इलाहाबाद हाईकोट
गिरफ़्तारी/रिमांड के ख़िलाफ़ हैबियस कॉर्पस याचिका एक बार संज्ञान लिए जाने तक स्वीकार्य नहीं, आरोपी को नियमित ज़मानत लेनी होगी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
पिछले हफ्ते दिए गए एक अहम फैसले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि एक बार जब कोई सक्षम अदालत चार्जशीट पर संज्ञान ले लेती है तो कोई आरोपी अपनी गिरफ्तारी की वैधता या CrPC की धारा 167(2)/BNSS की धारा 187(2) के तहत पारित शुरुआती रिमांड आदेश को चुनौती देने वाली हेबियस कॉर्पस याचिका दायर नहीं कर सकता।जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने तर्क दिया कि शुरुआती रिमांड आदेश केवल जांच के चरण के दौरान ही प्रभावी रहता है, क्योंकि संज्ञान लिए जाने के बाद इसका महत्व स्वाभाविक रूप से समाप्त...
CrPC की धारा 319 के तहत आरोपी को समन करने से पहले दर्ज किए गए सबूतों के आधार पर सज़ा नहीं दी जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में यह फ़ैसला दिया कि किसी आरोपी की गैर-मौजूदगी में दर्ज किए गए सबूत, जिन पर CrPC की धारा 319 के तहत उसे समन करने के लिए भरोसा किया जाता है, बाद में उसकी सज़ा का आधार नहीं बन सकते।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने 2008 के एक मामले में हत्या के एक आरोपी को बरी करते हुए यह टिप्पणी की।ट्रायल कोर्ट ने अपीलकर्ता को IPC की धारा 302 (धारा 149 के साथ), धारा 307 (धारा 149 के साथ), धारा 148 और धारा 506(2) के तहत दोषी ठहराया था। उसे आजीवन कारावास की...
लोक अदालतें तलाक़ नहीं दे सकतीं, उनके पास फ़ैसला सुनाने का अधिकार क्षेत्र नहीं है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
एक अहम आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी लोक अदालत या ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के पास तलाक़ का आदेश देने की कोई कानूनी क्षमता या अधिकार क्षेत्र नहीं है, क्योंकि यह अधिकार पूरी तरह से नियमित सिविल और फ़ैमिली कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है।अपने 11 पन्नों के आदेश में जस्टिस शेखर बी सराफ़ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने DLSA, उन्नाव की कड़ी आलोचना की। बेंच ने DLSA पर फ़ैमिली कोर्ट के तलाक़ देने के अधिकार पर 'कब्ज़ा करने' का आरोप लगाया। DLSA ने कुछ ऐसे 'अस्पष्ट'...
सिर्फ दीवानी विवाद लंबित होने से आपराधिक मुकदमा खत्म नहीं हो सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी मामले के आरोप प्रथमदृष्टया आपराधिक अपराध का खुलासा करते हैं तो केवल इस आधार पर आरोपियों को राहत नहीं दी जा सकती कि पक्षकारों के बीच दीवानी विवाद भी लंबित है। अदालत ने कहा कि दीवानी और आपराधिक कार्यवाही साथ-साथ चल सकती हैं।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने यह टिप्पणी एक मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें कुछ आरोपियों ने ट्रायल कोर्ट द्वारा उनकी आरोपमुक्ति याचिका खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी।अदालत ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के इंडियन ऑयल...
इलाहाबाद हाईकोर्ट की फटकार के बाद प्रयागराज ADM ने मुस्लिम व्यक्ति के 'अपनी मर्ज़ी से' हिंदू धर्म अपनाने को दी मंज़ूरी
इस महीने की शुरुआत में इलाहाबाद हाईकोर्ट की कड़ी फटकार के बाद प्रयागराज के अपर ज़िला मजिस्ट्रेट (प्रशासन) ने औपचारिक रूप से मुस्लिम व्यक्ति के धर्म परिवर्तन के आवेदन को मंज़ूरी दी। इस व्यक्ति ने 2022 में अपनी मर्ज़ी से सनातन धर्म/हिंदू धर्म अपना लिया था।संबंधित अधिकारी द्वारा 14 मई को पारित आदेश का संज्ञान लेते हुए जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की डिवीज़न बेंच ने बुधवार को उस रिट याचिका का निपटारा किया, जिसे अनिल पंडित (पहले मोहम्मद अहसान) नामक व्यक्ति ने दायर किया था। अनिल पंडित...
