मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

ट्रांसफर पिटीशन में पत्नी की सुविधा अब सबसे ज़रूरी नहीं, वीसी सुविधा या आने-जाने का मुआवज़ा दिया जा सकता है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
ट्रांसफर पिटीशन में पत्नी की सुविधा अब सबसे ज़रूरी नहीं, वीसी सुविधा या आने-जाने का मुआवज़ा दिया जा सकता है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने माना कि शादी के झगड़ों में ट्रांसफर पिटीशन पर फैसला करने के लिए पत्नी की सुविधा अब अकेली या सबसे ज़रूरी बात नहीं है, क्योंकि अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा या आने-जाने के खर्च का मुआवज़ा जैसे सही विकल्प मौजूद हैं।जस्टिस दीपक खोत की बेंच ने कहा,"ट्रांसफर एप्लीकेशन पर फैसला करने के लिए पत्नी/महिला की सुविधा सबसे ज़रूरी बात नहीं है और ट्रांसफर की कार्रवाई के विकल्प दिए गए , जैसे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए। अगर मामले को उस जगह के गवाहों से साबित करना है जहाँ मामला चल रहा...

मजिस्ट्रेट विवादित मालिकाना हक के आधार पर कंडीशनल सीज़र का आदेश नहीं दे सकते: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने डकैती के मामले में सीज़र रद्द किया
मजिस्ट्रेट विवादित मालिकाना हक के आधार पर कंडीशनल सीज़र का आदेश नहीं दे सकते: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने डकैती के मामले में सीज़र रद्द किया

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने माना कि मजिस्ट्रेट CrPC की धारा 156(3) के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए विवादित टाइटल या मालिकाना हक के फैसले पर निर्भर कंडीशनल निर्देश जारी नहीं कर सकता, क्योंकि ऐसे मामले ट्रायल या सिविल कार्यवाही के दायरे में आते हैं।जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच ने कहा,"जांच के दौरान सीज़र करने की शक्ति जांच से जुड़े संबंधित प्रावधानों के तहत पुलिस के पास है। मजिस्ट्रेट CrPC की धारा 156(3) के तहत अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए टाइटल के फैसले पर निर्भर कंडीशनल निर्देश जारी...

पुजारी सिर्फ़ भगवान का सेवक: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मंदिर की प्रॉपर्टी पर पुजारी के मालिकाना हक का दावा किया खारिज
'पुजारी सिर्फ़ भगवान का सेवक': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मंदिर की प्रॉपर्टी पर पुजारी के मालिकाना हक का दावा किया खारिज

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अशोकनगर ज़िले में मौजूद मंदिर गणेश जी के पुजारी का मंदिर से जुड़ी खेती की ज़मीन पर दावा खारिज किया।जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया की बेंच ने कहा कि पुजारी सिर्फ़ भगवान का सेवक होता है और मंदिर की ज़मीन और उससे जुड़ी प्रॉपर्टी मंदिर के भगवान की होती हैं।कोर्ट ने कहा; "मैनेजर या पुजारी भगवान का सेवक होता है और मंदिर की प्रॉपर्टी भगवान की होती है, मैनेजर/पुजारी की नहीं। इसलिए भले ही वादी के पहले के लोगों को पुजारी या मैनेजर बनाया गया हो, फिर भी वादी मंदिर की प्रॉपर्टी को अपनी या...

अपराधी दया को अधिकार के तौर पर नहीं मांग सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य द्वारा सज़ा में बदलाव के बाद कांस्टेबल की बहाली की अर्ज़ी खारिज की
'अपराधी दया को अधिकार के तौर पर नहीं मांग सकता': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य द्वारा सज़ा में बदलाव के बाद कांस्टेबल की बहाली की अर्ज़ी खारिज की

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस कांस्टेबल की कंपलसरी रिटायरमेंट के खिलाफ अर्ज़ी यह कहते हुए खारिज की कि एक बार जब राज्य ने दया याचिका में उसकी बर्खास्तगी को कंपलसरी रिटायरमेंट में बदलकर नरमी दिखाई तो उसके पास आगे ज्यूडिशियल रिव्यू की मांग करने का कोई लागू करने लायक अधिकार नहीं है।जस्टिस आनंद सिंह बहरावत की बेंच ने कहा,"दया कानूनी अधिकारों का विषय नहीं है। यह वहीं से शुरू होती है, जहां कानूनी अधिकार खत्म होते हैं। एक अपराधी व्यक्ति को दया के अधिकार के इस्तेमाल के संबंध में होम सेक्रेटरी द्वारा अपने...

