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पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना पीड़ित को मुआवजे के तौर पर 1.3 करोड़ रुपये दिए, कहा- 'पीड़ित 20 साल से अधिक समय से मुआवजे से वंचित, देरी के लिए हमारी व्यवस्था जिम्मेदार'
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना के एक पीड़ित को 1.3 करोड़ रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। कोर्ट ने उसे मुआवजा प्रदान करने में हुए विलंब के लिए न्यायिक प्रणाली को "जिम्मेदार" माना, कहा कि न्यायिक प्रणाली को आत्म-मूल्यांकन की आवश्यकता है। पीड़ित व्यक्ति को सड़क दुर्घटना में पेल्विक फ्रैक्चर यूरिथ्रल इंजरी हुई थी, जिसके कारण वह स्थायी रूप से विकलांग हो गया। हालांकि उसे "उचित मुआवजा" तय करने में 24 साल का समय लिया, जिसके मद्देनजर हाईकोर्ट उसके मुआवजे में बढ़ोतरी का फैसला किया।...
सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद विध्वंस पर अवमानना याचिका में यूपी अधिकारियों को नोटिस जारी किया; आगे की तोड़फोड़ पर रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के अधिकारियों के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें 13 नवंबर, 2024 के फैसले का कथित उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया, जिसमें बिना किसी पूर्व सूचना और सुनवाई के अवसर के देश भर में विध्वंस की कार्रवाई पर रोक लगाई गई थी।जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की खंडपीठ ने आदेश पारित करते हुए कहा,"यह प्रस्तुत किया गया कि विचाराधीन संरचना याचिकाकर्ताओं के स्वामित्व वाली निजी भूमि पर बनाई गई थी। उस पर निर्माण भी 1999 के स्वीकृति आदेश के अनुसार नगर निगम...
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के एडिशनल एडवोकेट जनरल के खिलाफ हाईकोर्ट की टिप्पणियों पर रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के एडिशनल एडवोकेट जनरल के खिलाफ पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा की गई प्रतिकूल टिप्पणियों पर रोक लगा दी, जिसमें विचाराधीन कैदी की जमानत याचिका के लंबित रहने के दौरान मौत हो गई थी।जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने हरियाणा राज्य द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका पर अंतरिम आदेश पारित किया।अदालत ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले मामले में पेश हुए एडिशनल एडवोकेट जनरल के संबंध में हाईकोर्ट द्वारा की गई सभी टिप्पणियों पर...
Yati Narsinghanand Case | मैंने अपने पेशेवर दायित्व के तहत 'X' पर पोस्ट किया, BNS/IPC के तहत कोई अपराध नहीं हुआ: हाईकोर्ट में बोले मोहम्मद जुबैर
यति नरसिंहानंद के 'अपमानजनक' भाषण पर कथित एक्स पोस्ट को लेकर ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ गाजियाबाद पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR को चुनौती देते हुए उनके वकील ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया कि जुबैर ने तथ्य जांचकर्ता के रूप में अपने पेशेवर दायित्व के तहत पोस्ट किए। इस तरह के पोस्ट भारतीय न्याय संहिता या भारतीय दंड संहिता के तहत किसी भी अपराध के अंतर्गत नहीं आते हैं।जुबैर के लिए दलील देते हुए सीनियर एडवोकेट दिलीप कुमार ने जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस योगेंद्र...
जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट ने महिलाओं के नाम के आगे "तलाकशुदा" शब्द के इस्तेमाल के खिलाफ चेतावनी दी, कहा कि ऐसी याचिकाएं पंजीकृत नहीं होंगी
जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट ने वकीलों/वादियों को निर्देश दिया कि वे अदालती कार्यवाही में किसी भी याचिका या आवेदन में महिलाओं के नाम के खिलाफ "तलाकशुदा" शब्द का इस्तेमाल न करें। न्यायालय ने यह भी चेतावनी दी कि यदि कोई याचिका या आवेदन इस तरह की अभिव्यक्ति का उल्लेख करता है, तो उसे पंजीकृत/डायरी नहीं किया जाएगा। न्यायालय ने कहा कि यदि किसी महिला को "तलाकशुदा" के रूप में लेबल किया जाता है और दिखाया जाता है, जैसे कि यह उसका उपनाम या जाति हो, तो अपनी पत्नी को तलाक देने वाले पुरुष को भी "तलाकशुदा" कहा...
