इलाहाबाद हाईकोट

CCTV फुटेज सिर्फ 2 महीने रखने वाला यूपी डीजीपी का आदेश सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की प्रथम दृष्टया अवमानना: हाईकोर्ट
CCTV फुटेज सिर्फ 2 महीने रखने वाला यूपी डीजीपी का आदेश सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की 'प्रथम दृष्टया अवमानना': हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) द्वारा जारी उस परिपत्र पर गंभीर सवाल उठाए, जिसमें राज्य के सभी थानों में CCTV फुटेज केवल 2 से 2.5 महीने तक सुरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है। अदालत ने इसे अत्यंत अजीब बताते हुए कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के फैसले Paramvir Singh Saini बनाम बलजीत सिंह (2020) के प्रथमदृष्टया अवमानना जैसा प्रतीत होता है, जिसमें कम से कम 6 महीने से 18 महीने तक फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है।जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस...

तबादला नीति केवल मार्गदर्शक, कानूनन लागू नहीं; राज्य को किसी कर्मचारी का तबादला करने का निर्देश नहीं दे सकती अदालत: इलाहाबाद हाईकोर्ट
तबादला नीति केवल मार्गदर्शक, कानूनन लागू नहीं; राज्य को किसी कर्मचारी का तबादला करने का निर्देश नहीं दे सकती अदालत: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने यह स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा जारी की गई तबादला नीति केवल मार्गदर्शन के लिए होती है। इसे अदालत के माध्यम से लागू नहीं कराया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी का स्थानांतरण और पदस्थापना पूरी तरह से राज्य सरकार के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में आता है। न्यायालय राज्य को किसी विशेष कर्मचारी को किसी विशेष स्थान पर स्थानांतरित करने का निर्देश नहीं दे सकता।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस मंजिव शुक्ला की खंडपीठ ने बुधवार को एक रिट याचिका खारिज करते हुए...

ट्रायल के दौरान रिकॉर्ड साक्ष्य के आधार पर ही जोड़े जा सकते हैं अतिरिक्त आरोपी, केस डायरी सामग्री अप्रासंगिक: इलाहाबाद हाईकोर्ट
ट्रायल के दौरान रिकॉर्ड साक्ष्य के आधार पर ही जोड़े जा सकते हैं अतिरिक्त आरोपी, केस डायरी सामग्री अप्रासंगिक: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 319 के तहत किसी अतिरिक्त आरोपी को तलब करने का आधार केवल वही साक्ष्य हो सकता है, जो मुकदमे के दौरान न्यायालय के समक्ष रिकॉर्ड किया गया हो। चार्जशीट या केस डायरी में उपलब्ध सामग्री को साक्ष्य नहीं माना जा सकता। इनके आधार पर किसी व्यक्ति को अतिरिक्त आरोपी के रूप में समन नहीं किया जा सकता।यह टिप्पणी जस्टिस चवन प्रकाश की एकलपीठ ने दहेज मृत्यु के एक मामले में दाखिल आपराधिक पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए की। याचिका के माध्यम से...

अतिरिक्त मुख्य सरकारी वकील निजी पक्ष की ओर से पेश हो सकता है या नहीं: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने विधि सचिव से मांगी रिपोर्ट
अतिरिक्त मुख्य सरकारी वकील निजी पक्ष की ओर से पेश हो सकता है या नहीं: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने विधि सचिव से मांगी रिपोर्ट

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण सवाल पर राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा कि क्या अतिरिक्त मुख्य सरकारी वकील किसी ऐसे मामले में निजी पक्ष की ओर से पैरवी कर सकता है, जिसमें उत्तर प्रदेश राज्य स्वयं एक पक्षकार हो। इस संबंध में अदालत ने प्रमुख सचिव (विधि) एवं विधिक स्मरणकर्ता से विस्तृत रिपोर्ट तलब की।जस्टिस दिवेश चंद्र समंत की एकल पीठ ने यह निर्देश उस समय दिया, जब वर्ष 2018 से लंबित एक आपराधिक पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई हो रही थी। यह याचिका पत्नी द्वारा फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए...

हठधर्मिता पर सख्त इलाहाबाद हाइकोर्ट, पेड़ों की भू-अंकन विफलता पर शीर्ष वन व उद्यान अधिकारियों को तलब 40 हजार रुपये का जुर्माना
हठधर्मिता' पर सख्त इलाहाबाद हाइकोर्ट, पेड़ों की भू-अंकन विफलता पर शीर्ष वन व उद्यान अधिकारियों को तलब 40 हजार रुपये का जुर्माना

इलाहाबाद हाइकोर्ट की लखनऊ पीठ ने वर्ष 2013 में दायर एक जनहित याचिका में राज्य अधिकारियों की उदासीनता और हठधर्मिता पर कड़ा रुख अपनाते हुए वन और उद्यान विभाग के शीर्ष अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया।न्यायालय ने पेड़ों के वैज्ञानिक भू-अंकन से संबंधित पूर्व आदेशों के पालन में विफल रहने पर कुल 40 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस अब्धेश कुमार चौधरी की पीठ ने वन विभाग के अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के प्रमुख सचिव सहित अन्य...

