केरल हाईकोर्ट

जब तक तथ्य वकील की निजी जानकारी में न हों, वह क्लाइंट की ओर से हलफनामा नहीं दे सकता: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने कहा कि वादी का वकील दस्तावेज़ पेश करने की मांग करते हुए वादी की ओर से हलफनामा दाखिल नहीं कर सकता। [2026 LiveLaw (Ker) 514]जस्टिस ईश्वरन एस ने एक ओरिजिनल याचिका पर यह फैसला सुनाया।यह मामला तब सामने आया जब बंटवारे के मुकदमे में वादी की ओर से पेश वकील ने कुछ दस्तावेज़ पेश किए। आवेदन के साथ जो हलफनामा था, उस पर वकील ने खुद शपथ ली थी। ट्रायल कोर्ट ने इसे इस आधार पर मंज़ूरी दी कि कार्यवाही के सही चरण पर दस्तावेज़ों की प्रासंगिकता और स्वीकार्यता पर विचार किया जा सकता है। इस आदेश को हाई...

सीनियर सिटिज़न के अपने बच्चे ज़िंदा हों तो भरण-पोषण के लिए बहू ज़िम्मेदार नहीं: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि 'माता-पिता और सीनियर सिटिज़न के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007' के तहत बहू तब ज़िम्मेदार नहीं है, जब सीनियर सिटिज़न के बच्चे ज़िंदा हों। [2026 LiveLaw (Ker) 499]जस्टिस हरिशंकर वी. मेनन ने कहा कि जब सीनियर सिटिज़न के दूसरे बच्चे हों तो बहू इस अधिनियम के तहत 'बच्चे' या 'रिश्तेदार' की परिभाषा में नहीं आएगी।कोर्ट ने कहा,“अधिनियम की धारा 9 को पढ़ने से पता चलता है कि केवल “बच्चों या रिश्तेदारों” को ही सीनियर सिटिज़न को मासिक भरण-पोषण का भुगतान करने का निर्देश दिया...

IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता का एक गंभीर कृत्य भी अपराध माना जा सकता है, कई कृत्यों की श्रृंखला ज़रूरी नहीं: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि क्रूरता का एक ही गंभीर कृत्य IPC की धारा 498A के तहत अपराध माना जा सकता है और इसके लिए कई कृत्यों की श्रृंखला ज़रूरी नहीं है।जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन ने कहा:“पति-पत्नी के बीच हर तरह की परेशानी, असहमति या बुरे बर्ताव को IPC की धारा 498A के तहत 'क्रूरता' नहीं माना जा सकता... साथ ही यह भी नहीं कहा जा सकता कि क्रूरता साबित करने के लिए हमेशा कई कृत्यों की श्रृंखला ज़रूरी है। अगर कोई एक कृत्य काफ़ी गंभीर हो और क़ानूनी परिभाषा के दायरे में आता हो, तो उसे भी क्रूरता...

भरण-पोषण मामले में हाईकोर्ट ने 80 वर्षीय महिला की याचिका खारिज की, कहा- स्टूडेंट पोती से ऐसी मांग करना अनुचित
केरल हाईकोर्ट ने कहा कि पढ़ाई कर रही और शिक्षा के लिए कर्ज ले रही पोती से अपनी पेंशन पाने वाली दादी का भरण-पोषण करने की उम्मीद नहीं की जा सकती। कोर्ट ने 80 वर्षीय महिला की उस याचिका को खारिज किया, जिसमें उसने अपनी बहू और पोती से भरण-पोषण दिलाने की मांग की थी।जस्टिस हरिशंकर वी. मेनन ने कहा कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत बहू पर सास के भरण-पोषण का दायित्व नहीं है। कोर्ट ने पोती को भी इस मामले में भरण-पोषण के लिए बाध्य मानने से इनकार किया।महिला के बेटे की...

शादीशुदा महिला खुद होटल गई तो केवल शादी के वादे को यौन संबंध की वजह नहीं माना जा सकता: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में शादीशुदा महिला से यौन संबंध बनाने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत दर्ज आपराधिक मामला रद्द किया। कोर्ट ने कहा कि यदि एक विवाहित महिला अपनी इच्छा से किसी दूसरे पुरुष के साथ होटल के कमरे में जाती है और उसके साथ यौन संबंध बनाती है तो केवल शादी के वादे के आरोप के आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि उसकी सहमति सिर्फ उसी वादे से हासिल की गई।जस्टिस जॉबिन सेबेस्टियन ने कहा कि जब महिला का विवाह कायम है और वह स्वेच्छा से आरोपी के साथ होटल गई तो...

