जानिए हमारा कानून
असहाय व्यक्ति की देखभाल और आवश्यकताओं को पूरा करने के अनुबंध के उल्लंघन पर कानूनी प्रावधान : धारा 357 भारतीय न्याय संहिता, 2023
भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita – BNS) 2023 में कई अपराधों और उनके लिए सजा के प्रावधान हैं।इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण धारा 357 (Section 357) है, जो उन मामलों से संबंधित है जहाँ कोई व्यक्ति कानूनी अनुबंध (Legal Contract) के तहत किसी असहाय व्यक्ति (Helpless Person) की देखभाल करने या उसकी आवश्यकताएँ (Needs) पूरी करने के लिए बाध्य है, लेकिन स्वेच्छा से अपनी ज़िम्मेदारी निभाने से इनकार कर देता है। यह धारा उन मामलों में सजा का प्रावधान करती है, जहाँ कोई व्यक्ति, जो किसी बच्चे, बुजुर्ग,...
क्या बिना किसी अपराध का आरोपी बनाए किसी व्यक्ति पर LOC लगाना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कर सकता है?
Look Out Circular (LOC) भारत में एक कानूनी प्रक्रिया (Legal Process) है, जिसका उपयोग अधिकारियों द्वारा उन व्यक्तियों की यात्रा (Travel) रोकने के लिए किया जाता है, जो किसी आपराधिक जांच (Criminal Investigation) में शामिल होते हैं।राहुल सुराना बनाम Serious Fraud Investigation Office (SFIO) मामले में, मद्रास हाईकोर्ट ने एक LOC की वैधता (Validity) की जांच की, जिसे राहुल सुराना के खिलाफ जारी किया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि यह उनके यात्रा करने के मौलिक अधिकार (Fundamental Right to Travel) का...
राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 के तहत शराब बिक्री और रोजगार पर प्रतिबंध
राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 (Rajasthan Excise Act, 1950) राज्य में शराब और नशीले पदार्थों (Intoxicating Substances) की बिक्री, वितरण और नियंत्रण को विनियमित (Regulate) करता है। इस कानून के तहत शराब विक्रेताओं (Liquor Vendors) के लिए कुछ प्रतिबंध (Restrictions) लागू किए गए हैं ताकि समाज में इसकी गलत खपत (Consumption) को रोका जा सके।इस अधिनियम में कुछ खास वर्गों के लोगों को शराब बेचने पर रोक लगाई गई है, जैसे कि नाबालिग (Minors), मानसिक रूप से अस्वस्थ लोग (People of Unsound Mind), और ड्यूटी पर...
अच्छी नीयत में की गई आलोचना और सार्वजनिक हित में दी गई चेतावनी : BNS 2023 की धारा 356 भाग IV के तहत मानहानि के कानूनी अपवाद
यह लेख भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023) की धारा 356 (Section 356) में दिए गए मानहानि (Defamation) से जुड़े प्रावधानों को सरल हिंदी में समझाने के लिए लिखा गया है। पिछले भागों में हमने मानहानि की परिभाषा (Definition), किन परिस्थितियों में यह लागू होती है, और इसके कुछ अपवादों (Exceptions) को समझाया था। इस अंतिम भाग में, हम बचे हुए अपवादों और मानहानि के लिए निर्धारित सजा पर चर्चा करेंगे।अपवाद 7: कानूनी अधिकार (Lawful Authority) रखने वाले व्यक्ति द्वारा की गई आलोचना (Censure)...
क्या राज्यपाल दया याचिका पर निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है या उन्हें राष्ट्रपति की अनुमति लेनी होगी?
सुप्रीम कोर्ट ने ए.जी. पेरारिवालन बनाम तमिलनाडु राज्य (2022) केस में एक महत्वपूर्ण संवैधानिक (Constitutional) मुद्दे पर फैसला सुनाया। यह मामला इस सवाल पर केंद्रित था कि क्या राज्यपाल (Governor) को राज्य मंत्रिमंडल (State Cabinet) की सलाह माननी होती है या वे राष्ट्रपति (President) को अंतिम निर्णय के लिए मामला भेज सकते हैं।इस फैसले ने दया याचिका (Remission) देने की प्रक्रिया को स्पष्ट किया और यह सुनिश्चित किया कि कोई भी संवैधानिक (Constitutional) पदाधिकारी अपनी शक्तियों का अनुचित उपयोग न करे। ...
