पटना हाईकोट
ब्लैकलिस्टिंग के 'कारण बताओ नोटिस' के खिलाफ कोई रिट याचिका दायर नहीं की जा सकती': पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि ब्लैकलिस्टिंग की कार्यवाही शुरू करने वाले 'कारण बताओ नोटिस' को आम तौर पर अनुच्छेद 226 के तहत चुनौती नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने इस बात को दोहराया कि जिस अधिकारी के पास अंतिम फैसला लेने की शक्ति है, वह प्रक्रिया शुरू करने के लिए भी उतना ही सक्षम है।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेंद्र सिंह की एक डिवीज़न बेंच रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में 17.03.2026 को इंजीनियर-इन-चीफ-सह-रजिस्टरिंग अथॉरिटी द्वारा जारी किए गए एक 'कारण बताओ नोटिस' को चुनौती दी गई थी। इस...
कल्याणकारी योजना के तहत आंगनवाड़ी सेविका के पद पर चयन से कोई लागू करने योग्य वैधानिक अधिकार नहीं मिलता: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजना के तहत आंगनवाड़ी सेविका के पद पर चयन या नियुक्ति से कोई लागू करने योग्य वैधानिक अधिकार नहीं मिलता। ऐसे चयन से जुड़े विवादों में आमतौर पर रिट अधिकार क्षेत्र के तहत हस्तक्षेप की ज़रूरत नहीं होती है।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेंद्र सिंह की डिवीज़न बेंच 10.02.2023 को सिंगल जज द्वारा C.W.J.C. No. 10524 of 2017 में दिए गए फैसले को चुनौती देने वाली इंट्रा-कोर्ट अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अपीलकर्ता द्वारा दायर रिट याचिका को...
'अनुकंपा नियुक्ति विशेष छूट है, किंतु देर से किए गए दावों के लिए नहीं': पटना हाईकोर्ट ने 25 साल के अंतराल के बाद अपील खारिज की
पटना हाईकोर्ट ने फिर दोहराया कि अनुकंपा नियुक्ति का मकसद तत्काल आर्थिक राहत देना है और लंबे समय बीत जाने के बाद इसका दावा नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने एक कर्मचारी के लापता होने के लगभग 25 साल बाद दायर की गई इंट्रा-कोर्ट अपील खारिज की।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेंद्र सिंह की डिवीज़न बेंच C.W.J.C. No. 6835 of 2017 में सिंगल जज द्वारा 02.09.2024 को दिए गए फैसले को चुनौती देने वाली लेटर्स पेटेंट अपील पर सुनवाई कर रही थी।यह मामला अपीलकर्ता के अनुकंपा नियुक्ति के दावे से जुड़ा था। अपीलकर्ता के...
बिहार में RTI लंबित मामलों पर सुनवाई टली, हाईकोर्ट ने कहा- मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन
पटना हाईकोर्ट ने बिहार में RTI आवेदनों और अपीलों के भारी लंबित मामलों को लेकर दायर जनहित याचिका पर फिलहाल सुनवाई टाल दी। अदालत ने कहा कि यह मुद्दा पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है।चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। याचिका में मांग की गई कि सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत तय समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने के लिए अदालत लगातार निगरानी का आदेश दे।याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि दिसंबर, 2024 तक बिहार राज्य सूचना आयोग में 28 हजार...
'भरोसे लायक दस्तावेज़ दिए बिना ब्लैकलिस्ट करना प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन': पटना हाईकोर्ट ने ठेकेदार पर लगी 2 साल की रोक हटाई
पटना हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि किसी ठेकेदार को उन दस्तावेज़ों को दिए बिना ब्लैकलिस्ट करना, जो आरोपों का आधार हैं, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। कोर्ट ने राज्य के अधिकारियों द्वारा लगाई गई दो साल की रोक हटाई।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेंद्र सिंह की डिवीज़न बेंच रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में ग्रामीण कार्य विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ द्वारा 10.12.2025 को जारी किए गए आदेश को चुनौती दी गई। इस आदेश के तहत, याचिकाकर्ता को बिहार ठेकेदार पंजीकरण नियम, 2007 के नियम 11 के...
