मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
अंतर-धार्मिक के जोड़ों को लगातार पुलिस सुरक्षा पाने के लिए खतरे का स्पष्ट सबूत दिखाना होगा: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अलग-अलग धर्मों के जोड़े की याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने चौबीसों घंटे (24 घंटे) पुलिस सुरक्षा, जिसमें रात के समय विशेष सुरक्षा भी शामिल थी, की मांग की थी। कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि लगातार पुलिस सुरक्षा की हर याचिका में खतरे का स्पष्ट सबूत होना चाहिए, न कि सिर्फ़ आम आशंकाएं या इक्का-दुक्का घटनाएं।याचिकाकर्ताओं ने विशेष रूप से प्रतिवादियों की 13.04.2026 की कार्रवाई रद्द करने या उसमें बदलाव करने की मांग की थी। इस कार्रवाई के तहत उनकी सुरक्षा के लिए पहले तैनात किए गए...
Twisha Sharma Dowry Death Case: सास गिरिबाला सिंह की अग्रिम ज़मानत को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगा हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार (25 मई) को त्विशा शर्मा की सास गिरिबाला सिंह से कथित दहेज हत्या मामले में उन्हें दी गई अग्रिम ज़मानत को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जवाब मांगा।जस्टिस देवनारायण मिश्रा की सिंगल जज बेंच ने पीड़ित के माता-पिता की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा (जिनके साथ एडवोकेट अनुराग श्रीवास्तव भी हैं) की दलीलें सुनीं। लूथरा ने याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई की मांग की।लूथरा ने कोर्ट को बताया कि दो संबंधित मामले सूचीबद्ध हैं- एक राज्य सरकार द्वारा दायर और दूसरा पीड़ित के...
'पेमेंट ऑफ़ ग्रेच्युटी एक्ट' की शर्तें पूरी न होने तक कर्मचारी को नौकरी से निकालने पर ग्रेच्युटी अपने-आप ज़ब्त नहीं की जा सकती: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि सिर्फ़ नौकरी से निकाल देने भर से ग्रेच्युटी अपने-आप ज़ब्त नहीं हो जाती, जब तक कि एक्ट के तहत तय कानूनी शर्तें पूरी न हो जाएं।कोर्ट ने सेंट्रल एमपी ग्रामीण बैंक की तरफ़ से दायर अपील भी खारिज की। इस अपील में बैंक ने सिंगल जज के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें बैंक को निर्देश दिया गया कि वह एक मृत कर्मचारी की विधवा को ग्रेच्युटी का भुगतान करे। उस कर्मचारी को पैसों के गबन के आरोपों के चलते नौकरी से निकाल दिया गया।जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की...
BCI के नियम वकील-आरोपी को सह-आरोपी का प्रतिनिधित्व करने से नहीं रोकते: एमपी हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी का मामला रद्द किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक वकील के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही रद्द की। इस वकील ने एक आपराधिक मामले में अपने बेटे की ओर से पेश होकर उसका प्रतिनिधित्व किया, जबकि उस मामले में वे दोनों ही आरोपी थे। कोर्ट ने यह फैसला देते हुए कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम किसी सह-आरोपी वकील को किसी अन्य आरोपी का प्रतिनिधित्व करने से नहीं रोकते हैं।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने यह टिप्पणी की:"ऊपर जिस बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम 13 का ज़िक्र किया गया, वह 'मुवक्किल के प्रति...
त्विशा शर्मा दहेज हत्या मामला: पति समर्थ सिंह ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका वापस ली
त्विशा शर्मा दहेज मौत मामले में आरोपी पति समर्थ सिंह ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से अपनी अग्रिम जमानत याचिका वापस ले ली है। मामले की सुनवाई शुक्रवार को जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह की पीठ ने की।अदालत ने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता समर्थ सिंह की ओर से पेश वकील ने अग्रिम जमानत याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी और कहा कि वह ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करना चाहते हैं। अदालत ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि आरोपी चाहे तो जांच अधिकारी या ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण कर सकता है।अदालत ने कहा,“यदि...
