इलाहाबाद हाईकोट

अगर पुलिस दबाव डाले तो अवमानना ​​का मामला भेजें: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेटों को दी सलाह
अगर पुलिस 'दबाव डाले' तो अवमानना ​​का मामला भेजें: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेटों को दी सलाह

हाल ही में दिए गए एक अहम आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब मजिस्ट्रेट कुछ खास 'असुविधाजनक' मामलों की जांच के आदेश देते हैं तो कभी-कभी बड़े पुलिस अधिकारी उन पर 'दबाव डालने' की कोशिश करते हैं।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की बेंच ने मजिस्ट्रेटों को साफ तौर पर सलाह दी कि अगर उन्हें किसी पुलिस अधिकारी की तरफ से ऐसी कोई शर्मिंदगी या दबाव महसूस हो, तो वे कभी भी हाईकोर्ट में अवमानना ​​का मामला भेज सकते हैं।बेंच ने अपने आदेश में कहा,"मजिस्ट्रेट को ज़रूरी आदेश देने में हिचकिचाना...

अनुच्छेद 25 पूजा के लिए इकट्ठा होने के अधिकार की रक्षा करता है, निजी जगहों पर प्रार्थनाओं पर कोई रोक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
अनुच्छेद 25 पूजा के लिए इकट्ठा होने के अधिकार की रक्षा करता है, निजी जगहों पर प्रार्थनाओं पर कोई रोक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि भारत के संविधान का अनुच्छेद 25 देश में हर धार्मिक संप्रदाय को पूजा के लिए इकट्ठा होने के अधिकार की रक्षा करता है, लेकिन यह प्रार्थना की आड़ में एक धर्म द्वारा दूसरे धर्म को उकसाने को कोई सुरक्षा नहीं देता।साथ ही कोर्ट ने यह भी साफ किया कि किसी व्यक्ति की निजी जगह पर की जाने वाली प्रार्थनाओं या धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर कोई रुकावट या रोक नहीं हो सकती, चाहे वह किसी भी धर्म या संप्रदाय का हो।ये टिप्पणियां जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की बेंच...

सरकारी स्कूल टीचर की नियुक्ति से पहले की दूसरी शादी दुराचार नहीं, बल्कि योग्यता की जड़ पर ही वार है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
सरकारी स्कूल टीचर की नियुक्ति से पहले की दूसरी शादी दुराचार नहीं, बल्कि योग्यता की जड़ पर ही वार है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि कोई महिला, जिसने सरकारी स्कूल टीचर के तौर पर नियुक्त होने से पहले दूसरी शादी (Bigamous Marriage) की थी, उसे इस आधार पर यूपी सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली और यूपी सरकारी कर्मचारी (अनुशासन और अपील) नियमावली के तहत दुराचार के लिए दंडित नहीं किया जा सकता।हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि वह उम्मीदवार, जिसने 2009 में ऐसे व्यक्ति से शादी की, जिसकी पहली शादी अभी भी कायम थी, वह 'उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा शिक्षक सेवा नियमावली, 1981' के नियम 12 के तहत टीचर के तौर पर...

मुकदमे में संशोधन की समयसीमा पर अहम फैसला: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने कहा- मुकदमे के चरण के आधार पर होगा निर्णय
मुकदमे में संशोधन की समयसीमा पर अहम फैसला: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने कहा- मुकदमे के चरण के आधार पर होगा निर्णय

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने सिविल मामलों में याचिका (प्लीडिंग) में संशोधन को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि संशोधन आवेदन की समयसीमा का आकलन मुकदमे की शुरुआत की तारीख से नहीं, बल्कि मुकदमे किस चरण में है, इसके आधार पर किया जाना चाहिए।जस्टिस मनीष कुमार निगम ने कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 6 नियम 17 के तहत अदालत को किसी भी चरण में संशोधन की अनुमति देने का अधिकार है। बशर्ते वह वास्तविक विवाद के समाधान के लिए आवश्यक हो।अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक चरण (ट्रायल शुरू होने से पहले) में...

