मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

इंदौर में ध्वनि प्रदूषण पर सख्त हुआ हाईकोर्ट, सरकार के जवाब पर जताई नाराजगी, कार्रवाई का मांगा शपथपत्र
इंदौर में ध्वनि प्रदूषण पर सख्त हुआ हाईकोर्ट, सरकार के जवाब पर जताई नाराजगी, कार्रवाई का मांगा शपथपत्र

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को लेकर राज्य सरकार के जवाब पर असंतोष जताते हुए सरकार को निर्देश दिया कि ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई का शपथपत्र पेश किया जाए।साथ ही यह भी बताया जाए कि मध्य प्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 की धारा 18 का पालन सुनिश्चित कराने के लिए इंदौर जिला कलेक्टर ने क्या कदम उठाए हैं। जस्टिस सुभोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने कहा कि सरकार की ओर से यह जरूर बताया गया कि ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ उचित...

बिजली चोरी में उपभोक्ता की देयता तय करने का अधिकार केवल विशेष अदालत को, वितरण कंपनी नहीं कर सकती वसूली तय: एमपी हाईकोर्ट
बिजली चोरी में उपभोक्ता की देयता तय करने का अधिकार केवल विशेष अदालत को, वितरण कंपनी नहीं कर सकती वसूली तय: एमपी हाईकोर्ट

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिजली चोरी के मामलों में उपभोक्ता की सिविल देयता तय करने का अधिकार केवल बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 154 के तहत गठित विशेष अदालत को है। बिजली वितरण कंपनी या उसके अधिकारी स्वयं यह देयता निर्धारित कर मांग नहीं उठा सकते।जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के ने मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड का आदेश रद्द कर दिया, जिसके तहत कथित बिजली चोरी के मामले में याचिकाकर्ता पर 1 लाख 16 हजार 734 रुपये की सिविल देयता तय करते हुए राशि जमा करने का निर्देश दिया गया।अदालत...

जिस व्यक्ति के खिलाफ जनहित याचिका दायर की, उसी की ओर से अदालत में पैरवी: एमपी हाईकोर्ट ने BCI से मांगी जांच रिपोर्ट
जिस व्यक्ति के खिलाफ जनहित याचिका दायर की, उसी की ओर से अदालत में पैरवी: एमपी हाईकोर्ट ने BCI से मांगी जांच रिपोर्ट

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक वकील के आचरण पर गंभीर सवाल उठाते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) से यह जांच करने को कहा कि क्या उनका व्यवहार पेशेवर कदाचार की श्रेणी में आता है। मामला उस स्थिति से जुड़ा है, जिसमें एडवोकेट ने पहले एक अधिकारी के खिलाफ जनहित याचिकाएं दायर कीं और बाद में उसी अधिकारी की ओर से दूसरे मामलों में अदालत में पैरवी की।एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता एडवोकेट ने वर्ष 2025 में मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के...

मां के नौकरीपेशा होने से नाबालिग संतान के भरण-पोषण से पिता मुक्त नहीं, आय केवल राशि तय करने का आधार: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मां के नौकरीपेशा होने से नाबालिग संतान के भरण-पोषण से पिता मुक्त नहीं, आय केवल राशि तय करने का आधार: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मां के नौकरीपेशा होने या नाबालिग संतान के उसके साथ रहने मात्र से पिता की भरण-पोषण की जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती। अदालत ने कहा कि मां की आय केवल भरण-पोषण की राशि तय करने में एक प्रासंगिक पहलू हो सकती है, लेकिन इससे पिता का कानूनी दायित्व स्वतः खत्म नहीं होता।जस्टिस पुष्पेन्द्र यादव की पीठ ने फैमिली कोर्ट का वह अंतरिम आदेश बरकरार रखा, जिसमें नाबालिग बेटी को 6,000 रुपये प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था, जबकि मां को अंतरिम भरण-पोषण देने...

