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आईपीसी के तहत प्रथम दृष्टया अपराध सिर्फ इसलिए  आकर्षित नहीं होगा क्योंकि महिला ने उत्तेजक कपड़े पहने थे: केरल कोर्ट ने यौन उत्पीड़न मामले में आरोपी को अग्रिम जमानत दी
'आईपीसी के तहत प्रथम दृष्टया अपराध सिर्फ इसलिए आकर्षित नहीं होगा क्योंकि महिला ने उत्तेजक कपड़े पहने थे': केरल कोर्ट ने यौन उत्पीड़न मामले में आरोपी को अग्रिम जमानत दी

केरल की एक अदालत (Kerala Court) ने यौन उत्पीड़न मामले (Sexual Harassment Case) में लेखक और सोशल एक्टिविस्ट सिविक चंद्रन को अग्रिम जमानत देते हुए कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 354 ए के तहत अपराध प्रथम दृष्टया आकर्षित नहीं होता है क्योंकि महिला 'यौन उत्तेजक कपड़े' पहन रखी थी।74 वर्षीय आरोपी ने जमानत अर्जी के साथ महिला की तस्वीरें भी पेश की थीं।कोझीकोड सत्र न्यायालय ने कहा,"आरोपी द्वारा जमानत आवेदन के साथ पेश की गई तस्वीरों से पता चलता है कि वास्तविक शिकायतकर्ता खुद ऐसे कपड़े पहन रखी थी, जो यौन...

वेश्यालय के ग्राहकों पर अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज नहीं किया जा सकता: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
वेश्यालय के ग्राहकों पर अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज नहीं किया जा सकता: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 के तहत एक वेश्यालय ग्राहक के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।जस्टिस नीनाला जयसूर्या की पीठ ने तय कानूनी स्थिति को दोहराया कि एक ग्राहक जो वेश्या के साथ यौन संबंध रखने के लिए नकद भुगतान पर आया था, वह अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 की धारा 3, 4 और 5 के तहत अपराधों के लिए अभियोजन के लिए उत्तरदायी नहीं है।पीठ ने गोयनका साजन कुमार बनाम आंध्र प्रदेश राज्य के फैसले को याद किया :"4. अधिनियम की धारा 3 वेश्यालय के घर को...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
[आरटीई एक्ट] चुनाव अधिसूचना जारी होने से पहले भी शिक्षकों को चुनाव ड्यूटी पर तैनात किया जा सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट (डिवीजन बेंच) ने फैसला सुनाया कि नि: शुल्क एंव अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) की धारा 27 के मद्देनजर, स्थानीय निकाय, एक राज्य के विधानसभा या संसद चुनाव से संबंधित अधिसूचना जारी होने से पहले ही शिक्षकों को चुनाव ड्यूटी पर तैनात किया जा सकता है।चीफ जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस जसप्रीत सिंह की पीठ ने आगे फैसला सुनाया कि शिक्षकों को शिक्षण दिनों या शिक्षण घंटों के दौरान तैनात नहीं किया जा सकता है, लेकिन गैर-शिक्षण दिनों और गैर-शिक्षण समय पर हो सकता है।अनिवार्य रूप...

सीआरपीसी की धारा 125-विवादित पितृत्व के मामलों में दावे की सत्यता सुनिश्चित होने तक बच्चे के भरण-पोषण देने में इंतज़ार किया जा सकता है : जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट
सीआरपीसी की धारा 125-विवादित पितृत्व के मामलों में दावे की सत्यता सुनिश्चित होने तक बच्चे के भरण-पोषण देने में इंतज़ार किया जा सकता है : जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया है कि सीआरपीसी की धारा 125 के तहत एक याचिका पर विचार करने वाले मजिस्ट्रेट के लिए नाबालिग बच्चे को दिया जाने वाले भरण-पोषण एक सर्वाेपरि विचार होना चाहिए, लेकिन जब एक बच्चे के संबंध में गंभीर रूप पितृत्व विवादित (Disputed Paternity) हो तो पहले दावों की सत्यता का पता लगाए बिना एक मजिस्ट्रेट के लिए बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी तय करना विवेकपूर्ण नहीं होगा।जस्टिस संजय धर की पीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें याचिकाकर्ता, एक...

