हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट की जज जस्टिस भारती डांगरे ने सचिन वाजे की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग किया
बॉम्बे हाईकोर्ट की जज जस्टिस भारती डांगरे ने सचिन वाजे की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग किया

बॉम्बे हाईकोर्ट की जज जस्टिस भारती डांगरे ने मंगलवार को बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे द्वारा दायर हेबियस कॉर्पस याचिका पर आदेश पारित करने या आगे की सुनवाई करने से खुद को अलग कर लिया।जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की खंडपीठ ने इस महीने की शुरुआत में वाजे द्वारा दायर याचिका पर संक्षिप्त दलीलें सुनी थीं, जो महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख से संबंधित भ्रष्टाचार के मामले में हिरासत से अपनी रिहाई की मांग कर रहे हैं।वाजे उस मामले में सरकारी गवाह बन गए और तब से हिरासत में...

आर्य समाज मंदिर में विवाह के गवाह वास्तविक और प्रामाणिक होने चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट
आर्य समाज मंदिर में विवाह के गवाह वास्तविक और प्रामाणिक होने चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने महिला और उसके सगे चाचा के बीच आर्य समाज मंदिर में संपन्न विवाह को अमान्य घोषित किया, क्योंकि उस व्यक्ति ने झूठा हलफनामा देकर कहा था कि जब उसकी पत्नी और बेटा था तब वह अविवाहित था।जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस अमित शर्मा की खंडपीठ ने विवाह की तस्वीरें देखीं और पाया कि जोड़े के अलावा पुजारी को छोड़कर कोई भी समारोह में मौजूद नहीं था।महिला के पिता द्वारा दायर हेबियस कॉर्पस याचिका पर विचार करते हुए न्यायालय ने कहा,"ऐसी शादियों की वैधता और पवित्रता पूरी तरह से संदिग्ध है।"अदालत ने...

राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस से पहले से ही विवाहित लिव-इन पार्टनर्स की सुरक्षा याचिका पर विचार करने को कहा
राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस से पहले से ही विवाहित लिव-इन पार्टनर्स की सुरक्षा याचिका पर विचार करने को कहा

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्थानीय पुलिस को निर्देश दिया कि वह अपने विवाह से बाहर लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे पुरुष और महिला को आवश्यक सुरक्षा प्रदान करने पर विचार करे।जस्टिस अरुण मोंगा की पीठ चार बच्चों की मां और एक बच्चे के पिता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो पिछले कुछ दिनों से अपने-अपने जीवनसाथी से तलाक लिए बिना एक साथ रिश्ते में रह रहे हैं और उन्हें अपने रिश्तेदारों से जान का खतरा होने की आशंका हैं।पीठ ने कांति और अन्य बनाम हरियाणा राज्य और अन्य (2023) का हवाला दिया, जिसमें पंजाब एंड...

पार्टियों के बीच सामान्य झगड़ा हत्या के मकसद का सबूत नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने हत्या के आरोपी को जमानत दी
पार्टियों के बीच सामान्य झगड़ा हत्या के मकसद का सबूत नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने हत्या के आरोपी को जमानत दी

राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि आरोपी और मृतक के बीच किसी तरह के झगड़े को आरोपी द्वारा मृतक की हत्या करने के मकसद के सबूत के तौर पर नहीं लिया जा सकता। इस प्रकार, कोर्ट ने 2021 से जेल में बंद एक हत्या के आरोपी को केवल अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर जमानत दे दी।अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ तीन मुख्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य पेश किए, जिनमें से एक मुख्य तर्क यह था कि पक्षों के बीच शत्रुतापूर्ण संबंध थे।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने इस बात पर प्रकाश डाला,"केवल किसी...

दिल्ली हाईकोर्ट ने 120 दिनों के भीतर लिखित बयान दाखिल करने की आवश्यकता वाले नियम को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट ने 120 दिनों के भीतर लिखित बयान दाखिल करने की आवश्यकता वाले नियम को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट (मूल पक्ष) नियम, 2018 के अध्याय VII के नियम 4 की संवैधानिकता बरकरार रखी, जिसके अनुसार गैर-वाणिज्यिक मामलों सहित 120 दिनों के भीतर लिखित बयान दाखिल करना अनिवार्य है।एक्टिंग चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मिनी पुष्करणा की खंडपीठ ने कहा कि हाईकोर्ट को CPC की धारा 129 और दिल्ली हाईकोर्ट एक्ट, 1966 की धारा 7 के कारण अपने मूल सिविल अधिकार क्षेत्र के प्रयोग में अपने स्वयं के नियम और प्रक्रिया तैयार करने का अधिकार है।याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली हाईकोर्ट (मूल पक्ष) नियम ('DHC...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महिलाओं को नहाते हुए फिल्माने के आरोपी महंत के खिलाफ महत्वपूर्ण सबूतों का खुलासा न करने के मामले में राज्य सरकार की जांच के आदेश दिए
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महिलाओं को नहाते हुए फिल्माने के आरोपी महंत के खिलाफ महत्वपूर्ण सबूतों का खुलासा न करने के मामले में राज्य सरकार की जांच के आदेश दिए

