इलाहाबाद हाईकोट

चल रही भर्ती प्रक्रिया से कानूनी रूप से उपलब्ध न होने वाले पदों को हटाना नियम बदलने जैसा नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि चल रही भर्ती प्रक्रिया से खाली पदों को हटाना — क्योंकि उन पदों को विज्ञापन में बताए गए नियमों के तहत कानूनी रूप से नहीं भरा जा सकता — "खेल के नियम" बीच में बदलने जैसा नहीं है।कोर्ट ने माना कि खाली पदों की संख्या को सही करना, योग्यता या चयन के मानदंडों को बदलने से बिल्कुल अलग बात है। कोर्ट ने कहा कि संविधान पीठ के 'तेज प्रकाश पाठक बनाम राजस्थान हाई कोर्ट' मामले के फैसले के तहत केवल बाद वाली चीज़ (यानी योग्यता या चयन के मानदंड बदलना) पर रोक है।'तेज प्रकाश पाठक' मामले...

रेगुलर होने से पहले की सर्विस पेंशन के लिए ज़रूरी सर्विस में गिनी जाएगी, लेकिन पेंशन की रकम तय करने में नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी कर्मचारी की रेगुलर होने से पहले की सर्विस - चाहे वह सीज़नल, एड-हॉक, वर्क-चार्ज्ड या टेम्पररी कर्मचारी के तौर पर हो - उसे यह तय करते समय गिना जाना चाहिए कि क्या उसके पास पेंशन के लिए ज़रूरी सर्विस है या नहीं। कोर्ट ने कहा कि पेंशन की रकम सिर्फ़ उसकी रेगुलर सर्विस के आधार पर ही तय की जा सकती है।कोर्ट ने 'प्रेम सिंह बनाम यूपी राज्य' और 'उदय प्रताप ठाकुर बनाम बिहार राज्य' मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया। इन फैसलों में यह साफ़ किया गया था कि पिछली...

सर तन से जुदा नारा भारत की संप्रभुता को चुनौती, इसकी तुलना अल्लाह-हू-अकबर, जय श्री राम से नहीं की जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

सितंबर 2025 में बरेली में हुई हिंसा के मामले में मौलाना तौकीर रज़ा खान की ज़मानत अर्ज़ी खारिज करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि "गुस्ताख-ए-नबी की एक ही सज़ा, सर तन से जुदा, सर तन से जुदा" नारे की तुलना "नारा-ए-तकबीर, अल्लाह-हू-अकबर", "जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल", "जय श्री राम" या "हर हर महादेव" जैसे धार्मिक नारों से नहीं की जा सकती।जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की बेंच ने कहा कि जहां ये नारे संबंधित भगवान या गुरु के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं, वहीं "सर तन से जुदा" नारा "कानून के अधिकार के...

NSA Detention: नोएडा डीएम को हाईकोर्ट की फटकार, कहा- तानाशाह अफ़सर राज्य को ऑर्वेलियन डिस्टोपिया बना देंगे

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते दिल्ली यूनिवर्सिटी की लॉ स्टूडेंट और एक्टिविस्ट आकृति चौधरी (24) की नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत रद्द करते हुए नोएडा के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM) द्वारा हिरासत का आदेश जारी करने के तरीके की कड़ी आलोचना की।बेंच ने साफ़ तौर पर चेतावनी दी कि अगर अफ़सरशाही का 'तानाशाही' रवैया जारी रहा तो उत्तर प्रदेश एक "ऑर्वेलियन डिस्टोपिया" (एक ऐसी जगह जहां सरकार का पूरा नियंत्रण हो और लोगों की आज़ादी न हो) में बदल सकता है।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की...