अगर टेंडर की समय सीमा नहीं बढ़ाई जाती तो वह अपने आप खत्म हो जाता है: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि सिर्फ़ बार-बार अर्जी देने से देरी की भरपाई नहीं हो सकती या समय-सीमा नहीं बढ़ाई जा सकती> एक बार जब टेंडर की समय सीमा बिना किसी विस्तार के खत्म हो जाती है तो कॉन्ट्रैक्ट अपने आप खत्म हो जाता है, जिससे राज्य को जनहित में एक नया टेंडर जारी करने की अनुमति मिल जाती है।चीफ़ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की डिवीज़न बेंच राज्य द्वारा दायर लेटर्स पेटेंट अपील पर सुनवाई कर रही थी। इस अपील में 18.11.2024 को सिंगल जज द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें...
फेनोथियाज़ीन और प्रोमेथाज़ीन NDPS Act के तहत नहीं: पटना हाईकोर्ट ने तीन दोषियों की सजा रोकी
पटना हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि फेनोथियाज़ीन और प्रोमेथाज़ीन जैसे पदार्थ मादक या मनोप्रभावी पदार्थों की श्रेणी में नहीं आते। इनके आधार पर NDPS Act के तहत सजा देना प्रथम दृष्टया उचित नहीं प्रतीत होता। अदालत ने इसी आधार पर तीन दोषियों की सजा को निलंबित करते हुए उन्हें अपील लंबित रहने तक जमानत देने का आदेश दिया।यह मामला उन तीन आरोपियों से जुड़ा है, जिन्हें ट्रायल कोर्ट ने NDPS Act की धारा 21(ग) के तहत दोषी ठहराते हुए 15 वर्ष की सजा और डेढ़ लाख रुपये जुर्माना लगाया। आरोप है कि उनके पास से भारी...
अनिवार्य टेंडर शर्तों में ढील नहीं दी जा सकती: पटना हाईकोर्ट ने बोलीदाता की योग्यता रद्द की
पटना हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि टेंडर प्रक्रिया में निर्धारित अनिवार्य शर्तों को नजरअंदाज या शिथिल नहीं किया जा सकता। अदालत ने आवश्यक दस्तावेज जमा न करने वाले एक बोलीदाता को तकनीकी रूप से योग्य घोषित करने और उसे एल-1 घोषित करने का फैसला रद्द किया।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेन्द्र सिंह की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें ग्रामीण कार्य विभाग के एक टेंडर से जुड़े विवाद को चुनौती दी गई।याचिकाकर्ता ने आपत्ति जताई कि निजी पक्ष ने टेंडर की अनिवार्य शर्तों के तहत जरूरी “पेमेंट सर्टिफिकेट”...
टेंडर में 'मौजूदा प्रतिबद्धता' वही मानी जाएगी, जो वास्तव में लागू हों: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि टेंडर प्रक्रिया में केवल वही कार्य “मौजूदा प्रतिबद्धता” माने जाएंगे, जो वास्तव में लागू और प्रभावी हों। जिन कार्यों को पहले ही समाप्त करने का प्रस्ताव हो चुका हो, उन्हें छिपाने के आधार पर बोलीदाता को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेन्द्र सिंह की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए तकनीकी मूल्यांकन समिति द्वारा एक बोलीदाता को अयोग्य ठहराने का आदेश रद्द किया।मामला ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा सड़क और पुल निर्माण से जुड़े टेंडर से...
Bihar Prohibition Act | सुप्रीम कोर्ट ने ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट को अंतिम प्रमाण नहीं कहा: पटना हाईकोर्ट की स्पष्टता, राज्य की अपील खारिज
पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने कभी यह नहीं कहा कि ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट शराब सेवन का निर्णायक (अंतिम) प्रमाण नहीं है। साथ ही अदालत ने राज्य की अपील खारिज करते हुए पुलिस अधिकारी की बर्खास्तगी रद्द करने का आदेश बरकरार रखा।चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। मामला एक सब-इंस्पेक्टर की बर्खास्तगी से जुड़ा था, जिस पर ड्यूटी के दौरान शराब पीने का आरोप था और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई।राज्य का मामला मुख्य...