गुजरात हाईकोर्ट ने सीनियर जर्नालिस्ट महेश लंगा की FIR रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज की
गुजरात हाईकोर्ट ने सोमवार (17 फरवरी) को पत्रकार महेश लंगा की याचिका खारिज की, जिसमें गांधीनगर पुलिस द्वारा उनके खिलाफ कथित भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और चोरी के आरोप में दर्ज FIR रद्द करने की मांग की गई थी, जिसमें उन पर अत्यधिक गोपनीय सरकारी दस्तावेज हासिल करने का आरोप है।जस्टिस दिव्येश ए जोशी ने आदेश सुनाते हुए कहा आवेदन खारिज किया जाता है।FIR BNS धारा 316(5), 303(2), 306, 61(2) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7(ए), 8, 12, 13(1)(ए), 13(2) के तहत दर्ज की गई।गुरुवार को सुनवाई के दौरान लंगा...
'लंबे समय तक जेल में रहने से विचाराधीन कैदियों का मानसिक स्वास्थ्य खराब हो सकता है, नशीली दवाओं का सेवन बढ़ सकता है': बॉम्बे हाईकोर्ट ने 9 साल से अधिक समय से जेल में बंद हत्या के आरोपी को जमानत दी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार (14 फरवरी) को जेल में नौ साल से अधिक समय बिताने वाले एक व्यक्ति को जमानत देते हुए, किसी व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर लंबे समय तक कारावास के कारण होने वाले दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभावों पर जोर दिया। जस्टिस मिलिंद जाधव ने कहा कि आवेदक गणेश मेंडारकर ने हत्या के आरोप में नौ साल और पच्चीस दिन जेल में बिताए, जबकि मामले में सह-आरोपी पहले से ही जमानत पर बाहर थे।जस्टिस माधव ने आदेश में कहा,"लंबे समय तक कारावास के दौरान कारावास-पश्चात सिंड्रोम की स्थिति पैदा हो...
गलत तरीके से बर्खास्तगी के खिलाफ कुछ मामलों में पिछले वेतन के साथ बहाली की तुलना में एकमुश्त मुआवजा बेहतर उपाय हो सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कुछ मामलों में गलत तरीके से बर्खास्तगी के मामले में पिछले वेतन के साथ बहाली की तुलना में एकमुश्त मुआवजा देना अधिक उचित उपाय हो सकता है। ऐसे मुआवजे का निर्देश देते समय अदालतों को कर्मचारी और नियोक्ता के हितों को ध्यान में रखते हुए अपने दृष्टिकोण को उचित ठहराना आवश्यक है।दीपाली गुंडू सुरवासे बनाम क्रांति जूनियर अध्यापक महाविद्यालय, (2013) 10 एससीसी 324 सहित कई मामलों पर भरोसा करते हुए कोर्ट ने कहा कि बर्खास्त कर्मचारी को पिछले वेतन का भुगतान करने का आदेश देना स्वतः राहत...
सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में दोषियों की समयपूर्व रिहाई के लिए नीति पर निर्णय लेने के लिए केंद्र को समय दिया
जिस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को दोषियों की समयपूर्व रिहाई के लिए नीति बनाने के लिए कहा था, उस मामले में केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने एक रिपोर्ट दाखिल की, जिसे ध्यान में रखते हुए केंद्र को उचित निर्णय लेने के लिए आज 4 सप्ताह का समय दिया गया।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की और आदेश पारित करते हुए कहा,"ए़डिशनल सॉलिसिटर जनरल ने केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन से प्राप्त रिपोर्ट के संदर्भ में उचित निर्णय लेने के लिए 4 सप्ताह का समय मांगा...
राजस्थान हाईकोर्ट ने पिता के आपराधिक मामले में धन ट्रांसफर पर बेटी के खिलाफ दर्ज FIR रद्द की
राजस्थान हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी के मामले में आरोपी बेटी (याचिकाकर्ता) के खिलाफ दर्ज FIR इस तथ्य के आधार पर खारिज की कि उसने अपने पिता से कुछ पैसे प्राप्त किए, जो कथित तौर पर शिकायतकर्ता से बेईमानी से प्रलोभन के तहत प्राप्त किए गए, जिसके साथ उसने बिक्री के लिए समझौता किया था।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने माना कि प्रतिनिधि दायित्व का नियम यहां लागू नहीं होता, न ही याचिकाकर्ता द्वारा अपने पिता के साथ आपराधिक साजिश का कोई आरोप था। FIR या शिकायतकर्ता के बयान में भी उस पर आरोप नहीं लगाया गया।FIR के अनुसार...
