गुजरात हाईकोर्ट

यूसुफ पठान को गुजरात हाईकोर्ट की फटकार, पूछा- आवंटन पूरा हुए बिना सरकारी भूखंड पर कब्जा कैसे किया?
यूसुफ पठान को गुजरात हाईकोर्ट की फटकार, पूछा- आवंटन पूरा हुए बिना सरकारी भूखंड पर कब्जा कैसे किया?

गुजरात हाईकोर्ट ने सोमवार को पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस सांसद यूसुफ पठान से तीखे सवाल पूछते हुए कहा कि आवंटन की सभी औपचारिकताएं पूरी हुए बिना किसी सरकारी भूखंड पर कब्जा कैसे किया जा सकता है?अदालत ने संकेत दिया कि न केवल भूखंड खाली करने का निर्देश दिया जा सकता है, बल्कि सार्वजनिक भूमि के उपयोग और कब्जे के लिए हर्जाना भी लगाया जा सकता है।चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डी. एन. राय की खंडपीठ यूसुफ पठान की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने अगस्त 2025 के एकल पीठ के...

शादी का झूठा वादा कर संबंध बनाना गंभीर आरोप, मां की असहमति बहाना नहीं: गुजरात हाईकोर्ट
शादी का झूठा वादा कर संबंध बनाना गंभीर आरोप, मां की असहमति बहाना नहीं: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत दर्ज FIR रद्द करने से इनकार करते हुए कहा कि शादी से इनकार करने के लिए केवल यह कहना कि “मां रिश्ते के लिए तैयार नहीं थीं”, प्रथम दृष्टया दुर्भावनापूर्ण मंशा को दर्शाता है।जस्टिस एम. के. ठक्कर ने जाम्बिया निवासी आरोपी की याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामले के आरोप यह संकेत देते हैं कि आरोपी ने विवाह का झूठा आश्वासन देकर पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाए, जबकि उसकी शादी करने की वास्तविक मंशा नहीं थी।अदालत ने अपने आदेश में कहा,“सिर्फ यह...

RTI Act के तहत जानकारी मिलने के बाद मूल दस्तावेज मांगने का अधिकार नहीं: गुजरात हाईकोर्ट
RTI Act के तहत जानकारी मिलने के बाद मूल दस्तावेज मांगने का अधिकार नहीं: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने एक RTI आवेदक की याचिका खारिज करते हुए कहा कि जब केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (CPIO) उपलब्ध अभिलेखों की प्रतियां उपलब्ध करा देता है तब आवेदक मूल दस्तावेज देने की मांग नहीं कर सकता।जस्टिस हेमंत एम प्रच्छक ने अपने आदेश में कहा कि RTI Act के तहत लोक प्राधिकरण की जिम्मेदारी केवल उन दस्तावेजों और सूचनाओं को उपलब्ध कराने तक सीमित है, जो उसके पास उपलब्ध और सुलभ हैं।अदालत ने कहा,“जो दस्तावेज संबंधित प्राधिकरण के पास उपलब्ध थे, उनकी प्रतियां याचिकाकर्ता को पहले ही दी जा चुकी हैं। मूल...

रात में बिना संकेत हाईवे पर खड़े ट्रक से टकराने पर बाइक सवार को दोषी नहीं ठहराया जा सकता: गुजरात हाईकोर्ट
रात में बिना संकेत हाईवे पर खड़े ट्रक से टकराने पर बाइक सवार को दोषी नहीं ठहराया जा सकता: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि रात के समय बिना किसी चेतावनी संकेत के हाईवे पर खड़े ट्रक से बाइक टकरा जाने पर बाइक चालक को लापरवाही का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें मृतक बाइक चालक पर 30 प्रतिशत सह-लापरवाही तय की गई थी।जस्टिस मूल चंद त्यागी ने कहा कि ट्रक चालक ने वाहन को इस तरह खड़ा किया था कि उसका आधा हिस्सा सड़क पर था और बाकी हिस्सा सड़क से बाहर। साथ ही वहां कोई इंडिकेटर, पार्किंग लाइट, रिफ्लेक्टर या चेतावनी संकेत...

