कर्नाटक हाईकोर्ट
सेशंस कोर्ट आजीवन कारावास को बिना रिमिशन नहीं दे सकता: कर्नाटक हाइकोर्ट ने हत्या के दोषी की सजा में संशोधन किया
कर्नाटक हाइकोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैसले में स्पष्ट किया कि सेशंस कोर्ट को किसी दोषी को बिना रिमिशन के आजीवन कारावास, यानी जीवनभर प्राकृतिक मृत्यु तक कारावास की सजा देने का अधिकार नहीं है।हाइकोर्ट ने एक बालक की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए आरोपी की सजा में संशोधन करते हुए प्राकृतिक मृत्यु तक आजीवन कारावास को साधारण आजीवन कारावास में परिवर्तित कर दिया।यह मामला उस आरोपी द्वारा दायर अपील से जुड़ा था, जिसे ट्रायल कोर्ट ने हत्या के अपराध में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा दी थी और आदेश...
कर्नाटक हाइकोर्ट ने बाइक टैक्सी पर रोक हटाई, राज्य सरकार शर्तें लगाने के लिए स्वतंत्र
कर्नाटक हाइकोर्ट ने राज्य में बाइक टैक्सी सेवाओं पर लगी रोक को हटा दिया। शुक्रवार (23 जनवरी) को हाइकोर्ट की डिवीजन बेंच ने ओला, उबर, रैपिडो समेत अन्य एग्रीगेटर कंपनियों की अपीलों को स्वीकार करते हुए एकल जज का आदेश रद्द कर दिया।यह मामला उस आदेश के खिलाफ दायर अपीलों से जुड़ा था, जिसमें कहा गया कि जब तक राज्य सरकार मोटर वाहन अधिनियम के तहत आवश्यक दिशा-निर्देश और नियम अधिसूचित नहीं करती, तब तक बाइक टैक्सी नहीं चल सकतीं।चीफ जस्टिस विभु बाखरू और जस्टिस सी.एम. जोशी की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि...
कर्नाटक हाईकोर्ट ने केंद्र से भारतीय नागरिकता के लिए ऑनलाइन आवेदन से जुड़ा नोटिफिकेशन जमा करने को कहा
कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोमवार (19 जनवरी) को केंद्र सरकार से उस नोटिफिकेशन को रिकॉर्ड पर रखने को कहा, जिसके तहत भारतीय नागरिकता के लिए ऑनलाइन आवेदन संबंधित डिप्टी कमिश्नर के पास करना होता है।कोर्ट एक महिला की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जो अपने पति के साथ वैवाहिक विवाद के बाद अपने बेटे के लिए नागरिकता मांग रही थी, जो कनाडा में पैदा हुआ और फिलहाल उसके साथ भारत में रह रहा है।दोनों पक्षकारों को सुनने के बाद जस्टिस बीएम श्याम प्रसाद ने अपने आदेश में कहा:"मिस्टर शांति भूषण DSG ने कहा कि ऐसा अंतरिम आदेश...
जमानती अपराधों में बरी होने के खिलाफ अपील सिर्फ़ हाईकोर्ट में होती है, सेशंस कोर्ट में नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में एक सेशंस कोर्ट द्वारा दिए गए दोषसिद्धि का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें आरोपी को लापरवाही से मौत का कारण बनने का दोषी ठहराया गया था। हाईकोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार ने ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए बरी के आदेश को चुनौती देते हुए सेशंस कोर्ट में गलत तरीके से अपील दायर की थी, जबकि सेशंस कोर्ट के पास ऐसी अपील पर सुनवाई करने का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है।अपीलकर्ता, के. केशवा ने सेशंस कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी, जिसने ट्रायल कोर्ट के बरी होने के खिलाफ राज्य की अपील को...
प्रथम दृष्टया कोई आरोप नहीं: श्री श्री रविशंकर के खिलाफ कथित भूमि अतिक्रमण मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने जांच पर लगाई रोक
कर्नाटक हाईकोर्ट ने 13 जनवरी को आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के खिलाफ दर्ज कथित भूमि अतिक्रमण के मामले में चल रही जांच पर 21 जनवरी तक रोक लगाई।श्री श्री रविशंकर इस मामले में एक FIR में आरोपी बनाए गए, जो बेंगलुरु में सार्वजनिक भूमि पर कथित अतिक्रमण से जुड़ी है।उल्लेखनीय है कि इससे एक सप्ताह पहले हाईकोर्ट ने जांच पर रोक लगाने या कोई अंतरिम संरक्षण देने से इनकार कर दिया।जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि शिकायत का अवलोकन करने पर प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई ठोस...
