इलाहाबाद हाईकोट
बालिग होने के बाद मुस्लिम पर्सनल लॉ विवाह की अनुमति दे सकता है, लिव-इन संबंध की नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ में भले ही बालिग होने के बाद विवाह को मान्यता दी गई हो लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि विवाह के बिना लिव-इन संबंध को भी कानूनी स्वीकृति मिल जाती है।जस्टिस गरिमा प्रसाद ने कहा,“यदि मुस्लिम पर्सनल लॉ के कुछ मत बालिग होने पर विवाह को मान्यता देते हैं तो वह केवल विवाह से संबंधित है विवाह के बाहर लिव-इन व्यवस्था से नहीं।”बता दें, यह मामला अंतरधार्मिक जोड़े की याचिका से जुड़ा था। याचिका दायर करने वाली महिला 20 वर्षीय मुस्लिम थी, जबकि पुरुष...
राहुल गांधी के खिलाफ कथित आय से अधिक संपत्ति शिकायत पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, CBI और ED से मांगी प्रगति रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ कथित आय से अधिक संपत्ति की शिकायत पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को आरोपों का सत्यापन कर प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।यह आदेश जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस जफीर अहमद की खंडपीठ ने BJP कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।इन-चैंबर सुनवाई के दौरान CBI की ओर से अदालत को बताया गया कि एजेंसी को शिकायत...
21 साल से कम उम्र के लड़के के साथ Live-in Relationship को संरक्षण नहीं दे सकता कोर्ट: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि live-in relationship में किसी एक साथी की उम्र वैधानिक विवाह आयु से कम है, तो अदालत संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत ऐसे संबंध को संरक्षण नहीं दे सकती। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के तहत सुरक्षा मिलती रहेगी।जस्टिस गरिमा प्रसाद की पीठ एक 20 वर्षीय मुस्लिम महिला और 19 वर्षीय हिंदू युवक की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। दोनों ने दावा किया था कि वे live-in relationship में हैं और महिला के परिवार से उन्हें खतरा...
S.233 CrPC | आरोपी को बचाव पक्ष के गवाहों को बुलाने का अधिकार, कोर्ट का दखल सीमित: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि कोर्ट आमतौर पर CrPC की धारा 233 के तहत आरोपी के बचाव पक्ष के गवाहों को पेश करने के अधिकार में दखल नहीं दे सकती। कोर्ट ने कहा कि अगर कोर्ट आरोपी द्वारा पेश किए जाने वाले गवाहों को समन जारी करने से मना करती है तो वह ऐसा केवल लिखित में कारण बताते हुए और यह देखते हुए कर सकती है कि ऐसे समन से न्याय में देरी होगी या न्याय का मकसद ही खत्म हो जाएगा।जस्टिस विवेक कुमार सिंह ने कहा,“CrPC की धारा 311 के तहत, शक्ति केवल कोर्ट के पास होती है। CrPC की धारा 233 के तहत अधिकार...
मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना जुआ मामले की जांच नहीं कर सकती पुलिस : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि सार्वजनिक स्थान या सड़क पर जुआ खेलने से जुड़ा Public Gambling Act, 1867 की धारा 13 के तहत अपराध गैर-संज्ञेय (Non-Cognizable) है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना पुलिस जांच शुरू नहीं कर सकती और बिना वारंट गिरफ्तारी भी नहीं की जा सकती।जस्टिस संजय कुमार पचौरी की एकलपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए एक आरोपी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही और समन आदेश को रद्द कर दिया।मामला मिर्जापुर का था, जहां पुलिस ने चार लोगों को ताश के पत्तों...
