गुजरात हाईकोर्ट
कानूनी अधिकार का इस्तेमाल कर भूमि हड़पने की शिकायत दर्ज करना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज उस एफआईआर को रद्द कर दिया, जिसमें उस पर भूमि हड़पने (Land Grabbing) की शिकायत दर्ज कर मृतक को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया था। अदालत ने कहा कि कानून के तहत उपलब्ध वैधानिक अधिकार का प्रयोग करते हुए शिकायत दर्ज करना मात्र इस आधार पर आत्महत्या के लिए उकसाना (Abetment of Suicide) नहीं माना जा सकता कि बाद में संबंधित व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली।2026 LiveLaw (Guj) 175 में जस्टिस पी. एम. रावल की एकलपीठ ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है...
हरेन पांड्या मर्डर केस में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की सज़ा कम करने की अर्ज़ी पर 6 महीने के अंदर फ़ैसला करे राज्य: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि वह मोहम्मद असगर अली की सज़ा कम करने की अर्ज़ी पर छह महीने के अंदर फ़ैसला ले। असगर अली को राज्य के पूर्व गृह मंत्री हरेन पांड्या की हत्या के लिए दोषी ठहराया गया और उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई।जस्टिस एमआर मेंगडे ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड में पेश की गई जेल की रिपोर्ट से पता चलता है कि याचिकाकर्ता की सज़ा कम करने के मामले पर विचार करने की प्रक्रिया चल रही है। सलाहकार समिति की राय मिल गई है और इसे जल्द ही संबंधित अधिकारी के सामने पेश किया जाएगा।कोर्ट ने...
मुबारात से हुए तलाक को मान्यता देना फैमिली कोर्ट का दायित्व: गुजरात हाईकोर्ट ने पति-पत्नी का विवाह समाप्त घोषित किया
गुजरात हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि शरीयत कानून के अधीन आने वाले मुस्लिम पति-पत्नी आपसी सहमति से 'मुबारात' के माध्यम से विवाह समाप्त करते हैं तो फैमिली कोर्ट का दायित्व है कि वह उस समझौते को स्वीकार करे और वैवाहिक संबंध समाप्त होने की घोषणा करे।जस्टिस इलेश जे. वोरा और जस्टिस आर. टी. वच्छाणी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी एक पति की अपील पर सुनवाई करते हुए की, जिसने फैमिली कोर्ट द्वारा उसकी याचिका खारिज किए जाने को चुनौती दी थी।मामले के अनुसार पति और पत्नी का विवाह 21 फरवरी 2015 को...
1999 की नीति के तहत भूखंड पाने का दावा: यूसुफ पठान ने गुजरात हाईकोर्ट से मांगा समय, अदालत ने कहा- जितनी देरी, उतना बढ़ेगा हर्जाना
गुजरात हाईकोर्ट में पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान ने सरकारी भूमि से जुड़े विवाद में राज्य सरकार की नीति के तहत अपने दावे को आगे बढ़ाने के लिए अतिरिक्त समय मांगा।हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि यदि वह लंबे समय तक भूमि पर कब्जे में रहे हैं तो समय बढ़ने के साथ संभावित हर्जाने की राशि भी बढ़ सकती है।चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डी एन रे की खंडपीठ यूसुफ पठान की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने अगस्त 2025 के एकल पीठ के फैसले को चुनौती दी। उस फैसले में अदालत ने उन्हें...
2013 रेप केस: आसाराम ने गुजरात हाईकोर्ट से अपनी अस्थायी ज़मानत बढ़ाने की अर्ज़ी वापस ली
गांधीनगर कोर्ट ने 2013 के रेप केस में आसाराम को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी। आसाराम ने शुक्रवार (12 जून) को गुजरात हाईकोर्ट से अपनी अस्थायी ज़मानत बढ़ाने की अर्ज़ी वापस ली।आसाराम के वकील ने जस्टिस गीता गोपी और जस्टिस एलएस पीरज़ादा की डिवीज़न बेंच के सामने कहा कि राजस्थान हाई कोर्ट ने हाल ही में एक अलग रेप केस में आसाराम की सज़ा और उम्रकैद बरकरार रखी और वह अभी जोधपुर जेल में बंद हैं।वकील ने कहा,"मुझे मिले निर्देशों के अनुसार मुझे अस्थायी ज़मानत बढ़ाने की अर्ज़ी वापस लेने की अनुमति दी...