अगर घरेलू शांति बनाए रखने का एकमात्र तरीका पति को घर से निकालना है तो उसे निकाल देना चाहिए, वैकल्पिक ठिकाना न होना प्रसांगिक नहीं : मद्रास हाईकोर्ट
अगर घरेलू शांति बनाए रखने का एकमात्र तरीका पति को घर से निकालना है तो उसे निकाल देना चाहिए, वैकल्पिक ठिकाना न होना प्रसांगिक नहीं : मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने स्थायी निषेधाज्ञा की मांग वाली पत्नी की याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि यदि घरेलू शांति सुनिश्चित करने का एकमात्र तरीका पति को घर से निकालना है तो फैमिली कोर्ट को ऐसे आदेश पारित करने में संकोच नहीं करना चाहिए।जस्टिस आरएन मंजुला की पीठ ने कहा,"सुरक्षा आदेश आम तौर पर अपने घरेलू क्षेत्र में महिला के शांतिपूर्ण जीवन को सुनिश्चित करने के लिए दिए जाते हैं। जब महिला अपने पति की उपस्थिति से डरती है और चिल्लाती है तो न्यायालय केवल पति को यह निर्देश देकर उदासीन नहीं हो सकता कि वह...

बॉम्बे हाईकोर्ट में स्वतंत्रता दिवस पर विशेष सुनवाई, अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में बैडमिंटन खिलाड़ी को वाइल्ड कार्ड एंट्री की अनुमति दी
बॉम्बे हाईकोर्ट में स्वतंत्रता दिवस पर विशेष सुनवाई, अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में बैडमिंटन खिलाड़ी को वाइल्ड कार्ड एंट्री की अनुमति दी

बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने बैडमिंटन खिलाड़ी प्रथमेश कुलकर्णी को 30 अगस्त से पुणे में होने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में वाइल्ड कार्ड एंट्री की इजाजत दे दी। जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस अरुण पेडनेकर की खंडपीठ ने समय की कमी के कारण स्वतंत्रता दिवस पर विशेष सुनवाई की क्योंकि प्रतिभागियों की अंतिम सूची में याचिकाकर्ता का नाम जोड़ने की समय सीमा 15 अगस्त को शाम 5 बजे तक थी। अदालत ने नोटिस जारी किया और 12 अगस्त को और 15 अगस्त को एक विशेष सुनवाई निर्धारित की।भारतीय बैडमिंटन प्राधिकरण...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
'रेप पीड़िता की गवाही संदेहास्पद': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सजा पूरी कर चुके आरोपी के खिलाफ पारित दोषसिद्धि के आदेश को रद्द किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने हाल ही में रेप (Rape Case) के आरोपी के खिलाफ पारित दोषसिद्धि के आदेश को रद्द कर दिया क्योंकि कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की गवाही के प्रत्येक भाग को 'अशक्त', 'संदिग्ध' और 'विरोधाभासी' पाया।गौरतलब है कि छूट की अवधि का लाभ प्राप्त कर पूरी सजा काटकर आरोपी को पहले ही रिहा किया जा चुका है।जस्टिस करुणेश सिंह पवार की पीठ ने पाया कि अभियोक्ता की गवाही के समर्थन में अदालत के समक्ष कोई पुष्ट सबूत पेश नहीं किया गया और अभियोजन घटना की जगह, घटना के समय और घटना के तरीके...

केरल हाईकोर्ट
अव्यावहारिक विवाह का संरक्षण दुख का कारण बनता है, जोड़ने लायक ना बचे हो तो वैवाहिक बंधन तोड़ दिया जाना चाहिए: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एक वैवाहिक अपील को खारिज करते हुए कहा कि जब एक विवाह जोड़ने की सीमा से परे टूट गया है तो कानून को इस तथ्य पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि ऐसे विवाह के कानूनी बंधन को तोड़ने से इनकार करना पार्टियों के हित के साथ ही समाज के लिए भी हानिकारक होगा।जस्टिस अनिल के नरेंद्रन और जस्टिस सी एस सुधा की खंडपीठ ने कहा कि पार्टियों को हमेशा के लिए एक शादी में, जो वास्तव में खत्म हो गई है, बांधे रखने की कोशिश करने से कुछ हासिल नहीं होता है।मामलायाचिकाकर्ता और प्रतिवादी के बीच जनवरी 2009...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
सीआरपीसी की धारा 372 के परंतुक के तहत 'पीड़ित' को अपील का वास्तविक अधिकार प्रदान करना प्रकृति में पूर्वव्यापी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने कहा कि वर्ष 2009 में एक परंतुक (Proviso) जोड़कर सीआरपीसी की धारा 372 में किए गए संशोधन के तहत 'पीड़ित' को अपील का वास्तविक अधिकार प्रदान करना प्रकृति में पूर्वव्यापी नहीं है।इसका मतलब यह है कि, एक 'पीड़ित' [जैसा कि सीआरपीसी की धारा 2 w (wa) के तहत परिभाषित है] को 31 दिसंबर, 2009 से पहले पारित एक आदेश के खिलाफ अपील करने का कोई अधिकार नहीं है, जिसमें आरोपी को बरी करना/उसे अपराध के लिए दंडित करना/अपर्याप्त मुआवजा लगाना शामिल है।यह ध्यान दिया जा सकता है...