पत्नी के पुनर्विवाह के बाद विवाह समाप्त: पटना हाईकोर्ट ने डॉक्ट्रिन ऑफ फ्रस्ट्रेशन लागू कर दिया तलाक, फैमिली कोर्ट की व्याख्या को बताया 'विकृत'
पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में फैमिली कोर्ट का आदेश विकृत करार देते हुए विशेष विवाह अधिनियम के तहत हुए विवाह को समाप्त किया। अदालत ने कहा कि जब वैवाहिक संबंध का आधार ही खत्म हो जाए तो कानून को वास्तविकता स्वीकार करनी चाहिए।जस्टिस बिबेक चौधरी और जस्टिस चंद्र शेखर झा की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। मामला वर्ष 2007 में विशेष विवाह अधिनियम के तहत हुए विवाह से जुड़ा था जिसे फैमिली कोर्ट ने शुरू से ही अमान्य बताते हुए तलाक याचिका खारिज की थी।हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट की इस व्याख्या पर कड़ी आपत्ति...
पार्टियां सिंगल जज के सामने यह मान लेने के बाद कि मामला किसी बाध्यकारी मिसाल के दायरे में आता है, इंट्रा-कोर्ट अपील में उन मुद्दों को दोबारा नहीं उठा सकतीं: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया कि एक बार जब पार्टियाँ सिंगल जज के सामने यह मान लेती हैं कि कोई मुद्दा किसी बाध्यकारी मिसाल से पहले ही तय हो चुका है तो वे बाद में इंट्रा-कोर्ट अपील में उसी मुद्दे को दोबारा नहीं उठा सकतीं; कोर्ट ने इस बात को दोहराया कि किसी फैसले में दर्ज बयान पार्टियों पर बाध्यकारी होते हैं।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस राजेश कुमार वर्मा की डिवीज़न बेंच CWJC नंबर 14725/2023 में एक सिंगल जज द्वारा 08.04.2024 को पारित आदेश को चुनौती देने वाली लेटर्स पेटेंट अपील पर सुनवाई कर रही...
खांसी की दवा वाले मामलों में NDPS Act का लगातार दुरुपयोग: पटना हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, जमानत मंजूर
पटना हाईकोर्ट ने खांसी की दवा से जुड़े मामलों में NDPS Act के इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि पुलिस इस कानून का लगातार दुरुपयोग कर रही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्धारित सीमा के भीतर कोडीन युक्त कफ सिरप के मामले NDPS Act के तहत नहीं बल्कि औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम के अंतर्गत आते हैं।जस्टिस अशोक कुमार पांडेय जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें याचिकाकर्ता को मानसी थाना कांड संख्या 218/2025 में आरोपी बनाया गया। प्रारंभ में मामला बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत दर्ज हुआ...
सबूतों की समझ नहीं: पटना हाईकोर्ट ने हत्या के आरोपियों को किया बरी, ट्रायल जज की ट्रेनिंग का दिया निर्देश
पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए आरोपियों को बरी करते हुए ट्रायल कोर्ट की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि ट्रायल जज को आपराधिक मामलों में साक्ष्यों की प्रासंगिकता, स्वीकार्यता और वैधता की मूलभूत समझ तक नहीं थी।जस्टिस बिबेक चौधरी और जस्टिस चंद्र शेखर झा की खंडपीठ 22 जुलाई, 2019 के उस फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें शेखपुरा के एडिशनल सेशन जज ने आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (CrPC) की धारा 302/34 और शस्त्र अधिनियम की धारा...
बिना मंजूरी सरकारी कर्मचारी पर मुकदमा अमान्य: पटना हाईकोर्ट ने वन अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही रद्द की
पटना हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ बिना पूर्व स्वीकृति के शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही शुरुआत से ही अवैध होती है। अदालत ने वन विभाग के एक रेंज अधिकारी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की।जस्टिस जितेंद्र कुमार की एकल पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी।मामला एक शिकायत से जुड़ा था, जिसमें आरोप लगाया गया कि अधिकारी ने ट्रैक्टर रोककर मारपीट की 25 हजार रुपये की मांग की और मोबाइल छीन लिया। ट्रायल कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए समन जारी किया।याचिकाकर्ता...