अगर अपॉइंटमेंट गैर-कानूनी नहीं है तो प्रमोशन के लिए एड-हॉक सर्विस को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
अगर अपॉइंटमेंट गैर-कानूनी नहीं है तो प्रमोशन के लिए एड-हॉक सर्विस को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अगर अपॉइंटमेंट गैर-कानूनी नहीं है तो सरकार किसी कर्मचारी की एड-हॉक सर्विस को प्रमोशन के लिए नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती। कोर्ट ने यह भी कहा कि जिस कर्मचारी के दावे को गैर-कानूनी तरीके से नज़रअंदाज़ किया गया, उसे प्रमोशन उसी तारीख से दिया जाना चाहिए, जिस तारीख को उसके जूनियर को प्रमोशन दिया गया।यह मानते हुए कि नियमों के अनुसार किया गया एड-हॉक अपॉइंटमेंट ज़्यादा से ज़्यादा अनियमित हो सकता है, गैर-कानूनी नहीं, जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने कहा,“अगर...

सिर्फ रिश्तेदारी के आधार पर संपत्ति जब्त नहीं: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने दिया बड़ा फैसला
सिर्फ रिश्तेदारी के आधार पर संपत्ति जब्त नहीं: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने दिया बड़ा फैसला

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी व्यक्ति की संपत्ति केवल इस आधार पर जब्त नहीं की जा सकती कि वह किसी गैंगस्टर का रिश्तेदार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संपत्ति जब्ती के लिए अपराध और संपत्ति के बीच सीधा संबंध (नेक्सस) साबित होना जरूरी है।जस्टिस राज बीर सिंह की पीठ ने मंसूर अंसारी की अपील स्वीकार करते हुए उनकी संपत्ति जब्त करने का आदेश रद्द कर दिया। मंसूर अंसारी, कुख्यात गैंगस्टर मुख्तार अंसारी के चचेरे भाई हैं।मामले में जिला मजिस्ट्रेट द्वारा मंसूर अंसारी की दुकानों और भवन...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गर्भवती नाबालिग की असंवेदनशील काउंसलिंग के लिए मेडिकल बोर्ड को फटकारा, बताया- चौंकाने वाला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गर्भवती नाबालिग की असंवेदनशील काउंसलिंग के लिए मेडिकल बोर्ड को फटकारा, बताया- चौंकाने वाला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते मेडिकल बोर्ड और चीफ मेडिकल ऑफिसर (CMO), हाथरस को तब फटकारा, जब वे एक समय-संवेदनशील रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इस याचिका में लगभग 30 हफ़्ते की गर्भावस्था के उन्नत चरण में गर्भपात की मांग की गई थी, जिस पर कोर्ट ने नाबालिग पीड़िता के प्रति उनकी असंवेदनशीलता पर नाराज़गी जताई।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी की:"आज, याचिकाकर्ता के वकील ने अपने मुवक्किल से मिले निर्देशों के आधार पर कोर्ट को सूचित किया कि मेडिकल बोर्ड बस उसके...

क्या हिंदुओं को भी घर में सामूहिक पूजा से रोका जा सकता है?: नमाज़ पर कथित रोक को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा
क्या हिंदुओं को भी घर में सामूहिक पूजा से रोका जा सकता है?: नमाज़ पर कथित रोक को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रमज़ान के दौरान नमाज़ पर कथित प्रतिबंध को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार से कड़ा सवाल करते हुए पूछा कि यदि मुसलमानों को निजी संपत्ति पर नमाज़ पढ़ने से रोका जा सकता है तो क्या हिंदुओं को भी अपने घरों में सामूहिक पूजा करने से रोका जा सकता है।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ संभल जिले में रमज़ान के दौरान नमाज़ पढ़ने पर लगाए गए कथित प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।सुनवाई के दौरान जस्टिस श्रीधरन ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा,“मुसलमानों को...

