मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

HAMA | अगर बालिग़ अविवाहित बेटी अपनी कमाई से अपना गुज़ारा नहीं कर सकती तो उसे गुज़ारा-भत्ता पाने के लिए कोई दिव्यांगता दिखाने की ज़रूरत नहीं: एमपी हाईकोर्ट
HAMA | अगर बालिग़ अविवाहित बेटी अपनी कमाई से अपना गुज़ारा नहीं कर सकती तो उसे गुज़ारा-भत्ता पाने के लिए कोई दिव्यांगता दिखाने की ज़रूरत नहीं: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बालिग़ अविवाहित बेटी को ₹2,000 का अंतरिम गुज़ारा-भत्ता (Pendente Lite Maintenance) देने के फ़ैमिली कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम (HAM Act) की धारा 20(3) साफ़ तौर पर कहती है कि बेटी को बस यह दिखाना होगा कि वह अपनी कमाई या किसी और संपत्ति से अपना गुज़ारा करने में असमर्थ है; उसे किसी विकलांगता को साबित करने की ज़रूरत नहीं है। [2026 LiveLaw (MP) 270]जस्टिस द्वारकाधीश बंसल की बेंच ने कहा;"ऊपर बताई गई बातों को देखते हुए यह साफ़ है...

एमपी हाईकोर्ट ने नाबालिग़ उम्र में शादी के आरोप वाली FIR में वायरल कुंभ मेला स्टार और उनके पति को अंतरिम सुरक्षा दी
एमपी हाईकोर्ट ने नाबालिग़ उम्र में शादी के आरोप वाली FIR में वायरल कुंभ मेला स्टार और उनके पति को अंतरिम सुरक्षा दी

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने वायरल कुंभ मेला स्टार और उनके पति को अंतरिम राहत दी। उन्होंने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि उनकी अलग-अलग धर्मों की शादी को अपराध साबित करने के लिए महिला के जन्म प्रमाण पत्र में हेरफेर किया गया। जोड़े ने जन्म प्रमाण पत्र को बहाल करने और सरकारी रिकॉर्ड में कथित धोखाधड़ी की स्वतंत्र जांच के आदेश देने की भी मांग की।मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस गजेंद्र सिंह की बेंच ने उन्हें नाबालिग़ उम्र में शादी के आरोपों पर दर्ज FIR में अंतरिम सुरक्षा दी।"मौजूद पक्षों के वकीलों की...

छात्रावास शुल्क विवाद में परीक्षा से रोकने के खिलाफ लॉ स्टूडेंट पहुंची मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, कॉलेज और यूनिवर्सिटी को नोटिस
छात्रावास शुल्क विवाद में परीक्षा से रोकने के खिलाफ लॉ स्टूडेंट पहुंची मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, कॉलेज और यूनिवर्सिटी को नोटिस

छात्रावास शुल्क को लेकर विवाद के कारण एलएलबी की स्टूडेंट को द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा में बैठने से रोकने के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कॉलेज और यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी किया।अदालत ने दोनों पक्षों से जवाब तलब करते हुए मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की।जस्टिस दीपक खोत की पीठ ने कहा,"प्रतिवादियों को सात कार्य दिवस के भीतर प्रक्रिया शुल्क जमा करने पर नोटिस जारी किया जाए। नोटिस चार सप्ताह में प्रत्यावर्तनीय हो। इसके बाद मामले को सूचीबद्ध किया जाए।"याचिकाकर्ता तीन वर्षीय एलएलबी...

मां ने पति पर लगाया बेटियों के यौन शोषण का आरोप, बेटियों ने कोर्ट में कहा— आरोप झूठे हैं, पिता के साथ रहेंगे
मां ने पति पर लगाया बेटियों के यौन शोषण का आरोप, बेटियों ने कोर्ट में कहा— 'आरोप झूठे हैं, पिता के साथ रहेंगे'

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने पारिवारिक विवाद और झूठे आरोपों से जुड़े एक मामले में बेहद अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने एक नाबालिग लड़की को उसकी मां के पास भेजने के बजाय उसके पिता और बड़ी बहन के साथ रहने की इजाजत दे दी है। कोर्ट ने यह फैसला तब लिया जब नाबालिग लड़की ने साफ शब्दों में कहा कि उसकी मां ने वैवाहिक विवाद (Matrimonial Dispute) के चलते उसके पिता को फंसाने के लिए यौन उत्पीड़न का झूठा आरोप लगाया था।पूरा मामला क्या है?यह मामला जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी...

