राज�थान हाईकोट
स्वास्थ्य का अधिकार: राजस्थान हाईकोर्ट ने नागरिकों, विशेषकर बच्चों में कुपोषण/मोटापे का स्वतः संज्ञान लिया
राजस्थान हाईकोर्ट ने बच्चों में कुपोषण, अस्वस्थ खान-पान की आदतों के कारण मोटापे तथा मोबाइल फोन के अत्यधिक और बढ़ते उपयोग को गंभीरता से लेते हुए इन मुद्दों का उचित समाधान खोजने के लिए स्वतः संज्ञान लिया।अदालत ने मामले को 'स्वतः संज्ञान: नाबालिग बच्चों, महिलाओं और नागरिकों को कुपोषण या मोटापे से बचाने के संबंध में दर्ज किया, जो उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है।स्थिति पर दुख व्यक्त करते हुए, न्यायालय ने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 और खाद्य सुरक्षा और मानक...
राजस्थान हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: बच्चों में मोबाइल की लत और जंक फूड पर लगे रोक, शिक्षा बोर्ड तैयार करें नया सिलेबस
राजस्थान हाईकोर्ट ने मंगलवार (1 जुलाई) को केंद्र और राज्य सरकार को सुझाव दिया कि सभी माध्यमिक शिक्षा बोर्डों को निर्देश दिए जाएं कि वे ऐसा पाठ्यक्रम तैयार करें, जो बच्चों में जंक फूड खाने की आदत को हतोत्साहित करे और मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग पर समय-सीमा निर्धारित करने का प्रावधान करे।जस्टिस अनुप कुमार ढांड ने कहा कि मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग 1 से 21 वर्ष तक की उम्र के बच्चों की शारीरिक और मानसिक सेहत पर गंभीर असर डाल रहा है। कोर्ट ने कहा कि अब सरकार, शिक्षा विभाग और अभिभावकों को जागने और...
न्यायिक फैसले रेत के टीले नहीं, जिन्हें हल्के में डगमगाया जा सके : राजस्थान हाईकोर्ट ने निष्पादित निर्णयों को दोबारा खोलने पर पक्षकारों की आलोचना की
राजस्थान हाईकोर्ट ने दोहराया कि न्यायिक निर्णयों की पहचान उनकी स्थिरता और अंतिमता है और इन्हें हल्के में अस्थिर नहीं किया जाना चाहिए।न्यायिक फैसले रेत के टीले नहीं हैं, जो हवा और मौसम की मार से बदल जाएं, जस्टिस अनुप कुमार ढांड ने यह टिप्पणी शारीरिक प्रशिक्षण अनुदेशक (Physical Training Instructor) पद पर नियुक्ति रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए की।याचिकाकर्ता ने 19 सितंबर 2022 को पात्रता परीक्षा दी थी जिसमें वह एक विषय में असफल हो गई थी और उस पेपर को पुनर्मूल्यांकन के लिए...
राजस्थान हाईकोर्ट ने PMLA मामले में गिरफ्तार व्यक्ति को सशर्त विदेश यात्रा की दी अनुमति, कहा- विदेश यात्रा का अधिकार
राजस्थान हाईकोर्ट ने PMLA मामले में गिरफ्तार एक व्यक्ति को व्यापारिक बैठकों के लिए दुबई और सिंगापुर जाने की अनुमति दी। साथ ही दोहराया है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत 'व्यक्तिगत स्वतंत्रता' की अभिव्यक्ति में विदेश जाने का अधिकार भी शामिल है।जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978) में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का उल्लेख किया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि "भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत 'व्यक्तिगत स्वतंत्रता' की अभिव्यक्ति का दायरा व्यापक है, जिसमें विदेश जाने...
बिना वजह बैंक अकाउंट को फ्रीज करना चिंता का विषय, व्यापार और व्यक्तियों पर भारी वित्तीय असर: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने जांच एजेंसियों द्वारा यांत्रिक (मैकेनिकल) तरीके से बिना उचित कारण के बैंक अकाउंट को फ्रीज किए जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की।जस्टिस मनोज कुमार गर्ग की एकल पीठ ने कहा कि यह एक बढ़ती हुई समस्या है, जिससे भारतीय व्यापारिक संस्थाओं और व्यक्तियों को गंभीर वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें याचिकाकर्ताओं ने अपने बैंक अकाउंट के फ्रीज किए जाने के विरुद्ध पहले आवेदन और फिर पुनरीक्षण याचिका दायर की थी, जो दोनों ही खारिज कर दी...
