हिमाचल हाईकोर्ट

“नहीं” का मतलब “नहीं”: एचपी हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इनकार किया, कहा- रिश्ते में होने का मतलब यह नहीं कि यौन-कृत्य की सहमति मिल गई

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि किसी रिश्ते में होने का मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति अपने साथी की मर्जी के खिलाफ यौन क्रियाएं कर सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि “नहीं” का मतलब “नहीं” ही होता है।कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की जब उसने अपनी मंगेतर के यौन उत्पीड़न के आरोपी व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की। इस मामले में शुरुआती जांच और मेडिकल सबूतों से भी आरोपों की पुष्टि होती दिख रही है।जस्टिस चिराग भानु सिंह ने कहा:इस मामले के तथ्यों को देखते हुए, इतना कहना ही काफी है कि याचिकाकर्ता/आरोपी का...

तलाक के बाद स्त्रीधन अपने पास रखना लिमिटेशन के लिहाज से लगातार चलने वाला अपराध नहीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि तलाक की डिक्री से शादी खत्म हो जाने के बाद पत्नी के 'स्त्रीधन' को अपने पास रखना 'लगातार चलने वाला अपराध' (Continuing Offence) नहीं माना जा सकता।अदालत ने तलाक और 'ज्यूडिशियल सेपरेशन' (न्यायिक अलगाव) के बीच फर्क बताते हुए कहा कि 'ज्यूडिशियल सेपरेशन' में पति-पत्नी के बीच कानूनी रिश्ता बना रहता है, लेकिन तलाक होने पर यह रिश्ता पूरी तरह खत्म हो जाता है। यह अंतर आपराधिक कार्यवाही के लिए 'लिमिटेशन पीरियड' (समय-सीमा) तय करने के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है।जस्टिस चिराग...

मंदिर की विवादित जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेशछ हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अधिकारियों को अवमानना की चेतावनी दी

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सोलन जिले में ठाकुर द्वारा श्री नरसिंह जी मंदिर की बताई जा रही विवादित जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया। कोर्ट ने राज्य के अधिकारियों को स्पष्ट किया कि इस जमीन पर किसी भी तरह की विकास गतिविधि नहीं होनी चाहिए। आदेश का पालन नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाएगी।चीफ जस्टिस जी.एस. संधावालिया और जस्टिस बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने सोलन के उपायुक्त, नालागढ़ के उपमंडल अधिकारी (एसडीएम) और अन्य संबंधित अधिकारियों को आदेश का पालन...

नोटिस की तामील और 15 दिन की भुगतान अवधि पूरी होने से पहले चेक बाउंस की शिकायत दाखिल करना जल्दबाजी: हिमाचल हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि परक्राम्य लिखत अधिनियम 1881 (NI Act) की धारा 138 के तहत चेक बाउंस की शिकायत तब तक दाखिल नहीं की जा सकती, जब तक चेक जारी करने वाले व्यक्ति को कानूनी नोटिस की तामील नहीं हो जाती और नोटिस मिलने के बाद भुगतान के लिए निर्धारित 15 दिन की अवधि समाप्त नहीं हो जाती। इससे पहले दाखिल की गई शिकायत समय से पहले मानी जाएगी और उसके आधार पर मजिस्ट्रेट अपराध का संज्ञान नहीं ले सकता।जस्टिस राकेश कैन्थला ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि शिकायत उस समय दाखिल की गई, जब नोटिस की...

मालाफाइड या पक्षपात साबित न हो तो कोर्ट इंटरव्यू के अंक और चयन मेरिट की दोबारा जांच नहीं कर सकता: हिमाचल हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि विधिवत गठित चयन समिति की ओर से दिए गए इंटरव्यू के अंकों और उम्मीदवारों की तुलनात्मक मेरिट का कोर्ट दोबारा आकलन नहीं कर सकता, जब तक चयन प्रक्रिया में दुर्भावना, पक्षपात, मनमानी या वैधानिक नियमों अथवा लागू नीति का उल्लंघन साबित न हो।जस्टिस रंजन शर्मा ने कहा कि केवल इस आधार पर कि किसी असफल उम्मीदवार को इंटरव्यू में कम अंक मिले हैं कोर्ट चयन समिति या विशेषज्ञ की भूमिका अपनाकर उम्मीदवारों की योग्यता का फिर से मूल्यांकन नहीं कर सकता।कोर्ट ने कहा,“विधिवत गठित चयन समिति...

