उत्तराखंड हाईकोर्ट

सिर्फ़ चेयरपर्सन आदेश पास नहीं कर सकते: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारी के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई रद्द की
'सिर्फ़ चेयरपर्सन आदेश पास नहीं कर सकते': उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारी के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई रद्द की

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि "राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण के चेयरपर्सन द्वारा अकेले पास किया गया आदेश, प्राधिकरण द्वारा पास किया गया आदेश नहीं माना जा सकता"। कोर्ट ने माना कि उत्तराखंड पुलिस अधिनियम, 2007 के तहत, प्राधिकरण में चेयरपर्सन और चार अन्य सदस्य होते हैं और चेयरपर्सन द्वारा अकेले पास किया गया आदेश "अपने आप में ग़ैर-क़ानूनी है। इसी आधार पर इसे रद्द किया जाना चाहिए"। नतीजतन, इस बात को मानते हुए कोर्ट ने उस आदेश के आधार पर एक पुलिस अधिकारी के ख़िलाफ़ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई रद्द...

हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी शिफ्ट करने के प्रस्ताव को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी शिफ्ट करने के प्रस्ताव को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट कॉम्प्लेक्स को नैनीताल से हल्द्वानी शिफ्ट करने के प्रस्ताव को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की। कोर्ट ने कहा कि यह रिट याचिका समय से पहले दायर की गई थी क्योंकि मामला अभी ज़मीन की पहचान करने के चरण में है। कोर्ट ने कहा कि जब वन भूमि को डी-रिज़र्व करने या उसे गैर-वन उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करने का चरण आएगा, तब वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 की धारा 2 के तहत केंद्र सरकार की पूर्व मंज़ूरी की आवश्यकता होगी।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी और जस्टिस पंकज पुरोहित की डिवीज़न बेंच उस...

पत्नी की सरकारी नौकरी की जानकारी RTI में नहीं मिलेगी, जब तक सार्वजनिक हित का ठोस आधार न हो: उत्तराखंड हाईकोर्ट
पत्नी की सरकारी नौकरी की जानकारी RTI में नहीं मिलेगी, जब तक सार्वजनिक हित का ठोस आधार न हो: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अलग रह रही पत्नी की सरकारी नौकरी से जुड़ी जानकारी RTI के तहत मांगने वाले व्यक्ति को राहत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस material नहीं है, जिससे यह साबित हो कि जानकारी के खुलासे में सार्वजनिक हित इतना महत्वपूर्ण है कि वह पत्नी के निजता के अधिकार पर भारी पड़े।चीफ जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की डिवीजन बेंच ने अपील खारिज करते हुए कहा कि अपीलकर्ता अपनी पत्नी की सरकारी नियुक्ति में कथित हेरफेर के आरोप को प्रथम दृष्टया साबित...

रोमांटिक रिश्ता या शादी का प्रस्ताव POCSO Act के असर को कम नहीं कर सकता: नाबालिग के यौन उत्पीड़न मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने ज़मानत देने से इनकार किया
'रोमांटिक रिश्ता या शादी का प्रस्ताव POCSO Act के असर को कम नहीं कर सकता': नाबालिग के यौन उत्पीड़न मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने ज़मानत देने से इनकार किया

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि "रोमांटिक रिश्ते और उसके बाद शादी के प्रस्ताव की दलील POCSO Act के तहत नाबालिग बच्चे को मिली कानूनी सुरक्षा को कम नहीं कर सकती," और यह दोहराया कि कानून की नज़र में नाबालिग की सहमति "पूरी तरह से अप्रासंगिक" है।मौजूदा मामले में इसे लागू करते हुए कोर्ट ने इस आरोप पर भी ध्यान दिया कि आरोपी ने नाबालिग का भरोसा जीतने के लिए अपनी धार्मिक पहचान छिपाई थी। उसकी उम्र, गर्भावस्था की मेडिकल स्थिति और POCSO Act के तहत सहमति पर कानूनी रोक को देखते हुए कोर्ट ने आरोपी को ज़मानत देने...

