राज�थान हाईकोट
नाबालिग की अश्लील तस्वीरें हटाने का आदेश: राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- निजता पर गंभीर हमला”
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश में केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह मेटा प्लेटफॉर्म के साथ समन्वय कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम से एक नाबालिग की अश्लील और निजी तस्वीरों को तुरंत हटवाए। अदालत ने कहा कि बिना सहमति इस तरह की सामग्री का प्रसार निजता और गरिमा पर गंभीर हमला है, जिसके दूरगामी और अपरिवर्तनीय परिणाम होते हैं।जस्टिस फरजंद अली ने अपने फैसले में कहा कि डिजिटल युग में ऐसी सामग्री का प्रसार डिजिटल दाग बन जाता है, जो समय के साथ खत्म नहीं होता बल्कि पीड़ित को लगातार नुकसान पहुंचाता...
APO के जरिए अनुशासनात्मक कार्रवाई से बचना गलत: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को लगाई फटकार
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी पर लगे कदाचार के आरोपों से निपटने के लिए एवेटिंग पोस्टिंग ऑर्डर (APO) का सहारा नहीं लिया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में विधिसम्मत अनुशासनात्मक प्रक्रिया ही अपनाई जानी चाहिए।जस्टिस आनंद शर्मा की पीठ ने इस मामले को कानून के दुरुपयोग का उदाहरण बताते हुए कहा कि राज्य ने प्रशासनिक अधिकारों का प्रयोग गलत उद्देश्य से किया जो विधि के विरुद्ध है।अदालत ने कहा,“नियम 25ए का उपयोग दिखावे के लिए प्रशासनिक कारणों से किया...
जज की कुर्सी पर बैठकर गाना बजाते हुए दिया पोज़: राजस्थान हाईकोर्ट ने वायरल वीडियो पर भेजा अवमानना का नोटिस, कहा- कोर्टरूम या क्लब?
राजस्थान हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो का कड़ा संज्ञान लिया। इस वीडियो में बीकानेर के एक ग्राम न्यायालय के अंदर दो लोग जज की कुर्सी पर बैठे हुए और गाने बजाते हुए दिखाई दे रहे हैं।जस्टिस संदीप शाह की बेंच ने तीन लोगों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए नोटिस जारी किया।यह मामला तब सामने आया, जब बीकानेर के ग्राम न्यायालय के जज ने हाईकोर्ट को औपचारिक पत्र (10 मार्च, 2026 का) भेजा।इस पत्र में हाईकोर्ट को बताया गया कि जब स्थानीय अदालत बंद थी, तब दो लोग तीसरे...
बालीग बेटों की कमाने की क्षमता पत्नी के 'स्वतंत्र' और स्थायी गुज़ारा भत्ता के अधिकार को खत्म नहीं करती: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में यह टिप्पणी की कि तलाकशुदा पत्नी का स्थायी गुज़ारा भत्ता पाने का अधिकार एक 'स्वतंत्र' और 'अलग' अधिकार है, जिसे सिर्फ़ इसलिए कम या खत्म नहीं किया जा सकता कि उसके बेटे बालीग हैं और कमाते हैं।यह साफ़ करते हुए कि ये बातें ज़्यादा से ज़्यादा गुज़ारा भत्ते की रकम पर असर डाल सकती हैं, लेकिन पत्नी के बुनियादी अधिकार को खत्म नहीं कर सकतीं, कोर्ट ने कहा:"...बेटों का बालीग होना और उनकी कमाने की क्षमता, भले ही कानूनी तौर पर मायने रखती हो, लेकिन हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25...
राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर बिल पर की गई टिप्पणियां हटाईं, जारी किया संशोधित आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से जुड़े संशोधन कानून पर पहले की गई अपनी टिप्पणियों को हटाते हुए आदेश का संशोधित संस्करण जारी किया।जस्टिस अरुण मोंगा ने 30 मार्च के आदेश में ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि यह कानून ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के आत्म-पहचान के अधिकार को सीमित कर सकता है। हालांकि अब अदालत ने उन टिप्पणियों को हटाकर नया स्पष्टीकरण जारी किया।संशोधित आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि मूल फैसला उस समय लागू कानूनी स्थिति को...