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महंत मुकेश गिरि से जुड़े एक मामले में तथ्यों और साक्ष्यों का खुलासा न करने के मामले में राज्य पुलिस विभाग, अभियोजन निदेशक कार्यालय और सरकारी अधिवक्ता कार्यालय के खिलाफ जांच का आदेश दिया है। महंत पर आरोप है कि उन्होंने महिलाओं के नहाते समय चुपके से उनका वीडियो बनाया था। न्यायालय द्वारा मांगे गए महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रस्तुत करने में अभियोजन पक्ष की विफलता पर चिंता व्यक्त करते हुए जस्टिस विक्रम डी चौहान की पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि न्यायालय द्वारा महत्वपूर्ण विवरण और...

रिटायर हाईकोर्ट जज के नाम के साथ रिटायर्ड शब्द नहीं जोड़ा जाएगा, टाइटल जस्टिस रहेगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया
रिटायर हाईकोर्ट जज के नाम के साथ रिटायर्ड शब्द नहीं जोड़ा जाएगा, टाइटल जस्टिस रहेगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने देखा कि रिटायर जज के नाम का टाइटल जस्टिस ही रहेगा। यह देखा गया कि रिटायर हाईकोर्ट के जज के नाम के साथ रिटायर्ड शब्द का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।"रिटायर्ड जज को माननीय जस्टिस (रिटायर्ड) के रूप में संदर्भित नहीं किया जाना चाहिए।"रिटायर शब्द को जज के नाम के साथ इस तरह नहीं जोड़ा जाना चाहिए, जैसे कि वह जज के नाम के साथ हो। हाईकोर्ट का जज रिटायर होने के बाद भी अपने नाम के साथ जस्टिस टाइटल रखता है।जस्टिस जे.जे. मुनीर ने कहा,“रिटायर जज के मामले में बस इतना ही किया जाना चाहिए कि...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी मामले में कोरियोग्राफर रेमो डिसूजा को राहत देने से किया इनकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी मामले में कोरियोग्राफर रेमो डिसूजा को राहत देने से किया इनकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2016 के धोखाधड़ी मामले के संबंध में बॉलीवुड कोरियोग्राफर और फिल्म निर्देशक रेमो डिसूजा द्वारा दायर की गई याचिका खारिज की।जस्टिस राजीव मिश्रा की पीठ ने उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा कि डिसूजा इस मामले में उनके खिलाफ दायर आरोपपत्र को चुनौती देने में विफल रहे हैं। इसलिए उन्हें कोई राहत नहीं दी जा सकती, जिसकी उन्होंने प्रार्थना की।कोर्ट ने कहा,“आवेदक के वकील राज्य के ए.जी.ए. को सुनने और रिकॉर्ड के अवलोकन के बाद यह न्यायालय पाता है कि आवेदक के खिलाफ प्रस्तुत दिनांक 25.9.2020 के...

अगर अपराध में इस्तेमाल हथियार नहीं मिला तो अभियोजन पक्ष के मामले पर संदेह नहीं किया जाना चाहिए: जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट ने 31 साल पुराने हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी
अगर अपराध में इस्तेमाल हथियार नहीं मिला तो अभियोजन पक्ष के मामले पर संदेह नहीं किया जाना चाहिए: जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट ने 31 साल पुराने हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर देते हुए कि सिद्ध हथियार की अनुपस्थिति अभियोजन पक्ष के मामले को स्वतः ही संदिग्ध नहीं बनाती, 1993 के एक हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। कार्यवाहक चीफ जस्टिस ताशी रबस्तान और जस्टिस पुनीत गुप्ता की पीठ ने कहा,"भले ही घटना में इस्तेमाल की गई बंदूक किसी दिए गए मामले में सिद्ध न हो या जहां अपराध का हथियार ही न मिले, इसका मतलब यह नहीं है कि अभियोजन पक्ष के मामले को सभी परिस्थितियों में संदेह की दृष्टि से देखा जाना...

