राज�थान हाईकोट

पिछली FIR में नहीं उठाए गए, देर से लगाए गए आरोप प्रक्रिया का दुरुपयोग दर्शाते हैं: राजस्थान हाईकोर्ट
पिछली FIR में नहीं उठाए गए, देर से लगाए गए आरोप प्रक्रिया का दुरुपयोग दर्शाते हैं: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने माना कि किसी गंभीर अपराध का उचित समय के भीतर, या उस प्रासंगिक समय पर खुलासा न करना, जब उसी शिकायतकर्ता द्वारा उसी आरोपी के खिलाफ पहले ही अपराध दर्ज किया गया, आरोपों को झूठा साबित कर देगा और बाद की शिकायत/FIR/आरोपों को कानून का दुरुपयोग बना देगा।याचिकाकर्ता के खिलाफ बलात्कार का आरोप लगाने वाली FIR रद्द करते हुए जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच ने टिप्पणी की कि FIR कथित घटना की तारीख से दो महीने से अधिक की देरी के बाद दर्ज की गई, और वह भी संबंधित परिवार के सदस्यों के बीच पहले से...

S.125 CrPC | कानूनी कमियों के कारण महिलाओं का शोषण जारी रहने से प्रावधान का उद्देश्य विफल: राजस्थान हाईकोर्ट
S.125 CrPC | कानूनी कमियों के कारण महिलाओं का शोषण जारी रहने से प्रावधान का उद्देश्य विफल: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने CrPC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण के लिए महिला द्वारा दायर अर्जी खारिज करते हुए इस स्थिति को "दुर्भाग्यपूर्ण" बताया और याचिकाकर्ता के प्रति सहानुभूति व्यक्त की। बता दें, उक्त महिला का विवाह इसलिए अमान्य है, क्योंकि उसके और उसके पति, दोनों के पहले के विवाह अभी भी कायम हैं।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने उन कानूनी कमियों को उजागर किया, जिनके कारण इस प्रावधान का मूल उद्देश्य ही विफल हो जाता है। साथ ही पीठ ने याचिकाकर्ता को उपलब्ध अन्य संभावित उपायों का भी सुझाव दिया, जैसे कि...

PC Act के तहत कार्रवाई के लिए रिश्वत की मांग और उसे स्वीकार करना ही काफी: राजस्थान हाईकोर्ट
PC Act के तहत कार्रवाई के लिए रिश्वत की मांग और उसे स्वीकार करना ही काफी: राजस्थान हाईकोर्ट

भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 (PC Act) के तहत दर्ज FIR रद्द करने की याचिका खारिज करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि इस प्रावधान के लिए यह ज़रूरी नहीं है कि संबंधित सरकारी कर्मचारी वास्तव में वह सरकारी काम करने की स्थिति में हो।जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर की बेंच ने टिप्पणी की कि इस अपराध के मामले में यह काफी है कि सरकारी कर्मचारी ने यह विश्वास दिलाकर रिश्वत स्वीकार की हो कि वह रिश्वत देने वाले की मदद किसी अन्य सरकारी कर्मचारी के माध्यम से करवा देगा, और रिश्वत देने वाले ने...

बालिग होने में केवल 4 दिन बाकी थे: सहमति से संबंध का हवाला देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने POCSO मामले में दी जमानत
बालिग होने में केवल 4 दिन बाकी थे: सहमति से संबंध का हवाला देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने POCSO मामले में दी जमानत

राजस्थान हाईकोर्ट ने POCSO Act से जुड़े मामले में आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि कथित घटना के समय पीड़िता बालिग होने से केवल चार दिन दूर थी और परिस्थितियां यह दर्शाती हैं कि दोनों के बीच सहमति से संबंध था।जस्टिस संजीत पुरोहित ने आदेश में कहा कि कथित घटना के समय पीड़िता वयस्कता की दहलीज पर थी, इसलिए उसकी समझ को एक परिपक्व युवती के समान माना जा सकता है।अदालत ने यह भी नोट किया कि बालिग होने के तुरंत बाद पीड़िता ने अपने परिवार से सुरक्षा की मांग करते हुए अदालत का रुख किया और तब से वह आरोपी के परिवार...

