मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

एमपी हाईकोर्ट का अहम फैसला: कोर्ट जांच एजेंसी को अपनी राय के मुताबिक चार्जशीट दाखिल करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि क्लोजर रिपोर्ट पर विचार करते समय अदालत जांच एजेंसी को केवल इसलिए चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश नहीं दे सकती कि अदालत जांच के नतीजे पर जांच एजेंसी की राय से सहमत नहीं है। जांच के बाद मामले में आरोप पत्र दाखिल किया जाए या क्लोजर रिपोर्ट पेश की जाए, इस संबंध में राय बनाना जांच एजेंसी के वैधानिक अधिकार क्षेत्र में आता है। हालांकि, कानून के तहत सक्षम अदालत को उपलब्ध न्यायिक अधिकार बरकरार रहते हैं।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी उस...

अगर मुद्दे एक जैसे हों और फ़ैसला करने के लिए कॉमन सबूत काफ़ी हों, तो सिविल मुकदमों को एक साथ मिलाया जा सकता है: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि सिविल मुकदमों को तभी एक साथ मिलाया जा सकता है जब उनमें शामिल मुद्दे एक जैसे हों और उन मुद्दों पर फ़ैसला करने के लिए कॉमन सबूत काफ़ी हों। [2026 LiveLaw (MP) 379]मुकदमों को एक साथ मिलाने की अर्ज़ी को खारिज करने वाले आदेश को चुनौती देने वाली रिविज़न याचिका खारिज करते हुए जस्टिस आशीष श्रोती की बेंच ने कहा:"इस तरह, दो मुकदमों को एक साथ मिलाया जा सकता है और मिलाया जाना चाहिए, जब उनमें शामिल मुद्दे एक जैसे हों (भले ही बिल्कुल एक न हों) और दोनों मुकदमों के लिए रिकॉर्ड किए...

गंभीर जालसाजी के मामलों में सिविल कोर्ट पुलिस को FIR दर्ज करने के लिए शिकायत भेजने का निर्देश दे सकता है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने कहा है कि गंभीर जालसाजी (Forgery) के आरोप वाले उपयुक्त मामलों में सिविल कोर्ट को अपनी अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए पक्षकार या गवाह को पुलिस के पास शिकायत भेजने और FIR दर्ज कराने का निर्देश देने का अधिकार है।जस्टिस गजेंद्र सिंह की पीठ ने कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, जो सिविल कोर्ट को इस तरह का निर्देश देने से रोकता हो। कोर्ट की यह शक्ति धारा 151 CPC में निहित अंतर्निहित अधिकार क्षेत्र से जुड़ी है।कोर्ट ने...

ड्यूटी से गैर-हाज़िरी और अपनी जगह किसी और से पढ़ाना ज़्यादा-से-ज़्यादा सर्विस मिसकंडक्ट, धोखाधड़ी नहीं: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक सरकारी टीचर के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी की FIR रद्द की। टीचर पर आरोप है कि उसने अपनी जगह किसी और व्यक्ति को पढ़ाने का काम सौंपा है। कोर्ट ने कहा कि ये आरोप ज़्यादा से ज़्यादा सर्विस मिसकंडक्ट (नौकरी से जुड़ी गड़बड़ी) के दायरे में आते हैं। [2026 LiveLaw (MP) 377]यह देखते हुए कि FIR में धोखाधड़ी के ज़रूरी तत्व नहीं है, जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच ने कहा,"इसके अलावा, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) को पढ़ने से पता चलता है कि धोखाधड़ी के ज़रूरी तत्वों में धोखा देना,...

यूक्रेन में MBBS कर रहे स्टूडेंट की एमपी हाईकोर्ट में गुहार- युद्ध के बीच NMC के 12 महीने की इंटर्नशिप वाले नियम का पालन करना नामुमकिन
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यूक्रेन में MBBS की पढ़ाई कर रहे एक स्टूडेंट की याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा। स्टूडेंट ने नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के 'फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंशिएट (FMGL) रेगुलेशंस 2021' को चुनौती दी है, खासकर उस नियम को जिसके तहत उसी विदेशी मेडिकल संस्थान में 12 महीने की इंटर्नशिप पूरी करना ज़रूरी है।याचिकाकर्ता का तर्क है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण इस शर्त को पूरा करना नामुमकिन हो गया, क्योंकि वह अनिवार्य इंटर्नशिप पूरी करने और ज़रूरी सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए यूक्रेन...