बिना वैलिड परमिट और फिटनेस सर्टिफिकेट के गाड़ी चलाना इंश्योरेंस पॉलिसी का उल्लंघन: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि बिना वैलिड परमिट और फिटनेस सर्टिफिकेट के ट्रांसपोर्ट गाड़ी चलाना इंश्योरेंस पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है।कोर्ट ने कहा कि इंश्योरेंस कंपनी पर मुआवज़े की पूरी ज़िम्मेदारी नहीं डाली जा सकती, लेकिन "पे एंड रिकवर" (पहले भुगतान करें और फिर वसूलें) सिद्धांत लागू करते हुए इंश्योरेंस कंपनी को निर्देश दिया कि वह पहले मुआवज़े की रकम का भुगतान करे और फिर गाड़ी के मालिक से वह रकम वसूल ले।जस्टिस सुशील कुकरेजा ने कहा:"चूंकि दुर्घटना के दिन संबंधित गाड़ी के पास परमिट और फिटनेस...

परिवार दशकों से भारत में रह रहा हो तो नेपाली नागरिक होने के कारण पैरोल से इनकार नहीं किया जा सकता: हिमाचल हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि किसी दोषी का नेपाली नागरिक होना अपने आप में उसे पैरोल देने से इनकार करने का आधार नहीं हो सकता। यदि दोषी का परिवार कई दशकों से भारत में रह रहा है, यहां उसके स्थायी सामाजिक और पारिवारिक संबंध हैं तथा जेल में उसका आचरण संतोषजनक रहा है तो केवल इस आशंका के आधार पर पैरोल नहीं रोकी जा सकती कि वह नेपाल भाग सकता है।जस्टिस राकेश कैंथला ने विक्की राणा की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि जब याचिकाकर्ता के परिवार के सदस्य 30-35 वर्षों से नैनीताल में रह रहे हैं, तो केवल उसके...

आर्थिक तंगी, बेरोजगारी या कर्ज का हवाला देकर पत्नी को भरण-पोषण देने से पति नहीं बच सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि पति की आर्थिक तंगी, बेरोजगारी, खराब कारोबार या कर्ज चुकाने की जिम्मेदारी पत्नी को भरण-पोषण देने के दायित्व से बचने का आधार नहीं बन सकती। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि तलाकशुदा पत्नी भी दोबारा शादी न करने तक दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की हकदार है।जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रंजन शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि पति यह दलील देकर भरण-पोषण देने से नहीं बच सकता कि उसके पास भुगतान करने के पर्याप्त साधन नहीं हैं। पत्नी के भरण-पोषण के अधिकार को...

सेवा रिकॉर्ड में दो साल की समयसीमा के बाद जन्मतिथि नहीं बदली जा सकती: हिमाचल हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारी के सेवा रिकॉर्ड में दर्ज जन्मतिथि में सुधार के लिए सेवा नियमों में तय समयसीमा का सख्ती से पालन करना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि महज समानता या न्यायसंगत आधार के नाम पर निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद जन्मतिथि में सुधार की अनुमति नहीं दी जा सकती।जस्टिस राकेश कैन्थला ने कहा कि जन्मतिथि में बदलाव के लिए समयसीमा तय करने वाले नियमों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए। यदि नियम में प्रविष्टि सुधारने के लिए दो साल की अवधि...

खुफिया सुराग बरारी पुलिस की सामान्य कोशिश, न कि NDPS Act की धारा 42 लागू करने वाली पहले से मिली कोई खास जानकारी: एचपी हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस डायरी एंट्री में इस्तेमाल किया गया शब्द "खुफिया सुराग बरारी" NDPS अपराध की किसी खास पहले से मिली जानकारी को नहीं दिखाता है, जिससे नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 (NDPS Act) की धारा 42 का अनिवार्य पालन करना पड़े।कोर्ट ने कहा कि यह शब्द किसी खास इलाके में अपराध होने की संभावना के बारे में गुप्त जानकारी पाने के लिए पुलिस की सामान्य खोज या कोशिश को बताता है।जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रंजन शर्मा की डिवीजन बेंच ने कहा:"आवेदक की यह दलील...