एक बार की प्रतिकूल टिप्पणी से वकील को हमेशा के लिए नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
एक बार की प्रतिकूल टिप्पणी से वकील को हमेशा के लिए नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी वकील के खिलाफ अतीत में दर्ज की गई एक बार की प्रतिकूल टिप्पणी उसे भविष्य में सरकारी विधि अधिकारी के पद पर नियुक्ति से हमेशा के लिए अयोग्य नहीं ठहरा सकती। अदालत ने कहा कि यदि सक्षम प्राधिकारी बाद में उसके कार्य का मूल्यांकन कर उसे उपयुक्त पाता है, तो उसकी नियुक्ति को केवल पुरानी प्रतिकूल टिप्पणियों के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता।यह फैसला जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के ने सुनाया। अदालत ने सरकारी विधि अधिकारी के रूप में वकील की नियुक्ति को चुनौती...

पुलिस शायद आरोपी को रिहाई दिलाने में मदद करने के लिए गिरफ्तारी की प्रक्रिया को जानबूझकर नज़रअंदाज़ कर रही है- एमपी हाईकोर्ट
पुलिस शायद आरोपी को रिहाई दिलाने में मदद करने के लिए गिरफ्तारी की प्रक्रिया को जानबूझकर नज़रअंदाज़ कर रही है- एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया कि वह सभी जांच अधिकारियों के लिए एक सर्कुलर जारी करें। इसमें उन्हें पंकज बंसल मामले में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस और BNSS की धारा 47 की ज़रूरतों का सख्ती से पालन करने की चेतावनी दी जाए। इन नियमों के तहत गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में बताना ज़रूरी है।जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की डिवीज़न बेंच ने आगे कहा कि नियमों का पालन न करने से यह धारणा बनेगी कि आरोपी को लिखित आधार जानबूझकर नहीं दिए गए। ऐसा बुरी नीयत से किया...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अधिकारियों से कहा- टाइगर रिज़र्व को कैनाइन डिस्टेंपर के प्रकोप से बचाया जाए
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अधिकारियों से कहा- टाइगर रिज़र्व को कैनाइन डिस्टेंपर के प्रकोप से बचाया जाए

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि वह सभी टाइगर रिज़र्व में नज़र रखे और यह पक्का करे कि ज़रूरत पड़ने पर बाघों को कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) का टीका लगाया जाए।जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी सिंह की बेंच ने कहा:"दलीलों पर विचार करते हुए यह उम्मीद की जाती है कि संबंधित अधिकारी ज़िम्मेदारी से काम करेंगे और सभी टाइगर रिज़र्व पर नज़र रखेंगे। जब भी और जहाँ भी टीकाकरण की ज़रूरत होगी, यह अभियान चलाया जाएगा ताकि बिल्ली प्रजाति के इन जानवरों को ऐसी प्राकृतिक या स्वास्थ्य संबंधी आपदाओं से...

नाबालिग लड़की की उम्र छिपाने के आरोप पर पुलिस अधिकारी और स्कूल प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई पर फैसला लें: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने DGP को दिए निर्देश
नाबालिग लड़की की उम्र छिपाने के आरोप पर पुलिस अधिकारी और स्कूल प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई पर फैसला लें: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने DGP को दिए निर्देश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया कि वह एक पुलिस अधिकारी और एक स्कूल प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता पर एक महीने के भीतर निर्णय लें। अदालत ने प्रथम दृष्टया पाया कि दोनों ने नाबालिग लड़की की वास्तविक जन्मतिथि से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज दबाकर उसकी उम्र को लेकर संदेह पैदा किया जिससे आरोपी को आपराधिक मामले में बरी होने में मदद मिली।जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि उपलब्ध सभी आधिकारिक अभिलेखों में लड़की की जन्मतिथि 10 फरवरी...

