इलाहाबाद हाईकोट

पेमेंट में देरी के आधार पर मील की ज़रूरत से कम गन्ना आवंटित करना सही नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मील की अनुमानित ज़रूरत से कम गन्ना आवंटित करने के भेदभावपूर्ण फ़ैसले को कम गन्ना उठाने या गन्ना मूल्य के भुगतान में कथित देरी के आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता, खासकर तब जब कम आवंटन के कारण ही कम गन्ना उठाया गया और मिल की भुगतान करने की क्षमता प्रभावित हुई।कोर्ट ने यह भी कहा कि गन्ना आवंटन करते समय इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि सप्लाई किए गए गन्ने का केवल 60% ही अंततः पेराई के लिए उपलब्ध होता है, जबकि बाकी 40% चोरी और अन्य नुकसानों में चला जाता है।जस्टिस जे.जे....

यूपी पुलिसकर्मियों को राहत: सजा के खिलाफ पुनर्विचार में देरी माफ की जा सकती है, इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस के अधीनस्थ रैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों को राहत देते हुए कहा कि विभागीय सजा के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका दाखिल करने में हुई देरी को माफ किया जा सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश पुलिस अधिकारियों के अधीनस्थ रैंक के दंड एवं अपील नियम, 1991 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 5 के तहत देरी माफ करने की शक्ति को समाप्त करता हो।जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की पीठ ने कहा कि नियमों में न तो...

26 साल बाद भूमि आवंटन रद्द करना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परिवार के हक में बहाल की ज़मीन

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 26 साल बाद कृषि भूमि का आवंटन रद्द किए जाने के मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1950 की धारा 198(4) के तहत इतने लंबे अंतराल के बाद शुरू की गई कार्यवाही कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। कोर्ट ने कहा कि जब आवंटी को बाद में हस्तांतरणीय अधिकारों वाला भूमिधर भी दर्ज किया जा चुका था, तब निजी शिकायत पर 26 साल बाद आवंटन रद्द करने की कार्यवाही नहीं की जा सकती।जस्टिस चंद्र कुमार राय ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि संबंधित...

इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बुजुर्ग की जान और सुरक्षा बचाने के लिए बच्चों को घर से निकाल सकता है ट्रिब्यूनल

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत गठित ट्रिब्यूनल, बुजुर्ग की जान और सुरक्षा की रक्षा के लिए असाधारण परिस्थितियों में उसके साथ रहने वाले बच्चों या रिश्तेदारों को संपत्ति से बाहर करने का आदेश दे सकता है। हालांकि, यह शक्ति असीमित नहीं है और इसे केवल भरण-पोषण तथा सुरक्षा के अधिकार के हिस्से के तौर पर, बहुत कम और आवश्यक मामलों में इस्तेमाल किया जा सकता है।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि ट्रिब्यूनल की...

माता-पिता की वास्तविक चिंता भी व्यस्क व्यक्ति के जीवनसाथी चुनने के अधिकार से ऊपर नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि माता-पिता की सच्ची चिंता भी संविधान से सुरक्षित बालिग व्यक्ति की जीवनसाथी चुनने की आज़ादी से ऊपर नहीं हो सकती।कोर्ट ने कहा कि अपना साथी चुनने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सम्मान का एक हिस्सा है।जस्टिस संदीप जैन की बेंच ने व्यस्क महिला से जुड़ी 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। महिला ने दावा किया था कि उसने अपनी मर्ज़ी से अपनी पसंद के व्यक्ति से शादी की है और वह उसकी पत्नी के तौर पर...

सिर्फ आपराधिक मुकदमा दर्ज होना पुलिस सेवा के लिए अयोग्य नहीं बनाता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी उम्मीदवार के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज होने मात्र से उसे पुलिस सेवा में नियुक्ति के लिए स्वतः अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। उम्मीदवार की योग्यता का आकलन मामले की प्रकृति और उससे जुड़ी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।जस्टिस जे. जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने राज्य सरकार की विशेष अपील खारिज करते हुए कहा कि केवल मुकदमा दर्ज होने के आधार पर उम्मीदवार को यांत्रिक ढंग से सेवा से बाहर नहीं किया जा सकता।कोर्ट ने कहा,“ऐसा कोई कानून नहीं है,...

झूठों का झुंड: यूपी पुलिस थाने के CCTV पर हाईकोर्ट सख्त, अवैध हिरासत के लिए 65 हजार मुआवजा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने देवरिया जिले के गौरी बाजार थाने में चार लोगों को कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखे जाने के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई।कोर्ट ने थाने के CCTV कैमरों के खराब होने और हिरासत की अवधि की रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं होने को लेकर थाना प्रभारी और पुलिस अधीक्षक से तीखे सवाल किए। सुनवाई के दौरान जस्टिस अतुल श्रीधरन ने अधिकारियों की सफाई पर नाराजगी जताते हुए मौखिक रूप से उन्हें 'झूठों का झुंड' तक कह दिया। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की पीठ चार...

पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट के बावजूद केस डायरी में प्रथमदृष्टया अपराध हो तो आरोपी को समन कर सकता है मजिस्ट्रेट: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि पुलिस जांच के बाद अंतिम रिपोर्ट यानी क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करती है, लेकिन केस डायरी में प्रथमदृष्टया अपराध किए जाने का पर्याप्त आधार मौजूद है तो मजिस्ट्रेट पुलिस की रिपोर्ट को अस्वीकार कर आरोपी के खिलाफ संज्ञान लेते हुए उसे समन कर सकता है। इसके लिए मजिस्ट्रेट को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 200 और 202 के तहत शिकायत मामले की प्रक्रिया अपनाना जरूरी नहीं है।जस्टिस संदीप जैन ने सुप्रीम कोर्ट के राकेश बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, विष्णु कुमार तिवारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य,...

रिटायरमेंट के बाद गवर्नर की मंजूरी के बिना विभागीय कार्रवाई जारी नहीं रह सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ उसकी रिटायरमेंट से पहले शुरू की गई विभागीय कार्रवाई रिटायरमेंट के बाद अपने आप जारी नहीं रह सकती। सिविल सर्विस रेगुलेशंस के रेगुलेशन 351-ए के तहत रिटायरमेंट के बाद ऐसी कार्रवाई जारी रखने और उसके आधार पर कोई सजा देने के लिए गवर्नर की मंजूरी जरूरी है।जस्टिस अनिल कुमार गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट के स्टेट ऑफ यूपी बनाम श्री कृष्ण पांडे और भागीरथी जेना बनाम बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के फैसलों के साथ-साथ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसले हरिहर भोले नाथ...

चार्ज-शीट में शामिल गवाहों से पूछताछ आरोपी कर्मचारी की मौजूदगी में होनी चाहिए, ऐसा न करना प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यूपी सरकारी कर्मचारी (अनुशासन और अपील) नियम, 1999 के नियम 7(vii) के तहत जांच अधिकारी के लिए यह ज़रूरी है कि वह चार्ज-शीट में बताए गए गवाहों के मौखिक बयान आरोपी सरकारी कर्मचारी की मौजूदगी में दर्ज करे। ऐसा न करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।कोर्ट ने कहा कि आरोपी कर्मचारी द्वारा खास तौर पर मांग न किए जाने पर भी उसे जिरह (cross-examination) का मौका दिया जाना चाहिए।जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने कहा,“इस बात के अलावा कि आरोप स्पष्ट होने चाहिए, जिन दस्तावेजों या...

रिविज़नल अथॉरिटी किसी अलग रिविज़न में समान अधिकार वाली दूसरी रिविज़नल अथॉरिटी का अंतिम आदेश रद्द नहीं कर सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यूपी लैंड रेवेन्यू एक्ट, 1901 की धारा 219 के तहत रिविज़न पर फैसला करने वाली रिविज़नल अथॉरिटी के पास उसी अपीलीय आदेश से जुड़े किसी अलग रिविज़न में समान अधिकार वाली दूसरी रिविज़नल अथॉरिटी द्वारा पहले ही दिए गए अंतिम फैसले को रद्द करने का अधिकार नहीं है।एक्ट की धारा 219(1) तय रेवेन्यू अधिकारियों को किसी ऐसे मामले का रिकॉर्ड मंगाने की इजाज़त देती है, जिसका फैसला किसी अधीनस्थ रेवेन्यू कोर्ट ने किया हो और जिसमें कोई अपील न हो सकती हो, या अपील हो सकती हो लेकिन न की गई हो, और पारित...

पूर्व IPS अधिकारी अमिताभ ठाकुर की अनिवार्य रिटायरमेंट के खिलाफ चुनौती पर जल्द फैसला करे CAT: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT), लखनऊ बेंच को निर्देश दिया कि वह पूर्व IPS अधिकारी अमिताभ ठाकुर की अनिवार्य रिटायरमेंट के खिलाफ चुनौती पर जल्द फैसला करे। यह मामला 2021 से ट्रिब्यूनल के पास लंबित है।जस्टिस जसप्रीत सिंह की बेंच ने संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत ठाकुर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। ठाकुर ने 2021 में दायर अपनी लंबित अर्जी के जल्द निपटारे की मांग की थी।ठाकुर ने वकील डॉ. नूतन ठाकुर और दीपक कुमार के माध्यम से हाईकोर्ट...

