इलाहाबाद हाईकोट
नाबालिग स्टूडेंट को बुर्का पहनाने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव के आरोपी स्टूडेंट को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत, मिली अग्रिम जमानत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूली स्टूडेंट को अग्रिम जमानत दी, जिस पर आरोप है कि उसने नाबालिग स्टूडेंट का कथित रूप से ब्रेनवॉश कर उसे बुर्का पहनने और इस्लाम धर्म अपनाने के लिए दबाव डाला।जस्टिस अवनीश सक्सेना की पीठ ने आरोपी स्टूडेंट मालिश्का उर्फ मालिश्का फातमा को राहत देते हुए कहा कि पीड़िता के बयान के अतिरिक्त रिकॉर्ड पर ऐसा कोई अन्य ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे आरोपी की संलिप्तता प्रथम दृष्टया स्थापित हो सके।आरोपी के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 और 5(1) के...
अवमानना कार्यवाही शुरू करने से इनकार के खिलाफ इंट्रा-कोर्ट अपील नहीं होगी, जब तक अदालत ने अधिकार क्षेत्र न लांघा हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोहराया कि अवमानना अदालत द्वारा कार्यवाही शुरू करने से इनकार किए जाने के आदेश के खिलाफ विशेष अपील अथवा इंट्रा-कोर्ट अपील दाखिल नहीं की जा सकती, जब तक यह न दिखाया जाए कि अवमानना अदालत ने अपने अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण करते हुए पक्षकारों के अधिकारों या मूल विवाद के गुण-दोष पर फैसला दे दिया।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि यदि अवमानना अदालत बिना मूल विवाद के गुण-दोष में गए केवल कार्यवाही प्रारंभ करने से इनकार करती है, तो उसके आदेश के विरुद्ध...
'I Love Mohammed' पोस्ट मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी ज़मानत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसे व्यक्ति को ज़मानत दी, जिस पर अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर यह पोस्ट करने का आरोप था कि वह 'I Love Mohammed' के लिए अपना सिर कटवा भी सकता है और दूसरों का सिर काट भी सकता है।जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की बेंच ने यह टिप्पणी की कि आवेदक द्वारा की गई 'कथित आपत्तिजनक' पोस्ट में किसी खास जाति या समुदाय का नाम नहीं लिया गया।आरोपी-नदीम मुजफ्फरनगर ज़िले का रहने वाला है। उस पर पिछले साल यूपी पुलिस ने उसकी इंस्टाग्राम प्रोफ़ाइल पर कथित तौर पर संवेदनशील टिप्पणियाँ करने के...
मथुरा भगदड़ मामलों पर हाईकोर्ट सख्त, भीड़ प्रबंधन नीति और अवैध निर्माण पर प्रशासन को लगाई फटकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा में हालिया भगदड़ जैसी घटनाओं और अवैध निर्माणों को लेकर प्रशासनिक तंत्र पर कड़ी नाराजगी जताते हुए मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण तथा जिला प्रशासन को फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर प्रशासन की उदासीनता चिंताजनक है।जस्टिस विनोद दिवाकर की पीठ ने मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण द्वारा दाखिल हलफनामे पर असंतोष जताते हुए पूछा कि उसके अधिकार क्षेत्र में अवैध निर्माण रोकने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कोई नीति क्यों नहीं...
2013 की हिस्ट्रीशीट: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद POCSO मामले के शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज ने मामला रद्द कराने पहुंचे हाइकोर्ट
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ दर्ज POCSO मामले के प्रथम सूचना दाता आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने वर्ष 2013 में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा खोली गई अपनी हिस्ट्रीशीट को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने पुलिस निगरानी रजिस्टर से अपना नाम हटाने की भी मांग की।आशुतोष महाराज ने स्वयं अदालत में पेश होकर कहा कि उनके खिलाफ शामली जिले के कांधला थाने में हिस्ट्रीशीट खोली गई। याचिका में उनका कहना है कि जिन आपराधिक मामलों का हवाला देकर यह कार्रवाई की गई, उनमें कई मामलों...