जज से संपर्क करने के मामले में BJP MLA के खिलाफ अवमानना कार्यवाही समाप्त, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की सख्त चेतावनी
जज से संपर्क करने के मामले में BJP MLA के खिलाफ अवमानना कार्यवाही समाप्त, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की सख्त चेतावनी

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक लंबित मामले की सुनवाई कर रहे जज से संपर्क करने के प्रयास को लेकर भारतीय जनता पार्टी विधायक (BJP MLA) संजय सत्येंद्र पाठक के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक अवमानना कार्यवाही समाप्त की। हाईकोर्ट ने उनकी बिना शर्त माफी स्वीकार करते हुए भविष्य में ऐसी हरकत दोबारा नहीं करने की सख्त चेतावनी दी।एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने माना कि विधायक का आचरण आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आता है। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि इस कृत्य से न्यायिक प्रक्रिया...

जैन संत के बारे में अपमानजनक व्हाट्सएप पोस्ट: एमपी हाईकोर्ट ने दी अग्रिम ज़मानत, कहा- गिरफ़्तारी के बिना भी इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच हो सकती है
जैन संत के बारे में 'अपमानजनक' व्हाट्सएप पोस्ट: एमपी हाईकोर्ट ने दी अग्रिम ज़मानत, कहा- गिरफ़्तारी के बिना भी इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच हो सकती है

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक डॉक्टर समेत तीन लोगों को अग्रिम ज़मानत दी। इन पर आरोप है कि इन्होंने WhatsApp ग्रुप में जैन संत मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के ख़िलाफ़ अपमानजनक संदेश फैलाया था। [2026 LiveLaw (MP) 288]जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता की बेंच ने कहा कि यह मामला मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक सबूतों पर आधारित है, जिनकी जांच गिरफ़्तारी के बिना भी की जा सकती है।कोर्ट ने कहा,"अभियोजन का मामला मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड पर आधारित है। ऐसे मामलों में जांच आमतौर पर डिवाइस की फोरेंसिक जांच, कॉल...

शब्द सही नहीं थे, लेकिन धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं: माता सीता पर टिप्पणी मामले में व्यक्ति को राहत
'शब्द सही नहीं थे, लेकिन धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं': माता सीता पर टिप्पणी मामले में व्यक्ति को राहत

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक प्रोग्राम होस्ट को अग्रिम ज़मानत (Anticipatory Bail) दी। उन पर माता सीता के अपहरण से जुड़ी एक कविता (दोहा) सुनाकर धार्मिक दुश्मनी को बढ़ावा देने का आरोप था। कोर्ट ने कहा कि भले ही शब्दों का चुनाव सही न रहा हो, लेकिन पहली नज़र में इससे यह नहीं लगता कि उनका इरादा लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने या सांप्रदायिक अशांति फैलाने का था। [2026 LiveLaw (MP) 289]जस्टिस देवनारायण मिश्रा ने कहा:"वीडियो से यह साफ़ है कि आवेदक/कवि ने स्पष्ट रूप से कहा कि लंका की महिलाएं इस तरह चर्चा...

जिला कलेक्टर पुलिस को क्लोजर रिपोर्ट वापस लेने या दोबारा जांच के आदेश नहीं दे सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
जिला कलेक्टर पुलिस को क्लोजर रिपोर्ट वापस लेने या दोबारा जांच के आदेश नहीं दे सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि जिला कलेक्टर को किसी आपराधिक मामले में पुलिस को क्लोजर रिपोर्ट वापस लेने या जांच दोबारा शुरू करने का आदेश देने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा करना मजिस्ट्रेट के न्यायिक अधिकारों में कार्यपालिका के हस्तक्षेप के समान होगा, जो विधि के शासन के विपरीत है।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की सिंगल बेंच ने यह टिप्पणी सितंबर 2025 में जिला कलेक्टर द्वारा जारी उन आदेशों को रद्द करते हुए की, जिनमें कोतवाली थाना प्रभारी को क्लोजर रिपोर्ट वापस लेकर...

