इलाहाबाद हाईकोट
पति-पत्नी की तरह साथ रहने पर वैध विवाह का कड़ा सबूत मांगकर भरण-पोषण से इनकार नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि कोई पुरुष और महिला लंबे समय तक पति-पत्नी की तरह साथ रहे हों और उनका वैवाहिक संबंध अन्य परिस्थितियों से स्थापित होता हो, तो भरण-पोषण (Maintenance) के दावे को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि वैध विवाह का सख्त दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है।जस्टिस अचल सचदेव ने यह टिप्पणी महाराजगंज फैमिली कोर्ट के उस आदेश को आंशिक रूप से रद्द करते हुए की, जिसमें महिला की भरण-पोषण याचिका केवल इसलिए खारिज कर दी गई थी क्योंकि वह स्वयं को विधिक रूप से विवाहित...
भगवा रंग में सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त आतंकवादी' वाली फेसबुक पोस्ट मामले में आरोपी की गिरफ्तारी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फेसबुक पर कथित रूप से सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली पोस्ट साझा करने के आरोपी एक व्यक्ति की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई। आरोपी का दावा है कि संबंधित पोस्ट उसने नहीं की थी, बल्कि उसका सोशल मीडिया खाता हैक कर लिया गया था।जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता मुशाहिद गड़ा को अंतरिम राहत देते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया।मामला सहारनपुर में पिछले वर्ष जुलाई में दर्ज FIR से जुड़ा है। याचिकाकर्ता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा...
माँ के साथ रहने से 'बिगड़' जाएगी बच्ची: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिता को सौंपी 5 साल की बच्ची की अस्थायी कस्टडी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को 5 साल की बच्ची की कस्टडी अस्थायी रूप से उसके पिता को सौंप दी। कोर्ट ने माना कि अगर बच्ची अपनी माँ की कस्टडी में रहती है तो निश्चित रूप से वह 'बिगड़' जाएगी।कोर्ट ने पाया कि बच्ची का इस्तेमाल वैवाहिक विवाद में एक 'मोहरे' की तरह किया जा रहा था और माँ ने उसे पिता पर यौन शोषण के आरोप लगाने के लिए "पूरी तरह से सिखा-पढ़ा" दिया था।जस्टिस संदीप जैन की बेंच ने कहा,"बच्ची से बातचीत करने के बाद इस कोर्ट की राय है कि उसे बहुत-सी नकारात्मक बातें सिखाई गईं और अगर वह रेस्पॉन्डेंट...
'डिविज़न बेंच के फ़ैसले के ख़िलाफ़': हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से ग्राम प्रधानों को 5 साल के कार्यकाल के बाद एडमिनिस्ट्रेटर बनाने पर सवाल पूछा
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने उत्तर प्रदेश सरकार से ग्राम प्रधानों को उनके संवैधानिक 5 साल के कार्यकाल के बाद पंचायतों का 'एडमिनिस्ट्रेटर' नियुक्त करने के फ़ैसले पर कड़ा सवाल किया।यूपी पंचायत राज एक्ट, 1947 की धारा 12(3-A) के तहत राज्य के कामों पर गंभीरता से ध्यान देते हुए जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने कहा कि सरकार के आदेश डिविज़न बेंच के पहले के फ़ैसले (प्रेम लाल पटेल बनाम यूपी राज्य 2000) का सीधे तौर पर उल्लंघन करते हुए जारी किए गए लगते हैं, जिसमें ऐसे प्रावधानों को...
राम मंदिर चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जांच की मांग पर दो और याचिकाओं पर सुनवाई से हाईकोर्ट का इनकार, कहा- मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित
राम मंदिर चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जांच की मांग पर दो और याचिकाओं पर सुनवाई से हाईकोर्ट का इनकार, कहा- मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और धन के दुरुपयोग के आरोपों की जांच की मांग वाली दो और जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार किया। अदालत ने कहा कि यही मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए समान विषय पर समानांतर कार्यवाही शुरू करने का कोई औचित्य नहीं है।जस्टिस राजन राय और...
