इलाहाबाद हाईकोट
बुढ़ापे में न्याय: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1982 के मर्डर केस में 100 साल के आरोपी को क्यों बरी किया?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में 1982 के मर्डर केस में 100 साल के एक व्यक्ति को बरी किया। यह बरी केस की खूबियों के आधार पर किया गया, खासकर अभियोजन पक्ष के आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में नाकाम रहने के कारण।अपने 23 पन्नों के फैसले में जस्टिस चंद्र धारी सिंह और जस्टिस संजीव कुमार की बेंच ने आरोपी की उम्र के बारे में कुछ ज़रूरी बातें कहीं।कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब कोई व्यक्ति जीवन के आखिरी पड़ाव पर कोर्ट के सामने खड़ा होता है तो दशकों की प्रक्रियात्मक देरी के बाद दंडात्मक परिणामों पर ज़ोर...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'विश्वसनीय जानकारी' के बिना पुलिस द्वारा गलत तरीके से गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को ₹1 लाख का मुआवजा दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में ऐसे व्यक्ति को 1 लाख रुपये का मुआवजा दिया, जिसे 2017 में उत्तर प्रदेश पुलिस ने बिना किसी उचित जांच या उसके खिलाफ विश्वसनीय सबूत के गलत तरीके से गिरफ्तार और हिरासत में लिया था।जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्य वीर सिंह की बेंच ने कहा कि गिरफ्तार करने वाले पुलिस कर्मियों की मनमानी और लापरवाही वाली कार्रवाई से याचिकाकर्ता के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार का उल्लंघन हुआ है और वह उस कृत्य का एक असहाय शिकार था।संक्षेप में मामलायाचिकाकर्ता (सुनील कंडू @ सुनील कुमार...
2026 CLAT-UG | सवाल एक, सही जवाब दो: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने काउंसलिंग के लिए मेरिट लिस्ट में बदलाव का आदेश क्यों दिया?
मंगलवार को दिए गए एक अहम आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ के कंसोर्टियम को CLAT-UG-2026 के लिए मेरिट लिस्ट में बदलाव करने का निर्देश दिया।यह आदेश तब दिया गया, जब सिंगल जज ने पाया कि हाई-पावर्ड 'ओवरसाइट कमेटी' ने बिना कोई कारण बताए, एक विवादित सवाल के बारे में सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट्स के फैसले को मनमाने ढंग से पलट दिया।जस्टिस विवेक सरन की बेंच ने कंसोर्टियम को आदेश दिया कि विवादित सवाल नंबर 9 (बुकलेट-C में) और CLAT-2026 एंट्रेंस एग्जाम की अलग-अलग बुकलेट में उसी से जुड़े सभी...
यूपी पुलिस ने 2024 से 1.08 लाख गुमशुदा लोगों की शिकायतों में से 9% से भी कम पर की कार्रवाई: 'हैरान' हाईकोर्ट ने PIL दर्ज की
उत्तर प्रदेश (यूपी) सरकार के इस कबूलनामे पर कड़ी निराशा जताते हुए कि जनवरी, 2024 और जनवरी, 2026 के बीच लगभग 1,08,300 गुमशुदा लोगों की शिकायतें दर्ज की गईं और इनमें से केवल 9,700 मामलों में ही राज्य पुलिस ने लोगों को ढूंढने के लिए कार्रवाई की, इलाहाबादहाई कोर्ट ने 'राज्य में गुमशुदा व्यक्ति' शीर्षक से एक PIL (जनहित याचिका) दर्ज की।जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस बबीता रानी की बेंच ने यह आदेश दिया, जिसमें गुमशुदा लोगों को ढूंढने में अधिकारियों के शुरुआती तौर पर लापरवाह रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई...
यूपी सरकार का राजनीतिक जाति रैलियों पर बैन प्रभावी होना चाहिए, बच्चों में सही संस्कार ही स्थायी समाधान: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने हाल ही में 2013 में दायर जनहित याचिका (PIL) का निपटारा किया, जिसमें सभी जाति-आधारित राजनीतिक रैलियों पर बैन लगाने और भारत के चुनाव आयोग (ECI) को ऐसी रैलियां आयोजित करने वाली राजनीतिक पार्टियों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने का निर्देश देने की मांग की गई।यह देखते हुए कि राज्य सरकार ने सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए पहले ही ऐसी सभाओं पर पूरी तरह से रोक लगाR, जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने सरकारी आदेश को सख्ती और प्रभावी ढंग से लागू करने की...
