इलाहाबाद हाईकोट
'रेडियो' की मांग पर उत्पीड़न का कोई सबूत नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1982 के आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में पति को बरी किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में 1982 के अपनी पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के एक मामले में व्यक्ति को बरी किया। कोर्ट ने कहा कि यह साबित नहीं हो पाया कि पति ने पीड़ित पत्नी को रेडियो की मांग को लेकर किसी भी तरह से परेशान किया, जिसके कारण कथित तौर पर उसने आत्महत्या कर ली थी।जस्टिस संजीव कुमार की पीठ ने अपने 18-पृष्ठ के फैसले के मुख्य भाग में यह टिप्पणी की,"...अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है कि अपीलकर्ता ने मृतक को किसी भी तरह से परेशान किया और घटना से ठीक पहले उसने कोई ऐसा...
किसी संस्था या ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने से पहले कारण और सामग्री के साथ नोटिस देना जरूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी संस्था या ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने से पहले केवल शो कॉज नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस नोटिस में ब्लैकलिस्टिंग के लिए आवश्यक कारण और संबंधित सामग्री (grounds and materials) का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अभ्धेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि“ब्लैकलिस्टिंग आदेश से पहले शो कॉज नोटिस देना जरूरी शर्त है, लेकिन इसके साथ ही उस नोटिस में प्रस्तावित कार्रवाई के आधार और सामग्री का उल्लेख भी अनिवार्य है।”मामले में याचिकाकर्ता ने...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बस्ती के SP से मांगा जवाब, कानून की समझ पर उठाए सवाल
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को बस्ती के पुलिस अधीक्षक (SP) डॉ. यशवीर सिंह के हलफनामे पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा। एसपी ने अपने हलफनामे में कहा था कि कुछ अग्रिम जमानत (anticipatory bail) याचिकाएं मजिस्ट्रेट अदालत में लंबित हैं, जिस पर कोर्ट ने तीखी टिप्पणी की।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने कहा,“यदि किसी जिले के एसपी को यह नहीं पता कि मजिस्ट्रेट के पास अग्रिम जमानत पर सुनवाई का अधिकार नहीं है, तो उनके कानून के बुनियादी ज्ञान पर सवाल उठता है।”कोर्ट ने...
Land Acquisition Act, 1894 | रेफरेंस कोर्ट कलेक्टर का अवार्ड रद्द नहीं कर सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के तहत रेफरेंस कोर्ट को कलेक्टर द्वारा दिए गए मुआवजे का अवार्ड रद्द करने या कलेक्टर द्वारा नए सिरे से निर्धारण किए जाने का आदेश देने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा केवल एक अपीलीय कोर्ट ही कर सकती है।यह देखते हुए कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 अपने आप में एक पूर्ण संहिता है, जस्टिस संदीप जैन ने कहा,“भूमि अधिग्रहण अधिनियम में केवल यह उल्लेख है कि यदि भूमि मालिक कलेक्टर द्वारा दिए गए मुआवजे की राशि से संतुष्ट नहीं है तो वह...
क्या संभावित आरोपी को सुने जाने का अधिकार है? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR का निर्देश देने वाले आदेश पर लगाई रोक
एक अहम घटनाक्रम में इलाहाबाद हाई कोर्ट (लखनऊ बेंच) ने BJP कार्यकर्ता की याचिका पर अपना अंतिम आदेश रोक दिया। इस याचिका में लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई थी। यह मांग उन दावों के संबंध में की गई कि राहुल गांधी एक ब्रिटिश नागरिक हैं।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने उस फैसले के अमल को प्रभावी रूप से टाल दिया, जो शुक्रवार को ओपन कोर्ट में पहले ही सुनाया जा चुका था। उस फैसले में गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया गया। बेंच ने इस आदेश को...
राजस्थान हाईकोर्ट ने कथित अवैध नियुक्ति के बावजूद बहाली सही ठहराई, बताया यह कारण
राजस्थान हाईकोर्ट ने दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी की बहाली को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की। इस कर्मचारी पर आरोप था कि उसकी नियुक्ति अवैध रूप से की गई। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि संबंधित कर्मचारी की सेवा समाप्त करने के लिए औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत अनिवार्य प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक था, जिसका पालन नहीं किया गया।जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण की पीठ ग्राम पंचायत थाटेड के सरपंच द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में लेबर कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें प्रतिवादी...
ब्रिटिश नागरिकता विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का दिया आदेश
एक अहम आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने आज लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने और जांच करने का निर्देश दिया। यह आदेश एक भारतीय जनता पार्टी (BJP) कार्यकर्ता की याचिका के संबंध में दिया गया, जिसमें राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता का आरोप लगाया गया।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने इस तरह लखनऊ कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने से इनकार किया गया था।गौरतलब है कि इस साल जनवरी में लखनऊ की ACJM अदालत ने गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय...