गरीबी, अशिक्षा और कानून की जानकारी न होना चार साल की देरी माफ करने का आधार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
गरीबी, अशिक्षा और कानून की जानकारी न होना चार साल की देरी माफ करने का आधार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम के तहत दायर एक दावे में चार वर्ष की देरी को माफ करने से इनकार करते हुए कहा है कि गरीबी, अशिक्षा और कानून की जानकारी का अभाव अपने-आप में देरी माफ करने के लिए 'पर्याप्त कारण' नहीं हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक पूरी देरी का संतोषजनक कारण नहीं बताया जाता, तब तक केवल इन आधारों पर विलंब को स्वीकार नहीं किया जा सकता।जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन ने कर्मचारी प्रतिकर आयुक्त-सह-श्रम न्यायालय, सागर के आदेश को बरकरार रखते हुए मृतक कर्मचारी के परिजनों की...

आरोपी को चार्जशीट के खिलाफ विरोध याचिका दायर करने का वैधानिक अधिकार नहीं, आरोपमुक्ति की दलील ही उपलब्ध उपाय: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
आरोपी को चार्जशीट के खिलाफ विरोध याचिका दायर करने का वैधानिक अधिकार नहीं, आरोपमुक्ति की दलील ही उपलब्ध उपाय: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि जांच एजेंसी किसी मामले में आरोपपत्र दाखिल करती है तो आरोपी को उसके खिलाफ विरोध याचिका दायर कर आरोप तय होने से पहले लघु सुनवाई कराने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में आरोपी के पास उपलब्ध कानूनी उपाय केवल आरोपमुक्ति की मांग करना है।जस्टिस जय कुमार पिल्लई ने शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने और अश्लीलता के आरोपों में आरोप तय करने के आदेश को चुनौती देने वाली पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।अदालत ने कहा,"जब जांच...

उज्जैन में मुहर्रम जुलूस के दौरान हुए मॉक ब्लास्ट की NIA से जांच की मांग, हाईकोर्ट ने मांगा राज्य सरकार से जवाब
उज्जैन में मुहर्रम जुलूस के दौरान हुए 'मॉक ब्लास्ट' की NIA से जांच की मांग, हाईकोर्ट ने मांगा राज्य सरकार से जवाब

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को एक हफ़्ते का समय दिया ताकि वह इस बात पर निर्देश ले सकें कि क्या 23 जून, 2026 को मुहर्रम जुलूस के दौरान हुए धमाकों की जांच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) करेगी।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने कहा:"एडिशनल एडवोकेट जनरल (Addl. A.G.) ने इस मामले में निर्देश लेने के लिए एक हफ़्ते का समय मांगा और उन्हें यह समय दिया गया। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उज्जैन (म.प्र.) ज़िले के बड़नगर में 23/06/2026 को हुई घटना नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी एक्ट,...

पति का माता-पिता का ध्यान रखना पत्नी के अलग रहने और भरण-पोषण मांगने का आधार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
पति का माता-पिता का ध्यान रखना पत्नी के अलग रहने और भरण-पोषण मांगने का आधार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि पति का अपने माता-पिता या परिवार के अन्य सदस्यों का ध्यान रखना मात्र इस आधार पर पत्नी को अलग रहने और भरण-पोषण पाने का अधिकार नहीं देता। अदालत ने कहा कि ससुराल वालों के साथ सामान्य मतभेद या पति का अपने माता-पिता के प्रति दायित्व निभाना, वैवाहिक घर छोड़ने का पर्याप्त कानूनी कारण नहीं माना जा सकता।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की सिंगल बेंच ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें पत्नी को भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था। हालांकि अदालत ने...

