इलाहाबाद हाईकोट

बिना दोषसिद्धि केवल जेल जाने के आधार पर CISF कर्मी को सेवा से नहीं हटाया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
बिना दोषसिद्धि केवल जेल जाने के आधार पर CISF कर्मी को सेवा से नहीं हटाया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी आपराधिक मामले में केवल गिरफ्तारी या जेल में रहने के आधार पर, बिना दोषसिद्धि के केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के किसी कर्मी को सेवा से हटाया नहीं जा सकता। अदालत ने कहा कि मात्र कारावास को अनुशासनात्मक कार्रवाई या बर्खास्तगी का आधार बनाना न तो तथ्यात्मक रूप से उचित है और न ही कानूनी रूप से टिकाऊ।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस राजीव भारती की खंडपीठ ने केंद्र सरकार की विशेष अपील खारिज करते हुए सिंगर जज का आदेश बरकरार रखा, जिसमें हत्या के एक मामले में आरोपित...

लिखित किरायेदारी एग्रीमेंट न होना या किरायेदारी की जानकारी न देना, रेंट अथॉरिटी के अधिकार क्षेत्र को नहीं रोकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
लिखित किरायेदारी एग्रीमेंट न होना या किरायेदारी की जानकारी न देना, रेंट अथॉरिटी के अधिकार क्षेत्र को नहीं रोकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश शहरी परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 के तहत रेंट अथॉरिटी के पास किरायेदार को बेदखल करने के लिए मकान मालिक के आवेदन पर सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र है, भले ही कोई किरायेदारी एग्रीमेंट न हुआ हो और मकान मालिक ने किरायेदारी की जानकारी भी न दी हो।उत्तर प्रदेश शहरी परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 के विभिन्न प्रावधानों का हवाला देते हुए जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने कहा,“2021 के अधिनियम के प्रावधानों के तहत गठित रेंट अथॉरिटी के पास उन मामलों में...

फॉर्म में जानबूझकर ज़्यादा नंबर भरने वाले उम्मीदवार की नियुक्ति मौलिक रूप से गैर-कानूनी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
फॉर्म में जानबूझकर ज़्यादा नंबर भरने वाले उम्मीदवार की नियुक्ति मौलिक रूप से गैर-कानूनी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भर्ती के लिए एप्लीकेशन फॉर्म में जानबूझकर ज़्यादा नंबर भरने वाले उम्मीदवार की नियुक्ति, ताकि सिलेक्शन प्रोसेस में गलत फायदा मिल सके, मौलिक रूप से गैर-कानूनी है।कोर्ट ने कहा कि ऐसा उम्मीदवार एस्टोपेल का फायदा नहीं उठा सकता क्योंकि नियुक्ति शुरू से ही गलत है।जस्टिस मंजू रानी चौहान ने कहा,“जहां कोई उम्मीदवार जानबूझकर असल में मिले नंबरों से ज़्यादा नंबर भरता है, जिससे वह खुद को गलत फायदे वाली स्थिति में डालता है और आखिरकार नियुक्ति पा लेता है तो ऐसी नियुक्ति को कानूनी या...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सज़ा के 38 साल बाद हत्या के आरोपी को बरी किया, कहा- मृतक की हत्या किसी और ने की थी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सज़ा के 38 साल बाद हत्या के आरोपी को बरी किया, कहा- 'मृतक की हत्या किसी और ने की थी'

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में हत्या के 3 आरोपियों को बरी किया, जो उम्रकैद की सज़ा काट रहे थे। कोर्ट ने कहा कि हत्या एक ब्लाइंड मर्डर था और इसे किसी और ने अंजाम दिया था। कोर्ट ने कहा कि चश्मदीद और मेडिकल सबूतों में बड़े विरोधाभास हैं और अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे अपना मामला साबित करने में विफल रहा।3 आरोपियों को बरी करते हुए जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस संजीव कुमार की बेंच ने कहा:“हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे अपना मामला साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है।...

