गुजरात हाईकोर्ट
2002 दंगों के बाद वडोदरा हत्याकांड में 5 आरोपियों की बरी बरकरार, गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य की अपील खारिज की
गुजरात हाईकोर्ट ने 2002 गोधरा ट्रेन कांड के बाद हुए दंगों से जुड़े वडोदरा हत्याकांड मामले में पांच आरोपियों को बरी किए जाने का फैसला बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि गवाह आरोपियों की स्पष्ट पहचान नहीं कर सके और यह साबित नहीं हुआ कि वही लोग कथित अपराध में शामिल थे।जस्टिस निर्जर एस. देसाई और जस्टिस डी.एन. रे की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए कहा कि घटना लगभग 400 से 500 लोगों की भीड़ द्वारा अंजाम दी गई और गवाहों ने लगातार यही कहा कि वे हमलावरों की पहचान नहीं कर सके।अदालत ने कहा कि मृतक की...
गुजरात हाइकोर्ट ने दुष्कर्म मामले में आसाराम की अस्थायी जमानत 15 जून तक बढ़ाई
गुजरात हाइकोर्ट ने 2013 के दुष्कर्म मामले में दोषसिद्ध आसाराम को दी गई अस्थायी जमानत 15 जून 2026 तक बढ़ाई।जस्टिस इलेश जे. वोरा और जस्टिस आर.टी. वच्छानी की खंडपीठ ने चिकित्सीय आधारों पर यह राहत प्रदान की।अदालत ने कहा कि दोषी की मेडिकल स्थिति, निरंतर निगरानी की आवश्यकता तथा अब तक अस्थायी जमानत के दौरान किसी प्रतिकूल घटना के सामने न आने को देखते हुए जमानत अवधि बढ़ाई जा रही है।खंडपीठ ने आदेश में कहा कि पूर्व में 6 नवंबर 2025 को जिन शर्तों पर अस्थायी जमानत दी गई, वही शर्तें आगे भी लागू रहेंगी।आसाराम...
स्वस्थ पति बिना सबूत के बिज़नेस बंद होने का दावा करके कैंसर से पीड़ित पत्नी को गुज़ारा भत्ता देने से मना नहीं कर सकता: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति की अपील खारिज की, जिसमें उसने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उसे अपनी पत्नी—जो कैंसर का इलाज करवा रही है—को गुज़ारा भत्ता देने का निर्देश दिया गया। कोर्ट ने कहा कि पति का बिज़नेस बंद होना या मंदी, अगर इसका कोई ठोस सबूत न हो तो गुज़ारा भत्ता देने से मना करने का आधार नहीं हो सकता, खासकर 'स्वस्थ शरीर' (Able-Bodied) के सिद्धांत को देखते हुए।ऐसा करते हुए कोर्ट ने कई पिछले फैसलों का हवाला देते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि कानून बिल्कुल स्पष्ट है कि पति का यह...
'पेशा कलंकित नहीं हो सकता': गुजरात हाईकोर्ट ने वकील बनकर पेश होने के आरोपी लॉ स्टूडेंट को अग्रिम ज़मानत देने से किया इनकार
गुजरात हाईकोर्ट ने महिला लॉ स्टूडेंट को अग्रिम ज़मानत देने से इनकार किया। यह महिला अभी LL.B. कोर्स के तीसरे साल में है और उस पर एक मामले में वकील बनकर पेश होने का आरोप है। इस मामले में कई आरोपियों पर 80,00,000 रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है।राज्य सरकार ने आरोप लगाया कि जांच के दौरान न सिर्फ उसके नाम से जारी गुजरात बार काउंसिल का पहचान पत्र बरामद हुआ, बल्कि एक नेम प्लेट भी मिली जिस पर आरोपी को भारत के सुप्रीम कोर्ट का वकील बताया गया। इसके अलावा, विभिन्न पुलिस स्टेशनों की मुहरें, केस रजिस्टर,...
कार्यस्थल पर हार्ट अटैक से मौत को स्वतः 'रोजगार चोट' नहीं माना जा सकता: हाईकोर्ट ने मुआवजा खारिज किया
गुजरात हाईकोर्ट ने अहम फैसले में स्पष्ट किया कि कार्यस्थल पर हार्ट अटैक से हुई मृत्यु को स्वतः रोजगार से उत्पन्न चोट नहीं माना जा सकता। इसके लिए यह साबित करना आवश्यक है कि मृत्यु और रोजगार के बीच सीधा संबंध (नैक्सस) हो।जस्टिस जे.सी. दोशी ने कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम की धारा 2(8) का हवाला देते हुए कहा कि “रोजगार चोट” वही मानी जाएगी जो दुर्घटना या व्यावसायिक बीमारी के कारण हो और जो रोजगार के दौरान तथा उससे उत्पन्न हुई हो।मामला मैकेनिक की मृत्यु से जुड़ा था, जिसकी कार्य के दौरान हार्ट अटैक से मौत...
