अवमानना याचिका का मतलब दबाव डालना या परेशान करना नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 50 हजार का जुर्माना लगाया

Amir Ahmad

11 Feb 2025 8:38 AM

  • अवमानना याचिका का मतलब दबाव डालना या परेशान करना नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 50 हजार का जुर्माना लगाया

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवमानना आवेदक पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया, जिसमें आरोप लगाया गया कि गांव सभा ने रिट कोर्ट के निर्देशों के अनुसार अतिक्रमण नहीं हटाया।

    आवेदक ने दलील दी कि लेखपाल ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि विचाराधीन भूखंड जल निकासी के लिए हैं, लेकिन गलत तरीके से दर्ज किए गए और तदनुसार उन्होंने रिकॉर्ड में सुधार की सिफारिश की। इस रिपोर्ट के आधार पर यह दलील दी गई कि विपक्षी दलों ने हाईकोर्ट के आदेश और लेखपाल की सिफारिशों के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया।

    अदालत ने पाया कि आवेदक के पास अतिक्रमण हटाने के लिए अन्य उपाय थे। यह पाया गया कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 38 के तहत राजस्व प्रविष्टियों को सही करने के बाद ही अतिक्रमण हटाया जा सकता है।

    यह देखते हुए कि ऐसे मामलों में न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत अवमानना कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती जस्टिस सलिल कुमार राय ने कहा,

    "अवमानना आवेदन दबाव बनाने और भूखंडों पर कब्जा करने वाले व्यक्तियों को परेशान करने का साधन प्रतीत होता है। यह आवेदन न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।”

    इसके अनुसार न्यायालय ने अवमानना आवेदन को भूमि राजस्व के बकाया के रूप में वसूलने योग्य 50,000 रुपये की लागत के साथ खारिज कर दिया।

    केस टाइटल: शिव शंकर बनाम रवींद्र कुमार मंदर, जिला कलेक्टर और 2 अन्य [अवमानना आवेदन (सिविल) संख्या - 491/2025]

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