जाति साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज न होने भर से SC-ST को संवैधानिक लाभ से वंचित नहीं कर सकते: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC/ST) का सदस्य अपनी जातीय पहचान साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर पाया केवल इस आधार पर उसे संविधान के तहत मिलने वाले लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता। इसके लिए राज्य को उसके दावे के विपरीत ठोस और स्वतंत्र साक्ष्य पेश करना होगा।डॉ. जस्टिस ए.के. जयशंकरन नांबियार और जस्टिस प्रीता ए.के. की डिवीजन बेंच ने कहा कि केरल अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति सामुदायिक प्रमाणपत्र जारी करने के विनियमन अधिनियम 1996 के तहत जाति दावों की जांच...

पासपोर्ट से पूर्व पति का नाम हटाने के लिए तलाक की डिक्री जरूरी नहीं: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि तलाकशुदा व्यक्ति को पासपोर्ट से पूर्व पति या पत्नी का नाम हटाने के लिए तलाक की डिक्री या न्यायिक पृथक्करण का आदेश प्रस्तुत करना जरूरी नहीं है।जस्टिस मुरली पुरुषोत्तमन ने कहा कि Passports Rules, 1980 के तहत ऐसी स्थिति में तलाक की डिक्री की आवश्यकता नहीं है, इसलिए केवल एक ऑफिस मेमोरेंडम के जरिए यह अतिरिक्त शर्त नहीं लगाई जा सकती।मामला एक महिला से जुड़ा था, जिसका विवाह मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत हुआ था और बाद में आपसी सहमति से तलाक के जरिए विवाह समाप्त हुआ। महिला ने अपने...

'सिंगल स्टेटस सर्टिफिकेट' एक्सपायर होने पर शादी से इनकार नहीं कर सकता विवाह अधिकारी: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत विवाह अधिकारी केवल इस आधार पर विवाह कराने से इनकार नहीं कर सकता कि विदेशी नागरिक द्वारा प्रस्तुत किया गया 'सिंगल स्टेटस सर्टिफिकेट' एक्सपायर हो चुका है।जस्टिस हरिशंकर वी. मेनन ने एक नेपाली महिला से विवाह करने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए विवाह अधिकारी को नोटिस ऑफ इंटेंडेड मैरिज के आधार पर विवाह संपन्न कराने की अनुमति देने का निर्देश दिया।क्या था मामला?याचिकाकर्ता ने एक नेपाली नागरिक महिला से विवाह करने...

बच्चे का खर्च न देने भर से पिता पर JJ Act के तहत क्रूरता का केस नहीं बनता: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ बच्चे का भरण-पोषण खर्च नहीं देने के आधार पर पिता के खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act) के तहत बच्चे के साथ क्रूरता का मामला नहीं चलाया जा सकता, जब तक यह साबित न हो कि उस व्यक्ति के पास बच्चे की वास्तविक देखभाल या नियंत्रण था।कोर्ट ने विदेश में काम कर रहे एक पिता के खिलाफ इसी आधार पर शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही रद्द की। जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन ने कहा कि केवल बच्चे का पिता होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 के तहत बच्चे की...

पत्रकार की खबर से शर्मिंदगी होने पर भी यह अपने आपमें आपराधिक मानहानि नहीं: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी और उसके खिलाफ अपराध दर्ज होने की खबर देने के लिए पत्रकार को मानहानि के अपराध के लिए आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। [2026 LiveLaw (Ker) 448]जस्टिस सी.एस. डायस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 499 [मानहानि], 501 [मानहानिकारक सामग्री छापना या उत्कीर्ण करना] और 502 [मानहानिकारक सामग्री वाली छपी या उत्कीर्ण वस्तु बेचना] का हवाला देते हुए कहा:“आधिकारिक कार्यवाही की रिपोर्ट और स्वतंत्र रूप से किए गए मानहानिकारक दावे के बीच का...

