इलाहाबाद हाईकोट
CrPC की धारा 362 ज़मानत की शर्तों को बदलने में रुकावट नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 साल बाद ₹64 लाख जमा करने की 'कठिन' शर्त हटाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि CrPC की धारा 362 (कोर्ट द्वारा फैसले में बदलाव न करना) के तहत कानूनी रोक ज़मानत आदेश में लगाई गई शर्तों में बदलाव या ढील देने पर लागू नहीं होती है।कोर्ट ने खास तौर पर कहा,"...ज़मानत देने का आदेश सिर्फ़ एक अंतरिम आदेश (interlocutory order) होता है और यह CrPC की धारा 362 में इस्तेमाल किए गए वाक्यांश 'मामले का निपटारा करने वाला फैसला या अंतिम आदेश' के दायरे में नहीं आता है। इसलिए CrPC की धारा 362 में दी गई रोक किसी आरोपी व्यक्ति को ज़मानत देने के आदेश में लगाई...
'हलाला' की आड़ में अपराध को व्यक्तिगत कानून का संरक्षण नहीं मिल सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंगरेप मामले में FIR रद्द करने से किया इनकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2016 के कथित निकाह हलाला के दौरान नाबालिग से दुष्कर्म और 2025 में कथित 'डबल हलाला' के नाम पर सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों से जुड़े मामले में दर्ज एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि विवाह या व्यक्तिगत कानून की आड़ में कोई अपराध किया जाता है, तो उसे व्यक्तिगत कानून का संरक्षण नहीं मिल सकता।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने कहा कि आपराधिक कानून में व्यक्तिगत कानूनों की दलील स्वीकार नहीं की जा सकती, जब तक कि स्वयं कानून ऐसा अपवाद न...
'प्लेसेस ऑफ़ वर्शिप एक्ट' सिर्फ़ धार्मिक स्वरूप बदलने पर रोक लगाता है, जनहित में सरकारी अधिग्रहण पर कोई रोक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि 'प्लेसेस ऑफ़ वर्शिप (स्पेशल प्रोविज़न्स) एक्ट, 1991' के तहत किसी पूजा स्थल के धार्मिक स्वरूप को एक धार्मिक संप्रदाय से दूसरे धार्मिक संप्रदाय में बदलने पर ही रोक है, लेकिन यह कानून सरकार को 'धर्मनिरपेक्ष' और 'जनहित' के कामों के लिए ऐसी संपत्तियों का अधिग्रहण करने से नहीं रोकता।इसके साथ ही, जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस अरुण कुमार की बेंच ने वाराणसी के दालमंडी इलाके को चौड़ा करने और उसे सुंदर बनाने के काम को रोकने की मांग वाली रिट याचिका को खारिज कर दिया। यह...
अली खमेनेई की तस्वीरें ज़बरदस्ती हटाने और शोक मनाने वालों पर FIR दर्ज करने का मामला: यूपी पुलिस के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचे शिया संगठन
शिया विद्वानों के एक संगठन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) में याचिका दायर की। इसमें राज्य में पुलिस की 'मनमानी' कार्रवाई को चुनौती दी गई, जिसमें निजी संपत्तियों से धार्मिक पोस्टर ज़बरदस्ती हटाना और राज्य के शिया समुदाय के 'शांतिपूर्ण' शोक मनाने वालों के खिलाफ FIR दर्ज करना शामिल है।मजलिस उलेमा-ए-हिंद ने अपने महासचिव मौलाना सैयद कल्बे जवाद नकवी के ज़रिए यह जनहित याचिका (PIL) दायर की। याचिका में राज्य पुलिस से यह निर्देश देने की मांग की गई कि वे उन लोगों के खिलाफ कोई ज़बरदस्ती वाली कार्रवाई न...
मृत्युपूर्व बयान के लिए मानसिक रूप से पूरी तरह सक्षम होने का अलग प्रमाणपत्र जरूरी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी मृत्युपूर्व बयान पर भरोसा करने के लिए डॉक्टर द्वारा यह अलग से प्रमाणित करना अनिवार्य नहीं है कि पीड़ित बयान देने के समय मानसिक रूप से पूरी तरह सक्षम था। यदि डॉक्टर ने यह प्रमाणित किया कि पीड़ित होश में था और बोलने की स्थिति में था तो यह पर्याप्त है।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने कहा,"मृतक के बयान देने के लिए मानसिक रूप से सक्षम होने संबंधी डॉक्टर का अलग प्रमाणपत्र कानून की अनिवार्य शर्त नहीं, बल्कि केवल सावधानी का एक...