सर्जरी से पहले गर्भावस्था शुरू होने के कारण नसबंदी के बाद पैदा हुए बच्चे के लिए कोई मुआवज़ा नहीं: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें नसबंदी की प्रक्रिया फेल होने के आरोप पर मेडिकल लापरवाही के लिए मुआवज़ा देने से इनकार कर दिया गया। कोर्ट ने माना कि महिला की गर्भावस्था सर्जरी से पहले ही शुरू हो गई। [2026 LiveLaw (MP) 378]जस्टिस आशीष श्रोती की बेंच ने इस बात पर ज़ोर दिया:"इसलिए ट्रायल कोर्ट ने मामले के तथ्यों और सबूतों को सही ढंग से समझा और माना कि वादी (महिला) 04.07.2004 को हुए ऑपरेशन से पहले ही गर्भवती हो गई। इस प्रकार, यह आरोप साबित नहीं होता कि ऑपरेशन फेल...

'इंस्टाग्राम से संतुष्ट नहीं तो इस्तेमाल न करें': अकाउंट निलंबन मामले में एमपी हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कॉपीराइट उल्लंघन की शिकायतों के बाद इंस्टाग्राम पोस्ट हटाए जाने और अकाउंट निलंबित किए जाने को चुनौती देने वाली सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर की याचिका पर गुरुवार को फैसला सुरक्षित रख लिया।जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक रूसिया की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि इंस्टाग्राम की मालिक कंपनी मेटा है और यदि उपयोगकर्ता उसकी सेवाओं से संतुष्ट नहीं है तो वह प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल न करने का विकल्प चुन सकता है।याचिकाकर्ता '@memenasha' नाम से इंस्टाग्राम अकाउंट चलाता है और...

दतिया किले की संपत्ति विवाद में हाईकोर्ट की अंतरिम रोक, जमीन बेचने और तीसरे पक्ष का अधिकार बनाने पर पाबंदी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दतिया किले से जुड़े संपत्ति विवाद में अंतरिम राहत देते हुए अगली सुनवाई तक विवादित जमीन को बेचने, हस्तांतरित करने या उस पर किसी तीसरे पक्ष का अधिकार बनाने पर रोक लगाई।जस्टिस अमित सेठ की पीठ ने हेमलता सिंह और उनके बेटे की अपील पर प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए यह अंतरिम आदेश दिया। अपीलकर्ताओं ने ट्रायल कोर्ट के 24 मार्च 2026 के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उनकी अस्थायी निषेधाज्ञा की मांग खारिज कर दी गई। मूल दीवानी मुकदमे में उन्होंने विवादित संपत्तियों पर स्वामित्व की...

पिता से विरासत में मिली संपत्ति से अपने आप नहीं बनता संयुक्त हिंदू परिवार, बाद में खरीदी संपत्ति भी संयुक्त नहीं मानी जा सकती: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर कि भाइयों को पिता से कुछ संपत्ति संयुक्त रूप से विरासत में मिली है, यह मान लेना उचित नहीं है कि वे संयुक्त हिंदू परिवार या सहदायिकी के सदस्य हैं।अदालत ने स्पष्ट किया कि संयुक्त रूप से विरासत में मिली संपत्ति का होना और संयुक्त हिंदू परिवार या सहदायिकी का अस्तित्व, दोनों अलग-अलग बातें हैं। केवल विरासत में मिली संपत्ति के संयुक्त रूप से दर्ज होने से बाद में खरीदी गई हर संपत्ति को संयुक्त परिवार की संपत्ति नहीं माना जा सकता। जस्टिस विवेक जैन की पीठ ने...