फॉरेनर्स एक्ट के तहत सेविंग्स क्लॉज़ के रद्द होने के बाद नई कार्रवाई शुरू करने का अधिकार नहीं देता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने साफ़ किया
फॉरेनर्स एक्ट के तहत सेविंग्स क्लॉज़ के रद्द होने के बाद नई कार्रवाई शुरू करने का अधिकार नहीं देता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने साफ़ किया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक घर के मालिक के खिलाफ तय समय में फॉर्म सी जमा न करने पर दर्ज FIR को यह कहते हुए रद्द किया कि इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 के लागू होने के बाद फॉरेनर्स एक्ट, 1946 के तहत नई कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती।जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच ने कहा,"सेविंग क्लॉज़ रद्द हो चुके फॉरेनर्स एक्ट, 1946 को फिर से लागू करने के लिए काम नहीं करता, और न ही यह इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 के लागू होने के बाद होने वाले कामों या चूक के संबंध में नई कार्रवाई शुरू करने या उसके...

जांच में नकली या झूठे डॉक्यूमेंट्स मिलने पर डिपार्टमेंटल एक्शन होगा: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस को कड़ी चेतावनी दी
जांच में नकली या झूठे डॉक्यूमेंट्स मिलने पर डिपार्टमेंटल एक्शन होगा: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस को कड़ी चेतावनी दी

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में पन्ना जिले के 2017 के एक मर्डर केस में दो लोगों की उम्रकैद की सज़ा यह देखते हुए रद्द की कि हालात के सबूतों की चेन अधूरी थी और गंभीर जांच में हुई गलतियों की वजह से खराब थी।इसके अलावा, जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस राजेंद्र कुमार वाणी की डिवीजन बेंच ने देखा कि आरोपी के खुलासे पर आधारित मेमोरेंडम एक 'काल्पनिक' डॉक्यूमेंट था, इसलिए पुलिस वालों को कड़ी चेतावनी दी।बेंच ने कहा,"जजमेंट की कॉपी सरकारी वकील को दी जाए, जो डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस से अपने विवेक के हिसाब...

बांधवगढ़ में बाघों की अप्राकृतिक मौतों पर रिपोर्ट तलब, मध्यप्रदेश हाइकोर्ट सख्त
बांधवगढ़ में बाघों की अप्राकृतिक मौतों पर रिपोर्ट तलब, मध्यप्रदेश हाइकोर्ट सख्त

मध्य प्रदेश में बाघों की बढ़ती मौतों और शिकार की घटनाओं को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक को विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने विशेष रूप से अप्राकृतिक मौतों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने कहा,“बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक को निर्देशित किया जाता है कि वे बाघों की रिपोर्ट की गई मौतों के संबंध में स्थिति...

कोल्डरिफ कफ सिरप से बच्चों की मौत मामला: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने डॉक्टर व फार्मासिस्टों की जमानत याचिका खारिज की
'कोल्डरिफ' कफ सिरप से बच्चों की मौत मामला: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने डॉक्टर व फार्मासिस्टों की जमानत याचिका खारिज की

मध्यप्रदेश हाइकोर्ट ने मंगलवार (17 फरवरी) को डॉ. प्रवीण सोनी और अन्य फार्मासिस्टों की जमानत याचिकाएं खारिज की। इन पर आरोप है कि उन्होंने बच्चों को 'कोल्डरिफ' नामक कफ सिरप लिखकर और बेचकर 30 से अधिक बच्चों की मौत का कारण बने।जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की पीठ ने कहा कि आवेदक एक बाल रोग विशेषज्ञ हैं और उन्हें 1998 में दिल्ली में डीईजी से दूषित कफ सिरप के कारण 33 बच्चों की मौत की घटना की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने उक्त सिरप लिखना जारी रखा।अदालत के अनुसार, इसके परिणामस्वरूप 4-5 वर्ष से कम आयु...