स्निफर डॉग की ट्रैकिंग तभी साक्ष्य मानी जाएगी जब पंचनामा और डॉग हैंडलर की गवाही उसका समर्थन करे: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि स्निफर डॉग (खोजी कुत्ते) की ट्रैकिंग को तब तक विश्वसनीय साक्ष्य नहीं माना जा सकता, जब तक उसके ट्रैकिंग की पूरी प्रक्रिया का विवरण पंचनामा में दर्ज न हो और डॉग हैंडलर अदालत में गवाही देकर उसका समर्थन न करे। कोर्ट ने कहा कि पंचनामा और डॉग हैंडलर की गवाही में कोई विरोधाभास नहीं होना चाहिए।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी 1998 के एक हत्या मामले में चार दोषियों की आजीवन कारावास की सजा रद्द करते हुए की।मामले में अभियोजन का दावा था...
कानून की समझ अब सबसे निचले स्तर पर': हत्या के दोषी की जमानत रद्द कराने वाली जनहित याचिका खारिज, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाया 50 हजार रुपये का जुर्माना
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के एक दोषी को दी गई जमानत और सजा पर रोक के आदेश को वापस लेने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।अदालत ने याचिका में की गई मांगों को "चौंकाने वाली" और "बेहद अनुचित" करार दिया।जस्टिस जे. जे. मुनीर और जस्टिस अरुण कुमार की खंडपीठ ने कहा कि इस तरह की प्रार्थनाएं कभी भी याचिका का हिस्सा नहीं बननी चाहिए।याचिका लालचंद यादव ने दायर की थी। इसमें उत्तर प्रदेश सरकार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और संबंधित थाना प्रभारी को निर्देश देने...
आरोपी से मिली वकालत की फीस अपराध की आय नहीं, जब तक अधिवक्ता खुद अपराध में शामिल न हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी आरोपी द्वारा अपने वकील को पेशेवर सेवाओं के बदले दी गई फीस को केवल इस आधार पर अपराध की आय नहीं माना जा सकता कि भुगतान आरोपी ने किया है। जब तक अधिवक्ता स्वयं किसी आपराधिक कृत्य में शामिल न हो तब तक उसकी पेशेवर फीस को अपराध की आय नहीं कहा जा सकता।जस्टिस जे. जे. मुनीर और जस्टिस अरुण कुमार की पीठ उत्तर प्रदेश पुलिस की साइबर सेल द्वारा एक वकील का पूरा बैंक खाता फ्रीज किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।मामले में वकील आयुष...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नशे की हालत में मस्जिद में शराब की बोतल फेंककर धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोपी व्यक्ति की गिरफ्तारी पर रोक लगाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को एक व्यक्ति को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दी। उस पर आरोप है कि उसने नशे की हालत में मस्जिद में शराब की बोतल फेंकी, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।सुरक्षा देते हुए जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने कहा कि पहली नज़र में ऐसा लगता है कि चूंकि याचिकाकर्ता नशे की हालत में था, इसलिए उसका धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं रहा होगा।संक्षेप में मामलाआज़मगढ़ पुलिस ने याचिकाकर्ता-आवेदक के खिलाफ BNS की धारा 298 [किसी वर्ग के धर्म का अपमान करने के...
बंटवारे के आदेश को लागू करने की समय-सीमा, उसे स्टाम्प पेपर पर तैयार करने से अलग: इलाहाबाद हाई कोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बंटवारे के आदेश को लागू करने की समय-सीमा, उसे स्टाम्प पेपर पर तैयार करने की प्रक्रिया से स्वतंत्र है। कोर्ट ने यह भी कहा कि बंटवारे के आदेश को स्टाम्प पेपर पर तैयार करने पर लगने वाली स्टाम्प ड्यूटी अलग है और यह आदेश को लागू करने या अपील की कार्यवाही पर लगने वाली कोर्ट फीस से अलग दायरे में काम करती है।जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र ने कहा,"स्टाम्प पेपर पर अंतिम आदेश (final decree) तैयार करने के लिए आवेदन करने का अधिकार कब पैदा होगा, इस पर कोर्ट का मानना है कि चूंकि बंटवारे...