राजस्थान हाईकोर्ट ने उस कांस्टेबल को बरी किया, जिसकी निगरानी से दो विचाराधीन कैदी भाग गए थे
राजस्थान हाईकोर्ट ने धारा 223 (IPC) के तहत आरोपित एक पुलिस कांस्टेबल को बरी कर दिया। उन्हें दो विचाराधीन कैदियों के जेल से फरार होने के बाद आरोपित किया गया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, जब एक पुलिस अधिकारी को सुरक्षा के साथ-साथ वायरलेस ऑपरेशन में भाग लेने जैसे दोहरे और एक साथ काम करने की जिम्मेदारी सौंपी जाती है तो निगरानी बिना किसी गलती के हो, ऐसी अपेक्षाओं को और मैनपॉवर और बुनियादी ढांचे की व्यावहारिक सीमाओं को दूसरे के आमने-सामने रखकर देखा जाना चाहिए।धारा 223, IPC क्या है?धारा 223, IPC का...
राजस्थान हाईकोर्ट ने आपराधिक न्याय प्रणाली के सुधारात्मक दृष्टिकोण पर दिया जोर, गर्भवती पत्नी की देखभाल के लिए NDPS आरोपी को 60 दिन की अंतरिम जमानत दी
राजस्थान हाईकोर्ट ने NDPS (मादक पदार्थ कानून) मामले के आरोपी को नियमित जमानत देने से इनकार करते हुए उसकी गर्भवती पत्नी की देखभाल के लिए 60 दिन की अंतरिम जमानत प्रदान की। आरोपी की पत्नी कुछ ही दिनों में बच्चे को जन्म देने वाली है और परिवार में उसकी देखरेख और चिकित्सकीय सहायता के लिए कोई और मौजूद नहीं है।जस्टिस फर्जंद अली की एकल पीठ ने कहा कि भले ही यह आधार नियमित जमानत के लिए पर्याप्त न हो लेकिन एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए वैध व्यक्तिगत परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अस्थायी जमानत दी जा...
राजस्थान लघु खनिज नियम | राजस्थान हाईकोर्ट ने नियम 16(2) के तहत LOI के विस्तार के लिए लगाए गए जुर्माने की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा
राजस्थान लघु खनिज रियायत नियम, 2017 के नियम 16(2) के प्रावधान 3 की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि एक बार नियम को संवैधानिक और वैधानिक रूप से वैध मान लिया गया तो राज्य द्वारा इसके अनुपालन में की गई किसी भी कार्रवाई को केवल कठिनाई या असुविधा के आधार पर गलत नहीं ठहराया जा सकता। प्रावधान में जारी किए गए आशय पत्र (एलओआई) को एलओआई जारी करने की तिथि से ऐसी विस्तारित अवधि के लिए हर महीने वार्षिक डेड रेंट के 10% की दर से जुर्माना अदा करने की शर्त पर विस्तारित...
सीपीसी की धारा 47 के तहत पारित आदेश को कब डिक्री माना जा सकता है? राजस्थान हाईकोर्ट ने समझाया
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा सीपीसी की धारा 47 के तहत पारित आदेश को कब डिक्री माना जा सकता है? राजस्थान उच्च न्यायालय ने समझाया सीपीसी की धारा 47 के तहत न्यायालयों द्वारा पारित आदेशों को सीपीसी के आदेश XXI नियम 58, 97 और 99 के साथ पढ़ा जाए तो उन्हें डिक्री माना जाएगा और उन पर सीपीसी की धारा 96 के तहत अपील की जा सकती है।धारा 47 सीपीसी डिक्री निष्पादित करने वाले न्यायालय द्वारा निर्धारित किए जाने वाले प्रश्नों से संबंधित है। आदेश XXI नियम 58 संपत्ति की कुर्की के दावों या आपत्तियों के न्यायनिर्णयन से...
राजस्थान हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय जोधपुर में 25% डोमिसाइल आरक्षण को बरकरार रखा
राजस्थान हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, जोधपुर (NLUJ) में 25% अधिवास-आधारित आरक्षण की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा, और निर्णय दिया कि इस तरह का आरक्षण अनुच्छेद 14 का उल्लंघन नहीं करता है, क्योंकि वर्गीकरण उचित, गैर-मनमाना था और क्षेत्रीय शैक्षिक विकास को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से तर्कसंगत संबंध बनाए रखता है। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस चंद्र प्रकाश श्रीमाली की खंडपीठ ने कई अन्य NLU पर ध्यान दिया, जिन्होंने अपने-अपने राज्यों के आधार पर अधिवास-आधारित आरक्षण लागू किया है,...
राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला: BNSS की धारा 170 के तहत एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को सीमित रोकथाम अधिकार, दंडात्मक हिरासत नहीं दी जा सकती
राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया कि भारतीय न्याय संहिता (BNSS) की धारा 170 एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को केवल सीमित रोकथाम अधिकार प्रदान करती है। इस प्रावधान का उपयोग दंड के रूप में या आपराधिक प्रक्रिया की जगह नहीं किया जा सकता।जस्टिस फर्ज़ंद अली ने एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट द्वारा व्यक्तियों को हिरासत में लेने और जमानत देने के लिए चरित्र प्रमाण पत्र की अतिरिक्त-वैधानिक शर्त लगाने की कड़ी आलोचना की।अदालत ने टिप्पणी की कि मजिस्ट्रेट ने संवैधानिक लोकतंत्र के अंतर्गत मजिस्ट्रेट की भूमिका की...
राजस्थान हाईकोर्ट ने उम्मेद सागर बांध के जलग्रहण क्षेत्र पर अतिक्रमण पर बुलडोजर कार्रवाई में हस्तक्षेप करने से किया इनकार
राज्य सरकार की बेदखली की कार्रवाई के खिलाफ उम्मेद सागर बांध के जलग्रहण क्षेत्र के कथित अतिक्रमणकारियों द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में जस्टिस सुनील बेनीवाल की पीठ ने कहा कि जल निकाय का हिस्सा बनने वाली भूमि पर किसी भी कब्जे को नियमित नहीं किया जा सकता।याचिकाकर्ता चोपसानी जागीर के खसरा नंबर 5 पर पिछले 15 से 20 वर्षों से रह रहे थे। जिला सतर्कता समिति को सौंपी गई अतिक्रमण की शिकायत के बाद समिति ने याचिकाकर्ताओं को हटाना शुरू कर दिया।याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया...
अनिश्चित काल के लिए फैसला सुरक्षित नहीं रखा जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट ने बेदखली के डर से किरायेदार की याचिका पर अपीलीय किराया न्यायाधिकरण से कहा
राजस्थान हाईकोर्ट ने निर्णय दिया है कि अपीलीय किराया न्यायाधिकरण से अनिश्चित काल के लिए निर्णय सुरक्षित रखने की अपेक्षा नहीं की जाती है, विशेषकर तब जब उसके समक्ष किसी मामले में बहस महीनों पहले सुनी और समाप्त हो चुकी हो। जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 की धारा 19(8) के अनुसार न्यायाधिकरण को अपील का नोटिस प्रतिवादियों को दिए जाने की तिथि से एक सौ अस्सी दिन की अवधि के भीतर निपटारा करना चाहिए।प्रतिवादियों ने किराए के परिसर से बेदखल करने के लिए...
जब तक अभियोजन पक्ष प्रथम दृष्टया मामला स्थापित नहीं कर देता, तब तक लास्ट-सीन-थ्योरी लागू नहीं की जा सकती: राजस्थान हाईकोर्ट ने मौत की सजा पाए दोषियों को बरी किया
राजस्थान हाईकोर्ट ने मृत्युदंड को खारिज करते हुए तथा 4 बच्चों सहित 6 लोगों के परिवार की हत्या के आरोपी अपीलकर्ताओं को बरी करते हुए कहा कि आपराधिक मुकदमे में अंतिम बार साथ देखे जाने के साक्ष्य के महत्व को "अत्यधिक महत्व" नहीं दिया जा सकता, क्योंकि यह अपने आप में किसी आरोपी को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है। जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 के क्रियान्वयन द्वारा आरोपी पर दायित्व स्थानांतरित किए जाने से पहले, यह माना जाना...
राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम की धारा 15| जवाब के साथ हलफनामा/दस्तावेज़ प्रस्तुत करना अनिवार्य नहीं, निर्देशात्मक प्रकृति का: हाईकोर्ट ने दोहराया
राजस्थान हाईकोर्ट ने रमेश कुमार बनाम चंदू लाल व अन्य मामले में डिवीजन बेंच के निर्णय पर भरोसा जताते हुए एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 की धारा 15 अनिवार्य नहीं बल्कि निर्देशात्मक (Directory) प्रकृति की है।अधिनियम की धारा 15 के अनुसार पक्षकार को अपने जवाब के साथ हलफनामे और दस्तावेज़ दाखिल करने होते हैं।जस्टिस अनूप कुमार धंड की एकल पीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें किराया न्यायाधिकरण (Rent Tribunal) के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें याचिकाकर्ता का...