जल्दबाज़ी में न्याय, न्याय को दबाना: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने POCSO आरोपी को एक्सपर्ट गवाह को बुलाने की इजाज़त दी
"जल्दबाज़ी में न्याय, न्याय को दबाना:" मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने POCSO आरोपी को एक्सपर्ट गवाह को बुलाने की इजाज़त दी

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि किसी आरोपी को सिर्फ़ टेक्निकल वजहों जैसे कि एप्लीकेशन फाइल करने में देरी या पुराने केस पेंडिंग होने पर फॉरेंसिक एक्सपर्ट को बुलाने और उनसे पूछताछ करने के मौके से मना नहीं किया जा सकता। साथ ही यह भी कहा कि केस का जल्दी निपटारा फेयर ट्रायल की कीमत पर नहीं हो सकता।जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह ने आरोपी द्वारा दायर क्रिमिनल रिवीजन को मंज़ूरी दी, जिसमें स्पेशल जज (POCSO), रीवा के ऑर्डर को चुनौती दी गई। इस ऑर्डर में फॉरेंसिक एक्सपर्ट समेत बचाव पक्ष के गवाहों को बुलाने की...

ट्रायल के देर के चरण में बिना प्रासंगिकता व प्रमाण के पेन-ड्राइव साक्ष्य स्वीकार नहीं किए जा सकते: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
ट्रायल के देर के चरण में बिना प्रासंगिकता व प्रमाण के पेन-ड्राइव साक्ष्य स्वीकार नहीं किए जा सकते: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी आपराधिक मुकदमे में ट्रायल के देर के चरण में पेश किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य तभी स्वीकार किए जा सकते हैं, जब उनकी आरोपों से स्पष्ट प्रासंगिकता हो और उन्हें विधि के अनुसार सिद्ध किया जा सके।इसी आधार पर हाईकोर्ट ने एक फर्जीवाड़ा मामले में मृतक मरीज की कथित आवाज़ रिकॉर्डिंग वाली पेन-ड्राइव को रिकॉर्ड पर लेने से इनकार कर दिया।जस्टिस बी.पी. शर्मा ने यह फैसला मालिनी जैन द्वारा दायर याचिका पर सुनाया, जिसमें उन्होंने छिंदवाड़ा के प्रथम अपर सेशन जज द्वारा...

विवाह या गर्भावस्था शिक्षा में बाधा नहीं बन सकती” : एमपी हाईकोर्ट ने छात्रा को उपस्थिति में छूट देने का कॉलेज को दिया निर्देश
"विवाह या गर्भावस्था शिक्षा में बाधा नहीं बन सकती” : एमपी हाईकोर्ट ने छात्रा को उपस्थिति में छूट देने का कॉलेज को दिया निर्देश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि विवाह और गर्भावस्था किसी महिला की उच्च शिक्षा में बाधा नहीं बन सकते। अदालत ने शैक्षणिक संस्थानों को निर्देश दिया कि वे छात्राओं को मातृत्व/चाइल्ड केयर अवकाश, उपस्थिति में छूट और आवश्यक शैक्षणिक सहयोग प्रदान करें।मध्य प्रदेश हाईको की खंडपीठ, जिसमें जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल शामिल थे, ने कहा कि कार्यस्थलों पर उपलब्ध मातृत्व संरक्षण का लाभ शिक्षा प्राप्त कर रही महिलाओं को भी समान रूप से मिलना चाहिए।अदालत ने कहा—“पढ़ाई...

निरस्त Foreigners Act के तहत अपराध दर्ज करना प्रथम दृष्टया अवैध: फॉर्म-C दाख़िल करने में देरी पर दर्ज FIR को MP हाईकोर्ट ने किया रद्द
निरस्त Foreigners Act के तहत अपराध दर्ज करना 'प्रथम दृष्टया अवैध': फॉर्म-C दाख़िल करने में देरी पर दर्ज FIR को MP हाईकोर्ट ने किया रद्द

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक निजी मकान मालिक के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है, जिसमें उस पर किसी विदेशी नागरिक के ठहरने की जानकारी 24 घंटे के भीतर फॉर्म-C में न देने का आरोप लगाया गया था। न्यायालय ने कहा कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के समक्ष यह स्पष्ट है कि Foreigners Act, 1946 के निरस्त हो जाने के बाद उसके तहत किसी प्रकार की आपराधिक कार्रवाई कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है, खासकर तब जब Immigration and Foreigners Act, 2025 लागू हो चुका है।जस्टिस हिमांशु जोशी ने कहा कि 1 सितंबर 2025 से 1946 का अधिनियम...

