इलाहाबाद हाईकोट

अगर तलाक पर कोई विवाद नहीं है तो मुस्लिम पति फैमिली कोर्ट से तलाक की घोषणा की मांग कर सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
अगर तलाक पर कोई विवाद नहीं है तो मुस्लिम पति फैमिली कोर्ट से तलाक की घोषणा की मांग कर सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट, फैमिली कोर्ट्स एक्ट, 1984 की धारा 7 के तहत तलाक की घोषणा कर सकता है, भले ही तलाक मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत हुआ हो और पार्टियों या किसी और ने उस पर कोई आपत्ति न जताई हो।जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस सैयद कमर हसन रिज़वी की बेंच ने कहा,“जब लखनऊ की फैमिली कोर्ट के एडिशनल प्रिंसिपल जज तलाक की वैधता या उसके बारे में संतुष्ट हैं और संबंधित पक्षों के बीच इस मामले पर कोई विवाद नहीं है - बल्कि प्रतिवादी/पत्नी ने खुद तलाक की डिक्री के लिए सहमति जताई है - तो फैमिली...

बुनकर की मौत उनकी विधवा को हाउसिंग कॉलोनी का क्वार्टर देने से इनकार करने का आधार नहीं हो सकती, बुनाई एक पुश्तैनी कला: इलाहाबाद हाईकोर्ट
बुनकर की मौत उनकी विधवा को हाउसिंग कॉलोनी का क्वार्टर देने से इनकार करने का आधार नहीं हो सकती, बुनाई एक पुश्तैनी कला: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब सरकार ने खुद बुनकर कॉलोनी में रह रहे बुनकरों को क्वार्टर ट्रांसफर करने का फैसला किया, तो बुनकर की मौत उनकी विधवा को वही अधिकार देने से इनकार करने का आधार नहीं हो सकती।यह देखते हुए कि भारत में बुनाई एक पुश्तैनी कला है, जो अगली पीढ़ी को मिलती है, कोर्ट ने कहा कि परिवार के मुखिया की मौत के बाद बुनकर के परिवार को कॉलोनी से बेदखल नहीं किया जा सकता।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच ने कहा,“जब सरकार ने खुद वहां रह रहे बुनकरों को क्वार्टर ट्रांसफर करने का...

S. 34 IPC | साझा इरादे के आधार पर दोषी ठहराने के लिए पहले से बनी योजना का सबूत ज़रूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1987 के मर्डर केस में आरोपी को बरी किया
S. 34 IPC | साझा इरादे के आधार पर दोषी ठहराने के लिए 'पहले से बनी योजना' का सबूत ज़रूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1987 के मर्डर केस में आरोपी को बरी किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि IPC की धारा 34 (कॉमन इंटेंशन/साझा इरादा) के तहत दोषी ठहराना तब तक कानूनी रूप से सही नहीं है, जब तक कोर्ट इस पक्के नतीजे पर न पहुँचे कि आरोपी ने "पहले से बनी योजना" के तहत और किसी तय प्लान के अनुसार काम किया था।जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की बेंच ने 1987 के एक मर्डर केस में आरोपी-अपीलकर्ता (लड्डन) को बरी करते हुए ये बातें कहीं।इसके साथ ही कोर्ट ने इलाहाबाद के एडिशनल सेशन जज का 1990 का फैसला भी रद्द किया, जिसमें अपीलकर्ता को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई...

सेल डीड के पंजीकरण के समय खरीदार और विक्रेता दोनों की मौजूदगी जरूरी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
सेल डीड के पंजीकरण के समय खरीदार और विक्रेता दोनों की मौजूदगी जरूरी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में बिक्री विलेख (Sale Deed) के पंजीकरण के समय खरीदार और विक्रेता दोनों की व्यक्तिगत मौजूदगी अनिवार्य नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में लागू पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 32A, केंद्रीय कानून से अलग है और इसमें दोनों पक्षों की उपस्थिति अनिवार्य नहीं की गई है।जस्टिस संदीप जैन ने यह टिप्पणी कानपुर की एक संपत्ति से जुड़े विवाद में ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए की। मामला शिवानी हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड और संपत्ति मालिक धर्म...

