राज�थान हाईकोट

दुष्कर्म और POCSO के दोषियों को भी खुली जेल में भेजने पर विचार संभव, लेकिन असाधारण परिस्थितियां जरूरी: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) या POCSO Act के तहत दुष्कर्म के दोषी कैदियों को खुली जेल शिविर में भेजने पर पूरी तरह रोक नहीं है। हालांकि, ऐसे कैदियों को खुली जेल में भेजने का स्वतः कोई अधिकार नहीं है। इसके लिए उन्हें विशेष या असाधारण परिस्थितियां साबित करनी होंगी।चीफ जस्टिस संजय के. अग्रवाल, जस्टिस समीर जैन और जस्टिस प्रवीर भटनागर की पूर्ण पीठ ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में संबंधित समिति को प्रत्येक कैदी के मामले का अलग-अलग आकलन करना होगा। अपराध की प्रकृति और...

राजस्थान हाईकोर्ट ने 2013 से लंबित अपीलकर्ता की दोषसिद्धि पर रोक लगाई, पंचायत चुनाव लड़ने की अनुमति दी
राजस्थान हाईकोर्ट ने उस व्यक्ति की दोषसिद्धि पर रोक लगाई, जिसकी अपील 2013 से लंबित है। कोर्ट ने उसे आगामी पंचायत चुनाव लड़ने की अनुमति दी, बशर्ते वह अन्य सभी शर्तों को पूरा करता हो।जस्टिस फरजंद अली की सिंगल बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता को केवल इसलिए चुनाव लड़ने के अवसर से वंचित नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि उसकी अपील वर्षों से लंबित है और निकट भविष्य में उस पर सुनवाई होने की संभावना नहीं है।याचिकाकर्ता को 2013 में अपहरण और घर में जबरन घुसने (House-Trespass) जैसे अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया और...

भ्रष्टाचार का मामला लंबित होने से विभागीय आरोपपत्र रद्द नहीं हो सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में प्राथमिकी दर्ज होने से विभागीय जांच और आरोपपत्र की कार्रवाई पर रोक नहीं लगती। आपराधिक मामला और विभागीय कार्यवाही दोनों अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं और कानून के तहत एक साथ जारी रह सकती हैं।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की सिंगल बेंच ने कहा कि सामान्यतः विभागीय कार्यवाही में जारी आरोपपत्र को चुनौती देने वाली याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती, जब तक यह साबित न हो कि आरोपपत्र जारी करने वाला अधिकारी...

नाबालिग यौन उत्पीड़न पीड़िता की अश्लील तस्वीरें छिपाने में लापरवाही पर राजस्थान हाईकोर्ट सख्त, संबंधित क्लर्क से मांगा स्पष्टीकरण; बार काउंसिल को दिशानिर्देश बनाने का आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग यौन उत्पीड़न पीड़िता की अश्लील तस्वीरें पेपरलेस मॉड्यूल सिस्टम पर दिखाई देते रहने के मामले में गंभीर रुख अपनाया। कोर्ट ने यह कदम तब उठाया, जब पहले ही यौन अपराधों के मामलों में पीड़ितों की पहचान और निजता सुरक्षित रखने के लिए दिशानिर्देश जारी किए जा चुके थे।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि पीड़िता की तस्वीरों को छिपाने में विफलता कोर्ट के पूर्व निर्देशों का पालन न करने के समान है और इससे उसकी निजता का उल्लंघन हुआ है। कोर्ट ने संबंधित क्लर्क से तस्वीरों को छिपाने...

मातृत्व और स्तनपान का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 का हिस्सा: राजस्थान हाईकोर्ट ने नवजात की मां के तबादले पर लगाई रोक, सरकार से नीति बनाने को कहा
राजस्थान हाईकोर्ट ने दो महीने के बच्चे की मां के दूर-दराज के स्थान पर किए गए तबादले पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार को उसके मामले पर मानवीय और सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण से दोबारा विचार करने का निर्देश दिया।अदालत ने कहा कि सामान्य रूप से यह माना जाता है कि एक साल से कम उम्र के बच्चे की मां के तबादले से, जहां तक संभव हो, बचना चाहिए। ऐसे मामलों पर प्रशासनिक आदेशों की तरह यांत्रिक ढंग से नहीं, बल्कि संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाना चाहिए।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि मातृत्व का अधिकार और...