धारा 207 सीआरपीसी | आरोप पत्र सामग्री को पेश करने से इनकार करने का नतीजा अनुचित ट्रायल के रूप में होता है: कर्नाटक हाईकोर्ट
धारा 207 सीआरपीसी | आरोप पत्र सामग्री को पेश करने से इनकार करने का नतीजा अनुचित ट्रायल के रूप में होता है: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने दोहराया है कि एक याचिकाकर्ता/अभियुक्त आरोपपत्र की सामग्री की सभी प्रतियों का हकदार होता, जिससे इनकार निस्संदेह निष्पक्षता के सिद्धांत के खिलाफ होगा और यह ट्रायल अनुचित होगा। जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल न्यायाधीश पीठ ने ‌चिराग आर मेहता द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया, जिस पर आईपीसी की धारा 364 ए और 506 के तहत अपराध का आरोप लगाया गया था।मेहता ने अतिरिक्त सिटी सिविल एंड सेशन जज, बेंगलुरु के आदेश पर सवाल उठाया था, जिन्होंने सीआरपीसी की धारा 207 (पुलिस रिपोर्ट और अन्य...

मोटर दुर्घटना दावा | बाल पीड़ित को गैर-कमाई वाले वयस्क के बराबर नहीं गिना जा सकता, गैर-आर्थिक मदों के तहत मुआवजा दिया जाना चाहिए: गुजरात हाईकोर्ट ने दोहराया
मोटर दुर्घटना दावा | बाल पीड़ित को गैर-कमाई वाले वयस्क के बराबर नहीं गिना जा सकता, गैर-आर्थिक मदों के तहत मुआवजा दिया जाना चाहिए: गुजरात हाईकोर्ट ने दोहराया

गुजरात हाईकोर्ट ने दोहराया कि मोटर दुर्घटनाओं के शिकार बच्चे मुआवजे के मामले में कमाई न करने वाले वयस्कों से अलग पायदान पर खड़े होते हैं।जस्टिस गीता गोपी की खंडपीठ ने मल्लिकार्जुन बनाम डिवीजनल मैनेजर, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों को याद करते हुए कहा कि मुआवजे से बच्चे को कुछ हासिल करने या जीवन शैली विकसित करने में सक्षम होना चाहिए, जो अपंगता से उत्पन्न होने वाली असुविधा या परेशानी को कुछ हद तक दूर करेगा।इस प्रकार, नाबालिग पीड़ितों के लिए मुआवजे की गणना...

सरकार के प्रति असंतोष को बढ़ावा देने के अभाव में राजद्रोह का अपराध नहीं बनता: कर्नाटक हाईकोर्ट ने पुलिस एसोसिएशन के नेता के खिलाफ मामला खारिज किया
सरकार के प्रति असंतोष को बढ़ावा देने के अभाव में राजद्रोह का अपराध नहीं बनता: कर्नाटक हाईकोर्ट ने पुलिस एसोसिएशन के नेता के खिलाफ मामला खारिज किया

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक बर्खास्त पुलिस कांस्टेबल के खिलाफ दर्ज राजद्रोह के मामले को खारिज कर दिया है। उसने वर्ष 2016 में अखिल कर्नाटक पुलिस महा संघ (वेलफेयर बॉडी) नामक एक पुलिस एसोसिएशन का गठन किया था। उस पर आरोप लगा था कि वह पुलिस के निचले पायदान के कर्मचारियों को मौजूदा चुनी हुई सरकार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए भड़का रहा है।जस्टिस हेमंत चंदनगौदर की एकल पीठ ने वी शशिधर और अन्य द्वारा दायर याचिकाओं की अनुमति दी, जिन पर आईपीसी की धारा 124 ए, 166 सहपठित धारा 120 (बी) और 109, कर्नाटक आवश्यक सेवा...

