मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

प्रथम दृष्टया आत्महत्या से मामला खत्म नहीं होता, पुलिस को आत्महत्या के लिए उकसाने के सबूतों की जांच करनी चाहिए: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि आत्महत्या के मामले को सिर्फ़ इस शुरुआती आकलन के आधार पर बंद नहीं किया जा सकता कि मरने वाले ने आत्महत्या की थी। कोर्ट ने कहा कि जांच पूरी करने से पहले पुलिस को उन सबूतों की जांच करनी चाहिए जिनसे आत्महत्या के लिए उकसाने की संभावना का पता चलता हो।जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच ने कहा:"सिर्फ़ इस बात से कि मौत प्रथम दृष्टया फांसी लगाने से हुई आत्महत्या का मामला है, मामला खत्म नहीं हो जाता। जब पुलिस के सामने ऐसे सबूत आते हैं, जिनसे पता चलता है कि मरने वाले के साथ ऐसा...

Sagar Bar Election: हाईकोर्ट ने चुने गए प्रेसिडेंट की बात सुने बिना वोट दोबारा गिनने का आदेश रद्द किया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल की स्पेशल कमेटी का वह आदेश रद्द किया, जिसमें सागर के डिस्ट्रिक्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट पद के लिए वोटों की दोबारा गिनती का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि यह आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। [2026 LiveLaw (MP) 356]मामले को स्पेशल कमेटी के पास वापस भेजते हुए जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीजन बेंच ने कमेटी को निर्देश दिया कि वह संबंधित पक्षों की बात सुने और कानून के अनुसार तर्कपूर्ण आदेश पारित...

हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25 के तहत स्थायी गुजारा भत्ता के दावे पर तलाक के आदेश से रोक नहीं लगती: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि तलाक का आदेश (डिक्री) पहले ही पारित हो चुका है तो भी यह बात किसी जीवनसाथी को हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25 के तहत स्थायी गुजारा भत्ता मांगने से नहीं रोकती। [2026 LiveLaw (MP) 357]कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक मामलों की सुनवाई करने वाली अदालत तलाक के आदेश के बाद भी स्थायी गुजारा भत्ते की अर्जी पर विचार करने के लिए सक्षम है।जस्टिस रामकुमार चौबे की बेंच ने कहा:"ऊपर बताई गई कानूनी स्थिति को देखते हुए तलाक का आदेश पहले ही पारित हो चुका है, तो भी यह बात अपीलकर्ता को हिंदू...

वकील-क्लाइंट के रिश्ते का मतलब यह नहीं कि क्लाइंट यौन उत्पीड़न का आरोप नहीं लगा सकता: हाईकोर्ट का FIR रद्द करने से इनकार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रैक्टिसिंग वकील के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इनकार किया। वकील पर अपनी पूर्व क्लाइंट के साथ रेप का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि वकील-क्लाइंट का रिश्ता होने का मतलब यह नहीं है कि FIR दर्ज होने के शुरुआती चरण में ही इन आरोपों को पूरी तरह असंभव मान लिया जाए। [2026 LiveLaw (MP) 354]यह देखते हुए कि "FIR खुद इसी रिश्ते के आधार पर दर्ज की गई और आरोप है कि कथित आपराधिक घटनाएं बाद में हुईं", जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच ने कहा:"...यह तथ्य कि याचिकाकर्ता और प्रतिवादी नंबर 4 के बीच...

दो साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या में मौत की सजा उम्रकैद में बदली, एमपी हाईकोर्ट ने कहा- मामला रेयरेस्ट ऑफ रेयर नहीं

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दो साल की बच्ची से गंभीर यौन हमला और हत्या के दोषी व्यक्ति की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। अदालत ने कहा कि आरोपी के सुधार और पुनर्वास की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने उसे कम से कम 25 वर्ष की वास्तविक उम्रकैद की सजा दी है, जिसमें कोई छूट नहीं मिलेगी।जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की बेंच ने कहा कि मानव जीवन ईश्वर का अनमोल उपहार है और किसी व्यक्ति का जीवन आसानी से नहीं छीना जाना चाहिए। अदालत ने आरोपी की उम्र, उसका कोई...