रोजी-रोटी कमाने का उसका अधिकार कम नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग बेटी के रेप केस में सरकारी कर्मचारी की सज़ा और उम्रकैद पर रोक लगाई
'रोजी-रोटी कमाने का उसका अधिकार कम नहीं किया जा सकता': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग बेटी के रेप केस में सरकारी कर्मचारी की सज़ा और उम्रकैद पर रोक लगाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक सरकारी कर्मचारी (लेखपाल) की सज़ा और उम्रकैद पर रोक लगाई, जिस पर अपनी 16 साल की बेटी का यौन उत्पीड़न करने का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ इस मामले में शामिल होने की वजह से उसकी ज़िंदगी जीने के लिए रोजी-रोटी कमाने के अधिकार को कम नहीं किया जा सकता।जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस प्रशांत मिश्रा-I की बेंच ने यह भी कहा कि यह अपील 2024 की है और केसों के भारी बैकलॉग के कारण निकट भविष्य में इसकी सुनवाई की बहुत कम संभावना है।ट्रायल कोर्ट ने पिछले साल मई में पिता-आरोपी...

S. 105 BNSS | पुलिस को तलाशी और ज़ब्ती की वीडियोग्राफी करनी होगी, वरना अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
S. 105 BNSS | पुलिस को तलाशी और ज़ब्ती की वीडियोग्राफी करनी होगी, वरना अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया कि वह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 105 के तहत निर्धारित तलाशी और ज़ब्ती की अनिवार्य ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए एक विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी करें।40 मोटरसाइकिलों की कथित बरामदगी से जुड़े चोरी के मामले में आरोपी को जमानत देते हुए जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने कहा कि BNSS की धारा 105 के अनिवार्य प्रावधान का पालन न करने से पूरी अभियोजन कहानी पर संदेह पैदा होता...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवैध रूप से बेदखल की गई महिला को ₹1 लाख क्षतिपूर्ति का आदेश दिया; सिविल जज के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवैध रूप से बेदखल की गई महिला को ₹1 लाख क्षतिपूर्ति का आदेश दिया; सिविल जज के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को एक महिला और उसके तीन नाबालिग बच्चों को अवैध रूप से घर से बेदखल किए जाने के मामले में बड़ी राहत देते हुए रु. 1 लाख का मुआवज़ा देने का आदेश दिया। साथ ही, अदालत ने संबंधित संपत्ति का कब्ज़ा पुनः बहाल करने का निर्देश भी जारी किया।इसके साथ ही, कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए आदेश की प्रति मुख्य न्यायाधीश को भेजने का निर्देश दिया, ताकि उस सिविल जज (कनिष्ठ प्रभाग) के खिलाफ उचित प्रशासनिक कार्रवाई पर विचार किया जा सके, जिसने प्रतिवादी के पक्ष में एकतरफा अंतरिम रोक आदेश...

स्टाम्प शुल्क निर्धारण के लिए यूपी जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम लागू नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
स्टाम्प शुल्क निर्धारण के लिए यूपी जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम लागू नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के तहत भूमि के बाजार मूल्य का निर्धारण करने के लिए उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1950 (UPZALR Act) को आधार नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने कहा कि दोनों कानूनों के उद्देश्य अलग-अलग हैं। जमींदारी उन्मूलन अधिनियम स्टांप शुल्क निर्धारण को नियंत्रित नहीं करता।जस्टिस सैयद क़मर हसन रिज़वी ने यह अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि UPZALR Act के तहत धारा 143 की अधिसूचना अधिकतम एक सहायक कारक हो सकती है, लेकिन इसके आधार पर ही...

प्रतीक्षा सूची में नाम होने से नियुक्ति का अटल अधिकार नहीं बनता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
प्रतीक्षा सूची में नाम होने से नियुक्ति का अटल अधिकार नहीं बनता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) में शामिल अभ्यर्थी को नियुक्ति का कोई पूर्ण या अटल अधिकार प्राप्त नहीं होता और न ही किसी चयन प्रक्रिया की प्रतीक्षा सूची को अनिश्चित काल तक जीवित रखा जा सकता है।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने यह टिप्पणी सहायक अध्यापक (एलटी ग्रेड) भर्ती से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की। अदालत ने कहा कि यह स्थापित सिद्धांत है कि प्रतीक्षा सूची केवल सीमित अवधि और सीमित उद्देश्य के लिए होती है और इससे नियुक्ति का स्वतः अधिकार उत्पन्न...

