लाइसेंस सरेंडर नवीनीकरण और तकनीकी त्रुटियां : राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 की धाराएं 36, 37 और 38

Himanshu Mishra

12 Feb 2025 12:41 PM

  • लाइसेंस सरेंडर नवीनीकरण और तकनीकी त्रुटियां : राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 की धाराएं 36, 37 और 38

    राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 (Rajasthan Excise Act, 1950) में शराब की खुदरा बिक्री (Retail Sale) से जुड़े लाइसेंस (Licence) के सरेंडर (Surrender), नवीनीकरण (Renewal) और तकनीकी त्रुटियों (Technical Irregularities) को लेकर विस्तृत प्रावधान दिए गए हैं।

    धारा 36, 37 और 38 में यह बताया गया है कि यदि कोई लाइसेंसधारक (License Holder) अपना लाइसेंस छोड़ना चाहे, तो उसके लिए क्या प्रक्रिया होगी, क्या लाइसेंसधारक को नवीनीकरण (Renewal) का कोई अधिकार है, और यदि लाइसेंस में कोई तकनीकी गलती हो जाए, तो उसे वैध (Valid) माना जाएगा या नहीं।

    धारा 36: खुदरा बिक्री (Retail Sale) के लाइसेंस का सरेंडर (Surrender)

    अगर कोई व्यक्ति, जिसे खुदरा बिक्री का लाइसेंस दिया गया है, अपना लाइसेंस सरेंडर करना चाहता है, तो उसे कम से कम एक महीने पहले एक्साइज कमिश्नर (Excise Commissioner) को लिखित रूप में सूचना देनी होगी। साथ ही, उसे पूरे उस अवधि के लिए लाइसेंस शुल्क (Licence Fee) का भुगतान करना होगा, जितने समय के लिए उसका लाइसेंस वैध (Valid) होता।

    उदाहरण (Illustration)

    मान लीजिए कि रमेश को 1 साल के लिए शराब की खुदरा बिक्री का लाइसेंस मिला है, लेकिन 6 महीने बाद वह इसे छोड़ना चाहता है। अगर वह अपना लाइसेंस सरेंडर करना चाहता है, तो उसे कम से कम एक महीने पहले लिखित सूचना देनी होगी और पूरे 1 साल की अवधि के लिए लाइसेंस शुल्क का भुगतान करना होगा, भले ही वह केवल 6 महीने तक ही कारोबार कर पाया हो।

    विशेष परिस्थिति में शुल्क माफी (Fee Waiver in Special Cases)

    अगर एक्साइज कमिश्नर (Excise Commissioner) यह मान लेता है कि लाइसेंस सरेंडर करने का कारण वाजिब (Reasonable) है, तो वह लाइसेंसधारक को पूरी राशि या उसका कुछ हिस्सा माफ (Remit) कर सकता है।

    लाइसेंसधारक की परिभाषा (Definition of Licence Holder)

    इस धारा में 'लाइसेंसधारक' (Licence Holder) शब्द का अर्थ केवल वही व्यक्ति नहीं है जिसके पास पहले से लाइसेंस है, बल्कि वह भी शामिल है जिसका टेंडर (Tender) या बोली (Bid) स्वीकृत हो गई हो, भले ही उसे अभी लाइसेंस प्राप्त न हुआ हो।

    धारा 37: लाइसेंस के नवीनीकरण (Renewal) का अधिकार नहीं और मुआवजे (Compensation) का दावा नहीं

    इस धारा के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जिसे इस अधिनियम के तहत लाइसेंस मिला है, उसे यह अधिकार नहीं होगा कि वह अपने लाइसेंस के नवीनीकरण (Renewal) की मांग करे। इसका मतलब यह है कि सरकार पूरी तरह स्वतंत्र (Independent) है कि वह लाइसेंस को नवीनीकृत करे या न करे।

    क्या लाइसेंसधारक मुआवजे (Compensation) का दावा कर सकता है?