राजस्थान हाईकोर्ट ने पति पर क्रूरता और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप रद्द किए, कहा - सुसाइड नोट से पता चलता है कि पत्नी उसके साथ खुश थी
राजस्थान हाईकोर्ट ने पति पर क्रूरता और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप रद्द किए, कहा - सुसाइड नोट से पता चलता है कि पत्नी उसके साथ खुश थी

राजस्थान हाईकोर्ट ने पति के खिलाफ अपनी पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की। कोर्ट ने पाया कि मृतक पत्नी द्वारा लिखे गए सुसाइड नोट से यह संकेत मिलता है कि उसका आरोपी पति के साथ रिश्ता खुशहाल था। उसे न तो प्रताड़ित किया गया था और न ही कोई नुकसान पहुंचाया गया था। इसके अलावा, पति ने न तो उससे दहेज की मांग की थी और न ही उसे आत्महत्या करने के लिए उकसाया था।इसके विपरीत, कोर्ट ने यह भी पाया कि सबूतों के अनुसार, मृतक का अपनी बेटी के साथ रिश्ता तनावपूर्ण था,...

लिखित पावर ऑफ अटॉर्नी को मौखिक रूप से रद्द या संशोधित नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
लिखित पावर ऑफ अटॉर्नी को मौखिक रूप से रद्द या संशोधित नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि लिखित रूप में दी गई पावर ऑफ अटॉर्नी (PoA) को मौखिक बयान के आधार पर न तो रद्द किया जा सकता है और न ही उसमें कोई बदलाव किया जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे किसी भी परिवर्तन, संशोधन या निरस्तीकरण के लिए लिखित दस्तावेज आवश्यक है।जस्टिस रेखा बोरणा ने अपने आदेश में कहा कि यदि कोई अनुबंध या दस्तावेज कानूनन लिखित रूप में आवश्यक है और उसे लिखित रूप में निष्पादित किया गया है तो उसके प्रावधानों को मौखिक रूप से बदला नहीं जा सकता। अदालत ने...

राजस्थान हाईकोर्ट ने लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी को दोषी की बेटी के इलाज का इंतज़ाम करने का निर्देश दिया, बार-बार पैरोल देने से किया इनकार
राजस्थान हाईकोर्ट ने लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी को दोषी की बेटी के इलाज का इंतज़ाम करने का निर्देश दिया, बार-बार पैरोल देने से किया इनकार

AIIMS में अपनी बेटी के इलाज के लिए दोषी की इमरजेंसी पैरोल की अर्ज़ी खारिज करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने ज़िला लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, सिरोही को निर्देश दिया कि वह सिरोही या किसी उचित सेंटर पर उसकी बेटी के इलाज के लिए सही इंतज़ाम करे।जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की डिवीज़न बेंच ने पाया कि इस बात को ध्यान में रखते हुए कि याचिकाकर्ता की बेटी मानसिक बीमारी से पीड़ित है, उसे नियमित इलाज की ज़रूरत होगी। हालाँकि, याचिकाकर्ता को नियमित अंतराल पर इमरजेंसी पैरोल देने की इजाज़त नहीं...

शादी और बच्चे के हित को देखते हुए पीड़िता को दोबारा बुलाने की अनुमति: राजस्थान हाईकोर्ट
शादी और बच्चे के हित को देखते हुए पीड़िता को दोबारा बुलाने की अनुमति: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने दुष्कर्म मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए आरोपी की उस अर्जी को मंजूरी दी, जिसमें उसने पीड़िता और उसकी मां को दोबारा गवाही के लिए बुलाने की मांग की थी। अदालत ने यह निर्णय आरोपी और पीड़िता के बीच विवाह तथा उनसे जन्मी बच्ची के हित को ध्यान में रखते हुए दिया।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि यदि बदली हुई परिस्थितियों में पीड़िता और उसकी मां के बयान फिर से दर्ज नहीं किए गए तो इससे उनके वैवाहिक जीवन और उनकी बेटी के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।अदालत ने प्राचीन...

