केरल हाईकोर्ट

न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए वकीलों का आचरण भी महत्वपूर्ण: केरल हाईकोर्ट; युवा वकील के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणियां हटाईं

केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि न्याय व्यवस्था की अखंडता केवल न्यायिक फैसलों की सटीकता पर ही नहीं, बल्कि उसमें भाग लेने वाले वकीलों की विश्वसनीयता, ईमानदारी और पेशेवर आचरण पर भी निर्भर करती है।जस्टिस देवन रामचंद्रन और जस्टिस बसंत बालाजी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी एक अपील पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें एक वकील के खिलाफ एकल न्यायाधीश के फैसले में की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने की मांग की गई थी। क्या था मामला?यह अपील 17 अगस्त, 2026 के एक फैसले से संबंधित थी। अपीलकर्ता ने रिट याचिका में मूल विवाद पर...

साइबर ठगी की शिकार महिला को SBI लौटाए ₹3.73 लाख: केरल हाईकोर्ट ने कहा- बैंक महिला की लापरवाही साबित नहीं कर सका

केरल हाईकोर्ट ने साइबर ठगी की शिकार महिला को 3.73 लाख लौटाने का निर्देश भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को दिया। महिला ने धोखाधड़ी का पता चलते ही 24 घंटे के भीतर बैंक और पुलिस को इसकी सूचना दी थी।जस्टिस हरिशंकर वी. मेनन ने कहा कि बैंक यह साबित नहीं कर सका कि महिला धोखाधड़ी वाले लेनदेन में शामिल थी। समय पर शिकायत किए जाने के कारण वह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के तहत शून्य देयता की हकदार है। याचिकाकर्ता SBI की खाताधारक है और उसके पास बैंक का एटीएम कार्ड भी है। उसे जानकारी मिली थी कि बैंक 29...

कक्षा में अनुशासन के लिए छात्रा का हाथ खींचने पर शिक्षिका के खिलाफ आपराधिक मामला रद्द: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने पांचवीं कक्षा की एक छात्रा का हाथ खींचने और उसे चोट लगने के आरोप में शिक्षिका के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि शिक्षिका का उद्देश्य छात्रा को परेशान करना या चोट पहुंचाना नहीं, बल्कि कक्षा में अनुशासन बनाए रखना था।जस्टिस जॉबिन सेबेस्टियन ने कहा कि केवल इसलिए किसी शिक्षक के खिलाफ आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता कि उसने संस्थान में अनुशासन बनाए रखने के लिए सुधारात्मक उपाय के रूप में मामूली दंड दिया।'मामूली सुधारात्मक कार्रवाई के लिए शिक्षकों पर आपराधिक...

पत्नी के पिता के पैसों से खरीदी गई संयुक्त संपत्ति पर केवल उसका ही अधिकार: केरल हाईकोर्ट का फैसला

केरल हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि पति-पत्नी के संयुक्त नाम पर खरीदी गई संपत्ति की पूरी रकम पत्नी के पिता ने उसकी भलाई के लिए दी थी और पति अपने योगदान का प्रमाण पेश नहीं कर पाया तो परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पत्नी को संपत्ति का विशेष स्वामित्व दिया जा सकता है। कोर्ट ने महिला को 2.8 एर भूमि और उस पर बने मकान का विशेष मालिक घोषित करते हुए पति को तीन महीने के भीतर संपत्ति खाली करने का निर्देश दिया।जस्टिस सतीश निनान और जस्टिस पी. कृष्ण कुमार की डिवीजन बेंच ने यह फैसला...

भारतीय नागरिक से शादी के बावजूद पाकिस्तानी नागरिक को भारत आने का अधिकार नहीं: केरल हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

केरल हाईकोर्ट ने कहा कि किसी विदेशी नागरिक को केवल इसलिए भारत आने के लिए वीजा हासिल करने का कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता, क्योंकि उसने भारतीय नागरिक से शादी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि भारत में किसी विदेशी नागरिक के प्रवेश और वीजा जारी करने का अधिकार राज्य का संप्रभु कार्य है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और प्रशासनिक विवेक जैसे पहलू शामिल होते हैं।जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने भारतीय नागरिक और उसकी पाकिस्तानी पत्नी की ओर से दायर याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। दंपती भारत में अपने...

अलग-अलग धर्मों में शादी करने वाले जोड़े को भी इंटर-कास्ट मैरिज आरक्षण का फ़ायदा मिलेगा: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने कहा कि 'इंटर-कास्ट मैरिज' आरक्षण के फ़ायदे के लिए अलग-अलग धर्मों में हुई शादी पर भी विचार किया जाना चाहिए।जस्टिस हरिशंकर वी. मेनन ने यह बात व्यक्ति की रिट याचिका पर विचार करते हुए कही, जिसने 'इंटर-कास्ट मैरिज' आरक्षण श्रेणी के तहत फ़ार्म कर्मचारी के पद पर नियुक्ति की मांग की।याचिकाकर्ता को आरक्षण के दावे के समर्थन में तय समय के भीतर दस्तावेज़ पेश करने हैं।याचिकाकर्ता ने वाइकोम के तहसीलदार द्वारा जारी 2007 का इंटर-कास्ट मैरिज सर्टिफ़िकेट (अलग-अलग जातियों में शादी का प्रमाण पत्र)...

