इलाहाबाद हाईकोट

जज को 'प्रभावित करने की कोशिश' का मामला: सीनियर IAS ऑफिसर के खिलाफ कंटेम्प्ट केस की सुनवाई से अलग हुए हाईकोर्ट जज
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने गुरुवार को सीनियर IAS ऑफिसर और देवी पाटन मंडल कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल से जुड़े क्रिमिनल कंटेम्प्ट मामले की सुनवाई से खुद को अलग किया। यह मामला उन आरोपों पर था कि उन्होंने एक ज्यूडिशियल ऑफिसर को प्रभावित करने और धमकाने की कोशिश की थी।जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की बेंच ने निर्देश दिया कि मामले को किसी दूसरी बेंच के सामने लिस्ट किया जाए, जिसके जस्टिस श्रीवास्तव मेंबर नहीं हैं।ऑर्डर में लिखा है: "इस केस को किसी...

'हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम' के तहत जैविक पिता अपने ही नाजायज़ बेटे को गोद ले सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 'हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम, 1956' के तहत किसी हिंदू पुरुष को अपने ही नाजायज़ बेटे को गोद लेने से इसलिए नहीं रोका जा सकता, क्योंकि वह बच्चे का जैविक पिता है।जस्टिस अरुण कुमार की बेंच ने 1970 में कथित तौर पर किए गए एक दत्तक ग्रहण (गोद लेने की प्रक्रिया) से जुड़ी दूसरी अपील पर फैसला सुनाते हुए यह बात कही। कोर्ट ने निचली अदालतों के इन फैसलों को सही ठहराया कि मूल वादी (राम केश) को बडलू ने कानूनी रूप से गोद लिया था, जो उसका जैविक पिता भी है।मामले का संक्षिप्त...

सरकारी वकीलों को केस सौंपने के तरीके से चिंतित इलाहाबाद हाईकोर्ट, स्टेट लॉ डिपार्टमेंट से मांगा जवाब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी वकीलों को केस सौंपने के तरीके पर चिंता जताई। कोर्ट ने देखा कि अक्सर फाइलें आखिरी समय में दी जाती हैं, जिससे वकीलों को मामले की तैयारी के लिए बहुत कम या बिल्कुल समय नहीं मिल पाता।जस्टिस विनोद दिवाकर की बेंच ने कहा कि यह बार-बार होने वाली समस्या "न्याय की प्रक्रिया में बाधा" डाल रही है और कहा कि सिर्फ सरकारी वकील को बदलना इसका समाधान नहीं है।कोर्ट ने कहा कि एक ऐसी पॉलिसी की ज़रूरत है, जो लॉ ऑफिसर्स के काम को रेगुलेट करने, जवाबदेही तय करने और लगातार ट्रेनिंग सुनिश्चित...

कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं होने पर HC की नाराजगी, UP DGP ने दिया सुधार का भरोसा
उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच की गुणवत्ता और इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों के लगातार अनुपालन न होने को लेकर अदालत ने गंभीर चिंता जताई। मामले में उत्तर प्रदेश के DGP राजीव कृष्ण 1 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने पेश हुए और भविष्य में पुलिस अधिकारियों द्वारा कोर्ट के आदेशों का समय पर पालन सुनिश्चित करने का भरोसा दिया।जस्टिस समीर जैन की पीठ एक हत्या के मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इससे पहले कोर्ट ने इंस्वेस्टिगेशन अधिकारियों द्वारा उसके आदेशों का लगातार पालन न किए...

पुलिस-राजस्व अधिकारियों की अनदेखी से बेअसर हो रहे सिविल कोर्ट के आदेश, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जताई गंभीर चिंता
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिविल कोर्ट के आदेशों और डिक्री के प्रति पुलिस तथा राजस्व अधिकारियों के रवैये पर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि हाल के समय में ऐसा चलन देखने को मिल रहा है जिसमें सिविल कोर्ट की डिक्री महज इसलिए बेअसर हो जाती है क्योंकि पुलिस और राजस्व अधिकारी उसके आदेशों को कोई महत्व नहीं देते।जस्टिस जे. जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने विश्व जाट संघ चैरिटेबल एंड रिलीजियस ट्रस्ट की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। मामला ट्रस्ट की उस संपत्ति से जुड़ा था, जिस पर उसके...