रेल हादसे में गर्भवती महिला की मौत पर गर्भस्थ शिशु के लिए अलग मुआवजा मिलेगा: गुजरात हाईकोर्ट
रेल हादसे में गर्भवती महिला की मौत पर गर्भस्थ शिशु के लिए अलग मुआवजा मिलेगा: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि 9 महीने का गर्भस्थ शिशु (foetus) भी कानून की नजर में “बच्चा” माना जाएगा और यदि किसी रेल दुर्घटना में गर्भस्थ शिशु की मृत्यु हो जाती है, तो उसके माता-पिता रेलवे अधिनियम के तहत अलग से मुआवजा पाने के हकदार होंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गर्भ में बच्चे की मौत को मां की मृत्यु से अलग स्वतंत्र दुर्घटना माना जाएगा।जस्टिस जेसी दोशी की अदालत एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें जयप्रकाश घासितेलाल अपनी 9 महीने की गर्भवती पत्नी के साथ ट्रेन में...

पहली नज़र में देरी करने की चाल चली: गुजरात हाईकोर्ट ने रेप केस में नारायण साई की उम्रकैद की सज़ा निलंबित करने से किया इनकार
'पहली नज़र में देरी करने की चाल चली': गुजरात हाईकोर्ट ने रेप केस में नारायण साई की उम्रकैद की सज़ा निलंबित करने से किया इनकार

गुजरात हाईकोर्ट ने सोमवार (5 मई) को नारायण साई की याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने रेप केस में अपनी उम्रकैद की सज़ा निलंबित करने की मांग की थी। इस केस में सूरत सेशन कोर्ट ने 2019 में उन्हें दोषी ठहराया था। कोर्ट ने पहली नज़र में यह पाया कि वह अपनी दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली अपील की जल्द सुनवाई में दिलचस्पी नहीं ले रहे थे और उन्होंने जानबूझकर देरी करने की चाल चली थी।याचिकाकर्ता की इस दलील पर कि वह 11 साल जेल में बिता चुके हैं और उनकी आपराधिक अपील की सुनवाई में देरी हो रही है, जस्टिस इलेश जे....

गुजरात हाईकोर्ट का फैसला: अलिबी साबित होने पर आरोपी बरी, जांच अधिकारी की लापरवाही पर कड़ी टिप्पणी
गुजरात हाईकोर्ट का फैसला: अलिबी साबित होने पर आरोपी बरी, जांच अधिकारी की लापरवाही पर कड़ी टिप्पणी

गुजरात हाईकोर्ट ने एक हत्या मामले में आरोपी को बरी करते हुए कहा कि उसने अलिबी (घटना के समय किसी अन्य स्थान पर होने) का जो दावा किया था, वह 13 स्वतंत्र गवाहों से साबित होता है, लेकिन इस महत्वपूर्ण साक्ष्य को चार्जशीट के साथ जानबूझकर पेश नहीं किया गया।जस्टिस इलेश जे. वोरा और जस्टिस आर. टी. वच्छानी की खंडपीठ ने कहा कि जांच अधिकारी द्वारा इस साक्ष्य को रिकॉर्ड पर न रखना गंभीर कर्तव्य-लोप (dereliction of duty) है और इससे अभियोजन की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।क्या है मामला?अभियोजन के...

2002 दंगों के बाद वडोदरा हत्याकांड में 5 आरोपियों की बरी बरकरार, गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य की अपील खारिज की
2002 दंगों के बाद वडोदरा हत्याकांड में 5 आरोपियों की बरी बरकरार, गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य की अपील खारिज की

गुजरात हाईकोर्ट ने 2002 गोधरा ट्रेन कांड के बाद हुए दंगों से जुड़े वडोदरा हत्याकांड मामले में पांच आरोपियों को बरी किए जाने का फैसला बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि गवाह आरोपियों की स्पष्ट पहचान नहीं कर सके और यह साबित नहीं हुआ कि वही लोग कथित अपराध में शामिल थे।जस्टिस निर्जर एस. देसाई और जस्टिस डी.एन. रे की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए कहा कि घटना लगभग 400 से 500 लोगों की भीड़ द्वारा अंजाम दी गई और गवाहों ने लगातार यही कहा कि वे हमलावरों की पहचान नहीं कर सके।अदालत ने कहा कि मृतक की...

स्वस्थ पति बिना सबूत के बिज़नेस बंद होने का दावा करके कैंसर से पीड़ित पत्नी को गुज़ारा भत्ता देने से मना नहीं कर सकता: गुजरात हाईकोर्ट
स्वस्थ पति बिना सबूत के बिज़नेस बंद होने का दावा करके कैंसर से पीड़ित पत्नी को गुज़ारा भत्ता देने से मना नहीं कर सकता: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति की अपील खारिज की, जिसमें उसने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उसे अपनी पत्नी—जो कैंसर का इलाज करवा रही है—को गुज़ारा भत्ता देने का निर्देश दिया गया। कोर्ट ने कहा कि पति का बिज़नेस बंद होना या मंदी, अगर इसका कोई ठोस सबूत न हो तो गुज़ारा भत्ता देने से मना करने का आधार नहीं हो सकता, खासकर 'स्वस्थ शरीर' (Able-Bodied) के सिद्धांत को देखते हुए।ऐसा करते हुए कोर्ट ने कई पिछले फैसलों का हवाला देते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि कानून बिल्कुल स्पष्ट है कि पति का यह...

