मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

बुजुर्ग पुरुष परिजन पारिवारिक मुकदमे के लिए छोटी उम्र की महिला सदस्य पर निर्भर हो सकते हैं, ऐसी धारणा लैंगिक पूर्वाग्रहपूर्ण: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि परिवार के बुजुर्ग पुरुष सदस्य पारिवारिक मुकदमे में जरूरी कानूनी कदम उठाने के लिए परिवार की अपेक्षाकृत कम उम्र की महिला सदस्य पर निर्भर हो सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि इसके विपरीत कोई भी धारणा स्वाभाविक रूप से लैंगिक पूर्वाग्रह से ग्रस्त और “विशिष्ट रूप से स्त्री-विरोधी” होगी।जस्टिस अनुराधा शुक्ला ने मामले में प्रथम अपीलीय अदालत के उस तर्क को खारिज किया, जिसमें यह माना गया कि चूंकि अन्य अपीलकर्ता मोहर बाई से उम्र में बड़े हैं, इसलिए यह नहीं माना जा सकता कि मुकदमे की...

Motor Accident | मौत के बाद भी पारिवारिक बिज़नेस चलते रहने कारण ur आश्रितों के आर्थिक नुकसान का दावा खारिज नहीं किया जा सकता: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि मोटर दुर्घटना में कमाने वाले सदस्य की मौत के कारण आश्रितों को हुए आर्थिक नुकसान के दावे को सिर्फ़ इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता, क्योंकि मृतक जिस पैथोलॉजी सेंटर से जुड़ा था, उसे परिवार के किसी दूसरे सदस्य ने चलाना जारी रखा। [2026 LiveLaw (MP) 401]जस्टिस रामकुमार चौबे की बेंच ने इस धारणा को भी खारिज किया कि कमाने वाले सदस्य की मौत के बाद भी आश्रितों को आय मिल रही थी, सिर्फ़ इसलिए कि वह संस्थान (बिज़नेस) चलता रहा।कोर्ट ने कहा,"कमाने वाले सदस्य की मौत से जुड़े दावे...

चुने हुए पंचायत सदस्य को कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की मांग करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि पंचायत के चुने हुए सदस्य के पास किसी कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के लिए 'रिट ऑफ़ मैंडमस' (आदेश की रिट) की मांग करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। [2026 LiveLaw (MP) 400]इस बात पर ज़ोर देते हुए कि 'रिट ऑफ़ मैंडमस' का इस्तेमाल कानूनी अधिकार और उससे जुड़े कानूनी/सार्वजनिक कर्तव्य को लागू करने के लिए किया जाता है, जस्टिस विवेक कुमार सिंह की बेंच ने कहा:"यह तथ्य कि याचिकाकर्ता जनपद पंचायत का चुना हुआ सदस्य है और उसने किसी कर्मचारी के कामकाज के बारे में...

BNS की धारा 69 के तहत शादी के झूठे वादे के मामले में आपसी सहमति वाला रिश्ता अग्रिम ज़मानत का पक्का आधार नहीं: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी का यह दावा कि दोनों पक्षों के बीच रिश्ता आपसी सहमति से है, इसे अकेले ही BNS की धारा 69 (धोखे से या शादी का झूठा वादा करके यौन संबंध बनाना) के तहत अग्रिम ज़मानत पाने का पक्का आधार नहीं माना जा सकता। [2026 LiveLaw (MP) 399]जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की बेंच ने कहा:"हालांकि, इस चरण पर केवल यह दावा करना कि रिश्ता आपसी सहमति से है, इसे अकेले ही आवेदक के अग्रिम ज़मानत पाने के अधिकार का पक्का सबूत नहीं माना जा सकता।"अभियोजन पक्ष के अनुसार, शिकायतकर्ता महिला और आवेदक...

मूल विभाग में वापसी के बाद कर्मचारी पर कार्रवाई का अधिकार उधार लेने वाले विभाग को नहीं, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आरोपपत्र रद्द किया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि प्रतिनियुक्ति पर गए किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ उधार लेने वाला विभाग तभी तक अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है, जब तक उस विभाग और कर्मचारी के बीच नियोक्ता-कर्मचारी का संबंध कायम रहता है। कर्मचारी के अपने मूल विभाग में वापस भेजे जाने के बाद उधार लेने वाला विभाग उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई नहीं कर सकता।जस्टिस आनंद सिंह बहारवत की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कर्मचारी के खिलाफ जारी आरोपपत्र और विभागीय जांच के लिए जांच अधिकारी नियुक्त करने का आदेश रद्द किया। कोर्ट ने कहा...