मजिस्ट्रेट की अनुमति बिना जुआ अधिनियम की धारा 13 में जांच नहीं कर सकती पुलिस: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थान पर जुआ खेलने से जुड़ा सार्वजनिक जुआ अधिनियम, 1867 की धारा 13 के तहत अपराध गैर-संज्ञेय है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में पुलिस मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना जांच शुरू नहीं कर सकती और न ही बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है।जस्टिस संजय कुमार पचौरी की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए मिर्जापुर में दर्ज आपराधिक मामले और उससे जुड़े संज्ञान व समन आदेश रद्द किया।मामला उस FIR से जुड़ा था जिसमें पुलिस ने चार लोगों को ताश के पत्तों और...
पेट दर्द की दवा से मां को शराबी नहीं कहा जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बच्चे की अभिरक्षा मां को सौंपी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पेट दर्द के इलाज से जुड़ी मेडिकल पर्चियों के आधार पर किसी महिला को शराब की आदी या मानसिक रूप से अस्वस्थ नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि ऐसे आधार पर मां को उसके बच्चे की अभिरक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस संदीप जैन ने यह टिप्पणी करते हुए नाबालिग बच्चे की अभिरक्षा मां को सौंप दी। अदालत ने कहा कि पांच वर्ष तक की आयु के बच्चे की प्राकृतिक संरक्षक मां होती है।मामला उस याचिका से जुड़ा था जिसमें मां ने आरोप लगाया था कि बच्चे के पिता ने जबरन बच्चे को उससे अलग कर...
अदालत में तीखी बहस अवमानना नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बैठे हुए जज के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की मांग खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रैक्टिस कर रहे वकील द्वारा दायर याचिका खारिज की, जिसमें हाईकोर्ट के वर्तमान जज जस्टिस सरल श्रीवास्तव के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई।जस्टिस सलील कुमार राय और जस्टिस देवेंद्र सिंह-प्रथम की खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि किसी गलत आदेश या अदालत में वकील और जज के बीच हुई तीखी बहस को आपराधिक अवमानना का आधार नहीं बनाया जा सकता।मामले में वकील अरुण मिश्रा ने दावा किया था कि नवंबर, 2025 में उन्होंने एक मामले की सुनवाई से जस्टिस सरल श्रीवास्तव से स्वयं को अलग...
पत्नी की शिक्षा या अकेले कमाने की क्षमता CrPC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण का दावा करने में बाधा नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि सिर्फ़ इस बात से कि पत्नी पढ़ी-लिखी है या उसमें कमाने की क्षमता है, उसे CrPC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण का दावा करने से वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने आगे कहा कि जिस बात पर विचार किया जाना चाहिए, वह यह है कि क्या उसमें खुद का भरण-पोषण करने की वास्तविक और मौजूदा क्षमता है। वह भी उसी जीवन-स्तर के अनुसार, जिसका वह अपने वैवाहिक घर में आनंद लेती थी।कोर्ट ने यह भी कहा कि जब तक यह साबित न हो जाए कि वह किसी लाभकारी रोज़गार में है और खुद का...
ड्यूटी पर जाते समय सड़क दुर्घटना में मारे गए पुलिस के सपोर्ट स्टाफ को पेंशन नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस के 'फॉलोअर' (सपोर्ट स्टाफ) के परिवार को पेंशन देने से इनकार किया, जिसकी ड्यूटी पर जाते समय एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। कोर्ट ने कहा कि सड़क दुर्घटनाएं 'उत्तर प्रदेश पुलिस (असाधारण पेंशन) नियमावली, 1961' के नियम 3 के दायरे में नहीं आतीं; यह नियम उन विशेष परिस्थितियों को बताता है जिनमें पेंशन दी जा सकती है।'उत्तर प्रदेश पुलिस (असाधारण पेंशन) नियमावली, 1961' का नियम 3 कहता है कि ये नियम उत्तर प्रदेश के सभी राजपत्रित/अराजपत्रित पुलिस, PAC या अग्निशमन सेवा...
