जानिए हमारा कानून
कौन-कौन से दस्तावेज स्टाम्प ड्यूटी के अधीन आते हैं और कब छूट मिलती है : भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 3
स्टाम्प ड्यूटी (Stamp Duty) एक प्रकार का कर (Tax) है, जो कानूनी दस्तावेजों (Legal Documents) पर लगाया जाता है ताकि वे वैध (Legally Valid) और लागू (Enforceable) हो सकें। यह सरकार के लिए राजस्व (Revenue) का एक महत्वपूर्ण स्रोत है और विभिन्न प्रकार के दस्तावेजों पर लागू होता है, जैसे कि समझौते (Agreements), विनिमय पत्र (Bills of Exchange), प्रतिज्ञा पत्र (Promissory Notes), और संपत्ति से जुड़े अनुबंध (Property Agreements)।भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (Indian Stamp Act, 1899) भारत में स्टाम्प ड्यूटी...
शराब व्यापार और सरकारी राजस्व: राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 की धारा 39 और 40
राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 (Rajasthan Excise Act, 1950) राज्य में शराब और अन्य नशीले पदार्थों के निर्माण, बिक्री और कराधान (Taxation) को नियंत्रित करता है। इस अधिनियम के तहत, व्यापार में पारदर्शिता बनाए रखने और सरकार के राजस्व (Revenue) की सुरक्षा के लिए कुछ विशेष प्रावधान बनाए गए हैं।अध्याय VII (Chapter VII) में ऐसे ही दो महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं—धारा 39, जो शराब विक्रेताओं और निर्माताओं के लिए सही माप-तौल उपकरण (Measuring and Testing Instruments) रखने की अनिवार्यता पर जोर देती है, और...
धारा 361, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023: जब मजिस्ट्रेट किसी मामले का निपटारा नहीं कर सकता
भारत में आपराधिक न्याय प्रणाली (Criminal Justice System) को व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) लागू की गई है। यह नया कानून दंड प्रक्रिया संहिता (Criminal Procedure Code - CrPC) का स्थान लेता है और आपराधिक मामलों को सुनने और तय करने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है।इस कानून की धारा 361 (Section 361) एक महत्वपूर्ण प्रावधान है, जो उन परिस्थितियों को स्पष्ट करती है जब एक मजिस्ट्रेट (Magistrate) को यह महसूस होता है कि वह...
सुप्रीम कोर्ट व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आपराधिक कानून के दुरुपयोग को कैसे रोकता है?
भारत का सुप्रीम कोर्ट हमेशा नागरिकों के मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) की रक्षा करता है, खासकर व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Personal Liberty) की, जो संविधान (Constitution) के अनुच्छेद 21 (Article 21) के तहत संरक्षित है। यह निर्णय महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें ग़लत गिरफ्तारी (Wrongful Arrest), आपराधिक कानून (Criminal Law) के दुरुपयोग और मुक्त भाषण (Freedom of Speech) से जुड़े मामलों को उठाया गया है।अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी व्यक्ति को कानूनी प्रक्रिया (Legal Process) का गलत इस्तेमाल करके...
Order XXII Rule 4 CPC | सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी उत्तराधिकारियों को प्रतिस्थापित करने, छूट रद्द करने और देरी को माफ करने के लिए आवेदन दायर करने की सही प्रक्रिया बताई
सुप्रीम कोर्ट ने चल रहे मुकदमे में कानूनी उत्तराधिकारियों को प्रतिस्थापित करने के संबंध में स्पष्टीकरण जारी किया, जिसमें वकीलों द्वारा अक्सर की जाने वाली प्रक्रियागत गलतियों को संबोधित किया गया। न्यायालय ने मुकदमे या अपील के छूट और उस छूट को रद्द करने की प्रक्रिया के बीच महत्वपूर्ण अंतर पर जोर दिया, खासकर उन मामलों में जहां प्रतिस्थापन आवेदन प्रारंभिक 90-दिन की परिसीमा अवधि से परे दायर किए जाते हैं।Order XXII Rule 4 CPC मृतक पक्षों को उनके कानूनी प्रतिनिधियों से प्रतिस्थापित करने की प्रक्रिया को...
