने के बावजूद हारने वाली महिला...
तीन जजों की पीठ सुनेगी तीस्ता सीतलवाड़ की पासपोर्ट जारी करने की याचिका: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (13 अप्रैल) को मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ द्वारा पासपोर्ट जारी करने की मांग वाली विविध आवेदन (Miscellaneous Application) को तीन जजों की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।सीनियर एडवोकेट ने इस मामले का उल्लेख जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीष चन्द्र शर्मा की खंडपीठ के समक्ष किया। खंडपीठ ने कहा कि चूंकि मूल जमानत आदेश तीन जजों की पीठ द्वारा पारित किया गया था, इसलिए इस आवेदन को भी उसी स्तर की पीठ द्वारा सुना जाना उचित होगा।गौरतलब है कि वर्ष...
किसानों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस: MSP को वास्तविक खेती लागत के आधार पर तय करने की मांग
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक जनहित याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया, जिसमें कृषि उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करते समय खेती की वास्तविक लागत यानी C2 को शामिल करने की मांग की गई है।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने एडवोकेट प्रशांत भूषण की दलीलें सुनीं। उन्होंने कहा कि देशभर के किसान गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं और कई बार MSP उनकी वास्तविक लागत से भी कम तय होता है। उन्होंने यह भी बताया कि MSP पर प्रभावी खरीद मुख्य रूप से...
'लैंड-फॉर-रेलवे जॉब्स' मामला: सुप्रीम कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव को ट्रायल के दौरान धारा 17A की मंजूरी का मुद्दा उठाने की दी अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव को कथित 'लैंड-फॉर-जॉब्स' घोटाले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A की लागू होने की वैधता का मुद्दा ट्रायल के दौरान उठाने की अनुमति दे दी। साथ ही, कोर्ट ने उन्हें ट्रायल के दौरान व्यक्तिगत रूप से पेश होने से भी छूट दे दी।जस्टिस एम एम सुन्द्रेश और जस्टिस एन कोटिश्वर की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि वह इस पर कोई राय नहीं दे रही है कि धारा 17A पूर्वव्यापी (retrospective) है या भावी (prospective)। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ट्रायल के दौरान...
BREAKING | उमर खालिद ने जमानत खारिज होने के खिलाफ दायर की पुनर्विचार याचिका, ओपन कोर्ट में सुनवाई की मांग
उमर खालिद ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी जमानत याचिका खारिज होने के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। यह याचिका 5 जनवरी के उस आदेश के खिलाफ है, जिसमें कोर्ट ने दिल्ली दंगा साजिश मामले में उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था। मामले की सुनवाई बुधवार को सूचीबद्ध है।गौरतलब है कि जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन वी अंजारिया की खंडपीठ ने उमर खालिद और सह-आरोपी शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि अभियोजन सामग्री से प्रथम दृष्टया यूएपीए के तहत उनके खिलाफ मामला बनता है और उनकी भूमिका...
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसवुमन को दिल्ली में टीचिंग पोस्ट के लिए 'ट्रांसजेंडर' के तौर पर अप्लाई करने की इजाज़त दी
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ट्रांसजेंडर व्यक्ति की मदद की। यह व्यक्ति अपने रोज़गार के अधिकारों की सुरक्षा के लिए बार-बार याचिकाएं दायर कर रहा था। कोर्ट ने अंतरिम उपाय के तौर पर उसे दिल्ली सरकार द्वारा विज्ञापित टीचिंग पदों के लिए 'ट्रांसजेंडर' व्यक्ति के तौर पर अप्लाई करने की इजाज़त दी, भले ही किसी खास वैकेंसी के लिए कोई भी जेंडर बताया गया हो।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच जेन कौशिक द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। जेन कौशिक को इस बात से शिकायत थी कि दिल्ली शिक्षा...
सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (06 अप्रैल, 2026 से 10 अप्रैल, 2026 तक) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।स्वतंत्र सहकारी समितियां अनुच्छेद 12 के तहत 'राज्य' नहीं हैं; उनकी चुनाव प्रक्रिया रिट अधिकार क्षेत्र के अधीन नहीं: सुप्रीम कोर्ट राजस्थान में जिला दुग्ध संघों की प्रबंधन समिति के चुनाव से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि जिला दुग्ध संघ स्वतंत्र सहकारी समितियां हैं, जो...
वोट देने और चुनाव लड़ने का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में फिर दोहराया कि न तो वोट देने का अधिकार और न ही चुनाव लड़ने का अधिकार मौलिक अधिकार है। ये दोनों अधिकार एक-दूसरे से अलग हैं और चुनाव लड़ने का अधिकार ज़्यादा सख़्त नियमों के अधीन है, जैसे कि योग्यता, अयोग्यता और संस्थागत ज़रूरतों के मामले में।जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने राजस्थान में ज़िला दुग्ध संघों से जुड़े एक चुनावी विवाद पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।जस्टिस महादेवन द्वारा लिखे गए फ़ैसले में यह कहा गया:"यह बात पूरी तरह से तय है कि न तो...
स्वतंत्र सहकारी समितियां अनुच्छेद 12 के तहत 'राज्य' नहीं हैं; उनकी चुनाव प्रक्रिया रिट अधिकार क्षेत्र के अधीन नहीं: सुप्रीम कोर्ट
राजस्थान में जिला दुग्ध संघों की प्रबंधन समिति के चुनाव से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि जिला दुग्ध संघ स्वतंत्र सहकारी समितियां हैं, जो हाईकोर्ट के रिट अधिकार क्षेत्र के अधीन नहीं हैं।जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि राजस्थान हाईकोर्ट ने जिला दुग्ध संघों द्वारा बनाए गए उप-नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करके गलती की, क्योंकि जिला दुग्ध संघों को संविधान के अनुच्छेद 12 के अर्थ के भीतर "राज्य के उपकरण" के रूप में...
