राज�थान हाईकोट

यदि यौन शोषण का इरादा होता तो माता-पिता को क्यों बुलाता”: आसाराम की राजस्थान हाइकोर्ट में दलील
यदि यौन शोषण का इरादा होता तो माता-पिता को क्यों बुलाता”: आसाराम की राजस्थान हाइकोर्ट में दलील

कथित दुष्कर्म मामले में स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम की ओर से राजस्थान हाइकोर्ट में विस्तृत दलीलें पेश की गईं।जस्टिस सुदेश बंसल और जस्टिस अनिल कुमार उपमन की खंडपीठ के समक्ष बचाव पक्ष ने अभियोजन की कहानी को असंभाव्य, साक्ष्यहीन और गढ़ी हुई साजिश करार दिया।आसाराम की ओर से एडवोकेट ने तर्क दिया कि अभियोजन का घटनाक्रम सामान्य मानवीय व्यवहार की कसौटी पर खरा नहीं उतरता।उन्होंने कहा कि यदि किसी का उद्देश्य यौन शोषण होता तो वह कथित पीड़िता के माता-पिता को साथ आने के लिए क्यों कहता।बचाव पक्ष ने सवाल उठाया,“अगर...

निजी संस्थान में सेवा समाप्ति के विरुद्ध रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं, सार्वजनिक तत्व का अभाव: राजस्थान हाइकोर्ट
निजी संस्थान में सेवा समाप्ति के विरुद्ध रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं, सार्वजनिक तत्व का अभाव: राजस्थान हाइकोर्ट

राजस्थान हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि किसी निजी संस्थान द्वारा की गई सेवा समाप्ति के विरुद्ध रिट याचिका तब तक सुनवाई योग्य नहीं है, जब तक मामले में सार्वजनिक विधि का तत्व स्पष्ट रूप से विद्यमान न हो।अदालत ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मैनेजमेंट रिसर्च के एक कर्मचारी द्वारा दायर याचिका खारिज की।जस्टिस प्रवीर भटनागर की एकल पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता और संस्थान के बीच संबंध निजी सेवा अनुबंध पर आधारित है। चूंकि विवाद सेवा संबंधी है और किसी वैधानिक प्रावधान द्वारा शासित नहीं है। इसलिए यह...

राजस्थान हाईकोर्ट ने कॉलेज NOC को अच्छे इंस्पेक्शन के बावजूद दबाए रखने पर राज्य की आलोचना की, समय पर सर्विस का अधिकार पक्का किया
राजस्थान हाईकोर्ट ने कॉलेज NOC को अच्छे इंस्पेक्शन के बावजूद दबाए रखने पर राज्य की आलोचना की, 'समय पर सर्विस का अधिकार' पक्का किया

इंस्पेक्शन के 8 महीने बाद भी NOC जारी करने में “बहुत ज़्यादा इनएक्टिविटी” के लिए राज्य की आलोचना करते हुए राजस्थान हाई कोर्ट ने कहा कि रूटीन क्लियरेंस को प्रोसेस करने में इस तरह की चूक से पब्लिक इंटरेस्ट की अनदेखी और पब्लिक ड्यूटी निभाने में ढिलाई का पता चलता है।इस तरह की इनएक्टिविटी पर नाराज़गी और हैरानी जताते हुए जस्टिस संजीत पुरोहित की बेंच ने कहा कि इस तरह की गलतियों की वजह से एंटिटीज़ को कोर्ट में रिट ऑफ़ मैंडेमस के लिए जाना पड़ा, जिससे लिटिगेशन का एक खतरनाक चक्र चलता रहा, जिसमें...