अली ख़ामेनेई के पोस्टर हटाने के आरोपों पर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- आरोप सामान्य और अस्पष्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश पुलिस पर ईरान के धार्मिक नेताओं के चित्र मनमाने ढंग से हटाने का आरोप लगाते हुए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार किया। अदालत ने कहा कि याचिका में पुलिस के खिलाफ लगाए गए आरोप सामान्य और अस्पष्ट हैं तथा किसी विशेष घटना का उल्लेख नहीं किया गया।जस्टिस राजन राय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने मजलिस उलेमा-ए-हिंद की ओर से उसके महासचिव मौलाना सैयद कल्बे जवाद नकवी द्वारा दायर जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए राहत देने से इनकार किया।याचिका में...
ISI एजेंट को पनाह देने और सेना की गोपनीय जानकारी पाकिस्तान भेजने के आरोपी को जमानत से इनकार, ट्रायल 6 माह में पूरा करने का निर्देश: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के कथित एजेंट को पनाह देने और भारतीय सेना व वायुसेना से जुड़ी गोपनीय जानकारी पाकिस्तान भेजने में मदद करने के आरोपी मोहम्मद अशफाक अंसारी की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को आरोपी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से ऊपर रखा जाना चाहिए।जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 437(6) के तहत 60 दिन में ट्रायल पूरा न होने पर जमानत देने का प्रावधान अनिवार्य (Mandatory)...
'Roblox' और अन्य गेमिंग प्लेटफॉर्म पर बैन की मांग: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए कहा- नाबालिगों को सेक्शुअल ग्रूमिंग के संपर्क में लाना
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने जनहित याचिका (PIL) पर नोटिस जारी किया। इस याचिका में ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म 'ROBLOX' और इसी तरह के दूसरे वर्चुअल प्लेटफॉर्म तक नाबालिगों की पहुंच पर रोक लगाने के निर्देश देने की मांग की गई।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने यह आदेश हाईकोर्ट की वकील रानी सिंह की याचिका पर दिया, जो खुद कोर्ट में पेश हुईं।PIL याचिका में 'मेंडेमस' (Mandamus) रिट की मांग की गई, ताकि संबंधित अधिकारियों (जिनमें इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय - MeitY भी...
वोटर किसी सीट को 'डी-रिज़र्व' की मांग करके सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार को वोट देने का अधिकार नहीं मांग सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
डिलिमिटेशन एक्ट, 2002 की धारा 9(1)(c) की वैधता बरकरार रखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कोई वोटर किसी निर्वाचन क्षेत्र (सीट) को 'डी-रिज़र्व' करने की मांग करके सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार को वोट देने का अधिकार नहीं मांग सकता।जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की बेंच ने कहा,"वोट देने के अधिकार का मतलब यह नहीं है कि वोटर किसी सीट के आवंटन की शर्तें तय कर सकता है या इस बात पर ज़ोर दे सकता है कि कोई सीट किसी खास श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए ही आवंटित की जाए।"डिलिमिटेशन एक्ट, 2002 की...
यूपी गुंडा एक्ट का इस्तेमाल 'दमन के हथियार' के तौर पर नहीं होना चाहिए: हाईकोर्ट ने 2 आपराधिक मामलों के आधार पर शुरू की गई कार्यवाही रद्द की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को जिला अधिकारियों के उस आदेश को रद्द किया, जिसमें एक व्यक्ति को यूपी कंट्रोल ऑफ़ गुंडाज़ एक्ट, 1970 के तहत 'गुंडा' घोषित किया गया था। कोर्ट ने कहा कि इस एक्ट का इस्तेमाल बेगुनाह लोगों को 'दबाने के हथियार' के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने कहा कि यह एक्ट 'गुंडों' को नियंत्रित करने और दबाने का "शक्तिशाली हथियार" है। इसका इस्तेमाल "बहुत स्पष्ट मामलों में, जैसे 'सार्वजनिक अव्यवस्था' या 'सार्वजनिक व्यवस्था' बनाए रखने के लिए बहुत सोच-समझकर"...