जब तक तथ्य वकील की निजी जानकारी में न हों, वह क्लाइंट की ओर से हलफनामा नहीं दे सकता: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने कहा कि वादी का वकील दस्तावेज़ पेश करने की मांग करते हुए वादी की ओर से हलफनामा दाखिल नहीं कर सकता। [2026 LiveLaw (Ker) 514]जस्टिस ईश्वरन एस ने एक ओरिजिनल याचिका पर यह फैसला सुनाया।यह मामला तब सामने आया जब बंटवारे के मुकदमे में वादी की ओर से पेश वकील ने कुछ दस्तावेज़ पेश किए। आवेदन के साथ जो हलफनामा था, उस पर वकील ने खुद शपथ ली थी। ट्रायल कोर्ट ने इसे इस आधार पर मंज़ूरी दी कि कार्यवाही के सही चरण पर दस्तावेज़ों की प्रासंगिकता और स्वीकार्यता पर विचार किया जा सकता है। इस आदेश को हाई...

IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता का एक गंभीर कृत्य भी अपराध माना जा सकता है, कई कृत्यों की श्रृंखला ज़रूरी नहीं: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि क्रूरता का एक ही गंभीर कृत्य IPC की धारा 498A के तहत अपराध माना जा सकता है और इसके लिए कई कृत्यों की श्रृंखला ज़रूरी नहीं है।जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन ने कहा:“पति-पत्नी के बीच हर तरह की परेशानी, असहमति या बुरे बर्ताव को IPC की धारा 498A के तहत 'क्रूरता' नहीं माना जा सकता... साथ ही यह भी नहीं कहा जा सकता कि क्रूरता साबित करने के लिए हमेशा कई कृत्यों की श्रृंखला ज़रूरी है। अगर कोई एक कृत्य काफ़ी गंभीर हो और क़ानूनी परिभाषा के दायरे में आता हो, तो उसे भी क्रूरता...

भरण-पोषण मामले में हाईकोर्ट ने 80 वर्षीय महिला की याचिका खारिज की, कहा- स्टूडेंट पोती से ऐसी मांग करना अनुचित

केरल हाईकोर्ट ने कहा कि पढ़ाई कर रही और शिक्षा के लिए कर्ज ले रही पोती से अपनी पेंशन पाने वाली दादी का भरण-पोषण करने की उम्मीद नहीं की जा सकती। कोर्ट ने 80 वर्षीय महिला की उस याचिका को खारिज किया, जिसमें उसने अपनी बहू और पोती से भरण-पोषण दिलाने की मांग की थी।जस्टिस हरिशंकर वी. मेनन ने कहा कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत बहू पर सास के भरण-पोषण का दायित्व नहीं है। कोर्ट ने पोती को भी इस मामले में भरण-पोषण के लिए बाध्य मानने से इनकार किया।महिला के बेटे की...

शादीशुदा महिला खुद होटल गई तो केवल शादी के वादे को यौन संबंध की वजह नहीं माना जा सकता: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में शादीशुदा महिला से यौन संबंध बनाने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत दर्ज आपराधिक मामला रद्द किया। कोर्ट ने कहा कि यदि एक विवाहित महिला अपनी इच्छा से किसी दूसरे पुरुष के साथ होटल के कमरे में जाती है और उसके साथ यौन संबंध बनाती है तो केवल शादी के वादे के आरोप के आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि उसकी सहमति सिर्फ उसी वादे से हासिल की गई।जस्टिस जॉबिन सेबेस्टियन ने कहा कि जब महिला का विवाह कायम है और वह स्वेच्छा से आरोपी के साथ होटल गई तो...

जाति साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज न होने भर से SC-ST को संवैधानिक लाभ से वंचित नहीं कर सकते: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC/ST) का सदस्य अपनी जातीय पहचान साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर पाया केवल इस आधार पर उसे संविधान के तहत मिलने वाले लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता। इसके लिए राज्य को उसके दावे के विपरीत ठोस और स्वतंत्र साक्ष्य पेश करना होगा।डॉ. जस्टिस ए.के. जयशंकरन नांबियार और जस्टिस प्रीता ए.के. की डिवीजन बेंच ने कहा कि केरल अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति सामुदायिक प्रमाणपत्र जारी करने के विनियमन अधिनियम 1996 के तहत जाति दावों की जांच...