पीड़ित का रिश्तेदार होने मात्र से प्रत्यक्षदर्शी गवाह की गवाही खारिज नहीं की जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
पीड़ित का रिश्तेदार होने मात्र से प्रत्यक्षदर्शी गवाह की गवाही खारिज नहीं की जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल इस आधार पर कि कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह मृतक का करीबी रिश्तेदार है, उसकी गवाही को अविश्वसनीय नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि निकट संबंधी स्वाभाविक गवाह होते हैं और सामान्यतः वे असली अपराधी को छोड़कर किसी निर्दोष व्यक्ति को झूठा नहीं फंसाते।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी रणजीत पटेल की हत्या के मामले में दायर अपील खारिज करते हुए की। अदालत ने चचेरे भाई की लोहे की रॉड से हत्या के मामले में आरोपी की उम्रकैद की सजा बरकरार...

ससुराल में पत्नी की अस्वाभाविक मौत पर पति और परिजनों को देना होगा जवाब, चुप्पी भी बन सकती है दोष साबित करने की कड़ी : इलाहाबाद हाईकोर्ट
ससुराल में पत्नी की अस्वाभाविक मौत पर पति और परिजनों को देना होगा जवाब, चुप्पी भी बन सकती है दोष साबित करने की कड़ी : इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी महिला की ससुराल में घर के भीतर अस्वाभाविक परिस्थितियों में मृत्यु होती है और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की मजबूत श्रृंखला आरोपियों की ओर संकेत करती है तो भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 के तहत घर में मौजूद लोगों की जिम्मेदारी है कि वे उसकी मौत की परिस्थितियों का संतोषजनक स्पष्टीकरण दें। यदि वे ऐसा नहीं कर पाते तो यह उनके खिलाफ परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की एक महत्वपूर्ण कड़ी बन जाती है।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए...

पुराने आदेश का घोर अनादर: 2024 से यूपी अल्पसंख्यक आयोग में खाली पद न भरने पर हाईकोर्ट ने टॉप सेक्रेटरी को तलब किया
पुराने आदेश का 'घोर अनादर': 2024 से 'यूपी अल्पसंख्यक आयोग' में खाली पद न भरने पर हाईकोर्ट ने टॉप सेक्रेटरी को तलब किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को तलब किया। उनसे उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति न कर पाने की राज्य की लगातार विफलता के बारे में स्पष्टीकरण मांगा गया, जबकि उनका पिछला कार्यकाल 2024 में ही खत्म हो गया।राज्य के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताते हुए जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने सरकार के इस तरीके को दूसरी बेंच (जिसकी अध्यक्षता चीफ जस्टिस अरुण भंसाली ने की थी) द्वारा पहले दिए गए आदेश का "घोर...

यूपी को-ऑपरेटिव सोसाइटीज़ एक्ट के तहत अवार्ड के आधार पर बेची गई गिरवी रखी प्रॉपर्टी को वापस पाने का केस धारा 111(d) के तहत वर्जित: इलाहाबाद हाईकोर्ट
यूपी को-ऑपरेटिव सोसाइटीज़ एक्ट के तहत अवार्ड के आधार पर बेची गई गिरवी रखी प्रॉपर्टी को वापस पाने का केस धारा 111(d) के तहत वर्जित: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि गिरवी रखी प्रॉपर्टी को वापस पाने (रिडेम्पशन) के लिए किया गया सिविल केस, जिसे यूपी को-ऑपरेटिव सोसाइटीज़ एक्ट, 1965 के तहत पास हुए अवार्ड के आधार पर पहले ही बेचा जा चुका है, एक्ट की धारा 111(d) के तहत वर्जित है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अवार्ड में दखल दिए बिना यह राहत नहीं दी जा सकती।यूपी को-ऑपरेटिव सोसाइटीज़ एक्ट, 1965 की धारा 111 इस एक्ट के तहत आने वाले मामलों में सिविल और रेवेन्यू कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को रोकता है। क्लॉज़ (d) इस रोक को एक्ट के तहत दिए गए किसी भी अन्य...

