उत्तराखंड हाईकोर्ट

पहले दीवानी मुकदमों का निपटारा होने दें, फिर आपराधिक कार्रवाई करें: मसूरी के मोदी भवन मामले में हाईकोर्ट ने FIR रद्द की
पहले दीवानी मुकदमों का निपटारा होने दें, फिर आपराधिक कार्रवाई करें: मसूरी के मोदी भवन मामले में हाईकोर्ट ने FIR रद्द की

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मसूरी स्थित मोदी भवन संपत्ति से जुड़े कथित ध्वस्तीकरण, चोरी और अतिक्रमण के आरोपों पर दर्ज FIR रद्द करते हुए कहा कि जब दोनों पक्ष पहले ही दीवानी अदालतों का दरवाजा खटखटा चुके हैं, तब समान विवाद पर आपराधिक जांच जारी रखना उचित नहीं है।जस्टिस राकेश थपलियाल ने अपने आदेश में कहा कि जब एक ही संपत्ति को लेकर दोनों पक्ष अलग-अलग दीवानी मुकदमे दायर कर चुके हैं तो ऐसे में आपराधिक कार्यवाही जारी रहने से लंबित मुकदमों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अदालत ने कहा कि फिलहाल पक्षकारों को...

अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़ने वाले सोशल मीडिया पोस्ट पर उत्तराखंड हाईकोर्ट सख्त, सुरेश राठौर के खिलाफ दो FIR रद्द, दो पर जांच जारी
अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़ने वाले सोशल मीडिया पोस्ट पर उत्तराखंड हाईकोर्ट सख्त, सुरेश राठौर के खिलाफ दो FIR रद्द, दो पर जांच जारी

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक सुरेश राठौर के खिलाफ दर्ज चार FIR में से दो रद्द की, जबकि दो अन्य मामलों में जांच जारी रखने की अनुमति दी।अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति को जघन्य अपराध से जोड़कर उसकी छवि खराब करने का प्रयास गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।जस्टिस राकेश थपलियाल ने मामले की सुनवाई के दौरान सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ वीडियो और ऑडियो सामग्री के प्रतिलेखों का अवलोकन किया।अदालत ने कहा कि बिना किसी ठोस आधार के किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से...

हाईकोर्ट ने नैनीताल मैदान में ईद की नमाज़ की इजाज़त देने के आदेश के खिलाफ राज्य की अपील खारिज की
हाईकोर्ट ने नैनीताल मैदान में ईद की नमाज़ की इजाज़त देने के आदेश के खिलाफ राज्य की अपील खारिज की

उत्तराखंड हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच ने शुक्रवार को राज्य द्वारा दायर विशेष अपील को 'आगे न बढ़ाने' (not pressed) के आधार पर खारिज किया। इस अपील में सिंगल-जज के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें नैनीताल के मशहूर जिमखाना और डिस्ट्रिक्ट स्पोर्ट्स एसोसिएशन के मैदान में ईद-उल-अज़हा (बकरीद) की नमाज़ पढ़ने की इजाज़त दी गई थी।जब 29 मई को चीफ जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की बेंच के सामने इस मामले की सुनवाई हुई तो राज्य की ओर से पेश हुए स्टैंडिंग काउंसिल BPS मेर ने बताया कि वे इस अपील...

कम अटेंडेंस वाले लॉ स्टूडेंट्स को परीक्षा देने की इजाज़त देने से कॉलेजों में अराजकता फैलेगी: उत्तराखंड हाईकोर्ट
कम अटेंडेंस वाले लॉ स्टूडेंट्स को परीक्षा देने की इजाज़त देने से कॉलेजों में अराजकता फैलेगी: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते यह टिप्पणी की कि किसी ऐसे लॉ स्टूडेंट को परीक्षा देने की इजाज़त देना, जो अटेंडेंस के न्यूनतम स्टैंडर्ड को पूरा करने में नाकाम रहता है, 'नुकसानदेह' होगा।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी की बेंच ने आगे कहा कि इससे शिक्षण संस्थानों में 'अराजकता' फैलेगी और शिक्षा का स्टैंडर्ड 'गिर जाएगा'।इसलिए बेंच ने प्राइवेट यूनिवर्सिटी की लॉ स्टूडेंट की याचिका में दखल देने से इनकार किया; यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कम अटेंडेंस के चलते उसे 8वें सेमेस्टर की आखिरी परीक्षा में बैठने से रोक दिया...

