हाईकोर्ट

अचानक झगड़ा हुआ, कोई पूर्व-योजना नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने गर्भवती पत्नी का गला घोंटने के लिए पति की हत्या की सजा गैर-इरादतन हत्या में बदली
'अचानक झगड़ा हुआ, कोई पूर्व-योजना नहीं': राजस्थान हाईकोर्ट ने गर्भवती पत्नी का गला घोंटने के लिए पति की हत्या की सजा गैर-इरादतन हत्या में बदली

राजस्थान हाईकोर्ट ने ऐसे व्यक्ति को रिहा करने का आदेश दिया, जो अपनी गर्भवती पत्नी की हत्या के लिए दोषी ठहराए जाने के बाद पिछले 10 वर्षों से आजीवन कारावास की सजा काट रहा था।जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण की खंडपीठ ने दोषी की अपील पर सुनवाई करते हुए दोषी का आरोप हत्या से गैर-इरादतन हत्या में बदल दिया और उसकी सजा आजीवन कारावास से घटाकर 10 वर्ष की अवधि की, जो उसने पहले ही जेल में बिताई है।न्यायालय ने पाया कि अभिलेख पर मौजूद सामग्री से यह स्पष्ट है कि अपीलकर्ता ने अपराध की...

राज्य ने कहा, बांग्लादेशियों की घुसपैठ नहीं हुई, लेकिन कुछ क्षेत्रों में जनजातीय आबादी में कमी के कारणों पर चुप्पी साधी गई: झारखंड हाईकोर्ट
राज्य ने कहा, बांग्लादेशियों की घुसपैठ नहीं हुई, लेकिन कुछ क्षेत्रों में जनजातीय आबादी में कमी के कारणों पर चुप्पी साधी गई: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को संथाल परगना क्षेत्र में जनजातीय आबादी में गिरावट के बारे में राज्य के अधिकारियों द्वारा हलफनामों में चुप्पी साधे रखने पर निराशा व्यक्त की। यह टिप्पणी क्षेत्र में बांग्लादेश से कथित अवैध अप्रवास को उजागर करने वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए पारित किए गए न्यायालय के आदेश में की गई।एक्टिंग चीफ जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ दानियाल दानिश द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें दावा किया गया कि छह जिलों - गोड्डा,...

बिना किसी कारण के जीवनसाथी को त्यागना क्रूरता, हिंदू विवाह की आत्मा और भावना की मृत्यु: इलाहाबाद हाईकोर्ट
बिना किसी कारण के जीवनसाथी को त्यागना क्रूरता, हिंदू विवाह की आत्मा और भावना की मृत्यु: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि हिंदू विवाह में बिना किसी उचित कारण के जीवनसाथी को छोड़ना उस जीवनसाथी के प्रति क्रूरता है, जिसे अकेला छोड़ दिया गया।जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस डोनाडी रमेश की पीठ ने कहा,“हिंदू विवाह संस्कार है, न कि सामाजिक अनुबंध, जहां एक साथी बिना किसी कारण या उचित कारण या मौजूदा या वैध परिस्थिति के दूसरे साथी को त्याग देता है, उस आचरण की आवश्यकता होती है, संस्कार अपनी आत्मा और भावना खो देता है। हालांकि यह अपने बाहरी रूप और शरीर को बनाए रख सकता है। इस प्रकार किसी तीसरे पक्ष...

अधिकारियों को अपनी सक्षता से बाहर जाकर आदेश पारित नहीं करने चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
अधिकारियों को अपनी सक्षता से बाहर जाकर आदेश पारित नहीं करने चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा ट्रांसफर के लिए मानदंड पूरा करने के बावजूद सहायक अध्यापक का ट्रांसफर आवेदन खारिज करने के निर्णय पर नाराजगी व्यक्त की। आवेदन को इस आधार पर खारिज किया गया था कि प्रधानाध्यापक DIOS और जिला मजिस्ट्रेट के आधिकारिक कार्य में व्यस्त थे।जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने कहा,"यह न्यायालय राज्य सरकार द्वारा निर्धारित मानदंडों को पूरा करने के बावजूद आवेदन पर विचार न करने के लिए संबंधित अधिकारी के खिलाफ नाराजगी दर्ज करता है। आवेदन इस आधार पर वापस कर दिया गया कि...

