इलाहाबाद हाईकोट

इलाहाबाद हाईकोर्ट में 'फुल कोर्ट मीटिंग्स' पर विवाद: हाईकोर्ट ने जजों के बीच चर्चा की कमी पर उठाए सवाल, कहा- जजों की राय रिकॉर्ड नहीं की जाती
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपनी 'फुल कोर्ट मीटिंग्स' (सभी जजों की बैठक) में चर्चा की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। कोर्ट ने देखा कि इन बैठकों की कार्यवाही में अलग-अलग जजों की सहमति या असहमति को रिकॉर्ड नहीं किया जाता है।कोर्ट ने यह भी महसूस किया कि पिछली दो फुल कोर्ट मीटिंग्स "सरकार द्वारा विश्वास मत के दौरान अपने सदस्यों को व्हिप जारी करके नियंत्रित करने" के तरीके से "पहले से तय (स्टेज-मैनेज्ड)" लग रही हैं।जस्टिस विनोद दिवाकर की बेंच ने 4 मामलों से जुड़े एक फैसले में यह बात कही। इन मामलों में निचली अदालतों...

'जज का फ़ैसला कौन करता है?': चीफ जस्टिस-केंद्रित मॉडल में बदलाव की आवश्यकता- इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट प्रशासन के चीफ जस्टिस-केंद्रित मॉडल में 'बदलाव' (Recalibration) की ज़रूरत बताई। कोर्ट ने ज़्यादा सोच-समझकर लिए गए फ़ैसलों, संस्थागत रूप से संतुलित और सबकी भागीदारी वाले नज़रिए के साथ-साथ मज़बूत संस्थागत जवाबदेही पर ज़ोर दिया।जस्टिस विनोद दिवाकर की बेंच ने चार मामलों से जुड़े एक फ़ैसले में यह बात कही। इन मामलों में निचली अदालतों में देरी, ज़मानत से जुड़े निर्देशों का पालन न होने और न्यायिक अनुशासन से जुड़े बड़े सवालों जैसे मुद्दों को उठाया गया।इन मुद्दों पर विचार...

बच्चों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी सिर्फ पिता की नहीं, मां को भी अपनी आय के अनुसार योगदान देना होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि नाबालिग बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी केवल पिता पर नहीं डाली जा सकती। सामान्यतः माता-पिता दोनों को अपनी-अपनी आय और आर्थिक क्षमता के अनुसार बच्चे के पालन-पोषण और अन्य खर्चों में योगदान करना होता है।जस्टिस लक्ष्मी कांत शुक्ला की पीठ ने यह टिप्पणी एक महिला और उसके दो नाबालिग बच्चों द्वारा दाखिल आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए की। याचिका में परिवार न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें दोनों बच्चों के लिए ₹1,500-₹1,500 प्रतिमाह भरण-पोषण देने का...

पुलिस स्टेशन में CCTV खराब होने पर पूछताछ/हिरासत का रिकॉर्ड GD में दर्ज करना होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस स्टेशनों में CCTV कैमरे खराब होने की स्थिति में पुलिस के लिए महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी किए हैं। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की डिवीजन बेंच ने कहा कि CCTV उपलब्ध न होने पर थाने में पूछताछ या गिरफ्तारी के लिए लाए गए हर व्यक्ति की एंट्री, पूछताछ और रिहाई का विवरण General Diary (GD) में तत्काल दर्ज करना होगा।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक बार CCTV सिस्टम चालू हो जाने के बाद उसे 24 घंटे, 365 दिन काम करना चाहिए। अगर सिस्टम खराब होता है तो SHO को GD में खराबी का समय...

अस्थायी नियुक्ति पर सीधे स्थायी नहीं हो सकता कर्मचारी, नियमितीकरण की प्रक्रिया जरूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अस्थायी आधार पर नियुक्त कर्मचारी को सीधे सेवा में स्थायी नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी कर्मचारी की सेवा में स्थायी करने का आदेश भर्ती, सेवा या नियमितीकरण से जुड़े नियमों के तहत जारी नहीं हुआ है, तो ऐसा आदेश शुरू से ही कानूनी रूप से अमान्य माना जाएगा और उसके आधार पर कर्मचारी को कोई कानूनी रूप से लागू किया जा सकने वाला अधिकार हासिल नहीं होता।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि निर्धारित भर्ती नियमों के बाहर की गई...

