उत्तराखंड हाईकोर्ट
रामगंगा-सरयू संगम क्षेत्र में खनन पर सख्ती, हाईकोर्ट ने भारी मशीनों के इस्तेमाल पर तत्काल रोक लगाई
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रामगंगा-सरयू नदी संगम क्षेत्र में खनन कार्यों के दौरान भारी मशीनों के इस्तेमाल पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश दिया।अदालत ने प्रशासन को सुनिश्चित करने को कहा कि संबंधित खनन क्षेत्रों में किसी भी पट्टाधारक द्वारा भारी मशीनों का उपयोग न किया जाए।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी और जस्टिस सिद्धार्थ साह की खंडपीठ पिथौरागढ़ निवासी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।याचिका में आरोप लगाया गया कि खनन पट्टाधारक नियमों के विपरीत पोकलेन और जेसीबी जैसी भारी मशीनों का उपयोग कर रहे...
आरोप वाला गिरफ़्तारी मेमो अनुच्छेद 22(1) की गिरफ़्तारी के आधार बताने की शर्त को पूरा करता है: उत्तराखंड हाईकोर्ट
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फ़ैसला दिया कि अनुच्छेद 22(1) के तहत गिरफ़्तार व्यक्ति को गिरफ़्तारी के आधार बताने की संवैधानिक शर्त तब पूरी मानी जाती है, जब गिरफ़्तारी मेमो, जिसमें गिरफ़्तारी का आधार बनाने वाले ज़रूरी तथ्यात्मक आरोप शामिल हों, आरोपी को दे दिया जाता है। कोर्ट ने कहा कि इसका मकसद आरोपों के सार की सही जानकारी देना है, न कि गिरफ़्तारी मेमो से अलग कोई दूसरा दस्तावेज़ देना। इसी आधार पर कोर्ट ने गिरफ़्तारी और उसके बाद की रिमांड को कानूनी तौर पर सही ठहराया।जस्टिस आशीष नैथानी ने 09.10.2024 के...
पुराने नियमों की समय-सीमा से अपील का अधिकार खत्म नहीं किया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बर्खास्त सिपाही को दी राहत
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि वर्ष 1991 के पुलिस नियमों में अपील दाखिल करने के लिए निर्धारित समय-सीमा का उपयोग उस स्थिति में नहीं किया जा सकता, जब वह उत्तराखंड पुलिस अधिनियम, 2007 के प्रावधानों से असंगत हो।अदालत ने स्पष्ट किया कि निरस्त कानून के तहत बनाए गए नियम, बाद में बने अधिनियम से टकराव होने पर प्रभावी नहीं रह सकते।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी बर्खास्त किए गए सिपाही की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसने सेवा से हटाए जाने और बाद में विलंब के आधार पर अपील खारिज किए जाने को...
NBFC द्वारा रिकवरी एजेंटों से जबरन वाहन कब्ज़े में लेना असंवैधानिक: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दिया लौटाने का आदेश
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFC) यदि रिकवरी एजेंटों के माध्यम से बिना विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाए वित्तपोषित वाहनों का जबरन कब्ज़ा लेती हैं, तो यह अवैध होने के साथ-साथ संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन भी है।अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी कार्रवाई कानून के शासन के विपरीत है और इससे नागरिकों के आजीविका के अधिकार का हनन होता है।जस्टिस पंकज पुरोहित ने समान प्रकृति की दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। दोनों मामलों में परिवहन व्यवसाय से...
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बिना क्रॉस-अपील के मोटर दुर्घटना मुआवज़ा बढ़ाया, CPC के आदेश 41 नियम 33 का हवाला दिया
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि न्याय सुनिश्चित करने के लिए CPC के आदेश 41 नियम 33 का हवाला देकर मोटर दुर्घटना मुआवज़ा बढ़ाया जा सकता है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि अपीलीय अदालत ऐसी शक्ति का प्रयोग तब कर सकती है, जब अवार्ड को न्यायसंगत और पूर्ण बनाना आवश्यक हो।जस्टिस रविंद्र मैथानी ICICI लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी द्वारा दायर अपील की सुनवाई कर रहे थे, जिसमें मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (Motor Accident Claims Tribunal) द्वारा 16.12.2022 को पारित अवार्ड को चुनौती दी गई। इस अवार्ड के तहत,...