28 साल नौकरी कराने के बाद कर्मचारी को हटाना अनुचित, नियमित करें सेवा: एमपी हाईकोर्ट का राज्य सरकार को आदेश
28 साल नौकरी कराने के बाद कर्मचारी को हटाना अनुचित, नियमित करें सेवा: एमपी हाईकोर्ट का राज्य सरकार को आदेश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने करीब 28 वर्ष की सेवा के बाद एक कर्मचारी की नियुक्ति यह कहते हुए समाप्त किए जाने का आदेश रद्द किया कि राज्य सरकार को उसे हटाने के बजाय प्रत्यक्ष भर्ती वाले उपयुक्त पद पर नियमित करना चाहिए था।अदालत ने कहा कि कर्मचारी ने नियुक्ति पाने के लिए न तो कोई धोखाधड़ी की और न ही कोई गलत जानकारी दी थी।जस्टिस दीपक खोत की एकलपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि कर्मचारी की सेवाओं को प्रत्यक्ष भर्ती वाले उपयुक्त पद पर नियमित किया जाए। यदि वह पद कम वेतनमान वाला भी हो तब भी नियमों के...

एक ही गोत्र में शादी करने पर कथित तौर पर सामाजिक बहिष्कार का मामला: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जोड़े को दी सुरक्षा
'एक ही गोत्र' में शादी करने पर कथित तौर पर सामाजिक बहिष्कार का मामला: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जोड़े को दी सुरक्षा

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक ऐसे जोड़े को नोटिस जारी किया और अंतरिम सुरक्षा दी है, जिन्हें एक स्थानीय सामाजिक संगठन (संगठन) ने एक ही गोत्र (वंश) में शादी करने के कारण कथित तौर पर समाज से बहिष्कृत कर दिया।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने पुलिस को निर्देश दिया कि अगर जोड़े को परेशान किया जा रहा है, तो उन्हें सुरक्षा दी जाए।"प्रतिवादी संख्या 9 से 16 को P.F. के भुगतान पर 7 कामकाजी दिनों के भीतर नोटिस जारी किया जाए, जिसका जवाब 6 सप्ताह के भीतर आना चाहिए। राज्य के वकील को...

एमपी हाईकोर्ट ने कांग्रेस से जुड़े WhatsApp ग्रुप में AI-वीडियो फैलाने के मामले में हेबियस कॉर्पस याचिकाओं को बंद किया
एमपी हाईकोर्ट ने कांग्रेस से जुड़े WhatsApp ग्रुप में AI-वीडियो फैलाने के मामले में 'हेबियस कॉर्पस' याचिकाओं को बंद किया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 'हेबियस कॉर्पस' याचिकाओं के एक समूह को बंद किया। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि तीन लोगों को पुलिस ने गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया और बाद में राजस्थान पुलिस को सौंप दिया। उन पर कांग्रेस से जुड़े WhatsApp ग्रुप में एक न्यूज़ चैनल की पहचान का गलत इस्तेमाल करके AI से बदला हुआ (मैनिपुलेटेड) वीडियो फैलाने का आरोप है। [2026 LiveLaw (MP) 282]बता दें, राजस्थान पुलिस ने दावा किया कि एक न्यूज़ चैनल के क्राइम रिपोर्टर ने चैनल की पहचान का गलत इस्तेमाल करके AI से बदले गए...

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का फैसला: दंगे के मामले में सम्मानजनक बरी होने की जानकारी छिपाने पर पुलिस कांस्टेबल की बर्खास्तगी बरकरार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का फैसला: दंगे के मामले में सम्मानजनक बरी होने की जानकारी छिपाने पर पुलिस कांस्टेबल की बर्खास्तगी बरकरार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दंगे और ईंट-पत्थर फेंकने के मामले में लाभ के संदेह (बेनिफिट ऑफ डाउट) के आधार पर बरी हुए पुलिस कांस्टेबल की सेवा से बर्खास्तगी को सही ठहराया। हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने यह तथ्य छिपाया कि उसकी बरी होना सम्मानजनक (क्लीन) नहीं था। ऐसे व्यक्ति की पुलिस जैसे अनुशासित बल में नियुक्ति पुलिस की अनुशासन व्यवस्था और प्रतिष्ठा पर सवाल खड़े करेगी।जस्टिस दीपक खोत की एकलपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता की आपराधिक मामले में संलिप्तता भले ही संदेहास्पद रही हो लेकिन उसके खिलाफ लगाए गए आरोप...

