मुख्य सुर्खियां
धारा 148 एनआई एक्ट के तहत पारित आदेश इंटरलोक्यूटरी प्रकृति में, पुनरीक्षण योग्य नहीं: मद्रास हाईकोर्ट
नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 148 के तहत पारित आदेशों के मामले में संशोधन के दायरे पर चर्चा करते हुए, मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि ऐसे आदेश प्रकृति में अंतर्वर्ती हैं और हाईकोर्ट के पुनरीक्षण अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं।जस्टिस डी भरत चक्रवर्ती की पीठ प्रधान सत्र न्यायाधीश, चेन्नई के एक आदेश के खिलाफ एक आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने अधिनियम की धारा 148 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए चेक अनादर के लिए कारावास (अपील के निपटान तक) के आदेश को, चेक राशि का 15%...
दिल्ली हाईकोर्ट ने रिटेल स्टोर पर 'हेटिच' ट्रेडमार्क और ट्रेडनेम का इस्तेमाल करके किसी भी नकली उत्पाद को बेचने पर रोक लगाई
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने एक रिटेल स्टोर को HETTICH और HETTICH लोगो ट्रेडमार्क और ट्रेड नेम का इस्तेमाल करके किसी भी नकली उत्पाद या किसी अन्य संबंधित सामान को बेचने से रोक दिया है।जस्टिस ज्योति सिंह, हेटिच मार्केटिंग-अंड वर्ट्रीब्स जीएमबीएच एंड कंपनी द्वारा गुप्ता स्टोर नाम के एक रिटेल स्टोर के खिलाफ दायर मुकदमे की सुनवाई कर रही थीं, जिसमें उसे ट्रेडमार्क 'HETTICH' और उसके लोगो का उल्लंघन करने से रोकने की मांग की गई थी।यह वादी का मामला था कि ट्रेड नेम और ट्रेडमार्क HETTICH की...
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने गन राइट्स का विस्तार किया, सार्वजनिक रूप से हथियार रखने के अधिकार को सीमित करने वाले कानून को रद्द किया
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को न्यूयॉर्क के एक कानून को खारिज कर दिया, जिसमें आत्मरक्षा के लिए सार्वजनिक रूप से छुपाकर आग्नेयास्त्रों को ले जाने पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया गया था, जिसमें कहा गया था कि सदियों पुराने कानून की आवश्यकता है कि आवेदक "उचित कारण" और "अच्छे नैतिक चरित्र" का प्रदर्शन करें, यह दूसरे संशोधन का उल्लंघन करता है।।6-3 के फैसले में, जिसमें रूढ़िवादी जज बहुमत में और उदारवदी जज अल्पमत में थे, पाया गया कि 1913 में अधिनियमित कानून ने अमेरिकी संविधान के दूसरे संशोधन के तहत एक...
वन संरक्षण अधिनियम के तहत कोई 'डीम्ड फोरेस्ट' नहीं हो सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट ने दोहराया
कर्नाटक हाईकोर्ट ने दोहराया कि भूमि "जंगल" या "वन भूमि" हो सकती है, लेकिन वन संरक्षण अधिनियम के तहत किसी प्रावधान के अभाव में कोई "डीम्ड फोरेस्ट" नहीं हो सकती है।चीफ जस्टिस रितु राज अवस्थी और जस्टिस अशोक एस किनागी की खंडपीठ ने डीएम देवेगौड़ा द्वारा दायर याचिका की अनुमति देते हुए कहा,"इस न्यायालय ने दिनांक 12.06.2019 के निर्णय और आदेश के तहत W.P.No.54476/2016 (GM-MM-S) C/w W.P.No.51135/2016 (धनंजय बनाम कर्नाटक राज्य और अन्य) में स्पष्ट रूप से कहा कि "डीम्ड फोरेस्ट" की कोई अवधारणा नहीं है।न्यायालय...
एनडीपीएस एक्ट के कठोर प्रावधानों का दुरुपयोग: कलकत्ता हाईकोर्ट ने बरामदगी की प्रक्रिया की अनिवार्य वीडियोग्राफी का आदेश दिया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में निर्देश दिया कि मादक पदार्थों की बरामदगी से जुड़े सभी मामलों में, जब्ती अधिकारी को पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग करनी होगी। रिकवरी की वीडियोग्राफी में विफल रहने के कारणों को विशेष रूप से जांच रिकॉर्ड में बताया जाना चाहिए।जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस अनन्या बंद्योपाध्याय की पीठ ने कहा कि सभी पुलिस अधिकारी आमतौर पर स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से लैस होते हैं, जो उन्हें इस तरह की वसूली प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करने में...