एक वकील और परिवार को अलग-अलग मामलों में 23 लाख से ज्यादा की सहायता, SC/ST Act के लाभों के दुरुपयोग की यूपी में जांच के आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 (SC/ST Act ) और उसके तहत बनाए गए नियमों के अंतर्गत मिलने वाली राहत और आर्थिक सहायता के दावों तथा वितरण की व्यापक जांच के निर्देश दिए। अदालत ने खास तौर पर एक ही व्यक्ति या उसके परिवार के सदस्यों द्वारा बार-बार राहत का दावा किए जाने वाले मामलों की जांच और प्रभावी निगरानी व्यवस्था बनाने को कहा।जस्टिस संतोष राय की बेंच ने यह निर्देश उस समय दिया जब अदालत के सामने राज्य सरकार ने बताया कि पेशे से वकील संतोष कुमार दोहरे और...

मुआवजा याचिका पूरी सुनवाई के बाद सिर्फ क्षेत्राधिकार के आधार पर खारिज नहीं कर सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण पूरी सुनवाई कराने के बाद केवल क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र न होने के आधार पर मुआवजा याचिका खारिज नहीं कर सकता, खासकर तब जब किसी भी प्रतिवादी ने यह साबित न किया हो कि मामले की सुनवाई उस स्थान पर होने से उसे कोई नुकसान या पूर्वाग्रह हुआ।जस्टिस सैयद कमर हसन रिजवी ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 166(2) दुर्घटना पीड़ित को दावा दायर करने के लिए मंच चुनने का अधिकार देती है। याचिका उस क्षेत्र के अधिकरण में दायर की जा सकती है जहां दुर्घटना हुई,...

बिल्डिंग मैप मंजूरी में अथॉरिटी निजी जमीन के मालिकाना हक पर फैसला नहीं कर सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि बिल्डिंग मैप की मंजूरी देने वाली अथॉरिटी निजी भूमि के मालिकाना हक के विवाद का फैसला नहीं कर सकती। ऐसी स्थिति में अथॉरिटी को केवल यह देखना है कि संबंधित जमीन पर कोई प्रभावी इंजंक्शन ऑर्डर लागू है या नहीं।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने कहा कि अथॉरिटी के पास जमीन के मालिकाना हक को विवादित घोषित करने का अधिकार नहीं है, सिवाय उन मामलों के जहां जमीन सरकार या ग्राम सभा की हो अथवा किसी न्यायिक कार्यवाही का विषय हो।क्या था मामला?याचिकाकर्ता ने अपनी जमीन पर निर्माण के लिए...

जयपुर में गिरफ़्तारी या फ़िरोज़ाबाद में? UP Police पर फ़र्ज़ी एनकाउंटर का आरोप, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ADGP और CP से मांगी रिपोर्ट

पुलिस अधिकारियों द्वारा फ़र्ज़ी एनकाउंटर के आरोपों वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश और राजस्थान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी। यह मामला जयपुर (राजस्थान) से चोरी के आरोपी की गिरफ़्तारी और उसके बाद फ़िरोज़ाबाद (UP) में कथित पुलिस एनकाउंटर में उसके घायल होने से जुड़ी अलग-अलग जानकारियों के सामने आने के बाद उठा है।जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की बेंच ने आरोपी की पत्नी द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।कोर्ट ने आगरा ज़ोन...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फरार आरोपी की 1982 की हत्या की कोशिश की अपील गैर-मौजूदगी में मेरिट के आधार पर खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या की कोशिश के मामले में 42 साल पुरानी अपील को मेरिट के आधार पर खारिज किया, जबकि आरोपी-अपीलकर्ता फरार थी। कोर्ट ने कहा कि वह तब तक हमेशा इंतज़ार करने के लिए बाध्य नहीं है जब तक कि उसे ढूंढकर कोर्ट के सामने पेश न किया जाए।जस्टिस वाणी रंजन अग्रवाल की बेंच फरार आरोपी फूलमती द्वारा 1982 में दायर क्रिमिनल अपील पर सुनवाई कर रही थी। यह अपील ट्रायल कोर्ट के उसी साल के फैसले के खिलाफ थी, जिसमें उसे IPC की धारा 307 के तहत दोषी ठहराया गया और चार साल की कठोर कैद की सजा सुनाई गई।11...

