उत्तराखंड हाईकोर्ट

दूसरी शादी की शिकायत पर संज्ञान लेने के चरण में सप्तपदी रस्म के सबूत की ज़रूरत नहीं: उत्तराखंड हाईकोर्ट
दूसरी शादी की शिकायत पर संज्ञान लेने के चरण में 'सप्तपदी' रस्म के सबूत की ज़रूरत नहीं: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 494 के तहत बिगैमी (दूसरी शादी) के अपराध के लिए आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि कथित दूसरी शादी की ज़रूरी रस्में, जिसमें 'सप्तपदी' भी शामिल है, पूरी की गई थीं या नहीं, यह ट्रायल का मामला है और "संज्ञान लेने के शुरुआती चरण में इस पर विचार नहीं किया जा सकता"।सुप्रीम कोर्ट के 'के. नीलावेनी बनाम राज्य' मामले के फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता-पति का यह तर्क कि 'सप्तपदी' रस्म के सबूत न होने के कारण IPC...

यूट्यूब चैनल बहाल कराने के लिए रिट याचिका नहीं चलेगी: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा- यह संविदात्मक विवाद
यूट्यूब चैनल बहाल कराने के लिए रिट याचिका नहीं चलेगी: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा- यह संविदात्मक विवाद

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कथित कॉपीराइट स्ट्राइक के कारण हटाए गए यूट्यूब चैनल को बहाल कराने के लिए संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दाखिल नहीं की जा सकती।अदालत ने कहा कि किसी यूट्यूबर और सोशल मीडिया मंच के बीच उत्पन्न संविदात्मक विवाद के समाधान के लिए रिट क्षेत्राधिकार का उपयोग नहीं किया जा सकता।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी की एकल पीठ ने यह फैसला एक यूट्यूबर की याचिका पर सुनाया जिसमें उसने अपने यूट्यूब चैनल को पहले की स्थिति में बहाल करने, हटाई गई सभी सामग्री वापस उपलब्ध कराने और...

NDPS Act की धारा 52A के तहत ज़ब्त नशीले पदार्थों पर मजिस्ट्रेट का सिर्फ़ देखा गया लिखना नियमों का पूरी तरह पालन नहीं माना जाएगा: उत्तराखंड हाईकोर्ट
NDPS Act की धारा 52A के तहत ज़ब्त नशीले पदार्थों पर मजिस्ट्रेट का सिर्फ़ "देखा गया" लिखना नियमों का पूरी तरह पालन नहीं माना जाएगा: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि ज़ब्त किए गए नशीले पदार्थों की इन्वेंट्री (सूची) पर मजिस्ट्रेट का सिर्फ़ "seen" (देखा गया) लिखना, NDPS Act, 1985 की धारा 52A और NDPS (ज़ब्ती, भंडारण, नमूनाकरण और निपटान) नियम, 2022 के नियम 8 के तहत सर्टिफ़िकेशन की ज़रूरी शर्तों का पूरी तरह पालन नहीं माना जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि नियमों का ऐसा पालन न करना, साथ ही लंबे समय तक जेल में रहना और ट्रायल में कोई प्रगति न होना, ज़मानत अर्ज़ी पर फ़ैसला करते समय ध्यान में रखने वाली अहम बातें हैं।जस्टिस राकेश थपलियाल NDPS...

तलाक के मामलों का शीघ्र निस्तारण निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार की कीमत पर नहीं हो सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
तलाक के मामलों का शीघ्र निस्तारण निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार की कीमत पर नहीं हो सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवादों के त्वरित निस्तारण का मतलब यह नहीं है कि किसी पक्ष को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर ही न दिया जाए। इसी टिप्पणी के साथ अदालत ने हरिद्वार फैमिली कोर्ट का वह आदेश रद्द किया, जिसमें पत्नी का लिखित जवाब दाखिल करने का अधिकार समाप्त कर उसके खिलाफ एकपक्षीय कार्यवाही करने का निर्देश दिया गया था।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी और जस्टिस पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने कहा कि चूंकि पत्नी फैमिली कोर्ट में उपस्थित हुई और उसने लिखित जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, इसलिए यह नहीं...

