इलाहाबाद हाईकोट

'अवध बार को लोकतांत्रिक व्यवहार में मिसाल कायम करनी चाहिए': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण बार चुनाव की अपील की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों से कहा है कि वे सुनिश्चित करें कि अवध बार एसोसिएशन के आगामी चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण तरीके से हों। कोर्ट ने कहा कि बार को समाज के लिए लोकतांत्रिक व्यवहार की मिसाल कायम करनी चाहिए।जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने कहा कि चुनावों में ईमानदारी, निष्पक्षता, पारदर्शिता और आपसी सम्मान के उच्चतम मानक दिखने चाहिए।बेंच ने कहा,"कानूनी बिरादरी से उम्मीद की जाती है कि वे समाज के लिए मार्गदर्शक बनें और दूसरों के लिए मिसाल कायम...

धर्म की आज़ादी का मतलब यह नहीं कि ईसाई समुदाय कब्रिस्तान के लिए ज़मीन का कोई खास टुकड़ा मांग सके: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि धर्म की आज़ादी के अधिकार (जिसमें धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अंतिम संस्कार करने का अधिकार भी शामिल है) के तहत किसी समुदाय को कब्रिस्तान बनाने के लिए स्थानीय निकाय की ज़मीन के किसी खास टुकड़े पर दावा करने का अधिकार नहीं मिलता।जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच ने 'क्रिश्चियन कम्युनिटी वेलफेयर सोसाइटी' की रिट याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। सोसाइटी ने गाजियाबाद में बंजर ज़मीन के एक टुकड़े को ईसाई कब्रिस्तान में बदलने की अपनी अर्जी खारिज किए जाने को...

सरकारी वकीलों से बदसलूकी अदालत की अवमानना हो सकती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट; यूपी DGP को सर्कुलर जारी करने का निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया है कि वह सभी पुलिस अधिकारियों के लिए सर्कुलर जारी करें। इसमें चेतावनी दी जाए कि अदालत के आदेशों के अनुपालन के लिए संवाद करने वाले सरकारी वकीलों के साथ दुर्व्यवहार करना अदालत की अवमानना हो सकता है और ऐसे मामलों में कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने यह निर्देश आजमगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) कार्यालय में तैनात जनसंपर्क अधिकारी (PRO) राजेश कुमार सिंह के कथित दुर्व्यवहार...

बुजुर्ग पिता की देखभाल करने भर से बेटे पर अनुचित प्रभाव का आरोप नहीं, वसीयत रद्द नहीं कर सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि केवल इस आधार पर किसी वसीयत को रद्द नहीं किया जा सकता कि वसीयत करने वाला व्यक्ति अधिक उम्र का था और उसके पक्ष में वसीयत पाने वाला बेटा उसकी देखभाल करता था तथा उसकी संपत्ति का प्रबंधन संभालता था। पिता-पुत्र का रिश्ता और पिता की वृद्धावस्था अपने आप यह साबित नहीं करते कि बेटे ने अपने प्रभाव का अनुचित इस्तेमाल किया।जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने कहा कि अनुचित प्रभाव का निर्धारण प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए। केवल पिता के...

'शिक्षा व्यवस्था में धोखाधड़ी': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोचिंग एकेडमी से जुड़े कथित 'डमी स्कूल रैकेट' की जांच का आदेश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को आज़मगढ़ के एक स्कूल और उसी मैनेजमेंट के तहत चल रही कोचिंग एकेडमी के कामकाज की जांच करने का निर्देश दिया। यह जांच इस बात का पता लगाने के लिए की जाएगी कि क्या ये संस्थान कोई ऐसा रैकेट चला रहे हैं जिसमें छात्रों को उनकी जानकारी के बिना किसी "डमी स्कूल" में दाखिला लिया हुआ दिखाया गया।जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की बेंच ने पाया कि ये संस्थान NEET, IIT-JEE और CLAT जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए रेजिडेंशियल कोचिंग (रहने-खाने की सुविधा वाली कोचिंग) दे रहे थे, जबकि...

