उत्तराखंड हाईकोर्ट

निष्पक्ष सुनवाई के लिए ज़रूरी: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने POCSO मामले में अंधे आरोपी के लिए गवाह की गवाही ब्रेल में उपलब्ध कराने का निर्देश दिया

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने देहरादून की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (POCSO) का वह आदेश रद्द किया, जिसमें पूरी तरह से अंधे आरोपी से गवाह से जिरह (Cross-Examination) करने का मौका छीन लिया गया।कोर्ट ने कहा, “आसानी से समझ में आने वाले या इस्तेमाल करने लायक रूप (Accessible Form) में सामग्री उपलब्ध कराना आरोपी के निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार से सीधे तौर पर जुड़ा है।” जस्टिस आलोक महरा क्रिमिनल रिवीजन याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें ट्रायल कोर्ट के 9 सितंबर, 2026 के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसके तहत आरोपी से...

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने छात्र संघ चुनावों में महिला आरक्षण सही ठहराया, 50% कोटा को चुनौती खारिज कीं

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कुमाऊं यूनिवर्सिटी से जुड़े कॉलेजों में छात्र संघ के पदों पर महिलाओं के लिए आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज किया। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार छात्राओं को बेहतर प्रतिनिधित्व देने के लिए संविधान के अनुच्छेद 15(3) के तहत निर्देश जारी कर सकती है।कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यूनिवर्सिटी का कोषाध्यक्ष और संयुक्त सचिव के पदों को महिलाओं के लिए आरक्षित करने का निर्णय केवल इसलिए अमान्य नहीं था कि छात्र संघ के संविधान में कोई औपचारिक संशोधन नहीं किया गया था, खासकर तब जब...

कृषि उपज को बाहर से लाकर सिर्फ प्रोसेसिंग करने पर विकास उपकर नहीं लगा सकता राज्य: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि राज्य के बाहर से कृषि उपज को किसी मार्केट एरिया में केवल विनिर्माण (Manufacturing) या आगे की प्रोसेसिंग के लिए लाने पर, यदि उस मार्केट एरिया में उसकी कोई बिक्री या खरीद नहीं होती है, तो उस पर डेवलपमेंट सेस (विकास उपकर) नहीं लगाया जा सकता।चीफ जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की डिवीजन बेंच ने कहा कि उत्तराखंड कृषि उपज विपणन (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 2011 की धारा 27(c)(v) के पहले प्रावधान में इस तरह के कृषि उत्पाद पर...

पत्नी के पहले पति से हुए बच्चे को अपनाने के बाद पति उसके भरण-पोषण की ज़िम्मेदारी से इनकार नहीं कर सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी के पहले पति से हुए बच्चे को 'जान-बूझकर' अपने परिवार का हिस्सा मानने के बाद, बाद में उसके भरण-पोषण की ज़िम्मेदारी से "मुकर" नहीं सकता।जस्टिस आलोक महरा ने कहा,"मौजूदा हालात की पूरी जानकारी के साथ वैवाहिक रिश्ते को होशपूर्वक स्वीकार करने के बाद" वह व्यक्ति अब बच्चे के "भरण-पोषण की ज़िम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता।" इस फैसले के आधार पर कोर्ट ने हरिद्वार फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ क्रिमिनल रिविज़न याचिका को मंज़ूरी दी। फैमिली कोर्ट ने पत्नी और...

उत्तराखंड हाईकोर्ट में पुलिस ने दिखाई ऑनलाइन FIR डाउनलोड करने की सुविधा, जनहित याचिका का निपटारा

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने ऑनलाइन FIR देखने और डाउनलोड करने में आ रही दिक्कत से जुड़ी जनहित याचिका का निपटारा किया। सुनवाई के दौरान पुलिस की तकनीकी टीम ने अदालत के सामने नागरिक पोर्टल और देवभूमि मोबाइल ऐप के जरिए FIR डाउनलोड करके दिखाई।चीफ जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के सामने पुलिस ने बताया कि सिविल पोर्टल पर पंजीकरण करने के बाद लोग पोर्टल और मोबाइल ऐप दोनों के जरिए FIR देख और डाउनलोड कर सकते हैं। तकनीकी टीम ने अदालत के सामने कई FIR डाउनलोड करके भी दिखाईं।मामले में...