हत्या की सजा रद्द करते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जज की कार्यक्षमता पर उठाए सवाल, मामला एक्टिंग चीफ जस्टिस के समक्ष भेजा

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में दोषसिद्धि रद्द करते हुए विशेष जज के फैसले में गंभीर त्रुटियां पाईं। अदालत ने साक्ष्यों के मूल्यांकन के तरीके पर चिंता जताते हुए विशेष जज, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST Act) दमोह की संवेदनशील मामलों की सुनवाई के लिए उपयुक्तता पर गंभीर सवाल उठाए। हाईकोर्ट ने मामले को उचित निर्णय के लिए कार्यवाहक चीफ जस्टिस के समक्ष रखने का निर्देश दिया।जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने FSL...

ज़रूरी तथ्य छिपाए: एमपी हाईकोर्ट ने विध्वंस नोटिस के ख़िलाफ़ याचिका खारिज की, जुर्माना लगाया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आनंद कुमार केडिया की रिट याचिका खारिज की। केडिया 'एसोसिएटेड अल्कोहल्स एंड ब्रुअरीज' को मैनेज करने वाले प्रमोटर ग्रुप के सदस्य हैं। उन्होंने इंदौर नगर निगम द्वारा उनके घर के पास 30 मीटर चौड़ी सड़क बनाने के लिए जारी किए गए गिराने के नोटिस को चुनौती दी थी। [2026 LiveLaw (MP) 349]यह देखते हुए कि केडिया ने ज़रूरी तथ्य छिपाए, जस्टिस संदीप एन भट्ट की बेंच ने उन पर ₹20,000 का जुर्माना लगाया।कोर्ट ने कहा,"हालांकि, इस बात को ध्यान में रखते हुए कि याचिकाकर्ता ने ज़रूरी तथ्य छिपाए...

बिना किसी नुकसान वाली गलती से हुई फायरिंग पर बड़ी सज़ा नहीं दी जा सकती: एमपी हाईकोर्ट ने CISF कॉन्स्टेबल की सज़ा रद्द की

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने CISF कॉन्स्टेबल पर लगाई गई बड़ी सज़ा का आदेश रद्द किया। यह सज़ा तब दी गई थी, जब कॉन्स्टेबल ने अपने हथियार की जांच करते समय गलती से गोली चला दी थी। कोर्ट ने मामले को नए सिरे से विचार करने के लिए वापस भेज दिया। [2026 LiveLaw (MP) 350]जस्टिस विवेक कुमार सिंह की बेंच ने कहा कि अभियोजन पक्ष के गवाहों के स्पष्ट बयानों के बावजूद कि फायरिंग गलती से हुई, जांच अधिकारी ने निष्कर्ष निकाला कि यह सुरक्षा नियमों का जानबूझकर किया गया उल्लंघन था, जो घोर लापरवाही के बराबर है।कोर्ट ने...

मंदिर पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी वाले वीडियो को हटाने का ब्लैंकेट आदेश नहीं दे सकता हाईकोर्ट: जांच एजेंसी पहले करे वीडियो की सत्यता और संदर्भ की पड़ताल

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्य सचिव ए.वी. सिंह की बहू को लेकर वायरल हुए उस वीडियो को सोशल मीडिया से हटाने के लिए व्यापक आदेश देने से इनकार किया, जिसमें भोपाल की एक आवासीय सोसायटी के निवासियों के साथ विवाद के दौरान मंदिर को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का आरोप है।जस्टिस हिमांशु जोशी ने कहा कि वीडियो की वास्तविकता, उसकी पूर्णता और पूरे घटनाक्रम के संदर्भ की जांच सक्षम जांच एजेंसी द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और उससे जुड़े नियमों के तहत की जानी चाहिए।अदालत ने कहा कि इस स्तर पर यह...