कालाबाज़ारी या ज़रूरी सामान की सप्लाई में रुकावट? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बताया- NSA कब लागू होता है और PBMSEC Act कब प्रभावी होता है?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बताया कि ज़रूरी सामान से जुड़े मामलों में नेशनल सिक्योरिटी एक्ट, 1980 (NSA) कब लागू किया जा सकता है। कोर्ट ने साफ़ किया कि जहाँ ज़रूरी सामान की सप्लाई में शारीरिक रुकावट डालने पर NSA लग सकता है, वहीं कालाबाज़ारी के मामलों से आम तौर पर 'प्रिवेंशन ऑफ़ ब्लैक-मार्केटिंग एंड मेंटेनेंस ऑफ़ सप्लाईज़ ऑफ़ एसेंशियल कमोडिटीज़ एक्ट, 1980' (PBMSEC Act) के तहत निपटा जाना चाहिए।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने कहा कि कालाबाज़ारी के मामले में किसी व्यक्ति को एक साल के लिए...

FIR पर रोक के बावजूद छात्र नेता के खिलाफ दाखिल हुई चार्जशीट, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने थाना प्रभारी से मांगा जवाब
उत्तर प्रदेश सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2025 में अनियमितताओं का आरोप लगाने वाली फेसबुक पोस्ट के मामले में छात्र नेता आशुतोष कुमार पांडेय के खिलाफ FIR पर हाईकोर्ट की रोक के बावजूद आरोपपत्र दाखिल किए जाने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त रुख अपनाया।अदालत ने लखनऊ के हुसैनगंज थाने के थाना प्रभारी को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि अदालत के आदेश के बाद भी मामले में जांच कैसे की गई और आरोपपत्र कैसे भेजा गया। जस्टिस रजनीश कुमार और जस्टिस बबीता रानी की खंडपीठ ने यह...

पांचवीं तक पढ़ी लड़की हिंदी अखबार भी नहीं पढ़ सकी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी की शिक्षा व्यवस्था पर जताई गंभीर चिंता
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई करने वाली लड़की के हिंदी अखबार न पढ़ पाने और अपने नाम के अलावा हिंदी में कुछ न लिख पाने पर उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने सवाल उठाया कि लड़की की पढ़ाई पांचवीं कक्षा के बाद क्यों छूट गई और राज्य यह सुनिश्चित क्यों नहीं कर पाया कि वह आगे भी शिक्षा प्राप्त करती।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की खंडपीठ ने कहा कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता गंभीर चिंता का विषय है। अदालत एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर...

शहरी भूमि सीमा कानून पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला: 1999 के निरसन से पहले जमीन पर वास्तविक कब्जा साबित करना राज्य की जिम्मेदारी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि शहरी भूमि (सीमा एवं विनियमन) अधिनियम, 1976 के तहत तय सीमा से अधिक जमीन पर राज्य सरकार को अपना कब्जा बनाए रखने के लिए यह साबित करना होगा कि 1999 में कानून निरस्त होने से पहले जमीन का वास्तविक कब्जा ले लिया गया था। यदि राज्य ऐसा साबित करने में विफल रहता है, तो जमीन के मालिक को शहरी भूमि (सीमा एवं विनियमन) निरसन अधिनियम, 1999 का लाभ मिलेगा।जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने कहा कि धारा 10(5) के तहत जारी ऐसा नोटिस, जिस पर तारीख दर्ज न हो और जिस पर...

निलंबन के दौरान गुजारा भत्ता नहीं मिलने से विभागीय जांच अपने आप रद्द नहीं होगी, कर्मचारी को नुकसान साबित करना होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि निलंबित कर्मचारी को गुजारा भत्ता नहीं दिए जाने मात्र से उसके खिलाफ की गई विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही अपने आप अवैध नहीं हो जाती। कर्मचारी को यह साबित करना होगा कि गुजारा भत्ता नहीं मिलने के कारण उसे अपना बचाव करने में वास्तविक नुकसान हुआ है।जस्टिस गरिमा प्रसाद ने कहा कि निलंबन के दौरान गुजारा भत्ता कर्मचारी के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा है। यदि इसका भुगतान नहीं होने के कारण कर्मचारी जांच में शामिल नहीं हो पाता या प्रभावी ढंग से अपना पक्ष नहीं रख पाता, तो इससे कार्यवाही...