“पुलिस ने मार दिया या खुद छिपा है?” 30 केस वाले शख्स के गायब होने पर इलाहाबाद HC सख्त, CBI करेगी जांच
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुजफ्फरनगर के एक हिस्ट्रीशीटर के लापता होने के मामले में CBI जांच के आदेश दिए हैं। अदालत ने स्थानीय पुलिस की जांच के तरीके पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि पुलिस की कार्रवाई में न तो गंभीरता दिखाई दे रही है और न ही लापता व्यक्ति का पता लगाने की वास्तविक कोशिश नजर आ रही है।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की पीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। मामला मुत्तलिव पुत्र शराफत के लापता होने से जुड़ा है, जो 4 मई 2026 से गायब...

दावे के समर्थन में कोई दस्तावेज़ नहीं: राहुल गांधी के ब्रिटिश नागरिक होने के आरोप वाली याचिका खारिज
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते उस रिट याचिका को वापस लेने की अनुमति दी, जिसमें आरोप लगाया गया कि विपक्ष के नेता और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिक हैं।इस याचिका में रायबरेली से लोकसभा सदस्य का पद संभालने के गांधी के अधिकार पर भी सवाल उठाया गया। याचिकाकर्ताओं द्वारा याचिका में लगाए गए आरोपों और दावों के समर्थन में एक भी दस्तावेज़ पेश न कर पाने के बाद इसे वापस लेने की अनुमति देते हुए खारिज कर दिया गया।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अभदेश कुमार चौधरी की बेंच वकील अशोक पांडे और एक अन्य...

नोएडा मजदूर प्रदर्शन: स्टूडेंट एक्टिविस्ट आकृति चौधरी की रासुका हिरासत रद्द, हाईकोर्ट ने राज्य की कहानी को बताया 'गढ़ी हुई'
नोएडा में अप्रैल 2026 में हुए मजदूर प्रदर्शन से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 25 वर्षीय छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत बुधवार को रद्द की।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की पीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका मंजूर करते हुए कहा कि आकृति की हिरासत राज्य की ओर से पेश की गई एक 'गढ़ी हुई कहानी' पर आधारित थी। अदालत ने निर्देश दिया कि यदि किसी अन्य मामले में उनकी गिरफ्तारी जरूरी न हो तो उन्हें तत्काल रिहा किया जाए। पीठ ने आकृति की गिरफ्तारी...

8 साल तक टैक्स वसूला, फिर बेदखली की कार्रवाई शुरू की: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेरठ छावनी बोर्ड को फटकार लगाई, आदेश रद्द किए
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेरठ छावनी (कैंटोनमेंट) में एक प्रॉपर्टी पर कब्ज़ा करने वालों के खिलाफ बेदखली की कार्रवाई रद्द की। कोर्ट ने कहा कि छावनी बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO), जिनके पास एस्टेट ऑफिसर का भी चार्ज था, को पता था कि याचिकाकर्ता प्रॉपर्टी पर कब्ज़ा किए हुए हैं। इसके बावजूद, बेदखली की कार्रवाई शुरू होने से पहले वे 8 साल तक चुप रहे।जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की बेंच ने यह भी पाया कि संबंधित अधिकारी ने स्थापित नियमों के खिलाफ काम किया। कोर्ट ने कहा कि "अधिकारी एक ही समय में दो...

बैंक खाते खुलवाने की याचिका में तथ्य छिपाना पड़ा महंगा, इलाहाबाद HC ने लगाया ₹1 लाख जुर्माना
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डिग्री कॉलेज के बैंक खातों के संचालन की अनुमति मांगने वाली याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर ₹1 लाख का exemplary cost लगाया। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता ने कॉलेज चलाने वाली सोसाइटी के लंबे समय से चले आ रहे प्रबंधन विवाद और उससे जुड़ी पिछली कार्यवाहियों के महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अब्देश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने गंभीर प्रबंधन विवाद को केवल बैंक खाते de-freeze कराने के मामले के रूप में पेश करने की कोशिश की।2020 से फ्रीज थे...

