महाकुंभ भगदड़: लापता लोगों के विवरण की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका

  • महाकुंभ भगदड़: लापता लोगों के विवरण की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका

    इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर 29 जनवरी को प्रयागराज में मची भगदड़ के बाद लापता हुए सभी लोगों का ब्योरा एकत्र करने के लिए न्यायिक निगरानी समिति गठित करने की मांग की गई है।

    मंगलवार (4 फरवरी) को दायर मामले को जल्द सूचीबद्ध करने के लिए बुधवार (5 फरवरी) को चीफ़ जस्टिस की अदालत के समक्ष उल्लेख किया गया था। इसके जवाब में चीफ जस्टिस अरुण भंसाली ने कहा, 'हम देखेंगे। मंगलवार की कॉजलिस्ट के अनुसार, इस मामले को अभी तक सूचीबद्ध नहीं किया गया है।

    याचिका में उन खबरों का हवाला दिया गया है जिनमें कहा गया है कि भगदड़ पीड़ितों के शवों को भयावह परिस्थितियों में रखा जा रहा है। कथित तौर पर उन्हें फर्श पर छोड़ दिया जाता है, बोरों में लपेटा जाता है, जिसमें प्रशीतन के लिए कोई प्रावधान नहीं होता है, जिससे अपघटन होता है।

    हाईकोर्ट में इस जनहित याचिका के दायर होने से एक दिन पहले, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (3 फरवरी) को भगदड़ के लिए उत्तर प्रदेश राज्य के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाली जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।

    कोर्ट ने याचिकाकर्ता एडवोकेट विशाल तिवारी को इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने को कहा।

    उन्होंने कहा, 'यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है, जो चिंता का विषय है, लेकिन हाईकोर्ट जाएं. पहले से ही एक न्यायिक आयोग का गठन किया गया है.' उन्होंने कहा कि भगदड़ की घटनाएं नियमित होती जा रही हैं।

    29 जनवरी की सुबह मची भगदड़ में 30 से 39 लोगों के मारे जाने की खबर है। प्रभावित क्षेत्र संगम पवित्र डुबकी बिंदु था। न्यूज मिनट की जमीनी जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मरने वालों की संख्या संभवतः 79 के करीब है।

    उत्तर प्रदेश सरकार ने 29 जनवरी को हुई भगदड़ की जांच के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस हर्ष कुमार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया है। पैनल ने घटना के संबंध में जानकारी देने के लिए लोगों को आमंत्रित किया है।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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