सबूतों की कड़ी अधूरी, केवल संदेह पर नहीं हो सकती सजा: गुजरात हाईकोर्ट ने मर्डर केस में फांसी की सजा रद्द की
गुजरात हाईकोर्ट ने एक दोहरे हत्या मामले में सुनाई गई फांसी की सजा रद्द करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष ठोस और निर्णायक सबूत पेश करने में पूरी तरह विफल रहा। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला “संदेह, अनुमान और कल्पना” पर आधारित था, जो कानून के सिद्धांतों के विपरीत है।मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस इलेश जे. वोरा और जस्टिस आर. टी. वच्छानी की खंडपीठ ने पाया कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला स्थापित नहीं की जा सकी। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को...
छात्रा से यौन संबंध की मांग के आरोपी प्रोफेसर को राहत नहीं, गुजरात हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज की
गुजरात हाईकोर्ट ने कॉलेज प्रोफेसर की जमानत याचिका खारिज की, जिस पर अपनी ही छात्रा से यौन संबंध बनाने का दबाव डालने और आपत्तिजनक संदेश भेजने के गंभीर आरोप हैं। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य प्रथम दृष्टया आरोपों का समर्थन करते हैं।जस्टिस निखिल एस. करियल ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी द्वारा यौन कृपा की मांग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए, जो अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं।अदालत ने चार्जशीट, पीड़िता के बयान और अन्य दस्तावेजों का अवलोकन करते हुए जमानत देने से इनकार किया।अदालत ने विशेष रूप से उस माफी...
मतदाता सूची पर बड़ा फैसला: गुजरात हाईकोर्ट ने कहा— राज्य निर्वाचन आयोग नाम जोड़ने-हटाने का स्वतंत्र अधिकार नहीं रखता
गुजरात हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया कि राज्य निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का स्वतंत्र अधिकार नहीं है। आयोग केवल विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची को ही अपनाने (प्रतिरूपित करने) का काम करता है।अदालत ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें एक महिला ने अहमदाबाद नगर निगम चुनाव में भाग लेने के लिए अपनी नामावली में नाम शामिल करने की मांग की थी।बता दें, महिला का नाम पहले प्रारंभिक सूची में शामिल नहीं किया गया, जबकि बाद में उसका आवेदन स्वीकार कर...
JJB, चाइल्ड कोर्ट को ज़मानत नामंज़ूर करने के कारण बताने होंगे: गुजरात हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में गिरफ्तार किशोर को रिहा करने का निर्देश दिया
गुजरात हाईकोर्ट ने कानून के साथ संघर्षरत बच्चे (CCL) को ज़मानत दी, जिसे दूसरे नाबालिग लड़के की हत्या के मामले में अन्य CCLs के साथ गिफ्तार किया गया था। कोर्ट ने पाया कि किशोर न्याय बोर्ड (JJB) और अपीलीय अदालत/बच्चों की अदालत दोनों ने ही ज़मानत याचिका खारिज करने के कोई कारण नहीं बताए।कोर्ट ने आगे यह भी पाया कि JJB और अपीलीय अदालत, दोनों ने ही CCL की ज़मानत याचिका पर किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act) की धारा 12 के तहत नहीं, बल्कि CrPC के तहत विचार किया था।जस्टिस गीता गोपी ने अपने आदेश में कहा:"JJB और...
पत्नी-बच्चों का भरण-पोषण करना पति का कानूनी और नैतिक कर्तव्य: गुजरात हाईकोर्ट, 660 दिन की सजा बरकरार
गुजरात हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पत्नी और बच्चों को भरण-पोषण राशि न देने वाले पति की 660 दिन की सजा बरकरार रखी। अदालत ने स्पष्ट कहा कि पत्नी और बच्चों का पालन-पोषण करना पति का कानूनी ही नहीं, बल्कि नैतिक कर्तव्य भी है, जिससे वह बच नहीं सकता।जस्टिस हसमुख डी. सुथार ने फैमिली कोर्ट का आदेश सही ठहराते हुए पति की याचिका खारिज की। पति ने उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे भरण-पोषण की राशि न चुकाने पर 660 दिन की साधारण कारावास की सजा दी गई थी।मामले के अनुसार, पति को अपनी पत्नी और दो बच्चों...
