राज�थान हाईकोट

बेटे की सर्जरी के लिए आरोपी माता-पिता को विदेश जाने की अनुमति, राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- बच्चे की देखभाल के लिए अस्पताल में भर्ती होना जरूरी नहीं
राजस्थान हाईकोर्ट ने आपराधिक मामले में आरोपी दंपती को अपने बेटे की सर्जरी के लिए चार महीने के लिए अमेरिका जाने की अनुमति दी। बेटे की सर्जरी अमेरिका में होनी है। हाईकोर्ट ने कहा कि बीमार बच्चे के साथ रहने और उसकी देखभाल करने के लिए उसका अस्पताल में भर्ती होना जरूरी शर्त नहीं हो सकती।जस्टिस फरजंद अली ने कहा कि माता-पिता की अपने बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर चिंता और भावनात्मक जुड़ाव को केवल इस आधार पर नहीं आंका जा सकता कि डॉक्टर की सलाह अस्पताल में भर्ती कराने की है या नहीं। अदालत ने कहा कि बच्चे की...

कन्हैया लाल हत्याकांड: पांच आरोपियों को जमानत नहीं, राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- आतंक राष्ट्र की 'मनोवैज्ञानिक संप्रभुता' पर करता है प्रहार
राजस्थान हाईकोर्ट ने उदयपुर के दर्जी कन्हैया लाल की 2022 में हुई निर्मम हत्या के मामले में पांच आरोपियों को जमानत देने से इनकार किया। चीफ जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने विशेष NIA अदालत के उन आदेशों को बरकरार रखा जिनमें आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज की गईं।हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में पैदा किया गया आतंक केवल किसी व्यक्ति के शरीर पर हमला नहीं था बल्कि उसने देश की मनोवैज्ञानिक संप्रभुता पर प्रहार किया। अदालत के मुताबिक, अपराध का उद्देश्य महज हत्या करना नहीं था बल्कि...

बरी होने के बाद नौकरी से निकाले गए कर्मचारी को दोबारा नौकरी पर रखे जाने तक का बकाया वेतन पाने का हक: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि जब किसी कर्मचारी को आपराधिक मामले में बरी होने के बाद नौकरी से निकाला जाता है तो वह नौकरी से निकाले जाने और दोबारा नौकरी पर रखे जाने के बीच की अवधि के लिए बकाया वेतन पाने का हकदार होता है।चीफ जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस इंद्रजीत सिंह की डिवीजन बेंच ने कहा कि भले ही बाद में बरी होने से पहले की सजा के कानूनी नतीजे पीछे की तारीख से खत्म नहीं होते, लेकिन बरी होने के बाद की गई बर्खास्तगी पर यह सिद्धांत लागू नहीं होता।बता दें, अपीलकर्ता को मई 2017 में एक आपराधिक मामले...

सर्विस बेनिफिट्स के लिए 'सम्मानजनक बरी होने' और 'अन्य तरह से बरी होने' में कोई अंतर नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट का सस्पेंशन पीरियड के लिए पूरी सैलरी देने का आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि सस्पेंड किए गए कर्मचारी को सर्विस बेनिफिट्स देने के मामले में 'सम्मानजनक बरी होने' (Honourable Acquittal) और 'बरी होने' (acquittal) के बीच कानूनी रूप से कोई अंतर नहीं है।जस्टिस आनंद शर्मा की बेंच ने LIC (प्रतिवादी) का वह आदेश रद्द किया, जिसके तहत याचिकाकर्ता को सस्पेंशन के समय के सर्विस बेनिफिट्स देने से मना कर दिया गया था। याचिकाकर्ता को एक आपराधिक मामले में फंसाए जाने के कारण सस्पेंड किया गया। बाद में वह बरी हो गया, लेकिन उसे बेनिफिट्स इसलिए नहीं दिए गए क्योंकि उसका...

नियुक्ति में अनियमितता हो तब भी वेतनमान घटाने से पहले कर्मचारी को सुनना जरूरी: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि किसी कर्मचारी की शुरुआती नियुक्ति में अनियमितता रही हो, तब भी उसका वेतनमान घटाने से पहले उसे सुनवाई का अवसर देना जरूरी है। हाईकोर्ट ने बिना सुनवाई के कर्मचारियों का नियमित वेतनमान कम करने वाले आदेश को रद्द करने का सिंगल बेंच का फैसला बरकरार रखा।चीफ जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण की खंडपीठ उन अपीलों पर सुनवाई कर रही थी, जिन्हें सिंगल बेंच के उस आदेश के खिलाफ दाखिल किया गया, जिसमें कर्मचारियों का नियमित वेतनमान घटाने का आदेश रद्द कर दिया गया।मामले...