कथित जबरन धर्मांतरण मामले में पूर्व कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी को जमानत, एमपी हाइकोर्ट का आदेश
कथित जबरन धर्मांतरण मामले में पूर्व कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी को जमानत, एमपी हाइकोर्ट का आदेश

मध्य प्रदेश हाइकोर्ट, इंदौर ने कथित जबरन धर्मांतरण के मामले में आरोपी पूर्व कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी को जमानत दी। अनवर कादरी अगस्त 2025 से न्यायिक हिरासत में थे। उन पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 तथा मध्य प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 के तहत अपराध दर्ज हैं।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने यह आदेश पारित करते हुए कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी के खिलाफ सीमित सामग्री ही सामने आती है, जबकि सह-आरोपी को पहले ही जमानत दी जा चुकी है।आवेदक की ओर से दलील दी गई कि पीड़िता ने अपनी शिकायत में अनवर कादरी...

पूर्व आदेश की अवहेलना कर TET शर्त दोबारा लगाने पर सीनियर अधिकारी अवमानना का दोषी: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
पूर्व आदेश की अवहेलना कर TET शर्त दोबारा लगाने पर सीनियर अधिकारी अवमानना का दोषी: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के सीनियर अधिकारी को न्यायालय की अवमानना का दोषी ठहराया है।अदालत ने पाया कि अधिकारी ने महिला कर्मचारी की अनुकंपा नियुक्ति के मामले में पहले से स्पष्ट न्यायिक आदेश के बावजूद, शिक्षक पात्रता परीक्षा (PET) की शर्त दोबारा लागू कर जानबूझकर अवहेलना की।जस्टिस प्रणय वर्मा ने अवमानना याचिकाओं के एक समूह पर फैसला सुनाते हुए कहा कि संबंधित अधिकारी ने 11 अगस्त, 2023 को पारित हाईकोर्ट के आदेश का गंभीर और जानबूझकर उल्लंघन किया।मामले की पृष्ठभूमियाचिकाकर्ता महिला को उसके...

22 साल से अधिक सेवा के बाद बर्खास्तगी रद्द: एमपी हाइकोर्ट ने कहा, अनियमित नियुक्तियां अवैध नहीं
22 साल से अधिक सेवा के बाद बर्खास्तगी रद्द: एमपी हाइकोर्ट ने कहा, अनियमित नियुक्तियां अवैध नहीं

मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने जिला कोर्ट में कार्यरत कई क्लास-3 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने के आदेशों को रद्द कर दिया है।हाइकोर्ट ने कहा कि दो दशक से अधिक समय तक सेवा देने के बाद केवल नियुक्ति में कथित अवैधता के आधार पर कर्मचारियों को हटाना कानूनन टिकाऊ नहीं है।जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने निर्णय में कहा कि वर्ष 1994–1995 में की गई नियुक्तियां प्रारंभ से ही अवैध या शून्य नहीं थीं। अधिकतम यह कहा जा सकता है कि उनमें कुछ प्रक्रिया संबंधी अनियमितताएं थीं, जो लंबे समय तक...

श्रम कानून फायदेमंद कानून, लिमिटेशन पर बहुत ज़्यादा तकनीकी नज़रिए से बचना चाहिए: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
श्रम कानून फायदेमंद कानून, लिमिटेशन पर बहुत ज़्यादा तकनीकी नज़रिए से बचना चाहिए: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि मज़दूरों द्वारा किए गए दावों को लिमिटेशन के बहुत ज़्यादा तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जाना चाहिए खासकर जब देरी COVID-19 महामारी और कानूनी जागरूकता की कमी के कारण हुई हो।श्रम कल्याण कानूनों के फायदेमंद स्वभाव पर ज़ोर देते हुए कोर्ट ने मेडिकैप्स लिमिटेड द्वारा दायर रिट याचिका को खारिज की, जिसमें इंदौर की इंडस्ट्रियल कोर्ट द्वारा पारित रिमांड आदेश को चुनौती दी गई थी।यह मामला 22 नवंबर, 2019 को मेडिकैप्स लिमिटेड के औद्योगिक प्रतिष्ठान के बंद होने से जुड़ा है। नियोक्ता...