केंद्र की योजनाओं के तहत काम करने वाले DRDA कर्मचारियों पर Regularisation Rules लागू नहीं: हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि District Rural Development Agency (DRDA) में कार्यरत कर्मचारियों को उत्तर प्रदेश के 2016 के नियमितीकरण नियमों का लाभ नहीं दिया जा सकता, क्योंकि DRDA सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत पंजीकृत एक सोसाइटी है और केंद्र सरकार की योजनाओं एवं परियोजनाओं के तहत कार्य करती हैजस्टिस अनिश कुमार गुप्ता ने यह फैसला उन याचिकाओं पर सुनाया, जिनमें DRDA में लंबे समय से काम कर रहे Data Entry Operator, Computer Operator और Programmer पदों पर कार्यरत लोगों ने नियमितीकरण और नियमित...

नोएडा प्रदर्शन में पत्थरबाजी भड़काने का वीडियो सबूत दिखाए राज्य सरकार: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा में अप्रैल 2026 में हुए श्रमिक प्रदर्शन के मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में ली गई दिल्ली विश्वविद्यालय की इतिहास स्नातक आकृति चौधरी की भूमिका को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार से वीडियो साक्ष्य पेश करने को कहा। अदालत ने पूछा कि आखिर वह कौन सा साक्ष्य है जिससे यह साबित होता है कि आकृति ने प्रदर्शनकारियों को पत्थरबाजी या वाहनों में आग लगाने के लिए उकसाया था।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की खंडपीठ मंगलवार को आकृति चौधरी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका...

हम इन्वेस्टिगेशन में गड़बड़ी पर बात कर रहे हैं: पुलिस की कार्यप्रणाली पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, यूपी DGP ने दिया अनुपालन का भरोसा
इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण मंगलवार को व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। जस्टिस समीर जैन की पीठ ने उन्हें यह बताने के लिए तलब किया था कि पुलिस अधिकारी हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करने में कथित तौर पर क्यों हिचक रहे हैं।सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केवल अदालत के आदेशों के अनुपालन को लेकर ही नहीं बल्कि पुलिस इन्वेस्टिगेशन की गुणवत्ता, समय पर पुलिस का पक्ष और रिकॉर्ड पेश करने तथा इन्वेस्टिगेशन से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने में हो रही देरी पर भी चिंता जताई।जस्टिस...

सिर्फ याचिकाकर्ता का निवास क्षेत्राधिकार नहीं देता: बाहर पारित आदेश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका नहीं चलेगी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोहराया कि किसी याचिकाकर्ता का हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार में रहने मात्र से उस अदालत को ऐसे आदेश के खिलाफ रिट याचिका सुनने का अधिकार नहीं मिल जाता, जो उसके क्षेत्राधिकार से बाहर स्थित प्राधिकारी ने पारित किया हो।जस्टिस अनिश कुमार गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट के सात जजों की पीठ के फैसले लेफ्टिनेंट कर्नल खजूर सिंह बनाम भारत संघ पर भरोसा करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार का निर्धारण इस आधार पर होता है कि जिस प्राधिकारी के आदेश को चुनौती दी गई...

जानबूझकर महत्वपूर्ण तथ्य छिपाना न्याय प्रशासन में दखल, वकील की जिम्मेदारी केवल मुवक्किल तक सीमित नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई वकील अपनी जानकारी में मौजूद महत्वपूर्ण तथ्यों को जानबूझकर छिपाकर अदालत के समक्ष उसके विपरीत स्थिति रखता है तो यह सक्रिय रूप से तथ्य छिपाना है और ऐसा आचरण न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप करता है। हालांकि, वास्तविक स्थिति की जानकारी न होने के कारण गलत तथ्य सामने रखना या तथ्यों की गलत व्याख्या करना अलग स्थिति है।जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने यह टिप्पणी एक कॉलेज की प्रबंध समिति के चुनाव से जुड़े मामले में दो वकीलों के आचरण की जांच करते हुए की। कोर्ट ने कहा कि जब कोई...