गुजरात हाईकोर्ट ने पति की सजा बरकरार रखी, पत्नी की हत्या को आत्महत्या दिखाने की साजिश साबित
गुजरात हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में ट्रायल कोर्ट द्वारा पति को दी गई सजा को बरकरार रखते हुए उसकी अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने पाया कि आरोपी ने अपनी पत्नी की गला घोंटकर हत्या की और बाद में घटना को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की।यह मामला 20 सितंबर 2014 का है, जब पति-पत्नी के बीच घरेलू विवाद के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर सूती दोरी/रस्सी से पत्नी का गला घोंट दिया, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। अभियोजन के अनुसार, आरोपी ने खुद को बचाने और पुलिस को गुमराह करने के लिए घटना स्थल को इस तरह तैयार किया...
सह-मालिक की सहमति न होने पर बिजली कनेक्शन देने से मना नहीं किया जा सकता: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि किसी संपत्ति पर मालिकाना हक या कब्ज़े के अधिकार का सवाल, किसी ऐसे उपभोक्ता को बिजली कनेक्शन देने से जुड़ा नहीं है, जो अन्यथा इसके लिए हकदार है।कोर्ट ने आगे कहा कि कोई कंपनी किसी उपभोक्ता को बिजली कनेक्शन देने के लिए संपत्ति के अन्य सह-मालिकों की सहमति पर ज़ोर नहीं दे सकती।मौजूदा मामले में याचिकाकर्ता ने एक ज़मीन के लिए बिजली कनेक्शन मांगा था, लेकिन बिजली कंपनी ने एक सूचना भेजकर कहा कि उस ज़मीन पर स्थित एक कुआं किसी अन्य व्यक्ति की भी संयुक्त संपत्ति है, इसलिए आगे...
पत्नी को प्रेमी के साथ अंतरंग अवस्था में देखना गंभीर और अचानक उकसावा: गुजरात हाईकोर्ट ने 2001 की गैर-इरादतन हत्या की सज़ा बरकरार रखी
गुजरात हाईकोर्ट ने 2001 का ट्रायल कोर्ट का आदेश बरकरार रखा, जिसमें एक पति को गैर-इरादतन हत्या (जो हत्या की श्रेणी में नहीं आती) का दोषी ठहराया गया। इस पति ने अपनी पत्नी पर तब हमला किया, जब उसने उसे अपने ही घर में किसी दूसरे आदमी के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखा था। कोर्ट ने टिप्पणी की कि इसे "गंभीर और अचानक उकसावा" माना जा सकता है।ऐसा करते हुए कोर्ट ने कहा कि यह मामला IPC की धारा 304-भाग II के अंतर्गत आता है, क्योंकि पति पर अपनी पत्नी की मौत का इरादा या जानकारी होने का आरोप नहीं लगाया जा...
पत्नी का कमाना ही पति से गुज़ारा भत्ता न देने का एकमात्र आधार नहीं हो सकता: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि कोई महिला कमा रही है, यह उसके पति से गुज़ारा भत्ता मांगने का दावा खारिज करने का एकमात्र आधार नहीं हो सकता।जस्टिस हसमुख डी. सुथार ने अपने आदेश में कहा,"दोनों पक्षकारों के वकीलों की दलीलें सुनने और अर्ज़ी की बातों के साथ-साथ फ़ैमिली कोर्ट के निष्कर्षों पर विचार करने के बाद यह साफ़ है कि पत्नी अपना गुज़ारा करने में असमर्थ है और उसके पति ने उसे नज़रअंदाज़ किया। इसके अलावा, यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि सिर्फ़ इसलिए कि पत्नी कमा रही है, यह उसके...
विदेशी कोर्ट के आदेश के बावजूद पिता द्वारा बच्चे को माँ से दूर ले जाना गैर-कानूनी कस्टडी माना जाएगा: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने एक पिता को निर्देश दिया कि वह अपने बच्चे की कस्टडी माँ को सौंप दे। कोर्ट ने पाया कि पिता ने बच्चे को गैर-कानूनी तरीके से भारत लाया था, जबकि बच्चे की कस्टडी एक कनाडाई कोर्ट ने माँ को सौंपी थी (जिस कार्यवाही में पिता ने भी हिस्सा लिया था)।ऐसा करते हुए कोर्ट ने टिप्पणी की कि बच्चे को उसकी माँ से दूर रहने के लिए मजबूर करना (जो कनाडा में रहती है) बच्चे के लिए मानसिक रूप से बहुत कष्टदायक होगा।माँ ने 'हैबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका के ज़रिए हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था।...