मुख्य गवाह मुकर जाने पर अपुष्ट विशेषज्ञ साक्ष्य दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त नहीं होते: राजस्थान हाईकोर्ट ने POCSO मामले में बरी करने का फैसला बरकरार रखा
एक POCSO मामले में निचली अदालत द्वारा व्यक्ति को बरी करने का फैसला बरकरार रखते हुए राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने कहा कि ऐसे मामलों में जहां पीड़ित, शिकायतकर्ता या मुख्य गवाह मुकर जाते हैं या अभियोजन पक्ष की कहानी का समर्थन करने में विफल हो जाते हैं तो बिना किसी सहायक गवाही के केवल विशेषज्ञ/वैज्ञानिक साक्ष्य के आधार पर दोषसिद्धि नहीं की जा सकती।जस्टिस अरुण मोंगा ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने "केवल लेकिन बहुत हद तक DNA और फोरेंसिक रिपोर्ट जैसे वैज्ञानिक साक्ष्यों पर भरोसा किया।भारतीय साक्ष्य...
अन्य व्यक्ति के आरोपों का प्रभावी ढंग से बचाव नहीं कर सकने पर दोषी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके खिलाफ कार्यवाही समाप्त की गई: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि दोषी कर्मचारी ही एकमात्र व्यक्ति है जो राज्य द्वारा उसके खिलाफ शुरू की गई विभागीय कार्यवाही में अपना बचाव उचित तरीके से कर सकता है और कार्यवाही के दौरान ऐसे दोषी कर्मचारी की मृत्यु के बाद जांच जारी नहीं रह सकती है और कार्यवाही समाप्त कर दी जाती है।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ एक कर्मचारी के खिलाफ दायर आरोप पत्र और परिणामी कार्यवाही के खिलाफ याचिका पर सुनवाई कर रही थी। न्यायालय को इस तथ्य से अवगत कराया गया कि दोषी कर्मचारी की कार्यवाही के दौरान ही मृत्यु हो...
Constable Recruitment| हरियाणा सरकार चयन के दूसरे चरण में पिछड़ा वर्ग का नया प्रमाण पत्र नहीं मांग सकती: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि हरियाणा कर्मचारी सेवा आयोग (HSSC) चयन प्रक्रिया के दूसरे चरण में पिछड़ा वर्ग (BC) का नवीनतम प्रमाण पत्र नहीं मांग सकता है, जबकि प्रमाण पत्र सामान्य पात्रता परीक्षा (CET) के समय दाखिल किया जाता है।जस्टिस जगमोहन बंसल ने कहा,"नियमों या विज्ञापन में विशेष तिथि के अभाव में विज्ञापित पद के लिए आवेदन दाखिल करने की निर्धारित अंतिम तिथि कट-ऑफ तिथि है। इस मामले में सीमित उद्देश्य यानी दस्तावेज अपलोड करने के लिए कट-ऑफ तिथि आवेदन दाखिल करने की अधिसूचित अंतिम...
प्रयागराज 'पुलिस हमला': इलाहाबाद HCBA ने वकीलों के खिलाफ 'अत्याचार' का ब्यौरा देते हुए हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल किया; राज्य को जवाब देना होगा
4 फरवरी को प्रयागराज में वकीलों पर 'हमला' करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग करने वाली आपराधिक रिट जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (HCBA) ने पुलिसकर्मियों द्वारा किए गए अत्याचारों को उजागर करते हुए हाईकोर्ट के समक्ष पूरक हलफनामा और पेन-ड्राइव दाखिल किया।हाईकोर्ट के पिछले आदेश के अनुसार, संबंधित संभागीय आयुक्त, मेला अधिकारी, पुलिस आयुक्त, जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस उपायुक्त (यातायात) ने भी अपने-अपने हलफनामे दाखिल किए, जिन्हें जस्टिस...
अभियुक्त को विचाराधीन कैदी के रूप में 6-7 वर्ष जेल में रहने के पश्चात अंतिम निर्णय प्राप्त होने का अर्थ है कि त्वरित सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन हुआ: सुप्रीम कोर्ट
"चाहे कोई भी अपराध कितना भी गंभीर क्यों न हो, अभियुक्त को संविधान के अनुच्छेद 21 के अनुसार त्वरित सुनवाई का मौलिक अधिकार है," सुप्रीम कोर्ट ने UAPA के तहत आरोपी अभियुक्त को जमानत देते हुए कहा, जो पांच वर्ष से अधिक समय से हिरासत में है।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की खंडपीठ ने छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा नक्सली गतिविधियों से संबंधित सामान्य रूप से उपयोग किए जाने वाले सामान ले जाने के आरोप में गिरफ्तार किए गए अभियुक्त को जमानत प्रदान की। अभियुक्त वर्ष 2020 से हिरासत में है तथा अभियोजन...
