मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
दूसरी शादी के दस्तावेज को प्रमाणित करने पर मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने पूर्व नोटरी को लगाई कड़ी फटकार
मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने एडवोकेट की याचिका पर कड़ी नाराजगी जताई, जिसमें उसने अपनी नोटरी प्रैक्टिस समाप्त किए जाने के आदेश को चुनौती दी। यह कार्रवाई उस वकील के खिलाफ इसलिए की गई, क्योंकि उसने एक पक्षकार की दूसरी शादी के संपन्न होने से संबंधित दस्तावेज को प्रमाणित (अटेस्ट) किया, जबकि उसे ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं था।इतना ही नहीं यह प्रमाणन उस समय किया गया था जब संबंधित व्यक्ति की पहली शादी अभी भी कायम थी।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने...
सिर्फ़ हत्या का शक जांच ट्रांसफर करने के लिए काफ़ी नहीं: एमपी हाईकोर्ट ने बेटे की मौत की CBI जांच की पिता की याचिका खारिज की
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक व्यक्ति की अपने बेटे की मौत की जांच CBI को ट्रांसफर करने की याचिका खारिज की। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ शक, चाहे वह कितना भी गंभीर क्यों न हो, या पिता का यह मानना कि इसमें हत्या का एंगल है, जांच ट्रांसफर करने के लिए कानूनी तौर पर मान्य सबूतों की जगह नहीं ले सकता।जस्टिस मिलिंद रमेश फडके की बेंच ने कहा,"रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों से पता चलता है कि DNA प्रोफाइलिंग के ज़रिए मृतक की पहचान होने के बाद जांच एजेंसी ने सभी ज़रूरी गवाहों के बयान दर्ज करके, कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच...
सीनियरिटी से इंचार्ज पोस्टिंग का अधिकार नहीं मिलता, यह एडमिनिस्ट्रेटिव विवेक का मामला: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रिटायर्ड अधिकारी की कॉन्ट्रैक्ट पर दोबारा नियुक्ति को सही ठहराया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यह साफ किया कि कैडर में सीनियरिटी से प्रमोशन/इंचार्ज पोस्टिंग का यह कहते हुए अधिकार नहीं मिलता कि ऐसी नियुक्तियां पूरी तरह से एडमिनिस्ट्रेटिव विवेक के दायरे में आती हैं।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच ने कहा,"चार्ज सौंपना कोई अधिकार का मामला नहीं है, बल्कि एडमिनिस्ट्रेटिव विवेक का मामला है। इस कोर्ट के सामने कोई ऐसा कानूनी प्रावधान पेश नहीं किया गया, जो यह अनिवार्य करता हो कि निचले कैडर के सबसे सीनियर अधिकारी को ही उच्च पद का चार्ज दिया जाना चाहिए।"यह मामला मध्य प्रदेश...
IPC की धारा 407: गंतव्य से पहले माल उतारना भी आपराधिक विश्वासघात- जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता ने स्पष्ट किया कानून
मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण कानूनी फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि यदि किसी वाहक को माल सुपुर्द किया गया और वह उसे निर्धारित गंतव्य के बजाय रास्ते में ही कहीं और उतार देता है या मार्ग बदल देता है तो यह आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust) का अपराध माना जाएगा।जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता की पीठ ने कहा कि इस अपराध को स्थापित करने के लिए माल की वास्तविक बिक्री या उसके निपटान को साबित करना अनिवार्य नहीं है।पूरा मामलायह मामला मार्च, 2006 का है जब विदिशा के जिला आपूर्ति अधिकारी ने...
POCSO Act: उम्र छिपाने और फर्जी आधार के जरिए हुई शादी के मामले में मध्यप्रदेश हाइकोर्ट ने आरोपी को दी जमानत
मध्यप्रदेश हाइकोर्ट ने एक 34 वर्षीय व्यक्ति की जमानत याचिका स्वीकार की, जिस पर अपनी 15 वर्षीय पत्नी के साथ दुष्कर्म करने का गंभीर आरोप लगाया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता के साथ लड़की के परिवार ने धोखाधड़ी की थी और फर्जी आधार कार्ड के माध्यम से उसकी वास्तविक उम्र को छिपाकर यह विवाह संपन्न कराया गया।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की खंडपीठ ने इस तथ्य पर विशेष ध्यान दिया कि आरोपी ने इस मामले के प्रकाश में आने से पहले ही राजस्थान के बारां जिले में लड़की के परिजनों के विरुद्ध...
