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एलोपैथी डॉक्टर बनाम बाबा रामदेव: हाईकोर्ट ने योग गुरु को जनता को गुमराह न करने, आयुर्वेद के सम्मान की रक्षा करने को कहा
एलोपैथी डॉक्टर बनाम बाबा रामदेव: हाईकोर्ट ने योग गुरु को जनता को गुमराह न करने, आयुर्वेद के सम्मान की रक्षा करने को कहा

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को बाबा रामदेव से कहा कि उनके अनुयायियों और उनकी बातों पर विश्वास करने वाले लोगों के लिए उनका स्वागत है, हालांकि, एलोपैथी के खिलाफ बयान देकर जनता को गुमराह नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने पतंजलि के उत्पाद कोरोनिल के पक्ष में बोलते हुए योग गुरु को आधिकारिक से ज्यादा कुछ भी कहने से परहेज करने को कहा।बड़े पैमाने पर जनता के हित पर चिंता व्यक्त करते हुए, जस्टिस अनूप जे भंभानी ने कहा कि आयुर्वेद के अच्छे नाम और प्रतिष्ठा को किसी भी तरह से नष्ट नहीं किया जाना चाहिए।जस्टिस...

मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने अन्नाद्रमुक में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया; नई सामान्य परिषद की बैठक के आयोजन का निर्देश

मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को अन्नाद्रमुक पार्टी की आम परिषद की नई बैठक आयोजित करने का आदेश दिया। अदालत ने यथास्थिति का भी आदेश दिया, जैसा स्थिति 23 जून को थी यानी 11 जुलाई को सामान्य परिषद की बैठक होने से पहले। अदालत ने देखा कि केवल समन्वयक और संयुक्त समन्वयक के पास ही सामान्य परिषद को बुलाने की शक्तियां थीं।जस्टिस जी जयचंद्रन की पीठ ने इस प्रकार तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम द्वारा पार्टी से उनके निष्कासन और 11 जुलाई को आयोजित अन्नाद्रमुक पार्टी की आम परिषद की बैठक को चुनौती देने...

हाईकोर्ट ऑफ कर्नाटक
[निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट] मामले के निपटारे में देरी धारा 143A के तहत अंतरिम मुआवजा देने का आधार नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) ने कहा है कि निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (NIAct) की धारा 138 के तहत दायर मामले के निपटारे में देरी अधिनियम की धारा 143 ए के तहत अंतरिम मुआवजा देने का आधार नहीं हो सकता है।जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने पद्मनाभ टीजी द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया और दिनांक 09.11.2021 के आदेश को रद्द कर दिया जिसमें याचिकाकर्ता को चेक राशि का 10 प्रतिशत भुगतान करने का निर्देश दिया गया और मामले को फिर से आदेश पारित करने के लिए मजिस्ट्रेट अदालत को वापस भेज दिया...

झारखंड हाईकोर्ट
विशेष क्षेत्राधिकार सिविल सूट के लिए अच्छा, मध्यस्थता की सीट को प्रभावित नहीं कर सकता: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने माना कि केवल इसलिए कि एक भ‌िन्न न्यायालय को विशेष अधिकार क्षेत्र प्रदान किया गया है, यह विपरीत संकेत नहीं हो सकता और मध्यस्थता का स्थान अभी भी मध्यस्थता की सीट ही होगी।जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि विशेष क्षेत्राधिकार क्लॉज मध्यस्थता के स्थान/सीट के पदनाम का स्थान नहीं ले सकता है।अनन्य क्षेत्राधिकार और सीट/स्थल के बीच संतुलन बनाते हुए, अदालत ने माना कि अनन्य क्षेत्राधिकार क्लॉज में बल होगा, जब पार्टियां सिविल सूट का सहारा लेंगी और स्थल का पदनाम मध्यस्थता की...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज में प्राइवेट सर्वेयर द्वारा बनाए गए चंद्रशेखर आज़ाद पार्क का ले आउट प्लान खारिज किया, राज्य को नई योजना तैयार करने का आदेश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज में प्राइवेट सर्वेयर द्वारा बनाए गए चंद्रशेखर आज़ाद पार्क का ले आउट प्लान खारिज किया, राज्य को नई योजना तैयार करने का आदेश दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को प्रयागराज जिले में प्रायवेट लैंड सर्वेयर प्रोजेक्ट कंसल्टिंग इंजीनियर द्वारा बनाए गए अमर चंद्रशेखर आजाद पार्क की ले आउट प्लान खारिज कर दी। कोर्ट ने राज्य सरकार को नई लेआउट योजना के साथ आने का निर्देश दिया।[नोट: यह पार्क (अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद पार्क) भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित एतिहासिक महत्व रखता है। वर्ष 1931 में महान क्रांतिकारी और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत शहीद भगत सिंह के सहयोगी चंद्रशेखर आजाद को अंग्रेजों द्वारा इसी पार्क में बेरहमी से...