आर्टिकल 21 का पहलू: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी के मामले में आरोपी रूसी नागरिक को दिव्यांग बेटे के इलाज के लिए विदेश जाने की इजाज़त दी
'आर्टिकल 21 का पहलू': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी के मामले में आरोपी रूसी नागरिक को दिव्यांग बेटे के इलाज के लिए विदेश जाने की इजाज़त दी

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भारत में धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश के आरोपों का सामना कर रहे रूसी नागरिक को अपने दिव्यांग बेटे के इलाज के लिए विदेश जाने की इजाज़त दे दी है। [2026 LiveLaw (MP) 257]ट्रायल कोर्ट ने उसकी अर्ज़ी सिर्फ़ इस आधार पर खारिज की थी कि उसका बेटा बचपन से ही बीमार है।उक्त आदेश रद्द करते हुए जस्टिस पवन कुमार द्विवेदी की बेंच ने कहा; "सिर्फ़ इस वजह से अर्ज़ी खारिज करना कि याचिकाकर्ता का बेटा बचपन से ही बीमार है, सही नहीं ठहराया जा सकता"।बेंच ने देखा कि इस मामले में...

लोक सेवाओं के लिए शैक्षणिक योग्यता तय करने से राज्य सरकार को नहीं रोक सकता UGC : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
लोक सेवाओं के लिए शैक्षणिक योग्यता तय करने से राज्य सरकार को नहीं रोक सकता UGC : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और उसके विनियम राज्य सरकार को लोक सेवाओं में नियुक्ति के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता निर्धारित करने से नहीं रोक सकते।अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी पद के लिए योग्यता तय करना पूरी तरह भर्ती नीति का विषय है और राज्य, नियोक्ता होने के नाते, अपनी आवश्यकता के अनुरूप पात्रता की शर्तें निर्धारित करने का अधिकार रखता है। जस्टिस जय कुमार पिल्लै की पीठ ने यह टिप्पणी सहायक प्राध्यापक (प्राणी विज्ञान) के पद पर नियुक्ति...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ट्रायल खत्म होने से पहले ही बरी करने का फ़ैसला तैयार करने के आरोपी जज को राहत देने से इनकार किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ट्रायल खत्म होने से पहले ही बरी करने का फ़ैसला तैयार करने के आरोपी जज को राहत देने से इनकार किया

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सिविल जज के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई को रद्द करने से इनकार किया। उन पर आरोप है कि उन्होंने अक्टूबर 2020 में ही आरोपी को बरी करने का फ़ैसला तैयार कर लिया था, जबकि ट्रायल अभी चल ही रहा था। [2026 LiveLaw (MP) 255]आरोप है कि जज ने यह फ़ैसला आरोपी संतोष वर्मा को अनुचित लाभ पहुंचाने की साज़िश के तहत तैयार किया था। संतोष वर्मा का IAS अवार्ड एक आपराधिक केस के लंबित होने के कारण रुका हुआ था।जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीज़न बेंच ने कहा कि अनुशासनात्मक अथॉरिटी...

नोटरीकृत समझौते से न तो हिंदू विवाह वैध होता है, न तलाक: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
नोटरीकृत समझौते से न तो हिंदू विवाह वैध होता है, न तलाक: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिंदू विवाह को न तो केवल नोटरीकृत समझौते के आधार पर संपन्न माना जा सकता है और न ही ऐसे समझौते के जरिए वैध रूप से समाप्त किया जा सकता है।अदालत ने कहा कि हिंदू कानून के तहत विवाह कोई अनुबंध नहीं है, इसलिए केवल नोटरीकृत विवाह समझौते से वैध विवाह नहीं माना जाएगा।यह टिप्पणी जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान की।पूरा मामलामामला सुमन बाई से जुड़ा था जो जनजातीय एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग में चौकीदार के पद...

