हिमाचल हाईकोर्ट
बच्चे को सार्वजनिक रूप से 'चोर' कहना और जेल की धमकी देना प्रथमदृष्टया मानसिक पीड़ा पहुंचा सकता है: हिमाचल हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट की रिपोर्ट में मानसिक आघात (Trauma) के संकेत न मिलने मात्र से किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 75 के तहत दर्ज एफआईआर रद्द नहीं की जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चे को वास्तव में मानसिक पीड़ा हुई या नहीं, यह मुकदमे के दौरान साक्ष्यों के आधार पर तय किया जाएगा।जस्टिस राकेश कैन्थला ने यह टिप्पणी एक स्कूल प्रिंसिपल द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए की, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर और आरोपपत्र को...
Kasol Rave Party: हाईकोर्ट ने कुल्लू के डिप्टी कमिश्नर, SP और SDM का ट्रांसफर करने और SIT जांच का आदेश दिया
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कसोल में बड़े पैमाने पर रेव पार्टियां आयोजित करने को लेकर वहां के ज़िला प्रशासन की कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि ये कार्यक्रम अधिकारियों की "बिना कहे मंज़ूरी" और संभवतः मिलीभगत से आयोजित किए गए।चीफ़ जस्टिस जी.एस. संधावालिया और जस्टिस बिपिन सी. नेगी ने कहा,"...अगर 9 जून, 2026 को वेकेशन बेंच ने दखल न दिया होता तो SDM, डिप्टी कमिश्नर और सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस की बिना कहे मंज़ूरी के दम पर पार्टी 7 से 11 जून, 2026 तक मज़े से चलती रहती।" कोर्ट ने कहा कि यह...
जांच में देरी भ्रष्टाचार की FIR रद्द करने का आधार नहीं, जब तक आरोपी निष्पक्ष सुनवाई में बाधा साबित न करे: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' (Prevention of Corruption Act) के तहत दर्ज FIR को सिर्फ़ जांच या चार्ज-शीट दाखिल करने में हुई देरी के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता, जब तक कि आरोपी यह साबित न कर दे कि इस देरी से निष्पक्ष सुनवाई पर बुरा असर पड़ा है।धर्मशाला नगर समिति द्वारा कचरा कंटेनर खरीदने में कथित अनियमितताओं से जुड़ी भ्रष्टाचार की कार्यवाही रद्द करने की याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में जनहित शामिल होता है और इन्हें आमतौर पर केवल समय...
सीनियर ऑफिसर की पत्नी के साथ अफेयर के लिए ITBP कॉन्स्टेबल को नौकरी से निकालना बहुत कड़ी सज़ा, अनिवार्य रिटायरमेंट सही: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि ITBP के कॉन्स्टेबल को अपने सीनियर ऑफिसर की पत्नी के साथ आपसी सहमति से अवैध संबंध बनाने के लिए नौकरी से निकालने की सज़ा, इस मामले के खास हालात को देखते हुए बहुत ज़्यादा है।कोर्ट ने गौर किया कि सीनियर ऑफिसर के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई और वह अपने लैपटॉप पर सेक्सुअल एक्ट रिकॉर्ड करने का दोषी पाया गया, लेकिन उसे बहुत कम सज़ा मिली। इसलिए कोर्ट ने कॉन्स्टेबल को नौकरी से निकालने की सज़ा को बदलकर अनिवार्य रिटायरमेंट किया और कहा कि अनुशासनात्मक कार्रवाई में...
240 दिन की लगातार सर्विस वाले वर्कर को बिना नोटिस नौकरी से निकालना गैर-कानूनी: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस जी.एस. संधावालिया और जस्टिस बिपिन चंद्र नेगी की डिवीज़न बेंच ने कहा कि जिस वर्कर ने 240 दिन की लगातार सर्विस पूरी की है, उसे बिना अनुशासनात्मक कार्रवाई या नोटिस के नौकरी से निकालना गैर-कानूनी है। ऐसे मामले में यह नहीं माना जा सकता कि उसने खुद नौकरी छोड़ी है।पृष्ठभूमि की जानकारीरेस्पोंडेंट को अक्टूबर 2012 में महर्षि मार्कंडेश्वर मेडिकल कॉलेज के रजिस्ट्रार ने सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर काम पर रखा था। वह 7 मार्च 2017 तक वहां काम करता रहा, जब वह अपनी माँ की मौत के...
