राज�थान हाईकोट

पूर्व सैनिक की लाइसेंसी राइफल लौटाने का आदेश, जब्ती जारी रहने से आजीविका प्रभावित होगी: राजस्थान हाईकोर्ट
पूर्व सैनिक की लाइसेंसी राइफल लौटाने का आदेश, जब्ती जारी रहने से आजीविका प्रभावित होगी: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने पूर्व सैनिक की लाइसेंसी 12 बोर राइफल उसे वापस सौंपने का आदेश देते हुए कहा कि वर्तमान में वह सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत है और यह राइफल उसके रोजगार का महत्वपूर्ण साधन है। ऐसे में राइफल को लंबे समय तक जब्त रखना उसकी आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।जस्टिस संजीत पुरोहित ने यह आदेश पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ता सेना से सेवानिवृत्त हैं और उनके नाम पर विधिवत लाइसेंसी राइफल है।याचिकाकर्ता के खिलाफ रंगदारी मांगने के आरोप में FIR दर्ज होने के बाद...

CrPC की धारा 311 का मकसद सच सामने लाना, न कि किसी एक पक्ष का साथ देना: POCSO केस में राजस्थान हाईकोर्ट ने पीड़िता के स्कूल रिकॉर्ड को मंगाने की इजाज़त दी
CrPC की धारा 311 का मकसद सच सामने लाना, न कि किसी एक पक्ष का साथ देना: POCSO केस में राजस्थान हाईकोर्ट ने पीड़िता के स्कूल रिकॉर्ड को मंगाने की इजाज़त दी

POCSO केस की सुनवाई के आखिरी दौर में CrPC की धारा 311 के तहत अर्ज़ी को मंज़ूरी देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि इस प्रावधान का मकसद अभियोजन पक्ष या आरोपी का पक्ष लेना या उनके खिलाफ़ होना नहीं है, बल्कि मामले में सही फ़ैसला लेने के लिए सच को स्वाभाविक रूप से सामने लाना है। [2026 LiveLaw (Raj) 263]CrPC की धारा 311 अदालतों को यह अधिकार देती है कि वे जांच या सुनवाई के किसी भी चरण में किसी भी गवाह या किसी भी सबूत को बुला सकें, दोबारा बुला सकें या दोबारा जांच सकें।याचिकाकर्ता पर POCSO का एक केस चल...

रेवेन्यू कोर्ट 1978 में ही सुना चुका है अंतिम फैसला: राजस्थान हाईकोर्ट ने ज़मीन विवाद की जांच के लिए पैनल बनाने पर राज्य की आलोचना की
रेवेन्यू कोर्ट 1978 में ही सुना चुका है अंतिम फैसला: राजस्थान हाईकोर्ट ने ज़मीन विवाद की जांच के लिए पैनल बनाने पर राज्य की आलोचना की

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक सिंगल जज के उस आदेश को रद्द किया, जो राज्य सरकार द्वारा गठित फैक्ट-फाइंडिंग कमीशन (तथ्यों की जांच करने वाले आयोग) की रिपोर्ट पर आधारित था। कोर्ट ने कहा कि इस मामले पर 1978 में ही अंतिम फैसला हो चुका था, इसलिए उस रिपोर्ट पर भरोसा करना गलत था।एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बिपिन गुप्ता की डिवीजन बेंच ने संबंधित कमीशन बनाने के लिए सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि जब बोर्ड ऑफ रेवेन्यू ने मामला खारिज कर दिया था, तो कमीशन के पास मामले की जांच करने का...

राजस्थान हाईकोर्ट ने क्रिप्टो होल्डिंग्स और डिजिटल वॉलेट की जानकारी देने की शर्त पर साइबर फ्रॉड के आरोपी को ज़मानत दी
राजस्थान हाईकोर्ट ने क्रिप्टो होल्डिंग्स और डिजिटल वॉलेट की जानकारी देने की शर्त पर साइबर फ्रॉड के आरोपी को ज़मानत दी

साइबर फ्रॉड के मामले में ज़मानत देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने आवेदकों को जांच अधिकारी को पहले बताए बिना कोई नया सिम या फ़ोन लेने/इस्तेमाल करने; नया बैंक खाता खोलने; या कोई सोशल मीडिया अकाउंट, डोमेन नाम या वेबसाइट बनाने से रोक दिया।जस्टिस रवि चिरानिया की बेंच ने आरोपियों को VPN, TOR ब्राउज़र, प्रॉक्सी सर्वर या किसी भी तरह के गुमनाम नेटवर्क या पहचान छिपाने वाली टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल न करने का भी निर्देश दिया।इसके अलावा, कोर्ट ने आरोपियों से एक हलफनामा भी मांगा, जिसमें ये जानकारियां शामिल हों:1....