सिविल सेवकों को 'माननीय' लिखने का अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि संप्रभु कार्यों का निर्वहन करने वाले संवैधानिक पदाधिकारियों को प्रत्येक आधिकारिक संचार में माननीय संबोधन दिया जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि सांसद, मंत्री, जज तथा अन्य ऐसे संवैधानिक पदाधिकारी इस सम्मानसूचक संबोधन के हकदार हैं जबकि किसी भी रैंक के सिविल सेवक इस विशेष संबोधन के पात्र नहीं हैं।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने कहा कि किसी व्यक्ति की निजी नाराजगी या पारिवारिक परिचय के आधार पर किसी संवैधानिक पदाधिकारी...
मथुरा भगदड़: हाईकोर्ट ने अपनाया सख्त रुख, भीड़ और संकट प्रबंधन की पूरी योजना मांगी
मथुरा में धार्मिक अवसरों पर लगातार सामने आ रही भगदड़ जैसी घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन से पूछा कि क्या शहर में भीड़ और आपदा प्रबंधन के लिए कोई समग्र योजना मौजूद हैजस्टिस विनोद दिवाकर की पीठ ने प्रशासन से यह भी पूछा कि भीड़जनित आपदाओं से निपटने के लिए कौन-सी रणनीतियां, प्रबंधन सिद्धांत और प्रशिक्षण व्यवस्थाएं लागू हैं तथा संबंधित पक्षों को जागरूक करने और संस्थागत क्षमता बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए गए।मामले की सुनवाई स्वामी शिव स्वरूपानंद जी महाराज द्वारा दायर...
मौजूद ही नहीं जो कानून, उसी के तहत दे दिया तलाक: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बांदा फैमिली कोर्ट द्वारा पारित तलाक डिक्री रद्द करते हुए कड़ी टिप्पणी की कि अदालत ने ऐसे कानून के तहत तलाक दिया, जिसका अस्तित्व ही नहीं है। हाईकोर्ट ने संबंधित न्यायिक अधिकारी के फैसले को अत्यंत लापरवाह और अनौपचारिक बताते हुए उसकी कार्यप्रणाली पर नाराज़गी जताई।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस विवेक सारन की खंडपीठ ने यह आदेश पति की अपील पर पारित किया, जिसने जनवरी 2026 में फैमिली कोर्ट द्वारा पत्नी को दिए गए तलाक आदेश को चुनौती दी थी।मामले में पत्नी ने अपनी याचिका मुस्लिम स्त्री...
अवैध जब्ती और जल्दबाज़ी में नीलामी पर राज्य सरकार को झटका: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कम-से-कम 2 लाख मुआवज़े का आदेश दिया
इलाहाबाद हाRकोर्ट ने कथित गौ-तस्करी के अप्रमाणित आरोप में वाहन जब्त कर जल्दबाज़ी में नीलाम करने पर उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाते हुए वाहन स्वामी को कम-से-कम 2 लाख रुपये मुआवज़ा देने का आदेश दिया। अदालत ने जब्ती और ज़ब्ती से जुड़े आदेश रद्द करते हुए कहा कि राज्य की कार्रवाई मनमानी, अवैध और कानून के विपरीत थी।जस्टिस संदीप जैन ने कहा कि यदि राज्य सरकार वाहन वापस नहीं कर सकती तो उसे वाहन स्वामी को अतिरिक्त 4 लाख रुपये वाहन मूल्य के रूप में देने होंगे।मामले के अनुसार 8 सितंबर 2024 को चंदौली जिले...
सामाजिक संतुलन को बिगाड़ने वाली धार्मिक प्रथाओं की शुरुआत या विस्तार अनुच्छेद 25 और 26 के तहत संरक्षित नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि किसी ऐसी धार्मिक प्रथा या उपयोग की शुरुआत या विस्तार, जो पहले से प्रचलित नहीं थी—विशेष रूप से यदि वह मौजूदा सामाजिक संतुलन को बिगाड़ती है—तो उसे संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत संरक्षण प्राप्त नहीं है।पीठ ने आगे कहा कि राज्य के लिए यह ज़रूरी नहीं है कि वह किसी वास्तविक व्यवधान का इंतज़ार करे; बल्कि, जहां ऐसी गतिविधि से सार्वजनिक जीवन प्रभावित होने की आशंका हो, वहां राज्य उचित निवारक उपाय कर सकता है।इन टिप्पणियों के साथ जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस गरिमा...