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 2018 के CM स्टिंग ऑपरेशन मामले में नामजद व्यक्ति के खिलाफ FIR रद्द की, कहा- कोई दोषी ठहराने वाला सबूत नहीं मिला

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री को निशाना बनाने वाले कथित स्टिंग ऑपरेशन के सिलसिले में नामजद व्यक्ति के खिलाफ 2018 में दर्ज FIR रद्द की। कोर्ट ने कहा कि "याचिकाकर्ता को कथित अपराधों से जोड़ने वाली कोई शुरुआती सामग्री (prima facie material) न होने पर आपराधिक कार्यवाही की मुश्किलों और अनिश्चितता का सामना करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।"कोर्ट ने गौर किया कि FIR में केवल यह आरोप लगाया गया कि न्यूज़ चैनल के CEO ने शिकायतकर्ता को बताया कि याचिकाकर्ता तत्कालीन मुख्यमंत्री...

फर्जी आधार कार्ड और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने POCSO आरोपी को जमानत से किया इनकार

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने POCSO मामले में आरोपी व्यक्ति को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि मामले में उपलब्ध साक्ष्य गहरे दबाव के तहत जबरन धर्म परिवर्तन के सुनियोजित प्रयास की ओर संकेत करते हैं। कोर्ट ने कथित तौर पर फर्जी नाम से बनाए गए आधार कार्ड को भी गंभीरता से लिया और कहा कि इससे अपराध में आरोपी की संलिप्तता की सीमा का संकेत मिलता है।जस्टिस राकेश थपलियाल ने आरोपी की पहली जमानत याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64 और 70 तथा POCSO Act की धारा...

साइन किया हुआ खाली चेक, भले विवरण किसी और ने भरे हों, कानूनी देनदारी की धारणा बनेगी: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि चेक पर हस्ताक्षर किए जाने की बात स्वीकार होने पर परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (NI Act) की धारा 118(ए) और 139 के तहत कानूनी धारणा लागू हो जाती है। चेक के बाकी विवरण किसी अन्य व्यक्ति द्वारा भरे जाने या हस्ताक्षर और अन्य लिखावट में अंतर होने से यह धारणा अपने आप समाप्त नहीं होती।जस्टिस आलोक महरा एक आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें धारा 138 के तहत दोषसिद्धि और सत्र अदालत द्वारा अपील खारिज किए जाने को चुनौती दी गई। ट्रायल कोर्ट ने याचिकाकर्ता को एक साल...

पैकेज पॉलिसी के तहत यात्रियों को कवर करने पर यात्री के तौर पर यात्रा कर रहे वाहन मालिक को मुआवज़ा पाने का हक: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी कॉम्प्रिहेन्सिव/पैकेज इंश्योरेंस पॉलिसी में खास तौर पर यात्रियों को कवर किया गया है तो यात्री के तौर पर यात्रा कर रहे वाहन मालिक को सिर्फ़ इसलिए मुआवज़े से वंचित नहीं किया जा सकता, क्योंकि वह वाहन का मालिक है। कोर्ट ने पाया कि उस खास इंश्योरेंस पॉलिसी की शर्तों में नौ यात्रियों के लिए साफ़ तौर पर कवरेज दिया गया, जिसके लिए अलग से प्रीमियम लिया गया।जस्टिस पंकज पुरोहित मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील पर सुनवाई कर रहे थे, जिसने सड़क...