जेएंडके हाईकोर्ट ने कहा, अनुच्छेद 227 का यंत्रवत इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए, हस्तक्षेप उन्हीं मामलों तक सीमित रहे, जहां गंभीर कानूनी उल्लंघन हो
जेएंडके हाईकोर्ट ने कहा, अनुच्छेद 227 का यंत्रवत इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए, हस्तक्षेप उन्हीं मामलों तक सीमित रहे, जहां गंभीर कानूनी उल्लंघन हो

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने एक फैसले में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत शक्तियों के विवेकपूर्ण प्रयोग को रेखांकित करते हुए इस बात पर जोर दिया कि ऐसी शक्तियों का प्रयोग यांत्रिक रूप से नहीं किया जाना चाहिए। जस्टिस वसीम सादिक नरगल ने कहा कि अनुच्छेद के तहत शक्तियों को ऐसे मामलों के लिए रिजर्व किया जाना चाहिए, जहां किसी निष्कर्ष को उचित ठहराने के लिए साक्ष्य का अभाव हो, जहां कोई निष्कर्ष इतना विकृत हो कि कोई भी उचित व्यक्ति उस निष्कर्ष पर न पहुंच सके, या जहां कोई गंभीर...

एनडीपीएस एक्ट | प्रतिबंधित पदार्थ को सुरक्षित रखा गया था और नमूने बिना किसी देरी के एफएसएल को भेजे गए थे, यह साबित करना अ‌भियोजन पक्ष का दायित्व: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट
एनडीपीएस एक्ट | प्रतिबंधित पदार्थ को सुरक्षित रखा गया था और नमूने बिना किसी देरी के एफएसएल को भेजे गए थे, यह साबित करना अ‌भियोजन पक्ष का दायित्व: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर एडं लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में एनडीपीएस एक्ट, 1985 से जुड़े मामलों में अभियोजन पक्ष के दायित्व को रेखांकित किया। कोर्ट ने कहा यह साबित करना कि प्रतिबंधित पदार्थ को सुरक्षित रखा गया था और नमूने बिना किसी देरी के फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) को भेजे गए थे, अभ‌ियोजन पक्ष का दायित्व है। उक्त टिप्पण‌ियों के साथ कोर्ट ने एनडीपीसए एक्ट, 1985 के तहत आरोप‌ित दो व्यक्तियों को बरी करने के फैसले को बरकरार रखा।जस्टिस राजेश ओसवाल और जस्टिस राजेश सेखरी की पीठ ने इस बात...

पूरी तरह से क्रॉस एग्जामिनेशन किए गए गवाह को अदालत के समक्ष दी गई पूर्व गवाही से मुकरने के लिए वापस नहीं बुलाया जा सकता: एमपी हाईकोर्ट
पूरी तरह से क्रॉस एग्जामिनेशन किए गए गवाह को अदालत के समक्ष दी गई पूर्व गवाही से मुकरने के लिए वापस नहीं बुलाया जा सकता: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट द्वारा पूरी तरह से क्रॉस एग्जामिनेशन किए गए गवाह को केवल इस आधार पर वापस नहीं बुलाया जा सकता कि ऐसा गवाह बाद में अपने बयान से मुकर गया।जस्टिस दिनेश कुमार पालीवाल की पीठ ने कहा,"किसी भी अभियोजन पक्ष के गवाह को केवल इसलिए जांच/क्रॉस एक्जामिनेशन के लिए नहीं बुलाया जा सकता, क्योंकि उसने ट्रायल कोर्ट के समक्ष दिए गए अपने बयान के विपरीत हलफनामा दायर किया।"इस मामले में अभियोक्ता ने अपनी FIR और CrPc की धारा 161 और 164 के तहत दर्ज बयान में अभियोजन...

Road Accident| बच्चे की मृत्यु के मामले में भविष्य की संभावनाओं के लिए कोई मुआवज़ा नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने दोहराया
Road Accident| बच्चे की मृत्यु के मामले में भविष्य की संभावनाओं के लिए कोई मुआवज़ा नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने दोहराया

राजस्थान हाईकोर्ट ने दोहराया कि मोटर वाहन दुर्घटना में बच्चे की मृत्यु के मामले में, ऐसी मृत्यु के लिए भविष्य की संभावनाओं के मद के तहत मुआवज़ा नहीं दिया जा सकता।जस्टिस नूपुर भाटी की पीठ ने राजेंद्र सिंह एवं अन्य बनाम नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के मामले पर भरोसा किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों को उनके बच्चे की मृत्यु के संबंध में दिए जाने वाले मुआवज़े को भविष्य की संभावनाओं के अलग मद के तहत और अधिक मुआवज़ा देकर बढ़ाने का तर्क खारिज कर दिया, क्योंकि यह माना गया कि जहां तक बच्चों...