धारा 306 आईपीसी | आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप को साबि‌त करने के लिए उकसाने के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कृत्य जरूरी, केवल उत्पीड़न के आरोप पर्याप्त नहींः गुजरात हाईकोर्ट
धारा 306 आईपीसी | आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप को साबि‌त करने के लिए उकसाने के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कृत्य जरूरी, केवल उत्पीड़न के आरोप पर्याप्त नहींः गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने एक कर्मचारी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी एक फैक्ट्री सुपरवाइजर के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही और एफआईआर को रद्द कर दिया है। अदालत ने आरोपी की ओर से आत्महत्या के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उकसाने के अपर्याप्त सबूत पाए और कहा कि घटना के समय सकारात्मक कार्रवाई के बिना केवल उत्पीड़न के आरोप भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 306 के तहत दोषसिद्धि को उचित नहीं ठहराते हैं।मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस दिव्येश ए जोशी ने कहा, "यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि आत्महत्या के लिए...

आपातकालीन सेवाएं प्रभावित होंगी, पूरे महाराष्ट्र का जनजीवन ठप्प हो सकता है: एमवीए के महाराष्ट्र बंद पर बॉम्बे हाईकोर्ट
आपातकालीन सेवाएं प्रभावित होंगी, पूरे महाराष्ट्र का जनजीवन ठप्प हो सकता है: एमवीए के महाराष्ट्र बंद पर बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार (23 अगस्त) को बदलापुर में दो किंडरगार्टन लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न के विरोध में महा विकास अघाड़ी (एमवीए) गठबंधन की ओर से अह्वान किए गए 'महाराष्ट्र बंद' पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा है कि इस तरह के 'बंद' से 'मुंबई का पूरा जीवन' रुक जाएगा।चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस अमित बोरकर की खंडपीठ ने शुक्रवार शाम को अपना आदेश सुनाया, जिसके तहत उसने सभी राजनीतिक दलों और यहां तक ​​कि व्यक्तियों को राज्य में कोई भी 'बंद' करने से रोक दिया था। कोर्ट ने एमवीए...

जेएंडके हाईकोर्ट ने कहा, प्रशासन यह स्‍पष्ट करे कि आवश्यक अनुमति के बिना कार्य अनुबंध कैसे निष्पादित हुआ, ठेकेदार अनुमोदन को सत्यापित करने के लिए जिम्मेदार नहीं
जेएंडके हाईकोर्ट ने कहा, प्रशासन यह स्‍पष्ट करे कि आवश्यक अनुमति के बिना कार्य अनुबंध कैसे निष्पादित हुआ, ठेकेदार अनुमोदन को सत्यापित करने के लिए जिम्मेदार नहीं

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में दोहराया कि किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले प्रशासनिक अनुमोदन, तकनीकी अनुमति और अन्य औपचारिकताएं पूरी की गई हैं या नहीं, यह सत्यापित करना ठेकेदार की जिम्मेदारी नहीं है। जस्टिस राजेश सेखरी की पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि यदि प्रशासन ऐसा आरोप लगाता है तो यह स्पष्ट करने की जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन की है कि आवश्यक अनुमोदन और अनुमति के अभाव में कार्य कैसे किया गया।हाईकोर्ट ने ये टिप्पणियां केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के खिलाफ मेसर्स क्यूब...

नामांकन फॉर्म में मामूली अंतर या बकाया राशि का खुलासा न करना ऐसा दोष नहीं, जिससे चुनाव परिणाम प्रभावित हो: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
नामांकन फॉर्म में मामूली अंतर या बकाया राशि का खुलासा न करना ऐसा दोष नहीं, जिससे चुनाव परिणाम प्रभावित हो: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश की चुरहट सीट से कांग्रेस विधायक अजय अर्जुन सिंह के निर्वाचन के खिलाफ दायर दो याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने फैसले में कहा कि नामांकन फॉर्म में मामूली अंतर या बकाया राशि का खुलासा न करना चुनाव परिणाम को प्रभावित करने वाला "महत्वपूर्ण दोष" नहीं कहा जा सकता। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकल पीठ ने देखा कि चुनाव याचिकाओं में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों का पालन न करने का आरोप लगाया गया है। जस्टिस मिश्रा ने कहा कि यद्यपि यह इंगित करने का प्रयास किया गया...