हाईकोर्ट ऑफ कर्नाटक
POCSO एक्ट आरोपियों पर सबूतों का भार डालता है, सीआरपीसी की धारा 311 के तहत महत्वपूर्ण गवाहों को समन करने की अनुमति दी जानी चाहिए : कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने POCSO (लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (The Protection Of Children From Sexual Offences Act, 2012) एक्ट के तहत दायर मुकदमे के संबंध में कहा कि अभियुक्त द्वारा सीआरपीसी की धारा 311 के तहत महत्वपूर्ण गवाहों को समन करने के लिए किए गए आवेदन को सामान्य रूप से अनुमति दी जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने कहा कि यह अनुमति तब तक दी जानी चाहिए जब तक अदालत इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच जाती आरोप गलत या सही है।जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने पेरियास्वामी एम द्वारा दायर...

धर्मशास्त्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के 78 छात्रों ने उपचारात्मक कक्षाओं के लिए अत्यधिक फीस लेने के फैसले को चुनौती देते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया
धर्मशास्त्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के 78 छात्रों ने 'उपचारात्मक' कक्षाओं के लिए अत्यधिक फीस लेने के फैसले को चुनौती देते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया

धर्मशास्त्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, जबलपुर के 78 छात्रों ने सत्रांत परीक्षा में बैठने के लिए उपचारात्मक कक्षाओं (Remedial Classes) के लिए 7500 रुपए प्रति विषय फीस लेने के यूनिवर्सिटी प्रशासन के निर्णय को चुनौती देते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (जबलपुर पीठ) का रुख किया है।छात्रों का कहना है कि उन्हें पहले ही सत्रांत परीक्षा लिखने से रोक दिया गया है, इसलिए उन्हें सत्रांत परीक्षा लिखने के लिए पात्र बनने के लिए उपचारात्मक कक्षाओं के नाम पर प्रति विषय 7500 रुपए का भुगतान करने के लिए कैसे कहा जा सकता...

रिट कोर्ट बैंकों और उधारकर्ता के बीच लेन-देन का परीक्षण नहीं कर सकता क्योंकि वह प्रकृति में अनिवार्य अनुबंध हैं : कर्नाटक हाईकोर्ट
रिट कोर्ट बैंकों और उधारकर्ता के बीच लेन-देन का परीक्षण नहीं कर सकता क्योंकि वह प्रकृति में अनिवार्य अनुबंध हैं : कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि रिट अदालतों के पास बैंकों के "विवेकपूर्ण निर्णयों" का पुनर्मूल्यांकन करने के लिए न तो साधन हैं और न ही विशेषज्ञता है जो व्यापार में संचित ज्ञान के साथ उनके वाणिज्यिक लेनदेन के सामान्य पाठ्यक्रम में किए जाते हैं।जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित की एकल पीठ ने इस प्रकार मेसर्स नितेश रेजीडेंसी होटल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर एक याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें यस बैंक द्वारा दी गई सभी क्रेडिट सुविधाओं को वापस लेने को चुनौती दी गई थी। फर्म ने सरफेसी अधिनियम के तहत जारी किए...

अभियुक्तों के लिए एनआई अधिनियम की धारा 139 के तहत अनुमान का खंडन करने के लिए सबूत का मानक संभावनाओं की प्रबलता का है: झारखंड हाईकोर्ट
अभियुक्तों के लिए एनआई अधिनियम की धारा 139 के तहत अनुमान का खंडन करने के लिए सबूत का मानक 'संभावनाओं की प्रबलता' का है: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने दोहराया है कि जब नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट (एनआई) एक्ट की धारा 138 के तहत एक आरोपी को चेक धारक के पक्ष में अनुमान का खंडन करना होता है, तो ऐसा करने के लिए सबूत का मानक 'संभावनाओं की प्रबलता' है।यह टिप्पणी जस्टिस दीपक रोशन की ओर से आई:"यद्यपि अधिनियम की धारा 138 चेक के बाउंस होने के संबंध में एक मजबूत आपराधिक उपाय निर्दिष्ट करती है, धारा 139 के तहत खंडन योग्य अनुमान मुकदमेबाजी के दौरान अनुचित देरी को रोकने के लिए एक उपाय है। अनिवार्य औचित्य के अभाव में, 'रिवर्स ओनस क्लॉज' आमतौर पर...