POSH शिकायतों की जांच ICC/LCC तंत्र के बाहर किसी समानांतर जांच प्राधिकरण द्वारा नहीं की जा सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि यौन उत्पीड़न की रोकथाम अधिनियम (POSH Act), 2013 के तहत शिकायतों की जांच या उनका निपटारा आंतरिक शिकायत समिति (ICC) या स्थानीय शिकायत समिति (LCC) के ढांचे के बाहर किसी भी समानांतर प्राधिकरण द्वारा नहीं किया जा सकता।जस्टिस आशीष श्रोती की पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे किसी समानांतर प्राधिकरण को अनुमति देने से POSH Act का उद्देश्य ही कमजोर हो जाएगा।पीठ ने कहा:"यदि किसी नियोक्ता को कार्यस्थल पर किसी महिला द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए...
ट्विशा शर्मा दहेज मौत मामला: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एम्स दिल्ली की टीम से दोबारा पोस्टमार्टम कराने के दिए निर्देश
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ट्विशा शर्मा दहेज मौत मामले में बड़ा आदेश देते हुए मृतका का दोबारा पोस्टमार्टम कराने की अनुमति दी। अदालत ने निर्देश दिया कि दूसरा पोस्टमार्टम एम्स दिल्ली के विशेषज्ञों की टीम द्वारा भोपाल में किया जाए।जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह ने शुक्रवार को ट्विशा शर्मा के पिता की याचिका पर यह आदेश पारित किया।सुनवाई के दौरान पति पक्ष के वकील ने दोबारा पोस्टमार्टम का विरोध करते हुए कहा कि इससे राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं का अपमान होगा। उन्होंने दलील दी कि पहले पोस्टमार्टम पर संदेह जताने के...
बरगी डैम नाव हादसे पर गठित न्यायिक जांच आयोग के बाद MP हाईकोर्ट ने PILs का किया निपटारा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर के बरगी डैम नाव हादसे को लेकर दायर जनहित याचिकाओं (PILs) के एक समूह का निपटारा कर दिया है। अदालत ने यह फैसला राज्य सरकार की उस जानकारी के बाद दिया, जिसमें बताया गया कि हादसे की जांच के लिए एक पूर्व हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग गठित किया जा चुका है।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ के समक्ष अतिरिक्त महाधिवक्ता एचएस रूपराह ने बताया कि आयोग ने आम जनता से सुझाव भी मांगे हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि 1 मई 2026 के आदेश के तहत...
ट्विशा शर्मा दहेज मृत्यु मामला: सास को मिली अग्रिम जमानत रद्द कराने हाईकोर्ट पहुंचे मृतका के पिता
ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़े दहेज उत्पीड़न मामले में उसके पिता नवनीधि शर्मा ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मृतका की सास गिरीबाला सिंह को दी गई अग्रिम जमानत को चुनौती दी।33 वर्षीय ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल स्थित अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2) के तहत दहेज मृत्यु, धारा 85 के तहत क्रूरता और धारा 3(5) के तहत समान आशय के आरोपों में FIR दर्ज की गई। इसके अलावा दहेज निषेध अधिनियम की धाराओं 3 और 4 के तहत भी मामला दर्ज किया गया।ट्विशा के...
ट्विशा शर्मा दहेज मृत्यु मामला: आरोपी वकील-पति समार्थ सिंह ने अग्रिम जमानत के लिए किया मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख
ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़े दहेज उत्पीड़न मामले में आरोपी वकील समार्थ सिंह ने अग्रिम जमानत के लिए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। समार्थ सिंह के खिलाफ पत्नी को प्रताड़ित करने और दहेज उत्पीड़न के आरोपों में FIR दर्ज की गई।यह याचिका ऐसे समय दायर की गई जब भोपाल की सेशन कोर्ट ने सोमवार को उनकी अग्रिम जमानत अर्जी खारिज की थी। अदालत ने कहा था कि FIR और व्हाट्सऐप चैट्स के अवलोकन से प्रथम दृष्टया मुख्य आरोप समार्थ सिंह के खिलाफ दिखाई देते हैं।हाईकोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार,...