बिना लाइसेंस मदिरा और अन्य उत्पाद बेचने पर रोक : राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 धारा 20 और धारा 21
राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 (Rajasthan Excise Act, 1950) का मुख्य उद्देश्य मदिरा (Liquor) और अन्य नशीले पदार्थों (Intoxicating Substances) के उत्पादन, बिक्री और वितरण को नियंत्रित करना है। यह कानून सुनिश्चित करता है कि इन उत्पादों का व्यापार एक व्यवस्थित तरीके से हो और अवैध बिक्री (Illegal Sale) को रोका जा सके।इस अधिनियम की धारा 19 (Section 19) के अनुसार, कोई भी व्यक्ति सरकार द्वारा निर्धारित मात्रा से अधिक मदिरा (Liquor) या अन्य उत्पाद बिना अनुमति अपने पास नहीं रख सकता। अब धारा 20 (Section...
अदालत द्वारा आरोपी की जांच की प्रक्रिया: धारा 351 BNSS, 2023 और पुरानी धारा 313 CrPC, 1973 से तुलना
भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली (Criminal Justice System) का मुख्य उद्देश्य निष्पक्ष सुनवाई (Fair Trial) और न्याय सुनिश्चित करना है। इस प्रक्रिया में यह आवश्यक होता है कि जिस व्यक्ति पर अपराध का आरोप लगाया गया है (Accused), उसे अपना पक्ष स्पष्ट करने का पूरा अवसर मिले।इसी सिद्धांत को लागू करने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 - BNSS, 2023) की धारा 351 (Section 351) में अदालत को यह शक्ति दी गई है कि वह किसी भी मुकदमे या जांच (Inquiry or Trial) के...
Transfer Of Property में Mortgage लेने वाले व्यक्ति की ड्यूटी
धारा 76 में कब्जा सहित बन्धकदार के दायित्वों का उल्लेख हुआ है। खण्ड (ग) तथा (घ) में वर्णित दायित्वों के सिवाय सभी दायित्व बाध्यकारी हैं। अतः किसी प्रतिकूल संविदा द्वारा इन्हें समाप्त नहीं किया जा सकता है। प्रत्येक मामले में इनका अनुपालन होना आवश्यक है। सकब्जा बन्धकदार, बन्धक सम्पत्ति के न्यासी की हैसियत से होता है। इस धारा के अन्तर्गत उसके निम्नलिखित दायित्व हैं :-(क) सामान्य प्रज्ञा से सम्पत्ति का प्रबन्ध करना - यह खण्ड उपबन्धित करता है कि बन्धकदार सामान्य प्रज्ञा वाले व्यक्ति की भाँति बन्धक...
Transfer Of Property में Mortgage लेने वाले व्यक्ति के राइट्स
एक बंधकदार के अधिकार और कर्तव्य संपत्ति अंतरण अधिनियम कि किसी एक धारा में समाहित नहीं किए गए हैं अपितु धारा 67 से लेकर धारा 77 तक बंधकदार के अधिकारों एवं कर्तव्यों से संबंधित है। बंधकदार उसे कहा जाता है जो किसी संपत्ति को अपने पास बंधक रखता है। धारा 67 से 77 तक की धाराएँ बन्धकदार के अधिकारों एवं कर्तव्यों की विवेचना करती हैं। धारा 67 से 73 तक बन्धकदार के अधिकारों का उल्लेख करती हैं जबकि धारा 67क, 76 और 77 उसके कर्तव्यों का उल्लेख करती हैं। यह धारा, धारा 60 की प्रतिरूप (Counter part) है जो...
Explained| हाईकोर्ट में एडहॉक जज : नियुक्ति और कार्यकाल की प्रक्रिया
आपराधिक अपीलों की बढ़ती हुई लंबितता से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में हाईकोर्ट में एडहॉक जज की नियुक्ति की शर्तों में ढील दी। न्यायालय ने अपने 2021 के फैसले में लगाई गई शर्त को निलंबित कर दिया, जिसके अनुसार तदर्थ नियुक्तियां तभी की जा सकती हैं, जब हाईकोर्ट में रिक्तियां स्वीकृत पदों के 20% से अधिक हों।2021 में भारत के तत्कालीन चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने लोक प्रहरी बनाम भारत संघ के मामले में एडहॉक जज की नियुक्ति के लिए...