दिल्ली हाईकोर्ट ने फार्मास्युटिकल उत्पाद निर्माताओं को 'लूज़आउट' ट्रेडमार्क का उपयोग करने से स्थायी रूप से प्रतिबंधित किया, दो लाख रूपये का जुर्माना लगाया
दिल्ली हाईकोर्ट ने फार्मास्युटिकल उत्पादों के दो निर्माताओं को ट्रेडमार्क 'लूज़आउट' का उपयोग करने वाले उत्पादों के निर्माण, बिक्री, विज्ञापन और प्रचार से स्थायी रूप से रोक दिया है, जो भ्रामक रूप से रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क 'लूज़' के समान है।जस्टिस ज्योति सिंह ने निर्माताओं को किसी भी अन्य ट्रेडमार्क के तहत उत्पादों के निर्माण और बिक्री से भी रोक दिया, जो समान या भ्रामक रूप से 'लूज़' या इसके वेरिएंट के समान है ताकि उल्लंघन न हो सके।तीन प्रतिवादियों द्वारा ट्रेडमार्क उल्लंघन के संबंध में इंटास...
दिल्ली रेंट कंट्रोल एक्ट के तहत रेंट कंट्रोलर मकान मालिक को किराएदार परिसर की मरम्मत के लिए नहीं कह सकता: हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने कहा कि दिल्ली रेंट कंट्रोल एक्ट, 1958 के तहत रेंट कंट्रोलर मकान मालिक को किराएदार परिसर की मरम्मत के लिए नहीं कह सकता है।जस्टिस सी हरि शंकर ने कहा कि रेंट कंट्रोलर किरायेदार को धारा 44(3) के तहत मरम्मत करने की अनुमति दे सकता है। यदि, उस संबंध में किरायेदार से नोटिस प्राप्त होने के बाद, मकान मालिक परिसर की मरम्मत करने में विफल रहता है। फिर खर्चे को मकान मालिक को देय किराए में से घटाया जा सकता है या मकान मालिक से वसूल किया जा सकता है।अदालत ने इस प्रकार...
सीआरपीसी धारा 482 के तहत हाईकोर्ट से पैरोल बढ़ाने की मांग नहीं की जा सकती: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि एक कैदी/दोषी दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC), 1973 की धारा 482 के तहत अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए पैरोल बढ़ाने की मांग नहीं कर सकता है।जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर की एकल न्यायाधीश पीठ ने यह भी सुझाव दिया कि ऐसे मामलों पर संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में विचार किया जा सकता है।वर्तमान मामले में, सीआरपीसी की धारा 482 के तहत एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें याचिकाकर्ता को चिकित्सा आधार पर दी गई पैरोल की अवधि बढ़ाने की मांग की गई थी।कोर्ट ने...
कानून उन लोगों की मदद करता है, जो अपने अधिकारों के प्रति सतर्क रहते हैं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में दोहराया कि कानून उन लोगों की मदद करता है जो अपने अधिकारों के बारे में सतर्क हैं, न कि उन लोगों की जो इससे बेखबर हैं।जस्टिस जीएस संधावालिया और जस्टिस विकास सूरी की खंडपीठ ने आगे कहा कि विलंबित चरण में उठाए जाने वाले स्वीकृति, देरी और लापरवाही अच्छी तरह से मान्यता प्राप्त अपवाद है, जो दावे को खारिज करने के लिए पर्याप्य आधार हैं।इस मामले में रिट याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि उनके पास मेडिकल डिग्री चाहने वाले छात्रों को शिक्षा प्रदान करने के लिए मेडिकल/डेंटल...
अस्पतालों को पुलिस सुरक्षा में रखने पर विचार करें: केरल हाईकोर्ट ने मेडिकल कर्मियों पर बढ़ते हमलों पर राज्य सरकार से कहा
केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकार से कहा कि वह अस्पतालों में पुलिस की उपस्थिति रखने के अपने सुझाव पर विचार करे। सरकार कम से कम अभी के लिए सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में पर ध्यान दें, जो बाद में नियत समय में अन्य स्थानों पर विस्तारित हो सकता है। हाईकोर्ट ने उक्त निर्देश यह देखने पर दिया कि स्वास्थ्य कर्मियों पर हमलों की रिपोर्ट 'नियमित' हो गई है।जस्टिस देवन रामचंद्रन और जस्टिस कौसर एडप्पागथ की खंडपीठ ने यह भी कहा कि वैधानिक प्रावधान कड़े दंड का प्रावधान करते हैं, लेकिन यह हमलावरों के लिए...
