मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

कोर्ट के समक्ष तथ्य रखना पेशेवर कदाचार नहीं, भले ही उससे दूसरे पक्ष को लाभ मिले : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि कोई लॉ ऑफिसर यदि अपने आधिकारिक कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करते हुए कोर्ट के सामने प्रासंगिक तथ्यों को रखता है, तो इसे पेशेवर कदाचार नहीं माना जा सकता, भले ही उन तथ्यों से किसी अन्य पक्ष को लाभ मिल जाए।एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने यह टिप्पणी दीपली न्यूज़ एडिटर द्वारा दायर रिट अपील खारिज करते हुए की। अपील में एक डिप्टी एडवोकेट जनरल (DAG) पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर (CMHO) का बचाव करने के लिए...

गेस्ट लेक्चरर नियमित कर्मचारियों के समान अतिरिक्त आकस्मिक अवकाश के हकदार नहीं : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि गेस्ट लेक्चरर नियमित सरकारी कर्मचारियों के समान अतिरिक्त आकस्मिक अवकाश (कैजुअल लीव) का दावा नहीं कर सकते। कोर्ट ने कहा कि गेस्ट लेक्चरर अस्थायी या आकस्मिक आधार पर नियुक्त किए जाते हैं और उनके सेवा नियम नियमित कर्मचारियों से अलग होते हैं।एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त द्वारा अतिथि व्याख्याताओं को 7 दिन का अतिरिक्त आकस्मिक अवकाश देने की मांग वाली याचिका खारिज करने का आदेश बरकरार रखा।कोर्ट ने कहा कि...

सिर्फ़ आपराधिक इतिहास के आधार पर संगठित अपराध का आरोप नहीं लगाया जा सकता, जब तक कि इसके लिए ज़रूरी शर्तें पूरी न हों: एमी हाईकोर्ट

एक आरोपी को ज़मानत देते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 के तहत 'ऑर्गनाइज़्ड क्राइम' (संगठित अपराध) का आरोप लगाने के लिए सिर्फ़ आपराधिक इतिहास का होना काफ़ी नहीं है, जब तक कि इस प्रावधान के लिए ज़रूरी कानूनी शर्तें शुरुआती तौर पर (prima facie) साबित न हो जाएं। [2026 LiveLaw (MP) 307]यह देखते हुए कि इस प्रावधान का इस्तेमाल अक्सर बिना यह जांचे किया गया कि क्या इसके लिए ज़रूरी बुनियादी शर्तें शुरुआती तौर पर पूरी होती हैं, जस्टिस रामकुमार चौबे की बेंच ने साफ़...

अगर सबूत मौजूद हों तो बिना किसी अर्ज़ी के भी कोर्ट को आरोपी की मानसिक क्षमता की जांच करनी चाहिए: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि अगर ऐसे सबूत मौजूद हैं, जिनसे आरोपी की ट्रायल का सामना करने की मानसिक क्षमता पर शुरुआती संदेह पैदा होता है तो ट्रायल कोर्ट की यह अनिवार्य ड्यूटी है कि वह जांच करे, भले ही इस संबंध में कोई अर्ज़ी दाखिल न की गई हो। [2026 LiveLaw (MP) 306]संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निष्पक्ष ट्रायल के अधिकार पर ज़ोर देते हुए जस्टिस गजेंद्र सिंह की बेंच ने कहा,"यही मुख्य कारण है कि कोड, संहिता और मेंटल हेल्थकेयर एक्ट में ऐसे प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिनके अनुसार किसी ऐसे व्यक्ति की...

सुप्रीम कोर्ट का राजद्रोह के आरोप को रोके रखने का निर्देश IPC, UAPA के तहत अन्य अपराधों पर ट्रायल जारी रखने से नहीं रोकता: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि एस.जी. वोम्बटकेरे बनाम भारत संघ [W.P.(Civil) 682/2021] मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला, जिसमें IPC की धारा 124A के तहत आरोपों को मामले के लंबित रहने तक रोके रखा गया, UAPA या IPC के तहत अन्य संबंधित अपराधों के लिए मुकदमा चलाने से पूरी छूट नहीं देता है। [2026 LiveLaw (MP) 302]यह देखते हुए कि कई कानूनों के तहत आरोप तय करने की प्रक्रिया को केवल इसलिए नहीं रोका जा सकता, क्योंकि एक धारा को रोके रखा गया, जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच ने कहा:"आरोप तय करने के लिए ज़रूरी...