कस्टडी मामले में कोर्ट को बच्चे की स्कूल पढ़ाई की निरंतरता पर भी ध्यान देना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक दस साल की बच्ची की कस्टडी उसके पिता को सौंपने का आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब कस्टडी बदलने का एकमात्र कारण बच्ची की स्कूल की पढ़ाई में रुकावट थी, तो कोर्ट को पहले यह देखना चाहिए कि क्या वह अपनी माँ के साथ रहते हुए भी पढ़ाई जारी रख सकती है, खासकर तब जब बच्ची ने कहा हो कि वह अपनी माँ के साथ रहना चाहती है।चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की बेंच ने कहा,"हमारी राय है कि संबंधित सिंगल जज को इस संभावना पर विचार करना चाहिए कि बच्ची अपनी माँ के साथ रहते...

NLU प्रयागराज जातिगत भेदभाव का मामला: हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने प्रोफेसर की अपील की सुनवाई से खुद को अलग किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अरुण भंसाली ने खुद को उस अपील की सुनवाई से अलग कर लिया, जो एक प्रोफेसर ने सिंगल जज के उस आदेश के खिलाफ दायर की थी, जिसमें डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, प्रयागराज में जाति-आधारित अपमान और भेदभाव के आरोपों की जांच न्यायिक अधिकारियों से कराने का निर्देश दिया गया।चीफ जस्टिस भंसाली यूनिवर्सिटी के चांसलर हैं।यह अपील चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने तब आई, जब इससे पहले एक डिवीजन बेंच ने रिट याचिका में आगे की कार्यवाही पर रोक लगाई और न्यायिक...

दहेज के कारण मौत का मामला इसलिए रद्द किया जा सकता है, क्योंकि महिला की मौत कथित तौर पर हार्ट-अटैक से हुई? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया जवाब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक सास के खिलाफ दहेज के कारण मौत का मामला रद्द करने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि यह तथ्य कि महिला की मौत मायोकार्डियल इन्फार्क्शन (हार्ट अटैक) के कारण हुए शॉक से हुई, इसे अकेले ही मामले को रद्द करने के चरण में इस बात का पक्का सबूत नहीं माना जा सकता कि उसकी मौत पूरी तरह से प्राकृतिक थी।जस्टिस चवन प्रकाश की बेंच ने कहा कि जब शादी के सात साल के भीतर किसी युवा महिला की मौत दहेज से जुड़ी क्रूरता या उत्पीड़न के खास आरोपों के बीच होती है तो शुरुआती चरण में यह अपने आप नहीं माना जा...

हुक्का बार पर फैसले के बाद जस्टिस शेखर बी. सराफ ने लिखी कविता, युवाओं से तंबाकू से दूर रहने की अपील
उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक स्थानों पर निर्धारित धूम्रपान क्षेत्रों में हुक्का सेवा देने को अवैध ठहराने वाले 90 पन्नों के फैसले के अंत में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस शेखर बी. सराफ ने अपने धूम्रपान के अनुभव पर एक कविता लिखी। उन्होंने अपने अनुभव के जरिए युवाओं को तंबाकू की लत से दूर रहने की सलाह दी।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अभ्देश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि उत्तर प्रदेश में हुक्का बार निर्धारित धूम्रपान क्षेत्रों में हुक्का सेवा देकर कानूनी रूप से संचालित नहीं किए जा...

रेप केस में कांग्रेस सांसद राकेश राठौर को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत, आरोपों को बताया 'बनाई गई कहानी'
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीतापुर से कांग्रेस सांसद राकेश राठौर को 2025 के रेप मामले में डिस्चार्ज कर दिया है। जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें राठौर की डिस्चार्ज अर्जी खारिज की गई थी। कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता की ओर से बताई गई कहानी इतनी “बेतुकी” है कि सामान्य विवेक वाला व्यक्ति उस पर विश्वास नहीं कर सकता।क्या था मामला?अभियोजन के अनुसार, शिकायतकर्ता की राठौर से वर्ष 2018 में मुलाकात हुई थी, जब वह विधायक थे। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि राठौर...