इलाहाबाद हाईकोर्ट का निर्णय, वैक्यूम पैन चीनी कारखानों के कामगारों से संबंधित विवादों पर श्रम न्यायालय का अधिकार क्षेत्र
इलाहाबाद हाईकोर्ट का निर्णय, वैक्यूम पैन चीनी कारखानों के कामगारों से संबंधित विवादों पर श्रम न्यायालय का अधिकार क्षेत्र

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वैक्यूम पैन शुगर फैक्टरियों के कामगारों के विवादों के संबंध में उत्तर प्रदेश औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत श्रम न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को बरकरार रखा है। उल्लेखनीय है कि वैक्यूम पैन शुगर फैक्टरियों के कामगारों की कार्य स्थितियां राज्य सरकार की ओर से समय-समय पर जारी किए गए स्थायी आदेशों के तहत शासित होती हैं।चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस विकास बधवार की पीठ ने कहा, “उत्तर प्रदेश औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के प्रावधानों के तहत औद्योगिक विवाद किसान सहकारी चीनी...

आदिवासियों की घटती आबादी पर जनहित याचिका | झारखंड हाईकोर्ट ने कहा- राज्य का दावा, बांग्लादेशियों की घुसपैठ नहीं हुई, लेकिन जनजातियों की आबादी में कमी के कारणों पर चुप
आदिवासियों की घटती आबादी पर जनहित याचिका | झारखंड हाईकोर्ट ने कहा- राज्य का दावा, बांग्लादेशियों की घुसपैठ नहीं हुई, लेकिन जनजातियों की आबादी में कमी के कारणों पर चुप

झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को संथाल परगना क्षेत्र में घटती आदिवासी आबादी पर हलफनामों में राज्य अधिकारियों की चुप्पी पर निराशा व्यक्त की। बांग्लादेश से कथित अवैध अप्रवास के मुद्दे पर दायर एक जनहित याचिका पर पारित आदेश में कार्यवाहक चीफ जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने उक्त टिप्पण‌ियां कीं। जनहित याचिका दानियाल दानिश ने दायर की है, जिसमें दावा किया गया था कि छह जिलों - गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़, दुमका, साहिबगंज और देवघर (संथाल परगना क्षेत्र में) में बड़े पैमाने पर...

S.420 IPC | भविष्य में नुकसान के संदेह पर दूसरों को संपत्ति बेचना ऐसी संपत्तियों को नहीं बचा सकता, दूसरों को बर्बाद करते हुए अमीर नहीं रह सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
S.420 IPC | भविष्य में नुकसान के संदेह पर दूसरों को संपत्ति बेचना ऐसी संपत्तियों को नहीं बचा सकता, दूसरों को बर्बाद करते हुए अमीर नहीं रह सकता: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति भविष्य में संभावित नुकसान के बारे में किसी और के माध्यम से सट्टा लगाता है। उस सट्टे के परिणामस्वरूप अपनी अचल संपत्ति को अपने निकट संबंधियों को बेच देता है तो ऐसी संपत्तियों को बाद में नहीं बचाया जा सकता और विक्रेता परिणामों के लिए जिम्मेदार होगा, क्योंकि उसे दूसरों को बर्बाद करते हुए अमीर बने रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती।जस्टिस राजेंद्र प्रकाश सोनी की पीठ आईपीसी के तहत धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किए गए परिवार...

पुलिस थानों में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए अलग से शौचालय या लॉकअप उपलब्ध नहीं: पंजाब पुलिस ने हाईकोर्ट में बताया
पुलिस थानों में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए अलग से शौचालय या लॉकअप उपलब्ध नहीं: पंजाब पुलिस ने हाईकोर्ट में बताया

पंजाब पुलिस ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया कि जिला पुलिस थानों में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए अलग से लॉकअप या अलग से शौचालय उपलब्ध नहीं है।पंजाब के सहायक पुलिस महानिरीक्षक द्वारा प्रस्तुत हलफनामे में कहा गया कि फील्ड यूनिट द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार यह पता चलता है कि जिला पुलिस थानों में अलग से लॉकअप का कोई प्रावधान नहीं है। जिला पुलिस थानों में ट्रांसजेंडर के लिए अलग से शौचालय उपलब्ध नहीं है।यह घटनाक्रम तब सामने आया जब पेशे से वकील सनप्रीत सिंह ने हाईकोर्ट का रुख...