मरने से पहले WhatsApp मैसेज में आरोपियों का नाम लेना शुरुआती तौर पर मरते समय दिया गया बयान माना जाएगा: एमपी हाई कोर्ट ने ज़मानत देने से इनकार किया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आत्महत्या करने से पहले मृतक द्वारा अपने पिता को भेजे गए WhatsApp मैसेज को, जिसमें आरोपी व्यक्तियों के नाम हैं, शुरुआती तौर पर 'मरते समय दिया गया बयान' (dying declaration) माना है। [2026 LiveLaw (MP) 304]जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच ने ट्रायल कोर्ट का आदेश बरकरार रखा, जिसमें अनुसूचित जाति के एक व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी तीन लोगों को ज़मानत देने से इनकार कर दिया गया था।"अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किया गया एक अहम सबूत मृतक के मोबाइल फोन से संबंधित पंचनामा...

किसी दूसरे केस में पहले से ही कस्टडी में दोषी को पुराने केस में सज़ा का सस्पेंशन खत्म होने के बाद दोबारा औपचारिक रूप से सरेंडर करने की ज़रूरत नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि जो दोषी पहले से ही किसी दूसरे क्रिमिनल केस में ज्यूडिशियल कस्टडी में है, उसे किसी पुराने केस में सज़ा के अस्थायी सस्पेंशन की अवधि खत्म होने के बाद दोबारा औपचारिक रूप से सरेंडर करने की ज़रूरत नहीं है। [2026 LiveLaw (MP) 301]यह देखते हुए कि कानून "बेमतलब या बेकार की औपचारिकताओं" पर ज़ोर नहीं देता, जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की बेंच ने कहा कि जेल अधिकारियों द्वारा कस्टडी रिकॉर्ड रखने में हुई प्रशासनिक चूक के कारण किसी कैदी को जेल में बिताई गई असल अवधि का क्रेडिट नहीं...

दुष्कर्म पीड़िता पत्नी का साथ न देना और पहली शादी रहते दूसरी शादी करना क्रूरता व परित्याग: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि पत्नी के साथ दुष्कर्म होने के बाद उसका साथ न देना और पहली शादी के रहते दूसरी शादी करना, दोनों ही वैवाहिक क्रूरता और परित्याग की श्रेणी में आते हैं।जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने परिवार न्यायालय द्वारा दिए गए तलाक के फैसले को बरकरार रखते हुए पति की अपील खारिज की।अदालत ने कहा,"पहली शादी विधिक रूप से कायम रहते दूसरी महिला से विवाह करना, जैसा कि स्वयं अपीलकर्ता ने स्वीकार किया है, क्रूरता और परित्याग दोनों...

980 के संदेह पर 2.5 करोड़ का पूरा बैंक अकाउंट फ्रीज करना उचित नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जारी किए अहम दिशा-निर्देश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने साइबर धोखाधड़ी के मामलों में बैंक अकाउंट फ्रीज करने की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि किसी अकाउंट में संदिग्ध राशि बहुत कम है तो पूरे अकाउंट को फ्रीज करना उचित नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि 980 की संदिग्ध राशि के आधार पर 2.5 करोड़ से अधिक की वैध धनराशि वाले पूरे बैंक अकाउंट को फ्रीज करना "अनुपातिकता के सिद्धांत" की कसौटी पर परखा जाना चाहिए।जस्टिस हिमांशु जोशी की एकल पीठ ने कहा कि जांच एजेंसियों के वैधानिक अधिकारों और नागरिक के...