निजी ज़मीन पर नियमित सामूहिक धार्मिक गतिविधियां सरकारी नियमों से मुक्त नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि निजी संपत्ति पर धार्मिक प्रार्थनाएं आयोजित की जा सकती हैं, बशर्ते वे कभी-कभार और बिना किसी बाधा के हों; लेकिन जब संपत्ति का इस्तेमाल नियमित या संगठित सामूहिक गतिविधियों के लिए किया जाता है तो उस पर सरकारी नियम लागू हो सकते हैं।जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने आगे कहा कि अगर निजी संपत्ति पर ऐसी गतिविधि नियमित, संगठित या बड़े पैमाने पर होने लगती है तो इसे परिसर के इस्तेमाल के तरीके में बदलाव माना जा सकता है। यह योजना और स्थानीय नियमों...
NCLT इलाहाबाद में याचिकाओं की जांच केवल स्थानीय रजिस्ट्री करेगी: हाईकोर्ट ने प्रिंसिपल बेंच का 'संयुक्त स्क्रूटनी' आदेश स्थगित किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NCLT प्रिंसिपल बेंच, नई दिल्ली के उस आदेश/अधिसूचना पर रोक लगा दी है, जिसमें NCLT इलाहाबाद में दायर याचिकाओं एवं आवेदनों की संयुक्त जांच (स्क्रूटनी) इलाहाबाद और प्रिंसिपल बेंच दोनों द्वारा किए जाने का प्रावधान किया गया।जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय देते हुए अंतरिम आदेश पारित किया कि फिलहाल NCLT इलाहाबाद में दायर याचिकाओं/आवेदनों की जांच केवल NCLT इलाहाबाद की रजिस्ट्री ही करेगी।यह...
राहुल गांधी के खिलाफ FIR की मांग वाली याचिका खारिज
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। यह याचिका उनके कथित विवादित बयान को लेकर दाखिल की गई थी।जस्टिस विक्रम डी चौहान की पीठ ने बुधवार को खुले न्यायालय में यह आदेश सुनाया। मामले में विस्तृत आदेश अभी जारी होना बाकी है।यह याचिका हिंदू शक्ति दल की सदस्य सिमरन गुप्ता द्वारा दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि गांधी के कथित बयान से देशभर में लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। विवाद उस कथित टिप्पणी को लेकर है, जो 2025 में AICC कार्यालय के उद्घाटन के...
सुप्रीम कोर्ट ने 77 वर्षीय कैंसर पीड़ित की पेंशन याचिका पर शीघ्र सुनवाई के निर्देश दिए
सुप्रीम कोर्ट ने आज इलाहाबाद हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि 77 वर्षीय कैंसर पीड़ित व्यक्ति की लंबित पेंशन याचिका पर आउट-ऑफ-टर्न सुनवाई की जाए। अदालत ने हाईकोर्ट से मामले को सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण से देखने को कहा।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता ने 1 जून 1970 से 28 मई 1985 तक उत्तर प्रदेश राज्य सरकार में सेवा दी थी, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा देकर Gas Authority of India Limited (GAIL) जॉइन किया।याचिकाकर्ता का दावा है कि राज्य सेवा छोड़ने...
झूठी जानकारी देकर जनहित याचिका दायर करने पर वकील पर 25 हजार रुपये का जुर्माना, इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सड़क अतिक्रमण के खिलाफ जनहित याचिका दायर करने वाले वकील पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता ने अपने शपथपत्र में गलत जानकारी दी और अपने विरुद्ध लंबित आपराधिक मामलों को छिपाया। चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ ने कहा कि यह याचिका न्यायिक प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग है और ऐसे मामलों में लागत लगाना आवश्यक है ताकि निजी स्वार्थ के लिए जनहित याचिका का सहारा लेने वालों को हतोत्साहित किया जा सके।याचिकाकर्ता पेशे से एडवोकेट है।...