राजकोट अग्निकांड की सुनवाई करते हुए गुजरात हाईकोर्ट ने कहा, नगर निगम के अधिकारियों की जिम्मेदारी टीआरपी गेम जोन के मालिक के बराबर
राजकोट अग्निकांड की सुनवाई करते हुए गुजरात हाईकोर्ट ने कहा, नगर निगम के अधिकारियों की जिम्मेदारी टीआरपी गेम जोन के मालिक के बराबर

गुजरात हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मौखिक रूप से कहा कि यह 'अस्थायी राय' है कि राजकोट नगर निगम के संबंधित आयुक्त इस साल की शुरुआत में टीआरपी गेम जोन आग में जान गंवाने वाले प्रत्येक पीड़ित के आश्रितों को 10,000 रुपये का भुगतान करें।चीफ़ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस प्रणव त्रिवेदी की खंडपीठ 25 मई को राजकोट के नाना-मावा इलाके में लगी भीषण आग में चार बच्चों सहित सत्ताईस लोगों की मौत के बाद उच्च न्यायालय द्वारा शुरू की गई स्वत: संज्ञान याचिका सहित याचिकाओं के एक बैच पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने पतंजलि को 4 करोड़ रुपये जमा करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया, मंगलम ऑर्गेनिक्स के साथ विवाद को सुलझाने का सुझाव दिया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पतंजलि को 4 करोड़ रुपये जमा करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया, मंगलम ऑर्गेनिक्स के साथ विवाद को सुलझाने का सुझाव दिया

बंबई हाईकोर्ट ने पतंजलि समूह पर अदालत के आदेश का उल्लंघन करने के कारण सिंगल जज द्वारा लगाए गए चार करोड़ रुपये के जुर्माने को जमा करने की समयसीमा शुक्रवार को एक सप्ताह के लिए बढ़ा दी।जस्टिस अतुल चंदुरकर और जस्टिस राजेश पाटिल की खंडपीठ ने पतंजलि आयुर्वेद और मंगलम ऑर्गेनिक्स को एक साथ बैठने और ट्रेडमार्क उल्लंघन मामले में अपने विवाद को सुलझाने की कोशिश करने की सलाह दी। उन्होंने कहा, 'आप दोनों साथ बैठकर विवाद क्यों नहीं सुलझा लेते। पतंजलि और मंगलम ऑर्गेनिक्स की ओर से पेश वकील से जस्टिस पाटिल ने...

वकील जो पहले से मामले में नहीं था, वह पुनर्विचार याचिका दायर करके मामले में फिर से बहस नहीं कर सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
वकील जो पहले से मामले में नहीं था, वह पुनर्विचार याचिका दायर करके मामले में फिर से बहस नहीं कर सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि एक वकील, जो इस मामले में पहले दाखिल या बहस करने वाला वकील भी नहीं था, मामले में फिर से बहस करने के लिए मामले की समीक्षा दायर नहीं कर सकता है।अदालत ने 20,000 रुपये की अनुकरणीय लागत के साथ समीक्षा आवेदन को खारिज कर दिया और कहा कि समीक्षा दायर करने का कोई कारण नहीं था और समीक्षा याचिका दायर करके मामले में फिर से बहस नहीं की जा सकती है। जस्टिस अलका सरीन ने कहा कि वकील ने समीक्षा आवेदन की विचारणीयता पर बहस नहीं की, और न तो दाखिल करने वाले वकील और...

पति या पत्नी के भरण-पोषण के साधनों की कमी को साबित करने का भार उस पक्ष पर, जो ऐसी असमर्थता व्यक्त करता है: केरल हाईकोर्ट
पति या पत्नी के भरण-पोषण के साधनों की कमी को साबित करने का भार उस पक्ष पर, जो ऐसी असमर्थता व्यक्त करता है: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने माना कि भरण-पोषण के लिए दायर मुकदमे में यह साबित करना प्रतिवादी पर है कि उसके पास दावेदार का भरण-पोषण करने के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं। न्यायालय ने कहा कि किसी व्यक्ति के साधनों को साबित करने के लिए साक्ष्य उसके अनन्य ज्ञान के भीतर होंगे और इसलिए याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए दावे को गलत साबित करना उस पर है।जस्टिस देवन रामचंद्रन और जस्टिस एम. बी. स्नेहलता की खंडपीठ ने यह टिप्पणी फैमलीं कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ अपील पर विचार करते हुए की, जिसमें भरण-पोषण के लिए दायर मुकदमा इस आधार...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बदलापुर यौन उत्पीड़न के विरोध में राजनीतिक दलों द्वारा बुलाए गए बंद पर रोक लगाई
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बदलापुर यौन उत्पीड़न के विरोध में राजनीतिक दलों द्वारा बुलाए गए बंद पर रोक लगाई