धारा 143A एनआई एक्ट| अंतरिम मुआवजे के लिए आवेदन पर निर्णय लेते समय 'अभियुक्त के आचरण' पर विचार किया जाए: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि अदाकर्ता (drawee) द्वारा चेक डिसऑनर के मामलों में, एनआई एक्ट 1881 की धारा 143ए के तहत अंतरिम मुआवजे की मांग संबंधी आवेदन पर फैसला करते समय मजिस्ट्रेट अदालतों को आरोपी के आचरण पर विचार करना चाहिए।जस्टिस एम नागप्रसन्ना की सिंगल जज बेंच ने कहा, मजिस्ट्रेटों को यह निर्देश देना आवश्यक हो गया है कि अधिनियम की धारा 143ए के तहत दायर आवेदनों पर विचार करते समय, आरोपी के आचरण पर ध्यान दें। यदि आरोपी अनावश्यक रूप से स्थगन की मांग करके कार्यवाही से बच रहा है तो आवेदन...
कस्टोडियल डेथ: त्रिपुरा हाईकोर्ट ने 27 वर्षीय पीड़ित के परिवार के सदस्यों को 10 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया
त्रिपुरा हाईकोर्ट (Tripura High Court) ने बुधवार को राज्य सरकार को जमाल हुसैन के परिवार के सदस्यों को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया, जिसकी कथित तौर पर पुलिस लॉकअप में हिरासत में यातना (Custodial Death) के कारण मौत हो गई थी।चीफ जस्टिस इंद्रजीत महंती और जस्टिस सत्य गोपाल चट्टोपाध्याय की खंडपीठ ने आदेश दिया कि मृतक की विधवा, बच्चे और मां मुआवजे की राशि के बराबर हिस्से की हकदार होंगी।क्या है पूरा मामला?27 वर्षीय जमाल हुसैन (पीड़ित) दुबई में एक क्लीनर के रूप में सेवा कर रहा था और सितंबर...
हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम 'अजन्मे बच्चे' को गोद लेने के लिए एग्रीमेंट की परिकल्पना नहीं करता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अजन्मे बच्चे को गोद लेने के मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 के तहत अजन्मे बच्चे को गोद लेने के लिए ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 ऐसे बच्चे को गोद लेने के एग्रीमेंट की परिकल्पना नहीं करता, जो अभी तक पैदा नहीं हुआ है।जस्टिस एम.एस. रामचंद्र राव नवजात शिशु की प्राकृतिक मां द्वारा उसे प्रतिवादी नंबर चार और पांच की कस्टडी से मुक्त कराने के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रहे थे,...
कंपनी अधिनियम की धारा 447 के तहत धोखाधड़ी के लिए निजी शिकायत आर्थिक अपराधों के लिए विशेष न्यायालय के समक्ष सुनवाई योग्य नहीं: तेलंगाना हाईकोर्ट
तेलंगाना हाईकोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 447 के तहत धोखाधड़ी के लिए निजी शिकायत विशेष न्यायालय के समक्ष सुनवाई योग्य नहीं है। कंपनी अधिनियम की धारा 212(6) सुनिश्चित करती है कि उचित जांच के बाद ही धोखाधड़ी के लिए मुकदमा चलाया जा सकता है। यह विभिन्न कंपनियों के लाखों शेयरधारकों की शिकायतों से सुरक्षा प्रदान करता है।कोर्ट ने कहा,"अगर शिकायतकर्ता का यह तर्क कि कोई शेयरधारक धोखाधड़ी के लिए शिकायत दर्ज कर सकता है, स्वीकार कर लिया जाता है तो ऐसी शिकायतों की बाढ़ आ...
उड़ीसा हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मद्देनजर पुरी जगन्नाथ मंदिर कॉरिडोर परियोजना को चुनौती देने वाले लंबित मामले का निपटारा किया
उड़ीसा हाईकोर्ट ने अर्धेंदु कुमार दास बनाम ओडिशा राज्य में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के मद्देनजर पुरी श्री जगन्नाथ मंदिर कॉरिडोर परियोजना को चुनौती देने वाली लंबित रिट याचिका का निपटारा किया।हाईकोर्ट ने विशेष रूप से उस मामले का निपटारा किया जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने सदियों पुराने पवित्र मंदिर के निकटवर्ती क्षेत्र में ओडिशा सरकार द्वारा किए गए कुछ निर्माण कार्यों के खिलाफ दायर दो याचिकाओं को खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने न केवल उन याचिकाओं को खारिज किया, बल्कि दोनों याचिकाकर्ताओं पर एक-एक...