UP Goondas Act | अपीलीय अथॉरिटी ज़िला मजिस्ट्रेट को नए फ़ैसले के लिए मामले वापस नहीं भेज सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि यूपी कंट्रोल ऑफ़ गुंडाज़ एक्ट, 1970 की धारा 6 के तहत काम करने वाली अपीलीय अथॉरिटी के पास मामले को ज़िला मजिस्ट्रेट के पास मेरिट के आधार पर नए सिरे से फ़ैसला करने के लिए वापस भेजने का कानूनी अधिकार नहीं है।जस्टिस संदीप जैन की बेंच ने कहा कि कानून अपीलीय अथॉरिटी को या तो "आदेश की पुष्टि करने (बदलाव के साथ या बिना बदलाव के) या उसे रद्द करने" का अधिकार देता है।कोर्ट अनिल चौधरी की रिट याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें अलीगढ़ डिवीज़न के कमिश्नर के दिसंबर 2025 के...
पुराने मालिक के नाम बिजली बिल और हाउस टैक्स जमा करने वाला प्रतिकूल कब्जे से मालिकाना हक का दावा नहीं कर सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि कोई व्यक्ति किसी संपत्ति पर प्रतिकूल कब्जे (Adverse Possession) के आधार पर मालिकाना हक का दावा करता है, लेकिन उसी संपत्ति के बिजली बिल और हाउस टैक्स पुराने मालिक के नाम से जमा करता रहता है, तो यह उसके द्वारा पुराने मालिक के स्वामित्व को स्वीकार करना माना जाएगा। ऐसे में प्रतिकूल कब्जे के आधार पर स्वामित्व का दावा टिक नहीं सकता।जस्टिस संदीप जैन ने यह टिप्पणी गाजियाबाद स्थित एक मकान पर प्रतिकूल कब्जे के आधार पर मालिकाना हक और स्थायी निषेधाज्ञा (Permanent...
'मकसद बदला लेना था': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मृत्यु पूर्व दिया बयान खारिज किया, हत्या के मामले में पति और ससुराल वालों को बरी किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते 2017 के हत्या और दहेज के कारण हुई मौत के मामले में पति और उसके परिवार के सदस्यों को बरी किया। कोर्ट ने मरने से पहले दिए गए बयान (डाइंग डिक्लेरेशन) को खारिज करते हुए कहा कि यह बयान सच बताने के बजाय "बदला लेने" की नीयत से दिया गया था।जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की बेंच ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें 5 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।कोर्ट ने पाया कि मरने से पहले दिए गए जिस बयान पर अभियोजन पक्ष ने आरोपियों को फंसाने के लिए...
Election | SC/ST आबादी वाले इलाकों में सीटों का आरक्षण संवैधानिक: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परिसीमन अधिनियम, 2002 की धारा 9(1)(c) की संवैधानिक वैधता बरकरार रखी। यह धारा अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए उन इलाकों में निर्वाचन क्षेत्रों को आरक्षित करने का प्रावधान करती है, जहाँ कुल आबादी में उनकी आबादी का अनुपात अपेक्षाकृत अधिक है।कोर्ट ने कहा कि कोई मतदाता यह दावा नहीं कर सकता कि उसके वोट देने के अधिकार का उल्लंघन हुआ है, सिर्फ़ इसलिए कि उसका निर्वाचन क्षेत्र दशकों से अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित रहा है।जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की...
बिना अधिकार के मुक़दमेबाज़ के मामले में पेश हुआ वकील: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया जांच का आदेश, कहा- ज़मीर झकझोरने वाला मामला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मुक़दमेबाज़ के इस आरोप की जांच का आदेश दिया कि एक वकील ने बिना अधिकार के उसकी ओर से पेश होकर कार्यवाही में हिस्सा लिया था। कोर्ट ने कहा कि समीक्षा याचिका (Review Application) में लगाए गए गंभीर आरोपों ने "कोर्ट के ज़मीर को झकझोर दिया।"जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने शिव शंकर सिंह द्वारा दायर समीक्षा याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। सिंह को पहले नेहरू विद्यापीठ इंटर कॉलेज, गाजीपुर के प्रबंधन से संबंधित एक रिट याचिका में प्रतिवादी संख्या 6 (Respondent No. 6) बनाया गया...