जम्मू-कश्मीर PSA का इस्तेमाल CrPC के तहत स्थापित उचित प्रक्रिया को दरकिनार करने के लिए शॉर्टकट के रूप में नहीं किया जा सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर PSA का इस्तेमाल CrPC के तहत स्थापित उचित प्रक्रिया को दरकिनार करने के लिए शॉर्टकट के रूप में नहीं किया जा सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

प्रिवेंटिव डिटेंशन ऑर्डर रद्द करते हुए जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि जम्मू-कश्मीर लोक सुरक्षा अधिनियम 1978 (PSA) का इस्तेमाल दंड प्रक्रिया संहिता 1973 (CrPC) के तहत स्थापित उचित प्रक्रिया को दरकिनार करने के लिए प्रिवेंटिव डिटेंशन अधिकारियों द्वारा शॉर्टकट के रूप में नहीं किया जा सकता।हिरासत में लिए गए व्यक्ति के खिलाफ कई एफआईआर के आधार पर हिरासत आदेश के खिलाफ हेबियस कॉर्पस याचिका स्वीकार करते हुए जस्टिस राहुल भारती ने कहा,"दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 110 के तहत...

आत्महत्या का प्रयास करने वाले व्यक्ति को मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम के प्रावधानों के मद्देनजर दंडित नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
आत्महत्या का प्रयास करने वाले व्यक्ति को मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम के प्रावधानों के मद्देनजर दंडित नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने हाल ही में महिला कांस्टेबल को राहत दी, जिस पर आत्महत्या करने का मामला दर्ज किया गया था। उक्त कांस्टेबल ने तनाव में आकर यह कदम उठाया था। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 के प्रावधानों के कारण उसके कृत्य पर कार्रवाई नहीं की जा सकती।जस्टिस विभा कंकनवाड़ी और जस्टिस वृषाली जोशी की खंडपीठ ने भंडारा के लाखांदूर पुलिस स्टेशन में शीतल भगत के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 309 के तहत दर्ज की गई एफआईआर खारिज कर दी।खंडपीठ ने 5 अगस्त को सुनाए गए अपने आदेश...

पति अपने माता-पिता से अलग रहने का विकल्प चुनता है तो पत्नी द्वारा उनकी देखभाल न करना क्रूरता नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
पति अपने माता-पिता से अलग रहने का विकल्प चुनता है तो पत्नी द्वारा उनकी देखभाल न करना क्रूरता नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि जब पति अपने माता-पिता से अलग रहने का विकल्प चुनता है तो केवल अपने माता-पिता की देखभाल न करना क्रूरता नहीं है।अपीलकर्ता-पति ने मुरादाबाद के फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज द्वारा तलाक याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पति ने प्रतिवादी-पत्नी पर क्रूरता का आरोप लगाते हुए तलाक के लिए अर्जी दी, क्योंकि वह उसके माता-पिता की देखभाल नहीं कर रही थी।न्यायालय ने पाया कि कथित अपीलकर्ता ने खुद अपने माता-पिता से अलग रहने का विकल्प चुना था और चाहता था कि उसकी...

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कई मामलों में DNA प्रोफाइलिंग के परिणाम प्राप्त करने में ढिलाई का स्वतः संज्ञान लिया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कई मामलों में DNA प्रोफाइलिंग के परिणाम प्राप्त करने में ढिलाई का स्वतः संज्ञान लिया

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कई मामलों में DNA प्रोफाइलिंग के परिणाम प्राप्त करने में जांच एजेंसी द्वारा दिखाई गई सुस्त ढिलाई का स्वतः संज्ञान लिया।जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने पूछा,"क्या पंजाब, हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में राज्य और क्षेत्रीय स्तर पर पर्याप्त संख्या में फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) स्थापित की गई हैं और उनमें पर्याप्त स्टाफ़ हैं, जिससे वे केस लोड को संभाल सकें?"न्यायालय ने निम्नलिखित प्रश्न भी तैयार किए:1. क्या यात्रा में लगने वाले श्रमदिवसों को बचाने के लिए वीडियो...