केवल शादी की सही तारीख का उल्लेख न होने पर तलाक की अर्जी खारिज नहीं की जा सकती: राजस्थान हाईकोर्ट
केवल शादी की सही तारीख का उल्लेख न होने पर तलाक की अर्जी खारिज नहीं की जा सकती: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि तलाक के लिए आवेदन में केवल शादी की सही तारीख का उल्लेख न होने आवेदन को खारिज करने का कारण नहीं हो सकता।जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने कहा कि अगर फैमिली कोर्ट को संदेह है कि शादी के पहलू पर निष्कर्ष अनिर्णायक हैं तो वह पक्षकारों से सवाल पूछने के लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 165 के तहत शक्तियों का प्रयोग कर सकती है, ताकि आवेदन में किए गए कथनों की सत्यता सत्यापित किया जा सके।वर्तमान अपीलकर्ता द्वारा फैमिली कोर्ट द्वारा पारित जजमेंट/डिक्री का विरोध...

बिलकिस बानो गैंग रेप केस: गुजरात सरकार ने छूट नीति के तहत आजीवन कारावास की सजा काट रहे 11 दोषियों को रिहा करने का निर्देश दिया
बिलकिस बानो गैंग रेप केस: गुजरात सरकार ने छूट नीति के तहत आजीवन कारावास की सजा काट रहे 11 दोषियों को रिहा करने का निर्देश दिया

गुजरात के 2002 बिलकिस बानो गैंग रेप मामले (Bilkis Bano Gang Rape Case) में उम्रकैद की सजा पाने वाले 11 दोषियों को गुजरात सरकार की छूट नीति के तहत सोमवार को गोधरा जेल से रिहा कर दिया गया।2002 के गुजरात दंगों (Gujarat Riots) के दौरान बानो के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था।जनवरी 2008 में मुंबई की एक विशेष सीबीआई अदालत ने गुजरात में गोधरा के बाद के सांप्रदायिक दंगों के दौरान बिलकिस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार और उसके परिवार के सात सदस्यों के हत्या के दोषी पाए जाने के बाद 11 दोषियों को आजीवन...

Gujarat High Court
संविदात्मक अनुबंध के लिए सहमति देने वाला कामगार औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 25 एफ का लाभ नहीं उठा सकता: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने दोहराया कि रोजगार के सहमति पत्र में नियुक्ति अनुबंध के आधार पर विशिष्ट शर्त दी जाती है तो ऐसे में कर्मचारी प्रतिवादी प्रतिष्ठान द्वारा औद्योगिक विवाद अधिनियम धारा 25 (एफ) के उल्लंघन के तहते किसी भी लाभ का दावा नहीं कर सकता।वर्तमान याचिका वरिष्ठ अधिकारी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए श्रम न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर की गई है। इसमें कहा गया कि श्रम न्यायालय को यह मानना ​​चाहिए कि संविदा नियुक्ति केवल 'छलावरण' है और वह छंटनी मुआवजे की हकदार है।प्रतिवादी ने जोर देकर कहा कि...

POCSO Act-यह असंभव है कि जिस नाबालिग का शिक्षक द्वारा यौन शोषण किया जा रहा हो, वह अपने माता-पिता/दोस्तों से शिकायत नहीं करेगी : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
POCSO Act-यह असंभव है कि जिस नाबालिग का शिक्षक द्वारा यौन शोषण किया जा रहा हो, वह अपने माता-पिता/दोस्तों से शिकायत नहीं करेगी : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में पॉक्सो एक्ट(लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012) के तहत आरोपी और सजा पाए एक स्कूल शिक्षक को बरी करते हुए कहा है कि यह बहुत ही असंभव है कि एक नाबालिग लड़की जिसका उसके शिक्षक द्वारा एक से अधिक अवसरों पर यौन शोषण किया गया हो, वह इस तथ्य का खुलासा अपने माता-पिता या उसके शिक्षक या उसके किसी कक्षा के साथी के समक्ष नहीं करेगी।जस्टिस जीएस संधावालिया और जस्टिस विकास सूरी की खंडपीठ ने आगे कहा कि एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी ने सभी सबूत मिटा दिए हैं।...