एमपी हाईकोर्ट ने बिना वैलिड पॉल्यूशन क्लीयरेंस के चल रही इंडस्ट्रीज़ के खिलाफ तुरंत कार्रवाई का निर्देश दिया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वह बिना वैलिड पॉल्यूशन क्लीयरेंस के चल रही सभी इंडस्ट्रीज़ के खिलाफ तुरंत और मिलकर कार्रवाई सुनिश्चित करें।कोर्ट एक स्थानीय अखबार में छपी खबर के आधार पर दर्ज की गई स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें बताया गया कि 5961 इंडस्ट्रीज़ एमपी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की वैलिड अनुमति के बिना चलाई जा रही हैं।जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने कहा,"हमें उम्मीद है कि राज्य इस गंभीर मामले पर तुरंत...
शादी के बाद राज्य परिवर्तन से महिलाओं का आरक्षण अधिकार समाप्त नहीं होता: एमपी हाइकोर्ट
मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने अहम फैसला देते हुए कहा कि जो महिलाएं विवाह से पहले किसी अन्य राज्य की निवासी थीं और शादी के बाद मध्य प्रदेश में स्थायी रूप से आकर बस गईं, उन्हें केवल इस आधार पर “प्रवासी” नहीं माना जा सकता। यदि उनका जाति वर्ग दोनों राज्यों में मान्यता प्राप्त आरक्षित श्रेणी में आता है तो उन्हें मध्य प्रदेश में सेवा और आरक्षण से जुड़े सभी लाभ मिलेंगे।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की पीठ ने स्पष्ट किया कि विवाह के बाद मध्य प्रदेश की स्थायी निवासी बन चुकी महिलाओं को राज्य की निवासी मानते हुए आरक्षण...
भर्ती में अधिक आयु होने पर पहले की देरी के आधार पर छूट नहीं मिल सकती: मध्य प्रदेश हाइकोर्ट
मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई अभ्यर्थी केवल इस आधार पर आयु में छूट का दावा नहीं कर सकता कि पूर्व की भर्ती प्रक्रिया में देरी हुई। अदालत ने कहा कि यदि कोई उम्मीदवार नई भर्ती विज्ञप्ति में निर्धारित आयु सीमा को पूरा नहीं करता है, तो वह पहले की भर्ती शर्तों के आधार पर राहत नहीं मांग सकता।यह टिप्पणी जस्टिस जय कुमार पिल्लै की पीठ ने बुधवार को की। हाइकोर्ट ने कहा कि भले ही वर्ष 2022 की भर्ती प्रक्रिया को पूरा होने में समय लगा हो लेकिन मात्र इस देरी से अभ्यर्थी के पक्ष में कोई स्थायी...
टाइटल सूट में ट्रायल कोर्ट, कब्ज़ा वापस दिलाने की राहत दिए बिना स्थायी रोक का आदेश नहीं दे सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार (14 जनवरी) को एक टाइटल सूट में ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने वादी को कब्ज़ा वापस दिलाने की राहत दिए बिना ही स्थायी रोक का आदेश देकर गलती की, जबकि कोर्ट ने यह माना था कि प्रतिवादी ने ज़मीन पर कब्ज़ा किया।जस्टिस विवेक जैन की बेंच ने कहा,"कोर्ट पहले ही इस नतीजे पर पहुंच चुका था कि प्रतिवादी ने ज़मीन पर कब्ज़ा किया और फैसले में यह भी लिखा कि प्रतिवादी को ज़मीन का खाली कब्ज़ा वादी को सौंपना होगा, लेकिन हैरानी की बात है कि आदेश में...
चाइनीज मांझे से पतंग उड़ाने पर नाबालिग के अभिभावक भी हो सकते हैं जिम्मेदार: मध्य प्रदेश हाइकोर्ट
मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने चाइनीज मांझे की अवैध बिक्री और उपयोग से जुड़े एक स्वतः संज्ञान जनहित मामले की सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की। हाइकोर्ट ने कहा कि यदि कोई नाबालिग चाइनीज नायलॉन मांझे से पतंग उड़ाते हुए पाया जाता है और उससे लापरवाही के कारण किसी की मृत्यु होती है, तो उस नाबालिग के अभिभावक को भी भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 106(1) के तहत जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने सोमवार को सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिए।अदालत ने कहा कि...