लेबलिंग की गलती से शराब की बोतलों पर गलत बैच नंबर होने पर एक्साइज़ एक्ट के तहत अवैध ट्रांसपोर्ट का आरोप नहीं लगाया जा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) के अवैध ट्रांसपोर्ट के आरोपी शराब बॉटलिंग यूनिट के मालिक के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द की। कोर्ट ने कहा कि वैध परमिट के तहत 400 केस (पेटियों) का ट्रांसपोर्ट केवल इसलिए हिमाचल प्रदेश एक्साइज़ एक्ट की धारा 39 के तहत मुकदमा चलाने का आधार नहीं बन सकता कि लेबलिंग की गलती के कारण कुछ बोतलों पर गलत बैच नंबर थे।जस्टिस संदीप शर्मा ने कहा:"IMFL के 400 बॉक्स वैध परमिट के तहत ट्रांसपोर्ट किए जा रहे थे और कुछ बोतलें अलग-अलग बैच की पाई गईं - हालांकि वे...
एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट मालिकाना हक के विवाद का फैसला किए बिना गांव के रास्ते से रुकावट हटाने का आदेश दे सकते हैं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कल्पा के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें गांव वालों द्वारा दशकों से इस्तेमाल किए जा रहे रास्ते से रुकावट हटाने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने केवल क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC) की धारा 147 के तहत इस्तेमाल के मौजूदा अधिकार की रक्षा की थी, न कि मालिकाना हक के किसी सवाल पर फैसला सुनाया था।कोर्ट ने कहा कि हालांकि मालिकाना हक के विवादों का फैसला केवल सिविल कोर्ट ही कर सकता है, लेकिन एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को रुकावटें हटाने...
DGP के पास शिकायत भेजना पर्याप्त नहीं, पहले थाने के प्रभारी अधिकारी से संपर्क जरूरी: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी संज्ञेय अपराध की शिकायत में सीधे पुलिस महानिदेशक (DGP) के पास जाने को दंड प्रक्रिया संहिता (CrPc) की धारा 154(1) का पालन नहीं माना जा सकता। शिकायतकर्ता को सबसे पहले संबंधित थाने के प्रभारी अधिकारी के समक्ष सूचना देनी होगी तभी वह मजिस्ट्रेट के समक्ष जांच के लिए आवेदन कर सकता है।जस्टिस राकेश कैंथला ने इस आधार पर एक FIR और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, नाहन द्वारा पारित आदेश रद्द कर दिया।अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता ने कानून द्वारा...
राज्य सड़क मरम्मत कार्य के लिए अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दुर्घटना में मारे गए युवक के लिए मुआवज़ा सही ठहराया
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 25 साल के युवक की माँ को दिए गए मुआवज़े को सही ठहराया। इस युवक की मौत नेशनल हाईवे-20 पर असुरक्षित सड़क मरम्मत कार्य के कारण हुई मोटरसाइकिल दुर्घटना में हुई थी। कोर्ट ने राज्य के अधिकारियों और ठेकेदार को लापरवाही का दोषी ठहराया, क्योंकि उन्होंने घटनास्थल पर चेतावनी वाले साइनबोर्ड और सुरक्षा के पर्याप्त उपाय नहीं किए।कोर्ट ने टिप्पणी की कि अधिकारियों का यह फ़र्ज़ था कि वे सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से को ठीक से बैरिकेड करें, वहां रोशनी का इंतज़ाम करें और सड़क इस्तेमाल करने...
सिर्फ़ शादी वाला घर बेचना IPC की धारा 498A के तहत दहेज उत्पीड़न नहीं माना जा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि सिर्फ़ शादी वाला घर बेचना अपने आपमें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498-A के तहत दहेज उत्पीड़न का काम नहीं माना जा सकता।जस्टिस संदीप शर्मा ने कहा:"स्टेटस रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि शिकायतकर्ता का दिल्ली में स्थित शादी वाला घर याचिकाकर्ताओं ने बेच दिया था, लेकिन ऐसा कोई भी काम, अगर हुआ भी है, तो उसे दहेज मांगने का काम नहीं माना जा सकता।" मामले की पृष्ठभूमिशिकायतकर्ता अंजलि राणा ने आरोप लगाया कि उनकी शादी याचिकाकर्ता राहुल डधवाल के साथ 11 अक्टूबर,...