बजट की कमी बताकर ठेकेदार का बकाया अनिश्चितकाल तक नहीं रोका जा सकता, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 5 लाख रुपये देने का आदेश दिया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि किसी ठेकेदार द्वारा पूरा किया गया काम का बकाया भुगतान केवल इस आधार पर अनिश्चितकाल तक नहीं रोका जा सकता कि विभाग के पास उसके लिए बजट का प्रावधान नहीं है। कोर्ट ने राज्य सरकार को ठेकेदार को 5 लाख रुपये की बकाया राशि 6 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ चार सप्ताह के भीतर जारी करने का निर्देश दिया।जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के ने ठेकेदार की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि जिस व्यक्ति ने उसे सौंपा गया काम पूरा कर दिया, उसे केवल विभाग द्वारा आवश्यक बजट प्रावधान नहीं किए जाने के...

त्विशा शर्मा हत्या मामला: दहेज हत्या की धारा हटने पर रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को जमानत अर्जी में संशोधन का निर्देश, 8 अक्टूबर को सुनवाई

भोपाल में बहू त्विशा शर्मा की असामान्य मौत से जुड़े मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रिटायर जज गिरिबाला सिंह को अपनी नियमित जमानत अर्जी में संशोधन करने का निर्देश दिया। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सिंह के खिलाफ दहेज हत्या की धारा हटाई और इसके स्थान पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 के तहत लगाया। हाईकोर्ट ने कहा कि बदली हुई धारा के मद्देनजर पहले जमानत अर्जी में संशोधन किया जाए और उसके बाद उस पर दलीलें रखी जाएं। मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को...

जूनियर वकीलों को शुरुआती तीन साल स्टाइपेंड देना जरूरी, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बार काउंसिल को गाइडलाइन बनाने का निर्देश दिया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जूनियर वकीलों के लिए न्यूनतम स्टाइपेंड तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश राज्य बार काउंसिल को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन के साथ परामर्श कर जूनियर वकीलों को शुरुआती तीन साल की प्रैक्टिस के दौरान दिए जाने वाले न्यूनतम स्टाइपेंड के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने को कहा।जस्टिस विशाल मिश्रा ने राज्य बार काउंसिल को छह महीने के भीतर यह प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। यह मामला अदालत को उस...

उज्जैन शाही मस्जिद विवाद: समझौते के बाद विध्वंस नोटिस के खिलाफ अपील का निपटारा, निगम के आश्वासन बाध्यकारी

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उज्जैन नगर निगम की ओर से शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाने के लिए जारी किए गए नोटिस के खिलाफ दायर अपील का निपटारा किया। अदालत ने यह आदेश मस्जिद की अधिकृत प्रशासनिक समिति और नगर निगम के बीच हुए समझौते को ध्यान में रखते हुए दिया।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच मामला पहले ही समझौते से सुलझ चुका है। हालांकि समझौते की विस्तृत शर्तें अदालत के सामने उपलब्ध नहीं थीं।मामला शाही मस्जिद वक्फ पांच मोचियान से जुड़ा था। नगर निगम ने...

सिर्फ आपराधिक मामला दर्ज होने या लंबित रहने से हथियार लाइसेंस निलंबित नहीं कर सकते: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि केवल आपराधिक मामला दर्ज होने या उसके लंबित रहने के आधार पर हथियार का लाइसेंस निलंबित नहीं किया जा सकता। लाइसेंस निलंबित करने से पहले सक्षम प्राधिकारी को शस्त्र अधिनियम की धारा 17 के तहत स्वतंत्र और तर्कसंगत संतुष्टि दर्ज करनी होगी।जस्टिस गजेंद्र सिंह की पीठ ने कहा कि लाइसेंस निलंबन का आदेश केवल किसी आपराधिक मामले के दर्ज होने, उसके लंबित रहने या हथियार के संभावित दुरुपयोग की सामान्य आशंका के आधार पर नहीं दिया जा सकता।अदालत एक सुरक्षा गार्ड की याचिका पर सुनवाई कर...

अनुच्छेद 227 पत्नी के दाम्पत्य अधिकारों की बहाली का मामला रद्द करने की याचिका सुनवाई योग्य नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने माना कि संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए कार्यवाही रद्द करने की मांग वाली याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। [2026 लाइव लॉ (एमपी) 387]जस्टिस अमित सेठ की पीठ ने कहा:"इस न्यायालय की सुविचारित राय है कि याचिकाकर्ता द्वारा भारत के संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत दायर वर्तमान विविध याचिका, जिसमें फैमिली कोर्ट, ग्वालियर के समक्ष हिंदू विवाह अधिनियम (HMA) की धारा 9 के तहत प्रतिवादी द्वारा शुरू की गई कार्यवाही रद्द करने की मांग की गई, सुनवाई योग्य नहीं है।...