किसी और के नाम से ईमेल ID बनाना पहली नज़र में IT Act की धारा 66-C के तहत आइडेंटिटी थेफ्ट नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने शुरुआती तौर पर माना कि किसी दूसरे व्यक्ति के नाम से सिर्फ़ ईमेल ID बनाना, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2008 (IT Act) की धारा 66-C के तहत अपराध नहीं है। बता दें, उक्त धारा 'आइडेंटिटी थेफ्ट' (पहचान की चोरी) की सज़ा से संबंधित है।IT Act की धारा 66-C में तब सज़ा का प्रावधान है, जब कोई व्यक्ति धोखाधड़ी या बेईमानी से किसी दूसरे व्यक्ति के इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर, पासवर्ड या किसी अन्य यूनिक आइडेंटिफिकेशन फ़ीचर (विशिष्ट पहचान विशेषता) का इस्तेमाल करता है।जस्टिस अब्दुल मोइन...

UP Panchayat Raj Act | फंड के दुरुपयोग के लिए ग्राम प्रधान के खिलाफ जांच उनका कार्यकाल पूरा होने पर ही खत्म नहीं हो जाती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यू.पी. पंचायत राज एक्ट, 1947 की धारा 95(1)(g) के तहत ग्राम प्रधान के खिलाफ चल रही जांच को सिर्फ इसलिए बेकार नहीं माना जा सकता या रोका नहीं जा सकता कि उनका कार्यकाल खत्म हो गया।कोर्ट ने कहा कि ऐसी कार्यवाही को तार्किक नतीजे तक पहुंचाया जाना चाहिए, क्योंकि एक्ट की धारा 95(2) और धारा 27 के तहत कार्यकाल खत्म होने के बाद भी कुछ परिणाम बने रहते हैं।यू.पी. पंचायत राज एक्ट, 1947 की धारा 95(2) के तहत धारा 95(1) के संबंधित क्लॉज़ के तहत हटाए गए व्यक्ति को पांच साल तक, या राज्य...

NDPS Case: जांच अधिकारी की मौखिक आशंका पर ज़ब्त जेवर और नकदी रोकना गलत: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल जांच एजेंसी की मौखिक आशंका के आधार पर किसी आरोपी की व्यक्तिगत तलाशी से बरामद सामान को उसके इस्तेमाल से वंचित नहीं किया जा सकता। जब्त वस्तुओं को थाने या मालखाने में लंबे समय तक रखने के बजाय कानून के अनुसार उनके वास्तविक स्वामी को सौंपने की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।जस्टिस डॉ. गौतम चौधरी ने वाराणसी की ट्रायल कोर्ट का वह आदेश रद्द किया, जिसमें NDPS मामले में आरोपी की व्यक्तिगत तलाशी से बरामद सोने के जेवर और 850 रुपये नकद छोड़ने से इनकार किया गया था।मामला वर्ष 2023...

राजस्व अभिलेख रद्द नहीं हुआ तो केवल जालसाजी के आरोप से उसे फर्जी नहीं माना जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सक्षम राजस्व प्राधिकारी या अदालत द्वारा रद्द, संशोधित या निरस्त नहीं की गई राजस्व प्रविष्टि को केवल दूसरे पक्ष के जालसाजी के आरोप के आधार पर फर्जी नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि राजस्व प्रविष्टि अपने आप में स्वामित्व का अधिकार पैदा नहीं करती लेकिन जब तक वह कायम है उसके साक्ष्यात्मक महत्व को पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता।जस्टिस अनिल कुमार-X ने स्थायी निषेधाज्ञा से जुड़े मामले में यह टिप्पणी करते हुए अपील खारिज की। अदालत ने कहा कि किसी राजस्व...