अस्पतालों और ऑक्सीजन प्लांट को बिजली देने वाले बिजली कर्मचारी कोविड वॉरियर: इलाहाबाद हाईकोर्ट का ₹50 लाख की अनुग्रह राशि देने का आदेश
अस्पतालों और ऑक्सीजन प्लांट को बिजली देने वाले बिजली कर्मचारी 'कोविड वॉरियर': इलाहाबाद हाईकोर्ट का ₹50 लाख की अनुग्रह राशि देने का आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में फिर से कहा कि कोविड-ड्यूटी का "सीमित अर्थ" नहीं निकाला जा सकता है, जिससे इसे केवल उन लोगों तक ही सीमित कर दिया जाए, जिन्हें अस्पतालों में लोगों के इलाज के लिए विशेष रूप से ड्यूटी पर लगाया गया।इस तरह बेंच ने माना कि ज़रूरी सेवाओं से जुड़े कर्मचारी, जैसे कि बिजली विभाग के कर्मचारी जिन्होंने अस्पतालों और ऑक्सीजन प्लांट को बिना रुकावट बिजली सप्लाई सुनिश्चित की, उन्हें "कोविड वॉरियर" माना जाना चाहिए।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने यह बात तब...

शरिया कानून के तहत बालिग़ होने पर शादी की इजाज़त POCSO का उल्लंघन, बाल विवाह पर रोक सभी धर्मों पर लागू होती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
शरिया कानून के तहत बालिग़ होने पर शादी की इजाज़त POCSO का उल्लंघन, बाल विवाह पर रोक सभी धर्मों पर लागू होती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि शरिया/मुस्लिम पर्सनल लॉ, जो लड़की की शादी के लिए बालिग़ होने (puberty) की उम्र को सही मानता है, वह 'बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006' (PCMA) और 'POCSO Act' के साफ़ तौर पर खिलाफ़ है।जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने यह भी कहा कि देश के हर नागरिक के लिए शादी की उम्र एक ही है, चाहे उनका धर्म कोई भी हो, जैसा कि PCMA में बताया गया।ये बातें 19 लोगों की एक रिट याचिका खारिज करते हुए कही गईं। इन लोगों ने अपने खिलाफ़ दर्ज FIR रद्द करने की मांग की थी। FIR में उन पर...

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भारतीय कानून से ऊपर नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने X की कार्यशैली पर जताई सख्त नाराज़गी
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भारतीय कानून से ऊपर नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने X की कार्यशैली पर जताई सख्त नाराज़गी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) के असहयोगात्मक रवैये पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए कहा कि बहुराष्ट्रीय डिजिटल मंच भारतीय कानून और जांच एजेंसियों के प्रति जवाबदेही से बच नहीं सकते।अदालत ने स्पष्ट किया कि भारतीय कानून का दायरा इतना व्यापक है कि वह किसी भी उल्लंघन तक पहुंच सकता है और दोषियों को न्याय के कटघरे में ला सकता है।यह टिप्पणी जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस दिवेश चंद्र समंत की खंडपीठ ने एक साइबर अपराध मामले की सुनवाई के दौरान की।अदालत ने कहा,"सोशल मीडिया मंच...