पत्नी और नाबालिग बच्चे को आर्थिक सहायता से वंचित करना 'घरेलू हिंसा' के बराबर, भले ही पार्टियां साझा घर में नहीं रह रही हों: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने गुरुवार को कहा कि पत्नी और नाबालिग बच्चे को आर्थिक सहायता से वंचित करना घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 (DV Act, 2005) की धारा 3 के तहत 'घरेलू हिंसा' का गठन करता है और यह महत्वहीन है कि क्या पार्टियां अभी भी एक साझा घर में रह रही हैं या नहीं।धारा 3 घरेलू हिंसा को परिभाषित करती है और इसमें शारीरिक, यौन, मौखिक, भावनात्मक और आर्थिक शोषण शामिल है।जस्टिस अजय कुमार मुखर्जी संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष लंबित डीवी अधिनियम की धारा 12 के तहत...
शिकायतकर्ता की ओर से नियुक्त प्राइवेट प्रॉसिक्यूटर अतिरिक्त आरोप तय करने की मांग कर सकता है, यह अभियोजन का नियंत्रण लेने के बराबर नहीं: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने हाल ही में न्यायिक मजिस्ट्रेट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें यह कहा गया था कि एक निजी वकील, जिसे लोक अभियोजक (Public Prosecutor) की सहायता के लिए शिकायतकर्ता द्वारा नियुक्त किया गया है, वह सीआरपीसी की धारा 301 (2) के तहत एक स्वतंत्र अभियोजन नहीं चला सकता है और इसलिए अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करने और मामले का संचालन करने का कोई अधिकार नहीं है।जस्टिस भरत चक्रवर्ती ने कहा कि मजिस्ट्रेट का आदेश बरकरार रखने योग्य नहीं है क्योंकि सीआरपीसी की धारा 301...
एफआईआर दर्ज करने में 45 दिनों की देरी : कर्नाटक हाईकोर्ट ने ठोस स्पष्टीकरण के अभाव में आपराधिक कार्यवाही रद्द की
कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति के खिलाफ लंबित आपराधिक कार्यवाही यह कहते हुए रद्द कर दी कि शिकायतकर्ता ने हमले की कथित घटना के 45 दिन बाद एफआईआर दर्ज करवाई थी और वह एफआईआर दर्ज करने में देरी के लिए कोई प्रशंसनीय स्पष्टीकरण नहीं दे पाया। जस्टिस हेमंत चंदनगौदर की एकल पीठ ने बी दुर्गा राम द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया और भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 504, 506 और धारा 34 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए उसके खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही रद्द कर दी।मामले का विवरण:दूसरे प्रतिवादी द्वारा एफआईआर...
सीपीसी| विभिन्न डिक्री धारकों के बीच संपत्ति के रेटेबल डिस्ट्रीब्यूशन का आदेश उन्हें उनके व्यक्तिगत ऋण को सेट-ऑफ करने से रोकता है: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया है कि नागरिक प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) के तहत, जब अलग-अलग डिक्रीधारकों के पक्ष में एक संपत्ति के लिए 'रेटेबल डिस्ट्रीब्यूशन' का आदेश होता है, तो उनमें से कोई भी बिक्री से प्राप्त राशि से अपने पूरे ऋण को समायोजित करने का दावा नहीं कर सकता है।न्यायमूर्ति अनिल के. नरेंद्रन और न्यायमूर्ति पी.जी. अजितकुमार की खंडपीठ ने कहा कि ऐसे मामले में जहां न्यायालय द्वारा 'रेटेबल डिस्ट्रीब्यूशन' का आदेश दिया जाता है, वहां डिक्री धारक को केवल उस आनुपातिक राशि को ही अलग...
कर्नाटक हाईकोर्ट ने वकीलों के बारे में गलत बातें पेश करने के आरोपी कन्नड़ समाचार चैनल के खिलाफ निजी शिकायत खारिज की
कर्नाटक हाईकोर्ट ने पब्लिक टीवी, न्यूज़ चैनल, और चैनल के मुख्य संरक्षक एचआर रंगनाथ के खिलाफ शुरू की गई मानहानि की कार्यवाही को रद्द कर दिया , जिसमें आरोप लगाया गया था कि कई मीडिया संस्थाओं ने बड़े पैमाने पर वकील की बिरादरी के बारे में गलत बातें पेश की हैं। जस्टिस हेमंत चंदनगौदर की एकल न्यायाधीश पीठ ने याचिका की अनुमति दी और कहा,"मौजूदा मामले में आरोप यह है कि याचिकाकर्ता-आरोपी ने एडवोकेट की बिरादरी के बारे में गलत बाते की हैं और शिकायत किए गए शब्द उसकी व्यक्तिगत क्षमता में शिकायतकर्ता के खिलाफ...

