क्या फ़रार आरोपी गिरफ़्तारी के बाद सप्लीमेंट्री चार्जशीट न दाखिल होने पर डिफ़ॉल्ट ज़मानत का दावा कर सकता है? मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दिया जवाब
क्या फ़रार आरोपी गिरफ़्तारी के बाद सप्लीमेंट्री चार्जशीट न दाखिल होने पर डिफ़ॉल्ट ज़मानत का दावा कर सकता है? मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दिया जवाब

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी आरोपी के फ़रार रहने के दौरान उसके ख़िलाफ़ चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी है तो उसकी गिरफ़्तारी के बाद सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल करने की कोई ज़रूरत नहीं है। [2026 LiveLaw (MP) 252]जस्टिस द्वारकाधीश बंसल की बेंच ने आरोपी को डिफ़ॉल्ट ज़मानत देने से इनकार करते हुए कहा,"सिर्फ़ इसलिए कि जांच एजेंसी ने आगे की जांच के लिए समय मांगा या याचिकाकर्ता की गिरफ़्तारी के बाद सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल नहीं की, यह नतीजा नहीं निकाला जा सकता कि जांच अधूरी रह गई और...

अगर शिकायतकर्ता की उम्र साबित नहीं होती है तो सिर्फ़ POCSO के तहत सज़ा के लिए पॉज़िटिव DNA रिपोर्ट काफ़ी नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
अगर शिकायतकर्ता की उम्र साबित नहीं होती है तो सिर्फ़ POCSO के तहत सज़ा के लिए पॉज़िटिव DNA रिपोर्ट काफ़ी नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ पॉज़िटिव DNA रिपोर्ट के आधार पर POCSO Act के तहत सज़ा का आदेश सही नहीं ठहराया जा सकता, खासकर तब जब शिकायतकर्ता/पीड़िता की उम्र साबित न हुई हो। [2026 LiveLaw (MP) 251]जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र सिंह की डिवीज़न बेंच ने देखा कि पीड़िता के पिता ने कहा था कि उनकी शादी घटना की तारीख से उन्नीस साल पहले हुई और शादी के एक साल बाद उनकी पहली संतान, यानी पीड़िता का जन्म हुआ। हालांकि, माँ ने कहा कि उनकी शादी घटना की तारीख से बीस साल पहले हुई थी और उसके दो साल...

ट्रायल कोर्ट पति की आय साबित करने का पूरा बोझ पत्नी पर नहीं डाल सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गुजारा-भत्ता मंज़ूर किया
ट्रायल कोर्ट पति की आय साबित करने का पूरा बोझ पत्नी पर नहीं डाल सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गुजारा-भत्ता मंज़ूर किया

पत्नी को गुजारा-भत्ता देने और नाबालिग बच्चे के गुजारा-भत्ते की रकम बढ़ाने के साथ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने पति की आय साबित करने का पूरा बोझ गलत तरीके से पत्नी पर डाल दिया था। [2026 LiveLaw (MP) 250]इस बात पर ज़ोर देते हुए कि CrPC की धारा 125 एक सामाजिक कल्याण की कार्यवाही है, जस्टिस गजेंद्र सिंह की बेंच ने कहा कि पति से उसकी आय से जुड़ी सभी ज़रूरी बातें बताने के लिए कहा जाना चाहिए था।बेंच ने कहा:"ट्रायल कोर्ट के आदेश से पता चलता है कि पति की आय का स्रोत साबित करने का पूरा...

GST अधिकारी को बदनाम करने और ₹1 करोड़ की उगाही के आरोप में पत्रकार बताने वाले व्यक्ति को अग्रिम जमानत से इनकार
GST अधिकारी को बदनाम करने और ₹1 करोड़ की उगाही के आरोप में पत्रकार बताने वाले व्यक्ति को अग्रिम जमानत से इनकार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने खुद को पत्रकार बताने वाले एक व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी, जिस पर GST आवेदन खारिज होने के बाद सहायक आयुक्त (GST) को सोशल मीडिया पर बदनाम करने और उनसे ₹1 करोड़ की उगाही करने का आरोप है।जस्टिस रत्नेश कुमार गुप्ता की पीठ ने कहा कि आरोपी के खिलाफ आरोप गंभीर हैं। प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड से यह प्रतीत होता है कि उसने आवश्यक दस्तावेजों के अभाव में अपना GST पंजीकरण कराने का दबाव बनाया और मना किए जाने पर सरकारी अधिकारी को सोशल मीडिया पर झूठी और अपमानजनक खबरें प्रकाशित...