किशोरावस्था की सजा पासपोर्ट जारी करने में बाधा नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'भूल जाने के अधिकार' और 'नई शुरुआत' सिद्धांत को माना अहम
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किशोरावस्था में दर्ज दोषसिद्धि किसी व्यक्ति को पासपोर्ट जारी करने से रोकने का आधार नहीं बन सकती।अदालत ने कहा कि किशोर न्याय कानून का उद्देश्य ऐसे बच्चों को “नई शुरुआत” का अवसर देना है और उन्हें समाज में बिना किसी कलंक के दोबारा स्थापित करना है।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी, लखनऊ के मार्च 2021 का आदेश रद्द किया, जिसमें मोहम्मद यूनुस अंसारी का पासपोर्ट आवेदन खारिज किया गया था।पासपोर्ट अधिकारी...
कॉकरोच जनता पार्टी पर NIA-ED जांच की मांग: इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत डिपके के खिलाफ NIAऔर प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच कराने की मांग को लेकर एक आपराधिक जनहित याचिका दाखिल की गई।यह याचिका कर्नाटक भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने दायर की। याचिका में कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े सभी सोशल मीडिया अकाउंट, पेज, चैनल, समूह और प्रोफाइल को स्थायी रूप से बंद और ब्लॉक करने की मांग भी की गई।याचिका में आरोप लगाया गया कि यह सुनियोजित डिजिटल अभियान भारत के युवाओं को भड़काने, सार्वजनिक अव्यवस्था...
नोएडा मजदूर प्रदर्शन: गिरफ्तार पत्रकार की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा मजदूर प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार पत्रकार सत्यम वर्मा की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया।जस्टिस सलील कुमार राय और जस्टिस देवेंद्र सिंह-प्रथम की पीठ ने सत्यम वर्मा की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट एस.एफ.ए. नकवी तथा अधिवक्ता शाश्वत आनंद और अंकुर आजाद की दलीलें सुनने के बाद राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया।अदालत ने राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए समय दिया। साथ ही याचिकाकर्ता को उसके...
चार दीवारों के भीतर, सार्वजनिक शांति में कोई खलल नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कथित गोहत्या के मामले में NSA हिरासत क्यों रद्द की?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को गोहत्या के आरोपी दो लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 (NSA) के तहत जारी हिरासत आदेश रद्द किया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कथित घटना घर की चारदीवारी के भीतर हुई थी, न कि किसी सार्वजनिक स्थान पर।जस्टिस राजीव मिश्रा और जस्टिस डॉ. अजय कुमार-II की खंडपीठ ने इस प्रकार इशम उर्फ इसम और समीर द्वारा दायर दो बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिकाओं को स्वीकार किया और निर्देश दिया कि उन्हें तत्काल हिरासत से रिहा किया जाए।कोर्ट ने टिप्पणी की कि कथित घटना,...
ज़मानत नियम है: राष्ट्रीय ध्वज का 'अपमान' करने के आरोप में एक साल जेल में बिताने वाले आरोपी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी राहत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते ऐसे व्यक्ति की दूसरी ज़मानत याचिका मंज़ूर की, जिस पर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज पर एक कुत्ते को बिठाकर उसका अपमान करने वाली तस्वीर अपलोड करने और अपने फ़ेसबुक अकाउंट पर कथित तौर पर 'पाकिस्तान-समर्थक' सामग्री पोस्ट करने का आरोप था।जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की पीठ ने आरोपी वासिक त्यागी को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट के हालिया फ़ैसले सैयद इफ़्तिख़ार अंद्राबी बनाम राष्ट्रीय जांच एजेंसी, जम्मू 2026 LiveLaw (SC) 512 का हवाला दिया, जिसमें 'ज़मानत नियम है और जेल अपवाद' के...