राजस्थान हाईकोर्ट ने कर्मचारी से गायब स्टॉक की रिकवरी आदेश रद्द किया, कहा - गबन के आरोपों के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई ज़रूरी
राजस्थान हाईकोर्ट ने कर्मचारी से गायब स्टॉक की रिकवरी आदेश रद्द किया, कहा - गबन के आरोपों के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई ज़रूरी

राजस्थान हाई कोर्ट ने यह फैसला दिया कि जब किसी कर्मचारी की ओर से कोई गंभीर दुराचार होता है, जिससे नियोक्ता को आर्थिक नुकसान होता है तो नियोक्ता को केवल वेरिफिकेशन रिपोर्ट के आधार पर रिकवरी का आदेश देने के बजाय, नियमों के तहत अनुमत उचित कार्रवाई शुरू करनी चाहिए।जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण की बेंच सरकारी कर्मचारी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो राजस्थान राज्य सड़क परिवहन निगम (RSRTC) में मैकेनिक के तौर पर काम कर रहा था। अधिकारियों द्वारा स्टॉक का फिजिकल वेरिफिकेशन किया गया, जिसमें 8 टायर और...

498ए मामले में ननद को राहत, राजस्थान कोर्ट ने कहा-भावावेश में दूर के रिश्तेदारों को भी फंसा दिया जाता है
498ए मामले में ननद को राहत, राजस्थान कोर्ट ने कहा-भावावेश में दूर के रिश्तेदारों को भी फंसा दिया जाता है

राजस्थान हाईकोर्ट ने दहेज उत्पीड़न से जुड़े मामले में मृतका की विवाहित ननद के खिलाफ दर्ज कार्यवाही रद्द की। कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवादों में अक्सर भावावेश में दूर के रिश्तेदारों को भी आरोपी बना दिया जाता है, जबकि उनके खिलाफ ठोस आधार नहीं होता।जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने यह टिप्पणी करते हुए मजिस्ट्रेट द्वारा भारतीय दंड संहिता (IPC) धारा 498ए के तहत लिए गए संज्ञान को आंशिक रूप से निरस्त किया।मामले में याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि परिवार के अन्य सदस्यों की भूमिका का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है और...

चेक मामले में आरोपी को मजबूत बचाव का अधिकार, हस्ताक्षर जांच के लिए FSL भेजने का आदेश: राजस्थान हाईकोर्ट
चेक मामले में आरोपी को मजबूत बचाव का अधिकार, हस्ताक्षर जांच के लिए FSL भेजने का आदेश: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि परक्राम्य लिखत अधिनियम (NI Act) की धारा 139 के तहत चेक धारक के पक्ष में जो कानूनी अनुमान बनाया गया, उससे आरोपी पर अपने बचाव का बोझ बढ़ जाता है। ऐसे में निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार और अधिक मजबूत हो जाता है और उसे पूरा अवसर दिया जाना आवश्यक है।जस्टिस अनूप कुमार ढांढ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें आरोपी के चेक पर हस्ताक्षर की FSL जांच कराने के आवेदन को खारिज कर दिया गया।मामले में आरोपी का शुरू से ही यह कहना था कि विवादित चेक पर उसके...

मृतक की आय में HRA व अन्य भत्ते भी शामिल होंगे, मुआवजा गणना में कटौती गलत: राजस्थान हाईकोर्ट
मृतक की आय में HRA व अन्य भत्ते भी शामिल होंगे, मुआवजा गणना में कटौती गलत: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना मामलों में मुआवजा तय करने को लेकर अहम स्पष्टता देते हुए कहा कि मृतक की आय में मिलने वाले विभिन्न भत्तों को हटाकर गणना नहीं की जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उच्च दायित्व भत्ता, शहर प्रतिकर भत्ता, मकान किराया भत्ता (HRA), धुलाई भत्ता सहित अन्य भत्ते मृतक की आय का हिस्सा हैं और इन्हें घटाना कानूनन सही नहीं है।जस्टिस संदीप तनेजा की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि जिला कोर्ट द्वारा इन भत्तों को हटाकर मुआवजा तय करना उचित नहीं है।कोर्ट ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट...

आउटसोर्स कर्मचारी को विभाग सीधे नहीं कर सकता बर्खास्त: राजस्थान हाईकोर्ट का अहम फैसला
आउटसोर्स कर्मचारी को विभाग सीधे नहीं कर सकता बर्खास्त: राजस्थान हाईकोर्ट का अहम फैसला

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी सरकारी विभाग में आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से कार्यरत कर्मचारी को विभाग स्वयं सीधे बर्खास्त नहीं कर सकता। ऐसे मामलों में विभाग केवल संबंधित एजेंसी को कार्रवाई के लिए अनुशंसा कर सकता है।जस्टिस मुनुरी लक्ष्मण की पीठ यह मामला सुन रही थी, जिसमें याचिकाकर्ता पंचायत राज विभाग के राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत ई-गवर्नेंस में राज्य समन्वयक के रूप में कार्यरत था। उसकी नियुक्ति एक आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से हुई थी लेकिन विभाग ने सीधे उसके सेवाएं...