धारा 498-A केवल गंभीर क्रूरता पर लागू, वैवाहिक असंगति या अपूर्ण विवाह पर नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने पत्नी द्वारा पति और ससुराल वालों के खिलाफ दर्ज धारा 498-A आईपीसी का मामला रद्द करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि“कानून असंगति (incompatibility) या अपूर्ण विवाह को अपराध नहीं बनाता। धारा 498-A वैवाहिक समस्याओं का सार्वभौमिक इलाज नहीं है।”जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने कहा कि धारा 498-A एक विशिष्ट और सीमित प्रावधान है, जो केवल गंभीर और जानलेवा स्तर की क्रूरता या दहेज से जुड़ी प्रताड़ना को दंडित करने के लिए बनाया गया है।मामले की पृष्ठभूमियाचिकाकर्ता अबुज़र अहमद और उनकी पत्नी की शादी...
अनुच्छेद 21 के अधिकार मूल कर्तव्यों के पालन से जुड़े हैं: 2020 बेंगलुरु दंगों के मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने जमानत से किया इनकार
कर्नाटक हाईकोर्ट ने वर्ष 2020 के बेंगलुरु दंगों से जुड़े मामले में आरोपी को जमानत देने से इनकार करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त स्वतंत्रता का अधिकार तभी सार्थक होता है, जब व्यक्ति संविधान में निहित अपने मूल कर्तव्यों का पालन करता है। कोर्ट ने कहा कि केवल अधिकारों का दावा नहीं किया जा सकता बल्कि उनके साथ कर्तव्यों का निर्वहन भी अनिवार्य है।जस्टिस के एस मुदगल और जस्टिस वेंकटेश नाइक टी की खंडपीठ ने कहा कि आरोपी अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के...
भरण-पोषण आदेशों को लागू करने के लिए फैमिली कोर्ट के पास LOC जारी करने की शक्ति नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट के पास दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 के तहत पारित आदेश को लागू करते समय लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी करने की शक्ति नहीं है, जो पत्नियों, बच्चों और माता-पिता के भरण-पोषण से संबंधित है।जस्टिस ललिता कन्नेगंती ने कहा कि CrPC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण आदेश न्यायिक आदेशों के माध्यम से लागू होने वाला सिविल दायित्व बनाते हैं। यदि कोई पक्ष डिफ़ॉल्ट करता है तो उपलब्ध उपाय संपत्ति की कुर्की, गिरफ्तारी वारंट जारी करने, या सिविल कारावास के माध्यम से आदेश को...
कर्नाटक हाईकोर्ट ने मानहानि मामला रद्द करने की राहुल गांधी की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा
कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा दायर उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें उन्होंने राज्य भाजपा द्वारा उनके खिलाफ शुरू की गई आपराधिक मानहानि की कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी।यह मामला विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी द्वारा प्रकाशित भ्रष्टाचार रेट कार्ड विज्ञापन और उससे संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा है, जिसे भाजपा ने अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया।जस्टिस एस. सुनील दत्त यादव की एकल पीठ के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान भाजपा की ओर...
कर्नाटक सरकार ने सरकारी अस्पतालों में जन औषधि केंद्रों को बंद करने का दिया था आदेश, हाईकोर्ट ने किया रद्द
कर्नाटक हाईकोर्ट ने बुधवार को कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 14 मई के सरकारी आदेश रद्द कर दिया, जिसमें सरकारी अस्पतालों के परिसर में चल रहे सभी जन औषधि केंद्रों (JAKs) को बंद करने का निर्देश दिया गया था।धारवाड़ बेंच में बैठे सिंगल जज जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने राकेश महालिंगप्पा एल और अन्य द्वारा दायर याचिका को मंज़ूरी दी। उन्होंने कहा, "मंज़ूर और रद्द।"उन्होंने मौखिक रूप से कहा,"हम सरकार के किसी भी विंग को गरीबों को दी जाने वाली दवाओं के साथ छेड़छाड़ करने की इजाज़त नहीं देंगे, चाहे वह मुफ्त हो या...