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कोर्ट में बाधा डालने की आरोपी महिला के खिलाफ केस रद्द किया, कहा- SDM सीधे पुलिस में शिकायत नहीं कर सकते

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कोर्ट की कार्यवाही में बाधा डालने की आरोपी महिला के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द की। कोर्ट ने कहा कि उस समय कोर्ट की अध्यक्षता कर रहे सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) सीधे पुलिस के पास नहीं जा सकते।कोर्ट ने माना कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 215 के तहत शिकायत लिखित रूप में उस उच्च न्यायालय या उस लोक सेवक को की जानी चाहिए, जिसके प्रशासनिक अधीन शिकायतकर्ता हैं।जस्टिस संदीप शर्मा ने कहा:"चूंकि शिकायतकर्ता उस समय कोर्ट की अध्यक्षता कर रहा था, जब याचिकाकर्ता...

मूक-बधिर व्यक्ति का मानसिक रूप से अस्वस्थ होना ज़रूरी नहीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बंटवारे की कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि कोई व्यक्ति बधिर और मूक (सुनने और बोलने में असमर्थ) है, यह नहीं माना जा सकता कि वह मानसिक रूप से अस्वस्थ है, जिसके लिए सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश XXXII नियम 3 के तहत किसी संरक्षक की नियुक्ति की आवश्यकता हो।कोर्ट ने कहा कि ऐसी ज़रूरत तभी पैदा होगी जब यह साबित हो जाए कि व्यक्ति मानसिक कमजोरी के कारण संबंधित संपत्ति में अपने हितों की रक्षा करने में असमर्थ है।जस्टिस ज्योत्सना रेवाल दुआ ने टिप्पणी की:"सिर्फ़ इसलिए कि श्री सोम देव बधिर और मूक...

हॉर्स ट्रेडिंग के आरोपों के आधार पर पंचायत समिति अध्यक्ष का चुनाव नहीं रोक सकता SDM: हिमाचल हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पंचायत समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव केवल इस आधार पर नहीं रोका जा सकता कि चुनाव में कथित खरीद-फरोख्त या धनबल के इस्तेमाल की शिकायत की पुलिस जांच चल रही है। कोर्ट ने SDM की ओर से चुनाव टालने की कार्रवाई को पूरी तरह अस्वीकार्य, स्पष्ट रूप से अवैध और कानून के शासन के विपरीत बताया।जस्टिस ज्योत्सना रिवाल दुआ ने कहा कि पंचायत समिति, इंदौरा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव रोकने के लिए SDM की कार्रवाई का कोई वैधानिक आधार नहीं था। अधिकारी ने कार्यकारी...

NDPS मामले में दोषी दो पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी बरकरार, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा- कानून के रक्षक ही कानून तोड़ने वाले बन गए

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने NDPS Act के तहत दोषी ठहराए गए दो पुलिस कांस्टेबलों की सेवा से बर्खास्तगी को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि पुलिसकर्मियों की NDPS अपराधों में संलिप्तता गंभीर मामला है और इस मामले में बर्खास्तगी न तो अत्यधिक कठोर है और न ही असंगत।जस्टिस अजय मोहन गोयल ने कहा कि दोषी पुलिस विभाग के कर्मचारी हैं और ऐसे में “कानून के रक्षक ही कानून तोड़ने वाले बन गए हैं।”मामला कांस्टेबल गौरव वर्मा और लक्ष्य चौहान से जुड़ा है। गौरव वर्मा को 2009 में कांस्टेबल नियुक्त किया गया था। उसे NDPS Act...