रिहायशी बिल्डिंग में वकील का ऑफिस 'कमर्शियल एक्टिविटी' नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार (13 जनवरी) को कहा कि रिहायशी बिल्डिंग में मौजूद वकील के ऑफिस को कमर्शियल एक्टिविटी नहीं माना जा सकता।जस्टिस जीएस अहलूवालिया की बेंच ने कहा;"जैसा कि पहले ही बताया गया, विवादित कमरा किसी कमर्शियल बिल्डिंग में नहीं, बल्कि एक रिहायशी बिल्डिंग में है। इसलिए किसी भी तरह से यह नहीं कहा जा सकता कि रिहायशी बिल्डिंग में मौजूद वकील का ऑफिस एक कमर्शियल एक्टिविटी है।"विवादित प्रॉपर्टी के मालिक, अपीलकर्ता ने प्रतिवादी को 500/- रुपये के मासिक किराए पर एक कमरा किराए पर दिया,...
आधार और वोटर आईडी जन्मतिथि का निर्णायक प्रमाण नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 13 जनवरी को एक अहम फैसले में कहा कि आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड किसी व्यक्ति की जन्मतिथि का निर्णायक और अंतिम प्रमाण नहीं माने जा सकते।अदालत ने स्पष्ट किया कि ये दस्तावेज़ स्व-घोषणा के आधार पर तैयार किए जाते हैं और इनका उद्देश्य केवल पहचान सुनिश्चित करना होता है, न कि जन्मतिथि जैसे सेवा संबंधी तथ्यों का निर्धारण करना।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की एकल पीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें धार जिले के अतिरिक्त कलेक्टर द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी गई...
परीक्षा का पहला चरण पास करने के लिए OBC कोटा का फायदा उठाने वाला उम्मीदवार बाद में अनारक्षित कैटेगरी में शिफ्ट नहीं हो सकता: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि जो उम्मीदवार परीक्षा के पहले चरण के लिए OBC कैटेगरी के तहत आरक्षण का फायदा उठाता है, वह बाद में परीक्षा के दूसरे चरण में अनारक्षित कैटेगरी में जाने की मांग नहीं कर सकता, अगर वह OBC उम्मीदवार के तौर पर दूसरा चरण पास नहीं कर पाता।ऐसा करते हुए कोर्ट ने महिला की याचिका खारिज की, जिसने 2023 पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा का पहला चरण OBC कैटेगरी के तहत पास करने के बाद दूसरे चरण में अनारक्षित कैटेगरी में जाने की मांग की थी, क्योंकि वह OBC कैटेगरी का कट-ऑफ पूरा नहीं कर...
अथॉरिटी सिर्फ़ राज्य से निर्देशों का इंतज़ार करते हुए डेवलपमेंट की इजाज़त देने से मना नहीं कर सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि डेवलपमेंट की इजाज़त देने वाली अथॉरिटी सिर्फ़ इस आधार पर मंज़ूरी रोक या मना नहीं कर सकती कि वे राज्य सरकार से निर्देशों का इंतज़ार कर रहे हैं।जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच ने कहा,"एक कानूनी अथॉरिटी को अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करना चाहिए और निर्देशों का इंतज़ार करने के बहाने काम करने से मना नहीं कर सकती, जब तक कि ऐसे निर्देश कानून द्वारा साफ़ तौर पर अनिवार्य न हों।"MGR डेवलपर्स ने अपनी प्रस्तावित आवासीय कॉलोनी 'विमल श्री शुभांगन' के लिए अथॉरिटी...
परिवार के सदस्य की सिर्फ़ बीमारी, जब हालत में सुधार हो रहा हो, तो अंतरिम ज़मानत देने का असाधारण आधार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार (12 जनवरी) को अस्थायी/अंतरिम ज़मानत मांगने वाली अर्ज़ी यह देखते हुए खारिज की कि परिवार के किसी सदस्य की सिर्फ़ बीमारी, खासकर जब हालत कंट्रोल में हो और उसमें सुधार हो रहा हो, तो अस्थायी/अंतरिम ज़मानत देने के लिए यह काफ़ी आधार नहीं है।जस्टिस मिलिंद रमेश फडके की बेंच ने कहा,"परिवार के किसी सदस्य की सिर्फ़ बीमारी, खासकर जब हालत कंट्रोल में हो और उसमें सुधार हो रहा हो, तो यह कोई असाधारण परिस्थिति नहीं है जिसके आधार पर गंभीर अपराधों वाले मामले में अस्थायी/अंतरिम ज़मानत...