वार्ड का बंटवारा आबादी के आधार पर होना चाहिए, न कि वोटरों की संख्या के आधार पर: राजस्थान हाईकोर्ट
वार्ड का बंटवारा आबादी के आधार पर होना चाहिए, न कि वोटरों की संख्या के आधार पर: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने नगर निकाय के आगामी चुनावों में वार्ड बनाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज की। कोर्ट का मानना ​​है कि वार्ड बनाने का मुख्य आधार वोटरों की संख्या नहीं, बल्कि आबादी है।एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस शुभा मेहता की खंडपीठ ने कहा कि पूरी याचिका गुमराह करने वाली थी और यह गलत धारणा पर आधारित थी कि वार्ड वोटरों की संख्या के आधार पर तय किए जाते हैं।बता दें, याचिकाकर्ता ने चुनाव के लिए ड्राफ्ट वोटर लिस्ट (मतदाता सूची) प्रकाशित होने के बाद यह याचिका दायर की, जिसमें...

अंतरिम आदेश से किसी पक्ष को असंगत नुकसान नहीं होना चाहिए: राजस्थान हाईकोर्ट ने विवाद लंबित रहने तक शराब दुकान को संचालन की अनुमति दी
अंतरिम आदेश से किसी पक्ष को असंगत नुकसान नहीं होना चाहिए: राजस्थान हाईकोर्ट ने विवाद लंबित रहने तक शराब दुकान को संचालन की अनुमति दी

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि अंतरिम आदेशों का उद्देश्य विवाद के अंतिम निपटारे तक दोनों पक्षों के हितों में संतुलन बनाए रखना होता है। ऐसे आदेश किसी एक पक्ष पर अनावश्यक या असंगत बोझ नहीं डालने चाहिए।जस्टिस फरजंद अली और जस्टिस सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए एक शराब दुकान संचालक को आबकारी विभाग द्वारा स्वीकृत नए स्थान से दुकान चलाने की अनुमति दी।अदालत ने कहा कि दुकान का स्थानांतरण उसी आबकारी क्लस्टर के भीतर किया गया और अंतरिम रोक के कारण लाइसेंसधारी को लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़...

साइबर सेल के गैर-जिम्मेदार रवैये पर MP हाईकोर्ट की टिप्पणी, कंपनी का बैंक खाता अनफ्रीज करने का आदेश
साइबर सेल के गैर-जिम्मेदार रवैये पर MP हाईकोर्ट की टिप्पणी, कंपनी का बैंक खाता अनफ्रीज करने का आदेश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक कंपनी का बैंक खाता अनफ्रीज करने का निर्देश देते हुए विभिन्न राज्यों की साइबर क्राइम सेल के "खराब कार्यप्रदर्शन और गैर-जिम्मेदार रवैये" पर नाराजगी जताई।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की पीठ ने कहा कि अदालत के अंतरिम आदेश के बाद बैंक ने संबंधित साइबर सेल को ईमेल भेजे थे, लेकिन बेंगलुरु साइबर सेल को छोड़कर किसी भी एजेंसी ने जवाब नहीं दिया।याचिकाकर्ता कंपनी ने तर्क दिया कि उसका खाता बिना किसी नोटिस या सुनवाई के केवल साइबर सेल के निर्देशों पर फ्रीज कर दिया गया था। वहीं, बैंक ने कहा...