आबकारी आयुक्त शराब की मंज़ूरशुदा सब-शॉप को दूसरी जगह नहीं भेज सकते: उत्तराखंड हाईकोर्ट
आबकारी आयुक्त शराब की मंज़ूरशुदा सब-शॉप को दूसरी जगह नहीं भेज सकते: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि आबकारी आयुक्त किसी लाइसेंस-धारक की शराब की सब-शॉप को सिर्फ़ इस आधार पर दूसरी जगह नहीं भेज सकते कि इससे किसी दूसरी शराब की दुकान की कमाई पर बुरा असर पड़ रहा है। कोर्ट ने पाया कि उत्तराखंड आबकारी नीति के नियम 28.4(b) के तहत दुकान को दूसरी जगह भेजने का अधिकार ज़िला मजिस्ट्रेट के पास है, न कि आबकारी आयुक्त के पास।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी उस रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें प्रतिवादी नंबर 5 की अपील पर आबकारी आयुक्त द्वारा 31 मार्च, 2026 को पारित आदेश को चुनौती दी...

उचित समय का नोटिस दिए बिना जमीन का अस्थायी अधिग्रहण नहीं: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रद्द किए अधिग्रहण आदेश
उचित समय का नोटिस दिए बिना जमीन का अस्थायी अधिग्रहण नहीं: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रद्द किए अधिग्रहण आदेश

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 81 के तहत किसी जमीन का अस्थायी अधिग्रहण उचित समय पहले नोटिस दिए बिना नहीं किया जा सकता।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून की तय प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी व्यक्ति को उसकी जमीन के इस्तेमाल से वंचित नहीं किया जा सकता। जस्टिस रविंद्र मैठाणी ने मेसर्स डेक्कन चार्टर्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला...

निष्पक्ष सुनवाई के लिए कॉल रिकॉर्ड ज़रूरी हों तो सिर्फ़ पीड़ित की प्राइवेसी के लिए उन्हें देने से मना नहीं किया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
निष्पक्ष सुनवाई के लिए कॉल रिकॉर्ड ज़रूरी हों तो सिर्फ़ पीड़ित की प्राइवेसी के लिए उन्हें देने से मना नहीं किया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और टावर-लोकेशन की जानकारी मांगने वाली अर्ज़ी को "सिर्फ़ पीड़ित के प्राइवेसी के अधिकार के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता, जब ये रिकॉर्ड मामले के सही फ़ैसले के लिए शुरुआती तौर पर ज़रूरी हों"।जस्टिस आलोक महरा ने कहा कि हालांकि आर्टिकल 21 के तहत आरोपी का निष्पक्ष सुनवाई और जांच का अधिकार और पीड़ित का प्राइवेसी का अधिकार, दोनों ही संवैधानिक रूप से सुरक्षित हैं। फिर भी ट्रायल कोर्ट को "इन दोनों अधिकारों के बीच संतुलन बनाना होगा" और ऐसा करने के लिए...

बाल संरक्षण का मतलब किशोरावस्था को अपराध बनाना नहीं: 17 वर्षीय लड़की और 21 वर्षीय युवक के संबंध पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने FIR रद्द की
बाल संरक्षण का मतलब किशोरावस्था को अपराध बनाना नहीं: 17 वर्षीय लड़की और 21 वर्षीय युवक के संबंध पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने FIR रद्द की

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 17 वर्षीय लड़की और करीब 21 वर्षीय युवक के बीच प्रेम संबंध से जुड़े मामले में POCSO Act के तहत दर्ज FIR और उससे जुड़ी पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द की। कोर्ट ने कहा कि बाल संरक्षण का उद्देश्य किशोरावस्था को अपराध की श्रेणी में डालना नहीं हो सकता।जस्टिस आलोक महरा ने कहा कि 17 वर्षीय लड़की और 21 वर्षीय युवक के बीच सहमति से बने संबंधों को यौन हमले के बराबर मानना महत्वपूर्ण अंतर को खत्म करता है और संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत स्पष्ट मनमानी की स्थिति पैदा करता है।अदालत रामनगर...