पिछली कार्यवाहियां छिपाकर PIL दाखिल करना पड़ा महंगा, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ₹2 लाख का जुर्माना लगाया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर ₹2 लाख का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता ने इसी मामले से जुड़ी पिछली न्यायिक कार्यवाहियों को छिपाया और यह गलत घोषणा की कि इससे पहले कोई PIL या रिट याचिका दाखिल नहीं की गई थी।यह आदेश चीफ़ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ ने दिया।मामला बरेली के मोहनपुर ठिरिया स्थित नगर निगम के बूचड़खाने के संचालन के लिए वर्ष 2015 में Marya Frozen Agro Food Products Pvt. Ltd. के पक्ष में दिए गए टेंडर...

35 साल पुराने दहेज मृत्यु मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला, पति और ससुराल वाले बरी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने करीब 35 साल पुराने दहेज मृत्यु मामले में पति और दो ससुराल वालों को बरी कर दिया। जस्टिस मनोज बाजाज की पीठ ने कहा कि धारा 304-B IPC के तहत दोषसिद्धि के लिए यह साबित करना जरूरी है कि महिला की मौत से 'जल्द पहले' उसे दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया गया था।कोर्ट ने शिव नारायण उर्फ सूर्य नारायण, जय नारायण और पटेश्वर की दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया।क्या था मामला?मृतका की शादी 12 मई 1987 को शिव नारायण से हुई थी। अभियोजन ने आरोप लगाया था कि उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता...

पुलिस स्टेशन में गैर-कानूनी हिरासत और ₹14 लाख की ज्वेलरी लूट का आरोप: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने SP से जांच और CCTV फुटेज सुरक्षित रखने को कहा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्नाव के पुलिस अधीक्षक (SP) को आदेश दिया कि वह उन्नाव जिले के हसनगंज पुलिस स्टेशन में एक व्यक्ति को गैर-कानूनी रूप से हिरासत में रखने और उससे ₹14 लाख की ज्वेलरी, कैश और अन्य सामान लूटने के आरोपों की जांच करें।जस्टिस रजनीश कुमार और जस्टिस बबीता रानी की बेंच ने पिछले हफ्ते क्रिमिनल रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उसे 27 जुलाई से 30 जुलाई, 2026 तक बिना किसी कानूनी कार्रवाई के पुलिस स्टेशन में गैर-कानूनी रूप से हिरासत में रखा...

S. 396 IPC | अभियोजन पक्ष को यह साबित करना होगा कि डकैती ही मुख्य इरादा था और हत्या उसी दौरान की गई: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 396 (हत्या के साथ डकैती) के तहत दोषी ठहराने के लिए अभियोजन पक्ष को यह साबित करना होगा कि डकैती ही मुख्य इरादा था और हत्या डकैती करने के दौरान ही की गई।जस्टिस समित गोपाल की बेंच ने 1981 के मामले में आपराधिक अपील को मंज़ूरी देते हुए और जीवित बचे आरोपी को बरी करते हुए यह टिप्पणी की। कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष कथित डकैती और हत्या के बीच ज़रूरी संबंध साबित करने में नाकाम रहा।मामले का संक्षिप्त विवरणयह मामला 30 दिसंबर 1981 की एक घटना से...

S. 313 CrPC | आरोपी से जिस परिस्थिति के बारे में सवाल नहीं पूछा गया, उसे न समझा पाने पर उसके खिलाफ कोई प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी आरोपी से ट्रायल कोर्ट ने CrPC की धारा 313 के तहत किसी परिस्थिति या सबूत के बारे में सवाल नहीं पूछा था तो उस परिस्थिति या सबूत को न समझा पाने के कारण आरोपी के खिलाफ कोई प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने 2 जुड़ी हुई आपराधिक अपीलों को स्वीकार करते हुए और 2006 के हत्या के प्रयास के मामले में IPC की धारा 307 के तहत दोषी ठहराए गए 3 आरोपियों को बरी करते हुए यह टिप्पणी की।मामले के मुख्य तथ्यअभियोजन पक्ष का मामला यह था कि...