अगर कम्यूटेशन के बावजूद पूरी पेंशन मिलती है तो पेंशनभोगी की ज़िम्मेदारी है कि वह अधिकारियों को बताए; रिकवरी सही है: उत्तराखंड हाईकोर्ट
अगर कम्यूटेशन के बावजूद पूरी पेंशन मिलती है तो पेंशनभोगी की ज़िम्मेदारी है कि वह अधिकारियों को बताए; रिकवरी सही है: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी पेंशनभोगी को पेंशन की कम्यूटेड वैल्यू (एकमुश्त राशि) मिलने के बावजूद पूरी पेंशन मिलती रहती है तो यह पेंशनभोगी की ज़िम्मेदारी है कि वह अधिकारियों को सूचित करे, अगर विभाग गलती से तय मासिक कटौती नहीं कर पाता है। कोर्ट ने कहा कि पेंशनभोगी ऐसी प्रशासनिक गलती के कारण गलत तरीके से मिली रकम को अपने पास नहीं रख सकता, खासकर तब जब पेंशन पेमेंट ऑर्डर में ही कटौती का स्पष्ट प्रावधान हो।चीफ जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की डिवीजन बेंच एक रिट याचिका पर...

सिर्फ़ दूसरे बैंक के कहने पर बैंक अकाउंट फ़्रीज़ नहीं किया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
सिर्फ़ दूसरे बैंक के कहने पर बैंक अकाउंट फ़्रीज़ नहीं किया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि किसी दूसरे बैंक से मिले उस मैसेज या सूचना के आधार पर बैंक अकाउंट फ़्रीज़ नहीं किया जा सकता, जिसमें गलती से पैसे ट्रांसफर होने का आरोप लगाया गया हो। कोर्ट ने कहा कि जब तक कोई सक्षम मजिस्ट्रेट या जांच करने वाली अथॉरिटी आदेश न दे, तब तक बैंक के पास ग्राहक का अकाउंट फ़्रीज़ करने का कानूनी अधिकार नहीं है और ऐसी कार्रवाई को सही नहीं ठहराया जा सकता।जस्टिस आलोक महरा एक क्रिमिनल रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें कोटक महिंद्रा बैंक, हरिद्वार में मौजूद याचिकाकर्ता का...

टिंडर पर बना रिश्ता बिगड़ने का मतलब यह नहीं कि शादी का झूठा वादा करके रेप किया गया: उत्तराखंड हाईकोर्ट
टिंडर पर बना रिश्ता बिगड़ने का मतलब यह नहीं कि शादी का झूठा वादा करके रेप किया गया: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि जब दो बालिग लोग टिंडर जैसे डेटिंग ऐप के ज़रिए मिलकर आपसी सहमति से रिश्ता बनाते हैं तो बाद में रिश्ता बिगड़ने और शादी न होने पर उसे शादी के झूठे वादे पर बना रिश्ता नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने पाया कि आरोपों से आपसी सहमति वाला रिश्ता पता चलता है, न कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 के तहत कोई अपराध।जस्टिस सिद्धार्थ साह, IPC की धारा 376 के तहत दर्ज FIR से शुरू हुई आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग वाली अर्ज़ी (CrPC की धारा 482 के तहत) पर सुनवाई कर रहे थे। FIR के...

यह गुंडागर्दी है, आपको किस कानून ने अधिकार दिया? : संसद मार्च से पहले नेता को रोकने पर उत्तराखंड हाईकोर्ट की पुलिस को फटकार
यह गुंडागर्दी है, आपको किस कानून ने अधिकार दिया? : संसद मार्च से पहले नेता को रोकने पर उत्तराखंड हाईकोर्ट की पुलिस को फटकार

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मंगलवार को संसद मार्च में शामिल होने जा रहे उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (UPP) के अध्यक्ष प्रभात ध्यानी को रास्ते में हिरासत में लेने पर राज्य पुलिस की कार्रवाई पर कड़ी नाराज़गी जताई।कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि आखिर किस कानून के तहत उन्हें दिल्ली जाने से रोका गया। जस्टिस रवींद्र मैठाणी और जस्टिस सिद्धार्थ साह की खंडपीठ के समक्ष राज्य सरकार ने दलील दी कि ध्यानी की हिरासत पूरी तरह वैध थी।इस पर कोर्ट ने पूछा,"किस कानून के तहत? BNSS की किस धारा के तहत?" राज्य की ओर से BNSS की धारा...