'तीर्थयात्रियों का दबाव कम करने के लिए': हाईकोर्ट ने 'बांके बिहारी' दर्शन के बढ़े हुए समय को सही ठहराया, एससी-नियुक्त पैनल के खिलाफ अवमानना याचिका खारिज
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त हाई-पावर्ड मंदिर प्रबंधन समिति, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस अशोक कुमार (रिटायर्ड) कर रहे हैं, उसके खिलाफ दायर अवमानना याचिका खारिज की। यह याचिका ठाकुर श्री बांके बिहारी जी महाराज मंदिर (वृंदावन-मथुरा में) में दर्शन का समय बढ़ाने के लिए दायर की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि यह हाईकोर्ट के नवंबर, 2022 के आदेश का उल्लंघन है।जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की बेंच ने कहा कि समिति, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के रोज़मर्रा के मामलों की देखरेख करने का अधिकार...
'सुप्रीम कोर्ट बैन के बाद भी यूपी में बुलडोज़र कार्रवाई जारी': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूछा— क्या यह सत्ता का गलत इस्तेमाल है?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में बुलडोज़र से मकान गिराने की कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि नवंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट के “बुलडोज़र जस्टिस” फैसले के बाद भी राज्य में दंड के तौर पर मकान तोड़े जा रहे हैं, जो चिंता का विषय है।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने सवाल उठाया कि क्या किसी अपराध के तुरंत बाद मकान गिरा देना सरकार की शक्ति का गलत इस्तेमाल नहीं है। अदालत ने कहा कि उसके सामने ऐसे कई मामले आए हैं, जहाँ एफआईआर दर्ज होते ही पहले नोटिस दिए गए और बाद...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अयोग्य एसपी विधायक इरफ़ान सोलंकी के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की कार्यवाही रद्द करने से किया इनकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते समाजवादी पार्टी (एसपी) के पूर्व विधायक इरफ़ान सोलंकी की याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1986 (UAPA) के तहत उनके खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी।जस्टिस समित गोपाल की बेंच ने BNSS की धारा 528 के तहत उनकी याचिका खारिज की, क्योंकि कोर्ट ने इस बात पर ध्यान दिया कि ट्रायल एडवांस्ड स्टेज पर है और उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया सबूत मौजूद हैं।सोलंकी ने 2022 के विधानसभा चुनाव कानपुर नगर के...
CPC की धारा 24 के तहत वैवाहिक मामलों के आपसी सहमति से ट्रांसफर पर कोई रोक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब केस लड़ने वाले पक्ष सहमत हों तो सिविल प्रोसीजर कोड (CPC) की धारा 24 के तहत शक्तियों का इस्तेमाल करके केस ट्रांसफर करने का आदेश देने में कोई कानूनी रुकावट नहीं है।कोर्ट ने आगे कहा कि आपसी सहमति से ट्रांसफर के मामलों में सुविधा के संतुलन की विस्तृत तुलनात्मक जांच की ज़रूरत काफी हद तक कम हो जाती है।यह टिप्पणी जस्टिस योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की बेंच ने तलाक के मुकदमे में ट्रांसफर एप्लीकेशन को मंज़ूरी देते हुए की। कोर्ट ने कहा कि हालांकि वादी आमतौर पर मुकदमे का मालिक...
भरण-पोषण बकाया में एक साथ वसूली और गिरफ्तारी वारंट जारी करना अवैध: इलाहाबाद हाइकोर्ट
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने फैमिली कोर्ट में प्रचलित उस प्रक्रिया पर सख्त आपत्ति जताई, जिसके तहत भरण-पोषण की बकाया राशि की वसूली के लिए एक ही समय पर वसूली वारंट और गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए जाते हैं।हाइकोर्ट ने इस प्रथा को अवैध और अमानवीय बताते हुए कहा है कि इसे तत्काल प्रभाव से रोका जाना चाहिए।जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की एकल पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भरण-पोषण देने के दायित्व में चूक करने वाले व्यक्ति को किसी आपराधिक मामले के अभियुक्त की तरह नहीं माना जा सकता। अदालतों को यह ध्यान रखना होगा कि...