'FIR में नाम आने पर सरकारी नौकरी से मना करने का एक जैसा तरीका निष्पक्षता के खिलाफ': पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि सिर्फ़ FIR पेंडिंग होने के आधार पर 'सील्ड कवर प्रक्रिया' (Sealed Cover Procedure) का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने दोहराया कि बिना जाँचे-परखे आरोपों के आधार पर नियुक्ति से मना करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत तय संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन है।जस्टिस आलोक कुमार सिन्हा की सिंगल जज बेंच उन उम्मीदवारों की एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए जारी...
'कल्पना से परे: FSL रिपोर्ट के बिना ज़ब्त चीज़ों को 'नशीला पदार्थ' कैसे मान लिया गया': पटना हाईकोर्ट ने 27 साल बाद NDPS के आरोपी को बरी किया
पटना हाईकोर्ट ने NDPS Act के तहत दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति को बरी किया। कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष कानून के मुताबिक नशीला पदार्थ बरामद होने की बात साबित करने में नाकाम रहा और अनिवार्य सुरक्षा उपायों का पालन न करने के साथ-साथ सबूतों में कमियों ने दोषसिद्धि रद्द की।जस्टिस आलोक कुमार पांडे की सिंगल बेंच, एडिशनल जिला एवं सेशन जज (तृतीय), आरा, भोजपुर द्वारा 27.12.2010 को NDPS केस नंबर 2/1998 में दिए गए फैसले के खिलाफ आपराधिक अपील पर सुनवाई कर रही थी। यह मामला शाहपुर थाना केस नंबर 7/1998 से जुड़ा...
'शक सबूत की जगह नहीं ले सकता': पटना हाईकोर्ट ने आरा कोर्ट धमाका मामले में आरोपियों को बरी किया, मौत की सज़ा रद्द की
176 पन्नों के फ़ैसले में पटना हाई कोर्ट ने आरा सिविल कोर्ट बम धमाका मामले में कई आरोपियों की सज़ा रद्द की। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष (सरकारी वकील) परिस्थितियों की कड़ी को बिना किसी उचित संदेह के साबित करने में नाकाम रहा। साथ ही यह दोहराया कि "शक, चाहे कितना भी मज़बूत क्यों न हो, सबूत की जगह नहीं ले सकता।"चीफ़ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद की डिवीज़न बेंच भोजपुर, आरा के एडिशनल सेशंस जज द्वारा चलाए गए मुक़दमे से जुड़े आपराधिक अपीलों के साथ-साथ CrPC की धारा 366 (BNSS की धारा...
पटना हाईकोर्ट ने सिविल कोर्ट भर्ती में वेटलिस्टेड उम्मीदवार को नियुक्त करने का निर्देश रद्द किया, कहा- 'खामोश बैठने वाले' समानता का दावा नहीं कर सकते
पटना हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि जो उम्मीदवार चयन पैनल के अस्तित्व में रहने के दौरान अपने अधिकारों का दावा करने में विफल रहते हैं, वे बाद में उन दूसरों के साथ समानता की मांग नहीं कर सकते, जिन्होंने समय पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने दोहराया कि रिट राहत में देरी और लापरवाही के कारण रोक है और अनुच्छेद 14 "नकारात्मक समानता" के आधार पर लाभों के विस्तार की अनुमति नहीं देता।चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस आलोक कुमार सिन्हा की एक खंडपीठ (Division Bench) C.W.J.C. संख्या 10521/2022 में एक...
साक्ष्यों में विरोधाभास, मेडिकल प्रमाण नहीं: पटना हाइकोर्ट ने POCSO मामले में दोषसिद्धि रद्द की
पटना हाइकोर्ट ने अहम फैसले में अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दी गई सजा रद्द की।अदालत ने कहा कि पीड़िता के बयानों में गंभीर विरोधाभास, मेडिकल साक्ष्य का अभाव और स्वतंत्र पुष्टि न होने के कारण अभियोजन का मामला विश्वसनीय नहीं ठहरता।जस्टिस बिबेक चौधुरी और जस्टिस डॉ. अंशुमान की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि ऐसे असंगत और अप्रमाणित साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि कायम नहीं रह सकती।अदालत ने माना कि यौन अपराध के मामलों में पीड़िता की गवाही महत्वपूर्ण होती है लेकिन इस मामले में उसके बयान...












