ताज़ा खबरे
सार्वजनिक परीक्षा में अन्य उम्मीदवारों के अंकों का खुलासा जनहित में RTI के तहत किया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश बरकरार रखा, जिसमें यह कहा गया कि सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act) के तहत सार्वजनिक परीक्षा में अन्य उम्मीदवारों द्वारा प्राप्त अंकों का खुलासा करने के अनुरोध को जनहित में अस्वीकार नहीं किया जा सकता।11 नवंबर, 2024 को रिट याचिका में पारित आदेश द्वारा हाईकोर्ट ने RTI Act के तहत जिला कोर्ट, पुणे में जूनियर क्लर्क के पद पर भर्ती में खुद सहित अन्य उम्मीदवारों द्वारा प्राप्त अंकों का खुलासा करने की मांग करने वाली प्रतिवादी की याचिका स्वीकार की थी।हाईकोर्ट...
क्या BNSS की धारा 223(1) का पहला प्रावधान NI Act की धारा 138 के तहत अपराध पर लागू होता है?
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 ('संहिता') की धारा 200 से 203 "मजिस्ट्रेट को शिकायत" से संबंधित हैं। इन प्रावधानों को अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 ('बीएनएसएस') की धारा 223 से 226 द्वारा प्रतिस्थापित किया गया।विवादास्पद प्रावधानबीएनएसएस की धारा 223(1) में कहा गया है कि, शिकायत पर अपराध का संज्ञान लेते समय अधिकार क्षेत्र रखने वाला मजिस्ट्रेट शिकायतकर्ता और उपस्थित गवाहों, यदि कोई हो, की शपथ पर जांच करेगा और ऐसी जांच का सार लिखित रूप में दर्ज किया जाएगा और उस पर शिकायतकर्ता और गवाहों के साथ-साथ...
Transfer Of Property में लीज का अंतरण
लीज़ का सम्व्यवहार एक ऐसा संव्यवहार है जिसमें अन्तरण आंशिक होता है, आत्यंतिक नहीं। दूसरे शब्दों में सम्पत्ति पर अन्तरक एवं अन्तरिती दोनों का हो अधिकार होता है। दोनों में फर्क यह होता है कि सम्पत्ति का भौतिक कब्जा अन्तरितों के पास होता है जबकि स्वामित्वाधिकार अन्तरक के पास ही रहता है। सम्पत्ति का उपभोग, लीज़ की अवधि के दौरान अन्तरिती या लीज़ग्रहीता करता है जबकि अन्तरक अथवा लीज़कर्ता तद् कालावधि में लीज़ के उपयोग के अधिकार से वंचित रहता है। इस प्रकार के संव्यवहार के लिए इंग्लिश विधि में डिमाइस' शब्द का...
Transfer Of Property में लीज का पीरियड
पीरियड पट्टे का एक महत्वपूर्ण घटक है। शाश्वतता के लिए लीज़ का सृजन एक निश्चित कालावधि हेतु किया गया। यह कालावधि प्रत्यक्षतः या परोक्षतः निर्धारित होगी। लीज़ के प्रारम्भ होने की तिथि साधारणतया लीज़कर्ता एवं लीज़ग्रहीता द्वारा आपसी करार के माध्यम से निर्धारित की जाती है,लेकिन यदि किसी कारणवश या उदासीनता के फलस्वरूप तिथि का निर्धारण नहीं हुआ है जिससे लीज़ का प्रारम्भ हुआ माना जा सके, तो इस अधिनियम की धारा 110 के अन्तर्गत लीज़ निष्पादन की तिथि से प्रारम्भ हुआ माना जाएगा। परन्तु यह नियम निष्पाद्य मामलों...
गंभीर अपराधों के निपटारे के लिए समझौता मान्य नहीं, कानून में कोई मंजूरी नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा है कि एक अपराधी और पीड़ित के बीच समझौते के आधार पर आपराधिक कार्यवाही को रद्द करना अपराध को कंपाउंडिंग करने के समान नहीं है।जस्टिस विनोद चटर्जी कौल की पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि हत्या, बलात्कार, डकैती और विशेष कानूनों के तहत नैतिक कदाचार के अपराधों जैसे गंभीर अपराधों को केवल इसलिए रद्द नहीं किया जा सकता क्योंकि आरोपी और पीड़ित के बीच समझौता हो गया है। अदालत ने टिप्पणी की, "अपराधी और पीड़ित के बीच समझौते के आधार पर अपराध या आपराधिक कार्यवाही को रद्द करना...