पति का पत्नी को आगे की पढ़ाई के लिए कहना, बच्चा पैदा करने के बारे में विचार व्यक्त करना क्रूरता नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट
पति का पत्नी को आगे की पढ़ाई के लिए कहना, बच्चा पैदा करने के बारे में विचार व्यक्त करना 'क्रूरता' नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि एक पति अपनी पत्नी को शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए सुझाव दे या उसे ऐसा कहे तो उसे क्रूरता नहीं माना जा सकता है।ज‌स्टिस डॉ एचबी प्रभाकर शास्त्री की एकल पीठ ने डॉ शशिधर सुब्बान्ना और उनकी मां द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका को स्वीकार कर लिया और भारतीय दंड की धारा 498-ए, धारा 34 और दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए निचली अदालत द्वारा उन्हें दी गई सजा को रद्द कर दिया।निचली अदालत ने 7 सितंबर 2013 के आरोपियों को दोषी ठहराया था और सत्र अदालत ने एक...

उम्मीदवार अधिकार के रूप में यह दावा नहीं कर सकते कि किसी भी सरकारी पद पर हर साल भर्ती होनी चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
उम्मीदवार अधिकार के रूप में यह दावा नहीं कर सकते कि किसी भी सरकारी पद पर हर साल भर्ती होनी चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उम्मीदवार अधिकार के रूप में दावा नहीं कर सकते कि किसी भी पद पर भर्ती हर साल की जानी चाहिए। इसके साथ ही कोर्ट ने कुछ अधिक उम्र के सहायक अभियोजन अधिकारी परीक्षा - 2022 उम्मीदवारों को राहत देने से इनकार कर दिया।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की पीठ ने इस बात पर भी जोर दिया कि राज्य सरकार की ओर से साल-वार पदों पर भर्ती नहीं करने की निष्क्रियता के कारण उम्मीदवारों को अधिक आयु होने के कारण चयन प्रक्रिया में भाग लेने का अधिकार नहीं मिल सकता।संक्षेप में मामलाकुछ एपीओ परीक्षा, 2022...

[मोटर दुर्घटना] साक्षर दावेदार विवेक का प्रयोग कर सकते हैं, ट्रिब्यूनल को बिना कारण बताए फिक्स्ड डिपॉजिट रिसीप्ट में अपना पैसा निवेश करने से बचना चाहिए: गुजरात हाईकोर्ट
[मोटर दुर्घटना] साक्षर दावेदार विवेक का प्रयोग कर सकते हैं, ट्रिब्यूनल को बिना कारण बताए फिक्स्ड डिपॉजिट रिसीप्ट में अपना पैसा निवेश करने से बचना चाहिए: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने एक वायु सेना के व्यक्ति को मोटर दुर्घटना दावों में दिए गए मुआवजे की फिक्स्ड डिपॉजिट रिसीप्ट को समय से पहले निकालने की अनुमति दी, जो अपने स्थायी निवास के लिए घर खरीदने का इरादा रखता है।जस्टिस गीता गोपी ने कहा,"जमा किए गए धन दावेदारों के हैं। साक्षर विवेकपूर्ण ढंग से विवेक का प्रयोग कर सकते हैं, अपने फंड का प्रबंधन कर सकते हैं और व्यक्तिगत रूप से फंड के निवेश के लिए व्यवस्थित योजना के बारे में निर्णय ले सकते हैं। साक्षर व्यक्ति के मामले में, ट्रिब्यूनल को...