आंशिक समझौते पर पूरी FIR रद्द करना गलत: राजस्थान हाईकोर्ट ने आदेश वापस लेकर जारी किए नए दिशा-निर्देश
राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि आंशिक समझौते के आधार पर पूरी FIR रद्द करना न्यायिक त्रुटि थी। अदालत ने अपने पहले के आदेश को आंशिक रूप से वापस लेते हुए स्पष्ट किया कि जांच बाकी आरोपियों के खिलाफ जारी रहेगी।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने यह भी कहा कि इस प्रकार की गलती को सुधारना रिव्यू (पुनर्विचार) नहीं बल्कि रिकॉल (आदेश वापस लेना) की श्रेणी में आता है।मामले में कुल 15 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज थी, लेकिन शिकायतकर्ता ने केवल दो आरोपियों के साथ समझौता किया। उन दो आरोपियों में से एक ने समझौते के...
83 वर्षीय महिला से 80 लाख की ठगी: डिजिटल अरेस्ट मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत ठुकराई
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बड़े साइबर ठगी मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कथित मुख्य साजिशकर्ता की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की। मामला 83 वर्षीय महिला से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करीब 80 लाख रुपये की ठगी से जुड़ा है।जस्टिस समीर जैन की पीठ ने कहा कि यह अपराध गंभीर प्रकृति का है और इसका समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है इसलिए ऐसे मामलों में समझौते के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती।अदालत ने यह भी पाया कि आरोपी द्वारा प्रस्तुत समझौता स्वयं उसके द्वारा हस्ताक्षरित नहीं था बल्कि उसके पिता ने उस पर हस्ताक्षर किए,...
100 से अधिक मामलों में आरोपी को हर बार पेशी के लिए लाना बोझिल: राजस्थान हाईकोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी की दी अनुमति
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि जिन मामलों में किसी आरोपी के खिलाफ बड़ी संख्या में मुकदमे दर्ज हों, वहां हर बार शारीरिक रूप से अदालत में पेश करना न केवल पुलिस व्यवस्था पर बोझ डालता है बल्कि सरकारी खर्च भी बढ़ाता है। ऐसे मामलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी एक व्यवहारिक और प्रभावी विकल्प है।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने 100 से अधिक FIR का सामना कर रहे आरोपियों को सभी मामलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने की अनुमति दी।अदालत ने कहा कि जब आरोपी की पहचान विवादित...
दस्तावेज के अभाव में एडमिशन से इनकार गलत, हाईकोर्ट ने NEET-PG अभ्यर्थी को दिलाया दाखिला
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश में NEET-PG 2025 की अभ्यर्थी को राहत देते हुए उसे कॉलेज में एडमिशन देने का निर्देश दिया। अभ्यर्थी को स्थायी पंजीकरण प्रमाणपत्र (परमानेंट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) न होने के आधार पर प्रवेश से वंचित कर दिया गया।डॉ. जस्टिस नूपुर भाटी की पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक निर्देश या सूचना पुस्तिका (इन्फॉर्मेशन बुलेटिन) किसी वैधानिक नियम को कमजोर या निरस्त नहीं कर सकती।मामले में याचिकाकर्ता ने MBBS के बाद छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल से अस्थायी पंजीकरण प्राप्त किया और...
वकीलों के साथ नौकरों की तरह नहीं किया जा सकता व्यवहार, मनमाने तरीके से हटाना गलत: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि वकीलों की अपनी गरिमा होती है और उन्हें नौकरों की तरह नहीं माना जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि वकीलों की नियुक्ति और हटाने की प्रक्रिया तय शर्तों और नियमों के अनुसार ही होनी चाहिए न कि मनमाने ढंग से।जस्टिस गणेश राम मीणा की पीठ ने जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) द्वारा सहायक वकीलों को हटाने के आदेशों को रद्द करते हुए कहा कि प्राधिकरण ने खुद बनाए गए नियमों और शर्तों की अनदेखी की है।अदालत ने कहा,“वकीलों की गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता। उन्हें...