नाबालिग से शादी मात्र से मानव तस्करी साबित नहीं होती, पैसों के लेन-देन का सबूत जरूरी: राजस्थान हाईकोर्ट ने सजा निलंबित की
राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग की मानव तस्करी के मामले में दोषी ठहराए गए दो व्यक्तियों की सजा निलंबित कर दी है। जस्टिस फरजंद अली ने कहा कि किसी नाबालिग से शादी हो जाना अपने आप में मानव तस्करी के आरोप को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। अभियोजन पक्ष को आरोपियों के खिलाफ लगाए गए अपराध के आवश्यक तत्वों को संदेह से परे साबित करना होगा।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नाबालिग से विवाह के कानूनी परिणामों और उस विवाह के संबंध में किसी अलग आपराधिक अपराध के कथित रूप से किए जाने के बीच अंतर करना जरूरी है। केवल...

भरण-पोषण बकाया वसूलने की 12 महीने की समयसीमा आदेश की तारीख से शुरू होगी, पिछली अवधि से नहीं जिसके लिए राशि तय हुई: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125(3) के परंतुक के तहत भरण-पोषण की बकाया राशि वसूलने के लिए निर्धारित 12 महीने की समयसीमा की गणना उस तारीख से की जाएगी, जिस दिन भरण-पोषण देने का आदेश पारित हुआ। यह समयसीमा उस पिछली तारीख से नहीं गिनी जाएगी, जिस तारीख से भरण-पोषण की राशि देने का निर्देश दिया गया।CrPC की धारा 125(3) के परंतुक में भरण-पोषण के आदेश के तहत बकाया राशि की वसूली के लिए 12 महीने की समयसीमा निर्धारित है। यह अवधि उस तारीख से गिनी जाती है, जिस दिन संबंधित राशि...

डॉक्टर को अपना नाम बदलने के बाद मेडिकल ऑफिसर पद के लिए आवेदन करने से पहले अपने शैक्षणिक रिकॉर्ड में सुधार कराना होगा: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि जो डॉक्टर अपना नाम बदलकर मेडिकल ऑफिसर डायरेक्ट रिक्रूटमेंट एग्जामिनेशन 2026 (सीधी भर्ती परीक्षा) में शामिल होना चाहता है, उसे सबसे पहले अपने शैक्षणिक दस्तावेजों में अपना नाम ठीक कराना होगा।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच ने कहा कि जब तक याचिकाकर्ता के स्कूल और कॉलेज के रिकॉर्ड में उसका नाम ठीक नहीं हो जाता तब तक उसे वह राहत नहीं दी जा सकती, जिसकी उसने मांग की है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (RUHS)...

ऑनलाइन घोटाला: राजस्थान हाईकोर्ट ने साइबर धोखाधड़ी के आरोपियों की तीसरी जमानत याचिका खारिज की
राजस्थान हाईकोर्ट ने साइबर अपराध के एक मामले में दो आरोपियों द्वारा दायर तीसरी जमानत याचिका खारिज की। कोर्ट ने कहा कि ऑनलाइन धोखाधड़ी में भारी बढ़ोतरी के बीच, डिजिटल घोटाले साइबर अपराध के सबसे खतरनाक रूपों में से एक बनकर उभरे हैं।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच ने कहा कि बैंक ग्राहकों को निशाना बनाने वाले फिशिंग घोटाले सबसे व्यापक साइबर अपराधों में से एक हैं।जज ने कहा,"साइबर अपराधी वित्तीय लाभ के लिए बैंक खातों तक पहुंचने के लिए लॉगिन क्रेडेंशियल (यूजरनेम और पासवर्ड) चुरा लेते हैं और क्रेडिट व...

केवल रोजगार के स्वरूप के आधार पर महिला संविदा कर्मचारियों को मैटर्निटी लीव देने से इनकार नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि रोजगार का स्वरूप—चाहे वह नियमित हो, अस्थायी (कैजुअल) हो या संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) आधारित—केवल इसी आधार पर किसी महिला कर्मचारी को मातृत्व लाभ (मैटर्निटी बेनिफिट) देने से इनकार करने का ठोस कारण नहीं हो सकता, बशर्ते अन्य सभी कानूनी शर्तें पूरी होती हों।इस संबंध में यदि संविदा की कोई शर्त 'मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961' (Maternity Benefits Act, 1961) के प्रावधानों के विपरीत है, तो उस पर इस अधिनियम के नियम ही लागू होंगे।जस्टिस बिपिन गुप्ता की पीठ ने स्पष्ट किया कि मातृत्व लाभ...