केवल प्रोत्साहन राशि लेने पर आशा कार्यकर्ताओं को पंचायत चुनाव से अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की उस स्पष्टीकरण अधिसूचना पर रोक लगाई, जिसमें आशा कार्यकर्ताओं को अंशकालिक कर्मचारी मानते हुए पंचायत पदों के लिए अयोग्य ठहराया गया।जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रंजन शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ताओं के पक्ष में मामला बनता है और उन्हें अंतरिम राहत दिए जाने का आधार मौजूद है।मामला 2 मई 2026 को जारी राज्य सरकार की एक स्पष्टीकरण अधिसूचना से जुड़ा है। इसमें कहा गया कि आशा कार्यकर्ता निश्चित मासिक मानदेय और कार्य आधारित प्रोत्साहन राशि पर...
दो लोगों को कुचलने के बाद जरूरत का बचाव नहीं ले सकता बस चालक: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 81 के तहत जरूरत का बचाव उस स्थिति में नहीं लिया जा सकता, जब एक व्यक्ति को बचाने की कोशिश में आरोपी दूसरों को अधिक नुकसान पहुंचा दे।जस्टिस राकेश कैन्थला ने कहा कि धारा 81 का सिद्धांत केवल कम नुकसान पहुंचाकर बड़े नुकसान को रोकने की अनुमति देता है। हालांकि, यदि किसी कार्रवाई से अधिक गंभीर परिणाम सामने आते हैं तो आरोपी इस प्रावधान का लाभ नहीं ले सकता।अदालत ने कहा,“यदि आरोपी की यह दलील भी मान ली जाए कि वह साइकिल सवार को बचाने की कोशिश...
पंचायत चुनावों में गलत जानकारी देने पर छह साल की अयोग्यता ज़्यादा नहीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि पंचायत पदाधिकारियों को नामांकन पत्रों में गलत जानकारी देने के कारण छह साल के लिए अयोग्य ठहराना मनमाना या ज़्यादा नहीं है।कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसा कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया कि ऐसी अयोग्यता प्रभावी और सार्थक बनी रहे, खासकर पंचायती राज संस्थाओं के पांच साल के चुनावी चक्र को देखते हुए।जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रंजन शर्मा की डिवीज़न बेंच ने टिप्पणी की:"6 साल की अयोग्यता एक मकसद के साथ तय की गई, क्योंकि 5 साल से कम अवधि के लिए दी गई कोई...
पहले विवाह के बेबुनियाद आरोप से नहीं रुकेगा हक, पत्नी को भरण-पोषण का अधिकार: हिमाचल हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि पत्नी के पहले से विवाह होने के केवल आरोप, बिना किसी ठोस और वैध प्रमाण के उसे घरेलू हिंसा कानून के तहत राहत पाने से वंचित नहीं कर सकते। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी परिस्थितियों में पत्नी भरण-पोषण की हकदार रहेगी।जस्टिस संदीप शर्मा ने कहा,“जब पति-पत्नी के बीच विवाह स्वीकार किया गया और पहले विवाह के अस्तित्व का कोई कानूनी प्रमाण रिकॉर्ड पर नहीं है तो शिकायत को खारिज करना उचित नहीं था।” मामले में पत्नी ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज कराते हुए...
“अपराध वासना का नहीं, प्यार का नतीजा था”: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने POCSO आरोपी को ज़मानत दी
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने POCSO Act के तहत आरोपी को नियमित ज़मानत दी। कोर्ट ने आरोपी और नाबालिग लड़की के बीच स्वीकार किए गए वैवाहिक संबंध और इस तथ्य पर गौर किया कि उनके मिलन से एक बच्चा भी पैदा हुआ है।कोर्ट ने आगे टिप्पणी की कि आरोपी को जेल में लगातार रखने से पीड़ित लड़की को मुश्किल होगी, जिसे अन्यथा बच्चे को अकेले ही पालना पड़ेगा, क्योंकि हालात एक आपसी सहमति वाले रिश्ते की ओर इशारा करते हैं।जस्टिस संदीप शर्मा ने टिप्पणी की:“इस कोर्ट को ट्रायल के दौरान ज़मानत मांगने वाले को अनिश्चित काल तक जेल...