नैनीताल में दूषित पानी पर हाईकोर्ट सख्त, 24 घंटे में हेल्पलाइन बनाने का आदेश

नैनीताल जिले के कई इलाकों में दूषित पेयजल और जलजनित बीमारियों के फैलने के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। हाईकोर्ट ने नैनीताल के जिलाधिकारी को 24 घंटे के भीतर आम लोगों के लिए हेल्पलाइन नंबर शुरू करने और उसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया। इस हेल्पलाइन के जरिए लोग दूषित पानी से जुड़ी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी और जस्टिस सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने वकील रवि बिष्ट की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए। अदालत के सामने खबरों...

सिर्फ़ चेयरपर्सन आदेश पास नहीं कर सकते: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारी के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई रद्द की

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि "राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण के चेयरपर्सन द्वारा अकेले पास किया गया आदेश, प्राधिकरण द्वारा पास किया गया आदेश नहीं माना जा सकता"। कोर्ट ने माना कि उत्तराखंड पुलिस अधिनियम, 2007 के तहत, प्राधिकरण में चेयरपर्सन और चार अन्य सदस्य होते हैं और चेयरपर्सन द्वारा अकेले पास किया गया आदेश "अपने आप में ग़ैर-क़ानूनी है। इसी आधार पर इसे रद्द किया जाना चाहिए"। नतीजतन, इस बात को मानते हुए कोर्ट ने उस आदेश के आधार पर एक पुलिस अधिकारी के ख़िलाफ़ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई रद्द...

हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी शिफ्ट करने के प्रस्ताव को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट कॉम्प्लेक्स को नैनीताल से हल्द्वानी शिफ्ट करने के प्रस्ताव को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की। कोर्ट ने कहा कि यह रिट याचिका समय से पहले दायर की गई थी क्योंकि मामला अभी ज़मीन की पहचान करने के चरण में है। कोर्ट ने कहा कि जब वन भूमि को डी-रिज़र्व करने या उसे गैर-वन उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करने का चरण आएगा, तब वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 की धारा 2 के तहत केंद्र सरकार की पूर्व मंज़ूरी की आवश्यकता होगी।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी और जस्टिस पंकज पुरोहित की डिवीज़न बेंच उस...

पत्नी की सरकारी नौकरी की जानकारी RTI में नहीं मिलेगी, जब तक सार्वजनिक हित का ठोस आधार न हो: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अलग रह रही पत्नी की सरकारी नौकरी से जुड़ी जानकारी RTI के तहत मांगने वाले व्यक्ति को राहत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस material नहीं है, जिससे यह साबित हो कि जानकारी के खुलासे में सार्वजनिक हित इतना महत्वपूर्ण है कि वह पत्नी के निजता के अधिकार पर भारी पड़े।चीफ जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की डिवीजन बेंच ने अपील खारिज करते हुए कहा कि अपीलकर्ता अपनी पत्नी की सरकारी नियुक्ति में कथित हेरफेर के आरोप को प्रथम दृष्टया साबित...

रोमांटिक रिश्ता या शादी का प्रस्ताव POCSO Act के असर को कम नहीं कर सकता: नाबालिग के यौन उत्पीड़न मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने ज़मानत देने से इनकार किया

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि "रोमांटिक रिश्ते और उसके बाद शादी के प्रस्ताव की दलील POCSO Act के तहत नाबालिग बच्चे को मिली कानूनी सुरक्षा को कम नहीं कर सकती," और यह दोहराया कि कानून की नज़र में नाबालिग की सहमति "पूरी तरह से अप्रासंगिक" है।मौजूदा मामले में इसे लागू करते हुए कोर्ट ने इस आरोप पर भी ध्यान दिया कि आरोपी ने नाबालिग का भरोसा जीतने के लिए अपनी धार्मिक पहचान छिपाई थी। उसकी उम्र, गर्भावस्था की मेडिकल स्थिति और POCSO Act के तहत सहमति पर कानूनी रोक को देखते हुए कोर्ट ने आरोपी को ज़मानत देने...