लाइसेंस सरेंडर नवीनीकरण और तकनीकी त्रुटियां : राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 की धाराएं 36, 37 और 38
राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 (Rajasthan Excise Act, 1950) में शराब की खुदरा बिक्री (Retail Sale) से जुड़े लाइसेंस (Licence) के सरेंडर (Surrender), नवीनीकरण (Renewal) और तकनीकी त्रुटियों (Technical Irregularities) को लेकर विस्तृत प्रावधान दिए गए हैं।धारा 36, 37 और 38 में यह बताया गया है कि यदि कोई लाइसेंसधारक (License Holder) अपना लाइसेंस छोड़ना चाहे, तो उसके लिए क्या प्रक्रिया होगी, क्या लाइसेंसधारक को नवीनीकरण (Renewal) का कोई अधिकार है, और यदि लाइसेंस में कोई तकनीकी गलती हो जाए, तो उसे वैध...
किशोर न्याय और जघन्य अपराध: क्या 16 से 18 साल के बच्चों को वयस्क अपराधियों की तरह सजा दी जानी चाहिए
भारत में नाबालिगों (Juveniles) के अपराधों को निपटाने के लिए Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 बनाया गया है। इस कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन बच्चों पर अपराध का आरोप है, उन्हें उचित न्याय मिले और उनके सुधार (Rehabilitation) पर ध्यान दिया जाए।लेकिन जब 16 से 18 वर्ष के बीच के किशोर (Teenagers) जघन्य अपराध (Heinous Crime) करते हैं, तो कानून इस बात की अनुमति देता है कि यह जांच की जाए कि उन्हें वयस्क (Adult) की तरह मुकदमे (Trial) का सामना करना चाहिए या नहीं। ...
धारा 360, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023: अभियोजन से हटने की प्रक्रिया, शर्तें और न्यायालय की भूमिका
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023), जो पहले की दंड प्रक्रिया संहिता (Criminal Procedure Code) का स्थान ले चुकी है, इसमें अभियोजन से हटने (Withdrawal from Prosecution) का प्रावधान धारा 360 (Section 360) में दिया गया है।यह धारा लोक अभियोजक (Public Prosecutor) या सहायक लोक अभियोजक (Assistant Public Prosecutor) को यह अधिकार देती है कि वे किसी भी आरोपी (Accused) के खिलाफ मुकदमे से हट सकते हैं, लेकिन इसके लिए न्यायालय (Court) की अनुमति आवश्यक होगी। यह...
क्या भारत में सच में राजद्रोह कानून समाप्त हो गया? बीएनएस 152 बनाम आईपीसी 124A की तुलना
भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita - BNS), 2023 को लागू करने से भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली (Criminal Justice System) में एक बड़ा बदलाव आया।इसने भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code - IPC), 1860 को पूरी तरह से बदल दिया। आईपीसी की धारा 124A, जो राजद्रोह (Sedition) से संबंधित थी, सबसे विवादास्पद प्रावधानों में से एक थी। सरकार ने दावा किया कि नए कानून में इसे हटा दिया गया है, लेकिन बीएनएस की धारा 152 को गहराई से देखने पर पता चलता है कि राजद्रोह की मूल अवधारणा अब भी नए रूप में मौजूद...
Transfer Of Property में डिपॉजिट टू कोर्ट किसे कहा जाता है?
संपत्ति अंतरण अधिनियम 1882 के अंतर्गत किसी भी बंधककर्ता को अपनी बंधक संपत्ति को मोचन करने का अधिकार प्राप्त है। यदि किसी बंधककर्ता ने अपनी कोई संपत्ति बंधक की संविदा के अंतर्गत बंधकदार को अंतरण की है तो उस संपत्ति की ऋण की अदायगी के समय विमोचन के अधिकार का प्रयोग कर पुनः प्राप्त कर सकता है। इस अधिनियम की धारा-83 इसी प्रकार मोचन के अधिकार का एक प्रारूप है। यदि कोई व्यक्ति अपने मोचन के अधिकार का प्रयोग करना चाहता है तथा अपने लिए गए ऋण की अदायगी करना चाहता है तब उसके पास में यह विकल्प उपलब्ध होगा...