पार्ट-टाइम इंस्ट्रक्टर के तौर पर मिले अनुभव को हेडमास्टर पद के लिए एलिजिबिलिटी में नहीं गिना जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
पार्ट-टाइम इंस्ट्रक्टर के तौर पर मिले अनुभव को हेडमास्टर पद के लिए एलिजिबिलिटी में नहीं गिना जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि पार्ट-टाइम इंस्ट्रक्टर के तौर पर मिला अनुभव रेगुलर टीचर के अनुभव के बराबर नहीं है। ऐसी पार्ट-टाइम सर्विस उम्मीदवार को हेडमास्टर के पद पर नियुक्ति के लिए तब तक एलिजिबल नहीं बनाएगी, जब तक कि कानून में खास तौर पर इसका प्रावधान न हो।जस्टिस मंजू रानी चौहान ने कहा,“अगर भर्ती के नियमों में खास तौर पर रेगुलर सर्विस में असिस्टेंट टीचर के तौर पर टीचिंग अनुभव की ज़रूरत है तो सिर्फ़ पार्ट-टाइम इंस्ट्रक्टर के तौर पर हासिल किया गया अनुभव, जिसमें परमानेंट होने, प्रशासनिक...

697 कार्डधारकों का राशन निकालने के लिए 3 आधार कार्ड का अवैध इस्तेमाल: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फेयर प्राइस शॉप के लाइसेंस रद्दीकरण पर पर राहत से किया इनकार
697 कार्डधारकों का राशन निकालने के लिए 3 आधार कार्ड का अवैध इस्तेमाल: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फेयर प्राइस शॉप के लाइसेंस रद्दीकरण पर पर राहत से किया इनकार

पिछले महीने इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक फेयर प्राइस शॉप लाइसेंस धारक को राहत देने से इनकार किया, जो 3 आधार कार्ड का इस्तेमाल करके 697 राशन कार्डधारकों का राशन अवैध रूप से निकाल रहा था, क्योंकि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर पाया कि राशन असल में 697 राशन कार्डधारकों को बांटा जा रहा था।याचिकाकर्ता के फेयर प्राइस शॉप लाइसेंस रद्द करने के फैसले को बरकरार रखते हुए जस्टिस अरुण कुमार ने कहा,“यह साफ है कि 697 कार्डधारकों का राशन निकालने के लिए तीन आधार कार्ड के इस्तेमाल के बारे में याचिकाकर्ता ने कोई सही वजह...

बिना दोषसिद्धि केवल जेल जाने के आधार पर CISF कर्मी को सेवा से नहीं हटाया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
बिना दोषसिद्धि केवल जेल जाने के आधार पर CISF कर्मी को सेवा से नहीं हटाया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी आपराधिक मामले में केवल गिरफ्तारी या जेल में रहने के आधार पर, बिना दोषसिद्धि के केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के किसी कर्मी को सेवा से हटाया नहीं जा सकता। अदालत ने कहा कि मात्र कारावास को अनुशासनात्मक कार्रवाई या बर्खास्तगी का आधार बनाना न तो तथ्यात्मक रूप से उचित है और न ही कानूनी रूप से टिकाऊ।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस राजीव भारती की खंडपीठ ने केंद्र सरकार की विशेष अपील खारिज करते हुए सिंगर जज का आदेश बरकरार रखा, जिसमें हत्या के एक मामले में आरोपित...

लिखित किरायेदारी एग्रीमेंट न होना या किरायेदारी की जानकारी न देना, रेंट अथॉरिटी के अधिकार क्षेत्र को नहीं रोकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
लिखित किरायेदारी एग्रीमेंट न होना या किरायेदारी की जानकारी न देना, रेंट अथॉरिटी के अधिकार क्षेत्र को नहीं रोकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश शहरी परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 के तहत रेंट अथॉरिटी के पास किरायेदार को बेदखल करने के लिए मकान मालिक के आवेदन पर सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र है, भले ही कोई किरायेदारी एग्रीमेंट न हुआ हो और मकान मालिक ने किरायेदारी की जानकारी भी न दी हो।उत्तर प्रदेश शहरी परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 के विभिन्न प्रावधानों का हवाला देते हुए जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने कहा,“2021 के अधिनियम के प्रावधानों के तहत गठित रेंट अथॉरिटी के पास उन मामलों में...