अगर बिना किसी स्पष्टीकरण के मृत व्यक्तियों को अभियोजन गवाह के तौर पर शामिल किया जाता है, तो जांच अविश्वसनीय जाती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
अगर बिना किसी स्पष्टीकरण के मृत व्यक्तियों को अभियोजन गवाह के तौर पर शामिल किया जाता है, तो जांच अविश्वसनीय जाती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अगर बिना किसी स्पष्टीकरण के मृत व्यक्तियों को अभियोजन गवाह के तौर पर शामिल किया जाता है, तो जांच अविश्वसनीय और कानूनी रूप से अस्थिर हो जाती है।जस्टिस शेखर कुमार यादव ने कहा:“मृत व्यक्तियों को बिना किसी स्पष्टीकरण के अभियोजन गवाह के तौर पर शामिल करना मामले की जड़ तक जाता है। जांच के दौरान दिमाग का इस्तेमाल न करने को दर्शाता है, जिससे जांच अविश्वसनीय और कानूनी रूप से अस्थिर हो जाती है।”2022 में गौतम बुद्ध नगर में एक FIR दर्ज की गई, जिसमें गांव चिताहेड़ा, तहसील दादरी की...

अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता से जुड़े डोमेस्टिक अवार्ड का प्रवर्तन हाईकोर्ट में होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता से जुड़े डोमेस्टिक अवार्ड का प्रवर्तन हाईकोर्ट में होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता से संबंधित किसी घरेलू मध्यस्थता अवार्ड (Domestic Award) का प्रवर्तन मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 36 के तहत संबंधित अधिकार क्षेत्र वाले हाईकोर्ट द्वारा किया जाएगा।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस राजीव भारती की खंडपीठ ने यह निर्णय देते हुए कहा किअंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता से संबंधित डोमेस्टिक अवार्ड के प्रवर्तन के लिए धारा 36 के तहत आवेदन दाखिल करने के संबंध में 'कोर्ट' हाईकोर्ट ही होगा।मामलाअपीलकर्ता ने सिंगल जज के...

अनुमान के आधार पर कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन नहीं; अधिनियम में प्रावधान न होने पर राहत संभव नहीं
अनुमान के आधार पर कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन नहीं; अधिनियम में प्रावधान न होने पर राहत संभव नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी छात्र या छात्रा को यह लगता है कि पुनर्मूल्यांकन होने पर उसके अंक बढ़ सकते हैं, तो मात्र इस अनुमान के आधार पर उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन नहीं कराया जा सकता, क्योंकि उ.प्र. इंटरमीडिएट एजुकेशन एक्ट, 1921 में पुनर्मूल्यांकन का कोई वैधानिक प्रावधान मौजूद नहीं है। अदालत ने कहा कि जब तक नियम इसकी अनुमति न दें, ऐसी मांग को स्वीकार नहीं किया जा सकता।मामले में याचिकाकर्ता ने इंटरमीडिएट परीक्षा में प्राप्त अंकों से असंतुष्ट होकर हिंदी और जीवविज्ञान...

अत्यंत अफसोसजनक स्थिति: 9 साल पुराने मामले में एडवोकेट जनरल शामिल न करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को लगाई कड़ी फटकार
अत्यंत अफसोसजनक स्थिति: 9 साल पुराने मामले में एडवोकेट जनरल शामिल न करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को लगाई कड़ी फटकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार की कानूनी कार्यप्रणाली और मुकदमों के प्रति उसके लापरवाह रवैये पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे अत्यंत अफसोसजनक स्थिति करार दिया है। कोर्ट ने यह तीखी टिप्पणी 2016 के एक पुराने मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें राज्य सरकार ने नौ वर्षों तक एडवोकेट जनरल को पेश होने का अनुरोध नहीं किया और अंततः जब नवंबर 2025 में उन्हें इस मामले में शामिल किया गया तो उन्हें केस से संबंधित जरूरी दस्तावेज और रिकॉर्ड तक उपलब्ध नहीं कराए गए।जस्टिस संगीता चंद्रा और जस्टिस...