पेशा कलंकित नहीं हो सकता: गुजरात हाईकोर्ट ने वकील बनकर पेश होने के आरोपी लॉ स्टूडेंट को अग्रिम ज़मानत देने से किया इनकार
'पेशा कलंकित नहीं हो सकता': गुजरात हाईकोर्ट ने वकील बनकर पेश होने के आरोपी लॉ स्टूडेंट को अग्रिम ज़मानत देने से किया इनकार

गुजरात हाईकोर्ट ने महिला लॉ स्टूडेंट को अग्रिम ज़मानत देने से इनकार किया। यह महिला अभी LL.B. कोर्स के तीसरे साल में है और उस पर एक मामले में वकील बनकर पेश होने का आरोप है। इस मामले में कई आरोपियों पर 80,00,000 रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है।राज्य सरकार ने आरोप लगाया कि जांच के दौरान न सिर्फ उसके नाम से जारी गुजरात बार काउंसिल का पहचान पत्र बरामद हुआ, बल्कि एक नेम प्लेट भी मिली जिस पर आरोपी को भारत के सुप्रीम कोर्ट का वकील बताया गया। इसके अलावा, विभिन्न पुलिस स्टेशनों की मुहरें, केस रजिस्टर,...

कार्यस्थल पर हार्ट अटैक से मौत को स्वतः रोजगार चोट नहीं माना जा सकता: हाईकोर्ट ने मुआवजा खारिज किया
कार्यस्थल पर हार्ट अटैक से मौत को स्वतः 'रोजगार चोट' नहीं माना जा सकता: हाईकोर्ट ने मुआवजा खारिज किया

गुजरात हाईकोर्ट ने अहम फैसले में स्पष्ट किया कि कार्यस्थल पर हार्ट अटैक से हुई मृत्यु को स्वतः रोजगार से उत्पन्न चोट नहीं माना जा सकता। इसके लिए यह साबित करना आवश्यक है कि मृत्यु और रोजगार के बीच सीधा संबंध (नैक्सस) हो।जस्टिस जे.सी. दोशी ने कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम की धारा 2(8) का हवाला देते हुए कहा कि “रोजगार चोट” वही मानी जाएगी जो दुर्घटना या व्यावसायिक बीमारी के कारण हो और जो रोजगार के दौरान तथा उससे उत्पन्न हुई हो।मामला मैकेनिक की मृत्यु से जुड़ा था, जिसकी कार्य के दौरान हार्ट अटैक से मौत...

सबूतों की कड़ी अधूरी, केवल संदेह पर नहीं हो सकती सजा: गुजरात हाईकोर्ट ने मर्डर केस में फांसी की सजा रद्द की
सबूतों की कड़ी अधूरी, केवल संदेह पर नहीं हो सकती सजा: गुजरात हाईकोर्ट ने मर्डर केस में फांसी की सजा रद्द की

गुजरात हाईकोर्ट ने एक दोहरे हत्या मामले में सुनाई गई फांसी की सजा रद्द करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष ठोस और निर्णायक सबूत पेश करने में पूरी तरह विफल रहा। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला “संदेह, अनुमान और कल्पना” पर आधारित था, जो कानून के सिद्धांतों के विपरीत है।मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस इलेश जे. वोरा और जस्टिस आर. टी. वच्छानी की खंडपीठ ने पाया कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला स्थापित नहीं की जा सकी। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को...

छात्रा से यौन संबंध की मांग के आरोपी प्रोफेसर को राहत नहीं, गुजरात हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज की
छात्रा से यौन संबंध की मांग के आरोपी प्रोफेसर को राहत नहीं, गुजरात हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज की

गुजरात हाईकोर्ट ने कॉलेज प्रोफेसर की जमानत याचिका खारिज की, जिस पर अपनी ही छात्रा से यौन संबंध बनाने का दबाव डालने और आपत्तिजनक संदेश भेजने के गंभीर आरोप हैं। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य प्रथम दृष्टया आरोपों का समर्थन करते हैं।जस्टिस निखिल एस. करियल ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी द्वारा यौन कृपा की मांग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए, जो अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं।अदालत ने चार्जशीट, पीड़िता के बयान और अन्य दस्तावेजों का अवलोकन करते हुए जमानत देने से इनकार किया।अदालत ने विशेष रूप से उस माफी...