फॉर्म में जानबूझकर ज़्यादा नंबर भरने वाले उम्मीदवार की नियुक्ति मौलिक रूप से गैर-कानूनी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
फॉर्म में जानबूझकर ज़्यादा नंबर भरने वाले उम्मीदवार की नियुक्ति मौलिक रूप से गैर-कानूनी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भर्ती के लिए एप्लीकेशन फॉर्म में जानबूझकर ज़्यादा नंबर भरने वाले उम्मीदवार की नियुक्ति, ताकि सिलेक्शन प्रोसेस में गलत फायदा मिल सके, मौलिक रूप से गैर-कानूनी है।कोर्ट ने कहा कि ऐसा उम्मीदवार एस्टोपेल का फायदा नहीं उठा सकता क्योंकि नियुक्ति शुरू से ही गलत है।जस्टिस मंजू रानी चौहान ने कहा,“जहां कोई उम्मीदवार जानबूझकर असल में मिले नंबरों से ज़्यादा नंबर भरता है, जिससे वह खुद को गलत फायदे वाली स्थिति में डालता है और आखिरकार नियुक्ति पा लेता है तो ऐसी नियुक्ति को कानूनी या...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सज़ा के 38 साल बाद हत्या के आरोपी को बरी किया, कहा- मृतक की हत्या किसी और ने की थी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सज़ा के 38 साल बाद हत्या के आरोपी को बरी किया, कहा- 'मृतक की हत्या किसी और ने की थी'

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में हत्या के 3 आरोपियों को बरी किया, जो उम्रकैद की सज़ा काट रहे थे। कोर्ट ने कहा कि हत्या एक ब्लाइंड मर्डर था और इसे किसी और ने अंजाम दिया था। कोर्ट ने कहा कि चश्मदीद और मेडिकल सबूतों में बड़े विरोधाभास हैं और अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे अपना मामला साबित करने में विफल रहा।3 आरोपियों को बरी करते हुए जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस संजीव कुमार की बेंच ने कहा:“हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे अपना मामला साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है।...

अगर बिना किसी स्पष्टीकरण के मृत व्यक्तियों को अभियोजन गवाह के तौर पर शामिल किया जाता है, तो जांच अविश्वसनीय जाती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
अगर बिना किसी स्पष्टीकरण के मृत व्यक्तियों को अभियोजन गवाह के तौर पर शामिल किया जाता है, तो जांच अविश्वसनीय जाती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अगर बिना किसी स्पष्टीकरण के मृत व्यक्तियों को अभियोजन गवाह के तौर पर शामिल किया जाता है, तो जांच अविश्वसनीय और कानूनी रूप से अस्थिर हो जाती है।जस्टिस शेखर कुमार यादव ने कहा:“मृत व्यक्तियों को बिना किसी स्पष्टीकरण के अभियोजन गवाह के तौर पर शामिल करना मामले की जड़ तक जाता है। जांच के दौरान दिमाग का इस्तेमाल न करने को दर्शाता है, जिससे जांच अविश्वसनीय और कानूनी रूप से अस्थिर हो जाती है।”2022 में गौतम बुद्ध नगर में एक FIR दर्ज की गई, जिसमें गांव चिताहेड़ा, तहसील दादरी की...

अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता से जुड़े डोमेस्टिक अवार्ड का प्रवर्तन हाईकोर्ट में होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता से जुड़े डोमेस्टिक अवार्ड का प्रवर्तन हाईकोर्ट में होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता से संबंधित किसी घरेलू मध्यस्थता अवार्ड (Domestic Award) का प्रवर्तन मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 36 के तहत संबंधित अधिकार क्षेत्र वाले हाईकोर्ट द्वारा किया जाएगा।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस राजीव भारती की खंडपीठ ने यह निर्णय देते हुए कहा किअंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता से संबंधित डोमेस्टिक अवार्ड के प्रवर्तन के लिए धारा 36 के तहत आवेदन दाखिल करने के संबंध में 'कोर्ट' हाईकोर्ट ही होगा।मामलाअपीलकर्ता ने सिंगल जज के...

अनुमान के आधार पर कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन नहीं; अधिनियम में प्रावधान न होने पर राहत संभव नहीं
अनुमान के आधार पर कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन नहीं; अधिनियम में प्रावधान न होने पर राहत संभव नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी छात्र या छात्रा को यह लगता है कि पुनर्मूल्यांकन होने पर उसके अंक बढ़ सकते हैं, तो मात्र इस अनुमान के आधार पर उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन नहीं कराया जा सकता, क्योंकि उ.प्र. इंटरमीडिएट एजुकेशन एक्ट, 1921 में पुनर्मूल्यांकन का कोई वैधानिक प्रावधान मौजूद नहीं है। अदालत ने कहा कि जब तक नियम इसकी अनुमति न दें, ऐसी मांग को स्वीकार नहीं किया जा सकता।मामले में याचिकाकर्ता ने इंटरमीडिएट परीक्षा में प्राप्त अंकों से असंतुष्ट होकर हिंदी और जीवविज्ञान...