पति का पत्नी को छोड़ना और भरण-पोषण न देना, शादी टूटने का विरोध करने का अधिकार खो देता है: राजस्थान हाईकोर्ट
पति का पत्नी को छोड़ना और भरण-पोषण न देना, शादी टूटने का विरोध करने का अधिकार खो देता है: राजस्थान हाईकोर्ट

शादी टूटने की इजाज़त देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने माना कि पति का कानूनी कार्रवाई को पूरी तरह से छोड़ना, कानूनी निर्देशों का जानबूझकर उल्लंघन करना और कोर्ट के आदेश के अनुसार भरण-पोषण का लगातार भुगतान न करना, लगातार मानसिक क्रूरता है, जिससे पत्नी के लिए पति के साथ रहने की उम्मीद करना नामुमकिन हो जाता है।जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने कहा कि पति द्वारा जानबूझकर अपनी शादी की ज़िम्मेदारियों के साथ-साथ कानूनी ज़िम्मेदारियों को छोड़ना, मामले का विरोध करने के उसके...

बिना कारण कैदी को 800–1000 किमी दूर जेल में भेजना असंवैधानिक: राजस्थान हाइकोर्ट ने आदेश किया रद्द
बिना कारण कैदी को 800–1000 किमी दूर जेल में भेजना असंवैधानिक: राजस्थान हाइकोर्ट ने आदेश किया रद्द

राजस्थान हाइकोर्ट ने एक विचाराधीन बंदी को उसके गृह नगर से 800–1000 किलोमीटर दूर स्थित जेल में स्थानांतरित करने के आदेश को निरस्त किया। अदालत ने कहा कि बिना किसी ठोस कारण के किया गया ऐसा स्थानांतरण बंदी के परिवार पर अनुचित और अत्यधिक बोझ डालता है।जस्टिस फरजंद अली की एकल पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता के परिवार को इतनी लंबी दूरी तय कर मिलने के लिए बाध्य करना, जबकि स्थानांतरण के लिए कोई सुरक्षा या प्रशासनिक आवश्यकता दर्शाई नहीं गई, पूर्णतः अव्यावहारिक और अन्यायपूर्ण है। इसलिए यह आदेश विधि की दृष्टि में...

पति के वेतन का विवरण व्यक्तिगत सूचना, पत्नी की RTI याचिका खारिज: राजस्थान हाइकोर्ट
पति के वेतन का विवरण व्यक्तिगत सूचना, पत्नी की RTI याचिका खारिज: राजस्थान हाइकोर्ट

राजस्थान हाइकोर्ट ने राज्य सरकार का आदेश बरकरार रखा, जिसमें पत्नी द्वारा दायर सूचना अधिकार (RTI) आवेदन के तहत पति के वेतन संबंधी विवरण देने से इनकार किया गया था। अदालत ने कहा कि किसी कर्मचारी के वेतन और सेवा संबंधी विवरण व्यक्तिगत सूचना की श्रेणी में आते हैं।मामले में याचिकाकर्ता ने संबंधित विभाग में कार्यरत अपने पति के एक निश्चित अवधि के वेतन पर्ची और वेतन भुगतान का विवरण मांगा। राज्य ने यह कहते हुए सूचना देने से इनकार किया कि मांगी गई जानकारी व्यक्तिगत प्रकृति की है, जो एक तृतीय पक्ष से...

मंदिर के पास 40 वर्ष पुरानी दुकान हटाने का नोटिस बरकरार, श्रद्धालुओं की आवाजाही में बाधा: राजस्थान हाइकोर्ट
मंदिर के पास 40 वर्ष पुरानी दुकान हटाने का नोटिस बरकरार, श्रद्धालुओं की आवाजाही में बाधा: राजस्थान हाइकोर्ट

राजस्थान हाइकोर्ट ने श्री देवस्थान बोर्ड सिरोही द्वारा जारी उस नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की, जिसमें श्री सारणेश्वर महादेव मंदिर के पास स्थित लगभग 40 वर्ष पुरानी दुकान को खाली करने के लिए कहा गया। अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता मंदिर की भूमि पर अतिक्रमणकारी है।जस्टिस कुलदीप माथुर की पीठ ने कहा कि मंदिर की संपत्ति से अतिक्रमण हटाने के लिए बोर्ड को कार्यवाही शुरू करने का पूरा अधिकार है ताकि मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को सुगम आवागमन में किसी प्रकार की असुविधा न हो।याचिकाकर्ता का कहना था...