जाली दस्तावेज़ों पर नौकरी मिली? : हाईकोर्ट ने 6 महीने में यूपी के सभी असिस्टेंट टीचरों की जांच का आदेश दिया, नौकरी रद्द करने और सैलरी रिकवर करने का भी आदेश
एक महत्वपूर्ण आदेश में उत्तर प्रदेश (यूपी) में कई असिस्टेंट टीचरों द्वारा जाली और मनगढ़ंत सर्टिफिकेट के आधार पर नौकरी पाने के 'परेशान करने वाले' पैटर्न पर कड़ा रुख अपनाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मैंडमस जारी किया, जिसमें पूरे राज्य में उनकी व्यापक जांच करने का निर्देश दिया गया।कोर्ट ने प्रिंसिपल सेक्रेटरी, बेसिक शिक्षा को यह काम, हो सके तो छह महीने के भीतर पूरा करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि न केवल अवैध नियुक्तियों को रद्द किया जाए, बल्कि सैलरी भी रिकवर की जाए और...
तत्काल इनाम या प्रमोशन नहीं, घायल को अनिवार्य इलाज और FIR जरूरी: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एनकाउंटर संस्कृति पर कसी नकेल
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में बढ़ती पुलिस FIR संस्कृति पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट निर्देश जारी किए। हाइकोर्ट ने कहा कि किसी भी पुलिस एनकाउंटर के तुरंत बाद पुलिसकर्मियों को न तो आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिया जाएगा और न ही वीरता पुरस्कार।साथ ही एनकाउंटर की हर घटना में अलग से FIR दर्ज करना, घायल को तत्काल मेडिकल सहायता उपलब्ध कराना और मजिस्ट्रेट या मेडिकल अधिकारी द्वारा घायल का बयान दर्ज कराना अनिवार्य होगा।यह महत्वपूर्ण आदेश जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ द्वारा पारित किया गया। 11...
यूपी पुलिस तारीफ़ पाने के लिए 'हाफ एनकाउंटर' कर रही है: हाईकोर्ट ने SP/SSP को एसी गाइडलाइंस का उल्लंघन करने पर अवमानना की चेतावनी दी
पूर्ववर्ती जारी किए गए महत्वपूर्ण आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस एनकाउंटर में आरोपी को गंभीर चोट लगने के मामलों में पुलिस अधिकारियों द्वारा पालन किए जाने वाले सख्त 6-पॉइंट गाइडलाइंस जारी किए।जस्टिस अरुण कुमार देशवाल की बेंच ने यह भी साफ किया कि डिस्ट्रिक्ट पुलिस चीफ, जिसमें पुलिस अधीक्षक (SP), सीनियर पुलिस अधीक्षक (SSP) और कमिश्नर शामिल हैं, अगर उनके अधिकार क्षेत्र में एनकाउंटर के संबंध में PUCL बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का सख्ती से पालन नहीं किया जाता है तो...
1991 विधानसभा हंगामा मामले को हाईकोर्ट ने किया रद्द, यूपी सरकार को पुराने मुकदमों पर नीति बनाने का निर्देश
न्यायपालिका के सीमित संसाधनों और लंबित मामलों के बढ़ते बोझ पर गंभीर टिप्पणी करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ पीठ) ने बुधवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा में कथित हंगामे से जुड़े 34 वर्ष पुराने आपराधिक मुकदमे को रद्द कर दिया। अदालत ने ऐसे पुराने और निष्प्रभावी मुकदमों को “निरर्थक (futile) अभ्यास” करार देते हुए राज्य सरकार से कहा कि वह विभिन्न अदालतों में लंबित ऐसे मामलों के “डेडवुड को काटे”।जस्टिस पंकज भाटिया की पीठ ने धारा 482 दंप्रसं के तहत दायर याचिकाओं को स्वीकार करते हुए 1991 में विधानसभा के गेट...
UP STF IG पर रिश्वत लेकर अपराधी छोड़ने के आरोप वाली खबर मामले में न्यूज़18 के पत्रकारों को हाइकोर्ट से राहत नहीं
इलाहाबाद हाइकोर्ट की लखनऊ बेंच ने न्यूज़18 चैनल के एग्जीक्यूटिव एडिटर और अन्य पत्रकारों द्वारा दायर याचिका खारिज की, जिसमें उनके खिलाफ जारी समन आदेश को चुनौती दी गई थी। यह समन सीनियर आईपीएस अधिकारी अमिताभ यश द्वारा दायर आपराधिक मानहानि के मामले में जारी किया गया।जस्टिस ब्रिज राज सिंह की पीठ ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 482 के तहत दाखिल याचिका पर सुनवाई करते समय हाइकोर्ट “मिनी ट्रायल” नहीं कर सकता और न ही इस स्तर पर पत्रकारों की निर्दोषता से संबंधित साक्ष्यों का मूल्यांकन किया जा...