बांग्लादेशी मानव तस्करी पीड़िता का बयान अब तक क्यों नहीं दर्ज हुआ? बॉम्बे हाईकोर्ट ने सेशन कोर्ट से मांगा स्पष्टीकरण
बांग्लादेशी मानव तस्करी पीड़िता का बयान अब तक क्यों नहीं दर्ज हुआ? बॉम्बे हाईकोर्ट ने सेशन कोर्ट से मांगा स्पष्टीकरण

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में मुंबई सेशन कोर्ट से यह स्पष्टीकरण मांगा कि मानव तस्करी की शिकार एक बांग्लादेशी महिला का बयान अब तक दर्ज क्यों नहीं किया गया, जबकि कोर्ट ने पहले ही ऐसा करने का स्पष्ट निर्देश दिया था। अदालत ने कहा कि पीड़िता को जल्द से जल्द बयान दर्ज कराने के बाद अपने देश बांग्लादेश वापस भेजा जाना है और फिलहाल वह भारत में एक एनजीओ की देखरेख में रह रही है।जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खाटा की खंडपीठ ने सेशन कोर्ट को निर्देश दिया कि 24 मार्च 2026 तक पीड़िता का बयान और साक्ष्य दर्ज...

नमाज़ियों की संख्या सीमित नहीं कर सकता प्रशासन, कानून-व्यवस्था संभालना राज्य का कर्तव्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जताई कड़ी आपत्ति
नमाज़ियों की संख्या सीमित नहीं कर सकता प्रशासन, कानून-व्यवस्था संभालना राज्य का कर्तव्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जताई कड़ी आपत्ति

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के संभल जिले में रमज़ान के दौरान एक मस्जिद में नमाज़ पढ़ने वालों की संख्या सीमित करने के प्रशासनिक फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई। अदालत ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य की जिम्मेदारी है और इसके नाम पर लोगों के धार्मिक अधिकारों पर रोक नहीं लगाई जा सकती।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने 27 फरवरी को सुनवाई के दौरान कहा कि यदि संभल के पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी को कानून-व्यवस्था की स्थिति संभालने में कठिनाई महसूस होती है तो उन्हें या तो...

घर में नमाज़ पढ़ने से रोके जाने के आरोप पर इलाहाबाद हाइकोर्ट सख्त, व्यक्ति को 24 घंटे सुरक्षा देने का आदेश
घर में नमाज़ पढ़ने से रोके जाने के आरोप पर इलाहाबाद हाइकोर्ट सख्त, व्यक्ति को 24 घंटे सुरक्षा देने का आदेश

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने बरेली के एक मुस्लिम व्यक्ति को कथित तौर पर अपने घर में नमाज़ पढ़ने से रोके जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए उसे चौबीसों घंटे पुलिस सुरक्षा देने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि यदि उसके या उसकी संपत्ति को कोई नुकसान पहुंचता है तो उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य की मानी जाएगी।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने आदेश दिया कि हसीन खान की सुरक्षा के लिए 24 घंटे दो सशस्त्र पुलिसकर्मी तैनात किए जाएं और वे जहां भी जाएं उनके साथ रहें।मामले में हसीन खान ने पहले...

ब्रिटिश नागरिकता विवाद | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय के 2019 के राहुल गांधी को दिए नोटिस का पूरा रिकॉर्ड तलब किया
ब्रिटिश नागरिकता विवाद | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय के 2019 के राहुल गांधी को दिए नोटिस का पूरा रिकॉर्ड तलब किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा 2019 में जारी किए गए नोटिस से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड तलब किया।बता दें, BJP सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत के बाद MHA ने 29 अप्रैल, 2019 को गांधी से उनकी नागरिकता के संबंध में "तथ्यात्मक स्थिति" बताने को कहा था। अपनी 2015 की शिकायत में डॉ. स्वामी ने आरोप लगाया कि गांधी एक ब्रिटिश नागरिक हैं।जस्टिस राजीव सिंह की बेंच ने कर्नाटक भारतीय जनता पार्टी (BJP) सदस्य एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर एक याचिका पर...