बोर्ड ऑफ रेवेन्यू में कैविएट प्रक्रिया में खामी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जारी किए व्यापक दिशानिर्देश
बोर्ड ऑफ रेवेन्यू में कैविएट प्रक्रिया में खामी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जारी किए व्यापक दिशानिर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश राज्य में बोर्ड ऑफ रेवेन्यू में कैविएट पर नोटिस जारी करने के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी किए।उन मामलों में होने वाली दिक्कतों को देखते हुए जिनमें बाहर के वकील शामिल होते हैं, जस्टिस जे.जे. मुनीर ने कहा:“हमारा मानना ​​है कि कई संभावित दिक्कतों से बचने के लिए मामले में पेश होने वाले बाहर के वकील को बोर्ड द्वारा अपने एक ऐसे सहयोगी को रखने के लिए कहा जा सकता है, जो उस स्टेशन पर रहता हो जहां बोर्ड की बेंच स्थित है, यानी उस बेंच पर जहां कैविएट दायर की गई। वैकल्पिक रूप...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवैध तोड़फोड़ और रेवेन्यू रिकॉर्ड में एकतरफ़ा बदलाव के लिए राज्य पर ₹20 लाख का जुर्माना लगाया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवैध तोड़फोड़ और रेवेन्यू रिकॉर्ड में एकतरफ़ा बदलाव के लिए राज्य पर ₹20 लाख का जुर्माना लगाया

छुट्टियों के दौरान एक आदेश पारित करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की संपत्ति पर अवैध रूप से ढांचा गिराने और याचिकाकर्ता की संपत्ति के संबंध में रेवेन्यू रिकॉर्ड में एकतरफ़ा आदेश पारित करके बदलाव करने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।जुर्माना लगाते हुए जस्टिस आलोक माथुर ने टिप्पणी की:“सिर्फ़ विवादित आदेश रद्द करना याचिकाकर्ता को पूरा न्याय देने के लिए काफ़ी नहीं होगा, जिसकी संपत्ति को राज्य अधिकारियों ने अवैध रूप से गिरा दिया है। उपरोक्त कार्रवाई के लिए, राज्य...

CPC की धारा 24 के तहत ट्रांसफर आदेश के खिलाफ विशेष अपील सुनवाई योग्य नहीं, क्योंकि यह निर्णय नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
CPC की धारा 24 के तहत ट्रांसफर आदेश के खिलाफ विशेष अपील सुनवाई योग्य नहीं, क्योंकि यह 'निर्णय' नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि CPC की धारा 24 के तहत ट्रांसफर आवेदन पर दिए गए आदेश के खिलाफ विशेष अपील इलाहाबाद हाईकोर्ट नियम, 1952 के अध्याय VIII नियम 5 के तहत सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि ऐसा आदेश कोई निर्णय नहीं है।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस प्रशांत कुमार की बेंच ने कहा,“CPC की धारा 24 के तहत पारित आदेश कोई निर्णय नहीं है। इसलिए इलाहाबाद हाईकोर्ट नियम, 1952 के अध्याय VIII नियम 5 के तहत इस आधार पर अपील सुनवाई योग्य नहीं है।”CPC की धारा 24 हाईकोर्ट या जिला कोर्ट को अपनी मर्जी से या किसी...

धारा 2(वा) दंड प्रक्रिया संहिता के तहत निकटतम विधिक उत्तराधिकारी की कसौटी पर पत्नी को वरीयता, चाचा का दावा खारिज: इलाहाबाद हाईकोर्ट
धारा 2(वा) दंड प्रक्रिया संहिता के तहत 'निकटतम विधिक उत्तराधिकारी' की कसौटी पर पत्नी को वरीयता, चाचा का दावा खारिज: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 2(वा) के अंतर्गत पीड़ित अथवा विधिक उत्तराधिकारी की पहचान के लिए अपनाई जाने वाली 'निकटतम विधिक उत्तराधिकारी' की कसौटी पर पत्नी मृतक के चाचा से अधिक अधिकारयुक्त मानी जाएगी। न्यायालय ने कहा कि मृतक की पत्नी, पारिवारिक और विधिक संबंधों की दृष्टि से चाचा की तुलना में अधिक निकट उत्तराधिकारी है।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस अभ्देश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका पर की, जिसमें मृतक के चाचा...