अपराध में संलिप्तता साबित किए बिना बैंक खाता फ्रीज करना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति के बैंक खाते को डी-फ्रीज करने का आदेश देते हुए कहा कि जांच एजेंसियों को बैंक खाते फ्रीज करने का अधिकार है, लेकिन इस शक्ति का प्रयोग उचित, आनुपातिक और कानूनी तरीके से किया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि संदिग्ध राशि का स्पष्ट निर्धारण किए बिना या खाताधारक की किसी आपराधिक गतिविधि में संलिप्तता स्थापित किए बिना पूरे बैंक खाते को फ्रीज करना नागरिक के मौलिक अधिकारों को प्रभावित करता है।जस्टिस निरल आर. मेहता की अदालत एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें साइबर अपराध की...
यूसुफ पठान को गुजरात हाईकोर्ट की फटकार, पूछा- आवंटन पूरा हुए बिना सरकारी भूखंड पर कब्जा कैसे किया?
गुजरात हाईकोर्ट ने सोमवार को पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस सांसद यूसुफ पठान से तीखे सवाल पूछते हुए कहा कि आवंटन की सभी औपचारिकताएं पूरी हुए बिना किसी सरकारी भूखंड पर कब्जा कैसे किया जा सकता है?अदालत ने संकेत दिया कि न केवल भूखंड खाली करने का निर्देश दिया जा सकता है, बल्कि सार्वजनिक भूमि के उपयोग और कब्जे के लिए हर्जाना भी लगाया जा सकता है।चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डी. एन. राय की खंडपीठ यूसुफ पठान की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने अगस्त 2025 के एकल पीठ के...
शादी का झूठा वादा कर संबंध बनाना गंभीर आरोप, मां की असहमति बहाना नहीं: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत दर्ज FIR रद्द करने से इनकार करते हुए कहा कि शादी से इनकार करने के लिए केवल यह कहना कि “मां रिश्ते के लिए तैयार नहीं थीं”, प्रथम दृष्टया दुर्भावनापूर्ण मंशा को दर्शाता है।जस्टिस एम. के. ठक्कर ने जाम्बिया निवासी आरोपी की याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामले के आरोप यह संकेत देते हैं कि आरोपी ने विवाह का झूठा आश्वासन देकर पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाए, जबकि उसकी शादी करने की वास्तविक मंशा नहीं थी।अदालत ने अपने आदेश में कहा,“सिर्फ यह...
RTI Act के तहत जानकारी मिलने के बाद मूल दस्तावेज मांगने का अधिकार नहीं: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने एक RTI आवेदक की याचिका खारिज करते हुए कहा कि जब केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (CPIO) उपलब्ध अभिलेखों की प्रतियां उपलब्ध करा देता है तब आवेदक मूल दस्तावेज देने की मांग नहीं कर सकता।जस्टिस हेमंत एम प्रच्छक ने अपने आदेश में कहा कि RTI Act के तहत लोक प्राधिकरण की जिम्मेदारी केवल उन दस्तावेजों और सूचनाओं को उपलब्ध कराने तक सीमित है, जो उसके पास उपलब्ध और सुलभ हैं।अदालत ने कहा,“जो दस्तावेज संबंधित प्राधिकरण के पास उपलब्ध थे, उनकी प्रतियां याचिकाकर्ता को पहले ही दी जा चुकी हैं। मूल...
रात में बिना संकेत हाईवे पर खड़े ट्रक से टकराने पर बाइक सवार को दोषी नहीं ठहराया जा सकता: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि रात के समय बिना किसी चेतावनी संकेत के हाईवे पर खड़े ट्रक से बाइक टकरा जाने पर बाइक चालक को लापरवाही का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें मृतक बाइक चालक पर 30 प्रतिशत सह-लापरवाही तय की गई थी।जस्टिस मूल चंद त्यागी ने कहा कि ट्रक चालक ने वाहन को इस तरह खड़ा किया था कि उसका आधा हिस्सा सड़क पर था और बाकी हिस्सा सड़क से बाहर। साथ ही वहां कोई इंडिकेटर, पार्किंग लाइट, रिफ्लेक्टर या चेतावनी संकेत...