स्वेच्छा से हिंदू धर्म अपनाने वाले मुस्लिम व्यक्ति का धर्मांतरण आवेदन खारिज करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ADM को लगाई फटकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के गैरकानूनी धर्मांतरण प्रतिषेध कानून के तहत एक मुस्लिम व्यक्ति के हिंदू धर्म अपनाने के मामले में ADM की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराज़गी जताई है। कोर्ट ने कहा कि ADM ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर बार-बार पुलिस जांच करवाई और आपराधिक मामले को आधार बनाकर धर्मांतरण प्रमाणन आवेदन खारिज कर दिया।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने फिलहाल प्रयागराज के ADM (प्रशासन) द्वारा पारित उस आदेश को स्थगित कर दिया है, जिसमें याचिकाकर्ता के 'सनातन धर्म'...
S. 138 NI Act | बाउंस हुए चेक पर साइन न करने वाले जॉइंट अकाउंट होल्डर पर केस नहीं चल सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
चेक बाउंस होने से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में फिर से दोहराया कि जॉइंट अकाउंट होल्डर, जिसने विवादित चेक पर साइन नहीं किए, उस पर Negotiable Instruments Act, 1881 (NI Act) की धारा 138 के तहत केस नहीं चलाया जा सकता।जस्टिस संदीप जैन की बेंच ने यह भी साफ किया कि NI Act की धारा 141, जो परोक्ष दायित्व (vicarious liability) से जुड़ी है, सिर्फ़ कंपनियों और पार्टनरशिप फर्मों पर लागू होती है, व्यक्तियों पर नहीं।इस तरह सिंगल जज ने आवेदक (मधु सिंह) के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1983 के 'सामूहिक बलात्कार' मामले में 3 लोगों को बरी किया, कहा- कोई मेडिकल सबूत नहीं
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में 1983 के एक कथित सामूहिक बलात्कार मामले में 3 लोगों को बरी किया। इस मामले में पीड़िता घटनाक्रम के समय 7 महीने की गर्भवती थी।जस्टिस अवनीश सक्सेना की बेंच ने आरोपियों को 'संदेह का लाभ' दिया। बेंच ने पाया कि FIR दर्ज करने में बिना किसी वजह के देरी हुई और मामले की पुष्टि करने वाले मेडिकल सबूतों की पूरी तरह कमी है।कोर्ट ने FIR को 'अस्पष्ट' भी बताया, क्योंकि कथित तौर पर पीड़िता के साथ चार लोगों ने बलात्कार किया था, लेकिन FIR में सिर्फ तीन लोगों के नाम थे।बेंच ने टिप्पणी...
बिना गिरफ्तारी के कारण बताए किसी को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा: यूपी सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को दिया आश्वासन
इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष उत्तर प्रदेश सरकार ने आश्वासन दिया है कि राज्य में किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तारी के कारण और आधार बताए बिना गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। सरकार ने कहा कि पुलिस गिरफ्तारी की प्रक्रिया को BNSS, 2023 और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप सख्ती से लागू करेगी।यह आश्वासन राज्य के एडिशनल एडवोकेट जनरल (AAG) विनोद कुमार शाही ने जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ के समक्ष दिया।AAG ने अदालत को बताया कि उन्होंने राज्य के अपर मुख्य सचिव (गृह) और पुलिस...
“तारीख पर तारीख” सिर्फ जजों की गलती नहीं, सरकार और पुलिस भी जिम्मेदार: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला अदालतों में लंबित आपराधिक मामलों पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि “तारीख पर तारीख” वाली स्थिति के लिए केवल न्यायिक अधिकारी जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि राज्य सरकार और पुलिस तंत्र की कमियां भी इसके लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं।जस्टिस अरुण कुमार देशवाल की पीठ ने बॉलीवुड फिल्म दमिनी के मशहूर संवाद “तारीख पर तारीख… मिलती है तो सिर्फ तारीख” का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आम लोगों की न्याय व्यवस्था के प्रति धारणा को दर्शाता है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि पर्याप्त स्टाफ,...