राहुल गांधी के खिलाफ केस लड़ रहे BJP कार्यकर्ता को Z+ सुरक्षा देने का मामला: केंद्र ने हाईकोर्ट में कहा- जल्द होगा फैसला
केंद्र सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया कि गृह मंत्रालय (MHA) BJP सदस्य एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर 'Z+' श्रेणी की सुरक्षा कवर की अर्जी पर "फिर से विचार कर रहा है और उसकी नए सिरे से जांच कर रहा है।" शिशिर ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ हाई कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की हैं।केंद्र सरकार की बात पर ध्यान देते हुए जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस ज़फीर अहमद की बेंच ने कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि "किसी नागरिक के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को पूरी तरह से...
हुक्का बार चलाने का कोई मौलिक अधिकार नहीं, यह गतिविधि 'रेस एक्स्ट्रा कमर्शियम' के दायरे में आती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने हाल ही में यह टिप्पणी की कि नागरिकों के पास हुक्का बार चलाने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है, क्योंकि ऐसी गतिविधियां 'रेस एक्स्ट्रा कमर्शियम' (वाणिज्य से बाहर/परे की चीज़ें) के कानूनी सिद्धांत के अंतर्गत आती हैं।यह टिप्पणी जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की डिवीज़न बेंच ने एम्पेरियो ग्रैंड प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर रिट याचिका की सुनवाई के दौरान की। यह कंपनी लखनऊ में होटल और रेस्टोरेंट का कारोबार करती है।याचिकाकर्ता का पक्ष यह था कि उसके पास खाद्य...
पेशेवर कामों के लिए वकीलों पर केस चलाना मतलब 'बार का अंत': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वकील के खिलाफ साज़िश की FIR रद्द की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में राज्य के कमर्शियल टैक्स डिपार्टमेंट को वकील के खिलाफ FIR दर्ज करने के लिए फटकार लगाई। वकील ने यह काम अपनी पेशेवर हैसियत से किया था।एक कड़ा संदेश देते हुए जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की बेंच ने कहा कि अगर वकीलों पर पेशेवर काम करने के लिए केस चलाया जाता है तो यह "बार के अस्तित्व का ही अंत" होगा। साथ ही एडवोकेट्स एक्ट के तहत प्रैक्टिस करने के वकील के अधिकार का भी अंत होगा।इस तरह बेंच ने हाईकोर्ट में 'एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड' और याचिकाकर्ता-समर्पण जैन के खिलाफ...
दहेज हत्या के मामलों में आजीवन कारावास को 'सामान्य प्रक्रिया' के तौर पर नहीं दिया जाना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि IPC की धारा 304-B के तहत दहेज हत्या के अपराध के लिए अधिकतम सज़ा, यानी आजीवन कारावास, को "सामान्य प्रक्रिया" के तौर पर नहीं थोपा जाना चाहिए। इसके बजाय, यह 'कठोरतम' सज़ा केवल "दुर्लभतम से दुर्लभ" मामलों में ही दी जानी चाहिए।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने 2012 के एक दहेज हत्या मामले में पति और उसके माता-पिता की दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए यह टिप्पणी की।हालांकि, खंडपीठ ने 'आनुपातिक सज़ा' के सिद्धांत को लागू करते हुए ट्रायल कोर्ट...
श्रम कानून उल्लंघन मामले में अज़ीम प्रेमजी को राहत, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द की आपराधिक कार्यवाही
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विप्रो के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अज़ीम प्रेमजी के खिलाफ श्रम कानून उल्लंघन के आरोपों से जुड़े आपराधिक मामला और समन आदेश रद्द किया।जस्टिस जफीर अहमद की एकलपीठ ने कहा कि केवल किसी व्यक्ति के पद के आधार पर उस पर आपराधिक जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती, जब तक कानून में स्पष्ट रूप से ऐसा प्रावधान न हो या उसके खिलाफ प्रत्यक्ष भूमिका के ठोस आरोप न हों।अदालत ने कहा,“केवल पदनाम के आधार पर यांत्रिक तरीके से आपराधिक दायित्व तय नहीं किया जा सकता, जब तक कि कानून में परोक्ष दायित्व का...