EMI और लोन का हवाला देकर बच्चों के भरण-पोषण से नहीं बच सकता पिता: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने कहा है कि पिता अपने बच्चों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से केवल इस आधार पर बच नहीं सकता कि वह EMI या लोन चुका रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चों के भोजन, कपड़े, आवास, इलाज और ट्यूशन जैसे खर्च उठाना पिता की कानूनी जिम्मेदारी है।जस्टिस गीता गोपी की अदालत एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें एक महिला ने अपने तीन नाबालिग ट्रिपलेट बच्चों के लिए भरण-पोषण राशि बढ़ाने की मांग की थी। पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पिता को ₹1800 प्रति माह देने का आदेश दिया था, लेकिन बाद में महिला ने धारा...
रेल हादसे में गर्भवती महिला की मौत पर गर्भस्थ शिशु के लिए अलग मुआवजा मिलेगा: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि 9 महीने का गर्भस्थ शिशु (foetus) भी कानून की नजर में “बच्चा” माना जाएगा और यदि किसी रेल दुर्घटना में गर्भस्थ शिशु की मृत्यु हो जाती है, तो उसके माता-पिता रेलवे अधिनियम के तहत अलग से मुआवजा पाने के हकदार होंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गर्भ में बच्चे की मौत को मां की मृत्यु से अलग स्वतंत्र दुर्घटना माना जाएगा।जस्टिस जेसी दोशी की अदालत एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें जयप्रकाश घासितेलाल अपनी 9 महीने की गर्भवती पत्नी के साथ ट्रेन में...
'पहली नज़र में देरी करने की चाल चली': गुजरात हाईकोर्ट ने रेप केस में नारायण साई की उम्रकैद की सज़ा निलंबित करने से किया इनकार
गुजरात हाईकोर्ट ने सोमवार (5 मई) को नारायण साई की याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने रेप केस में अपनी उम्रकैद की सज़ा निलंबित करने की मांग की थी। इस केस में सूरत सेशन कोर्ट ने 2019 में उन्हें दोषी ठहराया था। कोर्ट ने पहली नज़र में यह पाया कि वह अपनी दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली अपील की जल्द सुनवाई में दिलचस्पी नहीं ले रहे थे और उन्होंने जानबूझकर देरी करने की चाल चली थी।याचिकाकर्ता की इस दलील पर कि वह 11 साल जेल में बिता चुके हैं और उनकी आपराधिक अपील की सुनवाई में देरी हो रही है, जस्टिस इलेश जे....
ओपन जेलों पर राज्य के रवैये पर गुजरात हाईकोर्ट नाराज, कहा—“हमें खेद है”
गुजरात हाईकोर्ट ने ओपन जेलों से जुड़े मामले में राज्य सरकार की उदासीनता पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 26 फरवरी 2026 के निर्देशों के अनुपालन की स्थिति उसके सामने पेश नहीं की गई, जबकि पहले से नोटिस दिया गया था।चीफ़ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डी. एन. रे की खंडपीठ ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण मामले में राज्य अधिकारियों का रवैया “खेदजनक” है।अदालत ने नोट किया कि सरकारी वकील और लोक अभियोजक, दोनों ही सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए।यह सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के फैसले Suhas Chakma v. Union...
गुजरात हाईकोर्ट का फैसला: अलिबी साबित होने पर आरोपी बरी, जांच अधिकारी की लापरवाही पर कड़ी टिप्पणी
गुजरात हाईकोर्ट ने एक हत्या मामले में आरोपी को बरी करते हुए कहा कि उसने अलिबी (घटना के समय किसी अन्य स्थान पर होने) का जो दावा किया था, वह 13 स्वतंत्र गवाहों से साबित होता है, लेकिन इस महत्वपूर्ण साक्ष्य को चार्जशीट के साथ जानबूझकर पेश नहीं किया गया।जस्टिस इलेश जे. वोरा और जस्टिस आर. टी. वच्छानी की खंडपीठ ने कहा कि जांच अधिकारी द्वारा इस साक्ष्य को रिकॉर्ड पर न रखना गंभीर कर्तव्य-लोप (dereliction of duty) है और इससे अभियोजन की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।क्या है मामला?अभियोजन के...
2002 दंगों के बाद वडोदरा हत्याकांड में 5 आरोपियों की बरी बरकरार, गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य की अपील खारिज की
गुजरात हाईकोर्ट ने 2002 गोधरा ट्रेन कांड के बाद हुए दंगों से जुड़े वडोदरा हत्याकांड मामले में पांच आरोपियों को बरी किए जाने का फैसला बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि गवाह आरोपियों की स्पष्ट पहचान नहीं कर सके और यह साबित नहीं हुआ कि वही लोग कथित अपराध में शामिल थे।जस्टिस निर्जर एस. देसाई और जस्टिस डी.एन. रे की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए कहा कि घटना लगभग 400 से 500 लोगों की भीड़ द्वारा अंजाम दी गई और गवाहों ने लगातार यही कहा कि वे हमलावरों की पहचान नहीं कर सके।अदालत ने कहा कि मृतक की...