लोकतांत्रिक सीमाएं लांघने पर ही पुलिस खर्च की वसूली: राजस्थान हाइकोर्ट
लोकतांत्रिक सीमाएं लांघने पर ही पुलिस खर्च की वसूली: राजस्थान हाइकोर्ट

राजस्थान हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक ढंग से किए गए विरोध-प्रदर्शन पर सामान्यतः पुलिस बल की तैनाती का खर्च नहीं वसूला जा सकता लेकिन यदि प्रदर्शनकारी लोकतांत्रिक सीमाओं का उल्लंघन करते हैं तो अतिरिक्त खर्च की वसूली की जा सकती है।यह टिप्पणी जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने उस मामले की सुनवाई के दौरान की जिसमें एक प्रदर्शन के दौरान एक याचिकाकर्ता के पानी की ऊँची टंकी पर चढ़ जाने के कारण अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा था और उसके खर्च की वसूली का प्रश्न उठा...

अदालत के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना: राजस्थान हाइकोर्ट ने मेडिकल विभाग को फटकारा, प्रमुख सचिव को तलब किया
अदालत के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना: राजस्थान हाइकोर्ट ने मेडिकल विभाग को फटकारा, प्रमुख सचिव को तलब किया

राजस्थान हाइकोर्ट ने मेडिकल एवं स्वास्थ्य विभाग के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे अदालत के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना और पूर्ण उपेक्षा व अनादर करार दिया। अदालत ने विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होकर देरी के संबंध में व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया।जस्टिस संजीत पुरोहित की एकल पीठ कॉलेज द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने फिजियोथेरेपी संस्थान स्थापित करने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र हेतु आवेदन किया, लेकिन...

कानूनी वारिस संयुक्त किरायेदार होते हैं, सह-किरायेदार नहीं: राजस्थान हाइकोर्ट ने बेदखली डिक्री बरकरार रखी
कानूनी वारिस संयुक्त किरायेदार होते हैं, सह-किरायेदार नहीं: राजस्थान हाइकोर्ट ने बेदखली डिक्री बरकरार रखी

राजस्थान हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया कि मूल किरायेदार की मृत्यु के बाद उसके कानूनी वारिस अलग-अलग या स्वतंत्र किरायेदारी अधिकार प्राप्त नहीं करते, बल्कि वे संयुक्त किरायेदार के रूप में उसके स्थान पर आते हैं। ऐसे मामलों में एक संयुक्त किरायेदार के विरुद्ध की गई कार्यवाही सभी पर बाध्यकारी होती है।जस्टिस बिपिन गुप्ता की एकल पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए सह-किरायेदार के उत्तराधिकारियों द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में बेदखली डिक्री के क्रियान्वयन को चुनौती दी गई...

युवा वकीलों के लिए बड़ी राहत: राजस्थान हाइकोर्ट ने बनाया जूनियर एडवोकेट वेलफेयर फंड, कानून की किताबों के लिए मिलेगी सहायता
युवा वकीलों के लिए बड़ी राहत: राजस्थान हाइकोर्ट ने बनाया जूनियर एडवोकेट वेलफेयर फंड, कानून की किताबों के लिए मिलेगी सहायता

राजस्थान हाइकोर्ट ने प्रथम पीढ़ी के युवा वकीलों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए एक अहम पहल की।हाइकोर्ट ने जूनियर एडवोकेट वेलफेयर फंड के गठन का निर्देश दिया, जिसके माध्यम से कम आयु और सीमित अनुभव वाले वकीलों को कानून की पुस्तकें खरीदने के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी।यह आदेश जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने पारित किया।अदालत ने कहा कि पहली पीढ़ी के युवा वकीलों के सामने अपनी प्रैक्टिस स्थापित करने में गंभीर आर्थिक और व्यावसायिक चुनौतियाँ हैं। उनके पास न तो पारिवारिक पृष्ठभूमि का सहारा होता है और न...