Transfer Of Property की धारा 91 के प्रावधान
एक बंधककर्ता को अपनी संपत्ति पर मोचन का अधिकार प्राप्त होता है। बंधककर्ता के अलावा भी कुछ व्यक्ति ऐसे हैं जिन्हें मोचन का अधिकार प्राप्त है, धारा-91 उन्हीं व्यक्तियों का उल्लेख कर रही है।विधि बन्धककर्ता को यह अधिकार प्रदान करती है कि वह बन्धक रकम का भुगतान कर बन्धक सम्पत्ति वापस प्राप्त करे। बन्धककर्ता का यह अधिकार मोचनाधिकार कहलाता है। मोचनाधिकार की विवेचना अधिनियम की धारा 60 में की गयी है। धारा 91 उन व्यक्तियों के सम्बन्ध में प्रावधान करती है जो मोचन हेतु वाद ला सकेंगे या बन्धक सम्पत्ति का...
अन्य कारणों से लाइसेंस रद्द करने की शक्ति – राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 की धारा 35
राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 (Rajasthan Excise Act, 1950) शराब और नशीले पदार्थों (Intoxicating Substances) के निर्माण, बिक्री, वितरण और परिवहन को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया एक कानून है।यह अधिनियम यह सुनिश्चित करता है कि शराब और अन्य नशीले पदार्थों से जुड़ी गतिविधियाँ एक वैध (Legal) ढांचे के अंतर्गत रहें। इसके तहत सरकार को लाइसेंस (Licence), परमिट (Permit) या पास (Pass) जारी करने का अधिकार प्राप्त होता है, और यदि आवश्यक हो तो इन्हें निलंबित (Suspend) या रद्द (Cancel) भी किया जा सकता है। ...
भारतीय न्याय प्रणाली में अपराधों के समझौते की सीमाएँ और शर्तें : BNSS, 2023 की धारा 359
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita - BNSS), 2023 की धारा 359 अपराधों के समझौते (Compounding of Offences) की प्रक्रिया को निर्धारित करती है।इस धारा का पहला भाग यह बताता है कि कौन से अपराध समझौतायोग्य (Compoundable) हैं और उनका समझौता कौन कर सकता है। हालांकि, धारा 359 का दूसरा भाग, विशेष रूप से उपधारा (3) से (9) तक, इस प्रक्रिया से जुड़े विस्तृत प्रावधानों को स्पष्ट करता है। इस भाग में यह बताया गया है कि अपराध के उकसावे (Abetment) और प्रयास (Attempt) का समझौता कैसे...
क्या हर महिला, चाहे वह विवाहित हो या अविवाहित, सुरक्षित और कानूनी गर्भपात का अधिकार रखती है?
सुरक्षित और कानूनी गर्भपात (Abortion) का अधिकार महिलाओं के प्रजनन अधिकार (Reproductive Rights) और व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Personal Autonomy) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। X बनाम प्रिंसिपल सेक्रेटरी, हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर डिपार्टमेंट, दिल्ली सरकार (2022) के ऐतिहासिक फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) अधिनियम, 1971 और उसके नियमों की व्याख्या की।कोर्ट ने कहा कि सभी महिलाओं को, चाहे वे विवाहित (Married) हों या अविवाहित (Unmarried), गर्भपात की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए।...
आतंकवादी अपराधों की परिभाषा, सजा और कानूनी प्रक्रियाओं में अंतर : UAPA और BNS के बीच अंतर
भारत में आतंकवाद (Terrorism) से निपटने के लिए Unlawful Activities (Prevention) Act, 1967 (UAPA) और Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 (BNS) दो महत्वपूर्ण कानून हैं। हालांकि दोनों का उद्देश्य आतंकवाद को रोकना और दंडित करना है, लेकिन इनकी संरचना (Structure), क्षेत्र (Scope), प्रक्रियाएं (Procedures) और कानूनी प्रभाव (Legal Implications) अलग-अलग हैं।UAPA एक विशेष कानून (Special Law) है, जो आतंकवाद को रोकने और उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के लिए बनाया गया था। दूसरी ओर, BNS, जो अब भारतीय दंड संहिता...