FIR दर्ज किए बिना भी मजिस्ट्रेट ले सकते हैं पुलिस की मदद: राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया अधिकार क्षेत्र
FIR दर्ज किए बिना भी मजिस्ट्रेट ले सकते हैं पुलिस की मदद: राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया अधिकार क्षेत्र

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मजिस्ट्रेट किसी शिकायत पर सीधे FIR दर्ज कराने का आदेश दिए बिना भी पुलिस या अन्य सक्षम अधिकारी से जांच करा सकते हैं। अदालत ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 225 के तहत यह जांच केवल मजिस्ट्रेट की सहायता के लिए होती है, न कि पूर्ण पुलिस जांच का विकल्प।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने कहा कि धारा 225 के अंतर्गत की जाने वाली जांच सीमित और प्रारंभिक प्रकृति की होती है, जिसका उद्देश्य यह तय करना होता है कि आरोपी के खिलाफ आगे कार्यवाही के लिए पर्याप्त...

दूसरे राज्य का आरक्षण यहां लागू नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- हर राज्य की सामाजिक स्थिति अलग
दूसरे राज्य का आरक्षण यहां लागू नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- हर राज्य की सामाजिक स्थिति अलग

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक राज्य में मिलने वाला आरक्षण लाभ दूसरे राज्य में लागू नहीं किया जा सकता, क्योंकि विभिन्न राज्यों के पिछड़े वर्गों की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं।जस्टिस संजीत पुरोहित की पीठ ने यह टिप्पणी NEE-PG सीट आवंटन में आरक्षण से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की।अदालत ने कहा,“अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग का निर्धारण प्रत्येक राज्य की अपनी सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के आधार पर होता है। यह मान लेना कि सभी राज्यों के...

NDPS मामलों में बरामदगी व गिरफ्तारी मेमो की सच्चाई ट्रायल में ही तय होगी: राजस्थान हाईकोर्ट
NDPS मामलों में बरामदगी व गिरफ्तारी मेमो की सच्चाई ट्रायल में ही तय होगी: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि NDPS मामलों में बरामदगी और गिरफ्तारी मेमो की सत्यता, विश्वसनीयता और प्रमाणिकता का परीक्षण ट्रायल के दौरान ही किया जा सकता है, न कि रिट याचिका में।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए याचिका खारिज की, जिसमें आरोपी ने अपने खिलाफ दर्ज मामले को रद्द करने की मांग की थी।याचिकाकर्ता का कहना था कि उसे उसके घर से उठाया गया और बाद में उस स्थान पर ले जाकर फंसाया गया, जहां से कथित तौर पर मादक पदार्थ बरामद दिखाया गया। उसने पूरे मामले को झूठा और मनगढ़ंत...

एड-हॉक के आधार पर दावा खारिज नहीं किया जा सकता: 28 साल की सेवा के बाद कर्मचारी को पक्का करने पर विचार करे सरकार- राजस्थान हाईकोर्ट
एड-हॉक के आधार पर दावा खारिज नहीं किया जा सकता: 28 साल की सेवा के बाद कर्मचारी को पक्का करने पर विचार करे सरकार- राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक कर्मचारी को राहत दी, जिसने 28 साल से ज़्यादा समय तक सेवा देने के बावजूद, सरकार द्वारा उसे पक्का करने पर विचार न किए जाने के खिलाफ याचिका दायर की थी। सरकार का तर्क था कि उसकी शुरुआती नियुक्ति किसी स्वीकृत पद पर नहीं, बल्कि एड-हॉक (अस्थायी) आधार पर की गई।जस्टिस आनंद शर्मा की बेंच ने पाया कि राज्य सरकार का यह तर्क कि याचिकाकर्ता को किसी स्वीकृत पद पर नहीं, बल्कि केवल काम के बढ़ते बोझ को संभालने के लिए रखा गया था, लेबर कोर्ट द्वारा पहले ही खारिज किया जा चुका था। लेबर कोर्ट ने...