स्तंभ

पुलिस जब मजिस्ट्रेट बन जाए: स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट का अजीबोगरीब मामला

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरभ दास और आशुतोष रांका की हिरासत से जुड़ी कार्यवाही ने ऐसी अजीबोगरीब बात सामने ला दी, जिसके बारे में शायद कानूनी हलकों के बाहर बहुत कम लोग जानते हैं या चर्चा करते हैं - वह यह कि पुलिस अधिकारी 'स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट' (विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट) के रूप में काम करते हैं।दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 70 के तहत जारी एक अधिसूचना के जरिए दिल्ली पुलिस कमिश्नर, अतिरिक्त कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर, एडिशनल डिप्टी कमिश्नर और असिस्टेंट कमिश्नर को 'एग्जीक्यूटिव...

CEC की नियुक्ति के मामले पर फ़ैसला लेने में सुप्रीम कोर्ट की 2 साल से ज़्यादा की देरी की कीमत

29 सितंबर को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की सुप्रीम कोर्ट बेंच ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को एक बड़ी बेंच के पास भेज दिया।जहाँ जस्टिस दत्ता का मानना ​​था कि बड़ी बेंच को मामला भेजने की केंद्र सरकार की मांग ज़रूरी नहीं थी, वहीं जस्टिस शर्मा की राय अलग थी। बाद में इस मामले की सुनवाई करने वाले जस्टिस शर्मा की निष्पक्षता पर सवाल उठे, क्योंकि पता चला कि उनके बेटे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में...

क्या है फॉर्म 6? जिसके बारे में ECI ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस नए फ़ॉर्म डिक्लेरेशन को मंज़ूरी दी

स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) प्रोसेस के दौरान फ़ॉर्म 6 [जिसका इस्तेमाल नए वोटर्स को शामिल करने के लिए किया जाता है] में किए गए बदलावों पर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति के बाद विवाद खड़ा हो गया। इसके बाद भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने कल एक प्रेस बयान जारी करके नए वोटर्स के लिए डिक्लेरेशन फ़ॉर्म शामिल करने के अपने फ़ैसले को सही ठहराने की कोशिश की, जो फ़ॉर्म 6 के ज़रिए एनरोलमेंट चाहते हैं।ECI ने कहा कि SIR के लिए फ़ॉर्म 6 के साथ जोड़े गए डिक्लेरेशन को सुप्रीम कोर्ट ने बिहार SIR से जुड़े अपने मई के...

क्या संस्कृति के आधार पर सरकारी कार्यक्रमों में धार्मिक रीति-रिवाजों को सही ठहराया जा सकता है? भूमि पूजन समारोहों की संवैधानिक दृष्टिकोण

भारत में सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के शिलान्यास या उद्घाटन समारोहों से पहले भूमि पूजन, हवन, नारियल फोड़ने, वैदिक मंत्रोच्चार और अन्य हिंदू धार्मिक रीति-रिवाजों में प्रधानमंत्री, न्यायाधीशों, मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों और मंत्रियों जैसे सरकारी और संवैधानिक पदाधिकारियों की भागीदारी इतनी आम हो गई है कि इस पर शायद ही कभी गंभीर संवैधानिक जांच होती है। चाहे राजमार्गों, पुलों, अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, विधायी भवनों, सरकारी कार्यालयों या यहां तक ​​कि अदालती परिसरों की आधारशिला रखने का मामला हो, इन...

प्रेस और न्यायपालिका, दोनों हमें निराश कर चुके हैं; लेकिन क्यों? - कपिल सिब्बल

सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने हाल ही में कहा कि अगर लोकतंत्र के दो अहम स्तंभ न्यायपालिका और प्रेस सत्ता के गलत इस्तेमाल के आगे झुक जाते हैं तो इससे गणतंत्र अंदर से खोखला हो जाएगा। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका और मीडिया का काम नागरिकों को बहुमत की भावनाओं से बचाना है, लेकिन अगर एक संस्था खुद को बचाने की चिंता में लगी हो और दूसरी सरकार के पक्ष में नैरेटिव बनाने में व्यस्त हो तो लोकतंत्र नहीं बचेगा।सिब्बल 'प्रेम भाटिया मेमोरियल लेक्चर' में "लोकतंत्र के दो सबसे मजबूत स्तंभ प्रेस और न्यायपालिका हैं:...

यौन अपराधों में जेंडर से जुड़ी रूढ़िवादी सोच से निपटना: सुप्रीम कोर्ट की 2026 की गाइडलाइंस 2023 की हैंडबुक से कैसे अलग

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी (NJA) की एक्सपर्ट कमेटी ने हाल ही में जजों के लिए जेंडर-सेंसिटिव (लिंग-संवेदनशील), सर्वाइवर-सेंट्रिक (पीड़ित-केंद्रित) और सहानुभूतिपूर्ण कोर्ट प्रैक्टिस अपनाने के लिए कुछ गाइडलाइंस जारी कीं।ये गाइडलाइंस सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अनिरुद्ध बोस की अध्यक्षता वाली कमेटी ने तैयार की हैं। यह कदम तब उठाया गया, जब चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि टॉप कोर्ट की 2023 की 'जेंडर स्टीरियोटाइप्स से निपटने पर...

कोर्ट ने नई पीढ़ी को निराश किया है: सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दवे ने सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दवे ने एक लेख में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि अदालत ने नई पीढ़ी को निराश किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत ने कथित पुलिस कार्रवाई का सामना कर रहे छात्रों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।दवे ने लिखा कि संविधान का अनुच्छेद 32 सुप्रीम कोर्ट को नागरिकों के मौलिक अधिकारों का संरक्षक बनाता है। उन्होंने संविधान सभा में डॉ. भीमराव आंबेडकर के उस वक्तव्य का उल्लेख किया,...