12 साल की बच्ची के शोर नहीं मचाने को हाईकोर्ट ने माना अस्वाभाविक, दुष्कर्म के प्रयास के आरोपी की बरी बरकरार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 12 साल की बच्ची से गलत हरकत करने के प्रयास के मामले में आरोपी की बरी किए जाने का फैसला बरकरार रखा। जस्टिस जय कुमार पिल्लई की पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ अपराध साबित करने में सफल नहीं रहा।अदालत ने घटना के दौरान बच्ची के शोर नहीं मचाने, उसके शरीर पर चोट के निशान नहीं होने और किसी स्वतंत्र गवाह की जांच नहीं किए जाने सहित कई परिस्थितियों को अभियोजन की कहानी के खिलाफ माना।पीठ ने कहा कि यदि किसी बच्ची को जबरन गलत हरकत के लिए खींचा जा रहा हो और वह मदद के लिए...

न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर संवैधानिक कर्तव्य, पैसों की कमी कोई बहाना नहीं: एमपी हाईकोर्ट ने राज्य से कोर्ट के रुके हुए प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता देने को कहा

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अनुच्छेद 21 के तहत पर्याप्त न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने के उसके संवैधानिक कर्तव्य की याद दिलाई। कोर्ट ने कहा कि ज़िला और हाई कोर्ट में कई न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स सरकारी मंज़ूरी के इंतज़ार में रुके हुए हैं।अनूपपुर ज़िला कोर्ट बिल्डिंग में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से जुड़ी जनहित याचिका (PIL) का दायरा बढ़ाते हुए, एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की बेंच ने कहा,"हमें सरकार को याद दिलाने की ज़रूरत है कि न्यायपालिका...

विभागों को शोक-संतप्त परिवारों का मार्गदर्शन करना चाहिए कि पात्र आश्रित अनुकंपा नियुक्ति का दावा कैसे कर सकते हैं: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का निर्णय लेने वाले सक्षम अधिकारी को तकनीकी और कठोर दृष्टिकोण के बजाय सहानुभूतिपूर्ण और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। [2026 LiveLaw (MP) 344]इस बात पर जोर देते हुए कि अक्सर मृतक के परिवार को गलत सलाह मिलती है, एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस पवन कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने कहा;"अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति से संबंधित मामलों में सक्षम अधिकारी को कठोर और तकनीकी रवैये के बजाय वास्तविक सहानुभूति और संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। अक्सर मृतक के...

लेह जैसे ऊंचे पहाड़ी इलाके में एक्लिमेटाइज़ेशन सैनिक की ड्यूटी का हिस्सा है, इस दौरान लगी चोट को सर्विस से जुड़ी चोट माना जाएगा: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक सैनिक को विकलांगता पेंशन देने के आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल के आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि वह ऊंचे पहाड़ी इलाके में 'एक्लिमेटाइज़ेशन' (ऊंचाई के माहौल में ढलने की प्रक्रिया) पर था, जो उसकी ड्यूटी का हिस्सा है। इस दौरान लगी कोई भी चोट उसकी सर्विस से जुड़ी मानी जाएगी। [2026 LiveLaw (MP) 342]केंद्र सरकार की अपील खारिज करते हुए एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस आनंद पाठक की डिवीजन बेंच ने कहा:"प्रतिवादी (रेस्पॉन्डेंट) यह साबित करने में नाकाम रहे कि विकलांगता किसी...