Autonomous Medical PG Admission Rules | इन-सर्विस डॉक्टरों को ग्रामीण सेवा के लिए बॉन्ड देने की आवश्यकता नहीं : मध्य प्रदेश हाइकोर्ट
मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की सेवा में कार्यरत (इन-सर्विस) डॉक्टरों को मेडिकल पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स पूरा करने के बाद ग्रामीण सेवा के लिए बॉन्ड भरने की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने कहा कि मध्य प्रदेश स्वायत्त मेडिकल एवं दंत स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम (डिग्री/डिप्लोमा) प्रवेश नियम, 2017 का नियम 11 इन-सर्विस डॉक्टरों पर लागू नहीं होता।जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने यह टिप्पणी डॉ. दीपाली बैरवा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए की। याचिकाकर्ता ने भोपाल के...
कोर्ट लाइव-स्ट्रीम का गलत इस्तेमाल: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने YouTube, Instagram को आपत्तिजनक URL ब्लॉक करने का निर्देश दिया
रील्स, क्लिप और मीम्स के ज़रिए लाइव-स्ट्रीम की गई कोर्ट की कार्यवाही के गलत इस्तेमाल के आरोप वाली PIL पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार (12 जनवरी) को संबंधित प्लेटफॉर्म, YouTube और Instagram को 48 घंटे के अंदर आपत्तिजनक URL तक पहुंच ब्लॉक करने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सर्राफ की डिवीजन बेंच ने निर्देश दिया;"IA 24384/2025 के ज़रिए, याचिकाकर्ता ने Instagram और YouTube के आपत्तिजनक वीडियो के URL रिकॉर्ड पर रखे हैं। संबंधित प्रतिवादियों को आज से 48 घंटे...
पीड़िता के सहमति से वयस्क होने पर MP हाईकोर्ट ने POCSO सजा रद्द की, जज व अभियोजक से जवाब तलब
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने POCSO अधिनियम के तहत एक व्यक्ति की सजा को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि ट्रायल कोर्ट ने इस तथ्य को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया कि पीड़िता एक सहमति से संबंध में रहने वाली वयस्क (कंसेंटिंग एडल्ट) थी। इस मामले में न्यायालय ने यह भी पाया कि विशेष न्यायाधीश द्वारा की गई गंभीर चूक के कारण अभियुक्त को तीन वर्षों से अधिक समय तक जेल में रखा गया, जो न्याय के साथ अन्याय है।यह मामला जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रामकुमार चौबे की खंडपीठ के समक्ष आया। कोर्ट ने विशेष न्यायाधीश और लोक...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बिना लोकस स्टैंडी के लगाए गए अवैध खनन के आरोपों पर सुनवाई करने से किया इनकार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अवैध रेत खनन और खनन लीज के आवंटन का आरोप लगाने वाली याचिका यह देखते हुए खारिज की कि याचिका एक ऐसे याचिकाकर्ता ने दायर की थी, जिसने अपना लोकस नहीं बताया। ऐसा लग रहा था कि यह याचिका किसी एक व्यक्ति से निजी दुश्मनी निकालने के लिए दायर की गई।जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने कहा;"याचिकाकर्ता के अनुसार, प्रतिवादी नंबर 3 से 5 अवैध रेत खनन में लगी फर्में हैं और कथित तौर पर प्रतिवादी नंबर 6 और 7, जो सरकारी अधिकारी हैं, उसके साथ मिलकर काम कर रही हैं। यह...
सरकारी भूमि पर बिना स्वामित्व लंबे समय तक कब्जा होने से निषेधाज्ञा का अधिकार नहीं मिलता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार (9 जनवरी) को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के एक अधिकारी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने सरकारी जमीन पर अपने कब्जे का दावा किया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भूमि पर लंबे समय तक कब्जा मात्र से, बिना किसी वैध अधिकार के, कोई कानूनी हक या संरक्षण नहीं मिलता।जस्टिस हिर्देश की पीठ ने कहा कि—“जिस व्यक्ति के पास विवादित संपत्ति पर कोई वैधानिक अधिकार या स्वामित्व नहीं है, वह अनधिकृत कब्जेदार या अतिक्रमणकारी होता है। ऐसे व्यक्ति को उस भूमि के संबंध में...


