वन बार वन वोट विवाद: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एचसी बार एसोसिएशन चुनाव के लिए प्रोविज़नल वोटर लिस्ट रद्द करने से किया इनकार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर में MPHC बार एसोसिएशन के चुनाव के लिए प्रोविज़नल वोटर लिस्ट (अस्थायी मतदाता सूची) रद्द करने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि यह चुनौती समय से पहले दी गई थी, क्योंकि अभी केवल प्रोविज़नल वोटर लिस्ट जारी की गई और रिटर्निंग ऑफिसर के पास बाय-लॉज़ (उप-नियमों) के तहत आपत्तियों पर विचार करने और वोटर लिस्ट को अंतिम रूप देने का अधिकार है। [2026 LiveLaw (MP) 296]यह फ़ैसला एक प्रैक्टिसिंग वकील द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनाया गया, जिसमें 'वन बार, वन वोट' नियम को लागू करने की...

फीस वृद्धि और स्टाइपेंड विवाद आत्महत्या के लिए उकसावा नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मेडिकल कॉलेज चेयरमैन को मिली राहत बरकरार रखी

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल स्टूडेंट की आत्महत्या से जुड़े मामले में मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन और एनेस्थीसिया विभाग के प्रमुख को आरोपमुक्त किए जाने के ट्रायल कोर्ट का आदेश बरकरार रखा।अदालत ने कहा कि फीस वृद्धि, अवकाश से इनकार स्टाइपेंड में कटौती और अन्य प्रशासनिक विवाद जब तक उनमें आत्महत्या के लिए प्रत्यक्ष उकसावे या आपराधिक मंशा का स्पष्ट प्रमाण न हो तब तक उन्हें आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण का अपराध नहीं माना जा सकता।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की पीठ ने राज्य सरकार की पुनर्विचार...

सरकारी कर्मचारी से जमानतदार की शर्त लगाना जमानत से वंचित करने जैसा: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दो युवकों की रिहाई का दिया आदेश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की जमानत इस शर्त पर मंजूर की जाए कि उसके लिए कोई सरकारी कर्मचारी जमानतदार बने, जबकि ऐसी शर्त पूरी कर पाना व्यवहारिक रूप से संभव न हो, तो यह वास्तव में जमानत से वंचित करने के समान है।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने राष्ट्रीय शिक्षित युवा संघ के दो सदस्यों की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार करते हुए उनकी रिहाई का आदेश दिया।मामला उन दो युवकों से जुड़ा है, जिन्हें राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET)...

जर्जर मंदिर से मूर्तियां दूसरे मंदिर में स्थापित करना पुजारी का कदाचार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि कोई मंदिर जर्जर और पूजा के लिए असुरक्षित हो जाए तो पूजा-अर्चना निर्बाध जारी रखने के लिए उसकी मूर्तियों को पास के किसी सुरक्षित और सक्रिय मंदिर में स्थापित करना पुजारी का कदाचार या कर्तव्य की उपेक्षा नहीं माना जा सकता।जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की एकल पीठ ने शिवपुरी जिले के राधा गोपालजी श्रीराम जानकी मंदिर के पुजारी को पद से हटाने का आदेश रद्द करते हुए यह टिप्पणी की।अदालत ने कहा,"जब कोई प्राचीन मंदिर पूजा के लिए असुरक्षित और अनुपयुक्त...

एक-तरफ़ा गुज़ारा-भत्ता आदेश जारी करने से पहले WhatsApp/ईमेल सर्विस का वेरिफ़िकेशन ज़रूरी: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि फ़ैमिली कोर्ट WhatsApp और ईमेल जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से भेजे गए नोटिस की डिलीवरी की पुष्टि किए बिना एक-तरफ़ा (ex-parte) आदेश पारित नहीं कर सकता। [2026 LiveLaw (MP) 295]इलेक्ट्रॉनिक सर्विस के वेरिफ़िकेशन में विफलता को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन मानते हुए जस्टिस जय कुमार पिल्लई ने एक-तरफ़ा गुज़ारा-भत्ता आदेश रद्द किया।कोर्ट ने कहा,"WhatsApp या ईमेल सर्विस की स्थिति का पता लगाने में विफलता प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की जड़ पर प्रहार करती है।...