कोर्ट्स, SC/ST समुदाय से पीड़ित होने के आधार पर ही BNSS की धारा 173(4) के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश देने के लिए बाध्य नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
कोर्ट्स, SC/ST समुदाय से पीड़ित होने के आधार पर ही BNSS की धारा 173(4) के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश देने के लिए बाध्य नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि कोई स्पेशल कोर्ट या मजिस्ट्रेट, BNSS की धारा 173(4) के तहत दायर किसी आवेदन पर FIR दर्ज करने का निर्देश देने के लिए अपने आप बाध्य नहीं है, सिर्फ इसलिए कि आवेदक अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय से संबंधित है।जस्टिस अनिल कुमार-X की बेंच ने आगे कहा कि कोर्ट को सबसे पहले अपने सामने रखे गए आरोपों का मूल्यांकन करना होगा और उसके बाद यह तय करना होगा कि पुलिस द्वारा जांच का निर्देश देना उचित है या मामले को शिकायत मामले के तौर पर आगे बढ़ाना।इन टिप्पणियों के साथ...

AIIMS भर्ती विज्ञापन के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से इलाहाबाद हाइकोर्ट का इनकार, कहा- उपाय CAT के पास
AIIMS भर्ती विज्ञापन के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से इलाहाबाद हाइकोर्ट का इनकार, कहा- उपाय CAT के पास

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने AIIMS रायबरेली द्वारा जारी भर्ती विज्ञापन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार किया। हाइकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि इस प्रकार के मामलों के लिए उचित मंच केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) है, इसलिए याचिका वहां दायर की जानी चाहिए।यह आदेश जस्टिस प्रकाश सिंह की एकल पीठ ने पारित किया। हाइकोर्ट ने याचिका को सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज की।मामले में याचिकाकर्ता ने AIIMS रायबरेली द्वारा जारी उस भर्ती विज्ञापन को चुनौती दी थी, जिसमें सहायक भंडार अधिकारी के दो पद और निजी सचिव के...

तकनीकी आधार पर सांप के काटने से मौत का मुआवजा नहीं रोका जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
तकनीकी आधार पर सांप के काटने से मौत का मुआवजा नहीं रोका जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सांप के काटने से हुई मृत्यु के मामलों में राज्य आपदा राहत कोष से मिलने वाला अनुग्रह (ex-gratia) मुआवजा केवल तकनीकी कारणों जैसे पोस्टमार्टम रिपोर्ट का निष्कर्षहीन होना के आधार पर नहीं रोका जा सकता।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार की 2 अगस्त, 2018 की अधिसूचना स्पष्ट रूप से सांप के काटने से हुई मौत को उन परिस्थितियों में शामिल करती है जिनमें मृतक के आश्रितों को अनुग्रह राशि देने का प्रावधान है।अदालत ने कहा कि यह अधिसूचना...

भर्ती परीक्षा के अंक गोपनीय नहीं, RTI में बिना तीसरे पक्ष की अनुमति बताए जा सकते हैं: इलाहाबाद हाइकोर्ट
भर्ती परीक्षा के अंक गोपनीय नहीं, RTI में बिना तीसरे पक्ष की अनुमति बताए जा सकते हैं: इलाहाबाद हाइकोर्ट

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं में प्राप्त अंक गोपनीय जानकारी नहीं माने जा सकते। इसलिए यदि परीक्षा में शामिल कोई अभ्यर्थी RTI के तहत दूसरे अभ्यर्थियों के अंक मांगता है, तो इसके लिए तीसरे पक्ष की सहमति आवश्यक नहीं है।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने कहा कि सार्वजनिक परीक्षा में प्राप्त अंक निजी गोपनीय जानकारी की श्रेणी में नहीं आते।खंडपीठ ने कहा,“यदि किसी अभ्यर्थी द्वारा, जिसने स्वयं भी परीक्षा में भाग लिया हो, दूसरे...