दूसरी शादी की शिकायत पर संज्ञान लेने के चरण में सप्तपदी रस्म के सबूत की ज़रूरत नहीं: उत्तराखंड हाईकोर्ट
दूसरी शादी की शिकायत पर संज्ञान लेने के चरण में 'सप्तपदी' रस्म के सबूत की ज़रूरत नहीं: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 494 के तहत बिगैमी (दूसरी शादी) के अपराध के लिए आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि कथित दूसरी शादी की ज़रूरी रस्में, जिसमें 'सप्तपदी' भी शामिल है, पूरी की गई थीं या नहीं, यह ट्रायल का मामला है और "संज्ञान लेने के शुरुआती चरण में इस पर विचार नहीं किया जा सकता"।सुप्रीम कोर्ट के 'के. नीलावेनी बनाम राज्य' मामले के फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता-पति का यह तर्क कि 'सप्तपदी' रस्म के सबूत न होने के कारण IPC...

यूट्यूब चैनल बहाल कराने के लिए रिट याचिका नहीं चलेगी: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा- यह संविदात्मक विवाद
यूट्यूब चैनल बहाल कराने के लिए रिट याचिका नहीं चलेगी: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा- यह संविदात्मक विवाद

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कथित कॉपीराइट स्ट्राइक के कारण हटाए गए यूट्यूब चैनल को बहाल कराने के लिए संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दाखिल नहीं की जा सकती।अदालत ने कहा कि किसी यूट्यूबर और सोशल मीडिया मंच के बीच उत्पन्न संविदात्मक विवाद के समाधान के लिए रिट क्षेत्राधिकार का उपयोग नहीं किया जा सकता।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी की एकल पीठ ने यह फैसला एक यूट्यूबर की याचिका पर सुनाया जिसमें उसने अपने यूट्यूब चैनल को पहले की स्थिति में बहाल करने, हटाई गई सभी सामग्री वापस उपलब्ध कराने और...

NDPS Act की धारा 52A के तहत ज़ब्त नशीले पदार्थों पर मजिस्ट्रेट का सिर्फ़ देखा गया लिखना नियमों का पूरी तरह पालन नहीं माना जाएगा: उत्तराखंड हाईकोर्ट
NDPS Act की धारा 52A के तहत ज़ब्त नशीले पदार्थों पर मजिस्ट्रेट का सिर्फ़ "देखा गया" लिखना नियमों का पूरी तरह पालन नहीं माना जाएगा: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि ज़ब्त किए गए नशीले पदार्थों की इन्वेंट्री (सूची) पर मजिस्ट्रेट का सिर्फ़ "seen" (देखा गया) लिखना, NDPS Act, 1985 की धारा 52A और NDPS (ज़ब्ती, भंडारण, नमूनाकरण और निपटान) नियम, 2022 के नियम 8 के तहत सर्टिफ़िकेशन की ज़रूरी शर्तों का पूरी तरह पालन नहीं माना जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि नियमों का ऐसा पालन न करना, साथ ही लंबे समय तक जेल में रहना और ट्रायल में कोई प्रगति न होना, ज़मानत अर्ज़ी पर फ़ैसला करते समय ध्यान में रखने वाली अहम बातें हैं।जस्टिस राकेश थपलियाल NDPS...

तलाक के मामलों का शीघ्र निस्तारण निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार की कीमत पर नहीं हो सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
तलाक के मामलों का शीघ्र निस्तारण निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार की कीमत पर नहीं हो सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवादों के त्वरित निस्तारण का मतलब यह नहीं है कि किसी पक्ष को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर ही न दिया जाए। इसी टिप्पणी के साथ अदालत ने हरिद्वार फैमिली कोर्ट का वह आदेश रद्द किया, जिसमें पत्नी का लिखित जवाब दाखिल करने का अधिकार समाप्त कर उसके खिलाफ एकपक्षीय कार्यवाही करने का निर्देश दिया गया था।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी और जस्टिस पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने कहा कि चूंकि पत्नी फैमिली कोर्ट में उपस्थित हुई और उसने लिखित जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, इसलिए यह नहीं...