    अगर किसी व्यक्ति का लाइसेंस समाप्त (Expire) हो जाता है या उसका नवीनीकरण नहीं किया जाता, तो वह किसी भी प्रकार का मुआवजा (Compensation) मांगने का हकदार नहीं होगा।

    उदाहरण (Illustration)

    राजू को शराब की दुकान चलाने के लिए एक साल के लिए लाइसेंस मिला था। जब उसकी लाइसेंस अवधि समाप्त हो गई, तो उसने इसका नवीनीकरण (Renewal) करवाने की मांग की, लेकिन सरकार ने नवीनीकरण से इनकार कर दिया। इस स्थिति में, राजू न तो सरकार पर जबरदस्ती नवीनीकरण करने का दबाव बना सकता है और न ही कोई मुआवजा (Compensation) मांग सकता है।

    धारा 38: लाइसेंस में तकनीकी त्रुटियां (Technical Irregularities in Licence) वैध होंगी

    यह धारा यह सुनिश्चित करती है कि यदि किसी लाइसेंस में कोई छोटी-मोटी तकनीकी गलती (Technical Defect), अनियमितता (Irregularity) या चूक (Omission) हो जाती है, तो उसे पूरी तरह से अवैध (Invalid) नहीं माना जाएगा।

    इसका मतलब यह है कि अगर कोई त्रुटि (Error) केवल तकनीकी स्तर (Technical Level) की है और इससे लाइसेंस की मूल वैधता (Legality) पर कोई असर नहीं पड़ता, तो लाइसेंस रद्द नहीं होगा।

    कौन तय करेगा कि क्या तकनीकी गलती है?

    एक्साइज कमिश्नर (Excise Commissioner) को यह अधिकार दिया गया है कि वह तय करे कि कौन-सी गलती मात्र एक तकनीकी त्रुटि (Technical Defect) है और कौन-सी गलती इतनी गंभीर है कि लाइसेंस को अवैध घोषित किया जाए। एक्साइज कमिश्नर का निर्णय इस मामले में अंतिम (Final) होगा।

    उदाहरण (Illustration)

    सुरेश को शराब बिक्री का लाइसेंस मिला, लेकिन उसमें उसके पिता का नाम गलत लिखा गया। यह केवल एक तकनीकी त्रुटि (Technical Defect) है और इससे लाइसेंस की वैधता (Validity) पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इसलिए, इस गलती के कारण लाइसेंस को अवैध नहीं माना जाएगा।

    पिछली धाराओं से संबंध (Reference to Previous Sections)

    इससे पहले धारा 34 और 35 में यह बताया गया था कि सरकार किन परिस्थितियों में लाइसेंस रद्द (Cancel) कर सकती है। अगर किसी व्यक्ति का लाइसेंस सरकार द्वारा रद्द कर दिया जाता है, तो उसे धारा 36 का लाभ नहीं मिलेगा, क्योंकि यह धारा केवल स्वैच्छिक (Voluntary) रूप से लाइसेंस सरेंडर करने से संबंधित है।

    इसी तरह, धारा 37 यह सुनिश्चित करती है कि किसी व्यक्ति को लाइसेंस नवीनीकरण (Renewal) का कोई कानूनी अधिकार नहीं होगा, जिससे सरकार को यह छूट मिलती है कि वह अपने नीतिगत निर्णयों (Policy Decisions) के अनुसार लाइसेंस दे या न दे।

    निष्कर्ष (Conclusion)

    धारा 36, 37 और 38 मिलकर यह सुनिश्चित करती हैं कि लाइसेंसधारक और सरकार के बीच अधिकार और दायित्व (Rights and Responsibilities) स्पष्ट रूप से परिभाषित (Defined) हों।

    यदि कोई लाइसेंसधारक अपनी इच्छा से लाइसेंस छोड़ना चाहता है, तो उसे धारा 36 का पालन करना होगा। लेकिन अगर सरकार लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं करना चाहती, तो किसी भी व्यक्ति को इस पर आपत्ति करने या मुआवजा मांगने का अधिकार नहीं होगा, जैसा कि धारा 37 में स्पष्ट किया गया है।

    वहीं, धारा 38 यह तय करती है कि यदि लाइसेंस में कोई मामूली तकनीकी गलती (Technical Defect) हो जाती है, तो उसे अवैध (Invalid) नहीं माना जाएगा।

    इन धाराओं का मुख्य उद्देश्य यह है कि सरकार के पास लाइसेंस प्रबंधन (Licence Management) की पूरी शक्ति बनी रहे, ताकि शराब व्यापार (Liquor Business) को नियंत्रित (Regulate) किया जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस प्रक्रिया में कोई अवैध गतिविधि (Illegal Activity) न हो।

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