लिखित में गिरफ्तारी कारण न बताना आर्टिकल 22(1) का उल्लंघन, लेकिन इससे अपने-आप ज़मानत का अधिकार नहीं मिल जाता: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी को गिरफ़्तारी के कारण लिखित में न बताना संविधान के आर्टिकल 22(1) का उल्लंघन है, लेकिन ऐसा न करने से आरोपी को ज़मानत का अधिकार अपने-आप नहीं मिल जाता। [2026 LiveLaw (MP) 386]जस्टिस अमित लाहोटी की बेंच ने कहा:"हालांकि, रिकॉर्ड से पता चलता है कि आवेदक को गिरफ़्तारी के कारण लिखित में नहीं बताए गए, जो भारत के संविधान के आर्टिकल 22(1) और माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा मिहिर राजेश शाह (ऊपर ज़िक्र किया गया) मामले में तय किए गए कानून का उल्लंघन है। फिर भी इस मामले के...

एमपी हाईकोर्ट ने तलाक के मामले में पत्नी की मेडिकल जांच की पति की मांग ठुकराई, कहा - बिना ठोस वजह के जांच की इजाज़त नहीं

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने तलाक की कार्यवाही के दौरान पति के कहने पर पत्नी की मेडिकल जांच कराने का आदेश रद्द किया। कोर्ट ने कहा कि ऐसी शक्ति का इस्तेमाल बिना ठोस वजह के या सिर्फ़ जानकारी जुटाने के मकसद से की जाने वाली जांच (roving or fishing inquiry) की इजाज़त देने के लिए नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब मामला अंतिम बहस के चरण में हो। [2026 LiveLaw (MP) 385]जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की बेंच ने कहा कि अगर कोई खास ज़रूरत न हो तो अंतिम बहस के चरण में मेडिकल जांच की इजाज़त नहीं दी जा सकती।बेंच ने कहा,"जब...

NDPS मामले में जब्त वाहन मालिक के लोन डिफॉल्ट पर फाइनेंसर को नहीं दिया जा सकता: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि NDPS Act के तहत किसी अपराध में जब्त किए गए वाहन की अंतरिम सुपुर्दगी केवल इस आधार पर फाइनेंसर को नहीं दी जा सकती कि पंजीकृत मालिक ने लोन की किस्तें चुकाना बंद किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोन समझौते से मिलने वाला वाहन वापस लेने का अधिकार संविदात्मक अधिकार है जिसका इस्तेमाल लंबित आपराधिक मामले में वाहन की सुपुर्दगी हासिल करने के लिए नहीं किया जा सकता।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की पीठ ने एसके फाइनेंस लिमिटेड की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।...

हाईकोर्ट ने सागर में ज़हरीली शराब से हुई मौतों की जांच की मांग वाली PIL का निपटारा किया, कहा- राज्य पहले ही कार्रवाई कर चुका है

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार, 22 सितंबर को सागर ज़िले में ज़हरीली शराब से हुई मौतों की जांच की मांग करने वाली जनहित याचिका (PIL) का निपटारा किया। [2026 LiveLaw (MP) 383]यह देखते हुए कि राज्य ने पहले ही हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में आयोग का गठन कर दिया और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है, चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीज़न बेंच ने याचिका का निपटारा किया।खंडपीठ ने कहा,"फिलहाल, राज्य द्वारा उठाए गए कदमों से संतुष्ट होने के बाद कोर्ट इस मामले में आगे...

11 मामलों में बरी होने के बावजूद लंबित दिखाया, एक ही दिन में NSA हिरासत आदेश; MP हाईकोर्ट ने किया रद्द

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत जारी एक व्यक्ति के निरोध आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि अधिकारियों ने रिकॉर्ड की सही जानकारी की जांच किए बिना यांत्रिक तरीके से कार्रवाई की और 11 ऐसे मामलों को लंबित बताया, जिनमें आरोपी पहले ही बरी हो चुका था।जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने कहा कि रिकॉर्ड से अधिकारियों की ओर से “दिमाग का इस्तेमाल न करने” (non-application of mind) की स्थिति स्पष्ट होती है।एक ही दिन में पूरी प्रक्रियामामले में...