2026 CLAT-UG | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फ़ाइनल आंसर-की बहाल की, मेरिट लिस्ट में बदलाव के सिंगल जज का निर्देश रद्द किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस साल फ़रवरी में सिंगल जज द्वारा दिए गए आदेश को रद्द किया। इस आदेश में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ के कंसोर्टियम को कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) यूजी 2026 के लिए मेरिट लिस्ट में बदलाव करने का निर्देश दिया गया था।ऐसा करके जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की डिवीज़न बेंच ने वास्तव में 16 दिसंबर, 2025 को कंसोर्टियम द्वारा जारी की गई फ़ाइनल आंसर-की को बहाल किया। यह आंसर-की एक्सपर्ट कमेटियों द्वारा उठाई गई आपत्तियों की समीक्षा करने के बाद जारी की गई थी।इस तरह बेंच...
3 महीने अवैध हिरासत में रखने का आरोप: हाईकोर्ट का निर्देश- ₹10 लाख का मुआवज़ा दे यूपी सरकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह एक व्यक्ति को उसकी अवैध गिरफ्तारी और 3 महीने से ज़्यादा समय तक जेल में रखने के लिए ₹10 लाख का मुआवज़ा दे।जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की बेंच ने पाया कि राज्य के अधिकारियों ने याचिकाकर्ता को गिरफ्तारी के लिखित कारण न बताकर उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सीमित किया था। कोर्ट ने कहा कि इससे भारत के संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत उसके मौलिक अधिकार का उल्लंघन हुआ है।इस संबंध में बेंच ने मिहिर राजेश शाह...
मानव जीवन की रक्षा को लेकर पुलिस की संवेदनशीलता अब भी बेहद कम: हाईकोर्ट ने बदायूं SSP को लगाई फटकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पुलिस के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि राज्य की पहली जिम्मेदारी मानव जीवन बचाना है केवल अपराध होने के बाद अपराधियों को सजा दिलाना नहीं।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था एजेंसियों की मानव जीवन की रक्षा को लेकर संवेदनशीलता हमेशा कम रही है और आज भी वैसी ही बनी हुई है।अदालत ने ये टिप्पणियां बदायूं की सीनियर पुलिस अधीक्षक द्वारा दाखिल हलफनामे पर असंतोष जताते हुए कीं।मामला ननकराम...
देवी दुर्गा पर आपत्तिजनक गीत मामले में आरोपी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने देवी दुर्गा पर कथित आपत्तिजनक गीतों के निर्माण में आर्थिक और अन्य सहयोग देने के आरोपी राजवीर सिंह यादव को जमानत दी। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है, जिससे यह साबित हो कि आरोपी की किसी हरकत से सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हुई हो।जस्टिस समीर जैन की पीठ ने यह राहत देते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ सह-आरोपी के बयान के अलावा कोई ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं है।मामला पिछले वर्ष नवरात्रि के दौरान वायरल हुए उन गीतों से जुड़ा है, जिनमें माता दुर्गा के खिलाफ कथित अभद्र...
भगोड़े आरोपियों का मुकदमा कैसे चलेगा? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने BNSS की धारा 356 के तहत 'अनुपस्थिति में ट्रायल' की पूरी प्रक्रिया बताई
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि यदि कोई घोषित भगोड़ा आरोपी जानबूझकर गिरफ्तारी और मुकदमे से बचता है तो उसकी अनुपस्थिति में भी आपराधिक मुकदमा चलाया जा सकता है। अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 356 के तहत अनुपस्थिति में ट्रायल की विस्तृत प्रक्रिया निर्धारित की।जस्टिस प्रवीण कुमार गिरी की पीठ ने इस प्रावधान को भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली में ऐतिहासिक प्रावधान बताते हुए कहा कि यह व्यवस्था न्यायिक प्रक्रिया से भागने वाले आरोपियों के कारण होने वाली देरी...


