मल्टी-स्टेट को-ऑपरेटिव सोसाइटीज़ का निवेश, उनके उप-नियमों के अनुसार, सोसाइटी के अपने कारोबार से मेल खाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने यह फ़ैसला दिया कि कोई मल्टी-स्टेट को-ऑपरेटिव सोसाइटी किसी दूसरी कंपनी में निवेश तभी कर सकती है - जिसमें इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 के तहत 'रिज़ॉल्यूशन एप्लीकेंट' के तौर पर निवेश करना भी शामिल है - जब वह टारगेट कंपनी या तो उसकी सब्सिडियरी हो, या फिर "उसी तरह के कारोबार" में लगी हो।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने यह साफ़ किया कि मल्टी-स्टेट को-ऑपरेटिव सोसाइटीज़ एक्ट, 2002 की धारा 64 - जो यह तय करती है कि ऐसी सोसाइटीज़ अपने फंड का निवेश कैसे...
सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश: नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के आरोपों की अब CBI करेगी जांच
सुप्रीम कोर्ट ने संवेदनशील पारिवारिक विवाद से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए नाबालिग बेटी के साथ कथित यौन शोषण के आरोपों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया।यह मामला एक दंपत्ति के वैवाहिक विवाद से जुड़ा है, जिसमें पत्नी ने अपने पति के खिलाफ अपनी 11 वर्षीय बेटी के साथ यौन अपराध करने का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई। इससे पहले पति को बेटी की अभिरक्षा मिल चुकी थी।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि जांच...
सुप्रीम कोर्ट ने 4 साल की बच्ची के रेप-मर्डर की खराब जांच पर गाजियाबाद पुलिस को फटकारा, अस्पतालों की लापरवाही भी उजागर की
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को गाजियाबाद के पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया कि वे सोमवार को 4 साल की बच्ची के रेप और मर्डर से जुड़े एक मामले में खुद पेश हों। कोर्ट ने इस बात पर नाराज़गी जताई कि पुलिस ने यौन उत्पीड़न से जुड़ी धाराएं नहीं लगाईं और दो प्राइवेट अस्पतालों ने बच्ची के ज़िंदा रहते उसका इलाज करने से मना किया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने टिप्पणी की कि प्राइवेट अस्पतालों के साथ-साथ स्थानीय पुलिस का रवैया भी अमानवीय और असंवेदनशील...
Public Recruitment | सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों को चेताया: ऑनलाइन आवेदनों में गलतियों के कारण अस्वीकृति को चुनौती देने वाले मामलों पर विचार न करें
सुप्रीम कोर्ट ने 10 अप्रैल को यह टिप्पणी की कि ऑनलाइन सिस्टम के ज़रिए होने वाली बड़े पैमाने की सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में आवेदनों या सहायक दस्तावेजों में छोटी-मोटी गलतियों के कारण भी उम्मीदवारी को वैध रूप से रद्द किया जा सकता है। अदालतों को आमतौर पर ऐसे फैसलों में दखल देने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे भर्ती प्रक्रिया में देरी हो सकती है और कई अन्य उम्मीदवारों पर इसका बुरा असर पड़ सकता है।भर्ती विवादों में न्यायिक दखल के व्यवस्थागत प्रभावों पर ज़ोर देते हुए जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस प्रसन्ना...
यह देखने के लिए कि क्या यह अवैध सब-लेटिंग (किराए पर देना) छिपाने का तरीका है, साझेदारी का पर्दा हटाया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
यह देखते हुए कि साझेदारी की व्यवस्था का इस्तेमाल कब्ज़े के गैर-कानूनी हस्तांतरण को छिपाने के लिए एक तरीके के तौर पर नहीं किया जा सकता, सुप्रीम कोर्ट ने 10 अप्रैल को फैसला सुनाया कि अदालतों को साझेदारी का पर्दा हटाने का अधिकार है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या यह सिर्फ़ बिना अनुमति के सब-लेटिंग (किराए पर देना) के लिए एक दिखावा है।जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच अपील पर सुनवाई कर रही थी, जो अपीलकर्ता ने कर्नाटक हाई कोर्ट के फ़ैसले को चुनौती देते हुए दायर की थी।...
'FSSAI मौजूद है': खाद्य सुरक्षा के लिए कोर्ट निगरानी समिति बनाने की मांग वाली PIL सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में खाद्य सुरक्षा नियमों के प्रभावी पालन के लिए नेशनल टास्क फोर्स गठित करने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें नागरिकों को असुरक्षित और अस्वच्छ भोजन दिए जाने का मुद्दा उठाया गया था। याचिकाकर्ता डॉ. के.ए. पॉल ने अपने दावों के समर्थन में विभिन्न अखबारों की रिपोर्ट्स का हवाला दिया था।कोर्ट की टिप्पणीसुप्रीम कोर्ट ने कहा कि—याचिका में पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य का अभाव...
ईसाई धर्म को 'एकमात्र सच्चा' बताने पर पादरी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
सुप्रीम कोर्ट ने आज (10 अप्रैल) एक ईसाई पादरी की याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें कहा गया था कि किसी धर्म को “एकमात्र सच्चा धर्म” बताना भारतीय दंड संहिता की धारा 295A के तहत अपराध हो सकता है।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी करते हुए पादरी रेवरेन्ड फादर विनीत विन्सेंट परेरा के खिलाफ आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी।मामला क्या है?यह मामला उस FIR से जुड़ा है जिसमें आरोप लगाया गया कि पादरी...



