अवमानना मामले में केवल पेश होकर जवाब देने के आदेश के खिलाफ Contempt Act की धारा 19 के तहत अपील नहीं होगी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अवमानना न्यायालय द्वारा किसी कथित अवमाननाकर्ता को केवल उपस्थित होकर यह बताने का निर्देश देना कि उसके खिलाफ अवमानना के आरोप क्यों न तय किए जाएं, ऐसा आदेश नहीं है जिसके खिलाफ Contempt of Courts Act, 1971 की धारा 19(1)(a) के तहत अपील की जा सके।हालांकि, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में प्रभावित पक्ष के पास कोई उपाय नहीं होने की स्थिति नहीं है और वह लेटर्स पेटेंट अपील (Letters Patent Appeal - LPA) दाखिल कर सकता है।मामला एक अवमानना याचिका से जुड़ा...
सुबह 6 बजे खुला इलाहाबाद हाईकोर्ट, परीक्षा से तीन घंटे पहले अभ्यर्थी को मुख्य परीक्षा में बैठने की मिली राहत
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने रविवार सुबह 6 बजे विशेष सुनवाई कर सहायक अभियोजन अधिकारी (APO) 2025 मुख्य परीक्षा के एक अभ्यर्थी को बड़ी राहत दी।अदालत ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए अभ्यर्थी शालिनी पांडे को अस्थायी रूप से मुख्य परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी। परीक्षा उसी दिन सुबह 9 बजे शुरू होनी थी।मामले की अत्यधिक तात्कालिकता को देखते हुए मुख्य जस्टिस के 27 जून 2026 के प्रशासनिक आदेश के बाद जस्टिस अमिताभ कुमार राय ने अपने आवास पर विशेष बैठक कर सुनवाई की।शालिनी पांडे ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा...
मुश्किल समय में माता-पिता से मदद मिलने पर भी पति अपनी पत्नी के भरण-पोषण की कानूनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी को मुश्किल समय में उसके माता-पिता से आर्थिक मदद मिलने के आधार पर CrPC की धारा 125 के तहत पति से भरण-पोषण पाने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने कहा कि पत्नी के माता-पिता की आय को पत्नी की आय नहीं माना जा सकता। साथ ही माता-पिता की मदद पति की पत्नी के भरण-पोषण की कानूनी ज़िम्मेदारी का विकल्प नहीं हो सकती।बेंच ने यह टिप्पणी बुलंदशहर की फैमिली कोर्ट के दिसंबर 2023 के आदेश के खिलाफ पत्नी और उसके 2 नाबालिग बच्चों द्वारा दायर क्रिमिनल...
कल्याणकारी योजना के तहत पत्नी को घर मिलने से वह CrPC की धारा 125 के तहत गुज़ारा-भत्ता मांगने के अधिकार से वंचित नहीं होती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी कल्याणकारी योजना के तहत महिला को घर मिलना उसकी आजीविका का साधन नहीं माना जा सकता, जिससे वह अपने पति से CrPC की धारा 125 के तहत गुज़ारा-भत्ता मांगने के अधिकार से वंचित हो जाए।जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने यह भी कहा कि पति केवल यह कहकर अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने की कानूनी ज़िम्मेदारी से नहीं बच सकता कि वह बेरोज़गार है या बहुत कम कमाता है।इन बातों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने पति द्वारा दायर एक क्रिमिनल रिविज़न याचिका खारिज की। इस याचिका में फैमिली...