शादी का झांसा देकर मुवक्किल से दुष्कर्म का आरोप: वकील को अग्रिम जमानत से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का इनकार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शादी का झांसा देकर अपनी मुवक्किल से दुष्कर्म करने के आरोपी वकील को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया। जस्टिस गजेंद्र सिंह की पीठ ने जांच के दौरान सामने आए होटल के अभिलेख, पीड़िता के माता-पिता और दोस्तों के बयान तथा FIR समेत अन्य सामग्री को देखते हुए राहत देने से इनकार किया।अभियोजन के अनुसार पीड़िता कानूनी सलाह लेने के लिए आरोपी वकील के संपर्क में आई थी। आरोप है कि वकील ने खुद को अविवाहित बताते हुए उससे शादी का प्रस्ताव रखा। शुरुआत में पीड़िता ने प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया...

SI-ASI पर विभागीय कार्रवाई और वेतनवृद्धि रोकने का अधिकार एसपी के पास: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि पुलिस अधीक्षक को सब इंस्पेक्टर और असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने, संयुक्त जांच कराने और वेतनवृद्धि रोकने जैसी सजा देने का अधिकार है।जस्टिस दीपक खोट की पीठ ने कहा कि मध्य प्रदेश पुलिस विनियम के विनियम 221 के तहत पुलिस अधीक्षक को यह अधिकार प्राप्त है।यह मामला पुलिस विभाग में सब इंस्पेक्टर के पद पर वर्ष 1983 में सेवा शुरू करने वाले लज्जा शंकर मिश्रा से जुड़ा था। वह आगे चलकर इंस्पेक्टर और फिर डिप्टी पुलिस अधीक्षक के...

26 साल का कानूनी विवाद: अगर पहले का फैसला अधूरा रहा हो तो रेस ज्यूडिकाटा लागू नहीं होगा- एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि CPC की धारा 11 के तहत 'रेस ज्यूडिकाटा' का सिद्धांत वहां लागू नहीं होगा जहां विचार के लिए भेजी गई कार्यवाही बिना फैसले के रह गई और मामले का निपटारा अधूरा रहा। [2026 LiveLaw (MP) 339]अपीलकर्ता को नगर निगम के राजस्व विभाग में दिहाड़ी कर्मचारी के तौर पर नियुक्त किया गया, लेकिन उसकी सेवाएं 'गैर-कानूनी' तरीके से खत्म कर दी गईं। 1999 में हाईकोर्ट में दायर उसकी रिट याचिका पर मामले को विचार के लिए कलेक्टर के पास वापस भेजा गया, लेकिन उन्होंने आज तक मामले का निपटारा नहीं...

फर्जी दस्तावेज के जरिए मिली सरकारी नौकरी पर नियुक्ति का कोई पक्का अधिकार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ग्राम रोजगार सहायक की नियुक्ति रद्द करने का आदेश बरकरार रखते हुए कहा कि फर्जी या जालसाजी किए गए सरकारी अभिलेखों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने वाले व्यक्ति को पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। अदालत ने कहा कि नियुक्ति की नींव ही धोखाधड़ी पर आधारित हो तो उस पर कोई वैध अधिकार कायम नहीं हो सकता।जस्टिस विवेक कुमार सिंह की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने निर्धारित अंतिम तारीख के बाद आवेदन स्वीकार कराने के लिए ग्राम पंचायत के रजिस्टर में हेरफेर किया था। ऐसे में उसकी...

बैंक अकाउंट में ठगी की रकम आना भर अपराध में संलिप्तता साबित नहीं करता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के बैंक खाते में कथित ठगी की रकम जमा हो जाना, अपने आप में यह निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त नहीं है कि वह व्यक्ति अपराध में जानबूझकर शामिल था।कोर्ट ने 78 वर्षीय रिटायर्ड IFS अधिकारी और पूर्व सैनिक को ठगी तथा जालसाजी के मामले में अग्रिम जमानत दी।जस्टिस अजय कुमार निरंकारी ने कहा कि आरोपी ने बैंक खाते में रकम जमा होने के संबंध में स्पष्ट स्पष्टीकरण दिया और उसके फरार होने, सबूतों से छेड़छाड़ करने या गवाहों को प्रभावित करने की आशंका का कोई ठोस आधार...