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महा विकास अघाड़ी (MVA) को 24 अगस्त को महाराष्ट्र में राज्यव्यापी बंद बुलाने से रोक दिया।बंद का आह्वान MVA ने किया था, जो कांग्रेस, एनसीपी (शरद पवार गुट) और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) का राजनीतिक गठबंधन है। उक्त बंद का उद्देश्य ठाणे के बदलापुर में एक स्कूल में दो नाबालिग किंडरगार्टन लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न का विरोध करना है।बंद को अवैध और असंवैधानिक घोषित करने की मांग करते हुए जनहित याचिका (PIL) दायर की गई।चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस अमित बोरकर की खंडपीठ ने...

गुजरात हाईकोर्ट की चेतावनी के बाद इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स ऑफ इंडिया ने माफीनामा छापा
गुजरात हाईकोर्ट की चेतावनी के बाद इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स ऑफ इंडिया ने माफीनामा छापा

गुजरात हाईकोर्ट के निर्देश के बाद समाचार पत्रों इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स ऑफ इंडिया ने शुक्रवार को अपने अहमदाबाद एडिशन में माफीनामा प्रकाशित किया। हाईकोर्ट ने उन्हें एक आदलती मामले में जजों की टिप्पणियों को गलत तरीके से रिपोर्ट करने के लिए फटकार लगाई थी।चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस प्रणव त्रिवेदी की पीठ ने गुरुवार को माफीनामा प्रकाशित न करने की स्थिति में दोनों समाचार पत्रों के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का नोटिस जारी करने की चेतावनी दी थी। समाचार पत्रों ने आज अपने पहले पन्ने पर...

राजस्थान हाईकोर्ट ने दोहराया, “अदीब” की योग्यता कक्षा 10वीं की योग्यता के बराबर
राजस्थान हाईकोर्ट ने दोहराया, “अदीब” की योग्यता कक्षा 10वीं की योग्यता के बराबर

राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में यह दोहराते हुए कि "अदीब" के रूप में वर्णित शैक्षणिक योग्यता माध्यमिक परीक्षा (10वीं कक्षा) के समकक्ष है, एक महिला को स्वास्थ्य कार्यकर्ता (महिला) के पद पर नियुक्त करने का निर्देश दिया, जिसके लिए पात्रता मानदंड 10वीं कक्षा की योग्यता थी। जाहिदा सलमा बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य (2022) में एक समन्वय पीठ (जयपुर में) के निर्णय का हवाला देते हुए जस्टिस विनीत कुमार माथुर की एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा, "जाहिदा सलमा के मामले में जयपुर में समन्वय पीठ ने विवाद पर विस्तार से...

मुकदमा दायर करते समय पक्षकारों के अधिकारों को मुकदमेबाजी के दौरान होने वाले महत्वपूर्ण परिवर्तनों के अनुकूल होना चाहिए: जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट
मुकदमा दायर करते समय पक्षकारों के अधिकारों को मुकदमेबाजी के दौरान होने वाले महत्वपूर्ण परिवर्तनों के अनुकूल होना चाहिए: जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसला में कहा कि जबकि पक्षों के अधिकार आम तौर पर मुकदमा दायर करने के समय मौजूद परिस्थितियों से निर्धारित होते हैं, न्यायालयों को न्यायोचित परिणाम सुनिश्चित करने के लिए मुकदमेबाजी प्रक्रिया के दौरान होने वाले महत्वपूर्ण परिवर्तनों पर भी विचार करना चाहिए। यह टिप्पणी तब की गई जब हाईकोर्ट ने व्यक्तिगत आवश्यकता के आधार पर मूल रूप से दिए गए निष्कासन आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मकान मालिक की मृत्यु को एक महत्वपूर्ण घटना बताया गया जिसने निष्कासन के...