सावरकर पर क्विज सवाल को लेकर शिक्षक निलंबित, केरल हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
केरल हाईकोर्ट ने स्वतंत्रता सेनानियों पर आयोजित एक क्विज में वी.डी. सावरकर का नाम उत्तर के रूप में शामिल करने के कारण निलंबित किए गए शिक्षक की याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है।जस्टिस वीजू अब्राहम ने गुरुवार को सरकारी वकील को सरकार से निर्देश लेने और शिक्षक के निलंबन के कारणों से कोर्ट को अवगत कराने के लिए 17 अगस्त तक का समय दिया।क्या है पूरा मामला?याचिकाकर्ता गुरुप्रसाद राय के. एक शिक्षक हैं। उनकी देखरेख में तैयार किए गए क्विज में सवाल पूछा गया था— “किस स्वतंत्रता सेनानी को अंग्रेजों ने...

POCSO | पीड़िता के योनि के मुहाने पर वाइब्रेटिंग मशीन रखना 'अंदरूनी यौन हमला' और बलात्कार के बराबर: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया कि पीड़िता की योनि के मुहाने पर वाइब्रेटिंग मशीन रखना POCSO Act के तहत सज़ा-योग्य 'पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट' (अंदरूनी यौन हमला) और भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत सज़ा-योग्य रेप के बराबर है। [2026 LiveLaw (Ker) 416]जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने POCSO Act [बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम] की धारा 3 का हवाला दिया, जो पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट को परिभाषित करती है, और IPC की धारा 375 का भी ज़िक्र किया।उन्होंने कहा:“यहां M.O2 वाइब्रेटर, जो M.O1 (लिंग...

समझौते की कई कोशिशें नाकाम होने के बाद पत्नी का साथ रहने का प्रस्ताव पति की तलाक की अर्ज़ी को खारिज नहीं कर सकता: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में कहा कि अगर पति-पत्नी के बीच सुलह की कई कोशिशें नाकाम हो गई हैं तो सिर्फ़ इसलिए पति को तलाक देने से मना नहीं किया जा सकता कि पत्नी साथ रहने को तैयार है। [2026 LiveLaw (Ker) 406]जस्टिस जे. निशा भानु और जस्टिस शोभा अन्नामा ईपेन की डिवीज़न बेंच ने पत्नी की अपील खारिज की, जिसमें उसने फैमिली कोर्ट द्वारा पति को दिए गए शादी खत्म करने के आदेश (डिक्री) को चुनौती दी थी।कोर्ट ने पाया कि पति-पत्नी के बीच सुलह के लिए बातचीत (मीडिएशन) के ज़रिए कई कोशिशें की गईं, लेकिन वे...

भरण-पोषण नहीं देना आर्थिक उत्पीड़न, यह भी घरेलू हिंसा में आता है: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि पति द्वारा पत्नी और बच्चे का भरण-पोषण नहीं करना आर्थिक उत्पीड़न है और यह महिलाओं का घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत घरेलू हिंसा की श्रेणी में आता है।जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन ने यह टिप्पणी उस आपराधिक पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए की, जिसमें एक पति ने पत्नी और नाबालिग बेटी को भरण-पोषण देने संबंधी निचली अदालतों के आदेश को चुनौती दी थी।मामला घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12 के तहत दायर याचिका से जुड़ा है। चित्तूर की न्यायिक प्रथम श्रेणी...

कुछ घटनाओं के आधार पर नहीं टूट सकता विवाह, पूरे वैवाहिक जीवन को देखना होगा: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि मानसिक क्रूरता का आकलन करते समय पूरे वैवाहिक जीवन को समग्र रूप से देखा जाना चाहिए। वर्षों के दौरान हुई कुछ अलग-अलग घटनाओं या सामान्य वैवाहिक विवादों को मानसिक क्रूरता मानकर तलाक नहीं दिया जा सकता।डॉ. जस्टिस ए. के. जयशंकरन नांबियार और जस्टिस प्रीता ए. के. की खंडपीठ ने यह टिप्पणी पति की अपील खारिज करते हुए की। पति ने फैमिली कोर्ट द्वारा उसकी तलाक याचिका खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी।हाईकोर्ट ने कहा कि मानसिक क्रूरता की कोई ऐसी निश्चित और...