1977 में ₹300 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए थे लेखपाल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 49 साल बाद भी रखी सज़ा बरकरार
1977 में ₹300 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए थे लेखपाल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 49 साल बाद भी रखी सज़ा बरकरार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते 41 साल पुरानी आपराधिक अपील खारिज की और कंसोलिडेशन लेखपाल की 1985 की सज़ा बरकरार रखी। उन्हें लगभग आधी सदी पहले ₹300 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया।जस्टिस संजीव कुमार की बेंच ने उन्हें सुनाई गई 1 साल की कठोर कारावास की सज़ा बरकरार रखी। उन्हें अपनी बाकी सज़ा काटने के लिए 4 हफ़्तों के भीतर ट्रायल कोर्ट के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया गया।इस मामले में कोर्ट ने साफ़ किया कि अगर ट्रैप की कार्रवाई की पुष्टि विजिलेंस अधिकारियों और स्वतंत्र गवाहों द्वारा...

दस्तावेज का कोई पन्ना छूट जाने या गलत जगह लग जाने से फैसला समीक्षा योग्य नहीं हो जाता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
दस्तावेज का कोई पन्ना छूट जाने या गलत जगह लग जाने से फैसला समीक्षा योग्य नहीं हो जाता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल किसी दस्तावेज का कोई पन्ना छूट जाने, गलत स्थान पर लग जाने या अभिलेख के साथ संलग्न नहीं होने मात्र से अदालत का फैसला त्रुटिपूर्ण नहीं माना जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि समीक्षा तभी संभव है, जब ऐसी चूक से रिकॉर्ड पर स्पष्ट दिखाई देने वाली कानूनी त्रुटि उत्पन्न हुई हो या उससे न्याय का गंभीर हनन हुआ हो। जस्टिस करुणेश सिंह पवार ने कहा,"किसी दस्तावेज के संकलन में किसी पृष्ठ का छूट जाना, गलत स्थान पर लग जाना या संलग्न नहीं होना...

राम मंदिर चंदा विवाद: CBI जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से इलाहाबाद हाईकोर्ट का इनकार
राम मंदिर चंदा विवाद: CBI जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से इलाहाबाद हाईकोर्ट का इनकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राम मंदिर चंदा विवाद में कथित वित्तीय अनियमितताओं की CBI जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।अदालत ने कहा कि इसी तरह की मांग वाली एक याचिका पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की खंडपीठ वकील मोहित अशोक द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।याचिका में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए नकद, सोना और चांदी के चढ़ावे के कथित गबन की CBI से स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध...

अज्ञात आय के स्रोत से मिली संपत्ति को स्वतः अपराध की कमाई नहीं माना जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी जमानत
अज्ञात आय के स्रोत से मिली संपत्ति को स्वतः अपराध की कमाई नहीं माना जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी जमानत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल किसी व्यक्ति की संपत्ति का स्रोत अज्ञात होने भर से यह नहीं माना जा सकता कि वह किसी अनुसूचित अपराध से अर्जित 'अपराध की आय' है।अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष को यह स्पष्ट रूप से स्थापित करना होगा कि संबंधित संपत्ति किसी अनुसूचित अपराध से प्राप्त हुई।जस्टिस विक्रम डी. चौहान ने यह टिप्पणी यमुना बेसिन में अवैध खनन से जुड़े धन शोधन मामले में एक आरोपी को जमानत देते हुए की।अदालत ने कहा,"किसी व्यक्ति...

ताजमहल सर्वे की मांग पर केंद्र और ASI से जवाब तलब, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
ताजमहल सर्वे की मांग पर केंद्र और ASI से जवाब तलब, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ताजमहल के सर्वे की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह याचिका आगरा की अदालत द्वारा ताजमहल का सर्वे कराने के लिए वकील आयुक्त नियुक्त करने से इनकार किए जाने के आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई।जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता हरि शंकर जैन की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया।याचिकाकर्ताओं का दावा है कि ताजमहल वास्तव में भगवान शिव को समर्पित प्राचीन...