पशु डॉक्टर 'बेजुबानों' का इलाज करते हैं, उनकी सेवाओं को कमतर नहीं आंका जा सकता: एमपी हाईकोर्ट ने मेडिकल/डेंटल सर्जन के बराबर टाइम-स्केल वेतन बरकरार रखा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पशु चिकित्सा विभाग के डॉक्टरों को मेडिकल ऑफिसर और डेंटल सर्जन के समान टाइम-स्केल वेतन का लाभ देने के सिंगल जज का आदेश बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि पशु डॉक्टर ऐसे मरीजों का इलाज करते हैं, जो अपनी तकलीफ बता नहीं सकते, इसलिए उनकी सेवाओं को किसी भी तरह कमतर नहीं आंका जा सकता।जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए कहा कि पशु चिकित्सक और मानव चिकित्सा के डॉक्टर अलग-अलग प्रजातियों का इलाज करते हैं, लेकिन दोनों ही समाज के उपचारक हैं।...

भ्रामक धारणा पर आधारित: नए राज्यपाल की नियुक्ति की मांग वाली जनहित याचिका मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने खारिज की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में नए राज्यपाल की नियुक्ति के लिए दायर जनहित याचिका खारिज की। कोर्ट ने कहा कि संविधान राज्यपाल के पद पर किसी तरह के संवैधानिक शून्य की स्थिति की कल्पना नहीं करता। मौजूदा राज्यपाल अपने उत्तराधिकारी के पदभार संभालने तक पद पर बने रह सकते हैं।जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की खंडपीठ ने याचिका को 'भ्रामक धारणा पर आधारित' बताते हुए खारिज किया। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 156(3) का हवाला देते हुए कहा कि यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि राज्यपाल तब तक पद पर बने...

छतरपुर फायरिंग केस: बागेश्वर धाम प्रमुख के भाई शालिग्राम को हत्या के प्रयास मामले में हाईकोर्ट से जमानत
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने छतरपुर के चर्चित फायरिंग मामले में हत्या के प्रयास के आरोपी शालिग्राम को नियमित जमानत दी। कोर्ट ने कहा कि आरोपी पर गोली चलाने की जो विशिष्ट भूमिका बताई गई, उसे जांच के दौरान सामने आए पूरे साक्ष्य और सामग्री के संदर्भ में देखा जाना आवश्यक है। इस स्तर पर कोर्ट को साक्ष्यों का सूक्ष्म परीक्षण या मामले की लघु सुनवाई करने की आवश्यकता नहीं है।जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की पीठ ने मामले की परिस्थितियों और आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को देखते हुए जमानत मंजूर की। कोर्ट ने स्पष्ट...

एमपी हाईकोर्ट ने राज्य को NCTE की योग्यता शर्तों के अनुसार हायर सेकेंडरी टीचर पद के लिए उम्मीदवारी पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य को निर्देश दिया है कि वह हिंदी के हायर सेकेंडरी टीचर पद के लिए याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी पर फिर से विचार करे। यह निर्देश WP 10018/2021 में दिए गए कोर्ट के फैसले के बाद दिया गया, जिसमें एमपी स्कूल शिक्षा सेवा और शर्त नियम, 2018 की अनुसूची 3 (Schedule 3) रद्द कर दी गई और यह कहा गया कि शैक्षणिक योग्यताएं नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) द्वारा तय की गई योग्यताओं के अनुसार होनी चाहिए। [2026 LiveLaw (MP) 371]अपने पिछले फैसले का हवाला देते हुए जस्टिस मिलिंद रमेश...

त्विशा शर्मा दहेज हत्या मामला: पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत पर CBI को जवाब के लिए मिला एक सप्ताह
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए CBI को एक सप्ताह का समय दिया। यह मामला उनकी बहू त्विशा शर्मा की मौत और दहेज उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा है।जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की पीठ ने CBI के वकील के अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को तय की। 33 वर्षीय त्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल स्थित अपने ससुराल में मृत मिली थीं। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2) के तहत दहेज मृत्यु, धारा 85 के तहत क्रूरता और धारा...