मौन दर्शक नहीं बन सकता: आरोपी को संरक्षण देने पर एमपी हाइकोर्ट ने पुलिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए
मौन दर्शक नहीं बन सकता: आरोपी को संरक्षण देने पर एमपी हाइकोर्ट ने पुलिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए

मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने आरोपी को अवैध रूप से संरक्षण देने के गंभीर आरोपों में एक पुलिस अधिकारी के आचरण पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए उसके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए।हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब पुलिस अधिकारी न्यायालय के आदेशों को निष्प्रभावी करने का प्रयास करते हैं, तो अदालत मूक दर्शक बनी नहीं रह सकती।जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की एकल पीठ ने यह आदेश पारित करते हुए कहा कि संबंधित पुलिस अधिकारी का आचरण कानून के शासन, अदालत के अधिकार और निष्पक्ष जांच के बुनियादी...

कर्ज की वापसी की मांग को आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता: मध्यप्रदेश हाइकोर्ट
कर्ज की वापसी की मांग को आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता: मध्यप्रदेश हाइकोर्ट

मध्यप्रदेश हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति द्वारा अपने कर्ज की रकम वापस मांगना या उसके बदले मृतक की मोटरसाइकिल अपने पास रखना, आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध नहीं माना जा सकता।हाइकोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के तहत लगाए गए आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप रद्द कर दिया।जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की एकल पीठ ने कहा कि आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध तभी बनता है जब आरोपी की मंशा स्पष्ट रूप से मृतक को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने की हो। केवल कर्ज की वापसी की मांग को ऐसी मंशा नहीं माना...

कोर्ट्स में सर्विस मैटर्स की बाढ़: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य को इन-हाउस कर्मचारी विवाद समाधान प्रणाली बनाने का सुझाव दिया
कोर्ट्स में सर्विस मैटर्स की बाढ़: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य को इन-हाउस कर्मचारी विवाद समाधान प्रणाली बनाने का सुझाव दिया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार (28 जनवरी) को राज्य सरकार को अपने कर्मचारियों की शिकायतों को आंतरिक रूप से हल करने के लिए एक विवाद समाधान प्रणाली स्थापित करने का सुझाव दिया।जस्टिस विनय सर्राफ की बेंच ने देखा कि हाई कोर्ट्स में सर्विस मैटर्स की बाढ़ आ गई है, जिन्हें शुरुआती चरण में ही हल किया जा सकता था।बेंच ने कहा;"मैंने राज्य सरकार को यह सुझाव देना उचित समझा कि वह राज्य सरकार के कर्मचारियों के विवादों या शिकायतों को शुरुआती चरण में ही तय करने के लिए नीति बनाए ताकि मामलों की संख्या न बढ़े। इसके...

डिक्री होल्डर समझौता नहीं तोड़ सकता या जजमेंट देनदार का चेक लेने से मना करके एग्जीक्यूशन शुरू नहीं कर सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
डिक्री होल्डर समझौता नहीं तोड़ सकता या जजमेंट देनदार का चेक लेने से मना करके एग्जीक्यूशन शुरू नहीं कर सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि एक डिक्री होल्डर जानबूझकर जजमेंट देनदार द्वारा डिक्री के कानूनी निपटारे के लिए दिए गए चेक को लेने या कैश कराने से मना करके समझौते की डिक्री की शर्तों को नाकाम नहीं कर सकता या एग्जीक्यूशन की कार्यवाही शुरू नहीं कर सकता।जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने कहा कि जहां समझौते की डिक्री में पेमेंट का कोई खास तरीका, ब्याज या देरी से किस्तों के लिए कोई नतीजा तय नहीं है, वहां तय समय के अंदर चेक का कानूनी तौर पर पेश किया जाना वैध माना जाएगा और कानून की नज़र में डिक्री को...