100% श्रवण हानि से पीड़ित स्टूडेंट को प्रायोगिक परीक्षा में अतिरिक्त समय और दुभाषिया उपलब्ध कराया जाए: राजस्थान हाईकोर्ट
100% श्रवण हानि से पीड़ित स्टूडेंट को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता को दो दुभाषिए उपलब्ध कराए, एक सैद्धांतिक परीक्षा की तैयारी में उसकी सहायता के लिए और दूसरा प्रायोगिक परीक्षा के समय तैयारी में सहायता के लिए।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह सैद्धांतिक और प्रायोगिक परीक्षा के दौरान याचिकाकर्ता को एक अतिरिक्त घंटा और अतिरिक्त प्रति उपलब्ध कराए।न्यायालय स्टूडेंट द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा...
AIIMS जोधपुर के अज्ञानतापूर्ण रवैये के कारण रिटायर डॉक्टरों से 'वेतन माइनस पेंशन' की राशि पूर्वव्यापी रूप से वसूल नहीं की जा सकती: राजस्थान हाईकोर्ट
AIIMS जोधपुर द्वारा "पुनः नियोजित" रिटायर डॉक्टरों द्वारा बिना किसी शर्त के उनकी नियुक्ति के आदेश जारी होने के पांच साल बाद "वेतन माइनस पेंशन" नियम लागू करने के खिलाफ दायर याचिकाओं में राजस्थान हाईकोर्ट ने अस्पताल को अपने कर्मचारियों पर लागू कानून के बारे में अज्ञानता के लिए फटकार लगाई।न्यायालय केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के आदेश के खिलाफ कुछ डॉक्टरों और AIIMS जोधपुर द्वारा दायर याचिकाओं के समूह पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें कहा गया कि याचिकाकर्ता "पुनः नियोजित" व्यक्तियों की श्रेणी में...
राजस्थान हाइकोर्ट ने उस यूनानी मेडिकल स्टूडेंट को राहत दी, जिसका एडमिशन ओपन स्कूल मार्कशीट जमा न करने के कारण रद्द हो गया था
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक छात्र को राहत प्रदान की, जिसका राजस्थान यूनानी मेडिकल कॉलेज, जयपुर में प्रोविजनल एडमिशन रद्द कर दिया गया था, क्योंकि वह राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल से जीव विज्ञान उत्तीर्ण करने की मूल मार्कशीट प्रस्तुत नहीं कर सका था। यह निर्णय दिया गया कि यदि उम्मीदवार ने मूल सीमाएं पूरी कर ली हैं, तो तकनीकी औपचारिकताओं का सख्ती से पालन करने से प्रवेश योजना का उद्देश्य कमज़ोर हो जाता है। जस्टिस समीर जैन की पीठ ने कहा कि नेशनल काउंसिल फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (NCISM) के खंड 23 और 31 की...
राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अनावश्यक पक्षकार न जोड़े जाने का मुद्दा तब तक महत्वहीन, जब तक वह अनिवार्य न हो
राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश बरकरार रखा, जिसमें प्रतिवादी द्वारा दायर संशोधन याचिका (Order 6 Rule 17 CPC के तहत) को खारिज कर दिया गया था।हाईकोर्ट ने साथ ही यह स्पष्ट किया कि मुकदमे का स्वामी वादी होता है। उसे यह निर्णय लेने का अधिकार होता है कि वह किसके खिलाफ मुकदमा दायर करना चाहता है। प्रतिवादी इस निर्णय को वादी की ओर से नहीं ले सकता।जस्टिस अरुण मोंगा की पीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान की, जो ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने के लिए दायर की गई थी।वादी ने एक संपत्ति...
राजस्थान हाईकोर्ट ने जवाई बांध वितरण मुद्दे के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों के खिलाफ FIR रद्द की, कहा- पानी उनके लिए जीवन का सवाल
जवाई बांध जल वितरण मुद्दे पर "शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन" करने वाले 50 से अधिक किसानों के खिलाफ दर्ज FIR को खारिज करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि जब किसी व्यक्ति के हित प्रभावित होते हैं तो अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने का यह मतलब नहीं है कि उसने आईपीसी और राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के तहत कथित अपराध किया है। न्यायालय उन रिट याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिनमें याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आईपीसी की धारा 117 (आम जनता या दस से अधिक व्यक्तियों द्वारा...

