अगर कम्यूटेशन के बावजूद पूरी पेंशन मिलती है तो पेंशनभोगी की ज़िम्मेदारी है कि वह अधिकारियों को बताए; रिकवरी सही है: उत्तराखंड हाईकोर्ट
अगर कम्यूटेशन के बावजूद पूरी पेंशन मिलती है तो पेंशनभोगी की ज़िम्मेदारी है कि वह अधिकारियों को बताए; रिकवरी सही है: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी पेंशनभोगी को पेंशन की कम्यूटेड वैल्यू (एकमुश्त राशि) मिलने के बावजूद पूरी पेंशन मिलती रहती है तो यह पेंशनभोगी की ज़िम्मेदारी है कि वह अधिकारियों को सूचित करे, अगर विभाग गलती से तय मासिक कटौती नहीं कर पाता है। कोर्ट ने कहा कि पेंशनभोगी ऐसी प्रशासनिक गलती के कारण गलत तरीके से मिली रकम को अपने पास नहीं रख सकता, खासकर तब जब पेंशन पेमेंट ऑर्डर में ही कटौती का स्पष्ट प्रावधान हो।चीफ जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की डिवीजन बेंच एक रिट याचिका पर...

सिर्फ़ दूसरे बैंक के कहने पर बैंक अकाउंट फ़्रीज़ नहीं किया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
सिर्फ़ दूसरे बैंक के कहने पर बैंक अकाउंट फ़्रीज़ नहीं किया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि किसी दूसरे बैंक से मिले उस मैसेज या सूचना के आधार पर बैंक अकाउंट फ़्रीज़ नहीं किया जा सकता, जिसमें गलती से पैसे ट्रांसफर होने का आरोप लगाया गया हो। कोर्ट ने कहा कि जब तक कोई सक्षम मजिस्ट्रेट या जांच करने वाली अथॉरिटी आदेश न दे, तब तक बैंक के पास ग्राहक का अकाउंट फ़्रीज़ करने का कानूनी अधिकार नहीं है और ऐसी कार्रवाई को सही नहीं ठहराया जा सकता।जस्टिस आलोक महरा एक क्रिमिनल रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें कोटक महिंद्रा बैंक, हरिद्वार में मौजूद याचिकाकर्ता का...

टिंडर पर बना रिश्ता बिगड़ने का मतलब यह नहीं कि शादी का झूठा वादा करके रेप किया गया: उत्तराखंड हाईकोर्ट
टिंडर पर बना रिश्ता बिगड़ने का मतलब यह नहीं कि शादी का झूठा वादा करके रेप किया गया: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि जब दो बालिग लोग टिंडर जैसे डेटिंग ऐप के ज़रिए मिलकर आपसी सहमति से रिश्ता बनाते हैं तो बाद में रिश्ता बिगड़ने और शादी न होने पर उसे शादी के झूठे वादे पर बना रिश्ता नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने पाया कि आरोपों से आपसी सहमति वाला रिश्ता पता चलता है, न कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 के तहत कोई अपराध।जस्टिस सिद्धार्थ साह, IPC की धारा 376 के तहत दर्ज FIR से शुरू हुई आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग वाली अर्ज़ी (CrPC की धारा 482 के तहत) पर सुनवाई कर रहे थे। FIR के...