निरीक्षण से पहले नोटिस नहीं देना प्रक्रिया में अनियमितता, अवैधता नहीं; कोई नुकसान न हो तो कार्रवाई वैध: इलाहाबाद हाईकोर्ट
निरीक्षण से पहले नोटिस नहीं देना प्रक्रिया में अनियमितता, अवैधता नहीं; कोई नुकसान न हो तो कार्रवाई वैध: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि स्टांप शुल्क की कमी से जुड़े मामलों में यदि जिला मजिस्ट्रेट बिना संबंधित पक्ष को पूर्व सूचना दिए स्थल निरीक्षण करते हैं, तो यह केवल प्रक्रियात्मक अनियमितता है अवैधता नहीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि इससे संबंधित पक्ष को कोई वास्तविक नुकसान या पूर्वाग्रह नहीं हुआ है तो केवल इसी आधार पर पूरी कार्रवाई रद्द नहीं की जा सकती।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश स्टांप (संपत्ति का मूल्यांकन) नियमावली, 1997 के नियम 7(3) के तहत कलेक्टर के लिए स्थल निरीक्षण...

परमानेंट लोक अदालत का यह कहना- समझौते की कोशिश की गई लेकिन नाकाम रही, कानूनी रूप से काफी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
परमानेंट लोक अदालत का यह कहना- 'समझौते की कोशिश की गई लेकिन नाकाम रही', कानूनी रूप से काफी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि परमानेंट लोक अदालत का यह कहना कि 'समझौते की कोशिश की गई लेकिन नाकाम रही', एक सामान्य बात है। हाईकोर्ट के 'मैनेजर, लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, बस्ती बनाम परमानेंट लोक अदालत, बस्ती और अन्य' मामले में दिए गए फैसले के अनुसार, यह कानूनी रूप से काफी नहीं है।'मैनेजर, लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, बस्ती बनाम परमानेंट लोक अदालत, बस्ती और अन्य' मामले में कोर्ट ने कहा था कि परमानेंट लोक अदालत का काम सबसे पहले पार्टियों के बीच समझौते और निपटारे की कोशिश करना है।...

सुप्रीम कोर्ट कुछ भी कहे, पुलिस अपनी मनमर्जी करती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सतेंद्र अंतिल फैसले को नज़रअंदाज़ करने पर पुलिसकर्मी को फटकार लगाई
सुप्रीम कोर्ट कुछ भी कहे, पुलिस अपनी मनमर्जी करती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'सतेंद्र अंतिल' फैसले को नज़रअंदाज़ करने पर पुलिसकर्मी को फटकार लगाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ) ने गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का खुलेआम उल्लंघन करने के लिए पुलिस तंत्र की कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि पुलिस अधिकारियों का कानून को "पढ़ने और समझने" से कोई लेना-देना नहीं है और वे पूरी तरह से अपनी मनमर्जी से काम करते हैं।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की बेंच ने नाबालिग को अवैध रूप से हिरासत में रखने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान ये मौखिक टिप्पणियां कीं। उस नाबालिग को चोरी के आरोप में जेल भेज दिया गया।इससे पहले,...

4,000 से ज़्यादा बिना सरकारी मदद वाले मदरसों की फंडिंग की UP ATS की जांच में दखल देने से हाईकोर्ट का इनकार
4,000 से ज़्यादा बिना सरकारी मदद वाले मदरसों की फंडिंग की UP ATS की जांच में दखल देने से हाईकोर्ट का इनकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को राज्य में चल रहे 4,000 से ज़्यादा बिना सरकारी मदद वाले मदरसों की फंडिंग की उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) की जांच में दखल देने से इनकार किया।जस्टिस नीरज तिवारी और जस्टिस विवेक सरन की बेंच ने मदरसा मैनेजमेंट कमेटी और टीचर्स एसोसिएशन, मदरसा अरबिया की याचिका खारिज की।बता दें, याचिकाकर्ताओं ने 9 दिसंबर, 2025 का आदेश रद्द करने की मांग की थी, जिसके तहत राज्य सरकार ने ATS के ज़रिए उनके संस्थानों की फंडिंग की जांच शुरू की थी।याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि पहले भी...