हस्तक्षेप करने वाले द्वारा उठाई गई आपत्तियां, डिक्री धारक के निष्पादन कार्यवाही वापस लेने के अधिकार को खत्म नहीं कर सकतीं: उत्तराखंड हाईकोर्ट
'हस्तक्षेप करने वाले द्वारा उठाई गई आपत्तियां, डिक्री धारक के निष्पादन कार्यवाही वापस लेने के अधिकार को खत्म नहीं कर सकतीं': उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि किसी हस्तक्षेप करने वाले (Intervener) द्वारा उठाई गई आपत्तियां, डिक्री धारक के निष्पादन कार्यवाही वापस लेने के अधिकार को खत्म नहीं कर सकतीं; खासकर तब, जब मूल कार्यवाही में हस्तक्षेप करने वाले के खिलाफ कोई ठोस फैसला (Substantive Adjudication) कभी नहीं दिया गया हो। कोर्ट ने टिप्पणी की कि निष्पादन कार्यवाही को किसी तीसरे पक्ष के अधिकारों पर फैसला देने के लिए एक स्वतंत्र मंच में नहीं बदला जा सकता, जो मूल मामले में कभी पक्षकार नहीं था।जस्टिस आलोक मेहरा 'घरेलू हिंसा...

सरकारी कर्मचारी को अनिश्चितकाल तक निलंबित नहीं रखा जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 5 साल पुराना निलंबन रद्द किया
सरकारी कर्मचारी को अनिश्चितकाल तक निलंबित नहीं रखा जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 5 साल पुराना निलंबन रद्द किया

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी सरकारी कर्मचारी को अनिश्चितकाल तक निलंबित नहीं रखा जा सकता। अदालत ने करीब पांच वर्षों से निलंबित चल रहे कर्मचारी का निलंबन आदेश रद्द किया।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी उस याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें उधम सिंह नगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा जुलाई 2021 में जारी निलंबन आदेश को चुनौती दी गई थी।मामले में याचिकाकर्ता के खिलाफ विभागीय कार्यवाही चल रही थी। उस पर ड्यूटी से अनधिकृत अनुपस्थिति और फर्जी अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र के आधार...

ज़मानत पर विचार करते समय अपीलीय अदालत केवल BNSS की धारा 430 की व्याख्या निर्देशात्मक के रूप में नहीं कर सकती: उत्तराखंड हाईकोर्ट
ज़मानत पर विचार करते समय अपीलीय अदालत केवल BNSS की धारा 430 की व्याख्या निर्देशात्मक के रूप में नहीं कर सकती: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि वैधानिक आपराधिक अपील में सज़ा के निलंबन और ज़मानत के आवेदन पर विचार करते समय अपीलीय अदालत को केवल इस बात की व्याख्या करने के बजाय कि BNSS की धारा 430(1) निर्देशात्मक है या अनिवार्य, दोषसिद्धि के गुण-दोष की जांच करना आवश्यक है।अदालत ने टिप्पणी की कि एक बार जब दोषसिद्धि के खिलाफ अपील स्वीकार की जाती है तो अपीलीय अदालत को यह जांच करनी चाहिए थी कि दोषसिद्धि गलत थी या नहीं, और ऐसा न कर पाना न्यायिक विवेक का उपयोग न करने को दर्शाता है।जस्टिस राकेश थपलियाल, रुड़की...