विभागीय जांच में सिर्फ़ इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड से गवाहों से पूछताछ और क्रॉस-एग्जामिनेशन की जगह नहीं ली जा सकती: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1958 ("नियम") के नियम 16(6)(a) के तहत गवाहों से पूछताछ, क्रॉस एग्जामिनेशन, बचाव पक्ष के सबूत या दलीलें सुनने जैसे चरणों को सिर्फ़ इसलिए नहीं छोड़ा जा सकता, क्योंकि अनुशासनात्मक अधिकारियों को लगा कि दस्तावेज़ी या इलेक्ट्रॉनिक सामग्री ही काफ़ी है।जस्टिस कुलदीप माथुर की बेंच चित्तौड़गढ़ सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के एमडी के उस आदेश के ख़िलाफ़ अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसके तहत याचिकाकर्ता को नौकरी से बर्खास्त कर दिया...

सिर्फ़ कर्मचारी का जवाब रिकॉर्ड करना कि उस पर 'विचार किया गया', दिखावा मात्र: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर डिस्कॉम के ज़ोनल चीफ इंजीनियर पर सज़ा लगाने वाले आदेश और उस सज़ा को सही ठहराने वाला अपीलीय आदेश रद्द किया, क्योंकि उनके बचाव में दिए गए जवाब की बातों पर कोई विचार नहीं किया गया।जस्टिस आनंद शर्मा की बेंच ने कहा कि आदेश में सिर्फ़ यह लिख देना कि सामग्री पर विचार किया गया, एक खोखली औपचारिकता और दिखावा मात्र है। विचार करने का मतलब है दिमाग का सक्रिय इस्तेमाल करना और संबंधित सामग्री पर सोचना, विचार-विमर्श करना और उसे परखना।बता दें, कोर्ट जयपुर डिस्कॉम के ज़ोनल चीफ इंजीनियर...

63 साल पुराने राजस्व मामले पर राजस्थान हाईकोर्ट सख्त, 3 महीने में निपटाने का आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने 63 साल पुराने राजस्व मामले को तीन महीने के भीतर निपटाने का आदेश दिया। जस्टिस अनूप कुमार धांड की पीठ ने निर्देश दिया कि मामले में अनावश्यक स्थगन नहीं दिया जाए। यदि राजस्व अदालत के पीठासीन अधिकारी ने आदेश का पालन नहीं किया तो संबंधित उच्च अधिकारियों को उसके खिलाफ उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाएंगे। इसमें वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज करना भी शामिल है।अदालत ने राजस्व अदालतों में मामलों के लंबे समय तक लंबित रहने को व्यवस्था की “कड़वी हकीकत” बताते हुए कहा...

लंबी बीमारी के कारण अनुपस्थिति जानबूझकर किया गया कदाचार नहीं, राजस्थान हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी रद्द की
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि लंबी बीमारी के कारण कर्मचारी का ड्यूटी से अनुपस्थित रहना जानबूझकर की गई अनुपस्थिति नहीं माना जा सकता और इसके आधार पर उसे दंडित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने एक मृत कर्मचारी की बर्खास्तगी का आदेश रद्द करते हुए उसकी पत्नी को सभी सेवा और सेवानिवृत्ति संबंधी लाभ देने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया।मामले के अनुसार याचिकाकर्ता के पति वर्ष 1979 में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत थे और तपेदिक से पीड़ित थे।...

लिखित बयान में जालसाजी की दलील नहीं तो गवाही के चरण में हस्तलेख विशेषज्ञ की रिपोर्ट पेश नहीं कर सकते: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी पक्ष ने अपने लिखित बयान में दस्तावेज पर हस्ताक्षर जाली या कूटरचित होने की दलील नहीं दी तो वह गवाही के चरण में हस्तलेख विशेषज्ञ की रिपोर्ट पेश कर उस नई दलील को स्थापित नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा कि साक्ष्य के जरिए ऐसा नया तथ्य या बचाव पेश नहीं किया जा सकता, जिसकी बुनियाद ही मूल दलीलों में मौजूद नहीं थी।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने कहा कि दलीलें ही साक्ष्य की बुनियाद होती हैं और दूसरे पक्ष को यह पता होना चाहिए कि उसे किस मामले का सामना करना है। गवाही के जरिए पहली...