हाईकोर्ट ने जिम कॉर्बेट के पूर्व डायरेक्टर और सीनियर फॉरेस्ट अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को स्पेशल CBI कोर्ट में ट्रांसफर किया
हाईकोर्ट ने जिम कॉर्बेट के पूर्व डायरेक्टर और सीनियर फॉरेस्ट अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को स्पेशल CBI कोर्ट में ट्रांसफर किया

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के पूर्व डायरेक्टर और अन्य सीनियर फॉरेस्ट अधिकारियों के खिलाफ विजिलेंस के दो मामलों को देहरादून में एंटी-करप्शन, CBI के स्पेशल जज की कोर्ट में ट्रांसफर करने का आदेश दिया।कोर्ट ने कहा कि सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) द्वारा जांच किए गए मामलों की सुनवाई का अधिकार सिर्फ CBI कोर्ट को ही है। कोर्ट ने माना कि जब CBI ने अपनी जांच पूरी कर ली और नोटिफाइड CBI कोर्ट में चार्ज-शीट दाखिल कर दी, तो P.C. Act के तहत स्पेशल जज के सामने समानांतर कार्यवाही जारी...

उत्तराखंड हाईकोर्ट का पुलिस से सवाल: CJP के संसद मार्च में जा रहे नेता को हिरासत में क्यों लिया गया?
उत्तराखंड हाईकोर्ट का पुलिस से सवाल: CJP के संसद मार्च में जा रहे नेता को हिरासत में क्यों लिया गया?

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सोमवार (20 जुलाई) को पुलिस से उन हालात के बारे में सवाल किए, जिनमें उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (UPP) के अध्यक्ष प्रभात ध्यानी को हिरासत में लिया गया। ध्यानी ने सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि वह कथित NEET पेपर लीक के खिलाफ विरोध कर रहे छात्रों के समर्थन में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संसद मार्च में शामिल होंगे।कोर्ट ने पुलिस से यह भी स्पष्टीकरण मांगा कि रिहाई के बाद ध्यानी—जो एक वयस्क हैं—को स्वतंत्र रूप से छोड़ने के बजाय उनकी मां को क्यों सौंपा गया।यह आदेश उत्तराखंड...

अवमानना कार्यवाही में बाद की परिस्थितियों का सहारा लेकर रिट कोर्ट के आदेश से बचा नहीं जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
अवमानना कार्यवाही में बाद की परिस्थितियों का सहारा लेकर रिट कोर्ट के आदेश से बचा नहीं जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि अवमानना कार्यवाही के दौरान बाद में उत्पन्न हुई परिस्थितियों का हवाला देकर रिट कोर्ट के आदेश के पालन से बचा नहीं जा सकता। अदालत ने सड़क निर्माण के एक ठेके से जुड़े निविदा विवाद में रिट कोर्ट के आदेश का पालन न करने पर राज्य के अधिकारियों को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया।जस्टिस राकेश थपलियाल ने कहा कि अवमानना की सुनवाई कर रही अदालत रिट कोर्ट के आदेश की वैधता या उसके गुण-दोष पर विचार नहीं कर सकती। यदि आदेश का पालन करना असंभव हो गया हो, तो संबंधित पक्ष को उसकी वैधता को...

सिर्फ़ शादी से इनकार करना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं, पुलिस IPC की धारा 306 का आसानी से इस्तेमाल कर रही है: उत्तराखंड हाईकोर्ट
सिर्फ़ शादी से इनकार करना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं, पुलिस IPC की धारा 306 का 'आसानी से' इस्तेमाल कर रही है: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि पुलिस भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) का इस्तेमाल "बहुत आसानी से और बिना सोचे-समझे" कर रही है। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट को बहुत सावधानी और सोच-समझकर काम करना चाहिए और बिना सोचे-समझे या "सुरक्षित रहने" की मानसिकता अपनाते हुए इस धारा के तहत आरोप तय नहीं करने चाहिए।कोर्ट ने आगे कहा कि IPC की धारा 306 के तहत अपराध तब माना जाएगा, जब शुरुआती तौर पर ऐसे सबूत हों जिनसे पता चले कि आरोपी ने IPC की धारा 107 के तहत आत्महत्या के...