राज्य सरकार के कहने भर से नियुक्तियां रद्द नहीं कर सकता नियुक्ति प्राधिकारी, खुद करना होगा विचार: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि नियुक्ति प्राधिकारी केवल राज्य सरकार के निर्देश के आधार पर किसी कर्मचारी की नियुक्ति रद्द नहीं कर सकता। नियुक्ति रद्द करने से पहले संबंधित प्राधिकारी को मामले पर स्वतंत्र रूप से विचार करना होगा और अपने विवेक का इस्तेमाल करना होगा।जस्टिस राजीव सिंह ने उत्तर प्रदेश को-ऑपरेटिव बैंक के सहायक प्रबंधकों की वर्ष 2019 में की गई सेवा समाप्ति रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि इन कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द करने के आदेश मुख्य सचिव, सहकारिता के निर्देश पर जारी किए...

शून्य बकाया कह देने से नहीं खत्म होगी राज्य की देनदारी, विभाग की पुरानी स्वीकारोक्ति भी देखेगा कोर्ट: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी ठेकेदार के बकाये को लेकर राज्य सरकार बाद की जांच के आधार पर भले ही कुछ भी बकाया नहीं होने का दावा करे लेकिन अदालत उस दावे को आंख मूंदकर स्वीकार नहीं कर सकती। अदालत को विभाग की अपनी पिछली स्वीकारोक्ति और बाद में जारी की गई रकम का मिलान कर वास्तविक बकाया देखना होगा।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अभ्देश कुमार चौधरी की पीठ ने कहा कि विभाग के एकतरफा और अपने हित में किए गए शून्य देनदारी का दावा स्वीकार करने के बजाय उसके पुराने आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से जांच करना जरूरी...

उपाध्याय समुदाय के ख़िलाफ़ टिप्पणी मामले में जगद्गुरु रामभद्राचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने खारिज की FIR दर्ज करने की याचिका

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को वकील की याचिका खारिज की। इस याचिका में जगद्गुरु रामभद्राचार्य के ख़िलाफ़ FIR दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई। यह मांग 'उपाध्याय' समुदाय और शंकराचार्य समेत सम्मानित धार्मिक हस्तियों के बारे में उनकी कथित टिप्पणियों को लेकर की गई।जस्टिस चंद्र धारी सिंह और जस्टिस तरुण सक्सेना की बेंच ने कहा कि FIR दर्ज न होने से परेशान व्यक्ति को आमतौर पर हाईकोर्ट के आर्टिकल 226 के तहत विशेष अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करने से पहले 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (BNSS) के तहत...

दहेज हत्या में पति को जमानत देना जज को पड़ा भारी, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जांच की सिफारिश की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दहेज हत्या के मामले में पर्याप्त साक्ष्यों और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 118 के तहत लागू वैधानिक अनुमान की अनदेखी कर पति को जमानत देने वाले एडिशनल सेशन जज के खिलाफ जांच की सिफारिश की। हाईकोर्ट ने पति को दी गई जमानत भी रद्द की।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने जालौन के उरई स्थित एडिशनल सेशन जज, कोर्ट नंबर-1 द्वारा आरोपी पति को दी गई जमानत के खिलाफ दाखिल जमानत रद्द करने की अर्जी पर यह आदेश दिया।मामला वर्ष 2025 में जालौन जिले के एक थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS)...

लखनऊ कोर्ट हिंसा | हाईकोर्ट के आदेश में बदलाव: अब वकीलों की गुप्त जांच IB नहीं, UP Police का इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट करेगा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को लखनऊ कोर्ट हिंसा मामले में स्वतः संज्ञान (suo moto) लेते हुए अपने पिछले आदेश में बदलाव किया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि जिन वकीलों पर आरोप लगे हैं, उनके बैकग्राउंड और गतिविधियों की गुप्त जांच इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के बजाय उत्तर प्रदेश पुलिस का इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट करेगा।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने लखनऊ डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में 21 जुलाई, 2026 को हुई घटना से जुड़ी स्वतः संज्ञान कार्यवाही में यह आदेश पारित किया।यह आदेश तब बदला गया, जब डिप्टी...