मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मुकदमा चलाने के लिए दहेज की रकम पर पहले से सहमति होना ज़रूरी नहीं; शादी के बाद दहेज की मांग करना भी दंडनीय: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि शादी के बाद की गई दहेज की मांग पर भी 'दहेज निषेध अधिनियम' की धारा 4 लागू हो सकती है, भले ही शादी से पहले दहेज को लेकर कोई समझौता न हुआ हो। [2026 LiveLaw (MP) 419]अपीलीय अदालत के उस आदेश को रद्द करते हुए, जिसमें एक पति और उसके पिता को बरी कर दिया गया था, जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने कहा,"यह एक संस्कृति या परंपरा है कि दहेज अधिनियम की धारा 4 के तहत अपराध के लिए पहले से दहेज का कोई समझौता होना अनिवार्य शर्त नहीं है"... "दहेज" का अर्थ है कोई भी संपत्ति या कीमती वस्तु,...

Twisha Sharma Dowry Death Case: एमपी हाईकोर्ट ने गिरीबाला सिंह की ज़मानत अर्ज़ी पर अंतिम सुनवाई के लिए 26 अक्टूबर की तारीख तय की

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपनी बहू त्विशा शर्मा की दहेज हत्या के मामले में आरोपी रिटायर्ड जज गिरीबाला सिंह की नियमित ज़मानत अर्ज़ी पर अंतिम सुनवाई के लिए 26 अक्टूबर की तारीख तय की।जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की बेंच ने इस मामले की सुनवाई के लिए सुबह 10:30 बजे का समय निर्धारित किया।सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि त्विशा शर्मा के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने इस मामले की कार्यवाही को मध्य प्रदेश से दिल्ली स्थानांतरित (ट्रांसफर) करने की मांग...

वैध अनुमति के बिना फैक्ट्री चलाना अपराध, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बिना कारण बताओ नोटिस दिए तत्काल बंद करा सकता है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि वैध अनुमति के बिना फैक्ट्री चलाना अपराध है और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर्यावरण को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए तत्काल फैक्ट्री बंद करने का आदेश दे सकता है। ऐसी स्थिति में कारण बताओ नोटिस जारी करना अनिवार्य नहीं है, क्योंकि अवैध रूप से फैक्ट्री चलाने वाले संचालक को नोटिस न दिए जाने से उसके किसी कानूनी अधिकार का उल्लंघन नहीं होता।इसी टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने एक स्टील फैक्ट्री की याचिका खारिज की, जिसमें बिना कारण बताओ नोटिस दिए फैक्ट्री बंद करने के आदेश को...

अभियोजन की मंजूरी देने वाले अधिकारी को सबूतों का स्वतंत्र रूप से आकलन करना चाहिए, न कि ट्रायल कोर्ट के शुरुआती निष्कर्षों से प्रभावित होना चाहिए: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन की मंजूरी (Prosecution Sanction) देने के लिए अधिकृत अधिकारी को इस सवाल पर स्वतंत्र रूप से विचार करना चाहिए। वह किसी लोक सेवक के खिलाफ विशेष न्यायाधीश (Special Judge) के शुरुआती निष्कर्षों (Prima Facie findings) से प्रभावित नहीं हो सकता। [2026 LiveLaw (MP) 416]भ्रष्टाचार के आरोपी लोक सेवक के खिलाफ 'फाइनल क्लोजर रिपोर्ट' (मामला बंद करने की रिपोर्ट) खारिज करने वाला स्पेशल जज का आदेश रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और...

बिजली के बिना जीवन संभव नहीं, बिजली पाने का अधिकार भी अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि आधुनिक समय में बिजली के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। इसलिए बिजली पाने का अधिकार भी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा है।जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की पीठ ने बिजली विभाग को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता के वर्तमान आवास पर सात दिनों के भीतर बिजली कनेक्शन जारी करे। यह निर्देश लागू कानूनी शर्तों और अन्य आवश्यक मानकों के अनुपालन के अधीन दिया गया है।अदालत ने कहा कि बिजली वितरण प्राधिकरण केवल संपत्ति के स्वामित्व,...

स्क्रैपयार्ड में हुए धमाके के बाद हुई मौत के मामले में गैर-इरादतन हत्या का आरोप लगाने के लिए सिर्फ़ स्क्रैपयार्ड के मालिक से जुड़ाव काफ़ी नहीं: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति के ख़िलाफ़ दर्ज FIR रद्द की। उस व्यक्ति पर स्क्रैपयार्ड में हुए धमाके के मामले में 'गैर-इरादतन हत्या' का आरोप है; इस धमाके में दो लोगों की मौत हो गई थी और दो अन्य घायल हो गए। [2026 LiveLaw (MP) 415]ऐसा करते हुए कोर्ट ने कहा कि आरोपी का स्क्रैपयार्ड के मालिक से सिर्फ़ जुड़ाव या संबंध होना, या उस जगह पर आरोपी की मौजूदगी (जहाँ उसने कथित तौर पर निर्देश दिए थे) 'गैर-इरादतन हत्या' का आरोप लगाने के लिए काफ़ी नहीं है, जब तक कि इस बात का कोई सबूत न हो कि वह धमाके के लिए...