जीवन के अधिकार में सुरक्षित हाईवे शामिल: राजस्थान हाईकोर्ट ने 2 महीने के अंदर धार्मिक अतिक्रमण समेत सभी अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया
'जीवन के अधिकार में सुरक्षित हाईवे शामिल': राजस्थान हाईकोर्ट ने 2 महीने के अंदर धार्मिक अतिक्रमण समेत सभी अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया

पूरे राजस्थान में नेशनल हाईवे के राइट ऑफ़ वे (ROW) के अंदर धार्मिक ढांचों समेत बड़े पैमाने पर अतिक्रमण का न्यायिक संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने 2 महीने के अंदर उन्हें हटाने या सही जगह पर दूसरी जगह ले जाने का निर्देश दिया।डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की डिवीजन बेंच ने कहा कि हाईवे कंट्रोल लाइन, बिल्डिंग लाइन, सड़क की ज़मीन की बाउंड्री वगैरह का ज़िक्र किए बिना अलग-अलग परमिशन, लाइसेंस और यूटिलिटी कनेक्शन देते समय इंटर-डिपार्टमेंट कोऑर्डिनेशन की कमी के कारण खतरनाक एक्सेस पॉइंट...

चालाकी से ड्राफ्टिंग करके दूसरी रिवीजन पिटीशन पर रोक को टाला नहीं जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट ने NI Act के तहत याचिका खारिज की
चालाकी से ड्राफ्टिंग करके दूसरी रिवीजन पिटीशन पर रोक को टाला नहीं जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट ने NI Act के तहत याचिका खारिज की

राजस्थान हाईकोर्ट ने दोहराया कि दूसरी रिवीजन पिटीशन सुनवाई योग्य नहीं है। सिर्फ चालाकी से ड्राफ्टिंग या फाइल करते समय नाम बदलने से कानून को नहीं टाला जा सकता।जस्टिस फरजंद अली ने कहा,"प्रोसिजरल तरीके में बदलाव से प्रोसिडिंग्स का ज्यूरिडिकल कैरेक्टर नहीं बदल सकता। किसी प्रोसिडिंग का असली नेचर क्लेम की गई राहत के सार से तय होता है, न कि लिटिगेंट द्वारा अपनाए गए नाम के तरीके से।"संदर्भ के लिए कोर्ट एक सेशंस कोर्ट के ऑर्डर के खिलाफ एक क्रिमिनल पिटीशन पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें चेक बाउंस केस में...

राजस्थान हाइकोर्ट का निर्देश: वित्तीय संकट का बहाना बनाकर कर्मचारी के वैध बकाये नहीं रोके जा सकते
राजस्थान हाइकोर्ट का निर्देश: वित्तीय संकट का बहाना बनाकर कर्मचारी के वैध बकाये नहीं रोके जा सकते

राजस्थान हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सड़क परिवहन निगम की वित्तीय कठिनाइयां किसी कर्मचारी के वैध बकाये को रोकने का आधार नहीं बन सकतीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी श्रमिक के वैधानिक अधिकारों से केवल इस आधार पर वंचित नहीं किया जा सकता कि निगम के पास पर्याप्त धनराशि नहीं है।जस्टिस अशोक कुमार जैन की पीठ रिटायर कर्मचारी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने लगभग 13 वर्षों तक साप्ताहिक अवकाश के बदले देय राशि का भुगतान न होने पर अदालत का दरवाजा खटखटाया।अदालत ने कहा कि यदि...

93 वर्षीय महिला का DNA टेस्ट कराने का आदेश, संपत्ति विवाद में बेटी की मातृत्व जांच जरूरी: राजस्थान हाइकोर्ट
93 वर्षीय महिला का DNA टेस्ट कराने का आदेश, संपत्ति विवाद में बेटी की मातृत्व जांच जरूरी: राजस्थान हाइकोर्ट

राजस्थान हाइकोर्ट ने एक बेहद असाधारण और भावनात्मक मामले में 93 वर्षीय महिला का DNA टेस्ट कराने का आदेश दिया ताकि यह तय किया जा सके कि संपत्ति में हिस्सा मांगने वाली याचिकाकर्ता वास्तव में उसकी बेटी है या नहीं। कोर्ट ने साफ कहा कि कानून में पितृत्व को लेकर तो अनुमान की व्यवस्था है लेकिन मातृत्व को लेकर कोई वैधानिक अनुमान नहीं है।जस्टिस बिपिन गुप्ता की पीठ ने इस मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर बताते हुए कहा कि यह शायद दुर्लभतम मामलों में से एक है, जहां कोई मां किसी बच्चे को अपना मानने से इनकार कर रही...