मद्रास हाईकोर्ट
क्या घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12 के तहत कार्यवाही को संविधान के अनुच्छेद 227/धारा 482 सीआरपीसी के तहत चुनौती दी जा सकती है? मद्रास हाईकोर्ट ने मामले को बड़ी पीठ को भेजा

मद्रास हाईकोर्ट के एक एकल न्यायाधीश ने हाल ही में घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12 के तहत एक आवेदन को रद्द करने के लिए धारा 482 सीआरपीसी और / या संविधान के अनुच्छेद 227 के प्रावधानों की प्रयोज्यता के संबंध में सवालों को बड़ी पीठ को संदर्भित किया।जस्टिस एन सतीश कुमार सीआरपीसी की धारा 482 के तहत प्रावधान लागू करके डीवी अधिनियम की धारा 12 के तहत दायर आवेदन को रद्द करने की मांग वाली याचिकाओं के एक बैच पर विचार कर रहे थे।जस्टिस सतीश कुमार ने पाया कि हाल ही में खंडपीठ के आदेश ने फैसला सुनाया कि घरेलू...

जस्टिस सुनील थॉमस को कैट एर्नाकुलम बेंच में न्यायिक सदस्य के रूप में नियुक्त किया
जस्टिस सुनील थॉमस को कैट एर्नाकुलम बेंच में न्यायिक सदस्य के रूप में नियुक्त किया

केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने बुधवार को केरल हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुनील थॉमस को अपनी एर्नाकुलम पीठ में न्यायिक सदस्य नियुक्त किया।जस्टिस थॉमस नौ सितंबर तक पदभार ग्रहण कर सकते हैं।संयुक्त रजिस्ट्रार द्वारा जारी कार्यालय आदेश इस प्रकार है:"भारत सरकार के कार्मिक लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग आदेश संख्या ए- 11013/1/2021 - एटी दिनांक 06.08.2022, के अनुपालन में माननीय अध्यक्ष, केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण को माननीय श्री जस्टिस सुनील थॉमस को केंद्रीय...

कर्नाटक हाईकोर्ट ने लेजिस्लेटिव पैनल द्वारा नर्सिंग कॉलेजों के इंस्पेक्शन को मंजूरी दी
कर्नाटक हाईकोर्ट ने लेजिस्लेटिव पैनल द्वारा नर्सिंग कॉलेजों के इंस्पेक्शन को मंजूरी दी

कर्नाटक हाईकोर्ट ने स्पेशल हाउस कमेटी के गठन को बरकरार रखा है। इस कमेटी को राज्य के सभी नर्सिंग कॉलेजों और संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान संस्थानों का दौरा करने और यह पता लगाने के लिए इंस्पेक्शन करने का अधिकार दिया गया कि वे भारतीय नर्सिंग परिषद के निर्देशों के अनुसार काम कर रहे हैं या नहीं। साथ ही क्या उनके पास आवश्यक बुनियादी ढांचा और अन्य सुविधाएं हैं।कर्नाटक विधान परिषद में प्रक्रिया और कार्य संचालन के नियमों के नियम 242ए के खंड (1) के अनुसार कमेटी का गठन किया गया।जस्टिस एम आई अरुण की एकल पीठ ने...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 के तहत एक सह-आरोपी द्वारा दिया गया डिसक्लोजर बयान नॉन मेकर आरोपी के खिलाफ कानूनी सबूत नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने हाल ही में कहा कि साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 के तहत एक सह-अभियुक्त द्वारा दिया गया डिसक्लोजर बयान नॉन मेकर आरोपी के खिलाफ कानूनी सबूत नहीं है।जस्टिस निजामोद्दीन जहीरोद्दीन जमादार की पीठ ने एक राजू जोखनप्रसाद गुप्ता को उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 307 [हत्या का प्रयास] के तहत दर्ज एक मामले में जमानत देते हुए यह टिप्पणी की।पूरा मामलाप्रथम शिकायतकर्ता/पीड़ित किरण रतिलाल कटारिया रीटर कंपनी में उपाध्यक्ष (एचआर) के रूप में कार्यरत हैं और आवेदक राजू गुप्ता 'रवि...