समझौते के बाद अतिरिक्त मांग नहीं कर सकते पक्षकार: उत्तराखंड हाईकोर्ट
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा है कि जब पक्षकार आपसी सहमति से समझौता कर लेते हैं और उस पर अमल भी हो जाता है तो बाद में तय शर्तों से बाहर जाकर कोई अतिरिक्त दावा नहीं किया जा सकता।जस्टिस आलोक मेहरा आपराधिक मामले को निरस्त करने की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इस मामले में दोनों पक्षकारों के बीच पहले ही समझौता हो चुका था, जिसे अदालत ने 20 जुलाई, 2024 को दर्ज किया था। समझौते के तहत याचिकाकर्ताओं को प्रतिवादी को 38,61,795 रुपये का भुगतान करना था जो बाद में पूरा कर दिया गया।अदालत के...
बिना जांच बर्खास्तगी पर उत्तराखंड हाईकोर्ट सख्त, कहा- बड़ी सजा देने से पहले विभागीय जांच जरूरी
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि किसी कर्मचारी पर बड़ी सजा थोपने के लिए विभागीय जांच को सामान्य रूप से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच से छूट देने की शक्ति केवल असाधारण परिस्थितियों में और ठोस कारणों के आधार पर ही प्रयोग की जा सकती है।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी पुलिस कांस्टेबल की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसे वर्ष 2020 में कथित दुर्व्यवहार के आरोप में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। आरोप है कि लॉकडाउन के दौरान क्वारंटीन केंद्र में उसने एक महिला के...
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भर्ती परीक्षा में नकल के मामले में कथित 'आउटसाइड सॉल्वर' को ज़मानत देने से किया इनकार
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने आरोपी को ज़मानत देने से इनकार किया, जिस पर आरोप है कि उसने एक चल रही परीक्षा में नकल की साज़िश के तहत "आउटसाइड सॉल्वर" (बाहर से सवाल हल करने वाले) के तौर पर काम किया था। कोर्ट ने कहा कि डिजिटल सबूत, जिनसे पता चलता है कि परीक्षा के दौरान ही प्रश्न पत्रों को रियल-टाइम में भेजा और हल किया गया, अपने आप में एक मज़बूत प्रथम दृष्टया (prima facie) सबूत हैं।कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस तरह के अपराध सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं की शुचिता पर सीधा हमला करते हैं और चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता...
पीड़िता का शोर न मचाना सहमति का संकेत नहीं: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने POCSO के तहत सज़ा रखी बरकरार
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी नाबालिग पीड़िता का आचरण, जैसे कि शोर न मचाना या भागने की कोशिश न करना, उसे सहमति या अपनी मर्ज़ी का संकेत नहीं माना जा सकता।कोर्ट ने आगे दोहराया कि एक बार जब पीड़िता का नाबालिग होना साबित हो जाता है तो POCSO Act के तहत सहमति कानूनी रूप से बेमानी हो जाती है। साथ ही पीड़िता की गवाही में छोटी-मोटी विसंगतियां अभियोजन पक्ष के अन्यथा विश्वसनीय मामले को कमज़ोर नहीं करतीं।इसी आधार पर कोर्ट ने POCSO Act और IPC के तहत अपराधों के लिए अपीलकर्ता की सज़ा बरकरार...
जाति प्रमाण पत्र रद्द करने से पहले 'कारण बताओ नोटिस' देने की शर्त सिर्फ़ फ़ोन कॉल करने से पूरी नहीं होती: उत्तराखंड हाईकोर्ट
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फ़ैसला दिया कि किसी व्यक्ति को सिर्फ़ फ़ोन कॉल करना, जाति प्रमाण पत्र रद्द करने से पहले 'कारण बताओ नोटिस' जारी करने की शर्त को पूरा नहीं करता। कोर्ट ने कहा कि जाति प्रमाण पत्र रद्द करने से, जिससे नागरिक अधिकार मिलते हैं, प्रभावित व्यक्ति को सुनवाई का उचित और सही मौक़ा मिलना ज़रूरी है।जस्टिस पंकज पुरोहित रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इस याचिका में तहसीलदार द्वारा 09.07.2025 को जारी उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें याचिकाकर्ता का OBC जाति प्रमाण पत्र रद्द किया गया था।...