सिर्फ शराब की गंध से नशे में गाड़ी चलाना साबित नहीं होता, रक्त या ब्रेथ एनालाइज़र जांच जरूरी: उत्तराखंड हाईकोर्ट
सिर्फ शराब की गंध से नशे में गाड़ी चलाना साबित नहीं होता, रक्त या ब्रेथ एनालाइज़र जांच जरूरी: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी चालक के मुंह से केवल शराब की गंध आने मात्र से यह नहीं माना जा सकता कि वह नशे की हालत में वाहन चला रहा था। अदालत ने स्पष्ट किया कि रक्त जांच या ब्रेथ एनालाइज़र जांच के जरिए यह साबित होना आवश्यक है कि शरीर में शराब की मात्रा मोटर वाहन अधिनियम, 1988 में निर्धारित सीमा से अधिक थी। ऐसी वैज्ञानिक जांच के अभाव में केवल शराब की गंध के आधार पर नशे में वाहन चलाने का आरोप या भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 के तहत आरोप तय नहीं किया जा सकता।यह...

संबंधित, प्रासंगिक या संबद्ध विषय में मास्टर डिग्री रखने वाला असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति के लिए पात्र: उत्तराखंड हाईकोर्ट
संबंधित, प्रासंगिक या संबद्ध विषय में मास्टर डिग्री रखने वाला असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति के लिए पात्र: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा है कि यूजीसी (UGC) विनियमों के अनुसार, यदि किसी अभ्यर्थी के पास किसी भारतीय विश्वविद्यालय से संबंधित (Concerned), प्रासंगिक (Relevant) या संबद्ध (Allied) विषय में कम से कम 55% अंकों के साथ मास्टर डिग्री है, तो वह असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्ति के लिए पात्र होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यूजीसी विनियम इन तीनों श्रेणियों के विषयों को समान दर्जा देते हैं और केवल संबंधित विषय में डिग्री रखने वाले अभ्यर्थी को कोई अतिरिक्त प्राथमिकता नहीं देते।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी और...

वेतन संरक्षण मिलने से पूर्व सेवा को एसीपी में जोड़ने का अधिकार नहीं मिलता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
वेतन संरक्षण मिलने से पूर्व सेवा को एसीपी में जोड़ने का अधिकार नहीं मिलता: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूर्व सेवा के आधार पर वेतन संरक्षण दिए जाने मात्र से कर्मचारी को यह अधिकार नहीं मिल जाता कि उसी सेवा अवधि को सुनिश्चित सेवाकाल प्रगति का लाभ देने के लिए भी जोड़ा जाए। अदालत ने कहा कि वेतन संरक्षण और एसीपी के तहत मिलने वाली वित्तीय उन्नति अलग-अलग क्षेत्र हैं और दोनों अलग-अलग सरकारी आदेशों से संचालित होते हैं।जस्टिस पंकज पुरोहित एक कर्मचारी की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें 6 नवंबर 2013 के सरकारी आदेश तथा उसके आधार पर तीसरे एसीपी का लाभ वापस लेने संबंधी...

तेजाब हमले के दो महीने बाद सेप्टीसीमिया से मौत भी हत्या, दोषी की उम्रकैद बरकरार: उत्तराखंड हाईकोर्ट
तेजाब हमले के दो महीने बाद सेप्टीसीमिया से मौत भी हत्या, दोषी की उम्रकैद बरकरार: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया कि यदि तेजाब हमले में झुलसी पीड़िता की बाद में सेप्टीसीमिया (संक्रमण फैलने) के कारण मौत होती है और चिकित्सा साक्ष्य यह साबित करते हैं कि संक्रमण तेजाब से लगी चोटों का ही परिणाम था, तो इसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत हत्या का अपराध माना जाएगा। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने दोषी की हत्या, तेजाब हमला और गाली-गलौज के मामलों में हुई सजा बरकरार रखी।जस्टिस रवींद्र मैठाणी और जस्टिस सिद्धार्थ साह की खंडपीठ आपराधिक जेल अपील पर सुनवाई कर रही थी।...