मतदाता सूची पर बड़ा फैसला: गुजरात हाईकोर्ट ने कहा— राज्य निर्वाचन आयोग नाम जोड़ने-हटाने का स्वतंत्र अधिकार नहीं रखता
मतदाता सूची पर बड़ा फैसला: गुजरात हाईकोर्ट ने कहा— राज्य निर्वाचन आयोग नाम जोड़ने-हटाने का स्वतंत्र अधिकार नहीं रखता

गुजरात हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया कि राज्य निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का स्वतंत्र अधिकार नहीं है। आयोग केवल विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची को ही अपनाने (प्रतिरूपित करने) का काम करता है।अदालत ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें एक महिला ने अहमदाबाद नगर निगम चुनाव में भाग लेने के लिए अपनी नामावली में नाम शामिल करने की मांग की थी।बता दें, महिला का नाम पहले प्रारंभिक सूची में शामिल नहीं किया गया, जबकि बाद में उसका आवेदन स्वीकार कर...

JJB, चाइल्ड कोर्ट को ज़मानत नामंज़ूर करने के कारण बताने होंगे: गुजरात हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में गिरफ्तार किशोर को रिहा करने का निर्देश दिया
JJB, चाइल्ड कोर्ट को ज़मानत नामंज़ूर करने के कारण बताने होंगे: गुजरात हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में गिरफ्तार किशोर को रिहा करने का निर्देश दिया

गुजरात हाईकोर्ट ने कानून के साथ संघर्षरत बच्चे (CCL) को ज़मानत दी, जिसे दूसरे नाबालिग लड़के की हत्या के मामले में अन्य CCLs के साथ गिफ्तार किया गया था। कोर्ट ने पाया कि किशोर न्याय बोर्ड (JJB) और अपीलीय अदालत/बच्चों की अदालत दोनों ने ही ज़मानत याचिका खारिज करने के कोई कारण नहीं बताए।कोर्ट ने आगे यह भी पाया कि JJB और अपीलीय अदालत, दोनों ने ही CCL की ज़मानत याचिका पर किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act) की धारा 12 के तहत नहीं, बल्कि CrPC के तहत विचार किया था।जस्टिस गीता गोपी ने अपने आदेश में कहा:"JJB और...

पत्नी-बच्चों का भरण-पोषण करना पति का कानूनी और नैतिक कर्तव्य: गुजरात हाईकोर्ट, 660 दिन की सजा बरकरार
पत्नी-बच्चों का भरण-पोषण करना पति का कानूनी और नैतिक कर्तव्य: गुजरात हाईकोर्ट, 660 दिन की सजा बरकरार

गुजरात हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पत्नी और बच्चों को भरण-पोषण राशि न देने वाले पति की 660 दिन की सजा बरकरार रखी। अदालत ने स्पष्ट कहा कि पत्नी और बच्चों का पालन-पोषण करना पति का कानूनी ही नहीं, बल्कि नैतिक कर्तव्य भी है, जिससे वह बच नहीं सकता।जस्टिस हसमुख डी. सुथार ने फैमिली कोर्ट का आदेश सही ठहराते हुए पति की याचिका खारिज की। पति ने उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे भरण-पोषण की राशि न चुकाने पर 660 दिन की साधारण कारावास की सजा दी गई थी।मामले के अनुसार, पति को अपनी पत्नी और दो बच्चों...

गुजरात हाईकोर्ट ने पति की सजा बरकरार रखी, पत्नी की हत्या को आत्महत्या दिखाने की साजिश साबित
गुजरात हाईकोर्ट ने पति की सजा बरकरार रखी, पत्नी की हत्या को आत्महत्या दिखाने की साजिश साबित

गुजरात हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में ट्रायल कोर्ट द्वारा पति को दी गई सजा को बरकरार रखते हुए उसकी अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने पाया कि आरोपी ने अपनी पत्नी की गला घोंटकर हत्या की और बाद में घटना को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की।यह मामला 20 सितंबर 2014 का है, जब पति-पत्नी के बीच घरेलू विवाद के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर सूती दोरी/रस्सी से पत्नी का गला घोंट दिया, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। अभियोजन के अनुसार, आरोपी ने खुद को बचाने और पुलिस को गुमराह करने के लिए घटना स्थल को इस तरह तैयार किया...