CEC के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे लोगों की हिरासत से जुड़ी 3 हैबियस कॉर्पस याचिकाएं मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने निपटाईं

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ CJP के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पुणे से दिल्ली जा रहे लोगों को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने से जुड़ी तीन हैबियस कॉर्पस याचिकाओं का निपटारा कर दिया है।चीफ जस्टिस अल्पेश वाई. कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की खंडपीठ को राज्य सरकार के वकील ने बताया कि हिरासत में लिए गए सभी लोगों को उनके परिवारों के पास वापस भेज दिया गया है। इसके बाद अदालत ने कहा कि याचिकाओं में अब कुछ शेष नहीं रह गया है।हिरासत में लिए गए लोगों को परिवारों के पास भेजा...

हिरासत में कैदी की मौत के मामले में पर्यवेक्षी पद पर होना अपने आप में आपराधिक जिम्मेदारी का सबूत नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हिरासत में एक कैदी की मौत के मामले में आरोपी पुलिस अधिकारी को जमानत दी।अदालत ने कहा कि घटना के समय किसी पुलिस अधिकारी का पर्यवेक्षी पद पर होना एक प्रासंगिक तथ्य जरूर है, लेकिन केवल इसी आधार पर उसकी व्यक्तिगत आपराधिक जिम्मेदारी साबित नहीं की जा सकती।जस्टिस आलोक अवस्थी की पीठ ने कहा कि हिरासत की निगरानी से जुड़ी जिम्मेदारी और किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत आपराधिक जवाबदेही के बीच अंतर करना जरूरी है। किसी अधिकारी का वरिष्ठ या पर्यवेक्षी पद अपने आप में उस पर लगाए गए विशिष्ट आरोपों...

BREAKING| एमपी हाईकोर्ट का पुलिस को आदेश: CJP प्रदर्शन में शामिल होने जाती हिरासत में ली गई महिला को पेश करें

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया कि वे उस महिला को कोर्ट के सामने पेश करें, जिसे मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ CJP के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पुणे से दिल्ली जा रही ट्रेन में इटारसी जंक्शन पर पुलिस ने हिरासत में लिया।कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य सरकार महिला की उसके परिवार तक सुरक्षित वापसी के लिए इंतज़ाम कर सकती है।चीफ जस्टिस अल्पेश वाई. कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीज़न बेंच ने आदेश दिया:"नोटिस जारी करें, जिसकी वापसी की तारीख 13.10.2026 तय की गई। राज्य को निर्देश दिया जाता...

गैर-स्थानीय प्रजाति के पेड़ लगाने पर रोक के बावजूद पौधरोपण जारी, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया, जिसमें 9 जनवरी 2026 के सरकारी परिपत्र के बावजूद सार्वजनिक स्थानों पर कोनोकार्पस प्रजाति के पेड़ लगाए जाने का आरोप लगाया गया। यह प्रजाति स्थानीय नहीं है।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की पीठ ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।अदालत ने कहा कि सात कार्यदिवस के भीतर डाक खर्च जमा कराकर स्पीड पोस्ट के जरिए पावती सहित नोटिस भेजा जाए। मामले को चार सप्ताह बाद...

केन-बेतवा लिंक परियोजना पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट सख्त, सुप्रीम कोर्ट की समिति की रिपोर्ट पर राज्य सरकार से मांगा जवाब

केन-बेतवा लिंक परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों और सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति की रिपोर्ट पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा। अदालत ने सरकार से पूछा कि समिति की रिपोर्ट के बाद अब तक क्या कार्रवाई की गई है और इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही की स्थिति क्या है।मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी। चीफ जस्टिस अल्पेश वाई. कोग्जे और जस्टिस विवेक जैन की खंडपीठ जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में केन-बेतवा लिंक परियोजना से पन्ना...

स्पोर्ट्स से सेल्फ डिफेंस कैटेगरी में हथियार लाइसेंस बदलने का प्रावधान प्रथम दृष्टया नहीं: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि आर्म्स एक्ट और उससे जुड़े नियमों में प्रथम दृष्टया हथियार लाइसेंस की श्रेणी को स्पोर्ट्स से सेल्फ डिफेंस में बदलने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।कोर्ट ने कहा कि आर्म्स एक्ट की धारा 17 लाइसेंस की शर्तों में बदलाव की अनुमति देती है, लेकिन यह प्रावधान लाइसेंस की प्रकृति या श्रेणी को ही बदलने का अधिकार नहीं देता। जस्टिस मनिंदर एस. भट्टी ने मामले की सुनवाई करते हुए भोपाल के जिला मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि वह स्पोर्ट्स श्रेणी के हथियार लाइसेंस को सेल्फ डिफेंस श्रेणी...

