इलाहाबाद हाईकोट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन अधिनियम के तहत शिकायत में रिलायंस बायो एनर्जी को दी अंतरिम राहत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021' के तहत दायर एक शिकायत मामले में रिलायंस बायो एनर्जी को अंतरिम राहत दी।रिलायंस बायो एनर्जी, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की एक सहायक कंपनी है, जो कृषि अपशिष्ट (पराली) का उपयोग करके पूरे भारत में कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया में है।एक फ्लाइंग स्क्वाड द्वारा निरीक्षण किए जाने के बाद रामपुर, जिला-हापुड़ के चिताउली गांव में स्थित एक यूनिट के संबंध में अधिनियम की धारा...
BNSS और NDPS मामलों में संज्ञान से पहले आरोपी की सुनवाई जरूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) लागू होने के बाद NDPS Act के तहत दायर शिकायतों में विशेष अदालत आरोपी को सुने बिना संज्ञान नहीं ले सकती।जस्टिस बृजराज सिंह की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए लखनऊ स्थित NDPS विशेष अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें आरोपी को सुनवाई का अवसर दिए बिना संज्ञान लिया गया था।मामले में आरोपी की ओर से दलील दी गई कि 1 जुलाई 2024 से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता लागू होने के बाद धारा 223(1) के पहले प्रावधान के तहत...
“कोई खुद को भगवान न बताए” बयान पर FIR; इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गौतम खट्टर को दी राहत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूट्यूबर गौतम खट्टर को राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर में गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा को 14 जुलाई तक बढ़ा दिया है। गौतम खट्टर पर 'श्री करौली शंकर महादेव बाबा' उर्फ 'करौली सरकार' के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां करने का आरोप है।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए शिकायतकर्ता पक्ष को जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया। अब मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी।दरअसल, गौतम खट्टर ने कानपुर निवासी...
'इसके अस्तित्व पर ही सवाल उठाता है': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NHRC को हिरासत में हुई मौत का केस सिर्फ़ पुलिस के बयान पर बंद करने के लिए फटकारा
यह देखते हुए कि एक दिव्यांग व्यक्ति की हिरासत में हुई मौत का 16 साल पुराना मामला गंभीर "संस्थागत विफलताओं" को उजागर करता है, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और UP पुलिस को फटकारा और मामले की सच्चाई सामने लाने में हाईकोर्ट की अपनी प्रक्रियागत देरी को भी स्वीकार किया।अपने 16-पृष्ठों के आदेश में कोर्ट ने NHRC की कड़ी आलोचना की कि उसने बिना किसी स्वतंत्र जाँच के, पुलिस के बयान को ही अंतिम सत्य मानकर 2009 के इस मामले को बंद कर दिया।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस...
आरोपी के रिश्तेदारों को पुलिस द्वारा प्रताड़ित करना 'औपनिवेशिक प्रथा', यह अनुच्छेद 21 का उल्लंघन: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि पुलिस द्वारा किसी आरोपी के रिश्तेदारों को प्रताड़ित करना या परेशान करना एक 'औपनिवेशिक प्रथा' है, जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करती है।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की पीठ ने कहा कि आज के समय में पुलिस के पास आरोपी का पता लगाने और उसे न्याय के कटघरे में लाने के लिए वैज्ञानिक तरीके मौजूद हैं, न कि उसके रिश्तेदारों को डराना-धमकाना।इस खंडपीठ ने ये टिप्पणियां एक दंपति (मुनिता देवी...
एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास पर यूपी सरकार को हाईकोर्ट की फटकार, शीर्ष अधिकारियों को किया तलब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास, मुआवजे और दीर्घकालिक सहायता को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार इस गंभीर मुद्दे को हल्के और लापरवाह तरीके से ले रही है और अब तक कोई ठोस पुनर्वास नीति तैयार नहीं की गई।जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि एसिड अटैक पीड़ितों के लिए प्रभावी और समयबद्ध नीति बनाने के लिए सरकार की ओर से उच्च प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस प्रयास दिखाई नहीं देता।अदालत ने इस मामले में...
चाइनीज मांझे पर सख्त कानून लाएगी यूपी सरकार, पीड़ितों को मुआवजा देने पर भी विचार: हाईकोर्ट में दी जानकारी
उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया कि जानलेवा चाइनीज मांझा के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए जल्द ही एक सख्त कानून लाया जाएगा। सरकार ने यह भी कहा कि इस प्रस्तावित कानून में पीड़ितों को मुआवजा देने का प्रावधान भी शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ल की खंडपीठ को बताया गया कि प्रस्तावित कानून का नाम उत्तर प्रदेश घातक मांझा (निर्माण, बिक्री और उपयोग निषेध) अधिनियम रखा जा सकता है।सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि फिलहाल कानून का...