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने विकलांग व्यक्ति के लिए मुआवजा बरकरार रखा, कहा- बिना मुआवजे आपराधिक न्याय होगा 'खोखला'
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने माना है कि राज्य की कार्रवाई के कारण नागरिक की स्थायी विकलांगता उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है और राज्य द्वारा पूरी तरह से मुआवजा दिया जाना चाहिए।अदालत ने यह भी माना कि जब नोटिस की तामील सही पते पर की जाती है, तो पता लगाने वाले को उक्त नोटिस का ज्ञान माना जाता है। इसलिए, अदालत ने याचिकाकर्ता की ओर से नोटिस को मान लिया और एकपक्षीय डिक्री को रद्द करने से इनकार कर दिया जिसमें कहा गया था कि मुआवजे का निर्देश दिया गया था। यह नोट किया गया कि ट्रायल कोर्ट ने एसएसपी,...
सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (10 फरवरी, 2025 से 14 फरवरी, 2025 तक) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।'कार्यकारी नियम बनाने वाले प्राधिकरण पर 'कार्यकारी पद' का सिद्धांत लागू नहीं होता : सुप्रीम कोर्ट 12 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 'कार्यकारी पद' का सिद्धांत नियम बनाने वाले प्राधिकरण पर लागू नहीं होता और यह न्यायिक मंच या अर्ध-न्यायिक प्राधिकरण पर लागू होता है। कोर्ट ने कहा कि इस बात पर विवाद...
राजस्थान हाईकोर्ट ने बिना वेतन काम करवाने को बताया 'बेगार', राज्य सरकार को लगाई फटकार
राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है कि किसी भी कर्मचारी को बिना किसी औचित्य के उनके वेतन से वंचित करना भारत के संविधान के अनुच्छेद 21, 23 और 300-A के तहत उल्लंघन है।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ एक सार्वजनिक कर्मचारी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसे राज्य को अपनी सेवाएं प्रदान करने के बावजूद बिना किसी औचित्य के लगभग 97 महीनों से 2016 से अपना वेतन नहीं दिया गया था। याचिका में कहा गया है कि "किसी कर्मचारी को वेतन का भुगतान नहीं करना उसे उसकी आजीविका से वंचित करने के बराबर है।...
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (10 फरवरी, 2025 से 14 फरवरी, 2024) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।विशेष रिसीवर अदालत का 'एजेंट', अदालती आदेशों के क्रियान्वयन के लिए पुलिस द्वारा उसे तत्काल सहायता दी जानी चाहिए: बॉम्बे हाईकोर्ट बॉम्बे हाईकोर्ट ने आईपीआर मुकदमे के संबंध में अतिरिक्त विशेष रिसीवर (जो न्यायालय रिसीवर को रिपोर्ट करते हैं) को सहायता प्रदान करने में पुलिस अधिकारियों की विफलता के मुद्दे...
न्यायालय को कार्यवाही प्रक्रिया के दुरुपयोग होने का संदेह होने पर कोर्ट न आ सकने वाले अभियुक्त भी लाभ पाने के हकदार: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि जो अभियुक्त न्यायालय में नहीं जा सकते, वे भी लाभ पाने के हकदार हैं, जब न्यायालय को लगता है कि कार्यवाही प्रक्रिया का दुरुपयोग होगी। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने 23 वर्षों से लम्बित वन संरक्षण अधिनियम, 1980 और राजस्थान वन अधिनियम, 1953 के तहत चल रहे आपराधिक मामलों को रद्द कर दिया।यह मामला 2001 में बिना अनुमति के सड़क निर्माण के दौरान पेड़ों की अवैध कटाई से जुड़ा था।मामले की पृष्ठभूमि30 अगस्त 2002 को भादरा क्षेत्रीय वन अधिकारी ने 17 लोगों के खिलाफ...
भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899: स्टांप ड्यूटी का भुगतान और Adhesive Stamps का उपयोग
स्टांप ड्यूटी (Stamp Duty) एक प्रकार का कर (Tax) है जो विभिन्न दस्तावेज़ों (Documents) पर लगाया जाता है ताकि उन्हें कानूनी मान्यता (Legal Validity) मिले। भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 (Indian Stamp Act, 1899) इस कर की वसूली और उपयोग को नियंत्रित करता है।अधिनियम (Act) के भाग "B – स्टांप और उनके उपयोग की विधि" (B – Of Stamps and the Mode of Using Them) में यह बताया गया है कि स्टांप ड्यूटी का भुगतान कैसे किया जाए, किन दस्तावेजों पर चिपकाने योग्य स्टांप (Adhesive Stamps) का उपयोग किया जा सकता है, और...