रजिस्टर्ड गोद लेने के दस्तावेज़ को तब तक असली माना जाएगा, जब तक स्वतंत्र कार्यवाही में इसे गलत साबित न कर दिया जाए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
रजिस्टर्ड गोद लेने के दस्तावेज़ को तब तक असली माना जाएगा, जब तक स्वतंत्र कार्यवाही में इसे गलत साबित न कर दिया जाए: इलाहाबाद हाईकोर्ट

हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि एक रजिस्टर्ड गोद लेने के दस्तावेज़ को तब तक कानून के मुताबिक माना जाएगा, जब तक स्वतंत्र कार्यवाही में इसे खास तौर पर गलत साबित न कर दिया जाए।हिंदू गोद लेने और भरण-पोषण अधिनियम की धारा 16 में यह प्रावधान है कि जब किसी अदालत में रजिस्टर्ड गोद लेने का दस्तावेज़ पेश किया जाता है, जिसमें बच्चे को देने वाले पक्ष और बच्चे को गोद लेने वाले पक्ष के हस्ताक्षर होते हैं तो ऐसे दस्तावेज़ को तब तक कानून के मुताबिक माना जाएगा, जब तक इसके विपरीत साबित न हो जाए।जस्टिस इरशाद...

एडमिनिस्ट्रेटिव मशीनरी में कन्फ्यूजन की वजह से कोर्ट के ऑर्डर का पालन न होने पर स्टेट डिपार्टमेंट के सबसे बड़े ऑफिसर पर अवमानना ​​की कार्रवाई होगी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
एडमिनिस्ट्रेटिव मशीनरी में कन्फ्यूजन की वजह से कोर्ट के ऑर्डर का पालन न होने पर स्टेट डिपार्टमेंट के सबसे बड़े ऑफिसर पर अवमानना ​​की कार्रवाई होगी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि अगर एडमिनिस्ट्रेटिव मशीनरी में कन्फ्यूजन की वजह से रिट कोर्ट के ऑर्डर का पालन नहीं होता है तो सरकारी डिपार्टमेंट के सबसे बड़े ऑफिसर पर अवमानना ​​की कार्रवाई होगी।यह मानते हुए कि उत्तर प्रदेश सरकार के चीफ सेक्रेटरी लैंड एक्विजिशन एक्ट 1984 और राइट टू फेयर कंपनसेशन एंड ट्रांसपेरेंसी इन लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रीसेटलमेंट एक्ट 2013 से जुड़े मामलों में अवमानना ​​के लिए जिम्मेदार होंगे, जस्टिस सलिल कुमार राय ने कहा:“राज्य सरकार के अलग-अलग डिपार्टमेंट्स...

2018 से राज्य में मॉब लिंचिंग के सिर्फ़ 11 मामले रिपोर्ट हुए: हाईकोर्ट को UP DGP के उक्त दावे पर शक
2018 से राज्य में मॉब लिंचिंग के सिर्फ़ 11 मामले रिपोर्ट हुए: हाईकोर्ट को UP DGP के उक्त दावे पर शक

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने हाल ही में डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (DGP) के हाईकोर्ट के सामने दिए गए डेटा पर गंभीर शक जताया, जिसमें दावा किया गया कि 2018 से राज्य में मॉब लिंचिंग से जुड़े सिर्फ़ 11 मामले रिपोर्ट हुए।यह देखते हुए कि यह आंकड़ा "पहली नज़र में गलत लगता है", जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस राजीव भारती की डिवीजन बेंच ने बताया कि हाईकोर्ट ने अकेले अक्टूबर में इसी तरह के दो अलग-अलग मामलों को देखा था।पिछले महीने दिए गए आदेश में बेंच ने यूपी सरकार को यह भी निर्देश दिया कि वह उत्तर प्रदेश...