गरीबी के कारण जेल नहीं भेजा जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट ने चेक बाउंस मामले में आरोपी को रिहा किया
राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि केवल आर्थिक असमर्थता के कारण किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता छीनी नहीं जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि गरीबी को जेल भेजने का आधार नहीं बनाया जा सकता।जस्टिस फरजंद अली ने यह टिप्पणी करते हुए उस आरोपी को रिहा करने का आदेश दिया, जिसे केवल इसलिए जेल में रखा गया, क्योंकि वह अदालत द्वारा लगाए गए खर्च (कॉस्ट) का भुगतान नहीं कर सका था जबकि पक्षकारों के बीच विवाद पहले ही सुलझ चुका था।मामला चेक बाउंस से जुड़ा था, जिसमें आरोपी को दोषी ठहराया गया। बाद में जब मामला उच्च...
व्यक्ति होने का अटूट पहलू अब 'राज्य-मध्यस्थता वाला अधिकार' बनने के जोखिम में: ट्रांसजेंडर बिल 2026 पर राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन बिल, 2026, जो ट्रांसजेंडर एक्ट 2019 में संशोधन करना चाहता है, ऐसा लगता है कि वह किसी ट्रांसजेंडर व्यक्ति के आत्म-निर्धारण के अधिकार को छीन रहा है।जस्टिस अरुण मोंगा ने कहा कि अपनी खुद की लैंगिक पहचान तय करने का अधिकार, जिसकी गारंटी 2019 के एक्ट के तहत दी गई, उसे हाल के संशोधन में छीन लिया गया और नया संशोधन यह प्रस्ताव करता है कि लैंगिक पहचान की मान्यता प्रमाणन और जांच के अधीन होगी। इस प्रकार कोर्ट ने टिप्पणी की कि...
ट्रांसजेंडर को OBC में शामिल करने पर राज्य को फटकार, कहा—संवैधानिक दायित्व से पीछे हटी सरकार: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को OBC श्रेणी में शामिल करने संबंधी राज्य सरकार की अधिसूचना पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि यह कदम उनके अधिकारों को वास्तविक लाभ देने के बजाय “खाली औपचारिकता” बनकर रह गया है।यह फैसला जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।मामला गंगा कुमारी नामक एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था, जिसमें 12 जनवरी 2023 की उस अधिसूचना को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत राज्य सरकार ने ट्रांसजेंडर...
जनजाति से होने मात्र से तलाक पर रोक नहीं, ठोस परंपरा साबित करना जरूरी: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल अनुसूचित जनजाति से संबंध होने के आधार पर हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act) के तहत तलाक की कार्यवाही को रोका नहीं जा सकता। इसके लिए यह साबित करना आवश्यक है कि संबंधित समुदाय में विवाह और तलाक के लिए अलग मान्य परंपराएं मौजूद हैं।जस्टिस सुदेश बंसल और जस्टिस अनिल कुमार उपमन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए पत्नी की अपील खारिज की। पत्नी ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उसका आवेदन खारिज कर दिया गया था। उसने यह दलील दी थी कि दोनों पक्ष मीणा...
CrPC की धारा 41A के तहत व्हाट्सऐप नोटिस मान्य नहीं, अर्नेश कुमार गाइडलाइन्स के उल्लंघन पर पुलिसकर्मी दोषी: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में एक पुलिस अधिकारी को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया है। मामला उस गिरफ्तारी से जुड़ा था, जो केवल व्हाट्सऐप के जरिए दी गई सूचना के आधार पर की गई थी, बिना दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 41-A के तहत विधिवत नोटिस जारी किए।यह आदेश जस्टिस प्रवीर भटनागर की पीठ ने पारित किया। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि व्हाट्सऐप के माध्यम से भेजा गया संदेश कानूनन मान्य नोटिस की श्रेणी में नहीं आता और इसे वैध सेवा (valid service) नहीं माना जा सकता।मामले के तथ्य:याचिकाकर्ता के...