गंगा में नाव पर इफ्तार विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाकी 6 आरोपियों को भी दी जमानत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी में गंगा नदी में नाव पर इफ्तार पार्टी आयोजित करने, कथित तौर पर मांसाहारी भोजन करने और उसका बचा हुआ हिस्सा नदी में फेंकने के आरोप में गिरफ्तार बाकी 6 मुस्लिम आरोपियों को भी जमानत दी।जस्टिस राजीव लोचन शुक्ल की पीठ ने यह राहत देते हुए कहा कि इसी FIR में शामिल 8 अन्य आरोपियों को पहले ही जमानत दी जा चुकी है।गौरतलब है कि 15 मई को जारी अलग-अलग आदेशों में जस्टिस राजीव लोचन शुक्ल ने 5 आरोपियों और जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने 3 आरोपियों को जमानत दी थी। सोमवार के आदेश के बाद...
S.133 CrPC | उपद्रव हटाने की कार्यवाही में पेश किया गया साक्ष्य विश्वसनीय होना चाहिए, न कि निर्णायक प्रकृति का: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि CrPC की धारा 133 के तहत परेशानी हटाने की कार्यवाही संक्षिप्त प्रकृति की होती है और इसमें कथित परेशानी से जुड़े आवेदन पर फैसला करने के लिए "कोई भी भरोसेमंद सबूत" चाहिए होता है, न कि निर्णायक सबूत।जस्टिस डॉ. अजय कुमार-II ने फैसला दिया,"CrPC की धारा 133 के तहत कार्यवाही संक्षिप्त प्रकृति की होती है। इसका मकसद सार्वजनिक शांति और अमन को होने वाले आसन्न खतरे के मामलों से निपटना होता है। इसका इस्तेमाल—या बल्कि दुरुपयोग—किसी संपत्ति के मालिक के कीमती अधिकार को खत्म...
हाईकोर्ट अपनी पुनरीक्षण अधिकारिता में भरण-पोषण की राशि बढ़ा या घटा नहीं सकता, इसका उपाय BNSS की धारा 146 के तहत: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह अपनी पुनरीक्षण अधिकारिता के तहत किसी याचिका पर सुनवाई करते समय भरण-पोषण की राशि को सीधे तौर पर बढ़ा या घटा नहीं सकता।जस्टिस अचल सचदेव की पीठ ने टिप्पणी की कि बदली हुई परिस्थितियों के कारण भरण-पोषण भत्ते में संशोधन या बदलाव का उचित उपाय केवल BNSS की धारा 146 (CrPC की धारा 127) के तहत यह उपाय उसी अदालत के समक्ष किया जाना चाहिए जिसने मूल आदेश पारित किया था।अदालत ने टिप्पणी की कि पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते समय वह साक्ष्यों का पुनर्मूल्यांकन नहीं कर सकती या...
यूपी किराया नियंत्रण अधिनियम के तहत सुरक्षा का दावा करने वाले किरायेदार को कानून की प्रयोज्यता साबित करनी होगी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी किरायेदार को उत्तर प्रदेश शहरी भवन (किरायेदारी, किराया और बेदखली का विनियमन) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत सुरक्षा पाने के लिए, उसे इस कानून की प्रयोज्यता (लागू होने) को साबित करना होगा।जस्टिस डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने फैसला सुनाया,“जहां कोई किरायेदार यूपी अधिनियम संख्या 13, 1972 के प्रावधानों के तहत सुरक्षा चाहता है तो यह साबित करने का बोझ उस पक्ष पर होता है, जो अधिनियम की प्रयोज्यता का दावा कर रहा है। उसे उन बुनियादी तथ्यों को स्थापित करना...
पूर्व और वर्तमान विधायकों को पेंशन-भत्ते देने वाला कानून वैध: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की चुनौती
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में उत्तर प्रदेश राज्य विधानमंडल (सदस्यों के वेतन, भत्ते और पेंशन) अधिनियम, 1980 की संवैधानिक वैधता बरकरार रखी। अदालत ने कहा कि वर्तमान और पूर्व विधायकों तथा विधान परिषद सदस्यों को पेंशन, भत्ते और अन्य सुविधाएं देने पर संविधान में कोई रोक नहीं है।जस्टिस राजन राय और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने जनहित याचिका खारिज करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसी नीतिगत बातें विधायिका के विवेक और निर्णय के दायरे में आती हैं और अदालत को केवल स्पष्ट...
वाराणसी इफ्तार विवाद | 'गंगा में मांसाहारी भोजन के अवशेष फेंकने से हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं': इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते 8 मुस्लिम पुरुषों की ज़मानत अर्ज़ियां मंज़ूर कीं। इन पर इफ्तार पार्टी आयोजित करने, गंगा नदी (वाराणसी में) में नाव पर मांसाहारी भोजन करने और बचा हुआ कचरा नदी में फेंकने का आरोप है।उसी दिन (15 मई) जारी अलग-अलग आदेशों में जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला ने 5 आरोपियों को ज़मानत दी, जबकि जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने 3 आरोपियों को ज़मानत दी। इसके साथ ही इस मामले में कुल 14 आरोपियों में से 8 को अब ज़मानत मिल चुकी है।उल्लेखनीय है कि इस मामले में 14 आरोपियों में से 8 को अब...