व्यक्तिगत सुविधा से ऊपर राष्ट्रीय हित: राजस्थान हाईकोर्ट ने माता-पिता की मेडिकल दिक्कतों के बावजूद IAF अधिकारी का ट्रांसफर सही ठहराया
व्यक्तिगत सुविधा से ऊपर राष्ट्रीय हित: राजस्थान हाईकोर्ट ने माता-पिता की मेडिकल दिक्कतों के बावजूद IAF अधिकारी का ट्रांसफर सही ठहराया

राजस्थान हाईकोर्ट ने भारतीय वायु सेना (IAF) के स्क्वाड्रन लीडर के ट्रांसफर को सही ठहराया, जिन्होंने अपने माता-पिता की गंभीर मेडिकल स्थिति के कारण इसे चुनौती दी थी। [2026 LiveLaw (Raj) 254]कोर्ट ने माना कि मानवीय आधार या सहानुभूतिपूर्ण परिस्थितियों को सशस्त्र बलों के संगठनात्मक अनुशासन, ऑपरेशनल तैयारी और सेवा की ज़रूरतों जैसे अहम पहलुओं से ऊपर नहीं रखा जा सकता।कोर्ट ने कहा,"हालांकि ट्रांसफर ऑर्डर की वैधता या निष्पक्षता की जांच करते समय सहानुभूतिपूर्ण परिस्थितियां निश्चित रूप से एक अहम कारक हो...

राजस्थान हाईकोर्ट ने दिए आदेश: सेवा अधिकरण में रिकॉर्ड से छेड़छाड़ के आरोपों की होगी जांच
राजस्थान हाईकोर्ट ने दिए आदेश: सेवा अधिकरण में रिकॉर्ड से छेड़छाड़ के आरोपों की होगी जांच

राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण में रिकॉर्ड से कथित छेड़छाड़ के गंभीर आरोपों को लेकर जांच के आदेश दिए। अदालत ने कार्मिक विभाग के सचिव को मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।जस्टिस रवि चिरानिया ने 17 अप्रैल को पारित आदेश में अधिकरण के रजिस्ट्रार की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण पर असंतोष जताते हुए कहा कि वह अपनी जिम्मेदारी एक लिपिक पर डालने का प्रयास कर रहे हैं।अदालत ने कहा,"यह न्यायालय पाता है कि यह स्पष्टीकरण अत्यंत अव्यावहारिक है और रिकॉर्ड के आधार पर प्रथम...

46 साल की बकाया दिव्यांग पेंशन देने का आदेश, राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- सरकारी लापरवाही का खामियाजा पूर्व वायुसेना कर्मी नहीं भुगत सकता
46 साल की बकाया दिव्यांग पेंशन देने का आदेश, राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- सरकारी लापरवाही का खामियाजा पूर्व वायुसेना कर्मी नहीं भुगत सकता

राजस्थान हाईकोर्ट ने भारतीय वायुसेना के पूर्व कॉर्पोरल को बड़ी राहत देते हुए सरकार को 46 वर्षों की बकाया दिव्यांग पेंशन चार महीने के भीतर अदा करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि सरकारी निष्क्रियता या देरी के कारण किसी पूर्व सैनिक को उसके वैध अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस नुपुर भाटी की खंडपीठ ने सशस्त्र बल अधिकरण के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर यह फैसला सुनाया, जिसमें दिव्यांग पेंशन बहाल तो की गई, लेकिन उसके बकाये का भुगतान केवल वर्ष...

जुए के मामले में 100 रुपये का जुर्माना नैतिक अधमता नहीं, नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
जुए के मामले में 100 रुपये का जुर्माना 'नैतिक अधमता' नहीं, नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि राजस्थान सार्वजनिक जुआ अध्यादेश के तहत किसी व्यक्ति पर केवल जुर्माना लगाए जाने को 'नैतिक अधमता' (मोरल टरपिट्यूड) नहीं माना जा सकता। ऐसे आधार पर किसी पात्र अभ्यर्थी को सरकारी नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस कुलदीप माथुर की पीठ ने कहा कि यदि किसी अभ्यर्थी को किसी मामले में दोषी ठहराया गया हो तो केवल उसी आधार पर यांत्रिक तरीके से नियुक्ति से इनकार नहीं किया जा सकता। नियुक्ति प्राधिकारी का दायित्व है कि वह यह जांच करे कि संबंधित अपराध...