विदेशी वकील भारत में गवाहों से क्रॉस एग्जामिनेशन नहीं कर सकते, केवल कार्यवाही देख सकते हैं: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारत में अदालत द्वारा नियुक्त वकील आयुक्त के समक्ष विदेशी वकील गवाहों की मुख्य परीक्षा या क्रॉस एग्जामिनेशन नहीं कर सकते।अदालत ने कहा कि साक्ष्य दर्ज करना न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है और यह भारत में विधि व्यवसाय के दायरे में आता है, जिसकी अनुमति केवल भारतीय कानून के अनुसार अधिकृत वकीलों को है।जस्टिस मोहम्मद नियास सी. पी. ने कहा,"अधिवक्ता आयुक्त के समक्ष साक्ष्य दर्ज करना न्यायिक कार्यवाही का हिस्सा है और यह भारत में विधि व्यवसाय की श्रेणी में आता है। विदेशी...

केरल वक्फ बोर्ड के गठन को फिर हाईकोर्ट में चुनौती, CPI(M) नेता की नियुक्ति पर भी उठे सवाल
केरल हाईकोर्ट में राज्य वक्फ बोर्ड के गठन को चुनौती देते हुए एक और जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में CPI(M) नेता और पूर्व विधायक कुन्हाम्मद कुट्टी मास्टर की बोर्ड में नियुक्ति पर भी सवाल उठाए गए हैं।यह याचिका सेवानिवृत्त जूनियर वारंट ऑफिसर स्टालिन वी.एम. ने दायर की है। उनका कहना है कि राज्य सरकार ने 2 फरवरी 2026 के आदेश के जरिए वक्फ बोर्ड के 11 में से 9 सदस्यों की नियुक्ति की, लेकिन यह संशोधित वक्फ अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। याचिका में कहा गया है कि कानून के अनुसार बोर्ड...

निजी स्थान पर भी जातिसूचक अपमान सार्वजनिक दृष्टि में माना जा सकता है, यदि कई लोग मौजूद हों: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) की व्याख्या करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि किसी निजी स्थान पर की गई जातिसूचक टिप्पणी भी सार्वजनिक दृष्टि के दायरे में आ सकती है, यदि वहां अन्य लोग मौजूद हों और अपमानजनक शब्द सुन सकें।जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने SC/ST Act से जुड़े मामलों की विशेष अदालत, त्रिशूर द्वारा अग्रिम जमानत अर्जी खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर यह फैसला सुनाया।अदालत ने कहा,“यह स्थापित विधिक सिद्धांत है कि 'सार्वजनिक...

POSH Act के तहत संस्थान के निदेशक के खिलाफ भी आंतरिक शिकायत समिति कर सकती है जांच : केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि यदि किसी संस्थान का निदेशक उसके प्रशासन और प्रबंधन पर पूर्ण नियंत्रण नहीं रखता और वह कार्यकारी समिति द्वारा नियुक्त कर्मचारी की श्रेणी में आता है तो उसके खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत की जांच संस्थान की आंतरिक शिकायत समिति कर सकती है।जस्टिस अनिल के. नरेंद्रन और जस्टिस मुरली कृष्ण एस. की खंडपीठ उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एकल पीठ के फैसले को चुनौती दी गई।मामला इंटीग्रेटेड रूरल टेक्नोलॉजी सेंटर के निदेशक से जुड़ा है। संस्थान की एक महिला...

POCSO मामलों में उम्र साबित करने के लिए हर बार दस्तावेज जरूरी नहीं, यदि मौखिक गवाही को चुनौती न दी जाए: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि POCSO Act के तहत मामलों में यदि पीड़िता और उसकी मां द्वारा बताई गई उम्र को ट्रायल के दौरान चुनौती नहीं दी जाती, तो केवल दस्तावेजी प्रमाण के अभाव में दोषसिद्धि को खारिज नहीं किया जा सकता।जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने यह फैसला एक आपराधिक अपील पर सुनाते हुए दिया, जिसमें आरोपी ने POCSO Act की धाराओं 7 और 8 तथा IPC की धारा 354 के तहत हुई अपनी सजा को चुनौती दी थी।अभियोजन के अनुसार आरोपी एक अपार्टमेंट परिसर में सुरक्षा गार्ड था। उसने आठ वर्षीय बच्ची को कैमरा दिखाने के बहाने सुरक्षा...