सरकारी स्कूल का वीडियो बनाने पर CJP एक्टिविस्ट की गिरफ्तारी पर रोक, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से मांगा जवाब
फर्रुखाबाद के सरकारी प्राथमिक स्कूल की कथित बदहाल स्थिति का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सदस्य गौरव भारती की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई। कोर्ट ने राज्य सरकार से मामले में जवाब मांगा।जस्टिस सलिल कुमार राय और जस्टिस पदम नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने गौरव भारती उर्फ गौरव कुमार की याचिका पर यह आदेश दिया। सभी प्रतिवादी पक्षकारों को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए समय दिया गया।याचिका में 19 अगस्त को दर्ज FIR को चुनौती दी गई।...

Hookah Bars | फ़ूड सेफ़्टी डिपार्टमेंट और म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन लाइसेंस जारी नहीं कर सकते, पुलिस COTPA लागू कर सकती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश में हुक्का बार के लिए लाइसेंस जारी करने या उन्हें रेगुलेट करने का अधिकार न तो फ़ूड सेफ़्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के पास है और न ही म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के पास।हालांकि, बेंच ने साफ़ किया कि 'सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन पर रोक और व्यापार, वाणिज्य, उत्पादन, आपूर्ति और वितरण का नियमन) अधिनियम, 2003' (COTPA) के तहत पुलिस को उन प्रतिष्ठानों की तलाशी लेने, उन्हें ज़ब्त करने और जुर्माना लगाने का अधिकार है जो इस कानून का उल्लंघन करते हैं।जस्टिस शेखर...

UP में हुक्का बार पर रोक, निर्धारित धूम्रपान क्षेत्र में भी नहीं दे सकते हुक्का सर्विस: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश में हुक्का बार संचालित नहीं किए जा सकते और रेस्टोरेंट के निर्धारित धूम्रपान क्षेत्र में भी हुक्का सर्विस नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी स्थान को धूम्रपान के लिए निर्धारित किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि वहां रेस्टोरेंट ग्राहकों को हुक्का उपलब्ध कराने की सेवा दे सकता है।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अब्धेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने हुक्का बार और रेस्टोरेंट में हुक्का सर्विस से संबंधित याचिकाओं को खारिज करते हुए...

'बिजली जीने के लिए आवश्यक ज़रूरत': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक दशक से ज़्यादा समय से कनेक्शन मिलने का इंतज़ार कर रहे व्यक्ति की मदद की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि आज के समय में बिजली "एक ज़रूरी ज़रूरत" है। कोर्ट ने नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे को आदेश दिया कि वह उस व्यक्ति को बिजली कनेक्शन दे, जिसे एक दशक से ज़्यादा समय से बिना बिजली के रहना पड़ रहा है।जस्टिस प्रकाश पाडिया और जस्टिस विवेक सरन की बेंच ने कहा कि आर्टिकल 21 के तहत जीने का अधिकार सिर्फ़ किसी व्यक्ति की बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बिजली, साफ़-सफ़ाई, सड़कें, साफ़-सुथरा माहौल, पर्याप्त रोशनी और शुद्ध हवा और पानी जैसी ज़रूरी नागरिक...

शादी जैसी पवित्र संस्था को हल्के में नहीं लेना चाहिए: तलाक के बाद दोबारा शादी करने वाले दंपती को इलाहाबाद हाईकोर्ट की सुरक्षा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलाक के बाद दोबारा शादी करने वाले दो बच्चों के माता-पिता दंपती के शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन की सुरक्षा का आदेश दिया। अदालत ने साथ ही कहा कि “विवाह जैसी पवित्र संस्था को हल्के में नहीं लेना चाहिए।”जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्र की खंडपीठ ने दंपती की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने अपने शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन की सुरक्षा और विवाह के पंजीकरण में सहायता की मांग की थी।याचिकाकर्ता पहले भी पति-पत्नी रह चुके थे और उनके दो बच्चे...