दो शादियां करना सख्त मना है: CRPF कॉन्स्टेबल को मामूली सजा के प्रावधान के तहत नौकरी से हटाने सही- इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स (CRPF) के किसी सदस्य को सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स एक्ट, 1949 की धारा 11 के तहत नौकरी से हटाया जा सकता है, जिसका शीर्षक 'मामूली सजा' है।कोर्ट ने कहा कि धारा 11(1) के क्लॉज़ (a) से (e) में बताई गई सजाएं सस्पेंशन या नौकरी से हटाने के अलावा या उनकी जगह पर दी जा सकती हैं, और ये एकमात्र ऐसी सजाएं नहीं हैं, जिनकी इजाज़त यह प्रावधान देता है।सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स रूल्स, 1955 का नियम 15 फ़ोर्स के ऐसे सदस्य को, जिसकी पत्नी जीवित है, सरकार...

भर्ती विज्ञापन में नकारात्मक शर्त हो तो कटऑफ के बाद पात्रता प्रमाणपत्र नहीं दिया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि भर्ती विज्ञापन या उससे संबंधित नोटिस में दस्तावेज अपलोड करने की स्पष्ट अंतिम तिथि तय की गई हो और यह भी कहा गया हो कि समयसीमा तक दस्तावेज जमा नहीं करने वाले अभ्यर्थी को शॉर्टलिस्ट नहीं किया जाएगा, तो कटऑफ तिथि के बाद पात्रता प्रमाणपत्र दाखिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की पीठ ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में यह दलील अभ्यर्थी की मदद नहीं कर सकती कि पात्रता...

S.106 BNS | अगर लापरवाही साबित न हो तो किराये के घर में हुई एक्सीडेंटल मौत के लिए मकान मालिक ज़िम्मेदार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी जगह का मालिक होने मात्र से मकान मालिक पर एक्सीडेंटल मौत के लिए आपराधिक ज़िम्मेदारी (Vicarious Criminal Liability) नहीं डाली जा सकती, जब तक कि अभियोजन पक्ष के सबूतों से मालिक की ओर से कोई कानूनी रूप से साबित होने वाली लापरवाही या चूक का पता न चले।जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव की बेंच ने यह टिप्पणी तब की, जब वह एक मकान मालिक के खिलाफ़ चार्जशीट, संज्ञान/समन आदेश और पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर रहे थे। यह मामला जनवरी 2025 में एक युवा छात्र (IIT एस्पिरेंट) की मौत से जुड़ा...

योजना बंद होने के बाद संविदा कर्मियों को सेवा जारी रखने का अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी सरकारी योजना के तहत संविदा पर नियुक्त व्यक्ति योजना बंद होने के बाद सेवा में बने रहने के लिए परमादेश की मांग नहीं कर सकता। जब तक नियमितीकरण या समायोजन का प्रावधान करने वाला कोई नियम, विनियम या सरकारी आदेश मौजूद न हो तब तक ऐसे संविदा कर्मी के पक्ष में सेवा जारी रखने का कोई कानूनी अधिकार नहीं बनता।जस्टिस विकास बुधवार ने कहा कि नियोक्ता की ओर से किसी योजना को जारी रखने या बंद करने का फैसला अदालत में तब तक चुनौती नहीं दिया जा सकता, जब तक कर्मचारी या संविदा कर्मी यह...

RTI Act के तहत सीधे CCTV फुटेज नहीं मांग सकता आवेदक, शिकायत पर कोर्ट या आयोग करा सकता है सुरक्षित: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) के तहत मांगा गया CCTV फुटेज यदि अधिनियम की धारा 8(1)(g) में दिए गए अपवाद के दायरे में आता है तो उसे सीधे RTI आवेदक को नहीं दिया जा सकता। हालांकि, आवेदक संबंधित अदालत या आयोग के समक्ष शिकायत कर सकता है, जहां जरूरत पड़ने पर CCTV फुटेज मंगाने और उसे सुरक्षित रखने का आदेश दिया जा सकता है।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अब्धेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए याचिका का निस्तारण किया।मामले में याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद...

मुजफ्फरनगर के शिक्षक की करीब 37 साल के सर्विस केस में हाईकोर्ट ने कहा- जरूरी योग्यता के बिना नियुक्ति शुरू से ही शून्य, नियमितीकरण से नहीं हो सकती वैध

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा आयोग एवं चयन बोर्ड अधिनियम, 1982 की धारा 21 के तहत मिलने वाला संरक्षण एडहॉक शिक्षकों को उपलब्ध नहीं है। धारा 21 के तहत प्रबंध समिति को किसी शिक्षक को सेवा से हटाने या बर्खास्त करने से पहले बोर्ड की पूर्व मंजूरी लेना जरूरी है, लेकिन यह सुरक्षा बोर्ड की संस्तुति पर नियमित रूप से नियुक्त शिक्षकों के लिए है।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि प्रथम कठिनाई निवारण आदेश, 1981 के तहत...