समान मामले में शामिल दो सह-आरोपियों में से एक को ज़मानत देने और दूसरे को ज़मानत न देने का मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जज से मांगा स्पष्टीकरण
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाज़ियाबाद के एडिशनल सेशन जज से स्पष्टीकरण मांगा। यह मामला एक ही आपराधिक केस में शामिल दो सह-आरोपियों की ज़मानत याचिकाओं पर अलग-अलग तरह से कार्रवाई करने से जुड़ा है।जस्टिस विवेक कुमार सिंह की बेंच ने स्पष्टीकरण मांगा और ज़ोर दिया कि न्यायिक एकरूपता और कानूनी सिद्धांतों का समान रूप से पालन संस्थागत महत्व के मामले हैं।बता दें, न्यायिक अधिकारी ने एक आरोपी को ज़मानत देने से इनकार किया, जबकि उसे लगी चोटें (जो कथित तौर पर उसी ने पहुंचाई थीं) मामूली प्रकृति की थीं। लेकिन बाद में...
UP Panchayat Elections: '5 साल से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता पंचायत का कार्यकाल', इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा चुनाव का टाइमलाइन
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव टाले जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि पंचायतों का कार्यकाल संविधान के तहत निर्धारित पांच वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि जिन प्रावधानों के आधार पर राज्य सरकार ने ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने और चुनाव स्थगित करने के आदेश जारी किए, उन्हें पहले ही असंवैधानिक घोषित किया जा चुका है। इसलिए ये आदेश non est (कानून की नजर में अस्तित्वहीन) प्रतीत होते हैं।जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की पीठ अरविंद...
देरी से दायर POSH शिकायतें केवल विलंब के आधार पर खारिज नहीं की जा सकतीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संरक्षण (POSH) कानून के तहत दायर शिकायतों को केवल देरी के आधार पर प्रारंभिक स्तर पर खारिज नहीं किया जा सकता। शिकायत में हुई देरी के कारणों पर विचार करना आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का दायित्व है।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने यह टिप्पणी करते हुए प्रयागराज स्थित हरिशचंद्र अनुसंधान संस्थान के खगोल भौतिकी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर के खिलाफ दायर यौन उत्पीड़न की शिकायतों की दोबारा जांच का निर्देश दिया।मामला उन छात्राओं की शिकायतों...
'24 कोसी परिक्रमा मार्ग' परियोजना पर रोक से इनकार, जनहित के आगे व्यक्तिगत हित को झुकना होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी 24 कोसी परिक्रमा मार्ग परियोजना पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि यह सरकार की नीति के अनुरूप एक महत्वपूर्ण जनहित परियोजना है और ऐसे मामलों में व्यक्तिगत हित को व्यापक जनहित के आगे झुकना होगा।जस्टिस जे. जे. मुनीर और जस्टिस अरुण कुमार की खंडपीठ ने उस याचिका को खारिज किया, जिसमें संभल में प्रस्तावित परिक्रमा मार्ग के निर्माण को रोकने की मांग की गई। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनकी भूमि पर कोल्ड स्टोरेज बनाने की योजना है और परियोजना के...
धार्मिक रीति-रिवाजों के लिए किसी खास सड़क का इस्तेमाल करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुहर्रम जुलूस के लिए रास्ते की मांग वाली याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही भारत के संविधान का अनुच्छेद 25 धर्म की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार देता है, लेकिन यह किसी समुदाय को धार्मिक रीति-रिवाजों के पालन के लिए किसी खास सड़क का इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं देता। [2026 LiveLaw (AB) 333]जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस अरुण कुमार की बेंच ने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों वाले जुलूसों के लिए रास्ते तय करने की ज़िम्मेदारी सिविल और पुलिस प्रशासन की होती है।कोर्ट ने यह बात संभल ज़िले के कुछ निवासियों की जनहित याचिका (PIL) को खारिज करते हुए कही।...
अपील लंबित रहते एक ही संपत्ति पर बुलडोजर कार्रवाई पर हाईकोर्ट सख्त, LDA की मंशा पर उठाए सवाल
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अपील लंबित रहने के दौरान केवल एक संपत्ति पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने को लेकर लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को कड़ी फटकार लगाई।अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि प्राधिकरण की कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण प्रतीत होती है और फिलहाल आगे की ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर रोक लगाई। जस्टिस पंकज भाटिया और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ कंचन सिंह द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।याचिका में आरोप लगाया गया था कि एलडीए ने उनकी संपत्ति के खिलाफ चुनिंदा और भेदभावपूर्ण तरीके से ध्वस्तीकरण की...

