राहुल गांधी के खिलाफ याचिकाएं दायर करने वाले BJP कार्यकर्ता की Z+ सुरक्षा मांग पर 3 हफ्ते में फैसला करे केंद्र: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि कर्नाटक के भारतीय जनता पार्टी (BJP) कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा मांगी गई अखिल भारतीय स्तर की Z+ सुरक्षा पर तीन सप्ताह के भीतर कारणयुक्त फैसला लिया जाए।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अभदेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह आदेश शिशिर की याचिका का निस्तारण करते हुए दिया।शिशिर ने अपनी याचिका में मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाकर अखिल भारतीय स्तर पर Z+ सुरक्षा देने की मांग की थी। फिलहाल उन्हें सीएपीएफ सुरक्षा अधिकारी की चौबीसों घंटे सुरक्षा...
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ अवमानना याचिका खारिज, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- जमानत रद्द कराने का रास्ता खुला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ दायर अवमानना याचिका खारिज की। याचिका में आरोप लगाया गया कि उन्होंने POCSO मामले में अदालत द्वारा लगाई गई जमानत शर्तों का उल्लंघन किया।जस्टिस दिनेश पाठक की पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया अदालत की अवमानना का मामला नहीं बनता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जमानत की शर्तों का उल्लंघन हो रहा है, तो संबंधित पक्ष जमानत निरस्तीकरण याचिका दायर कर सकता है।यह अवमानना याचिका आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने दायर की थी।...
बालिग होने के बाद मुस्लिम पर्सनल लॉ विवाह की अनुमति दे सकता है, लिव-इन संबंध की नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ में भले ही बालिग होने के बाद विवाह को मान्यता दी गई हो लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि विवाह के बिना लिव-इन संबंध को भी कानूनी स्वीकृति मिल जाती है।जस्टिस गरिमा प्रसाद ने कहा,“यदि मुस्लिम पर्सनल लॉ के कुछ मत बालिग होने पर विवाह को मान्यता देते हैं तो वह केवल विवाह से संबंधित है विवाह के बाहर लिव-इन व्यवस्था से नहीं।”बता दें, यह मामला अंतरधार्मिक जोड़े की याचिका से जुड़ा था। याचिका दायर करने वाली महिला 20 वर्षीय मुस्लिम थी, जबकि पुरुष...
राहुल गांधी के खिलाफ कथित आय से अधिक संपत्ति शिकायत पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, CBI और ED से मांगी प्रगति रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ कथित आय से अधिक संपत्ति की शिकायत पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को आरोपों का सत्यापन कर प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।यह आदेश जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस जफीर अहमद की खंडपीठ ने BJP कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।इन-चैंबर सुनवाई के दौरान CBI की ओर से अदालत को बताया गया कि एजेंसी को शिकायत...
21 साल से कम उम्र के लड़के के साथ Live-in Relationship को संरक्षण नहीं दे सकता कोर्ट: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि live-in relationship में किसी एक साथी की उम्र वैधानिक विवाह आयु से कम है, तो अदालत संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत ऐसे संबंध को संरक्षण नहीं दे सकती। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के तहत सुरक्षा मिलती रहेगी।जस्टिस गरिमा प्रसाद की पीठ एक 20 वर्षीय मुस्लिम महिला और 19 वर्षीय हिंदू युवक की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। दोनों ने दावा किया था कि वे live-in relationship में हैं और महिला के परिवार से उन्हें खतरा...
S.233 CrPC | आरोपी को बचाव पक्ष के गवाहों को बुलाने का अधिकार, कोर्ट का दखल सीमित: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि कोर्ट आमतौर पर CrPC की धारा 233 के तहत आरोपी के बचाव पक्ष के गवाहों को पेश करने के अधिकार में दखल नहीं दे सकती। कोर्ट ने कहा कि अगर कोर्ट आरोपी द्वारा पेश किए जाने वाले गवाहों को समन जारी करने से मना करती है तो वह ऐसा केवल लिखित में कारण बताते हुए और यह देखते हुए कर सकती है कि ऐसे समन से न्याय में देरी होगी या न्याय का मकसद ही खत्म हो जाएगा।जस्टिस विवेक कुमार सिंह ने कहा,“CrPC की धारा 311 के तहत, शक्ति केवल कोर्ट के पास होती है। CrPC की धारा 233 के तहत अधिकार...
मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना जुआ मामले की जांच नहीं कर सकती पुलिस : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि सार्वजनिक स्थान या सड़क पर जुआ खेलने से जुड़ा Public Gambling Act, 1867 की धारा 13 के तहत अपराध गैर-संज्ञेय (Non-Cognizable) है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना पुलिस जांच शुरू नहीं कर सकती और बिना वारंट गिरफ्तारी भी नहीं की जा सकती।जस्टिस संजय कुमार पचौरी की एकलपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए एक आरोपी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही और समन आदेश को रद्द कर दिया।मामला मिर्जापुर का था, जहां पुलिस ने चार लोगों को ताश के पत्तों...



