Transfer Of Property में प्रॉपर्टी Mortgage रखने वाले व्यक्ति का प्रॉपर्टी को वापस लेने का राइट
Transfer Of Property की धारा 60 बंधककर्ता के मोचन के अधिकार का उल्लेख करती है। मोचनाधिकार से तात्पर्य बन्धककर्ता के उस अधिकार से है जिसके माध्यम से वह बन्धकधन के भुगतान हेतु प्रतिभूत रखी गयी सम्पत्ति, बन्धक धन की अदायगी होते ही बन्धकदार से वापस प्राप्त करता है। 'रिडीम' शब्द से तात्पर्य है सम्पत्ति को वापस प्राप्त करना या दायित्व से मुक्त कराना। इंग्लिश विधि के अन्तर्गत इस अधिकार को मोचन की साम्या के नाम से जाना जाता है। इसका कारण यह है कि यह अधिकार साम्या कोर्ट्स की देन है। बन्धकदार के जप्तीकरण...
Transfer Of Property में Mortgage से रिलेटेड Redemption rights के एलिमेंट
Transfer Of Property में मोर्टगेज में Redemption rights दिया गया है उस व्यक्ति को जिसने प्रॉपर्टी बंधक रखी है उसके कुछ एलिमेंट हैं।बन्धक धन का भुगतान या भुगतान हेतु निविदाभुगतान या निविदा उचित समय पर होभुगतान या निविदा उचित स्थान पर होअधिकार के प्रवर्तन हेतु वाद दायर किया जायेंअधिकार के प्रवर्तन की सूचनाबन्धक धन का भुगतान या भुगतान हेतु निविदा- मोचनाधिकार के प्रयोग हेतु आवश्यक है कि बन्धककर्ता, बन्धकधन का ब्याज़ के साथ भुगतान बन्धकदार या उसके द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति को करे या भुगतान करने की...
मजिस्ट्रेट की शक्ति - हस्ताक्षर, हस्तलिपि या आवाज़ के नमूने देने का आदेश : धारा 349, BNSS 2023
किसी भी अपराध की जांच (Investigation) में साक्ष्य (Evidence) की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अपराधी को पहचानने और उसके अपराध को साबित करने के लिए कई प्रकार के वैज्ञानिक तरीकों (Forensic Methods) का उपयोग किया जाता है।इन तरीकों में हस्ताक्षर (Signature), हस्तलिपि (Handwriting), आवाज़ (Voice Sample), और उंगलियों के निशान (Finger Impressions) शामिल हैं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 - BNSS, 2023) की धारा 349 के तहत प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट (First-Class...
अगर किसी अपराध का ट्रायल किसी अन्य राज्य में हुआ हो तो किस राज्य सरकार को दोषी की Remission याचिका पर निर्णय लेने का अधिकार होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने राधेश्याम भगवंदास शाह बनाम गुजरात राज्य (2022) मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी सवाल पर फैसला दिया कि क्या किसी दोषी (Convict) को उसी Remission नीति (Premature Release Policy) के तहत रिहाई का अधिकार है, जो उसकी सजा (Conviction) के समय लागू थी, या उसे बाद में बदली गई नीति के अनुसार देखा जाएगा।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोषी की Remission याचिका (Application) पर उसी नीति के अनुसार विचार किया जाना चाहिए, जो उसके सजा सुनाए जाने (Conviction) के समय प्रभावी थी। इस फैसले ने सजा और सजा के...
कानूनी मामलों, सार्वजनिक राय और कलात्मक समीक्षा में मानहानि के अपवादों की गहरी पड़ताल : BNS 2023 की धारा 356 भाग III
पिछले भागों में, हमने मानहानि (Defamation) की परिभाषा, इसके प्रकार, और उन परिस्थितियों को समझा था जिनमें कोई बयान मानहानि नहीं माना जाता है।इस भाग में, हम धारा 356 (Section 356) के दो और महत्वपूर्ण अपवाद (Exceptions) को विस्तार से समझेंगे, जो न्यायिक निर्णयों (Court Judgments) और सार्वजनिक प्रदर्शन (Public Performances) से जुड़े हैं। अपवाद 5: न्यायिक मामलों और अदालती कार्यवाही पर राय (Opinion on Court Judgments and Legal Proceedings)कानून यह स्वीकार करता है कि लोग न्यायिक मामलों (Legal Cases),...