प्रोटेस्ट याचिका के आधार पर ही फाइनल रिपोर्ट खारिज नहीं कर सकता मजिस्ट्रेट: दुष्कर्म मामले में राजश्तान हाईकोर्ट ने रद्द किया संज्ञान आदेश
प्रोटेस्ट याचिका के आधार पर ही फाइनल रिपोर्ट खारिज नहीं कर सकता मजिस्ट्रेट: दुष्कर्म मामले में राजश्तान हाईकोर्ट ने रद्द किया संज्ञान आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट केवल प्रोटेस्ट याचिका में लगाए गए आरोपों के आधार पर पुलिस की नकारात्मक अंतिम रिपोर्ट को खारिज कर अपराधों का संज्ञान नहीं ले सकता। ऐसा करने से पहले उसे जांच के दौरान एकत्र किए गए समस्त साक्ष्यों और सामग्री पर सार्थक विचार करना होगा तथा जांच अधिकारी के निष्कर्षों से असहमति के स्पष्ट कारण दर्ज करने होंगे।जस्टिस फरजंद अली की एकलपीठ ने दुष्कर्म के एक मामले में दो आरोपियों के खिलाफ लिए गए संज्ञान को रद्द करते हुए कहा कि संबंधित...

राजनीतिक पहचान नहीं, कानून और प्रक्रिया के आधार पर परखी जाए प्रशासनिक कार्रवाई: राजस्थान हाईकोर्ट
राजनीतिक पहचान नहीं, कानून और प्रक्रिया के आधार पर परखी जाए प्रशासनिक कार्रवाई: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी प्रशासनिक निर्णय की वैधता का परीक्षण संबंधित कानून और अपनाई गई प्रक्रिया के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि उस व्यक्ति की राजनीतिक पहचान के आधार पर जिसने मामले को अधिकारियों के संज्ञान में लाया हो। अदालत ने कहा कि केवल इस कारण कोई प्रशासनिक निर्णय अवैध या मनमाना नहीं माना जा सकता कि उसके पीछे सत्तारूढ़ दल के किसी स्थानीय नेता का प्रतिनिधित्व या अनुरोध रहा हो।जस्टिस संजीत पुरोहित ने यह टिप्पणी फालोदी जिले में नए राजस्व गांव खीचन विस्तार के गठन को चुनौती देने...

गंभीर बीमारी से जूझ रहे आजीवन कारावास भुगत रहे दोषी को राहत, राजस्थान हाईकोर्ट ने सजा निलंबित कर दी जमानत
गंभीर बीमारी से जूझ रहे आजीवन कारावास भुगत रहे दोषी को राहत, राजस्थान हाईकोर्ट ने सजा निलंबित कर दी जमानत

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे दोषी को बड़ी राहत देते हुए उसकी सजा निलंबित कर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। दोषी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी गिलियन-बारे सिंड्रोम से पीड़ित है। हाईकोर्ट ने कहा कि न्याय व्यवस्था को मानवीय गरिमा से अलग नहीं किया जा सकता और ऐसे मामलों में मानवता तथा संवैधानिक मूल्यों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।जस्टिस फरजंद अली और जस्टिस सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने कहा कि केवल बीमारी के आधार पर सजा निलंबित नहीं की जा सकती, लेकिन जब कोई...

53 दिन की अवैध कैद पर राजस्थान हाईकोर्ट सख्त: तहसीलदार पर व्यक्तिगत रूप से 2 लाख का जुर्माना, जांच के आदेश
53 दिन की अवैध कैद पर राजस्थान हाईकोर्ट सख्त: तहसीलदार पर व्यक्तिगत रूप से 2 लाख का जुर्माना, जांच के आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने HIV संक्रमित व्यक्ति को रिहाई के आदेश के बावजूद 53 दिनों तक अवैध रूप से जेल में रखने के मामले में राज्य प्रशासन को कड़ी फटकार लगाते हुए संबंधित तहसीलदार पर व्यक्तिगत रूप से 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के भी आदेश दिए।जस्टिस फरजंद अली और जस्टिस सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने इस घटना को शैतानी कृत्य करार देते हुए कहा कि यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि मानवीय पीड़ा के प्रति ऐसी असंवेदनशीलता है जो अदालत की अंतरात्मा को झकझोर देती है।अदालत ने...

