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दिल्ली हाईकोर्ट ने फार्मास्युटिकल उत्पाद निर्माताओं को 'लूज़आउट' ट्रेडमार्क का उपयोग करने से स्थायी रूप से प्रतिबंधित किया, दो लाख रूपये का जुर्माना लगाया

Shahadat
24 Jun 2022 7:45 AM GMT
दिल्ली हाईकोर्ट ने फार्मास्युटिकल उत्पाद निर्माताओं को लूज़आउट ट्रेडमार्क का उपयोग करने से स्थायी रूप से प्रतिबंधित किया, दो लाख रूपये का जुर्माना लगाया
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दिल्ली हाईकोर्ट ने फार्मास्युटिकल उत्पादों के दो निर्माताओं को ट्रेडमार्क 'लूज़आउट' का उपयोग करने वाले उत्पादों के निर्माण, बिक्री, विज्ञापन और प्रचार से स्थायी रूप से रोक दिया है, जो भ्रामक रूप से रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क 'लूज़' के समान है।

जस्टिस ज्योति सिंह ने निर्माताओं को किसी भी अन्य ट्रेडमार्क के तहत उत्पादों के निर्माण और बिक्री से भी रोक दिया, जो समान या भ्रामक रूप से 'लूज़' या इसके वेरिएंट के समान है ताकि उल्लंघन न हो सके।

तीन प्रतिवादियों द्वारा ट्रेडमार्क उल्लंघन के संबंध में इंटास फार्मास्युटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा मुकदमा दायर किया गया। जबकि वाद का निपटारा प्रतिवादी नं. एक के हक में हुआ, क्योंकि निर्माताओं की ओर से कोई उपस्थिति नहीं हुआ, जो प्रतिवादी नंबर दो और तीन है।

अदालत ने कहा,

"प्रतिवादी नंबर दो और तीन ने सेवा के बावजूद कार्यवाही से दूर रहने का विकल्प चुना है। इस प्रकार उनके द्वारा निर्मित उत्पादों पर उल्लंघन के ट्रडमार्क को अपनाने का कोई औचित्य या उचित स्पष्टीकरण नहीं है।"

तद्नुसार उक्त निर्माताओं, प्रतिवादी नंबर दो और तीन के विरुद्ध 2,00,000 रूपये का जुर्माना लगाया।

अदालत ने कहा,

"चूंकि मुकदमा मुकदमे के शुरुआती चरण में प्रतिवादी नंबर एक के लिए निपटाया गया है, वादी अदालत फीस अधिनियम, 1870 की धारा 16ए के प्रवाधानों सपठित सीपीसी, 1908 की धारा 89 के अनुसार, उसके द्वारा जमा की गई अदालती फीस का 50% वापस करने का हकदार है।"

तद्नुसार वाद का निस्तारण किया गया।

केस का शीर्षक: इंटास फार्मास्युटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम इंट्रा लाइफ प्राइवेट लिमिटेड और अन्य।

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