पिता द्वारा बच्चे की कस्टडी ज़बरदस्ती लेना 'गैर-कानूनी हिरासत' नहीं, जब तक कि यह कोर्ट के आदेश का उल्लंघन न हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि एक पिता, जो एक हिंदू नाबालिग का स्वाभाविक अभिभावक होता है, पर यह आरोप नहीं लगाया जा सकता कि उसने किसी बच्चे को 'गैर-कानूनी हिरासत' में रखा है, भले ही उसने बच्चे की कस्टडी माँ से ज़बरदस्ती ले ली हो; बशर्ते कि उसका यह काम कोर्ट के किसी आदेश का उल्लंघन न हो।जस्टिस अनिल कुमार-X की बेंच ने इस आधार पर माँ की बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह सुनवाई योग्य नहीं है। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसके अलग रह रहे पति (प्रतिवादी)...
हस्तलेख विशेषज्ञ की रिपोर्ट का साक्ष्य मूल्य हर मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करेगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि हस्तलेख विशेषज्ञ की रिपोर्ट का साक्ष्य मूल्य हर मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करता है।जस्टिस विक्रम डी. चौहान ने फैसला दिया:“अनुशासनात्मक कार्यवाही में, जिस सवाल की जांच की जानी है, उसका मकसद यह पता लगाना होता है कि क्या कर्मचारी किसी ऐसे कदाचार का दोषी है, जिसके लिए उसे दंडित किया जाना चाहिए। सबूत का पैमाना संभावनाओं की प्रबलता पर आधारित होता है। यह हर मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करेगा, जो कर्मचारी को दंडित करने के लिए पर्याप्त हों।...
जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम के तहत जारी जन्म प्रमाण पत्र तब तक मान्य है, जब तक उसे रद्द न कर दिया जाए या उसमें जालसाज़ी साबित न हो जाए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के तहत जारी जन्म प्रमाण पत्र तब तक वैध और मान्य है, जब तक उसे रद्द न कर दिया जाए या उसमें जालसाज़ी साबित न हो जाए।कक्षा VI में दाखिले से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने कहा:“जब तक कोई दस्तावेज़, जो किसी वैधानिक प्रावधान के तहत जारी किया गया, या तो रद्द न कर दिया जाए या उसमें जालसाज़ी का कोई तत्व साबित न हो जाए, तब तक उसका संबंधित अधिकारियों पर बाध्यकारी प्रभाव रहेगा। संबंधित अधिकारियों के अधिकार...
UP Gangsters Act | 'कानून को छोटा समझते हैं': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनिवार्य संयुक्त बैठक में शामिल न होने पर DM से स्पष्टीकरण मांगा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में मिर्ज़ापुर के ज़िलाधिकारी (DM) पवन कुमार गंगवार को यूपी गैंगस्टर नियम, 2021 के तहत 'गैंग चार्ट' को मंज़ूरी देने के लिए ज़रूरी अनिवार्य संयुक्त बैठक में शामिल न होने पर कड़ी फटकार लगाई।उनकी अनुपस्थिति का गंभीर संज्ञान लेते हुए जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की पीठ ने टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया, अधिकारी "कानून को छोटा समझते हैं। इसकी बिल्कुल भी परवाह नहीं करते, जैसा कि अक्सर पढ़े-लिखे आम लोगों के साथ होता है।"कोर्ट ने अब इस मामले पर उनसे व्यक्तिगत...
'युवाओं का दूसरों पर धर्म थोपना परेशान करने वाला चलन है': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किया धर्मांतरण विरोधी FIR में स्कूली छात्रा को राहत देने से इनकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कक्षा 12 की दो छात्राओं के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इनकार किया। इन छात्राओं पर यूपी धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत आरोप लगाया गया कि उन्होंने अपनी सहपाठी को बुर्का पहनने के लिए मजबूर किया और उसे इस्लाम में धर्मांतरित करने की कोशिश की।अपने 11-पृष्ठ के आदेश में जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने युवाओं द्वारा दूसरों पर अपना धर्म/मान्यता 'थोपने' के 'परेशान करने वाले चलन' पर भी संज्ञान लिया। यह एक ऐसी प्रवृत्ति है, जिसे यूपी गैर-कानूनी धर्मांतरण निषेध...
Advocates Act | इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला: सिर्फ़ रजिस्टर्ड वकील ही कर सकते हैं वकालत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ़ तौर पर कहा कि कोई भी व्यक्ति, भले ही उसके पास पावर ऑफ़ अटॉर्नी हो, एडवोकेट्स एक्ट, 1961 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए मुक़दमे लड़ने वालों की ओर से और उनकी तरफ़ से एक वकील या अटॉर्नी के तौर पर अधिकार के तौर पर पेश होकर बहस नहीं कर सकता।एडवोकेट्स एक्ट 1961 की धारा 29 और 33 का ज़िक्र करते हुए जस्टिस विनोद दिवाकर की बेंच ने साफ़ तौर पर कहा कि सिर्फ़ "रजिस्टर्ड वकील" ही किसी दूसरे व्यक्ति की ओर से कोर्ट के सामने पेश होकर बहस कर सकते हैं।बेंच ने आगे कहा कि हालांकि कोई भी...