अनुकंपा नियुक्ति से संबंधित 26 सिद्धांत: सुप्रीम कोर्ट ने समझाया
सुप्रीम कोर्ट ( जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस पीके मिश्रा की पीठ) ने अनुकंपा नियुक्ति से संबंधित सिद्धांतों का सारांश दिया।1) अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति, जो मानवीय आधार पर दी जाती है, सार्वजनिक रोजगार के मामले में समानता के नियम का अपवाद है [देखें महाप्रबंधक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बनाम अंजू जैन (2008) 8 SCC 475]2) नियमों या निर्देशों के अभाव में अनुकंपा नियुक्ति नहीं की जा सकती [देखें हरियाणा राज्य विद्युत बोर्ड बनाम कृष्णा देवी (2002) 10 SCC 246]3) अनुकंपा नियुक्ति आम तौर पर दो आकस्मिकताओं में...
सिद्धू मूसेवाला पर किताब लिखने वाले लेखक को मानहानि मामले में मिली अग्रिम जमानत
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने दिवंगत पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला के जीवन पर आधारित किताब के लेखक को मानहानि मामले में अग्रिम जमानत दी।मूसेवाला के पिता ने 'द रियल रीज़न व्हाई लीजेंड डाइड' पुस्तक लिखने वाले लेखक मनजिंदर सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 451, 406 और 380 के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356 (3) के तहत शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि इसमें गायक के परिवार के खिलाफ अपमानजनक सामग्री है।जस्टिस संदीप मौदगिल ने कहा,"वर्तमान याचिकाकर्ता को जमानत देने से इनकार...
मुकदमेबाजी में सफल होने के लिए आक्रामक होने की जरूरत नहीं; प्रामाणिक बनें: सीजेआई संजीव खन्ना ने लॉ स्टूडेंट्स से कहा
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) संजीव खन्ना ने शनिवार (15 फरवरी) को युवा पेशेवरों के लिए सफलता प्राप्त करने के लिए एक निश्चित तरीके से रहने के सामाजिक दबाव के बीच अपनी पहचान के प्रति प्रामाणिक और सच्चे बने रहने की आवश्यकता पर बात की।महाराष्ट्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, नागपुर के तीसरे दीक्षांत समारोह में बोलते हुए, सीजेआई ने कहा कि एक सफल वकील वह नहीं है जो अपने प्रस्तुतिकरण में आक्रामक हो या अत्यधिक सामाजिक हो, बल्कि वह व्यक्ति है जो बहस करने के कौशल में महारत हासिल करने पर ध्यान केंद्रित...
इस आरोप में सच्चाई का तत्व है कि न्यायालय योग्य मामलों में जमानत नहीं दे रहे हैं: जस्टिस अभय एस ओक
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस अभय एस ओक ने कहा कि सार्वजनिक आलोचना में सच्चाई का तत्व है कि न्यायालय योग्य व्यक्तियों को जमानत नहीं दे रहे हैं।जमानत देने के मुद्दे पर बात करते हुए जस्टिस ओक ने टिप्पणी की कि पहले जमानत की सुनवाई सरल थी, लेकिन अब जमानत न्यायशास्त्र में शुरू की गई "उत्तर, प्रत्युत्तर, उत्तर-प्रत्युत्तर" की संस्कृति समय ले रही है। उन्होंने कहा कि चूंकि एनडीपीएस जैसे विशेष अधिनियमों के कारण अभियुक्त पर बोझ पड़ता है, इसलिए नियमित जमानत के मामले पीछे छूट जाते हैं। न्यायाधीश ने कहा कि...
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने उच्च-दांव वाले निवेश मध्यस्थता विवादों को रणनीति बनाने और संभालने के लिए अंतर-मंत्रालयी मंच की मांग की
सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने शनिवार को उच्च-दांव वाले निवेश मध्यस्थता विवादों को संभालने के लिए अंतर-मंत्रालयी मंच की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि निवेश विवादों को अलग-अलग मंत्रालयों द्वारा स्वतंत्र रूप से संबोधित करने के बजाय एक अंतर-मंत्रालयी मंच स्थापित किया जाना चाहिए।उन्होंने सुझाव दिया कि यह मंच मंत्रालयों को शुरू से ही सहयोग करने की अनुमति देगा, जिससे एकीकृत और रणनीतिक दृष्टिकोण सुनिश्चित होगा। उन्होंने सरकार से विवाद के शुरुआती चरणों में समन्वित...




