हिमाचल प्रदेश अर्बन रेंट कंट्रोल एक्ट, 1987 के अंतर्गत मानक किराए और उसकी समय-समय पर समीक्षा
हिमाचल प्रदेश अर्बन रेंट कंट्रोल अधिनियम, 1987 (Himachal Pradesh Urban Rent Control Act, 1987) किरायेदारी (Tenancy) से जुड़े विभिन्न पहलुओं को नियंत्रित करता है। इसमें मकान मालिक (Landlord) और किरायेदार (Tenant) के अधिकार और कर्तव्य तय किए गए हैं।इस अधिनियम की धारा 4 (Section 4) और धारा 5 (Section 5) मानक किराए (Standard Rent) के निर्धारण और उसकी समय-समय पर समीक्षा (Revision) से संबंधित हैं। इन प्रावधानों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मकान मालिक को संपत्ति का उचित किराया मिले और साथ...
संविधान के अनुच्छेद 21 और धारा 313 CrPC के तहत निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने जय प्रकाश तिवारी बनाम मध्य प्रदेश राज्य (2022) मामले में निष्पक्ष सुनवाई (Fair Trial) और धारा 313 दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के महत्व पर विचार किया। यह धारा आरोपी को मौका देती है कि वह अपने खिलाफ पेश किए गए सबूतों (Evidence) पर सफाई दे सके।इस फैसले में न्यायालय ने जांच की कि क्या इस कानूनी प्रक्रिया का सही से पालन न करने से आरोपी को नुकसान (Prejudice) हुआ। यह लेख इस केस में उठाए गए प्रमुख कानूनी मुद्दों पर चर्चा करेगा, खासकर धारा 313 CrPC की भूमिका पर, जो कि न्याय दिलाने के लिए...
जब न्यायिक अधिकारी पर्याप्त कठोर दंड नहीं दे सकता, तब अपनाई जाने वाली प्रक्रिया : धारा 364, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) का उद्देश्य देश की आपराधिक न्याय प्रणाली (Criminal Justice System) को अधिक प्रभावी और न्यायसंगत बनाना है।इस संहिता की धारा 364 उन मामलों से संबंधित है, जहाँ किसी Magistrate (न्यायिक अधिकारी) को यह महसूस होता है कि अपराध (Offense) के लिए जो सजा (Punishment) आवश्यक है, वह उसकी अधिकार सीमा (Jurisdiction) से अधिक है। ऐसे मामलों में, यह धारा एक स्पष्ट प्रक्रिया प्रदान करती है, जिसके तहत मामला Chief Judicial Magistrate...
विशेष रिसीवर अदालत का 'एजेंट', अदालती आदेशों के क्रियान्वयन के लिए पुलिस द्वारा उसे तत्काल सहायता दी जानी चाहिए: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने आईपीआर मुकदमे के संबंध में अतिरिक्त विशेष रिसीवर (जो न्यायालय रिसीवर को रिपोर्ट करते हैं) को सहायता प्रदान करने में पुलिस अधिकारियों की विफलता के मुद्दे को उठाया, यह देखते हुए कि वे न्यायालय के एजेंट हैं जो एकपक्षीय अंतरिम आदेशों को निष्पादित करते हैं और इसलिए उन्हें पुलिस तंत्र द्वारा तत्काल प्रभावी सहायता दी जानी चाहिए। ऐसे मामलों में पुलिस सहायता प्रदान करने की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए, जस्टिस मनीष पिताले ने कहा, "यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि न्यायालय रिसीवर को रिपोर्ट...