गुजरात हाइकोर्ट ने दुष्कर्म मामले में आसाराम की अस्थायी जमानत 15 जून तक बढ़ाई
गुजरात हाइकोर्ट ने 2013 के दुष्कर्म मामले में दोषसिद्ध आसाराम को दी गई अस्थायी जमानत 15 जून 2026 तक बढ़ाई।जस्टिस इलेश जे. वोरा और जस्टिस आर.टी. वच्छानी की खंडपीठ ने चिकित्सीय आधारों पर यह राहत प्रदान की।अदालत ने कहा कि दोषी की मेडिकल स्थिति, निरंतर निगरानी की आवश्यकता तथा अब तक अस्थायी जमानत के दौरान किसी प्रतिकूल घटना के सामने न आने को देखते हुए जमानत अवधि बढ़ाई जा रही है।खंडपीठ ने आदेश में कहा कि पूर्व में 6 नवंबर 2025 को जिन शर्तों पर अस्थायी जमानत दी गई, वही शर्तें आगे भी लागू रहेंगी।आसाराम...
स्वस्थ पति बिना सबूत के बिज़नेस बंद होने का दावा करके कैंसर से पीड़ित पत्नी को गुज़ारा भत्ता देने से मना नहीं कर सकता: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति की अपील खारिज की, जिसमें उसने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उसे अपनी पत्नी—जो कैंसर का इलाज करवा रही है—को गुज़ारा भत्ता देने का निर्देश दिया गया। कोर्ट ने कहा कि पति का बिज़नेस बंद होना या मंदी, अगर इसका कोई ठोस सबूत न हो तो गुज़ारा भत्ता देने से मना करने का आधार नहीं हो सकता, खासकर 'स्वस्थ शरीर' (Able-Bodied) के सिद्धांत को देखते हुए।ऐसा करते हुए कोर्ट ने कई पिछले फैसलों का हवाला देते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि कानून बिल्कुल स्पष्ट है कि पति का यह...
'पेशा कलंकित नहीं हो सकता': गुजरात हाईकोर्ट ने वकील बनकर पेश होने के आरोपी लॉ स्टूडेंट को अग्रिम ज़मानत देने से किया इनकार
गुजरात हाईकोर्ट ने महिला लॉ स्टूडेंट को अग्रिम ज़मानत देने से इनकार किया। यह महिला अभी LL.B. कोर्स के तीसरे साल में है और उस पर एक मामले में वकील बनकर पेश होने का आरोप है। इस मामले में कई आरोपियों पर 80,00,000 रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है।राज्य सरकार ने आरोप लगाया कि जांच के दौरान न सिर्फ उसके नाम से जारी गुजरात बार काउंसिल का पहचान पत्र बरामद हुआ, बल्कि एक नेम प्लेट भी मिली जिस पर आरोपी को भारत के सुप्रीम कोर्ट का वकील बताया गया। इसके अलावा, विभिन्न पुलिस स्टेशनों की मुहरें, केस रजिस्टर,...
कार्यस्थल पर हार्ट अटैक से मौत को स्वतः 'रोजगार चोट' नहीं माना जा सकता: हाईकोर्ट ने मुआवजा खारिज किया
गुजरात हाईकोर्ट ने अहम फैसले में स्पष्ट किया कि कार्यस्थल पर हार्ट अटैक से हुई मृत्यु को स्वतः रोजगार से उत्पन्न चोट नहीं माना जा सकता। इसके लिए यह साबित करना आवश्यक है कि मृत्यु और रोजगार के बीच सीधा संबंध (नैक्सस) हो।जस्टिस जे.सी. दोशी ने कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम की धारा 2(8) का हवाला देते हुए कहा कि “रोजगार चोट” वही मानी जाएगी जो दुर्घटना या व्यावसायिक बीमारी के कारण हो और जो रोजगार के दौरान तथा उससे उत्पन्न हुई हो।मामला मैकेनिक की मृत्यु से जुड़ा था, जिसकी कार्य के दौरान हार्ट अटैक से मौत...



