Consider The Establishment Of The State Commission For Protection Of Child Rights In The UT Of J&K
केवल कई सालों की सर्विस नियमितिकरण का हक़दार नहीं बनाती, पद के लिए आवश्यक अन्य पात्रताएं सर्वोपरि: जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट

जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में कहा है कि सात साल की निरंतर सेवा पूरा करने से एक डेली वेजर नियमितीकरण का हकदार नहीं हो जाएगा, जब तक कि अन्य पात्रता शर्तों को पूरा नहीं किया जाता है।चीफ जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस जावेद इकबाल वानी की पीठ 1994 में जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा नियुक्त डेली वेजजर्स के पक्ष में पारित एकल पीठ के फैसले के खिलाफ एक अपील पर सुनवाई कर रही थी।प्रतिवादियों ने एकल न्यायाधीश के समक्ष अपनी याचिका में कहा था कि पदोन्नति, वरिष्ठता, पेंशन और अन्य...

सरकार ने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को खुद चौबीसों घंटे चलने की अनुमति दी, पुलिस अपने दम पर समय को सीमित नहीं कर सकती: मद्रास हाईकोर्ट
सरकार ने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को खुद चौबीसों घंटे चलने की अनुमति दी, पुलिस अपने दम पर समय को सीमित नहीं कर सकती: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने देर रात के दौरान पुलिस को उसके व्यवसाय में हस्तक्षेप न करने का निर्देश देने की मांग को लेकर दुकानकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि तमिलनाडु सरकार ने पहले ही राज्य में दुकानों को 24×7 चलाने की अनुमति देने के आदेश पारित कर दिए हैं। ऐसे में कानून-व्यवस्था की स्थिति को छोड़कर पुलिस व्यवसाय में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।जस्टिस एन सतीश कुमार ने कहा:सरकार ने जब खुद 24x7 के लिए व्यवसाय चलाने की अनुमति दी है तो पुलिस अपने दम पर समय को सीमित नहीं कर सकती।तद्नुसार, प्रतिवादियों को...

आर्बिट्रेटर की नियुक्ति की मांग करने वाले पक्षकार को अधिनियम की धारा 11(6) के तहत प्रक्रिया का पालन करके दूसरे पक्षकर की विफलता दिखाना चाहिए: जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट
आर्बिट्रेटर की नियुक्ति की मांग करने वाले पक्षकार को अधिनियम की धारा 11(6) के तहत प्रक्रिया का पालन करके दूसरे पक्षकर की विफलता दिखाना चाहिए: जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि अदालत के हस्तक्षेप के माध्यम से मध्यस्थ की नियुक्ति की मांग करने वाले पक्षकार को यह प्रदर्शित करना चाहिए कि प्रक्रिया का पालन करने और पहले मध्यस्थ की नियुक्ति के अनुरोध को स्वीकार करने में दूसरे पक्ष द्वारा विफल रहा है। इसलिए वह अदालत का रुख कर रहे हैं।चीफ जस्टिस पंकज मिथल की एकल पीठ जम्मू-कश्मीर मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1997 की धारा 11 (6) के तहत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 के साथ समान है, ताकि...

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
'संभावित बचाव' पेश कर पाने में विफलता या चेक जारी करने और हस्ताक्षर करने से इनकार धारा 139 एनआई एक्ट के तहत अनुमान को मजबूत करता है: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि चेक का आहर्ता "संभावित बचाव" जुटाने में विफल रहता है या कानूनी रूप से लागू करने योग्य ऋण के अस्तित्व का विरोध करने या उसके बाद चेक जारी करने और हस्ताक्षर करने से इनकार करने में विफल रहता है तो परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 139 के तहत वैधानिक अनुमान चेक धारक के पक्ष में प्रभावी होता है। जस्टिस संदीप शर्मा ने एक चेक आहर्ता द्वारा दायर एक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें मजिस्ट्रेट द्वारा पारित दोषसिद्धि के फैसले और अपील में इसकी...