बिना उचित कारण लंबे समय तक शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करना मानसिक क्रूरता: राजस्थान हाईकोर्ट ने तलाक का आदेश बरकरार रखा
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि शारीरिक अक्षमता या किसी वैध कारण के बिना पत्नी का लंबे समय तक शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करना मानसिक क्रूरता है और हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13(1)(ia) के तहत तलाक देने का वैध आधार बन सकता है।जस्टिस मुन्नूरी लक्ष्मण और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने पति को दिए गए तलाक का आदेश बरकरार रखा। अदालत ने माना कि पत्नी की ओर से लंबे समय तक शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करना और आत्महत्या करने की धमकी देना मानसिक क्रूरता के दायरे में आता है।हाईकोर्ट ने तलाक...

दोषी द्वारा मुकदमे का खर्च न चुका पाने पर प्रोबेशन रद्द करके उसे जेल नहीं भेजा जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि किसी दोषी द्वारा मुकदमे का खर्च (प्रॉसिक्यूशन कॉस्ट) न चुका पाना, अपने आप में प्रोबेशन का लाभ रद्द करने और उसे जेल भेजने का आधार नहीं हो सकता।जस्टिस फरजंद अली एक दोषी की अपील पर सुनवाई कर रहे थे। इस दोषी को 'प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट, 1958' की धारा 4 के तहत प्रोबेशन का लाभ दिया गया, भले ही उसे भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत अपराधों का दोषी ठहराया गया था। ट्रायल कोर्ट ने उसे इस एक्ट की धारा 5 के तहत मुकदमे की कार्यवाही के खर्च के रूप में ₹10,000 जमा करने का निर्देश भी...

यौन उत्पीड़न के आरोपी अधिकारी को चार्जशीट न मिलने से निलंबन अपने आप रद्द नहीं हो जाता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के आरोपी ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी (BCMO) का निलंबन आदेश बहाल किया। इससे पहले ट्रिब्यूनल ने इस आधार पर निलंबन आदेश रद्द किया था कि आरोपी को निलंबित करने से पहले उसे चार्जशीट नहीं दी गई।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच ने कहा कि हालांकि यह नियम है कि अगर चार्जशीट नहीं दी गई तो निलंबन को 3 महीने से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता, लेकिन ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत चार्जशीट न मिलने पर निलंबन अपने आप अवैध हो जाए या रद्द हो जाए।कोर्ट ने आगे कहा कि यौन...

राजस्थान हाईकोर्ट ने रिटायर जज के किडनी ट्रांसप्लांट खर्च की भरपाई के दावे पर फिर से विचार करने का आदेश दिया
राजस्थान हाईकोर्ट ने कानून एवं विधि कार्य विभाग (Law and Legal Affairs Department) का वह आदेश रद्द किया, जिसमें रिटायर न्यायिक अधिकारी के किडनी ट्रांसप्लांट के खर्च की भरपाई के दावे को खारिज कर दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि विभाग के सचिव को राज्य प्राधिकरण समिति (State Authorisation Committee) द्वारा दी गई अनुमति (ऑथराइजेशन) की वैधता पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है।जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण और जस्टिस बिपिन गुप्ता की खंडपीठ ने कहा कि 'मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994' (Transplantation of...

मोटर दुर्घटना मुआवजा मामले में बीमा कंपनी की लापरवाही पर राजस्थान हाईकोर्ट सख्त, चीफ रीजनल मैनेजर से मांगा स्पष्टीकरण
राजस्थान हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना मुआवजे के एक मामले में बीमा कंपनी की ओर से प्रभावी तरीके से पैरवी नहीं किए जाने पर यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के राजस्थान स्थित चीफ रीजनल मैनेजर से स्पष्टीकरण मांगा।कोर्ट ने उनसे यह बताने को कहा है कि राज्यभर में मोटर दुर्घटना मुआवजे के मामलों की निगरानी किस प्रक्रिया के तहत की जाती है और इन मामलों में बीमा कंपनी का बचाव करने के लिए वकीलों की नियुक्ति तथा उन्हें केस सौंपने की क्या व्यवस्था है। जस्टिस अशोक कुमार जैन की पीठ ने कहा कि चुनौती दिए गए आदेश से...