पंचायत चुनाव 2026: OBC आयोग गठन में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, यूपी सरकार से मांगी स्पष्ट समयसीमा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव 2026 के लिए समर्पित अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग के गठन में देरी पर राज्य सरकार से कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा कि आयोग का गठन आखिर कब तक किया जाएगा।जस्टिस सौरभ लवानिया की पीठ ने पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें आयोग गठन की स्पष्ट समयसीमा बतानी होगी।मामले की अगली सुनवाई 19 मई को होगी।अदालत अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसे अधिवक्ता मोतीलाल यादव ने दायर किया। याचिका में...
महाकुंभ भगदड़: हाईकोर्ट ने कहा—मुआवजा दावों का फैसला 30 दिन में जिला प्रशासन करे, आयोग नहीं
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जनवरी 2025 के महाकुंभ मेला भगदड़ मामले में स्पष्ट किया है कि पीड़ितों को अनुग्रह (ex gratia) मुआवजा देने के दावों का निपटारा राज्य द्वारा गठित न्यायिक जांच आयोग नहीं, बल्कि जिला प्रशासन और मेला प्राधिकरण द्वारा किया जाएगा, और यह प्रक्रिया 30 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस सत्य वीर सिंह की खंडपीठ संजय कुमार शर्मा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 29 जनवरी 2025 (मौनी अमावस्या) को हुई भगदड़ में उनके रिश्तेदार की मौत पर मुआवजा मांगा गया था।अदालत ने...
पुलिस को नहीं मिला फरार दुष्कर्म आरोपी, लेकिन हाइकोर्ट में हलफनामा दाखिल करने पहुंचा; इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जताई कड़ी नाराज़गी, CBI जांच पर विचार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कड़ी फटकार लगाई, जब यह सामने आया कि जिस सामूहिक दुष्कर्म आरोपी को पुलिस महीनों से फरार और अज्ञात स्थान पर बता रही है। वही आरोपी हाइकोर्ट की कार्यवाही में परोक्ष रूप से शामिल हो रहा था और हाल ही में हलफनामा दाखिल करने के लिए उसका आधिकारिक फोटोग्राफ भी न्यायालय परिसर में लिया गया।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यह स्थिति चौंकाने वाली है और प्रथम दृष्टया जांच अधिकारी...
सार्वजनिक स्थान पर कॉफी पीना भी डर का कारण बन गया': अंतरधार्मिक जोड़ों की उत्पीड़न पर NHRC की चुप्पी पर हाईकोर्ट में तीखी टिप्पणी, बेंच में मतभेद
इलाहाबाद हाईकोर्ट में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की भूमिका को लेकर सुनवाई के दौरान खंडपीठ के दो जजों के बीच असामान्य मतभेद देखने को मिले।जस्टिस अतुल श्रीधरन ने NHRC की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अंतरधार्मिक संबंधों में रहने वाले लोगों के लिए सार्वजनिक स्थान पर साथ कॉफी पीना तक भय का कारण बन गया है, जबकि आयोग ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान नहीं लेता।हालांकि जस्टिस विवेक सारन ने इन व्यापक टिप्पणियों से असहमति जताई और कहा कि बिना सभी पक्षों को सुने इस प्रकार की प्रतिकूल...
मदरसों की जांच का आदेश, लेकिन मॉब लिंचिंग पर स्वतः संज्ञान नहीं? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NHRC की भूमिका पर उठाए गंभीर सवाल
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि आयोग उत्तर प्रदेश के मदरसों की जांच जैसे मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है, जबकि मॉब लिंचिंग, भीड़ हिंसा और सतर्कतावादी हमलों जैसे गंभीर मामलों में स्वतः संज्ञान लेने के उदाहरण सामने नहीं आते।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस विवेक सरन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया ने वर्ष 2025 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा उत्तर...




