विवाह बचाने के लिए पत्नी 14 महीने चुप रही तो देरी से दर्ज FIR काउंटरब्लास्ट नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पति और उसके परिजनों के खिलाफ क्रूरता के आरोप में दर्ज FIR रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए कहा कि FIR दर्ज करने में हुई देरी को मात्र इस आधार पर काउंटरब्लास्ट नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि यदि पत्नी वैवाहिक जीवन बचाने की उम्मीद में धैर्य रखते हुए चुप रहती है और बाद में ससुराल वालों के व्यवहार में सुधार न होने पर शिकायत दर्ज करती है, तो उसकी चुप्पी को उसकी कमजोरी नहीं माना जा सकता।जस्टिस विशाल मिश्रा ने कहा कि यदि पत्नी अपना वैवाहिक जीवन बचाने के उद्देश्य...

स्पष्ट कानूनी रोक न होने पर रेवेन्यू अथॉरिटी का फ़ैसला सिविल केस को नहीं रोकता, न ही रेस ज्यूडिकाटा के तौर पर काम करता है: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि एमपी लैंड रेवेन्यू कोड की धारा 257 के तहत किसी सिविल केस को सिर्फ़ इसलिए नहीं रोका जा सकता, क्योंकि उस मामले पर पहले रेवेन्यू अथॉरिटी ने फ़ैसला किया, खासकर तब जब मामला सिविल अधिकारों के फ़ैसले से जुड़ा हो। [2026 LiveLaw (MP) 407]इस बात पर ज़ोर देते हुए कि रेवेन्यू अथॉरिटी का फ़ैसला बाद में होने वाले सिविल केस में 'रेस ज्यूडिकाटा' (Res Judicata) के तौर पर काम नहीं कर सकता, जस्टिस दीपक खोट की बेंच ने कहा:"इस कोर्ट की सोच यह है कि MPLRC की धारा 257 के तहत कोई साफ़...

एमपी हाईकोर्ट का आदेश: अगर पिता दोबारा शादी करता है या लिव-इन रिलेशनशिप में जाता है तो बेटी की कस्टडी माँ को सौंपनी होगी

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने चार साल की बच्ची की कस्टडी उसके पिता को तब तक के लिए दी है, जब तक कि वे दोबारा शादी नहीं कर लेते या लिव-इन रिलेशनशिप में नहीं चले जाते। [2026 LiveLaw (MP) 408]यह देखते हुए कि बच्ची की माँ (पत्नी) किसी दूसरे व्यक्ति के साथ रह रही है और अपने पति के पास वापस नहीं लौटना चाहती, चीफ जस्टिस अल्पेश वाई. कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की बेंच ने पिता को कस्टडी देना सही समझा।हालांकि, पति के दोबारा शादी करने की संभावना को देखते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया: "अगर याचिकाकर्ता दोबारा शादी...

WhatsApp अकाउंट ब्लॉक करने के खिलाफ बार एसोसिएशन प्रेसिडेंट की याचिका पर हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के प्रेसिडेंट की उस याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा, जिसमें उनके WhatsApp अकाउंट को ब्लॉक करने को चुनौती दी गई।जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने केंद्र सरकार के वकील को इस मामले में निर्देश लेने के लिए समय दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह भी निर्देश दिया कि वह याचिका की एक कॉपी Meta Inc. (जो WhatsApp की मालिक और ऑपरेटर है) के वकील को भेजे।इस मामले की सुनवाई 12 अक्टूबर, 2026 को होगी।याचिका के अनुसार, याचिकाकर्ता कई सालों से WhatsApp का...

बागेश्वर धाम दुष्कर्म मामले में DNA रिपोर्ट से नया मोड़, आरोपी का मिलान नहीं हुआ तो मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने विशेष जांच के दिए निर्देश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने छतरपुर जिले के बागेश्वर धाम से जुड़े नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी के DNA का भ्रूण के DNA से मिलान नहीं होने के बाद विशेष टीम गठित कर विस्तृत जांच के निर्देश दिए। कोर्ट ने यह पता लगाने को कहा है कि नाबालिग के साथ दुष्कर्म किस व्यक्ति ने किया और उसके गर्भस्थ शिशु का जैविक पिता कौन है।जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की बेंच ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए छतरपुर एसपी को विशेष टीम गठित कर दो महीने के भीतर विस्तृत जांच पूरी करने और उसके आधार पर उचित कार्रवाई करने...

सड़क किनारे सामान बेचने वालों को हटाना समाधान नहीं, सही योजना की ज़रूरत: जबलपुर कोर्ट में ट्रैफिक की समस्या पर हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बार एसोसिएशन और अन्य संबंधित पक्षों से जनहित याचिका (PIL) में शामिल होने को कहा। यह याचिका जबलपुर ज़िला कोर्ट के गेट नंबर 3 और 4 के पास सड़क किनारे सामान बेचने वालों और हाथगाड़ियों (Handcarts) की वजह से होने वाली ट्रैफिक समस्याओं से जुड़ी है।चीफ़ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीज़न बेंच ने कहा कि इस समस्या का व्यावहारिक समाधान निकालने के लिए संबंधित पक्षों, खासकर वकीलों के संगठन की भागीदारी ज़रूरी होगी।बेंच ने कहा,"याचिका में कोर्ट के कामकाज से जुड़ी...