बच्चे के जन्म के बाद नए स्कूल में जॉइन करने वाली शिक्षिका को 180 दिन का मातृत्व अवकाश दें: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को एक शिक्षिका को 180 दिन का मातृत्व अवकाश देने का निर्देश दिया, जिसने बच्चे के जन्म के बाद नए स्कूल में जॉइन किया। जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने अधिकारियों को मातृत्व अवकाश की अवधि का पूरा वेतन और उससे जुड़े सभी परिणामी लाभ देने का भी निर्देश दिया।कोर्ट शिक्षिका की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें राजस्थान सेवा नियम, 1951 के नियम 103 के तहत मातृत्व अवकाश देने के लिए राज्य के अधिकारियों को निर्देश जारी करने की मांग की गई।याचिकाकर्ता बाड़मेर जिले में...

पति-पत्नी की एक ही स्थान पर पोस्टिंग का पूर्ण अधिकार नहीं, परिवार की जिम्मेदारी सिर्फ एक जीवनसाथी पर नहीं डाल सकते: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की उन याचिकाओं में हस्तक्षेप करने से इनकार किया, जिनमें उन्होंने अपने जीवनसाथी की पोस्टिंग वाले स्थान पर तबादले की मांग की थी।जस्टिस कुलदीप माथुर की पीठ ने कहा कि पति-पत्नी की एक ही स्थान पर पोस्टिंग को लेकर सामान्य नीति का होना और इच्छित स्थान पर रिक्त पद उपलब्ध होना, अपने आप में कर्मचारी को वहां तबादले का कानूनी रूप से लागू कराया जा सकने वाला अधिकार नहीं देता। हाईकोर्ट ने कहा कि तबादले के फैसले में पद की प्रकृति, संबंधित कैडर और सेवा नियमों, मौजूदा तथा...

फर्जी आधार कार्ड बनवाने में मदद का आरोप: राजस्थान हाईकोर्ट ने खारिज की सरकारी अधिकारियों की जमानत याचिका
राजस्थान हाईकोर्ट ने उन आरोपियों की दूसरी जमानत याचिका भी खारिज की, जिन पर UIDAI (आधार कार्ड प्रोजेक्ट) की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। इन लोगों ने एक ऐसे व्यक्ति की मदद की थी, जो आधार कार्ड एनरोलमेंट/अपडेशन सेंटर चला रहा था, लेकिन यह सेंटर UIDAI की शर्तों के अनुसार नहीं था।जमानत मांगने वाले ये लोग सरकारी अधिकारी हैं, जो प्रोग्रामर और असिस्टेंट प्रोग्रामर के तौर पर काम कर रहे थे। इन पर आरोप है कि ये फर्जी आधार कार्ड बनाने, उनमें हेरफेर करने और जाली दस्तावेज तैयार करने में शामिल थे।...

स्वैच्छिक रिटायरमेंट की तारीख बढ़ाने का आवेदन नजरअंदाज नहीं कर सकते, रिटायरमेंट प्रभावी होने से पहले मांग करना जरूरी: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई कर्मचारी स्वैच्छिक रिटायरमेंट प्रभावी होने से पहले उसकी तारीख बढ़ाने का आवेदन देता है, तो उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसा तब भी लागू होगा, जब संबंधित सेवा नियमों में रिटायरमेंट की तारीख बढ़ाने की स्पष्ट व्यवस्था न हो।चीफ जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस इंद्रजीत सिंह की खंडपीठ ने कहा कि राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996 में स्वैच्छिक रिटायरमेंट की तारीख बढ़ाने की प्रक्रिया का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।लेकिन केवल इस आधार पर कर्मचारी को तारीख बढ़ाने का...

आत्मरक्षा में इस्तेमाल बल का आकलन घटना के समय की परिस्थितियों के आधार पर होना चाहिए: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि आत्मरक्षा में जरूरत से ज्यादा बल इस्तेमाल किए जाने का आकलन किसी शांत और बाद के विश्लेषण के आधार पर नहीं, बल्कि उस समय व्यक्ति को दिखाई दे रहे तत्काल खतरे की परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को हमलावर से गंभीर चोट या जान जाने का खतरा महसूस हो रहा था, तो उस भय और आशंका को आत्मरक्षा के दावे पर विचार करते समय प्रासंगिक माना जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि आत्मरक्षा की दलील का परीक्षण अत्यधिक तकनीकी दृष्टिकोण...