FIR दर्ज होने से पहले गिरफ्तारी मेमो पर केस नंबर होना गंभीर संदेह पैदा करता है: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने NDPS मामले में दी जमानत
FIR दर्ज होने से पहले गिरफ्तारी मेमो पर केस नंबर होना गंभीर संदेह पैदा करता है: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने NDPS मामले में दी जमानत

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मादक पदार्थ मामले में गिरफ्तार आरोपी को जमानत देते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि यदि गिरफ्तारी मेमो और जब्ती सूची पर FIR दर्ज होने से पहले ही FIR नंबर अंकित हो तो इससे पूरी कार्रवाई संदिग्ध हो जाती है और गिरफ्तारी प्रथम दृष्टया अवैध मानी जा सकती है।जस्टिस आशीष नैथानी ने NDPS Act की धाराओं 8, 21 और 60 के तहत दर्ज मामले में आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।अभियोजन के अनुसार पुलिस टीम नियमित जांच और अपराध नियंत्रण ड्यूटी के दौरान मोटरसाइकिल...

उत्तराखंड हाईकोर्ट का आदेश: ओन मेरिट सिद्धांत पर AIIMS ऋषिकेश में नर्सिंग पदोन्नति समीक्षा पर लगाई रोक
उत्तराखंड हाईकोर्ट का आदेश: ओन मेरिट सिद्धांत पर AIIMS ऋषिकेश में नर्सिंग पदोन्नति समीक्षा पर लगाई रोक

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने AIIMS ऋषिकेश में नर्सिंग अधिकारियों की वर्ष 2022 और 2023 की पदोन्नति समीक्षा प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगाई। यह रोक विशेष रूप से ओन मेरिट सिद्धांत के आधार पर आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को अनारक्षित पदों पर पदोन्नति देने से जुड़े मामले में लगाई गई।चीफ जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने यह आदेश नर्सिंग अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।याचिकाकर्ताओं ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के 7 अप्रैल के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें अंतरिम राहत...

अगर CrPC की धारा 313 के तहत पूछताछ के दौरान आरोपी को DNA रिपोर्ट नहीं दिखाई गई तो उसे दोषी ठहराने के लिए उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
अगर CrPC की धारा 313 के तहत पूछताछ के दौरान आरोपी को DNA रिपोर्ट नहीं दिखाई गई तो उसे दोषी ठहराने के लिए उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि अगर FSL/DNA रिपोर्ट के निष्कर्षों को CrPC की धारा 313 के तहत आरोपी से पूछताछ के दौरान उसके सामने नहीं रखा गया तो किसी को दोषी ठहराने के लिए उस रिपोर्ट पर भरोसा नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि आरोपी को सफाई देने के लिए जो भी सबूत नहीं दिखाए गए, उन्हें उसके खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।जस्टिस रविंद्र मैठानी और जस्टिस सिद्धार्थ साह की डिवीज़न बेंच देहरादून के स्पेशल जज (POCSO) के फैसले के खिलाफ दायर आपराधिक अपील पर सुनवाई कर रही थी। इस फैसले में अपीलकर्ता...

उत्तराखंड ज़मींदारी उन्मूलन अधिनियम: गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए किसी सोसाइटी को ज़मीन हस्तांतरित करने हेतु पूर्व अनुमति अनिवार्य - हाईकोर्ट
उत्तराखंड ज़मींदारी उन्मूलन अधिनियम: गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए किसी सोसाइटी को ज़मीन हस्तांतरित करने हेतु पूर्व अनुमति अनिवार्य - हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि उत्तराखंड में लागू 'उत्तर प्रदेश ज़मींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम, 1950' की धारा 154 के तहत, गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए किसी सोसाइटी के पक्ष में ज़मीन का हस्तांतरण करने हेतु राज्य सरकार की पूर्व अनुमति अनिवार्य है; भले ही यह हस्तांतरण 'उपहार विलेख' (Gift Deed) के माध्यम से किया गया हो। कोर्ट ने टिप्पणी की कि धारा 154 के तहत वैधानिक प्रतिबंध केवल 'बिक्री' के माध्यम से होने वाले हस्तांतरण तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि हस्तांतरण के सभी मान्यता प्राप्त...