ई-मित्र की कथित गलती से अभ्यर्थी को राहत नहीं, सुधार की तय अवधि में श्रेणी नहीं बदली: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने चतुर्थ श्रेणी शिक्षक भर्ती में OBC श्रेणी से सामान्य श्रेणी में बदलाव की मांग करने वाली अभ्यर्थी की याचिका खारिज की। अभ्यर्थी का कहना था कि आवेदन फॉर्म भरते समय ई-मित्र संचालक ने गलती से उसकी श्रेणी सामान्य के बजाय ओबीसी दर्ज की थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि अभ्यर्थी को श्रेणी में सुधार के लिए पर्याप्त अवसर दिए गए लेकिन उसने निर्धारित अवधि के भीतर इसका लाभ नहीं उठाया।जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने कहा कि प्रतियोगी चयन प्रक्रिया में अभ्यर्थी की...

सरकारी अस्पताल में स्टेंट न मिलने पर प्राइवेट दुकान से खरीदने को मजबूर मरीज़ को पूरा पैसा वापस पाने का हक: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने सिंगल जज का वह आदेश सही ठहराया, जिसमें राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि वह मरीज़ को सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान लगाए गए स्टेंट का पूरा खर्च वापस करे। ये स्टेंट अस्पताल में उपलब्ध न होने के कारण प्राइवेट सप्लायर से खरीदे गए।हेल्थकेयर और किफायती इलाज का अधिकार आर्टिकल 21 का हिस्सा बताते हुए जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस विनीत कुमार माथुर की डिवीज़न बेंच ने कहा कि मेडिकल इलाज के खर्च की वापसी (रीइंबर्समेंट) से जुड़े नियमों की व्याख्या उदारतापूर्वक की जानी चाहिए।मामले...

12 साल से लंबित भूमि अधिग्रहण मामले में महिला को आखिरी मौका, 25 छायादार पेड़ लगाने का आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने 12 साल से अधिक समय से लंबित भूमि अधिग्रहण मामले में महिला को साक्ष्य पेश करने का आखिरी मौका दिया। हालांकि, यह अवसर उसे कुछ शर्तों के साथ दिया गया।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने महिला को 15 दिनों के भीतर जूनियर एडवोकेट वेलफेयर फंड में 10 हजार रुपये जमा करने और सार्वजनिक स्थान पर 25 छायादार पेड़ लगाने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट एक महिला की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें जयपुर मेट्रोपोलिटन-I के सीनियर सिविल जज द्वारा उसके साक्ष्य और जिरह का अवसर बंद करने के आदेश को...

पति की मौत के बाद अनुकंपा नौकरी पाने वाली विधवा सास-ससुर को नहीं छोड़ सकती: राजस्थान हाईकोर्ट का सास को 25% सैलरी देने का आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि मृतक कर्मचारी की पत्नी की मासिक सैलरी का 25% हिस्सा उसकी सास के खाते में ट्रांसफर किया जाए। पत्नी ने पति की मौत के बाद सहानुभूति के आधार पर नौकरी तो हासिल की, लेकिन बाद में दूसरी शादी कर ली और कथित तौर पर मृतक के माता-पिता को छोड़ दिया।जस्टिस आनंद शर्मा की बेंच ने कहा कि इस वादे के आधार पर सहानुभूति के आधार पर नौकरी का लाभ उठाने के बाद कि वह परिवार के अन्य सदस्यों की भी देखभाल करेगी, पत्नी उस जिम्मेदारी से खुद को अलग नहीं कर सकती जो नौकरी मिलने का आधार थी।आगे...

राजस्थान हाईकोर्ट ने छुट्टी के दिन सुनवाई की और नगर पालिका चुनाव से कुछ घंटे पहले उम्मीदवार को गिरफ्तारी से बचाया
अजमेर के केकड़ी नगर पालिका बोर्ड के चेयरमैन पद के लिए तय चुनाव से कुछ घंटे पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने सोमवार (21 सितंबर) को चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दी। उम्मीदवार को डर है कि उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा और चुनाव में हिस्सा लेने से रोक दिया जाएगा।इस याचिका पर सार्वजनिक अवकाश के दिन सुनवाई हुई।जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने कहा कि जब नागरिकों के मौलिक और कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए तुरंत दखल की ज़रूरत हो तो न्याय के मंदिर के दरवाज़े बंद नहीं रह सकते। आगे कहा गया,"न्याय...