धारा 161 के बयान में चूक से गवाह को तभी किया जा सकता है अविश्वसनीय, जब जांच अधिकारी उसे साबित करे: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी गवाह के पुलिस के समक्ष दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 161 के तहत दिए गए बयान में हुई चूक के आधार पर उसे तभी अविश्वसनीय ठहराया जा सकता है, जब उस चूक को कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जांच अधिकारी साबित करे। केवल अदालत में गवाह का पुलिस बयान से सामान्य रूप से सामना करा देने से साक्ष्य अधिनियम की धारा 145 और CrPC की धारा 162 की कानूनी आवश्यकता पूरी नहीं होती।जस्टिस जे. जे. मुनिर और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी...
दोबारा शादी के बाद पहली पति से गुजारा भत्ता क्यों? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के जज से मांगा जवाब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने झांसी के अतिरिक्त प्रधान जज, फैमिली कोर्ट से यह स्पष्ट करने को कहा कि पत्नी के तलाक के बाद दोबारा विवाह कर लेने की जानकारी रिकॉर्ड पर होने के बावजूद उसे पहले पति से गुजारा भत्ता देने का आदेश क्यों पारित किया गया।जस्टिस प्रवीण कुमार गिरी की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए झांसी के एडिशनल प्रधान जज, फैमिली कोर्ट से स्पष्टीकरण तलब किया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि वह बताएं कि पत्नी के दूसरे विवाह का तथ्य आपत्ति-पत्र में स्पष्ट रूप से दर्ज होने के बावजूद उसे पहले पति से प्रति माह...
तलाक के बाद भी नहीं खत्म होगी घरेलू हिंसा की जिम्मेदारी, पीड़िता को मिलेगा कानून का संरक्षण: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि पति द्वारा घरेलू हिंसा की गई है, तो बाद में तलाक का डिक्री पारित हो जाने मात्र से वह घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के तहत अपनी कानूनी जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं हो सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि घरेलू हिंसा का कृत्य एक बार हो जाने के बाद पीड़िता को कानून के तहत मिलने वाले अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस बृज राज सिंह की सिंगल बेंच ने कहा,"घरेलू हिंसा का कृत्य एक बार हो जाने के बाद, बाद में पारित तलाक की डिक्री पति को उस कृत्य से...
सिर्फ़ चिट्ठियां भेजने या देर से अपील करने से 'लिमिटेशन पीरियड' नहीं बढ़ाई जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने सोमवार को फिर कहा कि किसी दावे के लिए तय कानूनी समय-सीमा (लिमिटेशन पीरियड) को अधिकारियों को बार-बार चिट्ठियां या देर से अपील (रिप्रेजेंटेशन) भेजकर नहीं बढ़ाया जा सकता, खासकर तब जब राज्य-प्रतिवादी (सरकारी पक्ष) ने अपनी देनदारी स्वीकार न की हो।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने कहा कि एक बार जब समय-सीमा की घड़ी चलना शुरू हो जाती है तो उसे सिर्फ़ "एकतरफ़ा" चिट्ठियां या संदेश भेजकर रोका या बढ़ाया नहीं जा सकता।कोर्ट ने यह भी कहा कि अनुच्छेद...
'चिंताजनक स्थिति': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सज़ा पाए दोषी को 6 साल से कम सज़ा काटने के बाद सज़ा में छूट देने पर सवाल उठाए
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के लिए उम्रकैद की सज़ा पाए एक दोषी को सज़ा में छूट देने पर गंभीर चिंता जताई, जिसे अपनी सज़ा के केवल 5 साल, 10 महीने और 18 दिन काटने के बाद रिहा कर दिया गया।जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की बेंच ने इसे "चिंताजनक स्थिति" करार दिया।कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव (गृह) से एक व्यक्तिगत हलफनामा भी मांगा, जिसमें उन मानदंडों और आधारों का खुलासा किया जाए जिनके आधार पर ऐसी छूट दी गई।यह बेंच मुख्य रूप से शैलेंद्र सिंह द्वारा दायर एक आपराधिक रिट याचिका पर...




