NI Act की धारा 138 के तहत शिकायत केवल पेयी या होल्डर इन ड्यू कोर्स ही कर सकता है: इलाहाबाद हाइकोर्ट
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (NI Act) की धारा 138 के तहत चेक बाउंस से संबंधित शिकायत कोई तीसरा व्यक्ति दाखिल नहीं कर सकता, भले ही उस लेन-देन से वह अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित क्यों न हो।हाइकोर्ट ने कहा कि ऐसी शिकायत केवल चेक के पेयी या होल्डर इन ड्यू कोर्स द्वारा ही दायर की जा सकती है।जस्टिस समित गोपाल की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि पेयी या होल्डर इन ड्यू कोर्स का अधिकृत प्रतिनिधि, जैसे पावर ऑफ अटॉर्नी धारक या कंपनी का अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता, शिकायत दाखिल...
Cyber Crime Cases | 'बिना वजह बैंक अकाउंट फ्रीज़ नहीं कर सकते, 24 घंटे के अंदर मजिस्ट्रेट को बताएं': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जारी किए प्रोटोकॉल
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि पुलिस द्वारा किसी खास अकाउंट को फ्रीज़ करने के लिए बैंक को दिया गया बिना वजह का नोटिस, जिसमें रकम (जिस पर रोक लगाई जा रही है) का ज़िक्र न हो, गैर-कानूनी और मनमाना होगा।जस्टिस शेखर बी सर्राफ और जस्टिस मनजीव शुक्ला की बेंच ने कहा कि इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर को 24 घंटे के अंदर इस बारे में संबंधित मजिस्ट्रेट को बताना होगा।कोर्ट ने यह भी कहा कि संबंधित IO को बैंकों को उस केस नंबर के बारे में भी बताना होगा जिसके आधार पर यह रोक/फ्रीज़िंग की जा रही है।हाईकोर्ट खालसा मेडिकल...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NEET-PG 2025-26 कट-ऑफ कम करने पर सवाल उठाने वाली PIL खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) के NEET-PG 2025-26 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ पर्सेंटाइल को कुछ कैटेगरी के लिए शून्य पर्सेंटाइल और माइनस 40 स्कोर तक कम करने के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (PIL) खारिज की।चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की बेंच ने PIL याचिका खारिज करते हुए कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट पहले ही इसी तरह की याचिका खारिज कर चुका है। इस विषय पर एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में भी पेंडिंग है। विस्तृत आदेश का इंतजार है।याचिकाकर्ता...
झांसी मेडिकल कॉलेज आग्निकांड | 1 साल से ज़्यादा समय से जांच पेंडिंग: हाईकोर्ट ने पूर्व चीफ मेडिकल सुपरिटेंडेंट का सस्पेंशन रोका
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने हाल ही में झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की पूर्व चीफ मेडिकल सुपरिटेंडेंट (CMS) डॉ. सुनीता राठौर के खिलाफ जारी सस्पेंशन ऑर्डर पर रोक लगाई।यह अंतरिम राहत कॉलेज के नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (NICU) में लगी दुर्भाग्यपूर्ण आग के एक साल से ज़्यादा समय बाद मिली है, जिसमें 10 बच्चों की जान चली गई थी। बचाए गए 39 बच्चों में से 8 अन्य की बाद में बीमारी के कारण मौत हो गई।जस्टिस श्री प्रकाश सिंह की बेंच ने यह आदेश दिया, जिसमें कहा गया कि जांच शुरू हुए एक साल से...
Sambhal Violence : पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR का आदेश दिए जाने के कुछ दिनों बाद पुलिस पर गोली मारने का आरोप लगाने वाले व्यक्ति को मिली जमानत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोहम्मद आलम नाम के युवक को अंतरिम अग्रिम जमानत दी, जिसके पिता की याचिका पर संभल की एक CJM कोर्ट ने हाल ही में नवंबर, 2024 की हिंसा के दौरान कथित तौर पर उस पर गोली चलाने के आरोप में कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था।हालांकि, आवेदक के पिता ने CJM कोर्ट में तर्क दिया था कि उनका बेटा बिना किसी उकसावे के पुलिस फायरिंग का शिकार हुआ था, लेकिन राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में तर्क दिया कि आलम को पुलिसकर्मियों की गोली से कोई चोट नहीं लगी थी।हालांकि, जस्टिस...




