फैमिली कोर्ट 'मुबारत' के ज़रिए आपसी तलाक़ की घोषणा के लिए मुस्लिम जोड़े की अर्ज़ी पर विचार करने के लिए अधिकृत: गुजरात हाईकोर्ट ने फिर की पुष्टि
गुजरात हाईकोर्ट ने दोहराया कि फैमिली कोर्ट आपसी सहमति से तलाक़ के आधार पर शादी को खत्म करने की अर्ज़ी पर विचार करने के लिए सक्षम और अधिकृत है। इस आपसी सहमति को मुस्लिम जोड़ों के बीच हुए 'मुबारत' समझौते के रूप में भी जाना जाता है।जस्टिस ए.वाई. कोगजे और जस्टिस निशा एम. ठाकोर की खंडपीठ ने 'आसिफ़ दाऊदभाई करवा और अन्य बनाम कोई नहीं (2025)' मामले में हाईकोर्ट के फ़ैसले का हवाला दिया और कहा कि कोर्ट ने समझौते के ज़रिए मुस्लिम शादी को खत्म करने के मामले पर विस्तार से विचार किया था।2025 के फ़ैसले का...
सूरत दुष्कर्म मामला: बयान में विरोधाभास का दावा, नारायण साईं ने हाइकोर्ट में सजा को दी चुनौती
सूरत दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे नारायण साईं ने गुजरात हाइकोर्ट में अपनी दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए कहा है कि पीड़िता के बयान में कई विरोधाभास बदलाव और सुधार हैं, जिन पर ट्रायल कोर्ट ने ध्यान नहीं दिया।यह दलील मंगलवार को जस्टिस इलेश जे. वोरा और जस्टिस आर. टी. वच्छानी की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान दी गई।साईं के वकील ने अदालत में कहा कि पीड़िता को कई मौके मिले, जब वह घटना की शिकायत कर सकती थी लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।वकील के अनुसार,“यदि किसी महिला के साथ ऐसा अत्याचार होता है,...
'PIL नियमों का उल्लंघन': गुजरात हाईकोर्ट ने संरक्षित मस्जिद पर अतिक्रमण का दावा करने वाले याचिकाकर्ता पर लगाया ₹10 लाख का जुर्माना
गुजरात हाईकोर्ट ने PIL खारिज की, जिसमें अहमदाबाद के एक संरक्षित स्मारक—बाबा अली शाह मस्जिद—के संरक्षित क्षेत्र के भीतर कथित अवैध निर्माण को हटाने की मांग की गई। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता ने अपनी पिछली PIL के बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी (जिसे डिफ़ॉल्ट के कारण खारिज कर दिया गया), और न ही उसने अपने आपराधिक इतिहास के बारे में बताया था।ऐसा करते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह वर्तमान PIL कोर्ट की प्रक्रिया का "गलत इस्तेमाल और दुरुपयोग करने...
होमगार्ड को पुलिस कर्मियों के न्यूनतम वेतन के बराबर ड्यूटी भत्ता मिले: गुजरात हाइकोर्ट
गुजरात हाइकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि होमगार्ड को दिया जाने वाला ड्यूटी भत्ता बढ़ाकर पुलिस कर्मियों के न्यूनतम वेतन के बराबर किया जाए।अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद राज्य सरकार इस मामले को नजरअंदाज नहीं कर सकती।यह आदेश जस्टिस मौलिक जे. शेलात की एकल पीठ ने पारित किया।अदालत ने पाया कि होमगार्ड को प्रतिदिन 450 रुपये का भत्ता दिया जाना सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए कानून के विपरीत है।अदालत ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ग्रहक रक्षक, होमगार्ड...
CCTV फुटेज बिना धारा 65बी प्रमाणपत्र के भी स्वीकार्य: गुजरात हाइकोर्ट ने क्रूरता के आधार पर तलाक बरकरार रखी
गुजरात हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि फैमिली कोर्ट वैवाहिक विवादों में साक्ष्य के रूप में सीसीटीवी फुटेज को स्वीकार कर सकती है भले ही उसके साथ भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65बी के तहत आवश्यक प्रमाणपत्र प्रस्तुत न किया गया हो।जस्टिस संगीता के. विशेन और जस्टिस निशा एम. ठाकोर की खंडपीठ ने कहा कि फैमिली कोर्ट को फैमिली कोर्ट एक्ट, 1984 की धारा 14 के तहत व्यापक अधिकार प्राप्त हैं, जिसके तहत वे ऐसे साक्ष्य भी स्वीकार कर सकती हैं, जो सामान्यतः साक्ष्य अधिनियम के कड़े नियमों के अनुसार...


