मासिक अवकाश विवाद: कर्नाटक हाईकोर्ट जनवरी 2026 में करेगा याचिकाओं पर सुनवाई, कहा- मामला सार्वजनिक महत्व का
कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा सभी पंजीकृत औद्योगिक प्रतिष्ठानों में महिलाओं को सवेतन मासिक धर्म अवकाश (मेनस्ट्रुअल लीव) देने संबंधी आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई जनवरी 2026 में करने का फैसला किया।अदालत ने बुधवार (10 दिसंबर) को कहा कि यह विषय सार्वजनिक महत्व का है और इस पर विस्तृत सुनवाई आवश्यक है।अगली सुनवाई की तारीख 20 जनवरी, 2026 तय की गई।यह मामला जस्टिस ज्योति एम की पीठ के समक्ष सुनवाई में है। इससे पहले मंगलवार को अदालत ने राज्य सरकार की अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी थी...
कर्नाटक हाईकोर्ट ने मासिक धर्म अवकाश संबंधी सरकारी आदेश पर लगाई रोक
कर्नाटक हाईकोर्ट ने औद्योगिक प्रतिष्ठानों में कार्यरत महिला कर्मचारियों को प्रति माह एक दिन का सवेतन मासिक धर्म अवकाश देने संबंधी राज्य सरकार के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई।अदालत ने 20 नवंबर को जारी उस सरकारी अधिसूचना के क्रियान्वयन को फिलहाल स्थगित कर दिया, जिसमें विभिन्न कानूनों के तहत पंजीकृत औद्योगिक प्रतिष्ठानों को सभी स्थायी, संविदा एवं आउटसोर्स महिला कर्मचारियों को यह अवकाश देने का निर्देश दिया गया था।जस्टिस ज्योति एम ने मामले की सुनवाई के दौरान सरकार को नोटिस स्वीकार करने का निर्देश देते हुए...
कर्नाटक हाईकोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि मामले में अंतरिम रोक बढ़ाई
कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा कांग्रेस (Congress) नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि मामले में जारी अंतरिम रोक को आगे भी जारी रखने का आदेश दिया। इससे ट्रायल कोर्ट में इस मामले की कार्यवाही फिलहाल स्थगित रहेगी।इससे पहले 17 जनवरी को हाईकोर्ट ने 42वें अतिरिक्त मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट की अदालत में चल रही सुनवाई पर रोक लगाई थी।जस्टिस एस. सुनील दत्त यादव की सिंगल बेंच ने गुरुवार को उस अंतरिम आदेश को जारी रखते हुए आगे की सुनवाई तक राहत को बरकरार रखा।सुनवाई के...
'अगर रिहा किया गया तो समाज के लिए खतरा होगा': SIT ने कर्नाटक हाईकोर्ट में रेप केस में सज़ा सस्पेंड करने की प्रज्वल रेवन्ना की अर्ज़ी का विरोध किया
रेप केस में दोषी पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना की उम्रकैद की सज़ा सस्पेंड करने और बेल देने की अर्ज़ी का विरोध करते हुए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने सोमवार (24 नवंबर) को कर्नाटक हाईकोर्ट को बताया कि अगर उसे बेल पर रिहा किया गया तो वह न सिर्फ़ इसी तरह के अपराधों में शामिल हो सकता है, बल्कि समाज के लिए भी खतरा बन सकता है।स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर प्रोफेसर रविवर्मा कुमार ने SIT की तरफ से दलील देते हुए जस्टिस के एस मुद्गल और जस्टिस वेंकटेश नाइक टी की डिवीजन बेंच के सामने कहा:“अपील करने वाले ने पीड़ित...
डिजीपब ने केंद्र की कंटेंट ब्लॉकिंग शक्तियों को चुनौती देने वाली X कॉर्प की याचिका खारिज होने के खिलाफ कर्नाटक हाईकोर्ट में अपील की
डिजीपब न्यूज़ इंडिया फाउंडेशन और पत्रकार अभिनंदन सेखरी ने कर्नाटक हाईकोर्ट में अपील की, जिसमें एक सिंगल जज के उस आदेश को चुनौती दी गई। इसमें US-बेस्ड माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X कॉर्प (पहले ट्विटर) द्वारा केंद्र की कंटेंट ब्लॉकिंग शक्ति को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी गई थी।डिजीपब डिजिटल मीडिया न्यूज़ का प्रतिनिधि समूह है और उसका कहना है कि उसके सदस्य X जैसे इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म पर न केवल अपनी पत्रकारिता सामग्री साझा करने और वितरित करने के लिए बल्कि डिजिटल युग में अपनी राय व्यक्त करने...