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के नोटिस की तामील से संबंधित प्रावधान GST Act के तहत सेवा पर लागू नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के नोटिस की तामील से संबंधित प्रावधान GST Act के तहत सेवा पर लागू नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

एक ऐतिहासिक फैसले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के सेवा के भेजने और प्राप्त करने से संबंधित प्रावधान गुड्स एंड सर्विस टैक्स एक्ट, 2017 (GST Act) की धारा 169 के तहत की गई सेवा पर लागू नहीं होते हैं।राज्य/केंद्रीय GST Act की धारा 169(1) के तहत प्रदान किए गए सेवा के छह तरीके हैं: (1) सीधे या मैसेंजर द्वारा देना, (2) स्पीड पोस्ट आदि द्वारा पावती के साथ भेजना, (3) ईमेल द्वारा संचार भेजना, (4) कॉमन पोर्टल पर उपलब्ध कराना, (5) एक अखबार में प्रकाशन द्वारा और (6)...

शादी का झूठा वादा करके महिलाओं का यौन शोषण एक बढ़ती हुई प्रवृत्ति, इसे शुरुआत में ही खत्म किया जाना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
शादी का झूठा वादा करके महिलाओं का यौन शोषण एक बढ़ती हुई प्रवृत्ति, इसे शुरुआत में ही खत्म किया जाना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि शादी का झूठा वादा करके महिलाओं का यौन शोषण करने और बाद में शादी से इनकार करने की प्रवृत्ति समाज में बढ़ रही है, जिसे शुरुआत में ही खत्म किया जाना चाहिए।यह टिप्पणी जस्टिस नलिन कुमार श्रीवास्तव की बेंच ने की, जिन्होंने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं, जिसमें धारा 69 (धोखे से यौन संबंध बनाना आदि) भी शामिल है, उसके तहत आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की।संक्षेप में मामलाआरोपी प्रशांत पाल पर पीड़िता के साथ शादी का झूठा वादा करके शारीरिक संबंध...

FIR रजिस्ट्रेशन के लिए मजिस्ट्रेट का CrPC की धारा 156 (3) के तहत आदेश, संभावित आरोपी की अपील पर रिवीजन के लिए खुला नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
FIR रजिस्ट्रेशन के लिए मजिस्ट्रेट का CrPC की धारा 156 (3) के तहत आदेश, संभावित आरोपी की अपील पर रिवीजन के लिए खुला नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि एक संभावित आरोपी के पास मजिस्ट्रेट द्वारा CrPC की धारा 156(3) के तहत पुलिस को FIR दर्ज करने और जांच करने का निर्देश देने वाले आदेश को रिवीजन याचिका के ज़रिए चुनौती देने का कोई अधिकार नहीं है।जस्टिस चवन प्रकाश की बेंच ने इस तरह आपराधिक रिवीजन याचिका यह देखते हुए खारिज कर दिया कि CrPC की धारा 156 (3) के तहत पारित आदेश एक इंटरलोक्यूटरी आदेश है और इसे CrPC की धारा 397(2) के तहत रिवीजन में चुनौती नहीं दी जा सकती है।इसमें कहा गया कि CrPC की धारा 156(3) के चरण में...

हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद यूपी पुलिस भेजेगी आपराधिक मामलों में सरकारी वकीलों को ईमेल से निर्देश, पैरोकार सिस्टम होगा खत्म
हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद यूपी पुलिस भेजेगी आपराधिक मामलों में सरकारी वकीलों को ईमेल से निर्देश, 'पैरोकार' सिस्टम होगा खत्म

उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने एक ज़रूरी सर्कुलर जारी किया, जिसमें सभी ज़िला पुलिस प्रमुखों को निर्देश दिया गया कि वे इलाहाबाद हाईकोर्ट में सरकारी वकीलों को ज़मानत और अन्य आपराधिक मामलों में निर्देश इलेक्ट्रॉनिक तरीके से भेजें।यह कदम 9 दिसंबर को हाईकोर्ट द्वारा जारी निर्देशों का सख्ती से पालन करते हुए उठाया गया।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने यह निर्देश जारी किया, जिसमें कहा गया कि मौजूदा मैनुअल सिस्टम के तहत, आपराधिक मामलों में पुलिस स्टेशनों से निर्देश मिलने में काफी देरी...