कानून से स्थापित यूनिवर्सिटी की पैरा-वेटरिनरी डिग्री को राज्य की अलग मान्यता जरूरी नहीं: हिमाचल हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि कानून के तहत स्थापित यूनिवर्सिटी से हासिल पैरा-वेटरिनरी योग्यता को केवल इस आधार पर रजिस्ट्रेशन से वंचित नहीं किया जा सकता कि उस यूनिवर्सिटी को राज्य सरकार से अलग से मान्यता प्राप्त नहीं है या वह हिमाचल प्रदेश पैरा-वेटरिनरी परिषद में रजिस्टर्ड नहीं है।जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रंजन शर्मा की खंडपीठ ने हिमाचल प्रदेश पैरा-वेटरिनरी परिषद नियम 2011 के नियम 14 के उस हिस्से को असंवैधानिक और मूल कानून के विपरीत माना जिसमें ऐसी अतिरिक्त शर्तें लगाई गई थीं। कोर्ट ने...

सिर्फ विरोध या अभद्र भाषा बोलना सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा नहीं: हिमाचल हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ केवल विरोध करना या अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना अपने आप में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 186 के तहत अपराध नहीं है।कोर्ट ने कहा कि यदि ऐसा कोई प्रत्यक्ष कृत्य नहीं हुआ जिससे सरकारी कर्मचारी अपने आधिकारिक कर्तव्य का निर्वहन करने से वास्तव में बाधित हुआ हो तो इसे सरकारी काम में स्वेच्छा से बाधा डालना नहीं माना जा सकता।जस्टिस संदीप शर्मा ने कहा कि सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा जरूरी नहीं कि केवल शारीरिक हो लेकिन अभियोजन को ऐसा कृत्य...

सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने वाली अविवाहित महिला से भर्ती प्रक्रिया पूरी होने तक अविवाहित रहने की उम्मीद नहीं की जा सकती: एचपी हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी पद के लिए आवेदन करने वाली अविवाहित महिला से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह भर्ती प्रक्रिया पूरी होने तक अविवाहित ही रहेगी।कोर्ट ने यह टिप्पणी 'वन मित्र' पद के लिए एक महिला की उम्मीदवारी रद्द किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए की। महिला ने चयन प्रक्रिया के दौरान शादी कर ली थी। कोर्ट ने कहा कि उसकी योग्यता का आकलन आवेदन की तारीख के आधार पर किया जाना चाहिए और बाद में वैवाहिक स्थिति में बदलाव के कारण उसे नियुक्ति के लिए अयोग्य नहीं ठहराया...

सिर्फ़ विरोध मार्च में शामिल होने से कोई व्यक्ति गैर-कानूनी सभा का हिस्सा नहीं बन जाता: हिमाचल हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि सिर्फ़ विरोध मार्च में शामिल होने से कोई व्यक्ति IPC की धारा 149 के तहत 'गैर-कानूनी भीड़' (Unlawful Assembly) का सदस्य नहीं बन जाता।कोर्ट ने पाया कि जब याचिकाकर्ताओं ने हिंसा देखी तो वे उपद्रवी भीड़ से अलग हो गए और हमला झेल रहे शिक्षकों को बचाने की कोशिश की। इसलिए उन्हें 'गैर-कानूनी भीड़' का सदस्य नहीं माना जा सकता।जस्टिस संदीप शर्मा ने कहा:"चूंकि याचिकाकर्ताओं ने कुछ लोगों को शिक्षकों के साथ मारपीट करते देखा और वे मार्च से अलग हो गए तथा शिक्षकों को बचाने की...

NDPS Act के तहत तलाशी के लिए गैजेटेड ऑफिसर चुनने के बाद आरोपी को कोई और विकल्प नहीं दिया जा सकता: एचपी हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 (NDPS Act) की धारा 50 के तहत जांच अधिकारी या किसी अन्य अधिकारी (जिसमें वह गैजेटेड ऑफिसर भी शामिल है, जिसके सामने व्यक्तिगत तलाशी ली जानी है) को आरोपी को कोई नया या तीसरा विकल्प देने की इजाज़त नहीं है, अगर आरोपी पहले ही अपना कानूनी विकल्प चुन चुका है।कोर्ट ने कहा कि यह प्रावधान केवल दो विकल्पों को मान्यता देता है: या तो सबसे पास के मजिस्ट्रेट के सामने तलाशी ली जाए या सबसे पास के गैजेटेड ऑफिसर के सामने।जस्टिस...