धारा 19 राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 के तहत निर्धारित सीमा से अधिक नशीले पदार्थों रखने पर प्रतिबंध
राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 (Rajasthan Excise Act, 1950) एक कानूनी ढांचा है जो राज्य में मदिरा (Liquor) और अन्य नशीले पदार्थों (Intoxicating Substances) के निर्माण (Manufacture), बिक्री (Sale) और कब्जे (Possession) को नियंत्रित करता है।इस अधिनियम की धारा 19 (Section 19) में यह प्रावधान किया गया है कि कोई भी व्यक्ति, जिसे कानून के तहत मदिरा बनाने, इकट्ठा करने, बेचने या खेती करने का लाइसेंस (License) नहीं दिया गया है, वह निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा में मदिरा अपने पास नहीं रख सकता। यह सीमा...
धारा 52 और 53 राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 के तहत पुलिस अधिकारियों के कर्तव्य और सार्वजनिक शांति के लिए दुकानों को बंद करने की शक्ति
राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 (Rajasthan Excise Act, 1950) एक कानून है जो राज्य में शराब और नशीले पदार्थों (Intoxicating Drugs) के उत्पादन, बिक्री और नियंत्रण को नियमित करता है। इस अधिनियम के तहत विभिन्न सरकारी अधिकारियों को कुछ विशेष ज़िम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं ताकि अवैध गतिविधियों (Illegal Activities) पर प्रभावी रूप से रोक लगाई जा सके। इस अधिनियम की धारा 52 (Section 52) पुलिस अधिकारियों को जब्त किए गए सामानों (Seized Articles) को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी देती है, जबकि धारा 53 (Section 53)...
मानहानि के उदाहरण और अपवादों की समझ और उनके व्यावहारिक प्रभाव : भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 356 भाग 2
पहले भाग में, हमने भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita - BNS), 2023 की धारा 356 के तहत मानहानि (Defamation) की परिभाषा को समझा।हमने देखा कि जब कोई व्यक्ति बोले गए या लिखित शब्दों, संकेतों (Signs) या दृश्य प्रस्तुतियों (Visible Representations) के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति की प्रतिष्ठा (Reputation) को नुकसान पहुँचाने के इरादे से कोई आरोप (Imputation) लगाता है, तो इसे मानहानि कहा जाता है। इस भाग में, हम धारा 356 के अंतर्गत दिए गए उदाहरणों (Illustrations) को विस्तार से समझेंगे, जो यह...
गवाह को बुलाने , पुनः जाँच करने की अदालत की शक्ति: BNSS, 2023 की धारा 348 और पुराने Crpc, 1973 की धारा 311
किसी भी अपराध जांच (Inquiry) या न्यायिक प्रक्रिया (Judicial Proceedings) के दौरान, साक्ष्य (Evidence) और गवाहों (Witnesses) की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। अदालत (Court) का यह अधिकार कि वह किसी भी समय किसी व्यक्ति को गवाह के रूप में बुला सके, या पहले से जाँच किए गए गवाह को फिर से बुला कर पूछताछ कर सके, न्याय (Justice) सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) की धारा 348 (Section 348) अदालत को यह शक्ति देती है कि वह किसी भी...
क्या Dying Declaration से धारा 498A IPC के तहत क्रूरता साबित की जा सकती है?
सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्रन बनाम केरल राज्य (2022) मामले में एक महत्वपूर्ण सवाल पर फैसला दिया कि क्या मृतक (Deceased) व्यक्ति के बयान को भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (Indian Evidence Act, 1872) की धारा 32(1) के तहत स्वीकार किया जा सकता है, खासकर जब आरोपी (Accused) को उसकी मृत्यु से संबंधित आरोपों से बरी कर दिया गया हो। यह मामला धारा 498A IPC (भारतीय दंड संहिता, 1860) के तहत क्रूरता (Cruelty) के आरोपों से जुड़ा था।इस फैसले में कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि किसी मृतक पत्नी के बयान को किस हद तक सबूत के...