'अपनी पसंद या जाति' का जांच अधिकारी मांगना अस्वीकार्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति यह मांग नहीं कर सकता कि किसी मामले की जांच उसके मनपसंद अधिकारी द्वारा या किसी विशेष जाति/समुदाय के अधिकारी द्वारा ही की जाए। कोर्ट ने कहा कि ऐसी मांगें कानून के खिलाफ हैं।जस्टिस अब्दुल शाहिद की पीठ ने SC/ST Act से जुड़े मामले में यह टिप्पणी करते हुए आपराधिक कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाई। इस मामले में शिकायतकर्ता ने पुनः जांच की मांग करते हुए विशेष रूप से अनुसूचित जाति के पुलिस अधिकारी से जांच कराने की मांग की थी।कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि...
फर्जी दूतावास चलाने के आरोपी को राहत, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी जमानत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में गाजियाबाद में फर्जी दूतावास चलाने और खुद को 'रॉयल एडवाइजर' (शाही सलाहकार) बताते हुए 'कॉन्सुलर' कार्यालय संचालित करने के आरोपी 49 वर्षीय व्यक्ति को जमानत दी।जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की सिंगल बेंच ने आरोपी हर्षवर्धन जैन को यह राहत प्रदान की। जैन को उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने पिछले वर्ष जुलाई में गिरफ्तार किया था।अभियोजन के अनुसार, आरोपी ने खुद को वेस्ट आर्कटिका नामक गैर-मौजूद देश का राजनयिक बताकर कथित कांसुलेट संचालित किया और विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से...
वकील अपने क्लाइंट्स के हितों को आगे बढ़ाने के लिए PIL याचिकाकर्ता नहीं बन सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में यह टिप्पणी की कि कोई भी वकील, जिसके पास उसके क्लाइंट्स अपनी शिकायतों के निवारण के लिए आते हैं, उसे खुद याचिकाकर्ता बनकर अपने क्लाइंट्स के हितों को आगे बढ़ाने वाली जनहित याचिका (PIL) दायर करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।यह देखते हुए कि ऐसा आचरण पेशेवर कदाचार माना जा सकता है, चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने एक वकील द्वारा दायर की गई PIL याचिका वापस लिए जाने के आधार पर खारिज की। इस याचिका में वकील ने प्रतिवादियों को यह निर्देश देने की...
बिजली तक पहुंच अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिजली कनेक्शन चाहने वाली बहू की मदद की
इस बात पर ज़ोर देते हुए कि बिजली कनेक्शन पाना भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत मौलिक अधिकार है, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में राज्य के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे वैवाहिक विवाद के बीच एक नई घरेलू बिजली कनेक्शन के लिए एक बहू द्वारा दायर आवेदन पर कार्रवाई करें।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत प्रीति शर्मा द्वारा दायर एक रिट याचिका पर यह आदेश पारित किया।संक्षेप में मामलायाचिकाकर्ता (शर्मा) प्रतिवादी नंबर 7 की...
परेशान करने वाला चलन, जांच अधिकारी दबाव में काम कर रहे हैं: हाईकोर्ट ने 'यूपी गैर-कानूनी धर्मांतरण कानून' के तहत 'झूठी' FIRs की कड़ी आलोचना की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य में 'उत्तर प्रदेश गैर-कानूनी धर्मांतरण निषेध अधिनियम, 2021' के तहत झूठी FIRs दर्ज किए जाने के "परेशान करने वाले चलन" की कड़ी निंदा की।यह देखते हुए कि 2021 के कानून के तहत FIRs "धड़ाधड़" दर्ज की जा रही हैं, जो बाद में झूठी साबित होती हैं, कोर्ट ने राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को निर्देश दिया कि वह एक व्यक्तिगत हलफनामा दायर कर बताएं कि ऐसे मामलों में क्या कार्रवाई की जा रही है।जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने ये टिप्पणियां...
बेटी की शादी 'पवित्र दायित्व': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोषी को दी 7 दिन की अस्थायी जमानत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि बेटी का विवाह हिंदू जीवन पद्धति में एक पवित्र दायित्व है। इसी आधार पर अदालत ने एक दोषी व्यक्ति को अपनी बेटी की शादी में शामिल होने के लिए 7 दिन की अस्थायी जमानत प्रदान की।जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्र की पीठ ने यह आदेश देश राज नामक व्यक्ति की याचिका पर दिया, जिसने अपनी सजा के खिलाफ अपील लंबित होने के दौरान यह राहत मांगी थी।मामले में याचिकाकर्ता को 2023 में लखनऊ सेशन कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304 के तहत दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष...
गवाह बुलाने के लिए शिकायतकर्ता भी दे सकता है आवेदन: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी की आपत्ति खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य मामलों में भी शिकायतकर्ता CrPC की धारा 311 (BNSS की धारा 348) के तहत अदालत से गवाह बुलाने या दस्तावेज प्रस्तुत कराने की मांग कर सकता है। इसके लिए लोक अभियोजक द्वारा आवेदन देना अनिवार्य नहीं है।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने यह फैसला देते हुए आरोपी की याचिका खारिज की, जिसमें ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी।मामला लखनऊ सेशन कोर्ट में चल रहे हत्या के मुकदमे से जुड़ा है। यहां शिकायतकर्ता ने अभियोजन साक्ष्य बंद होने और आरोपी का...


