समय पर आवेदन भेजने के बावजूद डाक में देरी से अभ्यर्थी को चयन से बाहर नहीं कर सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई अभ्यर्थी समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन करने के साथ विज्ञापन में निर्धारित अवधि के अंदर अनुमत माध्यम से आवेदन की हार्ड कॉपी भी भेज देता है, तो डाक से दस्तावेज पहुंचने में देरी के आधार पर उसे चयन प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि अभ्यर्थी की ओर से लापरवाही नहीं होने पर डाक विभाग की देरी का खामियाजा उसे नहीं भुगतना चाहिए।जस्टिस मंजू रानी चौहान ने कहा कि डाक से जुड़ी ऐसी अप्रत्याशित परिस्थिति के कारण अभ्यर्थी की उम्मीदवारी समाप्त करना एक...

स्थायी गुजारा भत्ते के लिए लिखित आवेदन सामान्य नियम, सहमति होने पर मौखिक मांग भी स्वीकार्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (Hindu Marriage Act) की धारा 25 के तहत स्थायी गुजारा भत्ता पाने के लिए सामान्यतः लिखित आवेदन देना जरूरी है। यह मांग अलग आवेदन के जरिए या लिखित जवाब में की जा सकती है। हालांकि, अपवादस्वरूप उन मामलों में मौखिक मांग भी स्वीकार की जा सकती है, जहां अदालत को गुजारा भत्ता पाने के अधिकार और उसकी राशि पर विवाद का फैसला नहीं करना हो।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि धारा 25 के प्रावधानों को पढ़ने से स्पष्ट है कि स्थायी...

असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती में कोर्ट खुद तय नहीं कर सकता कि कौन-सा विषय 'संबद्ध' है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी अभ्यर्थी को यह अधिकार नहीं है कि भर्ती के लिए किसी विषय को एक बार संबद्ध या प्रासंगिक मान लिए जाने के बाद भविष्य की भर्तियों में भी उसे उसी रूप में मान्यता देने की मांग करे। संबद्ध विषयों की पहचान करना शैक्षणिक विशेषज्ञता और नीतिगत निर्णय का मामला है। अदालत सक्षम प्राधिकारी के निर्णय की जगह अपना शैक्षणिक आकलन नहीं रख सकती।जस्टिस मंजू रानी चौहान ने कहा कि पहले किसी भर्ती में जैव प्रौद्योगिकी को प्राणी विज्ञान का संबद्ध या प्रासंगिक विषय मान लिया गया, अथवा दोनों...

प्रशासनिक प्रक्रिया को विफल होने से बचाने के लिए 'आवश्यकता के सिद्धांत' का सहारा लिया जा सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 'आवश्यकता का सिद्धांत' केवल पक्षपात की स्थिति में ही लागू नहीं होता, बल्कि ऐसी प्रशासनिक अपरिहार्यता में भी इसका सहारा लिया जा सकता है, जहां सार्वजनिक कर्तव्य के निर्वहन के दौरान प्रशासनिक प्रक्रिया ठप होने और पूरा प्रयास व्यर्थ हो जाने की आशंका हो।जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने इस सिद्धांत को लागू करते हुए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के चेयरमैन द्वारा अकेले प्रधानाचार्य पद की चयन सूची घोषित किए जाने को वैध ठहराया। उस समय बोर्ड के अन्य सभी सदस्यों का...

कानूनी अधिकार के बिना डेवलपमेंट अथॉरिटी 'इम्पैक्ट फ़ीस' और 'ओपन एरिया पेनल्टी' नहीं लगा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि डेवलपमेंट अथॉरिटी 'इम्पैक्ट फ़ीस' या 'ओपन एरिया पेनल्टी' नहीं लगा सकती। कोर्ट ने माना कि उत्तर प्रदेश शहरी योजना और विकास अधिनियम, 1973 की धारा 15(2-A) के तहत अथॉरिटी केवल डेवलपमेंट फ़ीस, म्यूटेशन चार्ज, स्टैकिंग फ़ीस और पानी की फ़ीस ही वसूल सकती है।इन दो तरह के शुल्क (लेवी) को लगाने के अधिकार पर नहीं, बल्कि उनकी गणना (कैलकुलेशन) की दर पर सवाल उठाया गया। कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक अदालत द्वारा कानून की व्याख्या शुरुआत से ही लागू मानी जाती है। याचिकाकर्ता को इसके लाभ से...