प्रतिवादी द्वारा भुगतान की देयता विवादित नहीं होने पर मध्यस्थता खंड रिट याचिका के सुनवाई योग्य होने में बाधा नहीं: पटना हाईकोर्ट
प्रतिवादी द्वारा भुगतान की देयता विवादित नहीं होने पर मध्यस्थता खंड रिट याचिका के सुनवाई योग्य होने में बाधा नहीं: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने माना कि प्रतिवादी द्वारा भुगतान की देयता विवादित नहीं होने पर मध्यस्थता खंड रिट याचिका के सुनवाई योग्य होने में बाधा नहीं।जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह और जस्टिस मधेश प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि एक बार प्रतिवादी द्वारा भुगतान की देयता स्वीकार कर लेने के बाद कोई विवाद नहीं रहता, जिसे मध्यस्थता खंड के लिए भेजा जा सकता हो। इसलिए, मध्यस्थता खंड (Arbitration Clause) अब रिट याचिका के लिए एक बार नहीं होगा।कोर्ट ने आगे कहा कि संविदात्मक मामलों में किसी पक्ष को भुगतान से केवल इसलिए इनकार नहीं...

प्रारंभिक मुद्दे पूरी तरह से तथ्यों के अलगाव में कानून के बिंदु पर निर्धारित होते हैं: त्रिपुरा हाईकोर्ट
प्रारंभिक मुद्दे पूरी तरह से तथ्यों के अलगाव में कानून के बिंदु पर निर्धारित होते हैं: त्रिपुरा हाईकोर्ट

त्रिपुरा हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि मुकदमे में मुख्य विवादों को 'प्रारंभिक मुद्दों' के रूप में तय नहीं किया जा सकता है, क्योंकि उन्हें फुल ट्रायल और साक्ष्य की अगुवाई की आवश्यकता होती है।जस्टिस टी. अमरनाथ गौड़ ने कहा कि प्रारंभिक रूप से निर्धारित किए जाने वाले मुद्दे विशेष रूप से और विशुद्ध रूप से तथ्यों के अलगाव में कानून के बिंदु पर होंगे, लेकिन कानून और तथ्य के मिश्रित प्रश्न नहीं होंगे।बेंच ने देखा,"मुद्दा जो कानूनी प्रकृति का है और O-XIV, R-2(2) के तहत आने वाले न्यायालय के अधिकार क्षेत्र...

केरल हाईकोर्ट ने अधिकारियों से मानव-वन्यजीव संघर्षों को कम करने के लिए कार्रवाई में तेजी लाने का आग्रह किया
केरल हाईकोर्ट ने अधिकारियों से मानव-वन्यजीव संघर्षों को कम करने के लिए कार्रवाई में तेजी लाने का आग्रह किया

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में संबंधित अधिकारियों से राज्य में मानव-पशु संघर्ष से निपटने के लिए प्रस्तावित दिशानिर्देशों को लागू करने की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा।चीफ जस्टिस एस. मणिकुमार और जस्टिस शाजी पी. शैली की खंडपीठ ने कहा कि हालांकि इस मुद्दे से निपटने के लिए प्रस्ताव पहले ही पेश किए जा चुके हैं, लेकिन उन्हें व्यवहार में लागू किया जाना बाकी है।खंडपीठ ने कहा,"जितना दिशा-निर्देशों को लागू किया गया है और कदम भी उठाए गए हैं ... हम केवल यह देखते हैं कि प्रस्तावों और की जाने वाली कार्रवाई में...

कलकत्ता हाईकोर्ट
जब अनुबंध में इस तरह के शुल्क का प्रावधान नहीं है तो द मेजर पोर्ट ट्रस्ट एक्ट, 1963 के तहत विलंब शुल्क का अवार्ड मान्य नहीं: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने माना कि पक्षकारों के बीच अनुबंध में इस तरह के नुकसान के लिए कोई प्रावधान न होने पर मध्यस्थ ट्रिब्यूनल द मेजर पोर्ट ट्रस्ट एक्ट, 1963 के आधार पर विलंब शुल्क नहीं दे सकता।जस्टिस कृष्ण राव की खंडपीठ ने कहा कि ट्रिब्यूनल के इस तरह के आरोप लगाने के लिए समझौते में किसी प्रावधान के अभाव में विलंब शुल्क शुल्क प्रदान करने के कराया गया मध्यस्थ अवार्ड पेटेंट अवैधता से दूषित होगा। कोर्ट ने माना कि ट्रिब्यूनल विलंब शुल्क देने के लिए द मेजर पोर्ट ट्रस्ट एक्ट, 1963 के प्रावधानों का सहारा...