जवाई क्षेत्र में बेकाबू पर्यटन पर सख्त राजस्थान हाईकोर्ट, नाइट सफारी और ड्रोन पर रोक
राजस्थान के पाली जिले के जवाई क्षेत्र में अनियंत्रित पर्यटन गतिविधियों पर सख्ती दिखाते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम अंतरिम आदेश जारी किया। हाइकोर्ट ने नाइट सफारी पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया और सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही सफारी गतिविधियों की अनुमति देने का निर्देश दिया। इसके साथ ही ड्रोन, तेज रोशनी वाले उपकरण और अन्य साधनों के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी गई, जो वन्यजीवों को परेशान करते हैं।यह आदेश जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें कहा गया कि जवाई क्षेत्र में बढ़ते अनियंत्रित...
'रक्षक ही भक्षक बन जाए तो व्यवस्था ढह जाएगी: राजस्थान हाईकोर्ट ने गैंगस्टर-पुलिस गठजोड़ पर जताई चिंता, DGP को दिए निर्देश
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक गंभीर मामले में पुलिस पर गैंगस्टर को संरक्षण देने के आरोपों को चिंताजनक संस्थागत विफलता करार दिया। अदालत ने कहा कि जब कानून की रक्षा करने वाले ही उसे तोड़ने लगें तो जनता का भरोसा पूरी तरह खत्म हो सकता है।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की जिसमें याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि एक पुलिस अधिकारी के इशारे पर गैंगस्टर उन्हें और उनके परिवार को धमका रहा है।अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा,“जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो व्यवस्था के पूरी तरह ढहने...
समय पर पहली अर्जी के बावजूद देरी का बहाना नहीं चलेगा, राजस्थान हाइकोर्ट ने दी राहत
राजस्थान हाइकोर्ट ने करुणामूलक नियुक्ति (कम्पैशनेट अपॉइंटमेंट) से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि यदि पहली अर्जी समय पर दी गई हो तो बाद में देरी का हवाला देकर दूसरी अर्जी खारिज नहीं की जा सकती।जस्टिस अशोक कुमार जैन की पीठ ने याचिकाकर्ता की अर्जी खारिज करने का आदेश रद्द कर दिया और राज्य को निर्देश दिया कि 90 दिनों के भीतर मामले पर दोबारा विचार कर उचित पद पर नियुक्ति दी जाए।मामले के अनुसार याचिकाकर्ता ने अपने पिता के निधन के बाद वर्ष 2015 में करुणामूलक नियुक्ति के लिए आवेदन...
ड्यूटी के दौरान हादसे में 5 साल से कोमा में सिपाही, राजस्थान हाइकोर्ट ने दिलाई वेतन की राहत
राजस्थान हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण मानवीय फैसले में उस महिला को राहत दी, जिसके पति एक सिपाही ड्यूटी के दौरान हुए हादसे के बाद पिछले कई वर्षों से कोमा में हैं और उनका वेतन रोका गया था।जस्टिस आनंद शर्मा की पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि सिपाही को विशेष दिव्यांग अवकाश (स्पेशल डिसएबिलिटी लीव) प्रदान किया जाए, 2021 से बकाया वेतन जारी किया जाए और आगे भी नियमित वेतन का भुगतान जारी रखा जाए।मामले के अनुसार सिपाही 2021 में ड्यूटी के दौरान एक दुर्घटना का शिकार हो गया था, जिसके बाद से वह कोमा में है।...
₹20,000 करोड़ की ज़रूरत के मुकाबले ₹1,000 करोड़ का आवंटन 'ऊंट के मुंह में जीरा' जैसा: राजस्थान हाईकोर्ट का सरकारी स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर सवाल
सरकारी स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए पर्याप्त बजट आवंटन की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए राजस्थान हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव को एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इस हलफनामे में स्कूल की इमारतों/कमरों के निर्माण/मरम्मत का पूरा रोडमैप और स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी।जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस अशोक कुमार जैन की डिवीज़न बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव की इस दलील पर विचार किया कि सरकारी स्कूलों में निर्माण/मरम्मत के काम के लिए...