यह गुंडागर्दी है, आपको किस कानून ने अधिकार दिया? : संसद मार्च से पहले नेता को रोकने पर उत्तराखंड हाईकोर्ट की पुलिस को फटकार
यह गुंडागर्दी है, आपको किस कानून ने अधिकार दिया? : संसद मार्च से पहले नेता को रोकने पर उत्तराखंड हाईकोर्ट की पुलिस को फटकार

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मंगलवार को संसद मार्च में शामिल होने जा रहे उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (UPP) के अध्यक्ष प्रभात ध्यानी को रास्ते में हिरासत में लेने पर राज्य पुलिस की कार्रवाई पर कड़ी नाराज़गी जताई।कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि आखिर किस कानून के तहत उन्हें दिल्ली जाने से रोका गया। जस्टिस रवींद्र मैठाणी और जस्टिस सिद्धार्थ साह की खंडपीठ के समक्ष राज्य सरकार ने दलील दी कि ध्यानी की हिरासत पूरी तरह वैध थी।इस पर कोर्ट ने पूछा,"किस कानून के तहत? BNSS की किस धारा के तहत?" राज्य की ओर से BNSS की धारा...

हाईकोर्ट ने जिम कॉर्बेट के पूर्व डायरेक्टर और सीनियर फॉरेस्ट अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को स्पेशल CBI कोर्ट में ट्रांसफर किया
हाईकोर्ट ने जिम कॉर्बेट के पूर्व डायरेक्टर और सीनियर फॉरेस्ट अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को स्पेशल CBI कोर्ट में ट्रांसफर किया

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के पूर्व डायरेक्टर और अन्य सीनियर फॉरेस्ट अधिकारियों के खिलाफ विजिलेंस के दो मामलों को देहरादून में एंटी-करप्शन, CBI के स्पेशल जज की कोर्ट में ट्रांसफर करने का आदेश दिया।कोर्ट ने कहा कि सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) द्वारा जांच किए गए मामलों की सुनवाई का अधिकार सिर्फ CBI कोर्ट को ही है। कोर्ट ने माना कि जब CBI ने अपनी जांच पूरी कर ली और नोटिफाइड CBI कोर्ट में चार्ज-शीट दाखिल कर दी, तो P.C. Act के तहत स्पेशल जज के सामने समानांतर कार्यवाही जारी...

उत्तराखंड हाईकोर्ट का पुलिस से सवाल: CJP के संसद मार्च में जा रहे नेता को हिरासत में क्यों लिया गया?
उत्तराखंड हाईकोर्ट का पुलिस से सवाल: CJP के संसद मार्च में जा रहे नेता को हिरासत में क्यों लिया गया?

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सोमवार (20 जुलाई) को पुलिस से उन हालात के बारे में सवाल किए, जिनमें उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (UPP) के अध्यक्ष प्रभात ध्यानी को हिरासत में लिया गया। ध्यानी ने सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि वह कथित NEET पेपर लीक के खिलाफ विरोध कर रहे छात्रों के समर्थन में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संसद मार्च में शामिल होंगे।कोर्ट ने पुलिस से यह भी स्पष्टीकरण मांगा कि रिहाई के बाद ध्यानी—जो एक वयस्क हैं—को स्वतंत्र रूप से छोड़ने के बजाय उनकी मां को क्यों सौंपा गया।यह आदेश उत्तराखंड...

अवमानना कार्यवाही में बाद की परिस्थितियों का सहारा लेकर रिट कोर्ट के आदेश से बचा नहीं जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
अवमानना कार्यवाही में बाद की परिस्थितियों का सहारा लेकर रिट कोर्ट के आदेश से बचा नहीं जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि अवमानना कार्यवाही के दौरान बाद में उत्पन्न हुई परिस्थितियों का हवाला देकर रिट कोर्ट के आदेश के पालन से बचा नहीं जा सकता। अदालत ने सड़क निर्माण के एक ठेके से जुड़े निविदा विवाद में रिट कोर्ट के आदेश का पालन न करने पर राज्य के अधिकारियों को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया।जस्टिस राकेश थपलियाल ने कहा कि अवमानना की सुनवाई कर रही अदालत रिट कोर्ट के आदेश की वैधता या उसके गुण-दोष पर विचार नहीं कर सकती। यदि आदेश का पालन करना असंभव हो गया हो, तो संबंधित पक्ष को उसकी वैधता को...