क्या भारत के बाहर हुई हिरासत को धारा 428 सीआरपीसी के तहत सजा में समायोजित किया जा सकता है?
सुप्रीम कोर्ट ने अबू सलेम अब्दुल कय्यूम अंसारी बनाम महाराष्ट्र राज्य के मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न (Legal Question) पर विचार किया। यह प्रश्न था कि क्या किसी आरोपी (Accused) को किसी विदेशी (Foreign) देश में बिताए गए हिरासत (Detention) के समय को भारतीय अदालत द्वारा दी गई सजा में समायोजित (Set-Off) करने का अधिकार मिल सकता है?सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि धारा 428 सीआरपीसी (CrPC) केवल भारत में बिताए गए हिरासत (Detention) के समय पर लागू होती है। किसी अन्य देश में किसी अन्य मामले में...
राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 के तहत लाइसेंस को रद्द और निलंबित करने की शक्ति – धारा 34
राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 (Rajasthan Excise Act, 1950) राज्य में शराब और अन्य नशीले पदार्थों के व्यापार को नियंत्रित करता है। इस अधिनियम के तहत शराब के निर्माण, बिक्री और परिवहन को कानूनी रूप से संचालित करने के लिए लाइसेंस (Licence), परमिट (Permit) और पास (Pass) दिए जाते हैं।हालांकि, सरकार ये लाइसेंस जारी करती है, लेकिन यह भी सुनिश्चित करती है कि इनका दुरुपयोग न हो। धारा 34 (Section 34) विशेष रूप से उन परिस्थितियों को निर्धारित करती है जिनमें लाइसेंस, परमिट या पास को रद्द (Cancel) या निलंबित...
भारतीय न्याय संहिता, 2023 में नए प्रावधान और महत्वपूर्ण बदलाव
भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita - BNS) में कई नए प्रावधान (Provisions) जोड़े गए हैं और पहले से मौजूद कई कानूनी परिभाषाओं (Legal Definitions) और धाराओं में बदलाव किए गए हैं।इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य नए अपराधों को शामिल करना, कानून को अधिक स्पष्ट बनाना और न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है। भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code - IPC) के कई प्रावधानों को हटाया गया, बदला गया या विस्तारित किया गया है। इस लेख में हम बीएनएस में शामिल कुछ महत्वपूर्ण संशोधनों (Modifications) और...
अपराधों के समझौते या Compounding of Offences पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 359
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita - BNSS), 2023 की धारा 359 उन अपराधों से संबंधित है, जिनका समझौता (Compounding) किया जा सकता है। समझौते का मतलब होता है कि अपराध के पीड़ित (Victim) और आरोपी (Accused) आपसी सहमति से मामला निपटा सकते हैं, जिससे केस बिना ट्रायल (Trial) के समाप्त हो जाता है।यह प्रावधान (Provision) अदालतों (Courts) का बोझ कम करने के लिए बनाया गया है, ताकि छोटी-मोटी आपराधिक घटनाओं को अदालत से बाहर सुलझाया जा सके। लेकिन सभी अपराधों का समझौता नहीं किया जा...
Transfer Of Property की धारा 81 और 82 के प्रावधान
संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 81 जो क्रमबंधन का उल्लेख करती है तथा धारा 82 जो अभिदाय का उल्लेख करती है।क्रमबंधन- (धारा 81)'क्रमबन्धन' से अभिप्रेत है चीजों को या वस्तुओं को एक क्रम में रखना क्रमबन्धन का अधिकार पाश्चिक बन्धकदार का अधिकार है।धारा 81 प्रतिभूतियों का क्रमबन्धन सम्बन्धी सिद्धान्त अधिनियमित करती है। क्रमबन्धन के सिद्धान्त के अनुसार यदि दो या अधिक सम्पत्तियों का स्वामी, जब उन्हें एक व्यक्ति के पास बन्धक रखता है और तत्पश्चात् उन सम्पत्तियों में से एक या अधिक सम्पत्तियों को किसी अन्य...