राहुल गांधी की भारतीय नागरिकता रद्द करने की मांग: इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) में रिट याचिका दायर की गई, जिसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की भारतीय नागरिकता रद्द करने की मांग की गई।यह याचिका वकील अशोक पांडे और डेंटिस्ट रजनीश कुमार सिंह ने दायर की। याचिका में राहुल गांधी के लोकसभा चुनाव को भी चुनौती दी गई और उनके खिलाफ 'क्वो वारंटो' (Quo Warranto) रिट जारी करने की मांग की गई। इसके ज़रिए रायबरेली लोकसभा सीट से सांसद के तौर पर काम करने के उनके अधिकार पर सवाल उठाया गया।इस मामले की सुनवाई मंगलवार को जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश...
किशोरावस्था के आपराधिक मामले नौकरी में बाधा नहीं बन सकते : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि किशोरावस्था में किए गए अपराध में दोषसिद्धि या ऐसे मामले की लंबित सुनवाई किसी व्यक्ति को वयस्क होने पर नौकरी पाने से अयोग्य नहीं ठहरा सकती। कोर्ट ने कहा कि लंबित आपराधिक मामलों के आधार पर किसी व्यक्ति को रोजगार से वंचित करना उसके जीवन और आजीविका पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।जस्टिस श्री प्रकाश सिंह ने किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2000 की धारा 19 का हवाला देते हुए कहा कि कानून का उद्देश्य यह...
आय से अधिक संपत्ति मामले में FIR से पहले स्पष्टीकरण मांगना जरूरी नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी लोक सेवक को उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने से पहले कथित आय से अधिक संपत्ति का स्पष्टीकरण देने का कोई अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में प्राथमिकी दर्ज करने से पहले आरोपी से जवाब मांगना कानूनन आवश्यक नहीं है।जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने यह टिप्पणी एक सरकारी कर्मचारी द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए की। याचिकाकर्ता के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(b) और 13(2) के तहत एफआईआर...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जारी किए कानपुर बम ब्लास्ट और राज नारायण-इंदिरा गांधी केस के हिंदी अनुवादित ऐतिहासिक फैसले
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपनी ऐतिहासिक निर्णय श्रृंखला के चौथे और पांचवें संस्करण के तहत दो महत्वपूर्ण मामलों के हिंदी अनुवाद ई-पुस्तिका स्वरूप में जारी किए हैं। इनमें स्वतंत्रता पूर्व कानपुर बम विस्फोट प्रकरण और ऐतिहासिक राज नारायण बनाम इंदिरा नेहरू गांधी मामले में पारित फैसले शामिल हैं। इन ई-पुस्तिकाओं का लोकार्पण 20 मई 2026 को ए-आई असिस्टेड लीगल एडवाइजरी, ई-एएचसीआर और आईएलआर समिति द्वारा किया गया।चौथे संस्करण में 15 मार्च 1946 को इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा कानपुर बम विस्फोट मामले में दिए गए फैसले...
अदालत की तय समयसीमा के बाद बिना अनुमति बढ़ाए चली विभागीय कार्रवाई अमान्य हो सकती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि अदालत द्वारा तय समयसीमा समाप्त होने के बाद विभागीय कार्रवाई पूरी की जाती है और संबंधित प्राधिकारी समय बढ़ाने के लिए कोई वास्तविक प्रयास नहीं करता तो ऐसी कार्रवाई अमान्य मानी जा सकती हजस्टिस श्री प्रकाश सिंह ने यूनियन ऑफ इंडिया बनाम शरवन कुमार मामला और उत्तर प्रदेश राज्य बनाम राम प्रकाश सिंह मामला के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि हर मामले में तय समय के भीतर विभागीय जांच पूरी कर पाना संभव नहीं होता। ऐसे में संबंधित प्राधिकारी समयसीमा समाप्त...




