1996 में उत्तराखंड राज्य था ही नहीं, फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र के आधार पर ग्राम प्रधान की अयोग्यता बरकरार : उत्तराखंड हाईकोर्ट
1996 में उत्तराखंड राज्य था ही नहीं, फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र के आधार पर ग्राम प्रधान की अयोग्यता बरकरार : उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र के आधार पर निर्वाचित ग्राम प्रधान को अयोग्य ठहराने और पद से हटाने का आदेश बरकरार रखते हुए कहा कि वर्ष 1996 में उत्तराखंड राज्य अस्तित्व में ही नहीं था। ऐसे में उस वर्ष जारी बताए गए स्थानांतरण प्रमाणपत्र में "उत्तराखंड राज्य" का उल्लेख होना उसके अविश्वसनीय होने का स्पष्ट संकेत है।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी ने ग्राम प्रधान की वह याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने सक्षम प्राधिकारी और अपीलीय प्राधिकारी के उन आदेशों को चुनौती दी थी, जिनके जरिए उन्हें...

गवाह को धमकी मिलना मात्र मुकदमे के स्थानांतरण का आधार नहीं, गवाह संरक्षण कानून का किया जाए उपयोग : उत्तराखंड हाईकोर्ट
गवाह को धमकी मिलना मात्र मुकदमे के स्थानांतरण का आधार नहीं, गवाह संरक्षण कानून का किया जाए उपयोग : उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि केवल गवाहों को धमकी मिलने के आरोप के आधार पर किसी आपराधिक मुकदमे को एक अदालत से दूसरी अदालत में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। यदि गवाहों की सुरक्षा के लिए कानून में व्यवस्था उपलब्ध है तो पहले उसी का सहारा लिया जाना चाहिए।जस्टिस सिद्धार्थ साह ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 407 के तहत दायर एक स्थानांतरण याचिका पर यह फैसला सुनाया।मामला हत्या और शस्त्र अधिनियम के तहत दर्ज एक आपराधिक मुकदमे से जुड़ा था। याचिकाकर्ता ने अनुरोध किया था कि देहरादून की जिला एवं सत्र...

21 वर्ष से कम उम्र में शादी पर भी जोड़े को सुरक्षा: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पुलिस को दिए संरक्षण के निर्देश
21 वर्ष से कम उम्र में शादी पर भी जोड़े को सुरक्षा: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पुलिस को दिए संरक्षण के निर्देश

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने विवाहित जोड़े को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह आदेश उस आपत्ति के बावजूद दिया कि विवाह के समय युवक की उम्र 21 वर्ष से कम है।हाईकोर्ट ने कहा कि परामर्शदाता की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि युवती अपने माता-पिता के साथ जाने को तैयार नहीं है और वह अपने पति के साथ खुश है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर जोड़ा सुरक्षा का हकदार है।जस्टिस आलोक महरा उस याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें पुलिस को निजी पक्षकारों और उनके सहयोगियों से दोनों याचिकाकर्ताओं की सुरक्षा...

रजिस्ट्रार के वैधानिक आदेश पर हुई सेवा समाप्ति के खिलाफ रिट याचिका सुनवाई योग्य: उत्तराखंड हाईकोर्ट
रजिस्ट्रार के वैधानिक आदेश पर हुई सेवा समाप्ति के खिलाफ रिट याचिका सुनवाई योग्य: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि यदि किसी सहकारी समिति के कर्मचारी की सेवा समाप्ति सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार या वैधानिक अधिकार का प्रयोग करने वाले अधिकारी के निर्देश पर की गई हो, तो उसके खिलाफ दायर रिट याचिका सुनवाई योग्य होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में यह नहीं कहा जा सकता कि याचिका केवल सहकारी समिति की कार्रवाई के विरुद्ध है।चीफ जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ विशेष अपील पर सुनवाई कर रही थी। यह अपील उस आदेश के खिलाफ दायर की गई,...