महापुरुषों को उनके कामों के लिए नाम से याद किया जाता है, न कि जाति के लिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महाराजा सुहेलदेव से जुड़ी जनहित याचिका खारिज की
Amir Ahmad
12 Feb 2025 10:08 AM

महापुरुषों को उनके कामों के लिए नाम से याद किया जाता है, चाहे उनकी जाति कुछ भी हो, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चित्तौड़गढ़ पर्यटक स्थल प्रतिमा/मूर्ति (बहराइच) के शिलान्यास पत्थर पर उत्कीर्ण श्रावस्ती नरेश सुशील देव भर नाम से क्षत्रिय शब्द हटाकर उसकी जगह भर शब्द लिखने की मांग करने वाली जनहित याचिका खारिज करते हुए उक्त टिप्पणी की।
जस्टिस अताउ रहमान मसूदी और जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने कहा कि हालांकि वह जनहित याचिका याचिकाकर्ता की भावनाओं का सम्मान करती है। फिर भी वह वर्तमान रिट याचिका में उठाए गए अकादमिक प्रश्न जैसे मुद्दे पर विचार नहीं कर सकती।
मूलतः याचिकाकर्ता (राजभर एकता कल्याण समिति के अध्यक्ष पवन कुमार राजभर) ने अन्य बातों के साथ-साथ प्रतिवादियों को यह निर्देश देने की मांग की कि वे किसी भी स्थान पर हमेशा श्रावस्ती नरेश सुहैल देव भर नाम का प्रयोग करें। चाहे इसका प्रयोग गांव और परगना मसीहाबाद, तहसील- बहराइच, चित्तौड़गढ़ पर्यटन स्थल पर किया जाए। हालांकि पीठ ने जनहित याचिका यह कहते हुए खारिज की कि जनहित याचिका सहित रिट कार्यवाही को न्यायालय केवल शैक्षणिक हित के प्रश्नों से निपटने के लिए स्वीकार नहीं कर सकता।
खंडपीठ ने आगे टिप्पणी की,
"याचिकाकर्ता स्वयं जाति-आधारित संगठन है, जिसने कानूनी वैधता वाले किसी भी स्वीकार्य साक्ष्य के आधार पर राजभर समुदाय से संबंधित महाराजा सुहैल देव राजभर की उत्पत्ति का पता नहीं लगाया है।"
इसके अलावा न्यायालय ने इस बात पर भी जोर दिया कि सभी धर्मों/जातियों में ऐसे महापुरुषों ने जन्म लिया, जो अपनी उपलब्धियों के लिए जाने जाते हैं, चाहे वह आध्यात्मिक हो, बहादुरी हो, साहित्यिक हो या विज्ञान हो और उन्हें उनके नाम से जाना जाता है न कि उनकी जाति से।
परिणामस्वरूप, जनहित याचिका में केवल शैक्षणिक हित का प्रश्न शामिल था, इसलिए न्यायालय ने इस पर विचार करने से इनकार किया।
केस टाइटल- राजभर एकता कल्याण समिति के माध्यम से। इसके अध्यक्ष पवन कुमार राजभर बनाम उत्तर प्रदेश राज्य। इसके प्रधान सचिव गृह विभाग लखनऊ और 3 अन्य 2025 लाइव लॉ (एबी) 61