हर शादी का अधूरा वादा रेप नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रेप और आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपी को किया बरी
'हर शादी का अधूरा वादा रेप नहीं': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रेप और आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपी को किया बरी

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल शादी से इनकार कर देने या शादी का वादा पूरा न होने मात्र से किसी व्यक्ति को दुष्कर्म (धारा 376 IPC) और आत्महत्या के लिए उकसाने (धारा 306 IPC) का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने कहा कि यह साबित होना जरूरी है कि आरोपी ने शुरुआत से ही शादी करने का इरादा नहीं रखा था और झूठा वादा केवल शारीरिक संबंध बनाने के लिए किया था।जस्टिस राजेंद्र कुमार वानी की पीठ ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि को रद्द करते हुए आरोपी को बरी कर...

अपील बहाल करते हुए अनोखा निर्देश: वृद्धाश्रम जाकर बुजुर्गों के साथ एक घंटा बिताएं, रिपोर्ट भी दें: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
अपील बहाल करते हुए अनोखा निर्देश: वृद्धाश्रम जाकर बुजुर्गों के साथ एक घंटा बिताएं, रिपोर्ट भी दें: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक रिट अपील बहाल करते हुए आवेदक को अनोखा निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि वह जबलपुर के तिलवारा वृद्धाश्रम जाकर वहां के बुजुर्गों के साथ एक घंटा बिताएं और 15 दिनों के भीतर अपने अनुभव, वृद्धाश्रम की स्थिति तथा सुझावों सहित रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करें।जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि यह मामला "सामाजिक लेखा-परीक्षण" की अवधारणा को परखने का अवसर है और वर्तमान समय में इसकी अत्यंत आवश्यकता है।मामला उस रिट अपील से जुड़ा था जिसे 18 जुलाई 2025 को पारित एक...

मंदिर के पुजारी की नियुक्ति के लिए सही प्रक्रिया की जगह विरासत या लंबी सेवा नहीं ले सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मंदिर के पुजारी की नियुक्ति के लिए सही प्रक्रिया की जगह विरासत या लंबी सेवा नहीं ले सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक सेवा, बाद में मिली मान्यता या प्रशासनिक बातचीत से पुजारी की नियुक्ति को सही नहीं ठहराया जा सकता। [2026 LiveLaw (MP) 273]जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की डिवीजन बेंच ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि मंदिर के पुजारी के तौर पर सेवा करने का अधिकार न तो हमेशा के लिए होता है और न ही इसे विरासत में पाया जा सकता है।"लंबे समय तक सेवा में बने रहने से पुजारी के पद पर नियुक्ति सही नहीं हो जाती, और न ही बाद में मिली मान्यता या प्रशासनिक बातचीत से...

अर्द्ध-न्यायिक कार्य करने वाले तहसीलदार को जजों जैसा कानूनी संरक्षण मिलेगा, पेंशन रोकने का आदेश रद्द: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
अर्द्ध-न्यायिक कार्य करने वाले तहसीलदार को जजों जैसा कानूनी संरक्षण मिलेगा, पेंशन रोकने का आदेश रद्द: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मुरैना के रिटायर संयुक्त कलेक्टर की याचिका स्वीकार करते हुए उनकी पेंशन पर लगाई गई रोक को रद्द किया।कोर्ट ने कहा कि अर्द्ध-न्यायिक कार्य करने वाले तहसीलदार को जजों की तरह कानूनी संरक्षण प्राप्त है, इसलिए अपने न्यायिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान किए गए कार्यों के लिए उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती, जब तक दुर्भावना या गंभीर कदाचार सिद्ध न हो।जस्टिस आनंद सिंह बहरावत की पीठ ने कहा कि मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता के तहत अधिकारों का प्रयोग करने वाला तहसीलदार जज संरक्षण...