ऑर्डर VI रूल 17 CPC प्रोविज़ो 2002 से पहले के केस पर लागू नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1997 के केस में बदलाव की इजाज़त दी
ऑर्डर VI रूल 17 CPC प्रोविज़ो 2002 से पहले के केस पर लागू नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1997 के केस में बदलाव की इजाज़त दी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में साल 1997 में फाइल किए गए एक केस में बदलाव की अर्जी को इस आधार पर मंज़ूरी दी कि ऑर्डर VI के रूल 17 के प्रोविज़ो में बदलाव, जिसमें ट्रायल शुरू होने के बाद केस में बदलाव पर रोक बताई गई थी, 2002 में लागू किया गया, यानी केस फाइल होने के बाद।जस्टिस मनीष कुमार निगम ने कहा,“यह केस साल 1997 का है, जो बदलाव से पहले का है। इसलिए स्टेट बैंक ऑफ़ हैदराबाद बनाम टाउन म्युनिसिपल काउंसिल के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देखते हुए बदला हुआ प्रोविज़ो इस केस पर लागू नहीं...

मात्र वकील की मदद से दायर की गई FIR को संदिग्ध या कमज़ोर नहीं माना जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
मात्र वकील की मदद से दायर की गई FIR को संदिग्ध या कमज़ोर नहीं माना जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि FIR को सिर्फ़ इसलिए संदिग्ध या कमज़ोर नहीं माना जा सकता, क्योंकि इसे वकील की मदद से दर्ज किया गया।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस अबधेश कुमार चौधरी की डिवीज़न बेंच ने कहा कि क्रिमिनल कार्रवाई के सभी स्टेज पर सभी को कानूनी मदद मिलती है। FIR दर्ज करने के स्टेज पर भी इसका फ़ायदा उठाया जा सकता है।कोर्ट ने कहा,"सिर्फ़ इस आधार पर कि FIR एक वकील की मदद से लिखी गई, यह नहीं माना जा सकता कि इन्फॉर्मेंट ने अपीलेंट के ख़िलाफ़ झूठी FIR दर्ज कराई। इसके अलावा, एक वकील की मदद से...

पूर्ण अवमानना: सीनियर सिटीजन की सुरक्षा योजना पर हाइकोर्ट ने यूपी सरकार को फटकारा, अफसरों को दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी
पूर्ण अवमानना: सीनियर सिटीजन की सुरक्षा योजना पर हाइकोर्ट ने यूपी सरकार को फटकारा, अफसरों को दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के गृह विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा अदालत के आदेश के अनुपालन में हलफनामा दाखिल न करने पर कड़ी नाराजगी जताई।अदालत ने इसे न्यायालय के आदेशों के प्रति “पूर्ण अवमानना” करार देते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि आदेशों की अवहेलना पर अफसरों को दंडात्मक कार्यवाही यहां तक कि अवमानना का सामना करना पड़ेगा।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की पीठ ने यह टिप्पणी उस समय की जब राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा गया कि क्या माता-पिता एवं सीनियर सिटीजन भरण-पोषण एवं...

न्यायिक हत्या: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने स्वामित्व विवाद में वादी को अवैध लाभ पहुंचाने पर ट्रायल जज के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई के निर्देश दिए
न्यायिक हत्या: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने स्वामित्व विवाद में वादी को अवैध लाभ पहुंचाने पर ट्रायल जज के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई के निर्देश दिए

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने संपत्ति स्वामित्व विवाद में ट्रायल कोर्ट जज के आचरण पर गहरा आघात व्यक्त करते हुए उसे “दिनदहाड़े न्यायिक हत्या” करार दिया। अदालत ने पाया कि ट्रायल जज ने एक मृतका के मृत्यु प्रमाणपत्र की छायाप्रति को नजरअंदाज कर वादी को अनुचित और अवैध लाभ पहुंचाया।जस्टिस संदीप जैन ने कहा,“सुशीला मेहरा के मृत्यु प्रमाणपत्र की उपेक्षा करने के लिए ट्रायल कोर्ट द्वारा दिया गया कारण चौंकाने वाला, विकृत और बाहरी कारणों से प्रेरित प्रतीत होता है। वादी को अवैध लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से इसे जानबूझकर...