लाइसेंस नवीनीकरण में देरी पर सांप रखने वाले व्यक्ति को जमानत, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा- केवल तकनीकी चूक पर जेल उचित नहीं
लाइसेंस नवीनीकरण में देरी पर सांप रखने वाले व्यक्ति को जमानत, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा- केवल तकनीकी चूक पर जेल उचित नहीं

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सांपों के कथित अवैध कब्जे के मामले में गिरफ्तार व्यक्ति को जमानत देते हुए कहा कि केवल लाइसेंस की अवधि समाप्त हो जाने और समय पर उसका नवीनीकरण न हो पाने के आधार पर किसी को लगातार जेल में रखना उचित नहीं माना जा सकता।जस्टिस आशीष नैथानी आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड से यह प्रतीत होता है कि आरोपी पहले वैध लाइसेंस के तहत कार्य कर रहा था और...

नाबालिग पीड़िता में अपने कार्यों के परिणामों को समझने की पर्याप्त परिपक्वता है: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने POCSO मामले में जमानत दी
नाबालिग पीड़िता में अपने कार्यों के परिणामों को समझने की पर्याप्त परिपक्वता है: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने POCSO मामले में जमानत दी

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने POCSO Act के तहत दर्ज आरोपी को जमानत दी। कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि, हालांकि पीड़िता कानूनी तौर पर नाबालिग थी, लेकिन रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से यह संकेत मिलता है कि वह स्वेच्छा से आवेदक के साथ गई और उसमें अपने कार्यों की प्रकृति और परिणामों को समझने के लिए पर्याप्त "समझ, परिपक्वता और विवेक" मौजूद था।कोर्ट ने टिप्पणी की कि, हालांकि POCSO Act के प्रावधान प्रकृति में कठोर हैं, लेकिन यह कठोरता कोर्ट को जमानत देने के लिए अपने विवेकाधीन क्षेत्राधिकार का प्रयोग करने से नहीं रोकती,...

कब्रिस्तान में दफन अधिकार को लेकर दो मुस्लिम समुदायों का विवाद जनहित याचिका के दायरे में नहीं आता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
कब्रिस्तान में दफन अधिकार को लेकर दो मुस्लिम समुदायों का विवाद जनहित याचिका के दायरे में नहीं आता: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि कब्रिस्तान में दफन अधिकार को लेकर दो मुस्लिम समुदायों के बीच विवाद जनहित याचिका के दायरे में नहीं आता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे अधिकारों को उचित दीवानी कार्यवाही या कानूनन उपलब्ध अन्य माध्यमों से स्थापित किया जा सकता है।चीफ जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ देहरादून के भनियावाला गांव स्थित एक कब्रिस्तान से जुड़े मामले पर सुनवाई कर रही थी।याचिका में मांग की गई कि बरेलवी समुदाय के लोगों को कब्रिस्तान में शव दफनाने और अंतिम धार्मिक रस्में...

केवल पुराने मुकदमों के आधार पर गैंगस्टर एक्ट में दोषी नहीं ठहराया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
केवल पुराने मुकदमों के आधार पर गैंगस्टर एक्ट में दोषी नहीं ठहराया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल पुराने मुकदमों के पंजीकरण या आपराधिक इतिहास के आधार पर किसी व्यक्ति को उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम, 1986 के तहत दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष को यह साबित करना होगा कि संगठित आपराधिक गतिविधियों का एक क्रम मौजूद था और आरोपी उसमें साझा उद्देश्य के तहत शामिल थे।जस्टिस आशीष नैथानी गैंगस्टर एक्ट के तहत दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली आपराधिक अपील पर सुनवाई कर रहे थे। स्पेशल जज नैनीताल ने...