SC/ST Act के तहत आरोप तय करने वाले अंतरिम आदेश के खिलाफ अपील स्वीकार्य नहीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (SC/ST Act) के तहत आरोप तय करने वाले आदेश के खिलाफ अपील स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि यह आदेश एक अंतरिम आदेश है और पक्षों के अंतिम अधिकारों का निर्धारण नहीं करता।जस्टिस जिया लाल भारद्वाज ने टिप्पणी की:"...आरोप तय करने का आदेश पूरी तरह से एक अंतरिम आदेश है, क्योंकि यह कार्यवाही को समाप्त नहीं करता, बल्कि मुकदमा तब तक चलता रहता है जब तक कि उसका परिणाम बरी होने या दोषी ठहराए जाने के रूप में सामने...
'समन मिलने के बाद सुनवाई की तारीख के बारे में न बताने के लिए आरोपी अपने पिता को दोषी नहीं ठहरा सकता': हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने देरी माफ करने की अर्जी खारिज की
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 130 दिन की देरी माफ करने की अर्जी खारिज की। कोर्ट ने कहा कि अर्जी देने वाला इस दलील पर भरोसा नहीं कर सकता कि कोर्ट का समन मिलने के बाद उसके पिता ने उसे सुनवाई की तारीख के बारे में नहीं बताया।जस्टिस राकेश कैंथला ने टिप्पणी की:"जब कानून यह कहता है कि समन परिवार के किसी वयस्क पुरुष सदस्य को दिया जाए तो यह ठीक वैसा ही है जैसे समन सीधे अर्जी देने वाले को दिया गया हो। इसलिए यह दलील कि अर्जी देने वाले को उसके पिता ने सुनवाई की तारीख के बारे में नहीं बताया, उसके काम नहीं आएगी।"...
आंगनवाड़ी सहायिका को कार्यकर्ता पद पर पदोन्नति में प्राथमिक अधिकार, ट्रांसफर से नहीं छीना जा सकता: हिमाचल प्रदेश हाइकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि किसी आंगनवाड़ी केंद्र में कार्यकर्ता का पद खाली होने पर वहां कार्यरत आंगनवाड़ी सहायिका को पदोन्नति के लिए प्राथमिक अधिकार होता है। विवाह के आधार पर किए गए स्थानांतरण से इस अधिकार को समाप्त नहीं किया जा सकता।चीफ जस्टिस जी.एस. संधावालिया और जस्टिस बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि विवाह के आधार पर स्थानांतरण का प्रावधान केवल अनुशंसात्मक है अनिवार्य नहीं। इसलिए इससे सहायिका के पदोन्नति के अधिकार को प्रभावित नहीं किया...
14 वर्ष के बाद भी आठवीं पास करना अवैध नहीं: हिमाचल प्रदेश हाइकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार कानून बच्चों को छह से चौदह वर्ष की आयु तक निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा की गारंटी देता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि 14 वर्ष से अधिक आयु का व्यक्ति स्कूल में पढ़ाई जारी नहीं रख सकता। अदालत ने इसी आधार पर एक याचिका खारिज की, जिसमें एक पार्ट टाइम मल्टी टास्क वर्कर की नियुक्ति को चुनौती दी गई।जस्टिस अजय मोहन गोयल ने अपने आदेश में कहा कि शिक्षा का अधिकार कानून, 2009 का उद्देश्य छह से चौदह वर्ष तक के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध...
प्रमोशन के लिए विचार किए जाने का अधिकार एक वैध अपेक्षा, शादी के आधार पर हुआ ट्रांसफर इसे खत्म नहीं कर सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी कर्मचारी का प्रमोशन के लिए विचार किए जाने का अधिकार एक वैध अपेक्षा है, जिसे सिर्फ इसलिए खत्म नहीं किया जा सकता कि किसी दूसरे कर्मचारी का ट्रांसफर शादी के आधार पर उस पद पर कर दिया गया।कोर्ट ने आगे स्पष्ट किया कि प्रशासनिक ट्रांसफर का इस्तेमाल इस तरह से नहीं किया जाना चाहिए जिससे किसी कर्मचारी की करियर में आगे बढ़ने की वैध अपेक्षा खत्म हो जाए।चीफ जस्टिस जी.एस. संधावालिया और जस्टिस बिपिन सी. नेगी की एक डिवीज़न बेंच ने टिप्पणी की:"प्रमोशन के लिए विचार...