आबकारी आयुक्त शराब की मंज़ूरशुदा सब-शॉप को दूसरी जगह नहीं भेज सकते: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि आबकारी आयुक्त किसी लाइसेंस-धारक की शराब की सब-शॉप को सिर्फ़ इस आधार पर दूसरी जगह नहीं भेज सकते कि इससे किसी दूसरी शराब की दुकान की कमाई पर बुरा असर पड़ रहा है। कोर्ट ने पाया कि उत्तराखंड आबकारी नीति के नियम 28.4(b) के तहत दुकान को दूसरी जगह भेजने का अधिकार ज़िला मजिस्ट्रेट के पास है, न कि आबकारी आयुक्त के पास।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी उस रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें प्रतिवादी नंबर 5 की अपील पर आबकारी आयुक्त द्वारा 31 मार्च, 2026 को पारित आदेश को चुनौती दी...

उचित समय का नोटिस दिए बिना जमीन का अस्थायी अधिग्रहण नहीं: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रद्द किए अधिग्रहण आदेश

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 81 के तहत किसी जमीन का अस्थायी अधिग्रहण उचित समय पहले नोटिस दिए बिना नहीं किया जा सकता।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून की तय प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी व्यक्ति को उसकी जमीन के इस्तेमाल से वंचित नहीं किया जा सकता। जस्टिस रविंद्र मैठाणी ने मेसर्स डेक्कन चार्टर्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला...

निष्पक्ष सुनवाई के लिए कॉल रिकॉर्ड ज़रूरी हों तो सिर्फ़ पीड़ित की प्राइवेसी के लिए उन्हें देने से मना नहीं किया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और टावर-लोकेशन की जानकारी मांगने वाली अर्ज़ी को "सिर्फ़ पीड़ित के प्राइवेसी के अधिकार के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता, जब ये रिकॉर्ड मामले के सही फ़ैसले के लिए शुरुआती तौर पर ज़रूरी हों"।जस्टिस आलोक महरा ने कहा कि हालांकि आर्टिकल 21 के तहत आरोपी का निष्पक्ष सुनवाई और जांच का अधिकार और पीड़ित का प्राइवेसी का अधिकार, दोनों ही संवैधानिक रूप से सुरक्षित हैं। फिर भी ट्रायल कोर्ट को "इन दोनों अधिकारों के बीच संतुलन बनाना होगा" और ऐसा करने के लिए...

बाल संरक्षण का मतलब किशोरावस्था को अपराध बनाना नहीं: 17 वर्षीय लड़की और 21 वर्षीय युवक के संबंध पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने FIR रद्द की

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 17 वर्षीय लड़की और करीब 21 वर्षीय युवक के बीच प्रेम संबंध से जुड़े मामले में POCSO Act के तहत दर्ज FIR और उससे जुड़ी पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द की। कोर्ट ने कहा कि बाल संरक्षण का उद्देश्य किशोरावस्था को अपराध की श्रेणी में डालना नहीं हो सकता।जस्टिस आलोक महरा ने कहा कि 17 वर्षीय लड़की और 21 वर्षीय युवक के बीच सहमति से बने संबंधों को यौन हमले के बराबर मानना महत्वपूर्ण अंतर को खत्म करता है और संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत स्पष्ट मनमानी की स्थिति पैदा करता है।अदालत रामनगर...

दूसरी शादी की शिकायत पर संज्ञान लेने के चरण में सप्तपदी रस्म के सबूत की ज़रूरत नहीं: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 494 के तहत बिगैमी (दूसरी शादी) के अपराध के लिए आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि कथित दूसरी शादी की ज़रूरी रस्में, जिसमें 'सप्तपदी' भी शामिल है, पूरी की गई थीं या नहीं, यह ट्रायल का मामला है और "संज्ञान लेने के शुरुआती चरण में इस पर विचार नहीं किया जा सकता"।सुप्रीम कोर्ट के 'के. नीलावेनी बनाम राज्य' मामले के फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता-पति का यह तर्क कि 'सप्तपदी' रस्म के सबूत न होने के कारण IPC...