भारत के बाहर उपयोग की अनुमति देने के लिए फोन के 'रिजनल लॉक' को अक्षम करना उसे 'प्रयुक्त माल' नहीं बनाता, जो शुल्क कटौती के लिए अयोग्य: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि मूल उपकरण निर्माताओं द्वारा किसी विशिष्ट भौगोलिक स्थान तक उपयोग को सीमित करने के लिए लगाए गए "रिजनल लॉक" को अक्षम करके केवल एक नए मोबाइल फोन को अनलॉक/सक्रिय करने से मोबाइल फोन "प्रयुक्त" वस्तु नहीं बन जाता है। इस प्रकार जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस धर्मेश शर्मा की खंडपीठ ने माना कि ऐसे मोबाइल फोन के निर्यातक भी शुल्क वापसी का दावा करने के पात्र होंगे।शुल्क वापसी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आयातकों द्वारा भुगतान किया गया सीमा शुल्क या स्थानीय निर्माताओं...
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को ई-जेल प्रोजेक्ट पर एमिक्स क्यूरी के सुझावों को लागू करने का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में राज्य सरकारों को ई-जेल प्रोजेक्ट पर एमिकस क्यूरी देवांश ए. मोहता की ओर प्रस्तुत सुझावों के कार्यान्वयन के लिए कदम उठाने और इस संबंध में एक महीने के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। प्रस्तुत सुझाव निम्नलिखित से संबंधित हैं:(i) पीटीएन (प्री-ट्रायल नंबर) का प्रकाशन; (ii) सीएनआर (केस नंबर रिकॉर्ड) और पीआईडी/जेल आईडी का संकलन; (iii) जेल अधिकारियों द्वारा सीएनआर के बिना मामलों की ट्रैकिंग; (iv) गैर-पुलिस मामलों को शामिल करने के लिए डेटाबेस का संवर्धन/विस्तार;...
क्या NCPCR मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत बच्चों के अवैध धर्मांतरण के खिलाफ शिकायत दर्ज कर सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने सवाल खुला छोड़ा
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ओर से व्यक्त किए गए इस दृष्टिकोण पर आपत्ति जताई कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) मध्य प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 के तहत शिकायत दर्ज नहीं कर सकता है, जब तक कि किसी व्यक्ति (या उनके माता-पिता/भाई-बहन) द्वारा अवैध रूप से धर्म परिवर्तन की शिकायत न की गई हो, जिसका अवैध रूप से धर्म परिवर्तन किया गया हो। हालांकि, कोर्ट ने इस मुद्दे पर अंतिम रूप से कुछ नहीं कहा और इसे खुला रखा। कोर्ट ने निर्देश दिया कि हाईकोर्ट की टिप्पणियों...
'प्रदर्शन के मानदंड' के आधार पर नवीनीकृत होने वाले अनुबंध को मानदंड पूरा होने के बाद एकतरफा नवीनीकृत माना जाता है, इसे समाप्त नहीं किया जा सकता: जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट ने माना कि जहां अनुबंध का नवीनीकरण प्रदर्शन के मानदंडों पर आधारित है, यदि उक्त मानदंडों को पूरा किया जाता है, तो अनुबंध को विस्तारित माना जाता है। कोर्ट ने यह भी माना कि न्यायालय मध्यस्थ द्वारा दी गई व्याख्या में हस्तक्षेप नहीं कर सकते हैं यदि वह उचित है और तर्क के विपरीत नहीं है। इस मामले में, मध्यस्थ को समझौते के उल्लंघन की वैधता का निर्धारण समझौते के खंड की व्याख्या करके करना था, जिसमें कहा गया था कि "यदि बिक्री संतोषजनक रही, तो पक्षों के बीच समझौता पहले पांच...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने POCSO मामले में जमानत दी, कहा 25 वर्षीय आरोपी कोई 'शिकारी' नहीं बल्कि 16 वर्षीय किशोरी के साथ सहमति से संबंध बनाने वाला 'युवक'
बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार (13 फरवरी) को 16 साल की नाबालिग लड़की से 15 महीने तक बलात्कार करने और उसे दो बार गर्भवती करने के आरोप में गिरफ्तार 25 वर्षीय व्यक्ति को जमानत देते हुए कहा कि वह कोई 'यौन शिकारी' नहीं बल्कि एक युवा है, जो लड़की के साथ सहमति से संबंध में शामिल था। सिंगल जज जस्टिस मिलिंद जाधव ने लड़की के बयानों से नोट किया कि उसका आवेदक- मोहम्मद अजान खान के साथ प्रेम संबंध था, जिसे अप्रैल 2024 में लड़की के पिता द्वारा बलात्कार के आरोपों और कड़े यौन अपराधों से बच्चों की रोकथाम (POCSO)...




