52 वर्षीय महिला को IVF की अनुमति, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा- केवल उम्र के आधार पर नहीं रोका जा सकता उपचार
52 वर्षीय महिला को IVF की अनुमति, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा- केवल उम्र के आधार पर नहीं रोका जा सकता उपचार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक 52 वर्षीय महिला को इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) प्रक्रिया से संतान प्राप्ति की अनुमति देते हुए कहा कि यदि डाक्टर महिला को मेडिकल रूप से उपयुक्त मानते हैं तो केवल आयु सीमा के आधार पर उसे इस प्रक्रिया से वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस विशाल मिश्रा की पीठ ने दंपती की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि वे अपनी पसंद के किसी भी संस्थान में सहायक प्रजनन तकनीक (IVF) की प्रक्रिया करा सकते हैं। संबंधित संस्थान मेडिकल जांच के बाद यह तय करने के लिए स्वतंत्र होगा कि IVF किया जा सकता है...

साइबर ठगी में हर सेकंड अहम: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा- पुलिस, बैंक और दूरसंचार विभाग के बीच तुरंत समन्वय जरूरी
साइबर ठगी में हर सेकंड अहम: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा- पुलिस, बैंक और दूरसंचार विभाग के बीच तुरंत समन्वय जरूरी

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने साइबर अपराधों की जांच को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में हर सेकंड अहम होता है और जांच एजेंसियों को अपराधियों से अधिक तेज़ी से काम करना होगा। कोर्ट ने कहा कि जब तक सूचना जुटाने, तकनीकी जांच और मैदानी कार्रवाई के बीच समन्वित व्यवस्था नहीं होगी, तब तक समय पर अपराध का खुलासा और धन की बरामदगी मुश्किल रहेगी।जस्टिस हिमांशु जोशी की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय, दूरसंचार विभाग और भारतीय रिजर्व बैंक को पक्षकार बनाने की अनुमति...

COVID-19 के दौरान खत्म हुई भवन अनुमति पर राहत, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट बोला- वित्तीय हित किसी व्यक्ति के जीवन से ऊपर नहीं हो सकते
COVID-19 के दौरान खत्म हुई भवन अनुमति पर राहत, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट बोला- वित्तीय हित किसी व्यक्ति के जीवन से ऊपर नहीं हो सकते

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने COVID-19 महामारी के दौरान समाप्त हुई भवन निर्माण अनुमति के मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के जीवन से बढ़कर वित्तीय हित नहीं हो सकते। कोर्ट ने नगर निगम द्वारा आवेदक पर नई भवन अनुमति लेने और इसके लिए दोबारा शुल्क जमा करने का दबाव बनाने के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की।जस्टिस जी. एस. अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने नगर निगम की अपील खारिज करते हुए सिंगल बेंच का आदेश बरकरार रखा, जिसमें निगम को भूमि विकास नियम, 2012 के नियम 23(3) के तहत भवन...

प्रैक्टिसिंग वकील न होने की स्वीकारोक्ति के बाद रेप FIR रद्द, एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
प्रैक्टिसिंग वकील न होने की स्वीकारोक्ति के बाद रेप FIR रद्द, एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महिला द्वारा दर्ज कराई गई दुष्कर्म की एफआईआर को रद्द करते हुए कहा कि जब शिकायतकर्ता ने अदालत के समक्ष स्वयं स्वीकार कर लिया कि वह प्रैक्टिसिंग वकील नहीं है, तब आरोपी से उसकी मुलाकात का आधार ही संदेहास्पद हो गया। अदालत ने माना कि इस महत्वपूर्ण विरोधाभास ने अभियोजन के पूरे मामले की बुनियाद को कमजोर कर दिया है।जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने कहा कि महिला ने अपनी लिखित शिकायत और धारा 164 सीआरपीसी के बयान में खुद को कोटा में प्रैक्टिस करने वाली अधिवक्ता बताया था और दावा...