आदेश में सभी दलीलों का उल्लेख न होने से जज को पक्षपाती नहीं कहा जा सकता : मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने न्यायिक पक्षपात की आशंका जताते हुए दायर स्थानांतरण आवेदन खारिज करते हुए कहा कि केवल इस आधार पर किसी जज को पक्षपाती नहीं कहा जा सकता कि अदालत के आदेश में किसी पक्ष की कुछ दलीलों का उल्लेख नहीं किया गया।जस्टिस हिमांशु जोशी की पीठ ने कहा कि अदालत हर उस दलील को आदेश में दर्ज करने के लिए बाध्य नहीं होती, जिसका विवाद के मूल मुद्दों से सीधा संबंध न हो।अदालत ने कहा,“न्यायिक आदेशों में केवल महत्वपूर्ण तथ्यों, लागू कानून और उन तर्कों का उल्लेख आवश्यक होता है, जिनका विवाद के निपटारे...
निजी मंदिरों के प्रबंधन में दखल नहीं दे सकती सरकार: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार किसी निजी मंदिर के प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। अदालत ने राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया है कि किसी भी मंदिर पर प्रबंधन योजना लागू करने से पहले यह तय किया जाए कि वह मंदिर सार्वजनिक है या निजी।जस्टिस दीपक खोत की पीठ ने यह आदेश डूंडा सिवनी गांव स्थित एक शिव मंदिर के सर्वराकर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में लोक न्यास रजिस्ट्रार द्वारा मंदिर के प्रबंधन के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित करने के आदेश को चुनौती दी गई।अदालत ने...
अंतरधार्मिक विवाह को अपराध साबित करने के लिए फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाने का आरोप: हाईकोर्ट पहुंची कुंभ की वायरल गर्ल 'मोनालिसा'
महाकुंभ मेले के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुईं मोनालिसा भोसले ने अपने पति फरमान के साथ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया। दंपति ने आरोप लगाया कि उनके अंतरधार्मिक विवाह को अपराध साबित करने के लिए मोनालिसा का जन्म प्रमाणपत्र फर्जी तरीके से बदला गया।याचिका में अदालत से मोनालिसा का मूल जन्म प्रमाणपत्र बहाल करने और सरकारी रिकॉर्ड में कथित जालसाजी की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई।मोनालिसा भोसले पिछले वर्ष महाकुंभ के दौरान रुद्राक्ष की माला बेचते हुए सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जिसके बाद उन्हें...
बिना विभागीय जांच के अवज्ञा के आरोप पर कर्मचारी को नौकरी से निकालना कानूनी तौर पर गलत: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि किसी कर्मचारी को अवज्ञा या अनुशासनहीनता के आरोपों पर बिना उसे ठीक से बनी जांच में सबूत पेश करने का मौका दिए, नौकरी से निकालना कानूनी तौर पर गलत है; इसलिए ऐसी बर्खास्तगी मान्य नहीं है।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच ने कहा कि प्रतिवादियों ने याचिकाकर्ता को सिर्फ़ एक 'कारण बताओ नोटिस' जारी करके और उसके जवाब को असंतोषजनक बताकर खारिज करके, बिना कोई औपचारिक विभागीय जांच किए उसकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं।कोर्ट ने कानून की स्थापित स्थिति को दोहराते हुए कहा कि भले ही कोई...
उधार लेने वाला विभाग, बिना पूरी विभागीय जांच किए अनुपयुक्तता के आधार पर प्रतिनियुक्ति पर आए कर्मचारी को वापस भेज सकता है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक सरकारी कर्मचारी की याचिका खारिज करते हुए, जिसमें उसने अपने मूल विभाग में समय से पहले वापस भेजे जाने को चुनौती दी थी, यह टिप्पणी की कि किसी सरकारी कर्मचारी को उसके मूल विभाग में वापस भेजना, केवल सक्षम अधिकारी की संतुष्टि के आधार पर भी वैध है।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच इस बात पर विचार कर रही थी कि क्या याचिकाकर्ता के निर्धारित विस्तारित कार्यकाल को समय से पहले खत्म करना एक 'कलंकपूर्ण दंड' (Stigmatic Punishment) माना जाएगा, जिसके लिए एक पूरी तरह से विभागीय जाँच की...