गलत तरीके से अनिवार्य रिटायरमेंट पर भेजे गए कर्मचारी को पूरा बकाया वेतन मिलेगा: नो वर्क, नो पे दलील पर राजस्थान हाइकोर्ट सख्त
गलत तरीके से अनिवार्य रिटायरमेंट पर भेजे गए कर्मचारी को पूरा बकाया वेतन मिलेगा: नो वर्क, नो पे दलील पर राजस्थान हाइकोर्ट सख्त

राजस्थान हाइकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए उस कर्मचारी को अनिवार्य रिटायरमेंट की अवधि का पूरा वेतन और भत्ते देने का आदेश दिया, जिसे बिना ठोस आधार के सेवा से बाहर कर दिया गया था। कोर्ट ने साफ कहा कि जब कर्मचारी को काम करने से ही रोका गया हो तो उस पर नो वर्क, नो पे का सिद्धांत लागू नहीं किया जा सकता।जस्टिस प्रवीर भटनागर की एकल पीठ ने यह आदेश उस याचिका पर सुनाया, जिसमें एक सरकारी कर्मचारी ने वेतन न दिए जाने को चुनौती दी थी। कर्मचारी को वर्ष 2006 में अनिवार्य रिटायरमेंट दी गई थी। बाद...

सरकारी कर्मचारी डिसिप्लिनरी जांच को रोकने के लिए इस्तीफ़ा देकर नौकरी नहीं छोड़ सकता: राजस्थान हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी सही ठहराई
सरकारी कर्मचारी डिसिप्लिनरी जांच को रोकने के लिए इस्तीफ़ा देकर नौकरी नहीं छोड़ सकता: राजस्थान हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी सही ठहराई

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक RAS अधिकारी की याचिका खारिज की, जिसमें राज्य द्वारा उसका इस्तीफ़ा खारिज किए जाने और नौकरी से निकालने की सज़ा लगाने के आदेश को चुनौती दी गई। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के व्यवहार को देखते हुए, राज्य के कामों में कोई कानूनी कमी नहीं थी।जस्टिस आनंद शर्मा की बेंच ने कहा कि सिर्फ़ इस्तीफ़ा देने से कर्मचारी के पक्ष में कोई निहित या ऑटोमैटिक अधिकार नहीं बन जाता, खासकर तब जब राज्य कर्मचारी के ख़िलाफ़ डिपार्टमेंटल कार्रवाई शुरू करने पर विचार कर रहा हो।कहा गया,“किसी सरकारी...

दैनिक मज़दूरों की हकीकत पर राजस्थान हाइकोर्ट की सख़्त टिप्पणी, 26 दिन के वेतन फ़ॉर्मूले को बताया अव्यावहारिक
दैनिक मज़दूरों की हकीकत पर राजस्थान हाइकोर्ट की सख़्त टिप्पणी, 26 दिन के वेतन फ़ॉर्मूले को बताया अव्यावहारिक

दैनिक मज़दूरी पर काम करने वाले श्रमिकों की ज़मीनी स्थिति को स्वीकार करते हुए राजस्थान हाइकोर्ट ने कहा कि यह मान लेना पूरी तरह गलत है कि हर दैनिक मज़दूर को सप्ताह में एक दिन का सवेतन अवकाश मिलता है। कोर्ट ने साफ़ कहा कि ऐसे मज़दूर बिना वेतन छुट्टी लेने की स्थिति में नहीं होते। इसलिए उनकी मज़दूरी की गणना 26 दिन के बजाय 30 दिन के आधार पर होनी चाहिए।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि दैनिक मज़दूरों की वास्तविक परिस्थितियों को नज़रअंदाज़ कर बनाए गए सरकारी फ़ॉर्मूले में सुधार...