जालसाजी के आरोप पर गिफ्ट डीड रद्द नहीं कर सकता सीनियर सिटीजन ट्रिब्यूनल, सिविल कोर्ट में जाना होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी सीनियर सिटीजन का आरोप हो कि उसकी संपत्ति का गिफ्ट डीड जाली है और उसने ऐसा दस्तावेज बनाया ही नहीं, तो सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत गठित न्यायाधिकरण उसे जाली घोषित कर रद्द नहीं कर सकता। ऐसे मामले में सीनियर सिटीजन को सक्षम सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटाना होगा।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि माता-पिता और सीनियर सिटीजन का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 की धारा 23(1) तभी लागू होती है, जब संपत्ति का वैध हस्तांतरण इस शर्त पर किया गया हो...

NEET-UG उत्तर कुंजी पर अकेले उम्मीदवार की आपत्ति से विशेषज्ञ राय जरूरी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि परीक्षा के विवादित प्रश्नों और उनके उत्तर विकल्पों को विशेषज्ञ के पास तभी भेजा जा सकता है, जब अदालत के सामने ऐसी ठोस सामग्री हो जो विशेषज्ञ राय लेने की जरूरत दिखाती हो। केवल एक उम्मीदवार की ओर से उत्तर कुंजी पर आपत्ति किए जाने और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा उसे जांचकर खारिज कर दिए जाने पर विशेषज्ञ से राय लेना जरूरी नहीं है।जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने NEET-UG 2026 के एक उम्मीदवार की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। उम्मीदवार ने...

लखनऊ अग्निकांड पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- प्राकृतिक आपदा के अलावा हादसों में मुआवजे की नीति नहीं
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ के जून 2026 के भीषण अग्निकांड को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार को प्राकृतिक आपदाओं के अलावा आग और अन्य हादसों में मृत्यु या गंभीर चोट की स्थिति में मुआवजा देने के लिए स्पष्ट नीति बनाने का निर्देश दिया। सरकार ने अदालत को बताया कि फिलहाल उसकी मुआवजा नीति केवल प्राकृतिक आपदाओं तक सीमित है।जस्टिस राजन राय और जस्टिस मंजिव शुक्ला की खंडपीठ ने यह निर्देश तीन मंजिला इमारत में संचालित एनीमेशन सेंटर में लगी आग से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। हादसे में 15 युवाओं की मौत...

बार-बार स्थगन से जजों को 'क्लर्क' की तरह काम करना पड़ रहा, आपराधिक अपीलों में कागजी बंडल न मिलने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट नाराज
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपराधिक अपीलों में वकीलों द्वारा कागजी बंडल उपलब्ध न होने के आधार पर बार-बार सुनवाई टालने की मांग पर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि इससे न्यायिक समय की भारी बर्बादी हो रही है और जजों को न्यायिक निर्णय लेने के बजाय “क्लर्कों की तरह” काम करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।जस्टिस सलिल कुमार राय और जस्टिस पदम नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने यह टिप्पणी दो आपराधिक अपीलों की सुनवाई के दौरान की। इन मामलों में अधिवक्ता ने यह कहते हुए सुनवाई टालने का अनुरोध किया कि उन्हें कागजी बंडल नहीं...

Cow Slaughter Act | 80 किलोग्राम गोमांस ले जा रहे वाहन का मालिक अज्ञानता की दलील देकर जब्ती से नहीं बच सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि वाहन का मालिक, जो गोमांस बरामद होने के समय स्वयं उसमें यात्रा कर रहा था, उत्तर प्रदेश गोहत्या निवारण अधिनियम, 1955 के तहत यह दलील देकर जब्ती का विरोध नहीं कर सकता कि मांस उन यात्रियों का था, जिन्होंने वाहन किराए पर लिया था।यह माना गया कि एक बार जब जब्त किए गए मांस की अधिकृत प्रयोगशाला द्वारा गोमांस होने की पुष्टि हो जाती है, तो अधिनियम की धारा 5-ए (10) के तहत उसके खिलाफ अनुमान लगाया जाता है, और यह उसके लिए है कि वह इसे ठोस साक्ष्य से हटा दे।अधिनियम की धारा 5-ए(6) के...