ज्यूडिशियल रिमांड के बाद गिरफ्तारी के आधार न बताए जाने पर भी हेबियस कॉर्पस नहीं दिया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
ज्यूडिशियल रिमांड के बाद गिरफ्तारी के आधार न बताए जाने पर भी 'हेबियस कॉर्पस' नहीं दिया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि एक बार ज्यूडिशियल रिमांड के आदेश जारी होने के बाद गिरफ्तारी को इस आधार पर चुनौती देने के लिए 'हेबियस कॉर्पस' की याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती कि गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए गए। ऐसा तब भी है जब नियमों का यह पालन न करना संविधान के अनुच्छेद 22(1) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 47 के तहत अनिवार्य संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा उपायों का उल्लंघन हो। [2026 LiveLaw (Raj) 249]जस्टिस उमा शंकर व्यास और जस्टिस अशोक कुमार जैन की डिवीजन बेंच ने...

नामर्दी के आरोपों को गलत साबित करने के लिए पत्नी के नार्को, पॉलीग्राफ और DNA टेस्ट की मांग: राजस्थान हाईकोर्ट ने खारिज की पति की अर्ज़ी
नामर्दी के आरोपों को गलत साबित करने के लिए पत्नी के नार्को, पॉलीग्राफ और DNA टेस्ट की मांग: राजस्थान हाईकोर्ट ने खारिज की पति की अर्ज़ी

राजस्थान हाईकोर्ट ने पति की उस अर्ज़ी को खारिज करने का फैसला सही ठहराया, जिसमें उसने अपनी और अपनी पत्नी की संयुक्त मेडिकल जांच की मांग की थी, ताकि पत्नी द्वारा तलाक की अर्ज़ी में लगाए गए शारीरिक अक्षमता और नामर्दी के आरोपों को गलत साबित किया जा सके। [2026 LiveLaw (Raj) 248]जस्टिस संजीत पुरोहित की बेंच ने कहा कि पहली बात तो यह कि अर्ज़ी कार्यवाही के बहुत बाद के चरण में दायर की गई। दूसरी बात, याचिकाकर्ता कथित यौन अक्षमता या नामर्दी के मुद्दे के लिए नार्को टेस्ट, पॉलीग्राफ टेस्ट, DNA टेस्ट आदि की...

दोषसिद्धि जरूरी नहीं, आदतन अपराधी होने के उचित आधार पर खोली जा सकती है हिस्ट्रीशीट: राजस्थान हाईकोर्ट
दोषसिद्धि जरूरी नहीं, आदतन अपराधी होने के उचित आधार पर खोली जा सकती है हिस्ट्रीशीट: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि राजस्थान पुलिस नियम, 1965 के तहत किसी व्यक्ति के खिलाफ हिस्ट्रीशीट खोलने या दोबारा सक्रिय करने के लिए पूर्व दोषसिद्धि (सजा) अनिवार्य शर्त नहीं है। यदि पुलिस के पास यह मानने के उचित आधार हैं कि कोई व्यक्ति आदतन अपराध करने का आदी है, तो उसके खिलाफ हिस्ट्रीशीट खोली जा सकती है।जस्टिस रेखा बोराणा की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि पुलिस नियमों में प्रयुक्त "आदतन अपराधी" की व्याख्या राजस्थान आदतन अपराधी अधिनियम, 1953 से नहीं ली जा सकती। अधिनियम के तहत...

अलग रह रही विधवा जेठानी को दहेज से कोई लाभ नहीं होना था, उसके खिलाफ 498ए का मामला रद्द: राजस्थान हाईकोर्ट
अलग रह रही विधवा जेठानी को दहेज से कोई लाभ नहीं होना था, उसके खिलाफ 498ए का मामला रद्द: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में महिला की जेठानी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की। अदालत ने कहा कि विधवा और ससुराल परिवार से अलग रह रही जेठानी को कथित दहेज से कोई लाभ मिलने की संभावना नहीं थी, इसलिए उसके खिलाफ लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया टिकाऊ नहीं हैं।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता जेठानी का उन नकदी या दहेज के सामानों से कोई लेना-देना नहीं था, जो कथित रूप से महिला के पति और सास-ससुर को दिए जाने थे।अदालत ने कहा...