FIR दर्ज कराने के चरण में मृतक का मीडिया को दिया बयान मृत्यु पूर्व बयान नहीं माना जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि FIR दर्ज कराने की मांग के चरण में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सामने मृतक द्वारा कथित रूप से दिए गए बयान को निर्णायक रूप से मृत्यु पूर्व बयान नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे बयान की प्रामाणिकता, सामग्री और साक्ष्य के रूप में उसकी अहमियत का निर्धारण सबूतों के आधार पर किया जाना जरूरी है।जस्टिस हिमांशु जोशी की पीठ ने मृतक की पत्नी की उस अर्जी को खारिज किया, जिसमें पुलिस अधिकारियों पर उसके पति के साथ मारपीट करने और इसके कारण उसकी मौत होने का आरोप लगाते हुए FIR...

पूरी तरह निष्क्रिय रवैये पर हाईकोर्ट सख्त, अवमानना मामले में दो IAS अधिकारियों के गिरफ्तारी वारंट जारी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका में न तो वकील नियुक्त करने और न ही अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने पर दो IAS अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को कार्यवाही की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने मामले में उपस्थित होने की जरूरत तक नहीं समझी।जस्टिस विवेक जैन की पीठ ने राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार ने अवमानना याचिकाओं के मामलों में पूरी तरह निष्क्रियता अपना रखी है। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी केवल हाईकोर्ट की रजिस्ट्री को पत्र भेजकर...

महो सत्र न्यायालय में अतिरिक्त लोक अभियोजक की नई नियुक्ति का रास्ता साफ, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 8 सप्ताह में प्रक्रिया शुरू करने को कहा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इंदौर जिले के महो स्थित एडिशनल सेशन जज की अदालत में अतिरिक्त लोक अभियोजक की नई नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया। जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की पीठ ने स्पष्ट किया कि विभागीय नियमावली में किसी नियुक्ति की अवधि अधिकतम तीन वर्ष बताए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हर नियुक्ति तीन साल के लिए ही होगी। इसका अर्थ केवल यह है कि नियुक्ति अधिकतम तीन साल तक की अवधि के लिए की जा सकती है।मामले में याचिकाकर्ता ने विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अतिरिक्त सचिव की ओर...

S.164 Electricity Act | पावर ट्रांसमिशन लाइन बिछाने के लिए ज़मीन मालिक की मंज़ूरी ज़रूरी नहीं, मुआवज़े का अधिकार बना रहेगा: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि बिजली ट्रांसमिशन लाइन बिछाने के लिए ज़मीन मालिक की पहले से मंज़ूरी लेने की ज़रूरत नहीं है, अगर बिजली कंपनी को इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा 164 के तहत टेलीग्राफ अथॉरिटी की शक्तियां दी गई हैं। [2026 LiveLaw (MP) 366]एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीज़न बेंच ने साफ़ किया कि एक बार ऐसी शक्तियां मिल जाने के बाद कंपनी इंडियन टेलीग्राफ एक्ट, 1885 (ITA) की धारा 10 और 16 के तहत टेलीग्राफ अथॉरिटी को मिली शक्तियों का इस्तेमाल कर सकती है।कोर्ट...

बालाघाट में बैगा समुदाय के 25 बच्चों की मौत का मामला, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में बैगा समुदाय के 25 बच्चों की कथित तौर पर संक्रामक बीमारियों और कुपोषण के कारण हुई मौतों का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया।इस मामले में दायर जनहित याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा। याचिका में आरोप लगाया गया कि दूरदराज के गांवों में रहने वाले विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह के बच्चों को पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिसके चलते उन्हें गंभीर बीमारियों और कुपोषण का सामना करना पड़ रहा है। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस...

ई-रिक्शा के लिए देशभर में नीति बनाए केंद्र, 60 दिन में सभी राज्यों को भेजे: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को देशभर में ई-रिक्शा के संचालन को नियंत्रित करने के लिए 60 दिन के भीतर एक समान नीति तैयार कर सभी राज्यों को भेजने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि ई-रिक्शा की संख्या और उनके मार्गों को विनियमित करने की व्यवस्था जरूरी है, ताकि शहरों की सड़कों पर बढ़ती भीड़ और अव्यवस्था को कम किया जा सके।जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने केंद्र को निर्देश दिया कि ई-रिक्शा के संचालन के लिए ऐसी नीति तैयार की जाए, जिसमें किसी शहर की सड़क पर इनकी...