रामगंगा-सरयू संगम क्षेत्र में खनन पर सख्ती, हाईकोर्ट ने भारी मशीनों के इस्तेमाल पर तत्काल रोक लगाई
रामगंगा-सरयू संगम क्षेत्र में खनन पर सख्ती, हाईकोर्ट ने भारी मशीनों के इस्तेमाल पर तत्काल रोक लगाई

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रामगंगा-सरयू नदी संगम क्षेत्र में खनन कार्यों के दौरान भारी मशीनों के इस्तेमाल पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश दिया।अदालत ने प्रशासन को सुनिश्चित करने को कहा कि संबंधित खनन क्षेत्रों में किसी भी पट्टाधारक द्वारा भारी मशीनों का उपयोग न किया जाए।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी और जस्टिस सिद्धार्थ साह की खंडपीठ पिथौरागढ़ निवासी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।याचिका में आरोप लगाया गया कि खनन पट्टाधारक नियमों के विपरीत पोकलेन और जेसीबी जैसी भारी मशीनों का उपयोग कर रहे...

आरोप वाला गिरफ़्तारी मेमो अनुच्छेद 22(1) की गिरफ़्तारी के आधार बताने की शर्त को पूरा करता है: उत्तराखंड हाईकोर्ट
आरोप वाला गिरफ़्तारी मेमो अनुच्छेद 22(1) की गिरफ़्तारी के आधार बताने की शर्त को पूरा करता है: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फ़ैसला दिया कि अनुच्छेद 22(1) के तहत गिरफ़्तार व्यक्ति को गिरफ़्तारी के आधार बताने की संवैधानिक शर्त तब पूरी मानी जाती है, जब गिरफ़्तारी मेमो, जिसमें गिरफ़्तारी का आधार बनाने वाले ज़रूरी तथ्यात्मक आरोप शामिल हों, आरोपी को दे दिया जाता है। कोर्ट ने कहा कि इसका मकसद आरोपों के सार की सही जानकारी देना है, न कि गिरफ़्तारी मेमो से अलग कोई दूसरा दस्तावेज़ देना। इसी आधार पर कोर्ट ने गिरफ़्तारी और उसके बाद की रिमांड को कानूनी तौर पर सही ठहराया।जस्टिस आशीष नैथानी ने 09.10.2024 के...

पुराने नियमों की समय-सीमा से अपील का अधिकार खत्म नहीं किया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बर्खास्त सिपाही को दी राहत
पुराने नियमों की समय-सीमा से अपील का अधिकार खत्म नहीं किया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बर्खास्त सिपाही को दी राहत

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि वर्ष 1991 के पुलिस नियमों में अपील दाखिल करने के लिए निर्धारित समय-सीमा का उपयोग उस स्थिति में नहीं किया जा सकता, जब वह उत्तराखंड पुलिस अधिनियम, 2007 के प्रावधानों से असंगत हो।अदालत ने स्पष्ट किया कि निरस्त कानून के तहत बनाए गए नियम, बाद में बने अधिनियम से टकराव होने पर प्रभावी नहीं रह सकते।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी बर्खास्त किए गए सिपाही की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसने सेवा से हटाए जाने और बाद में विलंब के आधार पर अपील खारिज किए जाने को...

NBFC द्वारा रिकवरी एजेंटों से जबरन वाहन कब्ज़े में लेना असंवैधानिक: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दिया लौटाने का आदेश
NBFC द्वारा रिकवरी एजेंटों से जबरन वाहन कब्ज़े में लेना असंवैधानिक: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दिया लौटाने का आदेश

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFC) यदि रिकवरी एजेंटों के माध्यम से बिना विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाए वित्तपोषित वाहनों का जबरन कब्ज़ा लेती हैं, तो यह अवैध होने के साथ-साथ संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन भी है।अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी कार्रवाई कानून के शासन के विपरीत है और इससे नागरिकों के आजीविका के अधिकार का हनन होता है।जस्टिस पंकज पुरोहित ने समान प्रकृति की दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। दोनों मामलों में परिवहन व्यवसाय से...