नाबालिग बच्चे का भरण-पोषण टाल नहीं सकता पिता, मां की आय या कर्ज का बहाना स्वीकार नहीं: उत्तराखंड हाईकोर्ट
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि पिता अपने नाबालिग बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से यह कहकर बच नहीं सकता कि मां भी कमाती है या उस पर कर्ज और पारिवारिक जिम्मेदारियां हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चे के भरण-पोषण का दायित्व सर्वोच्च है और स्वेच्छा से लिए गए वित्तीय बोझ इस जिम्मेदारी को कम नहीं कर सकते।जस्टिस आशीष नैथानी ने रुड़की फैमिली कोर्ट केा आदेश बरकरार रखा, जिसमें पिता को नाबालिग बच्चे के लिए प्रति माह 8,000 रुपये अंतरिम भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था।मामला...
व्यभिचार साबित करने के लिए DNA टेस्ट का आदेश आम तौर पर नहीं दिया जा सकता, बच्चे की वैधता की धारणा ही मान्य होनी चाहिए: उत्तराखंड हाईकोर्ट
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि व्यभिचार के आरोपों को साबित करने के लिए किसी बच्चे के DNA टेस्ट का आदेश आम तौर पर नहीं दिया जा सकता, खासकर तब जब साक्ष्य अधिनियम की धारा 112 के तहत बच्चे की वैधता की कानूनी धारणा को चुनौती देने के लिए कोई दलीलें या सबूत मौजूद न हों।कोर्ट ने टिप्पणी की कि बिना किसी ठोस आधार के ऐसे टेस्ट की अनुमति देना एक वैध विवाह से जन्मे बच्चे को प्राप्त कानूनी सुरक्षा को कमज़ोर करेगा और बच्चे की गरिमा और निजता में अनावश्यक दखल माना जाएगा। इसी आधार पर कोर्ट ने वैवाहिक...
नाबालिग बच्चे का भरण-पोषण टाल नहीं सकता पिता, मां की आय या कर्ज का बहाना स्वीकार नहीं: उत्तराखंड हाईकोर्ट
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि पिता अपने नाबालिग बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से यह कहकर बच नहीं सकता कि मां भी कमाती है या उस पर कर्ज और पारिवारिक जिम्मेदारियां हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चे के भरण-पोषण का दायित्व सर्वोच्च है और स्वेच्छा से लिए गए वित्तीय बोझ इस जिम्मेदारी को कम नहीं कर सकते।जस्टिस आशीष नैथानी ने रुड़की फैमिली कोर्ट केा आदेश बरकरार रखा, जिसमें पिता को नाबालिग बच्चे के लिए प्रति माह 8,000 रुपये अंतरिम भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था।मामला...
परिवार पेंशनभोगी को 'आश्रित' बताकर मेडिकल प्रतिपूर्ति से वंचित नहीं किया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि परिवार पेंशन पाने वाले व्यक्ति को आश्रित मानकर मेडिकल प्रतिपूर्ति (मेडिकल रिइम्बर्समेंट) से वंचित नहीं किया जा सकता, खासकर जब वह अपने स्वतंत्र अधिकार के रूप में इस लाभ का दावा कर रहा हो। कोर्ट ने कहा कि यदि राज्य सरकार ने किसी परिवार पेंशनभोगी को स्वास्थ्य योजना का लाभ दिया और उससे नियमित अंशदान भी लिया जा रहा है, तो बाद में आयु सीमा का हवाला देकर दावा खारिज करना अनुचित है।जस्टिस पंकज पुरोहित ने एक महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह...
प्रशासनिक चूक के कारण दावा खारिज नहीं किया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट का मृतक कांस्टेबल की विधवा को ₹25 लाख का बीमा देने का निर्देश
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि कोई भी बैंक किसी मृतक पुलिस कांस्टेबल की विधवा को आकस्मिक मृत्यु बीमा योजना का लाभ देने से सिर्फ इस आधार पर इनकार नहीं कर सकता कि उसका नाम बीमित कर्मचारियों की सूची में शामिल नहीं था, जबकि यह चूक प्रशासनिक लापरवाही के कारण हुई हो।यह मामला उत्तराखंड पुलिस के कांस्टेबल की मृत्यु से जुड़ा है। कांस्टेबल की मृत्यु ड्यूटी के दौरान सड़क दुर्घटना में हुई थी। उस समय उसका वेतन खाता (Salary Account) संबंधित बैंक में था। यह देखते हुए कि अधिकारियों के बीच तालमेल की कमी...