सहयोग पोर्टल के जरिये केंद्र की ब्लॉकिंग शक्तियों को वैध ठहराने वाले फैसले के खिलाफ एक्स कॉर्प की अपील, कर्नाटक हाईकोर्ट में नई कानूनी लड़ाई शुरू
एक्स कॉर्प ने सहयोग पोर्टल के माध्यम से केंद्र सरकार द्वारा जारी की जाने वाली ब्लॉकिंग निर्देशों को वैध ठहराने वाले कर्नाटक हाईकोर्ट के सिंगल बेंच के निर्णय के खिलाफ अपील दायर की है। यह अपील 14 नवंबर को दायर की गई, जिसमें 24 सितंबर को सुनाए गए उस फैसले को चुनौती दी गई। इस फैसले में कोर्ट ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(b) की व्याख्या को लेकर कंपनी की याचिका खारिज कर दी थी।मूल याचिका में एक्स कॉर्प ने तर्क दिया कि केंद्र सरकार के अधिकारी धारा 79(3)(b) के तहत स्वतंत्र रूप से...
चित्तापुर में पथसंचलन की अनुमति मिलने पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने RSS संयोजक की याचिका बंद की
कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार को RSS कलबुर्गी के संयोजक द्वारा चित्तापुर टाउन में प्रस्तावित पथसंचलन (मार्च) आयोजित करने की अनुमति संबंधी याचिका का निस्तारण कर दिया।जस्टिस एम.जी.एस. कमल ने चित्तापुर तहसीलदार द्वारा 16 नवंबर को पथसंचलन की अनुमति देते हुए कुछ शर्तें लागू करने वाले आदेश को रिकॉर्ड में लिया। पिछली सुनवाई में राज्य ने कोर्ट को बताया था कि वह रूट मार्च प्रस्ताव पर सकारात्मक रूप से विचार करेगा। संयोजक की ओर से संख्या बढ़ाने का अनुरोध सीनियर एडवोकेट अरुणा श्याम ने कहा कि अनुमति देने के...
RCB के निखिल सोसले को राहत, कर्नाटक हाईकोर्ट ने पूर्व सूचना देकर शहर छोड़ने की दी अनुमति
कर्नाटक हाईकोर्ट ने बुधवार को आरसीबी (रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु) के मार्केटिंग हेड निखिल सोसले को बड़ी राहत देते हुए उनकी जमानत की एक शर्त में ढील दी है। यह मामला बेंगलुरु स्टाम्पेड घटना से संबंधित है, जिसमें कई लोगों की मौत हुई थी।सोसले को 6 जून को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था और 6 दिन बाद उन्हें जमानत दी गई थी, इस शर्त के साथ कि वे बेंगलुरु शहर से बाहर नहीं जा सकते। अब उन्होंने यह शर्त हटाने की मांग की थी, क्योंकि उनके काम के सिलसिले में उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में यात्रा करनी पड़ती...
'न्याय दिल से सुनता है': कर्नाटक हाईकोर्ट ने सांकेतिक भाषा से बहस करने वाली श्रवण-बाधित वकील की सराहना की
कर्नाटक हाईकोर्ट ने श्रवण-बाधित अधिवक्ता सारा सनी की सराहना की, कहा — “उन्होंने मौन की सीमाओं को पार कर न्याय की नई परिभाषा लिखी”कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐतिहासिक उदाहरण पेश करते हुए श्रवण-बाधित अधिवक्ता सारा सनी की खुलकर प्रशंसा की, जिन्होंने सांकेतिक भाषा अनुवादक (sign language interpreter) की मदद से अदालत में पेश होकर अपने मुवक्किल की ओर से प्रभावशाली दलीलें दीं। जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने कहा — “यह न्यायालय गहन प्रशंसा के साथ अधिवक्ता सारा सनी के प्रयासों को दर्ज करता है, जिन्होंने...
RSS रूट मार्च पर कर्नाटक सरकार का रुख सकारात्मक, हाईकोर्ट को दी जानकारी
कर्नाटक सरकार ने शुक्रवार (7 नवंबर) को हाईकोर्ट को सूचित किया कि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) कलबुर्गी के संयोजक द्वारा चित्तापुर शहर में प्रस्तावित पथसंचलन आयोजित करने के प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करेगी।यह जानकारी राज्य के एडवोकेट जनरल शशिकिरण शेट्टी ने जस्टिस एम.जी.एस. कमल की अदालत में दी। उन्होंने कहा कि 5 नवंबर को आयोजित बैठक में RSS संयोजक अशोक पाटिल सहित सभी पक्षों ने भाग लिया और चर्चा रचनात्मक रही।30 अक्टूबर को अदालत ने RSS कलबुर्गी के संयोजक अशोक पाटिल को निर्देश दिया था कि वह 5...

