इंदौर में ध्वनि प्रदूषण पर सख्त हुआ हाईकोर्ट, सरकार के जवाब पर जताई नाराजगी, कार्रवाई का मांगा शपथपत्र

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को लेकर राज्य सरकार के जवाब पर असंतोष जताते हुए सरकार को निर्देश दिया कि ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई का शपथपत्र पेश किया जाए।साथ ही यह भी बताया जाए कि मध्य प्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 की धारा 18 का पालन सुनिश्चित कराने के लिए इंदौर जिला कलेक्टर ने क्या कदम उठाए हैं। जस्टिस सुभोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने कहा कि सरकार की ओर से यह जरूर बताया गया कि ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ उचित...

बिजली चोरी में उपभोक्ता की देयता तय करने का अधिकार केवल विशेष अदालत को, वितरण कंपनी नहीं कर सकती वसूली तय: एमपी हाईकोर्ट

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिजली चोरी के मामलों में उपभोक्ता की सिविल देयता तय करने का अधिकार केवल बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 154 के तहत गठित विशेष अदालत को है। बिजली वितरण कंपनी या उसके अधिकारी स्वयं यह देयता निर्धारित कर मांग नहीं उठा सकते।जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के ने मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड का आदेश रद्द कर दिया, जिसके तहत कथित बिजली चोरी के मामले में याचिकाकर्ता पर 1 लाख 16 हजार 734 रुपये की सिविल देयता तय करते हुए राशि जमा करने का निर्देश दिया गया।अदालत...

जिस व्यक्ति के खिलाफ जनहित याचिका दायर की, उसी की ओर से अदालत में पैरवी: एमपी हाईकोर्ट ने BCI से मांगी जांच रिपोर्ट

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक वकील के आचरण पर गंभीर सवाल उठाते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) से यह जांच करने को कहा कि क्या उनका व्यवहार पेशेवर कदाचार की श्रेणी में आता है। मामला उस स्थिति से जुड़ा है, जिसमें एडवोकेट ने पहले एक अधिकारी के खिलाफ जनहित याचिकाएं दायर कीं और बाद में उसी अधिकारी की ओर से दूसरे मामलों में अदालत में पैरवी की।एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता एडवोकेट ने वर्ष 2025 में मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के...

मां के नौकरीपेशा होने से नाबालिग संतान के भरण-पोषण से पिता मुक्त नहीं, आय केवल राशि तय करने का आधार: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मां के नौकरीपेशा होने या नाबालिग संतान के उसके साथ रहने मात्र से पिता की भरण-पोषण की जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती। अदालत ने कहा कि मां की आय केवल भरण-पोषण की राशि तय करने में एक प्रासंगिक पहलू हो सकती है, लेकिन इससे पिता का कानूनी दायित्व स्वतः खत्म नहीं होता।जस्टिस पुष्पेन्द्र यादव की पीठ ने फैमिली कोर्ट का वह अंतरिम आदेश बरकरार रखा, जिसमें नाबालिग बेटी को 6,000 रुपये प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था, जबकि मां को अंतरिम भरण-पोषण देने...

जज से संपर्क करने के मामले में BJP MLA के खिलाफ अवमानना कार्यवाही समाप्त, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की सख्त चेतावनी

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक लंबित मामले की सुनवाई कर रहे जज से संपर्क करने के प्रयास को लेकर भारतीय जनता पार्टी विधायक (BJP MLA) संजय सत्येंद्र पाठक के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक अवमानना कार्यवाही समाप्त की। हाईकोर्ट ने उनकी बिना शर्त माफी स्वीकार करते हुए भविष्य में ऐसी हरकत दोबारा नहीं करने की सख्त चेतावनी दी।एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने माना कि विधायक का आचरण आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आता है। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि इस कृत्य से न्यायिक प्रक्रिया...