बिना सरकारी अनुमति दूसरा विवाह करने पर यूपी के सरकारी कर्मचारी को मिल सकती है बड़ी सजा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी अनुमति के बिना दूसरा विवाह करने वाले सरकारी कर्मचारी पर बड़ी अनुशासनात्मक सजा लगाई जा सकती है।उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के नियम 29 के उपनियम (1) और (2) के उल्लंघन पर सजा तय करना नियुक्ति प्राधिकारी के विवेक पर निर्भर करता है। जस्टिस मनीष कुमार निगम ने स्पष्ट किया कि नियम 29 का उपनियम (3), जिसमें ऐसे मामले में तीन साल तक वेतनवृद्धि रोकने की न्यूनतम सजा का प्रावधान है, वर्ष 1976 में हटा दिया गया। इसके बाद इस उपनियम को दोबारा नियमावली में...

अंतरिम प्रबंधन समिति न नए सदस्य बना सकती, न पुराने सदस्यों को हटा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1965 के तहत गठित अंतरिम प्रबंधन समिति को सहकारी समिति में नए सदस्य शामिल करने या मौजूदा सदस्यों को हटाने का अधिकार नहीं है।यदि अंतरिम समिति ऐसा कोई प्रस्ताव पारित करती है, तो वह कानूनी रूप से अमान्य होगा। रजिस्ट्रार भी अधिनियम की धारा 128 के तहत ऐसे प्रस्ताव को प्रभावी नहीं कर सकता। जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि अंतरिम प्रबंधन समिति का गठन समिति के रोजमर्रा के कामकाज को अस्थायी रूप से...

कैंसर पीड़ित दो माह के बच्चे के खून के लिए अस्पताल ने वसूले 9 हजार रुपये, आयुष्मान योजना से हटाने का फैसला बरकरार
ब्लड कैंसर से पीड़ित दो माह के बच्चे को चढ़ाए जाने वाले खून की दो यूनिट के लिए 9 हजार रुपये वसूलने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निजी अस्पताल को राहत देने से इनकार किया।अदालत ने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत अस्पताल का पंजीकरण समाप्त करने के राज्य सरकार के फैसले को बरकरार रखा। योजना के तहत पात्र मरीजों को निर्धारित उपचार और सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने अस्पताल की ओर से दाखिल याचिका खारिज की।अस्पताल ने...

यूपी MLC चुनाव की मतदाता सूची को चुनौती देने वाली याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने कहा- चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद अधिसूचना को चुनौती नहीं
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLA) की पांच स्नातक निर्वाचन सीटों और छह शिक्षक निर्वाचन सीटों की मतदाता सूचियों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका बुधवार को खारिज की। हाईकोर्ट ने कहा कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया में कोई त्रुटि नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 329 के तहत चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद चुनाव अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता।चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने कहा कि याचिका मतदाता सूची में संशोधन को लेकर...

अंतरधार्मिक जोड़े को बड़ी राहत, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवाह नोटिस के प्रकाशन से दी छूट; पुलिस सुरक्षा का निर्देश
परिवार के सदस्यों से जान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को खतरा झेल रहे अंतरधार्मिक जोड़े को राहत देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत विवाह की सूचना प्रकाशित करने और उस पर आपत्तियां आमंत्रित करने की प्रक्रिया से छूट दी।अदालत ने लखनऊ के विवाह अधिकारी को निर्देश दिया कि वह जोड़े के विवाह की सूचना प्रकाशित न करें और प्रस्तावित विवाह पर आपत्तियां भी स्वीकार न करें। साथ ही, लखनऊ के पुलिस आयुक्त को कानून के अनुसार खतरे का आकलन कर जोड़े को सुरक्षा और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का...