भोजशाला विवाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपनाए अयोध्या फैसले के 10 अहम सिद्धांत
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोजशाला परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर दिए गए अपने महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या मामले के निर्णय में तय किए गए 10 प्रमुख सिद्धांतों को आधार बनाया। हाईकोर्ट ने कहा कि विवादित भोजशाला स्थल मां सरस्वती को समर्पित मंदिर है।जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 2003 के उस आदेश को आंशिक रूप से रद्द कर दिया, जिसमें हिंदुओं के पूजा अधिकार सीमित किए गए थे और मुस्लिम पक्ष को वहां नमाज की अनुमति दी गई...
रक्षा और सुरक्षा परियोजनाओं के लिए पेड़ काटने पर पूर्व अनुमति जरूरी नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भारतीय सेना को राहत देते हुए स्पष्ट किया कि रक्षा और सुरक्षा संबंधी अधोसंरचना परियोजनाओं पर पेड़ काटने के लिए पूर्व अनुमति संबंधी उसका पुराना आदेश लागू नहीं होगा, यदि संबंधित भूमि वन संरक्षण अधिनियम की धारा 1ए के तहत छूट प्राप्त श्रेणी में आती है।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने कहा कि वन संरक्षण अधिनियम, 1980 में संशोधन के बाद सुरक्षा संबंधी परियोजनाओं को विशेष छूट दी गई। इसलिए 26 नवंबर 2025 को पारित आदेश को उसी सीमा तक लागू माना जाएगा, जहां...
BREAKING| मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोजशाला स्थल को घोषित किया मंदिर, नमाज़ पढ़ने की अनुमति वाला सर्कुलर रद्द किया
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने घोषणा की कि भोजशाला का विवादित ऐतिहासिक स्थल देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर है।'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' और अन्य लोगों द्वारा दायर रिट याचिकाओं को स्वीकार करते हुए जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने कहा:"हमने इस स्थल पर हिंदू पूजा-अर्चना की निरंतरता को नोट किया। हालांकि समय के साथ इसे विनियमित किया गया... हम यह निष्कर्ष दर्ज करते हैं कि इस जगह का ऐतिहासिक साहित्य इसे राजा भोज से जुड़े संस्कृत सीखने के केंद्र के रूप में स्थापित करता है... यह धार...
शराब कारोबारी की आत्महत्या मामले में CBI जांच के आदेश, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने FIR में देरी पर पुलिस को फटकार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शराब कारोबारी की आत्महत्या मामले में बड़ा आदेश देते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को FIR दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि स्थानीय पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी FIR दर्ज करने में जानबूझकर देरी करते दिखे और ऐसा प्रतीत होता है कि वे आबकारी अधिकारी के प्रभाव में काम कर रहे थे।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की पीठ ने कहा कि मृतक द्वारा छोड़े गए वीडियो सुसाइड नोट में जिन रकमों का उल्लेख किया गया, वे बेहद बड़ी हैं और आत्महत्या से पहले वीडियो रिकॉर्ड किया जाना मामले को...
बुजुर्ग माता-पिता को संपत्ति बेचने से यूं ही नहीं रोका जा सकता, बच्चों को पहले साबित करने होंगे अधिकार: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि बच्चे मामूली आधार पर अदालत पहुंचकर अपने बुजुर्ग माता-पिता को संपत्ति का उपयोग करने या उसे बेचने से नहीं रोक सकते। अदालत ने कहा कि ऐसा करने से पहले बच्चों को यह प्रथम दृष्टया साबित करना होगा कि संपत्ति संयुक्त पारिवारिक संपत्ति है और उसमें उनका जन्मसिद्ध अधिकार मौजूद है।जस्टिस विवेक जैन की सिंगल बेंच ने निचली अपीलीय अदालत के आदेश को सही ठहराते हुए पिता की चार में से दो संपत्तियों को संयुक्त पारिवारिक संपत्ति माना जबकि बाकी दो...


