कानूनी योजना के तहत पुनर्वास दंडात्मक नहीं: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रिस्पना नदी के किनारे बसी बस्ती के निवासियों को जारी बेदखली नोटिस को सही ठहराया
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि देहरादून में रिस्पना नदी के किनारे बसी बस्ती के निवासियों को दूसरी जगह बसाने के लिए अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई, जो 'उत्तराखंड शहरी स्थानीय निकाय और प्राधिकरण (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2018' के तहत की गई, उसे गैर-कानूनी या दंडात्मक नहीं कहा जा सकता।कोर्ट ने कहा कि जब निवासियों को एक कानूनी योजना के तहत किसी दूसरी जगह (वैकल्पिक आवास) पर बसाया जा रहा हो तो ऐसी कार्रवाई अधिनियम के उद्देश्य के अनुरूप ही मानी जाएगी। इसी आधार पर कोर्ट ने निवासियों को जारी किए...
धमकी का सामना कर रहे विवाहित जोड़े की सुरक्षा सुनिश्चित करे राज्य: उत्तराखंड हाईकोर्ट का निर्देश
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी विवाहित जोड़े को खतरे की आशंका हो तो राज्य की जिम्मेदारी है कि वह उनकी सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करे। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह खतरे का आकलन कर आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराए।जस्टिस राकेश थपलियाल ने यह अंतरिम आदेश दंपत्ति की याचिका पर दिया जिसमें उन्होंने शांतिपूर्वक वैवाहिक जीवन जीने के लिए सुरक्षा की मांग की थी।याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट का रुख करते हुए अपनी जान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के लिए पुलिस सुरक्षा...
सहमति से बने किशोर संबंध को अपराध मानना अनुचित: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अपहरण केस पर लगाई रोक
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश में 15 वर्षीय लड़के के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगाई। इस लड़के पर अपनी ही उम्र की लड़की के अपहरण का आरोप लगाया गया था। अदालत ने माना कि मामला सहमति से बने किशोर संबंध का प्रतीत होता है।जस्टिस आलोक मेहरा ने यह आदेश देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले को ध्यान में रखना जरूरी है, जिसमें कहा गया कि सहमति से बने किशोर संबंधों को नजरअंदाज करने से अन्यायपूर्ण परिणाम सामने आ सकते हैं।मामले में लड़की के पिता ने FIR दर्ज कर...
ज़मीन वन भूमि नहीं पाई गई: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 'सैन्य धाम' युद्ध स्मारक के निर्माण के खिलाफ PIL खारिज की
उत्तराखंड हाई कोर्ट ने देहरादून में 'सैन्य धाम' नाम के युद्ध स्मारक के निर्माण को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (PIL) खारिज की। कोर्ट ने यह फैसला देते हुए कहा कि राजस्व और वन अधिकारियों द्वारा किए गए एक संयुक्त सर्वेक्षण में यह ज़मीन वन भूमि नहीं पाई गई। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब सक्षम अधिकारियों ने ज़मीन का निरीक्षण कर यह प्रमाणित कर दिया कि यह वन भूमि का हिस्सा नहीं है तो याचिका में उठाई गई चुनौती का मूल आधार ही खत्म हो जाता है, जिससे यह आधार कानूनी रूप से टिकने लायक नहीं रह जाता।जस्टिस मनोज...
सक्षम व्यक्ति बेरोज़गारी का बहाना बनाकर भरण-पोषण से बच नहीं सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि बेरोज़गारी का महज़ बहाना किसी सक्षम और योग्य व्यक्ति को CrPC की धारा 125 के तहत अपने नाबालिग बच्चों के भरण-पोषण की ज़िम्मेदारी से मुक्त नहीं कर सकता। कोर्ट ने इस सिद्धांत को दोहराया कि एक सक्षम व्यक्ति के बारे में यह माना जाता है कि उसमें कमाने की क्षमता है। साथ ही जानबूझकर की गई या बिना सबूत वाली बेरोज़गारी का इस्तेमाल कानूनी ज़िम्मेदारी से बचने के लिए नहीं किया जा सकता। इस सिद्धांत को लागू करते हुए कोर्ट ने दो नाबालिग बच्चों को दिए गए भरण-पोषण में दखल देने...