12 साल पुराने भूमि अधिग्रहण मामले में महिला को आखिरी मौका: राजस्थान हाईकोर्ट ने 25 पेड़ लगाने की शर्त पर साक्ष्य पेश करने की अनुमति दी
राजस्थान हाईकोर्ट ने 12 साल से लंबित भूमि अधिग्रहण मामले में महिला को अपना साक्ष्य पेश करने का आखिरी अवसर दिया। हाईकोर्ट ने यह राहत इस शर्त पर दी कि महिला 10 हजार रुपये जूनियर अधिवक्ता कल्याण कोष में जमा करेगी और सार्वजनिक स्थान पर छायादार 25 पेड़ लगाएगी।जस्टिस अनूप कुमार की पीठ के समक्ष यह याचिका दायर की गई, जिसमें जयपुर के वरिष्ठ सिविल जज द्वारा पारित उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत महिला को साक्ष्य पेश करने की अनुमति नहीं दी गई।मामला लंबे समय से लंबित होने को देखते हुए हाईकोर्ट ने...

सिर्फ़ आर्थिक तंगी वैवाहिक मामला ट्रांसफर करने का आधार नहीं हो सकती; पति पत्नी के यात्रा का खर्च उठा सकता है: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक पत्नी की उस याचिका को खारिज किया, जिसमें उसने तलाक की कार्यवाही को अलवर से जयपुर ट्रांसफर करने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि याचिकाकर्ता ने आर्थिक रूप से कमजोर होने का दावा किया, यह नहीं माना जा सकता कि वह यात्रा करने में असमर्थ या अक्षम है, खासकर तब जब प्रतिवादी-पति ऐसी यात्रा का खर्च उठाने को तैयार हो।जस्टिस चंद्र प्रकाश श्रीमाली की बेंच ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि याचिकाकर्ता जयपुर की स्थायी निवासी नहीं है और कथित तौर पर वहां किसी अन्य पुरुष के साथ...

पति-पत्नी में सुलह के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने तलाक की डिक्री रद्द कर बहाल किया विवाह
राजस्थान हाईकोर्ट ने अलग रह रहे पति-पत्नी के बीच तलाक की डिक्री के बाद हुई सुलह को देखते हुए तलाक का फैसला रद्द कर उनका विवाह बहाल किया। कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवाद केवल कानूनी दावों का टकराव नहीं होते, बल्कि इनके पीछे मानवीय रिश्ते और परिवार का जीवन जुड़ा होता है। महाभारत का संदर्भ देते हुए कोर्ट ने कहा कि जब पक्षकार स्वयं मतभेद खत्म कर साथ रहने का रास्ता चुनते हैं तो कानून को जहां तक संभव हो, उस शांति और पुनर्मिलन की राह को आसान बनाना चाहिए।जस्टिस उमा शंकर व्यास और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ...

नगर निकाय चुनाव में नामांकन खारिज होने को सिर्फ चुनाव याचिका से चुनौती दी जा सकती है: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने नगर निकाय चुनाव में नामांकन पत्र खारिज किए जाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज करते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया को चुनौती देने के लिए संविधान के अनुच्छेद 243-ZG के तहत विशेष रोक लागू है। नामांकन पत्र के गलत तरीके से खारिज किए जाने का मामला भी चुनाव से जुड़ा है और इसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत चुनाव याचिका के जरिए ही चुनौती दी जा सकती है।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 31 के तहत नामांकन पत्र को अनुचित तरीके से स्वीकार या खारिज करना...

गंभीर अपराध में दोषसिद्धि से पेंशन अपने आप जब्त नहीं हो सकती, सुनवाई का मौका देना जरूरी: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि किसी कर्मचारी के गंभीर अपराध में दोषी ठहराए जाने के आधार पर उसकी पूरी पेंशन स्वतः रोकना या जब्त करना उचित नहीं है। संबंधित प्राधिकारी को पेंशन पर दंडात्मक कार्रवाई करने से पहले कर्मचारी को नोटिस देकर अपना पक्ष रखने और परिस्थितियां बताने का उचित अवसर देना जरूरी है।जस्टिस आनंद शर्मा की पीठ ने राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के सेवानिवृत्त सहायक लेखा अधिकारी की पूरी पेंशन रोकने और जब्त करने का आदेश रद्द किया। कोर्ट ने कहा कि भले ही कर्मचारी की दोषसिद्धि...
